First Aid

ज़िंदगी में दुर्घटनाएं और हादसे कभी भी हो सकते हैं. चाहे दिल का दौरा हो या अस्थमा का अटैक, सड़क दुर्घटना हो या फिर कोई और हादसा. इन हादसों व दुर्घटनाओं को बहुत हद तक गंभीर होने से रोका जा सकता है, यदि आपको डॉक्टरी उपचार से पहले मिलनेवाले फर्स्ट एड (प्राथमिक उपचार) के बारे में पर्याप्त जानकारी हो तो. हम यहां पर ऐसे ही कुछ फर्स्ट एड टिप्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें आप मेडिकल इमर्जेंसी के दौरान यूज़ कर सकते हैं.

Medical
दिल का दौरा

फर्स्ट एड टिप्स:

– व्यक्ति को उस स्थिति में बिठाएं या लिटाएं, जिसमें वह आराम महसूस करे.
– बेस्ट पोज़ीशन यह है कि उसे ज़मीन पर दीवार से सटाकर बिठाएं. घुटनों को थोड़ा-सा मोड़ें. सिर और गर्दन को दीवार के सहारे सपोर्ट देकर बिठाएं.
– ध्यान रहे, व्यक्ति अपनी कॉन्शियसनेस (चेतना) न छोड़े, इसलिए उसे हवादार जगह पर लिटाएं या बिठाएं.
– उसकी धड़कन, नब्ज़, ब्लड प्रेशर और कॉन्शियसनेस के स्तर को बीच-बीच में चेक करते रहें.
– उसे तब तक चलने न दें, जब तक कि बहुत ज़रूरी न हो.
– यदि व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई हो रही हो, तो उसकी पीठ के पीछे तकिया रखकर ऊंचा करें.
– तुरंत डॉक्टर से फोन पर बात करें. उनके द्वारा बताई गई मेडिसिन दें.
– इमर्जेंसी महसूस होने पर तुरंत एंबुलेंस के लिए कॉल करें.
– अटैक आने के यदि तीन घंटे के अंदर सही उपचार किया जाए, तो ख़तरे को टाला जा सकता है.

पैनिक अटैक

फर्स्ट एड टिप्स:

– इस स्थिति में पीड़ित को हवादार जगह पर लिटाएं और लंबी-लंबी सांस लेने को कहें.
– अटैक के कारण यदि हाथ-पैर कांप रहे हों, गला सूख रहा हो या दिल की धड़कनें तेज़ हो रही हों, तो पीड़ित को लंबी-लंबी सांसें लेने के लिए कहें.
– अगर वह कोई बात बताना चाहता/चाहती है, तो उससे बहस करने की बजाय उसकी बात ध्यान से सुनें.
– उसकी मनोस्थिति को समझने की कोशिश करें, न कि उसे समझाने की.

मेडिकल इमर्जेंसी, Medical Emergency

एसिडिटी

फर्स्ट एड टिप्स:

– पीड़ित को बेड पर लिटाएं और बेड को सिर की तरफ़ से छह से आठ इंच ऊपर उठाकर रखें.
– ध्यान रहे, व्यक्ति के सिर के नीचे 2-3 तकिए लगाकर नहीं रखें.
– तला व मसालेदार भोजन, कैफ़ीन, अल्कोहल और पाचन तंत्र को प्रभावित करनेवाले भोजन न दें.
– खाना अच्छी तरह से पच जाए, इसलिए सोने से दो-ढाई घंटे पहले खाना खाएं.
– तनावरहित रहने का प्रयास करें. तनाव कम होने पर सारा बॉडी सिस्टम सुचारु रूप से काम करेगा.

