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इन लक्षणों से जानें थायरॉइड कंट्रोल में  है या नहीं (Thyroid: Causes, Symptoms And Treatment)

Thyroid Causes

इन लक्षणों से जानें थायरॉइड कंट्रोल में  है या नहीं (Thyroid: Causes, Symptoms And Treatment)

समय के साथ-साथ हमारी जीवनशैली बदल रही है, खानपान बदल रहा है, काम करने के तरी़के बदल रहे हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि इन बदलावों को हमारे मन के साथ-साथ हमारा तन भी स्वीकार करे. कई बार हमें इस बात का बिल्कुल एहसास नहीं होता है कि सामान्य से लगनेवाले ये छोटे-छोटेे बदलाव किसी गंभीर बीमारी के संकेत भी हो सकते हैं. ऐसी ही एक हेल्थ प्रॉब्लम (Health Problem) है थायरॉइड (Thyroid), जिसके बारे में हम आपको बता रहे हैं.

क्या है थायरॉइड?

हम में से अधिकतर लोगों को यह बात मालूम नहीं होगी कि थायरॉइड किसी बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह एक ग्रंथि का नाम है, जो गर्दन में सांस की नली के ऊपर और वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागों में तितली के आकार में बनी होती है. यह ग्रंथि थायरॉक्सिन नामक हार्मोन का उत्पादन करती है. हम जो भी खाते हैं, उसे यह हार्मोन ऊर्जा में बदलता है. जब यह ग्रंथि ठीक तरह से काम नहीं करती है, तो शरीर में अनेक समस्याएं होने लगती हैं.

पहचानें थायरॉइड के लक्षणों को?

एनर्जी का स्तर बदलना

थायरॉइड की समस्या होने पर शरीर में ऊर्जा का स्तर बदलता रहता है. ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) में मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है या फिर उसमें अनियमित बदलाव होता रहता है, जिसके कारण अधिक भूख लगना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन और बेचैनी जैसी समस्याएं होती हैं. इसी तरह से अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) में शरीर में ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है, जिसकी वजह से अधिक थकान, एकाग्रता में कमी, घबराहट और याद्दाश्त में कमी आने लगती है.

वज़न का घटना-बढ़ना

ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) ग्रंथि की समस्या होने पर मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है, जिसके कारण व्यक्ति की भूख बढ़ जाती है. वह ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाने लगता है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा खाने पर भी उसका वज़न घटने लगता है. वहीं दूसरी ओर अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) होने पर मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिसके कारण भूख कम लगती है और कम खाना खाने पर भी वज़न लगातार बढ़ता रहता है.

आंतों की समस्या

ओवरएक्टिव थायरॉइड और अंडरएक्टिव थायरॉइड दोनों के कारण आंतों में  भी गड़बड़ी की समस्या हो सकती है. ये दोनों ही भोजन पचाने और मल-मूत्र के विसर्जन करने की क्रियाओं में मुख्य भूमिका निभाते हैं. अंडरएक्टिव थायरॉइड होने पर व्यक्ति कब्ज़ और डायरिया से परेशान रहता है.

गले में सूजन

सर्दी-जुक़ाम के कारण गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन आने लगता है, लेकिन इन लक्षणों की अनदेखी बिल्कुल न करें. कई बार सिंपल से दिखनेवाले ये लक्षण थायरॉइड के भी हो सकते हैं, क्योंकि थायरॉइड होने पर भी गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन के साथ-साथ गले में सूजन आती है. अगर गले में सूजन हो, तो इसकी अनदेखी करने की बजाय थायरॉइड टेस्ट कराएं.

मांसपेशियों में दर्द

शारीरिक मेहनत और वर्कआउट करने के बाद बॉडी पेन होना आम बात है. लेकिन ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी मांसपेशियों में दर्द होता है. कई बार मांसपेशियों में दर्द के साथ-साथ कमज़ोरी, थकान, कमर व जोड़ों में दर्द और सूजन भी आती है.

अनिद्रा की समस्या

थायरॉइड के प्रमुख लक्षणों में अनिद्रा भी एक लक्षण है. थायरॉइड ग्रंथि का असर व्यक्ति की नींद पर भी पड़ता है, जैसे- रात को नींद नहीं आना, बेचैनी, सोते समय अधिक पसीना आना आदि. नींद न आने के कारण कई बार चक्कर भी आने लगते हैं.

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बालों का झड़ना और त्वचा का ड्राई होना  

हाइपरथायरॉइडिज़्म से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा धीरे-धीरे ड्राई होने लगती है. त्वचा के ऊपर की कोशिकाएं (सेल्स) क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिसके कारण त्वचा में रूखापन आने लगता है. थायरॉइड के कारण त्वचा में रूखेपन के अलावा बालों की भी कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं, जैसे- बालों का झड़ना, रूखापन आदि.

तनाव में रहना

दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद थकान होना लाज़िमी है, लेकिन अगर आपको ज़रूरत से ज़्यादा ही थकान महसूस हो, तो इसकी वजह थायरॉइड भी हो सकती है. शुरुआत में इस बात का एहसास नहीं होता है कि थकान किस वजह से है, लेकिन जब थायरॉइड ग्रंथि ओवरएक्टिव हो जाती है, तो यह ग्रंथि शरीर में ज़रूरत से बहुत अधिक मात्रा में थायरॉइड हार्मोंस का निर्माण करने लगती है, जिसके कारण तनाव व बेचैनी होने लगती है.

पीरियड्स की अनियमितता

अधिकतर महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना आम बात है, लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं होता है कि अंडरएक्टिव और ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी पीरियड्स अनियमित होते हैं. इसके लक्षणों में लगातार बदलाव होने पर महिलाएं इस बात से परेशान रहती हैं. जब महिलाओं को हाइपरथायरॉइडिज़्म (ओवरएक्टिव थायरॉइड) की समस्या होती है, तो उन्हें सामान्य से अधिक रक्तस्राव होता है और जब महिलाएं हाइपोथायरॉइडिज़्म (अंडरएक्टिव थायरॉइड) से ग्रस्त होती हैं, तब उन्हें रक्तस्राव बहुत कम होता है या फिर होता ही नहीं है.

डिप्रेशन

अवसाद होने की एक वजह थायरॉइड भी हो सकती है, क्योंकि अवसाद में अधिक नींद आना या अनिद्रा की समस्या होती है. यदि व्यक्तिअंडरएक्टिव थायरॉइड से ग्रस्त है, तो मूड स्विंग होना, आलस, काम में मन न लगना जैसी समस्याएं होती हैं.

थायरॉइड को नियंत्रित करने के लिए क्या खाएं?

