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सलमान खान से लेकर प्रियंका चोपड़ा तक यूं सेलिब्रेट कर रहे हैं रक्षाबंधन (Bollywood Celebrates Rakshabandhan)

रक्षाबंधन (Rakshabandhan) भाई बहन के प्यार और विश्वास का सबसे प्यारा त्योहार है… बॉलीवुड (Bollywood) भी इस त्योहार को काफ़ी दिल से celebrate करता है… आप भी देखिए पिक्चर्स जो सिलेब्रिटीज़ ने सोशल मीडिया पर अपनी बहन के साथ रखी बंधवाते हुए शेयर की

सलमान खान से लेकर प्रियंका चोपड़ा तक यूं सेलिब्रेट कर रहे हैं रक्षाबंधन (Bollywood Celebrates Rakshabandhan)

सलमान खान अर्पिता से रखी बंधवाते हुए

प्रियंका चोपड़ा अपने भाई के साथ

Priyanka Chopra With Her Brother

सैफ़ अली खान बहन सोहा के साथ

रितिक रोशन अपनी बहन के साथ

 

कार्तिक आर्यन अपनी बहन के साथ

Kartik Aryan with his sister

सारा और इब्राहिम अली खान

Sarah and Ibrahim Ali Khan

रक्षाबंधन 2018: राखी बांधने का सही मुहूर्त व समय (Rakshabandhan 2018: Right Time To Tie Rakhi)

राखी बांधने का सही मुहूर्त व समय क्या है, ये जानने की उत्सुकता सभी को रहती है. सारी बहनें शुभ मुहूर्त पर ही अपने भाई को राखी बांधना चाहती हैं. आपकी इस चाहत को पूरा करने के लिए पंडित राजेंद्र जी बता रहे हैं राखी बांधने का सही मुहूर्त व समय तथा रक्षाबंधन से जुड़ी ज़रूरी जानकारी.

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि रक्षाबंधन भाई-बहन का त्योहार है. इस दिन बहनें अपने भाइयों को राखी बांधकर अपनी रक्षा की याद दिलाती हैं. साथ ही रक्षाबंधन के दिन अपने वरिष्ठजनों जैसे कुलदेवता, ईष्ट देवता, पितृदेवता, राजा इत्यादि को रक्षा-सूत्र बांधा जाता है. ऐसा उल्लेख है कि महाभारत में भी पांडवों की सेना में सभी ने एक-दूसरे को रक्षा-सूत्र बांधा था. आइए, जानते हैं कि इस साल राखी बांधने का सही मुहूर्त व समय क्या है.

रक्षाबंधन 2018: राखी बांधने का सही मुहूर्त व समय जानने के लिए देखें वीडियो:

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रक्षाबंधन से जुड़ी ज़रूरी जानकारियां:

* ज्योतिष पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 25 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 16 मिनट से प्रारंभ हो जाएगी, जो 26 अगस्त को शाम 5 बजकर 25 मिनट तक रहेगी. इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र दोपहर 12.35 बजे तक रहेगा.

* रक्षाबंधन का मुहूर्त 26 अगस्त को प्रातः 7.43 से दोपहर 12.28 बजे तक रहेगा. इसके बाद दोपहर 2.03 से 3.38 बजे तक रहेगा. शाम 5.25 पर पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी, लेकिन सूर्योदय व्यापिनी तिथि मानने के कारण रात्रि में भी राखी बांधी जा सकेगी.

* जिन लोगों का यज्ञोपवीत संस्कार हुआ हो, वे अपने यज्ञोपवीत आज के दिन बदलते हैं, जो कि ‘श्रावणी उपाकर्म’ कहलाता है.

* इस दिन का महत्व ज्योतिष तथा तंत्र की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. अतः जिन लोगों की पत्रिका में चंद्रमा अस्त हो, नीच या शत्रु राशि में हो, वे दूध, चावल, सफेद वस्त्र इत्यादि दान कर अपना दोष दूर कर सकते हैं. इसी तरह जिन लोगों का चंद्रमा पत्रिका में अच्‍छा हो, वे मोती धारण कर चंद्रमा को प्रबल बना सकते हैं.

* यदि आपको अपनी कुंडली की जानकारी नहीं है, तो आप दूध से रुद्राभिषेक कर हर तरह का लाभ प्राप्त कर सकते हैं.

