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मेडिकल स्टोर से दवाएं ख़रीदते समय अक्सर हम लापरवाही बरतते हैं, जो कई बार ख़तरनाक भी साबित हो सकती है. दवाई लेते समय हम उसकी एक्सपायरी डेट और कीमत तो देखते हैं, लेकिन कई ज़रूरी बातों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम की वजह बन सकता है. इसलिए ज़रूरी है कुछ एहतियात बरतना, ताकि दवाएं आपको बीमारी से राहत दें, ना कि आपकी हेल्थ प्रॉब्लम्स की वजह बनें.

जानें दवा के रैपर पर बने निशान का मत

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दवा के रैपर पर बने निशान दवा के बारे में महत्वपूर्ण कई जानकारी देते हैं और बताते हैं कि कहीं वो दवाएं नशीली तो नहीं हैं. आइए दवा के रैपर पर बने ऐसे ही कुछ निशानों के बारे में जानते हैं, ताकि अगली बार आप कोई दवा खरीदने जाएं, तो इन निशानों को देखें, उसका मतलब समझें और तभी वो दवा खरीदें.

XRx का निशान: आमतौर पर मेंटल डिस्ऑर्डर्स के इलाज में जो मेडिसिन उपयोग हाती हैं, उन पर XRx लिखा होता है. ये दवाएं नशीली होती हैं. ध्यान रखें कि बिना प्रिस्क्रिप्शन के कोई भी मेडिकल स्टोर ये दवाएं नहीं बेच सकता है. साथ ही दवा बेचने पर उसे प्रिस्क्रिप्शन की कॉपी दो साल तक संभालकर रखनी होती है. इसलिए आपका केमिस्ट आपको इस निशान वाली कोई दवा पकड़ाए, तो सावधान रहें.

NRx का निशान: ये दवाएं डिप्रेशन, एंजाइटी या किसी बुरी लत को दूर करने के ट्रीटमेंट में इस्तेमाल होती हैं. ये दवाएं बिना डॉक्टर के सलाह के ना ली जा सकती हैं और ना ही बिना प्रिस्क्रिप्शन के बेची जा सकती हैं. तो ऐसी दवाओं से भी बचें.

Rx का निशान: ये दवाएं भी डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए. हालांकि ये सामान्य दवाएं होती हैं, लेकिन डॉक्टरी सलाह के बिना इस दवा का सेवन ख़तरनाक हो सकता है.

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रेड लाइन: रैपर पर बनी रेड लाइन यानी लाल रंग की पट्टी वाली दवाएं भी डॉक्टर की सलाह से ही लें. आमतौर पर यह पट्टी एंटीबायोटिक दवाइयों पर होती है. इन्हें खरीदने से पहले भी डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें.

जब मंगवाएं ऑनलाइन दवाएं

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आजकल ऑनलाइन दवाएं भी उपलब्ध हैं, जो घर बैठे आपको दवाएं मुहैया कराते हैं. ऑनलाइन दवाएं मंगवाने पर डिस्काउंट इतना ज़्यादा ऑफर किया जाता है कि लोग बिना ज़्यादा सोचे-समझे दवाएं ऑर्डर कर देते हैं, लेकिन ऑनलाइन दवाएं मंगवाते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है.

  • ध्यान रखें कि किसी भी विश्‍वसनीय वेबसाइट से जब आप दवाएं मंगवाएंगे, तो आपको डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन को अपलोड करने के लिए ज़रूर कहा जाएगा. अगर कोई वेबसाइड ऐसा नहीं करती, तो वहां से दवा मंगवाने से बचें.
  • आप वेबसाइट से उनके लाइसेंस के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. वेबसाइट के पास दवा बेचने का लाइसेंस है या नहीं.
  • ऑनलाइन दवा मंगवाते हुए उनकी टर्म्स एंड कंडीशंस, रिटर्न पॉलिसी भी ज़रूर पढ़ें. अगर रिटर्न पॉलिसी नहीं है तो समझ जाएं कुछ गड़बड़ है.
  • दवा ऑर्डर करने से पहले वेबसाइट के कस्टमर केयर से बात या मेल करें, ताकि अपनी सभी शंकाओं को दूर किया जा सके.
  • जब दवाएं आपके घर आएंगी, तो साथ में बिल जरूर आएगा, जिस पर सप्लायर का लाइसेंस नंबर लिखा होना चाहिए. अगर दवा विक्रय लाइसेंस नंबर नहीं है, तो समझ लीजिए दवाएं ऑथेंटिक नहीं हैं.
  • इसके अलावा दवाओं की एक्सपायरी ज़रूर चेक करें.
  • दवा कहीं से कटी-फटी ना हो और ना ही इस पर कोई अलग से लेबल चिपका हो.
  • ध्यान दें कि आपने जो मेडिसिन ऑर्डर की थी, क्या वही आई हैं या फिर उनका सब्सीट्यूट आया है. आमतौर पर ऑथेंटिक वेबसाइट डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना जेनरिक दवाएं नहीं देती.
  • दवाएं ऑनलाइन मंगवाने से पहले अपने डॉक्टर से भी कंसल्ट कर लें.
  • ये भी ध्यान रखें कि कहीं वेबसाइट आपकी पर्सनल इंर्फोमेशन तो डिस्कलोज़ नहीं कर रही.
  • यदि ख़रीदी गई दवा असरहीन पाई जाती है, तो इसके लिए आप अपने राज्य के ड्रग कंट्रोलर से शिकायत कर सकते हैं.

दवा खरीदते समय इन बातों का भी रखें ख्याल

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एक हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार, हमारे देश में आज भी 46 प्रतिशत लोग बिना डाक्टरी सलाह के ओवर द काउंटर मेडिसिन्स लेते हैं. ये या तो स्वयं चिकित्सा करते हैं या केमिस्ट को अपनी हेल्थ प्रॉब्लम बताकर उसकी सलाह पर ही दवाएं ले लेते हैं. इतना ही नहीं 30 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो डॉक्टर को दिखाते तो हैं, लेकिन वे पूरा कोर्स नहीं करते हैं और दोबारा वही तकलीफ होने पर पहले वाली दवा से ही काम चला लेते हैं. लेकिन हेल्थ और दवाओं को लेकर ये लापरवाही ठीक नहीं. बेहतर होगा कि दवा ख़रीदते या लेते समय कुछ बातों को ध्यान रखें.

  • दूसरों के पर्चे की दवा का इस्तेमाल न करें. कई बार इसके गंभीर साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं. बीमारी भले ही एक जैसी हो, उसके लिए एक ही दवा का इस्तेमाल करना ख़तरनाक हो सकता है.
  • अधूरा इलाज ख़तरनाक होता है जैसे ब्लड प्रेशर की दवा बंद करने पर ब्लड प्रेशर दोबारा बढ़ सकता है. इसी प्रकार डायबिटीज़, टीबी, अस्थमा आदि बीमारियों में भी दवा का कोर्स पूरा न करना रिस्की हो सकता है.
  • हमेशा रजिस्टर्ड मेडिकल स्टोर से ही दवा ख़रीदें, खरीदी गयी दवा की रशीद अवश्य लें.
  • दवा ख़रीदते समय दवा की एक्सपायरी डेट ज़रूर देख लें.
  • मेडिकल स्टोर वाला यदि डॉक्टर द्वारा लिखी गयी दवा के बजाय दूसरी दवा दे रहा है, तो बिना डाक्टर की सलाह के वो दवा न लें. पर्चे पर लिखे अनुसार ही दवा की खुराक लें.
  • हर दवा को फ्रिज में रखने की ज़रूरत नहीं होती, इसलिए जब तक डॉक्टर न कहें, दवाओं को फ्रिज में रखने से बचें.

ठंड हवाओं ने दस्तक दे दी है. मौसम ने मिज़ाज बदल दिया है. और मौसम के बदलते सेहत भी बिगड़ने लगती है और सर्दी-ज़ुकाम की समस्या भी शुरू हो जाती है. सर्द के मौसम में आपको सर्दी जुकाम परेशान न करे, इसलिए हम लाये हैं सर्दी से निजात पाने के घरेलू नुस्ख़े.

हॉट शॉवर: सर्दी-ज़ुकाम होने पर आलस आने लगता है और आप बिस्तर पर ही पड़े रहते हैं. 12 घंटे में अगर आप सर्दी से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो सुबह की शुरुआत हॉट शॉवर से करें. सुबह उठते ही सबसे पहले गरम पानी से नहाएं.

हल्दी वाला दूध या जूस: सर्दी होने पर भूख नहीं लगती. नाश्ता न करने से ज़ुकाम के कीटाणु और ज़्यादा सक्रिय हो जाते हैं. अगर आप ज़ुकाम से जल्द निजात पाना चाहते हैं, तो सुबह नाश्ता ज़रूर करें. हो सके तो नाश्ते में हल्दी वाला दूध पीएं. दूध नहीं पीना चाहते, तो संतरे का जूस पीएं. संतरे में विटामिन सी पाया जाता है, जो सर्दी दूर करने के लिए बहुत उपयोगी होता है. विटामिन सी आपके इम्यून सिस्टम को भी मज़बूत करता है.

Home Remedies For Cold And Cough

स्टीम लें: ज़ुकाम होने पर नाक बंद हो जाती है. ऐसे में सांस लेने में दिक्क़त होती है. बंद नाक खोलने के लिए कई बार आप दवाइयों का भी सहारा लेते हैं, लेकिन दावइयों से बेहतर है स्टीम (भाप) लेना. बंद नाक के लिए ये बहुत असरकारक उपाय है. इससे कफ़ बाहर निकलता है और आपको राहत मिलती है. जल्द राहत के लिए दिन में कई बार स्टीम लें.

एक्सरसाइज़: सर्दी होने पर पूरी तरह से शरीर को शिथिल न होने दें. अपना काम करते रहें. जल्दी राहत पाने के लिए एक्सरसाइज़ करें. इससे आपकी बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा, जिससे शरीर में गर्मी बढ़ेगी और आपको ज़ुकाम से राहत मिलेगी. एक्सरसाइज़ के अलावा बेड से उठकर कुछ मिनट टहलें.

गरम सूप पीएं: कोल्ड से राहत पाने के लिए गरम सूप पीएं. इस बात का ध्यान रखें कि बाज़ार में मिलने वाले सूप की बजाय घर में ही सूप बनाएं और गरम-गरम पीएं. दिन में कई बार सूप पीने पर सर्दी से राहत मिलेगी.

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हर्बल टी का सेवन करें: मिनटों में अगर आप कोल्ड से राहत पाना चाहते हैं, तो साधारण चाय की जगह हर्बल टी का सेवन करें. इसमें अदरक, कालीमिर्च, तुलसी, दालचीनी आदि का मिश्रण होता है, जिससे आपको राहत मिलती है.

होममेड कफ़ टॉफी: सर्दी होने पर गले में खरास होने लगती है. ऐसे में आमतौर पर आप बाज़ार में मिलने वाली कफ़ टॉफियों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे स़िर्फ थोड़े समय के लिए राहत मिलती है. अतः घर में ही कफ़ टॉफी बनाकर खाएं. इसके लिए अदरक को कूटकर उसका रस निकाल लें. कालीमिर्च का पाउडर बनाकर भून लें. अब अदरक के रस में कालीमिर्च पाउडर, थोड़ी-सी हल्दी और शहद मिलाएं और इस मिश्रण से छोटी-छोटी गोलियां बनाकर किसी डिब्बे में भरकर रखें. ज़रूरत पड़ने पर इनका सेवन करें. ये बहुत ही असरकारक होती हैं.

स्पाइसी करी का सेवन: रात में डिनर में सादी दाल की बजाय मसाले वाली कोई सब्ज़ी बनाएं. इसमें अदरक, लहसुन के पेस्ट के साथ ही सभी गरम मसाले मिलाएं. गरम-गरम करी खाएं. आप अगर नॉनवेज के शौक़ीन हैं, तो वो भी खा सकते हैं. गरम मसाले शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं.

अगर मौसम बदलते ही बार-बार आपको सर्दी की समस्या हो रही है, तो घरेलू उपचार के साथ ही डॉक्टर से संपर्क करें. हो सकता है कि आपको साइनेस की समस्या हो. इसके लिए ईएनटी स्पेशलिस्ट को दिखाएं.

