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फादर्स डे स्पेशल: बॉलीवुड के सुपर कूल डैड (Happy Father’s Day: Bollywood- Super Cool Dad)

वे रील लाइफ में जितनी संजीदगी और शिद्दत से अपने क़िरदार में जान फूंकते हैं, रियल लाइफ में पिता (Father) के रूप में अपनी ज़िम्मेदारियों को भी उतनी ही कुशलता व परिपक्वता से निभाते हैं. जी हां, हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड (Bollywood) के कुछ यंग और डैशिंग अभिनेताओं की, जो परफेक्ट पिता (Perfect Father) के मापदंडों पर शत-प्रतिशत खरे उतरते हैं.

Bollywood's Super Cool Dad

अक्षय कुमार

सुनहरे पर्दे पर अपने ख़तरनाक स्टंट्स से दर्शकों का दिल जीतनेवाले अक्षय रियल लाइफ में बेहद ज़िम्मेदार पिता हैं. हालांकि वे अपने बेटे आरव और बेटी नितारा को लाइम लाइट से दूर रखते हैं, लेकिन अक्सर सोशल मीडिया पर उनके पिक्स शेयर करते रहते हैं. अक्षय अपने सुपर बिज़ी शेड्यूल से समय निकालकर बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताना नहीं भूलते. यहां तक कि उन्होंने अपनी पीठ पर बेटे आरव के नाम का टैटू भी बनवाया है.

शाहरुख़ ख़ान

आर्यन, सुहाना और अबराम के पिता शाहरुख़ ख़ान निसंदेह बॉलीवुड के कूलेस्ट डैड हैं. छोटे बेटे अबराम को कहानियां सुनाने से लेकर, सुहाना और आर्यन के कॉलेज इंवेट्स अटेंड करने तक, शाहरुख़ पिता का कर्त्तव्य निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ते. एक इंटरव्यू में बच्चों के साथ अपने रिश्ते पर बात करते हुए शाहरुख़ ने एक बार कहा था, “मेरे ज़्यादा दोस्त नहीं हैं. मेरे बच्चे ही मेरे सबसे क़रीबी मित्र, मेरे बेस्ट फ्रेंड्स हैं. मैं उनके साथ अपने गहरे राज़, अपनी ख़ुशियां और अपने ग़म सब कुछ शेयर करता हूं.”

अभिषेक बच्चन

अभिषेक बच्चन बेहद ही प्रोटेक्टिव पिता हैं, जो बेटी आराध्या की छोटी-से-छोटी ख़ुशी का ख़्याल रखते हैं. आराध्या को शूट्स में साथ ले जाने से लेकर खाली समय में उसके साथ समय बिताने तक, अभिषेक ख़ुशी-ख़ुशी आराध्या का हर काम करते हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने पिता के रूप में अपने अनुभव शेयर करते हुए कहा,“शूटिंग या बाहर से घर में आते ही मैं सबसे पहले आराध्या को देखना चाहता हूं. एक पिता होने की ख़ुशी क्या होती है, ये जब आप बाप बनते हैं, तभी पता चलता है.” अभिषेक के अनुसार, बच्चे की देखभाल करना स़िर्फ मां का काम नहीं होता, बल्कि दोनों को साथ मिलकर यह ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए.

आयुष्मान खुराना

मल्टी टैलेंटेड एक्टर आयुष्मान खुराना जितने उम्दा अभिनेता हैं, रियल लाइफ में उतने ही अच्छे पिता भी. जी हां, आयुष्मान खुराना दो प्यारे-प्यारे बच्चों, विराजवीर और विरुष्का के पिता हैं. सोशल मीडिया पर पिता के रूप में अपनी भावनाओं को शेयर करते हुए आयुष्मान ने एक बार लिखा था,“मैं महत्वाकांक्षी नहीं हूं, लेकिन मेरे बच्चे मुझे मेरे जीवन का लक्ष्य देते हैं और मुझे उनका रियल हीरो बनने की प्रेरणा देते हैं.”

