Fire

बॉलीवुड की कई फ़िल्में यूं तो सिनेमा घरों में रिलीज़ होती हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही फ़िल्में दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब हो पाती हैं. दर्शकों को रिझाने के लिए कई फ़िल्मों में बोल्डनेस का तड़का लगाया जाता है, लेकिन बोल्ड कंटेंट होने के कारण उन फ़िल्मों को परिवार के साथ देखने के बजाय अकेले ही देखना पड़ता है. बॉलीवुड की कई ऐसी फ़िल्में हैं, जिनमें हॉट इंटीमेट सीन्स फ़िल्माए गए हैं और बोल्डनेस की सारी हदों को पार कर दिया गया है, लिहाजा इन फ़िल्मों को परिवार के साथ बैठकर कतई नहीं देखा जा सकता. चलिए जानते हैं बॉलीवुड की ऐसी ही 10 फ़िल्में जिनमें बोल्ड सीन्स की भरमार है और आप उन्हें अपनी फैमिली के साथ नहीं देख सकते हैं.

1- मर्डर

Murder

मल्लिका शेरावत और इमरान हाशमी की फ़िल्म ‘मर्डर’ जब रिलीज़ हुई थी तो इसे देखकर हर कोई दंग रह गया था. दरअसल, शादी के बाद एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर पर आधारिक फ़िल्म की कहानी दर्शकों को खूब पसंद आई थी. बोल्ड सीन्स से भरपूर इस फ़िल्म को फैमिली के साथ बैठकर नहीं देखा जा सकता.

2- कामसूत्र

Kamasutra

बॉलीवुड की कामुक फ़िल्म ‘कामसूत्र’ को लेकर काफी बवाल मचा था. इस फ़िल्म में सेक्स और बोल्ड सीन्स की भरमार थी. यहां तक कि फ़िल्म की हीरोइन भी कई सीन्स में न्यूड नज़र आई थी. इस बोल्ड मूवी को अकेले में ही देखा जा सकता है, परिवार के साथ नहीं. यह भी पढ़ें: बिना मेकअप के ऐसी दिखती हैं ये टॉप 10 बॉलीवुड एक्ट्रेस (10 Top Bollywood Actresses Without Makeup)

3- गर्लफ्रेंड

Girlfriends

डायरेक्टर करण राजदान की फ़िल्म ‘गर्लफ्रेंड’ साल 2004 में रिलीज़ हुई थी, जिसमें ईशा कोपिक्कर, अमृता अरोड़ा, आशीष चौधरी और सुमीत निझावन जैसे कलाकार नज़र आए थे. इस फ़िल्म की कहानी लेस्बियन पर आधारित थी, जिसमें ईशा कोपिक्कर और अमृता अरोड़ा ने काफी बोल्ड सीन्स दिए थे.

4- जूली

Julie

नेहा धूपिया की फ़िल्म ‘जूली’ साल 2004 में रिलीज़ हुई थी, लेकिन इस फ़िल्म को परिवार के साथ बैठकर नहीं देखा जा सकता है. इस एरोटिक ड्रामा फ़िल्म में नेहा ने अपने बोल्ड सीन्स से दर्शकों को दीवाना कर दिया था. फ़िल्म में लड़के नेहा का बार-बार शारीरिक शोषण करते हैं.

5- हवस

havas

एरोटिक थ्रिलर ड्रामा फ़िल्म ‘हवस’ साल 2004 में रिलीज़ हुई थी. इसमें मेघना नायडू, शावर अली, तरुण अरोड़ा जैसे कलाकार नज़र आए थे. फ़िल्म के नाम की तरह ही इसमें बोल्डनेस की भरमार है. इस फ़िल्म को भी आप अकेले में ही देख सकते हैं.

6- जिस्म 2

jism 2

फ़िल्म ‘जिस्म 2’ में अपनी बोल्डनेस से सनी लियोन ने फैन्स को दीवाना बना दिया था. इस फ़िल्म में कई ऐसे सीन्स थे, जिसे अकेले में ही देखा जा सकता है. सनी लियोन के सेक्स सीन्स को दर्शकों ने काफी पसंद किया था, लेकिन परिवार के साथ आप इस फ़िल्म को नहीं देख सकते.

7- बी.ए. पास

BA Paas

साल 2013 में रिलीज़ हुई फ़िल्म ‘बी.ए.पास’ में शिल्पा शुक्ला, शादाब कमल, राजेश वर्मा और दिब्येंदु भट्टाचार्य ने मुख्य किरदार निभाया था. इस एडल्ट फ़िल्म में दिखाया गया था कि एक लड़का अपनी मकान मालकिन को खुश करने के लिए उसके साथ बार-बार सेक्स करता है. बोल्ड सीन्स की भरमार होने के कारण फैमिली के साथ इसे नहीं देखा जा सकता. यह भी पढ़ें: 10 बॉलीवुड अभिनेत्रियां अपनी कामयाबी का श्रेय अपनी मां को देती हैं, मां ने ऐसे दिखाई इन्हें सफलता की राह (10 Bollywood Actress Gives Credit For Her Success To Her Mother)

8- फायर

fire

दीपा मेहता की फ़िल्म ‘फायर’ रिलीज़ होने पर देश के कट्टरपंथियों ने सिनेमाघरों को जला दिया था. फ़िल्म में एक महिला द्वारा दूसरी महिला की शारीरिक इच्छाओं और उसे संतुष्ट करने के बारे में बताया गया था. नंदिता दास और शबाना आज़मी के बीच के सीन्स ने काफी लोगों को असहज कर दिया था.

