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डिजिटल पेमेंट में गड़बड़ी होने पर कहां और कैसे करें शिकायत? (What To Do If Digital Payments Go Wrong?)

ज़रा सोचें, अगर ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान किसी मोबाइल वॉलेट से आपने पेमेंट किया, आपके अकाउंट से पैसे भी कट गए, पर शॉपिंग पूरी ही नहीं हुई, क्योंकि शॉपिंग साइट को पैसे ही नहीं मिले. अब क्या करें? ऐसे में अक्सर लोग घबरा जाते हैं, पर आप न घबराएं, क्योंकि आजकल ऐसे मामले बहुत तेज़ी से बढ़े हैं. डिजिटल पेमेंट्स से संबंधित शिकायतों के लिए कहां और कैसे करें शिकायत आइए जानते हैं.

Digital Payments

आज ज़्यादातर लोग डिजिटल पेमेंट्स का ही इस्तेमाल कर रहे हैं. बढ़ते इस्तेमाल के साथ-साथ इसमें फ्रॉड और धोखाधड़ी या फिर टेक्निकल गड़बड़ी के मामले भी तेज़ी से बढ़े हैं, इसलिए रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में देश के 19 शहरों में 21 डिजिटल ट्रांज़ैक्शन्स ओम्बड्समैन यानी लोकपाल की नियुक्ति की है, जो डिजिटल पेमेंट संबंधी समस्याओं को सुलझाएंगे.

किन मामलों में कर सकते हैं शिकायत?

–     अगर आपके बैंक अकाउंट से अनाधिकृत रूप से इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर हो जाए.

–     अगर सर्विस प्रोवाइडर आपके अकाउंट में पैसे ट्रांसफर न करे.

–     अगर आप ऑनलाइन पेमेंट या ट्रांज़ैक्शन नहीं कर पा रहे हों.

–     अगर ट्रांज़ैक्शन के बाद निश्‍चित समयावधि के भीतर वॉलेट में पैसे जमा न हों.

–     ऑनलाइन पेमेंट या फंड ट्रांसफर का ट्रांज़ैक्शन ऑनलाइन न दिखे.

–     ट्रांज़ैक्शन फेल होने पर रक़म अकाउंट में रिफंड न हो.

–     स्टॉप पेमेंट रिक्वेस्ट को समय पर स्टॉप न करें.

–     इसके अलावा यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई), भारत बिल पेमेंट सिस्टम, भारत क्यूआर कोड, यूपीआई क्यूआर कोड से जुड़े मामलों को भी आप डिजिटल ओम्बड्समैन के पास ले जा सकते हैं.

कहां करें शिकायत?

कस्टमर केयर

– किसी भी तरह की शिकायत करने के लिए सबसे पहले अपने पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के कस्टमर केयर से संपर्क करें.

– उन्हें ऑनलाइन ईमेल करें और साथ में सभी ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स भी अटैच करें.

– कंप्लेन नंबर और अपने कंप्लेन की कॉपी संभालकर रखें.

– उनके सोशल मीडिया हैंडल, जैसे- ट्विटर आदि के ज़रिए उन्हें शिकायत करें. अपनी इमेज के लिए वो जल्द से जल्द मामले को सुलझाने की कोशिश करते हैं.

– आपको अपने बैंक में जाकर एक फॉर्म भरना होगा, जिसके बाद वो ज़रूरी एक्शन लेंगे.

– आजकल ज़्यादातर वॉलेट्स अपने ऐप में ही ‘हेल्प’ सेगमेंट देते हैं, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर कस्टमर शिकायत कर सके.

–     अगर ऐप की तरफ़ से कोई समस्या नहीं होगी, तो वो आपको अपने बैंक से संपर्क करने के लिए कहेंगे. उसके बाद आपको अपने बैंक से फॉलोअप करना होगा.

–     शिकायत करने के बाद आपको 30 दिनों तक इंतज़ार करना होगा.

–     अगर 30 दिनों के भीतर उनकी तरफ़ से कोई जवाब न आए या फिर आपको संतोषजनक जवाब न मिले या फिर आपकी शिकायत अस्वीकृत हो जाए, तो एक साल के भीतर आप ओम्बड्समैन से शिकायत कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें: जानें डिजिटल पेमेंट्स की एबीसी (Different Methods And Benefits Of Digital Payments In India)

Digital Payments Tips

ओम्बड्समैन फॉर डिजिटल ट्रांज़ैक्शन्स

देश के 19 शहरों में रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच में ओम्बड्समैन नियुक्त किए गए हैं. स़िर्फ मुंबई और दिल्ली में दो-दो ओम्बड्समैन अपॉइन्ट किए गए हैं.

–     अपने शहर के ओम्बड्समैन के बारे में जानने के लिए आरबीआई की वेबसाइट पर जाएं. वहां आपको नाम, पता, ईमेल आईडी, टेलीफोन नंबर आदि की पूरी जानकारी मिल जाएगी.

–     कई ओम्बड्समैन को राज्यों के अलावा यूनियन टेरीटरीज़ और कुछ दूसरे राज्यों के शहर भी दिए गए हैं, इसलिए पहले लिस्ट में अपने शहर के ओम्बड्समैन को कंफर्म कर लें, तभी शिकायत करें.

–     आपको सर्विस प्रोवाइडर की तरफ़ से शिकायत अस्वीकृत हो जाने या कोई जवाब न आने की स्थिति में एक साल के भीतर ओम्बड्समैन को शिकायत करनी होगी, वरना आपकी शिकायत पर सुनवाई नहीं होगी.

–     आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि अगर आपका मामला पहले से किसी कोर्ट-कचहरी या आर्बिट्रेटर (मध्यस्थ) के पास है, तो ओम्बड्समैन आपकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं करेंगे.

–     अगर आप ख़ुद शिकायत नहीं कर सकते, तो किसी सहयोगी की मदद ले सकते हैं, पर वो वकील नहीं होना चाहिए.

–     ओम्बड्समैन पहले सेटलमेंट की कोशिश करते हैं, लेकिन अगर किसी तरह बात न बने, तो वो अपना फैसला देंगे.

–    ओम्बड्समैन कस्टमर को एक लाख से लेकर 20 लाख तक का मुआवज़ा दिला सकते हैं.

–     अगर आप ओम्बड्समैन के फैसले से ख़ुश नहीं हैं, तो 30 दिनों के भीतर आरबीआई के डेप्यूटी गर्वनर के सामने अपना मामला रख सकते हैं.

जब हो नेट बैंकिंग ट्रांसफर में गड़बड़ी

जब भी हम नेट बैंकिंग के ज़रिए किसी वॉलेट में पैसे जमा करते हैं, तो हमारे बैंक और उस वॉलेट के बीच एक पेमेंट गेटवे होता है, जो पैसे ट्रांसफर करता है. कभी-कभी सर्वर या नेटवर्क के प्रॉब्लम की वजह से भी पैसे अकाउंट से कट जाते हैं, पर वॉलेट में नहीं पहुंचते, ऐसे में आपको दो दिनों तक इंतज़ार करना चाहिए. आमतौर पर दो दिनों के
भीतर बैंक में पैसे वापस आ जाते हैं, लेकिन अगर नहीं आते, तो आपको तुरंत वॉलेट के कस्टमर केयर में संपर्क करना चाहिए.

जब हो कार्ड के ज़रिए पेमेंट में गड़बड़ी

अगर आप डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके पेमेंट कर रहे हैं और वहां पैसे अटक जाते हैं, तो आपको सात दिनों का इंतज़ार करना होगा. शिकायत की प्रक्रिया वही है, जो नेट बैंकिंग की है.

सतर्क रहें व स्मार्ट बनें

–     किसी भी तरह का ट्रांज़ैक्शन करते व़क्त सतर्क रहें, अगर कहीं कोई गड़बड़ी हो, तो तुरंत एक्शन लें.

