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फिल्म रिव्यू: सीक्रेट सुपरस्टार है एक बेहतरीन फिल्म (Movie Review: Secret Superstar)

Movie Review, Secret Superstar
फिल्म- सीक्रेट सुपरस्टार
स्टारकास्ट-  आमिर खान, ज़ायरा वसीम, मेहर विज, राज अरुण, तीर्थ शर्मा
निर्देशक- अद्वैत चंदन
रेटिंग- 4 स्टार
कहानी
फिल्म की कहानी है 15 साल की इंसिया (जायरा वसीम) की है, जिसका सपना है कि वो सिंगर बने, लेकिन घर के माहौल और स्वभाव से सख़्त उसके पिता उसे इसकी इजाज़त नहीं देते. इंसिया किसी भी हाल में अपने सपने को पूरा करना चाहती है. एक दिन वो बुर्का पहनकर एक गाना रिकॉर्ड करती हैं और उसे यूट्यूब पर अपलोड कर देती है. यूट्यूब पर उसका गाना पसंद किया जाता है और वो सीक्रेट सुपरस्टार बन जाती है. इंसिया की मां (मेहर विज) और फ्लॉप म्यूज़िक डायरेक्टर शक्ति कुमार (आमिर खान) इसमें इंसिया की मदद करते है.
फिल्म की यूएसपी
आमिर खान की ऐक्टिंग के एक बार फिर दिवाने हो जाएंगे आप. आमिर ने जिस तरह से 90 के दशक के म्यूज़िक डायरेक्टर का किरदार निभाया वो काबिले तारीफ़ है.
फिल्म की कहानी नई नहीं है, लेकिन उसे प्रेज़ेंट करने का तरीक़ा ज़रूर नया है. सभी कलाकारों का अभिनय अच्छा है.
अमित त्रिवेदी का संगीत भी बेहतरीन है.
फिल्म में आपको इमोशन्स, ख़ुशी, कॉमेडी हर चीज़ का तड़का मिलेगा. डायरेक्शन में डेब्यू करने वाले अद्वैत चंदन का निर्देशन कमाल का है. कहीं से भी आपको इस बात का एहसास नहीं होगा कि अद्वैत की ये पहली फिल्म है.
फिल्म में कई मुद्दों, जैसे- घरेलू हिंसा, भ्रूण हत्या, लड़की की आज़ादी पर प्रतिबंध को दिखाया गया है. लेकिन इन सबके बीच कैसे एक लड़की अपनी हिम्मत से आगे बढ़ती है, ये दिखाने का अंदाज़ बेहद ख़ूबसूरत है.
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फिल्म देखने जाए या नहीं?
ज़रूर देखने जाएं. ये फिल्म मिस नहीं कर सकते हैं आप. सीक्रेट सुपरस्टार फिल्म ख़ासकर उन लड़कियों को देखनी चाहिए, जो टैलेंट हैं, लेकिन वो अपने सपनों को साकार करने में सिर्फ़ इसलिए झिझकती है, क्योंकि उसे आज़ादी नहीं है अपने सपनों को जीने की. वीकेंड पर ये फिल्म आपके लिए किसी सुपरस्टार से कम नहीं होगी है.

 

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देसी मिठास है ‘बरेली की बर्फी’, ‘पार्टिशन 1947’ बंटवारे के बीच एक लव स्टोरी है (Movie Review: Bareilly Ki Barfi And Partition 1947)

देसी मिठास है 'बरेली की बर्फी', 'पार्टिशन 1947' बंटवारे के बीच एक लव स्टोरी है

फिल्म- बरेली की बर्फी

स्टारकास्ट- कृति सैनन, आयुष्मान खुराना, राजकुमार राव, पंकज त्रिपाठी और सीमा पाहवा

निर्देशक- अश्विनी अय्यर तिवारी

रेटिंग- 3/5 स्टार

देसी मिठास है 'बरेली की बर्फी', 'पार्टिशन 1947' बंटवारे के बीच एक लव स्टोरी है

बरेली की बर्फी में देसी मिठास है. आजकल बॉलीवुड में देसी कहानियों पर फिल्में ख़ूब बन रही हैं और दर्शक ऐसी कहानियों को पसंद भी कर रहे हैं. बरेली की बर्फी कहानी फ्रांसीसी नॉवेल इनग्रिडिएंट्स ऑफ लव पर आधारित है, लेकिन बॉलीवुड में इसे उत्तर प्रदेश के रंग में रंगा गया है. फिल्म की कहानी में और क्या है ख़ास? आइए जानते हैं.

