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Vishwaroopam 2 Movie Review: ‘विश्वरूपम 2’ में दिखा कमल हासन का ज़बरदस्त एक्शन अवतार (Vishwaroopam 2 Movie Review)

एक्टर कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम 2 सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. यह फिल्म विश्वरूपम का सीक्वल है. बता दें कि कमल हासन की फिल्में हमेशा लीक से हटकर किसी न किसी ख़ास मुद्दे पर आधारित होती हैं. 15 अगस्त से पहले रिलीज़ हुई यह फिल्म देशभक्ति और आतंक के मुद्दे पर आधारित एक स्पाई थ्रिलर फिल्म है, जिसमें कमल हासन का जबरदस्त एक्शन अवतार दिख रहा है. साल 2013 में आई फिल्म विश्वरूपम का यह सिक्वल दर्शकों को कुछ ख़ास पसंद नहीं आ रहा है, क्योंकि इसकी कहानी पेश करने का अंदाज़ और इसके प्रीक्वल के फ्लैशबैक सीन्स दर्शकों की उलझन बढ़ा रहे हैं.
Vishwaroopam 2 Movie
मूवी- विश्वरूपम 2
प्रोड्यूसर व डायरेक्टर- कमल हासन
स्टार कास्ट- कमल हासन, राहुल बोस, शेखर कपूर, पूजा कुमार, एंड्रिया जेरेमिया, जयदीप अहलावत, वहीदा रहमान
अवधि- 2 घंटा 21 मिनट
रेटिंग- 2/5
Vishwaroopam 2 Movie

कहानी-

विश्वरूपम 2 कहानी और स्क्रिप्ट के मामले में एक औसत फिल्म है. यह फिल्म वन मैन शो है, क्योंकि इसकी स्क्रिप्टिंग, डायरेक्शन की पूरी बागडोर कमल हासन ने ख़ुद संभाली थी. इस फिल्म की कहानी वहीं से शुरू होती है, जहां पर पिछली फिल्म की कहानी ख़त्म हुई थी. फिल्म में रॉ एजेंट मेजर विशाम अहमद कश्मीरी (कमल हासन) अपनी पत्नी निरूपमा (पूजा कुमार) और अपनी सहयोगी अस्मिता (एंड्रिया जेरेमिया) के साथ अलकायदा के मिशक को पूरा करने के बाद वापस लौटते हैं. पिछली फिल्म से कहानी आगे बढ़ती है और इस बार आतंकी उमर कुरैशी (राहुल बोस) ने भारत में 60 से भी ज़्यादा बम लगा दिए हैं, जिन्हें ढूंढकर उसके मकसद को नाकाम करने की चुनौती मेजर विशाम अहमद कश्मीरी के सामने है. फिल्म का हीरो आंतक के इस ख़ौफनाक खेल को रोकने में क़ामयाब होता है या नहीं, इसके लिए यह फिल्म देखनी पड़ेगी.

डायरेक्शन- 

विश्वरूपम 2 में कमल हासन ने निर्माता, निर्देशक, लेखक और एक्टर जैसी कई ज़िम्मेदारियां निभाई है. फिल्म का फर्स्ट हाफ स्लो है, लेकिन सेकेंड हाफ इससे बेहतर है. फिल्म का स्क्रीन प्ले कमज़ोर है, लेकिन संवाद बेहतर हैं. ख़ुफियागिरी और एक्शन ही इस फिल्म का मुख्य आधार है, बावजूद इसके फिल्म बार-बार अपने मुद्दे से भटकती हुई दिखाई देती है. अगर आपने इस फिल्म का प्रीक्वल नहीं देखा तो विश्वरूपम 2 को समझने में आपको दिक्कत हो सकती है.

एक्टिंग- 

एक्टिंग के मामले में 63 साल के कमल हासन एक कमाल के अभिनेता है, लेकिन जब वो एक्शन करते दिखाई देते हैं तो उसपर उनकी उम्र भारी पड़ती दिख रही है. अभिनेत्रियों में पूजा कुमार और एंड्रिया जेरेमिया ने अच्छा अभिनय किया है. फिल्म में आतंकी का किरदार निभाने वाले राहुल बोस खलनायक के रूप में थोड़े कमज़ोर पड़ते दिख रहे हैं. वहीदा रहमान फिल्म में कमल हासन की मां बनी हैं, जो अल्ज़ाइमर से पीड़ित हैं. इसके अलावा शेखर कपूर और जयदीप अहलावत ने भी अच्छी एक्टिंग की है.