–     अपने कार्ड और नेट बैंकिंग पासवर्ड व डिटेल्स संभालकर रखें.

–     अपने बैंक अकाउंट को वॉलेट से लिंक करने की बजाय हमेशा वॉलेट में ही कुछ पैसे जमा रखें, ताकि वॉलेट से ही आसानी से पेमेंट हो जाए और हर बार बैंक अकाउंट तक न जाना पड़े.

–     वॉलेट में पैसे रखने से आपका काम सुविधाजनक तरी़के से हो जाता है और हैकर्स को आपके अकाउंट के डीटेल्स भी नहीं मिलते.

–    नेट बैंकिंग व डेबिट कार्ड के पासवर्ड अलग-अलग रखें और समय-समय पर बदलते भी रहें.

–     अपने मोबाइल पर कोई भी ऐप डाउनलोड करते समय ध्यान रखें कि उसके साथ कोई मालवेयर न आ जाए, वरना वो आपके मोबाइल की सारी ज़रूरी जानकारी चुरा सकता है.

–     अगर मुमकिन हो, तो अलग-अलग वॉलेट्स के लिए अलग-अलग ईमेल आईडी का इस्तेमाल करें.

–    इस्तेमाल करने के बाद ई-वॉलेट से लॉगआउट करें, वरना मोबाइल खोने या चोरी होने पर धोखाधड़ी का डर रहता है.

– सुनीता सिंह   

यह भी पढ़ें:  इन 10 तरीक़ों से अपने स्लो मोबाइल को बनाएं फास्ट (10 Smart Tricks To Speed Up Your Android Phone)

आपके सफ़र का साथी ट्रैवल इंश्योरेंस (Why Travel Insurance Is Necessary For You?)

Travel Insurance

आपके सफ़र का साथी ट्रैवल इंश्योरेंस (Why Travel Insurance Is Necessary For You?)

छुट्टियों में अक्सर लोग परिवार सहित घूमने के लिए देश-विदेश की यात्रा पर निकल जाते हैं. यात्रा पर निकलने की तैयारी भी महीनों पहले शुरू हो जाती है, लेकिन इस दौरान वे ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी (Travel Insurance Policy) लेना ज़रूरी नहीं समझते हैं. नतीजतन यात्रा में होनेवाली परेशानियां सफ़र का सारा मज़ा ख़राब कर देती हैं. अगर आप भी अन्य लोगों की तरह अपने सफ़र का मज़ा किरकिरा नहीं करना चाहते हैं, तो ऐसे उठाएं ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी का लाभ.

क्यों कराएं ट्रैवल इंश्योरेंस?

  • विदेश यात्रा के दौरान मेडिकल ख़र्च आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में ट्रैवल इंश्योरेंस आपके लिए बहुत मददगार साबित होता है.
  • अगर आप अपनी विदेश यात्रा के दौरान होनेवाली परेशानियों, जैसे- ट्रिप रद्द होना, सामान खोना, विमान का दुर्घटनाग्रस्त होना आदि से बचना चाहते हैं, तो ऐसे में ट्रैवल इंश्योरेंस बहुत फ़ायदेमंद साबित होता है.
  • विदेश यात्रा के दौरान अगर आपका पासपोर्ट खो जाता है, तो इस स्थिति में ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी की सहायता से आप उस देश के दूतावास से डुप्लीकेट पासपोर्ट हासिल कर सकते हैं.

किससे कराएं ट्रैवल इंश्योरेंस?

सफ़र के लिए अगर ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी ख़रीद रहे हैं, तो जिस एयरलाइंस से आप टिकट बुक कर रहे हैं, उसी एयरलाइंस से यात्री ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी ले सकते हैं. इसके अलावा ट्रैवल एजेंट से भी यह इंश्योरेंस पॉलिसी ले सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि ट्रैवल एजेंट ऑथोराइज़्ड होना चाहिए.

ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी ख़रीदने से पहले रखें कुछ बातों का ध्यान

  • ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी कई तरह की होती हैं, जैसे- सोलो ट्रिप, मल्टी ट्रिप, सालभर घूमने के लिए जाना आदि. यदि आप सोलो ट्रिप पर जा रहे हैं, तो ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय इस बात का ध्यान रखें कि पॉलिसी लेने की अवधि यात्रा की अवधि से कम नहीं हो.
  • पॉलिसी लेते समय इस बात का ध्यान रखें कि यदि किसी कारण से यात्रा में देरी हो रही हो, तो तब तक ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी एक्सपायर न हो जाए.
  • यात्रा पर निकलने से पहले यात्री यानी बीमाकर्ता इंश्योरेंस कंपनी से जांच-पड़ताल कर लें कि वे उस डेस्टिनेशन को कवर करते हैं या नहीं, जहां वे घूमने के लिए जा रहे हैं.
  • ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी ख़रीदते समय अगर बीमाकर्ता या उनके पारिवारिक सदस्य को पहले से ही कोई बीमारी है, तो उसके बारे में बीमा कंपनी को अवगत कराए, क्योंकि ट्रैवल इंश्योरेंस कंपनियां पहले से होनेवाली बीमारियों को कवर नहीं करती हैं. ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी में केवल कुछ जानलेवा बीमारियों को ही कवर किया जाता है.
  • बीमाकर्ता को चाहिए कि वह तय डेस्टिनेशन के अलावा उन सुविधाओं की भी एक लिस्ट बनाए, जिन पर वह एक तय राशि क्लेम कर सकता है.
  • यदि यात्री किसी ऐसी जगह पर घूमने के लिए जा रहे हैं, जो शेंगेन अप्रूव्ड (Schengen Approved) है, तो यात्री को बीमा कंपनी से यह ज़रूर पूछना चाहिए कि ऐसे डेस्टिनेशन के लिए आपका ट्रैवल इंश्योरेंस वैध है या नहीं. शेंगेन अप्रूव्ड एरिया यानी कि यूरोपीय देशों द्वारा किया गया एक समझौता है, जो यात्रियों को उन देश की सीमाओं के पार बिना पासपोर्ट के कहीं भी घूमने की अनुमति नहीं देता है. इस बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए यात्री वीएफएस वेबसाइट चेक कर सकते हैं.
  • बहुत सारे यात्री ऐसे विशेष ट्रैवल इंश्योरेंस की मांग करते हैं, जो किसी विशेष क्षेत्र के लिए हो. इन विशेष ट्रैवल इंश्योरेंस योजनाओं की कीमत उस विशेष क्षेत्र के चिकित्सा उपचार की लागत को ध्यान में रखते हुए या फिर अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए तय की जाती है.
  • बीमा पॉलिसी के दस्तावेज़ों पर एक कस्टमर केयर हेल्पलाइन नंबर दिया होता है. अगर यात्री को बीमा पॉलिसी संबंधी किसी तरह की पूछताछ करनी है, तो वह इस कस्टमर केयर पर फोन करके सारी जानकारी हासिल कर सकता है.
  • यात्री को पॉलिसी क्लेम करने की समयसीमा का ध्यान रखना चाहिए. वह केवल तय या सीमित समयसीमा के भीतर ही क्लेम कर सकता है, पॉलिसी ख़त्म होने के बाद नहीं. यदि बीमा कंपनी किसी लोकल सर्विस प्रोवाइडर के साथ टाइ-अप करती है, तो उस स्थिति में यात्री पॉलिसी के कॉन्ट्रैक्ट में दिए गए निर्देेशों को ध्यान में रखें.
  • ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से पहले यात्री पॉलिसी के कॉन्ट्रैक्ट को अच्छी तरह से पढ़ लें कि उसमें क्या-क्या सुविधाएं शामिल की गई हैं. उदाहरण के लिए- बहुत-सी बीमा कंपनियां एडवेंचर स्पोर्ट्स और ऐसे खेलों को कवर नहीं करती हैं, जिनमें नेचुरल डेथ होने का संभावना होती है. इन सब नियम-निर्देशों जानने के बाद ही यात्री ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी लें.

