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‘मुबारकां’- पैसा वसूल, ‘इंदू सरकार’- दमदार और ‘राग देश’ है अलग फिल्म (Movie Review: Mubarakan, Indu Sarkar, Raag Desh)

फिल्म- मुबारकां

स्टारकास्ट- अर्जुन कपूर, अनिल कपूर, इलियाना डिक्रूज, आथिया शेट्टी, पवन मल्होत्रा, रत्ना पाठक शाह

निर्देशक- अनीस बज़्मी

रेटिंग- 3 स्टार्स

अनीस बज़्मी की फिल्में हमेशा एंटरटेनिंग होती है. उनकी फिल्म मुबारकां भी इस दर्शकों को एंटरटेन कर रही है. लंबी-चौड़ी स्टारकास्ट वाली इस फिल्म में कॉमेडी का तड़का लगा है. कहानी है करण और चरण (अर्जुन कपूर) की है, जो जुड़वां भाई हैं, लेकिन इनक परवरिश अलग-अलग जगह हुई है. सिंगल चाचा करतार सिंह यानी अनिल कपूर ने अपने एक भतीजे को बडे भाई (पवन मल्होत्रा) के पास पंजाब में रखा है, जबकि दूसरे को बहन (रत्ना पाठक शाह), जो कि लंदन में रहती है, इसके पास रखा है. दोनों अलग माहौल में बड़े होते हैं और दोनों को प्यार हो जाता है. एक जैसी शकल होने पर कहानी में ढेरों कंफ्यूज़न होते हैं और साथ ही होती है ख़ूब कॉमेडी भी.

क्यों देखें फिल्म? 

अनिल कपूर के लिए आपको ये फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए. एक बार फिर अनिल ने साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ़ एक नंबर है. कमाल का अभिनय किया है उन्होंने. अनीस बज़्मी भी दर्शकों की उम्मीदों पर खरे उतरे हैं. लोकेशन और गाने भी आपको एंटरटेन करेंगे. इलियाना और आथिया को जितना रोल दिया गया है, उसमें वो बिल्कुल फिट लग रही हैं. सबसे ख़ास बात ये फिल्म आप अपने परिवार के साथ देख सकते हैं.

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फिल्म- इंदु सरकार

स्टारकास्ट – कीर्ति कुल्हारी, नील नितिन मुकेश, अनुपम खेर, तोता रॉय चौधरी, सुप्रिया विनोद

निर्देशक – मधुर भंडारकर 

रेटिंग – 3 स्टार्स 

मधुर भंडारकर की विवादित फिल्म इंदु सरकार आखिरकार सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी के बाद रिलीज़ हो ही गई.

फिल्म इमर्जेंसी के बैकग्राउंड पर आधारित है, इस आप इमर्जेंसी की कहानी नहीं कह सकते हैं. यह एक लड़की इंदु (कीर्ति कुल्हाड़ी) की कहानी है, जो कवयित्री बनना चाहती है. लेकिन उसकी शादी एक सरकारी अफसर नवीन सरकार (तोता रॉय चौधरी) के साथ हो जाती है. इंदु और उसके पति के बीच झगड़े तब शुरू होते हैं, जब नवीन सरकार का साथ  देने लगता है. इंदु इमर्जेंसी के दौरान सरकार के रवैये से ख़ुश नहीं होती है और सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा शुरू कर देती है. फिल्म पिंक में दमदार ऐक्टिंग करने वाली कीर्ति ने एक बार फिर साबित किया है कि वो एक अच्छी ऐक्ट्रेस हैं.

70 के दशक को फिल्म के कलर, मेकअप और कपड़ों के ज़रिए बेहद ही अच्छे तरीक़े से दिखाया गया है. उस दौरान नसबंदी, मीडियाबंदी जैसे मुद्दों को भी दिखाने की कोशिश की गई है.

नील नितिन मुकेश फिल्म का एक सरप्राइज़ पैकेज हैं. अनुपम खेर, तोता रॉय चौधरी ने भी अभिनय का जौहर दिखाया है. सिनेमैटोग्राफी और डायलॉग्स भी फिल्म में आपकी दिलचस्पी बनाए रखेंगे. मधुर भंडारकर का निर्देशन हमेशा की तरह काफ़ी रियल और कमाल का है. 

क्यों देखें फिल्म? 

एक अलग फिल्म देखना चाहते हैं, तो ये फिल्म आपके लिए ही है. मधुर भंडारकर के फैन हैं, तो ये फिल्म आपको निराश नहीं करेगी.

फिल्म-  राग देश

डायरेक्टर-  तिग्मांशु धुलिया  

स्टारकास्ट- कुणाल कपूर, अमित साध, मोहित मारवाह

रेटिंग- 2.5 स्टार्स

पान सिंह तोमर और साहेब, बीवी और गैंगस्टर जैसी फिल्में बनाने वाले तिग्मांशु एक बार फिर एक अलग विषय पर फिल्म ले आए हैं राग देश.

कहानी है साल 1945 की जहां इंडियन नेशनल आर्मी के तीन ऑफिसर- शहनवाज (कुणाल कपूर), गुरबक्श सिंह ढिल्लन (अमित साध) और कर्नल प्रेम सहगल ( मोहित मारवाह ) की जिन पर देशद्रोह का आरोप है और उन पर मुकदमा चलाया जाता है. बीमार वकील भुलाभाई देसाई (केनेथ देसाई) इनका केस लड़ते हैं. ये तीनों देशद्रोह के आरोप से बचते हैं या नहीं, उसके लिए तो आपको ये फिल्म देखनी होगी.

