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हम सभी हमेशा जवां रहना चाहते हैं, लेकिन आजकल की दौड़भाग भरी तनाव की ज़िंदगी में कम उम्र में ही हमारी बॉडी शिकायत करने लगती है और हमारे शरीर पर भी बढ़ती उम्र के संकेत तेज़ी से दिखाई देने लगते हैं. लेकिन आप अपने बॉडी क्लॉक को रोककर उसे उल्टा घुमा सकते हैं और अपनी उम्र से 10 साल छोटे नज़र आ सकते हैं.

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फिटनेस

फिटनेस के लिए हर किसी को, हर उम्र में मेहनत करनी ही चाहिए. यदि आप फिट नहीं हैं, तो आपको कई शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं. आप कितने फिट हैं और फिट रहने के लिए आपको क्या करना चाहिए, आइए हम आपको बताते हैं.

30 से 50 की उम्र

  • सामान्य
    यदि आप आसानी से 3 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़ जाते हैं और आपकी सांस हल्की-सी फूलने या तेज़ चलने लगती है, तो यह एकदम सामान्य बात है. ऐसा अक्सर हम सबके साथ होता है. सांसों का फूलना हमारे वजन और लाइफ स्टाइल पर निर्भर होता है.
  • असामान्य
    यदि 3 मंजिल तक सीढ़ियां चढ़ने में आपको एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है, सांस लेने में परेशानी हो रही है, सिरदर्द हो रहा है तो यह चिंता की बात है. इसी तरह आपको यदि 2 मंजिल तक सीढ़ियां उतरने में भी मुश्किल हो रही है, तो यह भी चिंता की बात है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    30 की उम्र में कार्डियोवास्कुलर एक्सरसाइज़ करना बहुत फायदेमंद होता है. इससे मेटाबॉलिक रेट बढ़ता है जो उम्र बढ़ने की क्रिया को धीमा कर देती है. 40 की उम्र में रेजीस्टेंस एक्सरसाइज़ करना शुरू कर देना चाहिए. इसके साथ-साथ स्केवट्स और प्रेसअप भी करें. इससे हड्डियां मजबूत होती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव होता है.

50 से 70 की उम्र

  • सामान्य
    इस उम्र में जोड़ों में जकड़न होने लगती है. जिससे पहले की तरह तेज़ी से उठना-बैठना, चलना-फिरना नहीं हो पाता जो कि एक सामान्य लक्षण है.
  • असामान्य
    यदि आपको व्यायाम करने या मेहनत के काम करने के बाद चक्कर आने लगते हैं तो यह चिंता की बात है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    रोजाना वॉक करने जाएं. इससे सेहत ठीक रहती है, क्योंकि ताजी हवा आपकी सांसों में जाती है. इसके अलावा टहलने से जोड़ों में लचीलापन बना रहता है और पेट की चर्बी कम होती है. साथ ही ऑस्टियोआर्थराइटिस (जोड़ों का दर्द, जकड़न) से बचाव होता है. यदि आप ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित हैं तो वॉक करने से इसकी तीव्रता कम होती है.
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जोड़ों का दर्द

जोड़ों का दर्द एक आम समस्या है और ये तकलीफ अब कम उम्र के लोगों को भी होने लगी है. जोड़ों का दर्द से बचने और इससे छुटकारा पाने के लिए आपको अपना बॉडी क्लॉक इस तरह टर्न करना चाहिए.

30 से 50 की उम्र

  • सामान्य
    इस उम्र में ज़्यादातर लोगों को जोड़ों में लगातार दर्द रहता है या रह रहकर दर्द होता है, साथ ही ज़्यादा काम करने या एक्टिविटी करने से ये दर्द बढ़ जाता है.
  • असामान्य
    आराम करने पर भी दर्द होता है और चलने-फिरने या हिलने-डुलने से भी दर्द होता है. सारी शारीरिक क्रियाएं बंद करने के बाद भी दर्द होता ही रहता है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    अपने वजन को कंट्रोल में रखें. उसे बढ़ने ना दें. याद रखें आपका 1 किलो बढ़ा हुआ वजन जोड़ों पर 4 गुना भार बढ़ा देता है. बैठे रहने की बजाय रोज़ के कामकाज और शारीरिक गतिविधियां करते रहें. एक ही दिन घंटों जिम में पसीना बहाने की बजाय रोजाना थोड़ी-थोड़ी नियमित एक्सरसाइज़ करें या हप्ते में 4-5 दिन जिम जाएं. यदि जोड़ों में बहुत दर्द है, तो डॉक्टर से संपर्क करें.

50 से 70 की उम्र

  • सामान्य
    जोड़ों में पीड़ा या दर्द होना, जोड़ों से आवाज़ आना सामान्य बात है.
  • असामान्य
    जोड़ों में तेज़ दर्द, लंबे समय तक दर्द, चेतनाशून्यता या पिन चुभोने जैसा दर्द होता है. कई बार दर्द इतना बढ़ जाता है कि इसे दूर करने के लिए अक्सर पेनकिलर लेना पड़ता है.
  • टर्न करें बॉडी क्लॉक
    जोड़ों के लिए वजन कम करना बहुत फायदेमंद है. वजन कम होने से जोड़ों को ज़्यादा भार नहीं उठाना पड़ता. ऐसी डायट फॉलो करें जिससे वजन कम हो सके. बढ़ती उम्र में लंबे समय तक एक्सरसाइज़ करना ठीक नहीं, इसलिए रोजाना लगातार 30 मिनट एक्सरसाइज़ करने की बजाय 30 मिनट के समय को 3-4 भागों में बांट लें, यानी दिन में 3 बार 10-10 मिनट एक्सरसाइज़ करें.

यह भी पढ़ें: 10 बुरी आदतें बढ़ाती हैं मोटापा, क्या आप भी हैं इन बुरी आदतों के शिकार? (10 Bad Habits That Make You Fat, How to Break Them)

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याददाश्त

उम्र के साथ कई लोगों की याददाश्त तेज़ी से कम होने लगती है, कई लोगों को अल्ज़ाइमर जैसी समस्या भी हो जाती है. उम्र के साथ याददाश्त कम होना कब सामान्य है और कब नहीं, आइए जानते हैं.

30 से 50 की उम्र

  • सामान्य
    हम सबकी भूलने की आदत होती है, जैसे बाज़ार जाने पर किसी चीज़ को खरीदना भूल जाना, फोन नंबर्स का भूलना, बातचीत करते समय जगह या व्यक्ति का नाम भूलना आदि. यदि आप काफी व्यस्त रहते हैं तो यह समस्या और भी बढ़ जाती है.
  • असामान्य
    अपना पता भूलना, चीज़ों को भूलना, ख़ुद को भी भूल जाना चिंता का विषय है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    अपने स्ट्रेस/तनाव को कम करने की कोशिश करें. ऐसे लोगों के साथ रहें जो खुश रहते हैं और आपको भी उनके साथ रहने से ख़ुशी मिलती है. नियमित रूप से योग, ध्यान और एक्सरसाइज़ करें.

50 से 70 की उम्र

  • सामान्य
    हम देखते हैं कि बुजुर्गों को रोज़मर्रा की चीज़ें भी याद रखना मुश्किल हो जाता है. 70 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते बातचीत करते समय चीज़ों, व्यक्तियों या जगहों के नाम ज़ुबान पर नहीं आते. इन्हें याद करने के लिए ख़ुद को बहुत एकाग्र (कान्सन्ट्रेट) करना पड़ता है.
  • असामान्य
    बुजुर्ग कई बार अपने आपको भूल जाते हैं. अपना नाम, कहां रह रहे हैं? उन्हें कुछ भी याद नहीं रहता. कई बार रिश्तेदारों को भी पहचान नहीं पाते.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    खुद को मन और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए हेल्दी डायट लें. मानसिक रूप से सक्रिय रहें. आसान व्यायाम, योग और ध्यान करें. यदि भूलने की बीमारी ज्यादा बढ़ गई है, तो डॉक्टर से संपर्क करें.
Health Care Tips

सुनने की क्षमता

बढ़ती उम्र के साथ-साथ सुनने की क्षमता भी कम होने लगती है. कई बार ये समस्या इतनी बढ़ जाती है कि इसका ट्रीटमेंट जरूरी हो जाता है. आप अपनी सुनने की क्षमता को ऐसे बढ़ा सकते हैं.

30 से 50 की उम्र

  • सामान्य
    सुनने में कोई प्रॉब्लम नहीं होती. अलग से कोई लक्षण भी नहीं दिखाई देते.
  • असामान्य
    इसमें कई लक्षण दिखाई देते हैं. कानों में अक्सर भिनभिनाने की आवाज़ या घंटियों की आवाज़ सुनाई देती है. ये लोग दोस्तों या परिवार के सदस्यों से बात करने की अपेक्षा टीवी या रेडियो का वॉल्युम बढ़ा कर सुनते हैं. इन्हें एक बार में लोगों द्वारा कही गई बातें ठीक से सुनाई नहीं देतीं, इसलिए ये उन्हें अपनी बात फिर से कहने के लिए कहते हैं. इन लक्षणों से ज़ाहिर होता है कि सुनने की क्षमता का धीरे-धीरे कम हो रही है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    सुनने की क्षमता को बचाए रखने के लिए शोरगुल वाले स्थानों पर न जाएं. आई पॉड, मोबाइल या साउंड सिस्टम का वॉल्युम ज़्यादा ना बढ़ाएं, ये कानों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है. सुनने की क्षमता बहुत कम हो गई है, तो डॉक्टर को दिखाएं.

50 से 70 की उम्र

  • सामान्य
    उम्र बढ़ने के साथ-साथ सुनने की क्षमता कम होती जाती है. बैकग्राउंड म्यूजिक वाली जगहों पर, जैसे पब्स, रेस्टोरेंट या किसी कार्यक्रम में आपसी बातचीत ठीक से सुनाई नहीं देती.
  • असामान्य
    अच्छी तरह न सुन पाने का जीवन और लाइफ स्टाइल पर गहरा प्रभाव पड़ता है. इससे व्यक्ति सोशल फंक्शन्स में जाने से कतराने लगता है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    यदि सुनने में बहुत ज़्यादा अड़चन आ रही है, तो हियरिंग टेस्ट करवाएं. डॉक्टर की सलाह के अनुसार हियरिंग ऐड्स (कान की मशीन) लगवाएं. इससे आपको सारी समस्याओं से निज़ात मिल जाएगी.
Health Care Tips

देखने की क्षमता

बढ़ती उम्र का असर हमारी आंखों पर भी पड़ता है और हमारी देखने की क्षमता कम होने लगती है. अपनी देखने की क्षमता को आप इस तरह बेहतर बना सकते हैं.

30 से 50 की उम्र

  • सामान्य
    30 की उम्र में आंखों की दृष्टि को लगभग स्थिरता प्राप्त हो जाती है और वे हेल्दी होती हैं. 38 से 48 की उम्र के बीच दृष्टि में काफी परिवर्तन आने लगते हैं और आपको चीज़ों को देखने के लिए उन्हें पास या दूर रखना पड़ता है. यही वेकअप कॉल है कि अब आपकी उम्र बढ़ रही है.
  • असामान्य
    चश्मा लगाने पर भी धुंधला दिखना, आंखें लाल होना, आंखों में दर्द होना असामान्य बात है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    40 वर्ष की उम्र तक पहुंचते ही आंखों के डॉक्टर के पास जाएं. आंखों का पूरा चेकअप करवाएं, जिसमें आंखों के नंबर की जांच के अलावा मोतियाबिंद और ग्लूकोमा का भी चेकअप हो. मायोपिया (दूरदृष्टि) को लेसर सर्जरी द्वारा कम किया जाता है, जिससे चश्मा पहनने की आवश्यकता नहीं होती. आजकल बाइफोकल की जगह प्रोग्रेसिव ग्लासेस आ गए हैं, इनसे उम्र का पता नहीं चलता.

50 से 70 की उम्र

  • सामान्य
    इस उम्र में फ्लोट्रस आना, जिसमें लगता है कि नज़रों को मक्खियां क्रॉस कर रही हैं. कई बार आंखें ड्राई लगने लगती हैं. यही समय है जब आंखों की जांच करवाई जानी चाहिए. इस उम्र में डॉक्टर की सलाह का सख़्ती से पालन करें.
  • असामान्य
    लाइट के फ्लैशेस दिखना, आंखों का लाल होना, आंखों में चुभन, सीधी लाइन का लहराती हुई दिखना गंभीर लक्षण है.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    समय-समय पर आंखों का चेकअप करवाते रहें. ऐसा करने से यदि रेटिना की फटन हो रही हो, डार्क स्पॉट हो या अन्य कोई बीमारी हो, तो पकड़ में आ जाती है. इनका समय रहते इलाज करवाने से आंखों की रोशनी बनी रहती है. ड्राई आईज और लाल आंखों के लिए डॉक्टर की सलाह पर आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें.
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दांतों की समस्या

उम्र बढ़ने के साथ-साथ दांत भी कमज़ोर होने लगते हैं और दांतों की कई समस्याएं शुरू हो जाती हैं. बढ़ती उम्र में आप अपने दांतों को इस तरह मजबूत बनाए रख सकते हैं.

30 से 50 की उम्र

  • सामान्य
    कभी-कभार दांतों से ख़ून आना, दांतों में सड़न की शुरुआत, दांतों के इनेमल का कम होना, माइल्ड सेंसिविटी और दांतों का पीला/मलिन पड़ना सामान्य लक्षण हैं.
  • असामान्य
    दांत टूटना, दांतों का हिलना, दांतों में सड़न, मसूड़ों का फूलना या अपनी जगह से सरक जाना, दांतों का घिस जाना और ठंडी या गर्म चीज़ें खाने से दांतों में तेज़ झनझनाहट होना यानी सेंसिविटी होना असामान्य लक्षण हैं.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    दांतों में सड़न की शुरुआत होते ही डेंटिस्ट के पास जाकर दांत साफ करवाएं एवं फिलिंग करवाएं. दांतों की अच्छी तरह देखभाल के लिए दिन में 2 बार ब्रश करें. फ्लॉसिंग (दांतों के बीच की गंदगी निकालने के लिए) एवं नियमित माउथवॉश करें.

50 से 70 की उम्र

  • सामान्य
    कभी-कभार दांतों की पुरानी फिलिंग का निकाल जाना, मसूढ़ों का अपनी जगह से सरक जाना, इनेमल का नष्ट होना और इससे सेंसिटिविटी का बहुत बढ़ जाना, दांतों का मलीन होना आदि.
  • असामान्य
    दांतों की फिलिंग का नियमित रूप से टूटना या बाहर निकलना, मसूढ़ों में सूजन, ख़ून निकलना, मसूढ़ों का सरकना, जबड़ों के ज्वॉइंट्स में दर्द होना आदि.
  • ऐसे टर्न करें बॉडी क्लॉक
    दांतों में फिलिंग करवाएं. सड़े हुए दांत को बचाने के लिए रुट कनाल ट्रीटमेंट करवाएं और उस पर कैप या क्राउन बिठाएं, ताकि फिलिंग बाहर ना निकल सके. सेंसिटिविटी हो तो डॉक्टर की सलाह से सॉफ्ट ब्रश और सेंसिटिविटी टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें. फ्लोराइड माउथवॉश से रिन्स करें.

हेल्दी रहना भले ही आज के दौर में इतना आसान नहीं लेकिन छोटी-छोटी कोशिशें बड़े रंग ला सकती हैं. आप भी अगर ये सिम्पल रूल्स फ़ॉलो करेंगे तो हमेशा फिट और हेल्दी रहेंगे… इन स्टेप्स को फ़ॉलो करना ज़रा भी मुश्किल नहीं और इनकी जानकारी हम सभी को है लेकिन बस हम इनको फ़ॉलो नहीं करते, लेकिन आप कल से इन्हें आज़माएं और फ़र्क़ देखें व महसूस करें!

