Farooq

 

फारुख़ शेख़

चेहरे पर सादगी, आंखों में मासूमियत और लबों पर भोली-सी मुस्कान… एक सीधा-सादा शख़्स, लेकिन व्यक्तित्व उतना ही आकर्षक और अदाकारी का अंदाज़ दिल ही नहीं, रूह को छू जानेवाला. जी हां, ज़िंदगी को ज़िंदादिली से जीना फारुख़ शेख़ को बेहतर तरी़के से आता था. फिल्म नूरी का एक अल्हड़-सा रोमांटिक नौजवान हो या फिर फिल्म ये जवानी है दिवानी का इमोशनल व परिपक्व पिता… उमराव जान फिल्म में निभाया नवाबी अंदाज़ हो या फिल्म साथ-साथ का राह से भटका इंसान… हर रोल में परफेक्ट थे फारुख़ शेख़. इंडस्ट्री में भले ही कम काम किया, लेकिन जो भी किया, उसे आज भी लोग याद करते हैं. गमन से लेकर फिल्म बाज़ार तक के उनके तमाम रोल काबिले तारीफ़ थे. अगर बात फिल्मों से हटकर उनकी शख़्सियत की करें, तो फारुख़ शेख़ उन ख़ुशमिज़ाज इंसानों में से थे, जो अपनी ख़ुशी के साथ-साथ आसपास के माहौल को भी ख़ुश रखने की कोशिश करते थे. फिल्म के सेट से लेकर अपने पड़ोसियों तक के दिल-ओ-जान में फारुख़ साहब कुछ इस क़दर बस गए कि इस दुनिया से रुख़सत होने के बाद भी उन्हें लोग याद करते हैं. फिल्म इंडस्ट्री के इस असाधारण अभिनेता की आज बर्थ एनिवर्सरी है. इस मौ़के पर आइए, जानते हैं फारुख़ साहब से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें.

♣ फारुख़ शेख़ को आदत थी कि वो अपना लंच बॉक्स साथ में लेकर जाते थे. स़िर्फ अपना ही नहीं, कभी-कभी तो वो पूरे क्रू मेंबर्स के लिए घर से बिरयानी बनाकर ले जाते थे. उनकी ये दिलदारी आज भी सबको याद है.

♣ फारुख़ शेख़ ने लॉ की पढ़ाई की थी.

♣ फारुख़ के पिता ख़ुद एक वकील थे और वो चाहते थे कि फारुख़ भी वकील ही बनें.

♣ फारुख़ शेख़ की पहली कमाई 750 रु थी.

♣ फारुख़ शेख़ की आख़िरी फिल्म यंगिस्तान थी.

♣ हर फ्राइडे को फारुख़ साहब काम करने से बचते थे. इसका एक कारण था शुक्रवार की नमाज़ अदा करना. वो बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे.