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मिलिए बॉलीवुड की इन फीमेल विलेन यानी वैंप्स से, जिनके एक्सप्रेशन्स ही होते थे जानलेवा! (Most Evil & Sizzling Vamps Of Bollywood)

 Evil & Sizzling Vamps Of Bollywood
मिलिए बॉलीवुड की इन फीमेल विलेन यानी वैंप्स से, जिनके एक्सप्रेशन्स ही होते थे जानलेवा! (Most Evil & Sizzling Vamps Of Bollywood)

बॉलीवुड की लेडी डॉन कौन है? फीमले विलेन यानी वैंप्स का नाम आते ही बहुत-से चेहरे ख़्यालों में आने लगते हैं. कभी बहू पर अत्याचार करती ज़ालिम सास, तो कभी मेल डॉन का साथ देती हॉट हसीना. आप भी मिलिए इन फीमेल विलेन से, जिनके बिना हर फिल्म अधूरी लगती है.

ललिता पवार: इनके एक्सप्रेशन्स हों या फिर डायलोग बोलने का अंदाज़, हर बात ने इन्हें बेहद फेमस किया. ये बॉलीवुड की सबसे ज़ालिम सास थीं, जो अपनी मासूम बहू पर अत्याचार करके भी लोगों की फेवरेट बन जाती थीं. हालांकि ललिता पवार ने कैरेक्टर रोल्स भी किए, पर उन्हें पॉप्युलैरिटी तो निगेटिव रोल्स ने ही दी. आज भी मंथरा का नाम याद आते ही ललिता पवार का चेहरा सामने घूम जाता है. हिंदी, मराठी और गुजराती मिलाकर कुल 700 से अधिक फिल्मों में काम कर चुकीं ललिता पवार की ज़िंदगी में ट्विस्ट तब आया, जब शूटिंग के दौरान भगवान दादा ने उन्हें ज़ोर से थप्पड़ मार दिया था, जिससे उनकी एक आंख की नस पर असर हुआ और उनकी आंख ख़राब हो गई थी. लेकिन इसके बाद उन्होंने इसे ही अपनी पहचान और मज़बूती बनाकर हर रोल को जीवंत कर दिया और वो बन गईं सबसे ज़ालिम सास. उनके काम के लिए भारत सरकार ने भी उन्हें सम्मानित किया और अमिताभ बच्चन ने भी उनकी 100वीं बर्थ एनीवर्सरी पर ट्वीट करके उन्हें याद किया.

Lalita Pawar

नादिरा: फिल्म आन में लीड एक्ट्रेस के तौर पर अपना फिल्मी सफ़र शुरू करनेवाली नादिरा अपने स्टाइलिश अंदाज़ के लिए जानी जाती हैं. करियर की शुरुआत भले ही उन्होंने हीरोइन के रोल से की, लेकिन उन्हें याद किया जाता है निगेटिव रोल्स के लिए. मुड़-मुड़कर न देख गाना उनका इतना फेमस हुआ कि आज भी यह गाना सुनते ही उनका अंदाज़ याद आ जाता है. नादिरा एक बगदादी जूइश परिवार में जन्मी थीं. उनका मॉडर्न लुक उनकी सबसे बड़ी पहचान था और उनके एक्सप्रेशन्स उनके क़िरदार की जान. श्री 420 से लेकर फिल्म जूली तक उन्होंने कई तरह के रोल्स किए, पर जूली की मां के रोल ने उन्हें अलग पहचान दी.

Nadira

बिंदू: फिल्मों की मोना डार्लिंग आज भी बेहद पॉप्युलर हैं. गुजराती परिवार में जन्मी बिंदू ने वैंप्स की एक नई पीढ़ी की शुरुआत की. बिंदू ख़ूबसूरत थीं, हॉट थीं और अच्छी डान्सर भी थीं. कभी विलेन की गर्लफ्रेंड बनकर, तो कभी सौतेली मां बनकर उन्होंने अपने क़िरदारों को अपने नाम कर लिया. बिंदू के पिता फिल्म प्रड्यूसर ही थे, पर जब वो मात्र 13 साल की थीं, तो उनके पिता की मृत्यु हो गई, जिससे परिवार की ज़िम्मेदारी उन पर आ गई, क्योंकि वो घर में सबसे बड़ी थीं. बिंदू ने कई तरह के क़िरदार किए और अपने टैलेंट के साथ-साथ उन्होंने यह भी साबित कर दिया कि वैंप्स भी हॉटनेस और बोल्डनेस से दर्शकों की फेवरेट बन सकती हैं. फिल्म कटी पतंग में इन्होंने पहली बार सेक्सी ड्रेस में कैबरा किया और वो गाना- मेरा नाम है शबनम सबका हॉट फेवरेट बन गया और बिंदू नई स्टार आयकॉन.

Bindu

अरुणा ईरानी: इन्होंने भी अपने करियर की शुरुआत लीड एक्ट्रेस के तौर पर ही की थी, पर इन्हें दर्शकों ने निगेटिव रोल्स में ज़्यादा पसंद किया. ख़ूबसूरती और टैलेंट की इनमें कमी नहीं थी. अपने परिवार में ये सबसे बड़ी थीं और पैसों की कमी के चलते मात्र छठी क्लास तक ही पढ़ पाईं, पर इनके टैलेंट ने इन्हें स्टारडम के साथ-साथ पैसा और इज़्ज़त भी दिलवा दिया.

Aruna Irani

मनोरमा: चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर ये फिल्मों में आईं. मनोरमा हाफ आइरिश थीं. फिल्म सीता और गीता की चालाक व धूर्त चाची के रूप में लोगों के दिलों में इन्होंने अब तक जगह बनाई हुई है. उनका मेकअप और आंखें मटकाने का ख़ास अंदाज़ उन्हें बाकी वैंप्स से अलग करता था. मनोरमा ने 100 से भी अधिक फिल्मों में काम किया.

Manorama

शशिकला: 100 से भी अधिक फिल्मों में काम कर चुकीं शशिकला के टैलेंट का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र 5 वर्ष की उम्र से ही वो स्टे पर डान्सिंग, सिंगिंग और परफॉर्म करने लग गई थीं. किन्हीं कारणों से उनके पिताजी दिवालिया हो गए थे और वो अपने परिवार को मुंबई ले आए, क्योंकि उन्हें लगता था कि शशिकला की ख़ूबसूरती और टैलेंट उसे फिल्मों में काम दिलवा सकेगा. शुरुआत में स्टूडियो के धक्के खाने पर उन्हें छोटे-मोटे रोल्स मिले, पर एक्ट्रेस नूरजहां से मिलने के बाद उनका नसीब बदल गया. नूरजहां के पति ने शशिकला को अपनी फिल्म में रोल दिया. उसके बाद उन्हें रोल्स भी मिले और पहचान भी.

Sasikala

हेलन: डान्सिंग क्वीन हेलन ने 700 से भी अधिक फिल्मों में काम किया. एक समय था, जब लोग फिल्म इसलिए देखने जाते थे कि उसमें हेलन का डांस नंबर है. ये था उनकी पॉप्युलैरिटी का आलम. हॉट और सेक्सी हेलन ने कई कैरेक्टर रोल्स भी किए और आज की तारीख़ में लोग उन्हें सलमान ख़ान की स्टेप मदर के रूप में अधिक जानते हैं. भारतीय सरकार द्वारा इन्हें पद्मश्री से भी नवाज़ा जा चुका है. हेलन एंग्लो इंडियन पिता और बर्मीज़ मदर के यहां बर्मा के रंगून में पैदा हुई थीं. उनके की मृत्यु पिता वर्ल्ड वार 2 में हो गई थी और वो अपने परिवार के साथ शरण लेने के लिए मुंबई आ पहुंचीं. भारत आने के बाद भी उन्होंने व उनके परिवार ने बहुत बुरे दिन देखे. भूख-ग़रीबी ने उन्हें बेहाल कर रखा था. उनकी मां, भाई व उन्हें 2 महीने तक अस्पताल में रहने व इलाज के बाद नया जीवन मिला. इसके बाद वो कोलकाता गए, पर उनकी मां का वहां देहांत हो गया. परिवार के लिए उन्होंने स्कूल छोड़ फिल्मों का रुख किया और पहले ही ब्रेक ने उन्हें मशहूर कर दिया. जी हां, हावड़ा ब्रिज का गाना मेरा नाम चिन-चिन-चू… बेहद पॉप्युलर हुआ, पर उसके साथ हेलन का डांस और टैलेंट भी सबके सामने आया गया. रील लाइफ में हेलन ने जितनी पॉप्युलैरिटी देखी, अपनी रियल व पर्सनल लाइफ में उतनी ही परेशानियां. आज वो खान परिवार का हिस्सा हैं, क्योंकि सलीम खान ने उन्हें न स़िर्फ फिल्मों में बल्कि पर्सनल लाइफ में भी काफ़ी सपोर्ट किया.