तिग्मांशु धुलिया का डायरेक्शन ज़बरदस्त है.फिल्म को वास्तविकता के क़रीब लाने के लिए उन्होंने कॉस्ट्यूम से लेकर डायलॉग्स तक हर चीज़ पर मेहनत की है. आज़ादी से पहले का सेट हूबहू बनाने में तिग्मांशु सफल रहे हैं. फिल्म के सभी कलाकारों की ऐक्टिंग अच्छी है. फिल्म में एक ही गाना है, जिसे अलग-अलग मौक़ों पर बजाया जाता है.

क्यों देखे ये फिल्म?

देशभक्ति पर यूं तो कई फिल्में बनी हैं, लेकिन इस फिल्म की कहानी थोड़ी अलग है. फिल्म का सब्जेक्ट नया है. आज़ादी से पहले के कई वाक्यों को फिल्म में दिखाने की कोशिश की गई है, इसलिए एक बार आप ये फिल्म देख सकते हैं.

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फिल्म रिव्यूः मुन्ना माइकल और लिपस्टिक अंडर माय बुर्का (Film Review: Munna Michael And Lipstick Under My Burkha)

फिल्मः मुन्ना माइकल

स्टार कास्टः टाइगर श्रॉफ, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, रॉनित रॉय, निधि अग्रवाल
निर्देशकः शब्बीर खान
रेटिंगः 2.5

कहानी
माइकल (रॉनित रॉय) एक बैकग्राउंड डांसर है, जिसे बढ़ती उम्र के कारण डांस छोड़ना पड़ता है. जिस रात उसे काम से निकाला जाता है, उसी रात उसे कचरे में अनाथ बच्चा मुन्ना (टाइगर) मिलता है, जिसे वह घर लेकर आता है और उसका पालन पोषण करता है. मुन्ना माइकल जैक्सन का बड़ा फैन है और उन्हीं के सपने को देखते बड़ा होता है. किंग ऑफ पॉप बनने के सपने को पूरा करने के लिए वह मुंबई से दिल्ली जाता है और वहां एक गुंडे महिन्दर फौजी (नवाजुद्दीन) को डांस सिखाने के लिए तैयार हो जाता है. जल्द ही दोनों की दोस्ती दुश्मनी में बदलने लगती है. जब दोनों को एक ही लड़की दीपिका उर्फ डॉली (निधि) से प्यार हो जाता है.

कमज़ोर स्क्रिप्ट
फिल्म की शुरुआत अच्छी होती है, लेकिन बीच में ही यह अपने प्लॉट से भटक जाती है. फिल्म की स्क्रिप्ट कमज़ोर है और कहानी टिपिकल बॉलीवुड मूवीज़ जैसी है. एक रूटीन स्टोरी की तरह आपको समय-समय पर गाने और फाइटिंग सीन देखने को मिलेंगे. टाइगर अपनी पहली फिल्मों की तरह प्रभावित करने में असफल रहे हैं. नवाजुद्दिन का किरदार रोचक है, जो अपने प्यार को आकर्षित करने के लिए डांस सीखता है. अभिनेत्री निधि अग्रवाल अपनी पहली फिल्म में छाप छोड़ने में असफल रही हैं.

क्या अच्छा?
नवाजुद्दिन, बॉलीवुड के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक, टाइगर के डांस व फिल्म के गाने.

क्या बुरा?
कमज़ोर स्क्रिप्ट व निथि का अभिनय.

जाएं या नहीं?
यदि आप डांस मूव्स के शौकीन हैं तो मुन्ना माइकल देखने जाएं, हालांकि इस फिल्म में वह कुछ नया दिखाने नहीं जा रहे.

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जब हैरी मेट DJ डीप्लो! अमेरिकन डीजे और शाहरुख खान एक ही गाने में 

 

फिल्मः लिपस्टिक अंडर माय बुर्का

स्टार कास्टः कोंकणा सेन शर्मा, रत्ना पाठक, अहाना कुम्रा, प्लाबीता बोर ठाकुर, विक्रांत मैसी, सुशांत सिंह
निर्देशकः अलंकृता श्रीवास्तव
रेटिंगः 3.5

कहानी
लिपस्टिक अंडर माय बुर्का भोपाल में रहनेवाली चार महिलाओं, ऊषा परमार (रत्ना पाठक शाह), रेहाना अबिदी (प्लाबीता बोर ठाकुर), शिरिन असलम (कोंकणा सेन शर्मा) व लीला (अहाना कुम्रा) की कहानी है, जो पड़ोेसी हैं और मिडिल लोअर क्लास एरिया में रहती हैं. रेहाना बुर्का पहननेवाली एक कॉलेज स्टुडेंट है, जो माइली सायरस को पसंद करती है और कॉलेज के बैंड में गाना गाना चाहती है. उसी के पड़ोस में तीन बच्चों की मां शिरिन रहती है, जो सेल्सवुमन का काम करती है, जिसका पति रोज़ उसकी इच्छा के विरुद्ध उससे शारीरिक संबंध बनाता है. लीला एक ब्यूटीशियन है, जो नया बिज़नेस सेट करना चाहती है और उसका अफेयर मुस्लिम फोटोग्राफर विक्रांत मैसी से है. ऊषा परमार (रत्ना पाठक शाह) 55 वर्षीय विधवा महिला है, जिसे सब बुआजी के नाम से जानते हैं, जो समाज के लिए अपनी शारीरिक इच्छाओं को दबा रखा है.

दमदार स्क्रिट
यह फिल्म चार महिलाओं के सपनो व उनकी दबी हुई इच्छाओं की सुंदर कहानी है. यह बेहद ऑनेस्ट फिल्म है, जिसमें चार महिलाओं की ज़िदगियों के बारें में बताया गया है, जो समाज की बेड़ियों में बंधी होने के कारण अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाती हैं. कोई अपनी लाइफ से खुश नहीं हैं. हालांकि चार महिलाएं फिल्म में एक-दूसरे से रिलेटेड नहीं है, लेकिन स्क्रिप्ट इतनी ज़बर्दस्त तरी़के से पिरोई गई है, चारों एक-दूसरे से बंधी हुई लगती हैं.
क्या अच्छा?
सभी किरदारों का अभिनय बेहद उम्दा है. खासतौर पर रत्ना पाठक का किरदार.
क्या बुरा?
कमर्शियल फिल्मों के शौक़ीनों को शायद फिल्म स्लो लगें. संगीत बेहद साधारण है.