अगर आप कमल हासन के ज़बरदस्त फैन हैं और उनकी किसी भी फिल्म को देखना नहीं भूलते, तो इस वीकेंड आप अपने पसंदीदा हीरो कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम 2 देख सकते हैं.

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Movie Review: हौसले व संघर्ष की कहानी है फिल्म सूरमा, दिलजीत ने जीता दर्शकों का दिल (Soorma Movie Review)

नेशनल हॉकी टीम के कैप्टन और अर्जुन अवॉर्ड विनर संदीप सिंह के जीवन पर बनी फिल्म ‘सूरमा’ (Soorma) आज सिनेमा घरों में रिलीज़ हुई है. डायरेक्टर शाद अली की इस फिल्म में संदीप सिंह का किरदार निभाते दिख रहे हैं मशहूर पंजाबी एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh). तो चलिए, ज़िंदगी और मौत के बीच हौसले व संघर्ष की गाथा को बयान करती इस फिल्म के बारे में विस्तार से जानते हैं.

Soorma Movie

मूवी- सूरमा.

स्टार कास्ट- दिलजीत दोसांझ, तापसी पन्नू, अंगद बेदी, विजय राज, दानिश हुसैन.

डायरेक्टर- शाद अली.

अवधि- 2 घंटे 11 मिनट.

रेटिंग- 3/5.

Soorma Movie

कहानी- 

फिल्म की कहानी साल 1994 के शाहाबाद से शुरू होती है, जहां संदीप सिंह (दिलजीत दोसांझ) अपने बड़े भाई विक्रमजीत सिंह (अंगद बेदी), पिता (सतीश कौशिक) और मां के साथ रहता है. दोनों भाईयों का यही सपना है कि वो भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा बनें, लेकिन कोच के सख़्त रवैए से नाराज़ होकर संदीप अपने इस सपने से पीछे हटने लगता है. अचानक एक दिन संदीप की मुलाक़ात महिला हॉकी खिलाड़ी हरप्रीत (तापसी पन्नू) से होती है और उसे पहली नज़र में ही उससे प्यार हो जाता है.

हरप्रीत ही संदीप के दिल में एक बार फिर से हॉकी खेलने का जज़्बा जगाती है और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है. जिससे एक बार फिर हॉकी प्लेयर बनना संदीप के जीवन का मक़सद बन जाता है और इसमें उसके बड़े भाई विक्रमजीत सिंह भी उसका पूरा साथ देता है, लेकिन इस कहानी में दिलचस्प मोड़ तब आता है, जब अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए संदीप सिंह ट्रेन से सफर करते हैं, तब गलती से वो किसी की गोली का शिकार हो जाते हैं और उनके शरीर के नीचे का हिस्सा पैरालाइज्ड हो जाता है. यही से शुरू होता है संदीप सिंह की ज़िंदगी का असली संघर्ष, लेकन अपने हौसले के दम पर वो एक बार फिर मैदान में वापस लौटने में कामयाब रहते हैं.

एक्टिंग- 

फिल्म में हॉकी प्लेयर बनें दिलजीत दोसांझ ने संदीप सिंह का किरदार बेहतरीन ढंग से निभाया है. फिल्म में उन्होंने जैसा अभिनय किया है वह बेहतरीन है. वो अपने किरदार के हर भाव और लम्हे को जीते और जीवंत करते दिखाई देते हैं. जबकि तापसी पन्नू हर बार की तरह इस बार भी एक्टिंग में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देती दिख रही हैं. अंगद बेदी ने संदीप के बड़े भाई के रूप में अच्छा काम किया है. वहीं सतीश कौशिक ने पिता और विजय राज ने कोच की भूमिका बखूबी निभाई है.

डायरेक्शन- 

डायरेक्टर शाद अली ने फिल्म के फर्स्ट हाफ में संदीप सिंह के हॉकी प्लेयर बनने की कहानी को दिखाया है. इंटरवल के पहले की कहानी आपको भावुक कर सकती है. शाद ने इसमें कस्बे के छोटे-छोटे लम्हों और फिल्म के मुख्य कलाकारों के रोमांस को अच्छी तरह से पर्दे पर उतारा है. फिल्म में हॉकी से जुड़े कई सीन हैं जो दर्शकों को पसंद आएंगे. फिल्म का स्क्रीनप्ले कमाल का है. सिनेमेटोग्राफी अच्छी है और फिल्म के कुछ वाकये देखकर आप ख़ुद को इमोशनल होने से नहीं रोक पाएंगे. हालांकि फिल्म का म्यूज़िक अपना कमाल दिखाने में पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाया है.

बहरहाल अगर आप यह जानने में दिलचस्पी रखते हैं कि नेशनल हॉकी प्लेयर संदीप सिंह की ज़िंदगी में कब, क्या और कैसे हुआ, तो इस वीकेंड आप यह फिल्म देख सकते हैं.

Teri Bhabhi Hai Pagle

फिल्म- तेरी भाभी है पगले.
स्टार कास्ट- कृष्णा अभिषेक, रजनीश दुग्गल, मुकुल देव, नाज़िया हसन.
डायरेक्टर- विनोद तिवारी.
रेटिंग- 1.5/5.
रिव्यू-  फिल्म ‘तेरी भाभी है पगले’ बतौर डायरेक्टर विनोद तिवारी की डेब्यू फिल्म है. इस फिल्म में रजनीश दुग्गल फिल्म मेकर देव का किरदार निभा रहे हैं. जो अपनी फिल्म के लिए अपनी गर्लफ्रेंड रागिनी ( नाज़िया हसन) को मुख्य कलाकार को तौर पर कास्ट कर लेता है, जबकि कृष्णा अभिषेक इसमें मूवी स्टार राज का किरदार निभा रहे हैं और मुकुल देव अंडरवर्ल्ड फाइनांसर अरु भाई बने हैं.
इस फिल्म के मेल किरदारों का एक ही महिला रागिनी पर दिल आ जाता है और हर कोई उसका दिल जीतने की कोशिश करता है. पूरी फिल्म में बस इसी जद्दोजहद को दिखाया गया है . फिल्म की स्क्रिप्ट से लेकर डायलॉग्स तक की हर कड़ी बेहद कमज़ोर नज़र आती है. यहां हैरत की बात तो यह है कि लोगों को हंसा-हंसाकर लोट-पोट करने वाले एक्टर कृष्णा अभिषेक भी दर्शकों को हंसाने में नाकाम दिख रहे हैं, लेकिन मुकुल देव ने बेहतरीन एक्टिंग की है. अगर आप इस वीकेंड सिर्फ़ टाइम पास करने के मूड में हैं तो यह फिल्म देख सकते हैं.

Sanju Movie Review: दर्शकों को पसंद आ रही है फिल्म संजू, रणबीर की एक्टिंग देख कायल हुए फैंस (Sanju Movie Review)

साल 2018 की सबसे बड़ी और रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘संजू’ (Sanju) देशभर के कुल 4000 स्क्रीन्स पर रिलीज़ हुई है. फिल्म का फर्स्ट डे फर्स्ट शो भी हाउसफुल रहा. हालांकि फिल्म को रिलीज़ हुए अभी कुछ घंटे ही हुए हैं, लेकिन अब तक जिसने भी यह फिल्म देखी, वो इसकी तारीफ़ करने से ख़ुद को नहीं रोक पाया. सोशल मीडिया पर भी हर कोई इस फिल्म की तारीफ़ों के पुल बांध रहा है. डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने संजय दत्त की 37 साल की असल ज़िंदगी को 3 घंटे में बखूबी दर्शाने की कोशिश की है.

