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कैंसर से बचाएंगी ये किचन रेमेडीज़ (Cancer Prevention: Best Home Remedies To Lower Your Risk)

Cancer Prevention

कैंसर से बचाएंगी ये किचन रेमेडीज़ (Cancer Prevention: Best Home Remedies To Lower Your Risk)

पूरी दुनिया में ही नहीं, भारत में भी कैंसर (Cancer) के रोगी लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन हमारे किचन में ही ऐसी बहुत सारी चीज़ें उपलब्ध हैं, जिनका नियमित सेवन कैंसर से लड़ने में सहायता कर सकता है. एक नजर किचन में मौजूद कुछ ऐसी ही एंटी कैंसर चीज़ों पर.

हल्दीः खाने में हल्दी का इस्तेमाल ज़रूर करें. इसमें मौजूद करक्यूमिन तत्व कैंसर से लड़ने में मदद करता है. हल्दी ख़ासकर ब्रेस्ट कैंसर, पेट के कैंसर और त्वचा के कैंसर में ज़्यादा प्रभावी है.

केसरः केसर में क्रोसेटिन नाम का तत्व होता है, जो कैंसर से लड़ने में प्रभावी है. ये ना स़िर्फ कैंसर को स्प्रेड होने से रोकता है, बल्कि ट्यूमर के साइज़ को भी कम करता है.

जीराः जीरा खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही कैंसर से भी बचाता है. इसमें थाइमोक्वीनोन नाम का पदार्थ होता है, जो प्रोस्टेट कैंसर बनानेवाले सेल्स को बढ़ने से रोकता है. लिहाज़ा अगर कैंसर से बचना है और हेल्दी रहना है, तो अपने डेली डायट में जीरा शामिल करें.

दालचीनीः आयरन और कैल्शियम से भरपूर दालचीनी शरीर में ट्यूमर के साइज़ को कम करने में मदद करती है. हर रोज़ अपने दिन की शुरुआत दालचीनी की चाय से करें और सोने से पहले शहद और दालचीनी के साथ एक ग्लास दूध का सेवन करें. इससे आप कैंसर से सुरक्षित रहेंगे.

ऑरिगेनोः ऑरिगेनो का इस्तेमाल स़िर्फ पिज़्ज़ा, पास्ता की टॉपिंग के रूप में ही नहीं होता, बल्कि ये प्रोस्टेट कैंसर के ख़िलाफ़ भी एक सशक्त एजेंट का काम करता है.

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अदरक: औषधीय गुणों से भरपूर अदरक के सेवन से कोलेस्ट्रॉल कम होता है, मेटाबॉलिज़्म बढ़ता है और कैंसर सेल्स भी ख़त्म होते हैं. अदरक का अर्क कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी से होनेवाली परेशानी को भी कम कर सकता है. ये अन्य कई बीमारियों से भी बचाता है.

तुलसीः तुलसी की पत्तियों में यूजेनॉल नामक तत्व होता है, जो कैंसर से सुरक्षा देता है. इस तत्व का इस्तेमाल एंटी कैंसर दवाएं बनाने के लिए भी किया जाता है.

नारियल तेलः रोज़ खाली पेट एक चम्मच नारियल तेल का सेवन करने से कैंसर से बचाव होता है. इसमें मौजूद लॉरिक एसिड कैंसर की कोशिकाओं को ख़त्म करने में सहायक होता है.

लहसुन और प्याज़ः लहसुन और प्याज़ में मौजूद सल्फर कंपाउंड बड़ी आंत, बे्रस्ट कैंसर, लिवर और प्रोस्टेट कैंसर की कोशिकाओं को मार देते हैं. यह इंसुलिन के प्रोडक्शन को कम करके शरीर में ट्यूमर नहीं बनने देते.

एंटी कैंसर सब्ज़ियां: फूलगोभी और ब्रोकोली कैंसर की कोशिकाओं को मारती हैं और ट्यूमर को बढ़ने से रोकती हैं. ये लिवर, प्रोस्टेट, मूत्राशय और पेट के कैंसर के ख़तरे को कम करती हैं.

फलियां और दाल: दाल और फलियां प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत होने के साथ ही फाइबर और फोलेट से भरपूर होती हैं, जो पैंक्रियाज़ के कैंसर के ख़तरे को कम कर सकती हैं.

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बॉडी पर भी दिखते हैं ब्रेकअप के साइड इफेक्ट्स (How Your Body Reacts To A Breakup?)

Breakup Effects
बॉडी पर भी दिखते हैं ब्रेकअप के साइड इफेक्ट्स (How Your Body Reacts To A Breakup?)

शरीर में दर्द होने पर जैसे आप कोई काम सही ढंग से नहीं कर पाते हैं, ठीक वैसे ही दिल के टूटने पर भी दिल सही तरह से काम नहीं कर पाता है. ब्रेकअप का संबंध केवल भावनाओं से ही नहीं होता, शरीर से भी होता है, इसलिए ब्रेकअप (Breakup) के दौरान जब व्यक्ति बुरी तरह से आहत होता है, तो उसका दुष्प्रभाव (Side Effects) मन के साथ-साथ शरीर पर भी इस प्रकार से दिखाई देने लगता है-

आंखों में सूजन: जब दिल दुखी होता है, तो आंखों में आंसू आना लाज़िमी है. लोग पूरी-पूरी रात रोते रहते हैं, जिसके कारण अगले दिन आंखों में सूजन आ जाती है. यहां पर एक दिलचस्प बात बता दें कि ब्रेकअप, तलाक़ या किसी अन्य बात से आहत होने के बाद रोने पर जो आंसू निकलते हैं, वो केवल वॉटरी होते हैं, उनमें नमक की मात्रा बहुत कम होती है, जबकि चोट लगने या अन्य किसी कारण से रोने पर निकलनेवाले आंसुओं में नमक की मात्रा अधिक होती है. दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो जब कोई भावनात्मक रूप से आहत होकर रोता है, तो उसकी आंखों में अधिक सूजन आती है.

सीने में दर्द: क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि जब भी आप किसी बे्रकअप और तलाक़ जैसी गंभीर बात से आहत होते हैं, तो आपको ऐसा महूसस होता है, जैसे- सिर घूम रहा है, चक्कर आ रहा है, सांस लेने में तकलीफ़ हो रही है, सीने में हवा पूरी तरह से नहीं पहुंच रही है, जिसके कारण बेचैनी महसूस होती है. इसका कारण है कि भावनात्मक पीड़ा होने के साथ सीने में शारीरिक पीड़ा भी महसूस होती है. कई बार तो ऐसा दर्द महसूस होता है जैसे किसी ने छाती में मुक्का मारा हो या फिर छाती में भारीपन-सा महसूस होता है.

नींद न आना: ब्रेकअप के बाद अधिकतर लोग नींद न आने की समस्या से परेशान रहते हैं, जिसका कारण प्यार में नाकाम होना है. परिणामस्वरूप तनाव बढ़ने लगता है. तनाव बढ़ने के कारण कार्टिसोल का उत्पादन शरीर में बढ़ने लगता है और बॉडी क्लॉक पर भी बुरा असर पड़ता है. इन्हीं कारणों से ब्रेकअप के समय लोगों को नींद नहीं आती है.

मांसपेशियों में दर्द: यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में हुए एक शोध के अनुसार, बेक्रअप के बाद मांसपेशियों में सूजन आ सकती है, सिरदर्द बढ़ सकता है और गर्दन में अकड़न आ सकती है. कई बार पैर भी इतने स्थिर (स्टिफ) हो जाते हैं कि सीढ़ियां चढ़ना दूभर हो जाता है. यहां तक कि थोड़ी दूर पैदल चलना भी मुश्किल होता है. इसके अतिरिक्त इस शोध में यह भी साबित हुआ है कि 23% तलाक़शुदा लोगों को कुछ दिन तक चलने में परेशानी हो रही थी और कुछ लोगों को मांसपेशियों में दर्द हो रहा था.

पाचन तंत्र में गड़बड़ी: ब्रेकअप के बाद मांसपेशियों में दर्द हो सकता है, जिसके कारण शरीर में मौजूद कार्टिसोल हार्मोन की सप्लाई पाचन संबंधी अंगों की तऱफ़ डायवर्ट हो जाती है. जब कार्टिसोल की सप्लाई पाचन संबंधी अंगों की तरफ़ ज़रूरत से ज़्यादा होती है, तो भूख कम होना, डायरिया और पेट में मरोड़ जैसी समस्याएं होती हैं. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में हुए एक शोध के अनुसार, जब आप ब्रेकअप के दौर से गुज़र रहे होते हैं, तो आपका मस्तिष्क भूख मिटानेवाले हार्मोन का उत्पादन अधिक करता है.

वज़न बढ़ना: कुछ लोग जब तनावग्रस्त होते हैं, तो उनका वज़न धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. इसका कारण है कि तनावग्रस्त होने पर उनके शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील होने लगती हैं और शरीर इसकी क्षतिपूर्ति करने के लिए अधिक इंसुलिन का उत्पादन करने लगता है. परिणामस्वरूप शरीर में शुगर फैट के रूप में एकत्रित होने लगता है और उनका वज़न धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. जब वे ब्रेकअप से आहत होते हैं, तो उस समय उनका मन शुगर और फैटवाली चीज़ें खाने का करता है और इन चीज़ों को खाने से वज़न बढ़ता है.

मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव: एक्सपर्टस का मानना है कि जब आप किसी अपने को खो देते हैं, तो दिल में दर्द के साथ-साथ मस्तिष्क पर भी उसका असर पड़ता है. यानी कि दिल के बुरी तरह से आहत होने पर मस्तिष्क में भी तकलीफ़ होती है.

स्किन संबंधी समस्याएं: ब्रेकअप के बाद तनाव होता ही है. तनाव होने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर काफ़ी बढ़ जाता है, जिसके कारण त्वचा की चमक ख़त्म हो जाती है. अगर आप पहले से ही मुंहासे, सोरायसिस और एग्ज़ीमा जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं से परेशान हैं, तो बे्रकअप के बाद आपकी त्वचा की रंगत और भी ख़राब होने लगती है.

दिल संबंधी परेशानियां: कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि ब्रेकअप के समय व्यक्ति भावनात्मक रूप से टूटा हुआ होता है, इसलिए उस व़क्त उसे हार्ट संबंधी तकलीफ़ या दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा अधिक होता है. इसका कारण है कि ब्रेकअप के दौरान व्यक्ति के शरीर में एंड्रेनालाइन का स्तर बढ़ा हुआ होता है.

