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न भूलें रिश्तों की मर्यादा (Set Healthy Boundaries For Happy Relationship)

Set Healthy Boundaries For Happy Relationship

हेल्दी रिश्ते की शुरुआत ही मानसम्मान और मर्यादा से होती है. किसी व्यक्ति का सलीके से किया गया व्यवहार ही हमें उसकी ओर आकर्षित करता है. जब तक रिश्ते (Set Healthy Boundaries For Happy Relationship) में मानमर्यादा बनी रहती है, तब तक रिश्ते मज़बूत व हेल्दी बने रहते हैं, लेकिन जब हम अपनी हद पार करने लगते हैं, तो रिश्तों में दरार आने लगती है. अगर आपके रिश्ते में आ गई है खटास, तो देखें कि कहीं आपने अपने रिश्तों की मर्यादा तो नहीं लांघी?

Set Healthy Boundaries For Happy Relationship

क्या है रिश्तों की मर्यादा?

सायकोथेरेपिस्ट डॉ. चित्रा मुंशी कहती हैं कि रिश्तों में बाउंड्रीज़ का मतलब किसी को कंट्रोल करना या बंदिशें लगाना नहीं, बल्कि ख़ुद को व अपने रिश्ते को सुरक्षित रखने के लिए एक दायरा बनाना है. दूसरे शब्दों में कहें, तो हर रिश्ते का मानसम्मान बनाए रखना ही मर्यादा है और अपने आप को मयार्दित रखना ही हर रिश्ते की कामयाबी का मूलमंत्र है.

क्यों ज़रूरी है रिश्तों में मर्यादा?

रिश्तों में बाउंड्रीज़, लक्ष्मणरेखा, मर्यादा या हद जो भी कह लें, रिश्ते की गरिमा को बनाए रखने के लिए ज़रूरी होती है.

इससे रिश्तों में प्यार व सम्मान बना रहता है.

परिवार के सभी लोग जब अपनीअपनी मर्यादा का ख़्याल रखते हैं, तो घर में सौहार्द का माहौल बना रहता है.

जब दूसरे आपकी इच्छाओं और पर्सनल स्पेस का ख़्याल रखते हैं, तो आप भी उनकी पर्सनल स्पेस का ख़्याल रखते हैं.

किसी के आत्मसम्मान को चोट नहीं पहुंचती.

कोई बेवजह दूसरों की सोच का शिकार नहीं होता.

रिश्तों में ग़लतफ़हमियां पैदा नहीं होतीं.

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तीन तरह की होती हैं रिश्तों की बाउंड्रीज़

फिज़िकल बाउंड्री: किसी से बात करते समय एक सेफ डिस्टेंस बनाए रखना ही फिज़िकल बाउंड्री है. कुछ लोग आदतन दूसरों को छूकर बात करते हैं, जो हर किसी को पसंद नहीं आता. ऐसे लोगों से बात करने से लोग कतराते हैं. कपल्स को भी बड़ों के सामने इस बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए, क्योंकि हो सकता है कि उससे बड़े असहज हो जाएं.

अगर कोई आपका बहुत क़रीबी भी है, फिर भी बात करते व़क्त फिज़िकली बहुत ज़्यादा क्लोज़ न जाएं.

हर किसी के साथ एक सेफ डिस्टेंस मेंटेन करें.

अगर आपको भी दूसरों को छूकर बात करने की आदत है, तो उसे सुधार लें.

इमोशनल बाउंड्री: हर रिश्ते का एक इमोशनल लेवल होता है. किसी भी रिश्ते में इतनी मर्यादा रखें कि वो आप पर इमोशनली हावी न हो सके.

अगर किसी की कही कोई बात आपको परेशान कर रही है, तो इसका मतलब है कि आपने उस व्यक्ति को इमोशनली ख़ुद पर बहुत ज़्यादा हावी कर लिया है.

हर कोई हर किसी के बारे में कुछ न कुछ कहता रहता है, इसलिए आपको उसके बारे में इतना नहीं सोचना चाहिए.

मज़ाक बनाने और गॉसिप के लिए लोग अक्सर उनको टारगेट करते हैं, जो इमोशनली कमज़ोर होते हैं. आपको अपनी इमोशनल बाउंड्री ख़ुद बनानी होगी.

पतिपत्नी को भी एकदूसरे की इस बाउंड्री का ख़्याल रखना चाहिए.

डिजिटल बाउंड्री: आजकल की डिजिटल लाइफ में डिजिटल बाउंड्री का सम्मान बहुत ज़रूरी हो गया है. अगर आप सोशल मीडिया पर हर बार बिना पूछे किसी को टैग करते हैं, चेक इन में उसे मेंशन करते हैं, तो ध्यान रखें कि आप उसकी डिजिटल बाउंड्री क्रॉस कर रहे हैं.

बिना किसी की मर्ज़ी के उसके मोबाइल में तांकझांक करना, इस मर्यादा को भंग करता है.

घरवाले या रिश्तेदार अपने मोबाइल में क्या रखते हैं, क्या देखते हैं यह जानने के लिए उनका मोबाइल चेक करना ग़लत है.

जो लोग अपनी फोटो डालकर अपने 20 दोस्तों को टैग कर देते हैं या भगवान की फोटो डालकर 50 लोगों को टैग कर देते हैं, डिजिटल बाउंड्री क्रॉस करनेवाले ऐसे दोस्तों को लोग अक्सर ब्लॉक कर देते हैं.

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पार्टनर्स परखें अपने रिश्ते की मर्यादा

हर रिश्ते की तरह पतिपत्नी के रिश्ते में भी मर्यादा बहुत मायने रखती है. जब पार्टनर्स एकदूसरे को फॉर ग्रांटेड लेने लगते हैं या एकदूसरे की भावनाओं को नज़रअंदाज़ करके स़िर्फ अपनी इच्छाओं की पूर्ति शुरू कर देते हैं, तब रिश्ते बिखरने लगते हैं, इसलिए ज़रूरी है कि हर कपल अपने रिश्ते को इस कसौटी पर परखे

क्या आप अपनी बात खुलकर व ईमानदारी के साथ पार्टनर से शेयर कर पाते हैं?

क्या आप एकदूसरे की बात सुनते हैं?

एकदूसरे की भावनाओं को सम्मान देते हैं?

एकदूसरे से प्यार व सम्मान से बात करते हैं?

क्या एकदूसरे को स्पेस देते हैं?

अपने पार्टनर की हॉबीज़, करियर और इच्छाओं का ख़्याल रखते हैं?

जीवन में आगे बढ़ने के लिए एकदूसरे को सपोर्ट करते हैं?

चाहे जो हो जाए, रिश्ते की मर्यादा का ख़्याल रखते हैं?

कुछ भी हो जाए, पार्टनर से अपशब्द या बुरा व्यवहार नहीं करते?

अगर ऊपर दिए गए ज़्यादातर सवालों के जवाब हांहैं, तो आपका रिश्ता हेल्दी है, लेकिन अगर आपका स्कोर कम है, तो आपको अपने रिश्ते की ओर ध्यान देने की ज़रूरत है.

काउंसलिंग सायकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ कहती हैं कि ज़रूरी नहीं कि हर बार रिश्तों में दरार या खटास का कारण मर्यादा का भंग होना ही हो, क्योंकि जो आपके लिए मर्यादा है, ज़रूरी नहीं सामनेवाले के लिए भी वही मर्यादा हो. दरअसल, हर किसी के लिए इसके मायने

अलगअलग होते हैं. अलगअलग परिवेश में पलेबढ़े होने के कारण पार्टनर्स के लिए भी इसके मायने अलग होते हैं, लेकिन कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान रखकर आप भी अपने रिश्ते की एलओसी को बनाए रख सकते हैं.

हैप्पी रिलेशनशिप टिप्स

पतिपत्नी के रिश्ते की मर्यादा की डोर उन दोनों के हाथ में होती है. अगर आप भी मर्यादा की इन लकीरों का पालन करें, तो आपका रिश्ता भी हमेशा मज़बूत बना रहेगा.

हंसीमज़ाक और शरारतें करें, पर दूसरों के सामने अपने पार्टनर का कभी मज़ाक न बनाएं.

मायके में या ससुराल में कभी भी पार्टनर को ताना न मारें.

अगर किसी ने आपसे पार्टनर की शिकायत की है, तो सबके सामने दोषी ठहराने की बजाय अकेले में बात कर सच्चाई जानने की कोशिश करें.

अगर आपको कोई ग़लतफ़हमी हो गई है, तो बैठकर बात करें, न कि कठघरे में खड़ा करें.

अगर पार्टनर से उम्मीद करते हैं कि वो अपनी सारी बातें शेयर करे, तो आपको भी उनसे कुछ नहीं छिपाना चाहिए.

पार्टनर अपनी इच्छाएं कभी न थोपें, चाहे वो पहननेओढ़ने या खानेपीने के मामले में ही क्यों न हों.

 रिश्ते में बहुत ज़्यादा जकड़न घुटन का कारण बनने लगती है, इसलिए पार्टनर को पर्याप्त स्पेस भी दें.

जब पतिपत्नी एकदूसरे का सम्मान करते हैं, तो बाकी लोग भी उनके रिश्ते को सम्मान की नज़र से देखते हैं.

किसी भी परिस्थिति में पार्टनर की बात को सुनने का धैर्य रखें. बिना पूरी बात सुने, कभी भी रिएक्ट न करें.

आप दोनों को ही अपनेअपने रिश्ते की मज़बूती के लिए प्यार, विश्‍वास और समर्पण को बनाए रखना होगा.

याद रखें कि प्यार का मतलब बंधन नहीं आज़ादी होता है, इसलिए अपने पार्टनर की प्राइवेसी का हमेशा ख़्याल रखें.

मर्यादा से जुड़ी ये सारी बातें अन्य रिश्तों में भी लागू होती हैं, चाहे वो भाईबहन हो, देवरभाभी, जीजासाली, मांबेटे या पितापुत्री.

