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मूवी रिव्यू: उजड़ा चमन पर बहार आकर रहेगी… (Movie Review Of Ujda Chaman)

उजड़ा चमन (Ujda Chaman) नाम से ही ज़ाहिर होता है कि किसी की दुनिया लूट गई हो जैसे. हां जी, जिनके सिर पर जवानी में ही बहुत कम बाल हो यानी की वे गंजे हों, तो दर्द-ए-दास्तान कुछ ऐसी ही होती है जैसे फिल्म उजड़ा चमन के नायक की है. एक अछूते विषय को कहीं मनोरंजन, तो कहीं गंभीरता से छूने की सार्थक कोशिश की गई है.

Ujda Chaman

 

फिल्म के हीरो चमन यानी सनी सिंह दिल्ली के कॉलेज में हिंदी के शिक्षक हैं. उनके सिर पर बाल न होने पर अक्सर क्लास में उनका मज़ाक उड़ाया जाता है. वहीं वे अपनी शादी को लेकर भी परेशान रहते हैं. ऐसे में काफ़ी मशक्कत के बाद अप्सरा यानी मानवी गगरू मिलती भी है, तो वो ओवरवेट है.

दोनों परफेक्ट कपल, पर कुछ कमी के साथ हैं. गंजेपन के कारण कई रिश्तों का ठुकराया जाना, पंडितजी का अल्टीमेटम कि इस साल शादी नहीं हुई, तो ज़िदगीभर कुंवारा रहना पड़ सकता है, गंजेपन को लेकर शर्मिंदगी, तो मोटापे को लेकर जगहंसाई… इन तमाम बातों से जुड़ी भावनाओं व प्रतिक्रियाओं से होकर गुज़रती है फिल्म.

कन्नड़ फिल्म ओंदु मोट्टया कथे, जिसकी कहानी राज बी. शेट्टी ने लिखी थी, पर आधारित उजड़ा चमन अलग तरह की फिल्म है. यह इस बात पर भी कटाक्ष करती है कि आज भी हमारे देश में गंजापन और मोटापा कितना बड़ा मुद्दा बना हुआ है. ये शादी में रोड़ा होने के साथ-साथ चिंता का विषय भी बना हुआ है.

Ujda Chaman Ujda Chaman

अजय देवगन के सेक्रेटरी कुमार मंगत फिल्म के निर्माता है. उन्हीं के बेटे अभिषेक पाठक ने इस फिल्म से निर्देशन की शुरुआत की है. फिल्म के प्रमोशन में अजय देवगन, कार्तिक आर्यन, पुलकित सम्राट ने भी काफ़ी सहयोग दिया था. इसी विषय पर आयुष्मान खुराना की बाला फिल्म भी अगले हफ़्ते रिलीज होनेवाली है. दोनों ही फिल्मों को लेकर काफ़ी विवाद भी हुआ था. फिर भी यक़ीनन दोनों ही फिल्में दर्शकों का अलग तरह से मनोरंजन करने में कामयाब रहेंगी.

अन्य कलाकारों में सौरभ शुक्ला, ग्रूशा कपूर, अतुल कुमार, शारिब हाशमी, गगन अरोड़ा, करिश्मा शर्मा सभी ने अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है.

Ujda Chaman

गौरव रोशिन का संगीत ठीकठाक है. गुरु रंधावा के गीत कर्णप्रिय पर सामान्य है. सुधीर चौधरी की फोटोग्राफी ख़ूबसूरत व दर्शनीय है. सनी सिंह प्यार का पंचनामा, सोनू के टीटू की स्वीटी, टीवी आदि में अपने अभिनय का जलवा दिखा चुके हैं. यह फिल्म उनके लिए अभिनय सफ़र की एक और मज़बूत कड़ी साबित होगी. गंजापन किसी के जीवन के लिए कितना बड़ा अभिशाप बन जाता है, उजड़ा चमन इसका बेहतरीन उदाहरण है. लीक से हटकर कुछ अलग देखने की चाह हो, तो इसे ज़रूर देखें.

Ujda ChamanUjda Chaman

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फिल्म समीक्षा: लाल कप्तान, घोस्ट- कई फिल्में, अलग-अलग अंदाज़… (Movie Review: Lal Kaptaan, Ghost…)

आज प्रतिशोध, डर, प्यार-रोमांस, उलझते रिश्ते, खेल इन तमाम विषयों से जुड़ी कई फिल्में रिलीज़ हुईं. जहां दर्शक इंसानी फ़ितरत, एहसास के समंदर, भूत की दहशत, जात-पात के मकड़जाल इन तमाम स्थितियों से रू-ब-रू होते हैं. रिलीज़ फिल्मों की इस फेहरिस्त में है- लाल कप्तान, घोस्ट, प से प्यार फ से फरार, याराम, जंक्शन वाराणसी और क्रिकेट.

Lal Kaptaan and Ghost

लाल कप्तान- सैफ अली ख़ान अभिनीत इस फिल्म के पोस्टर, ट्रेलर को लोगों ने ख़ूब पसंद किया था और उन्हें सैफ के जटाधारी अघोरी के अवतार को देखते हुए इसका बेसब्री से इंतज़ार भी था. 17-18 वीं शताब्दी के समय की कहानी है. अंग्रेज़ों का राज, मराठे, नवाब, रुहेलखंडी, निजाम की आपसी लड़ाई व रंजिश के ताने-बाने के साथ प्रतिशोध, रहस्य-रोमांच से भरपूर है लाल कप्तान. यदि आप पीरियड फिल्म देखना पसंद करते हैं और सैफ के फैन हैं, तो एक बार फिल्म ज़रूर देखें. निर्देशन नवदीप सिंह ने इसे हॉलीवुड फिल्मों के अंदाज़ में बनाने की कोशिश की है, जिसमें वे सफल भी रहे हैं. सैफ तो प्रभावित करते ही हैं, साथ ही सोनाक्षी सिन्हा, मानव विज, दीपक डोबरियाल, ज़ोया हुसैन, सिमोन सिंह ने भी अपने क़िरदार के साथ न्याय किया है.

Ghost

घोस्ट- विक्रम भट्ट तो हॉरर मूवी स्पेशलिस्ट बन गए हैं. राज़, 1920 जैसी बेहतरीन डरावनी फिल्में उन्होंने बनाई है और अब घोस्ट लेकर आए हैं. वासु भगनानी की भूत की यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है, जो लोगों को डराती है, तो रोमांचित भी करती है. पति पर अपनी पत्नी के क़त्ल का इल्ज़ाम है, जबकि उसका कहना है कि वो उसने नहीं किया, बल्कि भूत द्वारा उससे करवाया गया है. शिवम भार्गव व शनाया ईरानी ने अपनी पहली ही फिल्म में प्रभावशाली अभिनय किया है.

