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अनहेल्दी लाइफस्टाइल कहीं आपको बीमार तो नहीं बना रही है? (Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick?)

Is Your Unhealthy Lifestyle Making You Sick

Unhealthy Lifestyle

अनहेल्दी लाइफस्टाइल (Unhealthy Lifestyle) कहीं आपको बीमार (Sick) तो नहीं बना रही है?

ब्रेकफास्ट न करना

इस बारे में डायटीशियन्स व न्यूट्रीशनिस्टस का कहना है कि ब्रेकफास्ट न करने से वज़न बढ़ना, हदय रोग, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग होना, एनर्जी लेवल कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते हैं, उनमें बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जल्दी बढ़ता है और रोज़ाना नाश्ता करनेवाले लोगों की तुलना में उन्हें डायबिटीज़ होने की संभावना भी अधिक होती है. जो लोग डायटिंग के नाम पर ब्रेकफास्ट नहीं करते, उन्हें विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखना चाहिए. ब्रेकफास्ट न करने पर दिनभर थकान महसूस होती है, एकाग्रता में कमी आने के साथ-साथ कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है.

खाना चबाकर न खाना

अधिकतर लोगों में खाना अच्छी तरह से चबाकर न खाने की बुरी आदत होती है. शोधकर्ताओं के अनुसार, अच्छे स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है कि खाने को अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाया जाए, लेकिन जो लोग खाने को पूरी तरह से चबाकर नहीं खाते हैं, उनका पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम नहीं करता. पाचन तंत्र के सही ढंग से काम न करने के कारण उन्हें कब्ज़, एसिडिटी और गैस की समस्या हो सकती है.

ज़्यादा कॉफी पीना

प्रतिदिन कॉफी पीने के बहुत फ़ायदे होते हैं. कॉफी में ऐसे अनेक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो हमारी याददाश्त को बढ़ाते हैं, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा कॉफी का सेवन सेहत को हानि पहुंचाता है. औसतन एक व्यक्ति के लिए दो से चार कप कॉफी पीना सामान्य है, लेकिन चार से अधिक कप कॉफी पीने से एंज़ायटी, इंसोम्निया (अनिद्रा) और शरीर में कंपकंपी होने लगती है, जिसके कारण सिरदर्द, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा कॉफी में मौजूद कैफीन नामक तत्व बोन मास डेंसिटी को कम करता है. अधिक मात्रा में कॉफी पीने से हड्डियां कमज़ोर होती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है.

ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना

सही एक्सरसाइज़ आपको फिट और फ्रेश होने का एहसास कराती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करना भी आपको बीमार बना देता है. जी हां, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से घुटनों को नुक़सान पहुंचता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा होता है. अधिक एक्सरसाइज़ करने से थकान महसूस होती है. कई बार मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है. एक शोध के अनुसार, ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ करने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना ब़ढ़ जाती है.

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भारी बैग कैरी करना

हैवी बैग्स उठाने से क्रॉनिक बैक पेन, कंधे और गर्दन में दर्द जैसी समस्याएं होती हैं. हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 5.5 किलोग्राम से लेकर 7 किलोग्राम तक का भारी बैग उठाने से गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द शुरू होने लगता है, इसलिए बैग ख़रीदते समय ऐसा बैग ख़रीदें, जिसमें हैवी मटेरियल का इस्तेमाल न किया गया हो. हैवी मटेरियलवाले बैग में सामान भरने के कारण बैग और भी भारी हो जाता है और गर्दन व कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव आने लगता है, जिसके कारण गर्दन, कंधे व पीठ में दर्द होने लगता है. इसके अलावा पतली स्ट्राइप्सवाले बैग से भी ब्लड सर्कुलेशन रुकने का ख़तरा होता है.

हाई हील पहनना

अधिकतर महिलाएं हाई हील को फैशन एक्सेसरीज़ के तौर पर अपने वॉर्डरोब में ज़रूर रखती है, यह जानते हुए भी कि हाई हील सेहत को नुक़सान पहुंचाती है. हाई हील पहनने से स़िर्फ पैरों में ही दर्द नहीं होता, बल्कि शरीर के अन्य भागों में भी तकली़फें बढ़ जाती हैं. एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 70% महिलाएं हाई हील पहनती हैं, जिनमें से 90% महिलाओं को कंधे, पीठ, घुटने और जोड़ों के दर्द की समस्या होती है. हाई हील पहनने से सबसे ज़्यादा दबाव पैरों पर पड़ता है, जिसके कारण बॉडी पोश्‍चर बिगड़ने लगता है. हाई हील का असर स्पाइन पर भी पड़ता है, जिससे पीठ और पिंडलियों में दर्द बढ़ने लगता है.

रात को सोने से पहले ब्रश न करना

ज़्यादातर लोग रात को सोने से पहले ब्रश करने से कतराते हैं. उनकी यह आदत न केवल उनके स्वस्थ दांतों के लिए हानिकारक है, बल्कि उनके हेल्दी रिलेशिपशिप में भी दूरी का कारण बनती है.

अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के डेंटिस्ट किमबर्ली हाम्स के अनुसार, दांतों की अच्छी सेहत के लिए दिन में दो बार ब्रश ज़रूर करना चाहिए. क्योंकि दिनभर खाते रहने के कारण दांतों पर प्लाक की परत जम जाती है, जिसके कारण दांतों में छिपे बैक्टीरिया एक्टिव हो जाते हैं. इसलिए जब भी आप खाना खाते हैं, तो ये बैक्टीरिया एसिड का उत्पादन करना शुरू कर देते हैं, जिससे दांतों में सड़न और सांसों में दुर्गंध की समस्या होने लगती है. इन समस्याओं से बचने के लिए दिन में 2 बार ब्रश करना ज़रूरी है.

पूरी नींद न लेना

स्लीप नामक पत्रिका में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग 6 घंटे या 6 घंटे से कम नींद लेते हैं, तो उन्हें कार्डियोेवैस्कुलर डिसीज़, जैसे- दिल की बीमारी, लो ब्लड प्रेशर, तनाव, अवसाद जैसी समस्याएं हो सकती हैं. नींद पूरी न होने के कारण पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, जिससे खाना पचने में मुश्किल होती है. इनके अलावा एकाग्रता में भी कमी आने लगती है.

यूरिन रोकना

यूरिन रोकना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, यह जानते हुए भी लोगों में यूरिन रोकने की बुरी आदत होती है. यूरिन के ज़रिए शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. अगर थोड़ा-सा भी यूरिन शरीर में रह जाता है, तो संक्रमण होने का ख़तरा बढ़ जाता है. 2-3 घंटे से अधिक समय तक यूरिन रोकने से किडनी स्टोन और ब्लैडर में सूजन की समस्या हो सकती है. बहुत देर तक यूरिन रोकने से यूटीआई (यूरिन ट्रैक्ट इंफेक्शन) की समस्या हो सकती है, जिसके कारण यूरिनरी ट्रैक में दर्द और यूरिन के साथ-साथ खून भी आने लगता है.

– अभिषेक शर्मा

खेल-खेल में बच्चों से करवाएं एक्सरसाइज़ और ख़ुद भी रहें फिट (Indulge In Fitness With Your Children And Get In Shape)

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यदि एक्सरसाइज़ को खेल के साथ जोड़ दिया जाए यानी खेल-खेल में एक्सरसाइज़ की जाए, तो यह मज़ेदार हो जाता है. इसके अलावा बच्चों के साथ पैरेंट्स भी इस बहाने ख़ुद को फिट रख पाते हैं.

इन दिनों बच्चे मोबाइल फोन, वीडियो गेम, इंटरनेट आदि में इस कदर उलझे रहते हैं कि आउटडोर एक्टिविटीज़ व एक्सरसाइज़ से दूर होते जा रहे हैं. ऐसे में यदि पैरेंट्स बच्चों को खेल-खेल में एक्सरसाइज़ सिखाएं और करवाएं, तो इससे दुगुना फ़ायदा होगा. जहां बच्चे दिमाग़ी और शारीरिक रूप से मज़बूत होंगे, वहीं पैरेंट्स भी फिट रहेंगे.

खेल भी, सेहत भी

* जब बच्चा दो साल का होता है, तभी से उसे हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ खेल-खेल में करवा सकते हैं.
* बच्चे के साथ बॉल से कैच-कैच खेलें. इससे आंखों की एक्सरसाइज़ होगी.
* इस उम्र में सबसे अधिक फोकस मूवमेंट स्किल और बॉडी कंट्रोल पर होना चाहिए.
* बच्चे को फ्री रनिंग, बॉल कैच करना, दौड़ना, एरोबिक्स जैसे खेल खिलाएं. इस तरह के खेल से बच्चों की हड्डी मज़बूत होती है.
* बच्चे के साथ हर रोज़ टहलें, पैदल चलें और घूमें. इससे ब्लड सर्क्युलेशन ठीक रहता है.
* यदि बच्चे की उम्र 12 साल से अधिक है, तो उसे साइकिलिंग, टेनिस, स्विमिंग, स्केटिंग जैसे खेल खेलने के लिए प्रेरित करें.
* क्लाइम्बिंग वाले गेम से बच्चे की पीठ, हाथ मज़ूबत होते हैं, साथ ही उनकी हाइट बढ़ने में भी मदद मिलती है.
* सी सॉ अधिकतर बच्चों का पसंदीदा गेम है. इसमें दो बच्चे आमने-सामने झूले पर बैठकर उठक-बैठक करते हैं, जिससे जहां उनके हाथ-पैर की एक्सरसाइज़ होती है, वहीं उनके साथ बड़ों की भी अच्छी-ख़ासी कसरत हो जाती है.
* बच्चे की याददाश्त बढ़ाने के लिए उनके साथ मेमरी गेम्स खेलें.
* बच्चों के साथ कूदें-फांदें. ऐसा करने से बॉडी स्ट्रेच होती है और फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है.
* रस्सी कूदना- दस मिनट रस्सी कूदना, आठ मिनट के दौड़ने के बराबर होता है.
* एक मिनट रस्सी कूदने से 10 से 15 कैलोरीज़ बर्न होती हैं.
* रस्सी कूदने से शरीर का बैलेंसिंग पावर इम्प्रूव होता है और पैरों के मूवमेंट से फुर्ती और कंट्रोल बढ़ता है, इसलिए बच्चों के साथ रस्सी कूदनेवाला गेम ज़रूर खेलें.
* इन सबके अलावा डांस, योग, वर्कआउट्स आदि को भी आप मनोरंजक तरी़के से बच्चों के साथ कर सकते हैं, जिससे आप दोनों ही फिट और हेल्दी रह सकते हैं.

