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The Psychology Of Relationships: टीनएज बेटी के व्यवहार से डर लगता है (Afraid Of Teenage Daughters Behavior)

Psychology Of Relationships

रिश्तों का मनोविज्ञान (The Psychology Of Relationships)

मेरी बेटी की उम्र 28 साल है. वो नौकरी करती है. पिछले कुछ समय से उसकी शादी की बात चल रही है. कई रिश्ते भी आए, पर उसे कोई पसंद ही नहीं आता. पता नहीं उसके मन में क्या चल रहा है. उससे पूछती हूं, तो कहती है कि सही समय पर, सही लड़का मिल जाएगा, तब कर लूंगी शादी. जल्दबाज़ी में ग़लत निर्णय नहीं लेना चाहती. लेकिन लोग बातें करते हैं, जिससे मैं बहुत परेशान रहती हूं.

– शिल्पा शुक्ला, उत्तर प्रदेश.

आज की जनरेशन शादी देर से ही करती है. उनकी प्राथमिकताएं अब बदल गई हैं. एक तरह से शादी की उम्र क़रीब 30 साल हो गई है. बच्चे पढ़-लिखकर कुछ बनकर ही शादी करने की सोचते हैं. अपनी बेटी का साथ दीजिए और धीरज रखिए. सही समय पर सब ठीक होगा. लोग क्या कहते हैं, उस पर ज़्यादा ध्यान न दें. यह आपकी बेटी की ज़िंदगी का सवाल है. अपनी बेटी पर भरोसा रखें. वो सही समय आने पर सही निर्णय ले लेगी. उसके कारण ज़्यादा परेशान होकर अपनी सेहत और घर का माहौल ख़राब न करें.

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मेरे पिताजी ने वॉलंटरी रिटायरमेंट ले लिया है. अब वे सारा दिन घर पर रहते हैं, लेकिन वो बहुत चिड़चिड़े से हो गए हैं. बात-बात पर बहस और ग़ुस्सा करते हैं. ज़िद्दी हो गए हैं, जिससे घर का माहौल ख़राब रहने लगा है. समझ में नहीं आता कि उन्हें कैसे हैंडल करें, क्योंकि वो बड़े हैं, तो उन्हें कुछ कह भी नहीं सकते.

– राकेश सिन्हा, पटना.

आप उनके मन की स्थिति समझने की कोशिश करें. हो सकता है, उन्हें भी दिनभर घर पर बैठे रहना अच्छा न लगता हो या यह भी हो सकता है कि उन्हें कोई और परेशानी हो, जो वे आप लोगों से कह न पा रहे हों. थोड़ा धीरज से काम लें. उनका विश्‍वास जीतें. उनसे प्यार से पेश आएं. उन्हें
सुबह-शाम वॉक पर ले जाएं. सोशल एक्टिविटीज़, योगा इत्यादि के लिए प्रोत्साहित करें. उन्हें घर के काम की भी ज़िम्मेदारी दें. घर के महत्वपूर्ण निर्णयों में उन्हें शामिल करें. उनकी राय को महत्व दें. उन्हें महसूस न होने दें कि अब वो काम पर नहीं जाते या कुछ करते नहीं हैं. आप सब का प्यार, सम्मान और सहानुभूति उन्हें शांत रहकर कुछ और करने के लिए प्रोत्साहित करेगी.

मेरी बेटी की उम्र 14 साल है. स्कूल जाती है. आजकल उसका स्वभाव कुछ अलग-सा हो गया है. हर समय मोबाइल पर लगी रहती है. कोई बात सुनती नहीं है. पैरेंट्स तो जैसे उसके दुश्मन हैं. डर लगता है, कहीं कोई ग़लत राह न पकड़ ले.
– कोमल सिंह, पानीपत.

इस उम्र में बच्चों का यह व्यवहार स्वाभाविक है. उन्हें परिजनों से ज़्यादा उनके दोस्त अच्छे लगते हैं. उन्हें लगता है पैरेंट्स की सोच पुरानी व दकियानूसी है. बच्चों की ख़ुशी का उन्हें ख़्याल नहीं है… आदि. बेहतर होगा आप भी उनके साथ दोस्तों की तरह पेश आएं. उनके साथ समय बिताएं, उनकी एक्टिविटीज़ में सकारात्मक तौर पर शामिल हों. हंसी-मज़ाक करें. हर बात पर टोकना या लेक्चर देना उन्हें पसंद नहीं आएगा. उनका विश्‍वास जीतें. लेकिन साथ ही उन पर नज़र भी रखें, उनके फ्रेंड सर्कल की जानकारी रखें, पर उन्हें कंट्रोल करने की कोशिश न करें. घर का हल्का-फुल्का दोस्ताना माहौल उन्हें घर से और आपसे बांधे रखेगा.

Zeenat Jahan

ज़ीनत जहान
एडवांस लाइफ कोच व
सायकोलॉजिकल काउंसलर

[email protected]

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बेस्ट ऐप्स, जो शादी के दिन को बनाएंगे ख़ास (Best apps that will make the wedding day special)

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शादी सागा ऐप (ShaadiSaga): द्वारा मैरिज से जुड़ी हर जानकारी अपने रिश्तेदारों व दोस्तों से शेयर की जा सकती है.इसमें शादी के इन्विटेशन, बधाई मैसेज, फोटोग्राफ्स आदि आसानी से शेयर किए जाते हैं. हां, एक बात है कि इसमें आपको शॉपिंग व वेंडर्स की लिस्ट नहीं मिल सकेगी. यह आपके विवरण और जानकारियों को दूसरों तक पहुंचाने, विवाह निमंत्रण-पत्र सहित में आपकी सहायता करता है. आप इस ऐप पर उपलब्ध अनेक डिज़ाइनों में से अपनी पसंद का डिज़ाइन चुन सकते हैं. साथ ही उस पर अपना विवरण डाल सकते हैं, जिसे ऐप स्वयं तैयार करती है.

*  वेड मी गुड ऐप (WedMeGood): सबसे बेहतरीन ऐप की श्रेणी में आता है. यह एक बढ़िया वेडिंग प्लानर ऐप है. इसमें विवाह से संबंधित तमाम ज़रूरी बातों की सुविधा मिल जाती है. इसकी रेटिंग भी 4.5 है, जो बहुत ही अच्छी है. इसमें वेंडर्स लिस्ट के साथ-साथ दिए गए ढेर सारे शादी-ब्याह की तस्वीरों से कई नए तरह के आइडिया मिल सकते हैं, जिससे अपने विवाह के लम्हों को आप यादगार बना सकते हैं.

*  वेड अबाउट (WedAbout): ऐप से जुड़े मैनेजर्स शादी से जुड़ी शॉपिंग को लेकर आपको उचित सलाह-मशवरा देते हैं. यह एक बेहतरीन वेडिंग प्लानिंग ऐप है. इससे आप अच्छी चीज़ें वाजिब दामों में ख़रीद सकते हैं. ये विवाह में काम आनेवाली आवश्यक सामानों में पर्सनली मदद भी करती है. यही वजह है कि यह ऐप सबसे अलग और ख़ास होता है. इसकी रेटिंग भी 4.8 है.

*  अर्बन क्लैप (UrbanClap): एक यूटीलिटी ऐप है. इसमें मैरिज के लिए ज़रूरी सभी चीज़ें, जैसे- केटरिंग, फोटोग्राफी, ब्यूटी-मेकअप, डांस-कोरियोग्राफी आदि वेंडर्स की जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं. इसे अब तक पांच लाख से अधिक लोगों द्वारा डाउनलोड किया गया है. यह आपके लिए अच्छा विकल्प है.

*  शादी के बाद हनीमून भी तो बहुत ज़रूरी है, क्योें है ना! इसमें आपकी बेहतरीन ढंग से मदद करता है टरक्वॉयज़ हॉलीडे हनीमून गाइड. इस ऐप में हनीमून मनाने के लिए अनगिनत ख़ूबसूरत जगहों के बारे में विस्तार से जाना जा सकता है. साथ ही फ्लाइट, वीज़ा आदि में भी यह ऐप सहायता करता है.

*  वेडिंग कार्ड मेकर (Wedding Card Maker): यदि आप सोच रहे हैं कि आप मित्र या रिश्तेदार के शादी का निमंत्रण-पत्र स्वयं डिज़ाइन करें, तो इस काम में यह ऐप आपके बहुत काम आ सकता है. यह फ्री ऐप इस्तेमाल में बहुत ही आसान है. यदि आप अपनी चीज़ों व रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना चाहते हैं, तो इसमें भी यह ऐप आपके लिए बहुत ही बेहतरीन साबित हो सकता है. इस ऐप का इस्तेमाल करके आप अपने काम की लिस्ट को व्यवस्थित रख सकते हैं. यह ऐप कार्ड आधारित इंटरफेस है, जो कैलेंडर फीचर व प्रतिदिन के शेड्यूल को निर्धारित करने की सुविधा देता है. इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इसमें आप अन्य लोगों को भी जोड़ सकते हैं. अपने काम को आसानी से संपादित कर सकते हैं, तालमेल बना सकते हैं और अपने प्लान के बारे में बात कर सकते हैं.

यह भी पढ़ेवेडिंग इंडस्ट्री में करियर की संभावनाएं (Career Opportunities In The Wedding Industry)

*  हेल्दीफाइमी (HealthifyMe): इस ऐप के ज़रिए ख़ुद को फिट रखने में मदद मिलती है. दरअसल, विवाह की तैयारी की व्यस्तता के कारण कई बार हम जिम व व्यायाम के लिए भी समय नहीं निकाल पाते. ऐसे समय में इस फिटनेस ऐप से एक्सरसाइज़ व कैलोरीज़ के बारे में जाना जा सकता है. इसके अलावा यह ऐप विवाह के लिए बॉडी को शेप देने में और परफेक्ट फिगर बनाने में भी मदद करता है.

*  पिनट्रेस्ट (Pinterest): यह ऐप सबसे मशहूर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जिसका उपयोग करके आप चेक कर सकते हैं कि कार्ड या कैटेगरी के अंतर्गत कैसे दूसरे लोग पिन करते हैं. यह ऐप पारंपरिक वैवाहिक ऐप्स की तरह काम नहीं करता, बल्कि यह  आपकी शादी के रुझान व दूसरी वैवाहिक चीज़ों की प्लानिंग के बारे में जानने का बढ़िया और महत्वपूर्ण साधन है. इस पर आप शादी के आउटफिट्स, निमंत्रण-पत्र, केक, डेकोरेशन आदि की पूरी जानकारी ले सकते हैं.

ऊषा गुप्ता

हैप्पी बर्थडे रितेश देशमुख- लाजवाब कॉमेडियन, लविंग पति व केयरिंग पिता… (Happy Birthday Ritesh Deshmukh- Great Comedian, Loving Husband And Caring Father…)

आज रितेश देशमुख को उनकी पत्नी जेनेलिया डिसूजा ने बड़े ही रोमांटिक अंदाज़ में जन्मदिन की बधाई दी. उन्होंने अपनी छोटी-सी प्यारी फैमिली की तस्वीर शेेयर की, जिसमें वे और उनके दोनों बेटे रितेश को किस करते हुए जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं. इसी के साथ उन्होंने अपने लविंग हसबैंड को प्यारभरा मैसेज भी लिखा.