Lal Kaptaan

 

प से प्यार फ से फरार- यह फिल्म प्यार को लेकर जाति की दीवार पर कटाक्ष करती है. आए दिन इस पर खाप पंचायत का फरमान में देखने-सुनने मिलता है. जहां ऊंची जाति की लड़की व छोटी जाति के लड़के का प्रेम जाति-बिरादरी को पसंद नहीं आता. इसे लेकर हिंसा, ख़ून-ख़राब आम-सी बात हो गई लगती है. इसमें सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया गया है. मनोज तिवारी के निर्देशन में जिमी शेरगिल, कुमुद मिश्रा, भावेश कुमार, संजय मिश्रा, ज्योति सिंह, बृजेंद्र काला, गिरीश कुलकर्णी ने ठीकठाक काम किया है.

#Yaaram

 

 

यारम- ट्रिपल तलाक़, दोस्ती, दोस्त की पत्नी से लगाव, फिर हर रिश्ते में उलझन से घिरी है फिल्म यारम. प्रतीक बब्बर, इशिता राज, सिद्धांत कपूर, अनीता राज, दिलीप ताहिल, शुभा राजपूत सभी के अभिनय को देख ऐसा लगता है, जैसे सभी को फिल्म को जैसे-तैसे पूरी करनी की जल्दी थी. उस पर निर्देशक ओवैस ख़ान ने गंभीर विषय को हास्यस्पद बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी.

Junction VaranasiKirket

इसी के साथ जंक्शन वाराणसीक्रिकेट फिल्म भी प्रदर्शित हुईं. एक में भोजपुरी क्रिकेट व भुखमरी से लड़ते संघर्ष को दिखाया गया है, तो  धीरज पंडित निर्देशित जंक्शन वाराणसी, जिसकी शूटिंग उत्तर प्रदेश के भदोही के पिपरी गांव में हुई है, अपना आंशिक प्रभाव ही छोड़ पाती है. देव शर्मा, जरीना वहाब, अंजन श्रीवास्तव, अंजलि अबरोल ने अपनी भूमिकाओं के साथ खानापूर्ति की है.

व्यूवर्स अलर्ट: आज रिलीज़ हुई इन सभी फिल्मों में से लाल कप्तान, घोस्ट और कुछ हद तक प से प्यार फ से फरार ही आपका मनोरंजन कर सकते हैं. अन्य बस समय बिताने के लिए कुछ न होने की स्थिति में देखा जा सकता है.

Lal Kaptaan and Ghost Reviews

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फिल्म रिव्यू- एक्शन, थ्रिलर, सस्पेंस-रोमांस से भरपूर साहो… (Film Review- Saaho- Action, Thriller, Suspense-Romance…)

प्रभास व श्रद्धा कपूर की साहो फिल्म आज भारतभर में तीन हज़ार स्क्रिन के साथ रिलीज़ हो गई है. इसके पहले कल यह यूईए में रिलीज़ हुई थी, जहां पर इसे दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला. सुजीत द्वारा लिखित व निर्देशित क़रीब पौने तीन घंटे की साहो मारधाड़, रहस्य-रोमांच, एक्शन, लव-रोमांस के साथ भरपूर मनोरंजन करती है. सभी की जिज्ञासा दूर करते हुए ये बता दे कि साहो का अर्थ है ‘जय हो’ यानी ‘ऑल हेल’ (सभी का स्वागत है).

Saaho

यूवी क्रिएशंस व टी-सीरीज़ द्वारा निर्मित साहो की कहानी कई बार देखी गई आम-सी है. एक शख़्स यानी एक्टर प्रभास शहर के लोगों की जान बचाने के लिए ढेरों हथियारों से लैस खलनायकों से अकेला लड़ता है. वह हर क़दम पर उनका डटकर मुक़ाबला करता है. प्रभास का एक्शन, स्टंट, फाइटिंग सीन काबिल-ए-तारीफ़ है. इसमें कई बार उसकी मदद पुलिस के रोल में श्रद्धा कपूर भी करती हैं. ज़बर्दस्त एक्शन के साथ कुछ सस्पेंस भी है, जिसे जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी. पुलिसवाली के क़िरदार में श्रद्धा कपूर ने कई लाजवाब एक्शन व फाइट सीन किए हैं. वे दुश्मनों से लड़ने में प्रभास का भरपूर साथ देती हैं. फाइटिंग के सीन के अलावा गानों में वे बेहद हॉट व दिलकश लगी हैं. इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रभास व श्रद्धा कपूर की केमेस्ट्री लाजवाब है.

Saaho

साहो में वीएफएक्स का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है. फिल्मों में खलनायकों की भरमार है और सभी लोग दो लाख करोड़ रुपए ढूंढ़ रहे हैं.

हिंदी के अलावा तमिल व तेलगू में भी फिल्म रिलीज़ हुई है, पर गौर करनेवाली बात यह है कि यह डब नहीं हुई है, बल्कि इसे तीनों ही भाषाओं में शूट किया गया है. इसी कारण लोगों की पसंद में फ़र्क़ पड़ सकता है, क्योंकि हिंदी फिल्मों के दर्शक व साउथ फिल्मों के ऑडियंस की पसंद में थोड़ा अंतर है. इसलिए यह कहा जा सकता है कि हिंदी फिल्मों के फैन्स को भले ही फिल्म उतनी ग्रेट न लगे, पर दक्षिण भारतीयों के लिए यह प्रभास की स्पेशल फिल्म है. आख़िरकार बाहुबली 2 के बाद इस फिल्म को उन्होंने दो साल दिए हैं. उनकी मेहनत व जुनून फिल्म में दिखती है.

Saaho Reviews

चंकी पांडे विलेन की भूमिका में सभी से बाज़ी मार ले जाते हैं. अन्य कलाकारों में नील नितिन मुकेश, जैकी श्रॉफ, महेश मांजरेकर, टीनू आनंद, एवलिन शर्मा, अरुण विजय, मंदिरा बेदी, मुरली शर्मा सभी ने अपनी-अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है.

इसके कई संगीतकार है, जिसमें शंकर-एहसान-लोय, गुरु रंधवा, तनिष्क बागची, बादशाह, एम. घिंबरण हैं. सभी ने अपनी तरफ़ से बेस्ट म्यूज़िक दिया है. शंकर महादेवन, बादशाह, नीति मोहन, तुलसी कुमार, हरिचरण, श्‍वेता मोहन, सिद्धार्थ महादेवन द्वारा गाए गीत सुमधुर हैं. इसमें सायको सैंया… बेहद ख़ूबसूरत बन पड़ा है. बेबी वोन्ट यू टेल मी, इन्नी सोनी, ये छोटा नुवुना, बेड बॉय गाने भी पसंद किए जा रहे हैं.

