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मन का रिश्ता: दोस्ती से थोड़ा ज़्यादा-प्यार से थोड़ा कम (10 Practical Things You Need To Know About Emotional Affairs)

Emotional Affairs

रिश्तों का दायरों में कुछ रिश्ते (Emotional Affairs) मन के भी होते हैं, जिन्हें कोई नाम तो नहीं दिया जा सकता, लेकिन इनके अस्तित्व को नाकारा भी नहीं जा सकता. इन्हीं रिश्तों में से एक है शादीशुदा स्त्री और पुरुष का ऐसा रिश्ता, जो दोस्ती से एक क़दम आगे होता है, लेकिन इसे प्यार का नाम भी नहीं दिया जा सकता. क्योंकि ऐसे रिश्ते में बंधे लोग किसी बंधन की चाह नहीं करते, वो बस कुछ समय साथ गुजारना चाहते हैं. क्यों, कब और कैसे बनते हैं मन के रिश्ते? आइए, जानते हैं.

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इंसान की ये फितरत है कि उसे जो चीज़ नहीं मिलती, वो उसी को पाना चाहता है. प्यार के मामले में तो ये चाहत और भी बढ़ती चली जाती है. जब लाइफ पार्टनर से मनचाहा प्यार नहीं मिलता, तो वो अपनी इस चाहत को अपने रिश्ते के दायरे से बाहर तलाशने लगता है. और तब बनते हैं मन के भावनात्मक रिश्ते, जिन्हें कोई नाम तो नहीं दिया जा सकता, लेकिन उनके होने को नकारा भी नहीं जा सकता. मन के रिश्ते में बंधे ऐसे लोग घर-परिवार, करियर, रिश्तेदार, समाज… अपनी तमाम ज़िम्मेदारियां निभा लेने के बाद जो व़क्त बचता है, उसे अपने उस साथी के साथ बिताना चाहते हैं, जिससे कुछ पल बात करके इन्हें नई ऊर्जा मिलती है, ज़िंदगी ख़ूबसूरत नज़र आने लगती है. क्यों बनते हैं ऐसे मन के रिश्ते? समाज ऐसे रिश्तों को किस नज़र से देखता है? क्या हैं ऐसे रिश्तों के पॉज़िटिव और नेगेटिव इफेक्ट्स? आइए, जानते हैं.