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Rakshabandhan 2018

धन व ऐश्वर्य प्राप्त करने के लिए निम्न उपाय किए जा सकते हैं:

1) ‘ॐ चं चन्द्रमसे नम:’ का जप तथा हवन या ‘ॐ सों सोमाय नम:’ का जप-हवन करें.
2) रुद्र पूजन ‘ॐ सोमेश्वराय नम:’ का जप करें.
3) बड़ी बहन, माता, बुआ, मौसी इत्यादि को भेंट देकर आशीर्वाद प्राप्त करें.
4) महालक्ष्मी मंदिर में या घर पर ही लक्ष्‍मी पूजन कर दूध, चावल, केला व पंच मेवा से बनी खीर देवी को अर्पण करें तथा बालकों में प्रसाद वितरित करें, तब स्वयं ग्रहण करें.
5) रात्रि में दूध, चावल, श्वेत पुष्प मिश्रित कर चन्द्रमा को अर्घ्य दें तथा दिन में केवल श्वेत वस्तुएं ही भोजनादि में ग्रहण करें.
6) यदि सौभाग्यवश गुरु हों तो उन्हें पूजन कर भेंट दक्षिणा आदि अर्पण कर रक्षा-सूत्र बांधें. उनकी कृपा हमेशा बनी रहेगी.

 

होली पर विशेष: क्या है होलिकादहन की पूरी कहानी? (Holi Special: Why Do We Celebrate Holi?)

Holi Special: Why Do We Celebrate Holi

Holi Special: Why Do We Celebrate Holi

होली (Holi) से संबंधित सबसे पॉप्युलर कथा है हिरण्यकश्यप की बहन होलिका व प्रह्लाद की. क्या है यह कथा और क्यों मनाते हैं हम होली, आइए, जानें-

प्राचीन काल में एक बहुत ही अत्याचारी राक्षसराज था- हिरण्यकश्यप, जिसने तपस्या करके ब्रह्मा से वरदान पा लिया कि संसार का कोई भी जीव, देवी-देवता, राक्षस या मनुष्य उसे नहीं मार सकते. न ही वह रात में मरेगा, न दिन में, न पृथ्वी पर, न आकाश में, न घर में, न बाहर और यहां तक कि कोई शस्त्र भी उसे नहीं मार पाएगा.

ऐसा वरदान पाकर वह और भी ज़्यादा अत्याचारी व निरंकुश हो गया था. लेकिन इसी हिरण्यकश्यप के यहां प्रह्लाद जैसा पवित्र आत्मा व ईश्‍वर में अटूट विश्‍वास करनेवाला पुत्र पैदा हुआ. प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था.

हिरण्यकश्यप को यह बिल्कुल पसंद नहीं था कि उसका पुत्र किसी और को पूजे. उसने प्रह्लाद को आदेश दिया कि वह उसके अतिरिक्त किसी अन्य की स्तुति न करे. प्रह्लाद के न मानने पर हिरण्यकश्यप उसे जान से मारने पर उतारू हो गया और उसने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन वो हर बार प्रभु-कृपा से बचता रहा.

ऐसे में हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने एक सुझाव दिया, होलिका को अग्नि से बचने का वरदान था. यानी उसे एक ऐसा आवरण मिला था, जिससे आग उसे जला नहीं सकती थी. हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता से प्रह्लाद को आग में जलाकर मारने की योजना बनाई.

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होलिका बालक प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई. लेकिन भगवान की कृपा से होलिका का वह आवरण भक्त प्रह्लाद को मिल गया और उसको कुछ नहीं हुआ. वहीं होलिका जलकर भस्म हो गई.

इसके बाद हिरण्यकश्यप को मारने के लिए भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में खंभे से निकल कर गोधूली बेला यानी सुबह व शाम के समय का संधिकाल, में दरवाज़े की चौखट पर बैठकर हिरण्यकश्यप को अपने नुकीले नाख़ूनों से उसका पेट फाड़कर उसे मार डालते हैं.
नरसिंह न मनुष्य थे, न जानवर, न वो सुबह का समय था, न शाम का, हिरण्यकश्यप को मारते समय न वो अंदर थे, न बाहर और उनके नाख़ून न अस्त्र थे, न शस्त्र.

