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कोरोना अलर्ट: कोरोना वायरस को लेकर कहीं फिल्म स्टार्स के संदेश, कविता तो कहीं सेफ हैंड्स चैलेंज… (Corona Alert: Somewhere The Film Stars’ Messages About The Corona Virus, Poetry Somewhere And Safe Hands Challenge…)

करोना वायरस को लेकर अलर्ट करने के लिए इन दिनों बहुत कुछ हो रहा है. अमिताभ बच्चन तो लगातार इससे जुड़े जागरूकता के मुहिम में शामिल हैं. अब उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से अपने हाथ पर बीएमसी द्वारा होम क्वारंटाइन मुहर को शेयर किया है. जो लोग इस कोविड-19 के चलते घर पर अलग-थलग रह रहे हैं. उनके लिए बीएमसी ने यह अभियान शुरू किया है. उन्होंने अमिताभ बच्चन इस तरह जागरूक करने के लिए धन्यवाद भी कहा.

आयुष्मान खुराना ने इससे जुड़े दर्द को कविता के रूप में पेश करते हुए कहा कि अब अमीर का हर दिन रविवार हो गया, और गरीब है अपने सोमवार के इंतज़ार में… अब अमीर का हर दिन सह परिवार हो गया, और गरीब है अपने रोज़गार के इंतज़ार में… उनकी इस कविता को बेहद पसंद किया जा रहा है. दरअसल, फिल्मों व टीवी सीरियल्स की शूटिंग भी बंद होने के कारण जो लाइट्समैन, टेक्निशियन, जूनियर आर्टिस्ट आदि रोज़ बेसिस पर काम करते थे, उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में फिल्म इंडस्ट्री ने उनके लिए मदद का हाथ भी बढ़ाया है. उन्हें राशन और ज़रूरी मदद मुहैया करवाई जा रही है.

दीपिका पादुकोण ने भी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा शुरू किए गए सेफ हैंड्स चैलेंज के तहत हाथों को अच्छी तरह से धोने का वीडियो शेयर किया. उन्होंने इस चुनौती को आगे बढ़ाते हुए विराट कोहली, रोजर फेडरर, क्रिएस्टीना रोनाल्डो को दिया. डब्लूएचओ के डायरेक्टर जनरल ने सेफ हैंड्स चैलेंज दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा को टैग करके दिया था, जिसमें दीपिका ने तो पूरा कर लिया, पर प्रियंका का अभी बाक़ी है.

इस तरह दुनियाभर में कोरोना वायरस को लेकर जागरूकता फैलायी जा रही है, जिसमें फिल्मी सितारे भी अपना बेहतरीन सहयोग दे रहे हैं.

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अदनान सामी- भारत में ख़ुद को सुरक्षित महसूस करता हूं… (Adnan Sami- I Feel Safe In India…)

आज जब धर्म को लेकर कई फिल्मी सितारे और असामाजिक तत्व बयानबाज़ी के ज़रिए राजनीति कर रहे हैं, ऐसे में अदनान सामी का यह कहना कि वे मुसलमान के तौर पर ख़ुद को भारत में बेहद सुरक्षित महसूस करते हैं, उन सभी के लिए करारा जवाब है.

Adnan Sami

अदनान सामी के गीतों, साफ़गोई व मधुरता के तो सभी दीवाने हैं ही, लेकिन अपने इस बयान से उन्होंने हिंदुस्तानियों का दिल जीत लिया. उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि धर्म के नाम पर गंदी सोच का इस देश में कोई स्थान नहीं है. सामी ने यह भी स्पष्ट किया कि आज इस बात को समझने की ज़रूरत है कि सीएए (नागरिकता संशोधन क़ानून) भारत के लोगों के लिए नहीं, बल्कि उनके लिए है, जो भारत की नागरिकता चाहते हैं. ऐसे में समझ में यह नहीं आ रहा कि ग़लतफ़हमी कहां पर है. सब कुछ साफ़ व स्पष्ट तो है.

उनके अनुसार, मैंने भारत की नागरिकता इसलिए ली थी कि मैं ख़ुद को एक मुस्लिम के रूप में सबसे अधिक सेफ यही पर महसूस करता हूं. मुझे भारत से प्यार है.

उन्होंने अल्पसंख्यकों पर होनेवाले अत्याचारों का भी ज़िक्र किया. जब वे इस्लामाबाद के एफ सेक्टर में रहते थे, तब उन्होंने वहां पर ईसाई समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव होते देखा था. चूंकि उन्होंने इसे जाना-समझा है, इसी कारण वे सीएए का समर्थन भी कर रहे हैं. इससे तमाम पीड़ित लोगों को मदद और उचित मान-सम्मान मिलेगा. पिछले दिनों अदनान को पद्मश्री पुरस्कार देने पर भी ख़ूब जमकर विपक्ष ने राजनीति की थी. वे भी क्या करें आदत से मजबूर हैं.

लंदन में जन्मे पाकिस्तान मूल के अदनान सामी को जब अपने लिए सुकूनभरे घर की तलाश थी, तब उन्हें सबसे सुरक्षित और प्यारा हिंदुस्तान ही लगा. देश ने भी उन्हें उतना ही प्यार व सम्मान भी दिया.

उन्होंने एक और सुलझी हुई महत्वपूर्ण बात कही कि वे एक मुसलमान हैं, पर वे सभी जाति-धर्म का सम्मान करते हैं. साथ ही वे इंसानियत का भी सम्मान करते हैं, फिर वह किसी भी रूप में क्यों न हो. आज हर किसी को अदनान सामी से प्रेरणा लेने की ज़रूरत है और सभी भेदभाव व ग़लतफ़हमियों को दरकिनार कर प्रेम, शांति व भाइचारे के साथ एकजुट होकर रहना है.

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब अदनान सामी ने देश के हित व भाईचारे पर अपनी बात रखी हो. वे इसके पहले भी कई मौक़ों पर एकता व प्रेम का संदेश देते रहे हैं.

अदनान सामी भारत में अपने सबसे चर्चित गाने थोड़ी तो लिफ्ट करा दे… से इस कदर मशहूर हुए थे कि सभी उनको पसंद करने लगे थे. उसके बाद कभी तो नज़र मिलाओ… तेरा चेहरा… गीत ने भी उन्हें ख़ास मुक़ाम दिलाया. उनके तेरी क़सम व किसी दिन एलबम भी ख़ूूब पसंद किए गए थे. अब उनका नया एलबम तू याद आया भी ख़ूब पसंद किया जा रहा है.

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सीएए पर इतना हंगामा क्यों?.. क्या इस रात की कोई सुबह नहीं…? फिल्ममेकर का बेबाक़ बयान… (Why So Much Uproar On CAA? .. Is There No Morning On This Night… Impeccable Statement Of Filmmaker…)

काफ़ी समय से सीएए को लेकर आए दिन कुछ-न-कुछ हो रहा है. इसमें आम जनता तो कम, लेकिन शरारती तत्व अधिक परेशान कर रहे हैं. तभी तो फिल्म निर्माता- लेखक विवेक अग्निहोत्री ने इसे अरबन नक्सल तक नाम दे दिया. हर भारतीय की तरह उन्हें भी देश व लोगों की चिंता है. तभी तो वे लगातार सोशल मीडिया पर इसे लेकर अपनी बात व पक्ष रख रहे हैं.