कहानी: 

जैसा की नाम से ही ज़ाहिर है कहानी है बरेली की बिट्टी मिश्रा (कृति सैनन) की, जो एक बिंदास लड़की है और अपने घर की लाडली है. एक दिन उसे प्यार हो जाता है बरेली की बर्फी नाम की किताब के लेखक से. इस किताब के लेखक कोई और नहीं, बल्कि चिराग दुबे (आयुष्मान खुराना) है, जिसने ये किताब तब लिखी थी, जब उसे प्यार में धोखा मिला था, लेकिन इस किताब को वो ख़ुद का नाम ने नहीं, बल्कि अपने दोस्त प्रीतम विद्रोही (राजकुमार राव) के नाम से छपवाता है. राजकुमार राव की फिल्म में एंट्री होते ही फिल्म में एक जान आ जाती है. लव ट्रायंगल तब और भी मज़ेदार हो जाता है. अब बिट्टी किसे मिलेगी? चिराग को या प्रीतम को? अब ये जानने के लिए आपको फिल्म देखने जाना होगा.

फिल्म की यूएसपी और कमज़ोर कड़ी:

अश्विनी ने इस फिल्म में बरेली के लोकल फ्लेवर को बनाए रखा है. फिल्म का सेकेंड पार्ट और भी धमाकेदार और इंट्रेस्टिंग है. आप एक मिनिट तके लिए भी बोर नहीं होंगे फिल्में में. जैसे अश्विनी ने फिल्म निल बटे सन्नाटा में बड़े ही मज़ाकिया अंदाज़ में गहरी बात कर दी थी, कुछ वैसे ही बात इस फिल्म में भी नज़र आएगी.

राजकुमार राव की ऐक्टिंग दि ब दिन निखरती चली जा रही है. एक बार फिर राजकुमार राव ने साबित किया है कि वो जो किरदार करते हैं, वो लगता है उन्हीं के लिए ही लिखा गया है. कृति सैनन और आयुष्मान खुराना भी अपने-अपने रोल में फिट लग रहे हैं. फिल्म के गाने भी अच्छे हैं.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

ज़रूर जाएं फिल्म देखने. ये इस साल की एक अच्छी रॉमकॉम फिल्म मानी जा रही है. कुल मिलाकर देखा जाए, तो ये एक एंटरटेनिंग फिल्म है. यक़ीनन आपके टिकट के पैसे वसूल हो जाएंगे इस फिल्म को देखकर.

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देसी मिठास है 'बरेली की बर्फी', 'पार्टिशन 1947' बंटवारे के बीच एक लव स्टोरी है

फिल्म-  पार्टिशन 1947

स्टारकास्ट- हुमा कुरैशी, ओमपुरी, मनीष दयाल

निर्देशक- गुरिंदर चढ्डा

रेटिंग- 2.5/5 स्टार

कहानी:

भारत-पाकिस्तान के बंटवारे पर आधारित है फिल्म पार्टिशन 1947. फिल्म की कहानी है बंटवारे के बीच पनपती है आलिया(हुमा कुरैशी) और जीत सिंह(मनीष दयाल) की लव स्टोरी. जिन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

फिल्म की यूएसपी और कमज़ोर कड़ी:

यूं तो ये कोई पहली फिल्म नहीं है, जो बंटवारे के बीच प्यार पर बनी हो, पहले भी इससे बेहतर फिल्में बनाई जा चुकी हैं. ऐसे में फिल्म की कहानी में कोई नयापन नहीं है. फिल्म का डायरेक्शन अच्छा है. कई रियल लोकेशन पर शूट किया है फिल्म को, जो आपके पसंद आएगा.

हुमा कुरैशी और मनीष दयाल का अभिनय अच्छा है. हुमा के पिता के रोल में ओमपुरी का किरदार भी अच्छा है.

ए.आर. रहमान का म्यूज़िक इस फिल्म की जान है.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

अगर आप पीरियड फिल्में पसंद करते हैं, तो एक बार ये फिल्म देख सकते हैं. लेकिन अगर किसी वजह से ये फिल्म मिस भी हो जाती है, तो कोई बड़ा नुक़सान नही होगा आपका.