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सुबह-सुबह खुली हवा में 30 से 45 मिनट की सैर आपको बीमारियों से दूर रखती है. बारिश में अगर आप कोल्ड इंफेक्शन से दूर रहना चाहते हैं, तो रोज़ाना खुली हवा में चहलक़दमी करना न भूलें.

होम रेमेडीज़

  • दिन में दो बार नमक के पानी से गरारे करें. नमक में एंटीवायरल गुण होते हैं. जो सर्दी से राहत दिलाता है.
  • अदरक को कूटकर पानी में उबाल लें. इसमें शहद मिलाकर पीएं.
  • लहसुन को दरदरा पीसकर शहद मिलाकर खाएं. इसके सेवन से जुकाम का वायरस खत्म हो जाता है.
  • ग्रीन टी पीएं. शहद मिलाकर पीने से ज़्यादा फायदा होगा.
  • शहद में दालचीनी पाउडर मिलाकर एक-एक चम्मच दिन में दो बार लें.
  • विटामिन-सी और विटामिन-डी का सप्लीमेंट ज़रूर लें. ये इम्युनिटी बढ़ाते हैं और सर्दी जुकाम से बचाते हैं.

क्या न करें?

  • अगर आपको सिगरेट की बुरी लत है, तो सर्दी होने पर न पीएं. सिगरेट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम कर देती है.
  • ज़ुकाम होने पर बॉडी स्प्रे से दूर रहें. डियो का इस्तेमाल न करें.
  • ऑफिस जाने के लिए ख़ुद ही कार ड्राइव न करें.
  • कुकिंग न करें. सब्ज़ी बनाते समय तड़का लगाने पर आपको दिक्क़त हो सकती है, इससे लगातार छींक आने लगती है.
  • पहले ही दिन दवाई खाने से बचें.
  • पंखे के नीचे सोने से बचें. इससे नाक और बंद हो जाती है.
  • अगर आप पूरे दिन घर पर हैं, तो दोपहर में सोने की ग़लती न करें. हां, थोड़ा आराम कर सकते हैं.
  • एसी से दूर रहें. बहुत ज़्यादा और लगातार एसी में रहने से ज़ुकाम जल्दी ठीक नहीं होता.
  • ज़ुकाम होने पर हो सके तो पूरा दिन घर पर रहें. बाहर निकलने से मिट्टी के कण और धुएं से आपकी समस्या और बढ़ सकती है.
  • ज़ुकाम बढ़ने पर लापरवाही न करें. डॉक्टर से संपर्क करें और सही इलाज करवाएं.

हेल्दी रहना जितना चुनौतीपूर्ण लगता है, ये उतना है नहीं, क्योंकि हेल्दी और फिट रहने के लिए हम कुछ ज़्यादा ही सोचते हैं और कर कुछ नहीं पाते, लेकिन फिटनेस और हेल्थ के लिए कुछ बड़ा करने की नहीं, छोटे-छोटे स्येप्स लेने की ज़रूरत है, जो आपके देंगे बड़ा फ़ायदा… आइए, जानें क्या हैं वो टिप्स और स्टेप्स?

– सबसे पहले, अपने दिन की शुरूआत बेहतर करें. पॉज़िटिव माइंड के साथ उठे और अपनी दिनचर्या को हेल्दी रखें.
– सुबह समय से उठने का नियम बनाएं. 
– सुबह उठते ही एक या दो ग्लास गुनगुना पानी पीएं.
– हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़, योग या वॉक से करें हेल्दी शुरुआत. रोज़ाना समय निकाल कर थोड़ी-सी फिज़िकल एक्टिविटी ज़रूर करें. दिन भर चुस्ती-स्फुर्ति के लिए हल्का व्यायाम बेहद ज़रूरी है.
– रोज़ाना कम से कम 8 ग्लास पानी ज़रूर पीएं. 
– चेहरे पर स्माइल रखें और खुद को मोटिवेट करें कि हां, आज का दिन अच्छा रहेगा और हम ख़ुश रहेंगे. 
– इसके बाद नंबर आता है हेल्दी ब्रेकफास्ट का. पौष्टिक नाश्ता करें, क्योंकि ऊर्जा को बढ़ाने और नए दिन की शुरुआत के लिए सबसे ज़रूरी है पौष्टिक नाश्ता, जिससे शरीर को पूरे दिन की ऊर्जा मिले.
– रिसर्च बताते हैं कि हेल्दी नाश्ता आपको डायबिटीज़ के ख़तरे से बचाता है. जो लोग नाश्ता करते उन्हें डायबिटीज़ का ख़तरा नाश्ता ना करनेवालों की तुलना में कम रहता है.
– इसके अलावा ब्रेकफ़ास्ट आपको मोटापे से बचाता है. जो लोग नाश्ता नहीं करते उनकी वेस्ट लाइन नाश्ता करनेवालों की तुलना में अधिक होती है. 
– भले ही लंच ठीक से ना करें लेकिन नाश्ता हेल्दी करेंगे तो फ़ैट्स से बचेंगे.
– बहुत ज़्यादा नमक और मीठा खाने से बचें.
– इसी तरह बहुत ज्यादा चाय-कॉफी या अल्कोहल के सेवन से बचें. 
– ग्रीन टी को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. 
– मौसमी फल और सब्ज़ियां ज़रूर खाएं. हर रंग के फल व सब्ज़ियां खाएं.

Daily Health Tip Ideas


– केले में फाइबर और पेक्टिन भरपूर मात्रा में होता है, जो आंतों के स्वास्थ्य के लिएबहुत फायदेमंद होता है.
– रिसर्च बताते हैं कि पपीता खाने से डायजेस्टिव सिस्टम में सुधार होता है. पपीते में विटामिन ए, बी और सी और कई तरह के एन्ज़ाइम्स होते हैं, जो खाने को डायजेस्ट करने में मदद करते हैं. 
– सेब में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जो पेट के स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं. सेब फाइबर का अच्छा स्रोत भी है और गुड बैक्टीरिया को पनपाने में भी मदद करता है. 
– खाने से एक घंटा पहले एक ग्लास पानी में नींबू का रस डालकर पीएं.
– रात को हल्दीवाला दूध लें. 
– नींद भरपूर लें, क्योंकि नींद पूरी न होने पर हेल्द तो ख़राब होती ही है, साथ ही वज़न भी बढ़ता है.
– खाने में वैरायटीज़ रखें, ताकि हर तरह का पोषण आपको मिल सके.
–  बासी भोजन करने से बचें. जितना हो सके ताज़ा पका खाना ही खाएं.
– हफ़्तेभर का डायट प्लान करके चार्ट बना लें.
– हेल्दी स्नैक्स खाएं. स्नैकिंग के बहुत-से हेल्दी ऑप्शन्स हैं. 
– सूप्स पीएं, सलाद खाएं.
– इसी तरह ड्राय फ्रूट्स भी अपने डायट में ज़रूर शामिल करें.
– नींबू का रोज़ाना सेवन करें. या तो नींबू पानी के रूप में या फिर खाने में नींबू का रस डालकर. यह पाचन शक्ति कोबेहतर बनाता है.
– रोज़ सुबह 1 टीस्पून फिश ऑयल लेना भी काफ़ी हेल्दी होता है.
– पनीर का सेवन करें, क्योंकि यह वज़न को भी नियंत्रित रखने में कारगर है.

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– इसी तरह से दही व छाछ का भी सेवन करें, क्योंकि इनमें हेल्दी बैक्टीरिया होते हैं जो पेट और आंतों को स्वस्थ रखते हैं.
– प्रोटीन रिच फूड खाएं. ये मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाता है. 
– ईटिंग हैबिट्स में एकदम से उसे बदलने की बजाय धीरे-धीरे बदलाव लाएं.
– बहुत ज़्यादा स्ट्रिक्ट डायट न करें, क्योंकि उसे ज़्यादा समय तक फ़ॉलो कर पाना बेहद मुश्किल है.
– बेहतर होगा अगर वेट लॉस करना हो, तो छोटे-
छोटे-छोटे गोल्स सेट करें. 
– एक ही हफ़्ते में स्लिम-ट्रिम होने की कोशिश आपको कमज़ोर और आपके डायट प्लान को बेकार साबित कर देगी. 
– वज़न कम करने में नींबू और शहद बेहद कारगर हैं. गुनगुने पानी में रोज़ सुबह खाली पेट सेवन करें.
– खाने के फौरन बाद पानी न पी लें.
– दिन में दो बार भरपेट खाने की बजाय 5-6 बार में थोड़ा-थोड़ा खाएं.
– खाना चबा-चबाकर खाएं. खाते समय मोबाइल या लैपटॉप को एक तरफ़ रख दें.
– कैल्शियम युक्त पदार्थ ज़रूर लें, जैसे- दूध, छाछ और दही. ये जल्दी डायजेस्ट हो जाते हैं.  
– हरीपत्तेदार सब्ज़ियां भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं. इन्हें अपने डायट में ज़रूर शामिल करें. 
– कोशिश करें कि आपकी थाली कलरफुल हो, जितने ज़्यादा कलर्स होंगे, उतना ही पोषक आपका भोजन होगा. 
– डायट में फाइबर शामिल करें. फाइबर जितना ज़्यादा होगा पेट उतना ही हेल्दी रहेगा क्योंकि आपको क़ब्ज़ की समस्या नहीं होगी.

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– डायट में साबूत अनाज, दालें, गाजर, ब्रोकोली, नट्स, छिलके सहित आलू, मकई, बींस व ओट्स को शामिल करें. फल और सब्ज़ियां फ़ाइबर का अच्छा सोर्स है. खीरा, गाजर, सलाद और हरीपत्तेदार सब्जियां ज़रूर खाएं.
– कुछ मसाले बहुत हेल्दी होते हैं, काली मिर्च दालचीनी, लौंग, इलाइची, धनिया, जीरा, सौंफ आदि को खाने में शामिल करें.
– बहुत ज़्यादा पेनकिलर्स न ले. छोटी-मोटी समस्याओं के लिए घरेलू नुस्खे ही आज़माएं. गले में खराश हो या सिर में दर्द, तो दालचीनी का सेवन करें. चुटकीभर दालचीनी पानी के साथ या शहद के साथ लें. 
– सर्दी-खांसी होने पर सेंधा नमक गुनगुने सरसों के तेल में मिलाकर सीने पर लगाएं. 
– फ्राइड व प्रोसेस्ड फूड कम खाएं.  
– हफ़्ते में एक या दो दिन अपनी क्रेविंग्स के लिए रखें. मनपसंद कुछ खाएं.
– होल ग्रेन्स और फ़ाइबर्स भी भरपूर मात्रा में लें.
– हमेशा भूख से थोड़ा कम ही खाएं, ताकि पानी के लिए जगह बची रहे.
– खाना बनाने और खाने से पहले साबुन से हाथ ज़रूर धोएं.
– हेल्थ चेकअप भी नियमित तौर पर करवाते रहें. कई बार डायबिटीज़ या बीपी जैसी बीमारियों का पता नहीं चल पाता.

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– अपनी पसंद का काम करें, अपनी हॉबीज़ को भी पूरा करने का टाइम निकालें. यह आपको रिफ्रेश कर देगा. 
– डान्सिंग और स्विमिंग क्लासेस जॉइन करें. इससे फन के साथ-साथ एक्सरसाइज़ भी होगी.
– रिसर्च बताते हैं कि ज़्यादा टीवी देखने वालों की लाइफ़ कम होती जाती है, इसलिए बहुत ज़्यादा टीवी ना देखें, यह आपको आलसी और इनएक्टिव बनाएगा. 
– इसी तरह मोबाइल और बहुत ज़्यादा सोशल साइट्स पर भी ना बने रहें. 
– कंप्यूटर के सामने बहुत देर तक न रहें. समय-समय पर आंखें बंद करके रिलैक्मस करें.
– घर में वेंटिलेशन अच्छा होना चाहिए. दिन के समय खिड़कियां खुली रखें, ताकि ताज़ा हवा और भरपूर रोशनी रहे.
– नहाने के बाद थोड़ा ध्यान लगाएं. इससे मन में एकाग्रता आती है और आप रिफ्रेश महसूस करते हैं.
– खांसते-छींकते वक़्त मुंह ढंकें और धूल-धूप में जाते वक़्त मास्क पहनें.
– ओवर ईटिंग से बचें. कई बार अपना मनपसंद खाना देखते ही हम भूख से ज़्यादा खा लेते हैं, – बहुत ज़्यादा पेन किलर्स न खाएं. घरेलू नुस्ख़े आज़माएं.