Tips To Stay Healthy & Fit
  1. रोज़ाना कम से कम 8 ग्लास पानी ज़रूर पीएं. फ्रूट जूसेस भी लें.
  2. सुबह उठते ही दो ग्लास गुनगुना पानी पीएं.
  3. भरपूर नींद लें. तनाव से दूर रहें.
  4. योग और एक्सरसाइज़ करें. रोज़ाना समय निकाल कर थोड़ी-सी फिज़िकल एक्टिविटी ज़रूर करें. दिन भर चुस्ती-स्फुर्ति के लिए हल्का व्यायाम बेहद ज़रूरी है.
  5. पौष्टिक नाश्ता ज़रूर करें. जी हां, जब भी आप सुबह उठते हैं तो अपनी ऊर्जा को बढ़ाने और नए दिन की ताज़ा तरीन शुरुआत के लिए सबसे ज़रूरी है पौष्टिक नाश्ता, जिससे शरीर को पूरे दिन की ऊर्जा मिले.
  6. अपने भोजन में वैरायटीज़ रखें, ताकि हर तरह का पोषण आपको मिल सके.
  7. मौसमी फल और सब्ज़ियां ज़रूर खाएं. हर रंग के फल व सब्ज़ियां खाएं.
  8. ड्राय फ्रूट्स भी अपने डायट में ज़रूर शामिल करें. होल ग्रेन्स और फ़ाइबर्स भी भरपूर मात्रा में लें.
  9. हेल्दी स्नैक्स खाएं. 4 बजे वाली भूख के लि, कोई हेल्दी ऑप्शन रखें. सूप्स पीएं, सलाद खाएं.
  10. शराब-सिगरेट, चाय-कॉफी जितना हो सके कम पीएं.
  11. अपनी पसंद का काम करें, अपनी हॉबीज़ को भी पूरा करने का टाइम निकालें. यह आपको रिफ्रेश कर देगा.
  12. खाना बनाने और खाने से पहले हाथ ज़रूर धोएं. अगर साबुन और पानी न हो, तो सनेटोइज़र का इस्तेमाल करें.
  13. खांसते-छींकते वक़्त मुंह ढंकें और धूल-धूप में जाते वक़्त मास्क पहनें.
  14. ओवर ईटिंग से बचें. कई बार अपना मनपसंद खाना देखते ही हम भूख से ज़्यादा खा लेते हैं, लेकिन ऐसा न करें. हमेशा भूख से थोड़ा कम ही खाएं, ताकि पानी के लिए जगह बची रहे.
  15. बहुत ज़्यादा पेन किलर्स न खाएं. घरेलू नुस्ख़े आज़माएं.
  16. खाने से एक घंटा पहले एक ग्लास पानी में नींबू का रस डालकर पीएं.
  17. खाने के फौरन बाद पानी न पी लें.
  18. रात को सोते समय एक ग्लास मीठा दूध पीएं.
  19. अपने बारे में हमेशा अच्छा महसूस करें और सकारात्मक सोच बनाए रखें.
  20. नहाने के बाद थोड़ा ध्यान लगाएं. इससे मन में एकाग्रता आती है और आप रिफ्रेश महसूस करते हैं.
  21. बहुत देर तक एक ही जगह पर न बैठें, न ही देर तक टीवी देखें. अपनी दिनचर्या नियमित करें और उसका पालन ईमानदारी से करें.
  22. अगर आपकी ईटिंग हैबिट्स ठीक नहीं है, तो एकदम से उसे बदलने की बजाय धीरे-धीरे बदलाव लाएं.
  23. अपनी बॉडी की सुनें. हर व्यक्ति की ज़रूरत और बॉडी टाइप व बॉडी क्लॉक अलग होता है, उसी के अनुसार अपना डायट और एक्सरसाइज़ प्लान करें.
  24. दिन में दो बार भरपेट खाने की बजाय 5-6 बार में थोड़ा-थोड़ा खाएं.
  25. खाना चबा-चबाकर खाएं.
  26. अपने डायट में मोनोअनसैचुरेटेड ़फैट्स शामिल करें. यह आपको स़फेद सरसों के तेल, मूंगफली का तेल और बादाम से मिलेगा. इसके अलावा कद्दू और सीसम के तेल में भी इसका स्रोत है.
  27. पॉलीअनसैचुरेटड फैट्स और ओमेगा3 और 6 ़फैटी एसिड भी शामिल करें. यह आपको ़फैटी फिश से मिलेगा, जैसे- सालमन, सार्डिन और ठंडे पानी की मछलियों के ऑयल. इसके अलावा अलसी के बीज, सोयाबीन और मकई भी पॉलीअनसैचुरेटड फैट्स के अच्छे स्रोत हैं.
  28. अपने डायट से सैचुरेटेड ़फैट्स की मात्रा कम करें. यह रेड मीट और डेयरी प्रोडक्ट्स में मिलता है.
  29. ट्रान्स फैट्स भी कम करें, जो फ्राइड व बेक्ड फूड, कुकिज़, कैंडीज़ और दूसरे प्रोसेस्ड फूड में पाया जाता है.
  30. अलग-अलग प्रोटीन्स लें. ये आपको बीन्स, नट्स, सीड्स, टोफू, सोय प्रोडक्ट्स में मिलेंगे. लेकिन सॉल्टेड, शुगरी या रिफाइन्ड नट्स न लें.
  31. कैल्शियम युक्त पदार्थ ज़रूर लें, जैसे- दूध, छाछ और दही. ये जल्दी डायजेस्ट हो जाते हैं. इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्ज़ियां भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं.
  32. बहुत ज़्यादा नमक और मीठा खाने से बचें. अपना हफ़्तेभर का डायट प्लान करके चार्ट बना लें. बासी भोजन करने से बचें. जितना हो सके ताज़ा पका खाना ही खाएं.
  33. रेग्युलर हेल्थ चेकअप भी करवाते रहें. कई बार डायबिटीज़ या उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का सालों तक पता नहीं चल पाता.
  34. घर में वेंटिलेशन अच्छा होना चाहिए. दिन के समय खिड़कियां खुली रखें, ताकि ताज़ा हवा और भरपूर रोशनी रहे.
  35. एसी का प्रयोग ज़रूरत पड़ने पर ही करें और समय-समय पर क्लीन भी करवाते रहें.
  36. ऑफ़िस में भी देर तक एक ही जगह पर न बैठे न रहें. बीच-बीच में टहल आएं.
  37. कंप्यूटर के सामने बहुत देर तक न रहें. समय-समय पर आंखें बंद करके रिलैक्मस करें.
  38. फ़ोन पर बहुत देर तक बातें न करें, इससे भी कई तरह के विकार उत्पन्न होते हैं.
  39. अगर संभव हो तो डान्सिंग और स्विमिंग क्लासेस जॉइन करें. इससे फन के साथ-साथ एक्सरसाइज़ भी होगी.
  40. रोज़ सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में शहद और नींबू मिलाकर पीएं.
  41. 1 कप कटे हुए मीठे पके सेब में 1 कप कटी हुई पत्ता गोभी, 1 टीस्पून जीरा और 3 कप पानी मिलाकर 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं. इसे छानकर इतना पानी मिला लें कि 3 कप बन जाए. इसे दिन भर थोड़ा-थोड़ा पीएं.
  42. नींबू का रोज़ाना सेवन करें. या तो नींबू पानी के रूप में या फिर खाने में नींबू का रस डालकर. यह पाचन शक्ति को बेहतर बनाता है.
  43. रोज़ सुबह 1 टीस्पून फिश ऑयल लेना भी काफ़ी हेल्दी होता है.
  44. जितना हो सके ब्रोकोली और पालक का सेवन करें.
  45. संतरे के छिलकों का जाम बनाकर सेवन करें. ताज़ा टमाटर खाएं.
  46. ब्लैक टी या ग्रीन टी लें.
  47. सोने से पहले भी दांतों को ब्रश करें. मुंह की दुर्गंध मिटाने के लिए पानी में बेकिंग सोडा डालकर गरारे करें.
  48. दांत और मसूड़ों की तकलीफ़ हो तो सेंधा नमक और सरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों की मालिश करें.
  49. वीकेंड्स पर बॉडी व हेड मसाज करवाएं. इससे थकान भी मिटेगी और ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ेगा.
  50. हवा-पानी बदलना बहुत ज़रूरी होता है. इससे पेट संबंधी रोग कम होते हैं. छुट्टियां प्लान करें और बाहर ज़रूर जाएं.
  51. खुलकर हंसे. रोज़मर्रा के तनाव में आपकी हंसी गायब न होने पाए. खुलकर हंसने से फेफड़ों में लचीलापन बढ़ता है और उन्हें ताज़ा हवा मिलती है.
  • रिंकु शर्मा
Tips To Stay Healthy & Fit

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यदि आप अपने बढ़े हुए वज़न के कारण स्टाइलिश कपड़े नहीं पहन पाते, तो ये आसान ट्रिक्स अपनाकर आप एक्स्ट्रा फैट कम कर सकते हैं. ये हैं वज़न घटाने के 10 कुदरती तरीके, इन्हें आजमाकर आप अपना मोटापा आसानी से घटा सकते हैं.

Lose Weight Tips

1) रोज़ाना सुबह उठने के बाद खाली पेट एक टमाटर खाएं.
2) रोज सुबह 3 टीस्पून नींबू का रस, 1/4 टीस्पून कालीमिर्च पाउडर और 1 टीस्पून शहद को मिलाकर एक ग्लास पानी के साथ पीएं. 3 महीने तक लगातार ऐसा करें, आपको अपने फिगर में बदलाव महसूस होगा.
3) रोज़ाना एक ग्लास गाजर का जूस पीने से भी मोटापा नहीं बढ़ता.
4) सलाद में ढेर सारी पत्तागोभी काटकर मिलाएं. इससे भी आप स्लिम बनी रहेंगी. पत्तागोभी आसानी से पच जाती है. साथ ही इसे खाने से देर तक पेट भरा होने का एहसास होता है.
5) एक ग्लास पानी में अदरक और नींबू की स्लाइस को कुछ देर के लिए उबालें, फिर पानी छानकर पी लें (ध्यान रहे कि पानी गरम ही हो). ये मोटापे के साथ ही ओवरईटिंग से भी बचाता है.

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Lose Weight Tips


6) चावल और आलू के ज़्यादा सेवन से परहेज़ करें. यदि आप चावल खाए बिना नहीं रह सकतीं, तो चावल को कुकर की बजाय पतीले में बनाएं और अतिरिक्त पानी निकालकर फेंक दें.
7) कटहल, अंगूर, पपीता, पाइनेप्पल, सेब, फ्रेंच बीन्स, अंजीर, पीच, अमरूद आदि फलों को अपनी डायट में शामिल करें. ये वज़न कम करने में सहायक हैं.
8) ग्रीन टी भी मोटापा कम करने में मदद करती है.
9) हफ्ते में एक बार उपवास करना भी अच्छा ऑप्शन है. इस दिन स़िर्फ लिक्विड चीज़ें लें, इससे टॉक्सिन और एक्स्ट्रा फैट शरीर से निकल जाएगा.
10) बहुत ज़्यादा नमक के सेवन से बचें, इससे वज़न बढ़ता है.

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टीवी की ये मशहूर बहू सबकी फेवरेट है और दिव्यांका की इमेज थी प्यारी सी पारंपरिक बहू की. लेकिन एक दुर्घटना के बाद उनका वज़न काफ़ी बढ़ गया था जिसके बाद उनके पति विवेक दहिया ने उन्हें प्रेरित किया और दिव्यांका ने अपना ऐसा मेकओवर किया कि वो बन गईं एकदम हॉट. क्या है दिव्यांका की फिटनेस का राज़, आइए जानें.

Divyanka Tripathi

दिव्यांका जिम जाती हैं और योगा भी करती हैं. हालांकि जिम जाने का उनका फिक्स टाइम नहीं है लेकिन वो नियमित वर्कआउट करती हैं.

Divyanka Tripathi

कार्डियो या वेट ट्रेनिंग उन्हें अधिक पसंद है. लेकिन दिव्यांका यह जानती थीं कि सिर्फ़ जिम जाना ही काफ़ी नहीं इसलिए उन्होंने डायट में भी बदलाव किए. उनका शरीर भी ऐसा है कि फैट्स जल्दी बनता है इसलिए उनके लिए समझदारी से हेल्दी डायट का चुनाव करना ज़रूरी था.

Divyanka Tripathi
  • दिव्यांका के दिन की शुरुआत होती है ग्रीन जूस से.
  • वो मीठा खाने से परहेज़ करती हैं.
  • घर का बना खाना ही खाती हैं.
  • नाश्ते में वो फ्रूट या ऑइल फ़्री पैनकेक्स भी खाना पसंद करती हैं.
  • वो सूप्स लेना भी पसंद करती हैं इसलिए जब भी उन्हें भूख महसूस होती है वो हेल्दी सूप पीती हैं. इस से भूख नियंत्रण में रहती है.
Divyanka Tripathi
  • इसके अलावा वो अपने साथ पनीर रखती हैं ताकि भूख लगने पर बीच बीच में उसका सेवन कर सकें.
  • दोपहर के खाने में वो रैप्स लेती हें. वो सब्ज़ियों व पनीर रैप्स का सेवन काफ़ी करती हैं. उनका खाना बिना तेल का ही होता है.
Divyanka Tripathi
  • चावल व कार्ब्स से दूर रहती हैं.
  • पानी खूब पीती हैं ताकि हाइड्रेटेड रहें.
  • शाम का भोजन 7:30-8 बजे से पहले कर लेती हैं.
  • उन्हें ऑइल फ्री वेजीटेबल कटलेट भी काफ़ी पसंद है.

