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7 बैड मनी हैबिट्स (7 Bad Money Habits)

Bad Money Habits

जिस तरह से आपका स्टाइल आपकी पर्सनेलिटी को दर्शाता है, उसी तरह से आपकी वित्त संबंधी मामलों से जुड़ी आदतें भी आपके स्ट्रॉन्ग फाइनेंशियल फिटनेस और पॉजिशन्स की ओर संकेत करती हैं. यही संकेत सुरक्षित भविष्य की नींव है, लेकिन सुरक्षित भविष्य के लिए ज़रूरी है कि आप अपनी बैड मनी हैबिट्स को छोड़ें. हम यहां पर ऐसी बैड मनी हैबिट्स के बारे में बता रहे हैं, जिनसे आप आसानी से छुटकारा पा सकते हैं.

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बैड मनी हैबिट: आय कम और फ़िज़ूलख़र्ची ज़्यादा.

हेल्दी ट्रिक्स:

  • फ़िज़ूलख़र्च से बचने के लिए अपने मासिक खर्च की लिस्ट बनाएं.
    इस लिस्ट में ज़रूरी ख़र्च और ग़ैरज़रूरी ख़र्चों को लिखें.
  •  खर्चों की प्राथमिकताएं तय करें. ऐसा करने से आप बहुत से ग़ैरज़रूरी ख़र्चो से बचेगें.
  •  ग़ैरज़रूरी ख़र्चों को भविष्य के लिए टाल दें.
  • फ़िज़ूलख़र्ची की आदत को कंट्रोल करने की कोशिश करें.
  •  ऐसा करने से आपको सप्ताह और महीने में होनेवाले ख़र्च की सही जानकारी का अनुमान लगेगा.
  •  लिस्ट बनाना थोड़ा बोरिंग होता है, लेकिन इससे अपनी आदत में ज़रूर शामिल करें.
  •  अपना मंथली बजट इस तरह से बनाएं कि सीमित आय में ही सारे ख़र्च पूरे हों.
  • यदि आय कम है और ख़र्चे ज़्यादा हैं, तो ख़र्चों को पूरा करने के लिए आय बढ़ाने के उपाय करें.

बैड मनी हैबिट्स: वित्तीय निर्णयों को भविष्य के लिए टालना.

हेल्दी ट्रिक्स: 

  • ‘अभी पैसा नहीं है’ या ‘भविष्य में ऐसा करेंगे, वैसा करेंगे’ वाली नीति अपनाएंगे, तो कभी भी बचत नहीं कर पाएंगें.
  •  ग़ैरज़रूरी ख़र्च या फ़िज़ूलख़र्च के कारण वित्त ़फैसलों को आगे के लिए न टालें.
  • वित्तीय फैसलों को टालने से आपको वित्तीय नुक़सान भी उठाना पड़ सकता है. इसलिए अपनी इस आदत का छोड़ने की कोशिश करें.
  • अपनी इस आदत के कारण आप अनेक ऐसी अच्छी योजनाओं में निवेश करने से रह जाएंगे, जिनमें अधिक लाभ मिलेगा.
  • यदि किसी योजना में निवेश करना चाहते हैं, तो तुरंत करें, लापरवाही न बरतें.

बैड मनी हैबिट्: लोन ज़रूरत या बुरी आदत.

हेल्दी ट्रिक्स:

  • लोन ले रहे हैं, तो गंभीरता से इस विषय पर विचार करें कि लोन लेना ज़रूरी है कि नहीं? बिना लोन के भी काम चल सकता है या नहीं.
  • याद रखें, लोन आपकी बेसिक ज़रूरतों (घर ख़रीदना, बच्चों की पढ़ाई या शादी आदि जैसे ख़र्चों) को पूरा करने का एक विकल्प है. इसे बुरी आदत न बनाएं.
  •  लाइफस्टाइल संबंधी ज़रूरतों या अनावश्यक ख़र्चों को पूरा करने के लिए बार-बार लोन लेने से बचें.
  • बार-बार लोन न लेना पड़े, इसलिए समय-समय पर बचत करते रहें.
  • लगातार लोन लेने से भी मार्केट में आपकी छवि ख़राब होगी.