इम्यूनिटी कमज़ोर होना: ब्रेकअप के दौरान अक्सर मन में नकारात्मक ख़्याल आते हैं. इन नकारात्मक ख़्यालों के कारण अवसाद, अकेलापन, तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ता है, जिसके कारण इम्यून सिस्टम कमज़ोर पड़ने लगता है और व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है.

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Breakup Effects

ब्रेकअप से जुड़े कुछ तथ्य
  • ब्रेकअप के दौरान महिलाएं भावनात्मक रूप से अधिक आहत होती हैं, लेकिन उनकी तुलना में पुरुषों को नॉर्मल होने में अधिक समय लगता है, क्योंकि वे अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं करते.
  • ब्रेकअप से पहले व्यक्ति अपने रिश्ते के प्रति जितना प्रतिबद्ध होता है, रिश्ता टूटने के बाद उसमें बदलाव की संभावना भी उतनी अधिक होती है. यानी बे्रकअप के बाद व्यक्ति अपने आप को पूरी तरह से बदला हुआ महसूस करता है.
  • सोशल मीडिया रिश्तों टूटने, मानसिक व शारीरिक शोषण और तलाक़ का एक प्रमुख कारण बन गया है.

 

ब्रेकअप के बाद कैसे करें अपनी बॉडी को हील?
  1. ब्रेकअप के बाद सबसे पहले अपना फिज़िकल चेकअप कराएं. फिज़िकल चेकअप के दौरान डॉक्टर से पूछें- ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर कितना है? क्या शरीर में रक्तसंचार सुचारू रूप से हो रहा है? कई बार तनाव और अवसाद के कारण इस तरह की समस्याएं हो सकती हैं.
  2. अगर आप किसी भावनात्मक समस्या से परेशान हैं, तो उसे भी अपने डॉक्टर से शेयर करें और उससे निबटने के तरी़के पूछें.
  3. अकेलेपन, अवसाद और तनाव से छुटकारा पाने के लिए किसी अच्छे स्पा में जाकर बॉडी मसाज कराएं. बॉडी मसाज से माइंड और बॉडी दोनों रिलैक्स होती हैं.
  4. ब्रेकअप के बाद बॉडी मसाज कराने से शारीरिक व मानसिक शांति मिलती है. मांसपेशियों का दर्द, सिरदर्द और तनाव दूर होता है. अच्छी नींद आती है और एकाग्रता बढ़ती है.
  5. नकारात्मक विचारों को दूर करने के लिए प्रकृति के क़रीब जाएं.
  6. ब्रेकअप में खाना-पीना छोड़ने की बजाय अपनी डायट पर ध्यान दें और हेल्दी फूड हैबिट्स फॉलो करें.
  7. ब्रेकअप के बाद शरीर में होनेवाले साइड इफेक्ट्स को दूर करने के लिए वर्कआउट करें. वर्कआउट और एक्सरसाइज़ करने से एंड्रॉर्फिन हार्मोन रिलीज़ होता है, जो तनाव और अवसाद को दूर करता है.
  8. योग और प्राणायाम करके अपने अशांत मन को शांत करने का प्रयास करें.
  9. अपने बीते हुए कल को भुलाने के लिए ख़ुद को व्यस्त करें, जैसे- अच्छी किताबें पढ़ें, सकारात्मक सोचवाले दोस्तों के साथ समय बिताएं.
  10. मन और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए डांस, साइकिलिंग, स्विमिंग, फिटनेस क्लास और स्पोर्ट्स खेलें.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

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समर केयर टिप्स (Summer Care Tips)

Summer Care Tips

  • पसीने की दुर्गंध से बचने के लिए प पसीने की दुर्गंध से बचने के लिए अच्छी कंपनी का डियो या सुगंधित पाउडर लगाएं.
  • दिन में दो बार स्नान करें.प यदि आप कामकाजी हैं, तो शाम को घर लौटने पर 10-15 मिनट तक ठंडे पानी में पैरों को डुबोकर रखें. इससे पैरों को आराम मिलेगा और आपको गर्मी से राहत.
  • ज़्यादा से ज़्यादा पानी पीएं. ख़ासकर घर से बाहर निकलते समय पानी ज़रूर पीएं. इससे आपके शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाएंगे और त्वचा भी ग्लो करेगी.
  • सुबह जल्दी उठकर लॉन में हरी घास पर टहलें.प घर से बाहर हों, तो थोड़ी-थोड़ी देर में नींबू पानी या जूस पीएं. हो सके, तो अपने साथ एक बॉटल में नींबू का शर्बत कैरी करें. इससे इंस्टेंट एनर्जी मिलती है.प दूध पोषक होने के साथ ठंडी तासीर का भी है, इसलिए रोज़ाना एक ग्लास दूध ज़रूर पीएं.
  • ज़्यादा ऑयली व गरिष्ठ भोजन करने से बचें.
  • अपने डायट में सलाद, जूस और फल शामिल करें. ढेर सारे फलों का सेवन करें, इससे त्वचा ग्लो करेंगी व गर्मी से भी राहत मिलेगी.
  • गर्मियों में अक्सर शरीर में पित्त की प्रॉब्लम हो जाती है, इसके लिएसुबह-सुबह ठंडा दूध पीएं.
  • छाछ को अपने भोजन का नियमित रूप से हिस्सा बनाएं. यह शरीर को ठंडक देता है.
  • लस्सी भी गर्मी से राहत दिलाती है.प गर्मी के कुछ महीनों में हो सके, तो चाय-कॉफी का सेवन बिल्कुल छोड़ दें, क्योंकि ये शरीर को गर्मी पहुंचाते हैं और सेंट्रल नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित करते हैं.
  • अगर बहुत ज़्यादा ज़रूरी न हो तो दिन में 11 बजे से 3 बजे तक धूप में न निकलें, क्योंकि इस समय सूरज की अल्ट्रा वॉयलेट किरणों का बहुत तेज़ और बुरा प्रभाव पड़ता है.
  • घर से बाहर जाएं या घर में रहें. अपनी त्वचा को सनस्क्रीन प्रोटेक्शन ज़रूर दें.
  • जिस तरह गर्मियों में शरीर डिहाइड्रेट होता है, उसी तरह स्किन भी डिहाइड्रेट होती है. ऐसे में स्किन का मॉइश्‍चर लेवल बनाए रखने के लिए ज़रूरी है उसे मॉइश्‍चराइज़ करना, ताकि स्किन को नरिशमेंट मिले. इसलिए गर्मियों में भी मॉइश्‍चराइज़र लगाना न भूलें.

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रखें वेजाइनल हेल्थ का ख़्याल (Easy Tips To Keep Your Vagina Healthy)

Tips To Keep Vagina Healthy

रखें वेजाइनल हेल्थ का ख़्याल (Easy Tips To Keep Your Vagina Healthy)

जागरूकता की कमी और शर्म-झिझक के कारण महिलाएं अक्सर वेजाइनल हेल्थ (Vagina Health) को अनदेखा कर देती हैं. नतीजा उन्हें कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स (Health Problems) की तकलीफ़ झेलनी पड़ती है. इसलिए ज़रूरी है कि वेजाइना (Vagina) की हेल्थ का भी ख़्याल रखा जाए और इसके लिए सबसे ज़रूरी है वेजाइनल हाइजीन (Vaginal Hygiene) का ख़्याल रखना.

कैसे रखें हाइजीन का ख़्याल?

क्लीनिंग के लिए सोप का इस्तेमाल न करें
कई लोग वेजाइना क्लीन करने के लिए परफ्यूमयुक्त साबुन या वेजाइनल डूशिंग का इस्तेमाल करते हैं, जो वेजाइनल हेल्थ के लिए ठीक नहीं. दरअसल, वेजाइना हानिकारक बैक्टीरिया से सुरक्षा के लिए अपने अंदर एक पीएच बैलेंस, नमी और तापमान बनाए रखती है, लेकिन साबुन और वेजाइनल डूशिंग के इस्तेमाल से ये पीएच संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. इसलिए ऐसा करने से बचें. इसकी बजाय सादे पानी का इस्तेमाल करें.

केमिकल्स का इस्तेमाल ना करें
वेजाइना में केमिकल बेस्ड क्रीम और लुब्रिकेशन का इस्तेमाल ना करें. वेजाइना सेल्फ लुब्रिकेटिंग होती है और इसमें नेचुरल नमी होती है, इसलिए आपको यहां आर्टिफिशियल लुब्रिकेंट इस्तेमाल करने की कोई ज़रूरत ही नहीं. अगर आप ऐसा करती हैं, तो इससे पीएच लेवल का संतुलन बिगड़ सकता है और बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है.

सेफ सेक्स संबंध बनाएं
अनसेफ सेक्स से आपको वेजाइनल इंफेक्शन हो सकता है, इसलिए सुरक्षित यौन संबंध बनाएं. सेक्स के दौरान प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करें, ताकि आप एचआईवी, जेनिटल हर्पीस आदि बीमारियों से सुरक्षित रहें.

जेनिटल एरिया को ड्राई रखें
अधिक पसीना आने और हवा न लगने से जेनिटल एरिया में नमी के कारण हानिकारक बैक्टीरिया पनपने की संभावना होती है, जिससेे खुजली और रैशेज़ की समस्या हो सकती है, इसलिए जेनिटल एरिया को हमेशा ड्राई रखने की कोशिश करें. कॉटन की पैंटी ही पहनें, ताकि वो पसीना सोख सके. साथ ही गीली पैंटी पहनने से बचें.

किसी भी तरह के इंफेक्शन को नज़रअंदाज़ ना करें
वेजाइना में छोटे-मोटे इंफेक्शन को भी अनदेखा न करें. ये इंफेक्शन कई बार भविष्य में गंभीर समस्या बन सकते हैं. इसलिए आपको जैसे ही वेजाइना में कोई एब्नॉर्मेलिटी या इंफेक्शन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
प्रोबायोटिक्स लेंः अपनी वेजाइनल हेल्थ को बरक़रार रखने के लिए बेहतर होगा कि अपने डायट में दही या प्रोबायोटिक्स शामिल करें. इंफेक्शन से लड़ने के लिए आपके वेजाइना को हेल्दी बैक्टीरिया की ज़रूरत होती है. प्रोबायोटिक्स से वेजाइना में अच्छे बैक्टीरिया बने रहेंगे और आपका मूत्राशय भी शेप  में रहेगा.

इन बातों का भी रखें ख़्याल

1. पब्लिक टॉयलेट के इस्तेमाल के समय हमेशा सतर्क रहें. एंटर होने से पहले फ्लश ज़रूर करें.

2. बहुत ज़्यादा टाइट पैंटी न पहनें. साथ ही बेहतर होगा कि रात में पैंटी निकालकर ही सोएं.

