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Satyameva Jayate
Movie Review: ज़बर्दस्त एक्शन, दमदार डायलॉग्स और सस्पेंस  से भरपूर है सत्यमेव जयते (Movie Review Satyameva Jayate)
भ्रष्टाचार और सिस्टम के ख़िलाफ़ लड़ाई कोई नहीं बात नहीं है, बल्कि इस विषय पर पहले भी कई फ़िल्में बन चुकी हैं, पर जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते कुछ अलग है. जॉन की दमदार पर्सनालिटी ने इस फिल्म के किरदार को बेहद रोमांचक बना दिया है. एक आम इंसान की भ्रष्टाचारी पुलिस वालों के ख़िलाफ़ यह दिलचस्प और सस्पेंस से भरपूर कहानी आपको ज़रूर पसंद आएगी. तो चलिए देखते हैं क्या है सत्यमेव जयते की कहानी.
मूवी- सत्यमेव जयते
डायरेक्टर- मिलाप मिलन ज़वेरी
स्टार कास्ट- जॉन अब्राहम, मनोज बाजपेयी, आयशा शर्मा, मनीष चौधरी, अमृता खानविलकर
अवधि- 2 घंटा 21 मिनट
रेटिंग- 3.5
कहानी-
फिल्म की शुरुआत ही धमाकेदार एक्शन के साथ होती है, जहां वीर राठौड़ (जॉन अब्राहम) एक करप्ट पुलिस ऑफिसर को मौत की सज़ा देता है. भ्रष्टाचारी पुलिस ऑफिसर्स को एक-एक करके ख़त्म करने लगता है, जिससे वो आम जनता के लिए मसीहा बन जाता है. वीर राठौड़ भ्रष्टाचारियों के ख़ात्मे में लगा ही रहता है कि उसका सामना एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर शिवांश राठौड़ से होता है. फिर शुरू होती है पुलिस और वीर की धर पकड़ की कहानी. इसी बीच कहानी में एंट्री होती है ख़ूबसूरत शिखा (आयशा शर्मा) की, जिसके बाद वीर और शिखा में नज़दीकियां बढ़ने लगती हैं. वीर अपने मकसद में आगे बढ़ता है, तो शिवांश के साथ उसकी भिड़ंत शुरू हो जाती है. इसके बाद एक एक कर कहानी में कई ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं और कहानी एक रोमांचक मोड़ पर पहुंचती है, जहां बताया जाता है कि वीर आख़िर क्यों भ्रष्टाचारी पुलिसवालों को ख़त्म करने में लगा रहता है.
Satyameva Jayate
क्या ख़ास है फिल्म में?
सत्यमेव जयते का ज़बर्दस्त एक्शन काबिले तारीफ़ है. दमदार डायलॉग्स दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर देते हैं. फिल्म  में ऐसा कई बार होता है कि दर्शक वाह वाह कर उठते हैं. इसी के साथ सस्पेंस भी काफ़ी अच्छा है. अगर आप जॉन के फैन हैं तो फिल्म देखने ज़रूर जाएं.
एक्टिंग
एक्टिंग की बात करें तो जॉन अब्राहम और मनोज बाजपेयी दोनों ने ही दमदार परफॉर्मेंस दी है.जॉन की डायलॉग डिलीवरी और एक्शन काबिले तारीफ़ है. पिछली फिल्मों की तरह इसमें भी मनोज बाजपेयी को ईमानदार पुलिस वाले के किरदार में देखना अच्छा लगता है. यह कहना होगा कि यह रोल उनकी पर्सनालिटी को काफ़ी सूट करता है. आयशा शर्मा भी अपने रोल में प्रॉमिसिंग नज़र आती हैं.
संगीत की बात करें तो इसके ‘पानियों सा’ और ‘दिलबर’ गाने तो पहले ही सुपर हिट हो चुके हैं, ऐसे में उन्हें बड़े पर्दे पर देखना अच्छा लगता है. कुल मिलाकर अगर आप जानना चाहते हैं कि क्यों वीर राठौड़ भ्रष्टाचारी पुलिस अफसरों को ख़त्म कर रहे हैं? तो यह फिल्म देखने ज़रूर जाएं. इस स्वतंत्रता दिवस अगर आप भी भ्रष्टाचार की इस लड़ाई में वीर और शिवांश का साथ देना चाहते हैं, तो सत्यमेव जयते देखने ज़रूर जाएं.
                                                      – अनीता सिंह

अभिनेता इरफान खान (Irrfan Khan) लंदन में न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का इलाज करा रहै हैं. इसी बीच आज उनकी फिल्म कारवां बॉक्स ऑफिस पर रिलीज़ हो गई है. भागदौड़ भरी ज़िंदगी के बीच सुकून के कुछ पलों को तलाशती दिलचस्प यात्रा की कहानी है फिल्म कारवां. इस फिल्म में हंसी-ठहाकों के बीच ड्रामा और डार्क ह्यूमर भी देखने को मिलता है. चलिए हम आपको ले चलते हैं फिल्म के तीन मुख्य कलाकारों की त्रासदी भरी ज़िंदगी को फिर से पटरी पर लाने की इस दिलचस्प यात्रा पर.

Karwaan Movie

मूवी- कारवां
डायरेक्टर- आकर्ष खुराना
स्टार कास्ट- इरफान खान, दुलकर सलमान, मिथिला पालकर, कृति खरबंदा.
अवधि- 2 घंटा
रेटिंग- 3.5/5
Karwaan Movie

कहानी- फिल्म का एक किरदार अविनाश (दुलकर सलमान) बेचैनी से भरा एक ऐसा इंसान है जो अपनी असफलताओं के लिए अपने पिता को ही ज़िम्मेदार ठहराता है. अविनाश का अपने पिता के साथ बहुत ही अजीब सा रिश्ता है. पिता और बेटे के इस जटिल रिश्ते के बीच फिल्म की कहानी की शुरुआत अविनाश को आए एक फोन कॉल से शुरू होती है. जब फोन पर उसे पिता के मौत की जानकारी मिलती है. पिता की मौत के बाद अविनाश और उसका दोस्त शौकत (इरफान खान) बेंग्लुरु से कोच्चि आ जाते हैं और इस यात्रा के दौरान उन्हें अपनी ज़िंदगी के बारे में सोचने का समय मिलता है. दोनों के इस कारवां में तान्या (मिथिला पालकर) की एंट्री होती है. इन तीनों की इस यात्रा में कई ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं, जिसे जानने के लिए आपको सिनेमा घरों की ओर रुख करना होगा.

