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समझदारी की सेल्फी से सुधारें बिगड़े रिश्तों की तस्वीर (Smart Ways To Get Your Relationship On Track)

Relationship On Track

चल बेटा सेल्फी ले ले रे… जी हां, ज़माना सेल्फी का है. हम ख़ुद को कैमरे में कैद करने का एक मौक़ा भी नहीं चूकते. हमारी पूरी कोशिश होती है कि हर तस्वीर में हम अच्छे दिखें. तो चलिए, हम भी आपसे सेल्फी लेने के लिए कहते हैं, पर यह सेल्फी होगी आपके व्यवहार की. कितना अच्छा होता अगर कोई ऐसा कैमरा भी होता, जो हमारी सेल्फी में हमारी अंदरूनी ख़ूबसूरती दिखाता या हमारी गलतियां भी दिखाता. आप शायद समझ ही गए होंगे कि यहां बात हो रही है आत्मविश्‍लेषण की.

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क्यों ज़रूरी है समझदारी की सेल्फी?

अमूमन हमारे जितने मन-मुटाव होते हैं, अधिकतर में हम दूसरों पर सारा दोष मढ़ कर बड़ी आसानी से आगे बढ़ जाते हैं. लेकिन आगे बढ़ते समय हम यह भूल जाते हैं कि कई सारे रिश्ते पीछे ही छूट गए. हमें ऐसा लगता है कि हमें इन रिश्तों की, सगे-संबंधियों की कोई ज़रूरत ही नहीं, पर क्या आप जानते हैं कि आपकी यही सोच आपकी सबसे बड़ी ग़लती है. और ना स़िर्फ ग़लती है, बल्कि समाज के लिए यह सोच बहुत बड़ा ख़तरा भी है, क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है.

रिश्तों से अपने आपको अलग कर लेना या उनसे दूर जाना हमारे सामाजिक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. तो यह तो तय है कि रिश्तों को सहेजना बहुत ही आवश्यक है, तो क्यों ना रिश्तों की इस तस्वीर को सुंदर बनाएं.

आजकल किताबी ज्ञान की हम में कोई कमी नहीं, पर याद रखिए किताबें समझदारी नहीं बांटतीं, इसके लिए हमारे अंतर्मन का जागृत होना ज़रूरी है. लेकिन इसे जागृत किया कैसे जाए, यह बहुत आसान नहीं, पर हां मुश्किल भी नहीं. इसके लिए आपको किसी और को नहीं, बल्कि ख़ुद को पहचानने की ज़रूरत है. साथ ही यह कोई एक दिवसीय कार्यक्रम ना होकर निरंतर प्रक्रिया है. आपको बस, करना इतना है कि रोज़ अपनी एक सेल्फी
खींचनी है और यह सेल्फी आप कैसे और कौन-से कैमरे से खीचेंगे, यह हम आपको बताएंगे.

कैसे खींचें समझदारी से सेल्फी?

सच्चाई की फ्लैश लाइट चमकाएं

सच्चाई बहुत ज़रूरी है, क्योंकि झूठ आपको कमज़ोर बनाता है. झूठा अहंकार आपको बार-बार झूठ बोलने पर मजबूर करेगा. इसलिए जब भी किसी से बात करें, तो अपना सच के फ्लैशवाला कैमरा साथ ले जाना ना भूलें. सच बोलना आपको ताक़त देगा. जब कभी आप झूठ का सहारा लेने की कोशिश करें, तो अपने आपको रोक लें. यह स़िर्फ आप कर सकते हैं, क्योंकि केवल आप ही जानते हैं कि आप कब झूठ का सहारा ले रहे हैं. इसके लिए आप ख़ुद को एक छोटी-सी चुनौती भी दे सकते हैं. सोने से पहले किसी काग़ज़ पर दिनभर में आपके द्वारा बोले छोटे से छोटे झूठ की ़फेहरिस्त बनाएं और अगले दिन पिछले दिन से कम झूठ बोलने की कोशिश करें.