क्यों बनते हैं मन के रिश्ते?
काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ के अनुसार, ज़्यादातर इमोशल या एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स चालीस की उम्र के बाद होते हैं. इसकी वजह यह है कि इसके पहले इंसान अपनी पढ़ाई, करियर, शादी, बच्चों की ज़िम्मेदारियों में उलझा रहता है. फिर जब उसकी ज़िंदगी में ठहराव आने लगता है, जिसे एमटी नेस्ट सिंड्रोम भी कहते हैं, तो उस खालीपन को भरने के लिए वो किसी ऐसे इंसान से जुड़ जाता है, जिसके साथ व़क्त गुज़ारना उसे अच्छा लगता है.
ऐसा रिश्ता दोस्ती से बढ़कर होता है, क्योंकि बार-बार मिलने, बात करने का मन करता है, लेकिन सेक्स की चाह नहीं होती. ऐसे रिश्ते को प्यार इसलिए नहीं कहा जा सकता, क्योंकि ऐसे लोग स़िर्फ कुछ समय साथ रहना चाहते हैं, उन्हें एक साथ दुनिया बसाने की कोई चाह नहीं होती. इमोशनल अफेयर कोई जानबूझकर नहीं करता, इसके होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे-
* शादीशुदा ज़िंदगी में अच्छे अनुभव भी होते हैं और बुरे भी. पार्टनर भले बुरा न हो, लेकिन उसके साथ गुज़रे बुरे अनुभवों के कारण कई बार रिश्ते में कड़ुवाहट आ जाती है और ऐसा दोनों पार्टनर के साथ होता है. इसके चलते रिश्ते से रोमांस ग़ायब हो जाता है. फिर जब किसी के साथ उनका जुड़ाव होने लगता है, तो वो उस रिश्ते में रोमांस तलाशने लगते हैं.
* शादी के बाद कई महिलाएं अपना ध्यान नहीं रखतीं, ख़ुद को ग्रूम नहीं करतीं, तो पति को उनमें रुचि कम होने लगती है, फिर जब उसे अपने जैसी कोई मिलती है, तो वो उसके प्रति आकर्षित हो जाता है.
* कई कपल ऐसे होते हैं, जो दुनिया के सामने तो ऐसा दिखाते हैं जैसे उनके बीच सबकुछ नॉर्मल है, लेकिन ऐसा होता नहीं. ऐसे में दोनों अपनी-अपनी अलग दुनिया बसा लेते हैं और दोनों अपनी दुनिया में ख़ुश रहते हैं.
* शादी के शुरुआती वर्षों को छोड़ दिया जाए, तो इंसान पूरी ज़िंदगी इस आस में गुज़ार देता है कि कभी तो उसकी ज़िंदगी में रोमांस के पल लौटकर आएंगे, लेकिन जब ऐसा नहीं हो पाता, तो जहां भी उसे अपने लिए प्यार महसूस होता है, वो उसी तरफ़ झुकता चला जाता है.
* चालीस की उम्र के बाद कई महिलाएं एमटी नेस्ट सिंड्रोम की शिकार हो जाती हैं, जब बच्चे अपनी दुनिया में बिज़ी हो जाते हैं और पति अपने काम में, ऐसे में महिलाएं अकेलापन महसूस करने लगती हैं. उन्हें लगने लगता है कि किसी को उनकी परवाह नहीं है. ऐसे में जब कोई उन्हें एहमियत देता है, तो वो उसकी तरफ खिंचती चली जाती हैं.
* जब शादीशुदा रिश्ते में कहीं कोई कमी रह जाती है, हम वैसी ज़िंदगी नहीं जी पाते जैसा हम जीना चाहते हैं, तो ज़िंदगी में एक अजीब-सा खालीपन आ जाता है. फिर जब किसी से मिलने पर वो खालीपन भरने लगता है, तो मन ऐसे रिश्ते से जुड़ता चला जाता है.
* घर-ऑफिस का स्ट्रेस, पारिवारिक कलह, विचारों का मतभेद कई बार पति-पत्नी के बीच इतनी दूरियां ला देता है कि एक छत के नीचे रहते हुए भी वो एक-दूसरे से बहुत दूर होते चले जाते हैं. ऐसे में वो घर में मिलने वाली ख़ुशियां बाहर तलाशने लगते हैं. फिर जब कोई थोड़ा भी सहारा देता है, तो वो उसकी तरफ़ खिंचते चले जाते हैं.
* कई बार ऐसा भी होता है कि कहने को तो रिश्ता तय हो जाता है, शादी भी हो जाती है, लेकिन कपल के विचार आपस में कभी नहीं मिलते. ऐसे में रिश्ता तोड़कर दो परिवारों को दुखी करने की बजाय वो ऐसे रिश्ता तलाश लेते हैं, जो उन्हें समझता हो, जिसका साथ उन्हें अच्छा लगता हो. ऐसे रिश्ते में वो अपनी ख़ुशियां तलाश लेते हैं. घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ वो अपने इस रिश्ते को भी जीते हैं.
* काम के बढ़ते घंटे कलीग को एक-दूसरे के इतने करीब ले आते हैं कि वो एक-दूसरे से अपनी हर बात शेयर करने लगते हैं. रोज़ाना घंटों साथ रहते हुए उन्हें ये पता ही नहीं चलता कि वो कब एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए हैं.
* आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में काम की आपाधापी के चलते पति-पत्नी के पास एक-दूसरे के लिए टाइम ही नहीं रहता, ऐसे में उनके बीच संवाद की कड़ियां ढीली पड़ने लगती हैं, शरीरिक ज़रूरत से ज़्यादा ऐसे समय में उन्हें इमोशनल सपोर्ट चाहिए होता है और जहां इसकी पूर्ति होती दिखाई देती है, वो उसी तरफ़ मुड़ जाते हैं.
* आजकल एक्सपोज़र इतना बढ़ गया है कि ज़िंदगी की ज़रूरतें भी जैसे बदलती जा रही हैं. अब लोग एक रिश्ते में घुट-घुटकर जीने की बजाय दूसरा रिश्ता तलाशकर अपना सुकून ढूंढ़ लेते हैं और ऐसा करते समय उन्हें कोई अपराधबोध भी नहीं होता.
* कई बार हमें एक ऐसे साथी की तलाश होती है, जिसके पास जाकर हम दुनिया की तमाम तकली़फें, शिकायतें भूल जाते हैं. उस व़क्त हमारे हैप्पी हार्मोन्स पीक पर होते हैं और हमें ज़िंदगी अच्छी लगने लगती है.