Ritesh Deshmukh

 

 

जेनेलिया लिखती हैं- हमेशा मेरे साथ रहनेवाले मेरे प्यार… जब तुम सौ साल के हो जाओगे, मैं तब भी तुमसे यही सब कहूंगी, जो मैं आज कह रही हूं. तुम मेरा आज व आनेवाला कल हो. हैप्पी बर्थडे… लव… हमेशा तुम्हारी…

https://www.instagram.com/p/B6KCoGFpRL4/

वाकई रितेश बेहद ख़ुशनसीब इंसान हैं, जो उन्हें इतना प्यार करनेवाली पत्नी और दो प्यारे-प्यारे बच्चे मिले. उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई. रितेश ने तुझे मेरी क़सम फिल्म से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी. लेकिन वे समय के साथ-साथ अभिनय में और भी निखरते-संवरते चले गए. उन्होंने कॉमेडी में अपनी एक अलग पहचान बनाई और व़क्त के साथ ख़लनायकी में भी अपने जानदार अभिनय से हर किसी को चकित कर दिया. एक विलेन और मरजावां में उनका यह रूप खुलकर देखने को मिलता है.

हाल ही सुपर-डुपर हिट हाउसफुल 4 में तो एक बार फिर अपने हास्य के अंदाज़ और कॉमेडी पंच से उन्होंने सभी को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर दिया.

हिंदी के साथ-साथ मराठी फिल्मों में नायक-निर्माता के तौर पर उन्होंने अपनी अच्छी पकड़ बनाई है. राजनीति घराने से होने के बावजूद रितेश ने पॉलिटिक्स की जगह एक्टिंग में करियर बनाने को अहमियत दी. और अपने निर्णय को उन्होंने सही भी साबित किया. उनकी भाव-भंगिमाएं, हास्य से भरपूर हरक़तें, परफेक्ट कॉमिक टाइमिंग ने उन्हें अन्य कलाकारों से अलग एक ख़ास पहचान दी है.

वे अक्सर जेनेलिया व बच्चों के साथ मज़ेदार तस्वीरें व वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं. आइए, उनके जन्मदिन पर उन ख़ूबसूरत व ख़ास पलों से एक बार फिर गुज़रते हैं-

Ritesh Deshmukh

Ritesh Deshmukh

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https://www.instagram.com/p/B4WbM49lNLF/

Ritesh Deshmukh

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Ritesh Deshmukh

 

Ritesh Deshmukh

 

यह भी पढ़े: HBD जॉन अब्राहमः 2020 में तीन एक्शन फिल्मों से साथ पर्दे पर धूम मचाएंगे जॉन (Happy Birthday, John Abraham: With Mumbai Saga, Attack And Satyameva Jayate, The Handsome Hunk Is Set To Rock 2020 In His Action Avatar)

 

कब करें फैमिली प्लानिंग पर बात? (When Is The Best Time To Discuss Family Planning?)

शादी से पहले होनेवाले कपल को तरह-तरह की हिदायतें दी जाती हैं. ट्रेनिंग दी जाती है. नए माहौल में एडजेस्ट होने से लेकर खाना पकाने तक और ससुराल में सबका मन जीत लेने से लेकर पार्टनर को काबू में करने तक के गुरुमंत्र दिए जाते हैं. जिसकी समझ में जो आता है, वो वही स्पेशल टिप देकर चला जाता है. लेकिन इन सबके बीच एक बात जो अक्सर नज़रअंदाज़ कर दी जाती है, वो है फैमिली प्लानिंग की बात.

Family Planning

क्यों नहीं की जाती फैमिली प्लानिंग की बात?

–     दरअसल हमारे समाज में शादी का दूसरा मतलब ही होता है बच्चे. जी हां, शादी होते ही हर कोई गुड न्यूज़ सुनना चाहता है, ऐसे में फैमिली प्लानिंग के बारे में भला कौन सोचे?

–     शादी के बाद यदि एक साल के अंदर गुड न्यूज़ नहीं मिलती, तो लोग बातें बनाने लगते हैं, क्योंकि हम मदरहुड को बहुत ही ग्लोरिफाई करते हैं.

–     मां बनना ही जैसे एक स्त्री की ज़िंदगी का सबसे बड़ा उद्देश्य है, उसके बिना उसके अस्तित्व का कोई महत्व ही नहीं.

–     अक्सर पैरेंट्स अपने बच्चों के मन यह बात डाल देते हैं कि बेहतर होगा कंट्रासेप्शन यूज़ न किया जाए और पहला बच्चा जितना जल्दी हो जाए, उतना अच्छा होगा.

–     अक्सर बच्चे को लोग शादी व रिश्ते की सिक्योरिटी मान लेते हैं, यह भी वजह है कि शादी के बाद गुड न्यूज़ का ही इंतज़ार करते हैं.

क्यों ज़रूरी है फैमिली प्लानिंग?

–     आजकल बिज़ी शेड्यूल के चलते बहुत-सी प्राथमिकताएं बदल रही हैं. इनका असर शादी व फैमिली प्लानिंग पर भी पड़ा है. ऐसे में अनचाहा गर्भ यानी एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी बहुत से ़फैसले बदलने को मजबूर कर सकती है.

–     इन फैसलों में करियर से लेकर फाइनेंशियल प्लानिंग तक शामिल है.

–    पहला बच्चा कब चाहते हैं, दूसरा बच्चा यदि चाहते हैं, तो कितने अंतराल के बाद… बच्चा होने पर किस तरह से ज़िंदगी बदलेगी, ज़िम्मेदारियां बढ़ेंगी, ख़र्चे बढ़ेंगे, काम बढ़ेगा… इन सब पर चर्चा ज़रूरी है.

–     बच्चे की ज़िम्मेदारी व उससे जुड़े काम कपल किस तरह से आपस में बांटेंगे, करियर को किस तरह से मैनेज करेंगे… इन तमाम बातों पर चर्चा बेहद ज़रूरी है.

कब करें फैमिली प्लानिंग की चर्चा?

अब सवाल यह है कि इन बातों पर चर्चा कब करनी चाहिए?

–    ज़ाहिर-सी बात है, ये तमाम बातें कपल को शादी से पहले ही कर लेनी चाहिए.

–     दोनों के क्या विचार हैं, किसकी कितनी सहमति है, यह जानना बेहद ज़रूरी है, ताकि बाद में विवाद न हो.

–     इसी प्लानिंग का एक बड़ा हिस्सा है- कंट्रासेप्शन. किस तरह का कंट्रासेप्शन यूज़ करना है, किसे यूज़ करना है, कब तक यूज़ करना है आदि बातें कपल्स पहले ही डिसाइड कर लें, वरना एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी बहुत से प्लान्स चेंज करवा सकती है.

–     कंट्रासेप्शन यदि फेल हुआ, तो एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा. आपका करियर व फाइनांस बहुत हद तक इससे प्रभावित होगा, तो उस पर भी चर्चा ज़रूरी है.

–     आप चाहें तो काउंसलर के पास जाकर भी सलाह ले सकते हैं.

–     लेकिन ज़रूरी है कि शादी से पहले ही इन सब बातों को लेकर आप क्लीयर हो जाएं, ताकि बाद में एक-दूसरे पर टीका-टिप्पणी या आरोप न लगें.

यह भी पढ़े: शादी से पहले दिमाग़ में आनेवाले 10 क्रेज़ी सवाल (10 Crazy Things Which May Bother You Before Marriage)

Family Planning Tips
बेझिझक बात करना है ज़रूरी

–     अक्सर कपल शादी से पहले इन बातों को जान-बूझकर भी अवॉइड करते हैं, क्योंकि उन्हें झिझक होती है.

–     उन्हें यह भी लगता है कि कहीं इतनी-सी बात को लेकर बनता रिश्ता टूट न जाए.

–     लड़कियों में भी हिचक होती है, क्योंकि उन्हें लगता है कि पार्टनर यह न समझे कि वो मर्यादा के बाहर जाकर बात कर रही है.

–     लेकिन बेहतर यही होगा कि आप हिचकिचाहट छोड़कर अपनी सारी शंकाएं दूर कर लें, ताकि बाद में यह महसूस न हो कि काश! पहले ही बात कर ली होती.

–     इससे आपको अपने होनेवाले पार्टनर की परिपक्वता, सोच-समझ व मानसिकता का भी अंदाज़ा हो जाएगा.

–     वो कितना सुलझा हुआ है, उसका थॉट प्रोसेस कितना क्लीयर है, यह आपको पता चल जाएगा.

बदलाव के लिए रहें तैयार

–     आप दोनों को इस बात पर भी चर्चा करनी होगी कि आप दोनों की ही ज़िंदगी बच्चा होने के बाद बहुत ज़्यादा बदल जाएगी.

–     एक तरफ़ ख़ुशख़बरी होगी, पर दूसरी तरफ़ ज़िम्मेदारियां भी.

–     उसी के अनुसार ख़र्च बढ़ेंगे, तो किस तरह से पहले से ही कितना अमाउंट इंवेस्ट करना है, ताकि बच्चा होने पर आपकी फाइनेंशियल हालत स्थिर रहे, उसकी प्लानिंग भी ज़रूरी है.

–     बच्चे के लिए कौन-कौन से प्लान्स लेने हैं, इसकी जानकारी ज़रूरी है.

–     स़िर्फ आर्थिक तौर पर ही नहीं, मानसिक व शारीरिक तौर पर भी बदलाव होंगे.

–     हल्का डिप्रेशन, शरीर में बदलाव, लाइफस्टाइल में बदलाव- इन सब पर भी चर्चा ज़रूरी है.

–     आपकी सेक्स लाइफ भी बदलेगी, जिसे लेकर हो सकता है आपसी तनाव हो जाए, तो यहां यदि आप पहले ही चर्चा करके एक-दूसरे के मन को जान लेंगे, परिपक्वता को परख लेंगे, तो भविष्य की चुनौतियों का सामना बेहतर तरी़के से कर पाएंगे.

–     बच्चा होने पर देर रात तक जागना, उसकी पूरी देखभाल करना शरीर व मन को थका सकता है और यह तनाव भी दे सकता है, जिससे आपस में विवाद भी हो सकते हैं.

–     करियर में बदलाव भी होगा. हो सकता है किसी एक को नौकरी छोड़नी भी पड़े या पार्ट टाइम काम करना पड़े, तो वो किस तरह से मैनेज होगा.

–     बच्चा होने के कितने समय बाद फिर से करियर को महत्व देना है, किस तरह से बच्चे की परवरिश करनी है, ये तमाम बातें छोटी लगती हैं, लेकिन आपके रिश्ते के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.

