film director

अनुराग कश्यप और तापसी पन्नू पर जबसे इनकम टैक्स की रेड पड़ी है, तभी से कंगना के निशाने पर हैं वो और वैसे भी कंगना पंगा लेने से पीछे हटती भी नहीं. कंगना ने बैक टु बैक ट्वीट करके दोनों पर ही नहीं बल्कि बॉलीवुड समेत तमाम उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जो फ़्रीडम ऑफ एक्स्प्रेशन के नाम पर देश विरोधी बातें कर जाते हैं.
कंगना ने लिखा है कि हर मिनट संख्या बढ़ रही है, पहले 350 करोड़ की हेराफेरी की बात सामने आई थी और अब ये संख्या 650 करोड़ की हो चुकी है. ये तो छोटे प्लेयर्स हैं, बुलीडवुड में टुकड़े-टुकड़े गैंग के आतंकवाद की जड़ें कितनी गहरी हो सकती हैं. कंगना ने अपने ट्वीट में ये भी लिखा है कि आईटी डिपार्टमेंट का दावा है कि इन्होंने अपने फ़ोन से डेटा डिलीट किया है, मनी लॉंडरिंग के मामले में और भी कई चौंकानेवाले ख़ुलासे हो सकते हैं.

Kangana
Photo Courtesy: Twitter

कंगना कहती हैं कि डेटा को रेट्रीव किया का सकता है, पर ये छोटे प्लेयर हैं, आप कल्पना कर सकते हैं कि फिल्म इंडस्ट्री में इस आतंकवाद की जड़ें कितनी गहरी होंगी. ये लोग देश के पैसों का नुकसान कर रहे हैं. सरकार को एक अच्छा उदाहरण सेट करना चाहिए. ये लोग इस देश के टुकड़े आतंकवाद को नहीं बेच सकते हैं. जय हिंद!

Taapsee Pannu-Anurag Kashyap
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कंगना ने ये भी कहा कि चोर-चोर मौसेरे भाई होते हैं और ग़द्दारों का समर्थन करनेवाले भी ग़द्दार ही होते हैं और चोर सिर्फ़ चोर ही होता है जो देश का सौदा कर अपनी मातृभूमि के टुकड़े करना चाहता है वो ग़द्दार ही कहलाता है और जिससे चोरों को डर लगता है वो साधारण मानव नहीं नरेंद्र मोदी होता है!

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हैप्पी बर्थडे गुलज़ार साहब! देखें उनके 10 बेहतरीन गानेअपने शब्दों से जादू कर लोगों की दिलों में अपनी एक ख़ास जगह बनाने वाले गुलज़ार साहब हो गए हैं 83 साल के. 5 दशकों से अपनी शायरी, कविताओं, गानों और कहानियों के ज़रिए हर किसी को अपना कायल बनाए हुए हैं. उनकी उम्र कभी उनके शब्दों की उड़ान को नहीं रोक पाई. झेलम ज़िलें के दीना गांव, जो अब पाकिस्तान में है जन्मे गुलज़ार साहब बंटवारे के बाद परिवार के साथ पंजाब में आकर बस गए. वो हमेशा से ही राइटर बनना चाहते थे. परिवार के मर्ज़ी के बिना गुलज़ार साहब मुंबई आ गए और यहां वो एक गैरेज में मैकेलिक के तौर पर काम करने लगे, लेकिन दिल में राइटर बनने के जज़्बा लिए हुए. जब भी उन्हें समय मिलता, वो कविताएं लिखने लगते. उन्हें पहला ब्रेक मिला बिमल रॉय की फिल्म बंदिनी में. पद्म भूषण गुलज़ार साहब ने कई बेहतरीन कहानियां तो लिखी ही हैं, साथ ही उन्होंने मौसम, आंधी, माचिस, अंगूर, नमकीन, इजाज़त जैसी फिल्मों का निर्देशन भी किया है.आज के दौर में भी मॉडर्न टेस्ट को समझते हुए गुलज़ार साहब ऐसे गाने लिख जाते हैं कि उनके सामने युवा गीतकार भी फ़ीके पड़ जाते हैं. गुलज़ार साहब जानते हैं कि शब्दों से खेलकर कैसे एक बेहतरीन रचना बनाए जा सकती है. शायद ही कोई हो, जो उनकी तरह प्यार के ख़ूबसूरत एहसास या दिल टूटने के दर्द को गानों के ज़रिए बयां कर पाए. बंटवारे का दर्द भी कई बार उनके गीतों में नज़र आया है.

आइए उनके जन्मदिन के मौक़े पर देखते हैं उनके कुछ बेहतरीन गाने.

फिल्म- खामोशी

फिल्म- मासूम

https://www.youtube.com/watch?v=LZ_YUOr-tYw

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फिल्म- आंधी

फिल्म- इजाज़त

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फिल्म- आनंद

https://www.youtube.com/watch?v=3vgDb4TQneA

फिल्म- माचिस

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फिल्म- डेढ़ इश्किया

फिल्म- घर

https://www.youtube.com/watch?v=NbqCWwlNKrA

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फिल्म- कमीने

फिल्म- बंटी और बबली

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