ऑनलाइन ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी भी लेना है आसान

अगर आप टेक्नो फ्रेंडली हैं, तो आपके लिए ऑनलाइन ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी लेना बहुत आसान है. कुछ ही मिनटों में सारी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी करके आप ट्रैवल इंश्योरेंस ले सकते हैं. ऑनलाइन ट्रैवल इंश्योरेंस इंस्टेंट प्रोसीज़र है, जिसे आप अपनी यात्रा शुरू करने से पहले हवाई अड्डे पर मौजूद रहकर भी पूरा कर सकते हैं.

यात्री क्या-क्या कवर कर सकते हैं ट्रैवल इंश्योरेंस में?

  1. उड़ानों में देरी होना या उनके कैंसल होने पर यात्रा में देरी होती है. ऐसी स्थिति में ट्रैवल इंश्योरेंस बहुत मददगार साबित होता है.
  2. यात्रा में देरी होने के अलावा उस दौरान खाने-पीने में होनेवाले ख़र्च और होटल में रुकने का ख़र्च भी ट्रैवल इंश्योरेंस में कवर होता है.
  3. सफ़र में अगर किसी यात्री का सामान खो जाता है या चोरी हो जाता है, तो इसे भी ट्रैवल इंश्योरेंस में कवर किया जाता है.
  4. यात्रा के दौरान यदि परिवार का कोई सदस्य बीमार पड़ जाता है या किसी का एक्सीडेंट हो जाता है, तो अस्पताल का सारा ख़र्च, जैसे- अस्पताल का बिल, डॉक्टर की फीस, मेडिकल जांच (एक्स-रे आदि) के बिल भी ट्रैवल इंश्योरेंस में कवर होता है.
  5. यात्रा के दौरान यदि किसी यात्री की मृत्यु हो जाती है, तो इस स्थिति को भी ट्रैवल इंश्योरेंस में कवर किया जा सकता है. जिन परिस्थितियों में यात्री की मृत्यु होती है, उसी के अनुसार कवरेज मिलता है.

                                      – देवांश शर्मा

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कितना जानते हैं आप ‘नॉमिनी’ के बारे में? (Why You Must Appoint A Nominee?)

Why You Must Appoint A Nominee

जब भी हम बैंक में सेविंग्स अकाउंट खोलते हैं, म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करते हैं, प्रॉपर्टी/शेयर्स ख़रीदते हैं या फिर जीवन बीमा करवाते हैं, तो हर बार हमें ‘नॉमिनी’ अपॉइंट करना होता है. ज़्यादातर लोगों को यही ग़लतफ़हमी है कि उसकी मृत्यु के बाद सारी रक़म नॉमिनी को मिल जाएगी, जबकि ऐसा है नहीं. नॉमिनी स़िर्फ आपके पैसों का केयरटेकर होता है, न कि मालिक. तो क्यों ज़रूरी है नॉमिनी बनाना और क्या हैं उसके अधिकार, आइए जानते हैं.

Why You Must Appoint A Nominee

कौन है नॉमिनी?

क़ानूनन नॉमिनी वह व्यक्ति है, जो आपकी मृत्यु के बाद कंपनी से मिली रक़म को आपके क़ानूनी वारिसों तक पहुंचाता है. वह क़ानूनन उस रक़म का मालिक नहीं होता, स़िर्फ एक ट्रस्ट होता है. सरल शब्दों में कहें, तो नॉमिनी एक केयरटेकर की तरह होता है, जो हमारे न रहने पर हमारी जमा-पूंजी को हमारे अपनों तक पहुंचाता है.

– अगर आपके अकाउंट के जॉइंट होल्डर्स हैं या फिर आपने वसीयत बनाई है, तो वसीयत के मुताबिक़ सारी जमा-पूंजी आपके क़ानूनी वारिस में बांट दी जाएगी. पर अगर आपने अपने क़ानूनी वारिस को ही अपना नॉमिनी बनाया है, तो उसके लिए चीज़ें आसान हो जाती हैं.

– मान लीजिए कि आपने अपनी पत्नी को सब जगह नॉमिनी बनाया है और वह आपकी क़ानूनी वारिस भी है, पर आपकी मृत्यु के बाद सब कुछ उसी को नहीं मिलेगा, जो भी आपकी जमा-पूंजी होगी, वह आपकी पत्नी और बच्चों में बराबर बंटेगी, लेकिन अगर आपने अपनी वसीयत में यह लिख दिया है कि मेरी पत्नी को फलां-फलां हिस्सा मिलेगा, तो क़ानूनन बाध्य हो जाता है, जिस पर आपके बच्चे क्लेम नहीं कर सकते.

क्या है नॉमिनी का रोल व अधिकार? 

नॉमिनी का अहम् रोल उस व्यक्ति की मृत्यु के बाद ही शुरू होता है. इंश्योरेंस कंपनी से इंश्योरेंस के पैसे निकालना बहुत ही पेचीदा होता है. कई क़ानूनी दस्तावेज़ों के बावजूद कई बार पैसा लंबे समय तक अटका रहता है, ऐसे में नॉमिनी के रहने से यह प्रक्रिया आसान हो जाती है. नॉमिनी बनाए ही इसीलिए जाते हैं, ताकि आपके न रहने पर आपके अपनों को इन क़ानूनी झंझटों का सामना न करना पड़े.

किसे और कैसे करें अपॉइंट?

आप अपने परिवार के किसी सदस्य, दोस्त या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को नॉमिनी अपॉइंट कर सकते हैं. जब भी आप प्रॉपर्टी, इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड्स, स्टॉक्स, बैंक डिपॉज़िट्स आदि में इन्वेस्ट करते हैं, तो आपको एप्लीकेशन के साथ-साथ एक और फॉर्म दिया जाता है, जहां आप अपने नॉमिनी के बारे में जानकारी देते हैं. कहीं-कहीं इसके लिए 1 या 2 गवाहों की ज़रूरत भी पड़ती है.

कहां-कहां बनाते हैं नॉमिनी?

जीवन बीमा: पॉलिसी होल्डर अपने माता/पिता, पति/पत्नी या फिर बच्चों को नॉमिनी बनाते हैं, तो  वो अपने आप बेनीफीशियल नॉमिनी बन जाते हैं. इसलिए जीवन बीमा में हमेशा अपने क़ानूनी वारिस को ही नॉमिनी बनाएं. इसमें आप एक से ज़्यादा नॉमिनी अपॉइंट कर सकते हैं.

बैंक अकाउंट: बैंक डिपॉज़िट अकाउंट या फिर लॉकर अकाउंट के लिए भी अपने किसी क़रीबी को नॉमिनी बना सकते हैं. यहां पर एक छूट है कि आप अपने किसी भरोसेमंद दोस्त को भी अपना नॉमिनी बना सकते हैं, ज़रूरी नहीं कि वो आपका क़ानूनी वारिस ही हो. लेकिन आप किसी एक व्यक्ति को ही नॉमिनी बना सकते हैं. यहां मल्टीपल नॉमिनी का ऑप्शन नहीं है. अगर जॉइंट अकाउंट हो, तो दूसरे होल्डर को अमाउंट मिलेगा और उसके ना रहने पर नॉमिनी को.

फिक्स्ड डिपॉज़िट: एफडी में इन्वेस्ट करते समय भी आपको किसी को नॉमिनी बनाना पड़ता है. यहां भी केवल किसी एक व्यक्ति को ही नॉमिनी बनाया जा सकता है.