Sanju Movie Reviews

फिल्म- संजू
डायरेक्टर- राजकुमार हिरानी
स्टार कास्ट- रणबीर कपूर, सोनम कपूर, दीया मिर्ज़ा, परेश रावल, मनीषा कोईराला, अनुष्का शर्मा, विक्की कौशल, जिम सरब.
अवधि- 2 घंटा 35 मिनट
रेटिंग- 4/5
Sanju Movie Reviews
कहानी-
संजय दत्त की बायोपिक ‘संजू’ में उनकी ज़िंदगी के हर पहलू को दिखाया गया है. फिल्म में रणबीर कपूर संजय दत्त की भूमिका निभा रहे हैं. इसकी कहानी संजय के येरवड़ा जेल जाने के एक महीने पहले से शुरू होती है. शुरुआत में दिखाया गया है कि संजय दत्त (रणबीर कपूर) अपनी एक बायोग्राफी लिखवाता है. इसी दौरान आर्म्स एक्ट के तहत संजय को सुप्रीम कोर्ट से जेल की सज़ा हो जाती है, लेकिन संजय चाहते हैं कि कोई उनकी कहानी को उनके नज़रिए से पेश करे और इसी सिलसिले में उनकी मुलाक़ात एक विदेशी राइटर विनी (अनुष्का शर्मा) से होती है.
संजय उस राइटर को अपने दोस्त जुबीन (जिम सरब) और कमलेश (विक्की कौशल) के बारे में बताते हुए, इस बात का ज़िक्र करते हैं कि कैसे एक दोस्त ने उन्हें ड्रग्स की दुनिया से रूबरू कराया और कैसे उनके दूसरे दोस्त ने उन्हें इससे बाहर निकाला. इसके साथ ही वो बताते हैं कि कैसे उनके पिता सुनील दत्त (परेश रावल) ने मुश्किल घड़ी में कभी उनका साथ नहीं छोड़ा और कैसे मौत के बाद भी नरगिस दत्त (मनीषा कोईराला) प्रेरणा बनकर हमेशा उनके साथ रहीं. बता दें कि फिल्म का हर एक सीन आपके इमोशन्स को टच करता है. हालांकि संजय दत्त की ज़िंदगी की कहानी को विस्तार से जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी होगी.
एक्टिंग-
बात करें इस फिल्म के सितारों की एक्टिंग की, तो संजू में रणबीर कपूर के जीवन का अभी तक का सबसे बेस्ट अभिनय देखने को मिला है. उनकी एक्टिंग को देखकर ऐसा लगता है कि रणबीर ने ख़ुद के लिए एक नया आयाम स्थापित किया है और वो एक अभिनेता के रूप में कामयाब रहे हैं, उन्हें देखकर कई बार यही लगता है कि फिल्म में रणबीर नहीं बल्कि ख़ुद संजय दत्त हैं. फिल्म में संजय दत्त की ज़िंदगी को जीने वाले रणबीर कपूर की जितनी तारीफ़ की जाए उतनी कम है.

रणबीर के अलावा विक्की कौशल ने फिल्म में कमाल की एक्टिंग की है. संजय दत्त के पिता सुनील दत्त के किरदार में परेश रावल बेहद शानदार नज़र आ रहे हैं, रणबीर और परेश रावल के इमोशनल सीन्स दर्शकों को भावुक कर देते हैं. इनके अलावा दीया मिर्ज़ा, अनुष्का शर्मा, मनीषा कोईराला, सोनम कपूर और करिश्मा तन्ना ने अपने-अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है.

डायरेक्शन- 

फिल्म के डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने फिल्म के पहले हिस्से में संजय दत्त के ड्रग्स एडिक्ट बनने और उस दलदल से बाहर निकलने की कहानी को दिखाया है. जिस तरह राजकुमार हिरानी ने फिल्म को ट्रीट किया है वो काबिले तारीफ़ है. इस बायोग्राफी में हिरानी ने ड्रग्स की अंधेरी दुनिया, संजू की गर्लफ्रेंड्स, टेरोरिज्म और जेल में सज़ा काटते संजय की विवादित ज़िंदगी को बहुत ही दिलचस्प तरीक़े से पेश किया है.

सिनेमेटोग्राफी-

बात करें फिल्म के सिनेमेटोग्राफी की, तो वो वाकई कमाल की है. फिल्म का म्यूज़िक एवरेज है, लेकिन इसके कुछ गाने बहुत ही बढ़िया हैं. एक ओर जहां यह फिल्म दर्शकों को हंसाती-गुदगुदाती है, तो वहीं दूसरी तरफ यह आपको भावुक भी कर देती हैं. फिल्म के इमोशनल सीन्स देख आंखें नम हो जाती हैं. बहरहाल, अगर आप संजू बाबा के फैन हैं तो इस वीकेंड यह फिल्म ज़रूर देखें.

