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फिल्म रिव्यूः मलाल और वन डेः जस्टिस डिलिर्व्ड (Film Review Of Malaal And One Day: Justice Delivered)

फिल्मः मलाल 
कलाकार: शर्मिन सहगल, मीजान जाफरी, समीर धर्माधिकारी, अंकुश बिष्ट
निर्देशक: मंगेश हडावले
स्टारः 2.5

Malaal

यह फिल्म 15 साल पहले बनी एक तमिल फिल्म का रीमेक है. इस फिल्म का हीरो शिवा (मीजान जाफरी) मुंबइया है. आमची मुंबई के इस मुलगे की मुलाकात होती है त्रिपाठी जी की बिटिया आस्था से (शर्मिन सहगल) से. मुफलिसी का मारा ये उत्तर भारतीय परिवार शिवा का पड़ोसी बनता है और फिर  शुरू होती है तकरार, इजहार, इंकार और इसरार के मसालों में पगी एक प्रेम कहानी. अदाकारी की बात करें तो मीजान ने मराठी लड़के का किरदार निभाने के लिए काफ़ी मेहनत की है, जो फिल्म में साफ नजर आती है. कई जगहों पर वे बेहद प्रभावित करते हैं. शर्मिन को अभी मेहनत की ज़रूरत है. फिल्म का संगीत भी कुछ खास नहीं है. सिनेमैटोग्राफी व एडिटिंग कसी हुई है. लवस्टोरी के शौकीन एक बार फिल्म दे सकते हैं.

फिल्मः वन डेः जस्टिस डिलिर्व्ड 
कलाकारः अनुपम खेर, ईशा गुप्ता, कुमुंद मिश्रा
निर्देशकः अशोक नंदा
स्टारः 2

One Day: Justice Delivered

यह फिल्म रिटायर्ड जज (अनुपम खेर) की कहानी है. जो रिटायर्मेंट के बाद बहुत सर्तक हो जाते हैं और उन अपराधियों का सजा दिलाने की कोशिश करते हैं जो सबूत के अभाव में अदालत से बरी हो गए थे. जज के रूप में त्यागी कानून के हाथों मजबूर होकर ऐसे अपराधियों को भी निर्दोष बताना पड़ा, जो उनके हिसाब से दोषी थे. एक घटना उन्हें पूरी तरह झकझोर देती है और रिटायर होने के बाद वे कानून को अपने हाथ में लेकर अपराधियों को सजा दिलाने का बीड़ा उठाते  हैं. फिल्म की कहानी अच्छी है, मगर उसे सही तरह से प्रस्तुत करने में निर्देशक अशोक नंदा पूरी तरह चूक गए हैं. इंस्पेक्टर के रूप में कुमुंद मिश्रा ने अपने किरदार को बख़ूबी निभाया है. ईशा गुप्ता का भी काम अच्छा है. खराब निर्देशन के बावजूद अनुपम खेर ने अपना किरदार अच्छी तरह प्ले किया है.

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फिल्म समीक्षा- पीएम नरेंद्र मोदी- साहसी, अद्भुत, सशक्त प्रधान सेवक (Movie Review: PM Narendra Modi- Strong, Charismatic And Visionary Leader)

पीएम नरेंद्र मोदी- अब कोई रोक नहीं सकता..वाकई फिल्म के पोस्टर पर दिए गए ये स्लोगन आज के सच को बयां करते हैं. भला कौन रोक पाया मोदीजी को देश के हित में कठोर, सटीक, साहसी निर्णय लेते और देशप्रेम के अपने जज़्बे को अपने अथक कार्यों से पूरा करते हुए. इसी हक़ीक़त को फिल्मी जामा पहनाकर बड़े पर्दे पर दिखाया गया है.

Movie Review PM Narendra Modi

जब कभी किसी ख़ास व्यक्ति विशेष की ज़िंदगी पर बायोपीक फिल्म बनती है, तो हर किसी को उसे देखने-जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है. ऐसे में शख़्सियत हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी हों, तो भला कौन नहीं चाहेगा मूवी देखना. उनके बचपन, परिवार, वैराग्य, संन्यासी, राष्ट्रीय सेवा संघ, राजनीति, गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक की स्थिति-परिस्थिति को संक्षेप में निष्पक्ष रूप से दिखाने की कोशिश फिल्म में की गई है. पीएम की भूमिका में विवेक ओबेरॉय ने लाजवाब अभिनय किया है. इसमें कोई दो राय नहीं कि यह उनकी अब तक की सबसे बेहतरीन अदाकारी है. उनके मेकअप, हावभाव व अभिनय ने मोदीजी के व्यक्तित्व को नई परिभाषा दी है.
अक्सर बायोपीक फिल्मों में हक़ीक़त व थोड़ी नाटकीयता का मिश्रण रहता है. लेकिन निर्देशक उमंग कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी फिल्म में ईमानदारी के साथ सच्चाई दिखाने व तथ्यों को स्पष्ट करने की प्रशंसनीय कोशिश की है. नमो यानी हमारे प्यारे प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदीजी के जीवन के उतार-चढ़ाव, श्रम, संघर्ष, आरोप-प्रत्यारोप का दंश, विपक्ष की नफ़रत, जनता का प्यार, लोगों का विश्‍वास, धर्म की आस्था, भगवा पर देश का प्यार… सभी को बेहतरीन ढंग से फिल्माया गया है, ख़ासकर हिमालय के लोकेशन काफ़ी ख़ूबसूरत बन पड़े हैं.
इस फिल्म के ज़रिए मोदीजी का हिमालय के प्रति प्रेम, जप-तप, तपस्वी का जीवन, निस्वार्थ सेवा, मेहनत-लगन, प्रभावशाली भाषाशैली, भाषण आदि को फिल्म के माध्यम से और भी क़रीब से देखने-समझने का मौक़ा मिलता है.
सुरेश ओबेरॉय, आनंद पंडित व संदीप सिंह द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित पीएम नरेंद्र मोदी फिल्म के डिस्ट्रिब्यूटर पैनोरमा स्टूडियोज और व आनंद पंडित मोशन पिक्चर्स है. फिल्म की कहानी संदीप सिंह ने लिखी है. संवाद और पटकथा में विवेक ओबेरॉय ने भी अपनी प्रतिभा दिखाई है, इसलिए उन्हें भी इसका श्रेय दिया गया है. उनके अलावा अनिरुद्ध चावला व हर्ष लिंबचिया के ज़बर्दस्त डॉयलॉग ने फिल्म को और भी आकर्षक बनाया है.