Statement Of Filmmaker

 

इस रात की कोई सुबह नहीं… जैसे बयां उनके आहत मन को ही दर्शा रहे हैं. उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें जिस तरह देश में कहीं-न-कहीं हर रोज़ तोड़-फोड़ के समीकरण बन-बिगड़ रहे हैं, यह कहीं सिविल वॉर के संकेत तो नहीं? वे कौन लोग हैं, जो इस तरह की कामों में लिप्त हैं.

कहीं ये सब दुनिया में देश को अपमानित करने का षड़यंत्र तो नहीं रचा जा रहा.,. इस तरह की आशंका भी विवेकजी ने जताई है. आख़िर कोई कैसे अपने ही देश की संपत्ति को इस कदर नुक़सान पहुंचा सकता है. यह है तो हम सभी का घर ना!.. कैसे इसके बारे में ग़लत व बुरा बोल सकते हैं. क्योंकर? हमारी परवरिश में कमी रह गई या फिर अभिभावकों के संस्कार में.

 

अपनी बात को मनवाने की ज़िद… आम नागरिक को परेशान करना… रक्षक को ही भक्षक की संज्ञा देना… जान-बूझकर पत्थरबाज़ी, आगजनी करना, ताकि माहौल और बिगड़ जाए. इन सब हालातों में सितारे भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आते. कुछ प्रतिष्ठित लेखक, कलाकार हैं, जो अक्सर कुछ-न-कुछ ऐसा कहते जा रहे हैं, जिससे स्थिति सुधरने की बजाय और बिगड़ जाती है. इसमें फिल्म इंडस्ट्री भी दो भागों में बंट गई है. जहां एक तरफ़ जावेद अख़्तर, स्वारा भास्कर, रिचा चड्ढा, अनुराग कश्यप जैसे नफ़रत की राजनीति कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ वंो पक्ष भी है, जो शांति बहाल करना चाहता है. इसमें अनुपम खेर तो कई बार सटीक व समझदारीभरे तथ्य रख रहे हैं और लोगों को जागरूक होने की पैरवी भी कर रहे हैं.

कौन कितना सही है और कितना ग़लत, यह तो हम सभी देख रहे हैं. लेकिन कुछ असमाजिक तत्व जिस तरह की हरकतें कर रहे हैं, वो ठीक नहीं. स्पष्टतौर पर कहें, तो इसकी ज़रूरत भी नहीं है, लेकिन फिर भी वे तिल का ताड़ बनाते जा रहे है, जिसे हम सभी को गंभीरता से सोचना व समझना होगा. चुभते शब्द, व्यंग्यबाण, धर्म की आड़, जाति की दुहाई कहां तक जायज़ है. इस पर ध्यान देना होगा.

कल रात मुंबई में भी सीएए को लेकर स्थिति बिगड़ रही थी, पर पुलिस द्वारा इसे नियंत्रण में कर लिया गया.

विवेक अग्निहोत्री ने अपने कुछ बातों, वीडियो आदि के ज़रिए कम में ही बहुत कुछ कहने की कोशिश की है. हर समस्या का समाधान शांति की नींव पर ही टिका होता है, इसके मर्म को जानना होगा.

भारतभर में हो रहे हंगामे, धरने, हल्ला बोल जैसी स्थिति के बारे में आप क्या सोचते हैं? आपकी क्या राय है, ज़रूर बताएं. शेष फिर…

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अवॉर्ड बिकता है… विवादों से घिरे रहे कई पुरस्कार… (Many Awards Surrounded By Controversies…)

सालों पहले शाहरुख ख़ान ने एक अवॉर्ड शो में कहा था कि उन्हें अवॉर्ड नहीं मिलता, तो वे पैसे लेकर आए थे, उसे ख़रीदने के लिए… जाने-अनजाने में उन्होंने फिल्मों के लिए दिए जानेवाले कई अवॉर्ड्स के कर्ता-धर्ताओं पर प्रश्नचिह्न लगाया था. जो सिलसिला बरसों से था, वो आज भी बरक़रार है. गली बॉय को तेरह फिल्मफेयर अवॉर्ड्स मिलना, जबकि उससे बेहतर कई फिल्में नामांकित थीं, कुछ अजीब ही नहीं, गोलमाल भी लगता है, ऐसा फैन्स व कई मशहूर हस्तियां कह रही हैं.

 Awards Surrounded By Controversies

 

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Alvida Awards..!!!

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यूं तो कई फिल्मी पुरस्कारों में गाहे-बगाहे भेदभाव का आरोप लगता ही रहा है. लेकिन इस बार तो अति ही हो गई. एक तरफ़ सुपर 30, केसरी, मणिकर्णिका, छिछोरे, मिशन मंगल, कबीर सिंह जैसी फिल्मों को सिरे से नकार दिया गया. केसरी फिल्म के गीत तेरी मिट्टी… को अवॉर्ड न मिलने पर इसके गीतकार मनोज मुंतशिर इस कदर आहत हुए कि उन्होंने अपना दर्द सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए अवॉर्ड शो में ताउम्र न जाने की बात तक कह दी. डियर अवॉर्ड… से उन्होंने एक इमोशनल नोट भी लिखा, जो वायरल हो गया. बॉयकॉट फिल्मफेयर भी ट्रेंड कर रहा है, जिस पर सिनेमा प्रेमी अपनी भड़ास निकाल रहे हैं.

अपने बेबाक़ बोल के लिए मशहूर कंगना रनौत की बहन रंगोली ने तो भाई-भतीजावाद पर कटाक्ष करते हुए करण जौहर, आलिया भट्ट की टीम को ख़ूब खरी-खरी सुना दी. बकौल उनके पिछले साल औसत मूवी के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड दे दिया गया था. इस बार तो और भी अति हो गई उनके सर्पोटिंग रोल यानी गली बॉय फिल्म में बहुत कम उनका काम था, के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार पकड़ा दिया गया. बात चुभनेवाली है, पर सच्चाई है इसमें कोई दो राय नहीं. कंगना रनौत, विद्या बालन जैसी अभिनेत्रियों के बेहतरीन परफॉर्मेंस की अनदेखी की गई.