3. पैंटी की सफ़ाई किसी अच्छे डिटर्जेंट से करें.

4. पैंटी को अपने अन्य कपड़ों के साथ कभी न धोएं. उसे अलग से साफ़ करें.

5. पैंटी को हमेशा धूप में ही सुखाएं. इससे पैंटी बैक्टीरिया फ्री रहेगी.

6. रोज़ पहननेवाली पैंटी पर एक बार आयरन ज़रूर करें. आयरन की गर्मी से बैक्टीरिया पूरी तरह से ख़त्म हो जाते हैं और पैंटी इंफेक्शन से मुक्त हो जाती है.

7. पीरियड्स के दौरान हर छह घंटे के अंतराल पर पैड्स बदलें. इससे किसी तरह का इंफेक्शन होने का डर नहीं रहता.

8. डिटर्जेंट से धोने के बाद पैंटी को पानी में एंटीसेप्टिक की कुछ बूंदें डालकर ज़रूर साफ़ करें. ऐसा करने से आप फंगल या ऐसे किसी संक्रमण से सुरक्षित रहेंगी.

9. सिंथेटिक की बजाय कॉटन की पैंटी इस्तेमाल करें और पैंटी हर तीन महीने में चेंज करें.

10. एक्सरसाइज़ या धूप से आने के बाद पसीने से भीगी पैंटी को तुरंत बदल लें. नमी के कारण उसमें बैक्टीरिया पनपने का ख़तरा बढ़ जाता है.

11. वेजाइना को गुनगुने पानी से अच्छी तरह से साफ़ करें.

12. प्राइवेट पार्ट्स में टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल न करें. इससे ओवेरियन कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है.

मेंस्ट्रुअल हाइजीन की 5 बातें
पीरियड्स के दौरान भी महिलाओं को हाइजीन का विशेष ध्यान रखना चाहिए. फर्टिलिटी संबंधी अधिकतर प्रॉब्लम्स की वजह पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ख़्याल न रखना है, इसलिए पीरियड्स के दौरान हाइजीन से जुड़ी इन बातों का ख़्याल रखें.

1. सैनिटेशन का तरीक़ा: गांवों में आज भी लोग सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल नहीं करते, नतीजा उन्हें प्रजनन संबंधी कई तरह की प्रॉब्लम्स झेलनी पड़ती हैं, इसलिए पीरियड्स के दौरान सही सैनिटेशन का इस्तेमाल ज़रूरी है. आज मार्केट में कई तरह के साधन उपलब्ध हैं, जैसे- सैनिटरी नैपकिन, टैंपून्स और मैंस्ट्रुअल कप, ये पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ध्यान रखते हैं.

2. रोज़ नहाएं: आज भी कई जगहों पर यह मान्यता है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को नहाना नहीं चाहिए. लेकिन ये सही नहीं है, नहाने से न स़िर्फ बॉडी क्लीन होती है, बल्कि गर्म पानी से स्नान करने से पीरियड्स के दौरान होनेवाली ऐंठन, दर्द, पीठदर्द, मूड स्विंग जैसी परेशानियों से भी राहत मिलती है.

3. साबुन इस्तेमाल न करें: पीरियड्स के दौरान साबुन से वेजाइना की सफ़ाई करने पर अच्छे बैक्टीरिया के नष्ट होने का ख़तरा रहता है, जो इंफेक्शन का कारण बन सकता है. लिहाज़ा, इस दौरान वेजाइना की सफ़ाई के लिए सोप की बजाय गुनगुना पानी इस्तेमाल करें.

4. हाथ धोना ज़रूरी: सैनिटरी पैड, टैंपून या फिर मैंस्ट्रुअल कप बदलने के बाद हाथ ज़रूर धोएं. हाइजीन की इस आदत का हमेशा पालन करें. इसके अलावा इस्तेमाल किए गए पैड या टैंपून को पेपर में अच्छे से रैप करके डस्टबिन में ही डालें, फ्लश न करें.

5. अलग अंडरवियर यूज़ करें: पीरियड्स के दौरान अलग अंडरवियर का इस्तेमाल करें. इन्हें स़िर्फ पीरियड्स के दौरान ही इस्तेमाल करें और अलग से गुनगुने पानी और साबुन से धोएं. एक एक्स्ट्रा पैंटी साथ ज़रूर रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके.

हेल्दी वेजाइना के लिए ईज़ी एक्सरसाइज़
कीगल एक्सरसाइज़ः घुटने मोड़कर आराम की स्थिति में बैठ जाएं. अब पेल्विक मसल्स को टाइट करके स्क्वीज़ यानी संकुचित करें. 5 तक गिनती करें. फिर मसल्स को रिलीज़ कर दें. ध्यान रखें ये एक्सरसाइज़ भरे हुए ब्लैडर के साथ न करें. यूरिन पास करने के बाद ही करें.
लेग लिफ्टिंगः सीधे लेट जाएं. दोनों हाथ बगल में हों. अब एक पैर ऊपर उठाएं. थोड़ी देर इसी स्थिति में रहें. पूर्व स्थिति में आ जाएं. यही क्रिया दूसरे पैर से भी दोहराएं. अब दोनों पैरों को एक साथ लिफ्ट करके यही क्रिया दोहराएं. इससे पेल्विक एरिया के मसल्स मज़बूत होते हैं.
स्न्वैट्सः सीधे खड़े रहें. दोनों हाथ सामने की ओर खुले रखें. अब घुटनों को मोड़ते हुए ऐसे बैठें जैसे आप किसी कुर्सी पर बैठ रहे हों. थोड़ी देर इसी अवस्था में रहें. पूर्वस्थिति में आ जाएं.

– प्रतिभा तिवारी

इन लक्षणों से जानें थायरॉइड कंट्रोल में  है या नहीं (Thyroid: Causes, Symptoms And Treatment)

Thyroid Causes

इन लक्षणों से जानें थायरॉइड कंट्रोल में  है या नहीं (Thyroid: Causes, Symptoms And Treatment)

समय के साथ-साथ हमारी जीवनशैली बदल रही है, खानपान बदल रहा है, काम करने के तरी़के बदल रहे हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि इन बदलावों को हमारे मन के साथ-साथ हमारा तन भी स्वीकार करे. कई बार हमें इस बात का बिल्कुल एहसास नहीं होता है कि सामान्य से लगनेवाले ये छोटे-छोटेे बदलाव किसी गंभीर बीमारी के संकेत भी हो सकते हैं. ऐसी ही एक हेल्थ प्रॉब्लम (Health Problem) है थायरॉइड (Thyroid), जिसके बारे में हम आपको बता रहे हैं.

क्या है थायरॉइड?

हम में से अधिकतर लोगों को यह बात मालूम नहीं होगी कि थायरॉइड किसी बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह एक ग्रंथि का नाम है, जो गर्दन में सांस की नली के ऊपर और वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागों में तितली के आकार में बनी होती है. यह ग्रंथि थायरॉक्सिन नामक हार्मोन का उत्पादन करती है. हम जो भी खाते हैं, उसे यह हार्मोन ऊर्जा में बदलता है. जब यह ग्रंथि ठीक तरह से काम नहीं करती है, तो शरीर में अनेक समस्याएं होने लगती हैं.

पहचानें थायरॉइड के लक्षणों को?

एनर्जी का स्तर बदलना

थायरॉइड की समस्या होने पर शरीर में ऊर्जा का स्तर बदलता रहता है. ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) में मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है या फिर उसमें अनियमित बदलाव होता रहता है, जिसके कारण अधिक भूख लगना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन और बेचैनी जैसी समस्याएं होती हैं. इसी तरह से अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) में शरीर में ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है, जिसकी वजह से अधिक थकान, एकाग्रता में कमी, घबराहट और याद्दाश्त में कमी आने लगती है.

वज़न का घटना-बढ़ना

ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) ग्रंथि की समस्या होने पर मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है, जिसके कारण व्यक्ति की भूख बढ़ जाती है. वह ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाने लगता है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा खाने पर भी उसका वज़न घटने लगता है. वहीं दूसरी ओर अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) होने पर मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिसके कारण भूख कम लगती है और कम खाना खाने पर भी वज़न लगातार बढ़ता रहता है.

आंतों की समस्या

ओवरएक्टिव थायरॉइड और अंडरएक्टिव थायरॉइड दोनों के कारण आंतों में  भी गड़बड़ी की समस्या हो सकती है. ये दोनों ही भोजन पचाने और मल-मूत्र के विसर्जन करने की क्रियाओं में मुख्य भूमिका निभाते हैं. अंडरएक्टिव थायरॉइड होने पर व्यक्ति कब्ज़ और डायरिया से परेशान रहता है.

गले में सूजन

सर्दी-जुक़ाम के कारण गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन आने लगता है, लेकिन इन लक्षणों की अनदेखी बिल्कुल न करें. कई बार सिंपल से दिखनेवाले ये लक्षण थायरॉइड के भी हो सकते हैं, क्योंकि थायरॉइड होने पर भी गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन के साथ-साथ गले में सूजन आती है. अगर गले में सूजन हो, तो इसकी अनदेखी करने की बजाय थायरॉइड टेस्ट कराएं.

मांसपेशियों में दर्द

शारीरिक मेहनत और वर्कआउट करने के बाद बॉडी पेन होना आम बात है. लेकिन ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी मांसपेशियों में दर्द होता है. कई बार मांसपेशियों में दर्द के साथ-साथ कमज़ोरी, थकान, कमर व जोड़ों में दर्द और सूजन भी आती है.

अनिद्रा की समस्या

थायरॉइड के प्रमुख लक्षणों में अनिद्रा भी एक लक्षण है. थायरॉइड ग्रंथि का असर व्यक्ति की नींद पर भी पड़ता है, जैसे- रात को नींद नहीं आना, बेचैनी, सोते समय अधिक पसीना आना आदि. नींद न आने के कारण कई बार चक्कर भी आने लगते हैं.

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बालों का झड़ना और त्वचा का ड्राई होना  

हाइपरथायरॉइडिज़्म से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा धीरे-धीरे ड्राई होने लगती है. त्वचा के ऊपर की कोशिकाएं (सेल्स) क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिसके कारण त्वचा में रूखापन आने लगता है. थायरॉइड के कारण त्वचा में रूखेपन के अलावा बालों की भी कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं, जैसे- बालों का झड़ना, रूखापन आदि.

