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ब्लड प्रेशर से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई (Myths And Facts About Blood Pressure)

हाइपरटेंशन (Hypertension) यानी हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure), बदलते लाइफस्टाइल के चलते होने वाली एक आम स्वास्थ्य समस्या है. हालांकि अधिकांश लोग इस बात से बेख़बर होते हैं कि वो ब्लड प्रेशर से संबंधित बीमारी की गिरफ़्त में हैं. चूंकि इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं, इसलिए इस रोग को साइलेंट किलर भी कहा जाता है. आंकड़ों के मुताबिक़, दुनिया में हर तीसरा व्यक्ति इस बीमारी से ग्रसित है. हालांकि कई लोग इस रोग से जुड़ी कुछ भ्रांतियों को सच मानकर टेंशन में आ जाते हैं, तो चलिए जानते हैं ब्लड प्रेशर से जुड़ी 10 भ्रांतियां और उनकी वास्तविकता.

Myths About Blood Pressure
भ्रम- अगर ब्लड प्रेशर कम हो जाए, तो नमक खाने से वह नॉर्मल हो जाता है.
सच– अगर आप यह सोचते हैं कि ब्लड प्रेशर कम होने पर नमक खाने से वह नॉर्मल हो जाता है, तो आपकी यह धारणा बिल्कुल ग़लत है. ब्लड प्रेशर कम है या ज़्यादा यह हम ख़ुद तय नहीं कर सकते. इसके बारे में हमें सही जानकारी स़िर्फ डॉक्टर ही दे सकता है. हालांकि जिन लोगों का ब्लड प्रेशर ज़्यादा रहता है, उन्हें कम नमक खाना चाहिए.

भ्रम- ब्लड प्रेशर कम हो जाने पर दवाइयों का सेवन बंद कर देना चाहिए.
सच- ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है जो जीवनभर व्यक्ति का पीछा नहीं छोड़ती. इससे पूरी तरह से निजात पाना नामुमक़िन है, लेकिन इसे कंट्रोल किया जा सकता है. इसलिए अगर दवाइयों के सेवन से ब्लड प्रेशर कम हो गया हो, तब भी दवाइयां बंद नहीं करनी चाहिए. ऐसी स्थिति में डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए.

भ्रम- वाइन दिल के लिए सेहतमंद होती है, इसलिए अत्यधिक मात्रा मंें इसका सेवन करने पर भी यह नुकसान नहीं पहुंचाती.
सच- वाइन फ़ायदा तभी पहुंचाती है, जब इसका सेवन सीमित मात्रा में किया जाए. ख़ासकर जिन लोगों को हाइपरटेंशन की समस्या है उन लोगों को अल्कोहल का सेवन करने से बचना चाहिए या फिर बहुत सीमित मात्रा में पीना चाहिए. ऐसे लोग अगर ज़्यादा शराब पीते हैं तो उन्हें हार्ट फेल, स्ट्रोक, अनियमित हार्टबीट जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

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भ्रम– हाई ब्लड प्रेशर ज़िंदगी भर ठीक नहीं हो सकता.
सच- हां, यह सच है कि ब्लड प्रेशर ज़िंदगी भर व्यक्ति के साथ रहता है, लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल की मदद से इस समस्या को काफ़ी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. इसे कंट्रोल करने के लिए हेल्दी डायट लें, वेट कंट्रोल करें व खाने में कम नमक का इस्तेमाल करें. इसके अलावा शराब और सिगरेट से परहेज़ करें.

भ्रम- जब ब्लड प्रेशर हाई होता है तो सिरदर्द होता है.
सच- यह धारणा बिल्कुल ग़लत है, क्योंकि सिरदर्द से ये पता नहीं चलता कि ब्लड प्रेशर बढ़ गया है, लेकिन यह सच है कि अगर आपको किसी तरह का दर्द महसूस होता है, तो इससे हार्ट रेट बढ़ जाती है.

भ्रम- हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को केला नहीं खाना चाहिए.
सच- यह बिल्कुल भी सच नहीं है कि ब्लड प्रेशर के मरीज़ केला नहीं खा सकते. सच्चाई तो यह है कि अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर है तो आपको केले का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि केला ब्लड प्रेशर के स्तर को कम करने में मदद करता है.

भ्रम- शरीर में किसी तरह की परेशानी या बीमारी महसूस नहीं होने का अर्थ यह है कि आपको ब्लड प्रेशर की समस्या नहीं है.
सच- अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो यह ग़लत है, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर होने पर शरीर में तुरंत किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं होती है. यह रोग धीरे-धीरे शरीर के अंगों को नुक़सान पहुंचाना शुरू करता है और आगे चलकर यह हार्ट व किडनी फेल होने के अलावा हार्ट स्ट्रोक जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है.

भ्रम- एक्सरसाइज़ व डायट से बीपी कंट्रोल हो जाए तो इससे डरने की ज़रूरत नहीं है.
सच- वेट कंट्रोल, हेल्दी डायट और एक्सरसाइज़ की मदद से हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह समस्या जड़ से ख़त्म हो गई है. यह समस्या कंट्रोल में रहे इसके लिए अनुशासित जीवनशैली का पालन करने के साथ समय-समय पर बीपी चेक करवाना आवश्यक है.

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भ्रम– हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़ रक्तदान नहीं कर सकते.
सच- हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़ भी रक्तदान कर सकते हैं, बशर्ते रक्तदान के समय आपका बीपी 180 सिस्टोलिक से कम और 100 डायस्टोलिक तक होना चाहिए. बीपी की गोलियों का रक्तदान से कोई संबंध नहीं है, लेकिन हां, सर्दी-ज़ुकाम, पेट की समस्या या एंटीबायोटिक्स लेते समय रक्तदान करने
से बचें.

भ्रम- गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर होना आम है, इससे कोई गंभीर समस्या नहीं होती.
सच– गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की संभावना उन महिलाओं में अधिक होती है, जिन्हें पहले से हाई बीपी की समस्या होती है. ज़्यादातर मामलों में गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर ज़्यादा होना परेशानी पैदा नहीं करता, जबकि कुछ मामलों में यह विकासशील भ्रूण और मां के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है.

इन डेली डोज़ेस से बढ़ाएं रिश्तों की इम्यूनिटी (Daily Doses To A Healthy Relationship)

रिश्तों (Relationships) को बेहतर बनाए रखने का कोई लिखा-पढ़ा फॉर्मूला तो नहीं है, क्योंकि हर इंसान और हर किसी की सोच अलग होती है. पर हां, कुछ बातें ज़रूरी होती हैं, जिनसे आपके रिश्ते बेहतर होंगे, उनमें नई उमंग और ऊर्जा जागेगी, जिससे उनकी इम्यूनिटी तो बढ़ेगी ही, साथ ही आप दोनों का प्यार व अपनापन भी बरक़रार रहेगा. तो क्या हैं वो डेली डोज़ेस (Daily Doses), जो आपके रिश्ते को बनाएंगे इम्यून, आइए जानें.

 Relationship Dose
थोड़ी आज़ादी दें

रिश्तों में एक-दूसरे को कंट्रोल करने की कोशिश कभी न करें. इससे घुटन होने लगती है. हमेशा एक-दूसरे को स्पेस दें और इतना विश्‍वास बनाएं कि पार्टनर बिना हिचके सब कुछ शेयर कर सके. हर बात पर टोकना, हर बात पर सवाल या हर बार यह अपेक्षा कि आप जैसा चाहें, पार्टनर वैसा ही करे और आपके अनुसार ही ढले… यह सोच ग़लत है. उसके अलग व्यक्तित्व को मानें और सम्मान दें.

गेम्स न खेलें, मैनुपुलेशन से बचें

बहुत से रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स भी आपको कहते मिलेंगे कि पावर गेम्स खेलें, ऐसा करें, तो पार्टनर कंट्रोल में रहेगा, वैसा करेंगे, तो दिन-रात आपको ही याद करेगा. ऐसा कभी न करें. अगर आप जान-बूझकर पार्टनर को इग्नोर कर रहे हैं, ताकि उनका अटेंशन पा सकें, तो यह ग़लत है. हो सकता है, थोड़े समय के लिए आपको पार्टनर का अटेंशन मिल जाए, लेकिन लंबे समय तक यह करेंगे, तो पार्टनर की दिलचस्पी आप में कम हो जाएगी. रिश्ते में ठंडापन व ग़लतफ़हमियां बढ़ेंगी.

पार्टनर की ख़ुशियों को भी सम्मान दें

भले ही आप एक-दूसरे से कितना ही प्यार करते हों, पर प्यार के साथ एक-दूसरे को सम्मान भी दें और ख़ासतौर से पार्टनर की ख़ुशियों का भी ख़्याल रखें. कभी-कभी अपनी ख़ुशियों को छोड़कर पार्टनर की ख़ुशी के लिए कुछ करने में बुराई नहीं. इससे आपके रिश्ते की इम्यूनिटी ही बढ़ेगी. पार्टनर को भी लगेगा कि आपको उनकी फ़िक्र है और जब उनकी बारी आएगी त्याग या समर्पण की, तो वो भी आपकी ख़ुशियों का ख़्याल रखने से पीछे नहीं हटेंगे. दूसरी तरफ़ पार्टनर की ख़ुशी व उसके सम्मान के लिए नकारात्मक बातों और चीज़ों पर से ध्यान हटाएं. जी हां, यदि पार्टनर की कोई आदत या बात आपको पसंद नहीं, तो बार-बार उसे टोकने या बदलने को कहने की बजाय उसे अवॉइड करें या फिर प्यार से अलग तरह से कहें. यह सोचें कि कोई भी परफेक्ट नहीं होता, आप भी नहीं हैं, तो फिर पार्टनर से इतने परफेक्शन की उम्मीद क्यों? बेहतर होगा पार्टनर की अच्छी आदतों और बातों को तवज्जो दें, उसकी प्रशंसा करें, उसे मोटिवेट करें. ये बातें आपके रिश्ते को इम्यून करेंगी.

मर्यादा तय करें

यह आप दोनों के व आपके रिश्ते के सम्मान को बनाए रखने के लिए भी ज़रूरी है. आप अपने पार्टनर को यह समझाएं कि उनकी किन बातों को आप स्वीकार कर सकते हैं और किन बातों को नहीं. पर यह बात झगड़े के दौरान न कहें. आपस में बैठकर बात करें. आराम से बोलें, आवाज़ का वॉल्यूम कम रखकर बात करें. ग़ुस्से में बात बिगड़ सकती है. एक बार पार्टनर समझ जाएंगे कि उन्हें क्या नहीं करना है, तो वो आगे से ध्यान रखेंगे.

अपनी ग़लती मानें

ग़लती किसी से भी हो सकती है. अगर आपकी ग़लती पकड़ी गई है या न भी पकड़ी गई हो, तो भी जहां आपको महसूस हो कि आप ग़लत हैं, उसे स्वीकार लें. बेवजह का ईगो रिश्तों को ख़त्म कर देता है. सॉरी बोलने में कोई छोटा नहीं हो जाता.

दिन की शुरुआत सकारात्मकता से करें

आपकी पॉज़िटिविटी पार्टनर को भी बढ़ावा देगी. सुबह-सुबह हड़बड़ाहट में ग़ुस्सा करने से काम नहीं संभलेगा. बेहतर होगा कि उन क्षणों को भी सकारात्मकता से स्वीकारें और धैर्य से मुस्कुराते हुए काम करें. इससे आप दोनों का ही मूड दिनभर रिफ्रेश रहेगा.

पार्टनर को इग्नोर न करें

भले ही आपके रिश्ते को कितना ही समय हो गया हो, पर इग्नोरेंस किसी को भी बर्दाश्त नहीं होगा. काम के बीच पार्टनर को न भूल जाएं. बीच-बीच में कॉल या मैसेज करके हालचाल या हल्की-फुल्की बातचीत करें. रोमांटिक बातें करें, छेड़छाड़ करें. यह डेली डोज़ आपको कनेक्टेड रखेगा.

सरप्राइज़ दें

यह ज़रूरी नहीं कि स्पेशल ओकेज़न पर ही सरप्राइज़ प्लान किया जाए, बल्कि सरप्राइज़ प्लान करके आप उस दिन को स्पेशल बना सकते हैं और अपने पार्टनर को स्पेशल फील करा सकते हैं. आप कोई गिफ्ट ले जाएं, जो आपका पार्टनर बहुत समय से लेना चाह रहा हो या आप मूवी टिकट्स ले आएं, डिनर प्लान करें… आप अपनी क्रिएटिविटी के अनुसार कोई भी सरप्राइज़ प्लान कर सकते हैं. उन बातों को याद करें या उनकी चर्चा करें, जो आपको एक-दूसरे में अच्छी लगती हैं: पुरानी या कोई नई याद, कुछ खट्टी-मीठी बातें, अपनी पहली मुलाक़ात या शादी का अल्बम… इनमें से कोई भी चीज़ आपके रिश्ते को इंस्टेंट फ्रेशनेस देती है. रिश्ते की इम्यूनिटी के लिए बहुत ज़रूरी है कि प्यारभरे ये डोज़ भी समय-समय पर एक-दूसरे को आप देते रहें.

माफ़ करना सीखें

पार्टनर की ग़लतियों पर बार-बार उसे शर्मिंदगी महसूस कराना रिश्ते को कमज़ोर करता है. बेहतर होगा पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ा जाए. माफ़ करना सीखें. हर किसी से ग़लती हो सकती है, ऐसे में माफ़ करने से ही रिश्ते बेहतर होते हैं, ग़लतियों को याद करके या याद दिलाकर रिश्तों को इम्यून नहीं किया जा सकता.

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Couple Goals
पार्टनर की पसंद को महत्व दें

कुछ चीज़ें जो आपके लिए उन्हें अच्छी लगती हों, वो करें, जैसे- उनकी पसंद का कलर पहनें, उनकी पसंद का टीवी प्रोग्राम उनके साथ देखें या उनकी पसंद का खाना बनाएं.