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हां, मैं अपने रिश्ते से ख़ुश हूं!
सुरीली (परिवर्तित नाम) कहती हैं. “मैं अमन से चार साल पहले मिली थी जब मैंने अपना नया ऑफिस ज्वाइन किया था. अमन मेरे सीनियर थे इसलिए काम के सिलसिले में उनसे बातें होती रहती थीं. धीरे-धीरे हमें एक दूसरे का साथ इतना अच्छा लगने लगा कि हम घर पहुंचते ही अगले दिन ऑफिस जाने का इंतज़ार करते रहते थे. हमारे बीच एक अनकहा रिश्ता जन्म लेने लगा था. बिना कुछ कहे-सुने हमने एक-दूसरे को अपना सहारा बना लिया. सच कहूं, तो जब से अमन मेरी ज़िंदगी में आए हैं, तब से जैसे मेरी ज़िंदगी ही बदल गई है. अमन का साथ मुझे एक अजीब-सी ख़ुशी और संतुष्टि देता है, जो मैंने अपने पति के साथ कभी महसूस नहीं की. मैं जब कभी अपसेट रहती हूं तो मेरे पति को तो इसकी ख़बर भी नहीं रहती, लेकिन अमन जानते हैं कि आज रात मुझे नींद नहीं आएगी. वो मुझे 2-3 बजे रात में भी मैसेज करते हैं कि अब सो भी जाओ, कल ऑफिस में काम कैसे करोगी. अमन का इस कदर केयर करना मुझे बहुत तसल्ली देता है. अमन के साथ मैं ख़ुद को प्रोटेक्टेड महसूस करती हूं. हमने कभी एक-दूसरे को छुआ भी नहीं है, लेकिन हमारी रूह एक-दूसरे में बसती है. समझ नहीं आता इस रिश्ते को क्या नाम दूं- प्यार, दोस्ती, अफेयर, हमसफर… जो भी है, मेरे लिए हमारा रिश्ता बहुत ख़ास है.”

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इस रिश्ते को क्या नाम दें?
प्राइवेट लंच डेट्स, सीक्रेट मीटिंग्स, उत्तेजक वार्तालाप… पार्टनर के होते हुए जब ये बातें किसी और के साथ शेयर की जाती हैं, तो ऐसे रिश्ते को क्या नाम दिया जाए? कई लोग ख़ुद को समझाते हैं कि जब तक उनके बीच सेक्स नहीं होता, उसे अफेयर का नाम नहीं दिया जा सकता, लेकिन ये सच नहीं है. जिस रिश्ते को आप अपने पार्टनर और दुनिया से छुपाकर रखते हैं, जिसे आप अपना बिल्कुल निजी मामला समझते हैं, उसे अफेयर ही कहा जा सकता है. आप अपनी ढेर सारी इमोशनल एनर्जी अपने अफेयर पर ख़र्च करते हैं, जबकि इस पर आपके पार्टनर का अधिकार है. ऐसे रिश्तों का जब खुलासा होता है, तो सबसे पहले विश्‍वास की दीवार ढहती है और फिर आप गिल्ट में जीते हैं और आपका पार्टनर नफ़रत की आग में.

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इमोशनल अफेयर के साइड इफेक्ट्स
* आप हर समय इस गिल्ट में रहते हैं कि आप अपने पार्टनर को धोखा दे रहे हैं.
* जाने-अनजाने पार्टनर और परिवार की अनदेखी करने लगते हैं.
* एक अनरियलिस्टिक दुनिया में जीने लगते हैं, जिसके परिणाम घातक हो सकते हैं.
* अपने अफेयर से मिलने के लिए पार्टनर से झूठ बोलते हैं.
* पति और परिवार का समय उस शख़्स को देने लगते हैं यानी अपना बेस्ट टाइम उसके साथ गुज़ारते हैं.
* पार्टनर की बजाय अपनी हर बात उस शख़्स के साथ शेयर करने लगते हैं.
* स़िर्फ कुछ समय की मुलाक़ात में सबकुछ अच्छा तो लगता है, लेकिन जब अफेयर की बात खुलती है, तो असल रिश्ते दूर हो जाते हैं.

– कमला बडोनी

 

 

शादीशुदा से प्यार अब परहेज़ नहीं (Having An Affair With Married Man?)

Having An Affair With Married Man
बदलते ज़माने के दौर में बहुत कुछ बदला है. पर सबसे अधिक जीने के नज़रिए में बदलाव आया है. एक व़क़्त था, जब शादीशुदा के प्यार (Having An Affair With Married Man) के बारे में ख़्याल को भी ग़लत माना जाता था, पर अब ऐसा नहीं रहा. आइए, इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर एक नज़र डालें.