9- ख्वाहिश

khwahish

‘ख्वाहिश’ एक्ट्रेस मल्लिका शेरावत की पहली फ़िल्म थी जो एक एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर पर आधारित थी. इस फ़िल्म में मल्लिका शेरावत और हिमांशु मलिक ने बोल्डनेस की सारी हदें पार कर दी थी. उनके बीच फ़िल्म में 17 बोल्ड किसिंग सीन्स फ़िल्माए गए थे.

10- आस्‍था

aas‍tha

फ़िल्म ‘आस्‍था: इन द प्रिजन ऑफ स्प्रिंग’ साल 1997 में रिलीज़ हुई थी. इस इरोटिक ड्रामा फ़िल्म का निर्देशन बासु भट्टाचार्य ने किया था. रेखा और ओम पुरी ने फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभाई थी और उनके बीच काफी बोल्ड सीन्स फ़िल्माए गए थे. फ़िल्म में रेखा ने एक गरीब महिला का किरदार निभाया था, जो अपनी समस्याओं के कारण वैश्यावृत्ति में आ जाती हैं.

10 महिला प्रधान फिल्में (Women Oriented Films) हर महिला को जरूर देखनी चाहिए, क्योंकि इन फिल्मों ने महिलाओं के जीवन के ऐसे कई पहलुओं को उजागर किया है, जिन पर इससे पहले बात तक नहीं की जाती थी. 10 महिला प्रधान फिल्मों ने कई सामाजिक मान्यताओं को तोड़ा है और समाज को नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया है. यदि आपने अभी तक ये फिल्में नहीं देखी हैं, तो आपको ये महिला प्रधान फिल्में जरूर देखनी चाहिए.

1) क्वीन (Queen)
महिला प्रधान फिल्मों की बात हो और कंगना रनौत की फिल्म क्वीन का ज़िक्र न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता. क्वीन फिल्म की सबसे बड़ी ख़ासियत है इस फिल्म का मैसेज. इस फिल्म में ये बताया गया है महिलाओं की चाहतें पुरुषों के सहारे की मोहताज नहीं हैं और कंगना रनौत ने अपनी अदाकरी से महिलाओं की भावनाओं को बहुत दमदार तरीके से प्रस्तुत किया है. यदि आपने अभी तक क्वीन फिल्म नहीं देखी है, तो आपको ये फिल्म ज़रूर देखनी चाहिए.

2) द डर्टी पिक्चर (The Dirty Picture) 
बॉलीवुड की मोस्ट टेलेंटेड एक्ट्रेस विद्या बालन की बेहतरीन फिल्मों में से एक द डर्टी पिक्चर 80 के दशक की दक्षिण भारतीय फिल्मों की कलाकार सिल्क स्मिता के जीवन पर आधारित थी. द डर्टी पिक्चर फिल्म में रुपहले पर्दे के की चमक के पीछे छुपे अंधेरे को उजागर किया गया. साथ ही महिला के शरीर के प्रति लोगों की मानसिकता को भी दर्शाया गया. इस फिल्म में विद्या बालन की एक्टिंग को खूब सराहा गया.

The Dirty Picture

3) लिपस्टिक अंडर माय बुर्का (Lipstick Under My Burka) 
विवादों से घिरी फिल्म लिपस्टिक अंडर माय बुर्का अलग-अलग उम्र की चार ऐसी महिलाओं को कहानी है, तो अपने हिसाब से आज़ादी से ज़िंदगी गुज़ारने में विश्‍वास रखती हैं. कोंकणा सेन शर्मा, रत्ना पाठक शाह, आहना कुमरा, पल्बिता बोरठाकुर ने लिपस्टिक अंडर माय बुर्का फिल्म में दमदार अभिनय किया है. हालांकि इस फिल्म को रिलीज़ होने से पहले सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने के लिए काफ़ी इंतज़ार करना पड़ा था, लेकिन जब भी महिला प्रधान फिल्म की बात की जाएगी, तो लिपस्टिक अंडर माय बुर्का फिल्म का ज़िक्र ज़रूर होगा.