उसी समय से होली का त्योहार मनाया जाने लगा यानी एक तरह से यह अच्छाई की बुराई पर जीत का संदेश है. व्यक्ति चाहे कितना ही बलशाली क्यों न हो, यदि वो अत्याचार की सीमाएं पार कर जाता है, तो कितने भी वरदान हों, उसे बचा नहीं सकते. बुराई का अंत निश्‍चित है. इसी तरह हमें भी बुरी शक्तियां ही नहीं, अपने मन में पनप रही सारी नकारात्मक भावनाओं को भी होली की अग्नि में दहन कर देना चाहिए और नेकी के मार्ग पर आगे चलना चाहिए.

होली में सावधान रहें केमिकल रंगों के अटैक से… (Holi Special: Play Safe Holi)

Play Safe Holi

होली (Holi) मस्ती का, रंगों का और प्यार का त्योहार होता है. गिले-शिकवे भुलाने का और सबको अपना बनाने का इससे बेहतर मौक़ा शायद दूसरा नहीं होता. लेकिन इस रंग में भंग भी पड़ सकता है, अगर आपने सावधानी नहीं बरती तो. एक समय था, जब फूलों से या प्राकृतिक रंगों से होती खेली जाती थी. लेकिन जबसे केमिकलवाले रंगों (Chemical Colours) का चलन बढ़ा है, तब से स्किन प्राब्लम्स (Skin Problems) भी बढ़ी हैं. के. जे. सोमाया हॉस्पिटल (K J Somaya Hospital) के डर्मैटोलॉजी डिपार्टमेंट की प्रोफेसर और हेड डॉ. शीतल पुजारे बता रही हैं स्किन प्रॉब्लम्स से जुड़ी ज़रूरी बातें.

 

Play Safe Holi

– आर्टिफिशियल कलर्स में काफ़ी केमिकल्स होते हैं, जैसे- ब्लैक में लेड ऑक्साइड, ग्रीन में कॉपर सल्फेट, सिल्वर में एल्युमीनियम ब्रोमाइड, ब्लू में कॉबाल्ड नाइट्रेट, ज़िंक सॉल्ट्स और रेड में मरक्यूरि सल्फेट.
– इसके अतिरिक्त उनकी चमक बढ़ाने के लिए उनमें माइका डस्ट और ग्लास पार्टिकल्स भी मिलाए जाते हैं.
– ये तमाम चीज़ें त्वचा पर काफ़ी बुरा प्रभाव डालती हैं. आपको खुजली, त्वचा की ऊपरी परत निकलना, त्वचा का ड्राई होना और स्किन अल्सर तक हो सकता है.
– ये रंग आसानी से नहीं छूटते और स्किन पर व बालों में जम जाते हैं.
– अगर आपको पहले से ही त्वचा की कोई समस्या है, तो वो भी बढ़ सकती है. पिंपल्स से लेकर एक्ज़िमा की तकलीफ़ गंभीर हो सकती है.
– स्काल्प में जमा होने पर ये रंग हेयर फॉल को बढ़ा सकते हैं.
– आंखों में जलन-खुलजी हो सकती है. सांस की तकलीफ़ बढ़ सकती है.

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कैसे बचें इन रंगों के प्रभाव से?
– सबसे बेहतर उपाय है कि नेचुरल रंगों का प्रयोग करें.
– यदि यह संभव न हो, तो होली खेलने से पहले त्वचा और बालों पर तेल लगा लें.
– नाख़ूनों को छोटा रखें, ताकि रंग उनमें न जम सकें और नेल इनामिल लगाएं, जिससे रंगों से बचाव हो सके.
– आई वेयर आंखों को बचाने का बेहतर तरीक़ा है, यदि आंखों में रंग चला जाए, तो फ़ौरन पानी से आंख धोएं.
– कलर को छुड़ाने के लिए त्वचा को ज़ोर-ज़ोर से न रगड़ें. धीरे-धीरे रंग हल्के पड़ते जाएंगे.

किन स्थितियों में लें एक्सपर्ट की मदद?
– यदि आपको अत्यधिक स्किन एलर्जी, रेडनेस और खुजली बढ़ गई हो.
– अगर चेहरे पर सूजन आ गई हो.
– अगर सांस लेने में तकलीफ़ हो रही हो.
– बाल बहुत ज़्यादा झड़ने लगें या एक्ने एकदम से बढ़ जाएं.
– होंठों व नाख़ूनों का रंग नीला पड़ गया हो.