Having An Affair With Married Man

  • एक का हो गया, वह दूसरे का नहीं हो सकता. एक ज़माने में लोग ऐसा ही सोचते थे. इसीलिए एकदो दशक पहले तक ऐसी घटनाएं कम ही देखने को मिलती थीं कि किसी लड़की को शादीशुदा पुरुष से प्यार हो जाए. उस ज़माने में लड़कियों के बुनियादी स्त्रियोचित गुणों में सौतिया डाह का स्थान सर्वोपरि था. यह कल्पना करना मुश्किल था कि अविवाहित लड़की किसी अन्य स्त्री के पति के साथ प्यार की पींगे बढ़ा सकती है.
  • लेकिन स्त्री और पुरुष की इस बनावट और उनके संबंधों की बुनावट में पिछले कुछ अरसे से काफ़ी बदलाव आया है. आज लड़कियां न केवल शादीशुदा पुरुष को प्यार के क़ाबिल समझ रही हैं, बल्कि समाज भी ऐसे संबंधों पर ऐतराज़ करता नज़र नहीं आ रहा. समाज और जीवन के ये फ़लस़फे यूं ही नहीं बदल गए. इनके लिए देशदुनिया में हो रहे तमाम परिवर्तन ज़िम्मेदार हैं.

लड़कियों का कामकाजी होनाः शादीशुदा पुरुष के प्रति लड़की के झुकाव, लगाव और प्यार की सबसे बड़ी वजह आज के ज़माने में लड़कियों का कामकाजी होना है. किसी ऑफ़िस में काम करती लड़की सुबह 10 से शाम 5 बजे तक का समय अपने पुरुष सहकर्मी के साथ बिताती है. लंबे समय तक साथ काम करना, चाय पीना, लंच करना, हंसीमज़ाक जैसी रोज़मर्रा की घटनाएं चाहेअनचाहे दिलों को क़रीब लाती हैं. काम के दौरान एकदूसरे का सहयोग करने, सीखनेसिखाने, सुखदुख बांटने का सिलसिला कब प्यार में तब्दील हो जाता है, पता ही नहीं चलता. इसके अलावा करियर की सीढ़ियां चढ़ने की चाहत भी प्यार का चोला पहनकर आती है.

सीरियल, हॉलीवुड व बॉलीवुड का असरः भारतीय महिलाओं की मनःस्थिति में आए इस बदलाव में धारावाहिकों की भी ख़ास भूमिका रही है. आजकल हर धारावाहिक में मसाला डालने के लिए जो तानेबाने बुने जाते हैं, उनमें विवाहित पुरुषों से रिश्ते बनानेवाली नायिकाओं ने आम युवतियों को भी प्रेरित किया है. आज लड़कियां शादी से पहले अथवा शादी के बाद भी अपनी मर्ज़ी से ऐसा कोई क़दम उठाने में नहीं झिझक रही हैं.

भारतीय महिलाओं के मन को इस रूप में ढालने में दूसरी सबसे अहम् भूमिका बॉलीवुड और हॉलीवुड के सितारों की भी रही है. नायकनायिकाओं को अपनी पसंद की ज़िंदगी जीने और अपनी पसंद की स्त्री/पुरुष को चुनने की आज़ादी ने धारावाहिकों में चल रही काल्पनिक कहानियों पर सच्चाई की मुहर लगा दी है. बदलाव आपके सामने है. आज से दो दशक पहले कोई युवती शादीशुदा पुरुष के साथ संबंध बनाकर अपने घर तो क्या, दूर किसी शहर में भी रहने की नहीं सोच सकती थी जबकि आज ऐसे रिश्ते के बावजूद लड़कियां अपने परिवार में ही रह रही हैं और कहीं से भी विरोध के स्वर उठते नहीं दिखते.

ग्लोबलाइज़ेशन व सूचना क्रांतिः सूचना क्रांति और वैश्‍वीकरण ने सारी दुनिया को एक गांव की शक्ल दे डाली है. दुनिया की सारी संस्कृतियां एकदूसरे को काफ़ी नज़दीक से देख रही हैं. टीवी चैनलों पर दूरदराज़ की ख़बरें पलभर में हर जगह पहुंच जाती हैं. ऐसे में पश्‍चिमी सभ्यता के खुलेपन का असर भारतीय समाज पर भी पड़ा है और भारतीय युवाओं और युवतियों के मन में भी खुली हवा में सांस लेने की चाहत जागी है. वह अपनी पसंद के पुरुष के साथ जीवन जीना चाहती है. वह पुरुष अविवाहित है या विवाहित, इससे उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.