Saaho

क़रीब 350 करोड़ के बजट में बनी साहो दर्शकों को कितनी पसंद आती है, यह तो कुछ दिनों में ही पता चल जाएगा. लेकिन प्रभास के फैन इससे निराश नहीं होंगे. प्रभास का हर एक्शन, रिएक्शन, डायलॉग उन्हें ख़ूब पसंद आएगा.

Saaho

Saaho

Saaho

Saaho

Saaho

Saaho

 

– ऊषा गुप्ता

फिल्म रिव्यूः मलाल और वन डेः जस्टिस डिलिर्व्ड (Film Review Of Malaal And One Day: Justice Delivered)

फिल्मः मलाल 
कलाकार: शर्मिन सहगल, मीजान जाफरी, समीर धर्माधिकारी, अंकुश बिष्ट
निर्देशक: मंगेश हडावले
स्टारः 2.5

Malaal

यह फिल्म 15 साल पहले बनी एक तमिल फिल्म का रीमेक है. इस फिल्म का हीरो शिवा (मीजान जाफरी) मुंबइया है. आमची मुंबई के इस मुलगे की मुलाकात होती है त्रिपाठी जी की बिटिया आस्था से (शर्मिन सहगल) से. मुफलिसी का मारा ये उत्तर भारतीय परिवार शिवा का पड़ोसी बनता है और फिर  शुरू होती है तकरार, इजहार, इंकार और इसरार के मसालों में पगी एक प्रेम कहानी. अदाकारी की बात करें तो मीजान ने मराठी लड़के का किरदार निभाने के लिए काफ़ी मेहनत की है, जो फिल्म में साफ नजर आती है. कई जगहों पर वे बेहद प्रभावित करते हैं. शर्मिन को अभी मेहनत की ज़रूरत है. फिल्म का संगीत भी कुछ खास नहीं है. सिनेमैटोग्राफी व एडिटिंग कसी हुई है. लवस्टोरी के शौकीन एक बार फिल्म दे सकते हैं.

फिल्मः वन डेः जस्टिस डिलिर्व्ड 
कलाकारः अनुपम खेर, ईशा गुप्ता, कुमुंद मिश्रा
निर्देशकः अशोक नंदा
स्टारः 2

One Day: Justice Delivered

यह फिल्म रिटायर्ड जज (अनुपम खेर) की कहानी है. जो रिटायर्मेंट के बाद बहुत सर्तक हो जाते हैं और उन अपराधियों का सजा दिलाने की कोशिश करते हैं जो सबूत के अभाव में अदालत से बरी हो गए थे. जज के रूप में त्यागी कानून के हाथों मजबूर होकर ऐसे अपराधियों को भी निर्दोष बताना पड़ा, जो उनके हिसाब से दोषी थे. एक घटना उन्हें पूरी तरह झकझोर देती है और रिटायर होने के बाद वे कानून को अपने हाथ में लेकर अपराधियों को सजा दिलाने का बीड़ा उठाते  हैं. फिल्म की कहानी अच्छी है, मगर उसे सही तरह से प्रस्तुत करने में निर्देशक अशोक नंदा पूरी तरह चूक गए हैं. इंस्पेक्टर के रूप में कुमुंद मिश्रा ने अपने किरदार को बख़ूबी निभाया है. ईशा गुप्ता का भी काम अच्छा है. खराब निर्देशन के बावजूद अनुपम खेर ने अपना किरदार अच्छी तरह प्ले किया है.

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फिल्म समीक्षा- पीएम नरेंद्र मोदी- साहसी, अद्भुत, सशक्त प्रधान सेवक (Movie Review: PM Narendra Modi- Strong, Charismatic And Visionary Leader)

पीएम नरेंद्र मोदी- अब कोई रोक नहीं सकता..वाकई फिल्म के पोस्टर पर दिए गए ये स्लोगन आज के सच को बयां करते हैं. भला कौन रोक पाया मोदीजी को देश के हित में कठोर, सटीक, साहसी निर्णय लेते और देशप्रेम के अपने जज़्बे को अपने अथक कार्यों से पूरा करते हुए. इसी हक़ीक़त को फिल्मी जामा पहनाकर बड़े पर्दे पर दिखाया गया है.

Movie Review PM Narendra Modi

जब कभी किसी ख़ास व्यक्ति विशेष की ज़िंदगी पर बायोपीक फिल्म बनती है, तो हर किसी को उसे देखने-जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है. ऐसे में शख़्सियत हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी हों, तो भला कौन नहीं चाहेगा मूवी देखना. उनके बचपन, परिवार, वैराग्य, संन्यासी, राष्ट्रीय सेवा संघ, राजनीति, गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक की स्थिति-परिस्थिति को संक्षेप में निष्पक्ष रूप से दिखाने की कोशिश फिल्म में की गई है. पीएम की भूमिका में विवेक ओबेरॉय ने लाजवाब अभिनय किया है. इसमें कोई दो राय नहीं कि यह उनकी अब तक की सबसे बेहतरीन अदाकारी है. उनके मेकअप, हावभाव व अभिनय ने मोदीजी के व्यक्तित्व को नई परिभाषा दी है.
अक्सर बायोपीक फिल्मों में हक़ीक़त व थोड़ी नाटकीयता का मिश्रण रहता है. लेकिन निर्देशक उमंग कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी फिल्म में ईमानदारी के साथ सच्चाई दिखाने व तथ्यों को स्पष्ट करने की प्रशंसनीय कोशिश की है. नमो यानी हमारे प्यारे प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदीजी के जीवन के उतार-चढ़ाव, श्रम, संघर्ष, आरोप-प्रत्यारोप का दंश, विपक्ष की नफ़रत, जनता का प्यार, लोगों का विश्‍वास, धर्म की आस्था, भगवा पर देश का प्यार… सभी को बेहतरीन ढंग से फिल्माया गया है, ख़ासकर हिमालय के लोकेशन काफ़ी ख़ूबसूरत बन पड़े हैं.
इस फिल्म के ज़रिए मोदीजी का हिमालय के प्रति प्रेम, जप-तप, तपस्वी का जीवन, निस्वार्थ सेवा, मेहनत-लगन, प्रभावशाली भाषाशैली, भाषण आदि को फिल्म के माध्यम से और भी क़रीब से देखने-समझने का मौक़ा मिलता है.
सुरेश ओबेरॉय, आनंद पंडित व संदीप सिंह द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित पीएम नरेंद्र मोदी फिल्म के डिस्ट्रिब्यूटर पैनोरमा स्टूडियोज और व आनंद पंडित मोशन पिक्चर्स है. फिल्म की कहानी संदीप सिंह ने लिखी है. संवाद और पटकथा में विवेक ओबेरॉय ने भी अपनी प्रतिभा दिखाई है, इसलिए उन्हें भी इसका श्रेय दिया गया है. उनके अलावा अनिरुद्ध चावला व हर्ष लिंबचिया के ज़बर्दस्त डॉयलॉग ने फिल्म को और भी आकर्षक बनाया है.