ऋतिक रोशन

बॉलीवुड के सुपर हीरो ऋतिक रोशन ने भले ही अपनी पत्नी सुज़ैन ख़ान से तलाक़ ले लिया है, लेकिन वे पिता के रूप में अपनी ज़िम्मेदारी निभाने से कभी पीछे नहीं हटते. वे अक्सर अपने दोनों बेटों रेहान और रिधान के साथ क्वॉलिटी टाइम स्पेंड करने के लिए उन्हें अलग-अलग देशों में एडवेंचर ट्रिप्स पर ले जाते हैं. उनका सोशल मीडिया अकाउंट इस तरह के पिक्स से भरा हुआ है. आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि कि ऋतिक अपने बेटों को मेंटली स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए उनके लिए कॉमिक स्ट्रिप्स और कहानियां भी क्रिएट करते हैं.

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शाहिद कपूर

चॉकलेटी हीरो शाहिद कपूर एक कंप्लीट फैमिली मैन हैं. वे दो प्यारे-प्यारे बच्चों मीशा और ज़ैन कपूर के पिता हैं. शाहिद ने तो मीशा के जन्म के समय बाकायदा पैटरनिटी लीव लेकर अपनी पत्नी मीरा कपूर के साथ समय बिताया था. इस बारे में बात करते हुए शाहिद ने कहा, “मीरा महज़ 22 साल की उम्र में मां बन गई थी. ऐसे में उसे मेरे सपोर्ट और साथ की बहुत ज़रूरत थी, जो मैंने दिया.” उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, “पिता बनने के बाद जीवन के प्रति मेरा नज़रिया पूरी तरह बदल गया है और मैं पहले से ज़्यादा मैच्योर और फोकस्ड हो गया हूं.”

रितेश देशमुख

रितेश देशमुख के रिहान और राहेल दो बेटे हैं. उनका सोशल मीडिया अकाउंट उनके बच्चों के पिक्स से भरा हुआ है. रितेश को अपने बच्चों के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताना बेहद पसंद है.

करण जौहर

करण जौहर हीरो तो नहीं हैं, लेकिन वे फिल्म इंडस्ट्री की जानीमानी हस्ती हैं. करण भी तुषार की तरह सिंगल फादर हैं. वे यश और रूही दो प्यारे-प्यारे बच्चों के पिता हैं, जिनका जन्म सेरोगेसी के माध्यम से हुआ है. करण अक्सर सोशल मीडिया पर अपने बच्चों की तस्वीर व वीडियोज़ शेयर करते रहते हैं. एक इंटरव्यू में पिता बनने के अपने निर्णय पर बात करते हुए करण ने कहा था, “पहले मेरी ज़िंदगी में बहुत खालीपन था, जिसे मेरे बच्चों ने भर दिया. मैं उनका पिता भी हूं और मां भी. हालांकि यह रोल बहुत चुनौतीपूर्ण है, लेकिन मैं इसे पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश करता हूं.”

आमिर ख़ान

फिल्म दंगल में भले ही आमिर ख़ान ने हानिकारक बापू की भूमिका निभाई थी, लेकिन रियल लाइफ में वे बहुत एडोरबल डैडी हैं. आमिर के तीन बच्चे हैं, जो मीडिया की लाइमलाइट से दूर रहते हैं, लेकिन आमिर मौक़ा मिलने पर उनकी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर ज़रूर शेयर करते हैं. आमिर ने अपने बच्चों को अपना करियर चुनने की पूरी आज़ादी दे रखी है. पहली शादी टूटने के बावजूद वे इरा और जुनैद के बेहद क़रीब हैं.

तुषार कपूर

बॉलीवुड के कूलेस्ट डैडी की लिस्ट में तुषार कपूर का ज़िक्र आना इसलिए ज़रूरी है कि क्योंकि वे सिंगल फादर हैं. उनका बेटा लक्ष्य दो साल का है. तुषार पिता और मां दोनों की ज़िम्मेदारी बख़ूबी निभाते हैं. इतना ही नहीं, उनकी पूरी दिनचर्या लक्ष्य के हिसाब से सेट है, ताकि वे अपने बेटे के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिता सकें.