तो आप भी अनुशासन में रहकर पा सकते हैं फिट शरीर. दिव्यांका अक्सर अपने पति के साथ अपने फिटनेस वीडियोज़ डालकर सबको प्रेरित भी करती हैं.

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क्या आप अचानक मोटी हो गई हैं? आपकी लाइफस्टाइल में कोई बदलाव नहीं आया है, आप कोई जंक फूड या तला हुआ खाना भी नहीं खा रहे हैं, आपको समझ नहीं आ रहा है कि आखिर आपका वजन क्यों बढ़ रहा है. क्या आप अपने बढ़े हुए वजन को कम नहीं कर पा रहे हैं? यदि बिना वजह आपका वजन बढ़ रहा है, तो आपको अपने भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा, क्योंकि मोटापे का इमोशनल कनेक्शन भी होता है. आखिर क्या है मोटापे का इमोशनल कनेक्शन, इसके बारे में बता रही हैं ट्रांसफॉर्मेशन कोच हित्ती रंगनानी.

Lose Weight Naturally

क्या है मोटापे का इमोशनल कनेक्शन?
मोटापा ज्यादा खाने से ही बढ़े ये जरूरी नहीं है, कई बार बेवजह वजन बढ़ने लगता है और स्थिति खतरनाक हो सकती है, क्योंकि ऐसे वजन बढ़ने का संबंध हमारे इमोशनल हेल्थ यानी भावनात्मक स्वास्थ्य से जुड़ा होता है. हमारी भावनाओं का हमारे शरीर पर इतना गहरा प्रभाव पड़ता है कि इससे हमें असाध्य बीमारी तक हो सकती है. स्वस्थ रहने के लिए शरीर ही नहीं, मन के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है. यदि बिना वजह आपका वजन बढ़ रहा है, तो आपको अपने भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा और इसका उपाय करना होगा.

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मोटापे का इमोशनल कनेक्शन जानने के लिए देखें ट्रांसफॉर्मेशन कोच हित्ती रंगनानी का ये वीडियो:

मोटापा कम करने के लिए अपनाएं ये 10 प्राकृतिक उपाय
मोटापा कम करने का प्राकृतिक तरीक़ा बहुत आसान है, इसके लिए आपको पैसे खर्च करने की भी जरूरत नहीं है. आइए, हम आपको मोटापा कम करने के 10 आसान और असरदार प्राकृतिक उपाय बताते हैं.

1) हेल्दी डायट का पहला मंत्र है दिनभर में थोड़ा-थोड़ा खाना इसलिए पूरे दिनभर में 5 बार खाएं. साथ ही यह भी देखें कि आप किस समय क्या खा रही हैं.
2) रोज़ सुबह उठकर सबसे पहले नींबू का रस और शहद मिला गरम पानी पीएं. अगर आपको अपना कोलेस्ट्रॉल कम करना है, तो गरम पानी में दालचीनी मिला सकती हैं, डायबिटीज़ कम करना है तो मेथी दाना भिगोकर मिला सकती हैं, सर्दी है तो पानी में हल्दी मिला सकती हैं. इन चीज़ों से सेहत अच्छी रहती है, वज़न घटना है और ख़ूबसूरती बढ़ती है.
3) अंकुरित अनाज, गाय का दूध, अंडे, नट्स आदि को अपने सुबह के नाश्ते में शामिल करें. इडली, डोसा, पोहा आदि भी ले सकती हैं.
4) नाश्ता व दोपहर के खाने के बीच में जब थोड़ी भूख होती है, उस समय मौसमी फल खाने चाहिए. ये आपको एनर्जी के साथ-साथ विटामिन्स और मिनरल्स भी प्रदान करते हैं, जिससे रोग-प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ती है. फलों के नियमित सेवन से आपको कम कैलोरी में सभी न्यूट्रीएंट्स मिल जाते हैं और ये वज़न कम करने में मददगार होते हैं.
5) दोपहर के खाने में ज्वारी, बाजरा, नाचनी से बनी रोटी खाएं. साथ ही हरी सब्ज़ियां व सभी प्रकार की दालें खा सकती हैं. भोजन के साथ सलाद भी खाएं. कैलोरीज़ कम करने के लिए रोटी में घी न लगाएं. सब्ज़ियों व दाल में भी कम घी/तेल का तड़का लगाएं. मसाले जैसे- हल्दी, कालीमिर्च, हींग आदि के प्रयोग से भोजन को स्वादिष्ट बनाया जा सकता है. इन मसालों से शरीर का मेटाबॉलिज़्म भी बढ़ता है, जिससे वज़न कम होने में मदद मिलती है.

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6) शाम के नाश्ते में नारियल पानी, छाछ या दही लिया जा सकता है. भूने हुए चने, ब्राउन ब्रेड सैंडविच, फ्रूट आदि भी ले सकती हैं.
7) रात को हल्का खाना जैसे- सूप, सलाद, खिचड़ी आदि लेने से वज़न कम होता है. रात के खाने और सोने में लगभग 3 घंटे का अंतर होना चाहिए.
8) स्लिम और जवां नज़र आने के लिए हेल्दी डायट के साथ-साथ वर्कआउट भी बेहद ज़रूरी है. इसके लिए रोज़ाना एक घंटा मॉर्निंग वॉक, जॉगिंग, एक्सरसाइज़, योग, मेडिटेशन आदि के लिए ज़रूर निकालें.
9) रात में जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत डालें, ताकि आपको पर्याप्त नींद मिल सके. सुबह जल्दी उठने से आप वर्कआउट के लिए आसानी से समय निकाल पाएंगे.
10) अपनी हॉबीज़ यानी शौक के लिए समय निकालें. हमारे शौक हमें खुश रखते हैं और हमारा तनाव दूर करते हैं, इससे इमोशनल मोटापा नहीं बढ़ता.

टेलीविज़न की मशहूर एक्ट्रेस दीपिका सिंह जितनी ख़ूबसूरत हैं, उतनी ही समझदार भी हैं. ‘दीया और बाती हम’ सीरियल की आईपीएस ऑफिसर संध्या (दीपिका का किरदार) की तरह ही दीपिका भी ज़िंदगी के हर चैलेंज का बहादुरी से सामना करती हैं. बेटे (सोहम) के जन्म के बाद दीपिका सिंह ने 18 किलो वज़न कम (Deepika Singh’s Weight Loss Secrets करके एक बार फिर सबको चौंका दिया है. इतने कम समय में दीपिका ने इतना वज़न कैसे कम किया? आइए, उन्हीं से ही जानते हैं.

दीपिका, आप फिर से पहले की तरह स्लिम-ट्रिम हो गई हैं. आपने इतनी जल्दी वज़न कैसे कम किया? (Deepika Singh’s Weight Loss Secrets)
मैंने वज़न कैसे कम किया, इससे पहले मैं आपको ये बताना चाहती हूं कि मेरा वज़न इतना ज़्यादा कैसे बढ़ गया. मेरा वज़न बढ़ने के ऐसे कई कारण थे, जिन पर मेरा कोई कंट्रोल नहीं था, जैसे-
* प्रेग्नेंसी के दौरान मुझे थायरॉइड की प्रॉब्लम हो गई थी, जिसके कारण मेरा वज़न तेज़ी से बढ़ने लगा था.
* फिर डिलीवरी के बाद मेरे घरवालों ने मुझे ख़ूब खिलाया-पिलाया, ताकि मुझे कमज़ोरी न आ जाए और बच्चे को दूध की कमी न हो.
* हमारे यहां 40 दिन तक घर से बाहर निकलने की इजाज़त नहीं है, इसलिए बैठे-बैठे बज़न और बढ़ने लगा.
* मैंने अपने बच्चे के लिए डाइपर का इस्तेमाल कभी नहीं किया. मुझे लगता है कि पीरियड्स के दौरान जब पांच दिन पैड पहनने में मुझे इतनी परेशानी होती है, तो इतने छोटे बच्चे को डायपर क्यों पहनाया जाए. जन्म के कुछ समय तक वो बार-बार कपड़े गीले करता था इसलिए मेरी नींद पूरी नहीं हो पाती थी, नींद की कमी से भी मेरा वज़न बढ़ने लगा. उस पर सोहम प्री-मैच्योर था इसलिए मैं उसका कुछ ज़्यादा ही ध्यान रखती थी.
* इस तरह मेरा वज़न 54 किलो से लगभग 72 किलो पहुंच गया. बढ़े हुए वज़न के कारण मुझे कमर दर्द की शिकायत भी होने लगी थी.