संगीतकार हितेश मोदक का संगीत फिल्म को गति देने के साथ दिल को सुकून भी देता है. सुखविंदर सिंह और सिद्धार्थ महादेवन की आवाज़ में हिंदुस्तानी, नमो नमो, सौंगध मुझे इस मिट्टी की… के गीत कर्णप्रिय हैं. राजेंद्र गुप्ता, ज़रीना वहाब, बरखा बिस्ट सेनगुप्ता, सुरेश ओबेरॉय, मनोज जोशी, किशोरी शहाणे, बोमन ईरानी, अंजन श्रीवास्तव, प्रशांत नारायणन, दर्शन कुमार, राज सलूजा, इमरान हसनी आदि कलाकारों ने प्रभावशाली अदाकारी के साथ अपने क़िरदार के साथ पूरा न्याय किया है. जहां देशभर में अबकी बार फिर मोदी सरकार पर देशवासियों ने मुहर लगा दी है, वहीं फिल्म भी सभी को यक़ीनन पसंद आएगी और बेहतरीन फिल्मों की श्रेणी में शामिल होगी.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यूः टोटल धमाल मनोरंजन से मालामाल (Movie Review: Total Dhamaal Full On Comic Entertainer)

इंद्र कुमार निर्देशित टोटल धमाल (Total Dhamaal) मनोरंजन से भरपूर मसाला फिल्म है. इसमें 17 साल बाद अनिल कपूर-माधुरी दीक्षित एक बार फिर साथ दिखेंगे. अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी की तिकड़ी कह सकते हैं तीन गुना कॉमेडी का तड़का देती है.

Total Dhamaal

कहानी बस इतनी-सी है कि मनोज पाहवा को करोड़ों का ख़ज़ाना मिलता है, जो वो अपने दोस्त अजय देवगन व संजय मिश्रा को धोखा देकर कहीं छिपा देता है. लेकिन जब तक अजय-संजय ख़ज़ाने तक पहुंचते हैं, तब तक कई लोगों को इसके बारे में पता चल जाता है और वे भी इसे ढूढ़ने के लिए निकल पड़ते है. इस खोजी टीम में अनिल-माधुरी, अरशद, रितेश, ईशा गुप्ता, पितोबश, जावेद, जॉनी लीवर, महेश मांजरेकर आदि हैं. उनकी इस सर्च जर्नी में उन्हें रोमांच, डर, डांस, मस्ती, एक्शन, एडवेंचर्स इन सबसे दो-चार होना पड़ता है.

सोनाक्षी सिन्हा पर फिल्माये गए गीत मुंगडा मुंगडा मैं गुड़ की डली… पैसा ये पैसा… रीमिक्स आकर्षित करते हैं. प्रीतम चक्रवर्ती के संगीत के साथ-साथ शान, ज्योतिका टांगरी, देव नेगी, अदिति सिंह शर्मा व हार्डी संधु की मधुर आवाज़ में गाए गए ये गीत समां बांध देते हैं.

फॉक्स स्टार स्टूडियोज द्वारा प्रस्तुत अजय देवगन फिल्मस, इंद्र कुमार, अशोक ठकेरिया, अधिकारी ब्रदर्स, आनंद पंडित, फॉक्स स्टार स्टूडियोज द्वारा निर्मित व इनके अलावा कुमार मंगत पाठक व संगीता अहीर द्वारा सह-निर्मित टोटल धमाल वाकई में मनोरंजन से भरपूर मज़ेदार फिल्म है. वैसे फिल्म रिलीज़ से पहले इसके ट्रेलर ख़ास कर अलग-अलग भाषाओं में बनाए गए ट्रेलर ने भी दर्शकों का ख़ूब मनोरंजन किया था.

मल्टी स्टारर इस फिल्म में विदेशी बंदर क्रिस्टल के अलावा वनमानुष, शेर, हाथी, गेंडा, सांप आदि के भी विदेशों में फिल्माए गए मज़ेदार सीन है. क्रिस्टल ने तो कई हॉलीवुड फिल्मों में भी अपनी उछल-कूद, गुलाटियों आदि का जलवा दिखाया है.

धमाल, डबल धमाल का सीक्वल तीसरी कड़ी टोटल धमाल फुल कॉमेडी टाइमपास मूवी है. ख़ज़ाने की खोज में इतने उतार-चढ़ाव, मोड़ के साथ-साथ कलाकारों की परफेक्ट कॉमेडी को देख दर्शक हंसते-हंसते लोटपोट हो जाते हैं. सभी कलाकारों ने मनोरंजन का ज़बर्दस्त धमाका पेश किया है.

टोटल धमाल की ख़ास बात रही कलाकारों को टक्कर देता जानवरों का लाजवाब अभिनय. यदि आप भी हंसी का पागलपन व दीवानगी देखना चाहते हैं, तो तर्क-वितर्क को अलग रखते हुए इस फिल्म को देखने का लुत्फ़ उठा सकते हैं, क्योंकि यह है पैसा वसूल कॉमेडी.

– ऊषा गुप्ता

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Film Review: सारा ने जीता दिल, पर कहानी है कमज़ोर कड़ी (Movie Review Of Film Kedarnath)

निर्देशक- अभिषेक कपूर

स्टारकास्ट- सुशांत सिंह राजपूत, सारा अली ख़ान, पूजा गौर, नितीश भारद्वाज

सर्टिफिकेट- U/A

रेटिंग्स- 3/5

Kedarnath Movie

फिल्म केदारनाथ (Kedarnath) एक सामान्य प्रेमकहानी है. जिसे वर्ष 2013 में आए बाढ़ और तबाही के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया है.