सोशल मीडिया पर आमिर ख़ान का एक वीडियो भी ख़ूब पसंद किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने इस बात का स्पष्टीकरण दिया है कि क्यों वे अवॉर्ड फंक्शन में नहीं जाते. जब उनके जैसे सशक्त अभिनेता के साथ बरसों से भेदभाव होता रहा है, तो आज के कलाकारों का क्या कहना. वीकेंड में एक तरफ़ जहां अवॉर्ड शो विवादों से घिरा रहा, तो दूसरी तरफ़ बिग बॉस 13 के विजेता को लेकर भी कुछ कम छींटाकशी नहीं हुई. आसीम के फैन्स ने इसके निर्माता चैनल व सलमान ख़ान पर भी फेवरिज़्म के इल्ज़ाम लगाए. अधिकतर लोगों का मानना था कि सिद्धार्थ शुक्ला, जो विजेता रहे हैं, से अधिक क़ाबिल आसिम थे, उन्हें विनर बनाना था. फैन्स के अलावा रश्मि देसाई ने भी अपनी पसंद आसिम को ही बताया. उन्होंने भी शो से निकलने के बाद दिए गए इंटरव्यू भी यह बात कही.

फिल्मी पुरस्कारों को लेकर लंबे समय से आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे हैं. दर्शकों का तो यह भी कहना था कि गली बॉय फिल्म तो ओरिजनल कॉन्सेप्ट भी नहीं था, इसी कारण ऑस्कर से बाहर हो गया था. फिर भी इसे सबसे अधिक पुरस्कार मिले, भला यह कहां का न्याय है. सिने प्रेमियों ने अपना ग़ुस्सा इसे लेकर तरह-तरह के मीम्स बनाकर प्रकट की. सोशल मीडिया पर ये मज़ेदार मीम्स का हर कोई ख़ूब आनंद ले रहा है. इस पर एक नज़र डालते हैं.

 

 

चाहे कोई भी अवॉर्ड्स हों, फिल्मों को लेकर या फिर टीवी शोज़ के, अवॉर्ड देनेवालों को इस बात का ख़्याल रखना होगा कि सही व उपयुक्त पात्र को ही पुरस्कार मिले, वरना वो दिन दूर नहीं जब वे अपनी साख व विश्‍वसनीयता पूरी तरह से खो बैठेंगे. इस विषय में आपकी क्या राय है, आप इसे कितना सही या ग़लत मानते हैं, ज़रूर बताएं.

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ट्रेलर: कुछ ज़्यादा ही सावधान करती है ‘शुभ मंगल ज़्यादा सावधान’ फिल्म.. (Shubh Mangal Jyada Saavdhan Trailer: Film Makes People More Careful..)

सावधानी हटी, दुर्घटना घटी… कहा जाता है, पर कुछ सावधानियां ऐसी भी होती हैं कि परेशान भी करती हैं, गुदगुदाती भी हैं, जैसा कि शुभ मंगल ज़्यादा सावधान के साथ हो रहा है. आयुष्मान खुराना और जितेंद्र कुमार की जुगलबंदी इस फिल्म को और भी मज़ेदार और हास्य से भरपूर बना देती है ट्रेलर देखकर तो ऐसा ही लग रहा है.

Shubh Mangal Jyada Saavdhan Trailer

इसमें बधाई हो कि हिट जोड़ी नीना गुप्ता व गजराज राव भी दिलचस्प भूमिकाओं में नज़र आएंगे. वहीं भूमि पेडनेकर का केमियो रोल फिल्म का ख़ास आकर्षण है.

इसे ये नहीं… गे कहते हैं… जब मैंने पहली बार उसे देखा तो मेरी बड़ी हो गई थी पुतलियां,.. मैं मदर इंडिया बनूंगी… कुछ सरल, तो कुछ द्विअर्थी संवाद फिल्म को और भी मज़ेदार बना देते हैं. हमेशा की तरह आयुष्मान खुराना अपनी छाप छोड़ जाते हैं और उनका भरपूर साथ देते हैं जितेंद्र कुमार. नीना व गजराज भी ख़ूब जमे हैं. उन दोनों की इस रिश्ते को लेकर क्रियाएं-प्रतिक्रियाएं ग़ज़ब के हैं. दोनों जितेंद्र के अभिभावक बने हैं. आयुष्मान का बोल्ड अंदाज़, उनका व जितेंद्र का लिप लॉक कहानी को एक नया मोड़ देने लगता है. सभी कलाकारों ने फिल्म को मनोरंजन बनाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी है.

शुभ मंगल सावधान फिल्म का सीक्वल है शुभ मंगल ज़्यादा सावधान. उसमें जहां पुरुषों के इरेक्शन जैसे अछूते विषय को गहराई से समझाया गया था. वहीं इसमें होमोसेक्सुअल रिलेशन को हाइलाइट किया गया है. वैसे बकौल आयुष्मान खुराना के यह पूरी तरह से पारिवारिक फिल्म है, जिसे आप सभी के साथ देख सकते हैं. अक्सर इस तरह के विषयों पर कम बात होती है और समाज का दृष्टिकोण भी अलग रहता है. ऐसे में इस फिल्म का आना और उस पर कलाकारों का दावा करना कि यह थोड़ी अलग है और सभी को ज़रूर पसंद आएगी, क्योंकि इसमें एक सार्थक संदेश देने की भी कोशिश की गई है, इसके प्रति उत्सुकता बढ़ा देता है.

आज फिल्म के ट्रेलर के साथ-साथ इसके कई दिलचस्प पोस्टर्स भी देखने को मिले, जो फिल्म की कहानी को मनोरंजक ढंग से से बयां करते हैं, उस पर आयुष्मान का अंदाज़ कि- कार्तिक का प्यार हो कर रहेगा अमन!.. वे शादी के स्टेज पर जितेंद्र के साथ मस्तीभरे स्टाइल में हैं और जितेंद्र उन्हें प्यार से निहार रहे हैं. जबकि परिवार चिंता, ग़ुस्से, आक्रोश के मिलेजुले अंदाज़ में दोनों को आग्नेय नेत्रों से देख रहा है.

दूसरी तस्वीर भी कुछ कम रोचक नहीं है. इसमें दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे फिल्म के क्लाइमेक्स के सीन को रिक्रिएशन किया गया दिख रहा है. जहां आयुष्मान बैग लिए ट्रेन के दरवाज़े पर हाथ बढ़ाते हुए जितेंद्र को थामने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं जितेंद्र कुमार ट्रेन के साथ भाग रहे हैं, उनके पीछे-पीछे उनका परिवार भी दौड़ रहा है. उ़फ् यह लव स्टोरी क्या गुल खिलाएगी, यह तो ऊपरवाला ही जानें.

तीसरी फोटो तो माशाअल्लाह अफ़लातून है. इसमें आयुष्मान घोड़ी पर सवार जितेंद्र को थामे हुए हैं और जितेंद्र के पैरेंट्स नीना गुप्ता व गजराज राव मानों दर्शकों से पूछ रहे हैं कि आख़िर इन दोनों का क्या करें. उस पर स्लोगन भी लाजवाब है कि जीतेगा प्यार सह-परिवार.. अब भाई यह क्या टोटका है, यह तो फिल्ममेकर ही जाने.

 

फिल्म के निर्माता आनंद एल. राय व भूषण कुमार के साथ-साथ निर्देशक हितेश केवालिया का भी मानना है कि उन्होंने इस संवेदनशील विषय को अलग ट्रीटमेंट दिया है. उनके अनुसार, हंसी-मज़ाक व मनोरंजन के साथ एक उद्देश्यपूर्ण बात भी कहती है फिल्म.