अनीता सिंह

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Haridwar: श्रीदेवी की अस्थियां गंगा में विसर्जित, बोनी के साथ अनिल कपूर, मनीष मल्होत्रा भी मौजूद (Sridevi’s ashes immersed in Haridwar)

Sridevi's ashes immersed in Haridwar

 

Sridevi's ashes immersed in Haridwar

रामेश्वरम में अस्थि विसर्जन के बाद अब श्रीदेवी की अस्थियां गंगा में विसर्जित की गईं. पति बोनी कपूर के साथ श्री के देवर अनिल कपूर अस्थियां लेकर हरिद्वार पहुंचे थे. उनके साथ राजनेता अमर सिंह और फैशन डिज़ाइनर मनीष मल्होत्रा और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे. पूरे विधि-विधान से अस्थि विसर्जन की क्रिया संपन्न हुई.

कहा जा रहा है कि श्रीदेवी एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हरिद्वार में रुकी थीं और उन्होंने दोबारा हरिद्वार आने की जताई थी, लेकिन वो हरिद्वार नहीं आ पाई थीं. हिन्दू धर्म के अनुसार हरिद्वार में अस्थि विसर्जन मोक्ष के लिए और आत्मा की शांति के लिए ज़रूरी होता है.

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बच्चन परिवार ने पारंपरिक अन्दाज़ में मनाई होली (Bachchan Family Celebrates Holi In Traditional Way)

Bachchan Family, Celebrates Holi, Traditional Way

बच्चन परिवार ने पारंपरिक अन्दाज़ में मनाई होली (Bachchan Family Celebrates Holi In Traditional Way)

अमिताभ बच्चन ने पूरे परिवार के साथ होलिका दहन की परंपरा में हिस्सा लिया और साथ ही देशवासियों को भी होली की शुभकामनायें दीं… उन्होंने ट्विटर पर ये तस्वीरें share कीं और हर तस्वीर के साथ एक संदेश भी दिया.

ये celebration पूरे पारम्परिक अन्दाज़ में किया गया था, अमिताभ ने अपनी पोती आराध्य को भी आशीर्वाद दिया और गुझिया की पिक भी share की

आप  भी देखें ये तस्वीरें…

अमिताभ ने इस तरह इन तस्वीरों के साथ ये संदेश ट्वीट किया… T 2730 – the Holika has been burnt and the prayers done .. the ’tilak’ colours put .. and the special sweetmeat for the occasion ‘gujiya’ consumed ..

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सोशल मीडिया पर रिश्ते तलाशते लोग अंदर से होते हैं तन्हा…! (Relationship Alert: Social Media Makes You Feel Alone)

Social Media Makes You Feel Alone

Social Media Makes You Feel Alone
सोशल साइट्स ने हमारी ज़िंदगी बदलकर रख दी है, इसमें कोई दो राय नहीं है. हम अब आसानी से अपडेटेड रहते हैं, पुराने दोस्तों व दूर-दराज़ के रिश्तेदारों से कनेक्टेड रहते हैं, अपनी फीलिंग्स उनके साथ बांट सकते हैं… इस तरह से देखा जाए, तो सोशल साइट्स हमारे लिए किसी सोशल साइट्स ने हमारी ज़िंदगी बदलकर रख दी है, इसमें कोई दो राय नहीं है. हम अब आसानी से अपडेटेड रहते हैं, पुराने दोस्तों व दूर-दराज़ के रिश्तेदारों से कनेक्टेड रहते हैं, अपनी फीलिंग्स उनके साथ बांट सकते हैं… इस तरह से देखा जाए, तो सोशल साइट्स हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं. लेकिन जब हम इनके आदी होने लगें और जब यथार्थ की दुनिया को छोड़कर इस डिजिटल वर्ल्ड में ही अपनों को और अपने रिश्तों को तलाशने लगें, तब यह सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या हम इतने तन्हा हैं कि हमारे आसपास कोई है ही नहीं अपने सुख-दुख बांटने के लिए और हम ऐसे लोगों की तलाश सोशल साइट्स पर भी करने लगे हैं.

  • कई तरह की स्टडीज़ और रिसर्च यह बताते हैं कि सोशल साइट्स पर सीमा से अधिक समय बिताना एक तरह के एडिक्शन को जन्म देता है.
  • ये शोध यह भी बताते हैं कि जो लोग भीतर से तन्हा होते हैं, वो इस तरह के एडिक्शन के अधिक शिकार होते हैं.
  • वो अपना अकेलापन दूर करने के लिए ही चैटिंग का सहारा लेते हैं.
  • अक्सर इस तरह की चैटिंग के ज़रिए ही वो अपने लिए पार्टनर भी तलाशने लगते हैं.
  • हालांकि कुछ लोग ये चैटिंग फन के लिए करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे इसकी लत लगने लगती है और फिर वो सीरियस एडिक्शन में तब्दील होने लगती है.
  • यह एडिक्शन मस्तिष्क के उस हिस्से को एक्टिवेट करता है, जो कोकीन जैसे नशीले पदार्थ के एडिक्शन पर होता है. यही वजह है कि सोशल साइट्स से दूर रहने को एक तरह से लोग बहुत बड़ा त्याग या डिटॉक्सिफिकेशन मानते हैं.
  • दरअसल, यंगस्टर्स सोशल मीडिया में इस तरह से इंवॉल्व हो जाते हैं कि बाहरी दुनिया से कट जाते हैं. उन्हें वो डिजिटल दुनिया और उसके रिश्ते इतने आकर्षक लगते हैं कि अपनी असली दुनिया उन्हें बोरिंग लगने लगती है. यही वजह है कि जब कभी उन्हें डिजिटल वर्ल्ड से ब्रेक लेना पड़ता हो या फिर वहां उन्हें रिश्ते नहीं मिल रहे हों, तो उन्हें रियल वर्ल्ड और भी तन्हा लगने लगता है. उनमें निराशा, अवसाद और चिड़चिड़ापन पनपने लगता है. इसका असर यह होता है कि वो फिर उसी डिजिटल दुनिया का रुख करते हैं और अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए नए रिश्ते तलाशने लगते हैं.
  • यह एक चक्र जैसा है, जिसमें हमें पहले यह लगता है कि हम तन्हा हैं, तो सोशल मीडिया हमारी तन्हाई को दूर करने का सबसे कारगर साधन है, लेकिन जब हम इस चक्र में फंसने लगते हैं, तो महसूस होता है कि यह तन्हाई दूर करने का नहीं, बढ़ाने का साधन साबित हो रहा है.
  • यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि जो लोग सोशल साइट्स पर अधिक समय बिताते हैं, वो अधिक अकेलापन और अवसाद महसूस करते हैं, क्योंकि जितना अधिक वो ऑनलाइन इंटरएक्शन करते हैं, उतना ही उनका फेस टु फेस संपर्क लोगों से कम होता जाता है.
  • यानी लोग अपनी तन्हाई दूर करने के इरादे से सोशल वर्ल्ड में आते हैं और यह उनकी तन्हाई घटाने की बजाय बढ़ा देता है.
  • इसके अलावा, डिजिटल रिश्तों में सबसे बड़ा ख़तरा फ्रॉड या धोखे का भी होता है. आपको कोई भी आसानी से बेव़कूफ़ बना सकता है यहां.
  • अपनी पहचान छिपाकर आपसे लंबे समय तक दोस्ती रख सकता है, आपका फ़ायदा उठा सकता है. इसी तरह की एक घटना का ज़िक्र करती हैं मुंबई की प्रीति वर्मा (बदला हुआ नाम). प्रीति ने जो आपबीती सुनाई, वो हैरान करनेवाली थी. “मैं पहले तो बहुत अधिक सोशल मीडिया पर रहती ही नहीं थी. मेरे सभी दोस्त सोशल मीडिया पर काफ़ी एक्टिव थे और मैं अपनी ज़िंदगी में बहुत ही तन्हाई के दौर से गुज़र रही थी. मैंने सोचा, क्यों न मैं भी सोशल मीडिया पर किसी से दोस्ती कर लूं. धीरे-धीरे मुझे यहां अच्छा लगने लगा. मेरा ज़्यादा समय यहां गुज़रने लगा. मुझे नए दोस्त बनाने का शौक़ तो था ही, यहां नए-नए लोगों से बातचीत होती, उनके बारे में दिलचस्प बातें जानने को मिलतीं, तो मेरा रुझान इस तरफ़ ज़्यादा ही होने लगा. कुछ समय पहले मुझे एक लड़के की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई, उसका प्रोफाइल बेहद आकर्षक था. मैंने भी उसमें दिलचस्पी दिखाई. हम दोस्त बन गए, दोस्ती थोड़ी गहरी हुई, तो हमने अपने फोन नंबर्स एक्सचेंज किए. वो घंटों मुझसे फोन पर बात करता. मुझे भी अच्छा लगने लगा था. वो अपने वीडियोज़ और पिक्चर्स भेजता. पर कहीं न कहीं मुझे लगता था कि न जाने क्यों इस शख़्स की पर्सनैलिटी से इसकी बातें मैच नहीं करतीं. वो पिक्चर्स तो बहुत आकर्षक भेजता था, लेकिन उसकी बातें बहुत ही बचकानी लगती थीं, जैसे कोई टीनएजर बात कर रहा हो. इस तरह पूरा एक साल बीत गया. वो अक्सर मिलने की इच्छा ज़ाहिर करता. दूसरे शहर में रहने की वजह से मैं प्लान कर रही थी कि कैसे जाकर उससे मिलूं, क्योंकि मैं भी उससे मिलना चाहती थी.एक दिन मैं यूं ही यू ट्यूब पर वीडियोज़ देख रही थी, तो अचानक एक वीडियो पर मेरी नज़र गई. मैं हैरान रह गई. वो वीडियो एक पंजाबी मॉडल का था, जिसकी शक्ल मेरे उस दोस्त से हूबहू मिलती थी. मैंने डीटेल में उस मॉडल का प्रोफाइल खंगाला, तो मेरे पसीने छूट गए, ये अगर असली है, तो वो कौन है, जो इसकी पहचान के आधार पर मेरा दोस्त बना हुआ था? उसने नकली पिक्चर्स लगाकर, नाम बदलकर मुझसे दोस्ती की. मैंने उसे तुरंत फोन लगाकर सफ़ाई मांगी, तो वो डर गया, मैंने पुलिस कंप्लेन करने की बात कही, तो उसने मुझे ब्लॉक कर दिया. नंबर्स से लेकर सोशल मीडिया तक, सब जगह से वो अब गायब था. मैं चाहकर भी कुछ न कर सकी, बस यही सोचकर रूह कांप जाती है कि अगर मैं उससे मिलने चली गई होती, तो न जाने क्या होता? मैं ख़ुद को ठगा हुआ महसूस कर रही थी. मैं बस, यही कहना चाहती हूं कि जब भी सोशल मीडिया पर रिश्ते तलाशें, तो अच्छी तरह जांचें-परखें, वरना यह आपको और भी तन्हा कर देगा. कहां तो मैं अपनी तन्हाई दूर करने यहां आई थी, कहां मैं बेव़कूफ़ बन बैठी.”
  • यह अपने आप में अकेली घटना नहीं है, प्रीति की तरह ही बहुत से लड़के-लड़कियां अपनी तन्हाई को दूर करने के लिए सोशल मीडिया की शरण में आते हैं और वो इस कदर तन्हा होते हैं कि कोई दोस्त मिल जाने पर बिना जांचे-परखे आगे बढ़ने लगते हैं. जबकि सोशल मीडिया एक अच्छा प्लेटफॉर्म है हर किसी के लिए, लेकिन यहां आकर जल्दबाज़ी में रिश्ते ढूंढ़ना आपको भारी पड़ सकता है. बेहतर होगा सतर्क रहें, सावधान रहें.
  • रियल वर्ल्ड में अगर आप तन्हा हैं या आपका अभी-अभी ब्रेकअप हुआ है, तो थोड़ा सब्र करें, ख़ुद को समय दें. अपनी हॉबीज़ पर ध्यान दें और अपना मन लगाने के अन्य साधन भी तलाशें. अक्सर लोग ब्रेकअप के बाद सोशल मीडिया पर अधिक एक्टिव हो जाते हैं या फिर अपनी बोरिंग शादीशुदा लाइफ से हटकर ज़िंदगी में कुछ स्पाइस ऐड करने के इरादे से यहां आते हैं. शुरुआत में उन्हें सब कुछ बेहद आकर्षक लगता है, लेकिन इससे अपनी तन्हाई दूर करने का यह इरादा उन्हें भटका भी सकता है.
  • बेहतर होगा, तन्हाई को क्रिएटिविटी में बदलें. कुछ समय बाद तन्हाई का एहसास अपने आप कम होने लगेगा. सोशल मीडिया पर ज़रूर जाएं, लेकिन एक निश्‍चित सीमा में रहकर, सावधानी से ही किसी से संपर्क साधें और अपने नंबर्स शेयर करें.