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फिल्म रिव्यू: ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ देगी एक ज़रूरी संदेश (Movie Review: Toilet: Ek Prem Katha)

फिल्म रिव्यू: 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' देगी एक ज़रूरी संदेश

फिल्म- टॉयलेट: एक प्रेम कथा

स्टारकास्ट- अक्षय कुमार, भूमि पेडनेकर, अनुपम खेर, सना खान

निर्देशक- श्री नारायण सिंह

रेटिंग- 3.5 स्टार

फिल्म रिव्यू: 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' देगी एक ज़रूरी संदेश

सच्ची घटना पर आधारित फिल्म टॉयलेट: एक प्रेम कथा कहानी है प्रियंका भारती की, जिसने अपने पति का घर सिर्फ़ इसलिए छोड़ दिया था, क्योंकि उसके घर में टॉयलेट नहीं था. इसी कहानी को फिल्म के ज़रिए दिखाने की कोशिश की है फिल्म के निर्देशक श्री नारायण सिंह ने. अक्षय कुमार के लिए ख़ास है ये फिल्म, क्योंकि उन्होंने फिल्म में केवल ऐक्टिंग ही नहीं की है, बल्कि वो इस फिल्म के को-प्रोड्युसर भी हैं.

कहानी

फिल्म की कहानी है मथुरा के पास एक गांव के रहने वाले 36 साल के केशव (अक्षय कुमार) की, जो मांगलिक है, इसलिए पहले उसकी शादी एक भैंस से कराई जाती है. साइकल की दुकान चलाने वाले केशव को तब प्यार हो जाता है, जब वो साइकल की डिलीवरी देने पहुंचता है कॉलेज टॉपर जया (भूमि पेडनेकर) के घर. केशव को जया से प्यार हो जाता है और दोनों शादी भी कर लेते हैं. यहां से शुरू होती है फिल्म की असली कहानी, जब जया को पता चलता है कि जिस घर में उसकी शादी हुई है, वहां घर में शौचालय ही नहीं है, तब वो अपना ससुराल छोड़ कर मायके चली जाती है. रूढ़िवादी परंपराओं और बातों को दरकिनार कर क्या केशव गांव में शौचालय बनवाकर अपनी पत्नी को वापस ला पाता है? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

फिल्म की यूएसपी

फिल्म का सब्जेक्ट इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी है. खूले में शौच करने की समस्या पर पूरी फिल्म बनाने का निर्णय ही काबिल-ए-तारीफ़ है. गांव की रियल लोकेशन कहानी को सपोर्ट करती है.

निर्देशन की तारीफ़ किए बगैर ये रिव्यू पूरा नहीं हो सकता है. श्री नारायण सिंह ने फिल्म को वास्तिवकता के क़रीब लाने में कोई कमी नहीं रखी है. यहां तक की गांव के रहने वाले केशव यानी अक्षय कुमार को जो बड़े ब्रांड्स की नकली टी-शर्ट्स पहनाई गई हैं, उसमें भी ह्यूमर भर दिया है.

स्वच्छता अभियान को लेकर गावों में क्या नियम-कानून है, इसकी जानकारी भी आपको ये फिल्म दे देगा.

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क्या है कमज़ोरी?

कुछ डायलॉग्स, जो सुनने में थोड़े बुरे लगते हैं. इसके अलावा फिल्म का सेकंड हाफ, जो बहुत ही ज़्यादा लंबा और बोरिंग लगने लगता है.

किसकी ऐक्टिंग में था दम?

अक्षय कुमार एक बेहतरीन ऐक्टर हैं ये उन्होंने फिर साबित कर दिया है. अक्षय ने साबित कर दिखाया है कि अच्छा अभिनय दिखाने के लिए ऐक्टिंग आनी ज़रूरी है, न कि बड़े-बड़े फिल्मों के सेट्स और न ही बड़ा बजट. केशव के किरदार के साथ पूरा न्याय कर रहे हैं अक्षय कुमार.

भूमि पेडनेकर की ये दूसरी फिल्म है. इससे पहले दम लगाके हइशा में भी उनकी ऐक्टिंग की सराहना हुई थी. इस बार भी उनका काम अच्छा है.