संगीतकार हितेश मोदक का संगीत फिल्म को गति देने के साथ दिल को सुकून भी देता है. सुखविंदर सिंह और सिद्धार्थ महादेवन की आवाज़ में हिंदुस्तानी, नमो नमो, सौंगध मुझे इस मिट्टी की… के गीत कर्णप्रिय हैं. राजेंद्र गुप्ता, ज़रीना वहाब, बरखा बिस्ट सेनगुप्ता, सुरेश ओबेरॉय, मनोज जोशी, किशोरी शहाणे, बोमन ईरानी, अंजन श्रीवास्तव, प्रशांत नारायणन, दर्शन कुमार, राज सलूजा, इमरान हसनी आदि कलाकारों ने प्रभावशाली अदाकारी के साथ अपने क़िरदार के साथ पूरा न्याय किया है. जहां देशभर में अबकी बार फिर मोदी सरकार पर देशवासियों ने मुहर लगा दी है, वहीं फिल्म भी सभी को यक़ीनन पसंद आएगी और बेहतरीन फिल्मों की श्रेणी में शामिल होगी.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यूः टोटल धमाल मनोरंजन से मालामाल (Movie Review: Total Dhamaal Full On Comic Entertainer)

इंद्र कुमार निर्देशित टोटल धमाल (Total Dhamaal) मनोरंजन से भरपूर मसाला फिल्म है. इसमें 17 साल बाद अनिल कपूर-माधुरी दीक्षित एक बार फिर साथ दिखेंगे. अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी की तिकड़ी कह सकते हैं तीन गुना कॉमेडी का तड़का देती है.

Total Dhamaal

कहानी बस इतनी-सी है कि मनोज पाहवा को करोड़ों का ख़ज़ाना मिलता है, जो वो अपने दोस्त अजय देवगन व संजय मिश्रा को धोखा देकर कहीं छिपा देता है. लेकिन जब तक अजय-संजय ख़ज़ाने तक पहुंचते हैं, तब तक कई लोगों को इसके बारे में पता चल जाता है और वे भी इसे ढूढ़ने के लिए निकल पड़ते है. इस खोजी टीम में अनिल-माधुरी, अरशद, रितेश, ईशा गुप्ता, पितोबश, जावेद, जॉनी लीवर, महेश मांजरेकर आदि हैं. उनकी इस सर्च जर्नी में उन्हें रोमांच, डर, डांस, मस्ती, एक्शन, एडवेंचर्स इन सबसे दो-चार होना पड़ता है.

सोनाक्षी सिन्हा पर फिल्माये गए गीत मुंगडा मुंगडा मैं गुड़ की डली… पैसा ये पैसा… रीमिक्स आकर्षित करते हैं. प्रीतम चक्रवर्ती के संगीत के साथ-साथ शान, ज्योतिका टांगरी, देव नेगी, अदिति सिंह शर्मा व हार्डी संधु की मधुर आवाज़ में गाए गए ये गीत समां बांध देते हैं.

फॉक्स स्टार स्टूडियोज द्वारा प्रस्तुत अजय देवगन फिल्मस, इंद्र कुमार, अशोक ठकेरिया, अधिकारी ब्रदर्स, आनंद पंडित, फॉक्स स्टार स्टूडियोज द्वारा निर्मित व इनके अलावा कुमार मंगत पाठक व संगीता अहीर द्वारा सह-निर्मित टोटल धमाल वाकई में मनोरंजन से भरपूर मज़ेदार फिल्म है. वैसे फिल्म रिलीज़ से पहले इसके ट्रेलर ख़ास कर अलग-अलग भाषाओं में बनाए गए ट्रेलर ने भी दर्शकों का ख़ूब मनोरंजन किया था.

मल्टी स्टारर इस फिल्म में विदेशी बंदर क्रिस्टल के अलावा वनमानुष, शेर, हाथी, गेंडा, सांप आदि के भी विदेशों में फिल्माए गए मज़ेदार सीन है. क्रिस्टल ने तो कई हॉलीवुड फिल्मों में भी अपनी उछल-कूद, गुलाटियों आदि का जलवा दिखाया है.

धमाल, डबल धमाल का सीक्वल तीसरी कड़ी टोटल धमाल फुल कॉमेडी टाइमपास मूवी है. ख़ज़ाने की खोज में इतने उतार-चढ़ाव, मोड़ के साथ-साथ कलाकारों की परफेक्ट कॉमेडी को देख दर्शक हंसते-हंसते लोटपोट हो जाते हैं. सभी कलाकारों ने मनोरंजन का ज़बर्दस्त धमाका पेश किया है.

टोटल धमाल की ख़ास बात रही कलाकारों को टक्कर देता जानवरों का लाजवाब अभिनय. यदि आप भी हंसी का पागलपन व दीवानगी देखना चाहते हैं, तो तर्क-वितर्क को अलग रखते हुए इस फिल्म को देखने का लुत्फ़ उठा सकते हैं, क्योंकि यह है पैसा वसूल कॉमेडी.

– ऊषा गुप्ता

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Film Review: सारा ने जीता दिल, पर कहानी है कमज़ोर कड़ी (Movie Review Of Film Kedarnath)

निर्देशक- अभिषेक कपूर

स्टारकास्ट- सुशांत सिंह राजपूत, सारा अली ख़ान, पूजा गौर, नितीश भारद्वाज

सर्टिफिकेट- U/A

रेटिंग्स- 3/5

Kedarnath Movie

फिल्म केदारनाथ (Kedarnath) एक सामान्य प्रेमकहानी है. जिसे वर्ष 2013 में आए बाढ़ और तबाही के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया है.

कहानी 
केदारनाथ की कहानी उत्तराखंड के केदारनाथ धाम की है. फिल्म की कहानी एक हिन्दू पंडित की बेटी मंदाकिनी उर्फ़ मुक्कु (सारा अली ख़ान) से शुरू होती है जो की बेहद जिद्दी, खुशमिज़ाज़ और अल्हड़ हैं. मुक्कु को एक मुस्लिम पिट्ठू (तीर्थयात्रियों को कंधे पर उठानेवाला) मंसूर (सुशांत सिंह राजपूत) से प्यार हो जाता है. दो अलग धर्म के लोगों का प्यार वादी के लोगों को पसंद नहीं आता और फिर इस प्यार को तोड़ने की भरपूर जद्दोजहद शुरू हो जाती है. इस पूरी कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब मंदाकिनी और मंसूर के प्यार को तोड़ने के लिए पंडितों और पिट्ठुओं के बीच जंग छिड़ जाती है और इसी बीच क़ुदरत भी अपना कहर बरपा देता है. हालांकि फिल्म प्राकृतिक आपदा पर आधारित है, लेकिन बाढ़ का सीन काफ़ी लंबे इंतज़ार के बाद आता है.

Kedarnath Movie

ख़ासियत
फिल्म की सेंटर ऑफ अट्रैक्शन सारा अली ख़ान हैं. जिन्होंने अपनी डेब्यू फिल्म में ही काफ़ी शानदार पर्फामेंस दिया है. फिल्म देखकर लगता ही नहीं की ये उनकी पहली फिल्म है. फिल्म के एक एक सीन में वे कॉन्फिडेंट और दमदार दिखीं. वे जैसे ही स्क्रीन पर आती हैं, दर्शकों को बांध लेती हैं. सुशांत सिंह ने भी काफ़ी अच्छा अभिनय किया है. तुषार कान्ति की ड्रोन असिस्टेड सिनेमाटोग्राफी कमाल की है. हिमालय की ख़ूबसूरत तस्वीरों को बेहद ख़ूबसूरती से फिल्माया गया है.