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अर्जुन रामपाल

इंडस्ट्री के मोस्ट हैंडसम हीरो होने के साथ-साथ अर्जुन रामपाल दो बेटियों मिहिका और मायरा रामपाल के पिता भी हैं. वे अपनी पत्नी मेहर जेसिया से अलग हो चुके हैं, लेकिन अपनी बेटियों को पूरा समय देते हैं. उन्होंने अपने हाथ पर बेटियों के नाम का टैटू भी बनवाया है. हाल ही में अर्जुन ने इस बात का खुलासा किया कि वे फिर से पिता बननेवाले हैं. उनकी गर्लफ्रेंड प्रेग्नेंट हैं.

सैफ अली ख़ान

बॉलीवुड के कूलेस्ट डैडी की बात हो, तो इंडस्ट्री के मोस्ट फोटोग्राफ्ड किड तैमूर अली ख़ान के पिता सैफ अली ख़ान का ज़िक्र आना स्वाभाविक है. सैफ अली ख़ान तैमूर के साथ सारा और इब्राहिम के भी पिता हैं, जिनके साथ उनका व्यवहार बेहद दोस्ताना है. उनकी बड़ी बेटी सारा बॉलीवुड में एंट्री कर चुकी हैं, जबकि इब्राहिम पढ़ाई कर रहा है. सैफ ने एक इंटरव्यू में पिता के रूप में अपने दायित्व के बारे में कहा था, “बच्चे का डायपर चेंज करने के बारे में बताना फैशनेबल हो गया है. यह हर कोई करता है. यह कोई बड़ी बात नहीं है. बड़ी बात तो बच्चे के साथ पूरा दिन रहना और उसका ख़्याल रखना है. हम लकी हैं कि ऐसा करने में सफल हो पा रहे हैं.”

– शिल्पी शर्मा

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फादर्स डे स्पेशल: सख़्त होती मॉम- कूल होते पापा (Fathers Day Special: Strict Mom And Cool Dad)

fathers Day

आज की वर्किंग मॉम घर-बाहर की दोहरी ज़िम्मेदारी निभाते-निभाते जहां बच्चों के प्रति सख़्त हो गई है, वहीं बच्चों के प्रति पुरुषों का व्यवहार कूल होता जा रहा है. आज के पापा अपने बच्चों के प्रति पहले के मुक़ाबले बहुत संवेदनशील हो गए हैं. नए ज़माने के पापा अपने बच्चों की नैपी भी बदलते हैं और उन्हें लोरी भी सुनाते हैं, उन्हें स्कूल छोड़ने भी जाते हैं और उनका होमवर्क भी कराते हैं. फादर्स डे के ख़ास मौ़के पर आइए नए ज़माने के कूल पापा को और क़रीब से जानते हैं.

 fathers Day

यदि आप कुछ समय पहले के पापा के बारे में सोचेंगे, तो आपको एक ऐसा पुरुष नज़र आएगा, जो अपने परिवार के लिए दिन-रात मेहनत तो करता था, लेकिन उनके सामने अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त नहीं कर पाता था. वो बच्चों की ज़रूरतें तो पूरी करता था, लेकिन उनके साथ हंसी-मज़ाक करने से कतराता था. इसकी सबसे बड़ी वजह थी समाज का दबाव. कुछ समय पहले तक यदि पुरुष अपने बच्चों के साथ घुल-मिल जाता, तो उसे ये ताने सुनाए जाते कि ज़्यादा लाड़-प्यार से बच्चे बिगड़ जाते हैं. यदि वो अपने परिवार के सामने भावुक हो जाता, तो उसे ये कहकर झिड़क दिया जाता कि क्या औरतों की तरह रोता है. तब के पुरुषों पर अपने परिवार के लिए रोज़ी-रोटी जुटाने का इतना दबाव होता था कि वो अपनी ख़ुशियों के बारे में कभी सोच ही नहीं पाते थे. परिवार भी बाहर से सख़्त दिखनेवाले पिता के कोमल मन को समझने की कोशिश नहीं करता था. बच्चों के सारे सीक्रेट्स, सारी नादानियां, तमाम शैतानियां स़िर्फ मां के हिस्से आती थीं, पिता के हिस्से स़िर्फ ज़िम्मेदारियों का बोझ ही आता था.