कहानी 
केदारनाथ की कहानी उत्तराखंड के केदारनाथ धाम की है. फिल्म की कहानी एक हिन्दू पंडित की बेटी मंदाकिनी उर्फ़ मुक्कु (सारा अली ख़ान) से शुरू होती है जो की बेहद जिद्दी, खुशमिज़ाज़ और अल्हड़ हैं. मुक्कु को एक मुस्लिम पिट्ठू (तीर्थयात्रियों को कंधे पर उठानेवाला) मंसूर (सुशांत सिंह राजपूत) से प्यार हो जाता है. दो अलग धर्म के लोगों का प्यार वादी के लोगों को पसंद नहीं आता और फिर इस प्यार को तोड़ने की भरपूर जद्दोजहद शुरू हो जाती है. इस पूरी कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब मंदाकिनी और मंसूर के प्यार को तोड़ने के लिए पंडितों और पिट्ठुओं के बीच जंग छिड़ जाती है और इसी बीच क़ुदरत भी अपना कहर बरपा देता है. हालांकि फिल्म प्राकृतिक आपदा पर आधारित है, लेकिन बाढ़ का सीन काफ़ी लंबे इंतज़ार के बाद आता है.

Kedarnath Movie

ख़ासियत
फिल्म की सेंटर ऑफ अट्रैक्शन सारा अली ख़ान हैं. जिन्होंने अपनी डेब्यू फिल्म में ही काफ़ी शानदार पर्फामेंस दिया है. फिल्म देखकर लगता ही नहीं की ये उनकी पहली फिल्म है. फिल्म के एक एक सीन में वे कॉन्फिडेंट और दमदार दिखीं. वे जैसे ही स्क्रीन पर आती हैं, दर्शकों को बांध लेती हैं. सुशांत सिंह ने भी काफ़ी अच्छा अभिनय किया है. तुषार कान्ति की ड्रोन असिस्टेड सिनेमाटोग्राफी कमाल की है. हिमालय की ख़ूबसूरत तस्वीरों को बेहद ख़ूबसूरती से फिल्माया गया है.

कमियां
केदारनाथ का पहला हाफ बहुत ही सुस्त और दूसरा भी कोई उम्मीद नहीं जगाता है. फिल्म का डायरेक्शन भी बेहद कमज़ोर है और कहानी कुछ भी नया नहीं दिखाती है. फिल्म के डायरेक्टर अभिषेक कपूर पूरी तरह चूकते नज़र आते हैं. यह फिल्म न तो प्रेम कहानी के तौर पर छूती है और न ही त्रासदी आधारित विषय पर बनी सॉलिड फिल्म ही लगती है.

म्यूज़िक
संगीत के मामले में भी फिल्म चूक गई है.  फिल्म के गाने थकाने का काम करते हैं. ‘नमो-नमो शंकरा’ के अलावा कोई भी गाना दिल को नहीं छूता.

केदारनाथ का ट्रेलर

 

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मूवी रिव्यू: सुपर इफेक्ट्स, थ्रिल, अविश्‍वसनीय एक्शन से भरपूर अद्भुत 2.0 (Movie Review 2.0: Brilliant Visual Effects, Thrills And Action Sequences)

 

2.0

जब दो सुपरस्टार रजनीकांत (Rajinikanth) और अक्षय कुमार (Akshay Kumar) एक साथ हों, तो एक बेहतरीन फिल्म की उम्मीद हर किसी को होती है. लेकिन यहां पर इन दोनों से कई ऊपर रहे निर्देशक एस. शंकर. जैसा कि सभी जानते हैं कि इसे रजनीकांत और अक्षय कुमार की फिल्म करके ख़ूब प्रमोट किया गया, पर इसमें सबसे अधिक प्रभावित करते हैं निर्देशक शंकर. उन्होंने पूरी फिल्म में हर एक सीन पर ख़ूब मेहनत की है. सुपर इफेक्ट्स की भरमार है फिल्म में पर व्यवस्थित व योजनाबद्ध तरी़के से. क़रीब आठ साल पहले शंकर की ही रोबोट फिल्म आई थी, जिसमें रजनीकांत और ऐश्‍वर्या राय बच्चन मुख्य भूमिका में थे, 2.0 फिल्म को उसी का सीक्वल कह सकते हैं.

पहली बार इस तरह की साइंस फिक्शन मूवी के एक्शन, सुपर इफेट्स मिक्सिंग देख हॉलीवुड मेकर भी शंकरजी की तारीफ़ किए बगैर नहीं रह सकेंगे. इसमें कोई दो राय नहीं कि भारतीय सिनेमा ने इस फिल्म के ज़रिए फिल्म बनाने में एक और शिखर को छुआ है. फिल्म के विज़ुअल इफेक्ट्स काबिल-ए-तारीफ़ हैं. उस पर थ्रीडी में होने के कारण फिल्म और भी शानदार बन पड़ी है. इस तरह की फिल्मों में कहानी की उम्मीद बहुत कम होती है, क्योंकि निर्देशक का पूरा ध्यान एक्शन, वीएफएक्स पर होता है और यही एस. शंकर ने भी किया.

कहानी बस इतनी है कि अक्षय कुमार, पक्षीराजन, जो ओर्निथोलॉजिस्ट (पक्षी वैज्ञानिक) हैं, मोबाइल टॉवर से कूदकर आत्महत्या कर लेते हैं. दरअसल, मोबाइल फोन के रेडिएशन से पक्षियों को काफ़ी नुक़सान पहुंच रहा होता है, इसका प्रतिशोध अक्षय इंसानों से लेना चाहता है. एक तरह इसके ज़रिए सोशल मैसेज भी देने की कोशिश की गई है. इसके बाद शहरभर के सभी लोगों के मोबाइल फोन उड़ने लगते हैं. वसीकरण यानी रजनीकांत को इसकी छानबीन करने के लिए कहा जाता है. वे अपनी असिस्टेंट नीला यानी एमी जैक्सन जो एक रोबोट हैं, के साथ पता लगाने की कोशिश करते हैं. इसी बीच शहर में मोबाइल फोन की बनी एक चिड़िया (अक्षय कुमार) शहर पर दनादन हमला करने लगती है. आख़िरकार उससे मुक़ाबला करने के लिए वसीकरण को अपने रोबोट चिट्टी (रजनीकांत डबल रोल में) की मदद लेनी पड़ती है, क्योंकि पक्षीराजन और इंसानों के बीच केवल चिट्टी का अपग्रेडेड वर्ज़न 2.0 है.

पक्षीराजन और चिट्टी का आमना-सामना, लड़ाई, दांवपेंच और उसके अविश्‍वसनीय से एक्शन थ्रिल व रोमांच पैदा करते हैं. फिल्म में भावनाओं की कमी थोड़ी खलती है, पर दो सुपर मानव की टक्कर दिलचस्पी भी पैदा करती है. फिल्म की शुरुआत में ही अक्षय कुमार की मौत होने के बाद उनकी आत्मा, भूत या फिर औरा जो समझ लें का इंसानों से बदला लेने, रजनीकांत से संघर्ष देखने काबिल है.