थायरॉइड के मरीज़ अगर उपचार के साथ-साथ अपने खानपान पर ध्यान दें, तो बहुत हद तक इसे नियंत्रित किया जा सकता है. उन्हें अपनी डायट में इन चीज़ों को शामिल करना चाहिए, जैसे-

मशरूम: इसमें सेलेनियम अधिक मात्रा में होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करता है.

अंडा: थायरॉइड के रोगियों को अपनी डायट में अंडा ज़रूर शामिल करना चाहिए. इसमें भी सेलेनियम होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करने के साथ कमज़ोरी को भी दूर करता है.

नट्स: वैसे तो नट्स सभी को खाने चाहिए, लेकिन थायरॉइड के मरीज़ों को नट्स ज़रूर खाना चाहिए. नट्स में ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो थायरॉइड के कारण होनेवाले हार्ट अटैक के ख़तरे को कम करते हैं.

दही: इसे खाने से इम्यूनिटी लेवल बढ़ता है और थायरॉइड भी नियंत्रित रहता है.

मेथी: इसमें ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो थायरॉक्सिन नामक हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं.

   – पूनम शर्मा

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सुकूनभरी गहरी नींद के लिए अपनाएं ये स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks To Sleep Better At Night)

Tricks To Sleep Better At Night

सुकूनभरी गहरी नींद के लिए अपनाएं ये स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks To Sleep Better At Night)

अगर आप भी बिस्तर पर पहुंचकर देर रात तक करवटें बदलते रहते हैं या फिर रात को बार-बार आपकी नींद (Sleep) खुल जाती है, तो इन छोटे-छोटे स्मार्ट ट्रिक्स (Smart Tricks) से आपकी यह समस्या (Problem) दूर हो जाएगी.

–    सोने से एक घंटे पहले कमरे में मौजूद सभी ब्लू लाइट्स को बंद कर दें. दरअसल जब रात को हम सोने जाते हैं, तो हमारे शरीर से मेलाटोनिन नामक हार्मोन का स्राव होता है, जो हमें सुकूनभरी नींद देता है, लेकिन मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी, आईपैड और वीडियोगेम से निकलनेवाली ब्लू लाइट के कारण मेलाटोनिन का स्राव तुरंत बंद हो जाता है.

–    दोपहर के बाद कैफीन न लें. कैफीन आपकी नींद को प्रभावित करता है, क्योंकि उसे पचने में चार से छह घंटे का समय लगता है. अगर गहरी नींद चाहते हैं, तो शाम को चाय या कॉफी पीना छोड़ दें.

–    दिन में आधे घंटे से ज़्यादा की नींद आपके रात की नींद को डिस्टर्ब करती है. दरअसल, दिन में ज़्यादा देर तक सोने से हमारा बॉडी क्लॉक डिस्टर्ब हो जाता है, इसलिए रात की नींद ख़राब होती है. अगर दिन में नींद लेने की आदत है, तो स़िर्फ आधे घंटे का पावर नैप लें.

–    आपका बिस्तर भी आपकी नींद में बाधा डाल सकता है. अगर बेडशीट, गद्दे और तकियों की क्वालिटी ख़राब हो गई हो, तो वो भी आपको ठीक से सोने नहीं देंगे.

–    स्टडी में यह बात साबित हो चुकी है कि जो लोग रोज़ाना एक्सरसाइज़ करते हैं, उन्हें बाकी लोगों के मुक़ाबले अच्छी नींद आती है. इसलिए कोशिश करें कि कम से कम हफ़्ते में पांच दिन फिज़िकल एक्टिविटीज़ करें.

–    आप चाहें, तो अच्छी नींद के लिए एरोमा थेरेपी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. तकिये पर लैवेंडर एसेंशियल ऑयल स्प्रे करें. इससे नींद काफ़ी अच्छी आती है.

–    दिनभर का तनाव भी आपके मस्तिष्क को अशांत किए रहता है, जिसके कारण आप चाहकर भी सुकून से सो नहीं पाते. इसके लिए सुबह-शाम जब भी समय मिले थोड़ी देर मेडिटेशन करें. ध्यान मस्तिष्क को शांत करता है, जिससे आप गहरी नींद सो पाते हैं.

–    सोने से एक घंटे पहले ही बेडरूम की लाइट मद्धिम कर दें. इससे बॉडी को सिग्नल मिलता है कि सोने का व़क्त करीब आ रहा है.

–   बेड पर जाने से पहले पार्क या खुले में वॉक करें. पेड़-पौधे और खुली हवा आपके शरीर को रिलैक्स कर देते हैं, जिससे आप अच्छी तरह सो पाते हैं.

–    सोने से दस मिनट पहले गुनगुने पानी में पैरों को डुबोकर रखें. पैर गर्म रहने पर नींद जल्दी और अच्छी आती है.

–    गुनगुने सरसों के तेल से पैरों के तलवों में मालिश करें.

–    सोने से पहले गुड़ खाना भी फ़ायदेमंद होता है.

–    गुनगुना मीठा दूध पीने से भी अच्छी नींद आती है.

–    सोते समय नाभि में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डालें.

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फिट रहने के लिए ऑफिस में खाएं 5 हेल्दी स्नैक्स (5 Healthy Office Snacks To Keep You Fit)

फिट (Fit) रहने के लिए ऑफिस (Office) में खाएं 5 हेल्दी स्नैक्स (Healthy Snacks) और रहें हमेशा एनर्जेटिक. हम क्या खाते हैं इसका असर हमारी सेहत, फिटनेस और हमारी स्किन पर भी पड़ता है. अक्सर लोग शाम के वक़्त ऑफिस में जंक फ़ूड खा लेते हैं, जिसके कारण उनका मोटापा बढ़ता जाता है और मोटापे के कारण अन्य बीमारियां भी उन्हें घेर लेती हैं. यदि आप थोड़ी-सी प्लानिंग करें, तो आप ऑफिस में जंक फ़ूड खाने से बच सकती हैं. फिट रहने के लिए आप भी ऑफिस में खाएं 5 हेल्दी स्नैक्स और हमेशा रहें फिट और हेल्दी.

Healthy Office Snacks

1) चना
प्रोटीन से भरपूर चना खाने से पेट भर जाता है और सेहत को किसी तरह का नुक़सान भी नहीं पहुंचता.
2) कुरमुरा
कुरमुरा न स़िर्फ वज़न में हल्का होता है, बल्कि आसानी से पच भी जाता है. बाज़ार की बनी नमकीन खाने से अच्छा है कि घर पर ही कुरमुरे की नमकीन बना लें.
3) ड्राईफ्रूट्स
काजू, किशमिश, बादाम, अखरोट आदि में ढेर सारा प्रोटीन, हेल्दी फैट, विटामिन व मिनरल्स पाए जाते हैं, जो भूख मिटाने के साथ ही हेल्दी भी बनाए रखते हैं.
4) कॉर्न
घर से ही मसाला कार्न बनाकर ले जाएं. इसके लिए उबले हुए कॉर्न में नमक और थोड़ा-सा चाट मसाला मिलाएं.
5) स्प्राउट्स
अंकुरित मूंग, चना आदि को हल्का उबालकर इसमें प्याज, टमाटर, मिर्च और नमक मिलाएं. ये टेस्टी स्नैक्स स्वाद व सेहत दोनों का ख़्याल रखता है.