किन वजहों ने बनाया पिता को सख़्त?
पहले पिता की छवि कठोर और अनुशासन प्रिय इंसान की ही होती थी. पिता परिवार का मुखिया होता था, दिनभर घर से बाहर रहता था, इसलिए बच्चे अपनी मां की तरह पिता के क़रीब नहीं आ पाते थे. पिता को इस बात की चिंता रहती थी कि उनकी संतान ज़िंदगी के कठोर सफ़र को बख़ूबी तय कर पाएगी या नहीं, इसलिए वे बच्चों के साथ हमेशा सख़्ती से पेश आते थे.

* सामाजिक दबाव
कुछ समय पहले तक पुरुषों पर एक तरह का सामाजिक दबाव होता था. यदि कोई पिता अपने बच्चे को नहला दे या उसके कपड़े बदल दे, तो उसे यह कहकर टोक दिया जाता था कि ये तुम्हारा काम नहीं है. ऐसे में पुरुष चाहकर भी अपने बच्चों की केयर नहीं कर पाते थे. अपने कमरे में भले ही कई पुरुष बच्चों की देखभाल करते रहे होंगे, लेकिन बाहर ऐसा करने में उन्हें हिचक महसूस होती थी.

* आर्थिक दबाव
पहले परिवार में स़िर्फ पुरुष ही घर से बाहर पैसे कमाने जाते थे, इसलिए उन पर परिवार के पालन-पोषण का दबाव रहता था. तब के पुरुष आज की तरह अपने पहनावे या ग्रूमिंग पर भी बहुत ध्यान नहीं देते थे. इसके साथ ही उस समय एक या दो बच्चों का चलन नहीं था. ज़्यादा बच्चे होने के कारण पुरुष पर पैसे कमाने का दबाव आज के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा था.

* पारिवारिक दबाव
पहले परिवार में पुरुषों को सारे अधिकार प्राप्त थे, इसलिए घर में उनका ही हुकुम चलता था. बच्चों की परवरिश के दौरान ही बेटा-बेटी में इतना ज़्यादा भेदभाव किया जाता था कि लड़कियों का स्वभाव बचपन से ही डरा-सहमा हो जाता था. इस सोच के चलते पुरुष परिवार में अपना रौब बनाए रखने के लिए बच्चों से भी एक निश्‍चित दूरी बनाए रखते थे.

* बेटियों से रखी जाती थी दूरी
पहले के पिता बेटे को तो फिर भी डांट-डपट देते थे, लेकिन बेटियों से एक निश्‍चित दूरी बनाकर रखते थे. महिलाओं के लिए जारी पर्दा प्रथा उनके पिता पर भी लागू होती थी. यही वजह थी कि तब कोई पिता सार्वजनिक रूप से अपनी बेटी को गले नहीं लगा पाता था या उसे दुलार नहीं कर पाता था. तब पिता और बेटी दोनों ही अपनी भावनाओं को दबाए रखते थे और अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते थे.

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पिता को कूल बनानेवाले कारण
पुरुष को सख़्त बनानेवाले समाज में बदलाव की कई वजहें हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है संयुक्त परिवार का एकल परिवार में बदल जाना.

* एकल परिवार ने बदली पापा की छवि
पहले संयुक्त परिवार में बच्चों की देखभाल की चिंता नहीं रहती थी. घर के सारे बच्चों को एक जैसा प्यार और परवरिश मिलती थी. समय के साथ लोग रोज़ी-रोटी की तलाश में गांव से शहर आने लगे और संयुक्त परिवार एकल होने लगे. एकल परिवार में पुरुष को अपने बच्चों के क़रीब रहने का मौक़ा मिला और बच्चों के प्रति उनकी छवि भी बदलने लगी. तब पुरुष बच्चों के प्रति अपना प्यार खुलकर व्यक्त करने लगे और बच्चे भी अपने पापा से घुलने-मिलने लगे.