कुछ चीज़ें साथ-साथ प्लान करें

एक साथ वॉक पर जाएं, जॉगिंग करें या स्विमिंग, डांस क्लास आदि जॉइन करें. इससे साथ में क्वालिटी टाइम बिता सकेंगे और उन पलों को ज़्यादा एंजॉय कर सकेंगे. आप किचन में भी मिलकर कुछ स्पेशल बना सकते हैं.

स़िर्फ पार्टनर के लिए टाइम निकालें

आज काम जल्दी हो गया, इसलिए जल्दी घर आ गया/गई, आज आउटडोर मीटिंग कैंसल हो गई, तो समय से पहले घर पहुंच गए… इन कारणों के अलावा एक दिन ऐसा करें कि हाफ डे लें स़िर्फ अपने पार्टनर के लिए और उसे कहें कि तुम्हारी याद आ रही थी, इसलिए हाफ डे लेकर आ गया. अगर दोनों वर्किंग हैं, तो पार्टनर के साथ प्लान करें. लीव लेकर पूरा दिन घर पर अकेले एक-दूसरे के साथ बिताएं.

शॉर्ट हॉलीडेज़ प्लान करें

लंबी छुट्टी पर जाना संभव नहीं, कोई बात नहीं. वीकेंड पर एक-दो दिन की अतिरिक्त छुट्टियां लेकर आसपास ही कहीं रिज़ॉर्ट में जाएं. यह आपके रिश्ते को नई ताज़गी व ऊर्जा देगी.

बहुत सारे सवाल न करें

बात-बात पर सवाल या टोकना किसी को भी पसंद नहीं आता, ऐसे में यदि आपके मन में कुछ आशंकाएं हैं भी, तो समय आने पर उनका जवाब मांगें. एक साथ रोज़ाना ढेर सारे सवाल पार्टनर को आपसे दूर ले जाएंगे. उन्हें लगेगा कि आपको उन पर भरोसा ही नहीं है.

पार्टनर के परिवारवालों को भी सम्मान दें

अपने पैरेंट्स के लिए हम जो सम्मान चाहते हैं, वही सम्मान पार्टनर के पैरेंट्स को भी दें. इससे आप दोनों की बॉन्डिंग और बेहतर होगी. हमेशा घरवालों की शिकायत करने से बचें. अगर कोई समस्या है भी, तो आराम से बैठकर सुलझाने की कोशिश करें.

सेक्स लाइफ को रिफ्रेश करें

सेक्स को रूटीन न बनने दें. यह शादीशुदा ज़िंदगी का महत्वपूर्ण अंग है. इसे नज़रअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है. अपनी सेक्स लाइफ में ताज़गी बनाए रखने के लिए कुछ न कुछ नया ट्राई करते रहें. चाहें, तो जगह चेंज करके देखें, नई पोज़ीशन्स ट्राई करें. एक-दूसरे को हॉट मसाज दें. रूम का लुक चेंज करें.

हर बात को शिकायत के अंदाज़ में न कहें

किसी की भी लाइफ परफेक्ट नहीं होती, लेकिन छोटी-छोटी चीज़ों में ख़ुशियां ढूंढ़ी जा सकती हैं. आपके पास भले ही बड़ी गाड़ी न हो, पर प्यार करनेवाला पार्टनर तो है. हर चीज़ का सकारात्मक पहलू देखें और

बात-बात पर शिकायत न करें. न ही रोना रोते रहें कि मेरे पास ये नहीं है, मुझे ज़िंदगी में कुछ नहीं मिला… आदि.

इमोशनल ब्लैकमेलिंग से बचें

सेक्स के समय शर्त रखना या बच्चों के नाम पर इमोशनल ब्लैकमेल करना बंद कर दें. इससे भले ही पार्टनर उस व़क्त आपकी बात मान लेगा, लेकिन उसकी नज़रों में आपका सम्मान कम होता जाएगा और वो आपसे दूर जाने लगेगा. रिश्ते की इम्यूनिटी के लिए इस ग़लती को फ़ौरन सुधार लें.

– विजयलक्ष्मी

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क्या आपका बॉयफ्रेंड मैरिज मटेरियल है? (Is Your Boyfriend Marriage Material?)

Marriage Material

नवीन व सीमा एक ही कॉलेज में थे. नवीन का आकर्षक व्यक्तित्व, सहायक स्वभाव, एक ही मुलाक़ात में दूसरों को अपना बना लेने का अंदाज़ क़ाबिले-तारीफ़ था, इसीलिए हर लड़की उसका साथ पसंद करती थी. दोस्तों के बीच भी वह काफ़ी लोकप्रिय था. जब नवीन की रुचि सीमा के प्रति बढ़ी तो उनकी दोस्ती जल्दी ही प्यार में बदल गई और झटपट शादी तय हो गई, किन्तु विवाह के बाद यही क़ाबिले तारीफ़ अंदाज़ और समाज सेवा का रवैया दोनों की तक़रार का कारण बना. सीमा नवीन से घरेलू ज़िम्मेदारियों की अपेक्षा करती थी, लेकिन नवीन से जग भलाई छूटती नहीं थी.

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राखी और निरंजन अच्छे दोस्त थे. ऑफ़िस के बाद दोनों रोज़ ही कभी कॉफ़ी हाउस, तो कभी रेस्टॉरेन्ट में बैठते. निरंजन अकेला रहता था. राखी भी माता-पिता की स्वतन्त्र विचारों वाली इकलौती बेटी थी. उनके लिए घर से ज़्यादा कैरियर महत्वपूर्ण था. दोस्ती गहरी होती गई. एक-दूसरे का साथ बहुत प्रिय था, इतना कि लगा एक-दूसरे के बिना रह ही नहीं सकेंगे. परिवारों को भी कोई ऐतराज नहीं हुआ तो सहर्ष शादी के बंधन में बंध गए. कहा-सुनी तब शुरू हुई जब निरंजन रेस्टॉरेन्ट के बजाए घर के खाने को ज़्यादा पसंद करने लगा. वह चाहता था कि राखी गृहस्थी में भी थोड़ी रुचि ले, किन्तु राखी ने तो अपने घर में पहले कभी घरेलू कामों में रुचि ली ही नहीं थी. फिर तो छोटी-छोटी बातों पर भी तू-तू मैं-मैं होने लगी और इस रिश्ते का अंत हुआ तलाक़ के साथ.

जब इस तरह की बातें सामने आती हैं तब पछतावा होता है अपने चुनाव पर. तब लगता है जल्दबाज़ी तो नहीं कर दी निर्णय लेने में. दरअसल, प्यार का नशा ऐसा होता है कि साथी में कुछ ग़लत या कमी दिखाई नहीं देती है और यदि कुछ महसूस भी होता है तो साथी का साथ पाने की प्रबल चाह के आगे सब कुछ बौना हो जाता है. पहले विवाह हमेशा माता-पिता द्वारा तय किए जाते थे. लड़के से अधिक घर-परिवार को महत्व दिया जाता था. मुश्किलें तब भी आती थीं, लेकिन उस समय समझौता करना और आजीवन इस बंधन को निभाने की भावना सर्वोपरि होती थी. बेमेल विवाह भी निभाए जाते थे और समझौतों के साथ निभाते-निभाते समय के साथ अनुकूलता और परिपक्वता भी आ जाती थी. निभाना स्त्री का प्रथम गुण था भले ही वह उसकी मजबूरी थी, क्योंकि उस समय वह आर्थिक रूप से स्वतन्त्र नहीं थी. उनके पास इतना कोई विकल्प नहीं होता था. किन्तु अब ऐसा नहीं है, बल्कि लड़कियां ख़ुद अपने लिए जीवनसाथी का चुनाव कर रही हैं. वे शारीरिक रूप-रंग से ़ज़्यादा मानसिक स्तर पर मेल चाहती हैं. प्रेम-विवाह न भी हो तो आज शादी से पहले मिलना-जुलना, एक-दूसरे के विचारों को जानना, साथ समय गुज़ारना दोनों परिवारों को भी मान्य होने लगा है. इसके बावजूद कई बार विवाह के बाद बहुत कुछ ऐसी बातें सामने आती हैं, जिनके बारे में पहले ज़रा भी ख़याल नहीं आया होता. विचार, व्यवहार और दृष्टिकोण विवाहित जीवन का अहम हिस्सा हैं, क्योंकि आप अकेली नहीं हैं. परस्पर अनुकूलता, परिपक्वता और विश्‍वास ज़रूरी है इस बंधन में, अतः ज़रूरी हो जाता है यह आंकना कि जिस व्यक्ति के साथ आप ज़िंदगी गुज़ारने का फैसला ले रही हैं, वह शादी जैसे पवित्र बंधन के योग्य है या नहीं?

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– लेकिन यह भी ज़रूरी है कि प्रेमी के बारे में अपनी राय बनाने से पहले आप अपना आत्मावलोकन भी करें, जैसे- अपने आपको जानना, अपने स्वभाव, अपनी क्रियाओं-प्रतिक्रियाओं को पहचानना, अपनी अपेक्षाओं को समझना, शादी की मैच्योरिटी को गम्भीरता से समझना और उससे जुड़ी ज़िम्मेदारियों को स्वीकारना.

– शादी एक पवित्र बंधन ही नहीं है, बल्कि यहां अनेक समझौते और कभी-कभी त्याग व समर्पण भी करने पड़ते हैं. कई बार ऐसा लगता है कि विचारों में समानता या अनुकूलता के साथ ही निभाना बेहतर होता है, किन्तु ऐसा नहीं है. अनुकूल स्वभाव के बावजूद टकराव हो ही जाता है. अहम का टकराव हो ही जाता है और कभी-कभी प्रतिकूल विचारधाराएं भी परिपूरक बन ज़िंदगी आसान बना देती हैं. जैसे यदि आप किन्हीं स्थितियों में कमज़ोर हैं तो साथी वहां पूरक बन जाए. उसे आपसे प्रेम है, आप पर भरोसा है और आपको समझता है, तो शादी का यह रिश्ता ख़ूबसूरत बन जाता है.

– विवाह की पहली शर्त है प्यार व विश्‍वास के साथ उसके गुण-अवगुण सहित स्वीकारना, साथ ही उसके परिजन व प्रियजनों को भी स्वीकारना. जिसके साथ जीवन बिताना है, उसे शर्तों में न बांधें, न ही उसकी शर्तें स्वीकार करें. प्रेमी या बॉयफ्रेंड अकेला होता है, किन्तु विवाह के बाद घर-परिवार होता है, हर रिश्ते से जुड़ना होता है, हर किसी के प्रति ज़िम्मेदारियां निभानी होती हैं.

– किसी भी रिश्ते या संबंध के निर्वाह में कम्यूनिकेशन यानी बातचीत अहम भूमिका रखती है, अतः बॉयफ्रेंड के साथ हर एक विषय पर स्पष्ट बात करें. उसके विचारों को जानें, अपनी भावनाओं को व्यक्त करें, उसकी प्रतिक्रिया महसूस करें. यदि स्वयं निर्णय ले पाने में दुविधा है तो किसी मैच्योर व्यक्ति या काउंसलर की सलाह भी ली जा सकती है. यदि व्यक्ति प्यार का वास्ता देकर अपनी बात मनवाने की कोशिश करता है या आपके प्यार में पागल हो अपने परिवार को छोड़ देने की बात करता है तो याद रहे, ये स्थिति न तो सामान्य है, न व्यावहारिक. आगे निश्‍चय ही परेशानियां आ सकती हैं. जो अब आपके लिए माता-पिता को छोड़ने की बात करता है, वह कल आपको भी छोड़ सकता है. कोई पति-पत्नी परिवार-समाज से दूर दुनिया बसा कर ख़ुश नहीं रह सकते हैं, बल्कि इससे तनाव व कुंठा महसूस होने लगती है, फिर शुरू होने लगता है एक-दूसरे पर आरोपों व प्रत्यारोपों का सिलसिला.

– विवाह का सच्चा सुख है केयरिंग व शेयरिंग में. साथी के साथ हर व्यवहार में सहजता महसूस होनी चाहिए. चाहे अपनी समस्या शेयर करनी हो या अपनों को केयरिंग की ज़रूरत हो. एक-दूसरे के अलावा आपकी ज़िंदगी में अपनों के लिए भी जगह होनी चाहिए. मेरा-तुम्हारा न होकर हर स्थिति मे ङ्गहमाराफ भाव होना चाहिए. एक-दूसरे को बदलने के बजाय एक-दूसरे का पूरक होना चाहिए.

– विचारों में समानता, ज़िंदगी के प्रति नज़रिया, घर-परिवार या भविष्य के प्रति दृष्टिकोण के साथ-साथ आर्थिक दृष्टिकोण के प्रति भी अपने बॉयफ्रेंड की प्लानिंग को जानने की कोशिश करें. प्यार में आसमान से तारे तोड़े जा सकते हैं, किन्तु शादीशुदा ज़िंदगी के लिए ठोस धरातल चाहिए. पैसों के बिना ज़िंदगी नहीं चलती. पैसों से ख़ुशियां नहीं पाई जा सकतीं, लेकिन पैसों से ही सुख के साधन जुटाए जा सकते हैं और सुख के माध्यम से आनंद की अनुभूति होती है.

– साथी का चरित्र जानना भी बहुत ज़रूरी है. चरित्र उसकी संगत, उसके व्यवहार, उसके अंदाज़ आदि से आसानी से पता लग सकता है, बस आपको अपनी सोच पर, प्यार के एहसास पर भरोसा होना चाहिए. शादी का ़फैसला लेना है, जीवनभर किसी का प्यार पाना है, उसे बनाए रखना है, फिर जल्दबाज़ी क्यों? सोच-समझकर निर्णय लें कि क्या वाकई आपका बॉयफ्रेंड ऐसा है कि उसके साथ आप ज़िंदगीभर निभा पाएंगी.