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शादी से पहले ही नहीं, बाद में भी ज़रूरी है फिट रहना (How To Stay Fit After Your Wedding)

यह सच है कि शादी (Wedding) के कुछ समय बाद ही प्यार और रोमांस पर ज़िम्मेदारियों की जिल्द चढ़ने लगती है. ऐसे में रूमानी ख़्याल बीते दिनों की बात बनकर रह जाते हैं और उनकी जगह ले लेते हैं बिल्स, ख़र्चे, आटे-दाल के भाव, रिश्ते निभाने का दबाव, बच्चे, परवरिश, लोन आदि. यही वजह है कि मन के साथ-साथ शरीर पर भी ये ज़िम्मेदारियां परत बनकर मोटापे (Fats) व बीमारियों (Diseases) के रूप में उभरने लगती हैं. हम लापरवाह होते जाते हैं और कमर व पेट का साइज़ हमारी मौजूदा परिस्थिति, शादीशुदा ज़िंदगी, हेल्थ, फिटनेस और सेक्स लाइफ की पहचान बन जाते हैं. 

Fitness Tips

हम अक्सर यही सोचते हैं कि जब तक शादी न हो जाए, तब तक हमारे लिए फिट रहना बहुत ज़रूरी है, ताकि हम अट्रैक्टिव लगें. शादी के बाद न स़िर्फ अपनी फिटनेस को लेकर, बल्कि हेल्थ और अट्रैक्शन को लेकर भी हमारी अप्रोच बहुत कैज़ुअल हो जाती है. चाहे लड़कियां हों या लड़के, सबका यही हाल होता है. शादी के शुरुआती समय को छोड़ दें, तो बाद में अपने प्रति इतने लापरवाह हो जाते हैं कि धीरे-धीरे एक-दूसरे के प्रति आकर्षण भी कम होने लगता है और इसका असर उनके रिश्ते व सेक्स लाइफ पर भी पड़ने लगता है.

क्यों हो जाते हैं बेपरवाह?

–    शादी के बाद ज़िंदगी शुरू होती है, जबकि हमारी यह सोच बन जाती है कि अब तो शादी हो चुकी, अब कुछ करने के लिए बचा नहीं लाइफ में, तो हम में एक नीरसता पनपने लगती है.

–     ज़िम्मेदारियों का बोझ जैसे-जैसे बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे हेल्थ, आकर्षण, फिटनेस, प्यार-मुहब्बत जैसी बातें गौण होने लगती हैं.

–     कभी घर के लिए लोन की किश्तें, कभी बच्चों की फीस, तो कभी घर के बड़ों की हेल्थ प्रॉब्लम्स हमें अपने प्रति बेपरवाह बना देती हैं.

–     करियर की चुनौतियां और तमाम तरह के तनावों के बीच हेल्थ और फिटनेस जैसी चीज़ों के लिए हमें समय निकालना समय की बर्बादी लगने लगती है.

–     थकान, मोटापा और बेडौल बदन शादी के कुछ समय बाद ही हमारी पहचान बन जाते हैं.

–     न कोई चार्म रहता है, न कोई ग्लैमर और न ही ऊर्जा.

क्यों ज़रूरी है फिटनेस?

–     फिटनेस का प्रभाव आपके रिश्ते पर भी पड़ता है. शादी के बाद फिटनेस का ख़्याल रखना और भी ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि इससे आप में यह एहसास बढ़ता है कि आप एक-दूसरे के लिए हेल्दी और आकर्षक नज़र आना चाहते हैं. इसके अलावा आप अधिक उत्साह व उमंग का अनुभव भी करते हैं.

–     कुछ कपल्स पर किए गए एक सर्वे के अनुसार, फिटनेस पर ध्यान देने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि फिटनेस से न केवल उनके व्यक्तित्व पर, बल्कि उनके आपसी रिश्ते पर सकारात्मक प्रभाव हुआ.

–     जब कपल्स को यह महसूस कराया गया कि स़िर्फ हेल्दी रहने के लिए ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने पार्टनर के लिए भी फिट रहना चाहिए, ताकि उनके बीच का चार्म बना रहे, तो उन्होंने इस सोच के साथ वर्कआउट और डायट करना शुरू किया कि यह कोई पर्सनल एजेंडा नहीं है, बल्कि यह रिश्ते में ताज़गी और गर्माहट बनाए रखने के लिए भी बेहद ज़रूरी है, तो वाकई उनका कॉन्फिडेंस बढ़ा और उनके रिश्ते भी सुधरे.

–     कपल्स को यह कहा गया कि आप अपने पार्टनर से यह कहें कि मुझे तुम्हारे लिए फिट, हेल्दी और आकर्षक बने रहना है. इसके बाद उन्हें महसूस हुआ कि उनकी बॉन्डिंग और स्ट्रॉन्ग हुई.

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How To Stay Fit
कैसे एचीव करें गोल?

–     यह बात सही है कि शादी के कुछ समय बाद ही बहुत-सी चीज़ें बदलने लगती हैं. समय की कमी के साथ-साथ ऊर्जा व उत्साह की कमी भी होने लगती है. ऐसे में नीरसता पनपने लगती है, जो आप दोनों को एक-दूसरे से दूर भी कर सकती है. ऐसे में ज़रूरी है कि आप ख़ुद कोई रास्ता निकालें.

–     अपना टाइमटेबल और शेड्यूल तैयार करें.

–    एक डायरी बनाएं, जिसमें रोज़ की एक्टिविटीज़ और कैलोरीज़ की डिटेल्स रात को सोने से कुछ समय पहले नोट करें.

–    हर संडे उस डायरी में नोट की हुई चीज़ों पर आपस में बातचीत करें और देखें कि कहां क्या कमी रह गई.

–     सुबह जल्दी उठकर एक साथ वर्कआउट, वॉकिंग या जॉगिंग करें. इससे आप एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिताएंगे.

–    एक-दूसरे को चैलेंज और मोटिवेट करें कि कौन ज़्यादा फिट और एनर्जेटिक है.

–     एक साथ वर्कआउट करने से पार्टनर एक-दूसरे के क़रीब आते हैं. दोनों में समन्वय व सामंजस्य बेहतर होता है, साथ ही शेयरिंग की भावना भी बढ़ती है.

–     घर के काम मिल-जुलकर करें. इससे एक्सरसाइज़ भी हो जाएगी और बॉन्डिंग भी स्ट्रॉन्ग होगी.