फिल्म के बाक़ी कलाकारों का काम भी अच्छा है.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

बिल्कुल जाएं ये फिल्म देखने. एक ज़रूरी संदेश देती है ये फिल्म. अगर आप अक्षय कुमार के फैन हैं, तो इस फिल्म को मिस नहीं कर सकते हैं आप. फिल्म को देखने के बाद ऐसा बिल्कल नहीं लगेगा कि आपके टिकट के पैसे बर्बाद हुए हैं.

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‘मुबारकां’- पैसा वसूल, ‘इंदू सरकार’- दमदार और ‘राग देश’ है अलग फिल्म (Movie Review: Mubarakan, Indu Sarkar, Raag Desh)

फिल्म- मुबारकां

स्टारकास्ट- अर्जुन कपूर, अनिल कपूर, इलियाना डिक्रूज, आथिया शेट्टी, पवन मल्होत्रा, रत्ना पाठक शाह

निर्देशक- अनीस बज़्मी

रेटिंग- 3 स्टार्स

अनीस बज़्मी की फिल्में हमेशा एंटरटेनिंग होती है. उनकी फिल्म मुबारकां भी इस दर्शकों को एंटरटेन कर रही है. लंबी-चौड़ी स्टारकास्ट वाली इस फिल्म में कॉमेडी का तड़का लगा है. कहानी है करण और चरण (अर्जुन कपूर) की है, जो जुड़वां भाई हैं, लेकिन इनक परवरिश अलग-अलग जगह हुई है. सिंगल चाचा करतार सिंह यानी अनिल कपूर ने अपने एक भतीजे को बडे भाई (पवन मल्होत्रा) के पास पंजाब में रखा है, जबकि दूसरे को बहन (रत्ना पाठक शाह), जो कि लंदन में रहती है, इसके पास रखा है. दोनों अलग माहौल में बड़े होते हैं और दोनों को प्यार हो जाता है. एक जैसी शकल होने पर कहानी में ढेरों कंफ्यूज़न होते हैं और साथ ही होती है ख़ूब कॉमेडी भी.

क्यों देखें फिल्म? 

अनिल कपूर के लिए आपको ये फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए. एक बार फिर अनिल ने साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ़ एक नंबर है. कमाल का अभिनय किया है उन्होंने. अनीस बज़्मी भी दर्शकों की उम्मीदों पर खरे उतरे हैं. लोकेशन और गाने भी आपको एंटरटेन करेंगे. इलियाना और आथिया को जितना रोल दिया गया है, उसमें वो बिल्कुल फिट लग रही हैं. सबसे ख़ास बात ये फिल्म आप अपने परिवार के साथ देख सकते हैं.

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फिल्म- इंदु सरकार

स्टारकास्ट – कीर्ति कुल्हारी, नील नितिन मुकेश, अनुपम खेर, तोता रॉय चौधरी, सुप्रिया विनोद

निर्देशक – मधुर भंडारकर 

रेटिंग – 3 स्टार्स 

मधुर भंडारकर की विवादित फिल्म इंदु सरकार आखिरकार सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी के बाद रिलीज़ हो ही गई.

फिल्म इमर्जेंसी के बैकग्राउंड पर आधारित है, इस आप इमर्जेंसी की कहानी नहीं कह सकते हैं. यह एक लड़की इंदु (कीर्ति कुल्हाड़ी) की कहानी है, जो कवयित्री बनना चाहती है. लेकिन उसकी शादी एक सरकारी अफसर नवीन सरकार (तोता रॉय चौधरी) के साथ हो जाती है. इंदु और उसके पति के बीच झगड़े तब शुरू होते हैं, जब नवीन सरकार का साथ  देने लगता है. इंदु इमर्जेंसी के दौरान सरकार के रवैये से ख़ुश नहीं होती है और सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा शुरू कर देती है. फिल्म पिंक में दमदार ऐक्टिंग करने वाली कीर्ति ने एक बार फिर साबित किया है कि वो एक अच्छी ऐक्ट्रेस हैं.

70 के दशक को फिल्म के कलर, मेकअप और कपड़ों के ज़रिए बेहद ही अच्छे तरीक़े से दिखाया गया है. उस दौरान नसबंदी, मीडियाबंदी जैसे मुद्दों को भी दिखाने की कोशिश की गई है.