– वैसे भी विवाह नामक संस्था से आज की पीढ़ी का विश्‍वास उठता-सा जा रहा है. काफ़ी लोगों के लिए शादी ज़िंदगीभर का सामाजिक बंधन नहीं रह जाता है, बल्कि अब विवाह व्यक्तिगत परिपूर्णता के साधन के रूप में देखा जाता है. साथी यदि अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाता है, तो बंधन को निभाते जाना मूर्खता समझी जाती है, अतः ज़रूरी है कि इस बात को पहले ही समझ लिया जाए कि गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड परस्पर एक-दूसरे की कसौटी पर खरे उतर पाएंगे या नहीं.

– प्रसून भार्गव

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रिश्तों में मिठास बनाए रखने के 50 मंत्र (50 Secrets For Happier Family Life)

ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बनाते हैं रिश्ते, अपनेपन का एहसास कराते हैं रिश्ते, कभी पल में जुड़ जाते हैं रिश्ते, जीने का सबब होते हैं ये रिश्ते… रिश्तों के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती. ऐसे में अगर इसमें अपनेपन की मिठास घुल जाए, तो ज़िंदगी और भी ख़ुशगवार बन जाती है. आइए, जानें रिश्तों में मिठास बनाए रखने के 50 मंत्र.

Secrets For Happier Family Life

1. सबसे पहले रिश्ते की ज़रूरतों को समझें, जो रिश्ता आप निभाने जा रहे हैं, वह कितना अहम् है आपके लिए इस बात को समझें.

2. दूसरी ज़रूरी चीज़ यह है कि आप अपने रिश्तों को समय दें. यह काफ़ी पुराना मंत्र है, पर है सौ फ़ीसदी कारगर. साथ समय बिताने के लिए आप साथ फ़िल्म देख सकते हैं, बाहर खाना खाने जा सकते हैं, साथ टीवी देख सकते हैं या फिर बातें कर सकते हैं.

3. स्पर्श का जादू… क्या आपने इसके बारे में सुना है? यह वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित हो चुका है कि स्पर्श किसी भी रिश्ते में जादू का काम करता है. अगर बच्चा बीमार है, तो डॉक्टर भी यह सलाह देते हैं कि पैरेंट्स बच्चे को अपना स्पर्श दें. स्पर्श सभी रिश्तों में बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए समय-समय पर जहां ज़रूरी हो, अपने स्पर्श का जादू चलाते रहें.

4. जब अपने मित्रों या रिश्तेदारों के साथ हों, तो औपचारिक भाषा का प्रयोग न करें. अनौपचारिक भाषा या बातचीत से आप और क़रीब आते हैं. उदाहरण के तौर पर, “आप कैसे हैं?” की जगह आप पूछ सकते हैं, “बहुत दिनों के बाद आपसे मुलाक़ात हुई, क्या हालचाल हैं?”

5. उपहार किसी भी रिश्ते में नई जान डाल सकते हैं. बिगड़ी बात बना सकते हैं. उपहार सस्ता हो या फिर महंगा, यह महत्वपूर्ण नहीं है. आप उसे किस भावना से दे रहे हैं, वो महत्वपूर्ण है. उपहार बताते हैं कि आप अपनों का कितना ख़्याल रखते हैं. यदि उपहार अनपेक्षित रूप से और बिना किसी स्वार्थ के दिया जाए, तो आनंद दुगुना हो जाता है.

6. आप अपने रिश्तेदारों और प्रियजनों के लिए एक छोटी-सी पार्टी या समारोह का आयोजन कर सकते हैं. उस पार्टी की थीम ़फैमिली रख दीजिए.

7. थोड़ा समय निकालकर अपने माता-पिता, भाई-बहनों आदि के साथ बैठकर अपने पुराने फ़ोटो एलबम देखें. अपने सगे-संबंधियों के साथ बिताए गए समय की ये तस्वीरें आज उनसे आपके रिश्ते को ज़रूर मज़बूत बनाएंगे.

8. साथ खाना ज़रूर खाएं. बेहतर रिश्तों के लिए दिन में कम से कम एक बार साथ खाना बहुत ज़रूरी है. खाने के टेबल पर परिवार से जुड़ी बातें ही करें.

9. रिश्तों में आपकी तरफ़ से अगर अपेक्षाएं कम और ज़िम्मेदारी का बोध ज़्यादा होगा, तो रिश्ते अपने आप मधुर होते जाएंगे.

10. हफ़्ते में कम से कम एक बार अपने सभी रिश्तेदारों से फ़ोन या इंटरनेट से बात करें.

11. किसी भी रिश्ते को निभाते समय अपना अहंकार या ईगो बीच में न आने दें.

12. अपनी प्रा़ेफेशनल लाइफ़ को ऑफ़िस तक ही सीमित रखें. उसे अपने घर के भीतर न लाएं.

13. जब आप अपने परिवारजनों के साथ हों, तो कंप्यूटर, टीवी या फ़ोन का इस्तेमाल कम से कम करें.

14. किसी भी परिस्थिति में रिश्तों के बीच संवादहीनता न आने दें. चुप्पी रिश्ते को ख़त्म कर देती है. यदि कोई रिश्ता बिगड़ रहा हो, तो उसे बातचीत से ठीक करें.

15. किसी से बात करते समय या अपनी बात किसी के समक्ष प्रस्तुत करते समय इस चीज़ का ख़ास ख़्याल रखें कि हर किसी का आत्मसम्मान होता है और उसे आप ग़लती से भी चोट न पहुंचाएं.

16. अच्छे श्रोता बनें. एक अच्छे रिश्ते के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि सामनेवाले की बातों को धैर्य के साथ सुना व समझा जाए.

17. किसी भी रिश्तेदार से मिलते समय मन में कोई हीनभावना या किसी बात का गर्व न आने दें.

18. यदि आप अपने रिश्तेदारों और मित्रोें को नाम से याद रखें और किसी समारोह में नाम से संबोधित करें, तो उन्हें बहुत अच्छा लगेगा.

19. अपने सभी मित्रों और रिश्तेदारों के जन्मदिन, शादी की सालगिरह आदि की तारीख़ याद रखकर उन्हें बधाई ज़रूर दें.

20. यदि आप समय-समय पर बड़ों को आदर और छोटों को प्यार देते रहेंगे, तो रिश्ते मज़बूत होते जाएंगे.

21. हर रिश्ते की अपनी समस्याएं होती हैं, पर किसी भी हाल में आपको क‘ोधित नहीं होना है. अपने जज़्बातों और ग़ुस्से पर नियंत्रण रखें.

22. आज की सबसे बड़ी समस्या है आर्थिक परेशानियां. लेकिन यह ध्यान रहे कि आपकी आर्थिक परेशानियां किसी भी रिश्ते और ख़ासकर पति-पत्नी के रिश्ते को हताहत न करें, क्योंकि आपकी परेशानियां, तो देर-सवेर सुलझ ही जाएंगी, पर रिश्ते नहीं.

23. रिश्तों में क्षमादान बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए माफ़ करना और अपने किसी ग़लत व्यवहार के लिए माफ़ी मांगना भी सीखें.

24. अपशब्दों या लड़ाई-झगड़े से दूर रहेें.

25. ख़ुद अपने हाथों से पूरे परिवार की पसंद का खाना बनाएं.

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Happy Family Life

26. सारे तीज-त्योहार सभी रस्मों-रिवाज़ व परंपराओें के साथ परिवारवालों के साथ मनाएं.

27. परिवारजनों या रिश्तेदारों में किसी को कोई विशेष उपलब्धि मिली हो, तो उसे सराहना न भूलें.

28. सभी परिवारवाले मिलकर साल में एक बार साथ घूमने ज़रूर जाएं.

29. छुट्टीवाले दिन सभी घरवाले मिलकर कि‘केट, कैरम या कोई और गेम खेल सकते हैं.

30. अगर संभव हो, तो घर में कोई पालतू जानवर रखें, जिसकी देखभाल परिवार के सभी लोग मिलकर करें.

31. घर के बच्चों में भी रिश्तों को निभाने के संस्कार डालें.

32. यदि आपको अपने परिवार से प्यार है, तो अपनी इस भावना को सबके सामने जाहिर होने दें.

33. परिवार में अपने रिश्ते को मज़बूत करने के लिए आप अपने परिवार के इतिहास पर एक शोध कर सकते हैं, जैसे- आपके पूर्वज कौन थे? वह कहां से आए थे? आज आपके क़रीबी रिश्तेदार कहां-कहां स्थित हैं आदि. और फिर ये सारी जानकारियां आप परिवार को गेट-टुगेदर पर दे सकते हैं.

34. घर के सारे काम एक-दूसरे के साथ बांटकर करें. इससे काम करने में मज़ा भी आएगा और आपसी रिश्ते भी मज़बूत होंगे.

35. परिवार के प्रत्येक सदस्य को प्राइवेसी मिलनी चाहिए, फिर चाहे वह छोटा हो या बड़ा.

36. रिश्ता कितना भी गहरा क्यों न हो, पर किसी के निजी मामलों में दख़ल नहीं देना चाहिए.

37. अपने रिश्तों में विश्‍वास पैदा करें.

38. किसी भी रिश्ते में दोस्ती का एक रिश्ता ज़रूर रखें.

39. आपके घर आनेवाले रिश्तेदारों का स्वागत पूरे दिल से करें. अपने तनाव अपनी परेशानियों को उनके सामने जाहिर न हेाने दें.

40. अपने आपको रिश्ते के हर उतार-चढ़ाव और हर परिस्थिति में ढालने के लिए तैयार रखेें.

41. अपने प्रियजनों के बुरे वक़्त में उनका साथ ज़रूर दें.

42. पूर्वानुमान लगाना सीखें कि आपकी पत्नी या पति, आपके माता-पिता आपसे क्या चाहते हैं? उनकी आपसे क्या अपेक्षाएं हैं? और उनके कहे बिना उसे पूरा कर उन्हें सरप्राइज़ देें.

43. आप जैसे हैं, घरवालों और रिश्तेदारों के सामने भी वैसे ही रहें. कुछ और बनने या दिखाने का प्रयत्न न करें. इससे भविष्य में आप मुश्किल में पड़ सकते हैं.

44. किसी भी रिश्ते को निभाने के लिए आपका ख़ुद का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बहुत ज़रूरी है, इसलिए अपनी सेहत का ख़ास ख़्याल रखें.

45. अपनी बुरी परिस्थितियों व दुखों का रोना किसी के सामने न रोएं. हमेशा रोनेवाले व्यक्ति को कोई पसंद नहीं करता.

46. अपने हर रिश्ते में पूरी ईमानदारी बरतें.

47. किसी से भी मिलते समय सकारात्मकता से मिलें. उस व्यक्ति के लिए कोई भी कड़वाहट मन में न रखें.

48. किसी रिश्ते को निभाते समय अगर पूर्व में आपसे कोई ग़लती हुई हो, तो उसे हमेशा याद रखें, ताकि आप उसे दोहराएं ना.

49. दूसरों से वैसा ही व्यवहार करें, जैसा कि आपको अपने लिए अपेक्षित है. आपने वह कहावत तो सुनी ही होगी कि जैसा बोएंगे वैसा ही काटेंगे.

50. रिश्तों में कभी रूखापन न आने दें. अपने प्रेम की आर्द्रता से इसे समय-समय पर सींचते रहें. यदि आपसे कोई रूठा है, तो उसे मनाने में ज़रा भी देर न लगाएं, क्योंकि वही तो आपका अपना है, जिसे आप बहुत प्यार करते हैं.

– विजया कठाले निबंधे

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महिलाएं बन रही हैं घर की मुख्य कमाऊ सदस्य (Women Are Becoming Family Breadwinners)

 

Working Women

महिलाएं बन रही हैं घर की मुख्य कमाऊ सदस्य (Women Are Becoming Family Breadwinners)

काम (Work) के आधार पर वर्गभेद और लिंग के आधार पर काम का बंटवारा… यह हमारे समाज का चलन था. पुरुषों (Men) का काम होता था पैसे कमाकर लाना, बाहर के सारे काम व ज़िम्मेदारियों को निभाना, जबकि महिलाओं (Women) का काम होता था घर संभालना. बाहर से देखने में सब कुछ ठीक-ठाक ही था. एक अनुशासन और संतुलन बना हुआ था समाज व परिवार में. लेकिन कहीं न कहीं बहुत कुछ ठीक नहीं था, क्योंकि पैसा कमाकर लानेवाला ख़ुद को शासक समझ बैठा था और घर संभालनेवाली को अपना ग़ुलाम. यही वजह थी कि महिलाओं ने इस प्रथा को तोड़ने में ही अपनी भलाई समझी और नतीजा सामने है.

आज महिलाएं पढ़ती-लिखती हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हैं. लेकिन यहां पिछले कुछ समय से एक और परिवर्तन देखने को मिल रहा है. शुरुआत में जहां महिलाएं एक सपोर्टिव अर्निंग मेंबर के रूप में देखी जाती थीं, वहीं अब वो घर की मुख्य कमाऊ सदस्य बनती जा रही हैं.

किस तरह से बदला है परिदृश्य?

–    आज महिलाएं अपनी पढ़ाई और करियर को भी उतना ही महत्व देती हैं, जितना शादी को.

–    मात्र पैसा कमाना ही उद्देश्य नहीं है अब महिलाओं का, वो करियर प्लानिंग करती हैं. करियर में आगे बढ़ने का सपना देखती हैं.

–    अब कॉम्प्रोमाइज़ कम करती हैं.

–    पैसा कमाने की अहमियत समझती हैं.

–    अपने लिए सम्मान चाहती हैं.

–    घर ही नहीं, अब बाहर की ज़िम्मेदारियां भी निभाती हैं.

–   पहले बेटा ही बुढ़ापे की लाठी माना जाता था, अब बेटियां भी वो भूमिका निभा रही हैं और उनसे उम्मीदें भी बढ़ी हैं.

–    कई बार तो पैरेंट्स की देखरेख के लिए शादी न करने का निर्णय भी लेती हैं.

–    शादी से कहीं ज़्यादा तवज्जो अपनी मर्ज़ी से ज़िंदगी जीने को देने लगी हैं.

