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हैप्पी फैमिली के लिए न भूलें रिश्तों की एलओसी (Boundaries That Every Happy Family Respects)

किसी ने बहुत ख़ूब कहा है कि मर्यादाएं (Limitations) ज़रूरी हैं रिश्तों (Relationships) के दरमियां, जब ये टूटती हैं, परिवार बिखर जाते हैं. हंसी-मज़ाक, छेड़छाड़ और शरारतें तो हर रिश्ते में होती हैं, पर ये चीज़ें मर्यादा में रहें, तभी अच्छी लगती है, क्योंकि हद पार करते ही ये अर्मादित हो जाती हैं. तो क्यों न आप भी समझें रिश्तों की एलओसी, ताकि रिश्तों में कभी कोल्ड वॉर न आए.

Relationships Goals

क्या है एलओसी?

जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारे पैरेंट्स, दोस्तों और रिश्तेदारों से हम बहुत कुछ सीखते हैं. रिश्तों को मान-सम्मान देना, प्यार-विश्‍वास, त्याग और समर्पण जैसी कई चीज़ें सीखते हैं. इन्हीं सबको देखकर हम रिश्तों की मर्यादा यानि लाइन ऑफ कंट्रोल ड्रॉ करना भी सीखते हैं. साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी कहती है कि ये चीज़ें हम में पैदाइशी नहीं होतीं, बल्कि समय के साथ धीर-धीरे सीखते हुए आती हैं. बहुत-से लोगों को यह ग़लतफ़हमी होती है कि अगर हम अपनी लाइन ड्रॉ करेंगे, तो लोग उसे दीवार समझकर हमें ग़लत न समझ बैठें, जबकि ऐसा है नहीं. आपको क्या सही लगता है, क्या ग़लत लगता है, बताने से आपके साथ-साथ सामनेवाले का भी मान-सम्मान बना रहता है.

क्यों ज़रूरी है एलओसी ड्रॉ करना?

हर रिश्ते की अपनी मर्यादा होती है, लेकिन इसे शुरू हमें ख़ुद से करना होता है. यह कोई ऐसी चीज़ नहीं, जो हम दूसरों के लिए करते हैं, बल्कि मर्यादाओं का पालन हम अपनी सुरक्षा और मान-सम्मान के लिए करते हैं.

– रिश्तों में एलओसी या मर्यादा ख़ुद की सुरक्षा के लिए ज़रूरी होती है. अगर आप लाइन ड्रॉ नहीं करेंगे, तो लोग उसे क्रॉस करके आपके
मान-सम्मान को चोट पहुंचा सकते हैं.

– ताकि आप किसी और की ग़लतफ़हमी का शिकार न बनें.

– आप परिस्थितियों का शिकार न बन जाएं.

– इसके बिना लोग आपको फॉर ग्रांटेड लेते हैं.

रिश्तों की बाउंड्रीज़

1. फिज़िकल बाउंड्रीज़़

सबसे पहले जो बाउंड्री हम सीखते हैं, वो है किसी से किसी दूरी बनाए रखें. आमतौर पर बच्चों को सिखाया जाता है कि किसी से भी एक हाथ की दूसरी पर रहकर ही बात करनी चाहिए. ऐसे बहुत-से लोग हैं, जो इस दूरी का ध्यान नहीं रखते, जिससे दूसरे को असहजता महसूस होती है.

– परिवार में भी इस बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए, क्योंकि किसी का भी बार-बार टच करके बात करना सभी को पसंद नहीं आता.

– अगर आपको भी यह पसंद नहीं, तो उससे भागने की बजाय अपनी बात प्यार से समझाएं.

– कुछ दोस्तों को भी हमेशा टच करके बात करने की आदत होती है, आप प्यार से अपने दोस्त को अपनी बाउंड्री के बारे में समझाएं.

2. इमोशनल बाउंड्री

– पैरेंट्स, भाई-बहन, पति या पत्नी से इमोशनली इस कदर जुड़े होते हैं कि उनके बिना रह पाने के बारे में सोच भी नहीं पाते. लेकिन दूसरों से एक भावनात्मक दूरी बनाए रखते हैं.

– हमें इमोशनली इतना मज़बूत होना चाहिए कि किसी भी मुश्किल हालात में डटे रहें.

– किसी पर इमोशनली इतने डिपेंडेंट न हो जाएं कि उसके बिना जीने की कल्पना भी आपको दूभर लगे.

3. डिजिटल बाउंड्री

आजकल रिश्तों में इस बाउंड्री की बहुत ज़रूरत है. आपकी प्राइवेसी आपके अपने हाथ में है. अपनी डिजिटल लाइफ में किससे कितनी
दूरियां-नज़दीकियां रखनी हैं, यह आपको ख़ुद तय करना होगा.

– रोशनी की 17 वर्षीया बेटी ने उसके मोबाइल पर उसके दोस्त द्वारा भेजी ईमोजी देखी. जिसे देखकर उसे ग़लतफ़हमी हो गई कि मम्मी का उनके दोस्त के साथ अफेयर है, जबकि ऐसा कुछ नहीं था. न रोशनी ने और न ही उनकी बेटी ने डिजिटल बाउंड्री का ख़्याल रखा, जिससे उनके रिश्ते में ग़लतफ़हमी आ गई. डॉ. चित्रा मुंशी कहती हैं कि हैप्पी फैमिली के लिए ज़रूरी है कि आप एक-दूसरे के मोबाइल चेक न करें. पैरेंट्स का बच्चों पर नज़र रखना अलग बात है, लेकिन हर किसी को अपनी डिजिटल बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए.

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हैप्पी फैमिली टिप्स

– बाउंड्री बनाना सबसे कठिन काम है, इसलिए अचानक से लाइन ड्रॉ न करें, वरना सब आपको घमंडी और मगरूर समझ बैठेंगे. धीरे-धीरे बताएं कि मुझे यह पसंद नहीं.

– परिवार में अगर किसी ने लाइन क्रॉस की है, तो उनकी ग़लती बताने की बजाय, वह आपको पसंद नहीं ऐसा बोलें.

– ‘आप ऐसे कैसे बोल सकते हैं’ कि बजाय ‘मुझे इस बात से तकलीफ़ हुई’ ऐसा बोलें.

हर रिश्ते में हो मर्यादा: माता-पिता, भाई-बहन या फिर पति-पत्नी ही क्यों न हों, सभी को अपने रिश्तों की गरिमा बनाए रखनी चाहिए. पैरेंट्स हों या भाई-बहन हर किसी से बात करते समय मर्यादा का ध्यान रखें.

मज़ाक किसी को शर्मिंदा न करे: मज़ाक अगर किसी के मान-सम्मान को चोट पहुंचानेवाला हुआ, तो वो मज़ाक नहीं रह जाता. ऐसे भी बहुत-से लोग हैं, जो मज़ाक के बहाने कटाक्ष करते हैं और बुरा लगने पर कहते हैं कि वो तो मज़ाक कर रहे थे. ऐसे मज़ाक कभी न करें, जिससे उस व्यक्ति को दूसरों के सामने शर्मिंदगी महसूस हो.

झिड़की और फटकार प्यार नहीं: अक्सर लोग बड़ों से बात करते समय मर्यादा का ख़्याल रखते हैं, पर छोटो को झिड़कना और फटकारना अपना अधिकार समझते हैं. बच्चों के सम्मान का भी ख़्याल रखें.

दोस्त बनें कॉपीकैट नहीं: दोस्ती का मतलब एक-दूसरे को समझना, बातें शेयर करना और हक़ जताना है, पर कुछ लोग हक़ जताने के चक्कर में वही करने लगते हैं, जो उनका दोस्त करता है. उसी के जैसी हरकतें करना, कपड़े पहनना, सोशल स्टेटस रखना जैसी चीज़ें आपके दोस्त को इरिटेट कर सकती हैं. अपनी दोस्ती की मर्यादा बनाए रखें और दोस्त को कभी कॉपी न करें.

कपल्स भी न भूलें एलओसी

काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ ने बताया कि रिश्तों में मर्यादा इसलिए भंग होती है, क्योंकि हर किसी के लिए इसके मायने अलग होते हैं. जो हमारे लिए सही है, ज़रूरी नहीं कि वो पार्टनर को भी सही लगे.

– पति-पत्नी के रिश्ते में लाइन क्रॉस करने के मामले सबसे ज़्यादा होते हैं, क्योंकि एक-दूसरे को कंट्रोल करने की भावना इनमें प्रबल होती है.

– पार्टनर को कितना हंसना चाहिए, कितना बोलना चाहिए, किससे मिलना चाहिए, किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए?
हैप्पी टिप्स

– प्यार का मतलब कंट्रोल करना नहीं, बल्कि आज़ादी देना है, इसलिए अपने प्यार को कभी कंट्रोल करने की कोशिश न करें.

– आप अपनी लाइन क्रॉस नहीं करेंगे, तो पार्टनर भी अपनी हद का ख़्याल रखेगा.

– शादी से पहले ही इन चीज़ों में क्लारिटी रखें.

– आप जो भी हैं, जैसी भी पार्टनर से उम्मीदें हैं, उनसे शेयर करें.

– पार्टनर के लिए और फैमिली के लिए आप जितना कर सकती हैं, वह अपने पार्टनर को बताएं. अपनी लिमिटेशन्स आपको ख़ुद बतानी होंगी.

– पार्टनर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें भले ही कितना भी ग़ुस्सा आए, वो हाथ नहीं उठा सकते, ग़लत बात नहीं कह सकते.

– सुनीता सिंह

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कैसे मनाएं सेफ दिवाली? (How To Celebrate Happy And Safe Diwali)

Diwali

कैसे मनाएं सेफ दिवाली? (How To Celebrate Happy And Safe Diwali)

दिवाली (Diwali) रोशनी का त्योहार (Festival) है. यह अपने साथ ढेर सारी ख़ुशियां लाती है. हम सभी इस त्योहार को पूरे धूमधाम से उमंग-उत्साह से मनाते है. लेकिन इस रोशनी के पर्व में थोड़ी सावधानी भी बेहद ज़रूरी है यानी फेस्टिवल मनाएं, पर सेफ्टी (Safety) का भी पूरा ख़्याल रखें, विशेषकर पटाखे जलाते समय. यहां पर हम कुछ सेफ्टी रूल्स (Safety Rules) बता रहे हैं.

–    पटाखे जलाते समय पैरों में चप्पल या जूते ज़रूर पहनें. कभी भी नंगे पांव पटाखे न जलाएं.

–    पटाखे हमेशा खुली जगह पर जलाएं यानी कभी भी घर के अंदर या बंद स्थान पर पटाखे ना फोड़ें. पटाखे जलाने के लिए घर के बाहर, छत पर या फिर आंगन भी ठीक है.

–    साथ ही आसपास देख लें कि कहीं कोई आग फैलानेवाली या फ़ौरन आग पकड़नेवाली चीज़ तो नहीं है.

–    बच्चे-बड़े सभी पटाखे जलाते समय आसपास बाल्टी भरकर पानी ज़रूर रखें. साथ ही जलने पर लगनेवाली इमर्जेंसी दवाएं भी

ज़रूर रखें.

–    यदि पटाखे से जल जाएं, तो जले हुए स्थान पर तुरंत पानी के छींटें मारें.

–    हमेशा लाइसेंसधारी और विश्‍वसनीय दुकानों से ही पटाखे ख़रीदें.

ये न करें…

–    कुछ लोग बहादुरी दिखाने के लिए पटाखे हाथ में पकड़कर जलाने की कोशिश करते हैं. ऐसा न करें, क्योंकि ऐसा करने से पटाखों के हाथ में फटने और दुर्घटना होने की संभावना रहती है.

–    पटाखों को दीये या मोमबत्ती के आसपास ना जलाएं.

–    जब आपके आसपास कोई पटाखे जला रहा हो, तो उस समय आप भी पटाखे ना जलाएं.

–   बिजली के तारों के आसपास क्रैकर्स न फोड़ें.

–   यदि किसी पटाखे को जलने में बहुत अधिक समय लग रहा है, तो उसे दोबारा ना जलाएं, बल्कि किसी सेफ जगह पर फेंक दें.

–   आधे जले हुए पटाखों को इधर-उधर ना फेंकें. उसे पानी में डुबोकर फेंक दें.

–    रॉकेट जैसे पटाखे ऐसे समय में बिल्कुल न जलाएं, जब ऊपर किसी तरह की रुकावट जैसे पेड़, बिजली के तार आदि हों.

–   दीपावली पर कॉटन के कपड़े पहनकर ही पटाखों का आनंद लें. ध्यान रहे, रेशमी या फिर नायलॉन के आउटफिट बिल्कुल भी न पहनें.

–    खुली फ्लेम के कारण पटाखे जलाने के लिए माचिस या लाइटर का इस्तेमाल न करें, यह ख़तरनाक हो सकता है.

–    कभी भी छोटे बच्चों के हाथ में कोई पटाखा न दें.

–   यदि आपकी कार है, तो उसे गैराज में रख दें या फिर उसे अच्छी तरह से कवर कर दें.

–   दीपावली पर घर की खिड़कियां बंद ही रखें तो अच्छा है. साथ ही उन पर रेशमी पर्दे न लगाएं, वरना कोई चिंगारी लगने पर तेज़ी से आग फैलने का डर बना रहता है.

–   सभी पटाखों को हमेशा किसी बंद डिब्बे में ही रखें, विशेषकर दिवाली की रात को.

–    क्रैकर्स जलाते समय पैकेट में दिए गए निर्देशों को भी ज़रूर देख लें और उसी के अनुसार पटाखों को जलाएं.