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मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। (Main Shiv Hun… Main Shiv Hun… Main Shiv Hun)

मैं शिव हूँ, Main Shiv Hun

 

मैं शिव हूँ, Main Shiv Hun

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। (Main Shiv Hun… Main Shiv Hun… Main Shiv Hun)

विभत्स हूँ… विभोर हूँ…
मैं समाधी में ही चूर हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

घनघोर अँधेरा ओढ़ के…
मैं जन जीवन से दूर हूँ…
श्मशान में हूँ नाचता…
मैं मृत्यु का ग़ुरूर हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

साम – दाम तुम्हीं रखो…
मैं दंड में सम्पूर्ण हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

चीर आया चरम में…
मार आया “मैं” को मैं…
“मैं” , “मैं” नहीं…
”मैं” भय नहीं…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

जो सिर्फ तू है सोचता…
केवल वो मैं नहीं…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

मैं काल का कपाल हूँ…
मैं मूल की चिंघाड़ हूँ…
मैं मग्न…मैं चिर मग्न हूँ…
मैं एकांत में उजाड़ हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

मैं आग हूँ…
मैं राख हूँ…
मैं पवित्र राष हूँ…
मैं पंख हूँ…
मैं श्वाश हूँ…
मैं ही हाड़ माँस हूँ…
मैं ही आदि अनन्त हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

मुझमें कोई छल नहीं…
तेरा कोई कल नहीं…
मौत के ही गर्भ में…
ज़िंदगी के पास हूँ…
अंधकार का आकार हूँ…
प्रकाश का मैं प्रकार हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

मैं कल नहीं मैं काल हूँ…
वैकुण्ठ या पाताल नहीं…
मैं मोक्ष का भी सार हूँ…
मैं पवित्र रोष हूँ…
मैं ही तो अघोर हूँ…

मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ। मैं शिव हूँ।

शिवरात्रि की शुभकामनाएं आप सभी को

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भाई दूज के पावन अवसर को यूं करें सेलिब्रेट (Bhai Dooj Celebration)

Bhai Dooj Celebration

Bhai Dooj Celebration

भैया दूज
दिवाली के अंतिम दिनों का पांचवां त्योहार भैया दूज है.
  • भाई दूज के दिन विवाहित या अविवाहित बहनों को प्रात: स्नान आदि से निपटकर भाई के स्वागत की तैयारी करनी चाहिए.
  • इस दिन यम की पूजा या भाई के आवभगत का तरीक़ा अलग होता है. इसके अनुसार बहनों को भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारनी चाहिए और कलावा बांधकर मुंह मीठा करने के लिए उन्हें माखन-मिश्री खिलानी चाहिए.
  • इस विधि के संपन्न होने तक दोनों को व्रती रहना चाहिए.
  • बहनों को शाम के समय यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखना चाहिए. इस समय आसमान में चील उड़ती दिखाई देने पर बहुत ही शुभ माना जाता है.
  • इस संदर्भ में मान्यता यह है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं, उसे यमराज ने क़बूल कर लिया है.यह भी पढ़ें: दिवाली स्पेशल: टॉप 5 रंगोली डिज़ाइन्स से करें ख़ुशियों का स्वागत

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क्या करें?
  • भाई को अपनी विवाहिता बहन के घर अवश्य जाना चाहिए.
  • बहन को अपने भाई का आतिथ्य सत्कार करना चाहिए और तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य, जीवन, स्वास्थ्य आदि की कामना करनी चाहिए.
क्या न करें?
  •  भाई को अपने घर बहन के आने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे ही बहन के घर जाना चाहिए.
  • बहन यमदेव की पूजा तक कुछ भी न खाए-पीए.

– मनीषा कौशिक

(वास्तु-फेंगशुई एक्सपर्ट)

दिवाली पार्टी करें इन 12 पंजाबी डांस नबंर्स के साथ (Top 12 Punjabi Dance Songs To Get Diwali Party Started!)

Top Punjabi Dance Songs

दिवाली पर फैमिली और दोस्तों संग के साथ पार्टी तो बनती ही है. लेकिन हर पार्टी अधूरी है पंजाबी गानों के बिना. जब तक पार्टी में पंजाबी डांस नंबर्स का तड़का न लगे, तब तक मज़ा नहीं आता है. इस दिवाली पर हम आपके लिए चुनकर लाए हैं 12 पंजाबी गाने, जो आपके फेस्टिवल को बनाएंगे और भी ख़ास.

