Fathers

फादर्स डे पर फिल्मी कलाकार और सेलिब्रिटी ने दिल को छू लेनेवाले अंदाज़ में अपने पिता को याद किया. किसी ने बचपन की तस्वीर पिता के साथ शेयर की, तो कोई दिवंगत पिता को भावपूर्ण रूप में याद करते रहे… बिग बी सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने अपने पिता हरिवंश राय बच्चन को अनोखे अंदाज़ में स्मरण किया. बाबूजी के साथ ही लिखते हुए और ख़ुद भी कुछ लिखते हुए ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर शेयर करते हुए लिखा-
हमें पढ़ाओ न.. रिश्तों की कोई और किताब..
पढ़ी हैं, पूज्य बाबूजी के चेहरे की झुर्रियां हमने…
बाबूजी के साथ एक और ब्लैक एंड व्हाइट फोटो उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर की, जिसमें दोनों के चेहरे मिलते-जुलते दिखाई दे रहे हैं, इस पर अमितजी कहते हैं- तस्वीरें धुंधली पड़ जाती है..
यादें, सूरतें वैसे ही रह जाती हैं…
इसी तरह विक्की कौशल ने भी पिता के साथ की तस्वीर में यह कैप्शन लिखा कि मां कहती हैं कि तुम पापा की कार्बन कॉपी हो…
आयुष्मान खुराना ने भाई अपारशक्ति और पिता के साथ मस्तीभरा वीडियो शेयर किया, जिसमें तीनों हाथ बांधे हुए मुस्कुराते हुए एक्शन कर रहे हैं.
अक्षय कुमार ने गोद में सोती हुई बेटी नितारा के साथ अपने इस एहसास को बयां किया कि एक पिता के लिए उसकी गोद में सोई हुई बेटी को निहारना उतना ही सुकून शांति देता है जितना कि योग अभ्यास से होता है. साथ ही उन्होंने सभी को फादर्स डे और अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस की बधाई भी दी.
ईशा देओल ने पिता धर्मेंद्र के साथ की ब्लैक-व्हाइट और कलर तीन-चार फोटो कुछ अलग तरह की शेयर की, जिसे देखकर ऐसे लगता है जैसे दोनों एक है. वैसे उनका कहना भी कुछ ऐसा ही है कि हम एक जैसा सोचते, दिखते और पंच मारते हैं. हम एक हैं. पापा आपको अधिक ताक़त मिले. ढेर सारा प्यार.. आप ख़ुश और स्वस्थ रहें.. आपकी बिट्टू…
अजय देवगन ने पिता वीरू देवगन के साथ की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर के साथ इमोशनल नोट लिखा कि जो प्यार होता है, वो कभी कम नहीं होता, वो हमेशा अनदेखा-अनसुना ही सही, पर हमारे साथ और क़रीब रहता है…
क्रिकेटर विराट कोहली ने अपने पिता के साथ बचपन की प्यारी-सी तस्वीर के साथ ख़ूबसूरत व प्रेरणादायी संदेश लोगों को दिया कि आपके पिता का प्यार और आशीर्वाद हमेशा आपके साथ रहता है, भले ही वे आपके पास हो या ना हो…
अनुष्का शर्मा ने भी अपने पिता के साथ की शादी के समय की तस्वीर साझा की, जिसमें वे बेटी को प्यार से गले लगा रहे हैं.
माधुरी दीक्षित ने अपने पति श्रीराम नेने और दोनों बच्चों के साथ की फोटो और अपने पिता के साथ की तस्वीर के साथ प्यारा का मैसेज दिया. वहीं उनके पति श्रीराम ने भी अपने बच्चों और पिता के साथ की तस्वीर साझा की.
प्रियंका चोपड़ा ने भी पिता अशोक चोपड़ा के साथ ससुरजी की भी फोटो शेयर की. दोनों ही तस्वीर में माइक लिए हुए थे. उन्होंने इस पर यह कहा कि हम दोनों के पिता यानी उनके और निक जोनस के इसी शौक कारण वे भी संगीत के क्षेत्र से जुड़े हैं.
श्रद्धा कपूर ने पिता शक्ति कपूर के साथ अपने बचपन की फोटो के साथ अपने बापू को अपनी ताक़त, सपोर्ट और हमेशा साथ देनेवाले माना. और भी बहुत कुछ था उनके मन में अपने पिता को लेकर जिसे शब्दों में बयां कर पाना उनके लिए मुश्किल है.
सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपने पिता के साथ बचपन की और अभी की दो ख़ूबसूरत फोटो डाली. उन्हें हमेशा अपने शिप के कप्तान होने की बात कही और वर्चुअल गले भी लगाया.
अर्जुन रामपाल ने अपने तीनों बच्चों में जिसमें दोनों बेटियां और उनकी गर्लफ्रेंड से हुआ बेटा की तस्वीर साझा की और उन्हें अपनी दुनिया बताया. उन्होंने अपने पिता और दादाजी की तस्वीर भी डाली. साथ ही इस बात का दुख प्रकट किया कि दोनों ही आज दुनिया में नहीं है, फिर भी उन्हें हर रोज़ याद करते हैं. उनका प्यार-दुलार, उनकी बातें हमेशा दिलो-दिमाग़ में ज़िंदा हैं.
कृति सैनॉन ने अपने बचपन की पिता के साथ प्यारी व सुंदर सी कई तस्वीरें दी, जिसमें वे बहुत ही स्वीट-क्यूट लग रही हैं.
सचिन तेंदुलकर ने अपने दोनों बच्चों अर्जुन और सारा के साथ योग करते हुए तस्वीर दी और कहा कि आज योगा डे और फादर्स डे दोनों ही है, तो हम साथ में योग के साथ फादर्स डे मना रहे हैं.
सोहा अली ख़ान ने कुणाल खेमू के साथ बेटी इनाया की मुस्कुराती हुई प्यारी सी तस्वीर के साथ दोनों की बॉन्डिंग की सराहना की.
इसी तरह तमाम हस्तियों जैसे शाहिद कपूर, टाइगर श्रॉफ, भाग्यश्री, किम शर्मा, रेणुका शहाणे, क्रिकेटर रोहित शर्मा, हार्दिक पंड्या, कुणाल पंड्या, शिखर धवन, मीरा राजपूत, रवि किशन, जय भानुशाली, सोनम कपूर, आलिया भट्ट, संदीपा धर, संजय कपूर, करीना कपूर, आमिर ख़ान की बेटी ईरा, सैफ अली का बेटा इब्राहिम, हिना ख़ान जैसी तमाम हस्तियों ने अपने पिता से जुड़ी याद-भावनाओं को साझा किया. आइए उन सभी को तस्वीरों के ज़रिए देखते हैं…