कमियां
केदारनाथ का पहला हाफ बहुत ही सुस्त और दूसरा भी कोई उम्मीद नहीं जगाता है. फिल्म का डायरेक्शन भी बेहद कमज़ोर है और कहानी कुछ भी नया नहीं दिखाती है. फिल्म के डायरेक्टर अभिषेक कपूर पूरी तरह चूकते नज़र आते हैं. यह फिल्म न तो प्रेम कहानी के तौर पर छूती है और न ही त्रासदी आधारित विषय पर बनी सॉलिड फिल्म ही लगती है.

म्यूज़िक
संगीत के मामले में भी फिल्म चूक गई है.  फिल्म के गाने थकाने का काम करते हैं. ‘नमो-नमो शंकरा’ के अलावा कोई भी गाना दिल को नहीं छूता.

केदारनाथ का ट्रेलर

 

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मूवी रिव्यू: सुपर इफेक्ट्स, थ्रिल, अविश्‍वसनीय एक्शन से भरपूर अद्भुत 2.0 (Movie Review 2.0: Brilliant Visual Effects, Thrills And Action Sequences)

 

2.0

जब दो सुपरस्टार रजनीकांत (Rajinikanth) और अक्षय कुमार (Akshay Kumar) एक साथ हों, तो एक बेहतरीन फिल्म की उम्मीद हर किसी को होती है. लेकिन यहां पर इन दोनों से कई ऊपर रहे निर्देशक एस. शंकर. जैसा कि सभी जानते हैं कि इसे रजनीकांत और अक्षय कुमार की फिल्म करके ख़ूब प्रमोट किया गया, पर इसमें सबसे अधिक प्रभावित करते हैं निर्देशक शंकर. उन्होंने पूरी फिल्म में हर एक सीन पर ख़ूब मेहनत की है. सुपर इफेक्ट्स की भरमार है फिल्म में पर व्यवस्थित व योजनाबद्ध तरी़के से. क़रीब आठ साल पहले शंकर की ही रोबोट फिल्म आई थी, जिसमें रजनीकांत और ऐश्‍वर्या राय बच्चन मुख्य भूमिका में थे, 2.0 फिल्म को उसी का सीक्वल कह सकते हैं.

पहली बार इस तरह की साइंस फिक्शन मूवी के एक्शन, सुपर इफेट्स मिक्सिंग देख हॉलीवुड मेकर भी शंकरजी की तारीफ़ किए बगैर नहीं रह सकेंगे. इसमें कोई दो राय नहीं कि भारतीय सिनेमा ने इस फिल्म के ज़रिए फिल्म बनाने में एक और शिखर को छुआ है. फिल्म के विज़ुअल इफेक्ट्स काबिल-ए-तारीफ़ हैं. उस पर थ्रीडी में होने के कारण फिल्म और भी शानदार बन पड़ी है. इस तरह की फिल्मों में कहानी की उम्मीद बहुत कम होती है, क्योंकि निर्देशक का पूरा ध्यान एक्शन, वीएफएक्स पर होता है और यही एस. शंकर ने भी किया.

कहानी बस इतनी है कि अक्षय कुमार, पक्षीराजन, जो ओर्निथोलॉजिस्ट (पक्षी वैज्ञानिक) हैं, मोबाइल टॉवर से कूदकर आत्महत्या कर लेते हैं. दरअसल, मोबाइल फोन के रेडिएशन से पक्षियों को काफ़ी नुक़सान पहुंच रहा होता है, इसका प्रतिशोध अक्षय इंसानों से लेना चाहता है. एक तरह इसके ज़रिए सोशल मैसेज भी देने की कोशिश की गई है. इसके बाद शहरभर के सभी लोगों के मोबाइल फोन उड़ने लगते हैं. वसीकरण यानी रजनीकांत को इसकी छानबीन करने के लिए कहा जाता है. वे अपनी असिस्टेंट नीला यानी एमी जैक्सन जो एक रोबोट हैं, के साथ पता लगाने की कोशिश करते हैं. इसी बीच शहर में मोबाइल फोन की बनी एक चिड़िया (अक्षय कुमार) शहर पर दनादन हमला करने लगती है. आख़िरकार उससे मुक़ाबला करने के लिए वसीकरण को अपने रोबोट चिट्टी (रजनीकांत डबल रोल में) की मदद लेनी पड़ती है, क्योंकि पक्षीराजन और इंसानों के बीच केवल चिट्टी का अपग्रेडेड वर्ज़न 2.0 है.

पक्षीराजन और चिट्टी का आमना-सामना, लड़ाई, दांवपेंच और उसके अविश्‍वसनीय से एक्शन थ्रिल व रोमांच पैदा करते हैं. फिल्म में भावनाओं की कमी थोड़ी खलती है, पर दो सुपर मानव की टक्कर दिलचस्पी भी पैदा करती है. फिल्म की शुरुआत में ही अक्षय कुमार की मौत होने के बाद उनकी आत्मा, भूत या फिर औरा जो समझ लें का इंसानों से बदला लेने, रजनीकांत से संघर्ष देखने काबिल है.

फिल्म में सीन दर सीन स्पेशल इफेक्ट्स का बड़ी ख़ूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है. एक समय ऐसा आता है, जब रजनीकांत व अक्षय कुमार की लड़ाई में पांच सौ रोबोट्स रजनीकांत के रूप में आ जाते हैं, तो हज़ारों अक्षय कुमार, फिर लाखों रजनीकांत- सब कुछ विस्मय, विलक्षण, रोगंटे खड़े कर देनेवाले दृश्य हैं, जो दर्शकों को पलभर के लिए भी हिलने नहीं देते और फिल्म से बांधे रखते हैं. इसके लिए टेकनीशियन और डायरेक्टर बधाई के पात्र हैं.

रजनीकांत, अक्षय कुमार के अलावा एमी जैक्सन, सुधांशु पांडे, आदिल शाह सभी ने बेहतरीन अभिनय किया है. अक्षय कुमार पहली बार रजनीकांत के साथ काम कर रहे हैं, उन्हें इस बात की बेहद ख़ुशी है, फिर चाहे वो खलनायक का ही क़िरदार क्यों न हो. बकौल अक्षय उन्हें शूटिंग के समय अपने पक्षीराजन के गेटअप में तैयार होने में क़रीब छह घंटे लग जाते थे. उन्हें इसके मेकअप के लिए मेकअप आर्टिस्ट के सामने घंटों ख़ामोश होकर बैठे रहना पड़ता था. उनके अनुसार, इस कारण उनकी सब्र करने और अपनी धैर्य की क्षमता को विकसित करने में भी मदद मिली.