 

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बैड मनी हैबिट: नियमित रूप से बचत न करना.

हेल्दी ट्रिक्स:

  • भविष्य में आर्थिक परेशानियों से निबटने के लिए नियमित रूप से बचत करना आवश्यक है.
  • बचत की शुरुआत करने से पहले यह देखें कि आप कहां पर छोटी-छोटी ग़लतियां करती हैं. अधिकतर लोग पूरे महीने ख़र्च करने के बाद बची हुई रकम को बचत मानते हैं, जो सही तरीक़ा नहीं है.
  •  बचत करने से पहले भविष्य के लक्ष्यों को तय करें और इसमें आनेवाले ख़र्चों की लिस्ट बनाएं.
  •  भले ही आय कम हो, लेकिन बचत करने की आदत डालें.
  • कम आय होने पर भी अपनी तनख्वाह का 10% ज़रूर बचाएं.
  • भविष्य में आर्थिक स्थिति मज़बूत बनी रहें, इसलिए भी नियमित रूप से बचत करते रहें.

अधिक जानकारी के लिए भी पढ़ें:  मनी सेविंग टिप्स

बैड मनी हैबिट्स: हानि होने पर भी निवेश करना. 

हेल्दी ट्रिक्स: 

  • स्टॉक मार्केट, म्यूचुअल फंड्स आदि में हानि होने की संभावना अधिक होती है. इसलिए अतिरिक्त लाभ कमाने के लालच में ऐसी योजनाओं में निवेश करने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करें.
  • आधी-अधूरी व लोगों की सुनी-सुनाई बातों पर यकीन करने की बजाय डायरेक्ट वित्तीय संस्थानों से सारी व सही जानकारियां प्राप्त करने के बाद ही निवेश करें.
  •  निवेश करने से पहले उस योजना, वित्तीय संस्थान या म्यूचुअल फंड्स के बारे में सही व पूरी जानकारी इकत्रित कर लें, ताकि बाद में पछताना न पड़ें.
  • म्यूचुअल फंड्स, चिट फंड और स्टॉक मार्केट आदि योजनाओं में निवेश करने से पहले मार्केट रिसर्च अच्छी तरह से करें.
  •  यदि इन्वेस्टमेंट संबंधी किसी योजना के बारे में कोई आशंका हो, तो उसके बारे में फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स से सलाह ज़रूर लें.
  • यह सही है कि अतिरिक्त लाभ कमाने के लिए जोख़िम उठाना ज़रूरी है, लेकिन इसे बैड हैबिट के तौर पर न अपनाएं.
  • अधिकतर फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का भी यही मानना है कि ऐसी योजनाओं में निवेश करने से बचें, जिनमें हानि होने की संभावना अधिक हो.

बैड मनी हैबिट: तय तारीख़ के बाद भी भुगतान न करना.

हेल्दी ट्रिक्स: 

  • यदि ड्यू डेट के बाद क्रेडिट कार्ड या अन्य बिलों के भुगतान करने की आदत है, तो इस आदत को तुरंत छोड़ दीजिए.
  • क्योंकि इस आदत से आप पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा और आपकी इमेज भी ख़राब होगी.
  • बिलों का भुगतान करते व़क्त समय-सीमा का ध्यान रखें.
  • समय-सीमा का ध्यान रखकर आप धीरे-धीरे ख़र्चों को मैनेज करना सीख जाएंगे.
  • समय पर भुगतान करने से लेट पेमेंट चार्ज़ेस, जैसे- ब्याज की और पेनॉल्टी देने से भी बचेगें.
  •  समय पर बिलों के भुगतान हों, इसके लिए अपने अकाउंट से डायरेक्ट ऑटो डेबिट भी करा सकते हैं.

बैड मनी हैबिट्स: सही जगह पर निवेश न करना.