वैसे भी पिछले कुछ समय से आयुष्मान खुराना कई ऐसे विषयों पर फिल्म कर रहे हैं, जो भरपूर मसाला व हास्य के साथ-साथ समाज में फैले ग़लत बातों को भी उजागर करती है, जैसे- ड्रीम गर्ल, बाला आदि. यह फिल्म फरवरी में 21 तारीख़ को रिलीज़ होनेवाली है. समलैंगिकता पर आधारित शुभ मंगल ज़्यादा सावधान लोगों को कितना सावधान करेगी, यह तो फिल्म देखने के बाद ही जान पाएंगे. फ़िलहाल फिल्म के ट्रेलर का आनंद लीजिए…

 

 

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बर्थडे स्पेशल: जावेद अख़्तर के जन्मदिन पर छाया रहा सितारों का रेट्रो लुक… (Birthday Special: Retro Look Of The Stars That Overshadowed Javed Akhtar’s Birthday…)

हिंदी सिनेमा के उम्दा व बेहतरीन शायर, गीतकार, लेखक जावेद अख़्तर आज अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं. कल रात से ही उनके जन्मदिन की धूम मची रही, ख़ासतौर पर रेट्रो थीम पर रहे बर्थडे पार्टी में फिल्मी हस्तियों का लुक मज़ेदार व शानदार रहा.

Javed Akhtar

जावेद अख़्तर और शबाना आज़मी लाल रंग के आउटफिट में काफ़ी ख़ूबसूरत व आकर्षक लग रहे थे. उनके बेटे फरहान अख़्तर ने तो डॉन फिल्म में अमिताभ बच्चन की वेशभूषा धारण की थी, उस पर सिर पर गमछा भी बांध रखा था. बिल्कुल डॉन के गीत खइके पान बनारसवाला खुल जाए बंद अक्ल का ताला… गाने में अमितजी के अंदाज़ की नकल की थी फरहान ने.

Farhan Akthar

इस फेहरिस्त में सतीश कौशिक भी अपनी पत्नी के साथ काले रंग के पोल्का डॉट्स के ड्रेसेस में कुछ कम दिलचस्प नहीं लग रहे थे.

Javed Akhtar Birthday Party

अनिल कपूर पत्नी सुनीता के साथ हमेशा की तरह डैशिंग व अट्रैक्टिव दिखे. बड़े भाई बोनी कपूर तो अपनी इमेज से हटकर रेट्रो लुक में शरारतभरी मुस्कान के साथ छाए रहे.

Anik Kapoor Javed Akhtar Birthday Party Javed Akhtar Birthday Party

उर्मिला मातोंडकर भी फराह ख़ान के साथ अपने हुस्न का जलवा दिखाते हुए रंगाीला हो रही थीं.

Javed Akhtar Birthday Party

दिव्या दत्ता लाल रंग के शरारे में गज़ब ढा रही थीं. उस पर मैचिंग करते गहने और क़ातिल मुस्कान, भई वाह क्या बात है.

Javed Akhtar Birthday Party

आमिर ख़ान पत्नी किरण राव के साथ रेट्रो लुक में कुछ अलग ही दिख रहे थे. वैसे भी यह जोड़ा जहां कहीं जाता है, अपनी छाप छोड़ जाता है.

Aamir Khan

आशुतोष गोवरिकर भी अपनी धर्मपत्नी के साथ मुस्कुराते हुए रंग जमाने पहुंचे.

Javed Akhtar Birthday Partyफोटो: योगेन शाह

कह सकते हैं कि जावेद साहब के जन्मदिन पार्टी को यादगार बनाने में बॉलीवुड के स्टार्स ने कोई कसर बाकी नहीं रखी.

Javed Akhtar Javed AkhtarJaved Akhtar

ज़िंदगीनामा…

* आज जावेद साहब अपना प्लेटिनम जुबली सालगिरह मना रहे हैं.

* वे बचपन से ही कविताएं और गीत लिखा करते थे.

* उनका असली नाम जादू है. ये नाम उनके पिता ने उनकी ही लिखी हुई पंक्ति- लम्हा-लम्हा किसी जादू का फ़साना होगा… से लेकर उन्हें दी थी.

* स्कूल में उनके मित्र उनसे प्रेमपत्र लिखवाया करते थे.

* गीतकार, कवि, शायर व स्क्रिप्ट राइटर जावेदजी का जन्म 17 जनवरी 1945 को पिता जाननिसार अख़्तर के यहां हुआ था.

* पिता मशहूर गीतकार थे और मां सैफिया अख़्तर गायिका व लेखिका थीं.

* बचपन से ही जावेद उसी माहौल में रहे हैं, ऐसे में शब्दों से खेलना उनके लिए कोई मुश्किल काम नहीं था.

* हिंदी सिनेमा के लिए बेहतरीन गीत लिखनेवाले जावेदजी ने ग़ज़ल को भी एक नया रूप दिया.

* जब जावेद मुंबई आए, तब उनके पास रहने के लिए घर भी नहीं था. कई रातें उन्होंने सड़कों पर गुज़ारी थीं.

* सलीम ख़ान और जावेद अख़्तर की मुलाक़ात सरहदी लुटेरा फिल्म के सेट पर हुई थी. इस फिल्म में सलीम ख़ान हीरो थे और जावेद क्लैपर बॉय थे.

* सलीम ख़ान व जावेद अख़्तर की जोड़ी ने साथ में 24 फिल्में लिखीं, जिनमें से 20 सुपर डुपर हिट रहीं.

* उस दौर में स्क्रिप्ट राइटर का नाम फिल्मी पर्दे पर नहीं दिखाया जाता था, लेकिन सलीम-जावेद की फिल्मों ने यह करिश्मा कर दिखाया.

* मिस्टर इंडिया फिल्म के बाद सलीम-जावेद की जोड़ी टूट गई.

* बतौर गीतकार जावेदजी की पहली फिल्म सिलसिला रही.

* बहुत कम लोग जानते हैं कि जावेदजी अपना जन्मदिन अपनी पहली पत्नी हनी ईरानी के साथ शेयर करते हैं. दोनों का ही जन्मदिन 17 जनवरी को है.

* जावेदजी कैफ़ी आज़मी को असिस्ट किया करते थे. वहीं उनकी मुलाक़ात शबाना आज़मी से हुई और छह साल तक अफेयर के बाद दोनों ने शादी कर ली.

* पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित जावेद सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए पांच राष्ट्रीय और 14 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स भी जीत चुके हैं.