ब्रह्मानंद शर्मा

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ख़ुशहाल ससुराल के लिए अपनाएं ये 19 हैप्पी टिप्स (19 Happy Tips For NewlyWeds)

Happy Tips For NewlyWeds
नए रिश्तों से भरे-पूरे परिवार को ख़ुश रखने की ज़िम्मेदारी नई बहू पर होती है. सभी की उम्मीदों पर ख़री उतर पाऊंगी या नहीं, जैसे कई सवाल उसके मन में उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं. दुल्हन की इन्हीं उलझनों को सुलझाने (Happy Tips For NewlyWeds) के लिए हमने बात की मैरिज काउंसलर ज़ीनत भारद्वाज से.

Happy Tips For NewlyWeds

हैप्पी टिप्स नई दुल्हन के लिए (Happy Tips For NewlyWeds)

1. बच्चों को दें भरपूर प्यार

सबसे पहले परिवार के बच्चों से दोस्ती करें. उनकी फेवरेट चीज़ें देकर उन्हें ख़ुश रखें और ढेर सारा प्यार करें. बच्चे ख़ुश रहेंगे, तो घर के बाकी सदस्य अपने आप ख़ुश रहेंगे.

2. बड़े-बुज़ुर्गों के लिए बच्चे बन जाएं

घर के बड़े-बुज़ुर्गों के साथ थोड़ी देर बैठें, उनसे बातें करें. उनसे बात करते समय बहुत ज़्यादा मैच्योरिटी की बजाय थोड़ा बचपना दिखाएं और अपनी शरारतों के बारे में उन्हें बताएं, उन्हें बहुत अच्छा लगेगा.

3. हमउम्र को बनाएं दोस्त

ननद, देवर, रिश्तेदारों के बच्चे, जो भी आपके हमउम्र हैं, उनसे दोस्तों की तरह ही व्यवहार करें. बहुत ज़्यादा दिखावा करने की बजाय, जैसी हैं, वैसी ही रहें. याद रखें, आपकी इन्हीं ख़ूबियों के कारण आपके ससुरालवाले आपको पसंद करते हैं.

4. हर व़क्त हो चेहरे पर मुस्कान

हंसता हुआ चेहरा किसी भी उदास चेहरे को मुस्कुराने पर मजबूर कर देता है. आपके चेहरे की मुस्कान देखकर परिवार के हर सदस्य का चेहरा खिल उठेगा.

5. रिश्तेदारों को घरवालों जैसा प्यार दें

शादी में दूर-दूर के रिश्तेदार इकट्ठा होते हैं. उनसे परिवार के सदस्यों जैसा व्यवहार करें. रिश्तेदारों को यह बहुत अच्छा लगता है कि नई बहू उनसे अजनबियों जैसा व्यवहार नहीं कर रही.

6. नए घर की ख़ुशहाली की ज़िम्मेदारी आपकी है

आपको यह समझना होगा कि आपकी शादी स़िर्फ एक पुरुष से नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार से हुई है. इसलिए स़िर्फ पति ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी आपकी है.

7. आपका ख़ुश रहना ख़ुद आपके हाथ में है

ख़ुशियां आपको अपनी शादी से मिली हैं, उन्हें ताउम्र बनाए रखना आपके ही हाथ में है. आपकी ही तरह आपके ससुराल वाले भी काफ़ी दुविधा में होंगे कि नई दुल्हन उन्हें दिल से अपनाएगी या नहीं. इसलिए अपने नए घर को प्यार और ख़ुशियों से भर दें. सास-ससुर को माता-पिता मानें, इससे आप भी ख़ुश रहेंगी और आपके ससुरालवाले भी.

8. हर पल को एंजॉय करें

भविष्य की चिंता छोड़कर इन सुनहरे पलों को एंजॉय करें. परिवार को संभालना, ज़िम्मेदारियां पूरी करना, सभी की उम्मीदों पर खरी उतरना, तो उम्रभर लगा रहेगा. फ़िलहाल जो व़क्त है, उसे एंजॉय करें और ख़ुद के साथ-साथ दूसरों को भी ख़ुश रखें.

9. सुपरवुमन बनने की कोशिश न करें

नई बहू के लिए यह समझना बहुत ज़रूरी है कि वह उतनी ही ज़िम्मेदारियां उठाए, जितना वह निभा सकती है. सारी ज़िम्मेदारियां लेकर चिड़चिड़ी होने की बजाय परिवार में बांटना सीखें. सुपरवुमन बनने के चक्कर में अपनी सेहत की दुश्मन न बनें.

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Happy Tips For NewlyWeds

कुछ टिप्स दूल्हे राजा के लिए भी (Happy Tips For NewlyWeds)

10. नई-नवेली दुल्हन को इस नए माहौल में सहज महसूस करवाना आपका फ़र्ज़ है. उसने आंखों में कई सपने संजो रखे हैं, जिन्हें वो आपके साथ पूरा करना चाहती है. उसकी हर छोटी-बड़ी ख़ुशियों का ध्यान रखना अब आपकी ज़िम्मेदारी है.

11. पत्नी को पत्नी न समझकर दोस्त समझें. उससे कुछ दुराव-छिपाव न करें, जो भी है, खुले दिल से उसे बताएं. ग सभी के दिलों में अपनी जगह बनाने के लिए उसे हर व़क्त आपकी ज़रूरत पड़ेगी. उसका सपोर्ट सिस्टम बनकर उसकी मदद करें.

12. कमियां हर किसी में होती हैं, इसलिए उसकी अच्छाइयों को देखें और परिवारवालों के सामने उन्हें दिखाने की कोशिश करें.

13. उसकी छोटी-छोटी ग़लतियों को नज़रअंदाज़ करें, फ़िर देखें कि कैसे आपकी शादी दूसरों के लिए एक उदाहरण बन सकती है.

14. ससुराल में अपनी पत्नी के लिए एक सम्माननीय स्थान बनाना आपका काम है. आप जिस नज़र से अपनी पत्नी को देखेंगे, जिस तरह उसके साथ व्यवहार करेंगे, परिवार के बाकी सदस्य भी वही फॉलो करेंगे.

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Happy Tips For NewlyWeds

ससुरालवाले भी समझें (Happy Tips For NewlyWeds)

15. बहू को बेटी कहने भर से वह बेटी नहीं हो जाती, उसके साथ बेटी जैसा व्यवहार भी करना होता है.

16. जो छूट और आज़ादी आप अपनी बेटी को देते थे, वही बहू को भी दें. बहू का टैग लगाकर रिश्ते को बोझिल न बनाएं.

17. अगर आप अपनी बहू को भरपूर प्यार और अपनापन देंगे, तो वह भी आपकी और आपके बेटे की ज़िंदगी को ख़ुशियों से भरने में कोई कमी नहीं रखेगी.

18. घर के बड़े होने के नाते छोटों के लिए प्रेरणा स्रोत व उदाहरण बनें. अगर आप अपनी पत्नी की इज़्ज़त करेंगे, तो बेटा कभी भी अपनी पत्नी की बेइज़्ज़ती नहीं करेगा.

19. छोटा-बड़ा कोई भी निर्णय लेते समय बहू की राय ज़रूर मांगें. इससे उसका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा और परिवार के लिए बेहतर सोच की उसमें भावना बढ़ेगी.