Daily Health Tip Ideas

– फ़ोन पर बहुत देर तक बातें न करें, इससे कई तरह की समस्या हो सकती है. 
– बहुत देर तक एक ही जगह पर न बैठें, न ही देर तक टीवी देखें.
– एसी का प्रयोग ज़रूरत पड़ने पर ही करें, बहुत ज़्यादा एसी भी सेहत के लिए सही नहीं.
– ओरल हेल्थ और हाइजीन का भी ख़्याल रखें. सोने से पहले भी दांतों को ब्रश करें.
– दांत और मसूड़ों की तकलीफ़ हो तो सेंधा नमक और सरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों की मालिश करें.
– सांसों की दुर्गंध मिटाने के लिए पानी में बेकिंग सोडा डालकर गरारे करें.
– अगर आपके मुंह से दुर्गंध आती है, तो अपना पेट साफ़ रखने की कोशिश करें. 
– तनाव न पालें. स्ट्रेस से दूर रहें, क्योंकि स्ट्रेस पूरे शरीर व ख़ासतौर से पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. इससे गैस, ऐसिडिटी, क़ब्ज़ जैसी समस्या हो सकती है.

Daily Health Tip Ideas


– खुश रहना सीखें और खुलकर हंसे. खुलकर हंसने से फेफड़ों में लचीलापन बढ़ता हैऔर उन्हें ताज़ा हवा व ऑक्सीजन मिलती है.
– समय मिलने पर बॉडी व हेड मसाज करवाएं. इससे थकान भी मिटेगी और ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ेगा.
– पर्सनल हाइजीन के महत्व को भी समझें और उनपर ध्यान दें.
– अपना वज़न नियंत्रण में रखने का हमेश प्रयास करें, ताकि आप बढ़ते वज़न से होनेवाली बीमारियों- जैसे- बीपी, हार्ट, डायबिटीज़ आदि से बचे रहें. 
– लेकिन डायटिंग का सही तरीक़ा चुनें. खान न खाना सही नहीं, बल्कि अनहेल्दी खाने को हेल्दी से रिप्लेस करना ही सही निर्णय होता है. 
– इसी तरह अपने मानसिक स्वास्थ्य का भी धयान रखें. हेल्दी सोशल लाइफ़ मेंटेन करें, क्योंकि इससे आपको अकेलापन और डिप्रेशन नहीं होगा. 
– कुकिंग थेरेपी ट्राई करें. रिसर्च के अनुसार जब आप खुद खाना बनाते हैं तो तनाव कम होता है, आप बेहतर महसूस करते हैं, क्रिएटिव बनते हैं और हेल्दी रहते हैं.

Daily Health Tip Ideas


– इसके अलावा जब आप खुद खाना बनाते हैं, तो हेल्दी ऑप्शन चुनते हैं और आपको एक संतुष्टि भी महसूस होती है. 
– नींद पूरी लें, क्योंकि नींद न होने से भी डिप्रेशन होता है. नींद अच्छी होने से दिनभर के तनावों से आप बचे रहेंगे और ऊर्जावान रखेगी. 
– रात को समय से सोने की कोशिश करें, देर रात तक न जागें, इससे आपका पाचन तंत्र भी ख़राब होगा और आपको सुबह फ्रेश महसूस नहीं होगा. 
– नींद न आने पर या तनाव होने पर सिगरेट या शराब का ऑप्शन न चुनें. ये अनहेल्दी होगा. 
– लेकिन जिस तरह ओवरईटिंग हानिकारक है, उसी तरह ओवर स्लीपिंग से भी बचें. 
– अपने बारे में अच्छा सोचें, रोज़ दिन में कोई एक ऐसा काम करें, जिससे दूसरों की मदद हो सके, इससे आपका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा. 
– चीटिंग, झूठ बोलना और ईर्ष्या जैसे नकारात्मक भाव मन न पालें. 
– मदद की भावना आपको पॉज़िटिव रखेगी और बदला लेने की मानसिकता आपको बीमार कर देगी.

Daily Health Tip Ideas


– हर समय काम ही न करते रहें, अपने लिए और अपनों के लिए भी समय निकालें. हॉलिडे प्लान करें. अगर समय कम हो, तो आसपास ही एक-दो दिन के लिए घूम आएं या मूवी प्लान करें. 
– दोस्तों व रिश्तेदारों को बुलाकर गेट-टु-गेदर करें, इससे आपकी ख़ुशियों में इज़ाफा होगा और आप हेल्दी रहेंगे. 
– पैसों से रिश्तों को न तोलें और स्वार्थी न बनें. खुलकर जीएं, फिर देखें.
– ऐसी ही कई तमाम छोटी-छोटी बातें हैं, जो आपको हेल्दी रखेगी और बड़ा फ़ायदा देगी.

– रिंकु शर्मा 

यह भी पढ़ें: वर्ल्ड हार्ट डे: भारतीय युवाओं में तेज़ी से बढ़ रहे हैं हार्ट फेलियर के मामले, जानें इसे कैसे मैनेज करें, ताकि आपका दिल सुरक्षित रहे! (World Heart Day: Managing The Rise Of Failure In India)

आपके दिल की धड़कन…..पूरे परिवार की धड़कन जिसके रुकने से आपका दिल भी धड़कना भूल सकता है, आपका पूरा परिवार बिखर सकता है…सोचिए तो अगर उसके दिल ने सचमुच धड़कना बंद कर दिया तो….ऐसा न हो आपके साथ, इसीलिए ज़रूरी है कि समय रहते सावधानी बरती जाए. जिस तरह महिलाओं में दिल की बीमारियां बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए तो बेहतर यही होगा कि आप अपने दिल के टुकड़े का आज से ही ख़याल रखना शुरू कर दें.

Heart Attack Reasons

एक सर्वे के अनुसार आज से करीब तीन दशक पहले तक पुरुषों ओर स्त्रियों में दिल की बीमारी होने का औसत 5ः1 था. लेकिन आज हालात कुछ और हैं और दिन-ब- दिन यह अंतर घटता जा रहा है. 1884 व उसके बाद दुनियाभर में हार्ट अटैक से मरनेवाली महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले कहीं ज़्यादा हैं. स़िर्फ पचास पार की नहीं, तीस व चालीस साल के बीच की उम्र की महिलाओं में भी यह ख़तरा दिन ब दिन बढता जा रहा है. आंकड़े बताते हैं कि तीस से चालीस साल के बीच की उम्र की महिलाओं में सडेन कार्डियक डेथ के मामले पुरुषों की तुलना में इक्कीस फीसदी से अधिक तेज़ी से बढे हैं.
आख़िर क्या हैं इसके कारण और क्या सावधानियां बरतनी ज़रूरी हैं, आइए जानते हैं.

महिलाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के कारण

Heart Attack Reasons

हाई कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप, मोटापा, डायबिटीज़, हाइपरटेंशन आदि कारण तो हैं ही, जो महिला और पुरुष दोनों को प्रभावित करते हैं. लेकिन महिलाओं के दिल को प्रभावित करने के और भी कई कारण हैं.

  • पेट के आसपास जमा चर्बी, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज़ और उच्च ट्राइग्लिसिराइड लेवल पुरुषों से ज़्यादा स्त्रियों को प्रभावित करते हैं.
  • शारीरिक कारणों के अलावा भावनात्मक कारणों से भी हृदय रोग के ख़तरे बढते हैं और महिलाओं को सबसे ज्यादा भावनात्मक कारण ही प्रभावित करते हैं, क्योंकि पुरुषों के मुकाबले वे काफ़ी संवेदनशील और भावुक होती हैं. क्रोध, दुख, मानसिक तनाव और डिप्रेशन का असर महिलाओं के दिल पर पुरुषों की अपेक्षा ज़्यादा पड़ता है.
  • सिगरेट का कश लेती लड़कियों को देखकर लोग अब चौंकते नहीं. ओकेजनल ड्रिंक भी अब बुरी नहीं मानी जाती. नतीजतन पुरुषों में आम हार्ट अटैक अब स्त्रियों में भी आम हो चला है.
  • मेनोपॉज के पहले स्त्रियों को एस्ट्रोजन हार्मोन के चलते हार्ट अटैक से जो नेचुरल प्रोटेक्शन मिला था, डायबिटीज़ ने अब उस सुरक्षा कवच में भी सेंध लगा दी है.
  • लाइफ़ स्टाइल और खान-पान के तरीकों में आया बदलाव भी महिलाओं में हार्ट प्रॉब्लम की एक बड़ी वजह है.
  • शारीरिक श्रम व एक्सरसाइज़ की कमी से बढता मोटापा भी दिल को कमज़ोर बना रहा है.
  • स्तन कैंसर के ख़तरों से तो महिलाएं परिचित हैं और इससे सुरक्षा के प्रति जागरुक भी हैं, लेकिन हृदय रोगों के बारे में आम मान्यता यही है कि ये तो पुरुषों का रोग है और महिलाओं को इससे कोई ख़तरा नहीं. इसी सोच के चलते हृदय रोग के लक्षण नज़र आने पर भी महिलाएं और उनके परिवार वाले इस पर ध्यान ही नहीं देते और जब तक वो कोई क़दम उठाते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.
  • तेज़ ऱफ़्तार ज़िंदगी, घर और बाहर के काम का दोहरा दबाव, तनाव, रिश्तों और कैरियर के बीच संतुलन बैठाने की जद्दोज़ेहद आदि कई कारण हैं जिनसे महिलाओं में दिल की बीमारियों का ख़तरा बढा है.
  • प्री एक्लेम्प्सिया, प्रेगनेंसी के दौरान होनेवाले उच्च रक्तचाप, डायबिटीज़, हाई कोलेस्ट्रॉल और अकर्मण्यता स्ट्रोक के ख़तरे को 60 % बढा देता है.
  • मेनोपॉज के दौरान ली जानेवाली एचआरटी यानी हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से भी स्ट्रोक का ख़तरा 40 % बढ जाता है.
  • गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से भी कुछ हद ब्लड क्लॉट और स्ट्रोक का ख़तरा बढ जाता है, लेकिन ये ख़तरा उन महिलाओं में ज्यादा होता है जो डायबिटीज़ से पीड़ित होती हैं या जो धूम्रपान करती हैं.
  • माइग्रेन से पीड़ित महिलाओं को स्ट्रोक का ख़तरा अपेक्षाकृत दोगुना होता है.

दिल का दौरा पड़ने के संकेत

Heart Attack Reasons in Women
  • सांस लेने में तकलीफ़ महसूस होना, थकान लगना, गले, जबड़े या पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द होना.
  • सीने में दबाव और दर्द. एन्जाइना के मुक़ाबले यह दर्द ज्यादा देर तक रहता है.
  • सीने का दर्द बांहों, कंधों, गले, पीठ और कमर में भी उतर सकता है.
  • मितली, पसीना आना, दम घुटना, चक्कर, बेहोशी, बोलने में तकलीफ़ होना, उलझन महसूस होना, धुंधला दिखना.

कुछ लोगों को ये सारे लक्षण प्रकट होते हैं तो कुछ को इनमें से एक भी लक्षण दिखाई नहीं देते. ये लक्षण इतने आम होते हैं कि पीड़ित महिला को लगता है कि उसे बस यूं ही अच्छा नहीं महसूस हो रहा है. ये लक्षण दिल का दौरा पड़ने के भी हो सकते हैं, इसका ख़याल तक उसके मन में नहीं आता, लेकिन अगली बार ये लक्षण नज़र आएं तो इन्हें नज़रअंदाज़ न करें. क्या पता आपकी लापरवाही आपकी जान ले ले.

ये सावधानियां भी ज़रूरी हैं

Heart Attack Reasons in Women
  • सबसे पहले अपने दिल से दोस्ती करें. अपने आप से प्यार करें, ताकि आप अपना ज़्यादा से ज़्यादा ख़याल रखें.
  • स्मोकिंग और अल्कोहल को ना कहें. हालांकि स्मोकिंग पुरुषों में भी हृदय रोग का बड़ा कारण है, लेकिन ये महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करता है.
  • जंक फूड को छोड़कर हेल्दी डायट लें, ताकि आपके कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलन में रहे.
  • भले ही कोई लक्षण नज़र न आए, लेकिन फिर भी समय-समय पर अपना पूरा टेस्ट कराते रहें, ताकि रोग की कोई संभावना होने पर समय रहते उसका इलाज कराया जा सके.
  • कई बार दिल के दौरे के संकेत बहुत हल्के होते हैं, लेकिन इन संकेतों को आम समझकर अस्पताल जाने में देरी न करें. जल्दी से जल्दी इलाज कराएं, ताकि कोई ब्लॉकेज आदि होने पर उसे क्लियर किया जा सके.
  • वज़न पर काबू रखें.
  • नियमित एक्सरसाइज़, योग या मॉर्निंग वॉक की आदत डालें.
  • महिलाएं यदि हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी ले रही हैं तो इसके ख़तरों के बारे में डॉक्टर से पहले ही पूछ लें.
  • 2 डी इको, लिपिड प्रोफाइल, डायबिटीज़ आदि कुछ आसानी से किए जा सकने वाले टेस्ट हैं, जिनसे आप अपने दिल की सेहत का जायज़ा ले सकती हैं.