Helen

प्रियंका और काजोल भी कर चुकी हैं निगेटिव रोल्स: प्रियंका चोपड़ा ने ऐतराज़ और सात ख़ून माफ़ में जिस ख़ूबसूरती से निगेटिव क़िरदार निभाया, उनकी अदाकारी का अलग रूप ही सामने आया. देसी गर्ल व़क्त आने पर हॉट वैंप भी बन सकती है और उसमें भी उतनी ही पसंद की जा सकती है, यह उन्होंने साबित कर दिया.

Priyanka
इसी तरह से काजोल ने भी गुप्त में एक सायको किलर का रोल करके सबको चौंका दिया था. काजोल के टैलेंट को लेकर कभी किसी को कोई शक नहीं था, पर वो इस तरह के क़िरदार को भी जीवंत कर सकती हैं, यह किसी ने नहीं सोचा था.

Kajol

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10 अजीब बॉलीवुड फिल्मों के नाम, जिन्हें देखकर आपकी हंसी छूट जाएगी (10 Weird Bollywood Movie Names That Will Make You Laugh)

बॉलीवुड में हर साल अनगिनत फिल्में बनती हैं, पर लोगों की ज़ुबान पर उन्हीं का नाम रहता है, जो बड़े स्टार कास्ट की होती हैं या सुपर हिट होती हैं. इनके अलावा कितनी ही फिल्में ऐसी बनती हैं, जिनका आम लोग नाम भी नहीं सुनते. हम यहां बॉलीवुड की कुछ ऐसी ही फिल्मों के नाम आपको बता रहे हैं, जिन्हें देखकर आपकी भी हंसी छूट जाएगी.

1.  धोती, लोटा और चौपाटी
Weird Bollywood Movie Names
1975 में आई इस फिल्म के हीरो वैसे तो नाज़िर हुसैन थे, पर इस फिल्म में स्टार कास्ट के लिए कुल 28 लोग थे, जिनमें संजीव कुमार, धर्मेंद, महमूद, हेलेन, जगदीप, फरीदा जलाल, ओम प्रकाश, टुनटुन और बिंदू जैसे बड़े स्टासर्र् क़िरदार निभाए थे.
2. सस्ती दुल्हन महंगा दूल्हा
Sasti Dulhan Mahenga Dulha
वर्ष 1986 में आई इस फिल्म में आदित्य पंचोली, महेश आनंद और बीना बैनर्जी जैसे कलाकार थे. इस फिल्म के डायरेक्टर भप्पी सोनी थे.
3. बंदूक दहेज के सीने पर
Bandook Dahej Ke Seene Par
साल 1989 में आई फिल्म के डायरेक्टर रामगोपाल गुप्ता थे. शशि कपूर, सदाशिव अमरापुरकर, गुलशन ग्रोवर, किरण कुमार, रज़ा मुराद, शेखर सुमन, सोनिका गिल और अर्चना पूरन सिंह जैसे कलाकार इस फिल्म की स्टार कास्ट थे.
4. मेहंदी बन गई खून
Mehandi Ban Gai Khoon
जूही चावला और सतीश शाह की स्टार कास्ट वाली इस फिल्म के डायरेक्टर आर.एस गेहलन थे. इस फिल्म का संगीत ऊषा खन्ना ने दिया था.
5. मुर्दे की जान ख़तरे में
murde ki jaan khatre mein
भोजपुरी सुपर स्टार कुनाल सिंह, रोमा मानिक और पैंताल जैसे कलाकारों से बनी यह फिल्म 1985 में आई थी.
6. सोने का दिल लोहे के हाथ
sone ka dil lohe ke haath
1978 में आई इस फिल्म के अभिनेता थे जुबली स्टार राजेंद्र कुमार. उनके साथ इस फिल्म में विद्या सिन्हा, माला सिन्हा, दारा सिंह और अरुणा ईरानी जैसे कलाकार थे. इसके डायरेक्टर नरेश कुमार थे.
7. राजा रानी को चाहिए पसीना

raja rani ko chaiye paseena

1978 की इस बॉलीवुड फिल्म की डायरेक्टर सुलभा देशपांडे थीं. इस फिल्म में सुशांत रे, दुर्गा और जसराज जैसे कलाकार थे.

8. ग्यारह हज़ार लड़कियां
gyara hazar kadkian
भारत भूषण और माला सिन्हा अभिनीत यह फिल्म 1962 में सिनेमाघरों में आई थी. फिल्म के डायरेक्टर केए अब्बास थे. यह एक रोमांटिक सोशल ड्रामा फिल्म थी.
9. भेड़ियों का समूह
bhediyon ka samooh
1991 में आई इस फिल्म के डायरेक्टर एमके शंकर थे. इस फिल्म में शिवाजी साटम, राजश्री पिंगले, गीता नाईक और सुनील चव्हाण जैसे कलाकार थे.

 

10. एक से मेरा क्या होगा
 ek se mera kya hoga
2006 में आई इस फिल्म में समीर कोचर और पायल रोहातगी मुख्य भूमिका में थे. इनके अलावा फिल्म में संगीता तिवारी तन्वी वर्मा और मल्लिका नायर थे. फिल्म के डायरेक्टर टीएलवी प्रसाद थे.

– अनीता सिंह

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अजय देवगन का मास्टर स्ट्रोक- विवादों, क्रिकेट, फिल्मों पर… (Ajay Devgan’s Master Stroke- On Controversies, Cricket, Films…)

अजय देवगन उन कलाकारों में से हैं, जो हर काम सोच-समझकर व योजना के साथ करते हैं. इन दिनों अपनी फिल्म तान्हाजी- अनसंग वॉरियर के प्रमोशन के दरमियान उन्होंने हर मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी, फिर चाहे वो फिल्में हो, क्रिकेट या फिर इन दिनों देश में चल रहे विवाद ही क्यों न हो.

Ajay Devgan

यह उनका मास्टर स्ट्रोक रहा कि जिस विषय में हमें पूरी जानकारी न हो, क्या हो रहा है, क्यों हो रहा है, ऐसे में उसके बारे में कुछ भी कहना ठीक नहीं है. हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है. इससे देश का ही नुक़सान होता है. हमें स्टार्स को लोग सुनते हैं और हमारा अनुसरण करते हैं, इसलिए हमारा हर कदम बहुत सोच-समझकर होना चाहिए. क्योंकि इससे बहुत लोग प्रभावित होते हैं. फैन्स, सोशल मीडिया, कलाकार आदि…

कितना सच व सटीक कहा है अजय देवगन ने. कई बार कितने ही फिल्मी लोग बहकावे में आकार, गुमराह होकर या फिर अपनी अकड़ के कारण ऐसे कई एक्शन-रिएक्शन दे देते हैं, जो उन्हें नहीं देना चाहिए.

इसी संदर्भ में शाइना एन. सी. ने एक बहुत अच्छी बात कही कि एकमात्र हमारा ही ऐसा देश है, जहां विरोधी आसानी से अपने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की आलोचना करते हैं, बहुत कुछ कहते हैं. विरोधी लोग इस आज़ादी का आनंद ज़रूर लें, पर अपनी छल-कपट से भरी गतिविधियों पर भी ज़रूर ध्यान दें…

Ajay Devgan

अजय देवगन ने भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली की तुलना तान्हाजी वीर से भी की. उनका कहना था कि जिस तरह तान्हाजी ने दुश्मनों से जीत के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था, उसी तरह विराट कोहली भी ज़बर्दस्त योद्धा हैं. वे अपने आक्रामक व उम्दा खेल के साथ देश को जीत दिलाने के लिए जी-जान लड़ा देते हैं. साथ ही अजय ने अपने क्रिकेट खेलने के दिनों की यादों को भी साझा किया. वे भी ख़ूब क्रिकेट खेला करते थे. एक बार तो कैच पकड़ते समय उनकी हाथ की उंगली तक टूट गई थी. आज भी उनकी वो उंगली थोड़ी मुड़ी हुई है.

फिल्मों को लेकर भी उन्होंने बेबाक़ी दिखाई. उनके अनुसार, उम्र हो जाने पर उन्हें फिल्में मिलना बंद हो जाए, उससे पहले ही वे एक्टिंग को छोड़ प्रोडक्शन से जुड़ जाएंगे. वैसे भी फिल्मों में आने से पहले उनके पिता वीरू देवगन से उन्होंने फिल्म प्रोडक्शन से जुड़ी बारीक़ियों को सीखा था. वे शेखर कपूर व दीपक शिवदासानी जैसे निर्देशकों के असिस्टेंट भी रह चुके हैं.