– अनीता सिंह

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Wedding Bells! ढेर सारे लगेज के साथ अनुष्का हुईं मुंबई से स्विट्ज़रलैंड के लिए रवाना, विराट ने भी दिल्ली एयरपोर्ट से पकड़ी फ्लाइट (Anushka Sharma And Virat Kohli Leaves For Switzerland)

Anushka Sharma, Virat Kohli, Leaves For Switzerland

Anushka Sharma, Virat Kohli, Leaves For Switzerland

विराट कोहली (Virat Kohli) और अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) की शादी की ख़बरें इन दिनों सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. हर कोई जानना चाहता है कि अनुष्का और विराट कब शादी करेंगे. ख़बरें हैं कि दोनों 9 से 12 दिसंबर के बीच इटली के मिलान शहर में शादी करने वाले हैं. हालांकि अनुष्का के प्रवक्ता ने बताया कि ये सारी ख़बरें अफवाह हैं और अनुष्का शादी नहीं कर रही हैं. लेकिन इन ख़बरों के बीच जब अनुष्का को परिवार के साथ मुंबई एयरपोर्ट पर जब देखा गया तो एक बार फिर विराट और अनुष्का की शादी की ख़बरों ने रफ़्तार पकड़ ली. अनुष्का इस बार ढेर सारे लगेज के साथ एयरपोर्ट पर देखी गईं.

Anushka Sharma, Virat Kohli, Leaves For Switzerland Anushka Sharma, Virat Kohli, Leaves For Switzerland

अनुष्का के साथ उनके पिता अजय कुमार शर्मा, मम्मी आशिमा शर्मा और भाई करणेश शर्मा स्विट्ज़रलैंड के लिए रवाना हो गए हैं.Anushka Sharma, Virat Kohli, Leaves For Switzerland

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Anushka Sharma, Virat Kohli, Leaves For Switzerland Anushka Sharma, Virat Kohli, Leaves For Switzerland

ख़बरें हैं कि दोनों की शादी में केवल करीबी दोस्त और परिवार ही शामिल होंगे. मुंबई में 21 दिसंबर को रिसेप्शन होने की ख़बरें भी आ रही हैं. अब इन ख़बरों में कितनी सच्चाई है ये तो वक़्त आने पर ही पता चलेगा.

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आख़िर क्यों बनते हैं अमर्यादित रिश्ते? (Why Do We Have Immoral Relationships In Our Society?)

extramarital affairs

हर रिश्ते की अपनी एक मर्यादा होती है, पर जब कोई रिश्ते की मर्यादा को लांघ देता है और उस रिश्ते को तार-तार कर देता है, तो ऐसे रिश्ते अपनी गरिमा को ही नहीं, विश्‍वास को भी खो बैठते हैैं. आख़िर क्यों बन जाते हैं ऐसे अमर्यादित रिश्ते (Extramarital Affairs)? आइए जानते हैं.में आए दिन अख़बार-टीवी पर पढ़ने-देखने को मिलते हैं कि भाभी-देवर के अनैतिक रिश्ते… अपनी ही भतीजी के साथ चाचा के संबंध… दामाद ने सास के साथ भागकर शादी कर ली… ससुर बहू के साथ बरसों से रिलेशन में है… भतीजे-बुआ समाज को दरकिनार कर लीव इन में रह रहे हैं… ऐसे में दिल में यही ख़्याल आता है कि कहां जा रहा है समाज…? क्या भाई-बहन, माता-पिता के पवित्र रिश्ते भी बेमानी होते जा रहे हैं? ऐसे कई सवाल मन में उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं. इस सिलसिले में हमने सायकोलॉजिस्ट परमिंदर निज्जर से बात की. आइए, इस पर एक नज़र डालते हैं. उनके अनुसार, रिश्तों के कलंकित होने का कोई एक कारण नहीं होता, बल्कि बहुत-सी छोटी-छोटी बातें होती हैं, जो सोसायटी में ऐसे रिश्ते को जन्म देती हैं.

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– फास्ट लाइफ इसका सबसे बड़ा कारण है. जहां हर कोई सब कुछ जल्दी और शॉर्टकट में चाह रहा है. ऐसे में सही-ग़लत के बारे में सोचने का वक़्त ही नहीं मिलता.

– इट्स माई लाइफ का फंडा भी लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है. हर कोई अपनी ज़िंदगी को अपने हिसाब से ही जीना चाहता है, जिसमें उसे किसी भी तरह की दख़लअंदाज़ी पसंद नहीं.

– कई केसेस में देखा गया है कि वे क़रीबी रिश्ते, जो अमर्यादित क़दम उठाते हैं, उनकी वजह उस शख़्स से गहरे तौर पर प्रभावित होना भी है.

– जैसे चाचा को अपनी भतीजी में वे सभी ख़ूबियां दिखाई देती हैं, जो जीवनसाथी में चाहिए होती हैं. और जब वो ख़ासियत कहीं नहीं मिलतीं, तो वे इस रिश्ते में ही बंधकर आगे बढ़ने से नहीं हिचकिचाते.

– बचपन से लड़की ही नहीं, लड़कों के भी अपने रोल मॉडल होते हैं. जब वो उन्हें अपनी सास, चाची, बुआ आदि में दिखते हैं. तब वे सब ऊंच-नीच की परवाह किए बगैर इस रिश्ते को थाम लेते हैं.

– संयुक्त परिवार का टूटना भी इन रिश्तों के पनपने का बड़ा कारण है, क्योंकि जब सब साथ रहते थे, तब हर रिश्ते में अपनापन, संस्कार, उसकी मर्यादा का निर्वाह बचपन से ही होता था. तब ऐसी ग़लती कम ही होती थी.

– पैरेंट्स की बिज़ी लाइफ भी ऐसे रिश्ते के लिए माहौल प्रदान करती है. उस पर पति-पत्नी दोनों ही अति व्यस्त व कामकाजी हैं, तो वे बच्चों को बहुत कम समय ही दे पाते हैं, जिससे उनके भटकने और बिगड़ने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं.

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रिश्तों की अहमियत को समझें…

– हम चाहे कितने भी मॉडर्न हो जाएं, पर हर रिश्ते की मर्यादा और मापदंड ज्यों का त्यों बना रहेगा. इस बात को समझें और हर रिश्ते को सम्मान दें.

– अरेंज मैरिज हो या लव मैरिज उसकी अपनी ख़ूबसूरती व सामाजिक स्वीकृति होती है. इससे अलग रिश्ते ग़लत ही होते हैं.ू

– अमर्यादित रिश्ते न जाने कितने डर, शंका-आशंका, अस्थिरता को पैदा करते हैं.

– सामाजिक बहिष्कार और अपनों से दूरियां जीवन को हाशिए पर ले आती हैं.

– ऐसे रिश्तों का अंत अक्सर आत्महत्या, हत्या या फिर मानसिक विक्षिप्तता के रूप में होता है.

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दूर रहना ही समाधान…

– तमाम केसेस को देखते हुए मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे रिश्ते से दूर रहना ही इसका समाधान है.  ू

– यूं तो जीवन में हर किसी के क़दम कभी न कभी डगमगाते ही हैं, पर ऐसे समय में अपनों का साथ, सही काउंसलिंग, धैर्य आदि द्वारा इससे उबरा जा सकता है.

– जब कभी आपको लगे कि आप किसी अमर्यादित रिश्ते की तरफ़ झुक रहे हैं, तब आत्मविश्‍लेषण करें.

– अपने रिश्ते को रिवाइव करें. पार्टनर के साथ कुछ दिन के लिए कहीं घूमने निकल जाएं.

– शादी के दिनों को, जीवनसाथी के साथ बिताए ख़ूबसूरत लम्हों को तरोताज़ा करें.

– पार्टनर से दूर होने के कारणों को ढूंढ़ें और उन्हें सुलझाने की कोशिश करें.

– अपने किसी ख़ास दोस्त/सहेली से सलाह लें. अपनी दुविधा को बताएं.

– रिश्ते जीने का संबल होने चाहिए, न कि हर पल डर व हीनभावना का कारण.

– ख़ुद को अपने किसी शौक़ में इन्वॉल्व करें.

– आपके रिश्ते आपके बच्चों और बड़ों के लिए रोल मॉडल की तरह होते हैं. ये बात हमेशा याद रखें.

– घर-परिवार, बच्चे से जुड़ी अपनी ज़िम्मेदारियों को नए सिरे से उठाएं और ख़ुद को उनसे जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करें.

– आंकड़ों के अनुसार, अमर्यादित रिश्तों का आकर्षण बस जुनून या फिर एक निश्‍चित सीमा तक रहता है. जब वो हैंगओवर उतरता है, तब सिवाय दुख, क्षोभ, पछतावे के कुछ नहीं रहता.

– ऊषा गुप्ता

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समझदारी की सेल्फी से सुधारें बिगड़े रिश्तों की तस्वीर (Smart Ways To Get Your Relationship On Track)

Relationship On Track

चल बेटा सेल्फी ले ले रे… जी हां, ज़माना सेल्फी का है. हम ख़ुद को कैमरे में कैद करने का एक मौक़ा भी नहीं चूकते. हमारी पूरी कोशिश होती है कि हर तस्वीर में हम अच्छे दिखें. तो चलिए, हम भी आपसे सेल्फी लेने के लिए कहते हैं, पर यह सेल्फी होगी आपके व्यवहार की. कितना अच्छा होता अगर कोई ऐसा कैमरा भी होता, जो हमारी सेल्फी में हमारी अंदरूनी ख़ूबसूरती दिखाता या हमारी गलतियां भी दिखाता. आप शायद समझ ही गए होंगे कि यहां बात हो रही है आत्मविश्‍लेषण की.

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क्यों ज़रूरी है समझदारी की सेल्फी?