–   बेहतर होगा कि पटाखे जलाते समय फुल स्लीव्स के ड्रेसेस ही पहने जाएं.

–    पटाखों का आनंद लेते समय किसी इमर्जेंसी वाली सिचुएशन के लिए भी तैयार रहें.

–   यदि आप बहुत सारे लोगों के साथ मिलकर पटाखे जला रहे हैं, तो इस बात का ख़्याल रखें कि एक समय में एक ही शख़्स पटाखे जलाए, क्योंकि यदि कई लोग साथ-साथ पटाखे जलाएंगे, तो दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है.

–    यदि आपके घर में पालतू जानवर, जैसे- बिल्ली, डॉगी आदि हैं, तो उन्हें पटाखों से दूर ही रखें. बेज़ुबान जानवर दिवाली के दिन शोर-शराबे से बेहद परेशान हो जाते हैं. यदि संभव हो, तो उनके कान में कॉटन डाल दें.

–    भीड़वाली जगह, पतली गलियों या घर के पास में पटाखे न जलाएं.

–    छोटे बच्चों को ख़ुद से पटाखे न जलाने दें. उनके साथ किसी बड़े को ज़रूर रखें.

–    कभी भी पैंट की जेब में पटाखे न रखें.

–    ढीले-ढाले कपड़े पहनकर पटाखे न जलाएं.

–    जहां पर पटाखे रखे हों, वहां पर माचिस की जली तीली या फिर अगरबत्ती आदि न फेंकें.

–    ध्यान रहे, कभी भी पटाखों के साथ कोई एक्साइटमेंट या फिर एक्सपेरिमेंट करने का प्रयास न करें. यह ख़तरनाक हो सकता है.

–    सड़क के कुत्तों या फिर अन्य जानवरों को पटाखों से परेशान न करें.

–   पटाखे जलाते समय पेट्रोल, गैस सिलेंडर, डीज़ल, केरोसिन आदि चीज़ें आसपास न हों, इस बात का ख़्याल रखें.

–   यदि पटाखे जलाते समय जल जाएं, तो तुरंत टूथपेस्ट व बरनॉल लगाएं. आवश्यक लगे, तो डॉक्टर को दिखाएं.

– सावित्री गुप्ता

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सोशल मीडिया रिलेशन: अधूरे रिश्ते… बढ़ती दूरियां… (Impact Of Social Media On Relationships)

 Social Media Relationships
सोशल मीडिया रिलेशन: अधूरे रिश्ते… बढ़ती दूरियां… (Impact Of Social Media On Relationships)

डिजिटल (Digital) होती दुनिया में रिश्ते (Relationships) भी डिजिटल हो चुके हैं. अब तो पति-पत्नी भी आसपास बैठकर सोशल मीडिया (Social Media) के ज़रिए ही एक-दूसरे से बात करते हैं. वहीं दूसरी ओर रियल लाइफ से दूर अब हमारे डिजिटल रिश्ते (Digital Relationships) भी बहुत सारे बन गए हैं, जो हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण भी हो गए हैं, क्योंकि उनमें अलग तरह का आकर्षण है. वहां रोक-टोक नहीं है, वहां हर बात जायज़ है… ऐसे में हमें वो भाते हैं और बहुत ज़्यादा लुभाते हैं.

–    सोशल मीडिया एडिक्शन की तरह है, यह बात शोधों में पाई गई है. यह एडिक्शन मस्तिष्क के उस हिस्से को एक्टिवेट करता है, जो कोकीन जैसे नशीले पदार्थ के एडिक्शन पर होता है. यही वजह है कि सोशल साइट्स से दूर रहने को एक तरह से लोग बहुत बड़ा त्याग या डिटॉक्सिफिकेशन मानते हैं.

–    यहां पनपे रिश्ते शुरुआत में बेहद आकर्षक और ख़ूबसूरत लगते हैं, क्योंकि सबकुछ एकदम नया लगता है.

–    अंजान लोग दोस्त बनते हैं और उनके बारे में सबकुछ जानने को आतुर हो जाते हैं.

–    न स़िर्फ उनके बारे में हम जानना चाहते हैं, बल्कि अपने बारे में भी सबकुछ बताने को उतावले रहते हैं.

–    यहां हमें इस बात का आभास तक नहीं होता कि इनमें से कौन, कितना सच बोल रहा होता है? अपने बारे में कौन किस तरह की जानकारी साझा कर रहा होता है और उनका इरादा क्या होता है.

–    डिजिटल रिश्तों में सबसे बड़ा ख़तरा फ्रॉड या धोखे का होता है. यहां कोई भी आपको आसानी से बेव़कूफ़ बना सकता है.

–    दरअसल, जो सोशल मीडिया के रिश्ते हमें इतने भाते हैं, वो उतने ही अधूरे होते हैं. कई बार तो साल-दो साल गुज़रने के बाद पता चलता है कि जिससे हम बात कर रहे थे, वो तो ये था ही नहीं.

–    इतने फेक अकाउंट्स, इतनी फेक आईडीज़, इतना दिखावटी अंदाज़… पर यही सब हमें इतना रियल लगता है कि अपने रिश्तों में दूरियां बढ़ाकर हम इन नक़ली रिश्तों के क़रीब जाते हैं.

–    एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि जो लोग सोशल साइट्स पर अधिक समय बिताते हैं, वो अधिक अकेलापन और डिप्रेशन महसूस करते हैं, क्योंकि जितना अधिक वो ऑनलाइन इंटरएक्शन करते हैं, उतना ही उनका फेस टु फेस संपर्क लोगों से कम होता जाता है. यह स्टडी यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन द्वारा की गई थी.

–    आपसी रिश्तों में हम पर बहुत सारी ज़िम्मेदारियां और जवाबदेही होती है, जबकि सोशल मीडिया रिलेशन इन सबसे मुक्त होते हैं, तो ऐसे में ज़ाहिर है ये रिश्ते हमें अच्छे लगने लगते हैं.

–    इन रिश्तों का मायाजाल ऐसा होता है कि हम इन्हें अपने पल-पल की ख़बर देना चाहते हैं और अपनी लाइफ को बहुत हैप्पनिंग दिखाना चाहते हैं, जबकि रियल रिश्तों में हमारी दिलचस्पी कम होने लगती है.

–    हम भले ही डिजिटल रिश्तों में अपनी ख़ुशियां ढूंढ़ने की कोशिश करें, लेकिन सच्चाई तो यही है कि ये सबसे अधूरे रिश्ते होते हैं, क्योंकि ये झूठ की बुनियाद पर अधिक बने होते हैं.

–    इनमें कई आवरण और नक़ाब होते हैं, जो परत दर परत धीरे-धीरे खुलते हैं और कभी-कभार तो हमें पता भी नहीं चलता और हम फरेब के मायाजाल में फंसते चले जाते हैं.

–    रियल रिश्तों में हमारा कम्यूनिकेशन कम होने लगता है और प्यार की गर्माहट भी घटती चली जाती है. जब तक होश आता है, तब तक बहुत कुछ हाथ से निकल चुका होता है.

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इस तरह छलता है सोशल मीडिया का रिश्ता…

मुंबई की रहनेवाली 35 वर्षीया आशा यूं तो अपनी  ज़िंदगी से और शादी से ख़ुश थी, पर कहीं न कहीं उसे सोशल मीडिया की ऐसी लत लग गई थी कि वो वहां अपनी ज़िंदगी के अधूरेपन को कम करने की कोशिशों में जुट गई थी. उसे हमेशा शिकायत रहती थी कि उसका पति उसे पूरा समय नहीं दे पाता. वो उसको पहले की तरह पैंपर नहीं करता… ऐसे में वो एक लड़के के संपर्क में आई. उसका नाम राजेश था. उसकी राजेश से रोज़ बातें होने लगीं. ये बातें अब इतनी बढ़ गई थीं कि मुलाक़ात करने का मन बनाया.

आशा का 5 साल का बेटा भी था, पर उसने किसी तरह अपने पति से झूठ कहा कि वो ऑफिस की तरफ़ से ट्रेनिंग के लिए दूसरे शहर जा रही है. वो राजेश के साथ होटल में रहने गई, तो उसे पता चला कि वो अकेला नहीं आया. उससे मिलने उसके साथ उसके दो दोस्त भी हैं.

ये पहला झटका जो आशा को लगा. उसके बाद राजेश ने उसे समझाया कि वो सब अलग कमरे में रहेंगे. आशा मान गई. राजेश उसको शहर में साथ घूमने के लिए कहता, तो आशा मना करती, क्योंकि इसी शहर में वो पति से झूठ बोलकर रह रही है, तो एक डर था मन में कि कहीं कोई देख न ले.

अगले ही दिन राजेश के साथ आशा की बहस हो गई. आशा को महसूस होने लगा कि राजेश की सोच बहुत पिछड़ी हुई है. वो चैटिंग में भले ही मीठी-मीठी बातें करता था, पर अब

रू-ब-रू उससे मिलकर अलग ही व्यक्तित्व सामने आ रहा है. राजेश का सोचना था कि जो वो बोले, आशा को आंख मूंदकर वही करना चाहिए.

आशा आत्मनिर्भर महिला थी. उसे इस तरह के व्यवहार की आदत भी नहीं थी, क्योंकि उसका पति बेहद सुलझा हुआ और शालीन था. अब आशा को महसूस हुआ कि उससे इस झूठे, अधूरे-से रिश्ते के लिए अपनी शादी को दांव पर लगा दिया. आशा को यह भी डर था कि कहीं राजेश उसे ब्लैकमेल न करे, पर उसने राजेश से बात करके अपने सारे रिश्ते ख़त्म किए और अपने घर लौट आई.

इस घटना ने आशा को बुरी तरह हिला दिया, लेकिन उसे यह बात समझ में आ गई कि रियल और डिजिटल रिश्तों में कितना अंतर होता है.

पति भले ही व्यस्तता के चलते समय न दे पाते हों, पर वो एक भले इंसान हैं और आशा का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे, जबकि राजेश एक दंभी पुरुष था, जो स़िर्फ आशा का फ़ायदा उठाना चाहता था.

कुछ इसी तरह का केस मालिनी का भी था, लेकिन वहां मालिनी के पति ने उसका झूठ पकड़ लिया था और मालिनी का तलाक़ हो गया था. उसके बाद जिस लड़के की वजह से मालिनी ने पति से फरेब किया था, उस लड़के ने भी मालिनी से पल्ला झाड़ लिया. जबकि मालिनी का कहना है कि वो पहले कहता था कि दोनों शादी कर लेंगे.

इस तरह के तमाम वाकये इस तरह के रिश्ते के अधूरेपन और रियल रिश्तों में बढ़ती दूरियों का संकेत देते हैं. ऐसे में बेहतर होगा कि संतुलन व सामंजस्य बनाकर ही हर चीज़ का इस्तेमाल किया जाए, वरना जो चीज़ वरदान है, उसे हम ख़ुद ही अपने लिए अभिशाप बना लेंगे.

– शौर्य सिंह

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शादी के बाद क्यों बढ़ता है वज़न? जानें टॉप 10 कारण (Top 10 Reasons For Weight Gain After Marriage)

अगर आपकी नई-नई शादी (New Marriage) हुई है और अचानक से अपने बढ़े हुए वज़न (Increased Weight) को लेकर आपके मन में कई सवाल उठे हैं और आप परेशान हैं, तो परेशान न हों. आपके सभी सवालों के जवाब यहां आपको मिलेंगे कि आख़िर शादी के बाद आपका वज़न इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ा है? द ओबेसिटी जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक शादी के 5 साल के भीतर 82% कपल्स का वज़न 5-10 किलो तक बढ़ जाता है. इसमें महिलाओं का वज़न पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है. लाइफस्टाइल में बदलाव के अलावा और क्या हैं कारण?

Weight Gain After Marriage

1. खानपान की आदतों में बदलाव

आपके मायके और ससुराल के खानपान में अंतर है. मसाले और पकाने की टेक्नीक दोनों जगह अलग है, जिसके कारण आपकी पाचनक्रिया पर इसका प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा मायके खाने के बाद टहलना, मॉर्निंग वॉक जैसी चीज़ें आपके रूटीन में शामिल थीं, जो यहां नहीं हैं.

2. अक्सर बाहर खाना

शादी के बाद से ही दोस्तों, रिश्तेदारों के यहां खाने का सिलसिला जो शुरू होता है, वो कई हफ़्तों तक जारी रहता है. इस बीच हनीमून पर आप बेरोक-टोक हर तरह के खाने को एंजॉय करते हैं, जिससे ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरीज़ खा लेते हैं.

3. प्राथमिकताएं बदल जाती हैं

शादी के बाद आप पति और ससुरालवालों की पसंद से खाना बनाती हैं और इंप्रेस करने के चक्कर में ख़ूब घी, तेल, मसाला इस्तेमाल करती हैं. इतनी मेहनत से बनाया खाना ख़राब न हो, इस चक्कर में ओवरईटिंग भी कर लेती हैं. समय के साथ बदली ये प्राथमिकताएं आपका वज़न बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार हैं.

4. लापरवाह हो जाती हैं

शादी के दिन स्टनिंग दिखने के लिए खाने-पीने पर ध्यान रखना, एक्सरसाइज़ करना, स्ट्रेस न लेना जैसी चीज़ें शादी के बाद लगभग पूरी तरह बदल जाती हैं. न चाहते हुए भी स्ट्रेस आ ही जाता है और बाकी कामों के चलते एक्सरसाइज़ का व़क्त नहीं मिलता. खाने का समय बदल जाता है और कहीं न कहीं यह सोच घर कर जाती है कि अब तो शादी हो गई, अब क्या फ़र्क़ पड़ता है.