–     रियलिस्टिक गोल्स सेट करें. अगर आपको लग रहा है कि शादी के छह महीने बाद ही 4-5 किलो वज़न बढ़ गया है, तो कोशिश करें धीरे-धीरे डायट व रूटीन में बदलाव लाने की.

–     घर में खाने के हेल्दी ऑप्शन्स रखें. अनहेल्दी स्नैक्स की जगह ड्रायफ्रूट्स, भुने चने, मूंगफली आदि रखें.

–     हर महीने गोल बदलें कि अगले दो महीनों में कितना वज़न कम करना है और दोनों एक-दूसरे को चैलेंज करें.

–     पार्टनर को मोटिवेट करने के लिए आप यह भी कर सकते हैं कि तुम्हारे बर्थडे या हमारी एनीवर्सरी तक अगर तुम इस आउटफिट में फिट आ गए, तो मैं तुम्हें गिफ्ट, पार्टी या हॉलीडे पर ले चलूंगा/चलूंगी.

–     नियमित रूप से हेल्थ टेस्ट्स व चेकअप, जैसे- बीपी, ब्लड शुगर लेवल, कोलेस्ट्रॉल व अन्य टेस्ट्स करवाएं.  बच्चे होने के बाद ख़ुद को महत्वहीन

न समझें

–     अक्सर कपल्स बच्चे होने के बाद ख़ुद के प्रति और भी उदासीन हो जाते हैं. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि एक पार्टनर ज़्यादा हेल्थ कॉन्शियस होता है, दूसरा बिल्कुल लापरवाह.

–     ऐसे में आप अपने फिट पार्टनर से ही सीख लें कि क्यों वो आपके सामने ज़्यादा यंग और एनर्जेटिक लगता है.

–     कई बार बच्चों के स्कूल में भी पीटीएम में आप देखेंगे कि कुछ कपल्स परफेक्ट लगते हैं. इसे भगवान की देन समझने की बजाय उनकी मेहनत को श्रेय दें और उनसे सीखें.

–     ख़ुद को चैलेंज करें कि अगली पीटीएम में आप भी परफेक्ट कपल नज़र आएंगे, इसके लिए कोशिश कल से नहीं, आज और अभी से ही शुरू कर दें.

–     यह भी ध्यान में रखें कि स़िर्फ अपने लिए या एक-दूसरे के लिए नहीं, बल्कि आपको अपने बच्चों के लिए भी फिट और हेल्दी रहना है.

–     बच्चों के साथ बहुत एनर्जी की ज़रूरत पड़ती है. ऐसे में आप ही थके-थके रहेंगे, तो बच्चों के साथ एक्टिविटीज़ में पार्टिसिपेट नहीं कर पाएंगे.

–     आप अगर हेल्दी खाएंगे और फिटनेस कॉन्शियस रहेंगे, तो बच्चे भी ऐसा ही करेंगे, क्योंकि बच्चों के पहले रोल मॉडल उनके पैरेंट्स ही होते हैं और वो आपसे ही सीखते हैं.

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Fitness Tips
फिटनेस का संबंध आपकी सेक्स लाइफ से भी है

–     अगर आप फिट होते हैं, तो आपका एनर्जी लेवल अधिक होता है, जिसका असर आपकी बॉडी इमेज व आपसी आकर्षण पर सकारात्मक तौर पर पड़ता है. इससे ज़ाहिर है कि आपकी सेक्स लाइफ बेहतर होती है.

–     हेल्दी डायट से आपकी सेक्स क्षमता भी बेहतर होती है. सेक्स लाइफ अच्छी होगी, तो आपसी संबंध और गहरे होंगे.

–     आप अपने रिश्ते में अधिक ऊर्जा व उत्साह का अनुभव करते हैं, क्योंकि फिटनेस से आपका कॉन्फिडेंस बढ़ता है.

–     आप यदि थके हुए और तनाव में रहेंगे, तो इसका सीधा असर आपकी सेक्स ड्राइव पर पड़ेगा.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

–     वर्कआउट, रेग्युलर एक्सरसाइज़, योगा, मेडिटेशन आदि से स्ट्रेस लेवल कम होता है.

–     एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्ट्रेस किसी भी व्यक्ति को शारीरिक व भावनात्मक रूप से कमज़ोर बनाता है, जिससे रिश्तों में गर्माहट, जोश व आत्मीयता धीरे-धीरे कम होने लगती है.

–     सेक्स लाइफ को ख़राब करने में सबसे बड़ा रोल स्ट्रेस का ही होता है. जहां सेक्स लाइफ अच्छी नहीं होगी, वहां रिश्ता भी कमज़ोर होता चला जाएगा.

– विजयलक्ष्मी

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किस हेल्थ प्रॉब्लम में क्या खाएं, क्या न खाएं? (Health Problems Associated With Foods)

Health Problems

किस हेल्थ प्रॉब्लम में क्या खाएं, क्या न खाएं? (Health Problems Associated With Foods)

रोज़मर्रा की व्यस्त जीवनशैली में हम अक्सर कुछ न कुछ ऐसा खा लेते हैं, जो संतुलित तो बिल्कुल नहीं होता, लेकिन उसे खाने से कोई न कोई स्वास्थ्य समस्या (Health Problems) ज़रूर खड़ी हो जाती है. न चाहते हुए डॉक्टर के पास जाना ही पड़ता है. यदि आप डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहते हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि किस बीमारी में क्या खाएं और क्या न खाएं?

डायबिटीज़

क्या खाएं?

–    हरी सब्ज़ियां, सोया, मूंग, काला चना, ब्राउन राइस, राजमा और अंडे का  स़फेदवाला भाग- ये लो ग्लाइसेमिक इंडेक्सवाली चीज़ें होती हैं, जो शरीर में जाकर धीरे-धीरे ग्लूकोज़ में बदलती हैं.

–    प्रोटीन और फाइबर से भरपूर चीज़ें खाएं, जैसे- लोबिया और स्प्राउट्स आदि.

–    फलों में चेरी, स्ट्रॉबेरी, सेब, संतरा, अनार, पपीता आदि और सब्ज़ियों में करेला, लौकी, तोरई, कद्दू, खीरा, टमाटर आदि खाएं.

–    रोज़ाना एक मुट्ठी मिक्स ड्रायफ्रूट्स ज़रूर खाएं.

–    करेला, लौकी, टमाटर, ऐलोवीरा का जूस डायबिटीज़ में बहुत फ़ायदेमंद होता है.

क्या न खाएं?

–    गुड़, शक्कर, शहद, चॉकलेट, केक, पेस्ट्री आदि मीठी चीज़ें न खाएं.

–    मैदा, सूजी, स़फेद चावल, स़फेद ब्रेड, नूडल्स, पिज़्ज़ा, बिस्किट्स न खाएं. ये हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्सवाली चीज़ें होती हैं, जो शरीर में जाकर जल्दी-जल्दी ग्लूकोज़ में परिवर्तित होती हैं.