हार्ट अटैक पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में लिए अधिक ख़तरनाक

Heart Attack Reasons in Women
  • दरअसल स्त्रियों के दिल में पाई जानेवाली कोरोनरी आर्टरीज़ पुरुषों की अपेक्षा छोटी व संकरी होती हैं, जिससे उनके ब्लॉक होने का ख़तरा रहता है. आर्टरिज़ के ब्लॉक होने पर हार्ट अटैक की गंभीरता भी अधिक होती है, दिल की पेशियों के डैमेज होने व मृत्यु का ख़तरा भी अधिक रहता है.
  • दूसरे महिलाओं में हार्ट अटैक के प्रत्यक्ष लक्षण नज़र नहीं आते, इस कारण परिवार वाले जान ही नहीं पाते कि उसे हार्ट अटैक आया है, जिससे उसे हॉस्पिटल ले जाने में देरी हो जाती है और इलाज में देरी कई बार मृत्यु का कारण बन जाती है.

चेकअप कराना कब ज़रूरी है?

  • आपकी उम्र से 30 वर्ष से अधिक है.
  • काम करते वक़्त आपकी सांसें फूलने लगती हैं.
  • वज़न औसत से 10 से 15 किलो अधिक हो.
  • आपको डायबिटीज़, कोलेस्ट्रॉल या उच्च रक्तचाप की शिकायत है.
  • आप अपने ऑफिस में स्ट्रेस से जूझ रहे हैं.
  • पेट पर चर्बी का जमाव ज़्यादा हो और कमर की चौड़ाई 80 सें.मी. से अधिक हो.
  • फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज़ लेवल 100 या उससे अधिक हो.
  • आपके परिवार में किसी को हार्ट डिसीज़, डायबिटीज़ या हाई ब्लडप्रेशर की शिकायत है.

रखें ख़याल मांसपेशियों की जकड़न का ख्याल

Heart Attack Reasons in Women

अक्सर कभी-कभी बैठे-बैठे तो कभी रात को सोते समय मांसपेशियों में जकड़न यानी क्रेम्प से आप बेचैन हो उठती हैं. इसको हल्के से न लें. यह पेरीफेरल आर्टिअल डिसीज़ हो सकती है. कूल्हे, जांघ या फिर चलते हुए क्रेम्प के आने का अर्थ है कि उस हिस्से में रक्त प्रवाह नहीं पहुंच रहा. ऐसे में डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें.

एस्प्रीन दिल की बीमारी की सबसे सस्ती दवा
एस्प्रीन का सेवन हृदयरोगियों के लिए वरदान है और 20 % तक मृत्युदर कम कर देती है. उच्च रक्तचाप, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापे, धूम्रपान, हृदयरोग, पारिवारिक पृष्ठभूमि हो तो डॉक्टर 75 मिग्रा. से 100 मिग्रा. तक एस्प्रीन लेने की सलाह देते हैं, ताकि ख़तरे को 30% तक कम किया जा सके. सीने में दर्द हो तो एस्प्रीन चबाने से अटैक से होनेवाली क्षति को कम किया जा सकता है.

बदलते मौसम का असर शरीर और सेहत पर भी पड़ता है और कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स होने लगती हैं. अगर समर में हेल्थ प्रॉब्लम्स से बचना है और हेल्दी रहना है, तो इससे बचाव के तरी़के जानना बेहद ज़रूरी है.

डीहाइड्रेशन


गर्मियों में अत्यधिक और बार-बार पसीना आने से शरीर में पानी की कमी और डीहाइड्रेशन की समस्या होने लगती है और जो लोग एक्सरसाइज़ करते हैं या जिम जाते हैं, उन्हें तो डीहाइड्रेशन की समस्या होने की संभावना ज़्यादा होती है.
 
शरीर में पानी की कमी के लक्षण

Summer Care Home Remedies

– अत्यधिक प्यास लगना
– सामान्य से कम पेशाब  होना
 – पेशाब का रंग गहरा होना
 – बेवजह थकान महसूस होना
 – रोने पर आंखों से आंसू न आना
–  सिरदर्द और चक्कर आना

क्या करें

– ज़्यादा-से-ज़्यादा पानी पीएं.
 – नमक की कमी को दूर करने के लिए स्पोर्ट्स ड्रिंक पीएं.
– ज़्यादा लिक्विड पीने के लिए पानी में ऑरेंज जूस, पुदीने की पत्तियां या नींबू निचोड़ें. इससे आप ज़्यादा पानी पी पाएंगी.
– चाय या कॉफी का सेवन कम करें.
– हल्के-फुल्के कपड़े पहनें.

एसिडिटी

गर्मियों में एसिडिटी की प्रॉब्लम ज़्यादा होती है, जिससे शरीर में भारीपन, खट्टी डकारें, पेटदर्द, जी मिचलाना आदि शिकायतें होती हैं. ऐसी स्थिति में-
– बार-बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीएं. इससे खाना जल्दी पच जाता है और एसिडिटी से राहत मिलती है.
– हरड़, सोंठ और सेंधा नमक तीनों को मिलाकर रख लें. एसिडिटी की शिकायत होने पर एक टीस्पून की मात्रा में ये चूर्ण ठंडे पानी के साथ लें.

बार-बार प्यास लगना

– छुहारे की गुठली मुंह में रखें.
– आलूबुखारा चूसने से भी लाभ होता है.
– धनिया को पानी में भिगो दें. दो घंटे बाद उसे मसलकर छान लें. इस पानी में शहद और शक्कर मिलाकर पीने से फ़ायदा होता है.


गर्मी में सिर चकराए तो

-गर्मी के दिनों में सिर चकराता हो या जी घबराता हो, तो आंवले का शर्बत पीएं. तुरंत राहत मिलेगी.

लू लगने पर

– लू लगने पर प्याज़ के रस से कनपटियों और छाती पर मालिश करें.
 – नारियल के दूध के साथ काला जीरा पीसकर शरीर पर मलने से लू की जलन कम होती है.
– धनिया के पानी में शक्कर मिलाकर पीने से लू का असर कम हो जाता है.
– तुलसी के पत्तों के रस में शक्कर मिलाकर पीने से लू नहीं लगती.

Summer Care Home Remedies


फूड पॉयज़निंग

गर्मियों में बासी या बाहर का खाना खाने, खाने-पीने में गड़बड़ी होने या अधिक गर्मी के कारण फूड पॉयज़निंग की प्रॉब्लम हो सकती है, जिसके कारण उल्टी, पेटदर्द, दस्त, तेज़ बुख़ार व डीहाइड्रेशन की शिकायत हो सकती है.
– खाना बनाने से पहले, वॉशरूम इस्तेमाल करने के बाद व पालतू जानवर को छूने के बाद मेडिकेटेड साबुन से हाथ धोएं. खाने से पहले भी हाथों को अच्छी तरह धोएं.
– बाहर का खाना या बासी खाना खाने से परहेज़ करें.
– मौसमी फल व सब्ज़ियां धोकर ही खाएं.
– ज़्यादा-से-ज़्यादा लिक्विड फूड का सेवन करें और हल्का खाना खाएं.

खाना-पीना शुद्ध हो तो ही स्वस्थ शरीर बनता है, लेकिन आजकल शुद्ध चीज़ें कहां मिलती हैं, चाहे दूध हो या घी, इसलिए शुद्ध चीज़ों के लिए ऐसी जगह से खरीदारी करें जो विश्वसनीय हो और भरोसेमंद ब्रांड के तहत बनी हो, हम आपके लिए गाय के देसी घी के बेस्ट ब्रांड्स ताकि आपकी सेहत भी बनी रहे और स्वाद भी मिले. आपकी जानकारी के लिए हम बता दें कि अगर आप इन प्रॉडक्ट्स को यहां दिए गए लिंक्स से ख़रीदते हैं तो ज़रूर हमें उनकी बिक्री के आर्थिक लाभ से कुछ शेयर या फायदा मिलेगा. लेकिन ये सभी उत्पाद सही हैं और पब्लिश करने के समय उपलब्ध भी.

  1. घी शुद्ध हो तो खाने का स्वाद दुगुना हो जाता है, आपके लिए है Nestle Everyday Shahi Ghee, 1L जो पंजाब की गाय के दूध से बना है. इन गायों को बेहतर और ज़िम्मेदारी से अच्छी क्वालिटी का भोजन कराया जाता है. इसे निकालने से लेकर पैकिंग तक में ये ख्याल रखा जाता है कि घी का स्वाद और महक बनी रहे. इसकी महक से ही भूख बढ़ जाएगी और ये है शुद्ध दानेदार घी जिसकी एक लीटर की डिस्काउंट कीमत है ₹ 439.00

2. एक ऐसा ब्रांड जो दूध हुए दूध से बने उत्पादों के लिए ही जाना हो, तो उससे बेहतर और क्या होगा? खरीदें Mother Dairy Cow Ghee, 1L ये न सिर्फ स्वादिष्ट है बल्कि ह्यूमन कंसम्पशन यानि इंसानों के लिए बेहतरीन माना जाता है. आपकी ज़रुरत के अनुसार बेहतरीन गायों का घी यहां उपलब्ध है. देसी गाय हो या गिर गाय, खास सर्दियों के लिए बेस्ट घी वैदिक देसी गाय का घी आप जो चाहें ले सकते हैं. एक लीटर की डिस्काउंट कीमत है ₹ 421.00

3. घी विटामिन्स से भरपूर होता है, शुद्ध दानेदार घी के लिए आप लें Amul Ghee – Pure, 1 L Tin ये फ्रेश क्रीम से बना होता है और इसका स्वाद व महक आपको अलग ही ज़ायके का अनुभव कराते हैं. दानेदार घी है ये और भरोसेमंद ब्रांड भी है तो सोचना क्या? एक लीटर की डिस्काउंट कीमत है ₹ 485.00

4. घी से शरीर को टॉक्सिन फ्री रखने और ऊर्जा व् याददाश्त बढ़ाने का दावा एक ब्रांड है जो करता है, शुद्धता की गारंटी चाहिए तो लें Patanjali Cow’s Ghee, 1L घी पित्त और वात को शांत करता है और इन दोषों के असंतुलन को संतुलित करता है. घी सिर्फ खाना ही ज़रूरी नहीं उसका पचना भी उतना ही महत्वपूर्ण है और पतंजलि घी पचने में बेहद आसान है और भी कई गुणों से ये भरपूर है. एक लीटर की कीमत है ₹ 565.00

5. बेहतरीन गुण, स्वाद और महक के लिए ज़रूर ट्राई करें Aashirvaad Svasti Pure Cow Ghee, 1L इस घी को धीरे-धीरे लगभग साढ़े तीन घंटों तक पकाया जाता है और वो भी तापमान धीरे-धीरे ही बढाकर ताकि इसका स्वाभाविक गुण, महक व स्वाद भी बना रहे. एक लीटर की डिस्काउंट कीमत है ₹ 546.00

6. देसी घी के शौक़ीन हैं तो आपके लिए एक और बेहतरीन विकल्प है Sri Sri Tattva Cow’s Pure Ghee (500ml Pack of 2) ये रोज़ाना खाने के लिए बेहतरीन है, जो स्वाद के साथ साथ सेहत भी अच्छी रखता है और शुद्धता की गारंटी देता है. इसके आधा-आधा लीटर के दो पैक यानि एक लीटर की डिस्काउंट कीमत है ₹ 560.50