समय ने मानसिकता भी बदल दी है…

यह सच है कि स्त्री को ही प्रकृति ने गर्भधारण का दायित्व दिया है. ऐसे में कंसीव करने के बाद यह सोचना कि यह कोई बड़ी मुसीबत है या यह बच्चा आपकी ही ज़िम्मेदारी नहीं है आदि ग़लत है. यह सच है कि बच्चा दोनों की ज़िम्मेदारी है, लेकिन स्त्री की शारीरिक संरचना व प्रकृति द्वारा प्रदत्त दायित्व के चलते उसकी ज़िम्मेदारी थोड़ी अलग व अधिक हो ही जाती है. निशांक व रिया ने फैमिली प्लानिंग नहीं की थी और न ही उस पर चर्चा की थी. नतीजा- शादी के एक साल के अंदर ही उनको बच्चा हो गया, लेकिन यह बच्चा रिया को बोझ लगने लगा, क्योंकि वो बात-बात पर निशांक से शिकायत करती कि बच्चा दोनों का है, तो तुम तो मज़े से ऑफिस चले जाते हो और मुझे इतना कुछ सहना पड़ता है. जबकि रिया वर्किंग नहीं थी, बावजूद इसके उसे यह अपेक्षा रहती थी कि यदि वो रात में जागकर बच्चे की नैप्पी बदल रही है, तो निशांक को भी यह करना होगा. प्रेग्नेंसी के बाद रिया में शारीरिक बदलाव भी आ गए थे, जिसको लेकर वो डिप्रेशन में रहने लगी थी. निशांक के अलावा रिया के जाननेवाले व सहेलियां भी उसे समझाती थीं कि यह नेचुरल है और समय के साथ सब नॉर्मल हो जाएगा, इसलिए रिया को बदले हालातों को स्वीकारना होगा, वो भी ख़ुशी-ख़ुशी. लेकिन रिया कुछ समझने को तैयार ही नहीं थी. उसे लगता था उसकी आज़ादी छिन गई, उसकी आउटिंग व पार्टीज़ बंद हो गईं, वो मोटी हो गई… जिसका असर दोनों के रिश्ते के साथ-साथ घर में आए नए मेहमान पर भी पड़ रहा था. एक्सिडेंटल प्रेग्नेंसी पर यदि रिया व निशांक ने पहले चर्चा की होती या फिर पहले से ही उन्होंने फैमिली प्लानिंग की चर्चा की होती, तो परिस्थितियां बेहतर होतीं.

इसके अलावा बेहतर होगा कि आज की जेनरेशन भी यह सच्चाई स्वीकारे कि प्रकृति ने स्त्री-पुरुष को अलग-अलग बनाया है और उसे कोई भी बदल नहीं सकता. बेहतर होगा कि अपने बच्चे का ख़ुशी-ख़ुशी स्वागत करें, ताकि वो सकारात्मक माहौल में पल-बढ़ सके.

ज़रूरत महसूस हो, तो काउंसलर की मदद भी ले सकते हैं या घर के बड़े-बज़ुर्गों का मार्गदर्शन लें.

– ब्रह्मानंद शर्मा

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रिश्तों का मनोविज्ञान (The Psychology Of Relationships)

Psychology Of Relationships

रिश्तों का मनोविज्ञान (The Psychology Of Relationships)

मेरी उम्र 27 साल है. सगाई हुए एक साल हो गया है. घरवाले शादी की जल्दी कर रहे हैं, पर मैं अभी भी शादी को लेकर, होनेवाले पति और उनके व्यवहार को लेकर काफ़ी असमंजस में हूं, इसलिए कोई भी फैसला लेने से हिचक रही हूं. मन में एक
अजीब-सा डर है.

– आशालता, चंडीगढ़.

कोई भी नया निर्णय लेना आसान नहीं होता. ख़ासकर तब, जब वह हमारे जीवन और भविष्य से संबंधित हो. शादी का निर्णय लेने से पहले कुछ बातों का ख़ास ख़्याल रखें, जैसे- शादी को लेकर आपकी अपेक्षाएं, आपकी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक तैयारी, क्या आप पूरी तरह से और यहां तक कि आर्थिक तौर पर भी तैयार हैं नए जीवन, नए रिश्तों व नए परिवार की ज़िम्मेदारी निभाने के लिए? ख़ुद से यह सवाल करें, आत्म विश्‍लेषण करें. घर के बड़ों से, अनुभवी दोस्तों से सलाह लें. परिवार या समाज के दबाव में आकर कोई निर्णय ना लें.

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मेरी दो बेटियां हैं. एक की उम्र है 16 साल और दूसरी 14 साल की है. उनके आजकल के बर्ताव से बहुत परेशान रहती हूं. उनके कपड़ों का, जूते-चप्पलों का चयन भी बहुत बदल गया है. वो अपनी ही दुनिया में रहती हैं. किसी को कुछ समझती ही नहीं. मेरी किसी बात का उन पर कोई असर नहीं होता. दोस्तों का साथ उन्हें ज़्यादा पंसद है. क्या करूं, बेहद परेशान हूं.

– नौशीन, कोलकाता.

किशोरावस्था में बच्चों को संभालना अपने आप में एक चुनौती है. आजकल का इंटरनेट युग इसे और भी मुश्किल बना रहा है. आपको संयम से काम लेना होगा. उनसे बहुत ज़्यादा कठोरता से पेश न आएं. उनकी उम्र को देखते हुए आपको उनसे दोस्ताना व्यवहार करना होगा. घर-परिवार का माहौल प्यारभरा बनाए रखें और उनका विश्‍वास जीतें. बात-बात पर
रोक-टोक न करें. उनकी दोस्त बनकर रहेंगी, तो वो आपसे दूरी नहीं बानएंगी और मन की बात भी शेयर करने से नहीं हिचकिचाएंगी. हां, उनके दोस्तों के बारे में जानकारी ज़रूर रखें, ताकि वो ग़लत संगत में न पड़ जाएं, लेकिन ध्यान रहे कि आपकी बच्चियों को यह न लगे कि आप उनकी जासूसी करती हैं.

मेरे पति काम के सिलसिले में ज़्यादातर बाहर रहते हैं. मेरा एक छोटा बेटा है. घर-बाहर का सारा काम मुझे ही देखना पड़ता है. लगता है मानो मेरा सारा जीवन बस इन्हीं उलझनों में उलझकर रह गया है. अपने लिए तो समय ही नहीं रहा अब.

– रजनी शर्मा, मुंबई.

अभी आपका बेटा छोटा है और मां होने के नाते उसके प्रति आपकी ज़िम्मेदारी बनती है. पति काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं, तो यह आपकी ज़िम्मेदारी है कि उनके पास ना होने से उनकी जगह भी आप लें. बेटे का बचपन और भविष्य सवांरने पर ध्यान दें. कुछ ही सालों में जब वह बड़ा हो जाएगा, आपके पास समय ही समय होगा अपने लिए. तब आप अपने बेटे के साथ को तरसेंगी. बेहतर है, आज जब वह आप पर निर्भर है और आप का समय और अटेंशन चाहता है, तो उसे वह सब दें, जिससे वो कामयाब जीवन की ओर बढ़ सके. जीवन के हर दौर का अपना एक अलग ही मज़ा होता है. हर दौर को भरपूर जीएं और उसका आनंद उठाएं. अगर नकारात्मक सोच रखेंगी, तो कभी ख़ुश नहीं रह पाएंगी. हां, यदि आप पर काम का बोझ अधिक बढ़ गया है, तो बेहतर होगा अपने पति से बात करें. हो सकता है वो कुछ अधिक समय आपके व बच्चे के लिए निकाल पाएं.

Zeenat Jahan

ज़ीनत जहान
एडवांस लाइफ कोच व
सायकोलॉजिकल काउंसलर

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यह भी पढ़े: लव गेम: पार्टनर से पूछें ये नॉटी सवाल (Love Game: Some Naughty Questions To Ask Your Partner)

गुम होता प्यार… तकनीकी होते एहसास… (This Is How Technology Is Affecting Our Relationships?)

अभी कुछ दशकों पहले तक हाल यह था कि त्योहारों की आहट सुनाई देते ही घर-परिवार, समाज- हर जगह रौनक़ की झालरें लहराने लगती थीं, ख़ुशी, उमंग और ऊर्जा से भरे चेहरों की चमक व उत्साह यहां-वहां बिखर जाता था. क्या करना है, कहां जाना है, किसे क्या उपहार देने हैं और रसोई में से कितने पकवानों की ख़ुुशबू आनी चाहिए- सबकी सूची बनने लगती थी. महीनों पहले से बाज़ार के चक्कर लगने लगते थे और ख़रीददारी का लंबा सिलसिला  चलता था.

Technology and Relationships

समय बदला, हमारी परंपराओं, संस्कृति और सबसे ज़्यादा हमारी सोच पर तकनीक ने घुसपैठ कर ली. हर समय किसी-न-किसी रूप में तकनीक हमारे साथ रहने लगी और फिर वह हमारी सबसे बड़ी ज़रूरत बन गई. अब आलम यह है कि त्योहारों का आगमन होता है, तो माहौल में चहल-पहल बेशक दिखाई देती है, पर उसमें से उमंगवाला अंश गायब हो गया है और तनावभरा एक शोर यहां-वहां बिखरा सुनाई देता है. दूसरों से बढ़-चढ़कर दिखावा करने की होड़ ने त्योहारों के महत्व को जैसे कम कर दिया है. त्योहार अब या तो अपना स्टेटस दिखाने के लिए, दूसरों पर रौब जमाने के लिए कि देखो हमने कितना ख़र्च किया है, मनाया जाता है या फिर एक परंपरा निभाने के लिए कि बरसों से ऐसा होता आया है, इसलिए मनाना तो पड़ेगा.

फॉरवर्डेड मैसेजेस का दौर

पहले लोग त्योहारों की शुभकामनाएं अपने मित्र-संबंधियों के घर पर स्वयं जाकर देते थे. बाज़ारवाद के कारण पहले तो इसका स्थान बड़े और महंगे ग्रीटिंग कार्ड्स ने लिया, फिर ई-ग्रीटिंग्स ने उनकी जगह ली. ग्रीटिंग कार्ड या पत्र के माध्यम से अपने हाथ से लिखकर जो बधाई संदेश भेजे जाते थे, उसमें एहसास की ख़ुशबू शामिल होती थी, लेकिन उसकी जगह अब फेसबुक और व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजे जाने लगे हैं. ये मैसेज भी किसी के द्वारा फॉरवर्ड किए हुए होते हैं, जो आगे फॉरवर्ड कर दिए जाते हैं. कई बार तो बिना पढ़े ही ये मैसेजेस फॉरवर्ड कर दिए जाते हैं. उनमें न तो कोई भावनाएं होती हैं, न ही भेजनेवाले की असली अभिव्यक्ति. ये तो इंटरनेट से लिए मैसेज ही होते हैं. इसी से पता लगाया जा सकता है कि तकनीक कितनी हावी हो गई है हम पर, जिसने संवेदनाओं को ख़त्म कर दिया है.