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Lipstick Under My Burka

4) पार्चड (Parched) 
पार्चड यानी सूखा और इस फिल्म में गांव की तीन स्त्रियों के माध्यम से इस शब्द को भलीभांति प्रस्तुत किया गया है. पार्चड फिल्म में पुरुष प्रधान मानसिकता, महिलाओं पर अत्याचार, बाल विवाह जैसी समस्याओं का कटु सत्य को बहुत तीखे अंदाज़ में पेश किया गया है. पार्चड फिल्म को 24 इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया और इस फिल्म ने 18 अवॉर्ड्स हासिल किए.

Parched

5) ऐंग्री इंडियन गॉडेसेस (Angry Indian Goddesses)
ऐंग्री इंडियन गॉडेसेस फिल्म की कहानी पांच लड़कियों के ईर्दगिर्द घूमती है. ये लड़कियां हंसती भी हैं और रोती भी हैं, मस्ती भी करती हैं और दर्द भी झेलती हैं. इस फिल्म में लड़कियों के साथ छेड़छाड़, कोर्ट में इंसाफ न मिलना, मां-बाप का प्यार न मिलना जैसी कई सामाजिक समस्याओं को उजागर किया गया है. महिलाओं को ये फिल्म भी ज़रूर देखनी चाहिए.

Angry Indian Goddesses

6) चांदनी बार (Chandni Bar) 
चांदनी बार फिल्म मुंबई की बार बालाओं के जीवन पर आधारित है. मधुर भंडारकर की फिल्म चांदनी बार में तब्बू ने अपनी दमदार अदाकारी से मुंबई की बार बालाओं के जीवन को बहुत ही सटीक तरीके से प्रस्तुत किया है. चांदनी बार फिल्म के लिए तब्बू को बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला और इस फिल्म को चार राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले.

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Chandni Bar

7) फायर (Fire)
दीपा मेहता की फिल्म फायर दो महिलाओं के समलैंगिग रिश्तों पर आधारित कहानी है. इस फिल्म को दो साल तक सेंसर बोर्ड की हरी झंडी का इंतज़ार करना पड़ा और दो साल बाद इस फिल्म को एडल्ट कैटेगरी में सिनेमाघरों में दिखाया गया. इस फिल्म में शबाना आज़मी और नंदिता दास की एक्टिंग को बहुत सराहा गया था.

Fire

8) नीरजा (Neerja)
नीरजा फिल्म को सोनम कपूर की बेस्ट फिल्मों में गिना जाता है. फिल्म में प्लेन हाइजैक के दौरान एक एयर होस्टेस किस तरह बहादुरी से अपनी नैतिक और सामाजिक ज़िम्मेदारी निभाती है, इसका बेहतरीन प्रस्तुतिकरण किया गया है. नीरजा फिल्म की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इस फिल्म में कहीं से भी हीरो या अभिनेता की कमी नहीं महसूस होती.

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Neerja

9) मॉम (Mom)
बॉलीवुड की चांदनी श्रीदेवी जी भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी फिल्म मॉम महिलाप्रधाान फिल्मों में खास स्थान रखती है. इस फिल्म में बताया गया है कि एक मां अपने बच्चों के लिए क्या कुछ कर सकती है. पूरी फिल्म श्रीदेवी यानी मॉम के ईर्दगिर्द घूमती है. इस फिल्म में भी हीरो की ज़रूरत महसूस नहीं होती.

Mom

10) पिंक (Pink)
तापसी पन्नू की फिल्म पिंक भी लीक से हटकर थी. इस फिल्म की कहानी तीन महिलाओं के ईर्दगिर्द घूमती है और समाज को महिलाओं के बारे में काफी कुछ सोचने पर मजबूर करती है. फिल्म पिंक में बिग बी अमिताभ बच्चन ने भी दमदार अभिनय किया है.

Pink

 महेंद्र सिंह धोनी

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी एक हादसे का शिकार होते-होते बचे. विजय हज़ारे ट्रॉफी के लिए धोनी दिल्ली पहुंचे थे. दिल्ली के द्वारका के एक होटल में सुबह-सुबह आग लग गई. सुबह के समय होटल के गेस्ट आमतौर पर सोए रहते हैं. ऐेसे में आग लगने की घटना बहुत बड़ी साबित हो सकती थी, लेकिन मौ़के पर सभी गेस्ट को बाहर निकाला गया और आग बुझाई गई.

धोनी की टीम झारखंड विजय हज़ारे ट्रॉफी के सेमीफाइनल में जगह बना चुकी है. टीम के कप्तान धोनी पूरी तरह से सुरक्षित हैं. आग लगने की वजह से आज का मैच टाल दिया गया है. वेलकम नाम के इस 5 स्टार होटल के पिछले हिस्से में आग लगी. आग लगने की ख़बर मिलते ही होटल कर्मचारियों ने धोनी को बाहर निकाला. आग लगने की वजह से मैच शनिवार तक के लिए टाल दिया गया है. खिलाड़ियों के कपड़े और किट होटल के रूम में ही रह गए थे.

 महेंद्र सिंह धोनी

इस ख़बर के बाद धोनी की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है.

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