डीमैट अकाउंट: शेयर्स और सिक्योरिटीज़ के इन्वेस्टमेंट डीमैट अकाउंट के ज़रिए किए जाते हैं. इसके लिए आप मल्टीपल नॉमिनी नियुक्त कर सकते हैं. यहां नॉमिनी स़िर्फ केयरटेकर नहीं, बल्कि मालिक होता है. उसे क़ानूनी वारिस को शेयर्स ट्रांसफर नहीं करने होते.

म्यूचुअल फंड: यहां आप तीन लोगों को अपना नॉमिनी बना सकते हैं. आप चाहें तो उनके लिए शेयर्स भी बांट सकते हैं. उदाहरण के लिए आप अपनी पत्नी और दो बच्चों को नॉमिनी बना सकते हैं. पत्नी को 50% और बच्चों को 25-25% शेयर्स दे सकते हैं.

प्रॉपर्टी: प्रॉपर्टी के मामले में वसीयत और सक्सेशन लॉ काम करते हैं, नॉमिनी की कोई ख़ास भूमिका नहीं होती. पर हां, अगर आप किसी कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में रहते हैं, तो आपको नॉमिनी नियुक्त करना ज़रूरी होता है, क्योंकि सोसाइटी में आप किसी एक फ्लैट में रहते हैं, जो एक बड़ी यूनिट है. इसलिए यहां नॉमिनी बनाना ज़रूरी हो जाता है.

और भी पढ़ें: जानें बैंकिंग के स्मार्ट ऑप्शन्स

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नॉमिनी से जुड़े 5 ज़रूरी सवाल-जवाब

नॉमिनी अपॉइंट करते समय आपके ज़ेहन में भी कई सवाल आएंगे, इसलिए ज़रूरी है कि पहले उन सभी सवालों को सुलझा लें.

1. क्या नाबालिग नॉमिनी बन सकता है?

जी हां, 18 साल से कम उम्रवाले को भी नॉमिनी बनाया जा सकता है, लेकिन उसके साथ आपको कोई गार्जियन भी अपॉइंट करना पड़ेगा. उदाहरण के लिए आप अपने बच्चे को अपना नॉमिनी बनाकर पत्नी को गार्जियन बना सकते हैं. और चूंकि दोनों ही आपके क़ानूनी वारिस हैं, तो आपके जाने के बाद कोई क़ानूनी समस्या भी नहीं आएगी.

2. क्या एक से ज़्यादा नॉमिनी हो सकते हैं?

आप चाहें, तो एक से ज़्यादा लोगों को अपना नॉमिनी बना सकते हैं और अगर चाहें तो उनके लिए शेयर्स भी बांट सकते हैं.

3. क्या नॉमिनी बदल सकते हैं?

आप जब चाहें, जितनी बार चाहें नॉमिनी बदल सकते हैं. इसके लिए आपको स़िर्फ एक फॉर्म भरकर देना होगा और आपका नॉमिनी बदल जाएगा. यह पूरी तरह आपका अधिकार है.

4. नॉमिनी बनाने पर भी क्या वसीयत बनानी ज़रूरी है?

बिल्कुल. नॉमिनी सिर्फ़ आपकी संपत्ति का रखवाला है, लेकिन उसका मालिक वही होता है, जिसको आपने अपनी वसीयत में अधिकार दिया है. मान लीजिए कि आपने अपनी जीवन बीमा में मां को नॉमिनी बनाया, तो आपके न रहने पर मां को बीमा की सारी रक़म मिलेगी, पर वो उन्हें आपकी पत्नी और बच्चों के साथ बांटनी होगी और अगर आपने अपनी वसीयत में वो रक़म मां के नाम लिखी है, तो उस पर स़िर्फ मां का अधिकार होगा, इसलिए नॉमिनी के साथ-साथ वसीयत बनानी भी बहुत ज़रूरी है.

5. वसीयत न होने पर नॉमिनी संपत्ति किसे देगा?

ऐसे भी कई मामले सामने आते हैं, जहां नॉमिनी तो बना दिया जाता है, पर व्यक्ति की कोई वसीयत नहीं होती, ऐसे में उस संपत्ति का बंटवारा इंडियन सक्सेशन लॉ, हिंदू लॉ और मोहम्मडन लॉ के अनुसार किया जाता है.

जानें अपने रेलवे इंश्योरेंस नॉमिनी को भी 

– हमारे देश में एक बहुत बड़ा तबका रेलवे से सफ़र करता है, पर यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि रेलवे किसी भी तरह के हादसे के व़क्त लोगों को इंश्योरेंस देता है.

– आईआरसीटीसी की वेबसाइट से जब आप टिकट बुक करते हैं, तो अंत में इंश्योरेंस का एक कॉलम होता है, जिसे बहुत से लोग अनदेखा कर देते हैं. इंश्योरेंस पर टिक करने से आपके खाते से महज़ 95 पैसे इंश्योरेंस में जाते हैं, पर आपको 10 लाख तक का इंश्योरेंस कवर मिलता है.

– यहां भी आपको नॉमिनी सिलेक्ट करना ज़रूरी होता है.

– आईआरसीटीसी की तरफ़ से आपको नॉमिनेशन के लिए मैसेज भी आता है, जिसके लिंक पर जाकर आपको अपना नॉमिनी नियुक्त करना होता है.

– हालांकि यह सुविधा 5 साल से छोटे बच्चों और विदेशी पर्यटकों के लिए नहीं है.

– अगर हादसे में व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, तो 10 लाख रुपए, परमानेंट या पार्शियल डिसेबिलिटी के लिए 7.5 लाख और हॉस्पिटलाइज़ेशन के लिए 2 लाख का कवर मिलता है.

– सबसे ज़रूरी बात नॉमिनी को हादसे के 4 महीने के भीतर इंश्योरेंस क्लेम करना होता है.

– अनीता सिंह

और भी पढ़ें: क्या आप में है बैंक संबंधी अच्छी आदतें?

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गुड न्यूज़: बढ़ गई है आधार-पैन लिंकिंग की तारीख़ (Aadhar-PAN Linking Date Extended to 31st March, 2018)

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जो लोग अभी तक अपने आधार कार्ड (Aadhar card) को पैन (Pan card) कार्ड से लिंक नहीं कर पाए हैं, उनके लिए सरकार की तरफ़ से बड़ी राहत और ख़ुशख़बरी आई है. उनके लिए लिंकिंग की डेट बढ़ाकर 31 मार्च 2018 कर दी गई है यानी अभी आपके पास पूरे 4 महीने हैं, अपना आधार और पैन कार्ड लिंक करने के लिए.

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वित्त मंत्रालय ने ट्वीट करते हुए कहा कि बहुत-से टैक्स पेयर्स अभी भी आधार कार्ड को पैन से लिंक नहीं कर पाए हैं, इसलिए उनकी सहूलियक को ध्यान में रखते हुए, केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया है.

यह भी पढ़ें: जानें पीपीएफ से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण बातें

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आपको बता कि हाल ही आधार कार्ड को पैन कार्ड के साथ-साथ सभी ज़रूरी सुविधाएं के लिए मोबाइल आदि से लिंक करना अनिवार्य बताया गया था, पर बहुत-से लोग अभी भी इस प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाए हैं, जिसको ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है. आधार कार्ड को अनिवार्य बनाए जाने का विरोध कुछ लोगों ने किया था, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट में इसके लिए बेंच बैठाई गई थी, ताकि किसी को भी इस फैसले के कारण असुविधा न हो.

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आपको बता दें कि अब तक लिंकिंग कि यह तारीख़ 21 दिसंबर, 2018 थी. साथ ही आपको याद दिला दें कि सिम कार्ड के साथ आधार लिंकिंग की डेट 6 फरवरी २०१८ है. सरकार के इस फैसले से बहुतों को राहत मिलेगी और आधार-पैन कार्ड लिंकिंग की प्रकिया भी समय से पूरी हो जाएगी, ऐसी उम्मीद है.