निर्माता अलीराजा सुबासकरण व राजू महालिंगम ने इस तरह की फिल्म बनाने का रिस्क लिया, जो सराहनीय है. ए. आर. रहमान का संगीत फिल्म को गति देता है, पर गाने केवल दो ही हैं. फिल्म को टूडी और थ्रीडी फार्मेट में दुनियाभर में प्रदर्शित किया गया है और इसके लिए तकनीकी रूप से शंकरजी के पूरी टीम ने ख़ूब मेहनत भी की है. फिल्म में सरप्राइज़ पैकेज के रूप में 3.0 कुट्टी का भी ज़िक्र किया गया है, ताकि प्रशंसकों को शंकर की अगली फिल्म का इंतज़ार रहे.

फिल्म हिंदी, तमिल और तेलगु- इन तीन भाषाओं के साथ अन्य भाषाओं में भी डब होकर प्रदर्शित की गई है. यूं तो फिल्म 512 करोड़ रुपए की लागत में बनी है, पर उसने अभी से सेटेलाइट, डिजिटल, डिस्ट्रिब्यूशन के राइट्स के ज़रिए 350 करोड़ रुपए कमा लिए हैं. यह तो जगजाहिर है कि 2.0 फिल्म दक्षिण भारतीयों द्वारा सुपर-डुपर हिट हो ही जाएगी. लेकिन हिंदी प्रेमी दर्शकों को यह कितना पसंद आएगी, यह तो व़क्त ही बताएगा.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू: सनी के दम पर भैयाजी सुपरहिट (Movie Revie: Bhaiaji Superhit- Sunny Deol Surprises With A Goofy Flick)

Bhaiaji Superhit Review

इन दिनों सनी देओल की कई सालों से अटकी फिल्में सिलसिलेवार आ रही हैं. पिछले हफ़्ते मौहल्ला अस्सी आई, जो काफ़ी समय से बन रही थी. अब आज भैयाजी सुपरहिट सिनेमा के पर्दे पर आ पाई है. दोनों ही फिल्मों में अभिनय के मामले में सनी देओल ने काबिल-ए-तारीफ़ अभिनय किया है.

भैयाजी अपनी पत्नी सपना के छोड़कर चले जाने से परेशान हैं. वे किसी भी क़ीमत पर अपनी पत्नी को वापस लाना चाहते हैं. इसके लिए फिल्मों में काम करने के लिए मुंबई आना, अभिनय करना, कुछ पुराने दुश्मनों से भिड़ना आदि चलता रहता है. इसमें निर्देशक व लेखक के रूप में अरशद-श्रेयस की जुगलबंदी देखते ही बनती है.

भैयाजी सुपरहिट में भी सनी देओल दबंग के क़िरदार में अपना दबदबा दिखाने में सफल रहे हैं. वे अपनी पत्नी सपना (प्रीति ज़िंटा) को बेइंतहा चाहते हैं और उससे डरते भी हैं. सपना के क़िरदार में प्रीति ने बेहतरीन काम किया है. वे बोलती कम और गोली ज़्यादा चलाती हैं. हमेशा शरारती-चुलबुली अंदाज़ में दिखनेवाली प्रीति एक नए ही अंदाज़ में सपना के रूप में चटक साड़ियों, भरी चूड़ियों में प्रभावशाली पत्नी के ज़बर्दस्त रोल में नज़र आती हैं. लंबे समय बाद प्रीति ज़िंटा को पर्दे पर देखना सुकून की तरह रहा. जब-जब पर्दे पर अरशद और श्रेयस की एंट्री होती है, लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. दोनों ही कलाकारों की कॉमेडी टाइमिंग लाजवाब है. कह सकते हैं कि प्रीति ज़िंटा के अलावा अन्य सभी कलाकारों यानी अमीषा पटेल, अरशद वारसी, श्रेयस तलपड़े, मिथुन चक्रवर्ती, मुकुल देव, जयदीप अहलावत, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, प्रकाश राज, एवलिन शर्मा सभी ने अपनी-अपनी भूमिकाओं को पूरी ईमानदारी से निभाया है.

नीरज पाठक का निर्देशन स्तरीय है. थोड़ी-सी और मेहनत करते तो फिल्म के सभी उम्दा कलाकारों से और भी बढ़िया काम करवा सकते थे. निर्माता चिराग धारीवाल और फौजिया अर्शी के साहस की दाद देनी होगी कि इतने सालों बाद ही सही फिल्म रिलीज़ तो हुई. साजिद-वाजिद, संजीव-दर्शन, जीत गांगुली, राघव सच्चर, अमजद नजीम, फौजिया अर्शी जैसे संगीतकारों का जमावड़ा है, पर एक भी गाना दिलोदिमाग़ पर ठहर नहीं पाता है. सुखविंदर सिंह, असीस कौर, यासेर देसाई के गाए गीत बस थोड़ी-सी राहत भर दे पाते हैं. फिल्म में एक्शन, कॉमेडी के साथ ईमोशंस भी है. भैयाजी सुपरहिट  होगी की नहीं पता नहीं पर भैयाजी तो हमेशा ही हिट हैं.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू- लैला मजनूं/पलटन (Movie Review- Laila Majnu/Paltan)

Laila Majnu/Paltan

लैला मजनूं

प्रेम कहानी पर जितनी भी फिल्में बनाई जाए, लोगों को पसंद आती ही है, बस कहानी और कलाकारों के अभिनय में दम होना चाहिए. निर्देशक इम्तियाज़ अली के भाई साजिद अली यही बाज़ी मार जाते हैं. इस फिल्म के ज़रिए उन्होंने निर्देशन की दुनिया में क़दम रखा है. साथ ही फिल्म में लैला-मजनूं बने अविनाश तिवारी और तृप्ति डिमरी ने भी अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की है.
प्रेमी-प्रेमिका की नोक-झोंक, दोनों का मिलना-बिछुड़ना, परिवार-ज़माने का विलेन बन जाना… यही सब है फिल्म में. लेकिन इसके बावजूद ख़ूबसूरत लोकेशन, कलाकारों का अभिनय, भावनाप्रदान दृश्य बांधे रखते हैं.
फिल्म की कहानी इम्तियाज़ अली ने लिखी है. फिल्म के कुछ संवाद और दृश्य बेहतरीन हैं.
संगीत मधुर है. गीत लैला ओ लैला… हाफिज़ हाफिज़… पहले से ही हिट हो गए हैं.
पहली ही फिल्म होने के बावजूद अविनाश व तृप्ति डिमरी ने प्रभावशाली अभिनय किया है. दोनोंं ही सहज लगे हैं. परमीत सेठी, सुमित कौल ने भी अपने अभिनय के साथ न्याय किया है. लव स्टोरी मूवी देखनेवालों को फिल्म ज़रूर पसंद आएगी.

पलटन

जे. पी. दत्ता देशभक्ति और उस पर भी ख़ासकर युद्ध पर आधारित फिल्म बनाने के लिए जाने जाते हैं. बॉर्डर, एलओसी कारगिल… फिल्मों को दर्शकों ने ख़ूब पसंद किया था. अब वे पलटन के रूप में भारत-चीन के बीच हुए युद्ध को लाए हैं. फिल्म की ख़ासयित रही है- वॉर सीन में रियल फौजियों के साथ फिल्माया जाना.