5. नींद की कमी

शादी के बाद सोने का समय और पैटर्न दोनों ही बदल जाते हैं, जिससे नींद पूरी नहीं हो पाती. नींद की कमी भी वज़न बढ़ने का एक कारण है.

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After Marriage

6. पार्टनर का पैंपर करना

शादी के बाद सभी कपल्स एक-दूसरे पर अपना प्यार न्योछावर करने और ख़ुश रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते. एक-दूसरे को पैंपर करने के लिए केक, पेस्ट्रीज़, चॉकलेट्स, पिज़्ज़ा, पास्ता जैसी सरप्राइज़ ट्रीट देते रहते हैं. कैलोरीज़ से भरपूर ये फैटी चीज़ें वज़न बढ़ाती हैं.

7. स्ट्रेस ईटिंग करना

शादी के बाद नए माहौल में ढलना थोड़ा मुश्किल होता है, ऐसे में अगर दुल्हन वर्किंग है, तो उसकी ज़िम्मेदारियां और भी बढ़ जाती है. ऑफिस के साथ-साथ घर पर भी अपना बेस्ट देने की कोशिश में हमेशा स्ट्रेस में रहती हैं और स्ट्रेस ईटिंग की शिकार हो जाती है.

8. हार्मोनल बदलाव

लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसके कारण तेज़ी से वज़न बढ़ता है. इसके अलावा सेक्सुअल एक्टिविटीज़ के कारण होनेवाले हार्मोनल बदलाव भी इसका कारण बनते हैं. हांलाकि कुछ लोग इसे मिथ मानते हैं, पर वज़न बढ़ाने में हार्मोंस का अहम् रोल होता है, यह सभी मानते हैं.

9. मेटाबॉलिक बदलाव

आजकल ज़्यादातर कपल्स 28-30 साल की उम्र में शादी करते हैं. इस समय शरीर के मेटाबॉलिक रेट में बदलाव आता है, जिससे वज़न पहले के मुकाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है.

10. प्रेग्नेंसी

बहुत-सी महिलाएं शादी के बाद ही कंसीव कर लेती हैं, जिससे परिवारवाले उसे पैंपर करने के लिए ओवर न्यूट्रीशियस चीज़ें खिलाते हैं, जिसे  डिलीवरी के बाद भी वो कम नहीं कर पातीं.

वेट कंट्रोल के लिए क्या करें?

– घर में हर कोई खाना खा ले, उसके बाद मैं खाऊंगी वाला एटीट्यूट बदलें. नियमित समय पर खाना खाएं. ओवरईटिंग से बचें.

– अपने लुक्स के प्रति लापरवाह न हों.

– स्ट्रेस ईटिंग से बचने के लिए ख़ुद को ख़ुश रखें.

– एक-दूसरे के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने के लिए योगा क्लासेस या जिम जॉइन करें.

– अनीता सिंह     

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रिश्तेदारों से कभी न पूछें ये 9 बातें (9 Personal Questions You Shouldn’t Ask To Your Relatives)

Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives

कहते हैं ‘शब्दों के दांत नहीं होते हैं, लेकिन शब्द जब काटते हैं, तो दर्द बहुत होता है.’ कुछ ऐसी ही कैफ़ियत होती है उनके साथ, जिनके रिश्तेदार कभी अनजाने में, तो कभी जानबूझकर ऐसी बातें या सवाल पूछ बैठते हैं, जो अक्सर उन्हें चुभ जाती हैं या असहज बना देती हैं. इसलिए ज़रूरी है कि रिश्तेदारों से बात करते व़क्त हम कुछ बातों का ख़ास ख़्याल रखें, ताकि बातें बुरी नहीं, बल्कि अच्छी लगें और रिश्ते भी मधुर रहें.

Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives

रिश्ते बहुत नाज़ुक होते हैं इसलिए उन्हें बहुत ही प्यार व सावधानी के साथ संभालकर रखते हैं, क्योंकि रिश्तों में पड़ी छोटी-सी दरार भी आपके रिश्ते को प्रभावित कर सकती है. अक्सर रिश्तेदारों के बारे में सबकुछ जानने की उत्सुकता में लोग ऐसी बातें पूछ बैठते हैं, जो आमतौर पर नहीं पूछनी चाहिए. हर रिश्ते की अपनी मर्यादा होती है, जिसे हर किसी को याद रखनी चाहिए और ऐसी बातें अवॉइड करनी चाहिए, ताकि आपके रिश्ते न प्रभावित हों और न ही दूसरों को दुख पहुंचे.

1. बेटी की शादी की बात

अगर किसी के घर में शादी के लायक बेटी हो, तो मां-बाप को बेटी की शादी कब कर रहे हैं? कब तक घर में बिठाकर रखेंगें, जैसी बातें अक्सर सुनने को मिल जाती हैं. भले ही आप यह सवाल अपने होने के अधिकार से पूछते हैं, पर कहीं न कहीं यह बात उन्हें अच्छी नहीं लगती, क्योंकि जितनी फ़िक़्र आपको है, उससे कहीं ज़्यादा वो इस बात के फ़िक़्रमंद होंगे, क्योंकि वो उनकी बेटी है. आजकल लड़कियों का अपने पैरों पर खड़े होना बहुत ज़रूरी हो गया है, जिसे सभी मां-बाप समझते हैं और यही वजह है कि उन्हें जल्दी शादी के लिए बाध्य भी नहीं करते. इसलिए इस विषय को न छेड़ना ही ज़्यादा अच्छा होगा.

2. गुड न्यूज़ की बात 

शादी को सालभर हुए नहीं कि रिश्तेदार ख़ुश ख़बरी की बात करने लगते हैं. गुड न्यूज़ कब सुना रहे हैं? यह सवाल आपको अक्सर सुनने को मिल जाएगा. जहां एक ओर प्रेग्नेंसी किसी भी व्यक्ति का बहुत ही निजी मामला होता है, जिसकी प्लानिंग का अधिकार पति-पत्नी को है, वहीं दूसरी ओर बदलते समय और लाइफस्टाइल के कारण इंफर्टिलिटी के मामले तेज़ी से बढ़े हैं. हो सकता है, शादी के बाद भी कंसीव न कर पाने के कारण कपल पहले से ही परेशान हो और ऐसे में रिश्तेदारों का बार-बार इस विषय में पूछना उन्हें और परेशान करता हो. एक शुभचिंतक होने के नाते अपने रिश्तेदारों से इस विषय पर ज़्यादा सवाल कभी न करें.

3. फैमिली इन्कम की बातें

घर में कौन कितना कमाता है? यह रिश्तेदारों के लिए हमेशा ही कौतुहल का विषय होता है. दरअसल, सैलरी की जानकारी से वो फैमिली इन्कम का अंदाज़ा लगाते हैं, ताकि दूसरे रिश्तेदारों से तुलना कर सकें. बेटों-बेटी की इन्कम में लोगों को ज़्यादा दिलचस्पी रहती है, ताकि अपने बच्चों से तुलना करके जान सकें कि किसके बच्चे ज़्यादा सफल हैं, ताकि सबके सामने शो ऑफ का एक और मौक़ा मिल सके. हर किसी के फाइनेंशियल हालात दूसरों से अलग होते हैं, ऐसे में ज़्यादातर लोग फैमिली इन्कम के बारे में डिस्कस करना उचित नहीं समझते. इसलिए समझदारी ऐसे विषयों को न छेड़ने में ही है.

4. बेटे की नौकरी की बात

आपके बेटे की नौकरी कहीं लगी कि अभी भी घर पर ही है? ये सवाल उन रिश्तेदारों से अक्सर पूछे जाते हैं, जिनके बच्चे स्ट्रगल कर रहे होते हैं. हर मां-बाप की ख़्वाहिश होती है कि उनके बच्चे जो भी करें, उसमें उन्हें कामयाबी मिले. अपने बच्चों के लिए ऐसी बातें सुनना किसी को भी पसंद नहीं होता, इसलिए ऐसी चुभनेवाली बातें हमेशा अवॉइड करें. अगर आप सचमुच में फ़िक़्रमंद हैं, तो अपनी बात को सही तरी़के से पूछें.

5. रोमांटिक या पर्सनल लाइफ की बातें

पति-पत्नी के बीच की निजी बातों को कुरेद-कुरेदकर पूछना कुछ लोगों की आदत में शुमार होता है. ख़ुद को उनका ज़्यादा क़रीबी जताने के चक्कर में रिश्तेदार अक्सर ऐसे सवाल
पूछ बैठते हैं, जिन्हें प्राइवेसी में दख़लंदाज़ी माना जाता है. रोमांस पति-पत्नी के बीच का बहुत ही निजी मामला है. ऐसे सवाल पूछकर आप अपनी इमेज ख़ुद ख़राब करते हैं, क्योंकि ऐसे सवालों के जवाब देना कोई पसंद नहीं करता. नतीजतन लोग आपसे कतराने लगते हैं. अगर आप नहीं चाहते कि लोग आपके साथ भी ऐसा व्यवहार हो, तो अपने रिश्ते की अहमियत बनाए रखें और ऐसी बातों से हमेशा बचें.

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Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives
6. बहू के मायकेवालों की बातें

हमारा समाज भले ही कितना भी मॉडर्न क्यों न हो जाए, पर बहुओं के लिए लोगों की सोच अभी भी पुरानी ही है. उसके मायकेवालों के बारे में जानना ज़्यादातर रिश्तेदारों का प्रिय शगल होता है. उन्हें हमेशा इस बात की फ़िक़्र लगी रहती है कि बहू  की बहन की शादी हुई या नहीं, उसका भाई काम पर लगा या नहीं और उससे भी ज़्यादा त्योहार या शादी-ब्याह के मौक़ों पर बहू के मायके से कितना सामान आया. तोहफ़ों का लेन-देन हो या फिर अपनों के बारे में तीखी बातें सुनना, किसी भी बहू को पसंद नहीं आता. हर लड़की चाहती है कि ससुराल के लोग उसके परिवार का सम्मान करें और उन्हें भी वही इज़्ज़त मिले, जो दूसरों को मिलती है. एक लड़की के लिए उसका परिवार उसका सम्मान होता है, ऐसे में उन पर तीखे सवाल उसके सम्मान को चोट पहुंचाते हैं, जो आजकल की आत्मनिर्भर व आत्मविश्‍वासी बहुएं बर्दाश्त नहीं करती और यही वजह है कि रिश्तों में मनमुटाव बढ़ने लगता है. ऐसे में रिश्तों को बचाना आपके अपने हाथ में है.

7. प्रॉपर्टी के बंटवारे की बातें

जितनी दिलचस्पी रिश्तेदारों की फैमिली इन्कम में होती है, उतनी ही प्रॉपर्टी के बंटवारे में भी होती है. प्रॉपर्टी में क्या-क्या है?, किसको क्या देने की सोच रहे हैं?, वसीयत बनाई या नहीं? जैसी बातें लोग केवल परिवार या बेहद क़रीबी लोगों से ही शेयर करते हैं. प्रॉपर्टी से जुड़ी बातें बहुत ही महत्वपूर्ण व प्राइवेट होती हैं, जिन्हें अक्सर लोग गोपनीय रखना पसंद करते हैं. इसलिए उनकी गोपनियता में कभी सेंध न लगाएं. अगर वो आपको इस लायक समझेंगे, तो ख़ुद ही सारी बातें शेयर करेंगे. पर अगर वो ऐसा नहीं करते, तो आप ख़ुद से ऐसे निजी मामलों को न कुरेदें. सभी रिश्तेदारों को अपने रिश्तों की सीमा पता होनी चाहिए और यह भी कि किससे क्या पूछना है और क्या नहीं.

8. पुराने हादसों की बातें

रिश्तेदारों से बातचीत करते व़क्त ज़्यादातर लोग औपचारिकता का ध्यान ही नहीं रखते और अक्सर कुछ ऐसी बातें कह जाते हैं, जिन्हें अक्सर लोग भूलने में ही भलाई समझते हैं. जाने-अनजाने किसी पुराने हादसे या ज़ख़्मों को कुरेदना अच्छी बात नहीं. ऐसी बातों से सभी को बचना चाहिए.

9. दूसरी शादी हो, तो पहली शादी की बातें

हर कोई चाहता है कि उसका वैवाहिक जीवन ख़ुशहाल हो, पर हर किसी की क़िस्मत इतनी अच्छी नहीं होती. अक्सर हादसे ज़िंदगी की दिशा बदल देते हैं और इंसान को अपनी ज़िंदगी को एक नया मोड़ देना पड़ता है. ऐसे में दोबारा नई गृहस्थी की शुरुआत करनेवालों से कभी भी उनकी पिछली शादी के बारे में नहीं पूछना चाहिए. तुम्हारी पहली शादी क्यों टूटी? जैसे सवाल करके किसी की दुखती रग पर हाथ न रखें.