रिश्तों की गढ़ती नई परिभाषाएं

परस्पर प्रेम और सद्भाव, सामाजिक समरसता, सहभागिता, मिल-जुलकर उत्सव मनाने की ख़ुुशी, भेदभावरहित सामाजिक शिष्टाचार आदि अनेक ख़ूबियों के साथ पहले त्योहार हमारे जीवन को जीवंत बनाते थे और नीरसता या एकरसता को दूर कर स्फूर्ति और उत्साह का संचार करते थे, पर आजकल परिवार के टूटते एकलवाद तथा बाज़ारवाद ने त्योहारों के स्वरूप को केवल बदला नहीं, बल्कि विकृत कर दिया है. सचमुच त्योहारों ने संवेदनशील लोगों के दिलों को भारी टीस पहुंचाना शुरू कर दिया है.

सोशल मीडिया के ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल ने जहां हमारी एकाग्रता को भंग किया है, वहीं सामाजिकता की धज्जियां उड़ा दी हैं. फोन कर बधाई देना भी अब जैसे आउटडेटेड हो गया है. बेवजह क्यों किसी को फोन कर डिस्टर्ब किया जाए, इस सोच ने मैसेज करने की प्रवृत्ति को बढ़ाकर सामाजिकता की अवधारणा पर ही प्रहार कर दिया है. लोगों का मिलना-जुलना जो त्योहारों के माध्यम से बढ़ जाता था, उस पर विराम लग गया है. ज़ाहिर है जब सोशल मीडिया बात कहने का ज़रिया बन गया है, तो रिश्तों की संस्कृति भी नए सिरे से परिभाषित हो रही है.

हो गई है सामाजिकता ख़त्म

‘मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है’, यह वाक्य हमें बचपन से रटाया गया, परंतु तकनीक ने शायद अब हमें असामाजिक बना दिया है. सोशल मीडिया के बढ़ते वर्चस्व ने मनुष्य की सामाजिकता को ख़त्म कर दिया है. देखा जाए, तो सोशल मीडिया आज की ज़िंदगी की सबसे बड़ी ज़रूरत बन गया है. व्हाट्सऐप, ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और न जाने क्या-क्या? स़िर्फ एक टच पर दुनिया के इस हिस्से से उस हिस्से में पहुंचा जा सकता है. देश-दुनिया की दूरियां सिमट गई हैं, लेकिन रिश्तों में दूरियां आ गई हैं.

संवादहीनता और अपनी बात शेयर न करने से आपसी जुड़ाव कम हो गया है और इसका असर त्योहारों पर पड़ा है. माना जाता था कि त्योहारों पर सारे गिले-शिकवे दूर हो जाते थे. एक-दूसरे से गले मिलकर, मिठाई खिलाकर मन की सारी कड़वाहट ख़त्म हो जाती थी. पर अब किसी के घर जाना समय की बर्बादी लगने लगा है, इसलिए बहुत ज़रूरी है तो ऑनलाइन गिफ़्ट ख़रीद कर भेज दिया जाता है.

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Technology and Relationships
रसोई से नहीं उठती ख़ुशबू

आजकल प्रत्येक क्षेत्र में बाज़ारवाद हावी हो रहा है. इस बनावटी माहौल में भावनाएं गौण हो गई हैं. ऑनलाइन संस्कृति ने अपने हाथों से उपहार को सजाकर, उसे स्नेह के धागे से बांधकर और अपनी प्यार की सौग़ात के रूप में अपने हाथों से देने की परंपरा को पीछे धकेल दिया है. बाज़ार में इतने विकल्प मौजूद हैं कि ख़ुद कुछ करने की क्या ज़रूरत है.

एक समय था कि त्योहारों पर घर में न जाने कितने तरह के पकवान बनाए जाते थे. न जाने कितने नाते-रिश्तेदारों के लिए लड्डू, मठरी, नमकपारे, नमकीन, बर्फी, गुलाब जामुन और न जाने कितने डिब्बे पैक होते थे और यह भी तय किया जाता था कि कौन किसके घर जाएगा.

पर एकल परिवारों ने त्योहारों की रौनक़ को अलग ही दिशा दे दी. महंगाई की वजह से त्योहार फ़िज़ूलख़र्ची के दायरे में आ गए हैं. ऐसे में मिठाइयां या अन्य चीज़ें बनाने का कोई औचित्य दिखाई नहीं पड़ता. पहले के दौर में संयुक्त परिवार हुआ करते थे और घर की सारी महिलाएं मिलकर पकवान घर पर ही बना लिया करती थीं. लेकिन अब न लोगों के पास इन सबके लिए व़क्त है और न ही आज की हेल्थ कॉन्शियस पीढ़ी को वह पारंपरिक मिठाइयां पसंद ही आती हैं.

कोई घर पर आ जाता है, तो झट से ऑनलाइन खाना ऑर्डर कर उनकी आवभगत करने की औपचारिकता को पूरा कर लिया जाता है. कौन झंझट करे खाना बनाने का. यह सोच हम पर इसीलिए हावी हो पाई है, क्योंकि तकनीक ने जीवन को आसान बना दिया है. बस फ़ोन पर एक ऐप डाउनलोड करने की ही तो बात है. फिर खाना क्या, गिफ़्ट क्या, घर को सजाने का सामान भी मिल जाएगा और घर आकर लोग आपका हर काम भी कर देंगे. यहां तक कि पूजा भी ऑनलाइन कर सकते हैं. डाक से प्रसाद भी आपके घर पहुंच जाएगा. हो गया फेस्टिवल सेलिब्रेशन- कोई थकान नहीं हुई, कोई तैयारी नहीं करनी पड़ी- तकनीक के एहसास ने मन को झंकृत कर दिया. बाज़ार से आई मिठाइयों ने मुंह का स्वाद बदल दिया और बाज़ारवाद ने उपहारों की व्यवस्था कर रिश्तों को एक साल तक और सहेजकर रख दिया- नहीं हैं इनमें जुड़ाव का कोई अंश तो क्या हुआ, एक मैसेज जगमगाते दीयों का और भेज देंगे और त्योहार मना लेंगे.

– सुमन बाजपेयी

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शादीशुदा ज़िंदगी में कैसा हो पैरेंट्स का रोल? (What Role Do Parents Play In Their Childrens Married Life?)

कहते हैं, घर की ख़ुशहाली व आपसी रिश्तों की मज़बूती में पैरेंट्स का आशीर्वाद, सहयोग व प्यार काफ़ी मायने रखता है. लेकिन जब बच्चों की शादीशुदा ज़िंदगी में पैरेंट्स का सहयोगपूर्ण रवैया दख़लअंदाज़ी-सा लगने लगे, तो उनकी भूमिका सोचनीय हो जाती है. ऐसे में क्या करें पैरेंट्स? आइए, जानते हैं.

Childrens Married

आज के बदले माहौल में पति-पत्नी की विचारधारा काफ़ी बदल गई है. शादी के बाद पति-पत्नी अलग घर बसाना चाहते हैं. स्वतंत्रता व आत्मनिर्भरता दोनों ही उनके लिए अहम् हैं. सब कुछ वो ख़ुद ही करना चाहते हैं. लेकिन ऐसे एकल परिवारों में भी समय-असमय पैरेंट्स या बुज़ुर्गों की ज़रूरत आन ही पड़ती है और पैरेंट्स को भी उनकी मदद  करनी पड़ती है, फिर चाहे वो ख़ुशी से हो या कर्त्तव्यबोध के कारण. ऐसी स्थिति आज के पैरेंट्स को दुविधा में डाल रही है. वे समझ नहीं पाते हैं कि आत्मनिर्भर बच्चों की ज़िंदगी में उनका क्या स्थान है? उनकी क्या भूमिका
होनी चाहिए?

अधिकतर पैरेंट्स के लिए बच्चे हमेशा बच्चे ही रहते हैं. उनकी हर संभव मदद करना वे अपना कर्त्तव्य समझते हैं, जबकि अन्य लोगों का मानना है कि जब बच्चे बड़े हो जाते हैं और उनकी शादी हो जाती है, तब पैरेंट्स की ज़िम्मेदारियां ख़त्म हो जाती हैं. बच्चों को अपनी ज़िंदगी ख़ुद संभालनी चाहिए. पैरेंट्स से कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए.

देखा गया है कि पैरेंट्स को जब विवाहित बच्चों की ज़िंदगी में परेशानियां व असुविधाएं दिखाई देती हैं, तब कभी तो वे तुरंत मदद के लिए हाथ बढ़ा देते हैं और कभी-कभी उन्हें समय व हालात के भरोसे छोड़ अपना हाथ खींच लेते हैं. ख़ासकर तब, जब ज़रूरत आर्थिक मदद की होती है.

काफ़ी समय पहले कोलकाता की एक एज्युकेशन रिसर्च संस्था अल्फा बीटा ओमनी ट्रस्ट द्वारा एक सर्वे किया गया था, जिसमें लगभग 200 पैरेंट्स से बातचीत की गई थी. 150 से भी ज़्यादा पैरेंट्स का कहना था- यदि संभव हो और सहूलियत हो, तो हर प्रकार की मदद की जानी चाहिए, क्योंकि बच्चे तो हमेशा ही हमारे लिए बच्चे रहेंगे. साथ ही उनका मानना था कि शादीशुदा ज़िंदगी का शुरुआती दौर कई बार मुश्किलों व असंतुलन से भरा होता है. कई प्रकार के पारिवारिक व भावनात्मक एडजस्टमेंट करने पड़ते हैं. कभी-कभी अनचाहे आर्थिक संकट भी ज़िंदगी को कठिन बना देते हैं. ऐसे में आर्थिक सहायता से ज़िंदगी आसान व ख़ुशहाल हो सकती है. दूसरे मत के अनुसार, शादी तभी की जानी चाहिए, जब व्यक्ति शादी के बाद आनेवाली हर परिस्थिति का मुक़ाबला करने के लिए तैयार हो, आर्थिक रूप से सुरक्षित व ठोस हो. बच्चों को पढ़ाना-लिखाना, ज़िम्मेदारियों के लिए तैयार करना पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी है. उसके बाद पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी ख़त्म. फिर तो बच्चों की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो पैरेंट्स की देखभाल करें.