तनाव में रहना

दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद थकान होना लाज़िमी है, लेकिन अगर आपको ज़रूरत से ज़्यादा ही थकान महसूस हो, तो इसकी वजह थायरॉइड भी हो सकती है. शुरुआत में इस बात का एहसास नहीं होता है कि थकान किस वजह से है, लेकिन जब थायरॉइड ग्रंथि ओवरएक्टिव हो जाती है, तो यह ग्रंथि शरीर में ज़रूरत से बहुत अधिक मात्रा में थायरॉइड हार्मोंस का निर्माण करने लगती है, जिसके कारण तनाव व बेचैनी होने लगती है.

पीरियड्स की अनियमितता

अधिकतर महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना आम बात है, लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं होता है कि अंडरएक्टिव और ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी पीरियड्स अनियमित होते हैं. इसके लक्षणों में लगातार बदलाव होने पर महिलाएं इस बात से परेशान रहती हैं. जब महिलाओं को हाइपरथायरॉइडिज़्म (ओवरएक्टिव थायरॉइड) की समस्या होती है, तो उन्हें सामान्य से अधिक रक्तस्राव होता है और जब महिलाएं हाइपोथायरॉइडिज़्म (अंडरएक्टिव थायरॉइड) से ग्रस्त होती हैं, तब उन्हें रक्तस्राव बहुत कम होता है या फिर होता ही नहीं है.

डिप्रेशन

अवसाद होने की एक वजह थायरॉइड भी हो सकती है, क्योंकि अवसाद में अधिक नींद आना या अनिद्रा की समस्या होती है. यदि व्यक्तिअंडरएक्टिव थायरॉइड से ग्रस्त है, तो मूड स्विंग होना, आलस, काम में मन न लगना जैसी समस्याएं होती हैं.

थायरॉइड को नियंत्रित करने के लिए क्या खाएं?

थायरॉइड के मरीज़ अगर उपचार के साथ-साथ अपने खानपान पर ध्यान दें, तो बहुत हद तक इसे नियंत्रित किया जा सकता है. उन्हें अपनी डायट में इन चीज़ों को शामिल करना चाहिए, जैसे-

मशरूम: इसमें सेलेनियम अधिक मात्रा में होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करता है.

अंडा: थायरॉइड के रोगियों को अपनी डायट में अंडा ज़रूर शामिल करना चाहिए. इसमें भी सेलेनियम होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करने के साथ कमज़ोरी को भी दूर करता है.

नट्स: वैसे तो नट्स सभी को खाने चाहिए, लेकिन थायरॉइड के मरीज़ों को नट्स ज़रूर खाना चाहिए. नट्स में ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो थायरॉइड के कारण होनेवाले हार्ट अटैक के ख़तरे को कम करते हैं.

दही: इसे खाने से इम्यूनिटी लेवल बढ़ता है और थायरॉइड भी नियंत्रित रहता है.

मेथी: इसमें ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो थायरॉक्सिन नामक हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं.

   – पूनम शर्मा

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सुकूनभरी गहरी नींद के लिए अपनाएं ये स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks To Sleep Better At Night)

Tricks To Sleep Better At Night

सुकूनभरी गहरी नींद के लिए अपनाएं ये स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks To Sleep Better At Night)

अगर आप भी बिस्तर पर पहुंचकर देर रात तक करवटें बदलते रहते हैं या फिर रात को बार-बार आपकी नींद (Sleep) खुल जाती है, तो इन छोटे-छोटे स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks) से आपकी यह समस्या (Problem) दूर हो जाएगी.

–    सोने से एक घंटे पहले कमरे में मौजूद सभी ब्लू लाइट्स को बंद कर दें. दरअसल जब रात को हम सोने जाते हैं, तो हमारे शरीर से मेलाटोनिन नामक हार्मोन का स्राव होता है, जो हमें सुकूनभरी नींद देता है, लेकिन मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, आईपैड और वीडियोगेम से निकलनेवाली ब्लू लाइट के कारण मेलाटोनिन का स्राव तुरंत बंद हो जाता है.

–    दोपहर के बाद कैफीन न लें. कैफीन आपकी नींद को प्रभावित करता है, क्योंकि उसे पचने में चार से छह घंटे का समय लगता है. अगर गहरी नींद चाहते हैं, तो शाम को चाय या कॉफी पीना छोड़ दें.

–    दिन में आधे घंटे से ज़्यादा की नींद आपके रात की नींद को डिस्टर्ब करती है. दरअसल, दिन में ज़्यादा देर तक सोने से हमारा बॉडी क्लॉक डिस्टर्ब हो जाता है, इसलिए रात की नींद ख़राब होती है. अगर दिन में नींद लेने की आदत है, तो स़िर्फ आधे घंटे का पावर नैप लें.

–    आपका बिस्तर भी आपकी नींद में बाधा डाल सकता है. अगर बेडशीट, गद्दे और तकियों की क्वालिटी ख़राब हो गई हो, तो वो भी आपको ठीक से सोने नहीं देंगे.

–    स्टडी में यह बात साबित हो चुकी है कि जो लोग रोज़ाना एक्सरसाइज़ करते हैं, उन्हें बाकी लोगों के मुक़ाबले अच्छी नींद आती है. इसलिए कोशिश करें कि कम से कम हफ़्ते में पांच दिन फिज़िकल एक्टिविटीज़ करें.

–    आप चाहें, तो अच्छी नींद के लिए एरोमा थेरेपी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. तकिये पर लैवेंडर एसेंशियल ऑयल स्प्रे करें. इससे नींद काफ़ी अच्छी आती है.

–    दिनभर का तनाव भी आपके मस्तिष्क को अशांत किए रहता है, जिसके कारण आप चाहकर भी सुकून से सो नहीं पाते. इसके लिए सुबह-शाम जब भी समय मिले थोड़ी देर मेडिटेशन करें. ध्यान मस्तिष्क को शांत करता है, जिससे आप गहरी नींद सो पाते हैं.

–    सोने से एक घंटे पहले ही बेडरूम की लाइट मद्धिम कर दें. इससे बॉडी को सिग्नल मिलता है कि सोने का व़क्त करीब आ रहा है.

–   बेड पर जाने से पहले पार्क या खुले में वॉक करें. पेड़-पौधे और खुली हवा आपके शरीर को रिलैक्स कर देते हैं, जिससे आप अच्छी तरह सो पाते हैं.

–    सोने से दस मिनट पहले गुनगुने पानी में पैरों को डुबोकर रखें. पैर गर्म रहने पर नींद जल्दी और अच्छी आती है.

–    गुनगुने सरसों के तेल से पैरों के तलवों में मालिश करें.

–    सोने से पहले गुड़ खाना भी फ़ायदेमंद होता है.

–    गुनगुना मीठा दूध पीने से भी अच्छी नींद आती है.

–    सोते समय नाभि में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डालें.

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फिट रहने के लिए ऑफिस में खाएं 5 हेल्दी स्नैक्स (5 Healthy Office Snacks To Keep You Fit)

फिट (Fit) रहने के लिए ऑफिस (Office) में खाएं 5 हेल्दी स्नैक्स (Healthy Snacks) और रहें हमेशा एनर्जेटिक. हम क्या खाते हैं इसका असर हमारी सेहत, फिटनेस और हमारी स्किन पर भी पड़ता है. अक्सर लोग शाम के वक़्त ऑफिस में जंक फ़ूड खा लेते हैं, जिसके कारण उनका मोटापा बढ़ता जाता है और मोटापे के कारण अन्य बीमारियां भी उन्हें घेर लेती हैं. यदि आप थोड़ी-सी प्लानिंग करें, तो आप ऑफिस में जंक फ़ूड खाने से बच सकती हैं. फिट रहने के लिए आप भी ऑफिस में खाएं 5 हेल्दी स्नैक्स और हमेशा रहें फिट और हेल्दी.

Healthy Office Snacks

1) चना
प्रोटीन से भरपूर चना खाने से पेट भर जाता है और सेहत को किसी तरह का नुक़सान भी नहीं पहुंचता.
2) कुरमुरा
कुरमुरा न स़िर्फ वज़न में हल्का होता है, बल्कि आसानी से पच भी जाता है. बाज़ार की बनी नमकीन खाने से अच्छा है कि घर पर ही कुरमुरे की नमकीन बना लें.
3) ड्राईफ्रूट्स
काजू, किशमिश, बादाम, अखरोट आदि में ढेर सारा प्रोटीन, हेल्दी फैट, विटामिन व मिनरल्स पाए जाते हैं, जो भूख मिटाने के साथ ही हेल्दी भी बनाए रखते हैं.
4) कॉर्न
घर से ही मसाला कार्न बनाकर ले जाएं. इसके लिए उबले हुए कॉर्न में नमक और थोड़ा-सा चाट मसाला मिलाएं.
5) स्प्राउट्स
अंकुरित मूंग, चना आदि को हल्का उबालकर इसमें प्याज, टमाटर, मिर्च और नमक मिलाएं. ये टेस्टी स्नैक्स स्वाद व सेहत दोनों का ख़्याल रखता है.

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शादी से पहले ही नहीं, बाद में भी ज़रूरी है फिट रहना (How To Stay Fit After Your Wedding)

यह सच है कि शादी (Wedding) के कुछ समय बाद ही प्यार और रोमांस पर ज़िम्मेदारियों की जिल्द चढ़ने लगती है. ऐसे में रूमानी ख़्याल बीते दिनों की बात बनकर रह जाते हैं और उनकी जगह ले लेते हैं बिल्स, ख़र्चे, आटे-दाल के भाव, रिश्ते निभाने का दबाव, बच्चे, परवरिश, लोन आदि. यही वजह है कि मन के साथ-साथ शरीर पर भी ये ज़िम्मेदारियां परत बनकर मोटापे (Fats) व बीमारियों (Diseases) के रूप में उभरने लगती हैं. हम लापरवाह होते जाते हैं और कमर व पेट का साइज़ हमारी मौजूदा परिस्थिति, शादीशुदा ज़िंदगी, हेल्थ, फिटनेस और सेक्स लाइफ की पहचान बन जाते हैं. 

Fitness Tips

हम अक्सर यही सोचते हैं कि जब तक शादी न हो जाए, तब तक हमारे लिए फिट रहना बहुत ज़रूरी है, ताकि हम अट्रैक्टिव लगें. शादी के बाद न स़िर्फ अपनी फिटनेस को लेकर, बल्कि हेल्थ और अट्रैक्शन को लेकर भी हमारी अप्रोच बहुत कैज़ुअल हो जाती है. चाहे लड़कियां हों या लड़के, सबका यही हाल होता है. शादी के शुरुआती समय को छोड़ दें, तो बाद में अपने प्रति इतने लापरवाह हो जाते हैं कि धीरे-धीरे एक-दूसरे के प्रति आकर्षण भी कम होने लगता है और इसका असर उनके रिश्ते व सेक्स लाइफ पर भी पड़ने लगता है.