डायरेक्शन- बिजॉय नाम्बियार ने कारवां की कहानी को लिखा है. फिल्म के डायलॉग्स और डायरेक्टर आकर्ष खुराना का स्क्रीनप्ले काफ़ी दमदार है. इस फिल्म के ट्रेलर में जितने जोक्स देखने को मिले हैं, उनसे कहीं ज़्यादा जोक्स पूरी फिल्म में देखने को मिलेंगे. फिल्म को साउथ इंडिया के ख़ूबसूरत लोकेशन्स पर शूट किया गया है. फिल्म में इरफान खान की मौजूदगी इसे और भी एंटरटेनिंग बनाती है. हालांकि फिल्म के गाने कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा पाए हैं.

एक्टिंग- इस फिल्म के ज़रिए हिंदी फिल्मों में कदम रखने वाले दुलकर सलमान ने जबरदस्त एक्टिंग की है. वहीं यूट्यूब सेंसेशन मिथिला पालकर ने भी फिल्म में अच्छा काम किया है. दोनों की केमेस्ट्री कमाल की है. हालांकि इरफान खान की मौजूदगी इस फिल्म को और भी बेहतर बनाती है. इरफान खान जब-जब स्क्रीन पर आते हैं उन्हें देखकर दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ज़रूर आ जाती है. फिल्म में उन्होंने अपने किरदार को बखूबी निभाया है.

बहरहाल, अगर आप भी अपनी भागदौड़ भरी ज़िंदगी से कुछ सुकून भरे पल चुराकर ख़ुश होने का बहाना तलाश रहे हैं तो इस वीकेंड फिल्म कारवां ज़रूर देखें.

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आज बॉक्स ऑफिस पर एक भाई और बहन के बीच कड़ी टक्कर हो रही है. जी हां, एक ओर जहां बहन सोनम कपूर की फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ रिलीज़ हुई है, तो वहीं भाई हर्षवर्धन कपूर की ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ इस फिल्म को कड़ी टक्कर देने के लिए बॉक्स ऑफिस पर उतरी है. इसके अलावा एक और फिल्म ‘फेमस’ ने सिनेमाघरों में दस्तक दी है. बॉक्स ऑफिस पर हो रहे इस कड़े मुक़ाबले में जीत किसकी होगी यह देखना बेहद दिलचस्प होगा.
यंगस्टर्स को पसंद आएगी ‘वीरे दी वेडिंग’ 
मूवी- वीरे दी वेडिंग 
स्टार कास्ट- करीना कपूर खान, सोनम कपूर, स्वरा भास्कर, शिखा तल्सानिया. 
डायरेक्टर- शशांक घोष 
टाइम- 2 घंटा 5 मिनट
रेटिंग- 3.5/5
कहानी-
‘वीरे दी वेडिंग’ बॉलीवुड की दूसरी फिल्मों से थोड़ी अलग और दिलचस्प है. फिल्म की कहानी 4 लड़कियों की दोस्ती की दास्तां बयां करती है, जो दिल्ली के एक स्कूल में साथ पढ़ा करती थीं. इनकी ख़ासियत है कि ये सभी सहेलियां अपने शर्तों पर जीती हैं और बेबाकी से बात करती हैं. ये चारों सहेलियां सेक्स और ऑर्गेज़्म पर निडरता से बातें करती हैं. डायरेक्टर ने उनकी ज़िंदगी की कमियों और समस्याओं को बेहद ख़ूबसूरत अंदाज़ में पेश करने की कोशिश की है.
फिल्म में शादी की उलझनों में उलझी कालिंदी (करीना कपूर) परिवार व रिश्तेदारों की उम्मीदों पर खरा उतरने की जद्दोजहद करती नज़र आती हैं, तो अवनी (सोनम कपूर) को कोई पार्टनर ही नहीं मिल रहा है और उनकी मां दिन-रात उनके लिए जीवनसाथी ढूंढने में लगी हैं. वहीं साक्षी (स्वरा भास्कर) रिलेशनशिप में बंधना ही नहीं चाहतीं और मीरा (शिखा तल्सानिया) एक विदेशी से शादी कर चुकी हैं और उनका एक बच्चा भी है, लेकिन उनकी शादीशुदा ज़िंदगी बहुत बोरिंग है. ये सभी सहेलियां कालिंदी (करीना कपूर) की शादी के लिए मिलती हैं और इस दौरान सभी की ज़िंदगी की कई सारी कहानियां सामने आती हैं.
डायरेक्शन- 
फिल्म के डायरेक्टर शशांक घोष ने फिल्म में इन चारों सहेलियों की केमेस्ट्री को बेहद तगड़े अंदाज़ में पेश किया है. फिल्म के कुछ डायलॉग्स को इन चारों अभिनेत्रियों ने शानदार तरीक़े से बोला है. फिल्म में कई ऐसे वन लाइनर्स हैं, जो आपको हंसने पर मजबूर कर सकते हैं. डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफी, लोकेशन के साथ कास्टिंग भी बेहतरीन है. फर्स्ट हाफ में फिल्म की कहानी दर्शकों को बांधे रखती है, लेकिन सेकेंड हाफ थोडा स्लो है.  फिल्म के ‘तारीफां’ और ‘भांगड़ा ता सजदा’ जैसे गाने आपको ख़ूब इंटरटेन करेंगे.
एक्टिंग-
फिल्म में करीना कपूर खान, स्वरा भास्कर, सोनम कपूर और शिखा तल्सानिया पूरी तरह से अपने किरदारों के साथ न्याय करती दिखाई दे रही हैं. हर फ्रेंम में ये चारों बेहतरीन आउटफिट्स पहने हुए नज़र आती हैं और सभी ने अपने डॉयलॉग्स को पूरे कॉन्फिडेंस के साथ पर्दे पर उतारा है. अगर आप ड्रामा और कॉमेडी के साथ-साथ सेक्स चैट के शौकीन हैं तो यह फिल्म आपके उम्मीदों पर खरी उतर सकती है.
करप्शन से जंग की कहानी है ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’
मूवी- भावेश जोशी सुपरहीरो 
स्टार कास्ट- हर्षवर्धन कपूर,प्रियांशु पैन्यूली,निशिकांत कामत,राधिका आप्टे,आशीष वर्मा
डायरेक्टर- विक्रमादित्य मोटवाने
टाइम- 2 घंटा 35 मिनट
रेटिंग- 2.5/5
कहानी-
फिल्म की कहानी वाटर स्कैम और समाज में फैले दूसरे करप्शन के खिलाफ़ लड़ने वाले एक आम आदमी के सुपरहीरो बनने की है. भावेश जोशी (हर्षवर्धन कपूर) अपने दोस्तों प्रियांसु पैन्यूली और आशीष वर्मा के साथ कॉलेज में पढ़ता है. ये तीनों दोस्त समाज से बुराइयों को दूर करने के मिशन पर लग जाते हैं. फिल्म में हर्षवर्धन कागज़ का मास्क पहनकर करप्शन करने वालों का पर्दाफाश करने की कोशिश करते हैं, लेकिन भ्रष्टाचारियों को यह नागवार गुज़रता है और वो इस मास्क के पीछे छुपे सुपरहीरो को ढूंढ निकालते हैं और इस सुपरहीरो की खूब पीटाई करते हैं, लेकिन सुपरहीरो हार नहीं मानता और इन सबको सबक सिखाता है. फिल्म में निशिकांत कामत राजनेता बने विलेन के रोल में हैं.
डायरेक्शन-
फिल्म के डायरेक्टर विक्रमादित्य मोटवाने ने डार्क शेड में लीक से हटकर फिल्म बनाई है. इस फिल्म से पहले एक्टर हर्षवर्धन कपूर राकेश ओम प्रकाश की ‘मिर्जिया’ में नज़र आ चुके हैं, लेकिन वो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपना कमाल नहीं दिखा पाई थी. फिल्म की कहानी अनुराग कश्यप और विक्रमादित्य मोटवाने ने मिलकर लिखी है. यह एक बहुत अच्छी कहानी बन सकती थी, लेकिन मेकर्स इसे दिलचस्प बनाने में असफल साबित हुए हैं. फिल्म की कहानी भले ही आम आदमी से जुड़ी है, लेकिन आम आदमी से यह कनेक्ट नहीं कर पाती है और फिल्म के संवाद भी कुछ ख़ास नहीं हैं.
एक्टिंग- 
हर्षवर्धन कपूर की यह दूसरी फिल्म है, लेकिन वो दर्शकों को आकर्षित करने में असफल दिख रहे हैं. हालांकि उन्होंने कोशिश बहुत अच्छी की है जो काबिले तारीफ़ है. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है और साथ ही हर्षवर्धन कपूर के दोस्त के रूप में दोनों एक्टर्स ने बढ़िया काम किया है, जबकि विलेन के रूप में निशिकांत कामत की दबंगई काफ़ी कमज़ोर दिखाई पड़ रही है. बहरहाल, अगर आप लीक से हटकर कोई फिल्म देखना चाहते हैं तो ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ देख सकते हैं.
भारी भरकम स्टार कास्ट वाली फिल्म है फेमस 
मूवी- फेमस 
स्टार कास्ट- जिमी शेरगिल, केके मेनन, श्रिया सरन, पंकज त्रिपाठी, जैकी श्रॉफ, माही गिल. 
डायरेक्टर- करण ललित बुटानी 
रेटिंग- 2/5
इन दोनों फिल्मों के अलावा डायरेक्टर करण ललित बुटानी की फिल्म ‘फेमस’ भी रिलीज़ हुई है. इस फिल्म में जिमी शेरगिल, श्रिया सरन, केके मेनन, पंकज त्रिपाठी, जैकी श्रॉफ और माही गिल जैसे कलाकरों ने काम किया है. भारी भरकम स्टार कास्ट होने के बावजूद यह फिल्म आपको बांध नहीं पाएगी. फिल्म की स्क्रिप्ट से लेकर स्क्रीनप्ले हर जगह कमियां नज़र आएंगी. फिल्म की कहानी चंबल से जुड़ी है और इस फिल्म के हर एक किरदार की अपनी एक अलग कहानी है. जिसे समझते-समझते आपका सिर चकराने लगेगा. बावजूद इसके अगर आप जिमी शेरगिल, केके मेनन और जैकी श्रॉफ के जबरदस्त फैन हैं तो यह फिल्म देख सकते हैं.