समाजशास्त्री डॉ. कामेश्‍वर भागवत का मानना है कि पैरेंट्स हमेशा ही पैरेंट्स रहते हैं. अपने बच्चों की ज़िंदगी में हमेशा ही उनकी भूमिका बनी रहती है. कभी मुख्य, तो कभी सहयोगी के तौर पर. इसलिए न तो पूरी तरह इनसे अलग हों और न ही रोज़मर्रा की हर बात में अपनी राय दें. यानी रास्ता बीच का होना चाहिए. वैसे भी भारतीय परिवार एक कड़ी की तरह जुड़े रहते हैं, एक तरफ़ हम अपने बच्चों की ज़िम्मेदारियां पूरी करते हैं, तो दूसरी तरफ़ पैरेंट्स के साथ जुड़े रहकर उनके प्रति दायित्व निभाते हैं. दरअसल शेयरिंग व केयरिंग की भावना ही परिवार है. पैरेंट्स का रोल कभी ख़त्म नहीं होता है, बस उनका स्वरूप बदल जाता है. आर्थिक योगदान के अलावा भी विवाहित बच्चों के जीवन में पैरेंट्स की एक सुखद भूमिका हो सकती है.

–    पति-पत्नी यदि अकेले व समर्थ हैं, तो भी उन्हें अपने पैरेंट्स के भावनात्मक सहयोग, उनके प्यार व आशीर्वाद की ज़रूरत होती है.

–    पति-पत्नी दोनों वर्किंग हैं, तो बच्चे की सुरक्षा व देखभाल की ज़िम्मेदारी लेकर आप उन्हें चिंतामुक्त कर सकते हैं. पैरेंट्स की मदद से वे लोग अपना काम बेहतर तरी़के से कर सकेंगे.

–   तकलीफ़ या बीमारी के दौरान आपका समय व अनुभव उनके लिए किसी वरदान से कम न होगा.

–   तनाव व संघर्ष के दौरान आपका भावनात्मक सहयोग व ज़िंदगी के अनुभव उन्हें संबल व हौसला प्रदान कर सकते हैं.

–   बच्चों को स्कूल से लाना व छोड़ना प्रायः ग्रैंड पैरेंट्स को भी अच्छा लगता है और ग्रैंड चिल्ड्रेन भी दादा-दादी का साथ एंजॉय करते हैं.

–   बच्चों में आध्यात्मिक व नैतिक गुणों तथा शिक्षा की शुरुआत भी ग्रैंड पैरेंट्स द्वारा बेहतर रूप से होती है.

–   आज अकेला बच्चा हर समय टीवी, कंप्यूटर, प्ले स्टेशन जैसे गैजेट्स से चिपका रहता है, ऐसे में आपका साथ व मार्गदर्शन  उसे समय का बेहतर उपयोग करना सिखा सकता है.

–    बच्चे जिज्ञासु होते हैं, उनकी जिज्ञासा ग्रैंड पैरेंट्स बहुत अच्छी तरह से शांत कर सकते हैं.

–    इन बातों के अलावा आपके विवाहित बच्चों की और भी अनेक व्यक्तिगत समस्याएं व ज़रूरतें हो सकती हैं, जिनका समाधान आपकी सहयोगी भूमिका से हो सकता है और बच्चों की विवाहित ज़िंदगी ख़ुशहाल हो सकती है.

–    आर्थिक सहायता निश्‍चय ही जटिल व निजी मामला है. इससे हालात सुधर भी सकते हैं और पैरेंट्स बुढ़ापे में स्वयं को सुरक्षित भी कर सकते हैं.

याद रखें, बच्चे आपके ही हैं, फिर भी पराए हो चुके हैं. एक नए बंधन में बंध चुके हैं. एक नई दुनिया बसा रहे हैं. तो बस, पास रहकर भी दूर रहें और दूर रहकर भी अपने स्पर्श का एहसास उन्हें कराते रहें.

आपकी सहयोगी भूमिका आपके शादीशुदा बच्चों को कैसी लग रही है, यह जानने के लिए इन बातों पर ध्यान दें-

–    क्या बच्चे आपकी मदद से ख़ुश हैं? आपकी भूमिका को सराहते हैं? आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं? यदि नहीं, तो आप मदद नहीं दख़ल दे रहे हैं.

–     अब आपके बच्चे अकेले नहीं हैं, उनकी ज़िंदगी उनके जीवनसाथी के साथ जुड़ी है. क्या उनके साथी को भी आपका रोल पसंद है? यदि नहीं, तो एक दूरी बनाना बेहतर होगा.

–     मदद के दौरान क्या आपको ऐसा महसूस होता है कि आपका फ़ायदा उठाया जा रहा है या आपको इस्तेमाल किया जा रहा है? ऐसी स्थिति कुंठा को जन्म देती है.

–     मदद के दौरान होनेवाला आपका ख़र्च आपको परेशानी में तो नहीं डाल रहा है? यदि ऐसा है तो हाथ रोक लें, वरना पछतावा होगा.

–     उनकी व्यस्तता को कम करने के लिए, उनकी ज़िंदगी को ख़ुशहाल बनाने के लिए अपनी ज़िंदगी को जीना न छोड़ें. अपनी दिनचर्या, अपनी हॉबीज़ पर भी ध्यान दें.

–     बिना मांगे, आगे बढ़कर ख़ुद को ऑफ़र न करें, न ही उनकी ज़िंदगी में दख़लअंदाज़ी करें, वरना रिश्ते बिगड़ सकते हैं, आपके साथ भी और आपस में उनके भी.

–     हर व़क़्त उनकी ज़िंदगी में झांकने की कोशिश न करें. जब वो शेयर करना चाहें, तो खुले मन से आत्मीयता बरतें.

–     अपनी चिंताओं व कुंठाओं का रोना भी हर व़क़्त उनके सामने न रोएं. चाहे वो स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हों या पारिवारिक रिश्तों की कड़वाहट.

–     बदलते समय के साथ अपने व्यवहार व सोच में परिवर्तन लाएं, ताकि बच्चे आपसे खुलकर बात कर सकें.

 

– प्रसून भार्गव

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हैप्पी बर्थडे ईशा देओल: लविंग बेटी-पत्नी से लेकर केयरिंग मां तक का ख़ूबसूरत सफ़र… (Happy Birthday To Esha Deol)

  • आज ईशा ने अपनी ख़ूबसूरत सी तस्वीर शेयर करके अपने ख़ास दिन की शुरुआत की. साथ ही सभी को बधाइयों के लिए शुक्रिया भी अदा किया. उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई! वे यूं ही सदा हंसती-मुस्कुराती रहें. वे समझदार बेटी, पत्नी और मां की भूमिका को बख़ूबी निभा रही हैं.

Esha Deol
भरत तख्तानी से शादी करने के बाद उन्होंने फिल्म से दूरी बना ली है. कभी-कभार मां हेमा मालिनी के साथ स्टेज शो, कृष्णलीला या उनके रामायण डांस बैलेट का हिस्सा बनती रही हैं. ईशा एक समर्पित पत्नी के रूप में अपने वैवाहिक जीवन को एंजॉय कर रही हैं. बेटी राध्या व मियारा के जन्म से ही उनके जीवन में बहार आ गई है. यही वो समय भी है, जब उन्हें अपनी मां हेमा मालिनी की बातों, सीख के मर्म को समझने का मौक़ा मिल रहा है. मां के लिए उनके बच्चे और ख़ासकर बेटी हो, तो काफ़ी मायने रखते है. उनकी पूरी दुनिया उनमें सिमट के रह जाती है. मदरहुड को ईशा ख़ूब एंजॉय कर रही हैं. वे अक्सर सोशल मीडिया पर दोनों बेटियों, पति, परिवार के साथ की ख़ूबसूरत व दिलचस्प तस्वीरें शेयर करती रहती हैं. ईशा ने अपने जीवन को ख़ूबसूरती से संवारा है. फिर चाहे वह बेटी की भूमिका हो, पत्नी की ज़िम्मेदारी हो, मां का रोल हो… उन्होंने हर किरदार को अपने जीवन में बख़ूबी निभाया है और निभा रही हैं.

Esha Deol

ईशा से जुड़ी कुछ विशेष बातों के बारे में जानते हैं...

* ईशा देओल ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत ‘कोई मेरे दिल से पूछे’ से की थी.
* उसके बाद एक से एक बेहतरीन फिल्में की उनके करियर का मील का पत्थर साबित हुआ फिल्म धूम, जिसमें उनके अभिनय और डांस की ख़ूब तारीफ हुई.
* ईशा ने अपनी फिल्मों में कई तरह की भूमिकाएं निभाई, पर ज़िंदगी भूमिका में सुपरहिट रहीं.
* ईशा के पति भरत तख्तानी उन्हें बचपन से पसंद करते थे.
* दोनों अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते थे, पर प्रतियोगिताओं आदि में उनकी अक्सर मुलाकातें होती थीं.
* उन्हीं दिनों भरत ने एक बार ईशा का हाथ पकड़ लिया था, तब उन्होंने नाराज़ होकर थप्पड़ मार दिया था.
* काफ़ी सालों बाद दोनों की दोबारा मुलाक़ात हुई, तब रोमांटिक अंदाज़ में भरतजी ने उन्हें कहा कि क्या वे अब उनका हाथ पकड़ सकते हैं, तो उन्होंने हामी भर दी.
* फिर वे धर्मेंद्र-हेमा मालिनी से मिले और उनकी रज़ामंदी मिलने के बाद हैप्पी एंड यानी शादी हो गई.
* वैसे ईशा का क्रश सिलवेस्टर स्टैलॉन हैं, जो हॉलीवुड के मशहूर एक्टर रहे हैं उनकी रैंबो, रॉकी सीरीज़ फिल्में सुपरडुपर हिट रही हैं.
* हाल ही में ‘केकवॉक’ शॉर्ट फिल्म में भी वे दिखी थीं.
* उन्होंने हेमाजी पर किताब भी लिखी है, यहां उन्होंने अपने लेखनी के हुनर को भी दिखाया है.
* ईशा की हमेशा से ख़्वाहिश रही थी कि उनका जीवनसाथी उनके पिता धर्मेंद्र की तरह हैंडसम और डैशिंग हो और आख़िरकार भरत तख्तानी के रूप में उन्हें वह मिल गया.
* ईशा की छोटी बहन अक्सर उनके लिए सरप्राइज पार्टी अरेंज करती रहती हैं.
* ईशा के बेबी शावर के समय भी उन्होंने एक मज़ेदार पार्टी का आयोजन किया था, तब ईशा ने एक रस्म के दौरान पीछे की तरफ फूल फेंका था. और जो उसे पकड़ लेता है, तो उसकी प्रेग्नेंसी निश्चित मानी जाती है और संजोग से आहना ने पकड़ा था. तब ईशा ने बड़े ही मजेदार ढंग से कहा था कि देखिए अब आगे क्या होता है. वैसे आहना को एक बेटा डेरिअन है.
* ईशा के साथ आज शाहरुख ख़ान का भी जन्मदिन है. कल रात से ही उनके फेंस का हुजूम उनके घर मन्नत पर मेला लगाए है. शाहरुख ने घर के छत से सभी का प्यार स्वीकारते हुए धन्यवाद कहा व अभिवादन किया.
* ईशा जया बच्चन को काफ़ी पसंद करती हैं. एक बार उन्होंने कहा था कि जन्म देनेवाली हेमाजी हैं, पर स्क्रीन पर रहीं मेरी मां जया बच्चन का काफ़ी सम्मान करती हूं. ऐसा उन्होंने उनके जन्मदिन की विश करते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त की थी.
* ईशा देओल आज उस मुक़ाम पर है, जहां पर हर एक लड़की होने की इच्छा करती है. वे शादीशुदा जीवन का भरपूर आनंद ले रही हैं. अपने मातृत्व को काफ़ी दुलार-संवार रही हैं. साथ ही लाइमलाइट में भी रहती हैं.
* ऐसा नहीं है कि मां बनने के बाद उन्होंने अपने अभिनय और नृत्य से प्यार को छोड़ दिए है. वे आज भी सभी के साथ तालमेल बैठाते हुए आगे बढ़ रही हैं. हमारी शुभकामनाएं व ऑल द बेस्ट, वे यूं ही आगे बढ़ती रहें…

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विशेष: ईशा के साथ आज शाहरुख ख़ान का भी जन्मदिन है. कल रात से ही उनके फैंस का हुजूम उनके घर मन्नत पर मेला लगाए है. शाहरुख ने घर के छत से सभी का प्यार स्वीकारते हुए धन्यवाद कहा व अभिवादन किया.