Javed Akhtar
जावेद अख़्तर के शानदार संवाद पर एक नज़र…

* मेरे पास मां है…

* अरे ओ सांबा कितने आदमी थे…

* आज ख़ुश तो बहुत होंगे तुम…

* जब तक बैठने को ना कहा जाए, शराफ़त से खड़े रहो… यह पुलिस स्टेशन है, तुम्हारे बाप का घर नहीं है…

* मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता…

* ये हाथ हमको दे दे ठाकुर…

* हमारे देश में काम ढूंढ़ना भी एक काम हैे…

* मैं जब भी किसी से दुश्मनी मोल लेता हूं, तो सस्ते-महंगे की परवाह नहीं करता…

* तू अभी इतना अमीर नहीं हुआ बेटा कि अपनी मां को ख़रीद सके…

* इस दुनिया में दो टांगवाला जानवर सबसे ख़तरनाक है…

Javed Akhtar

उम्दा गीत, ग़ज़ल, शायरी…

आप भी आइए हमको भी बुलाते रहिए

दोस्ती ज़ुर्म नहीं दोस्त बनाते रहिए

ज़हर पी जाइए और बांटिए अमृत सबको

ज़ख़्म भी खाइए और गीत भी गाते रहिए

व़क्त ने लूट लीं लोगों की तमन्नाएं भी

ख़्वाब जो देखिए औरों को दिखाते रहिए

शक्ल तो आपके भी ज़ेहन में होगी कोई

कभी बन जाएगी तस्वीर बनाते रहिए

 

अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं काफ़ी

हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का

 

ज़रा-सी बात जो फैली तो दास्तान बनी

वो बात ख़त्म हुई दास्तान बाक़ी है

 

बंध गई थी दिल में कुछ उम्मीद-सी

ख़ैर तुम ने जो किया अच्छा किया

 

छोड़ कर जिस को गए थे आप कोई और था

अब मैं कोई और हूं वापस तो आ कर देखिए

 

अक्ल ये कहती दुनिया मिलती है बाज़ार में

दिल मगर ये कहता है कुछ और बेहतर देखिए

 

मैं पा सका न कभी इस ख़लिश से छुटकारा

वो मुझ से जीत भी सकता था जाने क्यूं हारा

– ऊषा गुप्ता

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#RIP: ऋषि कपूर की बहन रितु नंदा का निधन (Rishi Kapoor’s Sister Ritu Nanda Passes Away)

राज कपूर की बेटी रितु नंदा का कल रात यानी मंगलवार को दिल्ली में देहांत हो गया. 71 वर्षीया रितुजी कैंसर से जूझ रही थीं. उनके अंतिम दर्शन के लिए शोकाकुल कपूर खानदान के सभी लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं. साल 2013 में उन्हें कैंसर होने का पता चला था, जिसका इलाज अमेरिका में चल रहा था.

Ritu Nanda

अमिताभ बच्चन ने अपनी समधन के मृत्यु की जानकारी अपने ब्लाग पर देते हुए लिखा- मेरी समधन रितु नंदा, श्‍वेता बच्चन की सास का रात 1.15 बजे अचानक निधन हो गया.

Ritu Nanda

भाई रणधीर कपूर ने भी ग़मगीन होकर इस सूचना की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि देर रात रितु नंदा ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. उन्हें कैंसर था. हम दिल्ली में हैं. उनका अंतिम संस्कार भी आज ही किया जाएगा. धीरे-धीरे पूरा कपूर खानदान व उनसे जुड़ी फिल्मी हस्तियां रितु नंदा के निवास स्थान पर इकट्ठा हो रही हैं.

भाई ऋषि कपूर की बेटी रिद्धिमा भी अपनी बुआ के जाने से आहत हैं. उन्होंने रितु की तस्वीर पोस्ट करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आप जैसी दयालु और विनम्र शख़्स मैंने आज तक नहीं देखी. ईश्‍वर आपकी आत्मा को शांति दे बुआ. वी मिस यू… रिद्धिमा के संदेश पर एकता कपूर ने भी शोक प्रकट करते हुए कहा कि सुनकर बुरा लगा.

नीतू सिंह भी अपनी ननद के प्रति अपने प्यार व स्नेह का इज़हार करने से ख़ुद को रोक न सकी. मेरी सबसे प्यारी… भगवान आपकी आत्मा को शांति दे…

इस दुख की घड़ी में नंदा परिवार के ग़म में सहभागी होते हुए उनसे जुड़े कई फिल्मी लोगों ने अपने कार्यक्रमों को रद्द कर दिया. गौरी ख़ान के यहां भी आज पार्टी थी, जो उन्होंने कैंसल कर दी.

रितु नंदा एक बेहतरीन शख़्स थीं. उनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है. दरअसल, वे लाइफ इंश्योरेंस के बिज़नेस से जुड़ी हुई थीं और उन्होंने चौबीस घंटे में 17 हज़ार पॉलिसी बेचने का कीर्तिमान अपने नाम किया था. अक्सर सोशल मीडिया पर उनकी अपने बच्चों निखिल नंदा, नताशा नंदा और बहू श्‍वेता बच्चन के साथ की तस्वीरें देखने को मिलती रहती थीं. कपूर खानदान का कोई भी फंक्शन, पार्टी व ख़ास मौक़ा हो, उनकी उपस्थिति हमेशा ही ख़ास रहती थी. फिर चाहे वो भाई ऋषि कपूर व रणधीर कपूर का परिवार हो, बच्चों का जन्मदिन, तीज-त्योहार आदि ही क्यों न हो. सरल, मिलनसार व ज़िंदादिल रितुजी को भावभीनी श्रद्धांजलि!..

Ritu Nanda

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सोनम कपूर- शादी के बाद ज़िम्मेदारियां व प्राथमिकताएं बदल जाती हैं… (Sonam Kapoor- Responsibilities And Priorities Change After Marriage…)

सोनम कपूर (Sonam Kapoor) कम फिल्में करती हैं, पर जो भी करती हैं दिलचस्प होती हैं, जैसे द ज़ोया फैक्टर. इसके व उनकी पर्सनल लाइफ से जुड़ी बातों के बारे में जानते हैं.

Sonam Kapoor

* मुझे ख़ुशी है कि अनुजा चौहान के उपन्यास पर आधारित अभिषेक शर्मा द्वारा निर्देशित मेरी फिल्म द ज़ोया फैक्टर को लोगों ने पसंद किया. जब इस फिल्म के लिए सचिन तेंदुलकर ने ट्वीट किया, तब भी मुझे बेहद ख़ुशी हुई थी. इस तरह की फिल्म करने का एक अलग ही मज़ा है.

* फिल्म इंडस्ट्री में हमेशा से ही पुरुषों का बोलबाला रहा है. यहां तक कि महिला निर्देशक भी एक्टर को ध्यान में रखकर पुरुष प्रधान फिल्में ही अधिक करती हैं, जबकि उन्हें महिला प्रधान फिल्मों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, फिर चाहे वो फराह ख़ान हों या ज़ोया अख़्तर. नायिका प्रधान फिल्में बहुत कम ही बनती हैं. बॉलीवुड में हीरोइन को अपनी पहचान बनाने के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है.

* हीरोज़ भी महिला प्रधान फिल्मों में काम नहीं करना चाहते. मेरी कई फिल्में, जो नायिका प्रधान थीं, के लिए हीरोज़ ढूंढ़ने में मुश्किलें आईं.