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गेम के साथ स्टडी भी

* यदि बच्चा बहुत छोटा है, तो आप उसे खेल-खेल में किचन में ही गणित सिखा सकती हैं.
* बच्चों को किचन में कुछ बर्तन इकट्ठा करने के लिए कहें और फिर गिनती करवाएं.
* इस तरह आप 1 से 10 और 1 से 20 आसानी से गिनती करवा सकती हैं.
* किचन में एक जैसी दिखनेवाली वस्तुओं को अलग करवाएं, जैसे- सभी कटोरियां, ग्लास, प्लेट आदि.
* बच्चों को इनके आकार के बारे में बताएं. इससे वे अलग-अलग शेप्स के बारे में जानेंगे.
* ध्यान रहे, खेल-खेल के माध्यम से बच्चा जो कुछ भी सीखता है, वो उसे हमेशा याद रखता है.

कुछ एक्सरसाइज़ ऐसी भी

* क्रॉलिंग लाइक ए बेबी यानी बच्चों की तरह रेंगना. यह भी एक मज़ेदार एक्सरसाइज़ है, जो क़रीब 1800 साल पुराना है. इससे बच्चों जैसी चंचलता और मज़बूती आती है. यह एक फन एक्सरसाइज़ है. इससे बॉडी की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है. मसल्स मज़बूत होते हैं और जॉइंट्स स्ट्रॉन्ग होते हैं. इसे आप बच्चों के साथ कर सकते हैं.
* ग्रूव एक्सरसाइज़ में सिंपल म्यूज़िक के साथ मूव करना होता है. इस एक्सरसाइज़ की ख़ास बात यह होती है कि इसमें कोई भी स्टेप ग़लत नहीं होता है. आपको म्यूज़िक को फील करके स्टेप करने होते हैं. जब बच्चे के साथ आप इसे करेंगे, तब गेम+फन+फिटनेस, तीनों का ही लुत्फ़ उठा पाएंगे.
* वेव शेप वर्कआउट में किसी भी मशीन की ज़रूरत नहीं होती. इससे स्ट्रेंथ, बैलेंस और फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर होती है.
* गेम्स फॉर द ब्रेन, एक ऑनलाइन जिम है, जहां पर आप अपने दिमाग़ की एक्सरसाइज़ कर सकते हैं. यहां पर 40 से भी अधिक ब्रेन गेम्स हैं, जिसे खेलकर ब्रेन को हेल्दी और फिट रख सकते हैं.

डिफरेंट स्ट्रोक्स

* आप जब भी बाज़ार जाएं, तो बच्चे को साथ लेकर जाएं. इससे बच्चा यह समझ सकेगा कि जो भी हम ख़रीदते हैं, उसके बदले में हमें पैसे देने पड़ते हैं.
* इस तरह आप बच्चों को दिलचस्प तरी़के से पैसों की अहमियत भी समझा सकते हैं.
* बच्चे से पहेली पूछ सकते हैं, क्रॉसवर्ड, शब्दों को तलाशना, ब्लॉक्स, सुडोकू जैसे खेल दिमाग़ के लिए बेहतरीन एक्सरसाइज़ हैं.

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इन बातों का रखें ख़्याल

* यदि बच्चे का मन नहीं है, तो उसे ज़बर्दस्ती खेलने के लिए न उकसाएं.
* हर रोज़ बच्चे को कम से कम एक घंटा खेलने के लिए प्रेरित करें.
* आप अपने बच्चों के साथ खेलने से हिचकिचाएं नहीं, बल्कि उनका भरपूर साथ दें.
* इससे बच्चों के बीच आपसी समझ और बॉन्डिंग बढ़ेगी.
* बैडमिंटन, फुटबॉल, क्रिकेट जैसे आउटडोर गेम्स में बच्चे का पार्टनर बनकर खेलने से आप बच्चे के अच्छे दोस्त बन सकते हैं.

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एक्सरसाइज़ के फ़ायदे

* बच्चे कम तनाव महसूस करते हैं.
* अच्छा महसूस करते हैं.
* वज़न कंट्रोल में रहता है.
* अच्छी नींद आती है.
* एक्सरसाइज़ से हड्डियां, मांसपेशियां व जोड़ों को मज़बूती मिलती है.

– ऊषा गुप्ता

 

अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide 

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जानें डॉक्टर्स के सीक्रेट हेल्थ मंत्र(Know health secret mantras of Doctors )

health secret mantras of Doctors

24 घंटे हमारे इलाज में तत्पर रहने वाले डॉक्टर्स क्या कभी बीमार नहीं होते? आख़िर वो ऐसी कौन-सी चीज़ खाते हैं कि 24/7 फिट और एनर्जेटिक दिखते हैं. आप भी जानें डॉक्टर्स के सीक्रेट हेल्थ मंत्र, जिसके बारे में बता रहे हैं डॉ. ए. के. मिश्रा.

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दर्द में क्या करते हैं डॉक्टर?

आपकी बीमारी को दवा के ज़रिए झट से दूर करने वाले डॉक्टर को भी दर्द होता है. ऐसे में वो दर्द को दूर करने के लिए क्या करते हैं? आइए, जानते हैं.
सिरदर्द
अमूमन सिर दर्द में लोग पेन किलर खाते हैं, लेकिन ज़्यादातर डॉक्टर दवाइयों के बदले कुछ और ही करते हैं. अपने हाथों के दोनों अंगूठों को भौंहों के नीचे रखकर ऊपर से नीचे की ओर प्रेस करें. इस तरह करते रहने से ऑर्बिटल नर्व स्ट्रेस लेवल को कम करके आपको सिरदर्द से राहत देती है.
कमरदर्द
हल्का कमर दर्द होने पर डॉक्टर किसी भी तरह की दवाई लेने के बजाय योगा पर भरोसा करते हैं. ख़ुद डॉ. ए. के. मिश्रा कहते हैं कि मामूली सा कमर दर्द होने पर योगा करना ज़्यादा अच्छा होता है. कमर दर्द के लिए सबसे कारगर योगा काउ एंड कैट योगा होता है. इसके लिए एक चटाई पर गाय की तरह अपने दोनों हाथों और पैरों के बल होकर, सांस अंदर की ओर खींचकर अपने चिन को नीचे की ओर झुकाएं और फिर धीरे-धीरे चिन को ऊपर उठाते हुए सांस को छोड़ें. ऐसा करने से बहुत जल्द ही आपको इस दर्द से छुटकारा मिल जाएगा.
चोट लगने पर
ज़्यादातर लोग चोट लगने पर उसपर बैंडेज लगा लेते हैं. जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए. ख़ुद डॉक्टर कहते हैं कि ऐसा करने से उस घाव के किटाणु अंदर ही रह जाते हैं. डॉ. ए. के. मिश्रा कहते हैं, “चोट लगने पर उसे अच्छे से साफ़ करें. इससे उसके किटाणु बाहर चले जाते हैं और चोट जल्दी ठीक होती है.”

 

कोल्ड एंड प्लू में क्या करते हैं?

मौसम बदलते ही आपको ज़ुकाम, बदन दर्द आदि की शिकायत रहती है. हमारे डॉक्टर भी इस समस्या से परेशान होते हैं. ऐसे में वो क्या करते हैं? आइए, जानते हैं.
ज़ुकाम होने पर
ज़ुुकाम होने पर किसी भी तरह की कोल्ड एंड फ्लू मेडिसिन से डॉक्टर्स बचते हैं. दवा लेने की बजाय गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारा करना ज़्यादा उचित समझते हैं.डेली डायट में फल और सब्ज़ियों को ज़्यादा वरियता देते हैं, जिससे बॉडी को कोल्ड एंड फ्लू से लड़ने की ताक़त मिलती है.
थकान
कोल्ड एंड फ्लू के कारण जब बॉडी में थकान होती है या फिर पूरी बॉडी दर्द होती है तो दवा के बदले डॉक्टर्स अपनी बॉडी की ज़रूरत को समझते हुए काम करते हैं. डॉक्टर्स की डायरी में इस तरह की सिचुएशन को हैंडल करने के लिए मेडिटेशन को महत्व दिया गया है. रोज़ाना 20 मिनट की एक्सरसाइज़, मेडिटेशन और योगा से दिमाग़ स्वस्थ रहता है और शरीर को आराम मिलता है.
हर्बल को देते हैं तरज़ीह
कोल्ड से बचने के लिए ख़ुद डॉक्टर्स भी आयर्वेद पर भरोसा करते हैं. आयुर्वेदिक दवाओं का यूज़ वो ख़ुद के लिए और अपनी फैमिली के लिए करते हैं. कुछ डॉक्टर्स ज़िंक को भी तरज़ीह देते हैं.
ग्रीन सब्ज़ियों का सेवन
बदलते मौसम में बीमारियों से बचने के लिए सबसे ज़रूरी होता है शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का मज़बूत होना. इसके लिए डॉक्टर्स अपने घर में हरी सब्ज़ियों का भंडार रखते हैं. डॉ. ए. के. मिश्रा कहते हैं, उनकी फ्रिज में हरी और पत्तेदार सब्ज़ियां हमेशा रहती हैं.