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महिला उद्यमियों के लिए बेस्ट 7 लोन सुविधाएं (7 best loan schemes for woman Entrepreneurs)

महिला उद्यमियों के लिए बेस्ट 7 लोन सुविधाएं


बिज़नेस के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने व उनकी आर्थिक स्थिति को मज़बूत बनाने के लिए ज़्यादातर बैंक समय-समय पर आकर्षक योजनाएं लॉन्च करते ही रहते हैं. ऐसी ही कुछ बेहतरीन योजनाओं के बारे में हम विस्तार से बता रहे हैं:

महिला उद्यमियों के लिए बेस्ट 7 लोन सुविधाएं
अन्नपूर्णा योजना

इस योजना के तहत फूड केटरिंग क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं को लोन दिया जाता है. इसमें अधिकतम 50 हज़ार तक का लोन मिलता है, जिसकी समयावधि तीन साल है. ग्राहकों की सहूलियत के लिए बैंक लोन देने के बाद एक महीना ङ्गईएमआई फ्रीफ की सुविधा देते हैं. इसमें आपको गारंटर और कोलैटरल सिक्योरिटी की ज़रूरत पड़ती है. ब्याज दर मार्केट रेट के अनुसार होगी.

स्त्री शक्ति पैकेज

यह पैकेज उन महिलाओं के लिए है, जो किसी फर्म या बिज़नेस में 50% मालिकाना हक़ रखती हैं. अगर आप 2 लाख से अधिक लोन लेती हैं, तो मौजूदा ब्याज दर में आपको 0.5% की छूट दी जाती है. राज्य स्तर की एंटरप्रेनरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम्स में हिस्सा लेनेवाली महिलाएं ही आवेदन कर सकती हैं.

देना शक्ति योजना:

देना बैंक की यह योजना ख़ासतौर से महिला उद्यमियों के लिए है. इस योजना के तहत महिलाएं खेती, उत्पादन, रिटेल स्टोर व लघु उद्योग के लिए लोन ले सकती हैं. इसमें उन्हें 0.25% ब्याज दर में छूट मिलती है.

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उद्योगिनी योजना

पंजाब और सिंध बैंक की यह योजना है. इसके तहत महिलाओं को लोन कम ब्याज दर में मिलता है और नियम-शर्तों में भी काफ़ी छूट मिलती है.

सेंट कल्याणी योजना

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की यह योजना है. इसके तहत सरकार द्वारा जारी कार्यक्रमों, ग्रामीण इलाकों में कुटीर उद्योग, कृषि उद्योग, हैंडलूम-हैंडीक्राफ्ट, ब्यूटीपार्लर, डे केयर सेंटर, रिटेल व्यवसाय से जुड़ी महिलाओं को आसानी से लोन मिलता है. हर क्षेत्र का ब्याज दर अलग है और मार्केट रेट पर निर्धारित होता है.

महिला उद्यम निधि योजना

लघु उद्योग को बढ़ावा देनेवाला यह लोन पंजाब नेशनल बैंक द्वारा दिया जाता है. इसके तहत आपको 10 लाख तक का लोन मिल सकता है, जिसे 10 साल के भीतर भरना होता है. ज़्यादातर योजनाओं की तरह इसका ब्याज दर भी मार्केट रेट पर आधारित होता है, जो समय-समय पर बदलता रहता है. ब्यूटीपार्लर, डे केयर सेंटर, ऑटोरिक्शा, टू व्हीलर या कार के लिए स्पेशल लोन की सुविधाएं हैं.
– इनके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा की अक्षय महिला आर्थिक सहाय योजना और पंजाब नेशनल बैंक की महिला समृद्धि योजना, महिला उद्यम निधि योजना, महिला सशक्तिकरण योजना और ओरिएंटल बैंक व भारतीय महिला बैंक द्वारा जारी लोन योजनाएं हैं.

लघु उद्यमी क्रेडिट कार्ड

व्यापारियों को लुभाने के लिए बैंक कुछ न कुछ नया लेकर आते ही रहते हैं. इसी कड़ी में कई बैंक लघु उद्यमी क्रेडिट कार्ड लेकर आए हैं. इसकी मदद ने बिज़नेस की शुरुआत को और भी आसान बना दिया है. कई बैंक ये सुविधा देते हैं, सभी के बारे में जानकारी लेकर आप अपनी सहूलियत के मुताबिक़ क्रेडिट कार्ड ले सकते हैं.

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सुनीता सिंह

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कैसे बचें 9 बेसिक फाइनेंशियल ग़लतियों से? (Avoid 9 Basic Financial Mistakes)

Basic Financial Mistakes

Basic Financial Mistakes

फाइनेंस के बारे में ज़्यादातर लोगों को कई ज़रूरी बातें पता ही नहीं होतीं. ऐसे में अक्सर लोग कुछ ऐसी ग़लतियां कर बैठते हैं, जिनसे बड़ी आसानी से बचा जा सकता है. ऐसी ही कुछ ग़लतियों के बारे में हम आपको बता रहे हैं, ताकि आप ये ग़लतियां न करें. 

टाइमलाइन न बनाना

हर किसी को घर, मकान, बच्चों की पढ़ाई, शादी, रिटायरमेंट आदि के लिए बचत करनी होती है, पर ज़्यादातर लोग इनके लिए कोई टाइमलाइन नहीं बनाते, न ही किसी डायरी में लिखकर रखते हैं, जिससे उन्हें पता ही नहीं चलता कि किस काम के लिए कितनी सेविंग्स की ज़रूरत है.

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ख़र्च के बाद बचत करना

ज़्यादातर लोग सैलरी आने के बाद महीने का सारा बजट बनाकर ख़र्च का जुगाड़ करते हैं और अगर उसके बाद कुछ बचता है, तो बचत में रखते हैं, वरना उस महीने कोई सेविंग्स नहीं. जबकि होना ये चाहिए कि बचत के पैसे निकालकर रखने के बाद जो रक़म बचे, उसमें ख़र्च करें. इसके लिए कुछ सेविंग स्कीम्स लेना बेहतर होगा.

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दूसरों की देखादेखी करना

अक्सर दोस्तों या कलीग्स की देखादेखी हम कोई प्लान ले लेते हैं या किसी स्कीम में इन्वेस्ट करते हैं, पर यह ध्यान नहीं देते कि उसकी ज़रूरत हमें है भी या नहीं. अक्सर लोगों को बाद में अपनी भूल का एहसास होता है कि काश इसकी बजाय अपनी ज़रूरत के मुताबिक कोई और प्लान लिया होता, तो ज्यादा फ़ायदा होता. इसलिए देखादेखी न करें.

बढ़ती महंगाई को भूल जाना

आजकल हर कोई यह जुमला उछालता नज़र आता है कि जितनी तेज़ी से महंगाई बढ़ रही है, सैलेरी नहीं बढ़ रही. हम जब भी भविष्य में किसी चीज़ के लिए प्लान करते हैं, तो आज के प्रॉपर्टी रेट्स और टैक्सेस को ध्यान में रखते हैं, जबकि आमतौर पर महंगाई बढ़ती ही है और हमें उसी के अनुसार अमाउंट प्लान करना चाहिए.

बजट को फॉलो न करना

कुछ लोग बजट तो बना लेते हैं, पर उसे सही तरी़के से फॉलो नहीं कर पाते. ऐसे में कई फाइनेंशियल मामले डगमगा जाते हैं, इसलिए इस ओर लापरवाही न बरतें.