 

Movie Review, Padmaavat

* बधाई हो, संजय लीला भंसाली ने पद्मावत के ज़रिए एक लाजवाब फिल्म बनाई है.
* राजपूत की आन-बान-शान, रानी पद्मावती की ख़ूबसूरती, भव्य सेट, ज़बर्दस्त संवाद, उमंदा अदाकारी फिल्म को बेहद ख़ास बना देती है.
* दीपिका पादुकोण अपनी भाव-भंगिमाओं के साथ बेपनाह सौंदर्य, साहस, कुशल धनुर्धर- हर रंग-रूप में बेहतरीन लगी हैं. कह सकते हैं कि दीपिका के बगैर फिल्म की कल्पना भी नहीं की जा सकती.
* शाहिद कपूर ने राजपूत राजा के रूप में अपनी वीरता, शौर्यता, सौम्यता, बड़प्पन- सभी को बख़ूबी निभाया है. उनके आदर्श व सहज अभिनय को देख मान-सम्मान देने के साथ ख़ुशी भी होती है.
* रणवीर सिंह हर बार की तरह अपने क़िरदार में जान फूंक दी है. मानो खिलजी की भूमिका को उन्होंने आत्मसात कर लिया हो. इंसान प्यार को पाने के लिए किस हद तक ग़ुजर सकता है. तब साम-दंड-भेद, छल-कपट, क्रूरता सब कुछ जायज़ सी लगने लगती है, इन बातों को आकर्षक ढंग से चित्रण किया गया है. रणवीर हर सीन में उत्कृष्ट रहे.
* वैसे सभी कलाकार दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर, रणवीर सिंह, अदिति राव हैदरी, रज़ा मुराद, जिम सरभ ने लाजवाब अभिनय किया है. कलाकारों से ख़ूबसूरत व जीवंत अदाकारी कराने के लिए भंसालीजी बधाई के पात्र हैं.
* फिल्म का गीत-संगीत पहले ही हिट हो चुका है, विशेषकर घूमर सॉन्ग.
* यह फिल्म मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा 1540 में अवधी में दोहा, चौपाई छंद द्वारा लिखे गए महाकाव्य पद्मावत से प्रेरित है.
* फिल्म में थ्रीडी तकनीक का बड़ी ख़ूबसूरती से इस्तेमाल किया गया, जिससे कई बार हमें ऐसा लगने लगता है कि हम किले की भव्य आंगन, मैदान, उस जगह पर हैं या उसके क़रीब हैं.
* फिल्म लंबी होने के बावजूद कहीं पर भी बोरियत महसूस नहीं होने देती. दर्शक हर दृश्य से ख़ुद को बंधे हुए महसूस करते हैं.
* प्रेम, रोमांस, फैंटेसी, राजस्थानी लोक गीत-संगीत, युद्ध, तलवारों की गूंज, ड्रामा, रंग बदलती इंसानी फ़ितरत- सब कुछ फिल्म को भव्य बना देती है.
* फिल्म की कथा-पटकथा, एडिटिंग सशक्त है.
* यूं तो फिल्म के सभी गाने कर्णप्रिय हैं, पर घूमर, एक दिल एक जान, नैनोवाले ने, खली बली गीत ख़ूबसूरत हैं.
* श्रेया घोषाल, स्वरूप ख़ान, शिवम पाठक, शैल हदा, नीति मोहन, रिचा शर्मा, अरिजीत सिंह सभी ने गीतों को अपनी सुमधुर आवाज़ से यादगार बना दिया है.
* फिल्म में तुर्क व अफगानी संगीत का भी अच्छा मिश्रण किया गया है.
* संजय लीला भंसाली ने कथा-पटकथा, संगीत, निर्देशन हर विभाग में न्याय किया है और अब तक की अपनी अविस्मरणीय फिल्म दर्शकों को दी है.
रेटिंगः 5 स्टार