डॉक्टर्स कैसे रखते हैं अपने वज़न को क़ाबू

एक्सरसा़इज
डॉक्टर ए. के. मिश्रा कहते हैं,” डॉक्टरों को फिट रहना बहुत ज़रूरी होता है. क्योंकि अगर हम ही फिट नहीं रहेंगे तो मरीजों को सलाह कैसे देंगे. फिट रहने के लिए रोज़ाना 20 मिनट तक की एक्सरसाइज़ बहुत ज़रूरी होती है. हर दिन मैं जंपिंग, रनिंग और बॉक्सिंग के साथ-साथ टेनिस भी खेलता हूं. ज़रूरी नहीं कि बहुत हार्ड एक्सरसाइज़ ही करें. आप को जो पसंद हो वो एक्सरसाइज़ कर सकते है.”
दूध है फिटनेस का राज़
एक ग्लास दूध हर दिन पीने से आप की बॉडी को सभी महत्वपूर्ण चीज़ें मिल जाती हैं. दूध पीने से आपको ज़्यादा खाने की भी ज़रूरत महसूस नहीं होती. भूख लगने पर थोड़ा बहुत स्नैक्स खाने से शरीर फिट महसूस करता है.

तनाव को कैसे रखते हैं बैकफुट पर?

भागदौड़ भरी लाइफ और 24/7 मरीज़ों के लिए काम करते हुए डॉक्टर भी तनाव से ग्रस्त होते हैं. ऐसे में वो ख़ुद को कैसे रखते हैं ठीक? आइए, जानते हैं.
लंबी सांस
स्ट्रेस लेवल बढ़ने पर ख़ुद को शांत रखने के लिए डॉक्टर लंबी-लंबी सांसे लेते और छोड़ते हैं. इससे उनका तनाव कम होता है. डॉ. ए. के. मिश्रा कहते हैं कि रोज़ाना नये-नये पेशेंट उनकी परेशानी और भागदौड़ भरी ज़िंदगी इन सब से डॉक्टरों को भी तनाव होता है, लेकिन उसके लिए वो एक शांत जगह पर बैठ कर आंखें बंद करके सांस की एक्सरसाइज़ करते हैं.
संगीत सुनना
किसी भी तरह के तनाव को दूर करने का ये सबसे आसान और कारगर तरीक़ा है. घर से ऑफ़िस जाते समय पसंदीदा संगीत सुनना डॉक्टरों की सीक्रेट डायरी में है. गाना सुनने से हमारा दिमाग़ रिलैक्स होता है और नया काम करने के लिए बिलकुल फिट होता है.
पसंदीदा काम
बहुत ज़्यादा तनाव होने पर लोगों को अपना पसंदीदा काम करना चाहिए. इस तरह से वो ख़ुद को तनाव से दूर रखने में सहायक होते हैं और धीरे-धीरे समस्या से बाहर निकलते हैं.

 

कोलेस्ट्रॉल लेवल तेज़ी से घटाने के 10+ असरदार व आसान उपाय (10+ Natural Ways to Lower Your Cholesterol Levels)

क्यों ज़रूरी है एक्सरसाइज़ः 22 वजहें (22 Reasons why Exercise is Necessary)

why exercise is necessary

यह तो हम सभी जानते हैं कि एक्सरसाइज़ हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद ज़रूरी है, लेकिन जब एक्सरसाइज़ करने की बात आती है तो हम दस तरह के बहाने बनाना शुरू कर देते हैं. कभी टाइम का रोना रोते हैं तो कभी कहते हैं कि हमें एक्सरसाइज़ की कोई ज़रूरत नहीं. आइए, जानते हैं एक्सरसाइज़ करने की 20+ वजहें.

why exercise is necessary
1. रोज़ाना कार्डियोवेस्कुलर एक्सरसाइज़ करने से हमारी ब्रीदिंग कैपिसिटी बढ़ती है और हम ज़्यादा एनर्जेटिक महसूस करते हैं.
2. यह ह्रदय व मांसपेशियों को स्वस्थ रखता है और रक्त के बहाव को बनाए रखता है.
3. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से हमारा स्टेमिना यानी काम करने की क्षमता बढ़ती है और हम ज़्यादा अच्छे तरी़के से अपना काम कर पाते हैं.
4. रेग्युलर एक्सरसाइज़ करने से हमारे शरीर से एंडोर्फिन्स नामक हार्मोन का स्राव होता है, जो तनाव कम करने में सहायक होता है.
5. नियमित एक्सरसाइज़ करने से शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है जिससे सभी इंटरनल ऑर्गन को सही मात्रा में ब्लड सप्लाई मिल पाता है और हमारा दिमाग़ सही तरी़के से काम करता है.
6. वेट ट्रेनिंग मसल्स की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ ही इन्हें सुदृढ़ और मज़बूत बनाने में भी सहायक होता है.
7. एक्सरसाइज़ दिमाग़ को सक्रिय करके नए ब्रेन सेल्स के निर्माण में मदद करता है. साथ ही ब्रेन सेल्स के कनेक्शन को भी मज़बूत करता है.
8. जो लोग शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं वे ज़्यादा समय तक ज़िंदा रहते हैं. एक्सरसाइज़ असमय मृत्यु की संभावना को भी कम करता है.
9. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से मेटाबॉल़िज़्म बढ़ता है. एक्सरसाइज़ करने के बाद आराम करते समय भी कैलोरी बर्न होती हैं, जिससे वज़न कम होता है.
10. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से ब्लड कॉलेस्ट्रॉल लेवल प्रभावित होता है. एक्सरसाइज़ बैड कॉलेस्ट्रॉल लेवल को कम करके एचडीएल यानी गुड कॉलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है.
11. एक्सरसाइज़ ब्लडप्रेशर नियंत्रित करने में भी मदद करता है. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से हाई ब्लडप्रेशर से पीड़ित लोगों का ब्लडप्रेशर तक़रीबन 75 फ़ीसदी तक कम हो जाता है. ब्लडप्रेशर नियंत्रित करने में अन्य एक्सरसाइज़ेस की अपेक्षा एरोबिक ज़्यादा असरकारी होता है.
12. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने वालों को विभिन्न प्रकार के कैंसर, ख़ासतौर पर कोलोन और ब्लड कैंसर होने का ख़तरा कम हो जाता है.
13. अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी में छपी रिपोर्ट के अनुसार, नियमित तौर पर एक्सरसाइज़ करने वालों को अन्य लोगों की तुलना में स्ट्रोक का ख़तरा 50 फ़ीसदी कम होता है.
14. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से बोन मिनरल डेंसिटी बढ़ती है जिससे ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा कम हो जाता है.
15. एक्सरसाइज़ करने से अच्छी नींद आती है और डिप्रेशन का ख़तरा भी कम हो जाता है. स्टैनफोर्ड स्कूल ऑफ मेडिसीन के शोधकर्ताओं के अनुसार, नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने वालों को जल्दी और अच्छी नींद आती है और वे सुबह ज़्यादा फ्रेश फील करते हैं.
16. एक्सरसाइज़ शारीरिक बनावट ठीक करने के साथ ही आत्मविश्‍वास बढ़ाने में भी सहायक है. फिटनेस और एक्सरसाइज़ेस हमें अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करने में मदद करते हैं.
17. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से एजिंग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और हम ज़्यादा दिनों तक स्वस्थ और जवां बने रहते हैं.
18. वेट ट्रेनिंग जैसे एक्सरसाइज़ नियमित रूप से करने से मांसपेशियों में टेस्टोस्टेरॉन का स्राव ज़्यादा होता है जो एनर्जी व स्टेमिना बढ़ाकर शारीरिक क्षमता भी बढ़ाता है.
19. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ शरीर में रक्त के बहाव को ठीक करता हैै, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को ठीक करने के साथ ही डीजनरेटिक बीमारियों जैसे- टाइप-2 डायबिटीज़ से भी रक्षा करता है.
20. रेग्युलर एक्सरसाइज़ करने से ह्रदय अधिक मात्रा में ब्लड पंप करता है और हम अधिक मात्रा में ऑक्सिजन ग्रहण करते हैं.
21. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने वालों को पीठ दर्द का ख़तरा कम होता है. हाल में हुए शोधों से यह सिद्ध हुआ है कि एक्सरसाइज़ लो बैक पेन से छुटकारा दिलाने में भी सहायक है.
22. एक्सरसाइज़ हमारे मानसिक स्वास्थ्य को सुधारता है. साथ ही डिप्रेशन के लक्षण को भी कम करता है. शोधकर्ताओं के अनुसार, नियमित एक्सरसाइज़ का असर सरट्रालाइन जैसे एंटीडिप्रेशेन्ट की तरह ही होता है. उनके अनुसार, ह़फ़्ते में 4-5 दिन 30 मिनट तक एक्सरसाइज़ करने से डिप्रेशन के लक्षणों में सुधार आता है.