* मां की भूमिका भी निभाने लगे हैं पापा
बदलती सोच और बढ़ती महंगाई ने धीरे-धीरे महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित किया और महिलाओं की आत्मनिर्भरता ने पुरुषों को थोड़ा और बदल दिया. आज के पापा ये बात अच्छी तरह जानते हैं कि यदि उनकी बीवी घर पर नहीं है, तो उन्हें मां की भूमिका निभाते हुए बच्चों की तमाम ज़िम्मेदारियां निभानी हैं. मां की अनुपस्थिति में आज के पापा बच्चों को पढ़ाने, उनके साथ खेलने से लेकर घर के सभी काम भी करने लगे हैं.

* भावनाएं व्यक्त करने लगे हैं पुरुष
पहले के पापा अपनी कठोर छवि को बरक़रार रखने के लिए बच्चों के सामने कभी कमज़ोर नहीं पड़ते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. आज के पापा बच्चों के सामने अपनी हर भावना व्यक्त करते हैं. वो बच्चों के सामने अपनी हार भी स्वीकार करते हैं और उनके सामने रो भी देते हैं, जिसके चलते उनका अपने बच्चों के साथ रिश्ता और मज़बूत बनने लगा है.

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इसलिए सख़्त हो रही हैं मॉम
पहले जिस तरह पुरुष घर से बाहर रहने के कारण अपने बच्चों को लेकर ज़्यादा प्रोटेक्टिव और सख़्त हुआ करते थे, वैसे ही अब महिलाएं होने लगी हैं. वर्किंग मदर्स को इस बात की चिंता रहती है कि उनके घर से बाहर रहने के कारण कहीं उनके बच्चे बिगड़ न जाएं, इसलिए वो अपने बच्चों के साथ सख़्ती बरतने लगी हैं. लेकिन मां की सख़्ती की भरपाई अब नए ज़माने के पापा करने लगे हैं. आज के कूल पापा बच्चों के साथ हर बात शेयर करते हैं, उनके साथ खेलते हैं, उनका होमवर्क कराते हैं. मां और पिता की बदलती भूमिका बच्चों को पिता के और क़रीब ला रही है.
– कमला बडोनी

 

 

Happy Father’s Day! पापा को स्पेशल फील कराएं बॉलीवुड के इन 10 गानों के साथ (Father’s Day Special: Top 10 Bollywood Songs)

Father's Day

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हर बच्चे के लिए उसके पापा उसके सुपरहीरो होते हैं. मदर्स डे तो जमकर सेलिब्रेट किया जाता है, लेकिन अक्सर हम अपने लाइफ के सबसे अहम् इंसान यानी पापा को थैंक्यू बोलना भूल जाते हैं. बॉलीवुड की फिल्मों में मां की ममता को तो बड़ी ही ख़ूबसूरती से दिखाया जाता रहा है, लेकिन पिता के प्यार पर कम ही फिल्में और गाने बने हैं. फिल्मों में अक्सर पिता को बेहद ही स्ट्रिक्ट या गुस्सैल दिखाया जाता रहा है. ख़ैर पिता पर भले ही बहुत ज़्यादा गाने न बने हों, लेकिन जितने भी बने हैं, वो बेहद ही प्यारे हैं. फादर्स डे पर अपने पापा को ख़ास फील कराएं बॉलीवुड के गानों के साथ.

इस ख़ास मौक़े पर हम आपके लिए ले आए हैं बॉलीवुड के 10 गानें, जो पिता और बच्चे के प्यारे से रिश्ते पर बने हैं. आप भी देखें ये गानें और अपने पापा को थैंक्यू बोलें.

फिल्म- दंगल

फिल्म- कयामत से कयामत तक

फिल्म- मैं प्रेम की दीवानी हूं

फिल्म- पापा कहते हैं

फिल्म- मासूम

फिल्म- मैं ऐसा ही हूं

फिल्म- अकेले हम अकेले तुम

फिल्म- रिश्ते

फिल्म- जानवर

फिल्म- हे बेबी