हेल्दी ट्रिक्स:

  • बचत करना ही काफी नहींं है, बल्कि उसे सही जगह निवेश करना भी ज़रूरी है, इसलिए सोच-समझकर निवेश करें.
  • अधिकतर लोग ऐसी जगह (जैसे- स्टॉक मार्केट, म्यूचुअल फंड आदि) पर निवेश करते हैं, जहां पर तेज़ गति (सही रफ्तार) से आगे नहीं ब़ढ़ पाता.
  •  ऐसी योजना या प्लान में निवेश करें, जहां पर अधिक रिटर्न मिले.
  • अपने वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखकर योजनाओं में निवेश करें.
  •  दोस्तों या रिश्तेदारों की बातों में आकर ऐसी जगह पर निवेश न करें, जहां पर बाद में पछताना पड़े.
  •  सही जगह पर निवेश करने के लिए फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की सलाह लें कि किन-किन योजनाओं में निवेश करना फ़ायदेमंद होगा.

   – पूनम नागेंद्र शर्मा

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रिलेशनशिप की 5 लेटेस्ट प्रॉब्लम्स व उनके स्मार्ट हल (5 latest Relationship problems and smart solutions)

Relationship problems and smart solutions

पति-पत्नी के रिश्ते की नाज़ुक डोर प्यार, विश्‍वास, भरोसे व अपनेपन जैसे मज़बूत धागों से बंधी होती है. इनमें ज़रा-सी भी उलझन दिलों में दरार डाल देती है और रिश्ते दरकने लगते हैं. कहीं आपकी शादीशुदा ज़िंदगी में भी तो कोई रिलेशनशिप प्रॉब्लम नहीं? अगर है, तो आइए जानें, रिलेशनशिप की 5 लेटेस्ट प्रॉब्लम्स (Relationship problems and smart solutions) व उनके स्मार्ट हल.

Relationship problems and smart solutions

1. कम्युनिकेशन गैप

हर सफल रिश्ते की नींव कम्युनिकेशन यानी बातचीत व सही व्यवहार पर टिकी होती है. जॉन ग्रे की क़िताब ङ्गमेन आर फ्रॉम मास, वुमन आर फ्रॉम वीनसफ में लेखक ने लिखा है, ङ्गस्त्री और पुरुष दोनों का संबंध अलग-अलग ग्रहों से है, इसलिए उनमें रिलेशन प्रॉब्लम्स होती हैं, जिससे महिलाएं चाहती हैं कि कोई उन्हें ध्यान से सुने, उनकी बातों परध्यान दे, पर पुरुष उन्हें समझ नहीं पाते और अपनी व्यस्तता के कारण उन्हें समाधानों की एक लंबी-चौड़ी लिस्ट थमा देते हैं.
अक्सर महिलाएं कहना कुछ चाहती हैं, पर वे कहती कुछ और हैं, जैसे- ङ्गकोई बात नहीं, मैं ये काम कर लूंगी,फ तो पुरुषों को समझ जाना चाहिए कि कुछ बात है और वह चाहती है कि आप उनसे कहें कि नहीं, नहीं मैं वो काम कर लूंगा, पर पुरुष इसे समझ ही नहीं पाते. इसी वजह से पत्नी को लगता है कि उसके पति उसे समझते ही नहीं, जिससे उनके रिश्ते में प्रॉब्लम्स आने लगती हैं.
ऐसी ही न जाने कितनी बातों की वजह से पति-पत्नी के रिश्ते में ख़ामोशी आने लगती है, जो धीरे-धीरे उनके रिश्ते को ख़ामोश करने लगती है, इसलिए अपने रिश्ते को बचाने के लिए उसमें कभी भी ख़ामोशी को न आने दें.
स्मार्ट हल
* कम्युनिकेशन यानी बातचीत का अर्थ केवल बोलना नहीं है, बल्कि सामनेवाले की बातों को ग़ौर से सुनना और समझना भी है.
* माना घर-गृहस्थी और करियर के चक्कर में आप एक-दूसरे के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं, पर आपके पार्टनर के बिना कैसी घर-गृहस्थी?
* पार्टनर के बीच बातचीत बहुत ज़रूरी है. एक-दूसरे की मजबूरियों और समस्याओं को समझने की कोशिश करें और कोई भी फैसला लेने से पहले खुलकर उस विषय पर बात करें.
* कितनी भी नाराज़गी क्यूं न हो, बात करना बंद न करें.
* इसके लिए किसी न किसी को तो पहल करनी ही होगी, तो उनके पहल करने का इंतज़ार न करें और अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर दें.
* हमेशा याद रखें कि ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका हल बातचीत से नहीं निकल सकता. बड़ी से बड़ी समस्या का हल बैठकर निकाला जा सकता है.