 

सिरदर्द के प्रकार, कारण और उनसे छुटकारा पाने के अचूक उपाय(Types of Headaches: Causes & How to Get Rid of Them)

बचें इन 10 मॉर्निंग मिस्टेक्स से (Most Common Morning Mistakes to Avoid)

Common Morning Mistakes

कहते हैं, अगर सुबह की शुरुआत अच्छी हो, तो दिन अच्छा गुज़रता है, लेकिन अगर शुरुआत ही ग़लत हो, तो उसके परिणाम तो ग़लत ही होंगे ना! अमूमन हर व्यक्ति सुबह-सुबह ऐसी कई ग़लतियां करता है, जिसका सीधा असर उसकी हेल्थ पर पड़ता है. ये मॉर्निंग मिस्टेक्स (Morning Mistakes) न स़िर्फ हमारा दिन ख़राब कर सकती हैं, बल्कि लंबे समय तक इनका दोहराव हमें कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी दे सकता है.

Morning Mistakes

 

  1. झटके से उठकर काम में लग जाना

दिन की शुरुआत धीरे-धीरे व शांति से करनी चाहिए. आंख खुलने पर थोड़ी देर रिलैक्स रहें, फिर दाईं करवट लेकर उठ जाएं. दाईं करवट लेकर उठने से सुप्त अवस्था में शिथिल पड़ी ऊर्जा का पूरे शरीर में बेहतर संचार होता है. यह शरीर में ऊर्जा के संचार को संतुलित करता है. आराम से उठकर कुछ देर लंबी व गहरी सांसें लें, अगर प्यास लगी हो, तो एक ग्लास पानी पीएं.

 

  1. स्ट्रेचिंग न करना

सोते व़क्त हमारे शरीर की मांसपेशियां, ख़ासतौर से रीढ़ की हड्डी सख़्त हो जाती है, जिसे सामान्य करने के लिए सोकर उठने पर शरीर को स्ट्रेच करें. अंगड़ाई लें. तीन-चार बार शरीर को स्ट्रेच करें और बांहें फैलाकर सुबह की पॉज़िटिव एनर्जी को ख़ुद में महसूस करें. ऐसा करने से दिनभर शरीर में चुस्ती-स्फूर्ति बनी रहती है.

 

  1. नींबू पानी की जगह चाय पीना

हेल्थ व फिटनेस एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, ज़्यादातर लोग सुबह चाय पीने की मॉर्निंग मिस्टेक करते हैं. बहुत से लोगों को बेड टी की आदत होती है, जो उनकी हेल्थ के लिए सही नहीं. खाली पेट चाय कभी न पीएं. अपने दिन की शुरुआत हमेशा नींबू पानी से करें, क्योंकि यह शरीर से टॉक्सिन निकालकर आपके मेटाबॉलिज़्म व इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाता है. इसके बाद अगर आप चाहें, तो ग्रीन टी पीएं.

 

  1. ब्रेकफास्ट न करना

ब्रेकफास्ट न करना डायबिटीज़, मोटापा और रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी कारण बनता है. हॉर्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के मुताबिक़ ब्रेकफास्ट न करने से हमारे शरीर पर अतिरिक्त तनाव पड़ता है. दरअसल, रात के खाने और सुबह के ब्रेकफास्ट के बीच लंबा गैप होता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल कम होता है. अगर सोकर उठने के एक घंटे के अंदर हम कुछ नहीं खाते, तो ब्लड शुगर का स्तर और गिर जाता है, जिससे सुस्ती महसूस होती है. इसके अलावा ज़्यादातर लोग चाय-बिस्किट से दिन की शुरुआत करते हैं, जबकि आपको भिगोए हुए बादाम, होल व्हीट ब्रेड, रोटी या किसी फल से अपने दिन की शुरुआत करनी चाहिए.

 

  1. आंखें खोलते ही मोबाइल चेक करना

सुबह-सुबह नींद खुलने पर बहुत से लोगों का हाथ सबसे पहले अपने मोबाइल फोन को ढूंढ़ता है. आंखें मलते हुए ज़रूरी ईमेल्स या मैसेजेस चेक करने से आपको स्ट्रेस हो सकता है, जो आपका पूरा दिन ख़राब कर सकता है. सुबह-सुबह का तनाव आपकी सेहत के लिए ठीक नहीं, इसलिए सोकर उठने के तुरंत बाद ही ईमेल्स चेक न करें.

 

  1. एक्सरसाइज़ न करना

न्यूट्रीशन, एक्सरसाइज़, पॉज़िटिव सोच और आराम हमारी सेहत के चार स्तंभ हैं. अगर इनमें से एक भी कमज़ोर रहा, तो हेल्थ प्रॉब्लम्स होना लाज़मी है. हर रोज़ सुबह हमें आधा घंटा एक्सरसाइज़ के लिए देना चाहिए. मॉर्निंग वॉक, योग, प्राणायाम आदि को अपने रूटीन में शामिल करें.

 

  1. मुस्कुराने में कंजूसी करना

आपकी मुस्कान आपकी सेहत को और बेहतर बनाती है, यही वजह है कि सुबह-सुबह आपको बहुत से लाफ्टर क्लब देखने को मिल जाएंगे. सुबह-सुबह हंसने-मुस्कुराने से आपका इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है, हार्ट बीट सामान्य रहती है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है, इसलिए मुस्कुराने में कंजूसी न करें और खुलकर हंसें-मुस्कुराएं.

 

  1. रोज़ाना एक ही एक्सरसाइज़ करना

ज़्यादातर लोग यह मॉर्निंग मिस्टेक करते हैं. शरीर के एक हिस्से को फोकस करके एक ही एक्सरसाइज़ को रोज़ाना दोहराते हैं, जिससे उस हिस्से पर एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ता है, जो ठीक नहीं है. हफ़्ते में 2 दिन साइकलिंग, तीन दिन वर्कआउट और दो दिन किसी स्पोर्ट्स को दिया जा सकता है. इससे न स़िर्फ आपके रूटीन में बदलाव आता है, बल्कि आपका मेटाबॉलिज़्म भी मज़बूत होता है.

 

  1. चिड़चिड़ेपन और ग़ुस्से में रहना

सुबह-सुबह उठते ही दिन में करनेवाले कामों को याद करके उन पर ग़ुस्सा होने या अपनेरूटीन को कोसने से आपकी हेल्थ अच्छी नहीं होती, बल्कि आप अपनी सेहत को ख़ुद नुक़सान पहुंचाते हैं. ग़ुस्सा और चिड़चिड़ापन पॉज़िटिव एनर्जी को ब्लॉक करता है, जिससे आप नेगेटिव एनर्जी से घिरे रहते हैं और वो किसी की सेहत के लिए ठीक नहीं. माना कि आजकल सभी को उठकर दिनभर के काम याद आते हैं, पर उन विचारों को कंट्रोल करना आपके ही हाथ में है. ख़ुद को ख़ुश रखें और स्वस्थ रहें.

 

  1. एक दिन पहले प्लानिंग न करना

आजकल सभी की ज़िंदगी भागदौड़ भरी हो गई है, ऐसे में मिनट दर मिनट नपा-तुला होता है. इसमें ज़रा-सा भी फेरबदल आपको बेवजह का तनाव दे देता है और आप झल्लाने-चिढ़ने लगते हैं, जिससे आपके हार्ट पर प्रेशर पड़ता है और आप अपनी ही सेहत के साथ खिलवाड़ करते हैं. इसलिए अगले दिन की सारी तैयारी रात को ही करके रखें, चाहे वो कपड़े, खाना या काम की कोई तैयारी हो. इससे सारे काम आसानी और सहजता से पूरे हो जाएंगे और आप दिनभर ख़ुश व उत्साहित भी रहेंगे.

 

आज़माएं ये मॉर्निंग मैजिक ट्रिक्स

–    रोज़ सुबह उठकर सबसे पहले ईश्‍वर को सभी चीज़ों के लिए धन्यवाद कहें.

–    बिस्तर से उठकर आईना देखें और ख़ुद को देखकर मुस्कुराएं. आपके चेहरे की ये मुस्कान दिनभर आपके साथ रहेगी.

–    आईने में देखकर ख़ुद से कहें कि आज आपका दिन बहुत अच्छा होगा.

–    खाली पेट एक ग्लास गुनगुना पानी पीएं. यह आपके बॉडी से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है.

–   नित्य क्रिया से निपटकर योग या एक्सरसाइज़ करें. अगर मुमकिन हो, तोे वॉक पर चले जाएं या साइकलिंग करें. यह आपके एनर्जी लेवल को बूस्ट करता है.

–    चाय-कॉफी की बजाय नींबू पानी और हैवी ब्रेकफास्ट करें.

–    पूरे दिन के कामों की लिस्ट देखकर प्राथमिकता के अनुसार काम सेट करें.

–   समय के अनुसार काम करें. अगर कभी देर हो जाती है, तो बेवजह स्ट्रेस न लें, क्योंकि आपके स्ट्रेस लेने से चीज़ें बेहतर नहीं हो जाएंगी.