रिश्तों में लाइन ड्रॉ करना बहुत ज़रूरी है

साइकोलॉजिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी के अनुसार, “दूसरों के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानने की उत्सुकता हर इंसान में होती है. हमारे समाज में बड़े-बुज़ुर्ग छोटों से निजी से निजी सवाल पूछना अपना हक़ समझते हैं और साथ ही यह भी जताने की कोशिश करते हैं कि हमें तुम्हारी कितनी परवाह है. दरअसल, वो ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने आस-पास वही देखा है और बचपन से वही सीख पाई है, जबकि आज ज़माना बदल रहा है. नई पीढ़ी कुछ मामलों में दख़लंदाज़ी पसंद नहीं करती है और वो कहीं न कहीं सही भी है, क्योंकि कुछ मामले इतने निजी होते हैं कि उनके बारे में दूसरों द्वारा बार-बार टोका जाना किसी को भी पसंद नहीं होता. इसलिए बदलते ज़माने के साथ आज हमें अपनों की
प्राइवेसी का भी सम्मान करना चाहिए और रिश्तों की मर्यादा को बनाए रखने के लिए एक लाइन ड्रॉ करना बहुत ज़रूरी हो गया है. हालांकि अभी भी 1-2% लोग ही हैं, जो सेंसिटिव होते हैं और जिन्हें ऐसी बातें बुरी लगती है, वरना 98% तो मानकर ही चलते हैं कि उनसे ऐसे सवाल किए जाएंगे और वो इसके लिए तैयार रहते हैं. पर इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं कि उन्हें ऐसी बातें बुरी नहीं लगती, पर वो उनसे निपटना सीख जाते हैं.”

जहां ज़्यादातर लोग कौतुहलवश ऐसे सवाल करते हैं, वहीं कुछ प्रतिशत लोग ऐसे भी हैं, जो केवल अपनी महत्ता दिखाने के लिए, दूसरों पर दबाव बनाए रखने व कंट्रोल करने की भावना से ऐसा करते हैं. इसलिए बातों से बढ़कर ये बातें कभी-कभी तानों और कटाक्ष में तब्दील हो जाती हैं. ऐसे लोगों के साथ आपको डील करना सीखना होगा. उनकी बातों पर कभी भी न ग़ुस्सा करें, न अपना मूड ख़राब करें और न ही दुखी हों, क्योंकि यह उनकाव्यक्तित्व है, जिसे आप बदल नहीं सकते. ऐसे सवाल ज़्यादातर महिलाओं से ही पूछे जाते हैं, क्योंकि उन्हें सॉफ्ट टारगेट माना जाता है और जो बातें महिलाओं को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती हैं, वो बच्चों व तलाक़ से जुड़ी होती हैं. इसलिए महिलाएं अपने आप को मना लें कि ऐसा तो होना ही है. ख़ुद को मानसिक तौर पर हमेशा तैयार रखें, ताकि ये बातें न आपको प्रभावित करें, न ही आपके रिश्ते को.

– सुनीता सिंह

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20 Tips: शादी से पहले करें शादी के बाद की तैयारियां (20 Smart Pre Marriage Preparations For Couples)

20 Tips: शादी से पहले करें शादी के बाद की तैयारियां (20 Smart Pre Marriage Preparations For Couples)

Pre Marriage Preparations

सगाई से शादी तक का सफ़र हर जोड़े के लिए ख़ास होता है. इस दौरान नए रिश्ते के साथ-साथ भावी गृहस्थी की भी नींव रखी जाती है. यही वो समय है, जब आपको अपने होनेवाले लाइफ पार्टनर के साथ मिलकर शादी के बाद की प्लानिंग की तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए. किन बातों की तैयारियां ख़ुद करें, किन बातों की एडवांस प्लानिंग करें और किन बातों पर ज़रूरी है चर्चा इसी विषय पर हमें अधिक जानकारी दी मैरिज कंसल्टेंट ज़ीनत भारद्वाज ने.

आज भी हमारे देश में ज़्यादातर शादियां अरेंज मैरेज ही होती हैं, जहां लड़का-लड़की को ख़ुद को रिश्ते के लिए तैयार करने के साथ-साथ एक-दूसरे को समझना होता है, साथ ही उनके परिवारों को भी समझना होता है. एक-दूसरे को समझने के साथ-साथ एक-दूसरे के साथ गृहस्थी शुरू करने की तैयारियां शुरू कर दें, तो दोनों को ही शादी के बाद के बदलावों को अपनाने में काफ़ी सहजता महसूस होगी.

गृहस्थी से पहले करें रिश्ते की तैयारियां

1. ख़ुद से करें सवाल: सबसे पहले तो आप ख़ुद से पूछें कि आप शादी क्यों करना चाहते हैं? इस सवाल के जवाब में शादी से जुड़ी कई बातें खुलकर सामने आ जाएंगी. आमतौर पर जहां लड़के इसलिए शादी करते हैं कि कोई उन्हें, उनके पैरेंट्स और घर को संभाले, वहीं लड़कियों का कारण फाइनेंशियल व सोशल सिक्योरिटी होती है.

2. ज़रूरी है मानसिक तैयारी: शादी ज़िंदगीभर साथ निभानेवाला सुंदर सा बंधन है. यह जीवनभर की ज़िम्मेदारी है. आप दोनों को ‘मैं’ भुलाकर ‘हम’ बनना होता है. इसमें समर्पण और सामंजस्य बनाए रखना पड़ता है. इसलिए सबसे पहले ख़ुद से पूछें कि क्या आप इस ज़िम्मेदारी और समर्पण के लिए तैयार हैं? इस रिश्ते की सफलता आपकी मानसिक तैयारी पर ही निर्भर करती है.

3. बदलाव को सहजता से लें: शादी से पहले बहुत-से कपल्स को ऐसा लगता है कि दोनों एक जैसे ही हैं और उनके विचार एक-दूसरे से बहुत मिलते हैं, पर शादी के कुछ दिनों बाद ज़्यादातर कपल्स को लगने लगता है कि उनका बेटर हाफ उनसे बिल्कुल अलग है. ज़रूरी नहीं कि ऐसा आपके साथ भी हो, फिर भी इस बदलाव के लिए पहले से ही तैयार रहें, ताकि उसे सहजता से ले सकें. वरना आप भी उन कपल्स की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे, जो अमूमन हर किसी से यही शिकायत करते हैं कि शादी के बाद वो बिल्कुल बदल गए हैं.

4. ताकि बाद में पक्षताना न पड़ेे: ज़्यादातर लोगों का यही रवैया होता है कि शादी के बाद देखेंगे क्या करना है, लेकिन बिना सही प्लानिंग के दोनों ही नई गृहस्थी को जोड़ने में लग जाते हैं और उनके सपनें व महत्वकांक्षाएं अधूरी रह जाती हैं और कुछ सालों बाद पक्षताने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं बचता. ऐसे में शादी से पहले इन बातों की प्लानिंग करना दोनों के लिए फ़ायदेमंद साबित होगा.

5. एक-दूसरे से उम्मीदें व अपेक्षाएं: सबसे पहले तो अपने होनेवाले लाइफ पार्टनर से उनकी उम्मीदों व अपेक्षाओं के बारे में पूछें. आपसे व उस रिश्ते से उनकी अपेक्षाओं और उम्मीदों को सुनें और उसी समय अपना पक्ष रख दें कि आप उन पर कितने खरे उतरेंगे, क्योंकि मौन रहना अक्सर स्वीकारोक्ति मानी जाती है.

6. ससुराल को भी समझें: सगाई के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोगों से फोन के ज़रिए जुड़ने की कोशश करें. किसी के बर्थडे, एनीवर्सरी या तीज-त्योहार पर शुभकामनाएं देकर उनसे जुड़ें. इससे शादी से पहले अच्छी बॉन्डिंग बन जाएगी और आप ससुराल में अजनबी जैसा महसूस नहीं करेंगी. लड़कियों के साथ-साथ लड़के भी अपने होनेवाले ससुराल में सबसे अच्छे रिश्ते बनाएं.

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Pre Marriage Preparations

ज़रूरी है एडवांस प्लानिंग

7. एक-दूसरे की महत्वकांक्षाएं: दोनों एक-दूसरे से अकैडमिक और प्रोफेशनल महत्वकांक्षाओं के बारे में खुलकर बात करें. हो सकता है कि लड़की शादी के बाद कोई कोर्स करना चाहती हो या फिर लड़के को अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए कोई एडवांस कोर्स करना हो, तो इन सबकी चर्चा अभी कर लें.

8. फाइनेंशियल प्लानिंग करें: ज़्यादातर कपल्स शादी से पहले एक-दूसरे की सैलरी आदि पूछने में संकोच करते हैं औैर उन्हें पता ही नहीं होता कि उनके पार्टनर का ख़र्च और बचत कितनी है. एक-दूसरे के इन्वेस्टमेंट्स, लोन, इंश्योरेंस आदि के बारे में डिसकस करें, ताकि शादी के बाद डॉक्यूमेंट्स पर नाम या नॉमिनी बदलने आदि के बारे में पहले ही तय कर लें.

9. ढूंढ़ लें अपना आशियाना: आमतौर पर यह बड़े शहरों की समस्या है, इसलिए शादी से पहले ही आप दोनों मिलकर शादी के बाद रहने की व्यवस्था कर लें, वरना शादी के कुछ समय बाद ही अगर पत्नी ने कंसीव कर लिया, तो इसके लिए भागदौड़ हो जाती है. पहले से डिसाइडेड घर होने से आप उसे अपने ज़रूरत के मुताबिक बनवा या सजवा सकती हैं.

10. जॉब सेटलमेंट डिसकस करें: आजकल शादी के बाद ज़्यादातर वर्किंग कपल्स की ज़िंदगी काफ़ी भागदौड़ वाली हो जाती है, ऐसे में अगर जॉब में ट्रांसफर होता रहता हो, मुश्किलें और बढ़ जाती हैं. ऐसे में शादी से पहले ही आप इस बारे में प्लान कर लें कि ट्रांसफर कहां लेना है, लेना है या नहीं आदि.

11. हनीमून पैकेज चुनें: हर कपल की चाहत होती है कि उनका हनीमून सबसे यादगार हो. इस दौरान साथ बिताए लम्हों की मिठास जीवनभर उनके रिश्ते में बनी रहे. इसलिए पहले से हनीमून पैकेज बुक कर लें, ताकि शादी के बाद इसके बारे में सोचने की ज़रूरत न हों. अगर विदेश जाना
चाहते हैं, तो पासपोर्ट, वीज़ा आदि के लिए जल्दी शुरुआत करें.

12. करें फैमिली प्लानिंग: शादी के बाद सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होती है फैमिली प्लानिंग. पति-पत्नी बनने के बाद माता-पिता बनना उससे भी बड़ी ज़िम्मेदारी है. कितने महीनों या सालों तक आप पैरेंट्स नहीं बनना चाहते, इस विषय में कोई भी निर्णय लेने से पहले गायनाकोलॉजिस्ट से ज़रूर मिलें, वो इसमें आपकी मदद करेंगे व उचित सलाह भी देंगे, वरना कइयों की तरह आप भी अनप्लान्ड प्रेग्नेंसी के शिकार हो सकते हैं. बच्चा एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है, उसके लिए आपको पहले से ही मानसिक, शारीरिक व आर्थिक तौर पर तैयार रहना होगा.

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हैप्पी-हैप्पी करें मैरिड लाइफ की शुरुआत

13. शादी से पहले शादी के बाद की प्लानिंग करने का यह कतई मतलब नहीं कि आप अपने गोल्डेन पीरियड को बोझिल बना लें.

14. इतने विषयों को देखकर शायद आपको लग रहा हो कि कितना कुछ करना बाकी है, पर यकीन मानिए एक-एक करके इन पर चर्चा करेंगे, तो प्लानिंग अपने आप आसान हो जाएगी.

15. शादी के पहले के इन ख़ूबसूरत लम्हों को सहेजकर रखें.

16. एक-दूसरे से मिले-जुलें, ताकि एक-दूसरे की पसंद-नापसंद जान सकें.

17. इस दौरान अगर आपके होनेवाले पार्टनर का बर्थडे आए या उन्हें ऑफिस में प्रमोशन या कोई अचीवमेंट मिले, तो उन्हें कोई ख़ूबसूरत-सा गिफ्ट या सरप्राइज़ पार्टी दें.

18. एक-दूसरे के प्रति अपना प्यार दर्शाने में बिल्कुल भी कंजूसी ना करें.

19. शादी से पहले आप दोनों किसी मैरेज काउंसलर से ज़रूर मिलें.

20. प्यार व विश्‍वास से अपने रिश्ते की शुरुआत करें, आपकी मैरिड लाइफ हमेशा हैप्पी-हैप्पी रहेगी.

– अनीता सिंह

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पुरुषों की आदतें बिगाड़ सकती हैं रिश्ते (Bad Habits Of Men Can Ruin Your Relationship)

Bad Habits Of Men Can Ruin Your Relationship

पुरुषों की आदतें बिगाड़ सकती हैं रिश्ते (Bad Habits Of Men Can Ruin Your Relationship)

पुरुषों की ऐसी कई आदतें हैं, जो उनसे जुड़े लोगों को पसंद नहीं आतीं और आगे चलकर यही आदतें झगड़े का कारण भी बनती हैं, ख़ासतौर पर पति-पत्नी के रिश्ते में. फिर धीरे-धीरे छोटे-छोटे झगड़ों से ही रिश्ते में तनाव आने लगता है और रिश्ते बिगड़ जाते हैं. आइए, संक्षेप में इसके बारे में जानते हैं.

Bad Habits Of Men Can Ruin Your Relationship

– पुरुषों में ईगो यानी अहंकार ख़ूब होता है. वे अपने अहंकार के आगे भावनाओं की कद्र बहुत कम करते हैं. उनकी इस आदत से उनकी पार्टनर बहुत दुखी रहती है और बार-बार ऐसा होने पर वह अपने रिश्ते में घुटन महसूस करने लगती है.