Ajay Devgan

सिंघम पार्ट थ्री बनने की तरफ़ भी उन्होंने इशारा किया. जिस तरह सिंबा फिल्म में अंत में अक्षय कुमार के सीन थे और सूर्यवंशी फिल्म के बारे में संकेत दिया गया था. उसी तरह सूर्यवंशी में रणवीर सिंह व अजय देवगन के भी एक्शन सीन हैं और सिंघम 3 के बारे में इशारा किया गया है.

तान्हाजी- द अनसंग वॉरियर की टक्कर दीपिका पादुकोण अभिनीत छपाक और रजनीकांत की दरबार फिल्म से होनेवाली है. इसमें कौन-सी फिल्म बाज़ी मारेगी और आगे निकल जाएगी, वो दो दिन में पता चल जाएगा. वैसे दरबार को थोड़ा फ़ायदा ज़रूर होगा, क्योंकि यह फिल्म दोनों फिल्म के एक दिन पहले यानी गुरुवार को रिलीज़ होनेवाली है.

 

वैसे अजय देवगन की इस फिल्म को लेकर तान्हाजी चैलेंज भी ख़ूब ट्रेंड कर रहा है, जिसमें एक शख़्स दस लोगों को इस मूवी के फ्री टिकट देने के साथ तीन अन्य लोगों को इसका चैलेंज देने के साथ टैग कर रहा है. है ना दिलचस्प अंदाज़. इसमें तजिंदर पाल सिंह बग्गा बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. हमारे तान्हाजी जैसे महान योद्धा के लिए इस तरह का सम्मान प्रशंसनीय है. लंबे समय के बाद अजय देवगन के साथ उनकी पत्नी काजोल भी ख़ास अंदाज़ में फिल्म में नज़र आएंगी. सैफ अली ख़ान ख़लनायक के रूप में ख़ूब जंच रहे हैं. वैसे हमारा चैलेंज तो इस तिकड़ी फिल्म में से आपके नंबर वन फिल्म व पसंद को जानने का रहेगा…

Ajay Devgan

Ajay Devgan

यह भी पढ़ेजेएनयू का दौरा दीपिका पर पड़ा भारी, सोशल मीडिया पर बायकॉट छपाक हो रहा है ट्रेंड (#BoycottChhapaak Trends On Twitter After Deepika Padukone Reaches JNU To Express Solidarity)

रिफ्रेशिंग सारा अली खान का यलो लव! (Sara Ali Khan Proves That Yellow Is The Coolest Colour)

रिफ्रेशिंग सारा अली खान का यलो लव! (Sara Ali Khan Proves That Yellow Is The Coolest Colour)

सारा ने यूं तो फिल्मों में आने से पहले ही काफ़ी सुर्ख़ियां बटोर ली थीं, लेकिन अपनी पहली फिल्म के रिलीज़ के बाद वो बॉलीवुड की फेवरेट बन गईं, क्योंकि वो स़िर्फ ख़ूबसूरत ही नहीं, बल्कि बेहद टैलेंटेड भी हैं. इसके अलावा सारा की एक और बात सबने नोटिस की है कि वो अक्सर यलो कलर में ही स्पॉट की जाती हैं. सारा यलो कलर को ख़ूबसूरती से कैरी करती हैं और यह कलर उनको देता है स्टनिंग और फ्रेश लुक. यहां इन पिक्चर्स में देखिए सारा का यलो लव-

यलो जंप सूट में बहुत ही फ्रेश लग रही हैं सारा.

 

Sara Ali Khan

सिंपल-सी यलो कुर्ती को भी स्टाइलिश मॉडर्न अंदाज़ में ख़ूबसूरती से कैरी किया है.

Sara Ali Khan

ट्रेडिशनल एम्ब्रॉयडरी वाले यलो टॉप को जींस के साथ पेयर करना कोई इनसे सीखे.

Sara Ali Khan

सिंपल, पर एलीगेंट यलो सारी में सारा.

Sara Ali Khan

पफ स्लीव्सवाला सैटिन यलो टॉप वाकई काफ़ी स्टाइलिश लग रहा है.

Sara Ali Khan

ट्रेडिशनल ब्यूटी को सार्थक करतीं सारा इस यलो लहंगा-चोली में बेहद प्यारी और इनोसेंट लग रही हैं.

 

Sara Ali Khan

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कैज़ुअल लुक में भी सारा का यलो लव नज़र आ रहा है.

Sara Ali Khan

यलो ड्रेस में लग रही हैं सारा स्वीट बेबी डॉल.

Sara Ali Khan

गिव में सम सनशाइन… रिलैक्स करते हुए भी सनशाइन इफेक्ट बरक़रार है.

Sara Ali Khan

रील हो या रियल लाइफ सारा का यलो लव सब जगह नज़र आ ही जाता है.

Sara Ali Khan

स्वीट, सिंपल और गॉर्जियल सारा को बेहद सूट करता है ये कलर.

Sara Ali Khan

ग्लैमरस अदाओं में भी इस रंग का असर आ रहा है नज़र.

Sara Ali Khan

 

टीम में भी यलो में सारा सबसे हसीं, सबसे जुदा लग रही हैं.

Sara Ali Khan

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अक्षय कुमार- हमें नहीं भूलना चाहिए कि पैरेंट्स भी बूढ़े हो रहे हैं… (Akshay Kumar- We Should Not Forget That Parents Are Getting Old Too…)

Akshay Kumar

अक्षय कुमार (Akshay Kumar) फैमिलीमैन फिल्म स्टार के रूप में जाने जाते हैं. हाल ही में उनकी फिल्म मिशन मंगल ने कामयाबी के आसमान को छूते करो़ड़ों का आंकड़ा पार कर लिया. ड्रीमगर्ल और वॉर फिल्मों से भी उसे कड़ी टक्कर मिलती रही. जल्द ही उनकी हाउसफुल फिल्म की चौथी कड़ी यानी हाउसफुल 4 और गुडन्यूज़ आनेवाली है. मनोरंजन से भरपूर मल्टी स्टारर हाउसफुल द को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है. गुडन्यूज़ भी अपने नए कॉन्सेप्ट के कारण लोगों में दिलचस्पी जगा रही है. ऐसे में अक्षय कुमार बाला चैलेंज भी ख़ूब सूर्ख़िया बटोर रहा है. आए दिन स्टार्स इससे जुड़ रहे हैं. सबसे अधिक आयुष्मान खुराना और वरुण धवन यह चैलेंज लोगों ने पसंद किया. आइए, अक्षय कुमार की फिल्मों, परिवार, फैन व सेहत से जुड़ी बातों को संक्षेप में उन्हीं से जानते हैं.

 

Akshay Kumar

अक्षय कुमार पृथ्वीराज पर…  

सम्राट पृथ्वीराज चौहान के मूल्यों व बहादुरी से मैं हमेशा प्रभावित रहा हूं. मैं ख़ुद को ख़ुशक़िस्मत मानता हूं कि मुझे इस ऐतिहासिक क़िरदार को निभाने का मौक़ा मिल रहा है. सच, अपने जन्मदिन पर यशराज के बैनर तले बननेवाली इस फिल्म पृथ्वीराज का ऐलान करते हुए मुझे बेइंतहा ख़ुशी हुई थी. जल्द ही इसकी शूटिंग शुरू होनेवाली है.

Akshay Kumar

लंदन की गलियों में मां को व्हील चेयर पर बैठाकर पैदल घुमाते हुए…

लंदन में शूटिंग के बिज़ी शेड्यूल से समय निकालकर मॉम को लंदन की सैर करवाना बहुत अच्छा लगा. इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप ज़िंदगी में कितना आगे बढ़ रहे हैं, पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पैरेंट्स भी बूढ़े हो रहे हैं, इसलिए उनके साथ कुछ व़क्त ज़रूर बिताएं, जो आप कर सकते हैं. मैं अक्सर अपने व्यस्त कामों से समय निकालकर मां के साथ समय बिताता हूं. मुझे अच्छा लगता है और इससे संतुष्टि भी मिलती है.

Akshay Kumar

क्रेज़ी फैन प्रभात, जो द्वारका (गुजरात) से पैदल चलकर उन्हें मिलने मुंबई आया…

किसी भी स्टार का फैन होना अच्छी बात है, पर इसके लिए अपनी जान जोख़िम में डालना ठीक नहीं है. आप इतनी दूर से पैदल चलकर आए हो, रास्ते में हाइवे आदि पर कुछ भी हो सकता था. युवाओं व अपने फैन्स को कहना चाहूंगा कि वे अपना क़ीमती समय व एनर्जी अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाने और अपने लक्ष्य को पूरा करने में लगाएं. वे ऐसा करेंगे, तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी.