–    कभी-कभी हम ट्रैफिक में फंस जाते हैं, तब भी बेचैन होते रहते हैं. उस व़क्त की बेचैनी और तनाव का असर आपकी सेहत पर ही पड़ेगा, इसलिए शांत रहें.

–    ज़रूरी नहीं कि चीज़ें और हालात हमेशा आपके अनुसार ही हों. ऐसे में संयम बहुत ज़रूरी है. संयम और शांति से काम करनेवाले हमेशा ख़ुशहाल और संतुष्ट रहते हैं.

–    ये मॉर्निंग मैजिक ट्रिक्स आपके दिन को एक अच्छी शुरुआत देंगे.

–    तो आज से ही इन छोटी-छोटी मॉर्निंग मिस्टेक्स से बचें और हेल्दी व फिट रहें.

 

– अनीता सिंह

 

 

 

 

वज़न घटाने के 25 ईज़ी टिप्स (How to Lose Weight Fast – Quick & Easy Weight Loss Tips)

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क्या आप डायटिंग करने में द़िक्क़त महसूस करते हैं? क्या कैलोरी का हिसाब रखना आपको पसंद नहीं? तो आप स़िर्फ यहां दिए गए टिप्स (Easy Weight Loss Tips) आज़माएं और देखें कैसे बिना अधिक मेहनत-मश़क्क़त के कई किलो वज़न आसानी से घटा सकते हैं.

1. पानी पीएं:
अगर आपको भूख लग रही है, तो पहले पानी पीजिए. इससे आपका पेट भरा हुआ लगेगा और आप कम खाएंगे.

2. किसी चीज़ से परहेज़ ना करें:
यदि आप ख़ुद से कहेंगे, “मुझे चॉकलेट को हाथ भी नहीं लगाना है!” तो आपके दिलो-दिमाग़ में चॉकलेट का ही ख़्याल आता रहेगा और आप ज़रूरत से भी ज़्यादा खा बैठेंगे. इससे बेहतर है कि एक छोटा-सा टुकड़ा खाकर अपने टेस्ट बड्स को शांत करें.

3. पैकेज्ड फूड का लेबल ज़रूर पढ़ें:
जब भी आप पैकेज्ड फूड ख़रीदें, तो पहले उसमें प्रयोग किए गए पदार्थों को लेबल में पढ़ लें और यह सुनिश्‍चित कर लें कि उनकी फैट और कार्बोहाइड्रेट्स आदि की मात्रा आपकी ज़रूरत के अनुसार हो.

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4. तल्लीनता के साथ भोजन करें:
भोजन हमेशा धीरे-धीरे चबाकर पूरी एकाग्रता के साथ करना चाहिए, जबकि बहुत से लोग टीवी देखते हुए खाना खाते हैं, जिससे उनका ध्यान भोजन पर नहीं रहता और बेख़्याली में वो ज़्यादा खा लेते हैं.

5. भूखे पेट न सोएं:
देर रात की भूख को शांत करने के लिए कुछ भी फैटी या ऑयली खाने की बजाय बादाम, अखरोट जैसे हाई प्रोटीन नट्स लें.

6. व्यायाम करें:
व्यायाम आपके शरीर के मेटाबॉलिक रेट को दुगुना कर सकता है. हफ़्ते में
कम-से-कम तीन दिन आधे घंटे तक व्यायाम करना आपके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकता है.

7. अधिक फैटयुक्त भोजन से परहेज़ करें:
बाहर का खाना या फास्टफूड देखकर ख़ुद को रोकना मुश्किल हो जाता है, पर याद रहे कि ये फैटयुक्त होते हैं, इसलिए आपको स्वयं पर नियंत्रण रखना होगा. खाने में अधिक व बैड फैट को पहचानें और उससे बचने की पूरी कोशिश करें.

8. ग्रीन टी का प्रयोग करें:
रोज़ाना ग्रीन टी के सेवन से आप हर रोज़ लगभग 40 प्रतिशत अधिक कैलोरी बर्न कर सकते हैं. तो फिर देर किस बात की, आज ही ग्रीन टी को अपने डेली रूटीन में शामिल करें.

9. फाइबर से भरपूर पदार्थ लें:
भोजन में मसूर, मटर, पत्तागोभी, ब्रोकोली, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, मशरूम, ब्राउन ब्रेड आदि को शामिल करें. यह चबाने तथा हज़म होने में अधिक समय लेते हैं, जिससे आपका पेट अधिक समय तक भरा हुआ महसूस होता है.

10. भोजन का समय सुनिश्‍चित रखें:
प्रतिदिन भोजन करने का समय सुनिश्‍चित कर लें. इससे आपके शरीर को उस निश्‍चित समय पर भोजन की आदत पड़ जाएगी और आप असमय कुछ भी खाने से बच जाएंगे.

11. खाने के नए नियम बनाएं:
खाने का अपना वर्तमान नियम नोट करें, जैसे कि चाय के साथ बिस्किट लेना, नाश्ते में परांठे खाना आदि और फिर उसमें हेल्दी बदलाव करें. आप चाहें, तो नाश्ते में दलिया, ओट्स, नट्स जैसी पोषक चीज़ों को शामिल कर सकते हैं.

12. एक्टिव बने रहें:
रोज़ाना थोड़ी देर टहलने या एक्सरसाइज़ करने से शरीर में एंडॉर्फिन्स नामक हार्मोंस विसर्जित होते हैं, जिससे आप अधिक शांत व प्रफुल्लित महसूस करते हैं और आप हेल्दी खाते हैं.

13. घर के कामों से बनें फिट:
घर के काम आपके शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखते हैं. इससे आप कई गुना कैलोरीज़ बर्न करते हैं, जो आपकी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद साबित होती है.

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14. अच्छी नींद का आनंद लें:
थका हुआ शरीर अधिक ऊर्जा के लिए बार-बार भूख का सिग्नल देता है, जिससे आप ओवरईटिंग करने लगते हैं. यही वजह है कि रोज़ाना 6-8 घंटे की अच्छी नींद लेना ज़रूरी है.

15. अधिक टहलें:
दिन में स़िर्फ आधा घंटा अधिक तेज़ टहलने से आपकी 320 कैलोरीज़ तक बर्न हो सकती हैं.

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16. छोटी प्लेट में भोजन करें:
हमेशा भोजन के लिए छोटी प्लेट लें, क्योंकि बड़ी प्लेट में सामान्य मात्रा में लिया हुआ भोजन कम नज़र आता है, जबकि छोटी प्लेट में वही मात्रा पर्याप्त नज़र आती है.

17. लिफ्ट को नज़रअंदाज़ करें:
सप्ताह में पांच दिन केवल दो मिनट तक सीढ़ियां चढ़ना-उतरना भी एक अच्छा व्यायाम है. यह 30 मिनट तक टहलने जितना लाभदायक होता है, तो कभी-कभी लिफ्ट को ज़रूर नज़रअंदाज़ करें.

18. दोस्तों का ग्रुप बनाएं:
अपना वज़न घटाने, व्यायाम के विषय में चर्चा करने, डायट फॉलो करने आदि के लिए दोस्तों का एक ग्रुप बनाएं. ग्रुप मेंबर्स के रहने से इन चीज़ों को लेकर उत्सुकता बनी रहती है और एक-दूसरे को देखकर प्रोत्साहन भी मिलता है.

19. डायट जर्नल मेंटेन करें:
अपने पास एक डायट जर्नल रखें और उसमें अपनी प्रेरणा के लिए लिखकर रखें कि आप कैसा दिखना चाहते हैं, जैसे- मैं स्लिम-फिट बॉडी में सुंदर दिखना चाहता/चाहती हूं. यह एक शक्तिशाली रिमाइंडर की तरह मानसिक रूप से आप पर असर डालेगा कि आप क्यों वज़न कम करना चाहते हैं.

20. अपेक्षित साइज़ की ड्रेस ख़रीद लें:
आप जैसा दिखना चाहते हैं, उस साइज़ की जींस या ड्रेस ख़रीद लें. इससे आपको वज़न कम करने की प्रेरणा मिलेगी, परंतु अपने आप
पर अधिक दबाव डाले बिना संभावित परिणाम को ही अपना लक्ष्य बनाएं.

21. सब्ज़ियों को प्राथमिकता दें:
यदि आप अपना भोजन ख़ुद परोस रहे हैं, तो पूरे भोजन की मात्रा में चावल या रोटी की मात्रा कम लें और सलाद व उबली सब्ज़ियों की मात्रा अधिक लें. इस तरह आप एक बार के भोजन में लगभग 200 कैलोरीज़ बचा सकते हैं.

22. शांत रहें:
जब भी आप तनाव में होते हैं, तो आपका शरीर शिथिल पड़ जाता है, जिससे आपको बहुत भूख लगती है. तनाव में अक्सर लोग फैटी चीज़ें ज़्यादा खाते हैं, जबकि तनावरहित और शांत रहने से आपका मेटाबॉलिज़्म बेहतर रहता है.

23. जंक फूड से दूर रहें:
जंक फूड न केवल वसा से भरपूर होता है, बल्कि मस्तिष्क की उन कोशिकाओं को भी नष्ट कर देता है, जो वज़न पर नियंत्रण रखती हैं.

24. मन पर नियंत्रण रखें:
यदि आपके किचन में स्नैक्स  के हेल्दी ऑप्शन्स मौजूद हों, तो बाहर से ऑर्डर न करें. आप घर में ही लो-फैट माइक्रोवेव पॉपकार्न, चना-कुरमुरा और स्प्राउट्स खा सकते हैं.