–    तली हुई चीज़ें, मक्के का आटा, पैक्ड फूड बिल्कुल न लें.

–    आम, चीकू, केला, अंगूर, अनन्नास में ज़्यादा शक्कर होता है, इसलिए इन्हें न खाएं.

–    स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर सब्ज़ियां- आलू, अरवी, जिमीकंद, कटहल, शकरकंद, चुकंदर न खाएं, क्योंकि इनमें ग्लूकोज़ अधिक होता है.

हार्ट अटैक

क्या खाएं?

–    हरी सब्ज़ियां, दालें, स्ट्रॉबेरी, संतरा, केला, सीताफल- इनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम होता है.

–    सूप, सलाद, खट्टे फल, आड़ू, सोया, नींबू पानी, काला चना, लोबिया खाना बहुत फ़ायदेमंद होता है.

–    ओमेगा3 से भरपूर- बादाम, अलसी, फिश ऑयल और अखरोट ज़रूर लें.

क्या न खाएं?

–    हाई फैट डायट (मक्खन, घी, मलाई आदि) में सैचुरेटेड फैट होता है, इसलिए इनका सेवन कम करें.

–    खाने में नमक की मात्रा कम रखें. टेबल सॉल्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें.

–    अजीनोमोटो, बेकिंग पाउडर, सॉस, अचार, पैक्ड फूड, बेकरी फूड न खाएं.

अस्थमा

क्या खाएं?

–    नींबू, कीवी, आंवला, ब्रोकोली, टमाटर, शिमला मिर्च में विटामिन सी अधिक होता है.

–    डायट में जौ और चोकर सहित गेहूं के आटे की रोटियां, दलिया, मूंग दाल ज़रूर लें.

–    चेरी, खुबानी, शकरकंद, हरी मिर्च, गाजर में बीटा कैरोटिन होता है, इन्हें ज़रूर खाएं.

–    प्रोटीन, विटामिन बी और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे- दाल, सोयाबीन, अंडा, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां आदि खाएं.

–    भिगोई हुई मूंगफली अस्थमा में बहुत फ़ायदेमंद होती है.

क्या न खाएं?

–    तला हुआ भोजन, जंक फूड, पैक्ड फूड, बासी खाना, मक्खन न लें.

–    तली हुई मूंंगफली बिल्कुल न खाएं.

–    डेयरी प्रोडक्ट्स, खट्टी व ठंडी चीज़ें न खाएं.

–    केला, पका हुआ चुकंदर, कटहल, लोबिया आदि न लें.

कब्ज़

क्या खाएं?

–    कब्ज़ होने पर बिना नमक और बटरवाले पॉपकॉर्न खाएं. कम कैलोरीवाले इस फूड आइटम में फाइबर बहुत अधिक होता है.

–    आलूबुखारे में फाइबर के साथ-साथ सोर्बिटोल (विशेष तरह का कार्बोहाइड्रेट) होता है, जो कब्ज़ से राहत दिलाता है.

–    सब्ज़ियों की तुलना में बीन्स में दोगुना फाइबर होता है. बीन्स को सब्ज़ी के तौर पर ही नहीं, सूप, पास्ता और पुलाव में भी डालकर खा सकते हैं.

–    खुबानी, अंजीर, खजूर और किशमिश में फाइबर अधिक मात्रा में होते हैं, जो कब्ज़ दूर करते हैं.

–    ब्रोकोली, साबूत अनाज, होल गे्रन ब्रेड, पका हुआ केला, फल और फाइबरयुक्त चीज़ें विशेष रूप से खानी चाहिए.

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क्या न खाएं?

–    पनीर, आइस्क्रीम आदि डेयरी प्रोडक्ट्स दूध से बने होते हैं और दूध कब्ज़ बढ़ाता है.

–    फैट बढ़ानेवाले स्नैक्स, विशेष रूप से पोटैटो वेफर्स, फे्रंचफ्राइज कब्ज़ की समस्या और बढ़ा सकते हैं.

–    बेकरी प्रोडक्ट्स, जैसे- कुकीज़, पेस्ट्री और केक न खाएं, क्योंकि इनमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं.

–    कच्चा केला, प्याज़, मूली, रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड (व्हाइट राइस, व्हाइट ब्रेड, व्हाइट पास्ता आदि) से कब्ज़ बढ़ता है.

–    उड़द दाल, अरवी, बैंगन, मसूर, मैदा से बनी चीज़ें, ठंडा व बासी खाना न खाएं.

डायरिया

क्या खाएं?

–    केला, दही-चावल, मूंग दाल खिचड़ी, धुली मसूर या मूंग दाल का सूप, लौकी का रायता जैसी हल्की चीज़ें खाएं.

–    ककड़ी, खीरा, तरबूज़, खरबूजा आदि वॉटरी फ्रूट्स ज़्यादा लें.

–    पपीता, बेल का मुरब्बा, मीठा सेब, अनार आदि फलों का सेवन करें.

–    नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, लस्सी, गन्ने का रस या फलों का जूस पीएं.

–    दही में केला मिलाकर नाश्ते, दोपहर और शाम को खाने से डायरिया में आराम मिलता है.

क्या न खाएं?

–    आलू, इमली, बैंगन, अरवी, ब्रोकोली, प्याज़, बीन्स, पत्तागोभी, अचार न खाएं.

–    तला, मसालेदार, बासी और गरिष्ठ भोजन खाने से बचें.

–    बिना ढकी हुई या बहुत देर से काटकर रखी हुई चीज़ें न खाएं.

–   सड़क के किनारे खड़े हॉकर्स या

शादी-पार्टी में पहले से कटा हुआ फ्रूट चाट-सलाद न खाएं.

सर्दी-ज़ुकाम

क्या खाएं?

–    सेब, चीकू, पपीता, अंजीर, शहतूत, अनार, कीवी, अंगूर आदि विटामिन सी से भरपूर फल व सब्ज़ियां खाएं.

–    सब्ज़ियों में पालक, चुकंदर, ब्रोकोली, लाल शिमला मिर्च, मशरूम, शलगम और गाजर ज़रूर खाएं.

–    गुड़ की तासीर गरम होती है, इसलिए गुड़ से बनी हुई चीज़ें खाएं.

क्या न खाएं?

–    यदि आपको सर्दी-ज़ुकाम जल्दी-जल्दी होता है, तो दही, पनीर, चीज़ कम खाएं. ये चीज़ें कफ़बढ़ाती हैं. सर्दी-ज़ुकाम सीज़नल प्रॉब्लम है, तो रात को दही न खाएं.

–    फ्राइड फूड, मसालेदार खाना, ठंडी चीज़ें, व्हाइट ब्रेड, पास्ता, नूडल्स न खाएं.