Akshay Kumar With His Kids

स्टार किड्स को लेकर मीडिया का रवैया…

21 साल की उम्र से छोटे किसी भी शख़्स के बारे में ग़लत या बेकार की बातें लिखना ग़ैरक़ानूनी कर देना चाहिए. किसी को दुखी करने, मज़ाक उड़ाने, शर्मिंदा करने में कइयों को बहुत आनंद आता है. कई स्टार किड्स के साथ ऐसा होता है. पैरेंट्स के रूप में मैं बच्चों को इतना ही समझा सकता हूं कि इस तरह की बातों को दिलोदिमाग़ पर न लें.

Akshay Kumar

अपने बच्चों का लाइमलाइट से दूर रहना…

मेरे बच्चे लाइमलाइट से दूर रहते हैं. मेरी बेटी नितारा, जो छह साल की है, वो हमारे साथ फैमिली डिनर या कहीं भी इसलिए नहीं आती कि उसे कैमरे की फ्लैश लाइट पसंद नहीं है. मैं मानता हूं कि स्टार होने के बाद मीडिया का अटेंशन होना आम बात है, पर बच्चों को उनकी प्राइवेसी भी तो मिलनी ज़रूरी है.

Akshay Kumar With His Son

बेटे आरव के जन्मदिन पर…

एक चीज़, जो मैंने अपने पिता से सीखी थी कि यदि मैं कभी भी मुश्किल में फंसा, तो मैं उनसे डरने की जगह उन पर पूरी तरह से भरोसा कर सकता हूं और निर्भर रह सकता हूं. आज जब बेटे आरव के मोबाइल पर स्पीड डायल में अपना नंबर देखता हूं, तो मुझे लगता है कि मैं भी सही परवरिश कर रहा हूं.

मैं हमेशा तुम्हें गाइड करता रहूंगा और तुम्हारे साथ रहूंगा. हैप्पी बर्थडे आरव…

Akshay Kumar

फिटनेस सीक्रेट…

मेरे फिट रहने का राज़ है- घर का बना भोजन, समय पर खाना-सोना, पर्याप्त पानी पीना व एक्सरसाइज़ करना. साथ ही अपनी उम्र को छुपाने के लिए कोई भी प्रोडक्ट्स लेना या कुछ अलग करने की कभी कोशिश न करना. मैं व एथलीट हिमा दास इसका बेहतरीन उदाहरण हैं कि आपको अच्छा दिखने व विजेता होने के लिए किसी सप्लीमेंट या स्टेरॉइड की ज़रूरत नहीं है. वैसे भी फिटनेस में कभी भी शॉर्टकट नहीं अपनाएं. इसके लिए जो तरीक़ा है, थोड़ा मुश्किलोंभरा है, पर वही सही है. यदि हम शॉर्टकट करते हैं, तो ज़िंदगी भी शॉर्ट यानी छोटी हो जाती है. याद रहे, हम जो खाते हैं, वैसे ही हम बनते हैं. हमें अपने शरीर के साथ ईमानदारी रखनी चाहिए. मैं दो बच्चों का पिता हूं, इस उम्र में भी ख़ुद को हमेशा फिट रखता हूं. एक ही ज़िंदगी है, उसे तरी़के से जीएं. सभी अपना ख़्याल रखें.

Akshay Kumar

आनेवाली फिल्में…

मैं यह कह सकता हूं कि आनेवाली मेरी हर फिल्म आपको चौंकाएगी, जैसे- लक्ष्मी बम, गुड न्यूज़, सूर्यवंशी, हाउसफुल 4, पृथ्वीराज. वैसे भी हाउसफुल की हर पार्ट को लोगों ने ख़ूब पसंद किया, इसलिए मुझे यक़ीन है कि हाउसफुल 4 भी लोगों का ख़ूब मनोरंजन करेगी. अच्छी बात यह भी है कि यह त्योहार पर यानी दिवाली; के समय रिलीज़ हो रही है, इसलिए यक़ीनन लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स भी मिलेगा. सभी को दीपावली की शुभकामनाएं.

– ऊषा गुप्ता

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फिल्म समीक्षा: लाल कप्तान, घोस्ट- कई फिल्में, अलग-अलग अंदाज़… (Movie Review: Lal Kaptaan, Ghost…)

आज प्रतिशोध, डर, प्यार-रोमांस, उलझते रिश्ते, खेल इन तमाम विषयों से जुड़ी कई फिल्में रिलीज़ हुईं. जहां दर्शक इंसानी फ़ितरत, एहसास के समंदर, भूत की दहशत, जात-पात के मकड़जाल इन तमाम स्थितियों से रू-ब-रू होते हैं. रिलीज़ फिल्मों की इस फेहरिस्त में है- लाल कप्तान, घोस्ट, प से प्यार फ से फरार, याराम, जंक्शन वाराणसी और क्रिकेट.

Lal Kaptaan and Ghost

लाल कप्तान- सैफ अली ख़ान अभिनीत इस फिल्म के पोस्टर, ट्रेलर को लोगों ने ख़ूब पसंद किया था और उन्हें सैफ के जटाधारी अघोरी के अवतार को देखते हुए इसका बेसब्री से इंतज़ार भी था. 17-18 वीं शताब्दी के समय की कहानी है. अंग्रेज़ों का राज, मराठे, नवाब, रुहेलखंडी, निजाम की आपसी लड़ाई व रंजिश के ताने-बाने के साथ प्रतिशोध, रहस्य-रोमांच से भरपूर है लाल कप्तान. यदि आप पीरियड फिल्म देखना पसंद करते हैं और सैफ के फैन हैं, तो एक बार फिल्म ज़रूर देखें. निर्देशन नवदीप सिंह ने इसे हॉलीवुड फिल्मों के अंदाज़ में बनाने की कोशिश की है, जिसमें वे सफल भी रहे हैं. सैफ तो प्रभावित करते ही हैं, साथ ही सोनाक्षी सिन्हा, मानव विज, दीपक डोबरियाल, ज़ोया हुसैन, सिमोन सिंह ने भी अपने क़िरदार के साथ न्याय किया है.

Ghost

घोस्ट- विक्रम भट्ट तो हॉरर मूवी स्पेशलिस्ट बन गए हैं. राज़, 1920 जैसी बेहतरीन डरावनी फिल्में उन्होंने बनाई है और अब घोस्ट लेकर आए हैं. वासु भगनानी की भूत की यह फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है, जो लोगों को डराती है, तो रोमांचित भी करती है. पति पर अपनी पत्नी के क़त्ल का इल्ज़ाम है, जबकि उसका कहना है कि वो उसने नहीं किया, बल्कि भूत द्वारा उससे करवाया गया है. शिवम भार्गव व शनाया ईरानी ने अपनी पहली ही फिल्म में प्रभावशाली अभिनय किया है.

Lal Kaptaan

 

प से प्यार फ से फरार- यह फिल्म प्यार को लेकर जाति की दीवार पर कटाक्ष करती है. आए दिन इस पर खाप पंचायत का फरमान में देखने-सुनने मिलता है. जहां ऊंची जाति की लड़की व छोटी जाति के लड़के का प्रेम जाति-बिरादरी को पसंद नहीं आता. इसे लेकर हिंसा, ख़ून-ख़राब आम-सी बात हो गई लगती है. इसमें सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया गया है. मनोज तिवारी के निर्देशन में जिमी शेरगिल, कुमुद मिश्रा, भावेश कुमार, संजय मिश्रा, ज्योति सिंह, बृजेंद्र काला, गिरीश कुलकर्णी ने ठीकठाक काम किया है.

#Yaaram

 

 

यारम- ट्रिपल तलाक़, दोस्ती, दोस्त की पत्नी से लगाव, फिर हर रिश्ते में उलझन से घिरी है फिल्म यारम. प्रतीक बब्बर, इशिता राज, सिद्धांत कपूर, अनीता राज, दिलीप ताहिल, शुभा राजपूत सभी के अभिनय को देख ऐसा लगता है, जैसे सभी को फिल्म को जैसे-तैसे पूरी करनी की जल्दी थी. उस पर निर्देशक ओवैस ख़ान ने गंभीर विषय को हास्यस्पद बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी.

Junction VaranasiKirket

इसी के साथ जंक्शन वाराणसीक्रिकेट फिल्म भी प्रदर्शित हुईं. एक में भोजपुरी क्रिकेट व भुखमरी से लड़ते संघर्ष को दिखाया गया है, तो  धीरज पंडित निर्देशित जंक्शन वाराणसी, जिसकी शूटिंग उत्तर प्रदेश के भदोही के पिपरी गांव में हुई है, अपना आंशिक प्रभाव ही छोड़ पाती है. देव शर्मा, जरीना वहाब, अंजन श्रीवास्तव, अंजलि अबरोल ने अपनी भूमिकाओं के साथ खानापूर्ति की है.

व्यूवर्स अलर्ट: आज रिलीज़ हुई इन सभी फिल्मों में से लाल कप्तान, घोस्ट और कुछ हद तक प से प्यार फ से फरार ही आपका मनोरंजन कर सकते हैं. अन्य बस समय बिताने के लिए कुछ न होने की स्थिति में देखा जा सकता है.