7. देसी घी का ज़िक्र होते ही एक ब्रांड है जिसका नाम सबसे पहल ज़ुबान पर आता है और वो है Gowardhan Ghee Jar, 1L लोगों में ये बेहद पॉपुलर है और उनका अनुभव है कि ये न सिर्फ स्वादिष्ट है बल्कि पूरी तरह शुद्ध भी है, तो जिसे जनता ने ही पास कर दिया हो आपको भी उसे एक मौका देकर ट्राई कर ही लेना चाहिए. एक लीटर की कीमत है ₹ 561.00

8. हर चम्मच में स्वाद हो ऐसा घी चाहिए तो ज़रूर लें Madhusudan Pure Vegetarian Desi Cow’s Ghee 1L ताज़ा दूध और फ्रेश क्रीम से बना है और सेहत के लिए बेहतरीन है. एनर्जी बढ़ाता है, टॉक्सिन्स दूर करके दिमाग और याददाश्त तेज़ करता है. हार्ट के लिए ये हेल्दी है. पचने में आसान है और ये कोशिकाओं व हॉर्मोन्स के निर्माण को भी बेहतर करता है. एक लीटर की डिस्काउंट कीमत है ₹ 550.00

9. शुद्धता के लिए एक भरोसेमंद ब्रांड ज़रूरी है, इम्युनिटी बूस्टर घी लेना है तो लें Dabur 100% Pure Cow Ghee | Improves Digestion and Boosts Immunity -1L रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाने में ये कारगर है और विटामिन ए के गुणों से भरपूर. ये पाचनशक्ति को बेहतर करके ऊर्जा देता है. राजस्थान के बेहतरीन गायों से प्राप्त किया जाता है और ये कई पोषक तत्वों से भरपूर है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स सेल्स को डैमेज होने बचाते हैं, ये गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है वज़न को नियंत्रित रखता है और स्किन को हेल्दी ग्लोइंग इफेक्ट देता है. एक लीटर की कीमत है ₹ 599.00

महिलाएं बर्थ कंट्रोल के तरीकों का इस्तेमाल तो करती हैं, लेकिन आज भी इससे जुड़े कई तरह के सवाल, कई भ्रांतियां रहती हैं उनके मन में. आज भी बर्थ कंट्रोल से संबंधित तमाम ज़रूरी जानकारियां महिलाओं को पता नहीं होतीं. आपके मन में बर्थ कंट्रोल से जुड़ी किसी तरह की कोई गलतफहमी न रहे, यही चाहते हैं हम, इसलिए इससे जुड़ी सभी जानकारियां ले आए हैं आपके लिए.

जानें गर्भनिरोधक गोलियों के बारे में

Important Facts About Contraception


गर्भनिरोधक गोलियां यानी बर्थ कंट्रोल पिल्स डेली पिल्स हैं यानि इसे रोज़ाना लेना होता है. ये एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन युक्त गोलियां होती हैं, जो शरीर के नेचुरल साइकल को प्रभावित करती हैं, जिससे प्रेग्नेंसी को रोका जा सकता है. ये ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को रोकता है, जिससे ओवरी से एग रिलीज़ नहीं होता और गर्भ ठहरने की संभावना नहीं रहती.

इमर्जेंसी कंट्रासेप्टिव पिल्स: इमर्जेंसी कंट्रासेप्टिव पिल्स जिन्हें मॉर्निंग आफ्टर पिल्स भी कहते हैं, असुरक्षित सेक्स के बाद प्रेग्नेंसी को रोकने का कार्य करती है. ये पिल असुरक्षित सेक्स के ७२ घंटों यानि ३ दिन के अंदर ली जानी चाहिए. लेकिन डॉक्टर्स के अनुसार अनसेफ सेक्स के बाद इमर्जेंसी कंट्रासेप्टिव पिल जितनी जल्दी ले लेंगी, असर उतना ही ज़्यादा होगा. पर ध्यान रखें, बर्थ कंट्रोल पिल्स सुरक्षित सेक्स की गारंटी देता है, जब कि इमर्जेंसी पिल्स ऐसा नहीं करता, इसलिए इमर्जेंसी कंट्रासेप्टिव पिल्स को सेफ सेक्स के ऑप्शन के तौर पर न लें. अगर कभी अनसेफ सेक्स हो गया हो, तो ही इसे लेना समझदारी है. इसे आदत न बना लें.

Facts About Contraception

बर्थ कंट्रोल पिल्स कब और कैसे लेना चाहिए: इन पिल्स को आपको रोज़ाना नियत समय पर लेना होगा तभी ये इफेक्टिव होंगी. इसे आप पीरियड्स के ५ वें दिन से ले सकती हैं. नॉर्मल मेन्स्टु्रअल साइकल २१ दिन का माना जाता है. आपको २१ दिन तक ये पिल्स लेनी होंगी. अगर आप एक दिन गोली भूल जाती हैं तो अगले दिन दो गोलियां ले सकती हैं. अगर लगातार दो दिन गोलियां लेना भूल गई हैं तो अगले दिन दो-दो गोलियां ले सकती हैं. लेकिन अगर आप दो या ज़्यादा दिनों के लिए गोलियां लेना भूल जाती हैं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर अन्य विकल्प के बारे में पूछें.

बर्थ कंट्रोल पिल्स का असर कब से शुरू होता है: वैसे इसका असर १४ वें दिन से शुरू हो जाता है. पर पूरी सेफ्टी के लिए डॉक्टर पिल शुरू करने के एक हफ्ते बाद तक कंडोम यूज़ करने की सलाह देते हैं.

बर्थ कंट्रोल पिल्स कितने इफेक्टिव हैं: अगर इसे सही तरीके से लिया जाए, तो ये अनचाहे गर्भ से पूरी सुरक्षा देते हैं. लेकिन ध्यान रखें अगर आप कोई अन्य दवाएं या सप्लीमेंट्स ले रही हैं, तो बर्थ कंट्रोल पिल्स का असर कम हो सकता है. ऐसी स्थिति में बेहतर होगा कि अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें.

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बर्थ कंट्रोल पिल्स कितने सेफ हैं: अधिकतर महिलाओं के लिए बर्थ कंट्रोल पिल्स पूरी तरह सेफ माने जाते हैं. लेकिन कुछ महिलाओं में और कुछ हेल्थ कंडीशन में इसके साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं. इसलिए बेहतर होगा कि पिल्स डॉक्टर की सलाह पर ही लें, ताकि आपके नए जीवन की शुरुआत हेल्दी तरीके से हो.

क्या साइड इफेक्ट्स हैं: शुरुआत में बर्थ कंट्रोल पिल्स के कुछ साइड इफेक्ट्स जैसे ब्लोटिंग, ब्रेस्ट में भारीपन, मूड स्विंग्स, वज़न बढना, सिरदर्द, पेटदर्द, उल्टी महसूस होना, डिप्रेशन आदि प्रॉब्लम्स हो सकते हैं, जो दो-तीन महीने में अपने आप दूर हो जाते हैं. अगर तकलीफ ज़्यादा हो तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें. हो सकता है वो आपको कोई और बर्थ कंट्रोल पिल्स प्रिस्क्राइब करें जिसके साइड इफेक्ट्स कम हों.

बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने से क्या भविष्य में कंसीव करने में दिक्कत आ सकती है: बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने से कंसीव करने में कोई दिक्कत नहीं आती. बस जब भी प्रेग्नेंसी प्लान करनी हो, इसे लेना बंद कर दें. हां कुछ महिलाओं का साइकल नॉर्मल होने में एक-दो महीने लग सकते हैं, लेकिन अधिकतर महिलाएं पिल बंद करते ही कंसीव कर सकती हैं. इसलिए अगर बच्चा प्लान करना है तो बस पिल्स लेना बंद करें, डॉक्टर से मिलें और मां बनने का आनंद लें.

क्या बर्थ कंट्रोल पिल्स का पीरियड्स पर भी असर होता है: बर्थ कंट्रोल पिल्स की अलग-अलग महिलाओं पर अलग-अलग प्रतिक्रिया होती है. ये पिल्स लेने के बाद कुछ महिलाएं हैवी ब्लडिंग, दर्द, अनियमित पीरियड्स की शिकायत करती हैं, तो ये पिल्स लेने से कुछ महिलाओं के पीरियड्स एकदम रेग्युलर हो जाते हैं और उन्हें पीरियड्स के दौरान दर्द भी कम होता है.


गर्भ निरोधक घरेलू नुस्खे

Home Remedies For Birth Control


अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए आप कुछ घरेलू नुस्खे अपना सकती हैं. हालांकि दूसरे गर्भ निरोधक मेथड की तरह ये भी १०० प्रतिशत गेरेंटी नहीं देते, पर ये बिल्कुल सेफ होते हैं.
– अनप्रोटेक्टेड सेक्स के बाद २-३ टुकड़े अंजीर के खाएं, जिससे गर्भ रोकने में मदद मिलेगी.
– अनप्रोटेक्टेड सेक्स के बाद पपीता ज़रूर खाएं, इससे गर्भधारण नहीं होगा. इसे सेक्स के बाद २ से ३ दिनों तक दिन में २ बार खाने की सलाह दी जाती है.
– अदरक भी एक गर्भ निरोधक का काम करता है. यदि आप अनचाहा गर्भधारण नहीं चाहतीं, तो सेक्स के बाद अदरक को उबालकर घूंट-घूंट कर पीएं.
– नीम भी एक बेहतरीन नेचुरल गर्भनिरोधक है. ये एग तक पहुंचने की स्पर्म की क्षमता को कम कर देती है, जिससे एग फर्टिलाइज नहीं हो पाता और प्रेगनेंसी की संभावना भी कम हो जाती है.
– विटामिन सी का सेवन कर आप अनचाहे गर्भ को रोक सकते हैं. इसमें आपको ज़रुरत है शुद्ध विटामिन सी के सेवन की, जिसमें कोई मिलावट न हो. अनप्रोटेक्टेड सेक्स के बाद इसे दिन में दो बार लें.

बचें इन मिथ्स से

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–  ये सिर्फ मिथ है कि ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं के प्रेग्नेंट होने की संभावना नहीं होती. अगर आपको भी ऐसी ही कुछ गलतफहमी है तो आज से ही इसे अपने मन से निकाल दें. ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बॉडी में जो हार्मोंस बनते हैं, उनके कारण ऑव्यूलेशन कुछ टाइम के लिए बंद हो जाता है, लेकिन यह बात हर महिला पर समान रूप से लागू नहीं होती है.
– इस बात में भी कोई सच्चाई नहीं है कि सेक्स के फौरन बाद नहाने से प्रेग्नेंसी नहीं होती. सेक्स के बाद यूरीन जाने या शावर लेने का स्पर्म द्वारा अंडे को फर्टिलाइज करने से कोई संबंध नहीं है.
– ज़्यादातर लोगों का मानना होता है कि सेफ दिनों में असुरक्षित सेक्स करने से प्रेग्नेंसी नहीं होती है, जबकि ये बिल्कुल गलत हैं. सेफ दिनों में भी महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकती हैं, इसलिए सेक्स के दौरान प्रोटेक्शन का इस्तेमाल ज़रूर करें.
– ये भी जान लें कि कोई भी बर्थ कंट्रोल १०० प्रतिशत प्रभावी होते हैं.



अल्ज़ाइमर आमतौर पर बुज़ुर्गों को होने वाली बीमारी मानी जाती है, जिसमें याददाश्त कमज़ोर हो जाती है, इसे भूलने की बीमारी भी कह सकते हैं. चौंकाने वाली बात ये है कि वृद्धावस्था में होनेवाली ये बीमारी अब युवाओं में भी देखी जा रही है. आख़िर युवाओं में क्यों बढ़ रही है भूलने की बीमारी?

Alzheimer

एक्सपर्ट्स के अनुसार, युवाओं में याददाश्त कमज़ोर होने या अल्ज़ाइमर के संकेत दिखाई देने का मुख्य कारण तनाव और बढ़ते काम का बोझ है. आजकल युवाओं पर काम का इतना प्रेशर रहता है, जिसके कारण वो स्ट्रेस और डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं. ऐसे में काम के बोझ और तनाव के चलते वो चीज़ें भूलने लगते हैं. यही वजह है कि आजकल युवाओं में कम उम्र में ही अल्ज़ाइमर के संकेत देखने को मिल रहे हैं. तनाव के कारण ही आजकल युवाओं में अल्ज़ाइमर, हाई ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, डायबिटीज आदि बीमारियां देखने को मिल रही हैं.