–    शादी के बाद ससुराल में भी सपोर्ट करती हैं.

–    घर का लोन हो या बच्चों की पढ़ाई, सभी में बराबर की ज़िम्मेदारी लेती हैं.

–    लेकिन इसका ख़ामियाज़ा भी भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि पुरुष थोड़े लापरवाह होते जा रहे हैं.

–   वो अपनी ज़िम्मेदारियां भी अपनी कमाऊ पत्नी पर ही डालते जा रहे हैं.

–   अपने करियर को लेकर थोड़े कैज़ुअल हो रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि पत्नी अच्छा कमा रही है.

–    कहीं-कहीं पत्नी का अच्छा कमाना और बेहतर करियर रिश्तों को तोड़ भी रहा है. कुछ पुरुषों का अहम् इतना बड़ा होता है कि वो पत्नी की कामयाबी बर्दाश्त नहीं कर पाते.

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Working Women

महिलाओं पर दबाव बढ़ गया है…

–    इस बदलते परिदृश्य में महिलाओं पर दबाव व ज़िम्मेदारियां बढ़ रही हैं.

–    भले ही वो घर की मुख्य कमाऊ सदस्य ही क्यों न हों, घर के काम की ज़िम्मेदारी अब भी उन्हीं की है.

–    बच्चों की परवरिश से लेकर रिश्ते निभाने का दायित्व उन्हीं पर है.

–    इन सबके बीच उनकी शारीरिक ही नहीं, मानसिक हेल्थ पर भी प्रभाव पड़ रहा है.

–   चूंकि अब वो कमाती हैं, तो पति भी आर्थिक ज़िम्मेदारियां नहीं निभाते, जिसका बोझ इन्हीं के कंधों पर आ जाता है.

स़िर्फ नौकरी ही नहीं, बिज़नेस में भी हाथ आज़मा रही हैं महिलाएं…

–    महिलाओं के बढ़ते वर्चस्व को देखते हुए अब अधिकांश बैंक, सरकारी योजनाएं और यहां तक कि ग़ैरसरकारी वित्तीय संस्थान भी उनकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं.

–    फुलर्टन इंडिया क्रेडिट कंपनी में रूरल बिज़नेस के प्रमुख विशाल वाधवा का कहना है कि समाज में अब बड़े पैमाने पर बदलाव आया है. आज के दौर में महिलाएं घर की मुखिया बन रही हैं. वो न स़िर्फ आर्थिक तौर पर घर संभालती हैं, बल्कि फाइनेंस से लेकर कई बड़े मसलों पर निर्णय भी लेती हैं.

–    महिलाओं को आगे बढ़ाने व आत्मनिर्भर होने के लिए कई स्कीम्स व योजनाएं हैं, क्योंकि अब लोग उनकी आत्मनिर्भरता को गंभीरता से लेने लगे हैं.

–    स़िर्फ शहरों में ही नहीं, अब गांवों में भी महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता के महत्व को समझ रही हैं.

–    यही वजह है कि अब कई वित्तीय संस्थान भी महिलाओं को सशक्त बनाने में पूरा सहयोग दे रहे हैं.

–    इस सहयोग में होम लोन्स पर विशेष ऑफर्स, बिज़नेस लोन पर कम ब्याज दर, ग्रुप लोन, पर्सनल लोन, नए बिज़नेस के लिए आर्थिक सहायता या बिज़नेस एक्सपैंशन के लिए किसी तरह की मदद आदि शामिल है.

–    इन सबके अलावा प्रोफेशनल ट्रेनिंग, कोर्सेस, अवेयरनेस प्रोग्राम्स, मनी मैनेजमेंट आदि संबंधी प्रशिक्षण भी संस्थाएं ग्रामीण इलाकों में देती हैं, क्योंकि आज महिलाओं की कमाई व आर्थिक आत्मनिर्भरता भी परिवार के लिए बहुत मायने रखती है.

–    पारंपरिक नियमों को तोड़कर आज महिलाएं अपने परिवार की आजीविका बेहतर करने का ज़िम्मा ले रही हैं, क्योंकि अब वो अपनी स्थिति में बदलाव चाहती हैं.

–   एक मशहूर लेखक व दर्शनशास्त्री ने कहा है कि सवाल यह नहीं कि कौन मुझे करने दे रहा है, सवाल यह है कि कौन मुझे रोक रहा है.

–   तो अब समाज बदल रहा है, महिलाओं की ही नहीं, महिलाओं को लेकर परिवार की भी सोच बदल रही है. ऐसे में अपनी स्थिति को बेहतर बनाने का ज़िम्मा भी महिलाओं का ही है.

–   अब वो मजबूर नहीं रहना चाहतीं. कठोर निर्णय लेने से भी पीछे नहीं हटतीं. लेकिन इस आर्थिक आत्मनिर्भरता और सपोर्टिव अर्निंग मेंबर से होकर मुख्य कमाऊ सदस्य बनने तक की लड़ाई में उन्हें बहुत कुछ खोना भी पड़ा है, क्योंकि आज भी परिवार व समाज से उस तरह का सहयोग नहीं मिल पा रहा, जैसा अपेक्षित था.

–    महिलाओं को इस मुक़ाम को पाने की बड़ी क़ीमत अदा करनी पड़ती है, क्योंकि पुरुषों के मुक़ाबले उनसे अपेक्षाएं ज़्यादा हैं. उन्हें सहयोग कम मिलता है, उनका संघर्ष बढ़ जाता है.

–    लेकिन कभी मजबूरी में, तो कभी अपनी ख़ुशी से वो इस रास्ते को अपनाती हैं और बदले में यदि थोड़ा-सा सम्मान चाहती हैं, तो इतना तो हक़ बनता ही है. परिवार और समाज से उनकी यह अपेक्षा कुछ ज़्यादा नहीं है.

– कमलेश शर्मा

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न्यूली मैरिड के लिए मॉडर्न ज़माने के सात वचन (7 Modern Wedding Vows For Newly Married)

बदलते समय के साथ शादी का ट्रेंड (Wedding Trend) काफ़ी बदला है, तो भला दूल्हा-दुल्हन के सात वचन वही क्यों रहें? पहले लड़कियां कामकाजी नहीं थीं, तो घर के सदस्यों की देखभाल और अपने भरण-पोषण का वचन दूल्हे से लेती थीं, लेकिन अब तो वो भी कमाने लगी हैं, कामकाजी हैं, तो घर पर भी उन्हें हेल्पिंग हैंड की ज़रूरत पड़ती है. ऐसे में वचनों में थोड़ा बदलाव होना चाहिए. शादी के बाद सभी न्यूली मैरिड कपल्स को मॉडर्न ज़माने के ये सात वचन निभाने का वादा करना चाहिए.

Modern Wedding Vows

क्या हैं शादी के पारंपरिक सात वचन?

शादी के व़क्त अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए कन्या वर से ये सात वचन लेती है, जिसकी पूर्ति का आश्‍वासन देने पर ही वह अर्द्धांगिनी बनने के लिए राज़ी होती है.

1. पहले वचन में कन्या वर से कहती है कि आप कभी तीर्थयात्रा पर जाओ, तो मुझे भी अपने संग ले जाना. किसी भी व्रत
उपवास और धार्मिक कार्यों में मुझे भी
वामांगी बनाना.

2. जिस प्रकार आप अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार मेरे माता-पिता का भी सम्मान करना.

3. तीसरे वचन में भी कन्या वर से वचन लेती है कि अगर आप जीवन की तीनों अवस्थाओं में मेरा पालन करने के लिए तैयार हैं, तभी मैं आपकी वामांगी बनूंगी.

4. अब तक आप घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों से मुक्त थे, लेकिन अब शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं, तो परिवार की सभी ज़रूरतों को पूरा करने की ज़िम्मेदारी आपके कंधों पर होगी.

5. अपने घर के कार्यों में, लेन-देन या किसी भी चीज़ के लिए ख़र्च करते समय मुझसे विचार-विमर्श करेंगे.

6. अगर मैं अपनी सहेलियों के साथ बैठी हूं, तो वहां आकर आप मेरा अपमान नहीं करेंगे.

7. पराई स्त्रियों को मां के समान मानेंगे और पति-पत्नी के प्रेम के बीच किसी को नहीं आने देंगे.

मॉडर्न ज़माने के सात वचन

अब ये तो हो गए पारंपरिक सात वचन, जो कन्या वर से मांगती है, लेकिन आज ज़माना बराबरी और समानता का है. लड़कियां अब कमज़ोर नहीं, बल्कि लड़कों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, ऐसे में घर-गृहस्थी की ज़िम्मेदारी भी दोनों मिलकर उठाते हैं.

1. घर का काम बांटकर करेंगे

आज ज़्यादातर शादीशुदा कपल्स वर्किंग हैं और अकेले रहते हैं. ऐसे में दोनों को ही घर के सभी काम ख़ुद करने पड़ते हैं. खाना
बनाने से लेकर घर की साफ़-सफ़ाई और देखभाल की ज़िम्मेदारी एक की न होकर दोनों की है, इसलिए दोनों को एक-दूसरे को यह वचन देना चाहिए कि वो घर के सारे काम मिल-बांटकर करेंगे.

2. एक-दूसरे की भावनाओं का  ख़्याल रखेंगे

शादी के शुरुआती दिनों में कपल्स की दुनिया काफ़ी अलग होती है. लविंग, केयरिंग और शेयरिंग में उनका पूरा समय बीतता है, लेकिन जब वो वापस काम पर लौटते हैं, तब असली परीक्षा शुरू होती है. घर-बाहर की ज़िम्मेदारी अक्सर कपल्स को चिड़चिड़ा बना देती है. शादी से पहले जहां पैरेंट्स सब कुछ संभाल लेते थे, वहीं अपनी गृहस्थी में सब कुछ
ख़ुद करना आसान नहीं होता. ऐसे में दोनों को एक-दूसरे की भावनाओं को समझना होगा.

3. एक-दूसरे के दोस्तों की रिस्पेक्ट करेंगे

माना कि शादी के बाद सब कुछ बदल जाता है, पर दोस्तों के साथ हमारी दोस्ती तो वही रहती है. शादी के बाद जब दोस्त मिलने आते हैं और कहीं बाहर मिलने भी बुलाते हैं, तो उन बातों को लेकर अक्सर कपल्स में नोंक-झोंक होने लगती है. हर किसी को हक़ है कि अपने दोस्तों के साथ समय बिताएं. ऐसे में आपको अपने पार्टनर को इतनी आज़ादी देनी होगी और उनके दोस्तों की भी रिस्पेक्ट करनी होगी. दोनों को ही यह याद रखना चाहिए कि दोस्तों की एक स्पेशल जगह होती है, जिससे किसी को भी महरूम नहीं करना चाहिए. तो आप दोनों भी वचन दें कि एक-दूसरे के दोस्तों की रिस्पेक्ट करेंगे.

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Wedding Vows

4. अपनी-अपनी हाइजीन का ख़्याल रखेंगे

कहते हैं कि मैरिड लाइफ की नींव हेल्दी सेक्स लाइफ पर टिकी होती है, इसलिए दोनों को ही अपने सेक्सुअल हेल्थ का ख़ास ख़्याल रखना चाहिए. रात को सोने से पहले ब्रश करना और प्राइवेट पार्ट्स को अच्छी तरह क्लीन करना दोनों की ही ज़िम्मेदारी है. पार्टनर को किसी तरह का सेक्सुअल इंफेक्शन न हो, इस बात को आप हाइजीन का ख़्याल रखकर ही सिक्योर कर सकते हैं.

5. एक-दूसरे के ऊपर अपनी मर्ज़ी नहीं थोपेंगे

प्यार में अक्सर कपल्स एक-दूसरे को ख़ुश करने के लिए पार्टनर की हर इच्छा को पूरी करते हैं, पर इस ख़ुशी को मजबूरी कभी न बनने दें. कैसे कपड़े पहनने हैं, कैसा व्यवहार करना है, किस तरह बातचीत करनी है… जैसी हज़ार चीज़ें हैं, जो न्यूली मैरिड कपल्स
एक-दूसरे पर थोपते हैं. पार्टनर की मर्ज़ी, हो न हो, अपनी मर्ज़ी चलाना अच्छी बात नहीं. आप दोनों इंडिपेंडेंट हो, वर्किंग हो, तो ज़ाहिर है,
बहुत-सी चीज़ें जानते हैं. ऐसे में यह ध्यान रखें कि कुछ भी करने से पहले पार्टनर की सलाह लें, चाहे बात सेक्सुअल रिलेशन की ही क्यों न हो. आपकी मर्ज़ी है, स़िर्फ इसलिए कुछ भी न करें.

6. हेल्दी लाइफस्टाइल मेंटेन करने में एक-दूसरे की मदद करेंगे

आज की हमारी लाइफस्टाइल में हेल्थ और फिटनेस बहुत ज़रूरी हो गया है, ऐसे में डायट से लेकर एक्सरसाइज़ तक दोनों को
एक-दूसरे को फिट रखने में मदद करनी होगी. यहां प्रॉब्लम तब आएगी, जब एक पार्टनर फूडी और दूसरा बहुत ही ज़्यादा फिटनेस कॉन्शियस होगा. यहां आप दोनों को बैलेंस करना होगा. और बात तब भी बिगड़ सकती है, अगर आप दोनों ही फूडी और आलसी हैं. ऐसे में दोनों को ही एक-दूसरे को मोटिवेट करना होगा. सुबह या शाम की रोज़ाना वॉक आप दोनों के साथ-साथ आपकी मैरिड लाइफ को भी हेल्दी बनाए रखेगी. तो आज ही एक-दूसरे से वचन लें कि दोनों मिलकर हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएंगे.