कब लगा कि अब वज़न कम करना ज़रूरी हो गया है? 
सोहम (बेटे) का जन्म 28 मई को हुआ और जुलाई की शुरुआत में जब मैंने अपना वज़न चेक किया, तो मैं हैरान रह गई. मेरा वज़न बढ़कर 72 किलो हो गया था. फिर 10 जुलाई से मैंने योगा करना शुरू किया था, लेकिन उससे भी बहुत ज़्यादा फर्क नहीं पड़ रहा था. मेरी बॉडी इतनी स्टिफ हो गई थी कि मैं कुछ भी नहीं कर पा रही थी. साथ ही मुझे कमर दर्द भी हो रहा था. मैंने डांस की प्रैक्टिस भी की, लेकिन मैं डांस कर ही नहीं पा रही थी. फिर जब मेरे बर्थडे (26 जुलाई) के दिन मेरी बहन और मां ने मुझसे कहा कि तुम्हारा वज़न कुछ ज़्यादा ही बढ़ने लगा है, तो ये मेरे लिए एक सिग्नल था. उसके बाद से मैंने फिटनेस की तरफ़ ध्यान देना शुरू कर दिया. सोहम के जन्म के ठीक 2 महीने बाद 28 जुलाई से मैंने जिम ज्वाइन कर लिया. हालांकि मैं जिम में बहुत कम टाइम ही बिता पाती थी, क्योंकि मुझे सोहम को दूध पिलाने के लिए जल्दी घर आना होता था. ब्रेस्ट फीडिंग की वजह से मैं वेट ट्रेनिंग तो कर नहीं सकती थी, इसलिए मैं जिम में ट्रेडमिल, क्रॉस ट्रेनर, कार्डियो वगैरह ही करती थी. कई बार मैं ब्रेस्ट पंप से उसके लिए दूध भी रखकर जाती थी. इसके अलावा ब्रेस्ट फीडिंग और डांस के कारण भी मेरा वज़न तेज़ी से कम हो रहा था.

आप क्या डांस की स्पेशल ट्रेनिंग ले रही हैं?
हां, मैं ओड़ीसी डांस सीख रही हूं. हफ्ते में तीन दिन मेरे गुरु सनातन चक्रवर्ती जी मुझे ओड़ीसी डांस सिखाते हैं. मुझे डांस करना बहुत पसंद है. डांस मेरे लिए पूजा की तरह है, इससे मुझे आध्यात्मिक शांति मिलती है. जब भी मैं डांस करती हूं, तो मैं ख़ुद को एक अलग ही दुनिया में पाती हूं. मेरे ख़्याल से डांस एक अच्छी एक्सरसाइज़ है और इससे बहुत ख़ुशी मिलती है. जिम, डांस, योगा, मेडिटेशन के साथ-साथ मैंने अपनी डायट पर भी ख़ास ध्यान देती हूं.

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आपके पूरे दिन का डायट प्लान क्या होता है? (Deepika Singh’s Weight Loss Secrets)
डायटिंग का ये मतलब नहीं है कि ख़ुद को खाने इतना दूर कर लो कि आपकी इमयूनिटी ही ख़राब हो जाए. फिर कल को जब आप कोई चीज़ खाएं तो आपकी बॉडी उसे डाइजेस्ट ही न कर पाए. हर चीज़ खानी चाहिए, लेकिन लिमिट में. साथ ही रेग्युलर एक्सरसाइज़ भी करनी चाहिए, ताकि आपका खाना अच्छी तरह पच जाए. मैं बार-बार नहीं खाती. दिन में 3-4 बार ही खाती हूं, वो भी घर का बना नॉर्मल खाना.
* मैं सुबह छह बजे उठ जाती हूं. सुबह मैं एक बॉटल गर्म पानी में 1-2 टीस्पून दालचीनी पाउडर मिलाकर पीती हूं. ये शरीर के टॉक्सिन बाहर निकालकर शरीर की सफ़ाई का काम करता है. ये इतना अच्छा प्रयोग है कि इसे आप सफ़र के दौरान भी कर सकते हैं. मेरा पानी पीने का भी नियम है. मैं शाम चार बजे तक ख़ूब पानी पीती हूं, उसके बाद ज़रूरत के हिसाब से पीना पीती हूं.
* 8 बजे तक मैं नाश्ता कर लेती हूं. नाश्ते में पोहा या ओट्स में मूंगफली, फ्रूट्स वगैरह डालकर खाती हूं. इससे मैं फ्रूट्स भी उसी समय खा लेती हूं.
* हफ्ते में तीन दिन सुबह दस बजे मेरी डांस क्लास शुरू हो जाती है (हंसते हुए), वो भी सोहम के हिसाब से आगे-पीछे होती रहती है. बाकी के दिन मैं योगा कर लेती हूं. साढ़े ग्यारह बजे तक डांस या योगा करने के बाद मैं शिकंजी (नींबू पानी) या छाछ पीती हूं. मुझे लो बीपी की प्रॉब्लम है इसलिए मैं नमक-शक्कर वाला नींबू पानी पीती हूं. कुछ देर बाद मन हुआ तो सलाद ले लेती हूं, नहीं तो सीधे लंच करती हूं.
* एक-डेढ़ बजे तक मैं लंच कर लेती हूं. लंच में 2 रोटी, 2 सब्ज़ी (एक सूखी और एक रस वाली), दाल, दही, हरी मिर्च, प्याज़… बिल्कुल देसी स्टाइल में खाना खाती हूं मैं. आजकल हमारे घर में राजस्थान से टीट का अचार आया हुआ है, तो मैं अचार भी स्वाद लेकर खा रही हूं.
* शाम पांच बजे मैं चाय के साथ बिस्किट या खाखरा लेती हूं. कई बार चना या मूंगफली खा लेती हूं.
* घर में खाना चाहे कितने बजे भी बने मैं शाम सात बजे अपने लिए दो परांठे बनवा लेती हूं और उन्हें सब्ज़ी या दाल जो भी मिले उसके साथ खा जाती हूं. आजकल आम आए हुए हैं, तो आम के साथ भी खा जाती हूं. सात बजे मैं डिनर कर ही लेती हूं.
* मैं सोहम को ब्रेस्ट फीड कराती हूं इसलिए मुझे 10 बजे फिर भूख लग जाती है. उस समय मैं एप्पल शेक पीती हूं. उसमें मैं फ्लैक सीड्स भी डालती हूं. मुझे एप्पल शेक बहुत पसंद है.
* मैं शुरू से अच्छा खाना खाती हूं. मैंने कभी क्रैश डायट नहीं की. हां, खाना पचाने के लिए मैं रेग्युलर एक्सरसाइज़ हमेशा करती हूं.
* वेट लॉस को लेकर मेरा जो ऑब्ज़रर्वेशन रहा है, वो है टाइमिंग. यदि आप राइट टाइम पर राइट चीज़ें और राइट प्रपोर्शन में खाते हैं, तो आपका वज़न जल्दी घटता है. रागी की रोटी खाओ, घी-तेल मत खाओ… इन सबसे कहीं ज़्यादा ज़रूरी टाइम पर खाना है. आप जिस टाइम पर खाते हैं, रोज़ उसी टाइम पर खाइए. साथ ही ख़ूब पानी पीएं, मैं हमेशा से ख़ूब पानी पीती हूं. साथ ही एक्टिव रहना, रेग्युलर एक्सरसाइज़ करना भी उतना ही ज़रूरी है.
* फिट रहकर, सही डायट लेकर, रेग्युलर एक्सरसाइज़ करके हम बीमारियों से दूर रह सकते हैं, बढ़ती उम्र के संकेतों को कम कर सकते हैं और हमेशा कॉन्फिडेंट नज़र आ सकते हैं.

आपका मां बनने का अनुभव कैसा था?
सच कहूं तो दिया और बाती से भी ज़्यादा मेहनत मां बनने में लगी. मां बनना औरत के लिए एक तरह से ट्रांसफॉर्मेशन का टाइम होता है. आज जब मैं ये सब सोचती हूं तो मुझे बहुत ख़ुशी होती है. मैंने पहले से ही तय कर लिया था कि मेरी डिलीवरी नॉर्मल होगी, मैं बच्चे को अपना दूध ही पिलाऊंगी और उसे डायपर नहीं पहनाऊंगी. मैंने सोहम की देखभाल के लिए मेड नहीं रखी. मुझे डर लगता है कि वो हाइजीन का ख़्याल रखेगी या नहीं. पहले मैंने मेड रखने की कोशिश की थी, लेकिन मुझे उनका काम पसंद नहीं आया. एक बार तो सोहम को आंख में इंफेक्शन हो गया था. मेड्स बच्चे को डाइपर पहनाकर फ्री हो जाती हैं इसलिए मैं अपने बच्चे को उनके हवाले नहीं करना चाहती थी.

क्या प्रेग्नेंसी के दौरान आपको कोई हेल्थ प्रॉब्लम हुई थी?
जैसा कि मैंने पहले भी बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान मुझे थायरॉइड हो गया था, जिसके कारण मेरा वज़न तेज़ी से बढ़ने लगा था. इसके साथ ही मुझे आठवें महीने में ही पेन शुरू हो गए थे, जिसके कारण मुझे रेस्ट करने की सलाह दी गई और डिलीवरी को नौवें महीने तक पोस्टपोन किया गया. मेरी डिलीवरी मेहर अंबे नर्सिंग होम, मुलुंड (मुंबई) में हुई थी. डॉक्टर रीता ने प्रेग्नेंसी के दौरान मुझे हेल्दी डायट और फिट रहने में बहुत मदद की. वो मुझे बताती थी वॉक ज़्यादा किया करो इसलिए मैं खाना खाने के बाद वॉक करती थी. साथ ही उन्होंने मुझे प्रेग्नेंसी के दौरान योगा करने को भी कहा. इन सबसे मेरा वज़न बहुत ज़्यादा नहीं बढ़ा और मेरा स्टेमिना भी अच्छा हो गया. वॉक और योग के कारण डिलीवरी के बाद भी मुझे काफी मदद मिली. यदि आप एक्टिव नहीं हैं, तो आपका स्टेमिना कम हो जाता है, जिससे आप बीमार जैसे दिखने लगते हैं इसलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को हमेशा एक्टिव रहना चाहिए. प्रेग्नेंसी के दौरान ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ बच्चे और मां को बहुत रिलैक्स करती है.