अपनी तस्वीर में लाएं अच्छाई की ब्राइटनेस

बेवजह की जलन, दूसरों की नाकामयाबी में ख़ुश होना… ये सभी चीज़ें आपकी अच्छाई को ख़त्म करती है. इस तरह की भावनाएं आपके समझदारी के आईने को धूमिल कर सकती हैं. ये सभी भावनाएं ना स़िर्फ आपके रिश्ते को प्रभावित करती हैं, बल्कि आपके
सोचने-समझने की क्षमता को कमज़ोर करती हैं. जब आपकी अच्छाई चमकेगी, तो आपके अंतर्मन की तस्वीर भी उजली-उजली होगी.
इसके लिए भी एक काम किया जा सकता है. रोज़ कम से कम एक अच्छा काम करें, जैसे- बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद.

दूर करें शिकायतों की उदासी

अपनी सेल्फी में यह ज़रूर ध्यान से देखें कि कहीं आप हमेशा जीवन से शिकायतें तो नहीं करते रहते. जिसे अपने जीवन से हमेशा स़िर्फ शिकायतें ही होती हैं, उसका ख़ुश रहना असंभव है. शिकायतों पर ध्यान केंद्रित करने से अच्छा है कि आप उन उपायों पर ध्यान दें, जिनसे शिकायतों को दूर किया जा सकता है. इसके अलावा यह ध्यान में रखें कि कुछ भी परफेक्ट नहीं होता. अपने जीवन को कुछ कमियों के साथ स्वीकार करें.

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खींचें हाई डेफिनेशन तस्वीर

जब समझदारी के कैमरे से सेल्फी लेनी है, तो कोशिश करें कि आपकी तस्वीर हाई डेफिनेशन हो यानी छोटी-छोटी बातों में ना फंसें. यही छोटी बातें हमें छोटा बना देती हैं. अपने जीने के स्तर को ऊंचा उठाएं. झगड़े या छोटी-मोटी नोंक-झोंक, मान-अपमान इन चीज़ों से ऊपर उठकर सोचें. अगर यह छोटी बातें तस्वीर से चली जाएं, तो ख़ुशियों के रंग निखरकर आएंगे.

कहीं तस्वीर में शिकन ना आ जाए

अगर आप जल्दी किसी को माफ़ नहीं कर सकते हैं या किसी बुरी घटना को जल्दी भूल नहीं सकते, तो संभल जाएं, आपकी सेल्फी की ख़ूबसूरती ख़तरे में है. तो करना बस इतना है कि जल्दी से अपनी समझदारी के कैमरे को चार्ज करिए और अपने चेहरे पर आई इस शिकन को मिटा दीजिए. दरअसल, दूसरों को माफ़ करना और कुछ क़िस्से-कहानियों को भूल जाना किसी और के लिए नहीं, बल्कि आपके अपने मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है. अंग्रेज़ी में कहते हैं ना ‘फॉरगेट एंड फॉरगिव’ ये चीज़ें ना स़िर्फ आपको ऊपर उठाती हैं, बल्कि कई सारे रिश्तों को फिर से संवारने का एक और मौक़ा भी देती हैं.

माफ़ी मांग लें

जिस तरह माफ़ करके आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है, उसी तरह अपनी ग़लती होने पर या कभी-कभी स़िर्फ परिस्थितियों को संभालने के लिए माफ़ी मांगना ज़रूरी है. माफी मांगने को अपने अहम् के साथ ना जोड़ें यानी माफ़ी मांगने से आप छोटे नहीं होते.