क्यों हो जाते हैं बेपरवाह?

–    शादी के बाद ज़िंदगी शुरू होती है, जबकि हमारी यह सोच बन जाती है कि अब तो शादी हो चुकी, अब कुछ करने के लिए बचा नहीं लाइफ में, तो हम में एक नीरसता पनपने लगती है.

–     ज़िम्मेदारियों का बोझ जैसे-जैसे बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे हेल्थ, आकर्षण, फिटनेस, प्यार-मुहब्बत जैसी बातें गौण होने लगती हैं.

–     कभी घर के लिए लोन की किश्तें, कभी बच्चों की फीस, तो कभी घर के बड़ों की हेल्थ प्रॉब्लम्स हमें अपने प्रति बेपरवाह बना देती हैं.

–     करियर की चुनौतियां और तमाम तरह के तनावों के बीच हेल्थ और फिटनेस जैसी चीज़ों के लिए हमें समय निकालना समय की बर्बादी लगने लगती है.

–     थकान, मोटापा और बेडौल बदन शादी के कुछ समय बाद ही हमारी पहचान बन जाते हैं.

–     न कोई चार्म रहता है, न कोई ग्लैमर और न ही ऊर्जा.

क्यों ज़रूरी है फिटनेस?

–     फिटनेस का प्रभाव आपके रिश्ते पर भी पड़ता है. शादी के बाद फिटनेस का ख़्याल रखना और भी ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि इससे आप में यह एहसास बढ़ता है कि आप एक-दूसरे के लिए हेल्दी और आकर्षक नज़र आना चाहते हैं. इसके अलावा आप अधिक उत्साह व उमंग का अनुभव भी करते हैं.

–     कुछ कपल्स पर किए गए एक सर्वे के अनुसार, फिटनेस पर ध्यान देने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि फिटनेस से न केवल उनके व्यक्तित्व पर, बल्कि उनके आपसी रिश्ते पर सकारात्मक प्रभाव हुआ.

–     जब कपल्स को यह महसूस कराया गया कि स़िर्फ हेल्दी रहने के लिए ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने पार्टनर के लिए भी फिट रहना चाहिए, ताकि उनके बीच का चार्म बना रहे, तो उन्होंने इस सोच के साथ वर्कआउट और डायट करना शुरू किया कि यह कोई पर्सनल एजेंडा नहीं है, बल्कि यह रिश्ते में ताज़गी और गर्माहट बनाए रखने के लिए भी बेहद ज़रूरी है, तो वाकई उनका कॉन्फिडेंस बढ़ा और उनके रिश्ते भी सुधरे.

–     कपल्स को यह कहा गया कि आप अपने पार्टनर से यह कहें कि मुझे तुम्हारे लिए फिट, हेल्दी और आकर्षक बने रहना है. इसके बाद उन्हें महसूस हुआ कि उनकी बॉन्डिंग और स्ट्रॉन्ग हुई.

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How To Stay Fit
कैसे एचीव करें गोल?

–     यह बात सही है कि शादी के कुछ समय बाद ही बहुत-सी चीज़ें बदलने लगती हैं. समय की कमी के साथ-साथ ऊर्जा व उत्साह की कमी भी होने लगती है. ऐसे में नीरसता पनपने लगती है, जो आप दोनों को एक-दूसरे से दूर भी कर सकती है. ऐसे में ज़रूरी है कि आप ख़ुद कोई रास्ता निकालें.

–     अपना टाइमटेबल और शेड्यूल तैयार करें.

–    एक डायरी बनाएं, जिसमें रोज़ की एक्टिविटीज़ और कैलोरीज़ की डिटेल्स रात को सोने से कुछ समय पहले नोट करें.

–    हर संडे उस डायरी में नोट की हुई चीज़ों पर आपस में बातचीत करें और देखें कि कहां क्या कमी रह गई.

–     सुबह जल्दी उठकर एक साथ वर्कआउट, वॉकिंग या जॉगिंग करें. इससे आप एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिताएंगे.

–    एक-दूसरे को चैलेंज और मोटिवेट करें कि कौन ज़्यादा फिट और एनर्जेटिक है.

–     एक साथ वर्कआउट करने से पार्टनर एक-दूसरे के क़रीब आते हैं. दोनों में समन्वय व सामंजस्य बेहतर होता है, साथ ही शेयरिंग की भावना भी बढ़ती है.

–     घर के काम मिल-जुलकर करें. इससे एक्सरसाइज़ भी हो जाएगी और बॉन्डिंग भी स्ट्रॉन्ग होगी.

–     रियलिस्टिक गोल्स सेट करें. अगर आपको लग रहा है कि शादी के छह महीने बाद ही 4-5 किलो वज़न बढ़ गया है, तो कोशिश करें धीरे-धीरे डायट व रूटीन में बदलाव लाने की.

–     घर में खाने के हेल्दी ऑप्शन्स रखें. अनहेल्दी स्नैक्स की जगह ड्रायफ्रूट्स, भुने चने, मूंगफली आदि रखें.

–     हर महीने गोल बदलें कि अगले दो महीनों में कितना वज़न कम करना है और दोनों एक-दूसरे को चैलेंज करें.

–     पार्टनर को मोटिवेट करने के लिए आप यह भी कर सकते हैं कि तुम्हारे बर्थडे या हमारी एनीवर्सरी तक अगर तुम इस आउटफिट में फिट आ गए, तो मैं तुम्हें गिफ्ट, पार्टी या हॉलीडे पर ले चलूंगा/चलूंगी.

–     नियमित रूप से हेल्थ टेस्ट्स व चेकअप, जैसे- बीपी, ब्लड शुगर लेवल, कोलेस्ट्रॉल व अन्य टेस्ट्स करवाएं.  बच्चे होने के बाद ख़ुद को महत्वहीन

न समझें

–     अक्सर कपल्स बच्चे होने के बाद ख़ुद के प्रति और भी उदासीन हो जाते हैं. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि एक पार्टनर ज़्यादा हेल्थ कॉन्शियस होता है, दूसरा बिल्कुल लापरवाह.

–     ऐसे में आप अपने फिट पार्टनर से ही सीख लें कि क्यों वो आपके सामने ज़्यादा यंग और एनर्जेटिक लगता है.

–     कई बार बच्चों के स्कूल में भी पीटीएम में आप देखेंगे कि कुछ कपल्स परफेक्ट लगते हैं. इसे भगवान की देन समझने की बजाय उनकी मेहनत को श्रेय दें और उनसे सीखें.

–     ख़ुद को चैलेंज करें कि अगली पीटीएम में आप भी परफेक्ट कपल नज़र आएंगे, इसके लिए कोशिश कल से नहीं, आज और अभी से ही शुरू कर दें.

–     यह भी ध्यान में रखें कि स़िर्फ अपने लिए या एक-दूसरे के लिए नहीं, बल्कि आपको अपने बच्चों के लिए भी फिट और हेल्दी रहना है.

–     बच्चों के साथ बहुत एनर्जी की ज़रूरत पड़ती है. ऐसे में आप ही थके-थके रहेंगे, तो बच्चों के साथ एक्टिविटीज़ में पार्टिसिपेट नहीं कर पाएंगे.

–     आप अगर हेल्दी खाएंगे और फिटनेस कॉन्शियस रहेंगे, तो बच्चे भी ऐसा ही करेंगे, क्योंकि बच्चों के पहले रोल मॉडल उनके पैरेंट्स ही होते हैं और वो आपसे ही सीखते हैं.

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Fitness Tips
फिटनेस का संबंध आपकी सेक्स लाइफ से भी है

–     अगर आप फिट होते हैं, तो आपका एनर्जी लेवल अधिक होता है, जिसका असर आपकी बॉडी इमेज व आपसी आकर्षण पर सकारात्मक तौर पर पड़ता है. इससे ज़ाहिर है कि आपकी सेक्स लाइफ बेहतर होती है.

–     हेल्दी डायट से आपकी सेक्स क्षमता भी बेहतर होती है. सेक्स लाइफ अच्छी होगी, तो आपसी संबंध और गहरे होंगे.

–     आप अपने रिश्ते में अधिक ऊर्जा व उत्साह का अनुभव करते हैं, क्योंकि फिटनेस से आपका कॉन्फिडेंस बढ़ता है.

–     आप यदि थके हुए और तनाव में रहेंगे, तो इसका सीधा असर आपकी सेक्स ड्राइव पर पड़ेगा.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

–     वर्कआउट, रेग्युलर एक्सरसाइज़, योगा, मेडिटेशन आदि से स्ट्रेस लेवल कम होता है.

–     एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्ट्रेस किसी भी व्यक्ति को शारीरिक व भावनात्मक रूप से कमज़ोर बनाता है, जिससे रिश्तों में गर्माहट, जोश व आत्मीयता धीरे-धीरे कम होने लगती है.

–     सेक्स लाइफ को ख़राब करने में सबसे बड़ा रोल स्ट्रेस का ही होता है. जहां सेक्स लाइफ अच्छी नहीं होगी, वहां रिश्ता भी कमज़ोर होता चला जाएगा.

– विजयलक्ष्मी

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किस हेल्थ प्रॉब्लम में क्या खाएं, क्या न खाएं? (Health Problems Associated With Foods)

Health Problems

किस हेल्थ प्रॉब्लम में क्या खाएं, क्या न खाएं? (Health Problems Associated With Foods)

रोज़मर्रा की व्यस्त जीवनशैली में हम अक्सर कुछ न कुछ ऐसा खा लेते हैं, जो संतुलित तो बिल्कुल नहीं होता, लेकिन उसे खाने से कोई न कोई स्वास्थ्य समस्या (Health Problems) ज़रूर खड़ी हो जाती है. न चाहते हुए डॉक्टर के पास जाना ही पड़ता है. यदि आप डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहते हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि किस बीमारी में क्या खाएं और क्या न खाएं?

डायबिटीज़

क्या खाएं?

–    हरी सब्ज़ियां, सोया, मूंग, काला चना, ब्राउन राइस, राजमा और अंडे का  स़फेदवाला भाग- ये लो ग्लाइसेमिक इंडेक्सवाली चीज़ें होती हैं, जो शरीर में जाकर धीरे-धीरे ग्लूकोज़ में बदलती हैं.

–    प्रोटीन और फाइबर से भरपूर चीज़ें खाएं, जैसे- लोबिया और स्प्राउट्स आदि.

–    फलों में चेरी, स्ट्रॉबेरी, सेब, संतरा, अनार, पपीता आदि और सब्ज़ियों में करेला, लौकी, तोरई, कद्दू, खीरा, टमाटर आदि खाएं.