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Deepika Singh's Weight Loss Secrets
दीपिका सिंह के स्पेशल हेल्थ टिप्स
* जब भी मैं बहुत थक जाती हूं या मुझे लगता है कि मेरी बॉडी को रिलैक्सेशन की ज़रूरत है, तो मैं मेडिटेशन करती हूं. इससे मुझे बहुत अच्छा महसूस होता है.
* मैं बहुत ज़्यादा नहीं सोती. मैं सोने में नहीं, जीने में विश्‍वास करती हूं. मुझे उगता सूरज देखना अच्छा लगता है. सुबह की ताज़ा हवा अच्छी लगती है. मैं हमेशा जल्दी उठती हूं.
* 72 किलो से अब मैं फिर से 54 किलो की हो गई हूं इसलिए मैं बहुत ख़ुश हूं. 18 किलो वज़न घटाकर मैंने अपना टारगेट अचीव कर लिया है. अब मुझे इससे कम वज़न नहीं करना है इसलिए मैं इसे ही मेन्टेन करूंगी. अब मैं शेप में आ गई हूं इसलिए मैंने जिम जाना बंद कर दिया है. अब मैं अपने वज़न को डांस और योगा से बैलेंस कर रही हूं.
* मेटाबॉलिज़्म रेट का सीधा संबंध डायजेशन है. यदि आपका खाना ठीक से पच रहा है, तो आपका मेटाबालिज़्म भी ठीक रहेगा. इसीलिए बॉडी की सफ़ाई ज़रूरी है. दालचीनी पाउडर मिला गरम पानी यही काम करता है.
* मैं खाते समय हमेशा ये सोचती हूं कि आज न जाने कितने लोगों को खाना नहीं मिला होगा, ये सोच मुझे लिमिट में खाने में मदद करती है. आज हमारे पास पैसे ज़्यादा आ गए हैं, लग्ज़री ज़्यादा आ गई है, इसका ये मतलब नहीं कि हम उनका ग़लत फ़ायदा उठाएं.

दीपिका सिंह के ब्यूटी सीक्रेट्स
* मैंने अभी तक अपने बालों को कलर नहीं किया है. पहले कभी-कभार मैं बालों में मेहंदी लगा लेती थी, लेकिन पिछले 2 सालों से मेहंदी भी नहीं लगाई है. प्रेग्नेंसी के दौरान घरवाले कहते थे कि मेहंदी लगाने से कहीं तुमहें सर्दी न हो जाए. अब बच्चे के जन्म के बाद कहते हैं कि कहीं बच्चे को सर्दी न हो जाए इसलिए मैं अभी भी मेहंदी नहीं लगा रही हूं.
* बालों में कलर न करने की वजह ये है कि बाज़ार में भले ही अमोनिया फ्री हेयर कलर उपलब्ध हैं, लेकिन बालों में कलर प्रोटेक्ट करने के लिए जो शैंपू लगाना पड़ता है, उसमें तो केमिकल होता ही है. मैं अपने शरीर पर केमिकल का कम से कम इस्तेमाल करती हूं इसलिए मैं बालों में कलर करने से बचती हूं. मैं बालों के लिए हर्बल शैंपू इस्तेमाल करती हूं.
* शूटिंग के अलावा मैं मेकअप नहीं करती. स्किन केयर के लिए भी मैं देसी उबटन का ही इस्तेमाल करती हूं.
* मैं पल्सेस, चावल, कलौंजी और बादाम को पीसकर पाउडर बनाकर एयर टाइट कंटेनर में रख देती हूं. फिर बाथरूम में ये पाउटर एक बाउल में रखती हूं और इस उबटन को साबुन की तरह लगाकर नहाती हूं. नहाने में मुझे 15 मिनट लग जाते हैं, लेकिन ये संतुष्टि होती है कि मैंने अपने शरीर पर कोई केमिकल नहीं लगाया. बॉडी वॉश या साबुन लगाने के बाद कितना भी पानी डालो, वो बॉडी में रह ही जाता है. उबटन यदि शरीर पर रह भी जाए तो उसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता.
* मैं हल्दी, केसर, दूध, पपीता आदि से लेप बनाकर चेहरे पर लगाती हूं.
* इसके अलावा जब भी टाइम मिलता है, तो मैं आटे में सरसों का तेल मिलाकर बॉडी मसाज भी करती हूं, इससे त्वचा को ग्लो मिलता है.

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मैं अपना अतीत नहीं भूली हूं
मेरा बचपन पहाड़गंज में बीता है, जहां आज भी लोग पानी की किल्लत झेलते हैं. बचपन में जब मैं पहाड़गंज में रहती थी, तो हमारे यहां पानी के टैंकर आते थे. मेरी मां, मैं और मेरी बहनें तीसरी मंज़िल तक बाल्टी से पानी भरकर ले जाते थे. कई बार फिसल भी जाते थे. मैंने लाइट और पानी की बहुत दिक्कत देखी है इसलिए मैं इन्हें कभी वेस्ट नहीं करती. कई बार जब लाइट चली जाती थी, तो हम लैंप में पढ़ाई करते थे. मैं आज भी घर के किसी भी रूम की लाइट, पंखा या एसी कभी खुला नहीं छोड़ती. मैं अपना अतीत नहीं भूली हूं इसलिए आज भी मैं पानी ज़रा भी वेस्ट नहीं करती. मुझे ये लगता है कि मैं अपनी तरह से कोशिश करती रहूंगी. मुझे देखकर कुछ लोग भी बदल सकें, तो मेरे लिए ये बहुत बड़ी बात होगी.

– कमला बडोनी

आपने अपनी दिनचर्या में कुछ ऐसी आदतें शामिल की होंगी, जो आपके हिसाब से सेहतमंद हैं, पर क्या आपको अंदाज़ा भी है, ये आपकी सेहत के लिए नुक़सानदायक भी हो सकती हैं. क्या हैं ये आदतें? चलिए हम आपको बताते हैं.

Healthy Habits

1) लो-फैट या फ्री डेयरी का चुनाव
नये रिसर्च से यह सिद्ध हुआ है कि फुल फैट डेयरी का दिल की बीमारियों, टाइप-2 डायबिटीज़ व मोटापा से कोई संबंध नहीं है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि डेयरी (दूध से बनी चीज़ें) में मौजूद फैटी एसिड्स मेटाबॉलिज़्म बढ़ाने में मददगार सिद्ध होते है. फैट का सेवन करने से पेट अधिक समय तक भरा रहता है और ओवरईटिंग से बचा जा सकता है. इसके साथ ही यह ज़रूरी नहीं है कि जिन प्रोडक्ट्स पर लो-फैट या फैट-फ्री लिखा हो, उनमें कम कैलोरीज़ या कम शुगर हो. कई बार कुछ कंपनियां प्रोडक्ट्स का स्वाद बढ़ाने के लिए उनमें आर्टिफिशियल शुगर, सॉल्ट या फ्लेवर्स मिलाती हैं. इसलिए सुनने में भले ही थोड़ा अटपटा-सा लगे, पर फुल-फैट डेअरी (वसा युक्त) प्रोडक्ट्स आपके लिए सेहतमंद हैं.

2) कार्ब्स से दूरी
एक रिसर्च के मुताबिक़ कार्बोहाइड्रेट्स- विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर्स प्रदान करते हैं, जो हमारे शरीर को ऊर्जा देते है. अगर हम पूरी तरह कार्ब्स का सेवन बंद कर देते हैं, तो बॉडी टिशूज़ में मौजूद ग्लाइकोसिन कम हो जाता है और शरीर ऊर्जा के लिए पूरी तरह फैट पर निर्भर हो जाता है, इस प्रोसेस को केटोसिस कहते हैं.
ऊर्जा के लिए फैट पर निर्भर रहना सेहत के लिए अच्छा नहीं है. शरीर में केटॉन्स एकत्रित होने पर सिरदर्द, नोज़िया, एकाग्रता की कमी और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं हो जाती हैं. इसलिए बेहतर यही होगा कि सिंपल कार्ब्स जैसे- डोनट्स व मफिन्स से भले ही दूरी बनाए, लेकिन साबूत अनाज, दालें, फल व सब्ज़ियों को अपनी डायट में ज़रूर शामिल करें, फिर भले ही आपको अपना वज़न ही क्यों न कम करना हो.

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3) लो-कैलोरी फ्रोज़ेन फूड्स का सेवन
वज़न घटाने के लिए कई लोग रात के आहार में 150 से 200 कैलोरीज़ वाला फ्रोज़न मील ग्रहण करते हैं, जो वास्तव में बेहद कम है. अगर आप दिनभर में कम खाएंग, तो आपका मेटाबोलिज़्म घट जाएगा, इसलिए इन मील्स के साथ सब्ज़ियों व फलों का भी सेवन करें. अगर आपके खाने में स्टार्च का आभाव है, तो अपने भोजन में साबूत अनाज और शकरकंद को शामिल करें.

4) लीन प्रोटीन के स्रोत के लिए देली मीट का चुनाव
रोस्ट टर्की और पका हुआ हैम शरीर में प्रोटीन की मात्रा को तेज़ी से बढ़ाने के लिए एक कारगर उपाय है, लेकिन हाल ही में द वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइज़ेशन ने यह संशोधित किया है कि देली मीट शरीर में कोलेस्ट्रॉल कैंसर के ख़तरे को बढ़ाता है. इस संबंध में द माइंड डायट की लेखिका न्यूट्रिशनिस्ट मैगी मून का कहना है कि इस प्रकार के मीट में नमक अधिक मात्रा में होने के कारण यह डिहाइड्रेशन की वजह बन सकता है. यदि आप एक प्रोटीन स्रोत की तलाश कर रहे हैं, तो रोटिसेरी चिकन का चयन करें तथा फैट और सॉल्ट की मात्रा को कम करने के लिए उसकी त्वचा को हटाकर उसका सेवन करें.