हाई रेटेड गबरू- गुरु रंधावा

3 पेग- शैरी मान

वखरा स्वैग- नव इंदर, बादशाह

सूट- गुरु रंधावा, अर्जुन

ऑल ब्लैक- रफ़्तार

लेम्बोर्गिनी- दिलजीत दोसांझ

मर्सी- बादशाह

लव डोज़- यो यो हनी सिंह

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एम्लिफायर- इमरान खान

रिंग- नेहा कक्कर, जतिन्दर जीतू

लौंग गवाचा- नेहा भसिन

चार बॉटल वोडका- यो यो हनी सिंह

दिवाली स्पेशल: लक्ष्मी जी की आरती (Aarti- Lakshmi Ma)

Aarti godess Lakshmi ji maa

लक्ष्मी जी की आरती (Aarti- Lakshmi Ma)

Aarti godess Lakshmi ji maa

जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

ब्रह्माणी रूद्राणी कमला, तू ही है जगमाता ।
सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

दुर्गा रूप निरंजन, सुख सम्पति दाता ।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

तू ही है पाताल बसन्ती, तू ही है शुभ दाता ।
कर्म प्रभाव प्रकाशक, भवनिधि से त्राता ॥
जय लक्ष्मी माता…

जिस घर थारो वासो, तेहि में गुण आता ।
कर न सके सोई कर ले, मन नहीं धड़काता ॥
जय लक्ष्मी माता…

तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान को वैभव, सब तुमसे आता ॥
जय लक्ष्मी माता…

शुभ गुण सुंदर मुक्तता, क्षीर निधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

आरती लक्ष्मी जी की, जो कोई नर गाता ।
उर आनन्द अति उपजे, पाप उतर जाता ॥
जय लक्ष्मी माता…

स्थिर चर जगत बचावे, शुभ कर्म नर लाता ।
राम प्रताप मैया की शुभ दृष्टि चाहता ॥
जय लक्ष्मी माता…

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श्री गणेश जी की आरती 

Aarti lord ganesh ji

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।

माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय…

हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।

लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥ जय…

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।

कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥

जय..

DIY घर पर बनाएं डिज़ाइनर कुंदन दीया (DIY- Easy To Make Designer Kundan Diya)

DIY Designer Kundan Diya

DIY Designer Kundan Diya
सामग्री:
सीडी
ब्लू कुंदन
ग्रीन कुंदन
हाफ पर्ल
जाली वाला कैंडल स्टैंड (जाली वाटी)
गोल्डन लेस
कार्ड पेपर
अडेसिव ग्लू
रबर बेस्ड अडेसिव ग्लू
फैब्रिक ग्लू
कैंची

विधि:
* सबसे पहले सीडी पर अडेसिव ग्लू लगाएं और उस पर कार्ड पेपर चिपकाएं.
* कार्ड पेपर को सीडी के शेप में काट लें.
* सीडी के बीच में रबर बेस्ड अडेसिव ग्लू से जाली वाला कैंडल स्टैंड चिपकाएं.
* जाली वाले कैंडल स्टैंड के पास रबर बेस्ड अडेसिव ग्लू से गोल्डन लेस चिपकाएं.
* लेस के पास फैब्रिक ग्लू से हाफ पर्ल चिपकाएं.
* अब सीडी के किनारे पर फैब्रिक ग्लू से ब्लू कुंदन चिपकाएं.
* फिर ब्लू कुंदन के पास अंदर की तरफ़ ग्रीन कुंदन चिपकाएं.

DIY घर पर बनाएं ख़ूबसूरत एक्रेलिक रंगोली
दीपावली 2017: मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 20 अचूक उपाय

इसी तरह आप अलग-अलग कलर कॉम्बिनेशन का प्रयोग करके ख़ूबसूरत डिज़ाइनर कुंदन दीये बना सकते हैं.