अल्ज़ाइमर क्या है?
अल्ज़ाइमर एक भूलने का रोग है. इस बीमारी के लक्षणों में याददाश्त कमज़ोर हो जाना, चीज़ें भूल जाना (यहां तक कि अपना नाम, घर का पता, परिवार के लोगों को भूल जाना), निर्णय न ले पाना, बोलने में दिक्कत आदि समस्याएं शामिल हैं. इसके अलावा ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, तनाव या सिर में चोट लग जाने से भी इस बीमारी के होने की संभावना बढ़ जाती है. अल्ज़ाइमर अमूमन 60 साल की उम्र के आसपास से शुरू होने वाली बीमारी है, लेकिन आजकल ये बीमारी युवाओं में भी देखने को मिल रही है. अल्ज़ाइमर का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है इसलिए इससे बचाव बेहद ज़रूरी है. हां, अल्ज़ाइमर के लक्षणों को यदि शुरुआती दौर में ही पहचान लिया जाए, तो नियमित जांच और इलाज से इस पर काबू पाया जा सकता है.

अल्ज़ाइमर के लक्षण
अचानक मूड बदल जाना, बिना वजह ग़ुस्सा करना, बिना वजह घंटों तक एक ही काम में व्यस्त रहना आदि अल्ज़ाइमर रोग के लक्षण हैं. अल्ज़ाइमर यानी भूलने की बीमारी होने पर पीड़ित व्यक्ति को बोलने, लिखने, हिसाब करने, रास्ते याद रखने में, खाना पकाने में, निर्णय लेने आदि में कठिनाई होने लगती है. ऐसे लोग चीज़ें रखकर भूल जाते हैं, अपने घर का पता तक भूल जाते हैं, कोई भी निर्णय नहीं ले पाते.

यह भी पढ़ें: अपने बढ़ते बच्चों को ऐसे सिखाएं बॉडी हाइजीन का ख्याल रखना (Personal Hygiene Tips For Pre-Teens And Teenagers)

युवाओं में अल्ज़ाइमर होने के कारण
युवाओं में अल्ज़ाइमर होना अच्छा संकेत नहीं है, लेकिन भागदौड़ भरी ज़िंदगी में आजकल युवा भी अल्ज़ाइमर के शिकार हो रहे हैं. युवाओं में अल्ज़ाइमर होने के निम्न कारण हैं:
1) अल्ज़ाइमर रोग होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन हाई ब्लड प्रेशर होना, डायबिटीज होना और लाइफस्टाइल खराब होना भी इसकी एक बड़ी वजह है.
2) काम के प्रेशर और तनाव के कारण आजकल कम उम्र में ही युवाओं में अल्ज़ाइमर के संकेत देखने को मिल रहे हैं. इससे बचने के लिए काम के प्रेशर और तनाव से दूर रहने की कोशिश करना बहुत ज़रूरी है.
3) कुछ मामलों में युवाओं में अल्ज़ाइमर होने का कारण आनुवांशिक भी होता है.
4) एक साथ बहुत सारे काम करने से भी अल्ज़ाइमर यानी भूलने की बीमारी की शिकायत हो सकती है. कई युवा एक साथ बहुत सारे काम करते हैं, जिसके कारण उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती. दिमाग़ को आराम देने के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत ज़रूरी है.
5) किसी दुर्घटना के दौरान सिर में चोट लगने से भी भूलने का रोग हो जाता है.

Alzheimer Disease

अल्ज़ाइमर से बचने के उपाय
लाइफ स्टाइल में बदलाव करके अल्ज़ाइमर से बचा जा सकता है. यदि आपकी याददाश्त भी कमज़ोर होने लगी है, तो आप भी ये उपाय ज़रूर ट्राई करें:

  • रोज़ाना योग और एक्सरसाइज़ करके अल्ज़ाइमर रोग के प्रभाव को कम किया जा सकता है. दिमाग़ तेज़ करने, याददाश्त तथा एकाग्रता बढ़ाने के लिए सर्वांगासन, भुजंगासन, कपालभाति आदि योग किए जा सकते हैं.
  • नियमित रूप से मेडिटेशन करके भूलने की समस्या को काफ़ी हद कम किया जा सकता है.
  • एक रिसर्च के मुताबिक, जो लोग बढ़ती उम्र में अपना काम खुद करते हैं, उन्हें अल्ज़ाइमर रोग होने का ख़तरा कम होता है. अपने काम ख़ुद करने से दिमाग़ सक्रिय रहता है और स्मरणशक्ति तेज़ होती है.
  • भोजन में फल, सब्ज़ियां, साबुत अनाज आदि की मात्रा बढ़ाकर अल्ज़ाइमर से बचा जा सकता है. इनके सेवन से न स़िर्फ दिल संबंधी ख़तरे कम होते हैं, बल्कि डिमेंशिया के ख़तरे को भी कम करने में भी मदद मिल सकती है.
  • तनाव से दूर रहकर, संतुलित भोजन करके और पर्याप्त नींद लेकर भी अल्ज़ाइमर से बचा जा सकता है.

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याददाश्त कमजोर होने पर क्या खाएं?
ऐसे कई सुपरफूड हैं जो याददाश्त तेज़ करने में सहायक हैं. यदि आपकी याददाश्त कमज़ोर हो रही है, तो आप भी ये सुपरफूड ज़रूर खाएं.

  • बादाम और ड्राईफ्रूट्स दिामग़ तेज़ करने और याददाश्त बढ़ाने के लिए बहुत सहायक हैं इसलिए अपने डेली डायट में ज़रूर शामिल करें.
  • दिमाग को सक्रिय बनाए रखने के लिए एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी खाएं. विटामिन ई से भरपूर स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी खाने से न स़िर्फ तनाव कम होता है, बल्कि मानसिक समस्याओं से भी निजात मिलती है.
  • ब्रोकली का सेवन करने से दिमाग़ तेज़ होता है. ब्रोकली में मैग्नीशियम, कैल्शियम, ज़िंक और फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिससे दिामग़ तेज़ होता है और हड्डियां भी मज़बूत होती हैं.
  • अल्जाइमर के दौरान दिमाग में बढ़ने वाले जहरीले बीटा-एमिलॉयड नामक प्रोटीन के प्रभाव को ग्रीन टी के सेवन से कम किया जा सकता है.
  • हरी पत्तेदार सब्जियां, बींस, साबुत अनाज, मछली, जैतून का तेल आदि अल्ज़ाइमर रोग से लड़ने में मदद करते हैं.

पैरों-हाथों के जोड़ों या उंगलियों में तेज़ दर्द, घुटना मोड़ने में तकलीफ, उठते-बैठते समय दर्द आदि लक्षणों को थकान समझकर अनदेखा न करें. ये यूरिक एसिड बढने का लक्षण हो सकते हैं, जिसका ट्रीटमेंट करके इन  तकलीफों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है.


यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण

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– ज्वाइंट पेन
– उठने-बैठने में तकलीफ होना
– जोड़ों में गांठ जैसा महसूस होना
– हाथों-पैरों की उंगलियों में तेज़ दर्द होना, जो कई बार असहनीय भी हो जाता है.
– दर्द की वजह से थकान या लो एनर्जी-सी महसूस होती रहती है.

कैसे जानें, क्या टेस्ट्स करें?

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अगर आपकी बॉडी में उपरोक्त में से कोई लक्षण दिखता है, तो अपने फिज़िशियन से मिलकर ज़रूरी टेस्ट्स और ट्रीटमेंट करवाएं. आपके फिज़िशियन आपको एक ब्लड टेस्ट करने की सलाह देंगे, जिससे आपकी बॉडी में यूरिक एसिड के लेवल का पता चल जाएगा.


क्यों बढता है यूरिक एसिड

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– असंतुलित लाइफस्टाइल और गलत खान-पान यूरिक एसिड बढने का सबसे बड़ा कारण है.
– डायबिटीज़ की दवाओं से भी यूरिक एसिड बढता है. इसलिए डायबिटीज़ के मरीज़ ज़्यादा रिस्क जोन में हैं.
– जो लोग ज़्यादा व्रत रखते हैं, उनका यूरिक एसिड लेवल भी अस्थाई रूप से हाई रहता है.
– रेड मीट, सी फूड, मशरूम, दाल, राजमा, टमाटर, भिंडी, पनीर, चावल  से भी यूरिक एसिड बढता है.
– इसके अलावा ब्लड प्रेशर की गोलियां. कैंसर ट्रीटमेंट के लिए इस्तेमाल की जानेवाली दवाएं और पेनकिलर्स भी यूरिक एसिड के ख़तरे को बढाते हैं.
– इसके अलावा यूरिक एसिड के बढे हुए लेवल के लिए वंशानुगत कारण भी ज़िम्मेदार होते हैं.

ये करें
– फाइबर युक्त डायट लें. दलिया, पालक, ब्रोकली आदि के सेवन से शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा कंट्रोल हो जाती है.
– अधिक से अधिक मात्रा में पानी पीएं. इससे रक्त में मौजूद अतिरिक्त यूरिक एसिड यूरिन द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है.


–  यदि दर्द बहुत ज्यादा है तो दर्द वाले स्थान पर बर्फ सेंके.
– डॉक्टर को कंसल्ट करके खान-पान की आदत बदलें शरीर में जमा अतिरिक्त यूरिक एसिड को निकालने के लिए डायट में फल, हरी सब्ज़ी, मूली का जूस, दूध, बिना पॉलिश किए गए अनाज इत्यादि शामिल करें.
– रोज़ाना 500 मिलीग्राम विटामन सी लें. एक दो महीने में यूरिक एसिड काफी कम हो जाएगा.
– कुकिंग के लिए ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करें. इसमें विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है, जो खाने को पोषक बनाता है और यूरिक एसिड को कम करता है.
– अजवाइन का अर्क भी फायदेमंद है. ये गठिया की तकलीफ को कम करता है और यूरिक एसिड को भी नियंत्रित रखता है.
– दिन में कम से कम दो से तीन लीटर पानी पीएं. पानी की पर्याप्त मात्रा से शरीर का यूरिक एसिड पेशाब के रास्ते से बाहर निकल जाएगा.

बचें इन चीज़ों से
– अल्कोहल से दूर रहें, ख़ासकर बीयर से. इससे यूरिक एसिड बढता है.
– स्मोकिंग, दही, चावल, अचार, पालक, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, पैक्ड फूड आदि से दूर रहें. ये सब यूरिक एसिड की समस्या को और ज़्यादा बढा देती हैं.
– खाना खाते समय पानी न पीएं. हेल्दी रहना चाहते हैं, तो खाने के एक घंटा पहले या बाद में ही पानी पीना चाहिए.

ईज़ी रेमेडीज़
एप्पल साइडर विनेगरः एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर एप्पल साइडर विनेगर का सेवन शरीर में यूरिक एसिड के लेवल को बनाए रखता है.

इलायचीः छोटी इलायची का नियमित सेवन से भी यूरिक एसिड कम होता है, साथ ही ये कोलेस्ट्रॉल के लिए भी फायदेमंद है.
 
प्याज़ः प्याज़ खाने से भी यूरिक एसिड कंट्रोल में रहता है. इसलिए इसे अपने नियमित भोजन का हिस्सा बनाएं.


बेकिंग सोडाः एक ग्लास पानी में आधा टीस्पून बेकिंग सोडा मिलाकर पीएं. इससे यूरिक एसिड का लेवल मेंटेन रहता है. अगर शरीर में सोडियम की अधिकता है तो बेकिंग सोडा लेते समय सावधानी बरतें.

खूब पानी पीएंः पर्याप्त पानी पीने से यूरिन द्वारा यूरिक एसिड बाहर निकल जाता है. इसलिए दिन भर में कम से तीन से चार लीटर पानी ज़रूर पीएं.

अजवायनः अजवायन को रोज़ाना सेवन भी यूरिक एसिड के लेवल को कम करता है.

विटामिन सीः संतरा, आंवला जैसे विटामिन सी युक्त फलों का सेवन करें. या विटामिन सी की गोलियां लें. एक-दो महीने में ही आपका यूरिक एसिड लेवल नॉर्मल हो जाएगा.