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मूवी रिव्यू: दो अलग कॉन्सेप्ट वाली फिल्में हैं ‘102 नॉट आउट’ और ‘ओमेर्टा’ (102 Not Out And Omerta Movie Review)

आज फिल्मी फ्राइडे है और सिनेमा घरों में दो अलग कॉन्सेप्ट वाली फिल्में रिलीज़ हुई हैं. एक तरफ है सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर की फिल्म ‘102 नॉट आउट’ है तो वहीं दूसरी तरफ इस फिल्म को टक्कर दे रही है अभिनेता राजकुमार राव की फिल्म ‘ओमेर्टा’. अमिताभ की यह फिल्म बुजुर्गों के एकाकीपन की कहानी बयां करती है तो राजकुमार राव की फिल्म एक आतंकी की कहानी को अलग अंदाज़ में दर्शकों के सामने पेश करती है.

फिल्म- 102 नॉट आउट
निर्देशक- उमेश शुक्ला
स्टार कास्ट- अमिताभ बच्चन, ऋषि कपूर, जिमित त्रिवेदी
अवधि- 1 घंटा 45 मिनट
रेटिंग- 3.5/5
फिल्म की कहानी-
निर्देशक उमेश शुक्ला की फिल्म ‘102 नॉट आउट’ बुजुर्गों के एकाकीपन की त्रासदी की कहानी है. इस फिल्म में 75 साल के बाबूलाल वखारिया (ऋषि कपूर) घड़ी की सुईयों के हिसाब से चलनेवाले एक सनकी बुजुर्ग हैं. जो अपने एनआरआई बेटे और उसके परिवार से पिछले 17 सालों से नहीं मिले हैं. हालांकि उनका बेटा हर साल मिलने का वादा तो करता है पर मिलता नहीं है.

उधर, बाबूलाल के 102 साल के पिता दत्तात्रेय वखारिया (अमिताभ बच्चन) एक ऐसे 102 साल का जवान हैं जो ज़िंदगी को ज़िंदादिली के साथ जीना पसंद करते हैं. एक दिन दत्तात्रेय अपने बेटे बाबूलाल के सामने कुछ शर्ते रखते हुए उसे वृद्धाश्रम भेजने की धमकी देते हैं. दरअसल वो अपने 75 साल के बेटे की जीवनशैली और सोच में इन शर्तों के ज़रिए बदलाव लाना चाहता हैं, लेकिन क्यों इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

कैसी है फिल्म?

इस फिल्म के ज़रिए निर्देशक उमेश शुक्ला ने विदेश में रहने वाले एनआरआई बच्चों से मिलने के लिए तड़पने वाले माता-पिता तक एक भावनात्मक संदेश भी पहुंचाने की कोशिश की है. इस फिल्म का पहला हिस्सा थोड़ा धीमा है, लेकिन इसके दूसरे हिस्से में फिल्म अपनी रफ्तार पकड़ लेती है और क्लाइमेक्स आपको इमोशनल करने के साथ-साथ जीत की खुशी का एहसास भी करा जाता है.

एक्टिंग

इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर की जोड़ी क़रीब 27 साल बाद पर्दे पर साथ नज़र आ रही है. एक तरफ जहां दत्तात्रेय की भूमिका में अमिताभ बच्चन किरदार के नब्ज़ को पकड़ते हुए कभी दर्शकों को लुभाते तो कभी चौंकाते हुए नज़र आ रहे हैं तो वहीं बाबूलाल की भूमिका अदा कर रहे ऋषि कपूर ने भी अपने किरदार को बेहद सहजता और संयम के साथ निभाया है. एकाकीपन से लड़ते दो बुजुर्गों की मज़ेदार नोकझोंक आपको बेहद पसंद आएगी.