कफ़

क्या खाएं?

–    जिन चीज़ों की तासीर गरम हो, वे अधिक खाएं, जैसे- गरम सूप, गरम चाय आदि.

–    सिट्रस फल, अनन्नास, अनार, सेब, मौसंबी, बेरीज़, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, सोयाबीन, फलियां ज़्यादा से ज़्यादा खाएं.

–    तुलसी, सोंठ, शहद और अदरक का सेवन अधिक करना चाहिए.

क्या न खाएं?

–    दूध, बटर, पनीर, फैट बढ़ानेवाले फूड और नॉनवेेज फूड कम खाएं.

–    ठंडी चीज़ें खाने से कफ़ बढ़ता है, इसलिए उन्हें अवॉइड करें.

– देवांश शर्मा

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इन 15 आदतों से बढ़ता है मोटापा (15 Bad Habits That Make You Fat)

अक्सर मोटापे (Obesity) से बचने के चक्कर में लोग ऐसी आदतें अपना लेते हैं, जो मोटापा कम करने की बजाय बढ़ा देती हैं. भूखे रहना, ठीक से खाना न खाना, फैट्स अवॉइड करना, लो फैटवाली चीज़ें खाना आदि ऐसी आदतें हैं, जो अनजाने में ही आपका मोटापा बढ़ा रही हैं. तो सावधान हो जाइए और इन आदतों (Habits) से बचने की कोशिश कीजिए.

Habits That Make You Fat

1. ब्रेकफास्ट न करना

ज़्यादातर लोग यह ग़लती करते हैं. ब्रेकफास्ट न करने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिससे दोपहर के बाद आप ओवर ईटिंग करना शुरू कर देते हैं. रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि जो लोग ब्रेकफास्ट नहीं करते, वो बाकी लोगों के मुक़ाबले 5 गुना तेज़ी से मोटापे के शिकार होते हैं.

2. नींद कम लेना या ज़्यादा

वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स के अनुसार, अगर आप 5 घंटे या उससे कम नींद लेते हैं या फिर 8 घंटे से ज़्यादा सोते हैं, तो बाकी लोगों के मुक़ाबले आपका बेली फैट ढाई गुना तेज़ी से बढ़ेगा.

3. बहुत तेज़ी से खाना

अगर आप खाना देखते ही कंट्रोल नहीं कर पाते और जल्दी-जल्दी खाना खा लेते हैं, तो आप अन्य लोगों के मुक़ाबले ज़्यादा ओवरईटिंग करते हैं. दरअसल, हमारे ब्रेन को यह सिग्नल देने में कि पेट भर गया है 20 मिनट लगते हैं, इसलिए 10 मिनट में खाना ख़त्म न करें, बल्कि धीरे-धीरे चबा-चबाकर 20 मिनट तक खाएं. इससे आप ओवरईटिंग से बच जाएंगे.

4. लो फैटवाली चीज़ें खाना

वेट लॉस करने के लिए ज़्यादातर लोग लो फैटवाली चीज़ें खाना शुरू कर देते हैं, पर उन्हें यह जानकर हैरानी होगी कि कुछ कैलोरीज़ बचाने के चक्कर में वो ज़्यादा कैलोरीज़ खा लेते हैं. दरअसल, लो फैट प्रोडक्ट्स में मैन्युफैक्चरर्स फैट को शक्कर और दूसरे फैट्स से रिप्लेस करते हैं. ज़्यादा शक्कर के कारण आपको तुरंत भूख लग जाती है, जिससे आप आमतौर से डबल खा लेते हैं.

5. रोज़ाना सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन

आपको शायद मालूम नहीं होगा कि एक सॉफ्ट ड्रिंक या सोडा में 11-15 ग्राम तक शक्कर होती है. सैन एंटोनियो के रिसर्चर्स ने इस बात का खुलासा किया है कि जो लोग रोज़ाना एक या दो सोडा पीते हैं, बाकी लोगों के मुक़ाबले उनका बेली फैट पांच गुना तेज़ी से बढ़ता है.

6. बहुत ज़्यादा टीवी देखना

जो लोग ज़्यादा टीवी देखते हैं, वो बाकी लोगों के मुक़ाबले ज़्यादा स्नैक्स खाते हैं. फैटी और फ्राइड ये स्नैक्स चुपके-चुपके आपका वज़न बढ़ाते हैं और आपका ध्यान भी नहीं जाता.

7. प्लास्टिक की बॉटल से पानी पीना

इस ओर शायद ही आपने ध्यान दिया हो कि आपकी प्लास्टिक की वॉटर बॉटल कई बीमारियों के साथ-साथ मोटापा भी दे सकती है. प्लास्टिक बॉटल्स में मौजूद बीपीए इसे बढ़ावा देते हैं, इसलिए जल्द से जल्द अपनी प्लास्टिक की वॉटर बॉटल को स्टेनलेस स्टील या तांबे से रिप्लेस करें.

8. छोटी-छोटी बातों पर स्ट्रेस

स्ट्रेस होने पर अक्सर लोगों को अनहेल्दी चीज़ें खाने की क्रेविंग होती है. इस चक्कर में वे ओवरईटिंग कर लेते हैं. इसे स्ट्रेस ईटिंग कहते हैं. स्ट्रेस ईटिंग कब आपकी आदत में शुमार हो जाता है, आपको पता भी नहीं चलता और आप मोटापे के शिकार हो जाते हैं.

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Habits That Make You Fat

9. बड़ी प्लेट में खाना

एक स्टडी में यह पाया गया कि अगर ऑप्शन दिया जाए, तो 98.6% लोग खाने के लिए बड़ी प्लेट उठाते हैं. बड़ी प्लेट यानी ज़्यादा खाना और ज़्यादा कैलोरीज़ यानी कुल मिलाकर आपका बढ़ता मोटापा. कोशिश करें कि छोटी प्लेट में खाएं, चाहें, तो दोबारा ले लें, पर बड़ी प्लेट अवॉइड करें.

10. पर्याप्त पानी न पीना

पर्याप्त पानी पीने से हमारे बॉडी के सभी फंक्शन्स सुचारु रूप से चलते रहते हैं, पर कम पानी पीने से इनमें समस्या आती है. जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो उसकी जगह बॉडी फैट लेने लगता है, जो मोटापे का कारण बनता है.

11. एक्सरसाइज़ न करना

अगर आप सही तरी़के से डायट नहीं फॉलो कर पा रहे हैं, तो कम से कम हफ़्ते में 5 दिन रोज़ाना 45 मिनट तक एक्सरसाइज़ करें. अगर आप यह भी नहीं करेंगे, तो रोज़ाना की एक्स्ट्रा कैलोरीज़ से बढ़नेवाले मोटापे के लिए किसी को दोष नहीं दे पाएंगे.