Lal Kaptaan and Ghost Reviews

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बॉलीवुड की इन फिल्मों ने बनाया करवा चौथ को और भी रोमांटिक, देखें गाने (Karwa Chauth In Bollywood Movies)

शायद ही कोई ऐसा त्योहार हो, जिसे बॉलीवुड ने सेलिब्रेट न किया हो. हर त्योहार को और भी ख़ास बनाते हैं बॉलीवुड के ये फिल्मी गाने. पिछले कुछ सालों में बॉलीवुड की कई फिल्मों में करवा चौथ को बहुत ही रोमांटिक तरी़के से फिल्माया गया है. इन सीन और गानों का इतना असर है कि पहले के मुकाबले अब ज़्यादा महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं. उन्हें लगता है कि अपने पति से प्यार के इज़हार का ये सबसे ख़ूबसूरत तरीक़ा है. करवा चौथ को फिल्मों में बहुत ही ख़ूबसूरती से दर्शाया गया है. इस करवा चौथ, आप भी अपने पार्टनर के साथ आप भी देखें बॉलीवुड के ये ख़ूबसूरत गाने और सीन.

दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे

यश राज बैनर तले बनी यह पहली फिल्म थी, जिसने करवा चौथ सेलिब्रेशन्स को फिल्मी दुनिया में ख़ास जगह दी. काजोल का शाहरुख के लिए व्रत रखना और छत पर दोनों को एक-दूसरे को खाना खिलानेवाले सीन ने बहुत-से जोड़ों को व्रत रखने के लिए प्रोत्साहित किया. यह शाहरुख का ही जादू है कि आज भी बहुत-से पति अपनी पत्नियों का साथ देने के लिए करवा चौथ का व्रत रखते हैं. प्यार जब दोनों को है, तो भला दूसरा इज़हार से पीछे कैसे रहे.
इस फिल्म का डायलॉग- ‘सिमरन, देखो चांद आ गया’ और काजोल का आईने में ख़ुद को देखना काफ़ी रोमांटिक लगता है.

कभी ख़ुशी कभी गम

करण जौहर की फिल्म कभी ख़ुशी कभी गम में करवा चौथ के पारंपरिक रीति-रिवाज़ों को भी बख़ूबी दिखाया गया. सास का अपनी बहू को सरगी देना और करवा चौथ की पार्टी की धूम इस फिल्म में देखने को मिलती है. इंडिया ही नहीं, दूसरे देशों में रहनेवाले भारतीय भी किस तरह करवा चौथ जैसे त्योहार को बढ़-चढ़कर सेलिब्रेट करते हैं. काजोल और शाहरुख की रोमांटिक जोड़ी के साथ करीना और रितिक की स्पेशल केमिस्ट्री बोले चूड़ियां गाने में देखने को मिली. आप भी देखें ये ख़ूबसूरत गाना.

बागबान

अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की जोड़ी को दर्शक बहुत ज़्यादा पसंद करते हैं. यही वजह है कि डायरेक्टर-प्रोड्यूसर्स भी इन्हें साथ लाने की पूरी कोशिश करते हैं. फिल्म बागबान में एक बार फिर बिग बी और ड्रीम गर्ल का वही करिश्माई जादू देखने को मिला. रिटायरमेंट के बाद अपने पार्टनर के साथ समय बिताने का ख़्वाब देखनेवाले पति-पत्नी को बच्चे अपनी ज़रूरतों के मुताबिक अलग कर देते हैं. एक-दूसरे को दिलो जान से चाहनेवाले पति-पत्नी जब इस उम्र में बिछड़ते हैं, तो उनकी तड़प कैसी होती है, इसे बेहद ख़ूबसूरती से दर्शाया गया है. अपने पार्टनर की भावनाओं का ख़्याल रखना ही तो करवा चौथ का असली मतलब है. इस फिल्म का गाना ‘मैं यहां तू वहां, ज़िंदगी है कहां’ देखकर आज भी लोगों की आंखों में आंसू आ जाते हैं.

हम दिल दे चुके सनम

डायरेक्टर संजय लीला भंसाली को फेस्टिवल्स से कितना प्यार है, यह उनकी फिल्मों में ख़ूब झलकता है. इस फिल्म में भी उन्होंने करवा चौथ के पहले और बाद की रस्मों को दिखाया है. इस फिल्म का गाना ‘चांद छुपा बादल में’ आज भी करवा चौथ के सेलिब्रेशन में ज़रूर बजता है. सलमान ख़ान और ऐश्‍वर्या राय की रोमांटिक केमिस्ट्री ने इस गाने में यकीनन जान डाल दी है. इस करवा चौथ अपने पार्टनर के साथ यह गाना ज़रूर सुनें औैर एंजॉय करें.

इश्क-विश्क

अमृता राव और शाहिद कपूर की ख़ूबसूरत केमिस्ट्री ने यंगस्टर्स को उनका दीवाना बना दिया था. फिल्म कॉलेज स्टूडेंट्स में बहुत ज़्यादा पॉप्युलर हुई थी. फिल्म में शाहिद और अमृता का करवा चौथ सीन भी काफ़ी मज़ेदार है. अमृता का पूरी शिद्दत से व्रत रखना शाहिद को छू जाता है. दोनों स्टार्स की मासूम प्रेम कहानी उनके फैंस को ख़ुश कर देती है. दोस्ती के रिश्ते का प्यार में बदल जाने का एहसास फिल्म में दिखाया गया है, जो आज भी यंगस्टर्स की फेवरेट है. 21वीं सदी की लड़कियों को भी अपने रीति-रिवाज़ों से कितना लगाव है, यह अमृता को देखकर समझा जा सकता है. इस फिल्म का करवा चौथ सीन आप भी कभी भूल नहीं पाएंगे.

– अनीता सिंह

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कपिल देव, लक्ष्मी अग्रवाल, गुंजन सक्सेना, मां शीला आनंद पर बन रही हैं फिल्में, देखें बॉलीवुड की 8 आगामी बायोपिक्स (8 Upcoming Bollywood Films Based On Biopics)

Upcoming Bollywood Films Based On Biopics

बॉलीवुड में इन दिनों बायोपिक्स की बहार है. हाल ही में हमने संजू, नीरजा, दंगल, एम एस धोनी, मेरी कॉम जैसी बेहतरीन बायोपिक्स देखी और आज बॉलीवुड में ऐसी फिल्में बनाना ट्रेंड सा बन गया है.  और हो भी क्यों न, ऐसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कमाई भी तो अच्छी करती हैं. फिक्शन और नॉन-फिक्शन के बीच उलझे फिल्म मेकर्स के लिए बायोपिक एक बेहतरीन ऑप्शन के रूप में सामने आया है. इस समय बॉलीवुड में कई बायोपिक्स पर काम चल रहा है. कुछ की शूटिंग चल रही है, तो कुछ की स्क्रिप्टिंग. हालांकि सभी फिल्मों का काम ज़ोरों पर है, क्योंकि फिल्म मेकर्स भी ट्रेंड पुराना हो जाने से पहले अपनी फिल्मों को रिलीज़ कर अच्छी कमाई कर लेना चाहते हैं. कौन-कौन सी फिल्में हैं इस कतार में आइए आपको बताते हैं.

1. 83

83

1983 में भारत की ऐतिहासिक क्रिकेट वर्ल्ड कप जीत पर आधारित यह फिल्म हमें कपिल देव के जीवन से भी रूबरू कराएगी. इस फिल्म में रणवीर सिंह कपिल देव का किरदार निभा रहे हैं. और मज़े की बात तो यह है कि दीपिका पादुकोण कपिल की पत्नी का रोल कर रही हैं यानी बॉलीवुड का यह हॉट कपल रील लाइफ में भी कपल की भूमिका निभा रहा है. कबीर ख़ान के डायरेक्शन में बन रही यह फिल्म 10 अप्रैल, 2020 को सिनेमाघरों में देखने को मिलेगी.

83

2. छपाक

Chhapaak

एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन पर आधारित इस फिल्म में एसिड अटैक से जूझने की लक्ष्मी की कहानी को दीपिका पादुकोण सबके सामने सामने लाएंगी. लक्ष्मी पर एसिड अटैक तब हुआ था, जब वो महज़ 15 साल की थीं और बुक स्टोर जा रही थीं. मिर्ज़ापुर फेम विक्रांत मेसी इस फिल्म में उनके पति की भूमिका निभा रहे हैं. यकीनन लक्ष्मी की कहानी सभी के लिए प्रेरणादायक होगी, तभी तो लोगों को इस फिल्म का बेसब्री से इंतज़ार है. यह फिल्म भी 10 जनवरी, 2020 को रिलीज़ होगी.