अस्थमा अटैक

फर्स्ट एड टिप्स:

– व्यक्ति को आरामदायक स्थिति में कुर्सी पर बिठाएं. उसे लिटाएं बिल्कुल नहीं.
– पीड़ित को अकेला न छोड़ें और न ही उसके आसपास भीड़ इकट्ठा होने दें.
– अस्थमा से पीड़ित लोग हमेशा अपने साथ इन्हेलर और रिलिवर पफ रखते हैं, इसलिए बिना देरी किए पीड़ित को रिलिवर पफ या इन्हेलर दें.
– अगर रिलिवर पफ या इन्हेलर से उसकी हालत में कोई सुधार न हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं.

बेहोशी की हालत में

फर्स्ट एड टिप्स:

– पीड़ित को हवादार जगह पर लिटाकर पैरों के नीचे 2-3 तकिए रखकर ऊंचा करें.
– ठोड़ी को ऊपर की तरफ़ ऊंचा करें.
– यदि हाथ-पैर ठंडे हो रहे हों, तो गरम करने के लिए मसाज करें.
– लिक्विड फूड, जैसे- पानी, छाछ या नींबू पानी पीने के लिए न दें.

मोच या हड्डी टूटने पर

फर्स्ट एड टिप्स:

– चोट लगी हुई जगह को बिना किसी सपोर्ट के हिलाएं-डुलाएं नहीं, न ही वहां पर किसी तरह का दबाव डालें.
– अगर हिलाना ही पड़े, तो चोटवाली जगह के ऊपर और नीचे कार्डबोर्ड का टुकड़ा या अख़बार/मैग्ज़ीन को फोल्ड करके रखें. फिर सावधानीपूर्वक कपड़े से बांध दें.
– सूजन और दर्द को कम करने के लिए चोटवाली जगह पर ब़र्फ लगाएं यानी थोड़ी देर तक ब़र्फ रगड़ें.
– ध्यान रखें, डायरेक्ट ब़र्फ रगड़ने की बजाय उसे रूमाल या प्लास्टिक बैग में रखकर लगाएं.
– किसी ऑइन्टमेंट या तेल से मालिश न करें.
– सिर, गर्दन और पीठ पर चोट लगने पर ज़्यादा हिलें-डुलें नहीं.
– मोच या चोटवाली जगह पर सूजन और दर्द बढ़ने पर तुरंत ऑर्थोपेडिक डॉक्टर को दिखाएं.

जलने की स्थिति में

फर्स्ट एड टिप्स:

– कपड़ों में आग लगने पर इधर-उधर भागने की बजाय तुरंत ज़मीन पर रोल करें.
– जले हुए व्यक्ति पर पानी डालने की बजाय उसे कंबल में लपेटकर आग बुझाने का प्रयास करें.
– पीड़ित को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर तुरंत कपड़े बदलें. इससे शरीर को कम हानि होगी.
– जली हुई जगह को पानी के नल के नीचे 10-15 मिनट तक रखें.
– वहां पर ब़र्फ लगाने की ग़लती न करें, न ही ब़र्फवाला ठंडा पानी डालें.
– दर्द और सूजन से राहत पानेे के लिए वहां पर ऐलोवीरा बेस्ड लोशन लगाएं.

एसिड से जलने पर

फर्स्ट एड टिप्स:

– एसिड से जली हुई त्वचा पर तब तक साफ़ व ठंडा पानी डालें, जब तक कि जलन कम न हो.
– एसिड लगे कपड़े, ज्वलेरी और जूते को निकाल दें.
– आंखों में यदि कॉन्टैक्ट लेंस लगाया हुआ है, तो तुरंत निकाल दें. ठंडे पानी से आंखों को कम से कम 15-20 मिनट तक धोएं. तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.
– जली हुई त्वचा पर कोई क्रीम या ऑइन्टमेंट न लगाएं. केवल डॉक्टर द्वारा बताई गई क्रीम ही अप्लाई करें.
– पीड़ित को सांस लेने में परेशानी हो रही हो, तो तुरंत खुली हवा में ले जाएं.
– यदि स्थिति गंभीर हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं या पीड़ित के लिए ऑक्सीजन का इंतज़ाम करें.
– बेहोश व्यक्ति को ज़बर्दस्ती पानी पिलाने की कोशिश न करें. बल्कि जल्दी से जल्दी डॉक्टर के पास ले जाएं.