* मेरा यह मानना है कि अपने बेस्ट फ्रेंड से शादी करना हमेशा अच्छा रहता है. मेरे और पति आनंद के बीच ग़ज़ब की ट्यूनिंग है, ऐसा हमारी दोस्ती के कारण है. हम एक-दूसरे के विचारों व मूल्यों का पूरा सम्मान करते हैं.

Sonam Kapoor

* मैं जब उठती हूं, तब आनंद बिस्तर पर नहीं होते. दरअसल, उन्हें सुबह जल्दी उठने की आदत है और वे रात में 10 बजे तक सो भी जाते हैं. जबकि मैं थोड़ा देरी से सोती हूं. वैसे हम दोनों को लेट नाइट पार्टीज़ पसंद नहीं, तो हम रात में कहीं बाहर भी नहीं जाते हैं.

* आनंद बहुत अच्छे जीवनसाथी हैं. वे शांत स्वभाव के हैं. मुझे पूरा स्पेस भी देते हैं. मेरा यह मानना है कि शादी के बाद हमें एक और नया परिवार मिलता है. तब हमारी ख़ुशियां, ज़िम्मेदारियां व प्राथमिकताएं भी बदल जाती हैं. हम दोनों के साथ भी ऐसा ही हुआ, पर हम दोनों ने आपने दोनों परिवारों के साथ अच्छा बैलेंस बनाकर रखा है. हम ख़ुश हैं और हर लम्हे को एंजॉय करते हैं.

Sonam KapoorSonam Kapoor Sonam Kapoor Sonam Kapoor

सोनमनामा…

* सोनम के सना, जिराफ व सोंज निक नेम्स हैं.

* हिंदी व अंग्रेज़ी के अलावा उन्हें पंजाबी, मराठी व उर्दू भाषा की अच्छी जानकारी है.

* उन्हें लिखना-पढ़ना, शॉपिंग, वीडियो गेम, बास्केट बॉल व स्न्वॉश खेलने का बहुत शौक है.

* शास्त्रीय संगीत, कत्थक व लेटिन डांस का भी उन्होंने बाक़ायदा प्रशिक्षण लिया है.

* जेब ख़र्च के लिए सोनम ने वेट्रेस के रूप में नौकरी भी की है.

* मोटापे के लिए आलोचना करने पर उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड के साथ रिश्ता तोड़ दिया था.

* उन्होंने सिंगापुर में थिएटर व आर्ट की पढ़ाई की है.

* ब्लैक फिल्म में संजय लीला भंसाली के असिस्टेंट डायरेक्टर से करियर की शुरुआत की.

* अपनी पहली फिल्म सांवरिया के लिए सोनम ने दो साल में 35 किलो वज़न कम किया था.

* स्टाइल आयकॉन सोनम की मां सुनीता कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर हैं, साथ ही वे मॉडल भी रह चुकी हैं.

* जल्द ही सोनम को पॉलिटिक्स करते हुए भी देखा जाएगा. दरअसल, सोनम का इरादा राजनीति में आने का है.

ऊषा गुप्ता

Sonam Kapoor

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अर्श से फर्श तक: बॉलीवुड के रिच स्टार्स, जिनकी मुफलिसी उन्हें सड़क पर ले आई थी! (Bollywood Stars Who Turned From Rich To Poor)

Stars Who Turned From Rich To Poor

अर्श से फर्श तक: बॉलीवुड स्टार्स, जिनकी मुफलिसी उन्हें सड़क पर ले आई थी! (Bollywood Stars Who Turned From Rich To Poor)

बॉलीवुड के लिए कहा जाता है कि यहां स़िर्फ चढ़ते सूरज को ही सलाम किया जाता है, व़क्त के साथ-साथ बड़े से बड़े सितारे यहां गुमनामी के अंधेरे में खो जाते हैं. यहां हम उन मशहूर फिल्म स्टार्स का ज़िक्र करेंगे, जो अपने समय के सुपर स्टार थे, लेकिन मुफलिसी ने उन्हें इस कदर घेरा कि वो सड़क पर आ गए.

मीना कुमारी: ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी ने जिस तरह सिल्वर स्क्रीन पर अपने हर किरदार को ज़िंदा किया, उससे सभी उनकी अदाकारी के कायल हो गए. लेकिन इनकी पर्सनल लाइफ में भी ट्रेजडी की कमी नहीं थी. ताउम्र प्यार के लिए तरसती मीना ने अपने अंतिम समय में भी ख़ुद को तन्हा ही पाया और उनके अंतिम समय में अस्पताल के बिल तक चुकाने के पैसे उनके पास नहीं थे. मीना कुमारी की ख़ासियत यह थी कि वो पारंपरिक मुसलमान लड़कियों से बहुत अलग थीं. वो बहुत अच्छी शायरा भी थीं, उनका अल्कोहॉलिक होना भी यह दर्शाता है कि ज़िंदगी से उन्होंने जो चाहा, वो उन्हें नहीं मिला. उनके परिवार ने उन्हें पैसा कमाने का मात्र एक ज़रिया समझा और यही वहज है कि जब कमला अमरोही से उनकी शादी हुई, तो परिवार को लगा कि मीना ने उन्हें धोखा दिया. मीना ख़ुद कहती थीं कि उन्हें लगता है भगवान से उन्हें शाप दिया है कि उनकी फिल्मों की ट्रेजडी रियल लाइफ में भी वो महसूस करें.

परवीन बाबी: 80 के दशक की हॉट, ग्लैमरस गर्ल परवीन अपने बोल्ड और बिंदास अंदाज़ के लिए मशहूर थीं. लेकिन परानॉइड स्किज़ोफ्रेनिया के चलते उनका एक्टिंग करियर व उनकी पर्सनल लाइफ भी प्रभावित होने लगी थीं. परवीन भी सच्चे प्यार की तलाश में रहीं और अंत में ख़ुद को तन्हा ही पाया. मुंबई के एक फ्लैट में अकेले रहते हुए ही उनकी मौत हो गई और उनके पड़ोसियों को यह बात तब पता चली, जब तीन दिन से उनके घर के बाहर दूध व अंडे यूं ही पड़े रहे. परवीन राज घराने में पैदा हुई थीं, लेकिन दुख की बात यह है कि परवीन के परिवार की तरफ़ से भी उनकी बॉडी तक क्लेम करने कोई नहीं आया और अंतत: महेश भट्ट ने उनका अंतिम संस्कार किया.

विमी: बी आर चोपड़ा की हमराज़ की इस ब्यूटी क्वीन से उस व़क्त सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया था. रातोंरात विमी स्टार बन चुकी थीं, लेकिन अपनी पर्सनल लाइफ में समस्याओं के चलते उन्हें फिल्मी मिलनी भी बंद हो गईं और फिर आर्थिक तंगी ने उन्हें अल्कोहॉल व अन्य गतिविधियों की तरफ़ धकेल दिया. विमी की रहस्मय मौत ने सबको चौंका दिया था.