– ऊषा गुप्ता

bollywood movie review

इस हफ़्ते तीन अलग-अलग विषयों पर फिल्में रिलीज़ हुई- मुक्काबाज़, कालाकांडी और 1921.

मुक्काबाज़
* क्रिटिक्स की जमकर वाहवाही लूटनेवाली फिल्म मुक्काबाज़ को रिलीज़ होने में थोड़ी देर हो गई, पर फिल्म लाजवाब है.
* फिल्म के हीरो विनीत कुमार सिंह ने ही इसकी कहानी भी लिखी है.
* बरेली का रहनेवाला श्रवण (विनीत कुमार सिंह) मुक्केबाज़ी में मशहूर होना चाहता है और ख़ूब नाम कमाना चाहता है.
* इस राह में वो कई उतार-चढ़ाव व संघर्ष से गुज़रता है.
* फिल्म में जातिवाद और खेल में हो रही राजनीति को बख़ूबी दर्शाया गया है.
* जोया हुसैन जिन्होंने गूंगी का क़िरदार निभाया है, इस फिल्म से अपने करियर की शुरुआत कर रही हैं. उन्होंने भी सहज व बेहतरीन अभिनय किया है.
* अनुराग कश्यप का निर्देशन व सभी कलाकारों विनीत कुमार सिंह, जिम्मी शेरगिल, जोया हुसैन, रवि किशन के अभिनय उम्दा हैं.
* फिल्म के संगीत व संवाद उसे और भी दमदार बनाते हैं.

रेटिंगः 3

कालाकांडी
* सीनेस्तान फिल्म कंपनी व फ्लाइंग यूनिकॉर्न एंटरटेनमेंट निर्मित कालाकांडी एक डार्क थ्रिलिंग कॉमेडी मूवी है.
* अक्षत वर्मा निर्देशित कालाकांडी में सैफ अली ख़ान एक अलग ही अवतार में नज़र आते हैं.
* इसके अलावा फिल्म के सभी क़िरदार व अंत बेहद दिलचस्प है.
* दीपक डोबरियाल, विजय राज, कुणाल रॉय कपूर, अक्षत ओबेरॉय, अमायरा दस्तूर, शोभिता धूलिपाला, शहनाज़ ट्रेजरीवाला ने अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय किया है.
* म्यूज़िक सामान्य है, पर फिल्म की सिनेमैट्रोग्राफी प्रभावशाली है.
* फिल्म के काफ़ी डायलॉग्स अंग्रेज़ी में हैं, जिनके सबटाइटल भी नहीं है, जिससे थोड़ी परेशानी हो सकती है.

रेटिंगः 3

1921
* विक्रम भट्ट निर्देशित करण कुंद्रा व ज़रीन ख़ान स्टारर यह एक हॉरर फिल्म है.
* फिल्म दर्शकों को डराने की बजाय कई जगहों पर हंसाती है.
* कहानी रोमांस, रोमांच, रहस्य पैदा करने की बजाय कई जगहों पर उलझकर रह जाती है.
* यूं तो कहानी में रहस्य की कई परतें दी गई हैं, पर फिर भी फिल्म दर्शकों को बांधे नहीं रख पाती है.
* वैसे डरावनी फिल्मों के शौक़ीन ज़रूर देख सकते हैैं.

रेटिंगः 2

– ऊषा गुप्ता

Movie Review, Tiger Zinda Hai

 

* यशराज फिल्म्स के बैनर तले निर्माता आदित्य चोपड़ा की फिल्म टाइगर ज़िंदा है को धमाकेदार ओपनिंग मिली. इसमें सलमान ख़ान की एक था टाइगर के आगे की कहानी है. निर्देशक अली अब्बास ज़फर का निर्देशन क़ाबिल-ए-तारीफ़ है.
* फिल्म की कहानी कुछ यूं है कि टाइगर पत्नी ज़ोया व बच्चे के साथ शांतिपूर्ण जीवन बिता रहा है. तभी आतंकवादी संगठन भारत-पाकिस्तान की नर्सों को बंधक बना लेता है और रॉ टाइगर से इस केस को हैंडल करने के लिए कहती है. तब टाइगर को इस मिशन पर कई ऐसी बातें पता चलती हैं, जिससे वो अचंभित रह जाता है.
* मूवी में ऐक्शन, डांस, रोमांचित करते फाइट सीन, मस्तीभरी गाने, रोमांस थ्रिलर यानी वो सब कुछ है, जो एक मसाला फिल्म को हिट बनाती है.
* सलमान ख़ान, कैटरीना कैफ़, गिरीश कर्नाड परेश रावल, अंगद बेदी, कुमुद मिश्रा हर किसी ने अपने बेहतरीन अभिनय से प्रभावित किया है.
* विशाल-शेखर का संगीत कर्णप्रिय है. दिल दिया गल्ला… स्वैग से करेंगे स्वागत… गाने पहले ही हिट हो चुके हैं.
* इरशाद कामिल के गीत व विशाल ददलानी और नेहा भसीन की आवाज़ सुमुधर है.
* मोरेक्को, ग्रीस के बर्फीले पहाड़ों से लेकर तपते रेगिस्तान के लोेकेशन दिल को लुभाते हैं. फिल्म की सिनेमाटोग्राफी लाजवाब है.
* यह हॉलीवुड स्टाइल की भरपूर मसाला फिल्म है, जिसे दर्शक ज़रूर पसंद करेंगे.
रेटिंगः 3