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Having An Affair With Married Man
बड़े धोखे हैं इस राह में

नोएडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत जयचंद विवाहित है. उसकी पत्नी और बच्चे गांव में हैं. वह और उसके साथ काम करनेवाली वर्षा एक ही बिल्डिंग में रहते हैं. एक ही ऑफ़िस में साथसाथ काम करते हुए और एक ही बिल्डिंग में रहते हुए वर्षा न जाने कब जयचंद के मोहपाश में बंधकर उससे प्रेम करने लगी, वह जयचंद को अपना सर्वस्व मानने लगी. लेकिन क्या ऐसा जयचंद के साथ भी है? क्या वह भी वर्षा को उसी शिद्दत के साथ चाहता है? नहीं! वर्षा अब यह अच्छी तरह जान चुकी है. जिस प्रेम ने उसके अंदर कभी उमंगें भरी थीं, वह अब एक बोझ बनकर रह गया है. वर्षा इस असहनीय स्थिति से छुटकारा पाना तो चाहती है, लेकिन जयचंद से अलग होकर जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती. इसलिए इस कशमकश भरे रिश्ते को प्यार के नाम पर निभाए जा रही है.

यह मात्र एक वर्षा और जयचंद की कहानी नहीं है. ऐसी न जाने कितनी वर्षाएं अपने प्यार से न जाने कितने जयचंदों की दुनिया हरीभरी कर रही हैं. लेकिन क्या उनकी अपनी दुनिया हरीभरी है, वे ख़ुद भी आश्‍वस्त होकर नहीं कह सकती हैं.

ज़ाहिर है, शादीशुदा पुरुष से प्यार की राह पर ख़तरे तो हर क़दम पर हैं, लेकिन ज़िंदगी की अजीब दास्तां का क्या ठिकाना? वह ऐसे मोड़ पर पहुंच सकती है, जहां कोई ऐसा मिल जाए, जो हो तो चुका हो किसी और का, पर बना आपके लिए है. ऐसे में क्या करेंगी आप? क्या ज़िंदगी जीने के लिए कभीकभी ख़तरों से नहीं खेलना पड़ता?

भ्रमित जीवन की शिकार

दरअसल अविवाहित लड़कियां अपने प्यार को चाहे जितना सच्चा मानें, ख़ुद को चाहे जितना स्मार्ट समझें, शादीशुदा पुरुष की निगाह में वे बस इच्छाओं की पूर्ति का एक साधन होती हैं. अपनी समझ से जब वे प्यार कर रही होती हैं, तब वस्तुतः वे शिकार बन रही होती हैं. इसके कई कारण हैं

कम उम्र वाली लड़कियों की चाहत होती है कि पुरुष उन पर ध्यान दें, उनके काम की प्रशंसा करें, उनकी ख़ूबसूरती की तारीफ़ करें. शादीशुदा पुरुष की अनुभवी आंखें उनकी इन चाहतों को बख़ूबी भांप जाती हैं. मन में तरहतरह के मंसूबे बांधे हुए पुरुष बाहरी तौर पर तो अच्छा बनते हुए व मदद करते हुए बड़े सहज भाव से लड़की की इच्छाएं पूरी करता है, पर साथ ही प्यार के नाम पर इसकी क़ीमत भी वसूलता जाता है.

स्त्री पुरुष से अपना पूरा वजूद, सारी भावनाएं जोड़ लेती है, लेकिन पुरुष इसका बस दिखावा करता है. स्त्री के दिल व भावनाओं से खेलते हुए पुरुष की असल ज़रूरत महज जिस्मानी होती है. स्त्री को इसका पता तब चलता है, जब बहुत देर हो चुकी होती है. उसके सारे सपने चूरचूर हो जाते हैं और वह डिप्रेशन से घिर जाती है.

अपने प्रेम या यूं कहें कि प्रेमी की ख़ातिर स्त्री को जितना सहना पड़ता है, उसके मुक़ाबले शादीशुदा पुरुष को कोई त्याग नहीं करना पड़ता. प्रेम का खुलासा होने पर लड़की को परिवार, पैरेंट्स की नाराज़गी के साथ समाज की तोहमत और बदनामी भी झेलनी पड़ती है, जिससे आगे चलकर शादी में अड़चनें भी आती हैं. इतना सब कुछ झेलने के बाद आख़िर स्त्री को मिलता क्या है? दोहरी ज़िंदगी जीनेवाले फरेबी पुरुष का दिखावटी और झूठा प्रेम. ऐसा प्रेम जो दूर से तो नज़र आता है, लेकिन नज़दीक जाने पर मृगमरीचिका साबित होता है.