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गीतांजलि नागपाल: सुपर मॉडल गीतांजलि नेवल ऑफिसर की बेटी हैं और अपने समय के मशहूर व कामयाब मॉडल भी. लेकिन ड्रग एडिक्शन के चलते वो एक रोज़ सड़कों पर भीख मांगती नज़र आईं. एक फोटोग्राफर को वो पोज़ देने लगीं, तो सुर्ख़ियों में आईं और उसके बाद उनका इलाज शुरू हुआ.

ओपी नैयर: म्यूज़िक इंडस्ट्री में बड़ा नाम हैं ओपी नैयर, लेकिन उनकी परिवार ने उन्हें घर से निकाल दिया और अपने अंतिम दिन उन्होंने एक फैन के घर में गुज़ारे. सुनने में यही आता है कि यदि कोई उनसे इंटरव्यू मांगने आता, तो उससे वो शराब व पैसे की डिमांड ही करते थे.

एके हंगल: फिल्म शोले का एक डायलॉग और लोगों की आंखों से आंसू बहने लग जाते- इतना सन्नाटा क्यों है भाई! जी हां, हंगल साबह ने 225 फिल्मों में काम किया, लेकिन बावजूद इसके अपने अंतिम दिनों में वो गरीबी व बीमारी के शिकार थे. अपने मेडिकल बिल्स भी वो चुका नहीं पा रहे थे. अमिताभ बच्चन ने उनकी मदद की और उसके बाद कई और हस्तियां भी सामने आईं.

भगवान दादा: इनका नाम आते ही शोला जो भड़के गाना याद आता है. इंडस्ट्री में बड़ा नाम थे भगवान दादा, लेकिन अपने प्रोडक्शन में बनाई कुछ फिल्मों ने इन्हें कंगाल बना दिया था. इन्हें अपना जुहू का बंगला व 7 कारें, जो हफ़्ते के हर दिन के हिसाब से वो यूज़ करते थे, बेचनी पड़ी और अंतिम दिन उन्होंने एक चॉल में गुज़ारे.

भारत भूषण: फिल्म बैजू बावरा ने इन्हें सुपर स्टार बना दिया था और इन्होंने अपने दौर की सभी नामी एक्ट्रेसेस के साथ काम किया था. इनके पास मुंबई में कई फ्लैट्स थे, लेकिन पैसे न बचाने की आदत ने इन्हें इतना कंगाल कर दिया था कि अपने अंतिम दिनों में वो चॉल में रहने को मजबूर थे और स्टूडियो में चौकीदार की नौकरी कर रहे थे.

सिल्क स्मिता: अपने हॉट अंदाज़ से सिल्क ने अपनी अलग जगह बनाई थी. वो साउथ की मशहूर एक्ट्रेस बन चुकी थीं, लेकिन अपने प्रोडक्शन की फिल्म बनाने की चक्कर में वो कंगाल हो चुकी थीं और उन्होंने आत्महत्या कर ली थी. फिल्म डर्टी पिक्चर उन्हीं की लाइफ से प्रेरित थी.

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गुल पनाग- बोल्ड एंड ब्यूटीफुल (20YearChallange: Gul Panag Hot Avatar)

गुल पनाग (Gul Panag) अपने बोल्ड अंदाज़ और बेबाक़ बयान के लिए काफ़ी मशहूर हैं. हाल ही में वे मालदीव में छुट्टियां बिता कर आईं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर हॉलीडे की कई ख़ूबसूरत तस्वीरें शेयर कीं, लेकिन जिस फोटो ने लोगों को सबसे अधिक आकर्षित किया, वो थी उनकी अब की और बीस साल पुरानी कंबाइन तस्वीर, जिसमें उनके फिगर को देख हर कोई दंग रह गया. क्योंकि जिस तरह उनकी बॉडी व फिटनेस बीस साल पहले थी, आज भी वो ज्यों की त्यों बरक़रार है.

Gul Panag

डोर व धूप फिल्मों में गुल पनाग के सादगीभरे सशक्त अभिनय को भला कौैन भूला सकता है. वैसे गुल इन दिनों वेब सीरीज़ द फैमिली मैन से सुर्ख़ियों में आई थीं. पिछली बार उन्हें स्टूडेंट ऑफ द ईयर में देखा गया था. जल्द ही वे बायपास रोड फिल्म में एक अलग अंदाज़ में दर्शकों से रू-ब-रू होंगी.

हां, हम बात कर रहे थे गुल पनाग की ग्लैमर्स स्विम सूट में तुलनात्मक तस्वीर की. इस वायरल फोटो में गुल ने स्विमिंग सूट में अपनी बीस साल पुरानी तस्वीर और अभी की भी स्विमिंग सूट मे दोनों को ही साथ में रखते हुए इस लाजवाब तस्वीर को पोस्ट किया है. दोनों ही तस्वीरों को देख कोई नहीं कह सकता कि एक आज की है और दूसरी बरसों पुरानी. इस पूर्व मिस इंडिया ने यह साबित कर दिखाया कि यदि आप अपनी सेहत और ब्यूटी को लेकर कॉन्शस रहते हैं, तो उम्र कभी आड़े नहीं आती. इसका सबसे बड़ा उदाहरण अक्षय कुमार, मलाइका अरोड़ा आदि हैं.

जब से गुल पनाग ने सोशल मीडिया पर अपनी दो दशक पुरानी और आज की फोटो एक जैसी स्विमिंग सूट के साथ फोटो शेयर की है, तब से यूज़र्स की प्रतिक्रियाओं की बाढ़-सी आ गई है. हर कोई अपने-अपने ढंग से रिएक्ट कर रहा है. कोई उन्हें एवरग्रीन ब्यूटी कह रहा है… तो कोई बोल्ड एंड ब्यूटीफुल… कोई इस सच्चाई को लेकर आश्‍चर्यचकित है कि दोनों तस्वीरों मेंं बरसों का अंतराल है. इसकी ख़ासियत यह भी थी कि गुल पनाग बीस साल पहले मालदीव आई थीं, तब उन्होंने स्विमिंग सूट में अपनी तस्वीरें खिंचवाई थीं. इसके बाद वे बीस साल बाद दोबारा मालदीव छुट्टियां बिताने आईं. यानी सालों का गैप भले ही रहा पर गुल पनाग के फिगर और पहनावे में कोई अंतर नहीं आया. सिंपल, बोल्ड एंड ब्यूटीफुल.