– ऊषा गुप्ता

Film Review, Tumhari Sulu, vidya balan

 

हाउसवाइफ से आरजे का दिलचस्प सफ़र…

हर नारी के ख़्वाब, उम्मीद, महत्वाकांक्षाओं की कहानी को जाने विद्या बालन (Vidya Balan) की तुम्हारी सुलु (Tumhari Sulu) से. टी सीरीज़ व एलिप्सिस एंटरटेनमेंट के बैनर तले निर्देशक सुरेश त्रिवेणी की यह पहली फिल्म है, जिसे ख़ास बनाने में वे सफल रहे.
पूरी फिल्म मेंं विद्या बालन छायी हुई हैं, फिर चाहे पत्नी, मां, नाइट आरजे (रेडियो जॉकी) या फिर मध्यमवर्गीय परिवार की एक आम नारी का प्रतिनिधित्व करना ही क्यों न हो, सभी में वे लाजवाब रही हैं.

मूवी हाइलाइट्स
* सुलोचना, जिसे प्यार से सुलु बुलाते हैं, जो एक हाउसवाइफ है. उसके सपने, कामयाबी, संघर्ष को बेहतरीन तरी़के से दिखाया गया है.
* मीडिल क्लास की महिला कैसे घर-गृहस्थी को सफलतापूर्व संभालते हुए भी अपने सपनों को भी उड़ान देती है, जिससे हर नारी ख़ुद को जुड़ा हुआ महसूस करेगी.
* सुलु को अचानक नाइट आरजे का जॉब मिलना और उसे बख़ूबी निभाते हुए रातोंरात मशहूर हो जाना, फिल्म का टर्निंग प्वॉइंट है.
* जहां पहले उसका पति से अच्छा तालमेल रहता है, वहीं सक्सेस के बाद दोनों के बीच मतभेद शुरू हो जाते हैं.
* सुलु ज़िंदगी के हर उतार-चढ़ाव को मुस्कुराते हुए झेलती है, पर अपने सपनों को भी पंख देती है.

+ फिल्म की यूएसपी विद्या बालन का बेहतरीन सहज अभिनय है. वे ख़ुशमिज़ाज शख़्स के रूप में मां, पत्नी, कलीग- हर क़िरदार को
ख़ूबसूरती से जीती हैं.
+ उनके पति के रूप में मानव कौल की अदाकारी भी शानदार है.
+ लंबे समय के बाद नेहा धूपिया को देखना सुखद रहा. अपने छोटे से रोल में प्रभावित करती हैं.
+ इनके अलावा विजय मौर्य व आरजे मल्लिष्का ने भी अपने क़िरदार के साथ न्याय किया है.
+ संगीत- गुरु रंधावा, तनिष्क बागची, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
+ गीत- कविता कृष्णमूर्ति, गुरु रंधावा, शलमली खोलगड़े, शाशा तिरुपति- सुमधुर हैं.
तुम्हारी सुलु कॉमेडी, नारी प्रधान एक दिलचस्प फैमिली फिल्म है, जो सभी का मनोरंजन करती है.

रेटिंग- 3.5 स्टार

– ऊषा गुप्ता

फिल्मः रूख
स्टारः मनोज वाजपेयी, स्मिता तांबे, कुमुद मिश्र, आदर्श ग्रोवर
निर्देशकः अतानु मुखर्जी
रेटिंगः 2.5

यह फिल्म उस ख़ास दर्शक वर्ग के लिए है, जो लीक से हटकर कुछ अलग और अर्थपूर्ण फिल्में देखना पसंद करते हैं.

Film Review Movie Rukh

 

कहानीः यह फिल्म पिता-पु्त्र की कहानी है. दिवाकर माथुर (मनोज वाजपेयी) का लेदर का कारोबार है. दिवाकर का एक बेटा ध्रुव (आदर्श गौरव) होता है. ध्रुव को हमेशा यही लगता है कि उसके पापा दिवाकर के पास उसके लिए समय नहीं है. इसी वजह से ध्रुव कुछ ज्यादा ही गुस्सैल बन जाता है. स्कूल में एक स्टूडेंट के साथ मारपीट के बाद उसे जब सीनियर सेकंडरी स्कूल से निकाल दिया जाता है तो दिवाकर उसे एक बोर्डिंग स्कूल में भेज देता है. बोर्डिंग में पढ़ रहे ध्रुव को एक दिन खबर मिलती है कि दिवाकर की एक रोड ऐक्सिडेंट में मौत हो गई है. ध्रुव बोर्डिंग छोड़ अपने घर लौट आता है, लेकिन ध्रुव को हर बार यही लग रहा है कि उसके पिता की मौत एक ऐक्सिडेंट में नहीं हुई बल्कि उनका एक सोची समझी प्लानिंग के साथ मर्डर किया गया है.

निर्देशनः अतानु की कहानी और किरदारों पर तो अच्छी पकड़ है, लेकिन स्क्रिप्ट पर उन्होंने ज्यादा काम नहीं किया. यही वजह है कि फिल्म की गति बेहद धीमी है. फिल्म की स्पीड अंत तक इस कदर धीमी है कि कई बार हॉल में बैठे दर्शकों का सब्र खत्म होने लगता है. फिल्म का मिजाज काफी डार्क है. ऐसे में ये फिल्म एक खास तबके के लिए है इसे मास शायद ही देखना पसंद करेगी.

अभिनयः मनोज वाजपेयी ने एक बार फिर अपनी अभिनय का लोहा मनवा दिया है. वहीं स्मिता तांबे की खामोशी के बीच उनका फेस एक्सप्रेशन जबर्दस्त है. ध्रुव के किरदार में आदर्श गौरव डायरेक्टर की राइट चॉइस रही तो कुमुद मिश्रा ने रॉबिन के किरदार को दमदार ढंग से निभाया है.

म्यूजिकः फिल्म में बैकग्राउंड में  दो गाने हैं, लेकिन ये गाने फिल्म की पहले से स्लो स्पीड को और स्लो ही करते हैं.