फिल्म में सीन दर सीन स्पेशल इफेक्ट्स का बड़ी ख़ूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है. एक समय ऐसा आता है, जब रजनीकांत व अक्षय कुमार की लड़ाई में पांच सौ रोबोट्स रजनीकांत के रूप में आ जाते हैं, तो हज़ारों अक्षय कुमार, फिर लाखों रजनीकांत- सब कुछ विस्मय, विलक्षण, रोगंटे खड़े कर देनेवाले दृश्य हैं, जो दर्शकों को पलभर के लिए भी हिलने नहीं देते और फिल्म से बांधे रखते हैं. इसके लिए टेकनीशियन और डायरेक्टर बधाई के पात्र हैं.

रजनीकांत, अक्षय कुमार के अलावा एमी जैक्सन, सुधांशु पांडे, आदिल शाह सभी ने बेहतरीन अभिनय किया है. अक्षय कुमार पहली बार रजनीकांत के साथ काम कर रहे हैं, उन्हें इस बात की बेहद ख़ुशी है, फिर चाहे वो खलनायक का ही क़िरदार क्यों न हो. बकौल अक्षय उन्हें शूटिंग के समय अपने पक्षीराजन के गेटअप में तैयार होने में क़रीब छह घंटे लग जाते थे. उन्हें इसके मेकअप के लिए मेकअप आर्टिस्ट के सामने घंटों ख़ामोश होकर बैठे रहना पड़ता था. उनके अनुसार, इस कारण उनकी सब्र करने और अपनी धैर्य की क्षमता को विकसित करने में भी मदद मिली.

निर्माता अलीराजा सुबासकरण व राजू महालिंगम ने इस तरह की फिल्म बनाने का रिस्क लिया, जो सराहनीय है. ए. आर. रहमान का संगीत फिल्म को गति देता है, पर गाने केवल दो ही हैं. फिल्म को टूडी और थ्रीडी फार्मेट में दुनियाभर में प्रदर्शित किया गया है और इसके लिए तकनीकी रूप से शंकरजी के पूरी टीम ने ख़ूब मेहनत भी की है. फिल्म में सरप्राइज़ पैकेज के रूप में 3.0 कुट्टी का भी ज़िक्र किया गया है, ताकि प्रशंसकों को शंकर की अगली फिल्म का इंतज़ार रहे.

फिल्म हिंदी, तमिल और तेलगु- इन तीन भाषाओं के साथ अन्य भाषाओं में भी डब होकर प्रदर्शित की गई है. यूं तो फिल्म 512 करोड़ रुपए की लागत में बनी है, पर उसने अभी से सेटेलाइट, डिजिटल, डिस्ट्रिब्यूशन के राइट्स के ज़रिए 350 करोड़ रुपए कमा लिए हैं. यह तो जगजाहिर है कि 2.0 फिल्म दक्षिण भारतीयों द्वारा सुपर-डुपर हिट हो ही जाएगी. लेकिन हिंदी प्रेमी दर्शकों को यह कितना पसंद आएगी, यह तो व़क्त ही बताएगा.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू: सनी के दम पर भैयाजी सुपरहिट (Movie Revie: Bhaiaji Superhit- Sunny Deol Surprises With A Goofy Flick)

Bhaiaji Superhit Review

इन दिनों सनी देओल की कई सालों से अटकी फिल्में सिलसिलेवार आ रही हैं. पिछले हफ़्ते मौहल्ला अस्सी आई, जो काफ़ी समय से बन रही थी. अब आज भैयाजी सुपरहिट सिनेमा के पर्दे पर आ पाई है. दोनों ही फिल्मों में अभिनय के मामले में सनी देओल ने काबिल-ए-तारीफ़ अभिनय किया है.

भैयाजी अपनी पत्नी सपना के छोड़कर चले जाने से परेशान हैं. वे किसी भी क़ीमत पर अपनी पत्नी को वापस लाना चाहते हैं. इसके लिए फिल्मों में काम करने के लिए मुंबई आना, अभिनय करना, कुछ पुराने दुश्मनों से भिड़ना आदि चलता रहता है. इसमें निर्देशक व लेखक के रूप में अरशद-श्रेयस की जुगलबंदी देखते ही बनती है.

भैयाजी सुपरहिट में भी सनी देओल दबंग के क़िरदार में अपना दबदबा दिखाने में सफल रहे हैं. वे अपनी पत्नी सपना (प्रीति ज़िंटा) को बेइंतहा चाहते हैं और उससे डरते भी हैं. सपना के क़िरदार में प्रीति ने बेहतरीन काम किया है. वे बोलती कम और गोली ज़्यादा चलाती हैं. हमेशा शरारती-चुलबुली अंदाज़ में दिखनेवाली प्रीति एक नए ही अंदाज़ में सपना के रूप में चटक साड़ियों, भरी चूड़ियों में प्रभावशाली पत्नी के ज़बर्दस्त रोल में नज़र आती हैं. लंबे समय बाद प्रीति ज़िंटा को पर्दे पर देखना सुकून की तरह रहा. जब-जब पर्दे पर अरशद और श्रेयस की एंट्री होती है, लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. दोनों ही कलाकारों की कॉमेडी टाइमिंग लाजवाब है. कह सकते हैं कि प्रीति ज़िंटा के अलावा अन्य सभी कलाकारों यानी अमीषा पटेल, अरशद वारसी, श्रेयस तलपड़े, मिथुन चक्रवर्ती, मुकुल देव, जयदीप अहलावत, पंकज त्रिपाठी, संजय मिश्रा, प्रकाश राज, एवलिन शर्मा सभी ने अपनी-अपनी भूमिकाओं को पूरी ईमानदारी से निभाया है.