इस पर मज़ेदार बात यह भी है कि वे अपने छोटे लाड़ले बेटे निहाल के साथ मालदीव में समंदर, बीचेस, डॉल्फिन के झुंड, ख़ूबसूरत वादियों आदि का ख़ूब लुत्फ़ उठाया. अपने बेटे के साथ की भी कई प्यारी तस्वीरें उन्होंने शेयर की. आइए, आप भी उनका आनंद लें…

Gul Panag

Gul Panag Hot Pics

Gul PanagGul Panag in Bikini

Gul Panag

Gul Panag

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Gul Panag

यह भी पढ़ेकैटरीना कैफ से लेकर दिशा पटानी तकः बॉलीवुड एक्ट्रेसेज़ जो जिम में लड़कों को कड़ी टक्कर दे रही हैं (Katrina Kaif To Disha Patani: Bollywood Actresses Giving The Boys A Tough Time At The Gym)

जन्मदिन पर विशेष: विनोद खन्ना- बेहद सरल व आकर्षक अभिनेता (Birth Anniversary: Vinod Khanna- Very Handsome And Attractive Star)

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सत्तर-अस्सी के दशक में अपने अभिनय, स्टाइल, हैंडसम पर्सनैलिटी से जिस कलाकार ने सबसे अधिक आकर्षित किया, वो थे विनोद खन्ना. उनके एक्शन, इमोशन, कॉमेडी में ग़ज़ब का तालमेल था. उनका खलनायक से शुरू हुआ सफ़र नायक के शिखर तक पहुंचा. फिर अध्यात्म की तरफ़ झुकाव, संन्यास, ओशो आश्रम जाना, दोबारा फिल्मों में आना, राजनीति, छोटे पर्दे पर आना… वे अपनी ज़िंदगी में हर दौर में न जाने कितने पड़ाव से गुज़रे, पर हर जगह अपनी क़ाबिलियत से हर किसी को प्रभावित किया. आज उनके जन्मदिन पर उनसे जुड़ी कई कही-अनकही बातों को जानने की कोशिश करते हैं.

Vinod Khanna

* विनोद खन्ना के पिता का टेक्सटाइल, केमिकल का बिज़नेस था. जब विनोदजी ने अभिनय करने की इच्छा ज़ाहिर की, तो उन्होंने उनकी तरफ़ बंदूक तान दिया था. लेकिन पत्नी के समझाने पर शांत हुए और विनोद को दो साल तक का समय दिया फिल्मों में ख़ुद को स्थापित करने के लिए. यदि वे असफल होते हैं, तो फिर उन्हें पिता के बिज़नेस में हाथ बंटाना होगा.

* विनोद पांच भाई-बहन थे, जिनमें तीन बहन और दो भाई थे. देश के बंटवारे के समय उनके पिता पेशावर से हिंदुस्तान आकर मुंबई में बस गए थे.

* विनोद खन्ना को पहली पत्नी गीतांजली से दो बेटे अक्षय व राहुल हैं और दूसरी बीवी से दो बच्चे साक्षी व श्रद्धा हैं.

* बचपन में विनोद काफ़ी शर्मीले स्वभाव के थे. एक बार उनके शिक्षक ने उन्हें नाटक में ज़बर्दस्ती काम करवाया, तब से अभिनय के प्रति उनका रुझान बढ़ने लगा.

* जब वे बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते थे, तब वे सोलवां साल और मुग़ल-ए-आज़म फिल्म से काफ़ी प्रभावित हुए और उन्होंने फिल्म में करियर बनाने का सोचा.

Vinod KhannaVinod KhannaVinod Khanna

* सुनील दत्त की फिल्म मन का मीत से खलनायक के तौर पर अभिनय के सफ़र की शुरुआत हुई और विलेन के रोल में दर्शकों ने उन्हें पसंद भी किया.

* इसके बाद आन मिलो सजना, पूरब और पश्‍चिम, मेरा गांव मेरा देश जैसी फिल्मों में अपनी खलनायकी के जलवे उन्होंने दिखाए, पर नायक के तौर पर ब्रेक गुलज़ार साहब ने दिया.

* उनकी मेरे अपने फिल्म ने विनोद खन्ना को हीरो के तौर पर पहचान दी. गुलज़ार-विनोद की जुगलबंदी ने फिर तो कई फिल्में कीं, जिसमें अचानक, इम्तिहान, रिहाई, लेकिन, मीरा जैसी लाजवाब फिल्में रहीं.

* मीडिया द्वारा अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना को एक-दूसरे का प्रबल प्रतिद्वंदी माना जाता था, जबकि हक़ीक़त में ऐसा कुछ भी नहीं था. यह और बात है कि बिग बी अमिताभ को सुपरस्टार विनोद खन्ना ने अमर अकबर एंथोनी, परवरिश, ख़ून-पसीना, हेरा फेरी, मुकद्दर का सिकंदर जैसी तमाम फिल्मों में जमकर टक्कर दी. और ये सभी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपर-डुपर हिट साबित हुईं.

* बहुत कम लोग जानते है कि अमिताभ बच्चन ने कुर्बानी फिल्म करने से मना कर दिया था, तब विनोद खन्ना को अप्रोच किया गया और फिरोज खन्ना की यह फिल्म उस दौर की सबसे कामयाब फिल्मों में से एक रही. इसके गीत-संगीत का जादू आज भी लोगों के दिलों को गुदगुदाता है, ख़ासकर- गाना लैला मैं लैला…

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* विनोद खन्ना कम मूडी नहीं थे. अपने अभिनय सफ़र के शिखर पर रहते हुए उन्होंने सब कुछ यानी फिल्मेें, पत्नी, दोनों बच्चे अक्षय व राहुल को छोड़छाड़ कर अमेरिका में ओशो रजनीश के आश्रम चले गए.

* वहां पर उन्हें स्वामी विनोद भारती, द मॉन्क हू सोल्ड हिज़ मर्सीडीज़, हैंडसम संन्यासी जैसे नामों से पुकारा जाता था. ग्लैमर वर्ल्ड को दरकिनार कर वे वहां पर साफ़-सफ़ाई करना, खाना बनाना, बागवानी करना जैसे तमाम काम करते थे.

* लेकिन वहां पर ध्यान-ज्ञान, काम सब कुछ करते हुए भी उनका मन स्थिर न रह पाया और उन्होंने दोबारा फिल्मों की तरफ़ रुख किया.

* उनकी फिल्मों में सेकंड एंट्री भी धमाकेदार रही. लोगों ने उन्हें हाथोंहाथ लिया. इंसाफ़, सत्यमेव जयते, दयावान, ज़ुर्म, रिहाई जैसी बेहतरीन उम्दा फिल्में कीं.

* उन्होंने राजनीति में भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ से गुरदासपुर से चार बार चुनाव लड़ा और विजयी रहे. इस बार वहां से सनी देओल चुनाव लड़े थे और भारी बहुमत से जीत भी हासिल की थी.

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* फिल्मों में विनोद खन्ना के उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें कई अवॉर्डस के अलावा फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

आज वे हमारे बीच नहीं है, पर अपने दमदार अभिनय, मस्ताने अंदाज़ से आज भी वे सभी की यादों में ज़िंदा है.

जब भी उनके जीवन में उतार-चढ़ाव आया, तब उन्होंने अपनी ही फिल्म के गाने से प्रेरणा ली- रुक जाना नहीं. तू कहीं हार के.. कांटों पे चलकर मिलेंगे साये बहार प्यार के, ओ रही, ओ रही…

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