संवार लें बिगड़ी हुई तस्वीर

अगर इतनी जद्दोज़ेहद के बाद भी सेल्फी बिगड़ ही जाए, तो उसे वैसा ही मत छोड़ें, बल्कि अपनी समझदारी से उसे ठीक कर लें. कई बार ऐसा होता है कि लाख संभालने के बावजूद कुछ रिश्ते हाथ से फिसलने लगते हैं. ना चाहते हुए भी हममें वह चीज़ें आ जाती हैं, जो हमारे व्यक्तित्व को ख़राब करती हैं. अगर ऐसा होता भी है, तो वहीं पर रुककर पहले आत्मविश्‍लेषण करें. अपने स्वभाव की बुरी आदतों को दूर करने की कोशिश करें और फिर आगे बढ़ें. इस सेल्फी में आपको ख़ूबसूरत तो दिखना है, पर बाहरी मेकअप से नहीं, बल्कि प्राकृतिक निखार से. याद रखिए कि आपको तस्वीर में सुंदर कैमरा या तस्वीर खींचनेवाला नहीं बनाता, बल्कि आप ख़ुुद बनाते हैं. कहने का तात्पर्य यह है कि जब आप अपने जीवन में ख़ुश ना हों, तो किसी और पर दोष मढ़ने से पहले एक बार ख़ुद को परख लें.

– विजया कठाले निबंधे

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बच्चों को सिखाएं फैमिली बॉन्डिंग (Educate your child on family bonding)

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न्यूक्लियर फैमिली के बढ़ते चलन के कारण पारिवारिक रिश्तों का दायरा सिकुड़ता जा रहा है. आजकल परिवार स़िर्फ मां-बाप और बच्चों तक ही सिमट कर रह गए हैं. ख़ासतौर पर बच्चों को मां-बाप को छोड़कर अन्य क़रीबी रिश्तों की जानकारी तक नहीं होती. बच्चों को रिश्तों का महत्व समझाने और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ जोड़े रखने के लिए पैरेंट्स को क्या करना चाहिए? 

दादा-दादी, नाना-नानी, चाची, बुआ, मौसी जैसे रिश्ते अब बीते व़क़्त की बात बनकर रह गए हैं. बच्चों की नज़र में अब ये रिश्ते अजनबी बनते जा रहे हैं. बहुत से घरों में तो बच्चे इन रिश्तों के नाम से भी वाकिफ़ नहीं. ऐसे परिवेश में रहने वाले बच्चे रिश्तों में प्यार, लगाव व अपनेपन को बिल्कुल भी समझ नहीं पाते. ऐसी स्थिति से बचने के लिए और बच्चों को पारिवारिक रिश्तों का महत्व समझाने के लिए पैरेंट्स को क्या करना चाहिए? आइए, जानने की कोशिश करते हैं.

छोटी उम्र से ही करें शुरुआत

* रिश्ते-नाते जैसी नाज़ुक बातों का महत्व एक ही दिन में नहीं समझाया जा सकता. अत: बचपन से ही बच्चे को इनके बारे में बताना शुरू कर दें. * बच्चे को रिश्ते-नातों की दुनिया में प्रवेश कराने के लिए चार साल का उम्र सही होती है, क्योंकि इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते बच्चे अपनों व गैरों के बीच फ़र्क़ समझने लगते हैं और रिश्तेदारों को भी पहचानने लगते हैं. * साथ ही उनमें हर व्यक्तिकी पर्सनैलिटी को आइडेंटिफ़ाई करने की क्षमता भी विकसित हो जाती है.
* यदि इस उम्र से ही बच्चे को अलग-अलग रिश्ते के बारे में समझाया जाए तो वह उनकी तस्वीर दिमाग़ में उतार लेते हैं.
* अत: इसी उम्र से बच्चे को रिश्तेदारों के क़रीब लाने की कोशिश शुरू कर दें.
* उसे बात-बात में परिवार के अन्य सदस्यों के बारे में बताती रहें.
* उसे यह भी समझाने की कोशिश करें कि पापा-मम्मी के अलावा भी कई लोग हैं, जो उसकी केयर करते हैं और उसे प्यार करते हैं. आपकी कोशिश अवश्य रंग लाएगी.