नील नितिन मुकेश फिल्म का एक सरप्राइज़ पैकेज हैं. अनुपम खेर, तोता रॉय चौधरी ने भी अभिनय का जौहर दिखाया है. सिनेमैटोग्राफी और डायलॉग्स भी फिल्म में आपकी दिलचस्पी बनाए रखेंगे. मधुर भंडारकर का निर्देशन हमेशा की तरह काफ़ी रियल और कमाल का है. 

क्यों देखें फिल्म? 

एक अलग फिल्म देखना चाहते हैं, तो ये फिल्म आपके लिए ही है. मधुर भंडारकर के फैन हैं, तो ये फिल्म आपको निराश नहीं करेगी.

फिल्म-  राग देश

डायरेक्टर-  तिग्मांशु धुलिया  

स्टारकास्ट- कुणाल कपूर, अमित साध, मोहित मारवाह

रेटिंग- 2.5 स्टार्स

पान सिंह तोमर और साहेब, बीवी और गैंगस्टर जैसी फिल्में बनाने वाले तिग्मांशु एक बार फिर एक अलग विषय पर फिल्म ले आए हैं राग देश.

कहानी है साल 1945 की जहां इंडियन नेशनल आर्मी के तीन ऑफिसर- शहनवाज (कुणाल कपूर), गुरबक्श सिंह ढिल्लन (अमित साध) और कर्नल प्रेम सहगल ( मोहित मारवाह ) की जिन पर देशद्रोह का आरोप है और उन पर मुकदमा चलाया जाता है. बीमार वकील भुलाभाई देसाई (केनेथ देसाई) इनका केस लड़ते हैं. ये तीनों देशद्रोह के आरोप से बचते हैं या नहीं, उसके लिए तो आपको ये फिल्म देखनी होगी.

तिग्मांशु धुलिया का डायरेक्शन ज़बरदस्त है.फिल्म को वास्तविकता के क़रीब लाने के लिए उन्होंने कॉस्ट्यूम से लेकर डायलॉग्स तक हर चीज़ पर मेहनत की है. आज़ादी से पहले का सेट हूबहू बनाने में तिग्मांशु सफल रहे हैं. फिल्म के सभी कलाकारों की ऐक्टिंग अच्छी है. फिल्म में एक ही गाना है, जिसे अलग-अलग मौक़ों पर बजाया जाता है.

क्यों देखे ये फिल्म?

देशभक्ति पर यूं तो कई फिल्में बनी हैं, लेकिन इस फिल्म की कहानी थोड़ी अलग है. फिल्म का सब्जेक्ट नया है. आज़ादी से पहले के कई वाक्यों को फिल्म में दिखाने की कोशिश की गई है, इसलिए एक बार आप ये फिल्म देख सकते हैं.

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फिल्म रिव्यू: ‘जग्गा जासूस’ है अलग फिल्म, रणबीर कपूर की ऐक्टिंग है हमेशा की तरह दमदार (Movie Review: Jagga Jasoos)

फिल्म- जग्गा जासूस

स्टारकास्ट- रणबीर कपूर, कैटरीना कैफ़, अदा शर्मा, सयानी गुप्ता, सौरभ शुक्ला और श्राश्वत चैटजी

निर्देशक- अनुराग बासु

रेटिंग- 3 स्टार्स

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अनुराग बासु और रणबीर कपूर की बर्फ़ी की जोड़ी एक बर इस फिल्म के ज़रिए साथ आई है. चार सालों से बन रही जग्गा जासूस आखिरकार रिलीज़ हो गई है. ब्रेकअप के बाद रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ की ये पहली फिल्म होगी. आइए, जानते हैं कैसी है फिल्म.

कहानी

कहानी है जग्गा की डिटेक्टिव और हकलाता है. लेकिन जग्गा कि एक ख़ास बात यह है कि वह केवल बोलते हुए हकलाता है. जग्गा के पिता उसे सिखाते हैं कि अगर वह गाते हुए बात करेगा, तो वह पूरी बात बना हकलाए बोल पाएगा. एक दिन जग्गा के पिता उसे छोड़कर चले जाते हैं. जग्गा अपने खोए हुए पिता की खोज में निकल पड़ता है. इस खोज में जग्गा का साथ देती है जर्नलिस्ट श्रुति सेन गुप्ता (कैटरीना कैफ), जो जग्गा को अपना दिल भी दे बैठती है. क्या जग्गा अपने पिता को खोज पाएगा? इसका जवाब आपको फिल्म देखने के बाद ही मिलेगा.