Healthy Habits

5) फलों से परहेेज़ करना, क्योंकि इसमें शुगर अधिक होता है
हालांकि फलों में शुगर फ्रटोज़ शामिल होता है, इसलिए फलों का ज़्यादा सेवन वज़न बढ़ाने का कारण बन सकता है. लेकिन फलों में फाइबर के होने के साथ कई पोषक तत्व भी होते हैं. फलों को अपने भोजन से हटाने का अर्थ होगा महत्वपूर्ण तत्व जैसे- विटामिन, मिनरल्स और बीमारी से लड़ने वाले फाइटिंग एंटीऑक्सीडेंट्स से दूर हो जाना. फल से दूरी बनाने का मतलब है कि आप इसे हाई कैलोरी स्वीट स्नैक्स, केक या कैंडी बार से बदल लेंगे, जिससे वज़न बढ़ सकता है.

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Disha Patani

बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पटानी (Disha Patani) उन फिटनेस फ्रीक स्टार्स (Fitness Freak Stars) में से एक हैं, जो अपनी स्लिम फिगर को मेटेन रखने और फिट रखने के लिए डायट और वर्कआउट करती हैं. अगर आप भी दिशा पटानी जैसे ऐब्स और टोन्ड बॉडी पानी चाहते हैं, तो फॉलो करें यहां पर बताए डायट (Diet) और फिटनेस सीके्रट्स (Fitness Secrets).

डायट
ब्रेकफास्ट: ओट्स, 2 अंडे, टोस्ट, कॉर्नफ्लेक्स, सीरियल्स और 1 ग्लास दूध/जूस.
लंच: वेजीटेबल सलाद/फ्रूट्स.
इवनिंग स्नैक्स: बादाम, मूंगफली.
डिनर: सूप, ब्राउन राइस, हरी सब्ज़ियां और दाल.

– दिशा हेल्दी फूड खाती हैं. लंच में ज़्यादातर विटामिन्स, मिनरल्स और से भरपूर चीज़ें खाना पसंद करती हैं.
– डिनर में वे प्रोटीन रिच फूड लेती हैं और कार्बोहाइड्रेट मिश्रित फूड बिल्कुल नहीं खाती.
– उन्हें मिठाइयां, पैनकेक औैर आइस्क्रीम बहुत पसंद है. जिस दिन उनका चीट डे होता है, वे यह सब खाना पसंद करती है.
– सलाद को अपनी डायट में ज़रूर शामिल करती हैं.
– दिशा का मानना है कि ख़ुद को फिट रखने के लिए सबसे ज़रूरी है कि आप क्या खा रहे हैं. क्योंकि हम जो खाते हैं, वहीं हमारी बॉडी पर भी लगता है.
– ग्रीन चीज़ों को अपनी डायट में ज़रूर शामिल करती है.
– दिनभर में खूब सारा पानी पीती है.

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वर्कआउट रूटीन
– दिशा के दिन की शुरुआत योग से होती है.
– वह हफ्ते में केवल 4 दिन ही जिम जाती है.
– कार्डियो एक्सरसाइज़, पिलेट्स, रिंग डिप्स, लाइट वेट ट्रेनिंग और वेट लिफ्टिंग उनके फिटनेस रूटीन का हिस्सा है.
– फिट रहने के लिए स्विमिंग और योग भी करती हैंै.
– दिशा ट्रेंड जिम्नास्ट डांसर है. अपनी फिगर को मेंटेन रखने के लिए जिम्नास्ट भी करती है.
– उन्हें डांस करना बेहद पसंद है. ख़ुद को फिट रखने के लिए वह रोज़ाना 30 मिनट डांस ज़रूर करती हैं. इस दौरान वह डांस के नए-नए फॉर्म
ट्राई करती हैं.
– नियमित रूप से मेडिटेशन करती हैं.
– फिट रहने के लिए दिशा बॉक्सिंग भी करती हैं. बॉक्सिंग करने से कैलोरीज़ बर्न होती है और वज़न भी मेंटेन रहता है.

फिटनेस मंत्र
– दिशा का फिटनेस मंत्र है कि वह फिट रहने के लिए बहुत वर्कआउट करती हैं.
– उनका मानना है कि किसी भी तरह के डांस फॉर्म से आप ख़ुद को फिट रख सकते हैं

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– देवांश शर्मा

Easy Diet Tips

15 आसान-असरदार टिप्स घटाते हैं वज़न
1. वर्किंग वुमन ऑफिस से आने के बाद इतनी थक जाती हैं कि अक्सर वही बनाती हैं जिसमें ज़्यादा मेहनत ना लगे. ऐसे में हरी सब्ज़ियां घर में बहुत कम ही बन पाती हैं. इससे बचने के लिए छुट्टी हेल्दी फल व सब्ज़ियों को काटकर फ्रिज में रख दें.
2. भुने चने, मुरमुरे, पॉपकॉर्न, ब्राउन ब्रेड आदि हमेशा फि्र्ज में रखें, ताकि भूख लगने पर भी आप हेल्दी खा सकें.
3. ऑफिस में टिफिन के अलावा ताज़े फल, दही, ड्राईफ्रूट्स, फैट-फ्री स्नैक्स आदि भी साथ ले जाएं, ताकि भूख लगने पर आप जंक फूड खाने से बच सकें.
4. सूप, सलाद, स्प्राउट्स, फ्रूट्स आदि स्लो टु ईट फूड माने जाते हैं. इनका सेवन हम धीरे-धीरे करते हैं, जिससे संतुष्टि मिलती है और हम ज़्यादा खाने से बच जाते हैं.
5. मूंग दाल चीला, बेसन का चीला, ऑमलेट आदि बनाने के लिए नॉन-स्टिक तवे का इस्तेमाल करें, इससे तेल कम इस्तेमाल होता है और आप हेल्दी डायट ले पाती हैं.

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6. दलिया, ब्राउन राइस आदि को बनाते समय उसमें ढेर सारी सब्ज़ियां मिला दें.
7. यदि पार्टी में जा रही हैं तो घर से निकलने से पहले हेल्दी स्नैक्स खा लें. इससे आप पार्टी में ओवर ईटिंग से बच जाएंगी.
8. इसी तरह शादी-ब्याह में ज़रूरी नहीं कि सारी चीज़ें खाई ही जाएं, स़िर्फ अपनी पसंद की चीज़ ही खाएं वो भी कम मात्रा में.
9. होटल में भी सारी चीज़ें इसलिए चट न कर जाएं कि उसमें आपके पैसे लगे हैं. यदि खाना बहुत बच गया है तो बेहतर होगा उसे पैक करा के घर ले जाएं.
10. अपने लंच व डिनर में पत्तेदार सब्ज़ियां जैसे चौलाई, शलजम के पत्ते, मूली के पत्ते, सरसों के पत्ते, बंदगोभी, पालक, लेट्यूस आदि शामिल करें. इनमें कई तरह के विटामिन्स होते हैं और वसा रहित होने के कारण ये नो कैलोरी में गिने जाते हैं.

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11. डार्क कलर के फल व सब्ज़ियों में एंटी एजिंग तत्व होते हैं, इनके सेवन से आप बढ़ती उम्र के संकेतों को आसानी से रोक सकती हैं. अतः अपने डेली डायट प्लान में पपीता, तरबूज, अनार, गाजर, शिमला मिर्च, टमाटर आदि को ज़रूर शामिल करें.
12. डायटिंग के दौरान होने वाली क्रेविंग रोकने के लिए कुछ खाने से पहले सूप, फ्रेश जूस, नारियल पानी, हर्बल टी पीएं. ये हेल्दी होते हैं और क्रेविंग से राहत भी दिलाते हैं.
13. क्रेविंग को रोकने का एक आसान तरीक़ा है ब्रश करना. जी हां, जब भी क्रेविंग बढ़े, तो टूथब्रश से दांत साफ़ करें, भूख ख़त्म हो जाएगी.
14. दिन में 4-5 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं. इससे आपका वज़न भी कंट्रोल में रहेगा और आप अपनी भूख पर नियंत्रण रख पाएंगी.
15. सुबह के नाश्ते में एग व्हाइट खाना बेहतरीन विकल्प है. इसमें प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है जिससे थोड़ा खाकर भी शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है.

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Weight Loss Tip

घर के कामों से वज़न घटाएं
* पोंछा लगाते समय 30 मिनट में 145 कैलोरी खर्च होती है जो ट्रेडमिल पर 15 मिनट दौड़ने के बराबर है.
* कपड़े धोते समय 60 मिनट में 85 कैलोरी बर्न होती है जो 100 सिटअप करने के बराबर है.
* खाना बनाते समय 60 मिनट में 150 कैलोरी खर्च होती है जो 15 मिनट एरोबिक्स करने के बराबर है.
* डस्टिंग करते समय 30 मिनट में 180 कैलोरी खर्च होती है जो 15 मिनट तक साइकिल चलाने के बराबर है.
* गार्डनिंग करते समय 60 मिनट में 250 कैलोरी बर्न होती है जो 25 मिनट सीढ़ी चढ़ने-उतरने के बराबर है.
* बिस्तर लगाते समय 15 मिनट में 66 कैलोरी बर्न होती है जो डेढ़ कि.मी. पैदल चलने के बराबर है.

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जानें वज़न बढ़ने की वजहें
वज़न बढ़ने की वजहें कई हैं, लेकिन व़क्त रहते यदि मोटापे पर कंट्रोल नहीं किया गया, तो कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं इसलिए सबसे पहले वज़न बढ़ने की वजहों को जानना ज़रूरी है.