इंडियन साइको सोशल फ़ाउंडेशन की सायकोलॉजिस्ट डॉ. समीक्षा कौर शादीशुदा पुरुषों से बढ़ते प्यार के लिए करियर को लेकर आई जागरूकता और इसके कारण शादी में देर, दहेज व वैवाहिक जीवन की समस्याओं से भागने की प्रवृत्ति को मानती हैं. वे इसे परिस्थितिवश हुआ समझौता करार देती हैं और कहती हैं, ”जहां तक पुरुषों की बात है, तो पार्टनर से विचारों में तालमेल का अभाव, पत्नी का गैरज़िम्मेदाराना रवैया जैसी चीज़ें उन्हें दूसरी स्त्री, ख़ासकर अपनी कलीग की ओर खींचते है. वहीं युवतियों में करियर को लेकर आई जागरूकता व वैवाहिक जीवन के झंझटों से दूर स्वच्छंद जीवन जीने की चाह ने ऐसी परिस्थितियां पैदा की हैं. करियर की भागमभाग में युवतियों को मानसिक, शारीरिक तृप्ति के लिए सुरक्षित बांहों की तलाश होती है, जहां उनकी महत्वाकांक्षाएं प्रभावित न होती हों. ऐसे में उन्हें साथ में काम करनेवाले विवाहित पुरुष ज़्यादा उपयुक्त दिखते हैं.”

डॉ. कौर ऐसे संबंधों में ठगे जाने की बात को भी स्वीकारती हैं. ”स्त्री पहले प्यार करती है और बाद में शारीरिक संबंधों के लिए तैयार होती है, जबकि पुरुष पहले शारीरिक संबंध बनाता है और बाद में वह भावनात्मक रूप से जुड़ भी सकता है, नहीं भी. ऐसी युवतियां ऐसे क़दम उठा तो लेती हैं, लेकिन उनकी सुख की तलाश ख़त्म नहीं होती, क्योंकि उनकी कल्पना में जो प्रेम होता है, वह दूसरी स्त्री के रूप में कभी हासिल नहीं होता. उन्हें सौतिया डाह तो नहीं होता, मगर अपने साथी की पत्नी को नीचा दिखाने की चाह ज़रूर होती है. ऐसे संबंधों को अब मौन सामाजिक स्वीकृति भी मिल चुकी है. अभिभावक तो नहीं, पर भाईबहन ऐसी बातें आपस में शेयर कर ही लेते हैं. कुछ मामलों में मांबाप भी इन संबंधों को स्वीकार कर लेते हैं.”

संजय श्रीवास्तव

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क्या करें जब पति को हो जाए किसी से प्यार? (Is Your Husband Having An Affair?)

Is Your Husband Having An Affair

आजकल पतियों का परस्त्री के प्रति आकर्षित हो जाना आम-सी बात होती जा रही है. ऐसे में पत्नियां समय पर सचेत हो जाएं, तो बहुत कुछ बिगड़ने से बच सकता है. साथ ही वे अपने प्यार, समझदारी, धैर्य व विश्‍वास से पति को सही रास्ते पर ला सकती हैं.

Is Your Husband Having An Affair

आज के महानगरीय जीवन की त्रासदी है- पति-पत्नी का अपने-अपने प्रोफेशन में ज़रूरत से अधिक ध्यान देना, परिवार का आकर्षण धीरे-धीरे कम होना और एक अच्छी लाइफस्टाइल जीने के लिए कम से कम समय में बहुत अधिक पैसा कमाना. ये कुछ ऐसे कारण हैं, जो पति और पत्नी के बीच में एक मज़बूत दीवार बनकर खड़े हो रहे हैं. इन सब से ऊपर आज की बिज़ी लाइफ में जो चीज़ अधिक सेंध लगा रही है, वह है जीवनसाथी के जीवन में किसी और का आज के महानगरीय जीवन की त्रासदी है- पति-पत्नी का अपने-अपने प्रोफेशन में ज़रूरत से अधिक ध्यान देना, परिवार का आकर्षण धीरे-धीरे कम होना और एक अच्छी लाइफस्टाइल जीने के लिए कम से कम समय में बहुत अधिक पैसा कमाना. ये कुछ ऐसे कारण हैं, जो पति और पत्नी के बीच में एक मज़बूत दीवार बनकर खड़े हो रहे हैं. इन सब से ऊपर आज की बिज़ी लाइफ में जो चीज़ अधिक सेंध लगा रही है, वह है जीवनसाथी के जीवन में किसी और का आ जाना.