जाएं या नहीं?
बॉलीवुड में इस तरह की फिल्में कम बनती हैं, सिनेमा प्रेमियों को यह फिल्म मिस नहीं करनी चाहिए.

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फिल्म रिव्यू: ‘ट्यूबलाइट’ में सलमान खान तो चमके, लेकिन फिल्म नहीं (Movei Review: Tubelight)

Tubelight Review

फिल्म- ट्यूबलाइट

स्टारकास्ट- सलमान खान, सोहेल खान, शाहरुख खान (गेस्ट अपीयरेंस),  स्व. ओमपुरी, झू झू, मातिन रे तंगु, बिजेंद्र काला, मोहम्मद जीशान अयूब, यशपाल शर्मा

निर्देशक- कबीर खान

रेटिंग- 3 स्टार

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ईद का मौक़ा सलमान खान के लिए हमेशा ही लकी साबित होता है. इस बार ईद के मौक़े पर रिलीज़ हुई है सलमान की फिल्म ट्यूबलाइट. कबीर खान के साथ सलमान की ये तीसरी फिल्म होगी. इससे पहले एक था टाइगर और बजरंगी भाईजान दोनों ही फिल्में सुपरहिट साबित हुई हैं. आइए, जानते हैं कि इस बार क्या ईद और कबीर खान का साथ सलमान के लिए लकी साबित होगा?

कहानी

कहानी है लक्ष्मण सिंह बिस्ट (सलमान खान) की, जिसे उसके आसपड़ोस वाले ट्यूबलाइट कहकर बुलाते हैं, क्योंकि वो बातें थोड़ी देर से समझता है. भले ही लोग उसे ट्यूबलाइट बुलाते हों, लेकिन लक्ष्मण का जीवन जीने का एक ही तरीक़ा है कि अपने विश्वास को ज़िंदा रखो, अगर विश्वास कायम है, तो आप जीवन में कुछ भी कर सकते हो, जंग भी रोक सकते हो. लक्ष्मण का भाई है भरत (सोहेल खान), दोनों अनाथ हैं और भारत-चीन बॉर्डर के पास एक गांव में रहते हैं. फिल्म की कहानी साल 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान सेट की गई है. इस दौरान सेना में भर्ती चल रही होती है, भरत भी सेना में भर्ती हो जाता है. भरत को को ये डर रहता है कि उसके चले जाने के बाद लक्ष्‍मण अकेला हो जाएगा, पर फिर भी वो युद्ध में जाने का फैसला कर लेता है. लक्ष्‍मण भाई का इंतज़ार करता है. भरत की कोई ख़बर नहीं आती है, लोगों को लगता है कि अब भरत वापस नहीं आएगा, लेकिन लक्ष्मण का विश्वास उसके साथ है. क्या उस विश्वास के दम पर लक्ष्मण अपने भआई भरत को वापस ले आ पाएगा? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

फिल्म की यूएसपी

फिल्म की यूएसपी हैं सलमान खान. एक नए और अलग अंदाज़ में सलमान को आप देख पाएंगे. पूरी फिल्म उन्ही के आसपास रची गई है. एक बेहद ही स्ट्रॉन्ग संदेश भी है फिल्म में, जिसकी जानने और समझने की ज़रूरत है लोगों को. फिल्म का म्यूज़िक और गाने भी अच्छे हैं, जो दर्शकों को बांधे रखेंगे.

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कमज़ोर कड़ी

फिल्म की कहानी कमज़ोर है. स्क्रिप्ट और स्क्रिनप्ले दोनों ही कमज़ोर है. कबीर खान अपनी पहली दोनों फिल्मों का जादू इस फिल्म में नहीं दिखा पाए हैं. कहीं-कहीं कहानी में कुछ ऐसे सीन्स शामिल किए गए हैं, जिनकी बिल्कुल ज़रुरत नहीं थी फिल्म में. सेकंड हाफ में फिल्म बहुत ही स्लो हो जाती है. अंत में क्या होने वाला है, ये आप पहले ही जान जाएंगे. फिल्म में स्व. ओमपुरी, बिजेंद्र काला, मोहम्मद जीशान अयूब और यशपाल शर्मा जैसे टैलेंट कलाकारों को अपना अभिनय दिखाने का मौक़ा ही नहीं मिला.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

सलमान खान की फिल्मों को देखने के लिए शायद ही फैन्स फिल्म की कहानी के बारे में सोचते होंगे. आप सलमान खाने के फैन हों या ना हो, एक बार उनकी फिल्म को देखना तो बनता ही है. इस बार सलमान एक नए अंदाज़ में नज़र आएंगे. वैसे भी ये फिल्म एक बार देखी जा सकती है. इस बार वीकेंड तीन दिनों का है, शनिवार, रविवार और सोमवार को ईद की छुट्टी को एंजॉय करें इस फिल्म के साथ.

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फिल्म रिव्यू: ‘राबता’ की कहानी है फीकी, ‘बहन होगी तेरी है’ मज़ेदार फिल्म (Movie Review: Raabta And Behan Hogi Teri)

Raabta Review

फिल्म- राबता

स्टारकास्ट- सुशांत सिंह राजपूत, कृति सेनन, राजकुमार राव

डायरेक्टर- दिनेश विजन

रेटिंग- 2.5 स्टार film-raabta_68d47db4-4b5c-11e7-81ca-1a4d4992589d (1)पुनर्जन्म की कहानी अक्सर लोगों को पसंद आती हैं, लेकिन न्यू जनेरेशन के साथ पुनर्जन्म को जोड़ना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. राबता की कहानी भी पुनर्जन्म पर आधारित है. दिनेश विजन की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म है राबता. आइए, जानते हैं कैसी है ये फिल्म.