Chhapaak

3. गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल

Gunjan Saxena - The Kargil Girl

1999 में कारगिल की लड़ाई के दौरान देश की पहली महिला पायलट गुंजन सक्सेना ने जिस बहादुरी के साथ जवानों को वहां से निकालकर उनकी जान बचाई थी, वह वाकई काबिले- तारीफ़ है. पर बहुत से लोग गुंजन सक्सेना को नहीं जानते, इसीलिए फिल्म मेकर्स ने यह फिल्म बनाकर उनकी बहादुरी के जज़्बे को दिखाने का निर्णय लिया. फिल्म में जहां जाह्नवी कपूर गुंजन सक्सेना का किरदार निभा रही हैं, वहीं पंकज त्रिपाठी उनके पिता, नीना गुप्ता उनकी मां और अंगद बेदी उनके भाई के रोल में नज़र आएंगे. यह फिल्म 13 मार्च, 2020 को रिलीज़ होगी.

Gunjan Saxena - The Kargil Girl

4. फील्ड मार्शल मानेक शॉ

Field Marshal Manek Shaw

वर्सेटाइल एक्टर विकी कौशल एक बार फिर एक नए अंदाज़ में नज़र आएंगे. फील्ड मार्शल सैम मानेक शॉ भारत के पहले फील्ड मार्शल थे. प्यार से लोग उन्हें सैम बहादुर भी बुलाते थे. लेकिन इस फिल्म के लिए दर्शकों को थोड़ा इंतज़ार करना होगा, क्योंकि यह फिल्म 2021 में आपको देखने को मिलेगी.

Field Marshal Manek Shaw

5. मां आनंद शीला पर बायोपिक

Biopic on mother Anand Sheela

देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा बनेंगी मां आनंद शीला. ओशो का दाहिना हाथ मानी जानेवाली मां आनंद शीला की लोकप्रियता हाल ही तब बढ़ी, जब नेटफिल्क्स ने डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ वाइल्ड वाइल्ड कंट्री रिलीज़ की. अमेरिकन डायरेक्टर बैरी लेविन्सन यह प्रोजेक्ट हैंडल कर रहे हैं. फिल्म अभी प्री-प्रोडक्शन स्टेज पर है.

Biopic on mother Anand Sheela

6. पी वी सिंधू पर बायोपिक

Biopic on PV Sindhu

जब 24 वर्षीया पीवी सिंधू ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता, तो पूरे देश में बस सिंधू की चर्चा थी. ऐसा माना जा रहा है कि पीवी सिंधू का रोल दीपिका पादुकोण निभाएं. दीपिका फिल्म मेकर्स की पहली चॉइस इसलिए हैं कि वो राष्ट्रीय स्तर बैडमिंटन खेल चुकी हैं. इस फिल्म को एक्टर सोनू सूद प्रोड्यूस कर रहे हैं.

7. सायना नेहवाल पर बायोपिक

Biopic on PV Sindhu

वर्ल्ड क्लास बैडमिंटन प्लेयर सायना नेहवाल पर फिल्म बन रही है. पहले श्रद्धा कपूर इसमें सायना नेहवाल का किरदार निभानेवाली थीं, पर हाल ही में मिली ख़बरों के मुताबिक परिणिती चोपड़ा यह रोल करेंगी.

8. मिथाली राज पर बायोपिक

Biopic on Mithali Raj

इंडियन वुमन क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिथाली राज इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज़्यादा रन बनानेवाली महिला क्रिकेटर हैं. वह एक दिवसीय क्रिकेट में 6000 रन बनानेवाली पहली हैं. लगातार सात एक दिवसीय क्रिकेट मं हाफ सेंचुरी बनाने का गौरव भी उन्हें प्राप्त है. मिथाली राज का ये दमदार किरदार तापसी पन्नू निभाएंगी.

इसके अलावा पीटी ऊषा पर बायोपिक बननेवाली है, जिसमें कैटरीना कैफ को लेने की बात कही जा रही है. साथ ही भारत के टॉप बैडमिंटन प्लेयर और कोच गोपीचंद फुलेला की जीवनी पर भी फिल्म बनाने का काम शुरू हो चुका है. इनके अलावा कारगिल की लड़ाई में शहीद हो चुके कैप्टन बत्रा पर बननेवाली फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी लीड रोल में हैं. साथ ही बास्केटबॉल प्लेयर सतनाम सिंह भामरा पर फिल्म बननेवाली है, जिसमें शायद अभिषेक बच्चन को लिया जाए.

– अनीता सिंह

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जन्मदिन मुबारक हो शबाना आज़मी: बेबाक़, बिंदास व बेहतरीन अदाकारा (Happy Birthday Shabana Azmi: Excellent Actress)  

बहुमुखी प्रतिभा की धनी शबाना आज़मी का आज जन्मदिन है. वे अपने बेहतरीन अभिनय, बेबाक़ राय और बिंदास अंदाज़ के लिए जानी जाती हैं. पिछले चार दशक से उनका फिल्मी सफ़र कई ख़ूबसूरत पड़ावों को पार करता हुआ अनवरत चल रहा है. सशक्त अदाकारी से उन्होंने हर किसी को प्रभावित किया है.

Shabana Azmi

* शबाना आज़मी मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मनोविज्ञान में ग्रेज्युट हैं. शायद उनकी इसी पढ़ाई का प्रभाव उनके दमदार अभिनय में भी देखने को मिलता है.

* शबानाजी अपने सशक्त अभिनय और बहुमुखी क़िरदारों को प्रभावशाली अंदाज़ में निभाए जाने के लिए जानी जाती हैं. तभी तो अपनी पहली ही फिल्म अंकुर में राष्ट्रीय पुरस्कार उन्होंने जीता था.

* उसके बाद तो उन्होंने कई फिल्मों के लिए नेशनल अवॉर्ड्स जीते, जिनमें विशेष तौर पर अर्थ, खंडहर, पार हैं.

* शबानाजी के पिता कैफ़ी आज़मी जाने-माने शायर रहे हैं. उन्हीं से लेखनी का सबक सीखने जावेद अख़्तर शबानाजी के घर आया करते थे, तभी ही दोनों एक-दूसरे के प्रति आकर्षित हुए.

Shabana AzmiShabana Azmi

* लेकिन उनका पहला क्रश हैंडसम-चार्मिंग शशि कपूर थे. दरअसल, पृथ्वीराज कपूर कैफ़ी आज़मी के पड़ोस में रहते थे और अपने पिता से मिलने शशि कपूर अक्सर वहां आया करते थे.

* शबानाजी उनकी इस कदर दीवानी थीं कि एक बार तो उन्होंने उनकी फोटो पर शशिजी का आटोग्राफ भी ले लिया.

* वैसे उनकी दिली तमन्ना उनके साथ बहुत काम करने की थी, पर वे एकमात्र फकीरा फिल्म में ही उनके साथ काम कर पाईं.

* शशि कपूर के अलावा उन्हें शेखर कपूर पर भी क्रश था, पर क़िस्मत ने जीवनभर का साथ जावेद अख़्तर के साथ जोड़ा था.

Shabana AzmiShabana AzmiShabana Azmi

* शबानाजी अपने बिंदास रोल के लिए भी काफ़ी जानी जाती रही हैं. फिर चाहे फिल्मी करियर की शुरुआती दौर में मंडी फिल्म का बोल्ड सीन हो या फिर समलैंगिकता पर फायर मूवी.

* व्यक्तिगत ज़िंदगी हो या फिल्में शबानाजी ने हर भूमिका के साथ न्याय किया. तभी तो जावेद साहब की पहली पत्नी हनी ईरानी के दोनों बच्चों फरहान अख़्तर और ज़ोया अख़्तर के साथ भी उनके उतने ही मधुर संबंध हैं, जितने जावेदजी के साथ है.

* फिल्मों में पर्दापण उन्होंने श्याम बेनेगल की अंकुर फिल्म से की थी. यह हैदराबाद की एक सच्ची प्रेम कहानी पर आधारित थी. इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला, जबकि इस रोल के लिए वे श्याम बेनेगल की पहली पसंद नहीं थीं.

* बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने की ख़्वाहिश उन्हें जया बच्चन के कारण हुई. जब उन्होंने जयाजी को फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की फिल्म सुमन में देखा था.

* शबानाजी की मां शौक़त आज़मी रंगमंच की बेहतरीन कलाकार थीं.

* शबानाजी ने लगातार तीन साल तक यानी 1983 से लेकर 1985 तक राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किया था. इसके बाद गॉडमदर के लिए भी उन्हें नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

Shabana Azmi

* फिल्म वॉटर के लिए शबानाजी ने अपने बाल भी निकलवाए थे और बिना बाल के वे बेहद ख़ूबसूरत भी लगती थीं. लेकिन कुछ कारणवश फिल्म की कास्ट चेंज हो गई.