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Happy Birthday Principessa: अभिषेक बच्चन ने रोमांटिक अंदाज़ में पत्नी ऐश्‍वर्या को किया बर्थडे विश.. (Happy Birthday To Aishwarya Rai Bachchan)

आज ऐश्‍वर्या राय बच्चन (Aishwarya Rai Bachchan) के जन्मदिन (Birthday) पर पति अभिषेक बच्चन ने रोम की रोमांटिक वादियों में उन्हें जन्मदिन की बधाई दी. उन्होंने ऐश्‍वर्या की ख़ूबसूरत तस्वीर शेयर करते हुए इटली में उन्हें राजकुमारी कहा. उनके अंदाज़ में हैप्पी बर्थडे प्रिंसिपेसा…

Aishwarya Rai Bachchan

दरअसल, अपने कई प्रोजेक्ट व काम के सिलसिले में ऐश्‍वर्या इटली के रोम में हैं. इस बार वे वहीं पर पति अभिषेक व बेटी आराध्या के साथ अपना जन्मदिन मना रही हैं. इस ख़ास मौ़के पर वे अपने परिवार को भी ख़ूब मिस कर रही हैं.

वैसे तो उनका फिल्मी सफ़र कई उतार-चढ़ाव से गुज़रा, पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने हर फील्ड में अपना सौ प्रतिशत दिया, फिर चाहे वो मॉडलिंग हो, एक्टिंग हो या फिर बिज़नेस ही क्यों न हो.

आइए, आज ऐश्‍वर्या राय बच्चन के जन्मदिन पर उनकी कुछ कही-अनकही बातों को जानते हैं-

* ऐश्‍वर्या का जन्म कर्नाटक के मैंगलूर में 1 नवंबर, 1973 में हुआ था.

* उनकी मां वृंदा राय लेखिका हैं.

* पिता कृष्णराज राय मरीन इंजीनियर थे.

* उनकी मातृभाषा तेलुगू है, पर उन्हें कन्नड़, हिंदी, अंग्रेज़ी, तमिल व मराठी भाषाएं भी अच्छी तरह से आती है.

* उनकी शुरुआती पढ़ाई हैदराबाद में हुई थी.

* फिर उनका परिवार मुंबई आ गया और सांताक्रुज़ के आर्य विद्या मंदिर में उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की.

* मुंबई के माटुंगा के डी.जी. रुपारेल कॉलेज से उन्होंने आगे की पढ़ाई की.

* जब वे नौंवी कक्षा में थीं, तभी से उन्होंने मॉडलिंग करना शुरू कर दिया था.

* उनका पहला विज्ञापन केमलिन पेंसिल का था.

* सत्रह साल की कम उम्र में उन्होंने फोर्ड प्रतियोगिता भी जीती थी.

* ऐश्‍वर्या ने कोकाकोला व पेप्सी दोनों के लिए विज्ञापन किए हैं और ऐसा करनेवाली वे एकमात्र भारतीय अदाकारा हैं.

* साल 1994 में वे मिस वर्ल्ड बनी थीं.

* बेइंतहा ख़ूबसूरत ऐश्‍वर्या को मिस वर्ल्ड में वोटिंग के आधार पर साल 2000 व 2010 में विश्‍व की सबसे ख़ूबसूरत शख़्सियत के रूप में चुना गया था.

* उनके फैन्स ने उनके नाम के दुनियाभर में कम से कम सत्रह हज़ार से अधिक इंटरनेट साइट बना रखे हैं, जो अपने आप में रिकॉर्ड है.

* ऐश्‍वर्या पहली भारतीय अभिनेत्री थीं, जिनका मोम का पुतला लंदन के मैडम तुसाद म्यूजियम में साल 2004 में स्थापित किया गया था.

* इसी साल अमेरिका की मशहूर पत्रिका टाइम ने उन्हें विश्‍व की सौ प्रभावशाली शख़्सियत में शामिल किया था.

* 2009 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था.

* उन्होंने तमिल फिल्म इरुवर से अभिनय की शुरुआत की और हिंदी में और प्यार हो गया उनकी पहली फिल्म थी, जिसमें अक्षय खन्ना उनके हीरो थे. इसके बाद अक्षय के साथ ही उनकी ताल फिल्म सुपर-डुपर हिट रही.

* गुरिंदर चड्ढा की अंग्रेज़ी मूवी प्राइड एंड प्रीजुडिस में उनका एक अलग अंदाज़ ही देखने को मिला.

* ऐश्‍वर्या अमेरिकी शो ओपरा विनफ्रे में आनेवाली पहली भारतीय सेलिब्रिटी थीं.

* उन्होंने हॉलीवुड की मूवी ट्रॉय में ब्रेड पिट के साथ काम करने से मना कर दिया था.

* अभिषेक बच्चन के साथ शादी के बाद उन्होंने फिल्मों में काम करना कम कर दिया और बेटी आराध्या होने के बाद तो और भी कम.

* साल 2010 में गुज़ारिश में उनके अभिनय की ख़ूब तारीफ़ हुई थी, उसके बाद जज़्बा और फन्ने ख़ा में वे दिखाई दी थीं.

* भले ही वे फिल्में कम कर रही हैं, पर अन्य बिज़नेस प्रोजेक्ट्स, मॉडलिंग, असाइंटमेंट से लगातार जुड़ी हुई हैं. इसी सिलसिले में उन्हें अभिषेक-आराध्या के साथ इटली के रोम भी जाना पड़ा. काम के साथ-साथ वे अपना जन्मदिन भी वहीं मना रही हैं.

* साल 2003 में उन्होंने फिल्म दिल का रिश्ता भी प्रोडयूस किया था.

* वे कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स की ब्रांड एंबेसडर हैं.

* हाल ही में अपनी मां के साथ मिलकर उन्होंने बैंगलुरू बेस्ट स्टार्टअप में भी इंवेस्ट किया है.

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इसमें कोई दो राय नहीं कि ऐश्‍वर्या ने आदर्श बेटी, बहन, पत्नी, बहू व मां के रूप में ख़ुद को बेहतरीन ढंग से संवारा-निखारा है. मेरी सहेली की तरफ़ से उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई!

– ऊषा गुप्ता

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अक्षय कुमार- हमें नहीं भूलना चाहिए कि पैरेंट्स भी बूढ़े हो रहे हैं… (Akshay Kumar- We Should Not Forget That Parents Are Getting Old Too…)

Akshay Kumar

अक्षय कुमार (Akshay Kumar) फैमिलीमैन फिल्म स्टार के रूप में जाने जाते हैं. हाल ही में उनकी फिल्म मिशन मंगल ने कामयाबी के आसमान को छूते करो़ड़ों का आंकड़ा पार कर लिया. ड्रीमगर्ल और वॉर फिल्मों से भी उसे कड़ी टक्कर मिलती रही. जल्द ही उनकी हाउसफुल फिल्म की चौथी कड़ी यानी हाउसफुल 4 और गुडन्यूज़ आनेवाली है. मनोरंजन से भरपूर मल्टी स्टारर हाउसफुल द को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है. गुडन्यूज़ भी अपने नए कॉन्सेप्ट के कारण लोगों में दिलचस्पी जगा रही है. ऐसे में अक्षय कुमार बाला चैलेंज भी ख़ूब सूर्ख़िया बटोर रहा है. आए दिन स्टार्स इससे जुड़ रहे हैं. सबसे अधिक आयुष्मान खुराना और वरुण धवन यह चैलेंज लोगों ने पसंद किया. आइए, अक्षय कुमार की फिल्मों, परिवार, फैन व सेहत से जुड़ी बातों को संक्षेप में उन्हीं से जानते हैं.

 

Akshay Kumar

अक्षय कुमार पृथ्वीराज पर…  

सम्राट पृथ्वीराज चौहान के मूल्यों व बहादुरी से मैं हमेशा प्रभावित रहा हूं. मैं ख़ुद को ख़ुशक़िस्मत मानता हूं कि मुझे इस ऐतिहासिक क़िरदार को निभाने का मौक़ा मिल रहा है. सच, अपने जन्मदिन पर यशराज के बैनर तले बननेवाली इस फिल्म पृथ्वीराज का ऐलान करते हुए मुझे बेइंतहा ख़ुशी हुई थी. जल्द ही इसकी शूटिंग शुरू होनेवाली है.

Akshay Kumar

लंदन की गलियों में मां को व्हील चेयर पर बैठाकर पैदल घुमाते हुए…

लंदन में शूटिंग के बिज़ी शेड्यूल से समय निकालकर मॉम को लंदन की सैर करवाना बहुत अच्छा लगा. इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप ज़िंदगी में कितना आगे बढ़ रहे हैं, पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पैरेंट्स भी बूढ़े हो रहे हैं, इसलिए उनके साथ कुछ व़क्त ज़रूर बिताएं, जो आप कर सकते हैं. मैं अक्सर अपने व्यस्त कामों से समय निकालकर मां के साथ समय बिताता हूं. मुझे अच्छा लगता है और इससे संतुष्टि भी मिलती है.

Akshay Kumar

क्रेज़ी फैन प्रभात, जो द्वारका (गुजरात) से पैदल चलकर उन्हें मिलने मुंबई आया…

किसी भी स्टार का फैन होना अच्छी बात है, पर इसके लिए अपनी जान जोख़िम में डालना ठीक नहीं है. आप इतनी दूर से पैदल चलकर आए हो, रास्ते में हाइवे आदि पर कुछ भी हो सकता था. युवाओं व अपने फैन्स को कहना चाहूंगा कि वे अपना क़ीमती समय व एनर्जी अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाने और अपने लक्ष्य को पूरा करने में लगाएं. वे ऐसा करेंगे, तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी.