इस फिल्म के द्वारा जे.पी. दत्ता बारह साल बाद वापसी कर रहे हैं, लेकिन फिल्म में ख़ास नयापन नहीं है.

जैकी श्रॉफ, सुनील शेट्टी, सोनू सूद, गुरमीत चौधरी, सिद्धार्थ कपूर, लव सिन्हा, हर्षवर्धन राणे, ईशा गुप्ता, सोनल चौहान सभी कलाकारों ने अपने क़िरदार के साथ न्याय किया है. लेकिन फिल्म दर्शकों उस तरह का प्रभाव नहीं छोड़ पाएगी, जैसा कि दत्ता साहब की फिल्मों के साथ होता है.

अनु मलिक और संजॉय चौधरी की संगीत भी बस ठीक-ठाक है.

 

फिल्म रिव्यूः स्त्री और यमला पगला दीवाना फिर से (Film Review: Stri And Yamala Pagala Deewana Phir Se)

पढ़िए आज यानी 31 अगस्त को रिलीज़ हुई दो फिल्में स्त्री और यमला पगला दीवाना फिर से की समीक्षा.

Stri And Yamala Pagala Deewana Phir Se Reviews

फिल्म: स्त्री

डायरेक्टर: अमर कौशिक

स्टार कास्ट: राजकुमार राव ,श्रद्धा कपूर, अपारशक्ति खुराना ,पंकज त्रिपाठी ,अभिषेक बनर्जी

अवधि: 2 घंटा 10 मिनट

Stri Reviews

कहानीः  ‘स्त्री’ एक हॉरर कॉमेडी है. जो एक सच घटना से प्रेरित बताई जाती है. फिल्म में विक्की (राजकुमार राव) एक टेलर है. एक दिन उसकी मुलाकात स्त्री (श्रद्धा कपूर) से होती है. विक्की और उसका दोस्त बिट्टू (अपारशक्ति खुराना) मिलकर स्त्री को पटाने की हर कोशिश करते हैं, लेकिन जब उन्हें स्त्री की अजीब हरकतों के चलते उस पर शक होता है, तो वे रुद्रा (पंकज त्रिपाठी) की शरण में जाते हैं, जो उन्हें स्त्री की सच्चाई से परिचित कराता है.

अभिनयः राजकुमार राव जब भी स्क्रीन पर आते हैं तो वह अपनी अदायगी से सारी लाइमलाइट बटोर ले जाते हैं. ‘स्त्री’ के जरिए उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह हर रोल में अव्वल हैं. उनकी कॉमेडी टाइमिंग से लेकर खौफ खाने का अंदाज आपको भा जाएगा. अपारशक्ति खुराना, अभिषेक बनर्जी, पंकज त्रिपाठी जैसे सपोर्टिंग स्टार्स ने बेहद सधी हुई भूमिका निभाई है, जो आपका दिल जीत लेगी. ऋद्धा कपूर ने भी अपने रोल के साथ न्याय किया है.

निर्देशनः अमर कौशिक का निर्देशन कमाल का है, शुरू से आखिरी तक फिल्म आपको बांधे रखेगी. कहानी में नयापन है. इसके डायलॉग्स और कॉमिक पंच इतने शानदार है कि ढाई घंटे का वक्त चुटियों में निकल जाएगा.

कमज़ोर कड़ियांः रिलीज से पहले फिल्म के गीत हिट नहीं हो पाए, इसका खामियाजा शायद मेकर्स को ओपनिंग के लिए उठाना पड़ सकता है, लेकिन कहानी में दम है, जिसकी वजह से वर्ड ऑफ माउथ से फायदा मिलेगा. क्लाइमैक्स शायद सबको पसंद न अाए.

फिल्म: यमला पगला दीवाना फिर से

Yamala Pagala Deewana Phir Se Reviews

डायरेक्टर: नवनैत सिंह

स्टार कास्ट: धर्मेंद्र, सनी देओल, बॉबी देओल, कृति खरबंदा, शत्रुघ्न सिन्हा, असरानी

अवधि: 2 घंटा 28 मिनट

 

कहानीः वैद्य पुराण (सनी देओल) एक आयुर्वेदिक वैद्य हैं जिनके पास वज्र कवच नाम का एक कमाल का फॉर्मूला है जो उनके पुरखों ने इजाद किया था. ये फॉर्मूला मुहासों से लेकर नपुंसकता हर बीमारी का इलाज कर सकती है. इस फॉर्मूले पर नजर होती एक बहुत बड़ी दवा कंपनी की जो किसी तरह इसे हासिल करना चाहती है. वहीं पुराण सिर्फ एक पुरुष नहीं है बल्कि महापुरुष है. जो मरीजों के इलाज के साथ-साथ सुपरमैन को भी टक्कर देते हैं.  फिल्‍म में धर्मेंद्र ने जयंत नाम परमार नाम के शख्‍स का किरदार निभाया है तो बॉबी देओल ‘काला’ नाम के एक लड़के के रोल में हैं.

ऐक्टिंगः धरम पाजी, सनी देओल और बॉबी देओल, तीनों अभिनेताओं ने बढ़िया काम किया है. इसके साथ ही अभिनेत्री कृति खरबंदा ने भी कहानी के मुताबिक ही अभिनय किया है.

निर्देशनः डायरेक्शन भी काफी हिला डुला है. कहानी सुनाने का ढंग भी काफी डगमगाया सा है.  फर्स्‍ट हाफ में मूवी ठीकठाक रही है, लेकिन सेकंड हाफ में कुछ स्‍लो होती दिखी है. अगर आप भी देओल ब्रैंड के फैन हैं तो एक बार यह मूवी देख सकते हैं.

कमज़ोर कड़ीः  फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी कहानी है जो काफी आउटडेटेड सी नज़र आती है और बांध पाने में असमर्थ दिखाई देती है. सनी देओल-बॉबी देओल और धर्मेंद्र जैसे बड़े-बड़े कलाकार की अदाकारी कहानी की वजह से फीकी पड़ जाती है.