7. सभी ख़र्चों की ज़िम्मेदारी दोनों की बराबर होगी

हैप्पी मैरिड लाइफ में फाइनेंस की भी अहम् भूमिका होती है. घर ख़र्च से लेकर इन्वेस्टमेंट और सेविंग्स दोनों की ही ज़िम्मेदारी है, क्योंकि यह आप दोनों की गृहस्थी है. सेविंग्स की ज़िम्मेदारी स़िर्फ पति की नहीं, बल्कि पत्नी की भी है. पति-पत्नी चाहें, तो ज़िम्मेदारियां बांट लें, जैसे पत्नी घर ख़र्च देखेगी, पति इन्वेस्टमेंट और सेविंग्स. और जो भी
इमर्जेंसी ख़र्च होगा, उसके लिए एक अलग से अकाउंट बनाकर कुछ पैसे दोनों रखते जाएंगे. ऐसे में किसी एक पर फाइनेंशियल प्रेशर नहीं होगा और आप दोनों की ही ज़िंदगी स्ट्रेस फ्री और ख़ुशहाल होगी.

सात फेरे के ये सात क़दम भी ज़रूर लें

1. अगर पत्नी का मायका और ससुराल एक ही शहर में है, तो महीने में कम से कम एक बार पत्नी को न स़िर्फ मायके जाने देंगे, बल्कि उसके साथ ख़ुद भी सास-ससुर का
हालचाल लेने जाएंगे.

2. जॉइंट फैमिली में नहीं रहते हैं, तो हर हफ़्ते अपने पैरेंट्स से मिलें. नई बहू के लिए सास-ससुर और ससुराल के बाकी सदस्यों से मेल-मिलाप बहुत ज़रूरी है.

3. हर दूसरे या तीसरे महीने कोई नई जगह देखने जाएं, क्योंकि एक बार बच्चे हो गए, तो कुछ समय के लिए घूमना-फिरना कम हो जाएगा, इसलिए अभी एक-दूसरे के साथ नई-नई जगहें देखें और क्वालिटी समय बिताएं.

4. वैसे तो हर हफ़्ते एक नई फिल्म रिलीज़ होती है, लेकिन महीने में कोई न कोई ख़ास फिल्म होती है, जिसे देखने ज़रूर जाएं.

5. 15-20 दिन या महीने में एक बार कैंडल लाइट डिनर पर जाने से मैरिड लाइफ में रोमांस बना रहता है और डेली रूटीन से भी ब्रेक मिल जाता है.

6. किसी दोस्त या रिश्तेदार से अपने पार्टनर को मिलाने ले जाएं. नए-नए लोगों से मिलने से मैरिड लाइफ में रोमांच बना रहता है.

7. ख़ुद को और पार्टनर को स्ट्रेस फ्री और पैंपर करने के लिए किसी स्पा ज़रूर ले जाएं.

– संतारा सिंह

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अब बेटे भी हो गए पराए (When People Abandon Their Old Parents)

दिल्ली के एक पॉश इलाके में रहनेवाली 79 वर्षीया कुंती देवी अपने एक रिश्तेदार से मिलने देहरादून गई थीं और वापस आने पर उन्हें पता चला कि उनके बेटों ने उनके घर पर कब्ज़ा कर लिया है. मरने से पहले उनके पति कुंती देवी के नाम पर वह घर कर गए थे और बाकी संपत्ति बेटों और उनमें बांट दी थी. बेटी ने अपना हिस्सा छोड़ दिया था, क्योंकि वह भाइयों से अपने संबंध ख़राब नहीं करना चाहती थी. उनकी बेटी उन्हें अपने साथ ले गई, क्योंकि भाइयों का भरोसा वह नहीं कर सकती थी. मां की देखभाल का ज़िम्मा उसने ले लिया है. कुंती देवी कहती हैं कि आजकल ज़माना बदल गया है. अब बेटी को चाहे विदा कर दो, पर वह फिर भी पराई नहीं होती है, जबकि बेटे तो मां-बाप को ऐसे नकार देते हैं, मानो बड़े होते ही उनसे सारे रिश्ते टूट गए हैं.

Abandon Old Parents

80 वर्षीया स्वर्णलता चंदा पिछले 7-8 सालों से एक ओल्ड एज होम में रह रही हैं. उनका बेटा ज़बर्दस्ती उन्हें वहां छोड़कर चला गया था, क्योंकि उसके फ्लैट में बूढ़ी मां को रखने की जगह नहीं थी. वह कहती हैं कि मुझे ऐसा लगता है कि मेरा बेटा मुझे इस बात की सज़ा दे रहा है कि मैंने उसे जन्म दिया. जब तक पति जीवित थे, बहुत अच्छी ज़िंदगी जी, लेकिन अब तो बेटे के लिए मैं केवल एक बोझ हूं. अपने बेटे को लायक बनाने में मैंने जितनी मेहनत की, उतनी बेटी के लिए की होती, तो कितना अच्छा होता. मेरी बेटी एक फोन करते ही दौड़ी चली आती है और जो हो सकता है करती है.

आज भी बेटे के जन्म पर ही मनाई जाती हैं ख़ुशियां

बेटे के जन्म लेते ही माता-पिता ही नहीं, परिवार के अन्य लोगों के चेहरे पर भी एक चमक आ जाती है. ख़ूब लाड़-प्यार के साथ उसके हर नख़रे को उठाते हुए उसे पाला जाता है. बेटा है, बस इसी ख़्याल से ख़ुश होते हुए माता-पिता उसके चेहरे पर हर समय मुस्कान देखने के लिए अपनी हर इच्छा को न्योछावर करने को तैयार रहते हैं. फिर वह बड़ा होता है, अपना करियर बनाता है, शादी करता है और अपने मां-बाप को छोड़कर चला जाता है. वजहें बहुत सारी होती हैं, लेकिन बेटे की नज़रों में वे सारी वजहें बहुत लॉजिकल होती हैं.

बेटियां तो पराई होती हैं, आज नहीं तो कल दूसरे घर चली जाएंगी, इसलिए जो कुछ है बेटा ही है, यह सोच युगों से कायम है. आश्‍चर्य तो इस बात का है कि इस ज़माने में जब लड़कियां शादी के बाद भी अपने मां-बाप की सेवा करती हैं और बेटों से ज़्यादा उनका ध्यान रखती हैं, फिर भी उन्हें पराया माना जाता है.

बनता जा रहा है ट्रेंड

– बेटों का मां-बाप को छोड़कर चले जाना एक ट्रेंड-सा बनता जा रहा है. एक व़क्त पर आकर बेटों को लगने लगता है कि अब अपने पैरेंट्स से उन्हें कोई फ़ायदा नहीं मिलनेवाला है. ऐसे में वे उन्हें उम्र के उस दौर में छोड़कर चले जाते हैं, जब पैरेंट्स को उनकी सबसे ज़्यादा आवश्यकता होती है.

– पढ़ाई, नौकरी या फिर शादी के बाद अपनी एक दुनिया बनाने की चाह और भौतिकवादी ज़िंदगी की दौड़ में ख़ुद को शामिल करने की हसरत उन्हें अपने ही पैरेंट्स से दूर कर रही है.

– एक वृद्ध दंपत्ति से जोधपुर जाते हुए ट्रेन में मुलाक़ात हुई थी, उनसे बातचीत करते हुए पता चला कि वे अकेले ही शिमला में रहते हैं. चूंकि उनकी बहू को उनके साथ रहना अच्छा नहीं लगता था, इसलिए बेटा उन्हें छोड़कर चला गया. रहता वह भी शिमला में ही है, पर कभी मिलने तक नहीं आता, क्योंकि उसकी बीवी को पसंद नहीं. उनका कहना था कि वे नहीं चाहते कि उनका बेटा उनकी वजह से अपनी गृहस्थी में परेशानी खड़ी करे, इसलिए उन्होंने यही सोच लिया कि उनकी एक नहीं दो बेटियां थीं और शादी के बाद वे दोनों विदा हो गईं.

– एकल परिवारों के बढ़ते चलन के कारण बुज़ुर्ग लोग अपने बेटों के लिए एक बोझ बनते जा रहे हैं.  बेटों को पैरेंट्स की सेवा करना तो नागवार गुज़रता ही है, साथ ही उन पर पैसा ख़र्च करना भी उन्हें पैसों की बर्बादी लगती है.

– बड़े शहरों में ऐसे अनगिनत मां-बाप या अकेली मां हैं, जो बेटे के घर से निकाले जाने के कारण या तो किसी ओल्ड एज होम में जीवन बिता रही हैं या फिर घर में रखने के लिए गिड़गिड़ाने को मजबूर हैं.

– बेटियां ज़रूर अपने पैरेंट्स की मदद करती हैं, लेकिन सभी के लिए ऐसा करना मुमकिन नहीं हो पाता, क्योंकि अगर बेटी शादीशुदा है, तो बेटी के ससुरालवाले इस पर आपत्ति उठाते हैं. फिर भी बीमारी में पैसों से उनकी मदद वे ज़रूर करती हैं, जबकि अधिकांश बेटों का मानना है कि उनके पैरेंट्स को उनके जीवन और लाइफस्टाइल में दख़ल देने का कोई हक़ नहीं है.

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Old Parents

रिश्तों में पसरी संवेदनहीनता

नई दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट की सीनियर सायकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बर्मी के अनुसार, “मूल्यों या संस्कारों से कहीं ज़्यादा संवेदनाओं में तटस्थता आने की वजह है भारत का बदला हुआ सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रोफेशनल सेटअप. भारत अब एक ग्लोबल कम्यूनिटी बन गया है और उसकी वजह से आपसी संबंधों में एक पृथकता आ गई है. बढ़ते अवसरों और बहुत कुछ जल्दी पा लेने की चाह में गांव, कस्बों और छोटे शहरों में रहनेवाले लोग शहरों या विदेशों का रास्ता पकड़ रहे हैं. बढ़ती भौतिकता के चलते उनकी सोच सेल्फ-सेंटर्ड हो गई है. पारिवारिक मूल्यों और अपनेपन के बदले लालच व पैसों की भूख ने रिश्तों को नकारने और ज़िम्मेदारियों से बचने को उकसाया है. पहले दिल से सोचा करते थे, पर अब दिमाग़ से सोचते हैं और इसलिए रिश्तों में परायापन पसर गया है.”

भाग रहे हैं ज़िम्मेदारी से

नौकरी की मजबूरियां, पत्नी की मम्मी-पापा से नहीं बनती या पैरेंट्स उनकी लाइफस्टाइल में फिट नहीं होते जैसे बहाने परोसते बेटे असल में अपनी ज़िम्मेदारी से भागना चाहते हैं. इसलिए प्रोफेशनल कमिटमेंट या अपनी गृहस्थी बचाने के नाम पर वे आसानी से अपने उत्तरदायित्वों से पल्ला झाड़ अपनी दुनिया में मस्त हो जाते हैं. वे बूढ़े माता-पिता, जो सारी ज़िंदगी अपने बेटे के सुखद भविष्य के लिए सब कुछ दांव पर लगा देते हैं, वही एक दिन उनके लिए आउटडेटेड हो जाते हैं और उनसे पीछा छुड़ाने के लिए बेटों के पास मजबूरियों की लंबी फेहरिस्त होती है और माता-पिता तब भी उनके पराएपन को जस्टीफाई कर नम आंखों से यही कहते हैं कि मेरा बेटा ऐसा नहीं है, वह तो उसकी मजबूरी थी, इसलिए हमें छोड़कर जाना पड़ा.

हमें स़िर्फ एक बार कुछ पल सोचना है कि बेटियां पराई होती नहीं, कर दी जाती हैं और बेटे तो स़िर्फ पराए होते हैं, क्योंकि उन्हें हमेशा उड़ने के लिए खुला आसमान मिलता है.

बुज़ुर्ग माता-पिता की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए व बेटों द्वारा उन्हें घर से बाहर निकाले जाने के बढ़ते मामलों को देखते हुए 2007 में मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पैरेंट्स एंड सीनियर सिटिज़न एक्ट नाम से क़ानून पास किया गया था.

क़ानून के मुख्य प्रावधान

–    पीड़ित अभिभावक अपने गुज़ारे भत्ते के लिए न्यायाधिकरण में आवेदन कर सकते हैं.

–   न्यायाधिकरण में दी गई गुज़ारा भत्ता अर्जी पर नोटिस जारी होने के बाद 90 दिनों में मामले का निपटारा कर दिया जाएगा.

–    न्यायाधिकरण द्वारा मंज़ूर गुज़ारा भत्ता 10,000 रुपए प्रति माह होगा.

–    यदि बच्चे न्यायाधिकरण के आदेश का पालन नहीं करते, तो उन्हें एक माह की जेल या तब तक जेल हो सकती है, जब तक कि वे गुज़ारा भत्ते का भुगतान नहीं करते.

–    जिस पर वरिष्ठ नागरिक की देखरेख का ज़िम्मेदारी हो, वह अगर उसे बेसहारा छोड़ दे, तो उसे तीन माह की जेल और 5000 रुपए जुर्माने की सज़ा हो सकती है.

– सुमन बाजपेयी

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हैप्पी फैमिली के लिए न भूलें रिश्तों की एलओसी (Boundaries That Every Happy Family Respects)

किसी ने बहुत ख़ूब कहा है कि मर्यादाएं (Limitations) ज़रूरी हैं रिश्तों (Relationships) के दरमियां, जब ये टूटती हैं, परिवार बिखर जाते हैं. हंसी-मज़ाक, छेड़छाड़ और शरारतें तो हर रिश्ते में होती हैं, पर ये चीज़ें मर्यादा में रहें, तभी अच्छी लगती है, क्योंकि हद पार करते ही ये अर्मादित हो जाती हैं. तो क्यों न आप भी समझें रिश्तों की एलओसी, ताकि रिश्तों में कभी कोल्ड वॉर न आए.

Relationships Goals

क्या है एलओसी?

जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारे पैरेंट्स, दोस्तों और रिश्तेदारों से हम बहुत कुछ सीखते हैं. रिश्तों को मान-सम्मान देना, प्यार-विश्‍वास, त्याग और समर्पण जैसी कई चीज़ें सीखते हैं. इन्हीं सबको देखकर हम रिश्तों की मर्यादा यानि लाइन ऑफ कंट्रोल ड्रॉ करना भी सीखते हैं. साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी कहती है कि ये चीज़ें हम में पैदाइशी नहीं होतीं, बल्कि समय के साथ धीर-धीरे सीखते हुए आती हैं. बहुत-से लोगों को यह ग़लतफ़हमी होती है कि अगर हम अपनी लाइन ड्रॉ करेंगे, तो लोग उसे दीवार समझकर हमें ग़लत न समझ बैठें, जबकि ऐसा है नहीं. आपको क्या सही लगता है, क्या ग़लत लगता है, बताने से आपके साथ-साथ सामनेवाले का भी मान-सम्मान बना रहता है.

क्यों ज़रूरी है एलओसी ड्रॉ करना?

हर रिश्ते की अपनी मर्यादा होती है, लेकिन इसे शुरू हमें ख़ुद से करना होता है. यह कोई ऐसी चीज़ नहीं, जो हम दूसरों के लिए करते हैं, बल्कि मर्यादाओं का पालन हम अपनी सुरक्षा और मान-सम्मान के लिए करते हैं.

– रिश्तों में एलओसी या मर्यादा ख़ुद की सुरक्षा के लिए ज़रूरी होती है. अगर आप लाइन ड्रॉ नहीं करेंगे, तो लोग उसे क्रॉस करके आपके
मान-सम्मान को चोट पहुंचा सकते हैं.

– ताकि आप किसी और की ग़लतफ़हमी का शिकार न बनें.

– आप परिस्थितियों का शिकार न बन जाएं.

– इसके बिना लोग आपको फॉर ग्रांटेड लेते हैं.

रिश्तों की बाउंड्रीज़

1. फिज़िकल बाउंड्रीज़़

सबसे पहले जो बाउंड्री हम सीखते हैं, वो है किसी से किसी दूरी बनाए रखें. आमतौर पर बच्चों को सिखाया जाता है कि किसी से भी एक हाथ की दूसरी पर रहकर ही बात करनी चाहिए. ऐसे बहुत-से लोग हैं, जो इस दूरी का ध्यान नहीं रखते, जिससे दूसरे को असहजता महसूस होती है.

– परिवार में भी इस बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए, क्योंकि किसी का भी बार-बार टच करके बात करना सभी को पसंद नहीं आता.

– अगर आपको भी यह पसंद नहीं, तो उससे भागने की बजाय अपनी बात प्यार से समझाएं.

– कुछ दोस्तों को भी हमेशा टच करके बात करने की आदत होती है, आप प्यार से अपने दोस्त को अपनी बाउंड्री के बारे में समझाएं.

2. इमोशनल बाउंड्री

– पैरेंट्स, भाई-बहन, पति या पत्नी से इमोशनली इस कदर जुड़े होते हैं कि उनके बिना रह पाने के बारे में सोच भी नहीं पाते. लेकिन दूसरों से एक भावनात्मक दूरी बनाए रखते हैं.

– हमें इमोशनली इतना मज़बूत होना चाहिए कि किसी भी मुश्किल हालात में डटे रहें.

– किसी पर इमोशनली इतने डिपेंडेंट न हो जाएं कि उसके बिना जीने की कल्पना भी आपको दूभर लगे.

3. डिजिटल बाउंड्री

आजकल रिश्तों में इस बाउंड्री की बहुत ज़रूरत है. आपकी प्राइवेसी आपके अपने हाथ में है. अपनी डिजिटल लाइफ में किससे कितनी
दूरियां-नज़दीकियां रखनी हैं, यह आपको ख़ुद तय करना होगा.

– रोशनी की 17 वर्षीया बेटी ने उसके मोबाइल पर उसके दोस्त द्वारा भेजी ईमोजी देखी. जिसे देखकर उसे ग़लतफ़हमी हो गई कि मम्मी का उनके दोस्त के साथ अफेयर है, जबकि ऐसा कुछ नहीं था. न रोशनी ने और न ही उनकी बेटी ने डिजिटल बाउंड्री का ख़्याल रखा, जिससे उनके रिश्ते में ग़लतफ़हमी आ गई. डॉ. चित्रा मुंशी कहती हैं कि हैप्पी फैमिली के लिए ज़रूरी है कि आप एक-दूसरे के मोबाइल चेक न करें. पैरेंट्स का बच्चों पर नज़र रखना अलग बात है, लेकिन हर किसी को अपनी डिजिटल बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए.

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Relationships Goals
हैप्पी फैमिली टिप्स

– बाउंड्री बनाना सबसे कठिन काम है, इसलिए अचानक से लाइन ड्रॉ न करें, वरना सब आपको घमंडी और मगरूर समझ बैठेंगे. धीरे-धीरे बताएं कि मुझे यह पसंद नहीं.

– परिवार में अगर किसी ने लाइन क्रॉस की है, तो उनकी ग़लती बताने की बजाय, वह आपको पसंद नहीं ऐसा बोलें.

– ‘आप ऐसे कैसे बोल सकते हैं’ कि बजाय ‘मुझे इस बात से तकलीफ़ हुई’ ऐसा बोलें.

हर रिश्ते में हो मर्यादा: माता-पिता, भाई-बहन या फिर पति-पत्नी ही क्यों न हों, सभी को अपने रिश्तों की गरिमा बनाए रखनी चाहिए. पैरेंट्स हों या भाई-बहन हर किसी से बात करते समय मर्यादा का ध्यान रखें.

मज़ाक किसी को शर्मिंदा न करे: मज़ाक अगर किसी के मान-सम्मान को चोट पहुंचानेवाला हुआ, तो वो मज़ाक नहीं रह जाता. ऐसे भी बहुत-से लोग हैं, जो मज़ाक के बहाने कटाक्ष करते हैं और बुरा लगने पर कहते हैं कि वो तो मज़ाक कर रहे थे. ऐसे मज़ाक कभी न करें, जिससे उस व्यक्ति को दूसरों के सामने शर्मिंदगी महसूस हो.

झिड़की और फटकार प्यार नहीं: अक्सर लोग बड़ों से बात करते समय मर्यादा का ख़्याल रखते हैं, पर छोटो को झिड़कना और फटकारना अपना अधिकार समझते हैं. बच्चों के सम्मान का भी ख़्याल रखें.

दोस्त बनें कॉपीकैट नहीं: दोस्ती का मतलब एक-दूसरे को समझना, बातें शेयर करना और हक़ जताना है, पर कुछ लोग हक़ जताने के चक्कर में वही करने लगते हैं, जो उनका दोस्त करता है. उसी के जैसी हरकतें करना, कपड़े पहनना, सोशल स्टेटस रखना जैसी चीज़ें आपके दोस्त को इरिटेट कर सकती हैं. अपनी दोस्ती की मर्यादा बनाए रखें और दोस्त को कभी कॉपी न करें.

कपल्स भी न भूलें एलओसी

काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ ने बताया कि रिश्तों में मर्यादा इसलिए भंग होती है, क्योंकि हर किसी के लिए इसके मायने अलग होते हैं. जो हमारे लिए सही है, ज़रूरी नहीं कि वो पार्टनर को भी सही लगे.

– पति-पत्नी के रिश्ते में लाइन क्रॉस करने के मामले सबसे ज़्यादा होते हैं, क्योंकि एक-दूसरे को कंट्रोल करने की भावना इनमें प्रबल होती है.

– पार्टनर को कितना हंसना चाहिए, कितना बोलना चाहिए, किससे मिलना चाहिए, किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए?
हैप्पी टिप्स

– प्यार का मतलब कंट्रोल करना नहीं, बल्कि आज़ादी देना है, इसलिए अपने प्यार को कभी कंट्रोल करने की कोशिश न करें.

– आप अपनी लाइन क्रॉस नहीं करेंगे, तो पार्टनर भी अपनी हद का ख़्याल रखेगा.

– शादी से पहले ही इन चीज़ों में क्लारिटी रखें.

– आप जो भी हैं, जैसी भी पार्टनर से उम्मीदें हैं, उनसे शेयर करें.

– पार्टनर के लिए और फैमिली के लिए आप जितना कर सकती हैं, वह अपने पार्टनर को बताएं. अपनी लिमिटेशन्स आपको ख़ुद बतानी होंगी.

– पार्टनर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें भले ही कितना भी ग़ुस्सा आए, वो हाथ नहीं उठा सकते, ग़लत बात नहीं कह सकते.

– सुनीता सिंह

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कैसे मनाएं सेफ दिवाली? (How To Celebrate Happy And Safe Diwali)

Diwali

कैसे मनाएं सेफ दिवाली? (How To Celebrate Happy And Safe Diwali)

दिवाली (Diwali) रोशनी का त्योहार (Festival) है. यह अपने साथ ढेर सारी ख़ुशियां लाती है. हम सभी इस त्योहार को पूरे धूमधाम से उमंग-उत्साह से मनाते है. लेकिन इस रोशनी के पर्व में थोड़ी सावधानी भी बेहद ज़रूरी है यानी फेस्टिवल मनाएं, पर सेफ्टी (Safety) का भी पूरा ख़्याल रखें, विशेषकर पटाखे जलाते समय. यहां पर हम कुछ सेफ्टी रूल्स (Safety Rules) बता रहे हैं.

–    पटाखे जलाते समय पैरों में चप्पल या जूते ज़रूर पहनें. कभी भी नंगे पांव पटाखे न जलाएं.

–    पटाखे हमेशा खुली जगह पर जलाएं यानी कभी भी घर के अंदर या बंद स्थान पर पटाखे ना फोड़ें. पटाखे जलाने के लिए घर के बाहर, छत पर या फिर आंगन भी ठीक है.

–    साथ ही आसपास देख लें कि कहीं कोई आग फैलानेवाली या फ़ौरन आग पकड़नेवाली चीज़ तो नहीं है.

–    बच्चे-बड़े सभी पटाखे जलाते समय आसपास बाल्टी भरकर पानी ज़रूर रखें. साथ ही जलने पर लगनेवाली इमर्जेंसी दवाएं भी

ज़रूर रखें.

–    यदि पटाखे से जल जाएं, तो जले हुए स्थान पर तुरंत पानी के छींटें मारें.

–    हमेशा लाइसेंसधारी और विश्‍वसनीय दुकानों से ही पटाखे ख़रीदें.

ये न करें…

–    कुछ लोग बहादुरी दिखाने के लिए पटाखे हाथ में पकड़कर जलाने की कोशिश करते हैं. ऐसा न करें, क्योंकि ऐसा करने से पटाखों के हाथ में फटने और दुर्घटना होने की संभावना रहती है.

–    पटाखों को दीये या मोमबत्ती के आसपास ना जलाएं.

–    जब आपके आसपास कोई पटाखे जला रहा हो, तो उस समय आप भी पटाखे ना जलाएं.

–   बिजली के तारों के आसपास क्रैकर्स न फोड़ें.

–   यदि किसी पटाखे को जलने में बहुत अधिक समय लग रहा है, तो उसे दोबारा ना जलाएं, बल्कि किसी सेफ जगह पर फेंक दें.

–   आधे जले हुए पटाखों को इधर-उधर ना फेंकें. उसे पानी में डुबोकर फेंक दें.

–    रॉकेट जैसे पटाखे ऐसे समय में बिल्कुल न जलाएं, जब ऊपर किसी तरह की रुकावट जैसे पेड़, बिजली के तार आदि हों.

–   दीपावली पर कॉटन के कपड़े पहनकर ही पटाखों का आनंद लें. ध्यान रहे, रेशमी या फिर नायलॉन के आउटफिट बिल्कुल भी न पहनें.

–    खुली फ्लेम के कारण पटाखे जलाने के लिए माचिस या लाइटर का इस्तेमाल न करें, यह ख़तरनाक हो सकता है.

–    कभी भी छोटे बच्चों के हाथ में कोई पटाखा न दें.

–   यदि आपकी कार है, तो उसे गैराज में रख दें या फिर उसे अच्छी तरह से कवर कर दें.

–   दीपावली पर घर की खिड़कियां बंद ही रखें तो अच्छा है. साथ ही उन पर रेशमी पर्दे न लगाएं, वरना कोई चिंगारी लगने पर तेज़ी से आग फैलने का डर बना रहता है.

–   सभी पटाखों को हमेशा किसी बंद डिब्बे में ही रखें, विशेषकर दिवाली की रात को.

–    क्रैकर्स जलाते समय पैकेट में दिए गए निर्देशों को भी ज़रूर देख लें और उसी के अनुसार पटाखों को जलाएं.

–   बेहतर होगा कि पटाखे जलाते समय फुल स्लीव्स के ड्रेसेस ही पहने जाएं.

–    पटाखों का आनंद लेते समय किसी इमर्जेंसी वाली सिचुएशन के लिए भी तैयार रहें.

–   यदि आप बहुत सारे लोगों के साथ मिलकर पटाखे जला रहे हैं, तो इस बात का ख़्याल रखें कि एक समय में एक ही शख़्स पटाखे जलाए, क्योंकि यदि कई लोग साथ-साथ पटाखे जलाएंगे, तो दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है.

–    यदि आपके घर में पालतू जानवर, जैसे- बिल्ली, डॉगी आदि हैं, तो उन्हें पटाखों से दूर ही रखें. बेज़ुबान जानवर दिवाली के दिन शोर-शराबे से बेहद परेशान हो जाते हैं. यदि संभव हो, तो उनके कान में कॉटन डाल दें.

–    भीड़वाली जगह, पतली गलियों या घर के पास में पटाखे न जलाएं.

–    छोटे बच्चों को ख़ुद से पटाखे न जलाने दें. उनके साथ किसी बड़े को ज़रूर रखें.

–    कभी भी पैंट की जेब में पटाखे न रखें.

–    ढीले-ढाले कपड़े पहनकर पटाखे न जलाएं.

–    जहां पर पटाखे रखे हों, वहां पर माचिस की जली तीली या फिर अगरबत्ती आदि न फेंकें.

–    ध्यान रहे, कभी भी पटाखों के साथ कोई एक्साइटमेंट या फिर एक्सपेरिमेंट करने का प्रयास न करें. यह ख़तरनाक हो सकता है.