Father's Day 2020
Father's Day 2020
Father's Day 2020
Father's Day 2020
Father's Day 2020
Father's Day 2020
Father's Day 2020
Father's Day 2020
Father's Day 2020
Father's Day 2020
Father's Day 2020

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यूं तो पिता बनना और पितृत्‍व के लिए स्‍वयं को तैयार करना चुनौतीभरा काम होता है. लेकिन जब बात उन लोगों की हो, जिनके बच्‍चे समय पूर्व ही पैदा हो गए हों, तो यह मुश्किलोंभरा होता है. ख़ासकर कोरोना वायरस के कारण मौजूदा कोविड-19 के चलते महामारी की स्थिति में यह चुनौती और भी अधिक बढ़ जाती है. उन पिताओं पर अतिरिक्‍त दबाव व ज़िम्मेदारियां आ जाती हैं. आइए, आज फादर्स डे पर ऐसे ही पिता बने पुरुषों की आपबीती को जानते हैं.

Fathers Day Special

सभी चुनौतियों के बावजूद, पिता बनने की ख़ुशी का एहसास कभी भी कम नहीं हुआ…

असीम शाह जिन्हें जुड़वा बच्चे हुए थे इस कोरोना वायरस की महामारी के दिनों में ही. तब उन्होंने ना केवल कई चुनौतियों का सामना किया, बल्कि ख़ुद को भी हौसला देते रहे. जॉन्‍सन एंड जॉन्‍सन के ग्रुप एसएफई व एनालिटिक्‍स मैनेजर की अपनी पद व ड्यूटी को निभाते हुए वे इस लॉकडाउन में बहुत कुछ सीखते भी रहे. कोविड-19 के इस लॉकडाउन के दौरान पैदा हुए जुड़वा बेटों का पिता बनने के अपने अनुभवों के बारे में असीम कुछ यूं बताते हैं…
दो महीने पहले, मैं अपने सहकर्मियों के साथ एक महत्‍वपूर्ण वीडियो कॉल पर था, तभी मेरी पत्‍नी ने अचानक बताया कि उन्‍हें डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल जाना पड़ेगा.
यह इमर्जेंसी डिलीवरी थी और हमारे बच्‍चे समय से चार हफ़्ते पहले ही पैदा हो गए. यह भी कमाल की बात थी. मैं दोपहर 3.30 बजे ऑफिस कॉल पर था और लगभग 4.00 बजे अपनी बांहों में दो-दो बच्‍चे थामे हुआ था. समय से पहले पैदा होने के चलते, बच्‍चों को एनआईसीयू में रखा गया. उनका लगातार ध्‍यान रखा जाना और उनकी देखभाल बेहद ज़रूरी था. मैं चाहता था कि मैं भी वहीं ठहरकर एनआईसीयू की कांच की दीवार के पीछे से उन्‍हें लगातार टकटकी लगाए देखता रहूं, लेकिन मुझे वापस घर लौटना पड़ा, क्‍योंकि कोविड के चलते हॉस्पिटल ने किसी को भी वहां ठहरने की इजाज़त नहीं दी.
यह स्थिति सामान्‍य से बिल्‍कुल अलग था और मुझे उन्‍हें उनके हाल पर छोड़कर वहां से जाना पड़ा. मुझे दिन में केवल एक बार उन्‍हें देखने की अनुमति थी. यह भावनात्‍मक रूप से तकलीफ़देह अनुभव था.