किसी तीसरे का आगमन इस बंधन में मुश्किलें पैदा करने के लिए काफ़ी है. अपने जीवनसाथी के प्रति बेवफ़ाई करना भी आज आम-सी बात हो गई है. जब आपके पति के मन में किसी अन्य महिला के लिए दोस्ती से अधिक की भावनाएं जन्म लेती हैं, तो यह वैवाहिक संबंधों में स्लो पॉयज़न का काम करता है. इस ज़हर को अपने परिवार में आने से पहले ही रोकना बेहद ज़रूरी है. इसके लिए आपको थोड़ा सावधान रहने की ज़रूरत है. कुछ संकेत व बातों पर ध्यान देने से ही आपको पता चल जाएगा कि आपके पति किसी दूसरी महिला के प्रति आकर्षित हो रहे हैं. आइए, इसके बारे में जानते हैं.

– जब आपको लगे कि आपके पति के व्यवहार में अचानक परिवर्तन आ गया है, तो समझ लीजिए कि आपके पति के मानसिक और भावनात्मक धरातल पर उथल-पुथल मची हुई है.

– जब आपके प्रति उनका व्यवहार बदल जाए और वह पहले की तुलना में आपसे प्यार से बात न करें, तो समझ जाएं कि यह प्यार कहीं और बांटा जा रहा है.

– जब आपके पति अचानक खोये-खोये-से रहने लगें, तो यह इस बात का संकेत है कि उनके मन में आपके अलावा कोई और बस गया है.

– ख़ुद का ज़रूरत से अधिक ध्यान रखना भी इस बात का संकेत देता है कि आपके पति को किसी और से प्यार हो गया है.

– जब आपको लगे कि आपके पति अपनी सेहत का ज़रूरत से अधिक ध्यान दे रहे हैं और अगर कारण पूछने पर एकदम सही जवाब न दे पाएं, तो समझ जाएं कि यह सब सजना-धजना आपके लिए नहीं है. वह इतने स्मार्ट बनकर किसी और के लिए जाते हैं.

– कहीं बाहर जाते हुए उनके मन में सुंदर दिखने की चाह का बने रहना.

– सुबह-शाम अपनी पर्सनैलिटी को निखारने की कोशिश करना इस बात का संकेत है कि आपके पति, आपके अलावा किसी और के लिए अपने को संवारकर रखना चाहते हैं.

– रोज़ ऑफिस के नाम से देर से घर आना और पूछने पर हर रोज़ कोई न कोई बहाना बनाना या फिर ग़ुस्सा करना भी इस बात की ओर इशारा करता है कि आपके पति की ज़िंदगी में किसी और ने जगह बना ली है.

– अक्सर घर से बाहर खाना या काम से शहर से बाहर जाना या घर से जल्दी से जल्दी निकल जाने का मतलब है कि उन्हें किसी और से मिलने की उत्सुकता है.

– किसी और से प्यार होने पर सबसे ज़्यादा असर सेक्स संबंधों पर पड़ता है. पत्नी के साथ संबंध बनाने में वह कम दिलचस्पी दिखाने लगते हैं और पत्नी के कहने पर ‘थका हुआ हूं’ कह मुंह फेरकर सो जाते हैं.

– यही नहीं, अगर पति पत्नी के मायके जाने में रुचि दिखाए और पहले की तरह यह न कहे कि वह उसके बिना नहीं रह सकता या परेशानी हो जाएगी, तो समझ लें कि उनकी ज़िंदगी में कोई और आ चुका है.

– बेवजह पति चिड़चिड़े रहने लगें या अधिक चुप रहने लगें और आपसे बात करने में कतराएं, तो भी संभव है कि उन्हें किसी से प्यार हो गया है.

ये तमाम बातें इस बात का संकेत हैं कि पति महाशय किसी और को अपना दिल दे बैठे हैं. ऐसे में आपकी थोड़ी-सी समझदारी इन परिस्थितियों को बदलने में सार्थक सिद्ध हो सकती है.