ब्लड प्योरिफाई करने से लेकर बॉडी को डिटॉक्सीफाई करने और एसिड का संतुलन बनाए रखने जैसे बॉडी के कई महत्वपूर्ण फंक्शन किडनी करती है. यानी अगर किडनी हेल्दी है, तो आपके कई बॉडी फंक्शन्स सही तरीके से होते रहेंगे और आप भी हेल्दी रहेंगे. इसलिए ज़रूरी है किडनी की एक्स्ट्रा केयर. इसके लिए सबसे पहले अपनी कुछ ऐसी डेली हैबिट्स को बदलेें, जो आपकी किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

1. कम पानी पीनाः अगर आपको भी कम पानी पीने की आदत है, तो इसे तुरंत छोड़ दें. दिन भर में कम से चार लीटर पानी ज़रूर पीएं. किडनी के सही फंक्शन के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत ज़रूरी है. ये शरीर से सारे टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में किडनी की मदद करता है. कम पानी पीने से किडनी पर बहुत बुरा प्रेशर पड़ता है और शरीर के टॉक्सिन्स भी नहीं निकल पाते. इसलिए किडनी को हेल्दी रखना है, तो खूब पानी पीएं.

Good Health Habits



2. देर तक यूरिन रोकनाः कई लोगों को आदत होती है कि घर से बाहर होने पर घंटों यूरिन रोक कर रखते हैं. लेकिन यूरिन रोकना या घंटों तक पेशाब न करना किडनी को डैमेज कर सकता है. इससे किडनी पर दबाव पड़ता है. इसलिए यूरिन को देर तक रोकने की आदत फौरन बदल दें.

3. दवाओं का बहुत ज़्यादा सेवनः कुछ दवाएं किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं. डॉक्टरों द्वारा प्रिस्क्राइब की गई दवाएं ज़रूरी हैं, लेकिन दवाओं की उतनी ही डोज़ लें जितनी डॉक्टर ने कहा है. बात-बात पर पेनकिलर खाने की भी आदत छोड़ दें. लंबे समय तक पेनकिलर का सेवन आपकी किडनी को ख़राब कर सकता है. इसके अलावा एस्पिरीन और कुछ एंटीबायोटिक दवाएं भी किडनी को डैमेज कर सकती हैं, इसलिए ख़ुद अपने डॉक्टर बनने की कोशिश न करें.

4. ज्यादा मीठा खानाः ज़्यादा मीठा खाना भी किडनी को नुकसान पहुंचाता है. अधिक मीठा खाने से यूरिन से प्रोटीन निकलने लगता है, जो किडनी की हेल्थ के लिए ठीक नहीं है. इसके अलावा मीठी चीज़ों से लगाव डायबिटीज़ का कारण भी बन सकता है और डायबिटीज़ की वजह से किडनी से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है. इसलिए मीठे से दूर ही रहें.

5. अधिक मात्रा में नमक का सेवनः नमक का अत्यधिक सेवन हाई ब्लडप्रेशर का कारण बन सकता है, जिसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है. ब्लडप्रेशर कंट्रोल करने के साथ ही किडनी को सेहतमंद बनाए रखने के लिए दिनभर में 5 ग्राम से अधिक नमक का सेवन करने से बचें.

6. ब्लडप्रेशर को मॉनिटर न करनाः ब्लडप्रेशर को समय-समय पर मॉनिटर करना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि हाई ब्लडप्रेशर किडनी को नुक़सान पहुंचा सकता है. इसलिए रेग्युलर बेसिस पर अपना ब्लड प्रेशर चेक कराते रहें, वरना आपका बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर आपकी किडनी को डैमेज कर सकता है.

7. प्रोटीन का अत्यधिक सेवनः ज़रूरत से ज़्यादा प्रोटीन का सेवन करना भी किडनी के लिए नुक़सानदेह होता है. दरअसल प्रोटीन से रिलीज़ हुए नाइट्रोजन और अमोनिया जैसे टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालना किडनी की ज़िम्मेदारी होती है. अगर आप ज़रूरत से ज़्यादा प्रोटीन का सेवन करेंगे, तो किडनी को अपना काम करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी, जिससेआपकी किडनी समय से पहले ख़राब हो सकती है.

8. पूरी नींद न लेनाः अगर आप भी औसत से कम सोते हैं, तो समझ जाइए कि आपकी किडनी डेंजर जोन में है, क्योंकि कम नींद से भी किडनी में प्रॉब्लम्स होती हैं. दरअसल नींद के दौरान ही हमारा शरीर, किडनी के टिशूज़ हील होते हैं. अगर आप भरपूर नींद नहीं लेते, तो इससे आपकी आर्टरीज़ भी ब्लॉक हो सकती हैं, जिससे आपका ब्लड प्रेशर बढ़ेगा और किडनी को नुकसान पहुंचेगा, इसलिए रोज़ाना 7-8 घंटे की नींद ज़रूर लें.

Good Health Habits



9. विटामिन्स की कमीः रिसर्च से पता चला है कि विटामिन बी 6 और विटामिन डी की कमी से किडनी डैमेज़ होने और किडनी स्टोन होने का ख़तरा बढ़ जाता है, इसलिए अपनी डायट में ताज़ी हरी सब्ज़ियों और फलों को शामिल करें.

10. कैफीन का अधिक सेवनः अध्ययन से ये भी पता चला है कि लंबे समय तक ज़्यादा मात्रा में कैफीन का सेवन किडनी फेलियर की वजह बन सकता है. दरअसल कैफीन से ब्लडप्रेशर बढ़ता है, जो किडनी पर बहुत ज़्यादा प्रेशर डालता है. इसलिए कैफीन का सेवन आज से ही कम कर दें.

11. स्मोकिंगः स्मोकिंग आपके हार्ट और फेफड़े को सबसे ज़्यादा नुकसान तो पहुंचाता ही है, ये आपकी किडनी की हेल्थ के लिए भी ख़तरे की घंटी है. ख़ासकर अगर आपको हाई ब्लडप्रेशर और डायबिटीज़ है और आप स्मोकिंग भी करते हैं, तो आपकी किडनी को ज़्यादा ख़तरा है.


12. एक्सरसाइज़ न करनाः जो लोग रोज़ाना एक्सरसाइज़ नहीं करते, उन्हें कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं. एक्सरसाइज़ न करनेवालों को ब्लडप्रेशर या डायबिटीज़ का ख़तरा भी ज़्यादा होता है. जिसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है. इसलिए हेल्दी किडनी चाहते हैं, तो नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करें.

13. अल्कोहल का सेवनः अल्कोहल का ज़्यादा सेवन भी किडनी पर दबाव बढ़ाता है. ज़रूरत से ज़्यादा शराब पीने से बॉडी डीहाइड्रेट होती है. आपकी यह आदत शरीर के सभी ऑर्गन्स की कार्यप्रणाली को बाधित करती है. इससे किडनी और लिवर पर बुरा प्रभाव पड़ता है और यह दोनों को ख़राब कर सकता है.

14. इंफेक्शन होने पर तुरंत इलाज न करानाः हां ये सच है कि अगर किसी तरह का इंफेक्शन होने पर आप उसका टाइम पर इलाज नहीं कराते, तो वो आपके किडनी पर असर कर सकता है. इसलिए अगर अगली बार आपको फ्लू भी हो, तो एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स करके उसे पूरी तरह ट्रीट करें. स्टडीज़ से पता चला है कि अगर किसी इंफेक्शन का इलाज नहीं कराया गया, तो वो किडनी में भी स्प्रेड हो सकता है और किडनी के फंक्शन को प्रभावित कर सकता है.

Good Health Habits


15. जंक फूड भी बिगाड़ता है किडनी की सेहतः किडनी की प्रॉब्लम्स से बचना चाहते हैं, तो फौरन जंक फूड खाना बंद कर दें. जंक फूड में नमक और कार्बोहाइडेट्स बहुत ज़्यादा मात्रा में होता है, जो आपकी किडनी के लिए नुकसानदायक है.

16. कोल्ड ड्रिंक्स का ज़्यादा सेवन भी किडनी के लिए है बुराः अगर आपक अक्सर ही सोडा या कोल्ड ड्रिंक पीते हैं, तो अपनी ये आदत तुरंत बदल डालिए. रिसर्च से पता चला है कि आर्टिफिशियली स्वीटंड ड्रिंक्स से किडनी फेलियर का ख़तरा दोगुना हो जाता है.


सावधान, ये लक्षण किडनी में प्रॉब्लम्स के संकेत हो सकते हैं

Good Health Habits

– शरीर का वजन अचानक बढ़ने लगना.
– शरीर में अक्सर सूजन रहना.
– अगर आपको यूरिन कम आने लगे.
– पेशाब का रंग गाढ़ा हो जाना या रंग में बदलाव आना भी किडनी प्रॉब्लम का लक्षण हो सकता है.
– जब आपको बार-बार पेशाब होने का एहसास हो, पर पेशाब न हो.
– पेशाब की मात्रा बढ़ जाना या कम हो जाना.
– पेशाब करते वक्त दर्द या जलन महसूस होना.
– पेशाब करते वक्त रक्त का आना.
– झाग जैसा पेशाब आना.
– अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होना.
– चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी.
– हर समय ठंड महसूस होना.
– त्वचा में रैशेज़ और खुजली.

चाहे सिरदर्द हो, कमरदर्द, पीठदर्द या ज्वाइंट पेन- हमेशा पेनकिलर्स लेने से बेहतर है कि कुछ नेचुरल पेनकिलर्स ट्राई करें, होम रेमेडीज़ आज़माएं. इससे दर्द से तो राहत मिलेगी ही, इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होगा.

सिरदर्द

Home Remedies For Pain Relief


– लहसुन की 1-5 कलियों को 1-2 ग्राम नमक के साथ पीसकर खाना खाने के साथ खाएं. इससे वात से उत्पन्न सिरदर्द में आराम मिलता है.
– तुलसी के पत्तों को पीसकर लेप करने से राहत मिलती है.
– 1 कप दूध में पिसी इलायची मिलाकर पीने से भी सिरदर्द में आराम मिलता है.
– अगर तेज़ गर्मी की वजह से सिरदर्द हो तो धनिया पीसकर सिर पर लगाएं.
– सुबह-सुबह उठते ही खाली पेट सेब पर नमक लगाकर खाने से सिरदर्द में लाभ होता है.
– सुबह खाली पेट जलेबियां दूध में डालकर खाने से भी सिरदर्द ठीक हो जाता है.
–  लौकी का गूदा निकालकर एकदम बारीक़ कर लें और माथे पर लेप करें. गर्मी से होने वाले सिरदर्द में बेहद कारगर है.
– दालचीनी को पीसकर माथे पर लेप करने से भी आराम मिलता है.
– गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पीने से गैस से उत्पन्न सिरदर्द में राहत मिलती है.
– गुड़ को पानी में घोल-छानकर पीने से सिरदर्द में आराम मिलता है.
– दही, चावल और मिश्री मिलाकर सूर्योदय से पहले खाने से सूर्योदय के साथ घटने-बढ़ने वाले दर्द में आराम मिलता है.
– दिन में दो बार दही और चावल का सेवन करने से लाभ होता है.
– लौंग पीसकर हल्का गरम करके सिर पर लेप लगाने से दर्द मिटता है.
– केसर को घी में पीसकर सूंघने से माइग्रेन का दर्द चला जाता है.
– गाय का शुद्ध ताज़ा घी सुबह-शाम 2-2 बूंद नाक मेें डालने से आराम मिलता है.
– बड़ी इलायची का छिलका बारीक़ पीसकर हल्का गर्म करके सिर पर लेप करने से आराम मिलेगा.
– सूर्योदय से पहले नारियल व गुड़ के साथ छोटे चने के बराबर कपूर मिलाकर तीन दिन तक खाएं. माइग्रेन का दर्द चला जाएगा. स्मरणशक्ति कमज़ोर होना
– 7 बादाम रात भर पानी मेंें भिगोएं. सुबह पीसकर पेस्ट बना लें, फिर दूध मेंें मिलाकर उबाल कर पीएं. ऐसा 15 से 40 दिनों तक करें.
– 20 ग्राम अखरोट 10 ग्राम किशमिश या अंजीर के साथ खाएं.


इन बातों का भी रखें ध्यान
– सिरदर्द का मुख्य कारण डिहाइड्रेशन और लो ब्लड शुगर है. इसलिए पर्याप्त पानी पीएं और संतुलित आहार लें.
– अगर आपको अक्सर सिरदर्द की शिकायत रहती हो तो एक डायरी रखें और उसमें नोट करें कि कब-कब सिरदर्द हुआ.
– जैसे ही सिरदर्द महसूस हो तुरंत एक्शन लें. कुछ खा या पी लें. अगर लंबे समय से कंप्यूटर के सामने काम कर रहे हों तो छोटा-सा ब्रेक लेकर टहल आएं. इससे दर्द बढने नहीं पाएगा.
– पानी में घुलनेवाला कोई पेनकिलर लें या किसी फिज़ी ड्रिंक के साथ इन्हें लें, ताकि  जल्दी राहत मिले. लेकिन ध्यान रहे, सिरदर्द के लिए ह़फ़्ते में दो या तीन दिन से ज्यादा पेनकिलर्स न लें.