25. कल्पना में भी स्वयं को छरहरा देखें:
आप अपने दिमाग़ में अपनी एक छरहरी आकृति बसा लें, जो या तो आपके अतीत की हो या फिर ऐसी हो, जिसमें आप ख़ुद को जैसा देखना चाहते हैं, वैसी हो. ऐसी कल्पना आपको वज़न कम करने के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हमेशा प्रेरित करेगी.

– अनिल निगम

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बिज़ी ऑफिस लाइफ में करें ये 15 ईज़ी एक्सरसाइज़ ( 15 Easy Exercises You Can Do at Work )

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बिज़ी ऑफिस लाइफ में हम अक्सर अपनी फिटनेस को अनदेखा कर देते हैं. घंटों बैठकर काम करना और फिज़िकल एक्टिविटी की कमी हमारे लिए काफ़ी नुक़सानदायक साबित होती है. अगर आप भी ऑफिस की बिज़ी लाइफ के कारण एक्सरसाइज़ को अपने डेली रूटीन में शामिल नहीं कर पा रहे हैं, तो अब अपने ऑफिस को ही बनाएं अपना जिम और करें एक्सरसाइज़. जी हां, यहां हम कुछ ऐसी ईज़ी एक्सरसाइज़ेस बता रहे हैं, जिन्हें आप आसानी से अपने ऑफिस में कर सकते हैं और बन सकते हैं फिट व स्मार्ट.

ईज़ी एक्सरसाइज़ेस

* अपनी टेबल की एक ओर पीठ करके खड़े हो जाएं. दोनों हथेलियों को टेबल पर रखें और घुटनों को मोड़ते हुए बैठने की कोशिश करें, फिर सीधे खड़े हो जाएं. इसे 10-15 बार दोहराएं.
* टेबल की ओर मुंह करके सीधे खड़े हो जाएं. दोनों हथेलियों को उल्टा अपनी ओर पॉइंट करें. हथेलियों पर हल्का-सा ज़ोर डालते हुए नीचे की ओर झुकें. 15 सेकंड तक इसी अवस्था में खड़े रहें. इससे कार्पल टनल सिंड्रोम (कलाई की हड्डी से जुड़ी नसों में होनेवाला दर्द, अकड़न व सुन्नता) से बचने में मदद मिलती है.
* दीवार की तरफ़ पीठ करके खड़े रहें. घुटनों को मोड़ते हुए नीचे की तरफ़ बैठने की कोशिश करें और 1-2 मिनट तक इसी अवस्था में रहें. इससे कैलोरीज़ जल्दी बर्न होती हैं.
* एक काल्पनिक कुर्सी के बारे में सोचें और उस पर 5 बार बैठें, फिर उठें.
* अपनी एडजस्टेबल कुर्सी को सामान्य हाइट से ऊपर उठाएं, ताकि आपके पैर हवा में लटकते रहें. कुर्सी पर बैठे-बैठे दोनों पैरों को सीधा फैलाएं, फिर मोड़ें. इस क्रिया को 15 बार दोहराएं.
* अगर आपकी कुर्सी में पहिए हैं, तो कभी-कभार बच्चे बन जाएं. महज़ कुर्सी को इधर से उधर घुमाने से भी आपकी बॉडी में फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहेगी.

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करें डेली डेस्करसाइज़

डेस्करसाइज़ यानी ऐसी एक्सरसाइज़, जिसे आप अपने डेस्क या कुर्सी पर ही बैठे-बैठे करते हैं. इसमें ज़्यादातर एक्टीविटीज़ बॉडी
स्ट्रेचिंग की होती हैं. एक स्टडी में पता चला है कि लगातार बैठकर काम करनेवाले लगभग हर 10 में से 8 लोगों को गर्दन, कंधे व पीठदर्द की शिकायत रहती है. ऐसे में ये डेस्करसाइज़ेस आपके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकती हैं.
* कुर्सी पर बैठे-बैठे दोनों पैरों को सीधा फैलाकर अपने पैरों की उंगलियों को छूने की कोशिश करें.
* दाएं पैर को सीधा फैलाएं, फिर मोड़ दें. ऐसा 15 बार करें. यही क्रिया बाएं पैर से भी दोहराएं.
* अपने टेबल पर दोनों हाथों को आगे की ओर रखें और गर्दन व कंधों को इस तरह झुकाएं, जैसे तैरने के लिए पानी में छलांग लगानेवाले हों.
* कुर्सी पर बैठे-बैठे दाएं हाथ की कुहनी को मोड़ते हुए हथेली बाएं कंधे के नीचे रखें. ठीक ऐसा बाएं हाथ से भी करें.
* दाएं हाथ को सीधा उठाते हुए सिर के ऊपर से बायीं ओर ले जाने की कोशिश करें, ताकि आपकी बॉडी स्ट्रेच हो सके. अब बाएं हाथ से क्रिया दोहराएं.
* दोनों कंधों को उचकाते हुए कानों तक पहुंचाने की कोशिश करें. इससे कंधों की फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहती है.
* दोनों हाथों को कुर्सी के पीछे सीधे फैलाते हुए छत की तरफ़ देखें.
* बाएं पैर पर दाएं पैर को क्रॉस करके रखें और पीठ को दाईं ओर मोड़ने की कोशिश करें. इसी तरह दूसरे पैर के साथ भी करें.
* दोनों हाथों को सिर के ऊपर रखते हुए पहले बायीं, फिर दाहिनी ओर झुकें. इस क्रिया को 5 बार दोहराएं.

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फिटनेस टिप्स

* बार-बार इंटरकॉम से बात करने की बजाय बीच-बीच में उठकर कलीग के पास जाकर बात करें.
* ऑफिस में एलिवेटर या लिफ्ट का सहारा लेने की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें.
* हमेशा कुर्सी पर बैठे न रहें. जो काम थोड़ी देर का है, उसे आप खड़े होकर भी निपटा सकते हैं. इससे डायबिटीज़, मोटापा और कार्डियोवैस्कुलर डिसीज़  की संभावना कम हो जाती है.
* मोबाइल पर बात करते समय अपनी कुर्सी छोड़ें और टहलते हुए बातें करें. इससे आपकी कैलारीज़ भी बर्न होंगी और वॉक भी हो जाएगी.
* कुछ भी खाने-पीने के लिए ऑफिस बॉय से मंगाने की बजाय बीच-बीच में उठकर ख़ुद पैंट्री में जाकर चाय/कॉफी लें.
* लंच ब्रेक में बैठकर गपशप करने की बजाय थोड़ी देर बाहर टहलें.
* कंप्यूटर पर काम करते व़क्त बॉडी पोश्‍चर का ध्यान रखें.
* डीप ब्रीदिंग आपको रिलैक्स होने में मदद करती है. काम ख़त्म करने के बाद ये ट्रिक आज़माएं, अच्छा लगेगा.
* आंखों को रिलैक्स करने के लिए पामिंग एक्सरसाइज़ करें.

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डायट का भी रखें ख़्याल

* ख़ुद को हमेशा हाइड्रेटेड रखने के लिए भरपूर पानी पीएं.
* चार बजे की भूख के लिए चना, कुरमुरा, मूंगफली, स्प्राउट्स जैसे हेल्दी ऑप्शन्स रखें.
* बहुत ज़्यादा ऑयली व स्पाइसी खाना अवॉइड करें.
* रोज़ाना खाने के साथ सलाद भी लें. फाइबर्स से भरपूर सलाद आपकी पाचनक्रिया को सही रखता है.
* पूरे दिन में 2-3 कप से ज़्यादा चाय या कॉफी न पीएं.
* लंच और डिनर हमेशा टाइम पर करें. इससे नियमितता बनी रहती है, जो हमारी सेहत के लिए फ़ायदेमंद है.
* अपने साथ हमेशा ड्रायफ्रूट्स का डिब्बा रखें, ताकि हल्की भूख मिटाने के चक्कर में फास्टफूड न चुनें.
* अगर आप लंबी ट्रैवलिंग करते हैं, तो बैग में हमेशा कोई फ्रूट लेकर चलें, ताकि फ्रूट खाने का कोटा भी पूरा हो जाए और शरीर को पोषण भी मिले.
* अपने खाने में फल व सब्ज़ियां भरपूर मात्रा में शामिल करें.
* रोज़ाना 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद लें.

ट्राई करें क्विक वर्कआउट ऐप्स

* स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ेस: इस ऐप में हाथ, पैर, कंधे, गर्दन, हिप्स आदि के 30 अलग-अलग स्ट्रेचेज़ के बारे में बताया गया है. इसमें मौजूद वीडियो से आप बहुत कम समय में इसे फॉलो करके स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ेस कर सकते हैं.
* 7 मिनट वर्कआउट: इसमें आपके कंप्लीट बॉडी मसल्स संबंधित कई ईज़ी व क्विक एक्सरसाइज़ेस हैं. इसमें 30-30 सेकंड्स के 12 अलग-अलग वर्कआउट्स हैं.
* 10 डेली एक्सरसाइज़ेस: इसमें मसल
ट्रेनिंग के साथ-साथ कार्डियो एक्सरसाइज़ेस भी दी गई हैं. इसमें आप एक्सरसाइज़ के लिए रिमाइंडर भी सेट कर सकते हैं. इसमें मौजूद कैलेंडर ट्रैक करके बताता है कि आपने कितने दिन एक्सरसाइज़ की और कितने दिन नहीं की.