फिल्‍म की कहानी शिव (सुशांत सिंह राजपूत) और सारा ( कृति सेनन) के प्यार की, जो पिछले जन्म में अधूरी रह जाती है. शिव एक बैंकर है और नौकरी के लिए वो बुडापेस्‍ट जाता है, जहां उसकी मुलाकात सारा से होती है. दोनों को लगता है उनमें कोई न कोई कनेक्‍शन है. दोनों को प्यार हो जाता है. लेकिन इस प्यार के बीच तीसरा शख़्स आ जाता है. फिर क्या होता है, ये जानने के लिए आपको ये फिल्म देखनी होगी.

सुशांत सिंह राजपूत और कृति सेनन की केमेस्ट्री अच्छी लग रही है. लेकिन फिल्म की कहानी वो कमाल नहीं कर पाई, जिसकी उम्मीद की जा रही थी. फिल्म के कुछ डायलॉग्स दमदार हैं. अगर विजुअल के मुताबिक़ फिल्म की समीक्षा की जाए, तो विजु्ली फिल्म अच्छी लगती है. लेकिन अगर कहानी में ही दम ना हो, तो न गाने काम आते हैं, न विजुअल्स. फिल्म का सेकंड हाफ काफ़ी स्लो है.

खैर कुल मिलाकर देखा जाए, तो अगर इस वीकेंड आप कुछ नहीं कर रहे हैं, तो एक बार ये फिल्म देख सकते हैं. अगर ये फिल्म आपसे मिस भी हो गई, तो कोई ख़ास नुक़सान नहीं होगा आपका.

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फिल्म- बहन होगी तेरी

स्टारकास्ट- राजकुमार राव, श्रुति हसन, रंजीत, गुलशन ग्रोवर

डायरेक्टर- अजय पन्नालाल

 रेटिंग- 3 स्टार
बहन होगी तेरी कॉमेडी फिल्म है. वो कपल्स इस फिल्म से ज़्यादा इत्तेफ़ाक रख पाएंगे, जो एक ही मोहल्ले में बड़े हुए हैं और एक-दूसरे से इश्क करते हैं. आइए, जानते हैं कैसी है फिल्म.
फिल्म की कहानी है लखनऊ के एक ही मोहल्ले में रहने वाले गट्टू (राजकुमार राव) और श्रुति हसन (बिन्नी) की. दोनों पड़ोसी हैं. दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं, लेकिन जैसा होता है, अक्सर एक ही मोहल्ले के लड़के-लड़कियों को भाई-बहन समझा जाता है, वैसा ही कुछ हाल इस फिल्म की कहानी में दोनों का है.
गट्टू पर भी यही प्रेशर है. एक दिन बिन्नी की शादी राहुल (गौतम गुलाटी) के साथ तय कर दी जाती है.  बिन्नी पर नज़र रखने की ज़िम्मेदारी गट्टू को दी जाती है.
अंत में क्या गट्टू आगे आकर बिन्नी के घरवालों से अपनी शादी की बात कर पाता है या राहुल बिन्नी से शादी कर लेता है. इन सारे सवालों का जवाब तब मिलेगा, जब आप ये फिल्म देखेंगे.
कहानी अच्छी है, लेकिन इसे सही तरीक़े से दर्शाने में थोड़ी-सी कमी रह गई है. बात करें अगर अभिनय कि तो राजकुमार राव हमेशा की तरह अपने अभिनय से इस फिल्म में भी दिल जीत लेते है. श्रुति हसन का अभिनय भी अच्छा है.
अगर आप राजकुमार राव के फैन हैं, तो ये फिल्म आप ज़रूर देख सकते हैं.

Film Review: फुल एंटरटेनिंग फिल्म है ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ (Movie Review: Badrinath Ki Dulhania)

Badrinath Ki Dulhania Review

फिल्म- बद्रीनाथ की दुल्हनिया

स्टारकास्ट- वरुण धवन, आलिया भट्ट, गौहर खान, आकांक्षा सिंह, श्वेता वसु प्रसाद और यश सिन्हा.

निर्देशक- शशांक खेतान

रेटिंग- 3.5 स्टार

Badrinath Ki Dulhania Review

हम्टी शर्मा की दुल्हनिया की सीक्वल बद्रीनाथ की दुल्हनिया में एक बार फिर वरुण धवन और आलिया भट्ट की केमेस्ट्री बेहद अच्छी लग रही है. शंशाक खेतान ने फिल्म का निर्देशन किया है और फिल्म के गाने पहले से ही हिट हैं. आइए, जानते हैं कैसी है पूरी फिल्म?

कहानी

झांसी का रहने वाले बद्रीनाथ (वरुण धवन) को चाहिए अपनी मनपसंद की लड़की. उसकी ये ख़्वाहिश पूरी होती है, जब वो पहुंचता है कोटा अपने एक दोस्त की शादी में शामिल होने के लिए. शादी में उसकी मुलाकात होगी है वैदेही (आलिया भट्ट) से. वैदैही एक पढ़ी-लिखी लड़की है. दोनों की सोच एक-दूसरे से काफ़ी अलग है. इसी बीच इनकी कहानी आगे बढ़ती है. बद्री वैदेही से शादी करना चाहता है, लेकिन वह शादी नहीं करना चाहती. क्योंकि उसके अपने कुछ सपने हैं. क्या बद्री को उसकी दुल्हनिया मिल पाएगी? क्या वैदेही शादी करेगी बद्री से. इन सवालों के जवाब पाने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

फिल्म की यूएसपी

रियल लोकेशन्स इस फिल्म की यूएसपी हैं. झासी, कोटा, सिंगापुर में शूट हुई है फिल्म.