12. हेल्दी फैट्स से भी दूरी

मोटापे से बचने के लिए बहुत से लोग फैट्स से एकदम दूर रहते हैं, जबकि फ्लैक्स सीड्स और ड्रायफ्रूट्स से मिलनेवाले फैट्स न स़िर्फ हेल्दी होते हैं, बल्कि स्लिम बने रहने में भी आपकी मदद करते हैं, इसलिए अपने रोज़ाना के डायट में हेल्दी फैट्स को शामिल करें.

13. नमक को अनदेखा करना

रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बहुत से लोग ज़रूरत से ज़्यादा क़रीब 50% अधिक नमक का सेवन रोज़ाना करते हैं. पैक्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड और वेफर्स जैसे स्नैक्स में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है. नमक हमारे शरीर में न स़िर्फ वॉटर रिटेंशन बढ़ाता है, बल्कि मोटापे को भी बढ़ाता है.

14. न्यूट्रीशन लेबल न देखना

मार्केट में कुछ भी ख़रीदते व़क्त हम पैकेट के आगे देखते हैं, कभी पलटकर पैकेट के पीछे नहीं देखते, वरना हमें पता चल जाए कि उस प्रोडक्ट में कितनी शक्कर, कितना सोडियम, कितना फैट और कितनी कैलोरीज़ हैं. अगली बार कोई भी स्नैक्स का पैकेट ख़रीदें, तो उसमें मौजूद शक्कर, कैलोरीज़ की मात्रा यकीनन आपको चौंका देगी. आपने सोचा भी नहीं होगा कि अनजाने में आपने कितनी कैलोरीज़ का ओवरडोज़ कर लिया.

15. खाने के तुरंत बाद सो जाना

ज़्यादातर लोग खाना खाते ही बिस्तर पर लुढ़क जाते हैं, जबकि डॉक्टर्स भी कहते हैं कि खाने के 2 घंटे बाद सोएं. इससे हमारे शरीर को खाने को पचाने के लिए समय मिल जाता है, लेकिन ऐसा न करने से हम ख़ुद अपना ही नुक़सान कर बैठते हैं.

– सुनीता सिंह

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क्या होती है सेक्सुअल फिटनेस? (What Is Sexual Fitness?)

यह सच है कि सेक्स और सेक्स से जुड़े विषयों पर हमारा समाज थोड़ा-बहुत खुलकर बात करने लगा है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि सेक्स को लेकर आज भी लोगों के मन में भ्रांतियां और ग़लतफ़हमियां हैं, क्योंकि सेक्स को लेकर कुछ खुलापन भले ही आ गया हो, लेकिन परिपक्वता अब भी नहीं आई है. ऐसे में यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि क्या हम सेक्सुअली फिट हैं?

Sexual Fitness

– एक सामान्य इंसान को सेक्स की ज़रूरत और चाहत होती है.

– यह चाहत व ज़रूरत अलग-अलग लोगों में अलग-अलग हो सकती है. किसी को कम, किसी को ज़्यादा.

– इसी तरह आकर्षण होना भी स्वाभाविक है.

– फैंटसीज़ यानी कल्पना करना, जैसे- किसी ख़ास व्यक्ति की ओर यदि हम आकर्षित होते हैं, तो उसके बारे में सोचना और कल्पना में उसके साथ             सेक्स करना भी स्वाभाविक व सामान्य है.

– सेक्स की चाह होने पर मास्टरबेट करना भी हेल्दी माना जाता है.

– यदि आप में ऊपर बताए तमाम लक्षण मौजूद हैं, तो आप सेक्सुअली फिट हैं और यदि आप में सेक्स ड्राइव यानी सेक्स की चाह कम है या कम हो           रही है, तो आपकी सेक्सुअल फिटनेस कम है.

–  अगर आप शादीशुदा हैं, तो आपकी सेक्स लाइफ कितनी अच्छी है?

– क्या सेक्स से आपको और आपके पार्टनर को पहले जैसी संतुष्टि नहीं मिलती?

– क्या सेक्स से आपको ऊब और बोरियत होने लगी है?

– क्या यह महज़ शारीरिक क्रिया बन गया है आपके लिए या अब भी भावनात्मक रूप से आप इसे आनंददायक क्रिया मानते हैं?

– ये तमाम सवाल ख़ुद से और अपने पार्टनर से करें, तो आप ख़ुद जान जाएंगे कि आप सेक्सुअली कितने फिट हैं.

व्यस्त ज़िंदगी में भी अगर सेक्स आपकी प्राथमिकताओं में से बाहर हो गया है, तो सचेत हो जाइए. शोधों में भी यह बात कई बार साबित हो चुकी है कि शादीशुदा लोग कुंवारे लोगों की अपेक्षा अधिक हेल्दी और लंबी ज़िंदगी जीते हैं. ऐसे में सेक्स के महत्व और सेक्सुअल फिटनेस को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. सेक्सुअल फिटनेस को आप इस तरह से बांटकर देख सकते हैं-

भावनात्मक पहलू: अगर आपका अपने पार्टनर से भावनात्मक लगाव है, तो ज़ाहिर है सेक्स लाइफ बेहतर बनेगी, लेकिन अगर आप दोनों ही मशीनी ज़िंदगी जीने के आदी हो चले हैं, तो सेक्स की चाह भी कम होती चली जाएगी यानी आपकी सेक्सुअल फिटनेस कम होती जाएगी.

स्पेशल टिप: ऐसे में ज़रूरी है पार्टनर के साथ समय बिताएं. प्यार भरी बातें करें, एक-दूसरे को सहयोग करें, जिसका सीधा प्रभाव आपकी सेक्स लाइफ पर पड़ेगा.

मानसिक स्थिति: मानसिक तनाव, काम का बोझ और घरेलू ज़िम्मेदारियां भी आपको सेक्स के प्रति उदासीन बना देती हैं. बेहतर होगा कि अपने काम का तनाव बेडरूम में न ले जाएं. आप मिल-जुलकर हर समस्या का समाधान निकाल सकते हैं, इसलिए अपने रिश्ते और सेक्स लाइफ पर इन रोज़मर्रा की बातों का असर न पड़ने दें.

स्पेशल टिप: पुरुषों की 90% सेक्स समस्या, जैसे- शीघ्रपतन आदि मानसिक अवस्था से ज़्यादा जुड़ी होती है, बजाय शारीरिक समस्या के. ठीक इसी तरह महिलाओं में योनि में सूखापन, दर्दयुक्त सेक्स आदि भी सेक्स के प्रति उदासीनता की वजह से हो सकता है.

शारीरिक पहलू: सेक्सुअल फिटनेस बहुत हद तक आपकी शारीरिक फिटनेस से भी जुड़ी होती है. अगर आपको कोई सेक्सुअल या शारीरिक समस्या है, तो काउंसलर या एक्सपर्ट की मदद लेने से परहेज़ न करें.