Akshay Kumar With His Kids

स्टार किड्स को लेकर मीडिया का रवैया…

21 साल की उम्र से छोटे किसी भी शख़्स के बारे में ग़लत या बेकार की बातें लिखना ग़ैरक़ानूनी कर देना चाहिए. किसी को दुखी करने, मज़ाक उड़ाने, शर्मिंदा करने में कइयों को बहुत आनंद आता है. कई स्टार किड्स के साथ ऐसा होता है. पैरेंट्स के रूप में मैं बच्चों को इतना ही समझा सकता हूं कि इस तरह की बातों को दिलोदिमाग़ पर न लें.

Akshay Kumar

अपने बच्चों का लाइमलाइट से दूर रहना…

मेरे बच्चे लाइमलाइट से दूर रहते हैं. मेरी बेटी नितारा, जो छह साल की है, वो हमारे साथ फैमिली डिनर या कहीं भी इसलिए नहीं आती कि उसे कैमरे की फ्लैश लाइट पसंद नहीं है. मैं मानता हूं कि स्टार होने के बाद मीडिया का अटेंशन होना आम बात है, पर बच्चों को उनकी प्राइवेसी भी तो मिलनी ज़रूरी है.

Akshay Kumar With His Son

बेटे आरव के जन्मदिन पर…

एक चीज़, जो मैंने अपने पिता से सीखी थी कि यदि मैं कभी भी मुश्किल में फंसा, तो मैं उनसे डरने की जगह उन पर पूरी तरह से भरोसा कर सकता हूं और निर्भर रह सकता हूं. आज जब बेटे आरव के मोबाइल पर स्पीड डायल में अपना नंबर देखता हूं, तो मुझे लगता है कि मैं भी सही परवरिश कर रहा हूं.

मैं हमेशा तुम्हें गाइड करता रहूंगा और तुम्हारे साथ रहूंगा. हैप्पी बर्थडे आरव…

Akshay Kumar

फिटनेस सीक्रेट…

मेरे फिट रहने का राज़ है- घर का बना भोजन, समय पर खाना-सोना, पर्याप्त पानी पीना व एक्सरसाइज़ करना. साथ ही अपनी उम्र को छुपाने के लिए कोई भी प्रोडक्ट्स लेना या कुछ अलग करने की कभी कोशिश न करना. मैं व एथलीट हिमा दास इसका बेहतरीन उदाहरण हैं कि आपको अच्छा दिखने व विजेता होने के लिए किसी सप्लीमेंट या स्टेरॉइड की ज़रूरत नहीं है. वैसे भी फिटनेस में कभी भी शॉर्टकट नहीं अपनाएं. इसके लिए जो तरीक़ा है, थोड़ा मुश्किलोंभरा है, पर वही सही है. यदि हम शॉर्टकट करते हैं, तो ज़िंदगी भी शॉर्ट यानी छोटी हो जाती है. याद रहे, हम जो खाते हैं, वैसे ही हम बनते हैं. हमें अपने शरीर के साथ ईमानदारी रखनी चाहिए. मैं दो बच्चों का पिता हूं, इस उम्र में भी ख़ुद को हमेशा फिट रखता हूं. एक ही ज़िंदगी है, उसे तरी़के से जीएं. सभी अपना ख़्याल रखें.

Akshay Kumar

आनेवाली फिल्में…

मैं यह कह सकता हूं कि आनेवाली मेरी हर फिल्म आपको चौंकाएगी, जैसे- लक्ष्मी बम, गुड न्यूज़, सूर्यवंशी, हाउसफुल 4, पृथ्वीराज. वैसे भी हाउसफुल की हर पार्ट को लोगों ने ख़ूब पसंद किया, इसलिए मुझे यक़ीन है कि हाउसफुल 4 भी लोगों का ख़ूब मनोरंजन करेगी. अच्छी बात यह भी है कि यह त्योहार पर यानी दिवाली; के समय रिलीज़ हो रही है, इसलिए यक़ीनन लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स भी मिलेगा. सभी को दीपावली की शुभकामनाएं.

– ऊषा गुप्ता

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ब्लड प्रेशर से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई (Myths And Facts About Blood Pressure)

हाइपरटेंशन (Hypertension) यानी हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure), बदलते लाइफस्टाइल के चलते होने वाली एक आम स्वास्थ्य समस्या है. हालांकि अधिकांश लोग इस बात से बेख़बर होते हैं कि वो ब्लड प्रेशर से संबंधित बीमारी की गिरफ़्त में हैं. चूंकि इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं, इसलिए इस रोग को साइलेंट किलर भी कहा जाता है. आंकड़ों के मुताबिक़, दुनिया में हर तीसरा व्यक्ति इस बीमारी से ग्रसित है. हालांकि कई लोग इस रोग से जुड़ी कुछ भ्रांतियों को सच मानकर टेंशन में आ जाते हैं, तो चलिए जानते हैं ब्लड प्रेशर से जुड़ी 10 भ्रांतियां और उनकी वास्तविकता.

Myths About Blood Pressure
भ्रम- अगर ब्लड प्रेशर कम हो जाए, तो नमक खाने से वह नॉर्मल हो जाता है.
सच– अगर आप यह सोचते हैं कि ब्लड प्रेशर कम होने पर नमक खाने से वह नॉर्मल हो जाता है, तो आपकी यह धारणा बिल्कुल ग़लत है. ब्लड प्रेशर कम है या ज़्यादा यह हम ख़ुद तय नहीं कर सकते. इसके बारे में हमें सही जानकारी स़िर्फ डॉक्टर ही दे सकता है. हालांकि जिन लोगों का ब्लड प्रेशर ज़्यादा रहता है, उन्हें कम नमक खाना चाहिए.

भ्रम- ब्लड प्रेशर कम हो जाने पर दवाइयों का सेवन बंद कर देना चाहिए.
सच- ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है जो जीवनभर व्यक्ति का पीछा नहीं छोड़ती. इससे पूरी तरह से निजात पाना नामुमक़िन है, लेकिन इसे कंट्रोल किया जा सकता है. इसलिए अगर दवाइयों के सेवन से ब्लड प्रेशर कम हो गया हो, तब भी दवाइयां बंद नहीं करनी चाहिए. ऐसी स्थिति में डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए.

भ्रम- वाइन दिल के लिए सेहतमंद होती है, इसलिए अत्यधिक मात्रा मंें इसका सेवन करने पर भी यह नुकसान नहीं पहुंचाती.
सच- वाइन फ़ायदा तभी पहुंचाती है, जब इसका सेवन सीमित मात्रा में किया जाए. ख़ासकर जिन लोगों को हाइपरटेंशन की समस्या है उन लोगों को अल्कोहल का सेवन करने से बचना चाहिए या फिर बहुत सीमित मात्रा में पीना चाहिए. ऐसे लोग अगर ज़्यादा शराब पीते हैं तो उन्हें हार्ट फेल, स्ट्रोक, अनियमित हार्टबीट जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

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भ्रम– हाई ब्लड प्रेशर ज़िंदगी भर ठीक नहीं हो सकता.
सच- हां, यह सच है कि ब्लड प्रेशर ज़िंदगी भर व्यक्ति के साथ रहता है, लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल की मदद से इस समस्या को काफ़ी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. इसे कंट्रोल करने के लिए हेल्दी डायट लें, वेट कंट्रोल करें व खाने में कम नमक का इस्तेमाल करें. इसके अलावा शराब और सिगरेट से परहेज़ करें.

भ्रम- जब ब्लड प्रेशर हाई होता है तो सिरदर्द होता है.
सच- यह धारणा बिल्कुल ग़लत है, क्योंकि सिरदर्द से ये पता नहीं चलता कि ब्लड प्रेशर बढ़ गया है, लेकिन यह सच है कि अगर आपको किसी तरह का दर्द महसूस होता है, तो इससे हार्ट रेट बढ़ जाती है.

भ्रम- हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को केला नहीं खाना चाहिए.
सच- यह बिल्कुल भी सच नहीं है कि ब्लड प्रेशर के मरीज़ केला नहीं खा सकते. सच्चाई तो यह है कि अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर है तो आपको केले का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि केला ब्लड प्रेशर के स्तर को कम करने में मदद करता है.

भ्रम- शरीर में किसी तरह की परेशानी या बीमारी महसूस नहीं होने का अर्थ यह है कि आपको ब्लड प्रेशर की समस्या नहीं है.
सच- अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो यह ग़लत है, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर होने पर शरीर में तुरंत किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं होती है. यह रोग धीरे-धीरे शरीर के अंगों को नुक़सान पहुंचाना शुरू करता है और आगे चलकर यह हार्ट व किडनी फेल होने के अलावा हार्ट स्ट्रोक जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है.

भ्रम- एक्सरसाइज़ व डायट से बीपी कंट्रोल हो जाए तो इससे डरने की ज़रूरत नहीं है.
सच- वेट कंट्रोल, हेल्दी डायट और एक्सरसाइज़ की मदद से हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह समस्या जड़ से ख़त्म हो गई है. यह समस्या कंट्रोल में रहे इसके लिए अनुशासित जीवनशैली का पालन करने के साथ समय-समय पर बीपी चेक करवाना आवश्यक है.

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भ्रम– हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़ रक्तदान नहीं कर सकते.
सच- हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़ भी रक्तदान कर सकते हैं, बशर्ते रक्तदान के समय आपका बीपी 180 सिस्टोलिक से कम और 100 डायस्टोलिक तक होना चाहिए. बीपी की गोलियों का रक्तदान से कोई संबंध नहीं है, लेकिन हां, सर्दी-ज़ुकाम, पेट की समस्या या एंटीबायोटिक्स लेते समय रक्तदान करने
से बचें.

भ्रम- गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर होना आम है, इससे कोई गंभीर समस्या नहीं होती.
सच– गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की संभावना उन महिलाओं में अधिक होती है, जिन्हें पहले से हाई बीपी की समस्या होती है. ज़्यादातर मामलों में गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर ज़्यादा होना परेशानी पैदा नहीं करता, जबकि कुछ मामलों में यह विकासशील भ्रूण और मां के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है.

इन डेली डोज़ेस से बढ़ाएं रिश्तों की इम्यूनिटी (Daily Doses To A Healthy Relationship)

रिश्तों (Relationships) को बेहतर बनाए रखने का कोई लिखा-पढ़ा फॉर्मूला तो नहीं है, क्योंकि हर इंसान और हर किसी की सोच अलग होती है. पर हां, कुछ बातें ज़रूरी होती हैं, जिनसे आपके रिश्ते बेहतर होंगे, उनमें नई उमंग और ऊर्जा जागेगी, जिससे उनकी इम्यूनिटी तो बढ़ेगी ही, साथ ही आप दोनों का प्यार व अपनापन भी बरक़रार रहेगा. तो क्या हैं वो डेली डोज़ेस (Daily Doses), जो आपके रिश्ते को बनाएंगे इम्यून, आइए जानें.