अमूमन हमारे जितने मन-मुटाव होते हैं, अधिकतर में हम दूसरों पर सारा दोष मढ़ कर बड़ी आसानी से आगे बढ़ जाते हैं. लेकिन आगे बढ़ते समय हम यह भूल जाते हैं कि कई सारे रिश्ते पीछे ही छूट गए. हमें ऐसा लगता है कि हमें इन रिश्तों की, सगे-संबंधियों की कोई ज़रूरत ही नहीं, पर क्या आप जानते हैं कि आपकी यही सोच आपकी सबसे बड़ी ग़लती है. और ना स़िर्फ ग़लती है, बल्कि समाज के लिए यह सोच बहुत बड़ा ख़तरा भी है, क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है.

रिश्तों से अपने आपको अलग कर लेना या उनसे दूर जाना हमारे सामाजिक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. तो यह तो तय है कि रिश्तों को सहेजना बहुत ही आवश्यक है, तो क्यों ना रिश्तों की इस तस्वीर को सुंदर बनाएं.

आजकल किताबी ज्ञान की हम में कोई कमी नहीं, पर याद रखिए किताबें समझदारी नहीं बांटतीं, इसके लिए हमारे अंतर्मन का जागृत होना ज़रूरी है. लेकिन इसे जागृत किया कैसे जाए, यह बहुत आसान नहीं, पर हां मुश्किल भी नहीं. इसके लिए आपको किसी और को नहीं, बल्कि ख़ुद को पहचानने की ज़रूरत है. साथ ही यह कोई एक दिवसीय कार्यक्रम ना होकर निरंतर प्रक्रिया है. आपको बस, करना इतना है कि रोज़ अपनी एक सेल्फी
खींचनी है और यह सेल्फी आप कैसे और कौन-से कैमरे से खीचेंगे, यह हम आपको बताएंगे.

कैसे खींचें समझदारी से सेल्फी?

सच्चाई की फ्लैश लाइट चमकाएं

सच्चाई बहुत ज़रूरी है, क्योंकि झूठ आपको कमज़ोर बनाता है. झूठा अहंकार आपको बार-बार झूठ बोलने पर मजबूर करेगा. इसलिए जब भी किसी से बात करें, तो अपना सच के फ्लैशवाला कैमरा साथ ले जाना ना भूलें. सच बोलना आपको ताक़त देगा. जब कभी आप झूठ का सहारा लेने की कोशिश करें, तो अपने आपको रोक लें. यह स़िर्फ आप कर सकते हैं, क्योंकि केवल आप ही जानते हैं कि आप कब झूठ का सहारा ले रहे हैं. इसके लिए आप ख़ुद को एक छोटी-सी चुनौती भी दे सकते हैं. सोने से पहले किसी काग़ज़ पर दिनभर में आपके द्वारा बोले छोटे से छोटे झूठ की ़फेहरिस्त बनाएं और अगले दिन पिछले दिन से कम झूठ बोलने की कोशिश करें.

अपनी तस्वीर में लाएं अच्छाई की ब्राइटनेस

बेवजह की जलन, दूसरों की नाकामयाबी में ख़ुश होना… ये सभी चीज़ें आपकी अच्छाई को ख़त्म करती है. इस तरह की भावनाएं आपके समझदारी के आईने को धूमिल कर सकती हैं. ये सभी भावनाएं ना स़िर्फ आपके रिश्ते को प्रभावित करती हैं, बल्कि आपके
सोचने-समझने की क्षमता को कमज़ोर करती हैं. जब आपकी अच्छाई चमकेगी, तो आपके अंतर्मन की तस्वीर भी उजली-उजली होगी.
इसके लिए भी एक काम किया जा सकता है. रोज़ कम से कम एक अच्छा काम करें, जैसे- बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद.

दूर करें शिकायतों की उदासी

अपनी सेल्फी में यह ज़रूर ध्यान से देखें कि कहीं आप हमेशा जीवन से शिकायतें तो नहीं करते रहते. जिसे अपने जीवन से हमेशा स़िर्फ शिकायतें ही होती हैं, उसका ख़ुश रहना असंभव है. शिकायतों पर ध्यान केंद्रित करने से अच्छा है कि आप उन उपायों पर ध्यान दें, जिनसे शिकायतों को दूर किया जा सकता है. इसके अलावा यह ध्यान में रखें कि कुछ भी परफेक्ट नहीं होता. अपने जीवन को कुछ कमियों के साथ स्वीकार करें.

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खींचें हाई डेफिनेशन तस्वीर

जब समझदारी के कैमरे से सेल्फी लेनी है, तो कोशिश करें कि आपकी तस्वीर हाई डेफिनेशन हो यानी छोटी-छोटी बातों में ना फंसें. यही छोटी बातें हमें छोटा बना देती हैं. अपने जीने के स्तर को ऊंचा उठाएं. झगड़े या छोटी-मोटी नोंक-झोंक, मान-अपमान इन चीज़ों से ऊपर उठकर सोचें. अगर यह छोटी बातें तस्वीर से चली जाएं, तो ख़ुशियों के रंग निखरकर आएंगे.

कहीं तस्वीर में शिकन ना आ जाए

अगर आप जल्दी किसी को माफ़ नहीं कर सकते हैं या किसी बुरी घटना को जल्दी भूल नहीं सकते, तो संभल जाएं, आपकी सेल्फी की ख़ूबसूरती ख़तरे में है. तो करना बस इतना है कि जल्दी से अपनी समझदारी के कैमरे को चार्ज करिए और अपने चेहरे पर आई इस शिकन को मिटा दीजिए. दरअसल, दूसरों को माफ़ करना और कुछ क़िस्से-कहानियों को भूल जाना किसी और के लिए नहीं, बल्कि आपके अपने मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है. अंग्रेज़ी में कहते हैं ना ‘फॉरगेट एंड फॉरगिव’ ये चीज़ें ना स़िर्फ आपको ऊपर उठाती हैं, बल्कि कई सारे रिश्तों को फिर से संवारने का एक और मौक़ा भी देती हैं.

माफ़ी मांग लें

जिस तरह माफ़ करके आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है, उसी तरह अपनी ग़लती होने पर या कभी-कभी स़िर्फ परिस्थितियों को संभालने के लिए माफ़ी मांगना ज़रूरी है. माफी मांगने को अपने अहम् के साथ ना जोड़ें यानी माफ़ी मांगने से आप छोटे नहीं होते.

संवार लें बिगड़ी हुई तस्वीर

अगर इतनी जद्दोज़ेहद के बाद भी सेल्फी बिगड़ ही जाए, तो उसे वैसा ही मत छोड़ें, बल्कि अपनी समझदारी से उसे ठीक कर लें. कई बार ऐसा होता है कि लाख संभालने के बावजूद कुछ रिश्ते हाथ से फिसलने लगते हैं. ना चाहते हुए भी हममें वह चीज़ें आ जाती हैं, जो हमारे व्यक्तित्व को ख़राब करती हैं. अगर ऐसा होता भी है, तो वहीं पर रुककर पहले आत्मविश्‍लेषण करें. अपने स्वभाव की बुरी आदतों को दूर करने की कोशिश करें और फिर आगे बढ़ें. इस सेल्फी में आपको ख़ूबसूरत तो दिखना है, पर बाहरी मेकअप से नहीं, बल्कि प्राकृतिक निखार से. याद रखिए कि आपको तस्वीर में सुंदर कैमरा या तस्वीर खींचनेवाला नहीं बनाता, बल्कि आप ख़ुुद बनाते हैं. कहने का तात्पर्य यह है कि जब आप अपने जीवन में ख़ुश ना हों, तो किसी और पर दोष मढ़ने से पहले एक बार ख़ुद को परख लें.

– विजया कठाले निबंधे

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इन 9 बेवजह के कारणों से भी होते हैं तलाक़ (9 Weird Reasons People Filed For Divorce)

Weird Reasons People Filed For Divorce

कभी-कभी लगता है कि बदलते दौर में रिश्तों की डोर कुछ ज़्यादा ही नाज़ुक हो चली है, तभी तो छोटी-छोटी बातें भी गृहस्थी के मज़बूत बंधन को तिनके-सा बिखेर रही हैं. कभी नासमझी, कभी ज़िद, कभी ग़ुस्से, तो कभी अहं की तुष्टि के लिए किए गए फैसले दांपत्य जीवन को बड़ी आसानी से ख़त्म कर रहे हैं. तलाक़ के बढ़ते मामले समाज के लिए गंभीर स्थिति हैं, पर क्या तलाक़ (Divorce) भी उतने ही गंभीर मुद्दों पर लिए जा रहे हैं? यहां हम कुछ ऐसे ही मामलों के बारे में बता रहे हैं, जहां तलाक़ के कारण बेवजह (Weird Reasons People Filed For Divorce) ही थे.

Weird Reasons People Filed For Divorce

तलाक़ से जुड़े अजीबो-ग़रीब मामले

हमारे देश में 10 साल पहले जहां 1000 शादियों में एक तलाक़ का मामला सामने आता था, वही आंकड़ा आज बढ़कर 13 हो गया है, जो यक़ीनन अगले साल और बढ़ेगा. पिछले कुछ सालों में यह आंकड़ा इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रहा है? इन शादियों के टूटने के क्या कारण हैं? क्या सभी रिश्ते शोषण और अत्याचार की बलि चढ़ रहे हैं या फिर कुछ बेवजह के कारणों से भी शादियां टूट रही हैं. सर्वे में पता चला है कि हाल ही में तलाक़ से जुड़े कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें कुछ अजीबो-ग़रीब कारणों से जहां कुछ रिश्ते टूट गए, तो कई टूटते-टूटते बचे. आइए जानें, क्या हैं ये कारण और क्यों बढ़ रहे हैं तलाक़ के मामले?