लाइफ स्टाइल
आधुनिक जीवनशैली ने सुख-सुविधाएं तो बहुत दी हैं, लेकिन उन सुविधाओं का लाभ उठाते हुए लोग शारीरिक श्रम करना ही भूल गए हैं. थोड़ी दूर भी जाना हो तो गाड़ी से ही जाएंगे, पहली मंज़िल पर जाने के लिए भी लिफ्ट का इस्तेमाल करेंगे, दिनभर एसी रूम में आरामकुर्सी से चिपके रहेंगे… लोगों की इन आरामपसंद आदतों ने उन्हें बड़ी-बड़ी बीमारियां दे दी हैं.
आसान है समाधान
बिज़ी दिनचर्या में भी समय निकालकर फिज़िकल एक्सरसाइज़ करना बहुत ज़रूरी है. सही डायट और एक्सरसाइज़ से फिट रहना मुश्किल काम नहीं है. अपनी लाइफ स्टाइल में बदलाव लाकर कोई भी फिट और हेल्दी रह सकता है.

जंक फूड
जंक फूड हमारी ज़िंदगी में इस क़दर शामिल हो गया है कि इसके बिना हम किसी भी सेलिब्रेशन की कल्पना भी नहीं कर सकते और जंक फूड की यही लत मोटापा बढ़ा देती है. बड़े ही नहीं बच्चे भी जंक फूड के आदी हो गए हैं. बड़ों की देखादेखी में अक्सर बच्चे भी पिज़्ज़ा, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक आदि जंक फूड की डिमांड करने लगते हैं.
आसान है समाधान
आज के दौर में जंक फूड से पूरी तरह बचना तो मुमकिन नहीं, लेकिन उनमें भी हेल्दी ऑप्शन अपनाए जा सकते हैं. साथ ही जंक फूड के लिए हफ्ते या महीने में एक-दो दिन फिक्स कर लें और स़िर्फ उसी समय जंक फूड खाएं.

समय की कमी
महानगरों में ज़्यादातर पति-पत्नी दोनों नौकरीपेशा होते हैं, ऐसे में समय की कमी के कारण वो रेडी टु ईट खाने को प्राथमिकता देते हैं. समय के अभाव ने फास्ट फूड और दो मिनट में बन जाने वाली चीज़ों की डिमांड बढ़ा दी है और इन्हीं चीज़ों से मोटापा बढ़ने लगता है.
आसान है समाधान
कम समय में हेल्दी खाना बनाया जा सकता है जैसे- सूप, सलाद, ओट्स, दलिया आदि. वर्किंग कपल थोड़ी-सी प्लानिंग करके हेल्दी डायट अपना सकते हैं.

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स्ट्रेस
जी हां, तनाव भी वज़न बढ़ने की एक बड़ी वजह है. तनाव में अक्सर हम ज़्यादा खाते हैं और तनाव के समय मीठा खाने का मन करता है, जिससे मोठापा ज़्यादा बढ़ता है.
आसान है समाधान
जब भी लगे कि आप तनाव महसूस कर रही हैं, तो एक ग्लास पानी पी लें. साथ ही तनावमुक्त होने के लिए एक्सरसाइज़ करें, जैसे- गहसी सांसें लें, मसल रिलैक्शेसन तकनीक अपनाएं या कोई जोक बुक पढ़ें.

नींद की कमी
रात में देर से सोने और सुबह जल्दी उठ जाने से भी मोटापा बढ़ता है. ऐसा करने से रात में खाया हुआ खाना पच नहीं पाता. साथ ही इंसोम्निया (अनिद्रा), डिप्रेशन आदि के शिकार भी हो सकते हैं.
आसान है समाधान
अपना हर काम समय पर पूरा करने की कोशिश करें ताकि आप समय पर सो सकें और पर्याप्त नींद ले सकें. रोज़ाना 7-8 घंटे की नींद बेहद ज़रूरी है.

खाने का शौक
खाने के शौकीन लोग अक्सर भरे-पूरे शरीर वाले होते हैं, क्योंकि उनका खाने पर कोई कंट्रोल नहीं होता. फिर आगे चलकर खाने का ये शौक उन्हें इतना भारी पड़ता है कि उन्हें कई हेल्थ प्रॉब्लम्स होने लगती हैं.
आसान है समाधान
खाने का शौक होना अच्छी बात है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि जब जो जी में आया खा लिया. यदि आप खाने की शौकीन हैं और अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा खा लेती हैं, तो अपने शौक की भरपाई एक्सरसाइज़ करके करें. इससे आपका शौक भी बना रहेगा और आप फिट भी बनी रहेंगी.

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* शाम को भूख लगने पर भरपेट पपीता खाएं. इसमें कैलोरी कम और फाइबर ज़्यादा होता है.
* रात के खाने में रागी की रोटी खाएं. इसमें भरपूर मात्रा में न्यूट्रिएंट्स होते हैं और कैलोरी बहुत कम होती है.
* दालचीनी, लाल मिर्च, कालीमिर्च, अदरक, सरसों आदि मसाले वज़न घटाने में सहायक हैं इसलिए इनका सेवन भी कर सकती हैं.
* पपीता, अनन्नास, सेब, अमरूद, अंगूर, पीच आदि फल भी वज़न कम करने में सहायक हैं.

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किस समय क्या खाएं?
डायटिंग का पहला मंत्र है दिनभर में थोड़ा-थोड़ा खाना. इससे भूख भी नहीं लगती और वज़न भी कम होता है इसलिए पूरे दिनभर में 5 बार खाएं. साथ ही यह भी देखें कि आप किस समय क्या खा रही हैं.

सुबह का नाश्ता
अंकुरित अनाज, गाय का दूध, अंडे, नट्स आदि को अपने सुबह के नाश्ते में शामिल करें. इडली, डोसा, पोहा आदि भी ले सकती हैं.

मिड मील
नाश्ता व दोपहर के खाने के बीच में जब थोड़ी भूख होती है, उस समय मौसमी फल खाने चाहिए. ये आपको एनर्जी के साथ-साथ विटामिन्स और मिनरल्स भी प्रदान करते हैं, जिससे रोग-प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ती है. फलों के नियमित सेवन से आपको कम कैलोरी में सभी न्यूट्रीएंट्स मिल जाते हैं और ये वज़न कम करने में मददगार होते हैं.

दोपहर का खाना
इसमें ज्वारी, बाजरा, नाचनी से बनी रोटी का समावेश करें. हरी सब्ज़ियां व सभी प्रकार की दालों का भी समावेश किया जाना चाहिए. साथ ही सलाद भी खाएं. कैलोरीज़ कम करने के लिए रोटी में घी न लगाएं. सब्ज़ियों व दाल में भी कम घी/तेल का तड़का लगाएं. मसाले जैसे हल्दी, कालीमिर्च, हींग आदि के प्रयोग से भोजन को स्वादिष्ट बनाया जा सकता है. इन मसालों से शरीर का मेटाबॉलिज़्म भी बढ़ता है, जिससे वज़न कम होने में मदद मिलती है.

शाम का नाश्ता
इस समय नारियल पानी, छाछ या दही लिया जा सकता है. भूने हुए चने, ब्राउन ब्रेड सैंडविच, फ्रूट आदि भी ले सकती हैं.

रात का खाना
रात को हल्का खाना जैसे- सूप, सलाद, खिचड़ी आदि लेने से वज़न कम होता है. रात के खाने और सोने में लगभग 3 घंटे का अंतर होना चाहिए.

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जन्मदिन मुबारक हो!

 

* परिणिती चोपड़ा ने 86 से 57 किलो अपना वज़न किया यानी 29 किलो वेट लॉस किया.
* इसके लिए उन्होंने ऑस्ट्रिया का डिटॉक्स प्रोग्राम अपनाया. इसे अर्जुन कपूर, रानी मुखर्जी, आदित्य चोपड़ा आदि कर चुके हैं. इसमें बिना सर्जरी के मनचाहा फिगर पा सकते हैं.
* इस प्रोग्राम में एक टेस्ट होता है, जिससे यह पता लगाया जाता है कि आपकी बॉडी क्या व कितना सहन कर सकती है.
* फिर इसी के आधार पर छह महीने का डायट प्लान बनाया जाता है, जिसे आपको पूरी गंभीरता के साथ फॉलो करना होता है.
* परिणिती पहले 38 इंच की जींस पहनती थीं, अब 30 इंच की पहनती हैं. वेस्ट के लिए उन्होंने जिम में वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज़ की मदद ली.
* इसके लिए वे हर रोज़ सुबह जॉगिंग, फिर मेडीटेशन, बाद में एक घंटा योग करती थीं.
* फिर ट्रेडमिल पर दौड़ना, डांस, स्विमिंग या हॉर्स राइडिंग करती थीं.
* नियमित रूप से एक्सरसाइज़ व कार्डियो के अलावा उन्होंने अपना डायट भी चेंज किया.
* उन्हें पिज़्ज़ा बहुत पसंद है, पर वेट लॉस के लिए उन्होंने फास्ट फूड अवॉइड करने के साथ बैलेंस डायट प्लान अपनाया.
* वे ब्रेकफास्ट में ब्राउन ब्रेड, एक ग्लास दूध, दो अंडे की स़फेदी और कभी-कभी जूस लेती हैं.
* लंच में ग्रीन सलाद व वेजीटेबल्स, दाल, रोटी और ब्राउन राइस लेती हैं.
* डिनर में कम ऑयल से बना सादा भोजन करती हैं. फिर एक ग्लास दूध व कभी-कभी चॉकलेट शेक लेती हैं.
* वे सोने से दो घंटे पहले डिनर लेती हैं. बकौल उनके यदि आपको वेट लॉस करना है, तो फास्ट फूड छोड़ना होगा.
– ऊषा गुप्ता