देखें या नहींः अगर आपको लीक से हटकर फिल्में देखना पसंद हैं और आप मनोज वाजपेयी के फैन हैं तो फिल्म अवश्य देखें. मसाला फिल्म के शौक़ीनों के लिए  इसमें कुछ नहीं है.

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फिल्म- सीक्रेट सुपरस्टार
स्टारकास्ट-  आमिर खान, ज़ायरा वसीम, मेहर विज, राज अरुण, तीर्थ शर्मा
निर्देशक- अद्वैत चंदन
रेटिंग- 4 स्टार
कहानी
फिल्म की कहानी है 15 साल की इंसिया (जायरा वसीम) की है, जिसका सपना है कि वो सिंगर बने, लेकिन घर के माहौल और स्वभाव से सख़्त उसके पिता उसे इसकी इजाज़त नहीं देते. इंसिया किसी भी हाल में अपने सपने को पूरा करना चाहती है. एक दिन वो बुर्का पहनकर एक गाना रिकॉर्ड करती हैं और उसे यूट्यूब पर अपलोड कर देती है. यूट्यूब पर उसका गाना पसंद किया जाता है और वो सीक्रेट सुपरस्टार बन जाती है. इंसिया की मां (मेहर विज) और फ्लॉप म्यूज़िक डायरेक्टर शक्ति कुमार (आमिर खान) इसमें इंसिया की मदद करते है.
फिल्म की यूएसपी
आमिर खान की ऐक्टिंग के एक बार फिर दिवाने हो जाएंगे आप. आमिर ने जिस तरह से 90 के दशक के म्यूज़िक डायरेक्टर का किरदार निभाया वो काबिले तारीफ़ है.
फिल्म की कहानी नई नहीं है, लेकिन उसे प्रेज़ेंट करने का तरीक़ा ज़रूर नया है. सभी कलाकारों का अभिनय अच्छा है.
अमित त्रिवेदी का संगीत भी बेहतरीन है.
फिल्म में आपको इमोशन्स, ख़ुशी, कॉमेडी हर चीज़ का तड़का मिलेगा. डायरेक्शन में डेब्यू करने वाले अद्वैत चंदन का निर्देशन कमाल का है. कहीं से भी आपको इस बात का एहसास नहीं होगा कि अद्वैत की ये पहली फिल्म है.
फिल्म में कई मुद्दों, जैसे- घरेलू हिंसा, भ्रूण हत्या, लड़की की आज़ादी पर प्रतिबंध को दिखाया गया है. लेकिन इन सबके बीच कैसे एक लड़की अपनी हिम्मत से आगे बढ़ती है, ये दिखाने का अंदाज़ बेहद ख़ूबसूरत है.
फिल्म देखने जाए या नहीं?
ज़रूर देखने जाएं. ये फिल्म मिस नहीं कर सकते हैं आप. सीक्रेट सुपरस्टार फिल्म ख़ासकर उन लड़कियों को देखनी चाहिए, जो टैलेंट हैं, लेकिन वो अपने सपनों को साकार करने में सिर्फ़ इसलिए झिझकती है, क्योंकि उसे आज़ादी नहीं है अपने सपनों को जीने की. वीकेंड पर ये फिल्म आपके लिए किसी सुपरस्टार से कम नहीं होगी है.

 

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फिल्म- सिमरन

स्टारकास्ट- कंगना रनौत, सोहम शाह

निर्देशक- हंसल मेहता

रेटिंग- 3 स्टार्स

फिल्म रिव्यू सिमरन

कहानी

ये कहानी है खुलकर अपनी शर्तों पर जीने वाली लड़की प्रफुल पटेल की. प्रफुल पटेल (कंगना) एक बिंदास लड़की है. उसका तलाक हो चुका है और वो अपने माता-पिता के साथ रहती है. एक होटल में वो हाउसकीपर का काम करती है. उसका बॉयफ्रेंड भी है. एक दिन वो पहुंचती है लॉस वेगास, जहां वो गैम्बलिंग करती है और बहुत सा पैसा हार जाती है. कर्ज़ में डूबी बिंदास प्रफुल लूटपाट का काम शुरू करती है और धीरे-धीरे क्राइम की ओर बढ़ जाती है. क्या होता है प्रफुल का? क्या उसकी चोरी की लत उसे बड़ी मुश्किल में फंसा देती है? क्या होता है तब, जब उसके बॉयफ्रेंड को पता चलता है कि प्रफुल को चोरी करने की आदत है? इन सवालों का जवाब आपको फिल्म देखने पर ही मिल पाएगा.

फिल्म की यूएसपी और कमज़ोर कड़ी

फिल्म की यूएसपी है कंगना की ऐक्टिंग, जो हमेशा की तरह अच्छी है. फिल्म में कंगना के कई शेड्स हैं, जो आपको मज़ेदार लगेंगे.

बात करें अगर कमज़ोर कड़ी कि तो फिल्म की कहानी थोड़ी-सी बिखरी नज़र आती है. कई जगहों पर कहानी में कुछ ऐसा होता है, जिस पर यक़ीन करना मुश्किल हो जाता है.

शाहिद, अलीगढ़ और सिटीलाइट जैसी बेहतरीन फइल्में बना चुके हंसल मेहता इस फिल्म में वो कमाल नहीं दिखा पाए.

फिल्म का ट्रेलर काफ़ी मज़ेदार थी, लेकिन फिल्म से ये उम्मीद नहीं की जा सकती है.

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

अगर आप कंगना रनौत के फैन हैं और हल्की-फुल्की कॉमेडी पसंद करते हैं, तो एक बार ये फिल्म देख सकते हैं.

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फिल्म रिव्यू लखनऊ सेंट्रल

फिल्म- लखनऊ सेंट्रल

स्टारकास्ट- फरहान अख्तर, डायना पेंटी, गिप्पी ग्रेवाल, रोनित रॉय, रवि किशन और दीपक डोबरियाल

निर्देशक- रंजीत तिवारी

रेटिंग- 2.5

लखनऊ सेंट्रल का विषय अच्छा है. आइए, जानते हैं फिल्म कैसी है.