इमर्जेंसी फंड को अनदेखा करना

रोज़मर्रा की ज़िंदगी बेरोक-टोक सुचारु रूप से चलती रहे, इसलिए घर में एक इमर्जेंसी फंड ज़रूर बनाएं, जो मेडिकल से लेकर फाइनेंशियल सभी ज़रूरतों को पूरा कर सके. ऐसा न करने पर इमर्जेंसी के व़क्त आपको इधर-उधर उधार मांगना पड़ सकता है.

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प्रोफेशनल या एक्सपर्ट की सलाह न लेना

अक्सर लोग ख़ुद को ही एक्सपर्ट समझकर मामलों को निपटाने की कोशिश करते हैं. चाहे घर ख़रीदना-बेचना हो, लोन लेना हो या इंश्योरेंस- आपको प्रोफेशनल एक्सपर्ट की हमेशा मदद लेनी चाहिए.

फैमिली के साथ डिस्कस न करना

फाइनेंस से जुड़े मामले अक्सर पुरुष ही संभालते हैं. महिलाएं न तो इसमें दिलचस्पी लेती हैं, न ही पुरुष उन्हें इसमें शामिल करते हैं. भले ही आप सारा काम ख़ुद संभालें, पर फैमिली के साथ शेयर ज़रूर करें, ताकि उन्हें भी इन मामलों की जानकारी हो.

ज़रूरत के व़क्त कुआं खोदना

किसी भी काम को करने के लिए सही प्लानिंग की ज़रूरत होती है, जिसके लिए आपको पहले से ही सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट करना पड़ता है. जब ज़रूरत होगी, तब जुगाड़ लगाना शुरू करेंगे, तो कर्ज़ के अलावा आपके पास कुछ नहीं बचेगा.

         – रिद्धी चौहान

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जानें क्या-क्या लकी है जुलाई में जन्मे लोगों के लिए? (July Born: How Lucky You Are?)

 

anuska1अगर आपका जन्म भी जुलाई महिने में हुआ तो जानिए अपनी ख़ूबियों के बारे में विस्तार से. 

नेचर

इस माह में जन्मे लोग मेहनती होने के साथ-साथ टैलेंडेट भी होते हैैं. लाइफ के प्रति पॉज़िटिव एटीट्यूट रखते हैं, इसलिए छोटी-छोटी बातों में ख़ुश रहते हैं. स्वभाव से बहुत मेहनती होते हैं, लेकिन इनसे कोई भी काम ज़ोर-ज़बर्दस्ती से नहीं करा सकते. नए-नए दोस्त बनाना, फिल्में देखना और घूमना-फिरना इन्हें बहुत अच्छा लगता है.

रोमांस

केयरिंग नेचर होने के कारण बेस्ट लवर होते हैं, पर अपनी फीलिंग्स को शेयर करने में संकोच करते हैं. पार्टनर के प्रति बहुत इमोशनल और सेंसिटिव होते हैं, जिसकी वजह से इनकी मैरिड और सेक्सुअल लाइफ ख़ुशहाल होती है.

कैरियर

इस माह में जन्मे लोग इंटेलीजेंट और टैलेंटेड होते हैं. अपनी इच्छानुसार जिस भी कैरियर का चुनाव करते हैं, उसमें सफ़ल होते हैं. इनमें परखने की अच्छी क्षमता होती है, इसलिए शेयर मार्केट में अपना कैरियर बना सकते हैं. स्पोर्ट्स में भी इनकी बहुत रुचि होती है, चाहें तो अच्छे खिलाड़ी भी बन सकते हैं. इनमें अच्छा बिज़नेसमैन बनने के गुण होते हैं. इनमें लोकप्रिय ऐक्टर/ऐक्टर्स बनने की संभावना भी होती है.

फाइनेंस

जुलाई माह में जन्मे लोगों के लिए फाइनेंशियल सिक्युरिटी बहुत महत्वपूर्ण होती है. जितनी कुशलता से पैसे कमाते हैं, उतनी ही समझदारी के उसे इन्वेस्ट भी करते हैं. हालांकि ख़र्च करने से नहीं डरते, चाहे जेब में पैसे हों या न हों.

हेल्थ

जुलाई माह में जन्मे लोग अपनी हेल्थ के प्रति चिंतित रहते हैं, इसलिए अच्छी हेल्थ के लिए वेजीटेरियन फूड खाते हैं. इमोशनल होने के कारण इनका मूड स्विंग होता रहता है और आंखों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं.

पॉप्युलैरिटी

इस माह में जन्मे लोग बेहद लोकप्रिय होते हैं, जैस- सौरव गांगुली, महेंद्र सिंह धोनी, अजीम प्रेमजी, सोनू निगम, रणवीर सिंह, प्रियंका चोपड़ा आदि इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं.

फाइनेंशियली कितनी फिट हैं आप? (Are You Financially Fit?)

Financially Fit

Financially Fit

हेल्दी फाइनेंशियल लाइफ के लिए ज़रूरी है कि आप सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए निवेश करें. निवेश करने की यह आदत इस बात की ओर संकेत करती है कि आर्थिक रूप से आपकी वित्तीय स्थिति कितनी मज़बूत है. हम यहां पर फाइनेंशियल क्विज़ के माध्यम से आपकी वित्त संबंधी आदतों के बारे में कुछ सवाल पूछ रहे हैं. आपके जवाब बताएंगे कि फाइनेंशियली आप कितनी स्ट्रॉन्ग हैं.

मेरा इमर्जेंसी फंड मेरे सभी ख़र्चों को पूरा करेगा-
ए. 6 महीने या उससे अधिक.
बी. 3-5 महीने.
सी. 1-2 महीने.
डी. इमर्जेंसी फंड क्या होता है?

मैं बचत कर सकती हूं-
ए. अपनी आय का 50% से अधिक.
बी. अपनी आय का 25-50% तक.
सी. अपनी आय का 10-25% तक.
डी. मैं अपनी वर्तमान आय का बहुत थोड़ा हिस्सा ही बचत कर पाती हूं.

मेरे ज़रूरी मासिक बिलों का भुगतान-
ए. ऑटोमेटिकली मेरे बैंक अकाउंट से डेबिट हो जाते हैं.
बी. धीरे-धीरे महीने के अंत तक भुगतान कर देती हूं.
सी. अंतिम क्षणों में भुगतान करती हूं.
डी. अमूमन, मैं भुगतान की तारीख़ भूल जाती हूं.

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मुझ पर लोन का बोझ है-
ए. माफ़ कीजिए, मुझ पर कोई लोन नहीं है.
बी. रिपेमेंट के लिए मासिक आय के 30% से कम राशि का भुगतान करती हूं.
सी. मासिक आय का 40-50% राशि लोन के भुगतान में जाती है.
डी. अतीत में किए गए निवेश की मासिक किश्त के भुगतान का दायित्व है.

मैंने जीवन बीमा पॉलिसी ली है-
ए. मेरी वार्षिक आय से 8 गुना अधिक.
बी. मेरी वार्षिक आय से क़रीबन 1-2 गुना अधिक.
सी. मेरी वार्षिक आय से कम.
डी. मैंने कोई जीवन बीमा पॉलिसी नहीं ली है.

क्रेडिट कार्ड के बिलों का भुगतान-
ए. हर महीने पूरा भुगतान करती हूं.
बी. भुगतान करने में शायद ही कभी देरी की हो.
सी. साल में 1-2 बार देरी से भुगतान किया हो.
डी. अधिकतर देरी से भुगतान करती हूं, क्योंकि पूरी राशि का भुगतान एक साथ नहीं कर सकती.

मैं अपनी मंथली सेविंग्स में निवेश की राशि निकालती हूं-
ए. नियमित रूप से निकालती हूं.
बी. अमूमन निकाल ही लेती हूं.
सी. कभी-कभी निकालती हूं.
डी. कभी नहीं. बैंक में ही जमा करती हूं.