फिल्म- ओमेर्टा
निर्देशक- हंसल मेहता 
स्टार कास्ट- राजकुमार राव, टिमोथी रायन, केवल अरोड़ा, राजेश तेलांग
अवधि- 1 घंटा 36 मिनट
रेटिंग- 3.5/5
फिल्म की कहानी- 
राजकुमार राव लीक से हटकर बनी फिल्मों में काम करने से बिल्कुल भी पीछे नहीं हटते हैं. एक बार फिर निर्देशक हंसल मेहता की फिल्म में राजकुमार राव का अलग अंदाज़ देखने को मिल रहा है. फिल्म ‘ओमेर्टा’ के ज़रिए एक आतंकी की कहानी को कुछ अलग ढंग से पेश करने की कोशिश की गई है. बता दें कि ओमेर्टा एक इटैलियन शब्द है और ऐसे आतंकी के लिए इस शब्द का प्रयोग किया जाता है जो पुलिस के बेइंतहां ज़ुल्म के बाद भी नहीं टूटता.
फिल्म की कहानी साल 2002 की है. जब लंदन में रह रहा अहमद ओमार सईद शेख (राजकुमार राव) पत्रकार डेनियल पर्ल (टिमोथी रायन) की हत्या की कहानी को अपने शब्दो में बयां करता है. इस कहानी के ज़रिए हंसल मेहता ने यह दिखाने की सराहनीय कोशिश की है कि आखिर क्यों आज की भटकी हुई युवा पीढ़ी आंतकवादी संगठनों की ओर आकर्षित हो रही है. उन्हें आईएसआई जैसे आतंकवादी संगठनों में ऐसा क्या नज़र आता है जो वो अपने सिर पर कफ़न बांधकर इसमें शामिल हो जाते हैं.
फिल्म की शूटिंग-
फिल्म की कहानी के अनुसार, इसकी सारी शूटिंग आउटडोर लोकेशन्स पर की गई है. लंदन और भारत की लोकेशन्स पर शूट की गई इस फिल्म में पाकिस्तान दवारा चलाए जा रहे आतंकी कैंपेन को भी अच्छी तरह से पेश किया है. इस फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर भी ठीक ठाक है. इस फिल्म को देखने के बाद आप भी यही महसूस करेंगे कि एक खूंखार आतंकवादी को आपने बेहद क़रीब से समझा है.
एक्टिंग-
अगर एक्टिंग की बात करें तो एक आंतकी के किरदार को राजकुमार राव ने अपने लाजवाब अभिनय से जीवंत कर दिखाया है. इस फिल्म में दमदार अभिनय करके एक बार फिर राजकुमार राव ने ख़ुद को एक बेहतरीन और बेमिसाल एक्टर साबित किया है. वहीं टिमोथी रायन, केवल अरोड़ा, राजेश तेलांग जैसे कलाकारों ने अपने-अपने किरदार को बेहतरीन ढंग से पेश किया है.
बहरहाल, अगर आप इस वीकेंड भावनात्मक संदेश देनेवाली पारिवारिक फिल्म देखना चाहते हैं तो ‘102 नॉट आउट’ देख सकते हैं और अगर लीक से हटकर एक आतंकी की कहानी से रूबरू होना चाहते हैं तो फिर ‘ओमेर्टा’ आपके लिए एक बेहतर विकल्प है.

मूवी रिव्यू: जानें कैसी है ईशान खट्टर की ‘बियॉन्ड द क्लाउड्स’ और अभय देओल की ‘नानू की जानू’ (Movie Review of Beyond The Clouds and Nanu ki Jaanu)