– ऐसे कई पुरुष होते हैं, जो अपनी बात पर कायम नहीं रहते. वे आज कुछ कहते हैं और बाद में उनका स्टेटमेंट कुछ और हो जाता है. इससे रिश्तों में दरार पड़ते देर नहीं लगती.

– ऐसे पुरुषों पर महिलाएं कम ही विश्‍वास करती हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि कल वह अपनी बात से मुकर जाएंगे.

– यह मानी हुई बात है कि जब रिश्ते में विश्‍वास ही न हो, तो वह टिकेगा कैसे. ऐसे में पत्नियां तो अपने ऐसे पतियों की किसी भी बात को गंभीरता से नहीं लेती हैं और अपनी बातें शेयर करने से भी कतराती हैं.

– क्योंकि पति की बात-बात पर पलट जाने की आदत पत्नी के मन में संशय के बीज बो देती है और रिश्ते में कड़वाहट आ जाती है.

– ऐसे पुरुषों की भी कमी नहीं है, जो अपने घर-परिवार को बिल्कुल वक़्त नहीं देते. उन्हें लगता है कि पैसे कमाकर घर में दे देना ही बहुत है. जबकि परिवार को उनके साथ समय बिताने की अधिक ज़रूरत होती है. ऑफिस से घर आकर वे मोबाइल फोन, टीवी या कंप्यूटर पर चिपक जाते हैं, जो सही नहीं है.

– मनोवैज्ञानिक शामा गुप्ता कहती हैं कि पुरुषों का घर को समय न देना, उससे जुड़े सभी रिश्तों को प्रभावित करता है, विशेषतौर पर जीवनसाथी से. तब वह इस बात को लेकर झगड़ती रहती है या अपनी एक अलग दुनिया बना लेती है और ज़्यादा समय बाहर गुज़ारना शुरू कर देती है. इसका परिणाम अक्सर अलगाव के रूप में दिखाई देता है.

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– पुरुषों की ज़रूरत से ज़्यादा कंट्रोल करने की आदत से भी रिश्तों में दम घुटने की नौबत आ जाती है.

– साथ ही पुरुषों का बेहद ख़्याल रखने की आदत से भी रिश्ते ख़राब होने लगते हैं.

– शामा गुप्ता कहती हैं कि पार्टनर को भी हक़ है कि वह ख़ुद कुछ निर्णय ले सके और तय कर सके कि उसे क्या करना है. पुरुष का प्रोटेक्टिव होना अच्छी बात है, पर वह इतना भी ख़्याल न रखे कि पार्टनर उसके बिना कुछ कर ही न पाए. इस तरह तो उसका वजूद ही डगमगाने लगता है और कई बार विद्रोह की नौबत आ जाती है.

– अधिकतर पुरुषों की वीकेंड पर देर तक सोने और नहीं नहाने की आदत होती है, जिससे पत्नी परेशान हो जाती है. यह क्या बात हुई कि हर चीज़ बेड पर ही चाहिए. बेड पर ही चाय, कॉफी, लंच और डिनर लेते हैं. दिनभर टीवी पर न्यूज़ और क्रिकेट देखते रहते हैं. और यदि आपने उन्हें नहाने के लिए कह दिया, तो समझो आपने उनका वीकेंड ख़राब कर दिया.

– कई पति इतने लापरवाह होते हैं कि वे अपना गीला तौलिया बिस्तर पर, गंदे मोज़े सोफे के नीचे डाल देते हैं. पत्नी अगर उनके बैग से लंच बॉक्स न निकाले, तो वह बाहर निकलेगा ही नहीं. और न जाने क्या-क्या करते हैं. घर को सजाकर रखनेवाली व व्यवस्थित तरी़के से रहनेवाली सफ़ाई पसंद पत्नी को अपने पति की ये आदत बिल्कुल भी पसंद नहीं आती है.

– पार्टनर ग़लती करे, तो उससे माफ़ी मंगवाए बिना न रहनेवाले पुरुष अपनी ग़लती को कभी मानने को तैयार नहीं होते. पुरुषों की यह ग़लती स्वीकार नहीं करने की आदत से भी महिलाओं को बहुत परेशानी होती है.

– कई पुरुषों की आदत होती है कि लड़ाई-झगड़ा होने पर पुरानी बातों को लेकर ताने-उलाहने देने लगते हैं. उनकी कुरेदने की यह आदत रिश्तों में कड़वाहट ला देती है. अतः यह ज़रूरी है कि हर पुरुष उपरोक्त सभी बातों पर ध्यान दें और उनमें उचित सुधार लाएं, जिससे रिश्तों की डोर मज़बूत बनी रहे.

– सुमन वत्स

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संपत्ति में हक़ मांगनेवाली लड़कियों को नहीं मिलता आज भी सम्मान… (Property For Her… Give Her Property Not Dowry)

Property For Her

संपत्ति में हक़ मांगनेवाली लड़कियों को नहीं मिलता आज भी सम्मान… (Property For Her… Give Her Property Not Dowry)

उसका वजूद जैसे कोई त्याग… उसके लब जैसे ख़ामोशी का पर्याय… उसकी नज़रें लाज-शर्म से झुकीं जैसे घर की लाज… उसके अधिकार…? नहीं हैं कोई… उसका कर्त्तव्य जैसे पिता-भाई द्वारा तय मर्यादाओं का पालन… लफ़्ज़ों के मायने कोई नहीं उसके लिए, जब तक अपने घर न जाए, तब तक एक बोझ, जब अपने घर जाती है, तो सबको ख़ुश रखना ही उसके जीवन का अर्थ… एक औरत के जीवन की यही सच्चाई थी कुछ समय पहले तक और आज भी बहुत कुछ बदलकर भी काफ़ी कुछ नहीं बदला है. यही वजह है कि अपने अधिकार के लिए आवाज़ उठानेवाली बेटियों को घर-परिवार व समाज में सम्मान नहीं मिलता, क्योंकि समाज में आज भी बेटियों से स़िर्फ और स़िर्फ त्याग की ही उम्मीद की जाती है.

उम्मीदें हैं बेहिसाब…

–    बेटियों से हर तरह की उम्मीदें करना जैसे सबका जन्मसिद्ध अधिकार हो.

–    वो मर्यादा में रहे, सबका कहना माने, सबकी इच्छाओं का सम्मान करे.

–    धीरे बात करे, ज़ोर से हंसे नहीं, लड़कों के साथ ज़्यादा न घूमे, नज़रें झुकाकर चले, जैसे वो कोई अपराधी है…

–    घर की पूरी इज़्ज़त व मान-मर्यादा उसकी ही ज़िम्मेदारी है.

–    एक अच्छी बेटी वो ही है, जो घर के कामकाज में पूरी तरह निपुण हो.

–    भाई-बहनों का, माता-पिता व अन्य तमाम रिश्तेदारों का ख़्याल रखे.

–    हमारे परिवारों में आज भी बेटों की अपेक्षा बेटियों से काफ़ी उम्मीदें रखी जाती हैं. ऐसे में उनका अपने हक़ के लिए कुछ बोलना कहां बर्दाश्त हो पाएगा किसी को भी?

क्यों हैं इतनी उम्मीदें?

–    सामाजिक व पारिवारिक ढांचा ऐसा ही है कि हमें लगता है कि बेटियां स़िर्फ कुर्बानी देने और त्याग करने के लिए ही होती हैं.

–    वो परिवार में झगड़ा नहीं चाहतीं, इसलिए अपना हक़ छोड़ने में ही समझदारी मानती हैं.

–    जबकि बेटों से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वो बहनों को उनका हक़ बिना कुछ कहे दे दें.

–    सब जानते हैं कि अगर बहनों ने अपने हक़ की बात तक की, तो सारे रिश्ते ख़त्म कर दिए जाएंगे.

–    बचपन से बेटों की परवरिश इसी तरह से होती है कि उन्हें अपनी बहनों से यही उम्मीद रहती है कि वो उनके लिए अपनी हर ख़ुशी कुर्बान करेंगी.

–    ऐसे में वो संपत्ति में बहनों को बराबर का हक़ देने के बारे में सोच भी नहीं सकते.

–    क़ानून ने भले ही बेटियों को समानता का हक़ दे दिया हो, पर समाज व परिवार के लिए अब भी ये स्वीकार्य नहीं है.

–    इसका प्रमुख कारण परिवार की सोच व परवरिश के तौर-तरी़के ही हैं, जो आज भी ज़्यादा नहीं बदले हैं.

–    महिलाएं भले ही घर की दहलीज़ लांघकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं, लेकिन बावजूद इसके उनकी घरेलू ज़िम्मेदारियां जस की तस हैं.

–    उन्हें पति, पिता या भाई से घर के कामों में ख़ास मदद नहीं मिलती.

–    बाहर काम करने का नतीजा यह हुआ कि महिलाओं की ही ज़िम्मेदारी बढ़ गई और आज वो दोहरी ज़िम्मेदारियों के बीच पिस रही हैं.

–    ऐसे में समानता का दर्जा, वो भी संपत्ति के मामले में तो बहुत दूर की सोच है…

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Property For Her

क्यों स्वीकार्य नहीं बेटियों का हक़?

प्रमिला के पति की मृत्यु हो चुकी थी. उसके दो बच्चे थे. पिता के पास काफ़ी ज़मीन थी, जो उन्होंने सभी बच्चों में बांट दी थी. प्रमिला के बड़े भाई ने कहा कि वो उसकी और उसके बच्चों की देखरेख आजीवन करेगा. बस, वो अपने हिस्से की ज़मीन अपने भाई के नाम कर दे. प्रमिला ने इंकार कर दिया, उसका साफ़ कहना था, “मेरा जो हक़ है, वो मुझे मिलना चाहिए, मैं ताउम्र किसी की मोहताज बनकर नहीं रह सकती.

बस, फिर क्या था. भाई ने न स़िर्फ बातचीत बंद कर दी, बल्कि सारे नाते तोड़ लिए, लेकिन मुझे इस बात की संतुष्टि थी कि मैंने सही समय पर सही फैसला लिया. आज मेरे बच्चे अपने पैरों पर खड़े हैं. मैंने उन्हें अच्छी शिक्षा दी और आज मैं ख़ुश हूं, दुख स़िर्फ इस बात का है कि मात्र संपत्ति ही ज़रिया है क्या प्यार व अपनेपन जैसी भावनाओं को जीवित रखने का?

मेरे भाई ने उसे इतना महत्व दिया कि बहन से सारे रिश्ते तोड़ लिए. कुछ लोगों ने मेरे इस क़दम को सही कहा, तो ऐसे भी लोग हैं, जो मानते हैं कि पैसों के लिए मैंने भाई से दुश्मनी कर ली… मुझे अपना हक़ छोड़ देना चाहिए था… दरअसल, समाज की सोच अब भी वही है कि घर का मुखिया एक पुरुष ही हो सकता है, वही हमारी देखरेख करता, तो प्यार बना रहता. मैंने अपने दम पर अपने बच्चों का जीवन संवारा, तो किसी से बर्दाश्त नहीं हो रहा…!”

प्रमिला की ही तरह कविता और सुषमा का भी केस है. कविता ने बताया, “पापा की मृत्यु के बाद अब मेरी मम्मी ने हम चार भाई-बहनों में ज़मीन-जायदाद का बंटवारा कर दिया. मुझे और मेरी बहन को भी मेरे दोनों भाइयों के बराबर का हिस्सा दिया गया. मेरे दोनों भाई यूं भी आर्थिक रूप से काफ़ी सक्षम हैं. लेकिन बावजूद इसके उनकी नाराज़गी इतनी बढ़ गई कि अब परिवार की शादियों तक में हमें निमंत्रण नहीं दिया जाता. इसकी एकमात्र वजह संपत्ति में हमारा हक़ लेना ही है.

लोग आज भी बेटियों से ही उम्मीद करते हैं कि भाई को नाराज़ करने से अच्छा है कि अपना हक़ छोड़ दें, लेकिन भाई से कभी यह पूछा तक नहीं जाता कि बहनों को अगर समान दर्जा मिल जाता है, तो उन्हें इतनी तकलीफ़ क्यों होती है?

हमने स़िर्फ अपना हक़ लिया है, उनका नहीं. तो उन्हें हमसे नाराज़गी क्यों? वो हमारे हिस्से की हर चीज़ पर अपना अधिकार समझते हैं और हर बार यही उम्मीद करते हैं कि बहनों को ही त्याग करना चाहिए… कोई उनसे पूछे कि क्या वो बहनों के लिए यह त्याग करने के लिए तैयार होंगे कभी?

प्रॉपर्टी में अपना जायज़ हिस्सा लेने पर भी समाज हमें लालची, घर व रिश्ते तोड़नेवाली और भी न जाने क्या-क्या कहता है, लेकिन उस भाई से एक भी सवाल नहीं, जो अपनी बहन का हिस्सा भी ख़ुद ही लेने की चाह रखता है.

दरअसल, यह सोच कभी नहीं बदलनेवाली और कभी बदलेगी भी तो सदियां बीत जाएंगी.”

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Property

 

प्रॉपर्टी फॉर हर… गिव हर प्रॉपर्टी, नॉट डाउरी!

भारतीय महिलाएं खेतों का लगभग 80% काम करती हैं, लेकिन मात्र 17% ही ज़मीन पर मालिकाना हक़ रखती हैं. अन्य क्षेत्रों में भी तस्वीर कुछ इसी तरह की है और अधिकार व पारिवारिक संपत्ति बेटों को ही मिलती है.

इसी के मद्देनज़र साउथ एशिया में महिलाओं को प्रॉपर्टी में हक़ दिलाने के लिए एक कैंपेन की शुरुआत की गई- प्रॉपर्टी फॉर हर!

इसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना था कि पैरेंट्स इस बात को समझें कि क्यों बेटियों के लिए संपत्ति ज़रूरी है और वो भी उतनी ही हक़दार हैं, जितने बेटे! क्योंकि

बिना किसी मज़बूत सपोर्ट सिस्टम, बिना किसी आर्थिक सुरक्षा के कैसे बेटियां आत्मनिर्भर और सुरक्षित महसूस कर

सकती हैं? यह कहना है इस कैंपेन से जुड़े लोगों का.

ट्विटर पर भी यह कैंपेन चलाया गया था, जिसमें महिला व पुरुष दोनों से ही राय मांगी गई थी. अधिकांश पुरुषों ने भी इस पर सहमति जताई कि महिलाओं को भी संपत्ति में बराबरी का हक़ दिया जाना चाहिए.

जहां तक क़ानून की बात है, तो काफ़ी पहले ही वो बेटियों को समानता का दर्जा दे चुका है, अब स़िर्फ समाज व परिवार को समझना है कि वो अपनी बेटियों को कब समान समझना शुरू करेंगे? ख़ासतौर से घर के बेटे, क्योंकि सोशल मीडिया पर बड़ी-बड़ी बातें करनेवाले भी अपनी बारी आने पर वही पारंपरिक सोच अपनाना बेहतर समझते हैं, जो उन्हें सूट करती है और उनके ईगो को तुष्ट करती है.

– गीता शर्मा

 

 

हेल्दी रिश्तों को दें ये सुरक्षा कवच (Smart Tips to Protect Your Relationship)

Smart Tips to Protect Your Relationship

हेल्दी रिश्तों को दें ये सुरक्षा कवच (Smart Tips to Protect Your Relationship)

‘अब रिश्तों में वो पहलेवाली मिठास नहीं रही, सब प्रैक्टिकल हो गए हैं…’ आजकल यह जुमला आपको अक्सर सुनने को मिल जाएगा. वैसे तो रिश्ते निभानेवालों पर निर्भर करते हैं, जो बदलती लाइफस्टाइल में भी रिश्तों को निभाने के गुर सीख लेते हैं. लेकिन अगर आपको भी ऐसा ही लगने लगा है कि आपके रिश्ते कमज़ोर होने लगे हैं, तो उन्हें ज़रूरत है सुरक्षा कवच की, जो उन्हें मज़बूती प्रदान करें. तो आइए देखें, क्या हैं वो रिश्तों के सुरक्षा कवच? 

Smart Tips to Protect Your Relationship

 

हेल्दी कम्यूनिकेशन

किसी ने बहुत ख़ूब कहा है कि रिश्तों में बातचीत होती रहनी चाहिए. भले ही लड़ाईझगड़ा हो, पर ख़ामोशी नहीं आनी चाहिए, वरना रिश्तों का दम घुटने लगता है. हेल्दी कम्यूनिकेशन आपके रिश्तों को मज़बूत बनाए रखता है.

हमेशा फेस टु फेस यानी आंखों में आंखें डालकर बात करें. इधरउधर देखते हुए अपनी बात कभी न कहें.

रिश्तों को हेल्दी बनाना चाहते हैं, तो बातचीत की पहल ख़ुद करें.

बातों के साथ बॉडी लैंग्वेज का भी हमेशा ख़्याल रखें.

आपकी बातों और चेहरे की भावभंगिमाओं में तारतम्य होना चाहिए. ऐसा न हो कि आप कुछ कह रहे हैं और आपका चेहरा कुछ और.

बातचीत करते समय अगर सामनेवाला कुछ कह रहा है, तो उसकी बात काटकर अपनी बात कहने की कोशिश न करें. सामनेवाले को पूरा सुनें, फिर बोलें.

हेल्दी कम्यूनिकेशन के लिए बोलने से ज़्यादा सुनना ज़रूरी है, इसलिए शांति से दूसरे की बात सुनें.

जब दो से ज़्यादा लोग बातचीत कर रहे हों, तो नॉन वर्बल सिग्नल्स का भी ख़्याल रखें.

बात करते समय ऊंची या एग्रेसिव आवाज़ में बात न करें, वरना ऐसा लगेगा कि आप सामनेवाले की बात को दबाने की कोशिश कर रहे हैं.

अक्सर लोग सामनेवाले की बात समझने की बजाय उनसे ख़ुद को समझने की उम्मीद करते हैं. हेल्दी कम्यूनिकेशन के लिए ज़रूरी है कि आप पहले ख़ुद दूसरे को समझें, तभी किसी से उम्मीद करें.

टेक्नोलॉजी का भरपूर फ़ायदा उठाएं. कम्यूनिकेशन के लिए फ्री मैसेजिंग ऐप्स, वीडियो कॉलिंग आदि का इस्तेमाल करें.

याद रहे, अगर 80% कोशिश आप करेंगे, तो 20% पहल वहां से भी होगी. इसलिए हेल्दी रिश्ते के लिए आप क्या कर रहे हैं, इस पर ध्यान दें.

अगर आपने कोई बात ग़लत कह दी हो, तो तुरंत ‘सॉरी’ कह दें. रिश्तों में जितना सहज रहें, उतना अच्छा है.

हेल्दी बाउंड्रीज़

हेल्दी रिश्तों के लिए आज़ादी के साथसाथ हेल्दी बाउंड्रीज़ भी ज़रूरी हैं. रिश्तों की मर्यादा रिश्तों के लिए एक बेहतरीन सुरक्षा कवच का काम करते हैं.

हर रिश्ते में अगर प्राइवेसी का ख़्याल रखा जाए, तो रिश्ते कमज़ोर नहीं होते. एकदूसरे की भावनाओं को समझना ही रिश्ते को मज़बूती प्रदान करता है.

हर रिश्ते की अपनी एक बाउंड्री होती है, जिसे हम पर्सनल स्पेस कहते हैं. घर के हर मेंबर को उसका पर्सनल स्पेस एंजॉय करने का पूरा हक़ है.

रिश्ते कितने ही गहरे क्यों न हों, ठेस लगनेवाली बातें कभी न कहें.

कुछ रिश्तों को हम फॉर ग्रांटेड लेते हैं, पर आप ऐसा न करें. सभी को वही मानसम्मान दें, जिसकी आप ख़ुद के लिए उम्मीद रखते हैं.

रिश्तों में प्यार बढ़ाने के लिए हंसीमज़ाक बहुत ज़रूरी है, पर जानबूझकर मज़ाक उड़ाना आपके रिश्ते को कमज़ोर कर सकता है.

हेल्दी रिश्तों के लिए थोड़ीबहुत शरारतें और टांगखिंचाई चलती है, पर ध्यान रहे कि उससे कोई आहत न हो जाए.

अपने मायके की बुराई से महिलाएं बहुत जल्दी चिढ़ जाती हैं, इसलिए जानबूझकर वहां की कभी बुराई न करें.

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हेल्दी रिलेशनशिप बूस्टर्स

किसी भी रिश्ते की मज़बूती के लिए क्वालिटी टाइम बहुत मायने रखता है. अपने रिश्ते को हेल्दी बनाए रखने के लिए आपको भी अपनी फैमिली के साथ भरपूर क्वालिटी टाइम बिताना चाहिए. साथ ही ध्यान रखें कुछ और ज़रूरी बातों का.

एकदूसरे से रियलिस्टक यानी वास्तविक अपेक्षाएं रखें. आपके परिवार की आर्थिक स्थिति आपसे बेहतर कौन जान सकता है, इसलिए पैरेंट्स, पार्टनर या फिर भाईबहन से ऐसी अवास्तविक उम्मीदें न पालें.

रिश्तों की मज़बूती फ्लेक्सिबिलिटी पर भी निर्भर करती है, इसलिए अगर घर का कोई सदस्य कुछ नया बदलाव ला रहा है, तो बेवजह विरोध न करें. पहले मामले को समझें, तभी कुछ कहें.

बेहतर रिश्तों के लिए परिवार में सभी से पॉज़िटिव टच बनाए रखें, बातें करें, साथ में किताब पढ़ें, टीवी देखें, जो करना

है करें, पर अपनेअपने मोबाइल में बिज़ी न रहें.

अगर आपके परिवार में किसी को गाने का शौक़ है, तो कभीकभार साथ में अंताक्षरी खेलें.

महीनेदो महीने में मिलकर कहीं घूमने जाएं. आपके साथसाथ आपके रिश्ते भी रिफ्रेश होंगे.

अगर आपके पार्टनर, भाईबहन या फिर मांपिताजी को किसी चीज़ का शौक़ है या वो किसी की मदद करना चाहते हैं, तो उनकी मदद करें.

हफ़्ते में एक दिन फैमिली कुकिंग टाइम बनाएं, जहां घर का हर सदस्य किचन में मदद करेगा. साथ में काम करने

से एकदूसरे के लिए मन में कड़वाहट नहीं आती.

घर के सभी मेंबर्स मिलकर कोई कॉमेडी शो देखें. इससे घर का माहौल भी हल्काफुल्का रहता है.

रिश्तों में औपचारिकता पूरी करने के लिए कुछ न करें, जो भी करें पूरे दिल से करें, जैसेअगर किसी मामले में बड़ों की राय ले रहे हैं, तो सोचसमझकर उसे अमल में भी लाएं, वरना उन्हें लगेगा कि आपने स़िर्फ औपचारिकता के लिए पूछा था.

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हेल्दी लव लैंग्वेजेज़

ये आपके रिश्ते के लिए ऑक्सीजन का काम करते हैं. प्यार और अपनेपन के बिना कोई रिश्ता फलफूल नहीं सकता. यह आपके रिश्ते का एक महत्वपूर्ण कवच है, जो उसे मुरझाने से बचाता है.

परिवार में रोज़ाना एकदूसरे से ये तीन लाइनें कहेंआई लव यू, आई नीड यू, आई रिस्पेक्ट यूये चंद लाइनें आपके रिश्ते में ईगो और निगेटिविटी को हावी नहीं होने देतीं.

चाहे पार्टनर्स हों या फिर दूर रह रहे बच्चे या पैरेंट्स, रोज़ाना 2 मिनट फॉर्मूला अपनाएं. हर रोज़ 2 मिनट फोन पर बात करें और इस दौरान कोई दूसरा काम न करें, बल्कि स़िर्फ उसकी सुनें और अपनी कहें.

थैंक्यू’ और ‘सॉरी’ जैसे मैजिकल शब्द लव लैंग्वेज का हिस्सा हैं. अगर कोई आपके लिए कुछ भी ख़ास करता है, तो उसे थैंक्यू कहने में बिल्कुल कंजूसी न करें.

सरप्राइज़ेस सभी को अच्छे लगते हैं. कभीकभार बिना किसी ओकेज़न के ही एक ख़ूबसूरत गिफ्ट अगर किसी को मिले, तो वो बेशक ख़ुश हो जाएगा.

रिश्ते में सच्चाई और ईमानदारी जितनी ज़रूरी है, उतनी ही ज़रूरी है केयरिंग. यह लव लैंग्वेज आपके अपनों को आपके प्यार से रूरू कराती है.

एकदूसरे के लिए अपनी भावनाओं का ज़िक्र करें. ऐसा ज़्यादातर पैरेंट्स करते हैं कि बच्चों को भले ही कितना प्यार क्यों न करें, कभी उनसे बताते नहीं. माना प्यार बोलकर जताया नहीं जाता, पर कभीकभी यह सुनना अच्छा लगता है.

जब भी मौक़ा मिले, अपने पैरेंट्स को यह बताने से कभी न चूकें कि उन्होंने आपके लिए बहुत कुछ किया है. आज आपकी ख़ुशहाली का सारा श्रेय उन्हीं को जाता है.

अगर किसी की तबियत ख़राब है, तो उसकी दवा ख़त्म होने से पहले दवा लाकर रखना, कोई खाने का शौक़ीन है, तो उसकी फेवरेट डिश लेकर जाना, संगीत के शौक़ीनों के लिए फेवरेट सिंगर का कलेक्शन देना, जैसी छोटीछोटी बातें आपके रिश्ते को ख़ुशहाल बनाती हैं.

रिश्तों को मज़बूत बनाए रखने के लिए मेंटेनेंस की भी ज़रूरत पड़ती है. अपने प्यार, विश्‍वास और अपनेपन से रिश्तों को मेंटेन करते रहें.

सुनीता सिंह

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पति की ग़लत आदतों को यूं छुड़ाएं (Make Your Husband Quit His Bad Habits)

Husband, Bad Habits
पति की ग़लत आदतों को यूं छुड़ाएं (Make Your Husband Quit His Bad Habits)
आप उन्हें बेपनाह प्यार करती हैं, पर उनकी ग़लत आदतों से भी परेशान रहती हैं. तो क्यों न कुछ ऐसा करें कि वे सुधर भी जाएं और आपसी प्यार भी बना रहे.

ख़ुशहाल पारिवारिक जीवन में पतिपत्नी के आपसी प्यार व सहयोग का काफ़ी महत्व होता है. ऐसे में पत्नी जहां हर ज़िम्मेदारियों को निभाती है, तो वह अपने पति से भी यह उम्मीद रखती है कि वे भी इसमें उसका भरपूर साथ दें और पतिदेव करते भी हैं. लेकिन इसके बावजूद पतियों की कुछ ऐसी आदतें होती हैं, जिनसे पत्नियां परेशान रहती हैं. वे पति की इन ग़लत आदतों को छुड़ाने की भरसक कोशिश भी करती हैं. इस विषय में वीडिटर्ना डॉट इन के फाउंडर सनीष सुकुमारन ने हमें कई उपयोगी जानकारियां दीं.