परिवार में मेडिकल इमर्जेंसी की स्थिति में सभी बिलों का रिटर्न मिल जाएगा-
ए. 5-10 लाख तक हेल्थ कवर के ज़रिए.
बी. मालिक/कंपनी द्वारा दिए गए मेडीक्लेम कवर के ज़रिए.
सी. अपने इमर्जेंसी फंड में से.
डी. मालूम नहीं, मैं कैसे इस फाइनेंशियल प्रॉब्लम से निपटूंगी.

मैं अधिकतर निवेश करती हूं-
ए. म्युचुअल फंड्स, जैसे- एसआईपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के ज़रिए.
बी. सुरक्षित निवेश, जैसे- रिकरिंग डिपॉज़िट्स, फिक्स डिपॉज़िट्स और पोस्ट ऑफिस मंथली इन्कम प्लान्स आदि.
सी. लोकप्रिय कंपनियों के शेयर्स में निवेश करके.
डी. वित्तीय वर्ष के अंत तक टैक्स बचाकर.

मेरा अधिकतर मासिक ख़र्च होता है-
ए. ज़रूरी ख़र्चे, जैसे- किराया, राशन, बिलों का भुगतान आदि.
बी. बुनियादी ख़र्चे और आकस्मिक ख़र्चे.
सी. एंटरटेनमेंट, मूवी, शॉपिंग और बाहर डिनर के लिए जाना.
डी. मेरा सोचना है कि ख़र्च करने के लिए ही तो कमाते हैं.

मैं स्टॉक मार्केट में निवेश करती हूं-
ए. लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट से मिलनेवाले अतिरिक्त फंड को.
बी. अन्य निवेशों से मिलनेवाले सरप्लस कैश को.
सी. कभी नहीं. मैं उन जगहों पर निवेश नहीं करती, जहां पर जोख़िम की संभावना अधिक होती है.
डी. स्टॉक मार्केट में केवल तभी निवेश करती हूं, जब मार्केट की स्थिति अच्छी होती है.

यह भी पढ़ें: रिटायर्मेंट को बेहतर बनाने के लिए कहां करें निवेश?

मेरा परिवार मेरी वसीयत के बारे में जानता है-
ए. हर पांच साल में वसीयत अपडेट करती हूं, यदि ज़िंदगी में कोई बदलाव न आए तो.
बी. कुछ साल पहले लिखी थी.
सी. वसीयत तभी लिखूंगी, जब मैं रिटायरमेंट के क़रीब होऊंगी.
डी. वसीयत के बारे में मैंने अभी तक सोचा नहीं.

स्कोर कार्ड

सभी सवालों के अपने जवाब पर टिक करके कैलकुलेट करें.
ए. 3 पॉइंट्स
बी. 2 पॉइंट्स
सी. 1 पॉइंट्स
डी. 0 पॉइंट्स

16 या 16 से कम पॉइंट्स-
यदि आपके पॉइंट्स उपरोक्त स्कोर से कम आते हैं, तो इसका अर्थ है कि आपको अपने व अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए फाइनेंशियली स्ट्रगल करने की आवश्यकता है. भविष्य के लिए आपको बचत करने की बहुत ज़रूरत है.

16-24 के बीच-
यदि आपका स्कोर 16-24 के बीच में है, तो आपकी फाइनेंशियल फिटनेस औसत है. अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए अपनी मनी सेविंग्स हैबिट्स को सुधारना होगा, ताकि कठिन परिस्थितियों में आपको पछताना न पड़े.

24-30 के बीच-
इसका अर्थ है कि आपकी फाइनेंशियल फिटनेस अच्छी है, लेकिन भविष्य के लिए और बचत करने की आवश्यकता है.

30 से अधिक-
आपकी फाइनेंशियल हेल्थ बहुत स्ट्रॉन्ग है, पर सिक्योर भविष्य के लिए ज़रूरी है कि आप समय-समय पर बचत करते रहें.

अधिक फाइनेंस आर्टिकल के लिए यहां क्लिक करें: FINANCE ARTICLES 

 – पूनम नागेंद्र शर्मा

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शादी से पहले ज़रूर पूछें ये 6 Important फाइनेंशियल सवाल(6 Most Important Money Talk You Need to Have Before Marriage)

Money Talk Before Marriagerelationship

शादी जीवन का सबसे अहम् फैसला होता है, जहां नए लोग, नए घर के साथ ही वैवाहिक ज़िंदगी के रूप में लड़कियों के लिए जीवन की एक नई शुरुआत भी होती है. उन्होंने भले ही अपना करियर बना लिया हो, आत्मनिर्भर हो गई हों, पर विवाह से पहले, उनके मन में भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर कई सवालों की कशमकश चलती रहती है. आइए जानते हैं, शादी से पहले मन में आनेवाले फ़ाइनेंशियल लाइफ़ (Money Talk Before Marriage) से जुड़े 6 महत्वपूर्ण सवालों के बारे में.

Money Talk Before Marriage
ज्वॉइंट अकाउंट खुलवाएं या अलग?

– शादी से पहले लड़कियों को सबसे ज़्यादा जो सवाल परेशान करता है, वह यह कि शादी के बाद दोनों ही अपना अलग-अलग सेविंग अकाउंट खोलें या ज्वॉइंट अकाउंट रखें.
– ज्वॉइंट अकाउंट की तरफ़ लड़कियों का झुकाव ़ज़्यादा होता है, क्योंकि वे सोचती हैं कि जब सब कुछ एक है, तो अकाउंट भी एक ही होना चाहिए.
– इसमें सबसे बड़ा फ़ायदा यह होता है कि यदि कभी अचानक पैसे की ज़रूरत पड़ जाए और दोनों में से एक व्यक्ति बाहर गया हो, तो दूसरे के साइन से पैसे निकाले जा सकते हैं और काम नहीं रुकता.
– लेकिन कई बार इसमें पैसों के हिसाब में गड़बड़ी होने से संबंधों में दरार आने का ख़तरा भी होता है.
– ऐसे में समझदारी इसी में है कि ज्वॉइंट अकाउंट खुलवाने के साथ-साथ, ख़ुद का एक अलग सेविंग अकाउंट भी खुलवाएं.
– यदि आप कामकाजी हैं, तो सैलरी का कुछ हिस्सा उसमें जमा कर सकती हैं, पर यदि हाउसवाइफ़ हैं, तो घर ख़र्च से की गई कुछ बचत उसमें जमा कर सकती हैं और ज़रूरत के वक़्त निकाल सकती हैं.
– ध्यान रहे कि अकाउंट का नॉमिनी जीवनसाथी को ही बनाएं.

उधार या लोन शेयर करूं या नहीं?

– शादी के बाद भावनात्मक रूप से भले ही ङ्गतेरे दुख अब मेरेफ की क़समें ली गई हों, पर जब उधार या लोन चुकाने की बारी आती है, तो कई बार सोच बदल जाती है.
– ऐसे में ख़ुद से सवाल करें कि क्या आप पार्टनर के ख़र्च को अपने अकाउंट से देने के लिए आर्थिक रूप से समर्थ या
तैयार हैं?
– यदि आप जवाब ङ्गहांफ चुनती हैं, तो आपको अपना इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो फिर से बनाना चाहिए.
– साथ ही यह भी देखना होगा कि आपका यह निर्णय आपके लक्ष्य को और आपके सपनों को प्रभावित न करे.

उत्तरदायित्व की ज़िम्मेदारी लें या नहीं?

– कई लोग उत्तरदायित्वों की ज़िम्मेदारी हंसी-ख़ुशी ले लेते हैं, तो कई लोग मुकर जाते हैं और ज़्यादातर लोग बीच का रास्ता चुनते हैं. ये सब बातें हमारी लाइफ़स्टाइल, परवरिश और मनी मैटर्स पर निर्भर करती हैं.