कमर-पीठ दर्द

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– पेनकिलर लेने से बेहतर है कि जहां दर्द है, वहां बर्फ से सेकें. दिन में तीन बार 20 मिनट तक सेंक दें.
– एक ही पोजीशन में ज्यादा समय तक खड़े होने या बैठने से बचें. अगर आप ऑफ़िस में काम करती हैं तो हर 45 मिनट पर ब्रेक लें.
– नीम की नरम पत्तियों को तोड़कर उसका काढ़ा बना लें. फिर रुई या साफ़ कपड़ा हल्के गरम काढ़े में भिगोकर पीठ के दर्द वाले स्थान पर सेंक करें.
– 20 ग्राम तिल, 3 ग्राम सोंठ व 40 ग्राम गुड़ को एक साथ मिलाकर दूध में पीस कर चाटें. दिन में दो बार इसका सेवन करने से तीन दिनों में ही पीठ दर्द गायब हो जाता है.
– 100 ग्राम अजवायन का चूर्ण और 100 ग्राम गुड़ एक साथ मिलाकर रख लें. 5-5 ग्राम यह चुर्ण सुबह-शाम लेने से कमर दर्द दूर होता है.
– अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके पानी में उबालें. छान लें और इस पानी में शहद मिलाकर पीएं.
– 5 ग्राम खजूर को उबालकर उसमें 2 ग्राम मेथी का चूर्ण डालकर नियमित पीने से दर्द से राहत मिलती है.
– कमलककड़ी के चूर्ण को दूध में उबालकर पीने से भयंकर से भयंकर कमर दर्द में आराम मिलता है.
– अदरक को पीसकर दर्दवाली जगह पर लगाएं.
– सुबह उठकर खाली पेट लहसुन की दो कलियां खाएं. आप रोज़ लहुसन के तेल मालिश भी कर सकते हैं.
– सोंठ व गोखरू समभाग में लेकर उसका क्वाथ बनाकर सुबह-शाम पीने से कमर दर्द दूर होता है.

घुटने का दर्द

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Closeup young woman sitting on sofa and feeling knee pain and she massage her knee at home. Healthcare and medical concept.

– राई को पीसकर घुटनों पर उसका लेप करें. तुरंत आराम मिलेगा.
– अजवायन को पानी में उबालकर उसकी भाप घुटनों पर लेने से दर्द से राहत मिलती है.
– लहसुन को पीसकर दर्दवाली जगह पर लगाने से तुरंत राहत मिलती है. पर इसे ज़्यादा देर तक न लगाएं, वरना फफोले पड़ जाएंगे
– आधा टीस्पून सोंठ और हल्दी पाउडर को पानी में उबाल लें. दिनभर घूंट-घूंटकर इसे पीते रहें.
– 50 मि.ली. गाय के दूध में 10 मि.ली. एरंड तेल मिलाकर पीना भी लाभप्रद है.
– नारियल के तेल में सेंधा नमक मिलाकर उसे गरम करके लेप करें और ऊपर से कपड़े की पट्टी रखकर बांध दें.
– लहसुन का कल्क 20 ग्राम, गाय का दूध 20 मि.ली., पानी 200 मि.ली. सब को एक साथ मिलाकर पकाएं. जब केवल दूध शेष रह जाए तो उसे उतार-छानकर पीएं.
 

जोड़ों का दर्द

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– अजवायन को पानी में डालकर पका लें. उस पानी की भाप दर्द वाले स्थान पर दें.
– अजवायन के तेल की मालिश से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है.
– नीम के तेल की मालिश भी काफ़ी लाभदायक है.
– सोंठ, काली मिर्च, बायविडंग और सेंधा नमक का चूर्ण बनाकर रख लें. इस चूर्ण को 3-3 ग्राम की मात्रा में शहद में मिलाकर चाटें.
– बथुआ के ताज़े पत्तों का रस 15 ग्राम प्रतिदिन पीने से जोड़ों का दर्द दूर होता है. इस रस में नमक, शक्कर आदि न मिलाएं. हर रोज़ सुबह खाली पेट लें. इसके सेवन के आगे-पीछे दो घंटे तक कुछ न लें. यह प्रयोग 2-3 महीने तक करें.
– 100 ग्राम मेथीदाने को भूनकर चूर्ण बना लें. 50 ग्राम सोंठ, 25 ग्राम हल्दी, 250 ग्राम मिश्री- सभी को पीसकर मिलाकर बॉटल में भर लें. सुबह-शाम एक-एक चम्मच दूध के साथ लें.
– हरड़, सोंठ और अजवायन समान मात्रा में लेकर कपड़छन चूर्ण बना लें. सुबह-शाम 5 ग्राम की मात्रा में गरम पानी से लें.
– दिन में चार-पांच बार टमाटर का सेवन करते रहें या टमाटर का एक ग्लास रस सुबह-शाम पीने से आश्‍चर्यजनक रूप से लाभ होगा.
– लहसुन पीसकर लगाने से बदन के हर अंग का दर्द जाता रहेगा. लेकिन इसे ज़्यादा देर तक लगाकर न रखें, वर्ना फफोले पड़ने का डर रहेगा.
– कड़वे तेल में अजवायन और लहसुन जलाकर उस तेल की मालिश करने से हर तरह के दर्द से छुटकारा मिलता है.
– लहसुन की दो कलियां कुचलकर तिल के तेल में डालकर तेल गर्म कर लेें और जोड़ोें की मालिश करेें.
– 10 मि.ली. एरंड के तेल को सोंठ के काढ़े मेें मिलाकर सुबह-शाम पीने से लाभ होता है.


एड़ियों में दर्द


– सबसे पहले सही फूटवेयर का चुनाव करें. एड़ियों में दर्द का अर्थ है कि आपके चलने की स्टाइल में दोष है या फिर आपको फूटवेयर सही नहीं है. हाई हील या अकंफ़र्टेबल चप्पलों से बचें.
– ये करें- किसी समतल जगह पर खड़े हो जाएं. एड़ियों पर प्रेशर दें. 30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें. दिन में पांच बार ये एक्सरसाइज़ करें.
– पैरों को बारी-बारी से पहले गर्म और ठंडे पानी में डुबोएं.

कान का दर्द

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– सरसों का तेल हल्का गर्म करके डालने से कान का दर्द में आराम मिलता है.
– प्याज़ का रस गुनगुना करके डालने से दर्द में तुरंत आराम मिलता है.
– अदरक का रस भी गुनगुना करके डालना काफ़ी कारगर होता है.
– तुलसी के पत्तों को पीसकर रस निकाल लें. इस रस को हल्की आंच पर रखकर थोड़ा गरम करें और कान में डालें.
– एक चम्मच तिल के तेल में लहसुन की आधी कली डालकर कुनकुना गरम करके दर्द वाले कान में 4-4 बूंदें डालकर दूसरी करवट दस मिनट तक लेटें रहें.
– एरंडी के पत्तों को गरम तिल के तेल में डुबोकर उससे कानों के आसपास हल्का सेंक करें.
– कान से पस (मवाद) आता हो तो गुग्गुल का धुआं कान पर लें.
– तुलसी के पत्तों को पीसकर रस निकाल लें. इस रस को हल्की आंच पर रखकर थोड़ा गरम करें और कान में डालें. इससे कान का दर्द मिटता है.
– मुलहठी को पीसकर घी मेें मिलाकर हल्का गर्म करके कान के आसपास लेप करने से दर्द में आराम मिलता है.
– एक भाग अजवायन का तेल और तीन भाग सरसों का तेल मिलाकर मंद आंच पर गुनगुना करके कान में डालें.
– मूली को बारीक़ टुकड़ों में काट कर सरसों के तेल में ख़ूब गर्म करें. फिर इस तेल को कपड़े से छानकर शीशी में रख लें. जब कभी भी कान में दर्द हो तो इस तेल को डालें. आराम लेगा.

दुनियाभर में लगभग 8-12 फ़ीसदी जोड़ों को बांझपन यानी इन्फर्टिलिटी की समस्या का सामना करना पड़ता है. इसमें 40-50 फ़ीसदी बांझपन के मामलों में एक महिला गर्भधारण करने में सक्षम नहीं होती है, तो वो पुरुष बांझपन के कारण होता है. महिला प्रजनन क्षमता के विषय पर व्यापक रूप से चर्चा करने पर यह पाया गया कि एंडोमेट्रियोसिस और पॉलीसिस्टिक डिम्बग्रंथि सिंड्रोम (पीसीओएस) जैसी स्थिति महिला बांझपन और जटिलताओं के लिए काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार हैं.
जबकि पुरुष बांझपन की स्थितियों में संक्रमण, हार्मोनल असंतुलन, मोटापा, स्तंभन दोष, प्रतिगामी स्खलन, भारी धातुओं, रसायनों जैसे जोख़िम शामिल हैं. इसके लक्षण प्रदर्शित नहीं होते, इसलिए इन अंतर्निहित स्थितियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. अक्सर गर्भ धारण करने की प्लानिंग करते समय इसका पता चलता है. पुरुष बांझपन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर डॉ. क्षितिज मुर्डिया जो इंदिरा आईवीएफ (आईवीएफ और इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ) के सीईओ हैं, ने महत्वपूर्ण जानकारियां दीं.

पुरुष बांझपन के कारण

जीवनशैली
पुरुषों में बांझपन का एक प्रमुख कारण अस्वस्थ जीवनशैली माना गया है. इसलिए डॉक्टर्स पौष्टिक आहार और नियमित रूप से व्यायाम के साथ-साथ जीवनशैली में संतुलन बनाए रखने की सलाह देते हैं. जीवनशैली में बदलाव लाकर और तनाव घटाकर उन हार्मोन को कम किया जा सकता है, जो शरीर में शुक्राणु उत्पादन को प्रभावित करते हैं.

तनाव
वर्तमान में ऑफिस या बिज़नेस पर अत्याधिक दबाव ने पुरुषों में तनाव के स्तर को बढ़ा दिया है, जो उनके प्रजनन स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है. तनाव का न केवल पुरुषों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर सीधा प्रभाव पड़ता है, बल्कि इसका असर शारीरिक भी होता है. तनाव के कारण वे हार्मोन रिलीज़ हो सकते हैं, जो टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम कर सकते हैं. साथ ही ग्लूकोकोर्टिकोइड्स जैसे शुक्राणु उत्पादन को भी कम कर सकते हैं.

मादक पदार्थ
अल्कोहल, तंबाकू, धूम्रपान जैसे पदार्थों का सेवन प्रजनन स्वास्थ्य में बाधा डालता है. ये पुरुषों में विभिन्न प्रजनन जटिलताओं के लिए अग्रणी वीर्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं. तंबाकू को कम शुक्राणुओं की संख्या के साथ जोड़ा गया है, क्योंकि यह शुक्राणुजनन को प्रभावित करता है.

विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आना
कीटनाशकों, रेडियोधर्मी रसायनों, भारी धातुओं आदि जैसे विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आना और पुरुषों में वृषण क्षेत्र का गर्म होना उनकी प्रजनन क्षमता के लिए हानिकारक होता है.
ऐसे मामलों में स्पर्म काउंट और अन्य पहलुओं पर विचार करने के बाद ही सफल गर्भाधान के लिए उपचार और संशोधनों का सुझाव दिया जाता है, जिनमें से सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) भी है.
बांझपन को दूर करने के लिए जीवनशैली में बदलाव करके नियमित व्यायाम, स्वस्थ और संतुलित आहार लेने के साथ-साथ अल्कोहल, तंबाकू जैसे पदार्थों के सेवन से बचकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है. इसके अलावा प्रजनन क्षमता विशेषज्ञ के अनुसार, दवाओं और सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी विधियों जैसे कि इंट्राकाइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) और आईएमएसआई (इंट्राकाइटोप्लास्मिक मॉर्फोलॉगिक रूप से चयनित शुक्राणु इंजेक्शन) भी पुरुष बांझपन को दूर करने में मददगार हो सकते हैैं.

– ऊषा गुप्ता

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