–    रोज़ाना एक मुट्ठी मिक्स ड्रायफ्रूट्स ज़रूर खाएं.

–    करेला, लौकी, टमाटर, ऐलोवीरा का जूस डायबिटीज़ में बहुत फ़ायदेमंद होता है.

क्या न खाएं?

–    गुड़, शक्कर, शहद, चॉकलेट, केक, पेस्ट्री आदि मीठी चीज़ें न खाएं.

–    मैदा, सूजी, स़फेद चावल, स़फेद ब्रेड, नूडल्स, पिज़्ज़ा, बिस्किट्स न खाएं. ये हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्सवाली चीज़ें होती हैं, जो शरीर में जाकर जल्दी-जल्दी ग्लूकोज़ में परिवर्तित होती हैं.

–    तली हुई चीज़ें, मक्के का आटा, पैक्ड फूड बिल्कुल न लें.

–    आम, चीकू, केला, अंगूर, अनन्नास में ज़्यादा शक्कर होता है, इसलिए इन्हें न खाएं.

–    स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर सब्ज़ियां- आलू, अरवी, जिमीकंद, कटहल, शकरकंद, चुकंदर न खाएं, क्योंकि इनमें ग्लूकोज़ अधिक होता है.

हार्ट अटैक

क्या खाएं?

–    हरी सब्ज़ियां, दालें, स्ट्रॉबेरी, संतरा, केला, सीताफल- इनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम होता है.

–    सूप, सलाद, खट्टे फल, आड़ू, सोया, नींबू पानी, काला चना, लोबिया खाना बहुत फ़ायदेमंद होता है.

–    ओमेगा3 से भरपूर- बादाम, अलसी, फिश ऑयल और अखरोट ज़रूर लें.

क्या न खाएं?

–    हाई फैट डायट (मक्खन, घी, मलाई आदि) में सैचुरेटेड फैट होता है, इसलिए इनका सेवन कम करें.

–    खाने में नमक की मात्रा कम रखें. टेबल सॉल्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें.

–    अजीनोमोटो, बेकिंग पाउडर, सॉस, अचार, पैक्ड फूड, बेकरी फूड न खाएं.

अस्थमा

क्या खाएं?

–    नींबू, कीवी, आंवला, ब्रोकोली, टमाटर, शिमला मिर्च में विटामिन सी अधिक होता है.

–    डायट में जौ और चोकर सहित गेहूं के आटे की रोटियां, दलिया, मूंग दाल ज़रूर लें.

–    चेरी, खुबानी, शकरकंद, हरी मिर्च, गाजर में बीटा कैरोटिन होता है, इन्हें ज़रूर खाएं.

–    प्रोटीन, विटामिन बी और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे- दाल, सोयाबीन, अंडा, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां आदि खाएं.

–    भिगोई हुई मूंगफली अस्थमा में बहुत फ़ायदेमंद होती है.

क्या न खाएं?

–    तला हुआ भोजन, जंक फूड, पैक्ड फूड, बासी खाना, मक्खन न लें.

–    तली हुई मूंंगफली बिल्कुल न खाएं.

–    डेयरी प्रोडक्ट्स, खट्टी व ठंडी चीज़ें न खाएं.

–    केला, पका हुआ चुकंदर, कटहल, लोबिया आदि न लें.

कब्ज़

क्या खाएं?

–    कब्ज़ होने पर बिना नमक और बटरवाले पॉपकॉर्न खाएं. कम कैलोरीवाले इस फूड आइटम में फाइबर बहुत अधिक होता है.

–    आलूबुखारे में फाइबर के साथ-साथ सोर्बिटोल (विशेष तरह का कार्बोहाइड्रेट) होता है, जो कब्ज़ से राहत दिलाता है.

–    सब्ज़ियों की तुलना में बीन्स में दोगुना फाइबर होता है. बीन्स को सब्ज़ी के तौर पर ही नहीं, सूप, पास्ता और पुलाव में भी डालकर खा सकते हैं.

–    खुबानी, अंजीर, खजूर और किशमिश में फाइबर अधिक मात्रा में होते हैं, जो कब्ज़ दूर करते हैं.

–    ब्रोकोली, साबूत अनाज, होल गे्रन ब्रेड, पका हुआ केला, फल और फाइबरयुक्त चीज़ें विशेष रूप से खानी चाहिए.

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क्या न खाएं?

–    पनीर, आइस्क्रीम आदि डेयरी प्रोडक्ट्स दूध से बने होते हैं और दूध कब्ज़ बढ़ाता है.

–    फैट बढ़ानेवाले स्नैक्स, विशेष रूप से पोटैटो वेफर्स, फे्रंचफ्राइज कब्ज़ की समस्या और बढ़ा सकते हैं.

–    बेकरी प्रोडक्ट्स, जैसे- कुकीज़, पेस्ट्री और केक न खाएं, क्योंकि इनमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं.

–    कच्चा केला, प्याज़, मूली, रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड (व्हाइट राइस, व्हाइट ब्रेड, व्हाइट पास्ता आदि) से कब्ज़ बढ़ता है.

–    उड़द दाल, अरवी, बैंगन, मसूर, मैदा से बनी चीज़ें, ठंडा व बासी खाना न खाएं.

डायरिया

क्या खाएं?

–    केला, दही-चावल, मूंग दाल खिचड़ी, धुली मसूर या मूंग दाल का सूप, लौकी का रायता जैसी हल्की चीज़ें खाएं.

–    ककड़ी, खीरा, तरबूज़, खरबूजा आदि वॉटरी फ्रूट्स ज़्यादा लें.

–    पपीता, बेल का मुरब्बा, मीठा सेब, अनार आदि फलों का सेवन करें.

–    नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, लस्सी, गन्ने का रस या फलों का जूस पीएं.

–    दही में केला मिलाकर नाश्ते, दोपहर और शाम को खाने से डायरिया में आराम मिलता है.

क्या न खाएं?

–    आलू, इमली, बैंगन, अरवी, ब्रोकोली, प्याज़, बीन्स, पत्तागोभी, अचार न खाएं.

–    तला, मसालेदार, बासी और गरिष्ठ भोजन खाने से बचें.

–    बिना ढकी हुई या बहुत देर से काटकर रखी हुई चीज़ें न खाएं.

–   सड़क के किनारे खड़े हॉकर्स या

शादी-पार्टी में पहले से कटा हुआ फ्रूट चाट-सलाद न खाएं.

सर्दी-ज़ुकाम

क्या खाएं?

–    सेब, चीकू, पपीता, अंजीर, शहतूत, अनार, कीवी, अंगूर आदि विटामिन सी से भरपूर फल व सब्ज़ियां खाएं.

–    सब्ज़ियों में पालक, चुकंदर, ब्रोकोली, लाल शिमला मिर्च, मशरूम, शलगम और गाजर ज़रूर खाएं.

–    गुड़ की तासीर गरम होती है, इसलिए गुड़ से बनी हुई चीज़ें खाएं.

क्या न खाएं?

–    यदि आपको सर्दी-ज़ुकाम जल्दी-जल्दी होता है, तो दही, पनीर, चीज़ कम खाएं. ये चीज़ें कफ़बढ़ाती हैं. सर्दी-ज़ुकाम सीज़नल प्रॉब्लम है, तो रात को दही न खाएं.

–    फ्राइड फूड, मसालेदार खाना, ठंडी चीज़ें, व्हाइट ब्रेड, पास्ता, नूडल्स न खाएं.

कफ़

क्या खाएं?

–    जिन चीज़ों की तासीर गरम हो, वे अधिक खाएं, जैसे- गरम सूप, गरम चाय आदि.

–    सिट्रस फल, अनन्नास, अनार, सेब, मौसंबी, बेरीज़, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, सोयाबीन, फलियां ज़्यादा से ज़्यादा खाएं.

–    तुलसी, सोंठ, शहद और अदरक का सेवन अधिक करना चाहिए.

क्या न खाएं?

–    दूध, बटर, पनीर, फैट बढ़ानेवाले फूड और नॉनवेेज फूड कम खाएं.

–    ठंडी चीज़ें खाने से कफ़ बढ़ता है, इसलिए उन्हें अवॉइड करें.

– देवांश शर्मा

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इन 15 आदतों से बढ़ता है मोटापा (15 Bad Habits That Make You Fat)

अक्सर मोटापे (Obesity) से बचने के चक्कर में लोग ऐसी आदतें अपना लेते हैं, जो मोटापा कम करने की बजाय बढ़ा देती हैं. भूखे रहना, ठीक से खाना न खाना, फैट्स अवॉइड करना, लो फैटवाली चीज़ें खाना आदि ऐसी आदतें हैं, जो अनजाने में ही आपका मोटापा बढ़ा रही हैं. तो सावधान हो जाइए और इन आदतों (Habits) से बचने की कोशिश कीजिए.

Habits That Make You Fat

1. ब्रेकफास्ट न करना

ज़्यादातर लोग यह ग़लती करते हैं. ब्रेकफास्ट न करने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिससे दोपहर के बाद आप ओवर ईटिंग करना शुरू कर देते हैं. रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते, वो बाकी लोगों के मुक़ाबले 5 गुना तेज़ी से मोटापे के शिकार होते हैं.

2. नींद कम लेना या ज़्यादा

वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स के अनुसार, अगर आप 5 घंटे या उससे कम नींद लेते हैं या फिर 8 घंटे से ज़्यादा सोते हैं, तो बाकी लोगों के मुक़ाबले आपका बेली फैट ढाई गुना तेज़ी से बढ़ेगा.

3. बहुत तेज़ी से खाना

अगर आप खाना देखते ही कंट्रोल नहीं कर पाते और जल्दी-जल्दी खाना खा लेते हैं, तो आप अन्य लोगों के मुक़ाबले ज़्यादा ओवरईटिंग करते हैं. दरअसल, हमारे ब्रेन को यह सिग्नल देने में कि पेट भर गया है 20 मिनट लगते हैं, इसलिए 10 मिनट में खाना ख़त्म न करें, बल्कि धीरे-धीरे चबा-चबाकर 20 मिनट तक खाएं. इससे आप ओवरईटिंग से बच जाएंगे.

4. लो फैटवाली चीज़ें खाना

वेट लॉस करने के लिए ज़्यादातर लोग लो फैटवाली चीज़ें खाना शुरू कर देते हैं, पर उन्हें यह जानकर हैरानी होगी कि कुछ कैलोरीज़ बचाने के चक्कर में वो ज़्यादा कैलोरीज़ खा लेते हैं. दरअसल, लो फैट प्रोडक्ट्स में मैन्युफैक्चरर्स फैट को शक्कर और दूसरे फैट्स से रिप्लेस करते हैं. ज़्यादा शक्कर के कारण आपको तुरंत भूख लग जाती है, जिससे आप आमतौर से डबल खा लेते हैं.