2. नो टाइम फॉर सेक्स

शादीशुदा ज़िंदगी को सफल बनाने में सेक्सुअल रिलेशन अहम् भूमिका अदा करती है. आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में, जल्दी से जल्दी सब कुछ पा लेने की होड़ में अक्सर रिश्ते कहीं पिछड़ जाते हैं, ख़ासकर शहरों में, जहां दोनों ही पार्टनर्स कामकाजी हैं, एक-दूसरे के लिए क्वालिटी टाइम निकालना मुश्किल हो जाता है, जिसका असर उनके शादीशुदा जीवन पर पड़ता है.
स्मार्ट हल
* चाहे कितने भी बिज़ी हों, एक-दूसरे के लिए समय ज़रूर निकालें. ध्यान रखें, सेक्स शादीशुदा ज़िंदगी के लिए टॉनिक की तरह है.
* इसके लिए ज़रूरी है कि दोनों ही खुलकर अपनी भावनाएं एक-दूसरे से व्यक्त करें.
* वीकेंड पर या छुट्टी के दिन ऑफ़िस को भूल जाएं. पूरा दिन साथ-साथ बिताएं. रोमांटिक बातें करें. आउटिंग पर जाएं.
* एक-दूसरे को छोटे-छोटे गिफ्ट्स देकर भी आप अपनी भावनाओं को ज़ाहिर कर सकते हैं.
* शादीशुदा ज़िंदगी में ताज़गी बनाए रखने के लिए हर छह महीने पर या साल में कम से कम एक बार स़िर्फ आप दोनों घूमने जाएं. ऐसे में सारे गिले-शिकवे भी दूर हो जाते हैं और आपकी सेक्सुअल लाइफ भी रिन्यू हो जाती है.

3. फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स

अक्सर पैसे ख़र्च करने के मामले में दोनों पार्टनर अलग होते हैं. एक को बहुत ख़र्च करना पसंद होता है, तो दूसरे को बचत करने की या कम ख़र्च करने की आदत होती है. कई बार तो पार्टनर के बीच इस बात को लेकर झगड़े हो जाते हैैं कि कौन कितना ख़र्च करेगा. व्यक्तिगत ख़र्च को प्राथमिकता देकर घर ख़र्च को अनदेखा करना भी इसका एक प्रमुख कारण है.
स्मार्ट हल
* दोनों पार्टनर्स बैठकर फाइनेंशियल प्लानिंग करें. इन्वेस्टमेंट आदि के अलावा घरेलू ख़र्चों में दोनों मिलकर सहयोग करें.
* हर महीने का बजट बनाएं, ताकि फ़िज़ूलख़र्ची न हो.
* अपने पार्टनर से अपने व्यक्तिगत ख़र्चों को छुपाए नहीं.

4. नो टाइम फॉर किड्स

कहते हैं, बच्चा पति-पत्नी के बीच के सभी गिले-शिकवे दूर कर उन्हें और क़रीब ले आता है, लेकिन आज कपल्स के पास इतना समय ही नहीं रहता कि वे बच्चे प्लान कर सकें. करियर बनाने और भविष्य को सुरक्षित करने के चक्कर में दोनों ही पार्टनर अपने रिश्ते से ज़्यादा काम को अहमियत देते हैं. बच्चे की ज़िम्मेदारी लेने के लिए उनके पास समय ही नहीं होता. लेकिन उम्र के एक पड़ाव पर उन्हें जब बच्चे की कमी का एहसास होता है, तब अपनी झुंझलाहट वो एक-दूसरे पर ही निकालते हैं और एक-दूसरे को दोषी ठहराते हैं, जिससे रिश्तों में खटास आने लगती है.
स्मार्ट हल
* दोनों को ही यह बात समझनी होगी कि करियर उनके रिश्ते से बढ़कर नहीं है और हर चीज़ की एक सही उम्र होती है, अगर उसी उम्र में वह हो जाए, तो ज़्यादा बेहतर है. इसलिए बच्चा प्लान करने में देरी न करें.
* ध्यान रखें कि बच्चे जीने के मक़सद होते हैं. पति-पत्नी के रिश्ते की कड़ी होते हैं, जो उन्हें स्नेह के बंधन से जोड़े रखते हैं.
* माना कि बच्चों की परवरिश एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है, लेकिन दोनों
के सहयोग से इसे आसान बनाया जा सकता है.