नीरज पाठक का निर्देशन स्तरीय है. थोड़ी-सी और मेहनत करते तो फिल्म के सभी उम्दा कलाकारों से और भी बढ़िया काम करवा सकते थे. निर्माता चिराग धारीवाल और फौजिया अर्शी के साहस की दाद देनी होगी कि इतने सालों बाद ही सही फिल्म रिलीज़ तो हुई. साजिद-वाजिद, संजीव-दर्शन, जीत गांगुली, राघव सच्चर, अमजद नजीम, फौजिया अर्शी जैसे संगीतकारों का जमावड़ा है, पर एक भी गाना दिलोदिमाग़ पर ठहर नहीं पाता है. सुखविंदर सिंह, असीस कौर, यासेर देसाई के गाए गीत बस थोड़ी-सी राहत भर दे पाते हैं. फिल्म में एक्शन, कॉमेडी के साथ ईमोशंस भी है. भैयाजी सुपरहिट  होगी की नहीं पता नहीं पर भैयाजी तो हमेशा ही हिट हैं.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू- लैला मजनूं/पलटन (Movie Review- Laila Majnu/Paltan)

Laila Majnu/Paltan

लैला मजनूं

प्रेम कहानी पर जितनी भी फिल्में बनाई जाए, लोगों को पसंद आती ही है, बस कहानी और कलाकारों के अभिनय में दम होना चाहिए. निर्देशक इम्तियाज़ अली के भाई साजिद अली यही बाज़ी मार जाते हैं. इस फिल्म के ज़रिए उन्होंने निर्देशन की दुनिया में क़दम रखा है. साथ ही फिल्म में लैला-मजनूं बने अविनाश तिवारी और तृप्ति डिमरी ने भी अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की है.
प्रेमी-प्रेमिका की नोक-झोंक, दोनों का मिलना-बिछुड़ना, परिवार-ज़माने का विलेन बन जाना… यही सब है फिल्म में. लेकिन इसके बावजूद ख़ूबसूरत लोकेशन, कलाकारों का अभिनय, भावनाप्रदान दृश्य बांधे रखते हैं.
फिल्म की कहानी इम्तियाज़ अली ने लिखी है. फिल्म के कुछ संवाद और दृश्य बेहतरीन हैं.
संगीत मधुर है. गीत लैला ओ लैला… हाफिज़ हाफिज़… पहले से ही हिट हो गए हैं.
पहली ही फिल्म होने के बावजूद अविनाश व तृप्ति डिमरी ने प्रभावशाली अभिनय किया है. दोनोंं ही सहज लगे हैं. परमीत सेठी, सुमित कौल ने भी अपने अभिनय के साथ न्याय किया है. लव स्टोरी मूवी देखनेवालों को फिल्म ज़रूर पसंद आएगी.

पलटन

जे. पी. दत्ता देशभक्ति और उस पर भी ख़ासकर युद्ध पर आधारित फिल्म बनाने के लिए जाने जाते हैं. बॉर्डर, एलओसी कारगिल… फिल्मों को दर्शकों ने ख़ूब पसंद किया था. अब वे पलटन के रूप में भारत-चीन के बीच हुए युद्ध को लाए हैं. फिल्म की ख़ासयित रही है- वॉर सीन में रियल फौजियों के साथ फिल्माया जाना.

इस फिल्म के द्वारा जे.पी. दत्ता बारह साल बाद वापसी कर रहे हैं, लेकिन फिल्म में ख़ास नयापन नहीं है.

जैकी श्रॉफ, सुनील शेट्टी, सोनू सूद, गुरमीत चौधरी, सिद्धार्थ कपूर, लव सिन्हा, हर्षवर्धन राणे, ईशा गुप्ता, सोनल चौहान सभी कलाकारों ने अपने क़िरदार के साथ न्याय किया है. लेकिन फिल्म दर्शकों उस तरह का प्रभाव नहीं छोड़ पाएगी, जैसा कि दत्ता साहब की फिल्मों के साथ होता है.

अनु मलिक और संजॉय चौधरी की संगीत भी बस ठीक-ठाक है.

 

फिल्म रिव्यूः स्त्री और यमला पगला दीवाना फिर से (Film Review: Stri And Yamala Pagala Deewana Phir Se)

पढ़िए आज यानी 31 अगस्त को रिलीज़ हुई दो फिल्में स्त्री और यमला पगला दीवाना फिर से की समीक्षा.

Stri And Yamala Pagala Deewana Phir Se Reviews

फिल्म: स्त्री

डायरेक्टर: अमर कौशिक

स्टार कास्ट: राजकुमार राव ,श्रद्धा कपूर, अपारशक्ति खुराना ,पंकज त्रिपाठी ,अभिषेक बनर्जी

अवधि: 2 घंटा 10 मिनट

Stri Reviews

कहानीः  ‘स्त्री’ एक हॉरर कॉमेडी है. जो एक सच घटना से प्रेरित बताई जाती है. फिल्म में विक्की (राजकुमार राव) एक टेलर है. एक दिन उसकी मुलाकात स्त्री (श्रद्धा कपूर) से होती है. विक्की और उसका दोस्त बिट्टू (अपारशक्ति खुराना) मिलकर स्त्री को पटाने की हर कोशिश करते हैं, लेकिन जब उन्हें स्त्री की अजीब हरकतों के चलते उस पर शक होता है, तो वे रुद्रा (पंकज त्रिपाठी) की शरण में जाते हैं, जो उन्हें स्त्री की सच्चाई से परिचित कराता है.

अभिनयः राजकुमार राव जब भी स्क्रीन पर आते हैं तो वह अपनी अदायगी से सारी लाइमलाइट बटोर ले जाते हैं. ‘स्त्री’ के जरिए उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह हर रोल में अव्वल हैं. उनकी कॉमेडी टाइमिंग से लेकर खौफ खाने का अंदाज आपको भा जाएगा. अपारशक्ति खुराना, अभिषेक बनर्जी, पंकज त्रिपाठी जैसे सपोर्टिंग स्टार्स ने बेहद सधी हुई भूमिका निभाई है, जो आपका दिल जीत लेगी. ऋद्धा कपूर ने भी अपने रोल के साथ न्याय किया है.

निर्देशनः अमर कौशिक का निर्देशन कमाल का है, शुरू से आखिरी तक फिल्म आपको बांधे रखेगी. कहानी में नयापन है. इसके डायलॉग्स और कॉमिक पंच इतने शानदार है कि ढाई घंटे का वक्त चुटियों में निकल जाएगा.

कमज़ोर कड़ियांः रिलीज से पहले फिल्म के गीत हिट नहीं हो पाए, इसका खामियाजा शायद मेकर्स को ओपनिंग के लिए उठाना पड़ सकता है, लेकिन कहानी में दम है, जिसकी वजह से वर्ड ऑफ माउथ से फायदा मिलेगा. क्लाइमैक्स शायद सबको पसंद न अाए.