फिल्म की यूएसपी

इसे फिल्म की यूएसपी ही कह सकते हैं कि फिल्म में 30 गाने हैं. ज़्यादातर डायलॉग्स को गाने की तरह शूट किया गया है. जग्गा जासूस एनिमेशन फिल्म टिनटिन से इंस्पायर्ड है और रणबीर का लुक भी कुछ वैसा ही है. अनुराग बासु का डायरेक्शन हमेशा की तरह अच्छा है. सिनेमैटोग्राफी से लेकर कहानी को प्रेज़ेंट करने का तरीक़ा बिल्कुल अलग और नया है. स्क्रिप्ट मज़बूत है और फिल्म की बाक़ी कलाकारों का अभिनय भी अच्छा है. कैटरीना कैफ़ हमेशा की तरह ख़ूबसूरत लगी हैं. रणबीर कपूर की जितनी तारीफ़ की जाए कम है. रणबीर ने अपनी ऐक्टिंग से साबित कर दिया है कि उनके जैसे कलाकार इंडस्ट्री में कम हैं. हर सीन और डायलॉग को रणबीर ने बड़ी शिद्दत से निभाया है.

फिल्म देखने जाएं या नहीं

अगर आप रणबीर कपूर के फैन हैं, तो ज़रूर देखें ये फिल्म. रणबीर की ऐक्टिंग आपको बिल्कुल निराश नहीं करेगी. अनुराग बासु का काम अगर आप पसंद करते हैं और कुछ अलग फिल्म देखना चाहते हैं, तो एक बार ये फिल्म ज़रूर देखी जा सकती है.

रिलीज़ हो गई बाहुबली 2: द कंक्लूजन, कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? मिल गया इसका जवाब (Movie Review: Baahubali 2: The Conclusion)

बाहुबली 2

फिल्म- बाहुबली 2: द कंक्लूजन

स्टारकास्ट- प्रभास, राणा दग्गुबाती, अनुष्का शेट्टी, तमन्ना भाटिया, राम्या कृष्णन

निर्देशक- एस एस राजामौली

रेटिंग- 4.5 स्टार

बाहुबली 2

आख़िरकार एक लंबे इंतज़ार के बाद एस एस राजामौली की फिल्म बाहुबली 2: द कंक्लूजन रिलीज़ हो ही गई. तमिल, तेलुगू, हिन्दी और मलयालम इन चार भाषाओं मे रिलीज़ हुई इस फिल्म को लेकर हर को उत्सुक है, क्योंकि यही वो फिल्म है जिसमें छुपा है उस सवाल का जवाब, जिसका हर किसी को इंतज़ार था. कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? इसका जवाब आपको फिल्म के सेकंड हाफ में मिलेगा. कमाल का स्क्रीनप्ले और हॉलीवुड स्तर की इस फिल्म की कहानी हम आपको नहीं बता सकते हैं, लेकिन इतना ज़रूर कह सकते हैं कि फिल्म इतनी शानदार है कि अगर आप ये फिल्म नहीं देखते, तो यकीनन एक बेहतरीन फिल्म मिस कर जाएंगे आप. फिल्म का आख़िरी के 15 मिनट आपकी सांसें रोक देगा, इतना ज़बरदस्त ऐक्शन शायद ही आपने पहले किसी बॉलीवुड फिल्म में देखा होगा.

देवसेना यानी अनुष्का शेट्टी को अब तक आपने एक छोटे से रोल में बेड़ियों में जकड़े देखा था, लेकिन बाहुबली 2 में वे कई ख़तरनाक़ ऐक्शन सीन्स करती नज़र आ रही हैं. तमन्ना भाटिया ने भी अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है.

अब बात बाहुबली और भल्लालदेव यानी प्रभास और राणा दग्गुबाती की, एक बार दोनों दमदार, पहले से ज़्यादा फिट नज़र आ रहे हैं. राम्या भी अपने किरदार में बेहतरीन लग रही हैं. फिल्म का वीएफएक्स हॉलीवुड लेवल का है. एडिटिंग से लेकर बैकग्राउंड स्कोर, सिनेमेटोग्राफी, फिल्म का संगीत सब कुछ परफेक्ट है.