–    सड़क के कुत्तों या फिर अन्य जानवरों को पटाखों से परेशान न करें.

–   पटाखे जलाते समय पेट्रोल, गैस सिलेंडर, डीज़ल, केरोसिन आदि चीज़ें आसपास न हों, इस बात का ख़्याल रखें.

–   यदि पटाखे जलाते समय जल जाएं, तो तुरंत टूथपेस्ट व बरनॉल लगाएं. आवश्यक लगे, तो डॉक्टर को दिखाएं.

– सावित्री गुप्ता

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सोशल मीडिया रिलेशन: अधूरे रिश्ते… बढ़ती दूरियां… (Impact Of Social Media On Relationships)

 Social Media Relationships
सोशल मीडिया रिलेशन: अधूरे रिश्ते… बढ़ती दूरियां… (Impact Of Social Media On Relationships)

डिजिटल (Digital) होती दुनिया में रिश्ते (Relationships) भी डिजिटल हो चुके हैं. अब तो पति-पत्नी भी आसपास बैठकर सोशल मीडिया (Social Media) के ज़रिए ही एक-दूसरे से बात करते हैं. वहीं दूसरी ओर रियल लाइफ से दूर अब हमारे डिजिटल रिश्ते (Digital Relationships) भी बहुत सारे बन गए हैं, जो हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण भी हो गए हैं, क्योंकि उनमें अलग तरह का आकर्षण है. वहां रोक-टोक नहीं है, वहां हर बात जायज़ है… ऐसे में हमें वो भाते हैं और बहुत ज़्यादा लुभाते हैं.

–    सोशल मीडिया एडिक्शन की तरह है, यह बात शोधों में पाई गई है. यह एडिक्शन मस्तिष्क के उस हिस्से को एक्टिवेट करता है, जो कोकीन जैसे नशीले पदार्थ के एडिक्शन पर होता है. यही वजह है कि सोशल साइट्स से दूर रहने को एक तरह से लोग बहुत बड़ा त्याग या डिटॉक्सिफिकेशन मानते हैं.

–    यहां पनपे रिश्ते शुरुआत में बेहद आकर्षक और ख़ूबसूरत लगते हैं, क्योंकि सबकुछ एकदम नया लगता है.

–    अंजान लोग दोस्त बनते हैं और उनके बारे में सबकुछ जानने को आतुर हो जाते हैं.

–    न स़िर्फ उनके बारे में हम जानना चाहते हैं, बल्कि अपने बारे में भी सबकुछ बताने को उतावले रहते हैं.

–    यहां हमें इस बात का आभास तक नहीं होता कि इनमें से कौन, कितना सच बोल रहा होता है? अपने बारे में कौन किस तरह की जानकारी साझा कर रहा होता है और उनका इरादा क्या होता है.

–    डिजिटल रिश्तों में सबसे बड़ा ख़तरा फ्रॉड या धोखे का होता है. यहां कोई भी आपको आसानी से बेव़कूफ़ बना सकता है.

–    दरअसल, जो सोशल मीडिया के रिश्ते हमें इतने भाते हैं, वो उतने ही अधूरे होते हैं. कई बार तो साल-दो साल गुज़रने के बाद पता चलता है कि जिससे हम बात कर रहे थे, वो तो ये था ही नहीं.

–    इतने फेक अकाउंट्स, इतनी फेक आईडीज़, इतना दिखावटी अंदाज़… पर यही सब हमें इतना रियल लगता है कि अपने रिश्तों में दूरियां बढ़ाकर हम इन नक़ली रिश्तों के क़रीब जाते हैं.

–    एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि जो लोग सोशल साइट्स पर अधिक समय बिताते हैं, वो अधिक अकेलापन और डिप्रेशन महसूस करते हैं, क्योंकि जितना अधिक वो ऑनलाइन इंटरएक्शन करते हैं, उतना ही उनका फेस टु फेस संपर्क लोगों से कम होता जाता है. यह स्टडी यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन द्वारा की गई थी.

–    आपसी रिश्तों में हम पर बहुत सारी ज़िम्मेदारियां और जवाबदेही होती है, जबकि सोशल मीडिया रिलेशन इन सबसे मुक्त होते हैं, तो ऐसे में ज़ाहिर है ये रिश्ते हमें अच्छे लगने लगते हैं.

–    इन रिश्तों का मायाजाल ऐसा होता है कि हम इन्हें अपने पल-पल की ख़बर देना चाहते हैं और अपनी लाइफ को बहुत हैप्पनिंग दिखाना चाहते हैं, जबकि रियल रिश्तों में हमारी दिलचस्पी कम होने लगती है.

–    हम भले ही डिजिटल रिश्तों में अपनी ख़ुशियां ढूंढ़ने की कोशिश करें, लेकिन सच्चाई तो यही है कि ये सबसे अधूरे रिश्ते होते हैं, क्योंकि ये झूठ की बुनियाद पर अधिक बने होते हैं.

–    इनमें कई आवरण और नक़ाब होते हैं, जो परत दर परत धीरे-धीरे खुलते हैं और कभी-कभार तो हमें पता भी नहीं चलता और हम फरेब के मायाजाल में फंसते चले जाते हैं.

–    रियल रिश्तों में हमारा कम्यूनिकेशन कम होने लगता है और प्यार की गर्माहट भी घटती चली जाती है. जब तक होश आता है, तब तक बहुत कुछ हाथ से निकल चुका होता है.

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इस तरह छलता है सोशल मीडिया का रिश्ता…

मुंबई की रहनेवाली 35 वर्षीया आशा यूं तो अपनी  ज़िंदगी से और शादी से ख़ुश थी, पर कहीं न कहीं उसे सोशल मीडिया की ऐसी लत लग गई थी कि वो वहां अपनी ज़िंदगी के अधूरेपन को कम करने की कोशिशों में जुट गई थी. उसे हमेशा शिकायत रहती थी कि उसका पति उसे पूरा समय नहीं दे पाता. वो उसको पहले की तरह पैंपर नहीं करता… ऐसे में वो एक लड़के के संपर्क में आई. उसका नाम राजेश था. उसकी राजेश से रोज़ बातें होने लगीं. ये बातें अब इतनी बढ़ गई थीं कि मुलाक़ात करने का मन बनाया.

आशा का 5 साल का बेटा भी था, पर उसने किसी तरह अपने पति से झूठ कहा कि वो ऑफिस की तरफ़ से ट्रेनिंग के लिए दूसरे शहर जा रही है. वो राजेश के साथ होटल में रहने गई, तो उसे पता चला कि वो अकेला नहीं आया. उससे मिलने उसके साथ उसके दो दोस्त भी हैं.

ये पहला झटका जो आशा को लगा. उसके बाद राजेश ने उसे समझाया कि वो सब अलग कमरे में रहेंगे. आशा मान गई. राजेश उसको शहर में साथ घूमने के लिए कहता, तो आशा मना करती, क्योंकि इसी शहर में वो पति से झूठ बोलकर रह रही है, तो एक डर था मन में कि कहीं कोई देख न ले.

अगले ही दिन राजेश के साथ आशा की बहस हो गई. आशा को महसूस होने लगा कि राजेश की सोच बहुत पिछड़ी हुई है. वो चैटिंग में भले ही मीठी-मीठी बातें करता था, पर अब

रू-ब-रू उससे मिलकर अलग ही व्यक्तित्व सामने आ रहा है. राजेश का सोचना था कि जो वो बोले, आशा को आंख मूंदकर वही करना चाहिए.

आशा आत्मनिर्भर महिला थी. उसे इस तरह के व्यवहार की आदत भी नहीं थी, क्योंकि उसका पति बेहद सुलझा हुआ और शालीन था. अब आशा को महसूस हुआ कि उससे इस झूठे, अधूरे-से रिश्ते के लिए अपनी शादी को दांव पर लगा दिया. आशा को यह भी डर था कि कहीं राजेश उसे ब्लैकमेल न करे, पर उसने राजेश से बात करके अपने सारे रिश्ते ख़त्म किए और अपने घर लौट आई.

इस घटना ने आशा को बुरी तरह हिला दिया, लेकिन उसे यह बात समझ में आ गई कि रियल और डिजिटल रिश्तों में कितना अंतर होता है.

पति भले ही व्यस्तता के चलते समय न दे पाते हों, पर वो एक भले इंसान हैं और आशा का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे, जबकि राजेश एक दंभी पुरुष था, जो स़िर्फ आशा का फ़ायदा उठाना चाहता था.

कुछ इसी तरह का केस मालिनी का भी था, लेकिन वहां मालिनी के पति ने उसका झूठ पकड़ लिया था और मालिनी का तलाक़ हो गया था. उसके बाद जिस लड़के की वजह से मालिनी ने पति से फरेब किया था, उस लड़के ने भी मालिनी से पल्ला झाड़ लिया. जबकि मालिनी का कहना है कि वो पहले कहता था कि दोनों शादी कर लेंगे.

इस तरह के तमाम वाकये इस तरह के रिश्ते के अधूरेपन और रियल रिश्तों में बढ़ती दूरियों का संकेत देते हैं. ऐसे में बेहतर होगा कि संतुलन व सामंजस्य बनाकर ही हर चीज़ का इस्तेमाल किया जाए, वरना जो चीज़ वरदान है, उसे हम ख़ुद ही अपने लिए अभिशाप बना लेंगे.

– शौर्य सिंह

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शादी के बाद क्यों बढ़ता है वज़न? जानें टॉप 10 कारण (Top 10 Reasons For Weight Gain After Marriage)

अगर आपकी नई-नई शादी (New Marriage) हुई है और अचानक से अपने बढ़े हुए वज़न (Increased Weight) को लेकर आपके मन में कई सवाल उठे हैं और आप परेशान हैं, तो परेशान न हों. आपके सभी सवालों के जवाब यहां आपको मिलेंगे कि आख़िर शादी के बाद आपका वज़न इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ा है? द ओबेसिटी जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक शादी के 5 साल के भीतर 82% कपल्स का वज़न 5-10 किलो तक बढ़ जाता है. इसमें महिलाओं का वज़न पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है. लाइफस्टाइल में बदलाव के अलावा और क्या हैं कारण?

Weight Gain After Marriage

1. खानपान की आदतों में बदलाव

आपके मायके और ससुराल के खानपान में अंतर है. मसाले और पकाने की टेक्नीक दोनों जगह अलग है, जिसके कारण आपकी पाचनक्रिया पर इसका प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा मायके खाने के बाद टहलना, मॉर्निंग वॉक जैसी चीज़ें आपके रूटीन में शामिल थीं, जो यहां नहीं हैं.

2. अक्सर बाहर खाना

शादी के बाद से ही दोस्तों, रिश्तेदारों के यहां खाने का सिलसिला जो शुरू होता है, वो कई हफ़्तों तक जारी रहता है. इस बीच हनीमून पर आप बेरोक-टोक हर तरह के खाने को एंजॉय करते हैं, जिससे ज़रूरत से ज़्यादा कैलोरीज़ खा लेते हैं.

3. प्राथमिकताएं बदल जाती हैं

शादी के बाद आप पति और ससुरालवालों की पसंद से खाना बनाती हैं और इंप्रेस करने के चक्कर में ख़ूब घी, तेल, मसाला इस्तेमाल करती हैं. इतनी मेहनत से बनाया खाना ख़राब न हो, इस चक्कर में ओवरईटिंग भी कर लेती हैं. समय के साथ बदली ये प्राथमिकताएं आपका वज़न बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार हैं.

4. लापरवाह हो जाती हैं

शादी के दिन स्टनिंग दिखने के लिए खाने-पीने पर ध्यान रखना, एक्सरसाइज़ करना, स्ट्रेस न लेना जैसी चीज़ें शादी के बाद लगभग पूरी तरह बदल जाती हैं. न चाहते हुए भी स्ट्रेस आ ही जाता है और बाकी कामों के चलते एक्सरसाइज़ का व़क्त नहीं मिलता. खाने का समय बदल जाता है और कहीं न कहीं यह सोच घर कर जाती है कि अब तो शादी हो गई, अब क्या फ़र्क़ पड़ता है.

5. नींद की कमी

शादी के बाद सोने का समय और पैटर्न दोनों ही बदल जाते हैं, जिससे नींद पूरी नहीं हो पाती. नींद की कमी भी वज़न बढ़ने का एक कारण है.

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After Marriage

6. पार्टनर का पैंपर करना

शादी के बाद सभी कपल्स एक-दूसरे पर अपना प्यार न्योछावर करने और ख़ुश रखने में कोई कसर नहीं छोड़ते. एक-दूसरे को पैंपर करने के लिए केक, पेस्ट्रीज़, चॉकलेट्स, पिज़्ज़ा, पास्ता जैसी सरप्राइज़ ट्रीट देते रहते हैं. कैलोरीज़ से भरपूर ये फैटी चीज़ें वज़न बढ़ाती हैं.

7. स्ट्रेस ईटिंग करना

शादी के बाद नए माहौल में ढलना थोड़ा मुश्किल होता है, ऐसे में अगर दुल्हन वर्किंग है, तो उसकी ज़िम्मेदारियां और भी बढ़ जाती है. ऑफिस के साथ-साथ घर पर भी अपना बेस्ट देने की कोशिश में हमेशा स्ट्रेस में रहती हैं और स्ट्रेस ईटिंग की शिकार हो जाती है.

8. हार्मोनल बदलाव

लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसके कारण तेज़ी से वज़न बढ़ता है. इसके अलावा सेक्सुअल एक्टिविटीज़ के कारण होनेवाले हार्मोनल बदलाव भी इसका कारण बनते हैं. हांलाकि कुछ लोग इसे मिथ मानते हैं, पर वज़न बढ़ाने में हार्मोंस का अहम् रोल होता है, यह सभी मानते हैं.

9. मेटाबॉलिक बदलाव

आजकल ज़्यादातर कपल्स 28-30 साल की उम्र में शादी करते हैं. इस समय शरीर के मेटाबॉलिक रेट में बदलाव आता है, जिससे वज़न पहले के मुकाबले ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है.