* आज 69 की उम्र में भी वे अपनी अदाकारी के दमख़म से अच्छे से अच्छा कलाकार को भी कड़ी चुनौती देती हैं. तभी तो जज़्बा फिल्म में एक तरफ़ उनका निगेटिव शेड था, तो दूसरी तरफ़ ऐश्‍वर्या राय बच्चन और इरफान ख़ान की मंजी अदाकारी.

* शबानाजी पांच बार फिल्मफेयर अवॉर्ड्स के अलावा पद्मश्री व पद्मभूषण से भी सम्मानित हो चुकी हैं.

Shabana Azmi

* अंकुर, मंडी, अर्थ, खंडहर, पार, गॉडमदर, शतरंज के खिलाड़ी, फायर, मकड़ी, जज़्बा में उनके विविधतापूर्ण सशक्त अभिनय ने हर किसी को प्रभावित किया.

* हिंदी के अलावा अन्य भाषाओं में उन्होंने क़रीब 122 फिल्मों में अभिनय किया है.

* उनकी आनेवाली फिल्म शीर कोरमा में दर्शक उन्हें एक अलग अंदाज़ में देखेंगे.

* मेरी सहेली की तरफ़ से उन्हें जन्मदिन मुबारक! वे यूं ही अभिनय के रंग बिखेरती रहें.

Shabana Azmi

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हिंदी दिवस पर विशेष- हिंदी फिल्मों में हिंदी का मिक्सचर. (#Hindi Diwas Special- Hindi Mixed In Hindi Films)

हिंदी (Hindi) हमारी आन-बान-शान है. देश की आज़ादी से लेकर आपसी लगाव और एकता में भी हिंदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. दिलों को जोड़ने में हिंदी फिल्मों (Hindi Films) का भी बहुत योगदान रहा है. देश-विदेश यानी एक तरह से पूरी दुनिया को हिंदी फिल्मों ने एक सूत्र में बांधा है.

Hindi Diwas Special

हमारे हिंदी फिल्मों के सितारों को विश्‍वभर में प्यार-अपनापन मिला है. फिर चाहे वो अमिताभ बच्चन हो, रितिक रोशन, अक्षय कुमार, शाहरुख, आमिर, सलमान ही क्यों न हो. फिल्मों ने भी हिंदी के प्रचार-प्रसार में अहम् भूमिका निभाई है. हिंदी की सरलता, चुटीली शैली और हास्य व्यंग्य ने भी सभी का ख़ूब मनोरंजन किया है. आइए, ऐसे ही कुछ फिल्मों पर एक नज़र डालते हैं…

Hindi Diwas Special

* अमिताभ-जया बच्चन, धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, ओमप्रकाश अभिनीत ‘चुपके-चुपके’ फिल्म आज भी हिंदी के मज़ेदार प्रयोग के कारण सभी को ख़ूब हंसाती है. फिल्म में धर्मेंद का शुद्ध हिंदी वार्तालाप सुन हर कोई हंसी से लोटपोट हो जाता है. साथ ही ओमप्रकाशजी की प्रतिक्रियाएं सोने पे सुहागा का काम करती हैं.

Hindi Diwas Special

* अमोल पालेकर-उत्पल दत्त की हास-परिहास से भरपूर ‘गोलमाल’ ने हर दौर में दर्शकों को हंसने के मौक़े दिए हैं. इसमें भी अन्य साथी कलाकारों ओमप्रकाश, बिंदिया गोस्वामी, दीना पाठक, युनुस परवेज ने भी भरपूर साथ दिया. फिल्म में हिंदी के महत्व के साथ-साथ इसकी उपेक्षा की ओर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया गया.

Hindi Diwas Special

* अक्षय कुमार की ‘नमस्ते लंदन’ में तो भारत देश के महत्व, हिंदी पर गौरव, हिंदी भाषा, हमारी संस्कृति, सभ्यता को बेहतरीन ढंग से महिमामंडित किया गया. फिल्म के एक दृश्य में तो अक्षय कुमार भारत की आन, परिवेश, महत्व की अपनी हिंदी में कही गई बात को लंदन में अंग्रेज़ों को कैटरीना कैफ के ज़रिए अंग्रेज़ी में जतला कर उन्हें करारा जवाब देते हैं.

Hindi Medium

* हिदी मीडियम फिल्म ने तो हिंदी के प्रति हमारे सौतेले व्यवहार पर ही हास्य के रूप में ही सही सशक्त व्यंग्य किया है. इसमें इरफान ख़ान व सबा कमर ने उम्दा अभिनय के ज़रिए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया.

Hindi Diwas Special

साल १९१८ में महात्मा गांधीजी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने पर ज़ोर दिया था. उन्होंने इसे जनमानस की भाषा भी कहा था. आख़िरकार फिर १४ सितंबर, १९४९ के दिन हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिल. तब से हर साल यह दिन ‘हिंदी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है.

हिंदी है हम!…

मूवी रिव्यू: लुका छुपी/सोनचिड़िया (Movie Review Of Luka Chuppi And Sonchiriya)

 

कार्तिक आर्यन-कृति सेनन (Kartik Aryan-Kriti Sanon) स्टारर लुका छुपी (Luka Chuppi) मूवी जहां दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने में कामयाब रही है, वहीं सोनचिड़िया (Sonchiriya) में डाकुओं की ज़िंदगी के अनकहे पहलुओं को पूरी ईमानदारी से दिखाया गया है. ये दोनों ही फिल्में अलग-अलग तरीक़ों से दर्शकों को प्रभावित करने में सफल रही हैं. इसके लिए निर्देशक लक्ष्मण उतेकर और अभिषेक चौबे बधाई के पात्र हैं.

Luka Chuppi And Sonchiriya

प्यार की लुका छुपी

कार्तिक आर्यन-कृति सेनन की फ्रेश जोड़ी ने अपनी लव व कॉमेडी के डबल डोज़ से सभी को प्रभावित किया है. लिव इन रिलेशन, छोटे शहर की मानसिकता, आज के युवापीढ़ी की सोच इन सभी का निर्देशक लक्ष्मण उतेकर ने बारीक़ी से चित्रण किया है.

कार्तिक मथुरा के लोकल केबल चैनल का रिपोर्टर है. कृति सेनन, जो राजनेता विनय पाठक की बेटी अपनी पढ़ाई पूरी करके इंर्टनशिप के लिए कार्तिक के चैनल को ज्वॉइन करती है. दोनों एक-दूसरे को चाहने लगते हैं. कार्तिक चाहता है कि इस प्यार को रिश्ते का नाम दे दिया जाए यानी जल्द से जल्द शादी कर ली जाए. लेकिन कृति की सोच थोड़ी अलग है, वो पहले अपने जीवनसाथी को जानना-परखना चाहती है फिर किसी बंधन में बंधना चाहती है. वो लिव इन में रहकर एक-दूसरे को अच्छी तरह से समझने का प्रस्ताव रखती है. लेकिन कार्तिक संयुक्पत परिवार से है और परिवार की सोच पारंपरिक है. उसे यह ठीक नहीं लगता. इसमें उसका दोस्त अपारशक्ति खुराना आइडिया देता है कि ऑफिस के काम से उन्हें कुछ दिनों के लिए शूट के सिलसिले में ग्वालियर जाना ही है, तो क्यों ने वे अपने इस प्रयोग को वही आज़मा लें. कार्तिक-कृति को भी यह ठीक लगता है और वहां पर दोनों लिव इन में रहने लगते हैं. कहानी में ज़बरर्दस्त मोड़ तब आता है, जब कार्तिक के भाई का साला पंकज त्रिपाठी दोनों को वहां देख लेता है और कार्तिक के परिवार को वहां पर ले आता है. तब ख़ूब ड्रामा, डायलॉगबाज़ी, कभी हंसना, तो कभी रोना जैसी स्थिति बनती-बिगड़ती है, पर आख़िरकार परिवारवाले इस रिश्ते को स्वीकार कर लेते हैं.

ज़रा रुकिए, कहानी में एक और ट्विस्ट है, वो कृति के पिताजी विनय पाठक. वे प्रेम व लिव इन के सख़्त ख़िलाफ़ है. इसके लिए उन्होंने न केवल प्रेमी लोगों का बहिष्कार किया है, बल्कि मथुरा में ऐसे जोड़ों का मुंह काला करवाकर उन्हें बेइज़्ज़त भी किया जाता है.

क्या कृति के पिता कार्तिक के साथ उसके रिश्ते को स्वीकार करेंगे? क्या कार्तिक-कृति एक हो पाएंगे या फिर उनकी प्रेम कहानी अधूरी ही रह जाएगी? या फिर दोनों को लुका छुपी की तरह ही अपने रिश्ते को आगे बढ़ाना होगा? इन तमाम सवालों को जानने के लिए थिएटर में फिल्म देखना ज़रूरी है और तब ही आप सभी के उम्दा मनोरंजन का लुत्फ़ उठा पाएंगे.