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Movie Review: ज़बर्दस्त एक्शन, दमदार डायलॉग्स और सस्पेंस से भरपूर है सत्यमेव जयते (Movie Review Satyameva Jayate)

Satyameva Jayate
Movie Review: ज़बर्दस्त एक्शन, दमदार डायलॉग्स और सस्पेंस  से भरपूर है सत्यमेव जयते (Movie Review Satyameva Jayate)
भ्रष्टाचार और सिस्टम के ख़िलाफ़ लड़ाई कोई नहीं बात नहीं है, बल्कि इस विषय पर पहले भी कई फ़िल्में बन चुकी हैं, पर जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते कुछ अलग है. जॉन की दमदार पर्सनालिटी ने इस फिल्म के किरदार को बेहद रोमांचक बना दिया है. एक आम इंसान की भ्रष्टाचारी पुलिस वालों के ख़िलाफ़ यह दिलचस्प और सस्पेंस से भरपूर कहानी आपको ज़रूर पसंद आएगी. तो चलिए देखते हैं क्या है सत्यमेव जयते की कहानी.
मूवी- सत्यमेव जयते
डायरेक्टर- मिलाप मिलन ज़वेरी
स्टार कास्ट- जॉन अब्राहम, मनोज बाजपेयी, आयशा शर्मा, मनीष चौधरी, अमृता खानविलकर
अवधि- 2 घंटा 21 मिनट
रेटिंग- 3.5
कहानी-
फिल्म की शुरुआत ही धमाकेदार एक्शन के साथ होती है, जहां वीर राठौड़ (जॉन अब्राहम) एक करप्ट पुलिस ऑफिसर को मौत की सज़ा देता है. भ्रष्टाचारी पुलिस ऑफिसर्स को एक-एक करके ख़त्म करने लगता है, जिससे वो आम जनता के लिए मसीहा बन जाता है. वीर राठौड़ भ्रष्टाचारियों के ख़ात्मे में लगा ही रहता है कि उसका सामना एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर शिवांश राठौड़ से होता है. फिर शुरू होती है पुलिस और वीर की धर पकड़ की कहानी. इसी बीच कहानी में एंट्री होती है ख़ूबसूरत शिखा (आयशा शर्मा) की, जिसके बाद वीर और शिखा में नज़दीकियां बढ़ने लगती हैं. वीर अपने मकसद में आगे बढ़ता है, तो शिवांश के साथ उसकी भिड़ंत शुरू हो जाती है. इसके बाद एक एक कर कहानी में कई ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं और कहानी एक रोमांचक मोड़ पर पहुंचती है, जहां बताया जाता है कि वीर आख़िर क्यों भ्रष्टाचारी पुलिसवालों को ख़त्म करने में लगा रहता है.
Satyameva Jayate
क्या ख़ास है फिल्म में?
सत्यमेव जयते का ज़बर्दस्त एक्शन काबिले तारीफ़ है. दमदार डायलॉग्स दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर देते हैं. फिल्म  में ऐसा कई बार होता है कि दर्शक वाह वाह कर उठते हैं. इसी के साथ सस्पेंस भी काफ़ी अच्छा है. अगर आप जॉन के फैन हैं तो फिल्म देखने ज़रूर जाएं.
एक्टिंग
एक्टिंग की बात करें तो जॉन अब्राहम और मनोज बाजपेयी दोनों ने ही दमदार परफॉर्मेंस दी है.जॉन की डायलॉग डिलीवरी और एक्शन काबिले तारीफ़ है. पिछली फिल्मों की तरह इसमें भी मनोज बाजपेयी को ईमानदार पुलिस वाले के किरदार में देखना अच्छा लगता है. यह कहना होगा कि यह रोल उनकी पर्सनालिटी को काफ़ी सूट करता है. आयशा शर्मा भी अपने रोल में प्रॉमिसिंग नज़र आती हैं.
संगीत की बात करें तो इसके ‘पानियों सा’ और ‘दिलबर’ गाने तो पहले ही सुपर हिट हो चुके हैं, ऐसे में उन्हें बड़े पर्दे पर देखना अच्छा लगता है. कुल मिलाकर अगर आप जानना चाहते हैं कि क्यों वीर राठौड़ भ्रष्टाचारी पुलिस अफसरों को ख़त्म कर रहे हैं? तो यह फिल्म देखने ज़रूर जाएं. इस स्वतंत्रता दिवस अगर आप भी भ्रष्टाचार की इस लड़ाई में वीर और शिवांश का साथ देना चाहते हैं, तो सत्यमेव जयते देखने ज़रूर जाएं.
                                                      – अनीता सिंह

Karwaan Movie Review: भागदौड़ भरी ज़िंदगी के बीच सुकून के तलाश की कहानी है फिल्म ‘कारवां’ (Karwaan Movie Review)

अभिनेता इरफान खान (Irrfan Khan) लंदन में न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का इलाज करा रहै हैं. इसी बीच आज उनकी फिल्म कारवां बॉक्स ऑफिस पर रिलीज़ हो गई है. भागदौड़ भरी ज़िंदगी के बीच सुकून के कुछ पलों को तलाशती दिलचस्प यात्रा की कहानी है फिल्म कारवां. इस फिल्म में हंसी-ठहाकों के बीच ड्रामा और डार्क ह्यूमर भी देखने को मिलता है. चलिए हम आपको ले चलते हैं फिल्म के तीन मुख्य कलाकारों की त्रासदी भरी ज़िंदगी को फिर से पटरी पर लाने की इस दिलचस्प यात्रा पर.

Karwaan Movie

मूवी- कारवां
डायरेक्टर- आकर्ष खुराना
स्टार कास्ट- इरफान खान, दुलकर सलमान, मिथिला पालकर, कृति खरबंदा.
अवधि- 2 घंटा
रेटिंग- 3.5/5
Karwaan Movie

कहानी- फिल्म का एक किरदार अविनाश (दुलकर सलमान) बेचैनी से भरा एक ऐसा इंसान है जो अपनी असफलताओं के लिए अपने पिता को ही ज़िम्मेदार ठहराता है. अविनाश का अपने पिता के साथ बहुत ही अजीब सा रिश्ता है. पिता और बेटे के इस जटिल रिश्ते के बीच फिल्म की कहानी की शुरुआत अविनाश को आए एक फोन कॉल से शुरू होती है. जब फोन पर उसे पिता के मौत की जानकारी मिलती है. पिता की मौत के बाद अविनाश और उसका दोस्त शौकत (इरफान खान) बेंग्लुरु से कोच्चि आ जाते हैं और इस यात्रा के दौरान उन्हें अपनी ज़िंदगी के बारे में सोचने का समय मिलता है. दोनों के इस कारवां में तान्या (मिथिला पालकर) की एंट्री होती है. इन तीनों की इस यात्रा में कई ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं, जिसे जानने के लिए आपको सिनेमा घरों की ओर रुख करना होगा.

डायरेक्शन- बिजॉय नाम्बियार ने कारवां की कहानी को लिखा है. फिल्म के डायलॉग्स और डायरेक्टर आकर्ष खुराना का स्क्रीनप्ले काफ़ी दमदार है. इस फिल्म के ट्रेलर में जितने जोक्स देखने को मिले हैं, उनसे कहीं ज़्यादा जोक्स पूरी फिल्म में देखने को मिलेंगे. फिल्म को साउथ इंडिया के ख़ूबसूरत लोकेशन्स पर शूट किया गया है. फिल्म में इरफान खान की मौजूदगी इसे और भी एंटरटेनिंग बनाती है. हालांकि फिल्म के गाने कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा पाए हैं.