चेहरे के मुंहासे व फोड़े बने तलाक़ का कारण

मामला 1998 का है, जब देश में ज़्यादातर शादियां अरेंज होती थीं और शादी से पहले लड़का-लड़की एक-दूसरे को देख भी नहीं पाते थे. शादी के बाद पत्नी के चेहरे पर मुंहासे देखकर पति को ऐसा सदमा लगा कि उसने तलाक़ के लिए कोर्ट में अर्ज़ी दाख़िल कर दी. पति का तर्क था कि पत्नी के मुंहासों के कारण वह उसके प्रति आकर्षित नहीं हो पाता, जिससे उनके बीच शारीरिक संबंध भी नहीं बन पाए. ऐसे में इस शादी को ज़बर्दस्ती बनाए रखना उसके साथ ‘क्रुएल्टी’ है. कोर्ट ने माना कि पत्नी के लिए यह तकलीफ़देह है कि उसके मुंहासे ठीक नहीं हो रहे, पर पति के लिए भी यह किसी सदमे से कम नहीं, इसलिए 2002 में उन्हें तलाक़ मिल गया.

मोटापे के कारण पार्टीज़ में नहीं ले जा सकता

मामला उत्तर भारत के एक शहर का है, जहां एमएनसी में काम करनेवाले टॉप एक्ज़ीक्यूटिव ने अपनी पत्नी से इस बात पर तलाक़ की मांग की कि वह बहुत मोटी है. पति का तर्क था कि इतनी बड़ी पोस्ट पर होने के कारण उसे अक्सर सोशल पार्टीज़ में जाना पड़ता था, जहां अपनी पत्नी के मोटापे के कारण उसे काफ़ी शर्मिंदगी उठानी पड़ती थी, क्योंकि उनकी जोड़ी बहुत बेमेल दिखती थी. अच्छी-ख़ासी सैलरी, शानो-शौक़त के बावजूद वह ख़ुश नहीं था. उसने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि पत्नी का वज़न कम कराने की उसकी तमाम कोशिशें नाकामयाब रहीं. शुक्र है, तलाक़ मिलना इतना भी आसान नहीं, वरना लोग न जाने किन कारणों से तलाक़ की मांग करते.

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मुंह की बदबू और खर्राटों ने पहुंचाया कोर्ट

हाल ही में गुड़गांव के एमएनसी में काम करनेवाली दो लड़कियों ने पति के मुंह की बदबू और खर्राटों से परेशान होकर तलाक़ लेने का ़फैसला लिया. अपर-मिडल क्लास की इन लड़कियों के तर्क थे कि पति की सांस की बदबू के कारण उनकी सेक्स लाइफ बुरी तरह प्रभावित हुई थी, साथ ही रात में उनके खर्राटों ने उनका सुख-चैन छीन लिया था. हालांकि बाद में मैरिज काउंसलर्स के समझाने पर दोनों ने तलाक़ के पेपर्स वापस ले लिए. जहां यह पूरा मामला अपने आप में अजीबो-ग़रीब है, वहीं सभी के लिए एक सबक भी है कि अपने साथ-साथ अपने पार्टनर की ज़रूरतों और भावनाओं का हमेशा ख़्याल रखें.

मोदी सपोर्टर बनाम केजरीवाल सपोर्टर

मामला 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान गाज़ियाबाद का है. 2013 में अरेंज मैरिज करनेवाले आईटी प्रोफेशनल पति-पत्नी की ज़िंदगी काफ़ी ख़ुशगवार गुज़र रही थी, पर लोकसभा चुनाव ने सब बिगाड़ दिया. जहां पति नरेंद्र मोदी का बहुत बड़ा फैन था, वहीं पत्नी आम आदमी पार्टी की सपोर्टर. चुनावों में बीजेपी की ज़बर्दस्त जीत के बाद पति अक्सर पत्नी को ताने मारने लगा था, जिससे उनमें काफ़ी झगड़े होने लगे. नतीज़ा दो महीने बाद ही दोनों ने तलाक़ ले लिया.

शॉपिंग और पार्टी भी बन जाते हैं कारण

यह मामला एक ऐसे कपल का है, जिन्होंने कई सालों तक लिव इन में रहने के बाद शादी की. देश के मेट्रो शहर में रहनेवाले इस कपल ने शादी के 4 सालों बाद आपसी सहमति से तलाक़ ले लिया. जहां पत्नी ने पति का साथ में शॉपिंग न करना तलाक़ का कारण बताया, वहीं पति ने पार्टीज़ में साथ न चलने को बताया था वजह.

बड़े घर की बेटी

आज भी कुछ लड़कियां शादी को लेकर प्रैक्टिकल अप्रोच नहीं रख पातीं, जिससे उनकी शादी टूटने के कगार पर पहुंच जाती है. ऐसा ही कुछ इस मामले में भी देखने को मिला. शादी के बाद जब लड़की ने देखा कि पति का घर उसके घर से छोटा है, तो वह अलग घर में शिफ्ट होने की मांग करने लगी, पर जब पति ने उसकी मांग पूरी नहीं कि तो वह तलाक़ के लिए कोर्ट पहुंच गई. पत्नी का तर्क था कि वह अपने लिविंग स्टैंडर्ड को कम नहीं कर सकती और अगर उसका पति उसकी ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकता, तो वह उस शादी को निभा नहीं सकती. हालांकि मैरिज काउंसलर्स ने बातचीत के ज़रिए मामले को सुलझा दिया.

पति अपनी मातृभाषा में डॉक्टर और सीए से बात करते हैं

मुंबई के एक साउथ इंडियन और नॉर्थ इंडियन कपल से जुड़ा तलाक़ का यह मामला जब सामने आया, तो हर किसी को तलाक़ के कारण पर बड़ा आश्‍चर्य हुआ. दरअसल, दोनों की लव मैरिज हुई थी. पत्नी उस डॉक्टर या चार्टेड अकाउंटेंट के पास बिल्कुल नहीं जाती थी, जहां उसके पति जाते थे, क्योंकि वहां वो अपनी मातृभाषा में बात करते थे, जो उसे बिल्कुल पसंद नहीं था. यहां तक कि पत्नी को अपने पति का उसके परिवारवालों से अपनी भाषा में बात करना भी पसंद नहीं था, क्योंकि उसे वह क्रूएल्टी लगता था. पत्नी के मुताबिक उसकी मौजूदगी में उन्हें उस भाषा में बात करनी चाहिए, जो उसे भी समझ में आए. अब इसे नादानी कहें या झूठा अहं, जो उनके रिश्ते पर भारी पड़ सकता था. शुक्र है, मैरिज काउंसलर्स रिश्तों को बचाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.

उसे लव स्टोरीज़ पसंद नहीं

ऐसा माना जाता है कि लड़कियों को रोमांटिक स्टोरीज़ ज़्यादा पसंद होती हैं, जबकि लड़कों को एक्शन व एडवेंचर ज़्यादा पसंद आता है. पर अगर लड़के को रोमांटिक लव स्टोरीज़ पसंद हों और लड़की को नहीं, तो क्या इस बात पर तलाक़ लिया जा सकता है? मामला दरअसल नोएडा का है, जहां पति पत्नी से महज़ इसलिए तलाक़ लेना चाहता था कि वह उसके साथ बैठकर रोमांटिक फिल्म नहीं देखती. हद तो तब हो गई, जब उसने कहा कि पत्नी उसके पसंदीदा एक्टर्स को पसंद नहीं करती. इसका मतलब दोनों कम्पैटिबल नहीं हैं और इसलिए उन्हें तलाक़ ले लेना चाहिए. हालांकि उन्हें तलाक़ मिला नहीं.

पराए पुरुषों के साथ डांस करना पसंद नहीं

दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ पार्टी करना किसे पसंद नहीं, पर अगर पार्टीज़ में जाने का कारण तलाक़ का कारण बन जाए, तो यह वाक़ई में बहुत अजीबो-ग़रीब मामला होगा. यह मामला भी नोएडा से है, जहां पति-पत्नी दोनों ही वर्किंग हैं और अपर-मिडल क्लास से हैं. पर शादी के कुछ महीनों बाद ही पति ने पत्नी की बेवफ़ाई को तलाक़ का कारण बताया. पति के मुताबिक़ उसकी पत्नी को पार्टीज़ का बहुत शौक़ था, पर उसे उसका पार्टीज़ में जाकर दूसरे पुरुषों के साथ डांस करना, या दोस्तों के साथ एंजॉय करना बिल्कुल पसंद नहीं था. इसके लिए उसने अपनी पत्नी को कई बार मना भी किया था. कोर्ट ने पति की बात पर अचरज जताते हुए तलाक़ नामंज़ूर कर दिया.

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Weird Reasons People Filed For Divorce

क्यों बढ़ रहे हैं तलाक़ के मामले?

– कपल मेें से किसी एक को लगता है कि शादी के बाद दूसरा बदल गया है.

– आजकल ज़रूरत से ज़्यादा अपेक्षाएं किसी को भी बर्दाश्त नहीं होतीं.

– शादी के कुछ ही दिनों बाद यह एहसास होना कि वो एक-दूसरे के लिए नहीं बने हैं.

– कम होता धैर्य और सहनशीलता भी इसका एक कारण है.

– दूसरों की बजाय स़िर्फ ख़ुद के बारे में सोचना.  

– एकल परिवारों में बड़े-बुज़ुर्गों का न रहना.  

– लड़की के घरवालों का ज़रूरत से ज़्यादा दख़लअंदाज़ी भी इसका एक बड़ा कारण है.

– फाइनेंशियल फ्रीडम ने महिलाओं को निर्णय की आज़ादी दे दी है. ये भी एक अहम् कारण है. 

तलाक़ के वाजिब कारण

द हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के सेक्शन 13 में तलाक़ के कारणों के बारे में दिया है, जो इस प्रकार हैं-

– व्यभिचार, धर्मांतरण, मानसिक विकार, कुष्ठ रोग, यौन रोग, सांसारिक कर्त्तव्यों को त्याग देना, 7 सालों से लापता, जुडीशियल सेपरेशन (कोर्ट द्वारा अलग रहने की इजाज़त), किसी भी तरह के शारीरिक संबंध नहीं और क्रूरता या निष्ठुरता. 

– उपरोक्त आधारों पर तलाक़ दिया जाता है, पर आजकल बहुत-से कपल्स ने क्रुएल्टी यानी क्रूरता को अपना हथियार बना लिया है. छोटी-छोटी समस्याओं को जब वे हल नहीं कर पाते, तो उसे क्रुएल्टी बताकर रिश्ते को तोड़ना उन्हें आसान लगता है.