5. रोज़ाना सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन

आपको शायद मालूम नहीं होगा कि एक सॉफ्ट ड्रिंक या सोडा में 11-15 ग्राम तक शक्कर होती है. सैन एंटोनियो के रिसर्चर्स ने इस बात का खुलासा किया है कि जो लोग रोज़ाना एक या दो सोडा पीते हैं, बाकी लोगों के मुक़ाबले उनका बेली फैट पांच गुना तेज़ी से बढ़ता है.

6. बहुत ज़्यादा टीवी देखना

जो लोग ज़्यादा टीवी देखते हैं, वो बाकी लोगों के मुक़ाबले ज़्यादा स्नैक्स खाते हैं. फैटी और फ्राइड ये स्नैक्स चुपके-चुपके आपका वज़न बढ़ाते हैं और आपका ध्यान भी नहीं जाता.

7. प्लास्टिक की बॉटल से पानी पीना

इस ओर शायद ही आपने ध्यान दिया हो कि आपकी प्लास्टिक की वॉटर बॉटल कई बीमारियों के साथ-साथ मोटापा भी दे सकती है. प्लास्टिक बॉटल्स में मौजूद बीपीए इसे बढ़ावा देते हैं, इसलिए जल्द से जल्द अपनी प्लास्टिक की वॉटर बॉटल को स्टेनलेस स्टील या तांबे से रिप्लेस करें.

8. छोटी-छोटी बातों पर स्ट्रेस

स्ट्रेस होने पर अक्सर लोगों को अनहेल्दी चीज़ें खाने की क्रेविंग होती है. इस चक्कर में वे ओवरईटिंग कर लेते हैं. इसे स्ट्रेस ईटिंग कहते हैं. स्ट्रेस ईटिंग कब आपकी आदत में शुमार हो जाता है, आपको पता भी नहीं चलता और आप मोटापे के शिकार हो जाते हैं.

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Habits That Make You Fat

9. बड़ी प्लेट में खाना

एक स्टडी में यह पाया गया कि अगर ऑप्शन दिया जाए, तो 98.6% लोग खाने के लिए बड़ी प्लेट उठाते हैं. बड़ी प्लेट यानी ज़्यादा खाना और ज़्यादा कैलोरीज़ यानी कुल मिलाकर आपका बढ़ता मोटापा. कोशिश करें कि छोटी प्लेट में खाएं, चाहें, तो दोबारा ले लें, पर बड़ी प्लेट अवॉइड करें.

10. पर्याप्त पानी न पीना

पर्याप्त पानी पीने से हमारे बॉडी के सभी फंक्शन्स सुचारु रूप से चलते रहते हैं, पर कम पानी पीने से इनमें समस्या आती है. जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो उसकी जगह बॉडी फैट लेने लगता है, जो मोटापे का कारण बनता है.

11. एक्सरसाइज़ न करना

अगर आप सही तरी़के से डायट नहीं फॉलो कर पा रहे हैं, तो कम से कम हफ़्ते में 5 दिन रोज़ाना 45 मिनट तक एक्सरसाइज़ करें. अगर आप यह भी नहीं करेंगे, तो रोज़ाना की एक्स्ट्रा कैलोरीज़ से बढ़नेवाले मोटापे के लिए किसी को दोष नहीं दे पाएंगे.

12. हेल्दी फैट्स से भी दूरी

मोटापे से बचने के लिए बहुत से लोग फैट्स से एकदम दूर रहते हैं, जबकि फ्लैक्स सीड्स और ड्रायफ्रूट्स से मिलनेवाले फैट्स न स़िर्फ हेल्दी होते हैं, बल्कि स्लिम बने रहने में भी आपकी मदद करते हैं, इसलिए अपने रोज़ाना के डायट में हेल्दी फैट्स को शामिल करें.

13. नमक को अनदेखा करना

रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बहुत से लोग ज़रूरत से ज़्यादा क़रीब 50% अधिक नमक का सेवन रोज़ाना करते हैं. पैक्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड और वेफर्स जैसे स्नैक्स में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है. नमक हमारे शरीर में न स़िर्फ वॉटर रिटेंशन बढ़ाता है, बल्कि मोटापे को भी बढ़ाता है.

14. न्यूट्रीशन लेबल न देखना

मार्केट में कुछ भी ख़रीदते व़क्त हम पैकेट के आगे देखते हैं, कभी पलटकर पैकेट के पीछे नहीं देखते, वरना हमें पता चल जाए कि उस प्रोडक्ट में कितनी शक्कर, कितना सोडियम, कितना फैट और कितनी कैलोरीज़ हैं. अगली बार कोई भी स्नैक्स का पैकेट ख़रीदें, तो उसमें मौजूद शक्कर, कैलोरीज़ की मात्रा यकीनन आपको चौंका देगी. आपने सोचा भी नहीं होगा कि अनजाने में आपने कितनी कैलोरीज़ का ओवरडोज़ कर लिया.

15. खाने के तुरंत बाद सो जाना

ज़्यादातर लोग खाना खाते ही बिस्तर पर लुढ़क जाते हैं, जबकि डॉक्टर्स भी कहते हैं कि खाने के 2 घंटे बाद सोएं. इससे हमारे शरीर को खाने को पचाने के लिए समय मिल जाता है, लेकिन ऐसा न करने से हम ख़ुद अपना ही नुक़सान कर बैठते हैं.

– सुनीता सिंह

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क्या होती है सेक्सुअल फिटनेस? (What Is Sexual Fitness?)

यह सच है कि सेक्स और सेक्स से जुड़े विषयों पर हमारा समाज थोड़ा-बहुत खुलकर बात करने लगा है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि सेक्स को लेकर आज भी लोगों के मन में भ्रांतियां और ग़लतफ़हमियां हैं, क्योंकि सेक्स को लेकर कुछ खुलापन भले ही आ गया हो, लेकिन परिपक्वता अब भी नहीं आई है. ऐसे में यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि क्या हम सेक्सुअली फिट हैं?

Sexual Fitness

– एक सामान्य इंसान को सेक्स की ज़रूरत और चाहत होती है.

– यह चाहत व ज़रूरत अलग-अलग लोगों में अलग-अलग हो सकती है. किसी को कम, किसी को ज़्यादा.

– इसी तरह आकर्षण होना भी स्वाभाविक है.

– फैंटसीज़ यानी कल्पना करना, जैसे- किसी ख़ास व्यक्ति की ओर यदि हम आकर्षित होते हैं, तो उसके बारे में सोचना और कल्पना में उसके साथ             सेक्स करना भी स्वाभाविक व सामान्य है.

– सेक्स की चाह होने पर मास्टरबेट करना भी हेल्दी माना जाता है.

– यदि आप में ऊपर बताए तमाम लक्षण मौजूद हैं, तो आप सेक्सुअली फिट हैं और यदि आप में सेक्स ड्राइव यानी सेक्स की चाह कम है या कम हो           रही है, तो आपकी सेक्सुअल फिटनेस कम है.

–  अगर आप शादीशुदा हैं, तो आपकी सेक्स लाइफ कितनी अच्छी है?

– क्या सेक्स से आपको और आपके पार्टनर को पहले जैसी संतुष्टि नहीं मिलती?

– क्या सेक्स से आपको ऊब और बोरियत होने लगी है?

– क्या यह महज़ शारीरिक क्रिया बन गया है आपके लिए या अब भी भावनात्मक रूप से आप इसे आनंददायक क्रिया मानते हैं?

– ये तमाम सवाल ख़ुद से और अपने पार्टनर से करें, तो आप ख़ुद जान जाएंगे कि आप सेक्सुअली कितने फिट हैं.

व्यस्त ज़िंदगी में भी अगर सेक्स आपकी प्राथमिकताओं में से बाहर हो गया है, तो सचेत हो जाइए. शोधों में भी यह बात कई बार साबित हो चुकी है कि शादीशुदा लोग कुंवारे लोगों की अपेक्षा अधिक हेल्दी और लंबी ज़िंदगी जीते हैं. ऐसे में सेक्स के महत्व और सेक्सुअल फिटनेस को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. सेक्सुअल फिटनेस को आप इस तरह से बांटकर देख सकते हैं-

भावनात्मक पहलू: अगर आपका अपने पार्टनर से भावनात्मक लगाव है, तो ज़ाहिर है सेक्स लाइफ बेहतर बनेगी, लेकिन अगर आप दोनों ही मशीनी ज़िंदगी जीने के आदी हो चले हैं, तो सेक्स की चाह भी कम होती चली जाएगी यानी आपकी सेक्सुअल फिटनेस कम होती जाएगी.

स्पेशल टिप: ऐसे में ज़रूरी है पार्टनर के साथ समय बिताएं. प्यार भरी बातें करें, एक-दूसरे को सहयोग करें, जिसका सीधा प्रभाव आपकी सेक्स लाइफ पर पड़ेगा.

मानसिक स्थिति: मानसिक तनाव, काम का बोझ और घरेलू ज़िम्मेदारियां भी आपको सेक्स के प्रति उदासीन बना देती हैं. बेहतर होगा कि अपने काम का तनाव बेडरूम में न ले जाएं. आप मिल-जुलकर हर समस्या का समाधान निकाल सकते हैं, इसलिए अपने रिश्ते और सेक्स लाइफ पर इन रोज़मर्रा की बातों का असर न पड़ने दें.

स्पेशल टिप: पुरुषों की 90% सेक्स समस्या, जैसे- शीघ्रपतन आदि मानसिक अवस्था से ज़्यादा जुड़ी होती है, बजाय शारीरिक समस्या के. ठीक इसी तरह महिलाओं में योनि में सूखापन, दर्दयुक्त सेक्स आदि भी सेक्स के प्रति उदासीनता की वजह से हो सकता है.

शारीरिक पहलू: सेक्सुअल फिटनेस बहुत हद तक आपकी शारीरिक फिटनेस से भी जुड़ी होती है. अगर आपको कोई सेक्सुअल या शारीरिक समस्या है, तो काउंसलर या एक्सपर्ट की मदद लेने से परहेज़ न करें.

स्पेशल टिप: योग व एक्सरसाइज़ को भी अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएं. साथ में जॉगिंग या योगा क्लासेस जॉइन करें, इससे आप दोनों में नज़दीकियां बढ़ेंगी, जिसका सकारात्मक असर आपकी सेक्सुअल फिटनेस पर पड़ेगा.