– अनीता सिंह 

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वर्कआउट के 20 फ़ायदे (Benefits of Regular Exercise)

Benefits of Regular Exercise

Benefits of Regular Exercise

फिट व हेल्दी रहने के लिए एक्सरसाइज़ (Regular Exercise) बहुत ज़रूरी है, आपने ये बात तो लगभग हर किसी के मुंह से सुनी होगी, मगर इस पर अमल कम ही लोग करते हैं. अधिकतर तो समय की कमी या काम के बोझ का बहाना बना देते हैं, तो कुछ कहते हैं कि वो फिट हैं और उन्हें वर्कआउट की ज़रूरत नहीं. चलिए, हम आपको बताते हैं वर्कआउट कितना फ़ायदेमंद हो सकता है. इसके फ़ायदे जानकर शायद आप भी बहाने भूल जाएं.

  1. रोज़ाना कार्डियोवेस्कुलर एक्सरसाइज़ करने से ब्रीदिंग कैपिसिटी बढ़ती है और आप ज़्यादा एनर्जेटिक महसूस करते हैं.
  2. यह मांसपेशियों के साथ ही आपके दिल को भी दुरुस्त रखता है और ब्लड फ्लो (रक्त के बहाव) को नियंत्रित रखता है.
  3. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से काम करने की क्षमता यानी स्टेमिना बढ़ता है और आप बेहतर तरी़के से अपना काम कर पाते हैं.
  4. रेग्युलर एक्सरसाइज़ करने से हमारे शरीर से एंर्डोफिन्स नामक हार्मोन का स्राव होता है, जो तनाव कम करने में सहायक होता है.
  5. रोज़ना एक्सरसाइज़ करने से शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे सभी इंटरनल ऑर्गन्स को सही मात्रा में ब्लड सप्लाई मिलती है और दिमाग़ सही तरी़के से काम करता है.
  6. वेट ट्रेनिंग मसल्स की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ ही इसे सुदृढ़ और मज़बूत बनाने में भी सहायक है.
  7. एक्सरसाइज़ दिमाग़ को सक्रिय करके नए ब्रेन सेल्स के निर्माण में मदद करता है. साथ ही ब्रेन सेल्स के कनेक्शन को भी मज़बूत करता है.
  8. कई शोधों से यह सिद्ध हुआ है कि जो लोग शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं, वे ज़्यादा समय तक जिंदा रहते हैं. एक्सरसाइज़ असमय मृत्यु की संभावना को कम करता है.
  9. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से मेटाबॉल़िज़्म बढ़ता है. एक्सरसाइज़ करने के बाद आराम करते समय भी कैलोरी बर्न होती है, जिससे वज़न कम होता है.
  10. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से ब्लड कॉलेस्ट्रॉल लेवल नियंत्रित रहता है. एक्सरसाइज़ बैड कॉलेस्ट्रॉल लेवल को कम करके एचडीएल यानी गुड कॉलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है.
  11. एक्सरसाइज़ बल्ड प्रेशर को भी कंट्रोल करने में मदद करता है. ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में अन्य एक्सरसाइज़ की अपेक्षा एरोबिक ज़्यादा असरदार है.
  12. कई शोधों से ये बात साबित हुई है कि नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने वालों को विभिन्न प्रकार के कैंसर, ख़ासतौर पर कोलोन और ब्लड कैंसर होने का ख़तरा कम हो जाता है.
  13. अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी में छपी रिपोर्ट के अनुसार, नियमित तौर पर एक्सरसाइज़ करने वालों को अन्य लोगों की तुलना में स्ट्रोक का ख़तरा 50 फीसदी कम होता है.
  14. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से बोन मिनरल डेंसिटी बढ़ती है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस होने का ख़तरा कम हो जाता है.
  15. एक्सरसाइज़ करने से अच्छी नींद आती है और डिप्रेशन का ख़तरा भी कम हो जाता है. स्टैनफोर्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं के अनुसार, नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने वालों को जल्दी और अच्छी नींद आती है और वे सुबह ़ज़्यादा फ्रेश महसूस करते हैं.
  16. एक्सरसाइज़ शारीरिक बनावट ठीक करने के साथ ही आत्मविश्‍वास बढ़ाने में भी सहायक है. एक्सरसाइज़ और फिटनेस आपको अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करने में मदद करता है.
  17. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से एज़िंग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और आप ज़्यादा दिनों तक स्वस्थ और जवां बने रहते हैं.
  18. नियमित तौर पर वेट ट्रेनिंग जैसे एक्सरसाइज़ से मांसपेशियों में टेस्टेस्टेरॉन का स्राव ज़्यादा होता है, जो एनर्जी और स्टेमिना बढ़ाकर शारीरिक क्षमता बढ़ाता है.
  19. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ शरीर में रक्त के बहाव को ठीक करता है, जो इम्यून सिस्टम को ठीक करने के साथ ही डीजनरेटिव बीमारियों जैसे- टाइप 2 डायबिटीज़ से भी रक्षा करता हैं.
  20. नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने वालों को लो बैक पेन से छुटकारा मिल जाता है.

 

योग द्वारा सिरदर्द से छुटकारा (Yoga for Migraine and Headache | Cure Migraine with Yoga)

अक्सर हम सिरदर्द के लिए पेनकिलर्स का सहारा लेते हैं, जिनके अपने साइडइफेक्ट्स होते हैं. बेहतर है दर्दनिवारक दवाओं की बजाय आप योगासन करें और सिरदर्द से मुक्ति पाएं (Cure Migraine with Yoga).
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महासिर मुद्रा

* सुखासन में बैठ जाएं.
* मध्यमा, तर्जनी और अंगूठे के आगे के भाग आपस में मिलाएं.
* अनामिका को मोड़कर अंगूठे की जड़ के पास लगाएं. छोटी उंगली सीधी रहनी चाहिए.
* आंखें बंद रखें और रिलैक्स रहें.

  • यदि माइग्रेन है, तो भुजंगासन, ब्रह्म मुद्रा व महासिर मुद्रा करें.
  • सामान्य सिरदर्द के लिए अनुलोम-विलोम, शलभासन, मकरासन, बालासन व ताड़ासन
    भी करें.
चंद्रभेदन प्राणायाम
* पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं.
* बाईं नाक से सांस लें और दाईं नाक से सांस छोड़ें. इस प्रकार इसे करते रहें. आंखें बंद रखें.
* कमर व रीढ़ एकदम सीधी रखें.
* 2 मिनट तक कर सकते हैं.
युवराज सिंह, क्रिकेटर
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कैंसर से लड़ने के बाद युवराज सिंह पूरी तरह से योग की शरण में आ गए. उनका मानना है कि योग के ज़रिए वो बेहतर तरी़के से रिकवर कर सकते हैं. बीमारी के बाद दोबारा भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी की कोशिश में जुटे युवराज सिंह ने फिटनेस के लिए योग को ज़रूरी बताते हुए कहा था, “मैं अपनी ऊर्जा को वापस पाने के लिए नियमित योग कर रहा हूं. शारीरिक व मानसिक तौर पर फिर से ऊर्जावान होना बहुत मुश्किल होता है. लेकिन मैंने चुनौतियों का सामना किया और मुश्किलों से बाहर भी आया, अब मेरा लक्ष्य है कि शत-प्रतिशत फिट होकर वापसी करना. अगले 5-6 साल मेरे करियर के बेहतरीन साल होंगे और मैं बहुत आशान्वित हूं अपने भविष्य को लेकर.”

हेल्दी लाइफ के लिए करें सूर्यनमस्कार (Benefits of Surya Namaskar : Yogasana)

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1. पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं और दोनों हथेलियां जोड़ें. दोनों पैरों के टखने व अंगूठे मिलाकर रखें.

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2. सांस लेकर, हाथों को खोलते हुए कंधे के ऊपर से पीछे की ओर जितना ले जा सकें, ले जाएं (चित्र देखें).

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3. सांस छोड़ते हुए हाथों को पीछे से सामने की ओर झुकाते हुए पैरों के पास रखें (अगर रख सकें तो). पैर घुटने से मुड़ने नहीं चाहिए.

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4. नीचे झुकते हुए हाथों को मज़बूती से ज़मीन पर लगाएं. बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं. सिर ऊपर की तरफ़ तथा दाहिना घुटना सीने के पास दोनों हाथों के बीच में रहे.

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5. दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं. सिर को नीचे की ओर करते हुए पेट व कमर के भाग को ऊपर उठाएं और पर्वतासन की स्थिति में आएं (चित्रानुसार). एड़ियां ज़मीन से टच होनी चाहिए.

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6. दोनों घुटनों को, छाती को और ठुड्डी को ज़मीन से टच करें.

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7. दोनों पैरों और हाथों को ज़मीन पर चित्रानुसार रखें. सांस भरते हुए आगे की तरफ़ आते हुए सिर को ऊपर की ओर उठाएं. सिर ऊपर की तरफ़ अर्द्ध भुजंगासन की तरह रखें.

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8. पांचवीं अवस्था की तरह दोनों पैरों को आगे लाएं. सिर को नीचे की ओर करते हुए पेट व कमर के भाग को ऊपर उठाएं और पर्वतासन की स्थिति में आएं.

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9. दोनों हाथों को मज़बूती से ज़मीन पर लगाएं. बायां पैर सामने की तरफ़ लाएं दोनों हाथों के बीच में.