– हम भी मानते हैं कि तनावपूर्ण रिश्ते में बने रहने से अच्छा है उस रिश्ते से छुटकारा पाना, पर वजहें वाजिब होनी चाहिए. 

– यंग जनरेशन व आनेवाली जनरेशन्स को शादी की गंभीरता और उसके सामाजिक मूल्यों को समझना होगा.

– सुनीता सिंह

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भाई दूज के पावन अवसर को यूं करें सेलिब्रेट (Bhai Dooj Celebration)

Bhai Dooj Celebration

Bhai Dooj Celebration

भैया दूज
दिवाली के अंतिम दिनों का पांचवां त्योहार भैया दूज है.
  • भाई दूज के दिन विवाहित या अविवाहित बहनों को प्रात: स्नान आदि से निपटकर भाई के स्वागत की तैयारी करनी चाहिए.
  • इस दिन यम की पूजा या भाई के आवभगत का तरीक़ा अलग होता है. इसके अनुसार बहनों को भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारनी चाहिए और कलावा बांधकर मुंह मीठा करने के लिए उन्हें माखन-मिश्री खिलानी चाहिए.
  • इस विधि के संपन्न होने तक दोनों को व्रती रहना चाहिए.
  • बहनों को शाम के समय यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखना चाहिए. इस समय आसमान में चील उड़ती दिखाई देने पर बहुत ही शुभ माना जाता है.
  • इस संदर्भ में मान्यता यह है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं, उसे यमराज ने क़बूल कर लिया है.यह भी पढ़ें: दिवाली स्पेशल: टॉप 5 रंगोली डिज़ाइन्स से करें ख़ुशियों का स्वागत

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क्या करें?
  • भाई को अपनी विवाहिता बहन के घर अवश्य जाना चाहिए.
  • बहन को अपने भाई का आतिथ्य सत्कार करना चाहिए और तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य, जीवन, स्वास्थ्य आदि की कामना करनी चाहिए.
क्या न करें?
  •  भाई को अपने घर बहन के आने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे ही बहन के घर जाना चाहिए.
  • बहन यमदेव की पूजा तक कुछ भी न खाए-पीए.

– मनीषा कौशिक

(वास्तु-फेंगशुई एक्सपर्ट)

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हेल्दी रिलेशनशिप के लिए छोड़ें भावनाओं की ‘कंजूसी’ (Express Yourself For A Healthy Relationship)

Healthy Relationship

बच्चों के साथ कुछ पल मौज-मस्ती, बड़ों के साथ बैठकर बोलने-बतियाने की चाहत, पार्टनर के साथ चंद सुकून के पल… ऐसी न जाने कितनी हसरतें हैं, जिन्हें पूरा करने की ख़्वाहिश रखते हैं हम, पर न जाने कहां इतने बिज़ी हैं कि अपनी भावनाओं को अपनों तक पहुंचा ही नहीं पाते. क्या सचमुच इतने बिज़ी हो गए हैं हम या फिर भावनाओं की कंजूसी करने लगे हैं? क्या है भावनाओं की कंजूसी के कारण और कैसे छोड़ें ये कंजूसी आइए जानते हैं.

Healthy Relationship

क्यों करते हैं हम भावनाओं की कंजूसी?

–  करियर में आगे, और आगे बढ़ने की होड़ लगी है.

– हर कोई अपनी आर्थिक स्थिति को अच्छी से बेहतर और बेहतर से बेहतरीन करने में लगा है.

– ख़ुद को बेस्ट साबित करने में हम सबने अपना सर्वस्व लगा दिया है.

– बिज़ी लाइफस्टाइल और तनाव हमारी सेहत को भी नुक़सान पहुंचा रहा है.

– अपनों से ज़्यादा अपनी भावनाओं को तवज्जो देने लगे हैं.

हम सभी मानते हैं कि हमारी ज़िंदगी बहुत तेज़ रफ़्तार से दौड़ रही है, सब कुछ बहुत तेज़ी से बीत रहा है, घर चलाने की जद्दोज़ेहद में बहुत कुछ छूट रहा है, पर क्या किसी ने यह सोचा कि अपने और अपनों के लिए दौड़ते-भागते हम उनसे दूर तो नहीं निकल आए? ज़िंदगी जीने की कला कहीं भूलते तो नहीं जा रहे हैं?

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तय करें अपनी प्राथमिकताएं

हर किसी को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और प्राथमिकताओं की फेहरिस्त में परिवार सबसे पहले होना चाहिए. हेल्दी रिलेशनशिप के लिए सबसे ज़रूरी है अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करना. परिवार के सभी सदस्यों में आपसी प्यार-विश्‍वास और अपनापन यही तो हमारे परिवार और जीवन की पूंजी है, इसे प्राथमिकता दें. ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं, जहां कामयाब लोगों ने इस बात को सबसे ज़्यादा अहमियत देने की बात कही है, तो आप भी ‘फैमिली कम्स फर्स्ट’ के स्लोगन को अपना लें और ज़िंदगी को एक नए नज़रिए से देखने की कोशिश करें.

बड़ों की हंसी कमाएं

पैसे तो हम सभी कमाते हैं, पर अपने परिवार की हंसी कितनी कमाते हैं? कोशिश करें रोज़ाना रात को खाना खाने के बाद कुछ देर अपने पैरेंट्स के साथ बैठें. उनसे बातें करें, उनका हालचाल लें और ऑफिस का कोई फनी क़िस्सा उन्हें सुनाएं या फिर कोई जोक सुनाएं, जिसे सुनकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाए. आपके पैरेंट्स की मुस्कुराहट ही आपकी उस दिन की असली कमाई है.

बच्चे हैं बेस्ट ‘बैटरी चार्जर’

माना कि आप दिनभर के काम के बाद थक गए हैं और आपकी बैटरी डाउन है, पर क्या आप जानते नहीं कि बच्चे बेस्ट चार्जर होते हैं? तो जाइए, बच्चों को गुदगुदाएं, उनके साथ खेलें, उन्हें घुमाकर लाएं और अपने साथ-साथ बच्चों को भी दिन का बेस्ट टाइम दें.

पार्टनर के लिए है शरारतें

पति हो या पत्नी हर कोई चाहता है कि उसका पार्टनर उनकी भावनाओं को समझे. पार्टनर को समय दें, उसके साथ व़क्त बिताएं. पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार-विश्‍वास के साथ-साथ थोड़ी शरारत और थोड़ी छेड़छाड़ भी ज़रूरी है. ये शरारतें ही आपकी रूटीन लाइफ को रोमांटिक बनाती हैं, तो थोड़ी भावनाएं रोमांस में भी ख़र्च करें और अपनी मैरिड लाइफ को मज़ेदार व रोमांटिक बनाएं.

भाई-बहनों पर इंवेस्ट करें प्यार-दुलार

कभी शिकायतें, तो कभी टांग खिंचाई, कभी लड़ाई-झगड़े, तो कभी प्यार-दुलार- भाई-बहनों का रिश्ता ही कुछ ऐसा होता है. अपनी रोज़मर्रा की भागदौड़ में अगर आप एक-दूसरे से दूर हो गए हैं, तो रोज़ाना एक बार फोन पर बात ज़रूर करें. वीकेंड पर मिलें और अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर करें. भावनाओं में इंवेस्टमेंट का आपको प्यार-दुलार का अच्छा-ख़ासा रिटर्न मिलेगा, जो आपकी ज़िंदगी में ख़ुशहाली लाएगा.

दोस्तों की यारी पर करें न्योछावर

फैमिली के बाद फ्रेंड्स ही तो हमारे सबसे क़रीब होते हैं. कोई प्रॉब्लम शेयर करनी हो, एंजॉय करना हो या फिर गॉसिप करनी हो, दोस्तों से बेहतर कौन हो सकता है. सोशल मीडिया के इस ज़माने में दोस्तों से कनेक्टेड रहना बहुत आसान है, तो क्यों न अपने बिज़ी रूटीन से थोड़ा व़क्त निकालकर अपने दोस्तों तक अपनी भावनाएं पहुंचाई जाएं.

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कंजूसी छोड़ें, दिल खोलकर लुटाएं भावनाएं

– पैरेंट्स और घर के अन्य बड़ों को जब भी मौक़ा मिले ‘थैंक्यू’ कहना न भूलें. आपको उनकी परवाह है और उनके त्याग और समर्पण का एहसास है, यह उन्हें जताने में कभी कंजूसी न करें.

– बड़ों की तरह छोटों को भी उनके हिस्से का प्यार और दुलार दें. भावनाओं को स़िर्फ खाने-पीने और खिलौनों के ज़रिए ही नहीं, संस्कारों और डांट-डपट के ज़रिए भी ज़ाहिर करें.

– घरवालों को बर्थडे-एनीवर्सरीवाले दिन स्पेशल फील कराएं. उसके साथ दिन बिताकर या उसका मनपसंद खाना खिलाकर भी आप अपनी भावनाएं उस तक पहुंचा सकते हैं.

– कहते हैं ‘टच थेरेपी’ में बहुत ताक़त होती है. यह आपकी पॉज़िटिव फीलिंग्स को सामनेवाले तक बख़ूबी पहुंचाती है, तो फैमिली मेंबर्स को गले लगाना और शाबासी देना जैसी चीज़ें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करें.

– पैरेंट्स, पार्टनर और बच्चों को दिन में एक बार ‘आई लव यू’ ज़रूर कहें. अक्सर हमें लगता है कि प्यार तो करते हैं, फिर जताने की क्या ज़रूरत है, पर याद रहे, प्यार का स़िर्फ होना काफ़ी नहीं, प्यार को समय-समय पर ज़ाहिर भी करते रहना ज़रूरी है.

– बच्चों की तरह बड़ों के लिए भी प्ले टाइम बनाएं. घर के बड़ों को उनका फेवरेट इंडोर या आउटडोर गेम्स खेलने के लिए उत्साहित करें और सारा इंतज़ाम ख़ुद करें.