एक्टिंग- इस फिल्म के ज़रिए हिंदी फिल्मों में कदम रखने वाले दुलकर सलमान ने जबरदस्त एक्टिंग की है. वहीं यूट्यूब सेंसेशन मिथिला पालकर ने भी फिल्म में अच्छा काम किया है. दोनों की केमेस्ट्री कमाल की है. हालांकि इरफान खान की मौजूदगी इस फिल्म को और भी बेहतर बनाती है. इरफान खान जब-जब स्क्रीन पर आते हैं उन्हें देखकर दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ज़रूर आ जाती है. फिल्म में उन्होंने अपने किरदार को बखूबी निभाया है.

बहरहाल, अगर आप भी अपनी भागदौड़ भरी ज़िंदगी से कुछ सुकून भरे पल चुराकर ख़ुश होने का बहाना तलाश रहे हैं तो इस वीकेंड फिल्म कारवां ज़रूर देखें.

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Movie Review: बहन सोनम की ‘वीरे दी वेडिंग’ और भाई हर्षवर्धन की ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ हुई रिलीज़ (Movie Review: Veere Di Wedding and Bhavesh Joshi Superhero)

आज बॉक्स ऑफिस पर एक भाई और बहन के बीच कड़ी टक्कर हो रही है. जी हां, एक ओर जहां बहन सोनम कपूर की फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ रिलीज़ हुई है, तो वहीं भाई हर्षवर्धन कपूर की ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ इस फिल्म को कड़ी टक्कर देने के लिए बॉक्स ऑफिस पर उतरी है. इसके अलावा एक और फिल्म ‘फेमस’ ने सिनेमाघरों में दस्तक दी है. बॉक्स ऑफिस पर हो रहे इस कड़े मुक़ाबले में जीत किसकी होगी यह देखना बेहद दिलचस्प होगा.
यंगस्टर्स को पसंद आएगी ‘वीरे दी वेडिंग’ 
मूवी- वीरे दी वेडिंग 
स्टार कास्ट- करीना कपूर खान, सोनम कपूर, स्वरा भास्कर, शिखा तल्सानिया. 
डायरेक्टर- शशांक घोष 
टाइम- 2 घंटा 5 मिनट
रेटिंग- 3.5/5
कहानी-
‘वीरे दी वेडिंग’ बॉलीवुड की दूसरी फिल्मों से थोड़ी अलग और दिलचस्प है. फिल्म की कहानी 4 लड़कियों की दोस्ती की दास्तां बयां करती है, जो दिल्ली के एक स्कूल में साथ पढ़ा करती थीं. इनकी ख़ासियत है कि ये सभी सहेलियां अपने शर्तों पर जीती हैं और बेबाकी से बात करती हैं. ये चारों सहेलियां सेक्स और ऑर्गेज़्म पर निडरता से बातें करती हैं. डायरेक्टर ने उनकी ज़िंदगी की कमियों और समस्याओं को बेहद ख़ूबसूरत अंदाज़ में पेश करने की कोशिश की है.
फिल्म में शादी की उलझनों में उलझी कालिंदी (करीना कपूर) परिवार व रिश्तेदारों की उम्मीदों पर खरा उतरने की जद्दोजहद करती नज़र आती हैं, तो अवनी (सोनम कपूर) को कोई पार्टनर ही नहीं मिल रहा है और उनकी मां दिन-रात उनके लिए जीवनसाथी ढूंढने में लगी हैं. वहीं साक्षी (स्वरा भास्कर) रिलेशनशिप में बंधना ही नहीं चाहतीं और मीरा (शिखा तल्सानिया) एक विदेशी से शादी कर चुकी हैं और उनका एक बच्चा भी है, लेकिन उनकी शादीशुदा ज़िंदगी बहुत बोरिंग है. ये सभी सहेलियां कालिंदी (करीना कपूर) की शादी के लिए मिलती हैं और इस दौरान सभी की ज़िंदगी की कई सारी कहानियां सामने आती हैं.
डायरेक्शन- 
फिल्म के डायरेक्टर शशांक घोष ने फिल्म में इन चारों सहेलियों की केमेस्ट्री को बेहद तगड़े अंदाज़ में पेश किया है. फिल्म के कुछ डायलॉग्स को इन चारों अभिनेत्रियों ने शानदार तरीक़े से बोला है. फिल्म में कई ऐसे वन लाइनर्स हैं, जो आपको हंसने पर मजबूर कर सकते हैं. डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफी, लोकेशन के साथ कास्टिंग भी बेहतरीन है. फर्स्ट हाफ में फिल्म की कहानी दर्शकों को बांधे रखती है, लेकिन सेकेंड हाफ थोडा स्लो है.  फिल्म के ‘तारीफां’ और ‘भांगड़ा ता सजदा’ जैसे गाने आपको ख़ूब इंटरटेन करेंगे.
एक्टिंग-
फिल्म में करीना कपूर खान, स्वरा भास्कर, सोनम कपूर और शिखा तल्सानिया पूरी तरह से अपने किरदारों के साथ न्याय करती दिखाई दे रही हैं. हर फ्रेंम में ये चारों बेहतरीन आउटफिट्स पहने हुए नज़र आती हैं और सभी ने अपने डॉयलॉग्स को पूरे कॉन्फिडेंस के साथ पर्दे पर उतारा है. अगर आप ड्रामा और कॉमेडी के साथ-साथ सेक्स चैट के शौकीन हैं तो यह फिल्म आपके उम्मीदों पर खरी उतर सकती है.
करप्शन से जंग की कहानी है ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’
मूवी- भावेश जोशी सुपरहीरो 
स्टार कास्ट- हर्षवर्धन कपूर,प्रियांशु पैन्यूली,निशिकांत कामत,राधिका आप्टे,आशीष वर्मा
डायरेक्टर- विक्रमादित्य मोटवाने
टाइम- 2 घंटा 35 मिनट
रेटिंग- 2.5/5
कहानी-
फिल्म की कहानी वाटर स्कैम और समाज में फैले दूसरे करप्शन के खिलाफ़ लड़ने वाले एक आम आदमी के सुपरहीरो बनने की है. भावेश जोशी (हर्षवर्धन कपूर) अपने दोस्तों प्रियांसु पैन्यूली और आशीष वर्मा के साथ कॉलेज में पढ़ता है. ये तीनों दोस्त समाज से बुराइयों को दूर करने के मिशन पर लग जाते हैं. फिल्म में हर्षवर्धन कागज़ का मास्क पहनकर करप्शन करने वालों का पर्दाफाश करने की कोशिश करते हैं, लेकिन भ्रष्टाचारियों को यह नागवार गुज़रता है और वो इस मास्क के पीछे छुपे सुपरहीरो को ढूंढ निकालते हैं और इस सुपरहीरो की खूब पीटाई करते हैं, लेकिन सुपरहीरो हार नहीं मानता और इन सबको सबक सिखाता है. फिल्म में निशिकांत कामत राजनेता बने विलेन के रोल में हैं.
डायरेक्शन-
फिल्म के डायरेक्टर विक्रमादित्य मोटवाने ने डार्क शेड में लीक से हटकर फिल्म बनाई है. इस फिल्म से पहले एक्टर हर्षवर्धन कपूर राकेश ओम प्रकाश की ‘मिर्जिया’ में नज़र आ चुके हैं, लेकिन वो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपना कमाल नहीं दिखा पाई थी. फिल्म की कहानी अनुराग कश्यप और विक्रमादित्य मोटवाने ने मिलकर लिखी है. यह एक बहुत अच्छी कहानी बन सकती थी, लेकिन मेकर्स इसे दिलचस्प बनाने में असफल साबित हुए हैं. फिल्म की कहानी भले ही आम आदमी से जुड़ी है, लेकिन आम आदमी से यह कनेक्ट नहीं कर पाती है और फिल्म के संवाद भी कुछ ख़ास नहीं हैं.
एक्टिंग- 
हर्षवर्धन कपूर की यह दूसरी फिल्म है, लेकिन वो दर्शकों को आकर्षित करने में असफल दिख रहे हैं. हालांकि उन्होंने कोशिश बहुत अच्छी की है जो काबिले तारीफ़ है. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है और साथ ही हर्षवर्धन कपूर के दोस्त के रूप में दोनों एक्टर्स ने बढ़िया काम किया है, जबकि विलेन के रूप में निशिकांत कामत की दबंगई काफ़ी कमज़ोर दिखाई पड़ रही है. बहरहाल, अगर आप लीक से हटकर कोई फिल्म देखना चाहते हैं तो ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ देख सकते हैं.
भारी भरकम स्टार कास्ट वाली फिल्म है फेमस 
मूवी- फेमस 
स्टार कास्ट- जिमी शेरगिल, केके मेनन, श्रिया सरन, पंकज त्रिपाठी, जैकी श्रॉफ, माही गिल. 
डायरेक्टर- करण ललित बुटानी 
रेटिंग- 2/5
इन दोनों फिल्मों के अलावा डायरेक्टर करण ललित बुटानी की फिल्म ‘फेमस’ भी रिलीज़ हुई है. इस फिल्म में जिमी शेरगिल, श्रिया सरन, केके मेनन, पंकज त्रिपाठी, जैकी श्रॉफ और माही गिल जैसे कलाकरों ने काम किया है. भारी भरकम स्टार कास्ट होने के बावजूद यह फिल्म आपको बांध नहीं पाएगी. फिल्म की स्क्रिप्ट से लेकर स्क्रीनप्ले हर जगह कमियां नज़र आएंगी. फिल्म की कहानी चंबल से जुड़ी है और इस फिल्म के हर एक किरदार की अपनी एक अलग कहानी है. जिसे समझते-समझते आपका सिर चकराने लगेगा. बावजूद इसके अगर आप जिमी शेरगिल, केके मेनन और जैकी श्रॉफ के जबरदस्त फैन हैं तो यह फिल्म देख सकते हैं.