दूसरी यूएसपी है फिल्म की कहानी, जो भले ही नई नहीं है, लेकिन मज़ेदार है और दर्शकों को बांधे रखेगी.

फिल्म में गर्ल्स एजुकेशन और जेंडर इक्वलिटी जैसे सोशल मैसेज भी हैं, जिससे आप कनेक्ट कर पाएंगे. पिक्चराइज़ेशन और बैकग्राउड म्यूज़िक कमाल का है.

छोटे शहर में सेट की गई फिल्म की कहानी को ध्यान में रखकर शशांक खेतान ने हर बात का ख़्याल रखा है, चाहे वो फिल्म का पूरा लुक हो या फिर वरुण और आलिया के बोलने का लहजा.

आलिया-वरुण की केमेस्ट्री

इन दोनों की केमेस्ट्री के क्या कहने! एक बार फिर वरुण और आलिया एक साथ धूम मचा रहे हैं. दोनों ही अपने-अपने किरदार में बिल्कुल फिट लग रहे हैं.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

बिल्कुल जा सकते हैं. बद्रीनाथ की दुल्हनिया एंटरटेनमेंट से भरपूर फुल मसाला और पैसा वसूल फिल्म है. वरुण-आलिया की केमेस्ट्री, फिल्म का गाने, रियल लोकेशन्स ये सब कुछ आपको बिलकुल बोर नहीं होने देंगे. होली की छुट्टी के साथ इस तीन दिन लंबे वीकेंड को आप इस फिल्म के साथ एंजॉय कर सकते हैं.

Film Review: फ़ीकी है ‘कॉफी विद डी’ (Movie Review: Coffee with D)

फिल्म- कॉफी विद डी (Coffee with D)

स्टारकास्ट- सुनील ग्रोवर, अंजना सुखानी, पंकज त्रिपाठी, दीपानिता शर्मा

निर्देशक- विशाल मिश्रा

रेटिंग- 1.5 स्टार

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कहानी
कॉफी विद डी कहानी है एक न्यूज एंकर की, जिसका नाम है अर्नब घोष (सुनील ग्रोवर). अपनी नौकरी बचाने के लिए वो अंडरवर्ल्ड डॉन डी (जाकिर हुसैन) का इंटरव्यू करने जाता है. जिसके बाद उसकी लाइफ में क्या-क्या होता है, इस पर आधारित है ये फिल्म.
कमज़ोर कड़ी
फिल्म की कहानी काफ़ी प्रेडिक्टेबल है, इसलिए फिल्म बोरिंग लगने लगती है. विशाल मिश्रा पहली बार फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं, ऐसे में निर्देशन में थोड़ी कमी ज़रूर नज़र आती है.
किसकी ऐक्टिंग में था दम
सुनील ग्रोवर यूं तो अच्छे ऐक्टर माने जाते हैं, लेकिन इस फिल्म में अपनी ऐक्टिंग की छाप छोड़ने में वो कामयाब नहीं हो पाए हैं. डॉन के किरदार में जाकिर हुसैन ठीक ठाक लग रहे हैं. फिल्म के गाने भी फिल्म को संभाल नहीं पाए.
फिल्म देखने जाएं या नहीं
अगर आप सुनील ग्रोवर के फैन हैं, तो चले जाएं फिल्म देखने. लेकिन अगर आप ये फिल्म नहीं भी देख पाते है, तो कोई बड़ा नुक़सान नहीं होगा आपका. वैसे आप चाहें तो फिल्म के टीवी पर आने का भी इंतजार कर सकते हैं.
– प्रियंका सिंह

Film Review: साल की पहली तीन फिल्में रिलीज़ हुईं, बॉक्स ऑफिस पर ओके जानू, हरामखोर और ट्रिपल एक्स! (Film Review: OK Jaanu, XXX: Return of xander cage And Haramkhor)

साल 2017 की पहली तीन फिल्में रिलीज़ हो गई हैं. श्रद्धा कपूर और आदित्य रॉय कपूर की फिल्म ओके जानू, नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी की हरामखोर और दीपिका पादुकोण की बॉलीवुड फिल्म ट्रिपल एक्स: रिटर्न ऑफ ज़ेंडर केज. तीनों ही फिल्में अलग-अलग जॉनर की हैं. dc-Cover-k4um0er2af9v9996mnegh0kv87-20160401122817.Medi (1)

सबसे पहले बात करते हैं ओके जानू की. नए ज़माने की रोमांटिक कहानी है. श्रद्धा कपूर और आदित्य रॉय कपूर की जोड़ी को दर्शकों ने फिल्म आशिक़ी 2 में बेहद पसंद किया था. इस बार भी ये जोड़ी कमाल कर रही है. कहानी ऐसे कपल की है, जो शादी में भरोसा नहीं करते. दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं और अपनी करियर बनाना चाहते हैं. शुरुआत में सब कुछ ठीक रहता है, लेकिन फिर करियर को लेकर दोनों के रिश्ते में प्रॉब्लम शुरू हो जाती है. तो क्या दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया है? क्या वो अपने करियर के लिए एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं? इन सवालों के जवाब आपको फिल्म से मिलेंगे. फिल्म का म्यूज़िक अच्छा है. deepika-padukone-xxx-return-of-xander-cage- (1)अब बात दीपिका पादुकोण और विन डीज़ल की फिल्म ट्रिपल एक्स: रिटर्न ऑफ ज़ेंडर केज की. भारत में ये फिल्म पहले रिलीज़ हुई है. दीपिका की पहली हॉलीवुड फिल्म है, जिसमें उन्होंने कई ख़तरनाक स्टंट्स किए हैं. यह फिल्म ट्रिपल एक्स सीरीज की तीसरी फिल्म है. विन डीज़ल अपनी इस फिल्म को प्रमोट करने भारत आए हैं. दीपिका के लिए एक बार ये फिल्म देखना तो बनता ही है. वैसे भी अगर आप हॉलीवुड फिल्में पसंद करते हैं, तो ये फिल्म ज़रूर देख सकते हैं.filmreview (1) (1)तीसरी फिल्म है नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी की हरामखोर, जो कई दिनों से रिलीज़ का इंतज़ार कर रही थी और अब जाकर रिलीज़ हुई है. स्टूडेंट और टीचर के रोमांस पर बनी है हरामखोर. फिल्म की कहानी मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव से शुरू होती है, जहां एक शादीशुदा गणित के टीचर को उसकी क्लास में पढ़ने वाली 15 साल की लड़की से प्यार हो जाता है. फिल्म की कहानी सुनने में जितनी दिलचस्प लगती है, देखने में उतनी नहीं है, क्योंकि फिल्म की एडिटिंग ठीक से नहीं हुई है, जिसके कारण सीन्स को कनेक्ट करना थोड़ा मुश्किल लगता है. वैसे इस फिल्म को कई फिल्म फेस्टिवल में पसंद किया गया है. नवाजुद्दीन सिद्दीक़ी को न्यूयॉर्क इंडियन फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड भी मिला है.