 Sexual Fitness
नकारात्मक सोच से बचें

मन में बैठी भ्रांतियों व ग़लतफ़हमियों के कारण अपनी सेक्सुअल फिटनेस कम न होने दें- अधिकतर लोगों को लगता है कि फैंटसाइज़ करना, मास्टरबेट करना या किसी की तरफ़ आकर्षण महसूस करना ग़लत है. जबकि ये तमाम चीज़ें आपकी सेक्सुअल फिटनेस का अहम् हिस्सा हैं और आपकी फिटनेस को दर्शाती हैं.

सामाजिक व पारिवारिक पहलू

जहां तक महिलाओं की बात है, तो बचपन से ही पालन-पोषण अलग ढंग से होने के कारण या अन्य कारणों से भी वो सेक्स को लेकर उतनी उत्साहित नहीं रहतीं. उन्हें लगता है कि सेक्स के बारे में बात करना ग़लत है या चाहत होने पर भी सेक्स के लिए पहल न करना ही सही है, क्योंकि स्त्रियों को शर्मीला होना चाहिए और यही शर्मीलापन उनके संस्कार व चरित्र की सही व्याख्या करेगा. तमाम ऐसी बातें महिलाओं को सेक्सुअली अनफिट बनाती हैं और वो अपने पार्टनर को ठीक से सहयोग नहीं करतीं. इसके अलावा वो अपनी बॉडी को लेकर भी काफ़ी कॉन्शियस रहती हैं, उन्हें लगता है कि उनका फिगर या उनकी शारीरिक ख़ूबसूरती उनके पार्टनर को आकर्षित करने के लिए नाकाफ़ी है.

स्पेशल टिप: इस तरह की नकारात्मक सोच न रखें. फिज़िकल फिटनेस पर ध्यान ज़रूर दें, लेकिन मानसिक रूप से भी पॉज़ीटिव बनी रहें. आपका सहयोग और आपका प्यार आपकी शारीरिक ख़ूबसूरती से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है रिश्ते व सेक्स लाइफ को हेल्दी बनाए रखने के लिए.

क्या करें?

– फोरप्ले ज़रूर करें. अच्छे सेक्स के लिए अच्छा फोरप्ले बहुत ज़रूरी है.

– इसी तरह से अच्छे सेक्स के लिए रोमांस होना भी बहुत ज़रूरी है, इसलिए व्यस्त दिनचर्या से रोमांटिक पलों को ज़रूर चुराएं.

– खान-पान हेल्दी हो. फिज़िकल फिटनेस आपको सेक्सुअली भी फिट रखेगी.

– सेक्स बूस्टर फूड को अपने डायट का हिस्सा बनाएं, जैसे- हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, फ्लैक्स सीड(अलसी), सोयाबींस, सनफ्लावर सीड्स, सी फूड,                नट्स, ताज़ा फल, ख़ासकर विटामिन सी युक्त आदि. साथ ही एक्सरसाइज़ भी करें.

– जंक फूड, अल्कोहल का सेवन कम करें.

– तनाव से दूर रहें.

– अगर कोई समस्या हो, तो काउंसलर व एक्सपर्ट से सलाह लें.

– योगिनी भारद्वाज

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9 बेस्ट वेट लॉस ऐप्स (9 Best Weight Loss Apps)

जिम में कड़ी एक्सरसाइज़ और कठोर डायट प्लान फॉलो करने के बाद भी यदि आपका वज़न कम (Weight Loss) नहीं हो रहा है, तो निराश होने की ज़रूरत नहीं है… ज़रूरत है तो बस, अपने स्मार्टफोन में वेट लॉस ऐप्स (Weight Loss Apps) डाउनलोड करने की. ये ऐप्स न केवल आपके वज़न और डायट पर पैनी नज़र रखेंगे, बल्कि आपके द्वारा ली जानेवाली कैलोरीज़ की जानकारी भी देंगे.

Best Weight Loss Apps

Lose It! (लूज़ इट!)

इस ऐप का मुख्य उद्देश्य वेट लॉस के दौरान आपकी डायट पर कड़ी नज़र रखना है. लूज़ इट! की मदद से आप अपनी उम्र, वज़न और फिटनेस से जुड़े लक्ष्यों को आसानी से हासिल कर सकते हैं. इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद उसमें आपको अपना मौजूदा वज़न टाइप करना होगा. आप कितना वज़न कम करना चाहते हैं, वो लिखना होगा. इसके बाद यह ऐप आपको बताएगा कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए आपको प्रतिदिन कितनी कैलोरीज़ चाहिए. इस ऐप की विशेषता ये है कि इसमें उपलब्ध कराए गए फूड प्रोडक्ट के बारकोड के द्वारा आप यह जान सकते हैं कि उसमें कोैन-कौन से पोषक तत्व कितनी मात्रा में हैं और उस फूड में कितनी कैलोरीज़ हैं.

Weight Watchers (वेट वॉचर्स)

इस ऐप में आपको वेट लॉस करने और उसके बाद उसे मेंटेन करने के अनगिनत विकल्प आसानी से मिल जाएंगे. वास्तव में यह ऐप आपके द्वारा सेवन की जानेवाली शक्कर, कैलोरीज़ और सैचुरेटेड फैट्स बेस्ड खाद्य पदार्थों को अधिक से अधिक ‘पॉइंट्स’ देता है, ताकि आप कैलोरी का सेवन कम से कम करें. वेट वॉचर्स की विशेषता ये है कि यह ऐप व्यक्तिगत रूप से आपके वज़न कम करने के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर आपके डायट चार्ट में शामिल खाद्य पदार्थों को पॉइंट्स देता है, ताकि आप ऐसे फूड्स न खाएं, जिनसे आपका वज़न बढ़े. इस ऐप में भी आप बारकोड की मदद से फूड में शामिल पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

FatSecret (फैटसीक्रेट)

यह ऐप आपके स्मार्टफोन पर न केवल आपके द्वारा ली जानेवाली दैनिक कैलोरीज़ के सेवन को दिखाता है, बल्कि औसतन मासिक कैलोरीज़ के सेवन को भी दिखाता है. फैटसीक्रेट में आप अपने फूड चार्ट को लॉग इन करने के बाद अपने वज़न को मॉनिटर कर सकते हैं. इस ऐप की ख़ासियत है कि इसमें आप चैट फीचर का इस्तेमाल करके अपने फैटसीक्रेट कम्युनिटी के बाक़ी सदस्यों से चैट कर सकते हैं. इस ऐप में हेल्दी रेसिपीज़ का बहुत बड़ा संग्रह है, जिसे आप सेव कर सकते हैं. इसके अलावा इस ऐप में आपको वेट लॉस से संबंधित टिप्स, लेख व जानकारियां भी मिलेंगी.

HealthyOut (हेल्दीआउट)

अगर आप अपने बढ़े हुए वज़न से परेशान हैं और वेट लॉस करना चाहते हैं, तो हेल्दीआउट आपके लिए बहुत मददगार साबित होगा. इस ऐप को डाउनलोड करके आप अपने वेट लॉस के लक्ष्य को आसान बना सकते हैं और अपने लिए बेस्ट फूड का चुनाव कर सकते हैं. यह ऐप उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है, जो डायट संबंधी फूड के बारे में जानना चाहते हैं या फिर जिन्हें किसी फूड विशेष से एलर्जी होती है.

Fooducate (फूड्यूकेट)

इस वेट लॉस ऐप के द्वारा आप यह जान सकते हैं कि आप जो भोजन खा रहे हैं, वह आपके उपयुक्त है या नहीं. उस भोजन में कितनी कैलोरीज़ और फैट्स हैं, जो आपके वज़न को कम नहीं होने देते हैं. इस ऐप के द्वारा यह जानकारी प्राप्त करने के बाद आप उन फूड्स से दूर रहेंगे, जिनसे आपका वज़न बढ़ सकता है. इसके लिए आपको उस फूड प्रोडक्ट का बारकोड डालना होगा. तुरंत आपके स्मार्टफोन में कैलोरीज़ से जुड़ी सारी जानकारियां आ जाएंगी.

SPARKPEOPLE (स्पार्कपीपल)

इस ऐप में यूज़र को डेली मील, एक्सरसाइज़ और वेट  संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए ट्रेकिंग टूल के द्वारा लॉग इन करना होता है. इस ऐप का न्यूट्रीशनल डाटाबेस बहुत बड़ा है, जिसमें तीन लाख से भी अधिक खाद्य पदार्थों की लिस्ट है. इस ऐप में बारकोड स्कैनर भी है, जिससे आप फूड की न्यूट्रीशनल वैल्यू को ट्रैक कर सकते हैं. इस ऐप को साइन इन करते समय आपको एक्सरसाइज़ के डेमो फोटोज़ और उनके विवरण भी मिलेंगे, ताकि आप यह जान सकें कि एक्सरसाइज़ के दौरान आपको कौन-कौन-सी तकनीक इस्तेमाल करनी है.

MyFitnessPal (मायफिटनेसपाल)

इस ऐप को एक बार अपने स्मार्टफोन में डाउनलोड करने के बाद मायफिटनेसपाल आपके वज़न, लंबाई, डायट और वेट लॉस के लक्ष्यों का पूरा रिकॉर्ड रखता है. इसके अलावा समय-समय पर अधिक कैलोरीज़वाले फूड न खाने का अलर्ट भी देता है. डायट प्लान के साथ-साथ यह ऐप एक्सरसाइज़ करने के लिए भी प्रेरित करता है. वेट लॉस के दौरान यदि आपका मन घर का बना खाना खाने का नहीं है, तो मायफिटनेसपाल ऐप की मदद से आप अपने एरिया के आसपास के रेस्टोरेंट्स में मिलनेवाले फूड के पोेषक तत्वों के बारे में जान सकते हैं.

ideal weight (आइडियल वेट)

यह ऐप आपके बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) को कैलकुलेट करता है और इस बात की जानकारी देता है कि आपका आइडियल वज़न कितना होना चाहिए. आइडियल वज़न को जानने के बाद आप अपनी इच्छानुसार एक्सरसाइज़ और डायट प्लान कर सकते हैं. इस ऐप में आप अपनी लंबाई, उम्र और अन्य फैक्टर्स भी ऐड कर सकते हैं.

MYFITNESS (मायफिटनेस)

इस ऐप में आपको न केवल नए-नए फिटनेस टिप्स मिलेंगे, बल्कि वेट लॉस करने के लिए डायट प्लान और खानपान संबंधी बातों की जानकारी और लेख  भी मिलेंगे. इस ऐप की ख़ासियत है कि इसमें आप स्लाइड शो और वीडियो के द्वारा भी दिलचस्प अंदाज़ में जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं.

– देवांश शर्मा

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