घर पर ख़ूबसूरत डिज़ाइनर कुंदन दीया बनाना सीखने के लिए देखें वीडियो:

DIY घर पर बनाएं ख़ूबसूरत एक्रेलिक रंगोली (DIY- Easy To Make Decorative Acrylic Rangoli)

Decorative Acrylic Rangoli


सामग्री:
एक्रेलिक डिज़ाइन पीसेस
गोल्डन कुंदन
सिल्वर कुंदन
ग्रीन कुंदन
गोल्डन बॉल चेन
ग्रीन बॉल चेन
फैब्रिक ग्लू
कैंची
गोल्डन रिंग
हाफ गोल्डन मोती

DIY घर पर बनाएं डिज़ाइनर कुंदन दीया
दीपावली 2017: मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 20 अचूक उपाय

 

विधि:
* सबसे पहले एक्रेलिक रंगोली पीस के गोल हिस्से के किनारों पर फैब्रिक ग्लू लगाएं और उस पर ग्रीन कुंदन चिपकाएं.
* इसी तरह किनारे के डिज़ाइन (देखें चित्र) पर फैब्रिक ग्लू से सिल्वर कुंदन चिपकाएं.
* अब ग्रीन कुंदन के पास गोल्डन बॉल चेन चिपकाएं.
* गोल्डन बॉल चेन के पास ग्रीन बॉल चेन चिपकाएं.
* किनारे के डिज़ाइन पर सिल्वर कुंदन के पास गोल्डन बॉल चेन चिपकाएं.
* फिर गोल हिस्से पर ग्रीन बॉल चेन के पास गोल्डन रिंग चिपकाएं.
* अब गोल्डन रिंग के अंदर हाफ गोल्डन मोती चिपकाएं.

ऐसे ही सारे डिज़ाइन बना लें.

घर पर ख़ूबसूरत एक्रेलिक रंगोली बनाना सीखने के लिए देखें वीडियो:

बॉलीवुड का फेवरेट फेस्टिवल है करवा चौथ, देखें गाने और सीन्स (Top 5 Karwa Chauth Songs And Scenes)

Karwa Chauth Video Songs

करवा चौथ बॉलीवुड की पारिवारिक फिल्मों का फेवरेट त्योहार रहा है. कई फिल्मों में इस फेस्टिवल को बड़े ही भव्य अंदाज़ में दिखाया गया है. फिल्मों में करवा चौथ के सीन्स बेहद ही रोमांटिक और इस सिचुवेशन पर फिल्माए गए गाने बहुत ही कलरफुल हैं. यशराज फिल्म से लेकर करण जौहर तक कई लोगों ने फिल्मों में करवा चौथ को बड़े ही ग्लैमरस तरीक़े से दिखाया है.

आइए, देखते हैं इस ख़ूबसूरत त्योहार पर फिल्माए गए कुछ गाने.

फिल्म- दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे

फिल्म- हम दिल दे चुके सनम

फिल्म- कभी ख़ुशी कभी ग़म

फिल्म- करवा चौथ

फिल्म- बहू बेटी

फिल्मों में कई सीन्स भी हैं, जिसने करवा चौथ के महत्व और इससे जुड़े रीति-रिवाज़ों को बड़े पर्दे पर ख़ूबसूरती से दिखाया है.

फिल्म- बागबान

फिल्म- बाबुल

फिल्म- इश्क विश्क

नवरात्र स्पेशल: किस दिन क्या भोग लगाएं (Navratri Special: 9 Bhog For Nav Durga)

नवरात्र स्पेशल: किस दिन क्या भोग लगाएं
नवरात्र में व्रत-पूजा की तरह ही भोग का भी बहुत महत्व होता है. मां के नौ रूपों को कौन-से नौ भोग लगाने चाहिए, आइए जानते हैं.
प्रतिपदा: रोगमुक्त रहने के लिए मां शैलपुत्री को गाय के घी से बनी स़फेद चीज़ों का भोग लगाएं.
द्वितीया: लंबी उम्र के लिए मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भोग लगाएं.
तृतीया: दुख से मुक्ति के लिए मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीज़ों का भोग लगाएं.
चतुर्थी: तेज़ बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं.
पंचमी: स्वस्थ शरीर के लिए मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाएं.
षष्ठी: आकर्षक व्यक्तित्व और सुंदरता पाने के लिए मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाएं
सप्तमी: शोक व संकटों से बचने के लिए मां कालरात्रि की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करें.
अष्टमी: संतान संबंधी समस्या से छुटकारा पाने के लिए मां महागौरी को नारियल का भोग लगाएं.
नवमी: सुख-समृद्धि के लिए मां सिद्धिदात्री को हलवा, चना-पूरी, खीर आदि का भोग लगाएं.
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