सड़क दुर्घटना

फर्स्ट एड टिप्स:

– ख़ून का बहाव रोकने के लिए उस जगह को ज़ोर से दबाकर रखें या फिर साफ़ कपड़ेे से बांधकर रखें, जब तक ख़ून बंद न हो जाए.
– दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की सांसें और नब्ज़ चेक करते रहें. तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं.
– सड़क दुर्घटना के दौरान सिर या रीढ़ की हड्डी में चोट लगने पर पीड़ित को ज़्यादा हिलाएं नहीं, बल्कि लिटा दें.
– यदि डॉक्टर के पास ले जाने में देर हो रही हो, तो पैरों को ऊपर ऊंचाई पर करके लिटाएं.
– घबराहट के कारण दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं. इस स्थिति में उसकी हथेली और पैरों के तलुओं की मालिश करें, ताकि गरमाहट बनी रहे.

– पूनम शर्मा

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घर या ऑफिस में कुछ काम करते वक़्त या खेदकूद के दौरान कई बार मोच (Ankle Sprain) आ जाती है. मोच अगर हल्की या ज़्यादा गंभीर न हो, तो घर पर ही उसका इलाज किया जा सकता है. इन बातों पर ध्यान देकर आप मोच को घर पर ही ठीक कर सकते हैं.sprains-first-aid-serve_first aid

क्या करें ?

  • मोच होने पर सबसे पहले उस हिस्से को रेस्ट करने दें. उस पर प्रेशर बिल्कुल ना पड़ने दें.
  • पहले 48 से 72 घंटे ब़र्फ से 15-20 मिनट सेंकाई करें. ब़र्फ मोचवाली जगह पर सीधे लगाने की बजाय टॉवेल या कपड़े में बांध कर लगाएं.
  • मोच वाले एरिया को नुक़सान न पहुंचे, इसलिए बैंडेज बांध दें. इससे सूजन कम होगी. बैंडेज कसकर ना बांधें, इससे रक्त-संचार बाधित होगा.
  • मोच वाले हिस्से को तकिये की मदद से थोड़ा ऊपर रखें, इससे सूजन कम होगी.
  • पैरों में अगर मोच आई हो और पैर ज़ख्मी हो गया हो, तो ज़्यादा देर तकिये पर ना रखें.

क्या न करें ?

  • मोच वाली जगह पर मसाज न करें.
  • किसी भी तरह की एक्ससाइज़ न करें.
  • मोच वाले हिस्से को गर्मी न दें, जैसे- स्टीम बाथ, सोनाबाथ न लें.
  • नशा न करें. अल्कोहल के सेवन से सूजन बढ़ सकती है और ठीक होने में ज़्यादा व़क्त लग सकता है.

फ्रैक्चर होने पर

  • हड्डी अगर फ्रैक्चर हो गई हो, तो उसे बिल्कुल न हिलाएं.
  • फुलपट्टी या छड़ी जैसी सख़्त चीज़ से हड्डी को सपोर्ट देकर कपड़े से किसी अंग से बांध दें.
  • हड्डी टूटते से ख़ून निकल रहा हो, तो पहले खून साफ़ पट्टी से हल्के से दबाकर रोकें.
  • चोट लगी जगह को पानी से साफ़ करें.
  •  हड्डी के टुकड़े अलग हो गए हों, तो टुकड़े को रख लें. कई बार टूटी हुई हड्डी को जोड़ा जा सकता है.
  • जितना जल्दी हो सके, डॉक्टर के पास मरीज़ को ले जाएं, ताकि समय पर इलाज हो सके.

क्या न करें ?

  • मरीज़ को खाने-पीने को कुछ न दें. कई बार मरीज़ को बेहोश कर हड्डी जोड़ी जाती है.
  • जहां चोट लगी हो वहां कोई मलहम न लगाएं.