कुल मिलाकर इस वीकेंड पर तीन फिल्में थिएटर में आपको एंटरटेन करने के लिए तैयार हैं.

– प्रियंका सिंह

Film Review: ‘वजह तुम हो’ को देखने की कई वजहे हैं (Movie Review: Wajah Tum Ho)

Wajah Tum Ho

फिल्म- वजह तुम हो (Wajah Tum Ho)

स्टारकास्ट-  सना खान, गुरमीत चौधरी, शरमन जोशी, रजनीश दुग्गल

निर्देशक- विशाल पांड्या

रेटिंग- 3 स्टार

Wajah Tum Ho

इस शुक्रवार बॉक्स ऑफिस पर अकेली रिलीज़ हुई है वजह तुम हो, जिसका फ़ायदा इस फिल्म को ज़रूर मिल सकता है. कहानी अगर ठीक-ठाक हो, तो फिल्म पैसा वसूल साबित हो जाती है. वजह तुम हो के लिए भी यही कहा जा सकता है. हेट स्टोरी 2 और हेट स्टोरी 3 के निर्देशक विशाल पांड्या की ये फिल्म कैसी है, आइए जानते हैं.

कहानी

फिल्म की कहानी एक मर्डर के आसपास रची गई है, जिसे टीवी पर लाइव दिखाया गया है. इस टीवी चैनल के मालिक हैं रजनीश दुग्गल, जो इस मर्डर के लिए शक के घेरे में हैं. गुरमीत चौधरी और सना खान फिल्म में वकील के किरदार में हैं. शरमन जोशी पुलिस वाले के किरदार में हैं, जो इस केस की जांच करते हैं. इस केस को सुलझाने में कई टि्वस्ट्स एंड टर्न्स आते हैं, जो फिल्म के अंत तक बांधे रखेंगे.

फिल्म की यूएसपी

फिल्म की यूएसपी है फिल्म का थ्रिलर, जो कमाल का है. इसके अलावा सना खान के स्टीमी सीन्स और उनका लुक अच्छा लग रहा है.

शरमन जोशी की डायलॉग डिलीवरी भी पसंद आएगी. साथ ही फिल्म के डायलॉग्स भी दमदार हैं. इसके अलावा फिल्म के गाने, ख़ासकर टाइटल ट्रैक अच्छा है.

क्यों देखें फिल्म?

अगर आपको सस्पेंस और थ्रिलर फिल्में पसंद हैं, तो ये फिल्म एक बार ज़रूर देखी जा सकती है. फिल्म के टि्वस्ट्स एंड टर्न्स आपको बोर नहीं होने देंगे.

 

FILM REVIEW: बैंजो है पैसा वसूल फिल्म (Banjo: worth watching)

फिल्म- बैंजो
स्टारकास्ट- रितेश देशमुख, नर्गिस फाकरी
निर्देशक- रवि जाधव
रेटिंग- 3 स्टार
मराठी फिल्मों के निर्देशक रवि जाधव ने बैंजो फिल्म के ज़रिए बॉलीवुड में कदम रखा है. रवि की ये कोशिश कुछ हद तक कामयाब होती नज़र आ रही है. बैंजो के लिए दर्शकों को अपनी जेब ढीली करनी चाहिए या नहीं, आइए जानते हैं.1
कहानी

लगभग 138 मिनट लंबी इस फिल्म में आपको मुंबई का एक अलग ही रंग नज़र आएगा. रितेश देशमुख फुल मुंबईया अंदाज़ में नज़र आएंगे. नंदकिशोर उर्फ तरात यानी रितेश देशमुख फिल्म में बैंजो प्लेयर बने हैं, जो वहां के एक लोकल नेता के साथ काम करने के अलावा फंक्शन्स में परफॉर्म भी करता है. एक अच्छे बैंजो प्लेयर की तलाश में क्रिस यानी नर्गिस फाकरी न्यूयॉर्क से आती है, ताकि वो गाने रिकॉर्ड करके एक म्यूज़िक कॉम्पटिशन में भेज सके. लेकिन कहानी सिर्फ़ इतनी-सी नहीं है. इसमें कई टि्वस्ट हैं, जिसके लिए आपको थिएटर तक जाना पड़ेगा.8

फिल्म की कमी और यूएसपी
फिल्म में रोमांस, डांस, म्यूज़िक, कॉमेडी हर चीज़ का तड़का है. रितेश देशमुख का लुक और डायलॉग्स आपको ज़रूर पसंद आएंगे. यूं तो फिल्म की शुरुआत ठीक ठाक है, लेकिन फिल्म का सेकंड हाफ ज़्यादा अच्छा है, जो दर्शकों को बांधे रखेगा. विशाल-शेखर का संगीत इस फिल्म की जान है.9फिल्म देखने जाएं या नहीं?