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लेकिन असली दिक़्क़त तो तब शुरू हुई, जब उन्‍हें हॉस्पिटल से डिस्‍चार्ज कर दिया गया और वो हफ़्तेभर में घर आ गए. जैसा कि मैंने बताया कि बच्‍चे समय से पूर्व हुए थे और बहुत छोटे थे. उनके लिए काफ़ी छोटे-छोटे डायपर्स की ज़रूरत होती थी. ज़रूरी डायपर्स, फॉर्म्‍यूला मिल्‍क, दवाएं आदि लेने के लिए मुझे 8-10 फार्मेसीज का चक्‍कर लगाना पड़ता था. लॉकडाउन के चलते, ये चीज़ें आसानी से उपलब्‍ध नहीं थीं और मैं इन अत्‍यावश्‍यक चीज़ों को सीमित स्‍टॉक में ही रख पाता था, जो बमुश्किल 3-4 दिन चल पाता. यह थोड़ी हताशाजनक स्थिति थी, पर मैंने हिम्मत नहीं हारी.
मुझे केवल अपने बच्‍चों के लिए उनके ज़रूरी सामानों को जुटाने की ही चिंता नहीं थी, बल्कि साथ ही मुझे बच्‍चों की देखभाल में अपनी पत्‍नी के साथ हाथ भी बंटाना था. बच्‍चों को संभाल पाना हम दोनों के लिए ही बहुत बड़ा काम था. कई बार तो ऐसा होता कि मैं काम करता और उसे बच्‍चों को संभालना पड़ता. हालांकि, मेरे सहकर्मियों और मेरी कंपनी ने मेरा काफ़ी सहयोग किया और मुझे अपनी इच्‍छानुसार शिफ्ट में काम करने की छूट दे दी, जो सबसे ज़रूरी था.
सभी चुनौतियों के बावजूद, पिता बनने की ख़ुशी का एहसास कभी भी कम नहीं हुआ. मुझे उन्‍हें सुलाने, खिलाने-पिलाने, उनके डायपर बदलने, कपड़े धोने, फीडिंग बॉटल धोने आदि में आनंद आता था. मैं हमारे नन्हें-मुन्‍नों के साथ अपनी पत्‍नी की हरसंभव मदद करना चाहता था. मैंने जाना कि किस तरह से माता-पिता दोनों को हाथ बंटाना ज़रूरी होता है और यह सब कुछ लॉकडाउन के चलते संभव हो सका.

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लॉकडाउन के चलते मेरी ज़िंदगी में आए पितृत्‍व के एहसास को शब्‍दों में बयां नहीं कर सकता…

यांसन इंडिया के सीनियर प्रोडक्‍ट मैनेजर, प्रणित सुराना बताते हैं कि किस तरह से उनके पांच महीने के बेटे ने उनके जीवन में बदलाव ला दिया है.
लॉकडाउन के दौरान, लोगों की ज़िम्मेदारी कई गुना बढ़ गई है और ख़ासकर उन पैरेंट्स की रिस्‍पांसबिलिटी बहुत बढ़ गई है, जिनके बच्‍चे अभी बहुत छोटे हैं. मुझे बताते हुए गर्व हो रहा है कि मैं अब एक पिता की ज़िम्मेदारियों को बेहतर समझने लगा हूं. मैं इस लॉकडाउन के चलते मेरी ज़िंदगी में आए पितृत्‍व के एहसास को शब्‍दों में बयां नहीं कर सकता. यह मेरे लिए आशा की किरण है. मैं लॉकडाउन से पहले ऑफिस के अपने उन दिनों की याद करता हूं, जब मैं अपने सहकर्मियों के साथ घूमता-फिरता और टी-ब्रेक पर गपशप किया करता था. यूं तो ये बातें सुनने में महत्‍वपूर्ण नहीं लगती, लेकिन उन पलों की मुझे बेहद याद आती है. लेकिन अभी जब मैं घर पर रहकर अपने बच्‍चे को संभालने के साथ फुलटाइम ऑफिस मैनेज कर रहा हूं, तो मुझे जीवनसाथी का अर्थ समझ आया. इसने मुझे आराम लेने और दैनिक कार्यों को प्रभावी तरीक़े से करने के महत्‍व को बता दिया है. घर पर रहकर काम करने से, ऑफिस का काम करने और व्‍यक्तिगत जीवन को संभालने के बीच की पतली रेखा और अधिक महीन हो गई है.

यदि मैं ऑफिस जाकर काम करता, तो अपने बच्‍चे को चलने की कोशिश करने और पेट के बल पलटना देखने जैसी अद्भुत ख़ुशी का किसी भी स्थिति में आनंद नहीं ले पाता. मुझे लगता है कि इस कोविड-19 इमर्जेंसी के बीच इन बहुमूल्‍य पलों को जीने से बड़ी ख़ुशी मुझे नहीं मिल सकती थी.

ऊषा गुप्ता

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