कहानी

कहानी है किशन मोहन गिरहोत्रा (फरहान अख़्तर) की, जो मुरादाबाद में रहता है और म्यूज़िक डायरेक्टर बनना चाहता है. एक दिन उसके साथ कुछ ऐसा होता है कि वो एक मामले में आरोपी बना दिया जाता है और जेल पहुंच जाता है. जेल में वो वहां के कैदियों गिप्पी ग्रेवाल, दीपक डोबरियाल, इनामुलहक और राजेश शर्मा के साथ मिलकर बैंड बनाता है. जेलर (रोनित रॉय) की नज़रें इन सब कैदियों पर होती है. सोशल वर्कर बनी डायना पेंटी इन कैदियों से सहानभूति रखती हैं. क्या किशन मोहन ख़ुद को निर्देष साबित कर पाता है? क्या वो संगीतकार बनने का अपना सपना पूरा कर पाता है? इन सब सवालों का जवाब फिल्म में आखिर में मिल जाता है.

फिल्म की यूएसपी और कमज़ोर कड़ी

फिल्म का विषय अच्छा था, लेकिन फिल्म इस विषय पर खरी नहीं उतरती है. बेहद ही कमज़ोर डायरेक्शन है फिल्म का.

फरहान अख़्तर की ऐक्टिंग हमेशा की तरह अच्छी है, लेकिन कमज़ोर डायरेक्शन का असर उन पर साफ़ नज़र आता है.

रवि किशन, दीपक डोबरियाल का काम अच्छा है.

फिल्म में यूं तो बैंड दिखाया गया है, लेकिन गाने ऐसे नहीं की याद रखे जाएं.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

अगर आप फरहान अख़्तर के फैन हैं, तो ये फिल्म देखने जा सकते हैं. वैसे किसी कारणवश अगर ये फिल्म आप नहीं भी देख पाते हैं, तो कोई नुक़सान नहीं होगा आपका.

फिल्म- शुभ मंगल सावधान

स्टारकास्ट- आयुष्मान खुराना, भूमि पेडनेकर, ब्रजेंद्र काला, सीमा पाहवा, अनमोल बजाज

निर्देशक- आर.एस. प्रसन्ना

रेटिंग- 3.5 स्टार

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शुभ मगंल सावधान एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है. ये फिल्म तमिल फिल्म कल्याण समायल साधम् की हिंदी रीमेक है. आइए जानते हैं कैसी है फिल्म.

कहानी

शुभ मंगल सावधान दिल्ली के मुदित शर्मा (आयुष्मान खुराना) और सुगंधा (भूमि पेडनेकर) की कहानी है, जिनकी सगाई हो चुकी है. शादी से पहले जब एक दिन दोनों एक-दूसरे के क़रीब आते हैं, तब मुदित को पता चलता है कि उसे सेक्सुअल प्रॉब्लम है. सुंगधा को भी ये बात पता चलती है, लेकिन उससे दूर होे की बजाय वो हर कदम पर मुदित का साथ देती है. सुंगधा के घर वालों को जब मुदित के सेक्सुअल प्रॉब्लम की बात पता चलती है, तो वो इस शादी के खिलाफ़ हो जाते हैं. अब मुदित और सुगंधा की शादी होती है या नहीं? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

फिल्म की यूएसपी

फिल्म की यूएसपी है फिल्म का सब्जेक्ट. इस सब्जेक्ट पर फिल्म बनाना बेहद ही रिस्की हो सकता था, लेकिन आर. एस. प्रसन्ना ने इसे बड़ी ही ख़ूबसूरती से डायलॉग्स के ज़रिए कॉमिक अंदाज़ में दिखाया है. लड़को की सेक्सुअल प्रॉब्लम को भले ही मज़ाकिया अंदाज़ में दिखाया गया है, लेकिन इससे युवाओं में जागरूकता बढ़ेगी.

आयुष्मान खुराना की ऐक्टिंग हमेशा की तरह कमाल की है. ऐसे अलग सब्जेक्ट पर बनी फिल्मों के लिए आयुष्मान एकदम फिट हैं.

भूमि पेडनेकर ने टॉयलेट एक प्रेम कथा के बाद एक बार फिर उन्होंने अपने अभिनय की छाप छोड़ी है. आयुष्मान और भूमि की जोड़ी दम लगा के हईशा में भी पसंद की गई थी और इस फिल्म में भी ये आपको निराश नहीं करेंगे.

फिल्म के डायलॉग्स नए हैं और आपको ख़ूब हसाएंगे.

फिल्म की कमज़ोर कड़ी

फिल्म का क्लाइमेक्स आपको बड़ा ही बनावटी-सा लगेगा.

फिल्म देखने जाएं या नहीं? 

बिल्कुल जाएं फिल्म देखने. ये हल्की-फुल्की कॉमेडी फिल्म आपके वीकेंड को एंटरटेनिंग बना देगी. फुल पैसा वसूल फिल्म है शुभ मंगल सावधान.

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 फिल्म- बादशाहो

स्टारकास्ट- अजय देवगन, इलियाना डीक्रूज़, इमरान हाशमी, विद्युत जामवाल, ईशा गुप्ता, संजय मिश्रा, शरद केलेकर, लिज़ा हेडन, 

निर्देशक- मिलन लूथरिया

रेटिंग- 3 स्टार

बादशाहो में है स्टार्स की पूरी फौज. बात करें अगर मिलन लूथरिया के साथ अजय की जोड़ी की तो, ये जोड़ी वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई जैसी सुपरहिट फिल्म साथ में दे चुके हैं. आइए जानते हैं इस मल्टीस्टारर फिल्म में क्या है ख़ास.

कहानी

फिल्म की कहानी 1975 के इमर्जेंसी के दौरान की है, लेकिन पूरी तरह से इमर्जेंसी पर आधारित नहीं है. उस दौरान राजस्थान के कुछ राजघराने अपनी अरबों की सम्पति को सरकार से बचाने में लगे थे, उस हिस्से को ये फिल्म दर्शाएगी.

फिल्म की कहानी महारानी गीतांजलि (इलियाना डिक्रूज) के आसपास घूमती है. इमर्जेंसी के दौरान महारानी के महल में भी छापा पड़ता है. महल में मिले ख़ज़ाने को सरकार मेजर सहर (विद्युत जाम्मवाल) के साथ दिल्ली भेजने का फैसला करती है. इस ख़ज़ाने को दिल्ली पहुंचने से पहले लुटने के लिए गीतांजलि एक टीम बनाती है, जिसकी ज़िम्मेदारी सौंपी जाती है वफादार भवानी सिंह (अजय देवगन) को. इस टीम में संजना ( ईशा गुप्ता), दलिया ( इमरान हाशमी), शराबी तिकला ( संजय मिश्रा) भी शामिल हैं. अब ख़ज़ाना सरकार तक पहुंचता है या महारानी के महल में, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

फिल्म की यूएसपी

फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी है, इसमें दिखाए गए ऐक्शन सीन्स, जिन्हें दमदार अंदाज़ में पेश किया गया है.