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10. नीचे झुकते हुए हाथों को मज़बूती से ज़मीन पर लगाएं. दोनों पैर दोनों हाथों के बीच रखें. घुटना छाती के सामने रखें. सिर व गर्दन दोनों हाथों के बीच में रखें.

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11. सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर ले जाते हुए पीछे की ओर करें.

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12. सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों को सामने की ओर लाएं और पूर्ववत् प्रणाम की स्थिति में आ जाएं.

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फ़ायदे

* 3 राउंड से शुरू करें और अपनी क्षमतानुसार राउंड्स बढ़ाएं.
* स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सूर्य नमस्कार को सर्वोत्तम अभ्यास माना गया है. इससे समस्त अंगों में क्रियाशीलता आती है तथा हार्मोंस संतुलित होते हैं.
* सूर्य नमस्कार कई बीमारियों को दूर करने की क्षमता रखता है.
* डायबिटीज़ की समस्या में बेहतर परिणाम देता है.
* पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हुए पेट संबंधी सभी समस्याओं, जैसे- आमाशय व अग्नाशय से जुड़ी परेशानियों से छुटकारा दिलाता है.
* मोटापे से जूझ रहे लोगों को वज़न कम करने में काफ़ी लाभदायक सिद्ध होता है.
* फेफड़ों व सांस संबंधी बीमारियों में भी कारगर साबित होता है.
* हृदय संबंधी विकारों को दूर करने में उपयोगी होता है.
* शरीर में रक्तसंचार को बेहतर बनाता है.
* बल और तेज की वृद्धि करता है.
* मानसिक शांति प्रदान करता है.
* रीढ़ का लचीलापन बढ़ाता है.
* अगर बचपन से ही यह आसन किया जाए, तो हाइट भी अच्छी होती है.
* शरीर की समस्त मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है.
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एक्सरसाइज़ के हेल्थ बेनीफिट्स (Health Benefits of Exercise)

Health Benefits of Exercise

– शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि नियमित रूप से एक्सरसाइज़ (Health Benefits of Exercise) करने से नींद अच्छी आती है.

– दिनभर ताज़गी का एहसास बना रहता है.

 

Health Benefits of Exercise

– रोज़ाना एक्सरसाइज़ करने से शरीर में फैट्स का लेवल कम होता है और ऊर्जा का स्तर बढ़ता है.

– नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से अवसाद और चिड़चिड़ापन दूर होता है.

– यदि एक्सरसाइज़ करने के मूड में नहीं हैं, तो दूसरी एक्टिविटीज़ करके भी अपने आपको फिट रख सकती हैं, जैसे- बच्चों के साथ बास्केट बॉल खेलना, बागवानी करना, ग्रॉसरी शॉप तक वॉकिंग जाना, पेट्स के साथ वॉक पर जाना आदि.

– तनाव कम करने के लिए जितना हो सके, शारीरिक गतिविधियां अधिक करें.

– गेम्स आदि खेलकर भी आप अपने तनाव को कम कर सकती हैं.

 

Health Benefits of Exercise

– एक्सरसाइज़ से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है.

– नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से इम्यून सिस्टम मज़बूत बनता है और आप बेहतर तरी़के से बीमारियों से लड़

पाते हैं.
Health Benefits of Exercise

मेडिकली यह साबित हो चुका है कि जो लोग नियमित रूप से एक्सरसाइज़ या फिज़िकल एक्टिविटीज़ करते हैं, उनमें-

  • कोरोनरी हार्ट डिसीज़ और स्ट्रोक का ख़तरा 35% तक कम हो जाता है.
  • डायबिटीज़ का ख़तरा लगभग 50% तक कम हो जाता है.
  • ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा 20% तक कम हो जाता है.
  • ऑस्टियोआर्थराइटिस का ख़तरा 83% तक कम हो जाता है.
  • अर्ली डेथ, डिप्रेशन और डेमेन्शिया का ख़तरा 30% तक कम हो जाता है.

बहाने छोड़िए, फिट रहिए ( Workout, Exercise )

Workout, Exercise

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में महिलाओं को फिट रहने के लिए जितना ज़रूरी हेल्दी डायट लेना है, उतना ही ज़रूरी एक्सरसाइज़ करना भी है, पर जब एक्सरसाइज़ करने की बात आती है, तो महिलाएं अपनी व्यस्त दिनचर्या का बहाना बनाकर बचने की कोशिश करती हैं. ऐसा नहीं है कि वे एक्सरसाइज़ से होनेवाले फ़ायदों से वाक़िफ़ नहीं हैं, लेकिन सब कुछ जानकर भी अंजान बने रहना चाहती हैं. आइए, जानें महिलाओं के ऐसे कुछ फिटनेस संबंधी बहानों के बारे में.

 

Workout, Exercise

फिटनेस बहाना: आज मैं बहुत व्यस्त हूं. मेरे पास एक्सरसाइज़ करने का समय नहीं है.

क्या करें: आप जैसे घर और ऑफिस के ज़रूरी कामों को निपटाने के लिए समय निकालती हैं, वैसे ही एक्सरसाइज़ के लिए भी थोड़ा समय ज़रूर निकालें. अपनी व्यस्त दिनचर्या के ज़रूरी कामों की लिस्ट में एक्सरसाइज़ को भी शामिल करें, न कि उसे अनावश्यक समझकर नज़रअंदाज़ करें.

– वर्क लोड चाहे कितना भी अधिक क्यों न हो, फिर भी कुछ समय ज़रूर निकालें.

– जिम जाने की बजाय घर पर ही हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ करें.

– यदि एक्सरसाइज़ करने का मूड नहीं है, तो सुबह आधे घंटे जल्दी उठकर मॉर्निंग वॉक के लिए जाएं.

फिटनेस बहाना: आज मैं बहुत थकी हुई हूं/ आज मेरा मूड नहीं है.

क्या करें: एक्सरसाइज़ करने की बजाय वॉक करें. वॉक करने से भी शरीर में ताज़गी और ऊर्जा का संचार होता है और थकान भी कम महसूस होती है.

– अपने आप को याद दिलाती रहें कि एक्सरसाइज़ करने से शरीर में चुस्ती-फुर्ती आती है.

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फिटनेस बहाना: अकेले एक्सरसाइज़ करना बोरिंग लगता है.

क्या करें: एक्सरसाइज़ को दिलचस्प बनाने के तरी़के ढूंढ़ें. इसके अलावा आप अपने किसी फ्रेंड के साथ मिलकर भी एक्सरसाइज़ कर सकती हैं.

– एक्सरसाइज़ को दिलचस्प बनानेवाली एक्सेसरीज़ ख़रीदें, जैसे- योगा पैंट व टी-शर्ट्स, ट्रैक सूट आदि. इन्हें पहनकर एक्सरसाइज़ करने से आपको अच्छी फीलिंग आएगी और कंफर्टेबल महसूस होगा.

– एक्सरसाइज़ करते समय म्यूज़िक ज़रूर लगाएं.

– रोज़ाना एक ही तरह के योगासन, प्राणायाम करते हुए बोरियत महसूस हो रही हो, तो किसी दिन जॉगिंग या ब्रिस्क वॉक के लिए जाएं.

– इसके अलावा स्विमिंग, साइक्लिंग या डांस क्लास भी जा सकती हैं.

– अकेले एक्सरसाइज़ करना बोर लगता है, तो फ्रेंड्स के साथ मिलकर योगा क्लास, डांस क्लास या एरोबिक्स क्लास आदि भी जॉइन कर सकती हैं.

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फिटनेस बहाना: इतनी एक्सरसाइज़ करने पर भी कोई ऱिज़ल्ट नहीं मिलता.

क्या करें: एक्सरसाइज़ को एक चैलेंज की तरह देखें. याद रखें, नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से आप फिट और स्लिम-ट्रिम रहेंगी.

– एक्सरसाइज़ करने के लिए प्रोफेशनल फिटनेस ट्रेनर की सलाह लें. ट्रेनर आपको यह बताएगा कि कौन-सी एक्सरसाइज़ आपके लिए फ़ायदेमंद है.

– ख़ुद को चैलेंज देने के लिए अपनी दिनचर्या में बदलाव लाएं,  जैसे- सुबह-सुबह एक्सरसाइज़ करने की जगह शाम को साइक्लिंग या एरोबिक्स भी कर सकती हैं. एक्सरसाइज़ में बदलाव लाने से आपको रिज़ल्ट जल्दी दिखाई देंगे.

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फिटनेस बहाना: जिम जाना बहुत ख़र्चीला है. मैं जिम की मेम्बरशिप अफोर्ड नहीं कर सकती.

क्या करें: जिम जाने की बजाय घर पर ही पुशअप, क्रंचेज़ या एरोबिक्स करें.

– जिम की मेम्बरशिप लेने से बचने के लिए अपनी लोकल लाइब्रेरी से फिटनेस बुक पढ़कर या डीवीडी देखकर घर पर एक्सरसाइज़ कर सकती हैं.

– घर पर ही छोटा-सा जिम बनाएं, एक्सरसाइज़ से जुड़े इक्विपमेंट, जैसे- ट्रेडमिल, एक्सरसाइज़ बॉल्स आदि रखें. एक बार ये सब ख़रीद लेंगी, तो बार-बार के जिम जाने के ख़र्च से भी बच जाएंगी.

– यदि जिम जाकर एक्सरसाइज़ करने का समय नहीं है, तो वॉकिंग या रनिंग जैसी एक्सरसाइज़ करके भी आप अपने को फिट रख सकती हैं.

– मधु शर्मा