फिल्म: यमला पगला दीवाना फिर से

Yamala Pagala Deewana Phir Se Reviews

डायरेक्टर: नवनैत सिंह

स्टार कास्ट: धर्मेंद्र, सनी देओल, बॉबी देओल, कृति खरबंदा, शत्रुघ्न सिन्हा, असरानी

अवधि: 2 घंटा 28 मिनट

 

कहानीः वैद्य पुराण (सनी देओल) एक आयुर्वेदिक वैद्य हैं जिनके पास वज्र कवच नाम का एक कमाल का फॉर्मूला है जो उनके पुरखों ने इजाद किया था. ये फॉर्मूला मुहासों से लेकर नपुंसकता हर बीमारी का इलाज कर सकती है. इस फॉर्मूले पर नजर होती एक बहुत बड़ी दवा कंपनी की जो किसी तरह इसे हासिल करना चाहती है. वहीं पुराण सिर्फ एक पुरुष नहीं है बल्कि महापुरुष है. जो मरीजों के इलाज के साथ-साथ सुपरमैन को भी टक्कर देते हैं.  फिल्‍म में धर्मेंद्र ने जयंत नाम परमार नाम के शख्‍स का किरदार निभाया है तो बॉबी देओल ‘काला’ नाम के एक लड़के के रोल में हैं.

ऐक्टिंगः धरम पाजी, सनी देओल और बॉबी देओल, तीनों अभिनेताओं ने बढ़िया काम किया है. इसके साथ ही अभिनेत्री कृति खरबंदा ने भी कहानी के मुताबिक ही अभिनय किया है.

निर्देशनः डायरेक्शन भी काफी हिला डुला है. कहानी सुनाने का ढंग भी काफी डगमगाया सा है.  फर्स्‍ट हाफ में मूवी ठीकठाक रही है, लेकिन सेकंड हाफ में कुछ स्‍लो होती दिखी है. अगर आप भी देओल ब्रैंड के फैन हैं तो एक बार यह मूवी देख सकते हैं.

कमज़ोर कड़ीः  फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी कहानी है जो काफी आउटडेटेड सी नज़र आती है और बांध पाने में असमर्थ दिखाई देती है. सनी देओल-बॉबी देओल और धर्मेंद्र जैसे बड़े-बड़े कलाकार की अदाकारी कहानी की वजह से फीकी पड़ जाती है.

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Movie Review: ज़बर्दस्त एक्शन, दमदार डायलॉग्स और सस्पेंस से भरपूर है सत्यमेव जयते (Movie Review Satyameva Jayate)

Satyameva Jayate
Movie Review: ज़बर्दस्त एक्शन, दमदार डायलॉग्स और सस्पेंस  से भरपूर है सत्यमेव जयते (Movie Review Satyameva Jayate)
भ्रष्टाचार और सिस्टम के ख़िलाफ़ लड़ाई कोई नहीं बात नहीं है, बल्कि इस विषय पर पहले भी कई फ़िल्में बन चुकी हैं, पर जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते कुछ अलग है. जॉन की दमदार पर्सनालिटी ने इस फिल्म के किरदार को बेहद रोमांचक बना दिया है. एक आम इंसान की भ्रष्टाचारी पुलिस वालों के ख़िलाफ़ यह दिलचस्प और सस्पेंस से भरपूर कहानी आपको ज़रूर पसंद आएगी. तो चलिए देखते हैं क्या है सत्यमेव जयते की कहानी.
मूवी- सत्यमेव जयते
डायरेक्टर- मिलाप मिलन ज़वेरी
स्टार कास्ट- जॉन अब्राहम, मनोज बाजपेयी, आयशा शर्मा, मनीष चौधरी, अमृता खानविलकर
अवधि- 2 घंटा 21 मिनट
रेटिंग- 3.5
कहानी-
फिल्म की शुरुआत ही धमाकेदार एक्शन के साथ होती है, जहां वीर राठौड़ (जॉन अब्राहम) एक करप्ट पुलिस ऑफिसर को मौत की सज़ा देता है. भ्रष्टाचारी पुलिस ऑफिसर्स को एक-एक करके ख़त्म करने लगता है, जिससे वो आम जनता के लिए मसीहा बन जाता है. वीर राठौड़ भ्रष्टाचारियों के ख़ात्मे में लगा ही रहता है कि उसका सामना एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर शिवांश राठौड़ से होता है. फिर शुरू होती है पुलिस और वीर की धर पकड़ की कहानी. इसी बीच कहानी में एंट्री होती है ख़ूबसूरत शिखा (आयशा शर्मा) की, जिसके बाद वीर और शिखा में नज़दीकियां बढ़ने लगती हैं. वीर अपने मकसद में आगे बढ़ता है, तो शिवांश के साथ उसकी भिड़ंत शुरू हो जाती है. इसके बाद एक एक कर कहानी में कई ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं और कहानी एक रोमांचक मोड़ पर पहुंचती है, जहां बताया जाता है कि वीर आख़िर क्यों भ्रष्टाचारी पुलिसवालों को ख़त्म करने में लगा रहता है.
Satyameva Jayate
क्या ख़ास है फिल्म में?
सत्यमेव जयते का ज़बर्दस्त एक्शन काबिले तारीफ़ है. दमदार डायलॉग्स दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर देते हैं. फिल्म  में ऐसा कई बार होता है कि दर्शक वाह वाह कर उठते हैं. इसी के साथ सस्पेंस भी काफ़ी अच्छा है. अगर आप जॉन के फैन हैं तो फिल्म देखने ज़रूर जाएं.
एक्टिंग
एक्टिंग की बात करें तो जॉन अब्राहम और मनोज बाजपेयी दोनों ने ही दमदार परफॉर्मेंस दी है.जॉन की डायलॉग डिलीवरी और एक्शन काबिले तारीफ़ है. पिछली फिल्मों की तरह इसमें भी मनोज बाजपेयी को ईमानदार पुलिस वाले के किरदार में देखना अच्छा लगता है. यह कहना होगा कि यह रोल उनकी पर्सनालिटी को काफ़ी सूट करता है. आयशा शर्मा भी अपने रोल में प्रॉमिसिंग नज़र आती हैं.
संगीत की बात करें तो इसके ‘पानियों सा’ और ‘दिलबर’ गाने तो पहले ही सुपर हिट हो चुके हैं, ऐसे में उन्हें बड़े पर्दे पर देखना अच्छा लगता है. कुल मिलाकर अगर आप जानना चाहते हैं कि क्यों वीर राठौड़ भ्रष्टाचारी पुलिस अफसरों को ख़त्म कर रहे हैं? तो यह फिल्म देखने ज़रूर जाएं. इस स्वतंत्रता दिवस अगर आप भी भ्रष्टाचार की इस लड़ाई में वीर और शिवांश का साथ देना चाहते हैं, तो सत्यमेव जयते देखने ज़रूर जाएं.
                                                      – अनीता सिंह