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एक पहलू यह भी…

बहुत कम उम्र में शादी हो जाने की वजह से भी दूसरी स्त्री से संबंध बन जाता है. घरवालों और समाज की वजह से अक्सर कुछ लोगों की शादी बहुत कम उम्र में हो जाती है. नौकरी हुई नहीं कि शादी कर दी जाती है. ऐसे लोग जब ज़िंदगी के अगले पड़ाव पर पहुंचते हैं, तो उन्हें ये लगने लगता है कि उन्होंने काफ़ी कुछ मिस कर दिया है. ऐसे में जब उनकी मुलाक़ात किसी ऐसी महिला से होती है, जो उनकी हर बात को पसंद करती है, तो उनके बीच प्यार पनप जाता है, क्योंकि वह उसे पत्नी से ज़्यादा इंपोर्टेंस देती है.

समाधान के लिए निम्न बातों पर ग़ौर करें…

– बेशक पति की बेवफ़ाई के बाद आप उनके साथ रहना नहीं चाहतीं, लेकिन क्या आवेश में आकर तलाक़ जैसा कठिन निर्णय आपके परिवार के हित में होगा, ये निर्णय आपको करना है. लेकिन याद रखें इस निर्णय से जहां दो दिल अलग होंगे, वहीं बच्चों की स्वाभाविक परवरिश भी प्रभावित होगी.

– किसी के प्रति आकर्षण होना एक अलग चीज़ है, लेकिन उस आकर्षण के चलते अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को ताक पर रख देना बिल्कुल ग़लत है.

– हालांकि किसी भी बात को सही-ग़लत ठहराने से पहले ये जान लेना बहुत ज़रूरी है कि उस बात की वजह क्या है.

– एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर होने के बहुत से कारण हो सकते हैं, लेकिन अगर समय रहते उन कारणों को जान लिया जाए, तो इस मुसीबत से पार पाया जा सकता है.

– ज़्यादातर मामलों में एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर शादीशुदा ज़िंदगी में कलह होने की वजह से होते हैं, इसलिए घर में शांति का वातावरण और आपसी प्यार को बनाए रखना बेहद ज़रूरी है.

– सेक्सुअल संतुष्टि न मिलने पर भी पति का झुकाव परस्त्री के प्रति हो जाता है. तो क्यों न उनकी चाहतों को समझा जाए और अपनी इच्छाओं के बारे में भी बताया जाए.

– जहां पति और पत्नी के बीच एक-दूसरे की मांगों को पूरा करने में असमर्थता आ जाती है, वहां उनके रिश्ते में प्यार ख़त्म हो जाता है. अतः भरसक कोशिश करें कि ऐसी स्थिति ही न बनने पाए.

– रिश्तों में खटास आने पर ही पुरुष दूसरी स्त्री की ओर आकर्षित होता है. अगर कोई पुरुष अपनी पत्नी से ख़ुश नहीं है, तो उसकी आंखें किसी दूसरे पर हमेशा टिकी रहेंगी, जो उसे समझ सके या उतना प्यार दे सके. इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि पति की भावनाओं को समझें और उन्हें भी अपने जज़्बात से रू-ब-रू कराएं. उन पर इतना प्यार लुटाएं कि वे आपके सिवा किसी और के बारे में सोच ही न सके.

राह नहीं है आसान

वजह चाहे जो भी हो, पर अलग हो जाना इसका समाधान नहीं है. पति को ऐसे संबंध के परिणामों के बारे में झगड़े या धमकी से नहीं, प्यार से ही समझाएं. अपनी ग़लतियों का अवलोकन करें कि आख़िर पति क्यों आपसे दूर रहने पर मजबूर हुए. उस दूसरी महिला के बारे में जानकारी हासिल करें और हो सके, तो उससे मिलकर उसे भी समझाएं.

पति का किसी और स्त्री से प्यार हो जाने की बात स्वीकारना या सहना आसान बात नहीं है. ऐसे में गुस्से में आप तुरंत उन्हें छोड़ने के लिए भी तैयार हो जाएंगी, पर यह भी जान लें कि ऐसे संबंध बहुत लंबे समय तक नहीं चलते हैं. अतः बेहतर होगा कि धैर्य से काम लें. जब दूसरी स्त्री एक सोशल सिक्योरिटी और रिश्ते को नाम देने की मांग करेगी, तो पति अपने परिवार की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने से पहले कई बार सोचेंगे. उस समय आपको उनका साथ देना होगा न कि ताने. अपने रिश्ते की मज़बूती को थामे आपको ही उस राह पर चलना होगा, जो आसान बिल्कुल नहीं है, पर यक़ीन मानिए मंज़िल मिलेगी ही. ध्यान रहे, अपने प्यार व विश्‍वास से ही आप अपने पति को वापस पा सकेंगी.

– सुमन बाजपेयी

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