10. प्रेग्नेंसी

बहुत-सी महिलाएं शादी के बाद ही कंसीव कर लेती हैं, जिससे परिवारवाले उसे पैंपर करने के लिए ओवर न्यूट्रीशियस चीज़ें खिलाते हैं, जिसे  डिलीवरी के बाद भी वो कम नहीं कर पातीं.

वेट कंट्रोल के लिए क्या करें?

– घर में हर कोई खाना खा ले, उसके बाद मैं खाऊंगी वाला एटीट्यूट बदलें. नियमित समय पर खाना खाएं. ओवरईटिंग से बचें.

– अपने लुक्स के प्रति लापरवाह न हों.

– स्ट्रेस ईटिंग से बचने के लिए ख़ुद को ख़ुश रखें.

– एक-दूसरे के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने के लिए योगा क्लासेस या जिम जॉइन करें.

– अनीता सिंह     

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रिश्तेदारों से कभी न पूछें ये 9 बातें (9 Personal Questions You Shouldn’t Ask To Your Relatives)

Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives

कहते हैं ‘शब्दों के दांत नहीं होते हैं, लेकिन शब्द जब काटते हैं, तो दर्द बहुत होता है.’ कुछ ऐसी ही कैफ़ियत होती है उनके साथ, जिनके रिश्तेदार कभी अनजाने में, तो कभी जानबूझकर ऐसी बातें या सवाल पूछ बैठते हैं, जो अक्सर उन्हें चुभ जाती हैं या असहज बना देती हैं. इसलिए ज़रूरी है कि रिश्तेदारों से बात करते व़क्त हम कुछ बातों का ख़ास ख़्याल रखें, ताकि बातें बुरी नहीं, बल्कि अच्छी लगें और रिश्ते भी मधुर रहें.

Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives

रिश्ते बहुत नाज़ुक होते हैं इसलिए उन्हें बहुत ही प्यार व सावधानी के साथ संभालकर रखते हैं, क्योंकि रिश्तों में पड़ी छोटी-सी दरार भी आपके रिश्ते को प्रभावित कर सकती है. अक्सर रिश्तेदारों के बारे में सबकुछ जानने की उत्सुकता में लोग ऐसी बातें पूछ बैठते हैं, जो आमतौर पर नहीं पूछनी चाहिए. हर रिश्ते की अपनी मर्यादा होती है, जिसे हर किसी को याद रखनी चाहिए और ऐसी बातें अवॉइड करनी चाहिए, ताकि आपके रिश्ते न प्रभावित हों और न ही दूसरों को दुख पहुंचे.

1. बेटी की शादी की बात

अगर किसी के घर में शादी के लायक बेटी हो, तो मां-बाप को बेटी की शादी कब कर रहे हैं? कब तक घर में बिठाकर रखेंगें, जैसी बातें अक्सर सुनने को मिल जाती हैं. भले ही आप यह सवाल अपने होने के अधिकार से पूछते हैं, पर कहीं न कहीं यह बात उन्हें अच्छी नहीं लगती, क्योंकि जितनी फ़िक़्र आपको है, उससे कहीं ज़्यादा वो इस बात के फ़िक़्रमंद होंगे, क्योंकि वो उनकी बेटी है. आजकल लड़कियों का अपने पैरों पर खड़े होना बहुत ज़रूरी हो गया है, जिसे सभी मां-बाप समझते हैं और यही वजह है कि उन्हें जल्दी शादी के लिए बाध्य भी नहीं करते. इसलिए इस विषय को न छेड़ना ही ज़्यादा अच्छा होगा.

2. गुड न्यूज़ की बात 

शादी को सालभर हुए नहीं कि रिश्तेदार ख़ुश ख़बरी की बात करने लगते हैं. गुड न्यूज़ कब सुना रहे हैं? यह सवाल आपको अक्सर सुनने को मिल जाएगा. जहां एक ओर प्रेग्नेंसी किसी भी व्यक्ति का बहुत ही निजी मामला होता है, जिसकी प्लानिंग का अधिकार पति-पत्नी को है, वहीं दूसरी ओर बदलते समय और लाइफस्टाइल के कारण इंफर्टिलिटी के मामले तेज़ी से बढ़े हैं. हो सकता है, शादी के बाद भी कंसीव न कर पाने के कारण कपल पहले से ही परेशान हो और ऐसे में रिश्तेदारों का बार-बार इस विषय में पूछना उन्हें और परेशान करता हो. एक शुभचिंतक होने के नाते अपने रिश्तेदारों से इस विषय पर ज़्यादा सवाल कभी न करें.

3. फैमिली इन्कम की बातें

घर में कौन कितना कमाता है? यह रिश्तेदारों के लिए हमेशा ही कौतुहल का विषय होता है. दरअसल, सैलरी की जानकारी से वो फैमिली इन्कम का अंदाज़ा लगाते हैं, ताकि दूसरे रिश्तेदारों से तुलना कर सकें. बेटों-बेटी की इन्कम में लोगों को ज़्यादा दिलचस्पी रहती है, ताकि अपने बच्चों से तुलना करके जान सकें कि किसके बच्चे ज़्यादा सफल हैं, ताकि सबके सामने शो ऑफ का एक और मौक़ा मिल सके. हर किसी के फाइनेंशियल हालात दूसरों से अलग होते हैं, ऐसे में ज़्यादातर लोग फैमिली इन्कम के बारे में डिस्कस करना उचित नहीं समझते. इसलिए समझदारी ऐसे विषयों को न छेड़ने में ही है.

4. बेटे की नौकरी की बात

आपके बेटे की नौकरी कहीं लगी कि अभी भी घर पर ही है? ये सवाल उन रिश्तेदारों से अक्सर पूछे जाते हैं, जिनके बच्चे स्ट्रगल कर रहे होते हैं. हर मां-बाप की ख़्वाहिश होती है कि उनके बच्चे जो भी करें, उसमें उन्हें कामयाबी मिले. अपने बच्चों के लिए ऐसी बातें सुनना किसी को भी पसंद नहीं होता, इसलिए ऐसी चुभनेवाली बातें हमेशा अवॉइड करें. अगर आप सचमुच में फ़िक़्रमंद हैं, तो अपनी बात को सही तरी़के से पूछें.

5. रोमांटिक या पर्सनल लाइफ की बातें

पति-पत्नी के बीच की निजी बातों को कुरेद-कुरेदकर पूछना कुछ लोगों की आदत में शुमार होता है. ख़ुद को उनका ज़्यादा क़रीबी जताने के चक्कर में रिश्तेदार अक्सर ऐसे सवाल
पूछ बैठते हैं, जिन्हें प्राइवेसी में दख़लंदाज़ी माना जाता है. रोमांस पति-पत्नी के बीच का बहुत ही निजी मामला है. ऐसे सवाल पूछकर आप अपनी इमेज ख़ुद ख़राब करते हैं, क्योंकि ऐसे सवालों के जवाब देना कोई पसंद नहीं करता. नतीजतन लोग आपसे कतराने लगते हैं. अगर आप नहीं चाहते कि लोग आपके साथ भी ऐसा व्यवहार हो, तो अपने रिश्ते की अहमियत बनाए रखें और ऐसी बातों से हमेशा बचें.

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Questions You Shouldn't Ask To Your Relatives
6. बहू के मायकेवालों की बातें

हमारा समाज भले ही कितना भी मॉडर्न क्यों न हो जाए, पर बहुओं के लिए लोगों की सोच अभी भी पुरानी ही है. उसके मायकेवालों के बारे में जानना ज़्यादातर रिश्तेदारों का प्रिय शगल होता है. उन्हें हमेशा इस बात की फ़िक़्र लगी रहती है कि बहू  की बहन की शादी हुई या नहीं, उसका भाई काम पर लगा या नहीं और उससे भी ज़्यादा त्योहार या शादी-ब्याह के मौक़ों पर बहू के मायके से कितना सामान आया. तोहफ़ों का लेन-देन हो या फिर अपनों के बारे में तीखी बातें सुनना, किसी भी बहू को पसंद नहीं आता. हर लड़की चाहती है कि ससुराल के लोग उसके परिवार का सम्मान करें और उन्हें भी वही इज़्ज़त मिले, जो दूसरों को मिलती है. एक लड़की के लिए उसका परिवार उसका सम्मान होता है, ऐसे में उन पर तीखे सवाल उसके सम्मान को चोट पहुंचाते हैं, जो आजकल की आत्मनिर्भर व आत्मविश्‍वासी बहुएं बर्दाश्त नहीं करती और यही वजह है कि रिश्तों में मनमुटाव बढ़ने लगता है. ऐसे में रिश्तों को बचाना आपके अपने हाथ में है.

7. प्रॉपर्टी के बंटवारे की बातें

जितनी दिलचस्पी रिश्तेदारों की फैमिली इन्कम में होती है, उतनी ही प्रॉपर्टी के बंटवारे में भी होती है. प्रॉपर्टी में क्या-क्या है?, किसको क्या देने की सोच रहे हैं?, वसीयत बनाई या नहीं? जैसी बातें लोग केवल परिवार या बेहद क़रीबी लोगों से ही शेयर करते हैं. प्रॉपर्टी से जुड़ी बातें बहुत ही महत्वपूर्ण व प्राइवेट होती हैं, जिन्हें अक्सर लोग गोपनीय रखना पसंद करते हैं. इसलिए उनकी गोपनियता में कभी सेंध न लगाएं. अगर वो आपको इस लायक समझेंगे, तो ख़ुद ही सारी बातें शेयर करेंगे. पर अगर वो ऐसा नहीं करते, तो आप ख़ुद से ऐसे निजी मामलों को न कुरेदें. सभी रिश्तेदारों को अपने रिश्तों की सीमा पता होनी चाहिए और यह भी कि किससे क्या पूछना है और क्या नहीं.

8. पुराने हादसों की बातें

रिश्तेदारों से बातचीत करते व़क्त ज़्यादातर लोग औपचारिकता का ध्यान ही नहीं रखते और अक्सर कुछ ऐसी बातें कह जाते हैं, जिन्हें अक्सर लोग भूलने में ही भलाई समझते हैं. जाने-अनजाने किसी पुराने हादसे या ज़ख़्मों को कुरेदना अच्छी बात नहीं. ऐसी बातों से सभी को बचना चाहिए.

9. दूसरी शादी हो, तो पहली शादी की बातें

हर कोई चाहता है कि उसका वैवाहिक जीवन ख़ुशहाल हो, पर हर किसी की क़िस्मत इतनी अच्छी नहीं होती. अक्सर हादसे ज़िंदगी की दिशा बदल देते हैं और इंसान को अपनी ज़िंदगी को एक नया मोड़ देना पड़ता है. ऐसे में दोबारा नई गृहस्थी की शुरुआत करनेवालों से कभी भी उनकी पिछली शादी के बारे में नहीं पूछना चाहिए. तुम्हारी पहली शादी क्यों टूटी? जैसे सवाल करके किसी की दुखती रग पर हाथ न रखें.

रिश्तों में लाइन ड्रॉ करना बहुत ज़रूरी है

साइकोलॉजिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी के अनुसार, “दूसरों के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानने की उत्सुकता हर इंसान में होती है. हमारे समाज में बड़े-बुज़ुर्ग छोटों से निजी से निजी सवाल पूछना अपना हक़ समझते हैं और साथ ही यह भी जताने की कोशिश करते हैं कि हमें तुम्हारी कितनी परवाह है. दरअसल, वो ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने आस-पास वही देखा है और बचपन से वही सीख पाई है, जबकि आज ज़माना बदल रहा है. नई पीढ़ी कुछ मामलों में दख़लंदाज़ी पसंद नहीं करती है और वो कहीं न कहीं सही भी है, क्योंकि कुछ मामले इतने निजी होते हैं कि उनके बारे में दूसरों द्वारा बार-बार टोका जाना किसी को भी पसंद नहीं होता. इसलिए बदलते ज़माने के साथ आज हमें अपनों की
प्राइवेसी का भी सम्मान करना चाहिए और रिश्तों की मर्यादा को बनाए रखने के लिए एक लाइन ड्रॉ करना बहुत ज़रूरी हो गया है. हालांकि अभी भी 1-2% लोग ही हैं, जो सेंसिटिव होते हैं और जिन्हें ऐसी बातें बुरी लगती है, वरना 98% तो मानकर ही चलते हैं कि उनसे ऐसे सवाल किए जाएंगे और वो इसके लिए तैयार रहते हैं. पर इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं कि उन्हें ऐसी बातें बुरी नहीं लगती, पर वो उनसे निपटना सीख जाते हैं.”

जहां ज़्यादातर लोग कौतुहलवश ऐसे सवाल करते हैं, वहीं कुछ प्रतिशत लोग ऐसे भी हैं, जो केवल अपनी महत्ता दिखाने के लिए, दूसरों पर दबाव बनाए रखने व कंट्रोल करने की भावना से ऐसा करते हैं. इसलिए बातों से बढ़कर ये बातें कभी-कभी तानों और कटाक्ष में तब्दील हो जाती हैं. ऐसे लोगों के साथ आपको डील करना सीखना होगा. उनकी बातों पर कभी भी न ग़ुस्सा करें, न अपना मूड ख़राब करें और न ही दुखी हों, क्योंकि यह उनकाव्यक्तित्व है, जिसे आप बदल नहीं सकते. ऐसे सवाल ज़्यादातर महिलाओं से ही पूछे जाते हैं, क्योंकि उन्हें सॉफ्ट टारगेट माना जाता है और जो बातें महिलाओं को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती हैं, वो बच्चों व तलाक़ से जुड़ी होती हैं. इसलिए महिलाएं अपने आप को मना लें कि ऐसा तो होना ही है. ख़ुद को मानसिक तौर पर हमेशा तैयार रखें, ताकि ये बातें न आपको प्रभावित करें, न ही आपके रिश्ते को.

– सुनीता सिंह

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