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आज फिल्मी फ्राइडे है और  ईशान खट्टर (Ishaan Khattar) स्टारर फिल्म ‘बियॉन्ड द क्लाउड्स’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. जाने माने ईरानी फिल्म मेकर माजिद मजीदी ने इस फिल्म के ज़रिए भाई-बहन के रिश्तों की अनोखी दास्तान को बयान करने की कोशिश की है, तो वहीं हॉरर और कॉमेडी से भरपूर अभय देओल (Abhay Deol) की फिल्म ‘नानू की जानू’ भी रिलीज़ हुई है. निर्देशक फ़राज़ हैदर ने फिल्म के ज़रिए दर्शकों को डराने के साथ-साथ हंसाने की भी कोशिश की है. चलिए जानते हैं कैसी है इन दोनों फिल्मों की कहानी.
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फिल्म- बियॉन्ड द  क्लाउड्स
निर्देशक- माजिद मजीदी
कलाकार- ईशान खट्टर, मालविका मोहनन, तनिष्ठा चटर्जी और गौतम घोष
रेटिंग- 3.5/5
कहानी
ईरानी फिल्म मेकर माजिद मजीदी की फिल्म ‘बियॉन्ड द क्लाउड्स’ की कहानी आमिर (ईशान खट्टर) और उनकी बड़ी बहन तारा (मालविका मोहनन) के रिश्तों की कहानी है. माता-पिता की मौत के बाद आमिर अपनी बहन के घर रहता है, लेकिन उसका शराबी पति हर रोज़ दोनों को पीटता है. एक दिन तंग आकर 13 साल की उम्र में आमिर अपनी बहन के घर से भाग जाता है.
आमिर गलत संगत में पड़ जाता है और हर हाल में पैसा कमाने की ख्वाहिश रखता है. उधर धोबी घाट पर 50 साल का अर्शी (गौतम घोष) आमिर की बहन तारा के साथ जबरदस्ती करता है, तो बचाव में वो उस पर बड़े पत्थर से हमला करती है. अर्शी पर हमला करने के आरोप में तारा को जेल भेज दिया जाता है और फिर इस कहानी में नया मोड़ आता है. आखिर ये नया मोड़ भाई-बहन की ज़िंदगी को किस तरह से बदलता है ये जानने के लिए यह फिल्म देखनी पड़ेगी.
एक्टिंग
ईशान खट्टर ने आमिर के किरदार को बहुत ही बेहतरीन ढंग से निभाया है. अपनी एक्टिंग से ईशान ने यह साबित कर दिया है कि वो आने वाले कल के स्टार हैं. वहीं ईशान की बहन का किरदार निभानेवाली साउथ फिल्मों की एक्ट्रेस मालविका मोहनन ने भी दमदार अदायगी से अपने किरदार में जान डाल दी है. इस फिल्म की शूटिंग मुंबई के कई स्लम कॉलोनियों में की गई है. अगर आप एक्शन, कॉमेडी, रोमांस और हॉट सीन्स से परे कुछ अलग देखना चाहते हैं तो ‘बियॉन्ड द क्लाउड्स’ आपको बेहद पसंद आ सकती है.
फिल्म- नानू की जानू
कलाकार- अभय देओल, पत्रलेखा, बृृजेंद्र काला, मनु ऋषि
निर्देशक- फ़राज़ हैदर
रेटिंग- 2.5/5
कहानी 
बॉलीवुड में वैसे तो कई हॉरर फिल्में बन चुकी हैं जो दर्शकों को डराने में कामयाब भी हुई हैं, लेकिन निर्देशक फ़राज़ हैदर की फिल्म ‘नानू की जानू’ हॉरर और कॉमेडी का मज़ेदार मिश्रण है. इस फिल्म में अभिनेता अभय देओल आनंद ऊर्फ नानू की भूमिका निभा रहे हैं जो दिल्ली का एक गुंडा है और लोगों को डरा-धमका कर उनके मकानों पर कब्ज़ा करना उसका पेशा है. एक दिन नानू के साथ अजीबो-गरीब घटना घटने लगती है जिससे नानू यानी अभय देओल डर जाते हैं और इससे छुटकारा पाने के लिए पड़ोसियों से मदद मांगते हैं.
दरअसल, नानू का पाला सिद्धि ऊर्फ जानू (पत्रलेखा) नाम की भूतनी से पड़ जाता है और इस भूतनी का दिल नानू पर आ जाता है. इसके बाद नानू नाम की भूतनी जानू को पाने के लिए तमाम कोशिशें करने लगती है. इस दौरान फिल्म में दिखाए गए कॉमेडी से भरपूर दृश्य दर्शकों को  हंसाने- गुदगुदाने का काम करते हैं, लेकिन यह भूतनी दिल्ली के गुंडे नानू की जानू बनने में कामयाब होती है या नहीं, यह तो आपको फिल्म देखने पर ही पता चलेगा.
एक्टिंग
भले ही अभय देओल फिल्मों में बेहद कम नज़र आते हों, लेकिन वो जब भी फिल्मों में एक्टिंग करते हैं तो उनकी दमदार एक्टिंग दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ खींच ही लेती है. अभय ने इस फिल्म में भी काफ़ी बेहतरीन एक्टिंग की है. फिल्म में भूतनी बनी पत्रलेखा का रोल भले ही छोटा हो, लेकिन उन्होंने अपने किरदार के साथ पूरा इंसाफ किया है. वहीं मनु ऋषि भी अपनी एक्टिंग से दर्शकों को हंसाने में कामयाब रहे हैं.