फिल्म में कई गानों का रीमिक्स है, जो अलग ढंग से लुभाता है. कोका कोला… पोस्टर छपवा दो अख़बार में गाने तो पहले से हिट हो चुके हैं. तनिष्क बागची, अभिजीत वघानी, केतन सोढ़ा के संगीत मधुर हैं. सभी ने बेहतरीन एक्टिंग की है, ख़ासतौर पर अपारशक्ति खुराना, पंकज त्रिपाठी की परफेक्ट कॉमेडी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करती है. कार्तिक आर्यन और कृति सेनन ने भी अपने सहज व सशक्त अभिनय से प्रभावित किया है. इसमें कोई दो राय नहीं कि निर्माता दिनेश विजान ने एक मनोरंजक फिल्म देने की कोशिश की है.

Luka Chuppi And Sonchiriya

डैकेतों की ज़िंदगी से रू-ब-रू कराती सोनचिड़िया

यूं तो डाकुओं के जीवन पर कई फिल्में बनी हैं, जैसे शोले, बैंडिट क्वीन, गुलामी, पान सिंह तोमर आदि. लेकिन सोनचिड़िया जैसा ट्रीटमेंट किसी में नहीं दिखा. निर्देशक अभिषेक चौबे ने बड़ी ख़ूबसूरती से डकैतों के जीवन के विभिन्न पहलुओं परिभाषित किया है. यह फिल्म ग्लैमर नहीं पेश करती, बल्कि सिक्के के दूसरे पहलू को सच्चाई के साथ दिखाती है. डाकुओं के गिरोह का बिहड़ जंगलों में रहना, खाने-पीने के लिए संघर्ष करना, उनकी भावनाएं, दर्द को बख़ूबी दर्शया गया है. साथ ही जात-पांत, भेदभाव, ऊंच-नीच, गरीबी, महिलाओं की स्थिति, पुरुषों की मर्दानगी पर भी करारा कटाक्ष किया गया है.

हर कलाकार ने फिर चाहे उसका रोल छोटा हो या बड़ा अपने क़िरदार के साथ न्याय किया है. सुशांत सिंह राजपूत दिनोंदिन अभिनय की ऊंचाइयों को छूते जा रहे हैं. वे अपने रोल में इस कदर रच-बस गए कि एकबारगी यूं लगने लगता है कि यह डाकू तो कितना इनोसेंट है, आख़िर उसके साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है. मनोज बाजपेयी, आशुतोष राणा, रणवीर शौरी, भूमि पेडनेकर अपने लाजवाब अदाकारी से कहानी को बांधे रखते हैं.

रॉनी स्क्रूवाला निर्मित सोनचिड़िया दर्शकों को अपराधियों की एक अलग ही दुनिया से रू-ब-रू कराती है. अनुज राकेश धवन की सिनेमौटोग्राफी काबिल-ए-तारीफ़ है. मेघना सेन की एडिटिंग बेजोड़ है. संगीत ठीक-ठाक है. फिल्म की कहानी अभिषेक चौबे और सुदीप शर्मा ने मिलकर लिखी है. फिल्म में अपराध, मारधाड़, एक्शन-ड्रामा सब कुछ है, जो आमतौर पर पसंद किया जाता है. वैसे डकैतों पर बनी बेहतरीन फिल्मों में से एक है सोनचिड़िया.

– ऊषा गुप्ता

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मूवी रिव्यू: मोहल्ला अस्सी/पीहू- दो ख़ूबसूरत प्रस्तुति- एक व्यंग्यात्मक तो दूसरी में मासूम अदाकारी (Movie Review: Mohalla Assi/Pihu- Remarkable Performances And Thought Provoking Scripts)

 

 Mohalla Assi/Pihu
मोहल्ला अस्सी- धर्म, संस्कृति, राजनीति पर करारा व्यंग्य

एक ओर सनी देओल अलग व दमदार अंदाज़ में नज़र आते हैं मोहल्ला अस्सी में, तो वहीं पीहू में दो साल की बच्ची की मासूम अदाकारी बेहद प्रभावित करती है.

हिंदी साहित्यकार काशीनाथ सिंह की काशी का अस्सी पर आधारित मोहल्ला अस्सी फिल्म धर्म, राजनीति, आस्था, परंपरा आदि के माननेवाले को बहुत पसंद आएगी. भारतीय सोच पर भी करारा व्यंग्य किया गया है. वैसे भी जो मज़ा बनारस में वो न पेरिस में है, न फारस में… इसी चरितार्थ करती है फिल्म. निर्माता विनय तिवारी की यह फिल्म चाणक्य सीरियल व पिंजर मूवी फेम डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी  के बेहतरीन निर्देशन के कारण बेहद आकर्षक व ख़ास बन गई है. बनारस के निवासी, गंगा नदी, घाट, गली-मोहल्ले, वहां के तौर-तरी़के, लोगों की विचारधारा, राजनीति का प्रभाव, धर्म, कर्मकांड सभी का ख़ूबसूरत चित्रण किया गया है.

कहानी बनारस के मोहल्ला अस्सी की है, जहां पर धर्मराज पांडे यानी सनी देओल ब्राह्मणों की बस्ती में अपनी पत्नी साक्षी तंवर और बच्चों के साथ रहते हैं. वे जजमानों की कुंडली बनाते हैं और संस्कृत भी पढ़ाते हैं. अपने धर्म व उससे जुड़ी अन्य बातों को लेकर वे इतने सख़्त रहते हैं कि अपने मोहल्ले में विदेशी सैलानियों को किराए पर घर रहने के लिए नहीं देते और न ही अन्य लोगों को ऐसा करने देते हैं. उनका मानना है कि विदेशियों के खानपान व आचरण के सब गंदा व अपवित्र हो रहा है. लेकिन हालात करवट बदलते हैं और उन्हें आख़िरकार न चाहते हुए वो सब करना पड़ता है, जिसके वे सख़्त ख़िलाफ़ थे. फिल्म में पप्पू चाय की दुकान भी है, जो किसी संसद से कम नहीं. जहां पर वहां के लोग हर मुद्दे पर गरमागरम बहस करते हैं, फिर चाहे वो राजनीति का हो या फिर कुछ और.

सनी देओल अपनी भाव-भंगिमाएं व प्रभावशाली संवाद अदाएगी से बेहद प्रभावित करते हैं. उनका बख़ूबी साथ देते हैं साक्षी तंवर, रवि किशन, सौरभ शुक्ला, राजेंद्र गुप्ता, मिथलेश चतुर्वेदी, मुकेश तिवारी, सीमा आज़मी, अखिलेंद्र मिश्रा आदि. अमोद भट्ट का संगीत स्तरीय है. विजय कुमार अरोड़ा की सिनेमाटोग्राफी क़ाबिल-ए-तारीफ़ है.

Mohalla Assi/Pihu

Pihu

 

पीहू- नन्हीं बच्ची का कमाल

निर्देशक विनोद कापड़ी की मेहनत, लगन और धैर्य की झलकियां बख़ूबी देखने मिलती है पीहू फिल्म में. आख़िरकार उन्होंने दो साल की बच्ची से कमाल का अभिनय करवाया है. कथा-पटकथा पर भी उन्होंने ख़ूब मेहनत की है. निर्माता सिद्धार्थ रॉय कपूर, रोनी स्क्रूवाला व शिल्पा जिंदल बधाई के पात्र हैं, जो उन्होंने विनोदजी और फिल्म पर अपना विश्‍वास जताया. बकौल विनोदजी यह सच्ची घटना पर आधारित है और इस पर फिल्म बनाना उनके लिए किसी चुनौती से कम न था.

फिल्म की जान है पीहू यानी मायरा विश्‍वकर्मा. उस नन्हीं-सी बच्ची ने अपने बाल सुलभ हरकतों, शरारतों, मस्ती, सादगी, भोलेपन से हर किसी का दिल जीत लेती है.

कहानी बस इतनी है कि पीहू की मां (प्रेरणा विश्‍वकर्मा) का देहांत हो चुका है और उनकी बॉडी के साथ वो मासूम बच्ची घंटों घर के कमरे में अकेले व़क्त बिताती है. उसे नहीं पता कि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं है, वो मासूम उनसे बात करती है, घर में इधर-उधर घूमती है, भूख लगने पर गैस जलाकर रोटी भी सेंकने की कोशिश करती है, घर को अस्त-व्यस्त, उल्टा-पुल्टा कर देती है. सीन दर सीन उत्सुकता, डर, घबराहट, बेचैनी भी बढ़ती जाती है. कम बजट में विनोदजी ने लाजवाब फिल्म बनाई है.

– ऊषा गुप्ता

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