5. ऑफिस रोमांस

कॉम्पटीशन के इस दौर में हर कोई आगे निकलना चाहता है. ऐसे में ज़्यादा समय तक काम करना हमारी आदत में शुमार हो जाता है. घर से ज़्यादा वक़्त हम ऑफिस में गुज़ारते हैं, जिसकी वजह से कलीग्स में एक भावनात्मक लगाव हो जाता है. ऐसी कई बातें होती हैं, जो हम अपने पार्टनर से न शेयर करके अपने कलीग्स से शेयर करने लगते हैं. कभी-कभी यह लगाव अफेयर का रूप ले लेता है, जिसका असर उनकी शादीशुदा ज़िंदगी पर भी पड़ता है. यह स़िर्फ पुरुषों तक ही सीमित नहीं है, महिलाएं भी इसमें उतनी ही भागीदार हैं, इसलिए दोनों को ही अपने रिश्तों पर ग़ौर करने की ज़रूरत है.
स्मार्ट हल
* अगर आपको ऐसा एहसास हो रहा है कि आप अपने कलीग्स के साथ कुछ ज़्यादा ही इन्वॉल्व हो रहे हैं, तो वहीं पर अपने क़दम पीछे खींच लें.
* अपने पार्टनर के साथ ज़्यादा से ज़्यादा क्वालिटी समय बिताने की कोशिश करें.
* अपने पार्टनर से बेवफ़ाई की भावना आपको आत्मग्लानि से भर देगी और आपकी ख़ुशहाल ज़िंदगी ख़ुशहाल नहीं रह जाएगी, इसलिए अपने रिश्ते में ईमानदारी बनाए रखें.
* रिश्तों की अहमियत को समझने की कोशिश करें और साथ ही अपने पार्टनर को भी समझने की कोशिश करें.
जानें स्वस्थ रिश्तों के लक्षण
1. दो व्यक्तियों के बीच की आपसी समझ ही स्वस्थ रिश्ते का सबसे बड़ा लक्षण है. पति-पत्नी बिना बोले एक-दूसरे की भावनाओं को समझ जाते हैं, तो स्वस्थ रिश्ते का इससे बड़ा उदाहरण नहीं है.
2. पति-पत्नी दोनों ही ख़ुश व तनावमुक्त होते हैं.
3. दोनों ही अपनी ज़िम्मेदारियां दूसरे पर नहीं थोपते, बल्कि उन्हें बांटने का पूरा प्रयास करते हैं.
4. दोनों में मन-मुटाव कम ही होते हैं, क्योंकि दोनों हर समस्या का समाधान मिलकर निकालते हैं. हर अहम् ़फैसलों में दोनों की सहमति होती है.
5. दोनों न स़िर्फ एक-दूसरे के काम में हाथ बंटाते हैं, बल्कि उनके काम का सम्मान भी करते हैं और उनके तनाव को समझते हैं.
6. ऐसे कपल्स एक-दूसरे पर निर्भर नहीं होते, बल्कि हर क़दम पर एक-दूसरे का साथ निभाते हैं.
7. स्वस्थ रिश्तों में पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ भरपूर क्वालिटी समय बिताते हैं. एक-दूसरे को ख़ुश रखने की हर संभव कोशिश करते हैं.
8. दोनों ही एक-दूसरे पर इतना विश्‍वास करते हैं कि दूसरों के बहकावे में कभी नहीं आते.

– अनीता सिंह

मुफ़्त के सलाहकारों से रहें सावधान (Stay Away From Free And Unwanted Advises)