Husband, Bad Habits

अल्कोहल व स्मोकिंग की आदत

यह समस्या तक़रीबन अधिकतर घरों में देखने को मिलती है. पत्नी चाहे लाख सेहत की दुहाई दे, पर पतिदेव के कान पर जूं तक नहीं रेंगती. पुरुषों की यह प्रवृत्ति रही है कि वे शराब व सिगरेट को अपनी शान समझते हैं. लेकिन जब इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है, तब उनकी ज़िंदगी ही नहीं, पारिवारिक स्थिति भी डांवाडोल होने लगती है.

स्मार्ट ट्रिक्स

पति को शराब व सिगरेट से होनेवाले दुष्प्रभाव से अवगत कराएं.

ऐसे कई परिवारों के उदाहरण दे सकती हैं, जिनका घर इसके कारण बर्बाद हो गया.

अपने व बच्चों के प्रति प्यार का वास्ता देकर भी इसे छुड़ाने का प्रयास कर सकती हैं.

पति को प्यार से समझाएं कि इससे उनकी सेहत ही नहीं, बल्कि परिवार की भी मानसिक स्थिति प्रभावित होती है.

शेविंग न करना

अधिकतर पुरुषों की आदत होती है कि वे शेविंग कम ही करते हैं या नियमित रूप से नहीं करते. उनकी इस आदत से पत्नियां अक्सर चिढ़ती हैं. कई तो ऐसे भी होते हैं कि शादीफंक्शन आदि में भी शेविंग करके जाना ज़रूरी नहीं समझते.

स्मार्ट ट्रिक्स

पति को हाइजीन के महत्व के बारे में समझाएं.

पार्टनर को कहें कि रेग्युलर शेविंग करने से उनकी सेहत ही नहीं, बल्कि पर्सनैलिटी भी निखरती है.

आज के ज़माने में प्रेज़ेंटेबल होना कितना ज़रूरी है. अप टु डेट रहेंगे, तो ऑफिस में भी इम्प्रेशन बना रहेगा.

इस इमोशनल कार्ड को भी इस्तेमाल करना न भूलें कि उनका क्लीन शेव रहना आपको बेहद पसंद है.

पर्सनल बातें शेयर न करना

यह हर कोई जानता है कि अधिकतर पतियों की यह आदत होती है कि वे अपनी पत्नी को हर बात नहीं बताते. ख़ासतौर पर दोस्तों से जुड़ी बातें या किसी के साथ कोई लेनदेन हो या फिर किसी की मदद ही क्यों न की हो. ऐसा वे इसलिए करते हैं ताकि घर में कोई विवाद या कलह न हो, लेकिन वे नहीं जानते कि इसी वजह से भविष्य में उन्हें कई मुसीबतों का सामना भी करना पड़ सकता है.

स्मार्ट ट्रिक्स

आप पति को समझा सकती हैं कि उनका ऐसा करना ठीक नहीं है. पतिपत्नी के रिश्ते में पारदर्शिता का होना बेहद

ज़रूरी है.

कल को कोई धोखा दे दे या फिर कोई उनसे ही किसी बात को लेकर पूछताछ करे, तो उनके लिए उस स्थिति को हैंडल करना मुश्किल हो सकता है.

कई बार बहुतसी बातें अपने तक ही रखने से कई अनजानी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

इससे आपकी सेहत भी प्रभावित हो सकती है और आप खुलकर ज़िंदगी को नहीं जी पाते हैं.

रात को घर देरी से आना

माना आज की फास्ट व बिज़ी लाइफ में वर्कलोड बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन पतियों द्वारा अक्सर ओवरटाइम करना, घंटों ऑफिस में समय बिताना, वक़्त पर घर न आना पत्नियों की परेशानी का सबब बनने के साथसाथ उन्हें शंकित भी करने लगता है.

स्मार्ट ट्रिक्स

* पति को समय पर आने के लिए आग्रह करें या फिर कहें कि उनके आने के बाद ही परिवार के सभी डिनर एक

साथ करेंगे.

* आपको और परिवार को समय देने के महत्व को समझाएं.

* काम का महत्व अपनी जगह है और परिवार का अपनी जगहइस पहलू को विस्तार से समझाएं.

* टाइम मैनजमेंट करना सिखाएं. कई बार पति महोदय की लापरवाही और ढुलमुल रवैया भी देरी से आने का कारण

होता है.

यह भी पढ़ें:  क्या करें जब पति को हो जाए किसी से प्यार?

Husband, Bad Habits

अपनों को छोड़ दूसरों को अधिक महत्व देना

पतियों की यह ख़ास आदत होती है कि घर की मुर्गी दाल बराबर यानी अपने घरपरिवार के लोगों के गुणों को कम आंकेंगे और दूसरों के परिवार, ख़ासकर अपने दोस्तों व उनके परिवार की जी भरकर तारीफ़ करेंगे. उनके गुणों की बखान करेंगे.

स्मार्ट ट्रिक्स

* मुसीबत आने पर अपने ही काम आते हैं, इसे पति महोदय को समझाएं.

* बारबार दूसरों के सामने अपने परिवार को कमतर आंकना ख़ुद उनके व्यक्तित्व पर भी प्रश्‍नचिह्न लगाता है.

* पति को आगाह करें कि इससे आप व बच्चे हतोत्साहित होते हैं. कभीकभी आपमें हीनभावना भी पनपने लगती है.

* पार्टनर को बताएं कि बच्चे पिता को महत्व कम देने लगे हैं. उनके दिलोदिमाग़ में यह बात घर कर गई है कि पापा को तो बस अपने दोस्तों के ही बीवीबच्चे अच्छे लगते हैं. अतः पति को इन सभी बातों से अवगत कराएं और उनका व्यवहार बैलेंस रखने के लिए कहें.

इन्हें भी आज़माएं

* पतिपत्नी एकदूसरे के साथ अधिक समय बिताएं.

* पति को क्रोध में व चिढ़कर नहीं, बल्कि संयम व प्रेम से समझाएं.

* हालात व स्थिति के अनुसार पति को उनकी ज़िम्मेदारियों का एहसास करवाएं.

* घरपरिवार व अपनों के महत्व को

समझाएं. ध्यान रहे पहले परिवार, बाक़ी सब बाद में.

* बच्चे बड़ों से ही सीखते हैं, पति की ग़लत आदतों का बच्चों पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है. इस पहलू पर पति महोदय का ध्यान आकर्षित करें.

* मास्टर स्ट्रोक तो यही होगा कि पत्नी पति को अपनी आदत बना लें, तब उन्हें आपके सिवा किसी और में दिलचस्पी कम

ही होगी.

परमिंदर निज्जर

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इंटरनेट ने छीनी ज़िंदगी की फ़ुर्सत … (Internet Has Taken Over Our Lives)

disadvantages of internet
न जाने कितने ही पल यूं ही तारों को तकते-तकते साथ गुज़ारे थे हमने… न जाने कितनी ही शामें यूं ही बेफिज़ूल की बातें करते-करते बिताई थीं हमने… न जाने कितनी ऐसी सुबहें थीं, जो अलसाते हुए एक-दूजे की बांहों में संवारी थी हमने… पर अब न वो रातें हैं, न वो सुबह, न वो तारे हैं और न वो बातें… क्योंकि अब वो पहले सी फ़ुर्सत कहां, अब वो पहले-सी मुहब्बत कहां…!

disadvantages of internet

जी हां, हम सबका यही हाल है आजकल, न व़क्त है, न ही फ़ुर्सतक्योंकि ज़िंदगी ने जो रफ़्तार पकड़ ली है, उसे धीमा करना अब मुमकिन नहीं. इस रफ़्तार के बीच जो कभीकभार कुछ पल मिलते थे, वो भी छिन चुके हैं, क्योंकि हमारे हाथों में, हमारे कमरे में और हमारे खाने के टेबल पर भी एक चीज़ हमारे साथ रहती है हमेशा, जिसे इंटरनेट कहते हैं. ज़ाहिर है, इंटरनेट किसी वरदान से कम नहीं. आजकल तो हमारे सारे काम इसी के भरोसे चलते हैं, जहां यह रुका, वहां लगता है मानो सांसें ही रुक गईं. कभी ज़रूरी मेल भेजना होता है, तो कभी किसी सोशल साइट पर कोई स्टेटस या पिक्चर अपडेट करनी होती हैऐसे में इंटरनेट ही तो ज़रिया है, जो हमें मंज़िल तक पहुंचाता है. लेकिन आज यही इंटरनेट हमारे निजी पलों को हमसे छीन रहा है. हमारे फुर्सत के क्षणों को हमसे दूर कर रहा है. हमारे रिश्तों को प्रभावित कर रहा है. किस तरह छिन रहे हैं फ़ुर्सत के पल?

किस तरह छिन रहे हैं फ़ुर्सत के पल?

चाहे ऑफिस हो या स्कूलकॉलेज, पहले अपनी शिफ्ट ख़त्म होने के बाद का जो भी समय हुआ करता था, वो अपनों के बीच, अपनों के साथ बीतता था.

आज का दिन कैसा रहा, किसने क्या कहा, किससे क्या बहस हुईजैसी तमाम बातें हम घर पर शेयर करते थे, जिससे हमारा स्ट्रेस रिलीज़ हो जाता था.

 लेकिन अब समय मिलते ही अपनों से बात करना या उनके साथ समय बिताना भी हमें वेस्ट ऑफ टाइम लगता है. हम जल्द से जल्द अपना मोबाइल या लैपटॉप लपक लेते हैं कि देखें डिजिटल वर्ल्ड में क्या चल रहा है.

कहीं कोई हमसे ज़्यादा पॉप्युलर तो नहीं हो गया है, कहीं किसी की पिक्चर को हमारी पिक्चर से ज़्यादा कमेंट्स या लाइक्स तो नहीं मिल गए हैं…?

और अगर ऐसा हो जाता है, तो हम प्रतियोगिता पर उतर आते हैं. हम कोशिशों में जुट जाते हैं फिर कोई ऐसा धमाका करने की, जिससे हमें इस डिजिटल वर्ल्ड में लोग और फॉलो करें.

भले ही हमारे निजी रिश्ते कितने ही दूर क्यों न हो रहे हों, उन्हें ठीक करने पर उतना ध्यान नहीं देते हम, जितना डिजिटल वर्ल्ड के रिश्तों को संजोने पर देते हैं.

 

आउटडेटेड हो गया है ऑफलाइन मोड

आजकल हम ऑनलाइन मोड पर ही ज़्यादा जीते हैं, ऑफलाइन मोड जैसे आउटडेटेडसा हो गया है.

यह सही है कि इंटरनेट की बदौलत ही हम सोशल साइट्स से जुड़ पाए और उनके ज़रिए अपने वर्षों पुराने दोस्तों व रिश्तेदारों से फिर से कनेक्ट हो पाए, लेकिन कहीं न कहीं यह भी सच है कि इन सबके बीच हमारे निजी रिश्तों और फुर्सत के पलों ने सबका ख़ामियाज़ा भुगता है.

शायद ही आपको याद आता हो कि आख़िरी बार आपने अपनी मॉम के साथ बैठकर चाय पीते हुए स़िर्फ इधरउधर की बातें कब की थीं? या अपने छोटे भाईबहन के साथ यूं ही टहलते हुए मार्केट से सब्ज़ियां लाने आप कब गए होंगे?

बिना मोबाइल के आप अपने परिवार के सदस्यों के साथ कब डायनिंग टेबल पर बैठे थे?

अपनी पत्नी के साथ बेडरूम में बिना लैपटॉप के, बिना ईमेल चेक करते हुए कब यूं ही शरारतभरी बातें की थीं?

याद नहीं आ रहा नआएगा भी कैसे? ये तमाम ़फुर्सत के पल अब आपने सूकून से जीने जो छोड़ दिए हैं.

अपने बच्चे के लिए घोड़ा बनकर उसे हंसाने का जो मज़ा है, वो शायद अब एक जनरेशन पहले के पैरेंट्स ही जान पाएंगे, क्योंकि आजकल स़िर्फ पिता ही नहीं, मम्मी भी इंटरनेट के बोझ तले दबी हैं.

वर्किंग वुमन के लिए भी अपने घर पर टाइम देना और फुर्सत के साथ परिवार के साथ समय बिताना कम ही संभव हो गया है.

लेकिन फिर भी कहीं न कहीं वो मैनेज कर रही हैं, पर जहां तक पुरुषों की बात है, युवाओं का सवाल है, तो वो पूरी तरह इंटरनेट की गिरफ़्त में हैं और वहां से बाहर निकलना भी नहीं चाहते.

यही नहीं, आजकल जिन लोगों के पास इंटरनेट कनेक्शन नहीं होता या फिर जो लोग सोशल साइट्स पर नहीं होते, उन पर लोग हैरान होते हैं और हंसते हैं, क्योंकि उन्हें आउटडेटेड व बोरिंग समझा जाता है.

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स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है

रिसर्च बताते हैं कि सोशल साइट्स पर बहुत ज़्यादा समय बिताना एक तरह का एडिक्शन है. यह एडिक्शन ब्रेन के उस हिस्से को एक्टिवेट करता है, जो कोकीन जैसे नशीले पदार्थ के एडिक्शन पर होता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की एक स्टडी के मुताबिक, जो लोग सोशल साइट्स पर अधिक समय बिताते हैं, वो अधिक अकेलापन और अवसाद महसूस करते हैं, क्योंकि जितना अधिक वो ऑनलाइन इंटरेक्शन करते हैं, उतना ही उनका फेस टु फेस संपर्क लोगों से कम होता जाता है.