अजय देवगन एक बार फिर ऐक्शन अवतार में नज़र आएंगे. अजय और इमरान हाशमी की ऐक्टिंग दमदार है, दोनों को ऐसे रोल में आपने पहले कभी नहीं देखा होगा.

इलियाना डीक्रूज़ और ईशा गुप्ता की ऐक्टिंग भी अच्छी है.

विद्युत जामवाल का ऐक्शन एक बार फिर आपको सीट से उठने नहीं देगा.

80 के दशक को फिल्म में बेहद ही ख़ूबसूरती से दिखाया गया है.

फिल्म का गाना रश्के कमर… बेहतरीन है.

कमज़ोर कड़ी

स्क्रिप्ट अच्छी थी, लेकिन उसे पूरी तरह से पर्दे पर दिखा नहीं पाए मिलन. फिल्म की कहानी भी बीच-बीच में ट्रैक से भटकती भी नज़र आई.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

अगर आप ऐक्शन फिल्में पसंद करते हैं, तो सितारों से भरपूर ये फिल्म ज़रूर देखने जाएं. अजय देवगन का ऐक्शन आपको निराश नहीं करेगा.

फिल्म- बरेली की बर्फी

स्टारकास्ट- कृति सैनन, आयुष्मान खुराना, राजकुमार राव, पंकज त्रिपाठी और सीमा पाहवा

निर्देशक- अश्विनी अय्यर तिवारी

रेटिंग- 3/5 स्टार

देसी मिठास है 'बरेली की बर्फी', 'पार्टिशन 1947' बंटवारे के बीच एक लव स्टोरी है

बरेली की बर्फी में देसी मिठास है. आजकल बॉलीवुड में देसी कहानियों पर फिल्में ख़ूब बन रही हैं और दर्शक ऐसी कहानियों को पसंद भी कर रहे हैं. बरेली की बर्फी कहानी फ्रांसीसी नॉवेल इनग्रिडिएंट्स ऑफ लव पर आधारित है, लेकिन बॉलीवुड में इसे उत्तर प्रदेश के रंग में रंगा गया है. फिल्म की कहानी में और क्या है ख़ास? आइए जानते हैं.

कहानी: 

जैसा की नाम से ही ज़ाहिर है कहानी है बरेली की बिट्टी मिश्रा (कृति सैनन) की, जो एक बिंदास लड़की है और अपने घर की लाडली है. एक दिन उसे प्यार हो जाता है बरेली की बर्फी नाम की किताब के लेखक से. इस किताब के लेखक कोई और नहीं, बल्कि चिराग दुबे (आयुष्मान खुराना) है, जिसने ये किताब तब लिखी थी, जब उसे प्यार में धोखा मिला था, लेकिन इस किताब को वो ख़ुद का नाम ने नहीं, बल्कि अपने दोस्त प्रीतम विद्रोही (राजकुमार राव) के नाम से छपवाता है. राजकुमार राव की फिल्म में एंट्री होते ही फिल्म में एक जान आ जाती है. लव ट्रायंगल तब और भी मज़ेदार हो जाता है. अब बिट्टी किसे मिलेगी? चिराग को या प्रीतम को? अब ये जानने के लिए आपको फिल्म देखने जाना होगा.

फिल्म की यूएसपी और कमज़ोर कड़ी:

अश्विनी ने इस फिल्म में बरेली के लोकल फ्लेवर को बनाए रखा है. फिल्म का सेकेंड पार्ट और भी धमाकेदार और इंट्रेस्टिंग है. आप एक मिनिट तके लिए भी बोर नहीं होंगे फिल्में में. जैसे अश्विनी ने फिल्म निल बटे सन्नाटा में बड़े ही मज़ाकिया अंदाज़ में गहरी बात कर दी थी, कुछ वैसे ही बात इस फिल्म में भी नज़र आएगी.

राजकुमार राव की ऐक्टिंग दि ब दिन निखरती चली जा रही है. एक बार फिर राजकुमार राव ने साबित किया है कि वो जो किरदार करते हैं, वो लगता है उन्हीं के लिए ही लिखा गया है. कृति सैनन और आयुष्मान खुराना भी अपने-अपने रोल में फिट लग रहे हैं. फिल्म के गाने भी अच्छे हैं.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

ज़रूर जाएं फिल्म देखने. ये इस साल की एक अच्छी रॉमकॉम फिल्म मानी जा रही है. कुल मिलाकर देखा जाए, तो ये एक एंटरटेनिंग फिल्म है. यक़ीनन आपके टिकट के पैसे वसूल हो जाएंगे इस फिल्म को देखकर.

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देसी मिठास है 'बरेली की बर्फी', 'पार्टिशन 1947' बंटवारे के बीच एक लव स्टोरी है

फिल्म-  पार्टिशन 1947

स्टारकास्ट- हुमा कुरैशी, ओमपुरी, मनीष दयाल

निर्देशक- गुरिंदर चढ्डा

रेटिंग- 2.5/5 स्टार

कहानी:

भारत-पाकिस्तान के बंटवारे पर आधारित है फिल्म पार्टिशन 1947. फिल्म की कहानी है बंटवारे के बीच पनपती है आलिया(हुमा कुरैशी) और जीत सिंह(मनीष दयाल) की लव स्टोरी. जिन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

फिल्म की यूएसपी और कमज़ोर कड़ी:

यूं तो ये कोई पहली फिल्म नहीं है, जो बंटवारे के बीच प्यार पर बनी हो, पहले भी इससे बेहतर फिल्में बनाई जा चुकी हैं. ऐसे में फिल्म की कहानी में कोई नयापन नहीं है. फिल्म का डायरेक्शन अच्छा है. कई रियल लोकेशन पर शूट किया है फिल्म को, जो आपके पसंद आएगा.

हुमा कुरैशी और मनीष दयाल का अभिनय अच्छा है. हुमा के पिता के रोल में ओमपुरी का किरदार भी अच्छा है.

ए.आर. रहमान का म्यूज़िक इस फिल्म की जान है.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

अगर आप पीरियड फिल्में पसंद करते हैं, तो एक बार ये फिल्म देख सकते हैं. लेकिन अगर किसी वजह से ये फिल्म मिस भी हो जाती है, तो कोई बड़ा नुक़सान नही होगा आपका.

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