ये फिल्म एक बार देखने जैसी ज़रूर है. अगर आप बैंजो सुनना पसंद करते हैं और रितेश के फैन हैं, तो ये फिल्म आपको निराश नहीं करेगी.

FILM REVIEW: वाह ताज! नहीं है वाह (Film Review: Wah Taj)

फिल्म- वाह ताज!
स्टारकास्ट- श्रेयस तलपड़े, मंजरी फणनिस
निर्देशक- अजीत सिन्हा 
रेटिंग- 1.5 स्टार
फिल्म का नाम और इसका ट्रेलर काफ़ी मज़ेदार था, लेकिन अफ़सोस कि ये हम फिल्म के बारे में नहीं कहा जा सकता. फिल्म बेहद ही बोरिंग है और इसके कॉमेडी सीन्स पर बिल्कुल हंसी नहीं आती है. यह एक अच्छी सटायर फिल्म हो सकती थी, लेकिन न ही कहानी ने और न ही फिल्म के किरदारों ने फिल्म में कोई इंपैक्ट छोड़ा. अक्सर रियल सबजेक्ट पर व्यंगात्मक फिल्म बनाना रिस्की साबित हो सकता है. ऐसा ही कुछ हुआ है वाह ताज के साथ भी.3कहानी

सोचिए ताजमहल पर कब्ज़ा करने के लिए एक महाराष्ट्रियन कपल टैक्टर पर बैठ कर महाराष्ट्र से आगरा पहुंचता है. ये सुनने में जितना अजीब है, उतने ही अजीब तरीक़े से फिल्माया भी गया है. इस फिल्म की कहानी इंट्रेस्टिंग होने की बजाय बोरिंग हो गई है. फिल्म की कहानी में कुछ नयापन नहीं है. एक बिज़नेसमैन के किसानों से ज़मीन छीनने पर जब किसानों का नेता इसका विरोध करता है, तो उसकी हत्या करवा दी जाती है. उस किसान के भाई विवेक (श्रेयस तलपड़े) जो कि विदेश में पढ़ाई कर रहा है, जब उसे ये बात पता चलती है तो वह अपनी गर्लफ्रेंड रिया (मंजरी फणनिस) के साथ गांव आ जाता है और ज़मीन पाने के लिए एक खेल खेलता है. दोनों ताजमहल के कागज़ात जमा करते हैं और तुकाराम व सुनंदा बनकर ताजमहल पर दावा ठोक देते हैं. फिर कहानी कई मोड़ लेती है.2

कमज़ोर कड़ी

पूरी की पूरी फिल्म ही कमज़ोर है. श्रेयस और मंजरी की एक्टिंग ठीक ठाक है, लेकिन दूसरे कलाकारों की ओवरएक्टिंग आपको बोर करेगी. फिल्म में कोर्ट रूम का एक सीन दिखाया गया है, जिसमें जज और वकील के बीच हुई बहस आपको ज़रूर हंसाने में कामयाब होगी.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

ये आप पर निर्भर करता है कि आपको क्या करना है. अगर दूसरी फिल्मों की टिकट्स नहीं मिल रही हैं और आपके पास वीकेंड पर करने को कुछ नहीं है, तो आप इस फिल्म को देखने जा सकते हैं. लेकिन अगर आपको अपने पैसे प्यारे हैं, तो इस फिल्म पर उसे बिल्कुल न खर्च करें.

FILM REVIEW- क्रिश के बाद जट्ट सुपरहीरो पसंद आएगा बच्चों को!

फिल्म- अ फ्लाइंग जट्ट
डायरेक्टर- रेमो डिसूज़ा
रेटिंग- 2 & 1/2 स्टार

देसी सुपरहीरो क्रिश पहले ही सबके दिलों में अपनी जगह बना चुका है. जहां तक बात है विदेशी सुपरहीरोज़ की तो वो तो बच्चों की पहली पसंद में शामिल ही हैं. क्रिश के बाद अब एक और देसी सुपरहीरो मिल गया है बच्चों को.Tiger-Shroff-A-Flying-Jattअ फ्लाइंग जट्ट में टाइगर श्रॉफ़ जट्ट सुपरहीरो बनकर अच्छे लग रहे हैं. हालांकि फिल्म की कहानी में कोई नयापन नहीं है. हमेशा की तरह बुराई और लोगों पर हो रहे ज़ुल्म को ख़त्म करने के लिए एंट्री होती है सुपरहीरो की. चलिए, एक नज़र कहानी पर डालते हैं.

स्टोरी

कहानी शुरू होती है पंजाब की ‘करतार सिंह कॉलोनी’ से, जहां अमन (टाइगर श्रॉफ) अपनी मां (अमृता सिंह) के साथ रहता है. अमन एक स्कूल में मार्शल आर्ट टीचर है. वहीं उसकी मुलाकात कीर्ति (जैकलीन) से होती है और दोनों में प्यार हो जाता है. टाइगर की सुपरहीरो वाली एंट्री तब होती है, जब इंडस्ट्रियलिस्ट मल्होत्रा (के के मेनन) अमन की कॉलोनी को तबाह कर देना चाहता है. इस काम के लिए वो राका (नाथन जोन्स) को बुलाता है. कहानी में टि्वस्ट तब आता है, जब अमन को अपनी शक्तियों का एहसास होता है और वो बन जाता है सुपरहीरो फ्लाइंग जट्ट. अपनी कॉलोनी और शहर के लोगों को बचाने के लिए फ्लाइंग जट्ट, राका से लड़ता है और उसका सफ़ाया कर देता है.

क्या है फिल्म की कमज़ोरी?