 Relationship Dose
थोड़ी आज़ादी दें

रिश्तों में एक-दूसरे को कंट्रोल करने की कोशिश कभी न करें. इससे घुटन होने लगती है. हमेशा एक-दूसरे को स्पेस दें और इतना विश्‍वास बनाएं कि पार्टनर बिना हिचके सब कुछ शेयर कर सके. हर बात पर टोकना, हर बात पर सवाल या हर बार यह अपेक्षा कि आप जैसा चाहें, पार्टनर वैसा ही करे और आपके अनुसार ही ढले… यह सोच ग़लत है. उसके अलग व्यक्तित्व को मानें और सम्मान दें.

गेम्स न खेलें, मैनुपुलेशन से बचें

बहुत से रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स भी आपको कहते मिलेंगे कि पावर गेम्स खेलें, ऐसा करें, तो पार्टनर कंट्रोल में रहेगा, वैसा करेंगे, तो दिन-रात आपको ही याद करेगा. ऐसा कभी न करें. अगर आप जान-बूझकर पार्टनर को इग्नोर कर रहे हैं, ताकि उनका अटेंशन पा सकें, तो यह ग़लत है. हो सकता है, थोड़े समय के लिए आपको पार्टनर का अटेंशन मिल जाए, लेकिन लंबे समय तक यह करेंगे, तो पार्टनर की दिलचस्पी आप में कम हो जाएगी. रिश्ते में ठंडापन व ग़लतफ़हमियां बढ़ेंगी.

पार्टनर की ख़ुशियों को भी सम्मान दें

भले ही आप एक-दूसरे से कितना ही प्यार करते हों, पर प्यार के साथ एक-दूसरे को सम्मान भी दें और ख़ासतौर से पार्टनर की ख़ुशियों का भी ख़्याल रखें. कभी-कभी अपनी ख़ुशियों को छोड़कर पार्टनर की ख़ुशी के लिए कुछ करने में बुराई नहीं. इससे आपके रिश्ते की इम्यूनिटी ही बढ़ेगी. पार्टनर को भी लगेगा कि आपको उनकी फ़िक्र है और जब उनकी बारी आएगी त्याग या समर्पण की, तो वो भी आपकी ख़ुशियों का ख़्याल रखने से पीछे नहीं हटेंगे. दूसरी तरफ़ पार्टनर की ख़ुशी व उसके सम्मान के लिए नकारात्मक बातों और चीज़ों पर से ध्यान हटाएं. जी हां, यदि पार्टनर की कोई आदत या बात आपको पसंद नहीं, तो बार-बार उसे टोकने या बदलने को कहने की बजाय उसे अवॉइड करें या फिर प्यार से अलग तरह से कहें. यह सोचें कि कोई भी परफेक्ट नहीं होता, आप भी नहीं हैं, तो फिर पार्टनर से इतने परफेक्शन की उम्मीद क्यों? बेहतर होगा पार्टनर की अच्छी आदतों और बातों को तवज्जो दें, उसकी प्रशंसा करें, उसे मोटिवेट करें. ये बातें आपके रिश्ते को इम्यून करेंगी.

मर्यादा तय करें

यह आप दोनों के व आपके रिश्ते के सम्मान को बनाए रखने के लिए भी ज़रूरी है. आप अपने पार्टनर को यह समझाएं कि उनकी किन बातों को आप स्वीकार कर सकते हैं और किन बातों को नहीं. पर यह बात झगड़े के दौरान न कहें. आपस में बैठकर बात करें. आराम से बोलें, आवाज़ का वॉल्यूम कम रखकर बात करें. ग़ुस्से में बात बिगड़ सकती है. एक बार पार्टनर समझ जाएंगे कि उन्हें क्या नहीं करना है, तो वो आगे से ध्यान रखेंगे.

अपनी ग़लती मानें

ग़लती किसी से भी हो सकती है. अगर आपकी ग़लती पकड़ी गई है या न भी पकड़ी गई हो, तो भी जहां आपको महसूस हो कि आप ग़लत हैं, उसे स्वीकार लें. बेवजह का ईगो रिश्तों को ख़त्म कर देता है. सॉरी बोलने में कोई छोटा नहीं हो जाता.

दिन की शुरुआत सकारात्मकता से करें

आपकी पॉज़िटिविटी पार्टनर को भी बढ़ावा देगी. सुबह-सुबह हड़बड़ाहट में ग़ुस्सा करने से काम नहीं संभलेगा. बेहतर होगा कि उन क्षणों को भी सकारात्मकता से स्वीकारें और धैर्य से मुस्कुराते हुए काम करें. इससे आप दोनों का ही मूड दिनभर रिफ्रेश रहेगा.

पार्टनर को इग्नोर न करें

भले ही आपके रिश्ते को कितना ही समय हो गया हो, पर इग्नोरेंस किसी को भी बर्दाश्त नहीं होगा. काम के बीच पार्टनर को न भूल जाएं. बीच-बीच में कॉल या मैसेज करके हालचाल या हल्की-फुल्की बातचीत करें. रोमांटिक बातें करें, छेड़छाड़ करें. यह डेली डोज़ आपको कनेक्टेड रखेगा.

सरप्राइज़ दें

यह ज़रूरी नहीं कि स्पेशल ओकेज़न पर ही सरप्राइज़ प्लान किया जाए, बल्कि सरप्राइज़ प्लान करके आप उस दिन को स्पेशल बना सकते हैं और अपने पार्टनर को स्पेशल फील करा सकते हैं. आप कोई गिफ्ट ले जाएं, जो आपका पार्टनर बहुत समय से लेना चाह रहा हो या आप मूवी टिकट्स ले आएं, डिनर प्लान करें… आप अपनी क्रिएटिविटी के अनुसार कोई भी सरप्राइज़ प्लान कर सकते हैं. उन बातों को याद करें या उनकी चर्चा करें, जो आपको एक-दूसरे में अच्छी लगती हैं: पुरानी या कोई नई याद, कुछ खट्टी-मीठी बातें, अपनी पहली मुलाक़ात या शादी का अल्बम… इनमें से कोई भी चीज़ आपके रिश्ते को इंस्टेंट फ्रेशनेस देती है. रिश्ते की इम्यूनिटी के लिए बहुत ज़रूरी है कि प्यारभरे ये डोज़ भी समय-समय पर एक-दूसरे को आप देते रहें.

माफ़ करना सीखें

पार्टनर की ग़लतियों पर बार-बार उसे शर्मिंदगी महसूस कराना रिश्ते को कमज़ोर करता है. बेहतर होगा पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ा जाए. माफ़ करना सीखें. हर किसी से ग़लती हो सकती है, ऐसे में माफ़ करने से ही रिश्ते बेहतर होते हैं, ग़लतियों को याद करके या याद दिलाकर रिश्तों को इम्यून नहीं किया जा सकता.

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Couple Goals
पार्टनर की पसंद को महत्व दें

कुछ चीज़ें जो आपके लिए उन्हें अच्छी लगती हों, वो करें, जैसे- उनकी पसंद का कलर पहनें, उनकी पसंद का टीवी प्रोग्राम उनके साथ देखें या उनकी पसंद का खाना बनाएं.

कुछ चीज़ें साथ-साथ प्लान करें

एक साथ वॉक पर जाएं, जॉगिंग करें या स्विमिंग, डांस क्लास आदि जॉइन करें. इससे साथ में क्वालिटी टाइम बिता सकेंगे और उन पलों को ज़्यादा एंजॉय कर सकेंगे. आप किचन में भी मिलकर कुछ स्पेशल बना सकते हैं.

स़िर्फ पार्टनर के लिए टाइम निकालें

आज काम जल्दी हो गया, इसलिए जल्दी घर आ गया/गई, आज आउटडोर मीटिंग कैंसल हो गई, तो समय से पहले घर पहुंच गए… इन कारणों के अलावा एक दिन ऐसा करें कि हाफ डे लें स़िर्फ अपने पार्टनर के लिए और उसे कहें कि तुम्हारी याद आ रही थी, इसलिए हाफ डे लेकर आ गया. अगर दोनों वर्किंग हैं, तो पार्टनर के साथ प्लान करें. लीव लेकर पूरा दिन घर पर अकेले एक-दूसरे के साथ बिताएं.

शॉर्ट हॉलीडेज़ प्लान करें

लंबी छुट्टी पर जाना संभव नहीं, कोई बात नहीं. वीकेंड पर एक-दो दिन की अतिरिक्त छुट्टियां लेकर आसपास ही कहीं रिज़ॉर्ट में जाएं. यह आपके रिश्ते को नई ताज़गी व ऊर्जा देगी.

बहुत सारे सवाल न करें

बात-बात पर सवाल या टोकना किसी को भी पसंद नहीं आता, ऐसे में यदि आपके मन में कुछ आशंकाएं हैं भी, तो समय आने पर उनका जवाब मांगें. एक साथ रोज़ाना ढेर सारे सवाल पार्टनर को आपसे दूर ले जाएंगे. उन्हें लगेगा कि आपको उन पर भरोसा ही नहीं है.

पार्टनर के परिवारवालों को भी सम्मान दें

अपने पैरेंट्स के लिए हम जो सम्मान चाहते हैं, वही सम्मान पार्टनर के पैरेंट्स को भी दें. इससे आप दोनों की बॉन्डिंग और बेहतर होगी. हमेशा घरवालों की शिकायत करने से बचें. अगर कोई समस्या है भी, तो आराम से बैठकर सुलझाने की कोशिश करें.

सेक्स लाइफ को रिफ्रेश करें

सेक्स को रूटीन न बनने दें. यह शादीशुदा ज़िंदगी का महत्वपूर्ण अंग है. इसे नज़रअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है. अपनी सेक्स लाइफ में ताज़गी बनाए रखने के लिए कुछ न कुछ नया ट्राई करते रहें. चाहें, तो जगह चेंज करके देखें, नई पोज़ीशन्स ट्राई करें. एक-दूसरे को हॉट मसाज दें. रूम का लुक चेंज करें.

हर बात को शिकायत के अंदाज़ में न कहें

किसी की भी लाइफ परफेक्ट नहीं होती, लेकिन छोटी-छोटी चीज़ों में ख़ुशियां ढूंढ़ी जा सकती हैं. आपके पास भले ही बड़ी गाड़ी न हो, पर प्यार करनेवाला पार्टनर तो है. हर चीज़ का सकारात्मक पहलू देखें और

बात-बात पर शिकायत न करें. न ही रोना रोते रहें कि मेरे पास ये नहीं है, मुझे ज़िंदगी में कुछ नहीं मिला… आदि.

इमोशनल ब्लैकमेलिंग से बचें

सेक्स के समय शर्त रखना या बच्चों के नाम पर इमोशनल ब्लैकमेल करना बंद कर दें. इससे भले ही पार्टनर उस व़क्त आपकी बात मान लेगा, लेकिन उसकी नज़रों में आपका सम्मान कम होता जाएगा और वो आपसे दूर जाने लगेगा. रिश्ते की इम्यूनिटी के लिए इस ग़लती को फ़ौरन सुधार लें.

– विजयलक्ष्मी

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