रिलेशनशिप मेंटेन करें

* बच्चे में क़रीबी रिश्तेदारों के प्रति प्यार व अपनेपन का भाव पैदा करने के लिए समय-समय पर उनसे मिलते-जुलते रहना बहुत ज़रूरी है.
* इसके लिए यदि रिश्तेदार पास में रहते हैं, तो ह़फ़्ते में कम से कम एक बार बच्चे को साथ लेकर उनसे मिलने जाएं.
* यदि चचेरे भाई-बहन पास में रहते हैं तो उन्हें एक साथ पिकनिक पर ले जाएं.
* इससे बच्चे एक-दूसरे की कंपनी एंजॉय भी करेंगे और उनके बीच आपसी बॉन्डिंग भी बढ़ेगी.
* यदि रिश्तेदार दूर रहते हैं तो बच्चे को उनसे फ़ोन पर बात करने के लिए प्रोत्साहित करें.
* इसके अलावा रात में सोने से पहले बच्चे को किसी न किसी तरह उनकी याद दिलाते रहें, जैसे- उससे कहें, “ सोने से पहले दादा-दादी को याद करके गुड नाइट कहो” या “आज पिंकी ने नई डॉल ख़रीदी है, अगली बार जब उसके घर जाओ तो उसके साथ खेलना.” इस तरह बच्चा हर रिश्ते से जुड़ा रहेगा.

कहानी को बनाएं माध्यम

* बच्चों को कहानियां सुनना बहुत अच्छा लगता है और उन्हें कहानियां ज़्यादा दिनों तक याद भी रहती हैं.
* अतः बच्चे को स्टोरी के रूप में रिश्ते समझाने की कोशिश करें, जैसे- जब दादाजी पहली बार स्कूल गए तब क्या हुआ? या उसके कज़िन का निकनेम कैसे रखा गया?
* इस तरह की बातें बच्चे को दिलचस्प भी लगेंगी और उसे ज़्यादा दिनों तक याद भी रहेंगी.
* स्टोरी सुनाने का समय फ़िक्स रखें. साथ ही जो स्टोरी आपने सुनाई है, वही कहानी कभी उसे सुनाने के लिए कहें.
* उदाहरण के लिए- बच्चे से कहें कि दादाजी या बुआजी वाली कहानी कौन सुनाएगा? इस तरह बच्चों का मनोरंजन भी होगा और उन्हें रिश्ते भी याद रहेंगे.

फैमिली एलबम बनाएं

* परिवार के सभी सदस्यों के फ़ोटोग्रा़फ़्स कलैक्ट करके फैमिली एलबम बनाएं तथा समय-समय पर बच्चों को पूरे परिवार का एलबम दिखाती रहें. * साथ ही उन्हें हर सदस्य के बारे में दिलचस्प बातें भी बताती रहें.
* इससे बच्चे रिश्तेदारों को चेहरे से पहचान लेंगे और अचानक मिलने पर वे अजनबियों की तरह व्यवहार नहीं करेंगे.
* इसके अलावा बच्चों को अपनी पुरानी फ़ोटो भी दिखाएं और बताएं कि पापा जब छोटे थे तो ऐसे दिखते थे या मम्मी नानी की गोद में थी तो कैसी लगती थी? इत्यादि.

गेट-टुगेदर आयोजित करें

* फैमिली गेट टुगेदर का कोई मौक़ा हाथ से न जाने दें.
* छुट्टियों में बच्चे को रिश्तेदारों के यहां घुमाने ले जाएं या रिश्तेदारों को अपने घर बुलाएं.
* इससे बच्चे का समय भी अच्छे से कट जाएगा और वो रिश्तेदारों से घुल-मिल भी जाएगा.
* हो सके तो बच्चे के चचेरे भाई-बहन को बुलाकर स़िर्फ उनके लिए कज़िन कैम्प रखें, जिसमें स़िर्फ वे लोग ही शामिल हों.
* इस कैम्प में बच्चों को पूरी आज़ादी दें. वे जिस तरह से रहना चाहें उन्हें रहने दें.
* इसके अलावा उन्हें मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित करें, जैसे- टेबल पर खाना लगाना, पानी देना, एक-दूसरे की मदद करना आदि.
* ये बातें दिखने में भले ही छोटी-छोटी सी लगें, लेकिन भविष्य में बच्चों को आपसी रिश्ते बनाने में बहुत मददगार साबित होंगी.

– योगेश शर्मा