– यदि दोनों पार्टनर्स उत्तरदायित्वों के मामले में एकमत नहीं होते, तो भविष्य में कई अहम् निर्णय लेने में उन्हें समस्याएं आ सकती हैं, जैसे- कार के लिए लोन, बच्चों की पढ़ाई के लिए लोन, रिटायरमेंट के लिए निवेश या दूसरा घर ख़रीदने के लिए निवेश आदि.
– बेहतर होगा कि इन सब बातों के बारे में अच्छी तरह सोच-समझकर आपस में डिसकस करें और अपनी ज़िम्मेदारी उठाएं.

क्या पति-पत्नी दोनों का इंश्योरेंस करवाना चाहिए?

– अक्सर पति के लाइफ़ इंश्योरेंस को अधिक महत्व दिया जाता है.
– लेकिन इस बात का भी ख़्याल रखें कि पत्नी भी सभी चीज़ों में बराबर की हिस्सेदार होती है. अतः उसकी ज़िंदगी को सुरक्षित बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
– इसलिए एक सही इंश्योरेंस पॉलिसी लेना बहुत ज़रूरी होता है.

क्या हेल्थ पॉलिसी या मेडिक्लेम करवाना चाहिए?

– शादी के तुरंत बाद हेल्थ पॉलिसी अवश्य लें.
– जितनी जल्दी यानी कम उम्र में पॉलिसी लेंगे, प्रीमियम उतना ही कम देना पड़ेगा.
– इसके अलावा पत्नी की मेडिक्लेम पॉलिसी भी ली जा सकती है. इससे मेटरनिटी और मेडिकल संबंधी ख़र्च भी आसानी से कवर हो जाते हैं.

क्या हर जगह पार्टनर को नॉमिनी बनाना होगा या वसीयत बदलनी होगी?

– शादी के बाद काफ़ी वक़्त तो घूमने-फिरने, मौज-मस्ती में निकल जाता है और नॉमिनीवाली बात याद ही नहीं रहती.
– इन बातों में देरी न करें. ऑफ़िस के प्रॉविडेंट फंड, बैंक अकाउंट्स और अन्य इनवेस्टमेंट वाली जगहों पर, जहां पहले आपने परिवार के किसी अन्य सदस्य को नॉमिनी बनाया है, उपयुक्त जगहों पर बदलकर पार्टनर का नाम डलवा दें.
– कई बार नॉमिनी बदलने में होनेवाली देरी अनेक परेशानियों को जन्म दे सकती है.
– यदि कभी कोई दुर्घटना घट जाए, तो पत्नी को पैसे नहीं मिल पाते, जिसकी वह हक़दार है. अतः इस काम को प्राथमिकता देते हुए पहले करें.
– यदि दूसरा विवाह है, तो यह सोचना होगा कि पहले विवाह से हुए बच्चों को उनका हक़ मिल सके और नए फैमिली मेंबर्स के साथ भी अन्याय न हो. अतः हरेक निर्णय सोच-समझकर लें.
बेहतर होगा कि मन में उठ रहे हर सवाल का जवाब पहले ख़ुद से मांगें और फिर खुले दिल से पार्टनर के साथ डिसकस करें और तभी अपनी फ़ाइनेंशियल प्लानिंग करें.

 

20 Tips: शादी से पहले करें शादी के बाद की तैयारियां (20 Smart Pre Marriage Preparations For Couples)

कैश ट्रांजेक्शन पर लगेगा 150 का जुर्माना एटीएम पर कोई चार्ज नहीं (You have to pay 150 as cash transaction fees Not on Atm Withdrawal )

कैश ट्रांजेक्शन

कैश ट्रांजेक्शन

बैंकिंग सेक्टर में कुछ नए बदलाव शुरू किए गए हैं. सरकारी दिशा निर्देश के अनुसार बैंक अपनी कार्यप्रणाली में कई फेरबदल कर रहे हैं. इनमें से एक ख़बर आपको हैरान कर सकती है.  आइए, देखते हैं कि क्या है पूरी ख़बर.

डिजिटल ट्रांज़ैक्शन को बढ़ावा देने के सरकार की मुहिम के तहत ग्राहकों को बैंकों से अपने ही पैसे निकालने के लिए मोटी फीस देनी होगी. कैशलेस व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए 1 मार्च से बैंकिंग नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं. निजी बैंकों ने लेन-देन पर चार्ज वसूलने की तैयारी कर ली है. 1 मार्च से चार ट्रांज़ैक्शन के बाद 150 रुपए तक का सर्विस चार्ज वसूला जाएगा. एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक ने नए नियम को लागू करने का फैसला किया है. ऐसा लोगों को कैश का कम इस्तेमाल करने के लिए किया गया है.

एचडीएफसी बैंक का नियम
अगर आप एचडीएफसी बैंक के ग्राहक हैं, तो बता दें कि 4 बार जमा-निकासी पर किसी तरह कोई चार्ज नहीं लगेगा. इसके बाद हर जमा-निकासी पर 150 रुपए सर्विस चार्ज देना होगा.

एक्सिस बैंक भी वसूलेगा एक्स्ट्रा पैसा
एक्सिस बैंक के ग्राहक होम ब्रांच से एक महीने में एक लाख रुपए तक जमा और निकासी कर सकते हैं. इसके अलावा 5 लेनदेन पर 150 रुपए सर्विस चार्ज देना होगा. इतना ही नहीं इसके बाद हर लेनदेन पर हर 1000 5 रुपए या न्यूनतम चार्ज 150 देने होंगे.

आईसीआईसीआई बैंक
होम ब्रांच में चार से ज्यादा कैश ट्रांज़ैक्शन्स (जमा और निकासी) पर कम-से-कम 150 रुपए चार्ज किया जाएगा.

कैसा होगा एसबीआई का नियम?
अगर आप का सेविंग अकाउंट भारतीय स्टेट बैंक में है, तो आप माह में तीन बार ही कैश ट्रांज़ैक्शन फ्री में कर पाएंगे. वैसे भी अन्य बैंकों की तुलना में इस बैंक में हमेशा ग्राहकों की लंबी लाइन लगती है. लोगों का विश्‍वास इस बैंक पर ज़्यादा होता है. एसबीआई में अकाउंट होने पर होम ब्रांच में इससे अधिक कैश ट्रांज़ैक्शन करने पर आपको प्रति ट्रांज़ैक्शन 50 रुपए और सर्विस चार्ज देना होगा. आपके लिए अभी एक महीने की फुर्सत है. भारतीय स्टेट बैंक ने 1 अप्रैल 2017 से यह नियम लागू करने का फैसला किया है.

एटीएम के नियम में कोई बदलाव नहीं

भले ही बैंक से निकासी पर चार्ज लगाया जाएगा, लेकिन एटीएम से पैसे निकालने पर किसी तरह का कोई चार्ज नहीं लगेगा. अफवाहों पर विश्‍वास न करें. वहीं दूसरी ओर, अगर आप मुफ्त ट्रांजेक्शन के बाद पैसे निकालने के लिए कोई ट्रांजेक्शन करते हैं, तो आपको 20 रुपए प्रति ट्रांजेक्शन का चार्ज देना होगा. वहीं दूसरी ओर अगर ट्रांजेक्शन नॉन-फाइनेंशियल है तो आप पर 8.5 रुपए का चार्ज लगेगा. इसके अलावा आपको 150 रुपए एटीएम के लिए नहीं गेने होंगे. ये पूरी तरह से बैंक में निकासी और जमा पर ही लगेंगे. आप पहले की ही तरह एटीएम से पैसे निकाल सकते हैं.

श्वेता सिंह

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