– परिवार के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने का बेस्ट तरीक़ा है कि सब साथ बैठकर खाना खाएं. हर किसी को घर में फैमिली डिनर टाइम बनाना चाहिए और हर किसी को उसके नियम का पालन भी करना चाहिए. यही वो समय होता है, जब पूरा परिवार एक साथ होता है और आप अपनी बात सबके साथ शेयर कर सकते हैं.

– परिवार के किसी सदस्य से अगर मनमुटाव या अनबन हो गई है, तो बैठकर उससे बात करें और अपना नज़रिया और पक्ष उसके सामने रखें. मन में कोई गुबार न रखें. अक्सर न कह पाने के कारण छोटी-छोटी बातें रिश्तों में दरार डाल देती हैं, इसलिए आप ऐसा न होने दें और यहां भी भावनाओं की कंजूसी न करें.

– फैमिली को स्पेशल फील कराने के लिए वीकली फैमिली नाइट रखें. वीकेंड पर या छुट्टी की रात कुछ ख़ास करें. मूवी देखें, नाटक देखने जाएं, अंताक्षरी खेलें या फिर बैठकर गप्पे मारें.

– भावनाओं को खुलकर शेयर करने के लिए मंथली प्लान भी बनाएं. महीने में एक बार परिवार को कहीं घुमाने ले जाएं या फिर कुछ ख़ास करें.

– याद रखें, दूसरों को ख़ुश करने का मौक़ा कभी हाथ से न जाने दें. अगर आपको पता है कि आपके एक फोन कॉल या मैसेज से किसी के चेहरे पर मुस्कान आ सकती है, तो ऐसा ज़रूर करें.

– दूसरों के साथ-साथ अपने लिए भी भरपूर भावनाएं लुटाएं. ख़ुद को ख़ुश रखने और पैंपर करने का कोई मौक़ा न गंवाएं, क्योंकि ख़ुशियां तभी बांट पाएंगे, जब आप ख़ुद ख़ुश रहेंगे.

– नाते-रिश्तेदारों को भी कभी-कभार याद कर लेंगे, तो वो ख़ुश हो जाएंगे.

– हमसे बहुत-से लोगों को बहुत-सी उम्मीदें होती हैं, सभी तो नहीं, पर कुछ की उम्मीदें तो हम ज़रूर ही पूरी कर सकते हैं.

– अनीता सिंह

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बेहतर करियर के लिए समझदारी से चुनें लाइफ पार्टनर (Choose Your Spouse Wisely For Better Career)

Spouse Wisely For Better Career

ज़िंदगी इत्तेफ़ाक नहीं है… हमारे फैसले, हमारी राय, हमारी सोच और हमारे निर्णय हमारी ज़िंदगी को दिशा देते हैं. हो सकता है कुछ चीज़ें हमारे मन के हिसाब से न हों, लेकिन सवाल यह है कि हमने कितना प्रयास किया? अक्सर शादी के निर्णय में हम और ख़ासतौर से लड़कियां अपनी सारी सोच और तमाम ख़्वाहिशों को ताक पर रख देती हैं, जबकि यही वो व़क्त होता है, जब हमें सबसे ज़्यादा सोच-समझकर फैसला लेने की ज़रूरत होती है, क्योंकि एक ज़िम्मेदार व समझदार पति आपकी ज़िंदगी को सही दिशा दे सकता है, जबकि एक ग़लत निर्णय आपको उम्रभर का पछतावा भी दे सकता है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या और किस तरह से सिलेक्ट करें आप अपना लाइफ पार्टनर, ताकि आपको परिवार व शादी के बाद अपने अच्छे-ख़ासे सफल करियर को यूं ही अलविदा न कहना पड़े.

क्या करें?

  • सबसे पहले आपको ख़ुद यह सोचना होगा कि आप क्या करना चाहती हैं? श्र अपनी प्राथमिकताएं तय करें.
  • डबल माइंड में न रहें.श्र आख़िर यह आपकी ज़िंदगी है, तो आपको ही यह निर्णय लेना होगा कि आपको क्या करना है.
  • अक्सर लड़कियां या तो ख़ुद यह सोच लेती हैं या फिर उनके परिवार की तरफ़ से उनको यह समझा दिया जाता है कि शादी के बाद देखा जाएगा, फ़िलहाल तो शादी हो जाए, यह ज़रूरी है.
  • ऐसे में लड़कियों पर भी दबाव होता है कि वो अपने होनेवाले पति से साफ़-साफ़ बात नहीं कर पातीं, क्योंकि उन्हें ससुरालपक्ष की नाराज़गी का डर रहता है.
  • अगर आप करियर ओरिएंटेड हैं और शादी के बाद भी करियर छोड़ना नहीं चाहतीं, तो सबसे बेहतर है कि अपने होनेवाले पति से इस बारे में खुलकर बात करें.
  • इससे आपको उनकी सोच व राय का भी अंदाज़ा हो जाएगा.श्र आपके लिए निर्णय लेना भी आसान हो जाएगा कि अब आपको किस चीज़ को प्राथमिकता देनी है.
  • आपकी राय भी महत्वपूर्ण है, आपका करियर भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना आपके पति का, इसलिए आपको अपनी बात बिना किसी संकोच के कहने की हिम्मत जुटानी ही होगी.

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क्या-क्या पूछें होनेवाले पार्टनर से?

  • आपके करियर को कितना महत्व देते हैं?
  • शादी के बाद आपके करियर को बढ़ावा देने के लिए उनकी तरफ़ से क्या मदद होगी?
  • क्या घरेलू ज़िम्मेदारियों में आपका हाथ बंटाएंगे?श्र घर के कामों में आपकी कितनी मदद करेंगे?
  • महिलाओं के प्रति और ख़ासतौर से कामकाजी महिलाओं के प्रति उनकी क्या राय है?
  • फैमिली बढ़ने के बाद भी क्या वो आपके करियर को उतना ही महत्वपूर्ण समझेंगे?
  • परिवार के लोग यदि नौकरी छोड़ने के लिए कहेंगे, तो वो आपको किस तरह से और किस हद तक सपोर्ट करेंगे?
  • बच्चे की ज़िम्मेदारी में किस तरह से आपको सपोर्ट करेंगे… आदि… इत्यादि… ये तमाम सवाल आपको बेझिझक पूछने होंगे, ताकि आगे चलकर आपको अपने करियर को लेकर किसी तरह का समझौता न करना पड़े.
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कितना कॉम्प्रोमाइज़ करें, कितना नहीं?

  • बातचीत के बाद आपको स्वयं यह अंदाज़ा हो जाएगा कि आपका होनेवाला पार्टनर आपकी बातों से कितना सहमत है.
  • आपको यह भी पता लग जाएगा कि शादी के बाद आपकी क्या चुनौतियां होंगी.
  • आपको कितना कॉम्प्रोमाइज़ करना पड़ेगा और आपकी कितनी बातों को समर्थन दिया जाएगा.
  • इसी के अनुसार आप अपनी प्राथमिकताएं तय कर सकती हैं. आप प्लानिंग कर सकती हैं कि आपको कितना बदलना है और किस तरह से बदलना है, ताकि  आपको करियर से भी समझौता न करना पड़े और परिवार को भी व़क्त दे सकें.

क्या कहते हैं आंकड़े?

  • सर्वे बताते हैं कि 48% महिलाएं अपने रियर को बीच में ही छोड़ देती हैं, ताकि वो अपने परिवार को समय दे सकें.
  • यदि ये महिलाएं काम करती रहें, तो भारत का जीडीपी 2% तक ऊपर जा सकता है.
  • जबकि पूरे एशिया की बात करें, तो 21% महिलाएं अपने करियर को बीच में छोड़ देती हैं.
  • इसी तरह से 43% उच्च शिक्षित महिलाएं बच्चों की परवरिश की ख़ातिर कुछ समय के लिए अपना करियर छोड़ देती हैं.
  • यही नहीं, विदेशों में भी यह आंकड़ा काफ़ी ज़्यादा है.

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कारण क्या है?

  • दरअसल, महिलाएं परिवार के प्रति अधिक ज़िम्मेदारी महसूस करती हैं.
  • न स़िर्फ ज़िम्मेदारी, विशेषज्ञ बताते हैं कि उनमें अपराधबोध की भावना भी पुरुषों के मुक़ाबले अधिक होती है.
  • उन्हें लगता है कि बच्चों और परिवार को उनकी अधिक ज़रूरत है.
  • परिवार को समय न दे पाने की चिंता व गिल्ट उन्हें अधिक होता है.
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बदलाव ही रास्ता है…

  • बदलाव हो रहा है. लड़कियों की सोच भी बदल रही है और वो भी अब अपने करियर को गंभीरता से लेने लगी हैं.
  • लेकिन ज़रूरत है समाज व लड़कियों के माइंडसेट को बदलने की, जहां उन्हें यह साफ़तौर पर निर्णय लेना होगा कि उन्हें परिवार और करियर दोनों ही चाहिए.
  • इस सकारात्मक सोच के साथ यदि वो आगे बढ़ेंगी, तो यक़ीनन दोनों के बीच सामंजस्य बेहतर तरी़के से बैठा पाएंगी.
  • अपने हक़ के लिए और सही बात के लिए उन्हें बोलना होगा और बोलने का सबसे सही व़क्त शादी से पहले ही है.
  • शादी से पहले ही उन्हें अपनी राय साफ़ करनी होगी और उन्हें ख़ुद भी यह तय करना होगा कि वो क्या चाहती हैं.
  • आख़िर उन्हें भी अपनी ज़िंदगी व अपने करियर से जुड़े फैसले लेने का पूरा-पूरा हक़ है, तो स़िर्फ त्याग या बलिदान जैसे शब्दों का बोझ वो अकेले ही क्यों ढोएं.
  • बेहतर होगा अपने होनेवाले लाइफ पार्टनर को जांचें, परखें और समझदारी से काम लें, क्योंकि एक समझदार लाइफ पार्टनर के साथ ही बेहतर ज़िंदगी और बेहतर करियर की संभावनाएं मौजूद होंगी.

 

– विजयलक्ष्मी