फिल्म की सबसे बड़ी कमज़ोरी है इसकी लंबाई. चूंकि कहानी में कोई नयापन नहीं है, इसलिए फिल्म की शुरुवात में ही आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि फिल्म में आगे क्या होने वाला है, ऐसे में कहानी को ज़्यादा लंबा करने की वजह से फिल्म बोरिंग लगने लगती है. फिल्म का क्लाइमेक्स भी निराश करता है, हालांकि इसे दमदार बनाया जा सकता था. इंटरवल से पहले फिल्म अच्छी लगेगी, लेकिन सेकंड हाफ में बोर करेगी.

फिल्म की यूएसपी

जब फिल्म में टाइगर श्रॉफ हों, तो एक्शन तो दमदार होगा ही. फिल्म में दिखाए गए स्टंट्स काफ़ी दमदार हैं.

यह फिल्म कुछ अच्छी बातें भी सिखाएगी, जैसे- कार चलाते वक़्त सीट बेल्ट लगाएं, प्रदूषण से कैसे बचें आदि.

फिल्म की तीसरी यूएसपी है फिल्म का संगीत. इस फिल्म का गाना बीट पे बूटी… हिट गानों की लिस्ट में अपनी जगह बना चुका है. शुरुआत में क्रेडिट लाइन्स के साथ आने वाला गाना चल चलिए… अच्छा है.

एक और बात जो इस फिल्म को ख़ास बनाती है, वो है टाइगर का सुपरहीरो वाला किरदार जिसे रेमो डिसुज़ा ने इंसानों वाला ही टच दिया है. जैसे कि टाइगर को फिल्म में ऊंचाई से डर लगता है और ये डर उसके सुपरहीरो बन जाने के बाद भी बना रहता है.

किसने दिखाया ऐक्टिंग का दम?

टाइगर की तारीफ़ तो हम पहले ही कर चुके हैं. अमृता सिंह का किरदार यक़ीनन आपको पसंद आएगा, वो इस फिल्म की सरप्राइज़ पैकेज हैं. उनकी कॉमिक टाइमिंग कमाल की है. हॉलीवुड ऐक्टर नाथन जोन्स भी विलेन के रोल में अच्छे लग रहे हैं. जैकलिन फर्नांडिस और के के मेनन का काम भी ठीक है.

फिल्म देखें या नहीं? 

अगर आप टाइगर श्रॉफ़ के फैन हैं या सुपरहीरो वाली फिल्में आपको पसंद हैं, तो आप ये फिल्म एक बार देख सकते हैं. लेकिन टाइम की कमी या पैसे ख़र्च न करने की वजह से अगर ये फिल्म आपसे छूट जाती है या आप इस फिल्म को नहीं देख पाएं, तो कोई ख़ास नुक़सान नहीं होगा आपका. जहां तक बात है बच्चों की तो उन्हें सुपरहीरो वाली फिल्में ज़्यादातर पसंद होती हैं, ऐसे में उन्हें ये फिल्म दिखाई जा सकती है.

FILM REVIEW: मज़ेदार फिल्म है ‘ढिशूम’

3रोहित धवन की ‘ढिशूम’ एक हल्की-फुल्की मनोरंजक फिल्म के तौर पर पसंद आ सकती है. सबसे पहले बात कहानी की करते हैं, कहानी में क्रिकेट, ख़ूबसूरत लोकेशन्स और कॉमेडी का तड़का लगा है.
कहानी में क्रिकेट के प्रति दीवानगी से लेकर मैच फिक्सिंग तक के मुद्दों को दिखाया गया है. लेकिन कहानी में लॉजिक की कोई जगह नहीं है. कब, क्यों और कैसे? जैसे सवालों में उलझे बिना अगर आप फिल्म देखें तो इसका भरपूर मज़ा उठा सकते हैं. ढिशूम में आपको वह सब मिलता है, जिसकी उम्मीद लेकर आप कोई भी मसाला फिल्म देखने जाते हैं. जॉन और वरुण का तालमेल कहानी की ढीली पकड़ की कमी को पूरा करता है. कहानी में हालांकि दम नहीं है, लेकिन अरेबियन नाइट्स जैसे लोकेशन्स, बैकग्राउंड में चलता गाना और कॉमेडी परोसती पंच लाइन्स फिल्म को बांधे रखती है. जॉन एक सख्त पुलिस ऑफिसर की भूमिका के साथ न्याय करते नजर आते है. तो वहीं वरुण की कॉमिक टाइमिंग शानदार है. फिल्म में एक चोरनी के किरदार में नज़र आईं जकैलिन फर्नांडिस के पास एक आइटम सॉन्ग और हीरो को लुभाने के अलावा ज़्यादा कुछ करने को नहीं है. लंबे समय बाद विलेन के रूप में अक्षय खन्ना की वापसी शानदार है. फिल्म में अक्षय कुमार एक छोटे, लेकिन अलग किरदार में नजर आते हैं. सुषमा स्वराज के रूप में गढ़ा गया मोना अंबेगांवकर का किरदार प्रभाव छोड़ता है. मोना जितनी देर भी पर्दे पर रहती हैं, बेहतरीन नज़र आती हैं. अभिजीत वघानी का बैकग्राउंड म्युज़िक लुभाता है और प्रीतम का गाना ‘सौ तरह के ..’ फिल्म को दम देता है. मनोरंजन परोसने के चक्कर में फिल्म की कहानी में थ्रिल अपना असर खोता नजर आया. अयानंका बोस की सिनेमैटोग्राफी ऊंचे दर्ज़े की है.

फिल्म का दम यही है कि कमियों के बावजूद यह मनोरंजन करने में कामयाब है. अगर दिमाग़ लगाए बिना केवल मनोरंजन के लिहाज़ से फिल्म देखना चाहें तो फिल्म देखने ज़रूर जाएं.