 

मूवी रिव्यू- ऐतिहासिक पद्मावत… बेहतरीन अभिनय (Movie Review- Padmaavat)

Movie Review, Padmaavat

Movie Review, Padmaavat

* बधाई हो, संजय लीला भंसाली ने पद्मावत के ज़रिए एक लाजवाब फिल्म बनाई है.
* राजपूत की आन-बान-शान, रानी पद्मावती की ख़ूबसूरती, भव्य सेट, ज़बर्दस्त संवाद, उमंदा अदाकारी फिल्म को बेहद ख़ास बना देती है.
* दीपिका पादुकोण अपनी भाव-भंगिमाओं के साथ बेपनाह सौंदर्य, साहस, कुशल धनुर्धर- हर रंग-रूप में बेहतरीन लगी हैं. कह सकते हैं कि दीपिका के बगैर फिल्म की कल्पना भी नहीं की जा सकती.
* शाहिद कपूर ने राजपूत राजा के रूप में अपनी वीरता, शौर्यता, सौम्यता, बड़प्पन- सभी को बख़ूबी निभाया है. उनके आदर्श व सहज अभिनय को देख मान-सम्मान देने के साथ ख़ुशी भी होती है.
* रणवीर सिंह हर बार की तरह अपने क़िरदार में जान फूंक दी है. मानो खिलजी की भूमिका को उन्होंने आत्मसात कर लिया हो. इंसान प्यार को पाने के लिए किस हद तक ग़ुजर सकता है. तब साम-दंड-भेद, छल-कपट, क्रूरता सब कुछ जायज़ सी लगने लगती है, इन बातों को आकर्षक ढंग से चित्रण किया गया है. रणवीर हर सीन में उत्कृष्ट रहे.
* वैसे सभी कलाकार दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर, रणवीर सिंह, अदिति राव हैदरी, रज़ा मुराद, जिम सरभ ने लाजवाब अभिनय किया है. कलाकारों से ख़ूबसूरत व जीवंत अदाकारी कराने के लिए भंसालीजी बधाई के पात्र हैं.
* फिल्म का गीत-संगीत पहले ही हिट हो चुका है, विशेषकर घूमर सॉन्ग.
* यह फिल्म मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा 1540 में अवधी में दोहा, चौपाई छंद द्वारा लिखे गए महाकाव्य पद्मावत से प्रेरित है.
* फिल्म में थ्रीडी तकनीक का बड़ी ख़ूबसूरती से इस्तेमाल किया गया, जिससे कई बार हमें ऐसा लगने लगता है कि हम किले की भव्य आंगन, मैदान, उस जगह पर हैं या उसके क़रीब हैं.
* फिल्म लंबी होने के बावजूद कहीं पर भी बोरियत महसूस नहीं होने देती. दर्शक हर दृश्य से ख़ुद को बंधे हुए महसूस करते हैं.
* प्रेम, रोमांस, फैंटेसी, राजस्थानी लोक गीत-संगीत, युद्ध, तलवारों की गूंज, ड्रामा, रंग बदलती इंसानी फ़ितरत- सब कुछ फिल्म को भव्य बना देती है.
* फिल्म की कथा-पटकथा, एडिटिंग सशक्त है.
* यूं तो फिल्म के सभी गाने कर्णप्रिय हैं, पर घूमर, एक दिल एक जान, नैनोवाले ने, खली बली गीत ख़ूबसूरत हैं.
* श्रेया घोषाल, स्वरूप ख़ान, शिवम पाठक, शैल हदा, नीति मोहन, रिचा शर्मा, अरिजीत सिंह सभी ने गीतों को अपनी सुमधुर आवाज़ से यादगार बना दिया है.
* फिल्म में तुर्क व अफगानी संगीत का भी अच्छा मिश्रण किया गया है.
* संजय लीला भंसाली ने कथा-पटकथा, संगीत, निर्देशन हर विभाग में न्याय किया है और अब तक की अपनी अविस्मरणीय फिल्म दर्शकों को दी है.
रेटिंगः 5 स्टार

– ऊषा गुप्ता

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