यही वजह है कि इंटरनेट का अधिक इस्तेमाल करनेवालों में स्ट्रेस, निराशा, डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन पनपने लगता है. उनकी नींद भी डिस्टर्ब रहती है. वो अधिक थकेथके रहते हैं. ऐसे में ज़िंदगी का सुकून कहीं खोसा जाता है.

इन सबके बीच आजकल सेल्फी भी एक क्रेज़ बन गया है, जिसके चलते सबसे ज़्यादा मौतें भारत में ही होने लगी हैं.

लोग यदि परिवार के साथ कहीं घूमने भी जाते हैं, तो उस जगह का मज़ा लेने की बजाय पिक्चर्स क्लिक करने के लिए बैकड्रॉप्स ढूंढ़ने में ज़्यादा समय बिताते हैं. एकदूसरे के साथ क्वालिटी टाइम गुज़ारने की जगह सेल्फी क्लिक करने पर ही सबका ध्यान रहता है, जिससे ये फुर्सत के पल भी यूं ही बोझिल होकर गुज़र जाते हैं और हमें लगता है कि इतने घूमने के बाद भी रिलैक्स्ड फील नहीं कर रहे.

मूवी देखने या डिनर पर जाते हैं, तो सोशल साइट्स के चेकइन्स पर ही ध्यान ज़्यादा रहता है. इसके चलते वो ज़िंदगी की ़फुर्सत से दूर होते जा रहे हैं.

सार्वजनिक जगहों पर भी लोग एकदूसरे को देखकर अब मुस्कुराते नहीं, क्योंकि सबकी नज़रें अपने मोबाइल फोन पर ही टिकी रहती हैं. रास्ते में चलते हुए या मॉल मेंजहां तक भी नज़र दौड़ाएंगे, लोगों की झुकी गर्दन ही पाएंगे. इसी के चलते कई एक्सीडेंट्स भी होते हैं.

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इंटरनेट की देन: पोर्न साइट्स भी पहुंच से दूर नहीं

 आजकल आसानी से पोर्न वीडियोज़ देखे जा सकते हैं. चाहे आप किसी भी उम्र के हों. इंटरनेट के घटते रेट्स ने इन साइट्स की डिमांड और बढ़ा दी है. बच्चों पर जहां इस तरह की साइट्स बुरा असर डालती हैं, वहीं बड़े भी इसकी गिरफ़्त में आते ही अपनी सेक्स व पर्सनल लाइफ को रिस्क पर ला देते हैं. इसकी लत ऐसी लगती है कि वो रियल लाइफ में भी अपने पार्टनर से यही सब उम्मीद करने लगते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि इन वीडियोज़ को किस तरह से बनाया जाता है. इनमें ग़लत जानकारियां दी जाती हैं, जिनका उपयोग निजी जीवन में संभव नहीं.

– यही नहीं, अक्सर एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर्स भी आजकल ऑनलाइन ही होने लगे हैं. चैटिंग कल्चर लोगों को इतना भा रहा है कि अपने पार्टनर को चीट करने से भी वो हिचकिचाते नहीं. इससे रिश्ते टूट रहे हैं, दूरियां बढ़ रही हैं.

कुछ युवतियां अधिक पैसा कमाने के चक्कर में इन साइट्स के मायाजाल में फंस जाती हैं. बाद में उन्हें ब्लैकमेल करके ऐसे काम करवाए जाते हैं, जिससे बाहर निकलना उनके लिए संभव नहीं होता.

इंटरनेट फ्रॉड के भी कई केसेस अब आम हो गए हैं, ये तमाम बातें साफ़तौर पर यही ज़ाहिर करती हैं कि इंटरनेट ने वाक़ई ज़िंदगी की फुर्सत छीन ली है…!

योगिनी भारद्वाज

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न भूलें रिश्तों की मर्यादा (Set Healthy Boundaries For Happy Relationship)

Set Healthy Boundaries For Happy Relationship

हेल्दी रिश्ते की शुरुआत ही मानसम्मान और मर्यादा से होती है. किसी व्यक्ति का सलीके से किया गया व्यवहार ही हमें उसकी ओर आकर्षित करता है. जब तक रिश्ते (Set Healthy Boundaries For Happy Relationship) में मानमर्यादा बनी रहती है, तब तक रिश्ते मज़बूत व हेल्दी बने रहते हैं, लेकिन जब हम अपनी हद पार करने लगते हैं, तो रिश्तों में दरार आने लगती है. अगर आपके रिश्ते में आ गई है खटास, तो देखें कि कहीं आपने अपने रिश्तों की मर्यादा तो नहीं लांघी?

Set Healthy Boundaries For Happy Relationship

क्या है रिश्तों की मर्यादा?

सायकोथेरेपिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी कहती हैं कि रिश्तों में बाउंड्रीज़ का मतलब किसी को कंट्रोल करना या बंदिशें लगाना नहीं, बल्कि ख़ुद को व अपने रिश्ते को सुरक्षित रखने के लिए एक दायरा बनाना है. दूसरे शब्दों में कहें, तो हर रिश्ते का मानसम्मान बनाए रखना ही मर्यादा है और अपने आप को मयार्दित रखना ही हर रिश्ते की कामयाबी का मूलमंत्र है.

क्यों ज़रूरी है रिश्तों में मर्यादा?

रिश्तों में बाउंड्रीज़, लक्ष्मणरेखा, मर्यादा या हद जो भी कह लें, रिश्ते की गरिमा को बनाए रखने के लिए ज़रूरी होती है.

इससे रिश्तों में प्यार व सम्मान बना रहता है.

परिवार के सभी लोग जब अपनीअपनी मर्यादा का ख़्याल रखते हैं, तो घर में सौहार्द का माहौल बना रहता है.

जब दूसरे आपकी इच्छाओं और पर्सनल स्पेस का ख़्याल रखते हैं, तो आप भी उनकी पर्सनल स्पेस का ख़्याल रखते हैं.

किसी के आत्मसम्मान को चोट नहीं पहुंचती.

कोई बेवजह दूसरों की सोच का शिकार नहीं होता.

रिश्तों में ग़लतफ़हमियां पैदा नहीं होतीं.

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तीन तरह की होती हैं रिश्तों की बाउंड्रीज़

फिज़िकल बाउंड्री: किसी से बात करते समय एक सेफ डिस्टेंस बनाए रखना ही फिज़िकल बाउंड्री है. कुछ लोग आदतन दूसरों को छूकर बात करते हैं, जो हर किसी को पसंद नहीं आता. ऐसे लोगों से बात करने से लोग कतराते हैं. कपल्स को भी बड़ों के सामने इस बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए, क्योंकि हो सकता है कि उससे बड़े असहज हो जाएं.

अगर कोई आपका बहुत क़रीबी भी है, फिर भी बात करते व़क्त फिज़िकली बहुत ज़्यादा क्लोज़ न जाएं.

हर किसी के साथ एक सेफ डिस्टेंस मेंटेन करें.

अगर आपको भी दूसरों को छूकर बात करने की आदत है, तो उसे सुधार लें.

इमोशनल बाउंड्री: हर रिश्ते का एक इमोशनल लेवल होता है. किसी भी रिश्ते में इतनी मर्यादा रखें कि वो आप पर इमोशनली हावी न हो सके.

अगर किसी की कही कोई बात आपको परेशान कर रही है, तो इसका मतलब है कि आपने उस व्यक्ति को इमोशनली ख़ुद पर बहुत ज़्यादा हावी कर लिया है.

हर कोई हर किसी के बारे में कुछ न कुछ कहता रहता है, इसलिए आपको उसके बारे में इतना नहीं सोचना चाहिए.

मज़ाक बनाने और गॉसिप के लिए लोग अक्सर उनको टारगेट करते हैं, जो इमोशनली कमज़ोर होते हैं. आपको अपनी इमोशनल बाउंड्री ख़ुद बनानी होगी.

पतिपत्नी को भी एकदूसरे की इस बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए.

डिजिटल बाउंड्री: आजकल की डिजिटल लाइफ में डिजिटल बाउंड्री का सम्मान बहुत ज़रूरी हो गया है. अगर आप सोशल मीडिया पर हर बार बिना पूछे किसी को टैग करते हैं, चेक इन में उसे मेंशन करते हैं, तो ध्यान रखें कि आप उसकी डिजिटल बाउंड्री क्रॉस कर रहे हैं.

बिना किसी की मर्ज़ी के उसके मोबाइल में तांकझांक करना, इस मर्यादा को भंग करता है.

घरवाले या रिश्तेदार अपने मोबाइल में क्या रखते हैं, क्या देखते हैं यह जानने के लिए उनका मोबाइल चेक करना ग़लत है.

जो लोग अपनी फोटो डालकर अपने 20 दोस्तों को टैग कर देते हैं या भगवान की फोटो डालकर 50 लोगों को टैग कर देते हैं, डिजिटल बाउंड्री क्रॉस करनेवाले ऐसे दोस्तों को लोग अक्सर ब्लॉक कर देते हैं.

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पार्टनर्स परखें अपने रिश्ते की मर्यादा

हर रिश्ते की तरह पतिपत्नी के रिश्ते में भी मर्यादा बहुत मायने रखती है. जब पार्टनर्स एकदूसरे को फॉर ग्रांटेड लेने लगते हैं या एकदूसरे की भावनाओं को नज़रअंदाज़ करके स़िर्फ अपनी इच्छाओं की पूर्ति शुरू कर देते हैं, तब रिश्ते बिखरने लगते हैं, इसलिए ज़रूरी है कि हर कपल अपने रिश्ते को इस कसौटी पर परखे

क्या आप अपनी बात खुलकर व ईमानदारी के साथ पार्टनर से शेयर कर पाते हैं?

क्या आप एकदूसरे की बात सुनते हैं?

एकदूसरे की भावनाओं को सम्मान देते हैं?

एकदूसरे से प्यार व सम्मान से बात करते हैं?

क्या एकदूसरे को स्पेस देते हैं?

अपने पार्टनर की हॉबीज़, करियर और इच्छाओं का ख़्याल रखते हैं?

जीवन में आगे बढ़ने के लिए एकदूसरे को सपोर्ट करते हैं?

चाहे जो हो जाए, रिश्ते की मर्यादा का ख़्याल रखते हैं?

कुछ भी हो जाए, पार्टनर से अपशब्द या बुरा व्यवहार नहीं करते?

अगर ऊपर दिए गए ज़्यादातर सवालों के जवाब हांहैं, तो आपका रिश्ता हेल्दी है, लेकिन अगर आपका स्कोर कम है, तो आपको अपने रिश्ते की ओर ध्यान देने की ज़रूरत है.

काउंसलिंग सायकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ कहती हैं कि ज़रूरी नहीं कि हर बार रिश्तों में दरार या खटास का कारण मर्यादा का भंग होना ही हो, क्योंकि जो आपके लिए मर्यादा है, ज़रूरी नहीं सामनेवाले के लिए भी वही मर्यादा हो. दरअसल, हर किसी के लिए इसके मायने

अलगअलग होते हैं. अलगअलग परिवेश में पलेबढ़े होने के कारण पार्टनर्स के लिए भी इसके मायने अलग होते हैं, लेकिन कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखकर आप भी अपने रिश्ते की एलओसी को बनाए रख सकते हैं.

हैप्पी रिलेशनशिप टिप्स

पतिपत्नी के रिश्ते की मर्यादा की डोर उन दोनों के हाथ में होती है. अगर आप भी मर्यादा की इन लकीरों का पालन करें, तो आपका रिश्ता भी हमेशा मज़बूत बना रहेगा.

हंसीमज़ाक और शरारतें करें, पर दूसरों के सामने अपने पार्टनर का कभी मज़ाक न बनाएं.

मायके में या ससुराल में कभी भी पार्टनर को ताना न मारें.

अगर किसी ने आपसे पार्टनर की शिकायत की है, तो सबके सामने दोषी ठहराने की बजाय अकेले में बात कर सच्चाई जानने की कोशिश करें.

अगर आपको कोई ग़लतफ़हमी हो गई है, तो बैठकर बात करें, न कि कठघरे में खड़ा करें.

अगर पार्टनर से उम्मीद करते हैं कि वो अपनी सारी बातें शेयर करे, तो आपको भी उनसे कुछ नहीं छिपाना चाहिए.

पार्टनर अपनी इच्छाएं कभी न थोपें, चाहे वो पहननेओढ़ने या खानेपीने के मामले में ही क्यों न हों.

 रिश्ते में बहुत ज़्यादा जकड़न घुटन का कारण बनने लगती है, इसलिए पार्टनर को पर्याप्त स्पेस भी दें.

जब पतिपत्नी एकदूसरे का सम्मान करते हैं, तो बाकी लोग भी उनके रिश्ते को सम्मान की नज़र से देखते हैं.

किसी भी परिस्थिति में पार्टनर की बात को सुनने का धैर्य रखें. बिना पूरी बात सुने, कभी भी रिएक्ट न करें.

आप दोनों को ही अपनेअपने रिश्ते की मज़बूती के लिए प्यार, विश्‍वास और समर्पण को बनाए रखना होगा.

याद रखें कि प्यार का मतलब बंधन नहीं आज़ादी होता है, इसलिए अपने पार्टनर की प्राइवेसी का हमेशा ख़्याल रखें.

मर्यादा से जुड़ी ये सारी बातें अन्य रिश्तों में भी लागू होती हैं, चाहे वो भाईबहन हो, देवरभाभी, जीजासाली, मांबेटे या पितापुत्री.

अनीता सिंह

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