स्पेशल टिप: योग व एक्सरसाइज़ को भी अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएं. साथ में जॉगिंग या योगा क्लासेस जॉइन करें, इससे आप दोनों में नज़दीकियां बढ़ेंगी, जिसका सकारात्मक असर आपकी सेक्सुअल फिटनेस पर पड़ेगा.

 Sexual Fitness
नकारात्मक सोच से बचें

मन में बैठी भ्रांतियों व ग़लतफ़हमियों के कारण अपनी सेक्सुअल फिटनेस कम न होने दें- अधिकतर लोगों को लगता है कि फैंटसाइज़ करना, मास्टरबेट करना या किसी की तरफ़ आकर्षण महसूस करना ग़लत है. जबकि ये तमाम चीज़ें आपकी सेक्सुअल फिटनेस का अहम् हिस्सा हैं और आपकी फिटनेस को दर्शाती हैं.

सामाजिक व पारिवारिक पहलू

जहां तक महिलाओं की बात है, तो बचपन से ही पालन-पोषण अलग ढंग से होने के कारण या अन्य कारणों से भी वो सेक्स को लेकर उतनी उत्साहित नहीं रहतीं. उन्हें लगता है कि सेक्स के बारे में बात करना ग़लत है या चाहत होने पर भी सेक्स के लिए पहल न करना ही सही है, क्योंकि स्त्रियों को शर्मीला होना चाहिए और यही शर्मीलापन उनके संस्कार व चरित्र की सही व्याख्या करेगा. तमाम ऐसी बातें महिलाओं को सेक्सुअली अनफिट बनाती हैं और वो अपने पार्टनर को ठीक से सहयोग नहीं करतीं. इसके अलावा वो अपनी बॉडी को लेकर भी काफ़ी कॉन्शियस रहती हैं, उन्हें लगता है कि उनका फिगर या उनकी शारीरिक ख़ूबसूरती उनके पार्टनर को आकर्षित करने के लिए नाकाफ़ी है.

स्पेशल टिप: इस तरह की नकारात्मक सोच न रखें. फिज़िकल फिटनेस पर ध्यान ज़रूर दें, लेकिन मानसिक रूप से भी पॉज़ीटिव बनी रहें. आपका सहयोग और आपका प्यार आपकी शारीरिक ख़ूबसूरती से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है रिश्ते व सेक्स लाइफ को हेल्दी बनाए रखने के लिए.

क्या करें?

– फोरप्ले ज़रूर करें. अच्छे सेक्स के लिए अच्छा फोरप्ले बहुत ज़रूरी है.

– इसी तरह से अच्छे सेक्स के लिए रोमांस होना भी बहुत ज़रूरी है, इसलिए व्यस्त दिनचर्या से रोमांटिक पलों को ज़रूर चुराएं.

– खान-पान हेल्दी हो. फिज़िकल फिटनेस आपको सेक्सुअली भी फिट रखेगी.

– सेक्स बूस्टर फूड को अपने डायट का हिस्सा बनाएं, जैसे- हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, फ्लैक्स सीड(अलसी), सोयाबींस, सनफ्लावर सीड्स, सी फूड,                नट्स, ताज़ा फल, ख़ासकर विटामिन सी युक्त आदि. साथ ही एक्सरसाइज़ भी करें.

– जंक फूड, अल्कोहल का सेवन कम करें.

– तनाव से दूर रहें.

– अगर कोई समस्या हो, तो काउंसलर व एक्सपर्ट से सलाह लें.

– योगिनी भारद्वाज

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9 बेस्ट वेट लॉस ऐप्स (9 Best Weight Loss Apps)

जिम में कड़ी एक्सरसाइज़ और कठोर डायट प्लान फॉलो करने के बाद भी यदि आपका वज़न कम (Weight Loss) नहीं हो रहा है, तो निराश होने की ज़रूरत नहीं है… ज़रूरत है तो बस, अपने स्मार्टफोन में वेट लॉस ऐप्स (Weight Loss Apps) डाउनलोड करने की. ये ऐप्स न केवल आपके वज़न और डायट पर पैनी नज़र रखेंगे, बल्कि आपके द्वारा ली जानेवाली कैलोरीज़ की जानकारी भी देंगे.

Best Weight Loss Apps

Lose It! (लूज़ इट!)

इस ऐप का मुख्य उद्देश्य वेट लॉस के दौरान आपकी डायट पर कड़ी नज़र रखना है. लूज़ इट! की मदद से आप अपनी उम्र, वज़न और फिटनेस से जुड़े लक्ष्यों को आसानी से हासिल कर सकते हैं. इस ऐप को डाउनलोड करने के बाद उसमें आपको अपना मौजूदा वज़न टाइप करना होगा. आप कितना वज़न कम करना चाहते हैं, वो लिखना होगा. इसके बाद यह ऐप आपको बताएगा कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए आपको प्रतिदिन कितनी कैलोरीज़ चाहिए. इस ऐप की विशेषता ये है कि इसमें उपलब्ध कराए गए फूड प्रोडक्ट के बारकोड के द्वारा आप यह जान सकते हैं कि उसमें कोैन-कौन से पोषक तत्व कितनी मात्रा में हैं और उस फूड में कितनी कैलोरीज़ हैं.

Weight Watchers (वेट वॉचर्स)

इस ऐप में आपको वेट लॉस करने और उसके बाद उसे मेंटेन करने के अनगिनत विकल्प आसानी से मिल जाएंगे. वास्तव में यह ऐप आपके द्वारा सेवन की जानेवाली शक्कर, कैलोरीज़ और सैचुरेटेड फैट्स बेस्ड खाद्य पदार्थों को अधिक से अधिक ‘पॉइंट्स’ देता है, ताकि आप कैलोरी का सेवन कम से कम करें. वेट वॉचर्स की विशेषता ये है कि यह ऐप व्यक्तिगत रूप से आपके वज़न कम करने के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर आपके डायट चार्ट में शामिल खाद्य पदार्थों को पॉइंट्स देता है, ताकि आप ऐसे फूड्स न खाएं, जिनसे आपका वज़न बढ़े. इस ऐप में भी आप बारकोड की मदद से फूड में शामिल पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

FatSecret (फैटसीक्रेट)

यह ऐप आपके स्मार्टफोन पर न केवल आपके द्वारा ली जानेवाली दैनिक कैलोरीज़ के सेवन को दिखाता है, बल्कि औसतन मासिक कैलोरीज़ के सेवन को भी दिखाता है. फैटसीक्रेट में आप अपने फूड चार्ट को लॉग इन करने के बाद अपने वज़न को मॉनिटर कर सकते हैं. इस ऐप की ख़ासियत है कि इसमें आप चैट फीचर का इस्तेमाल करके अपने फैटसीक्रेट कम्युनिटी के बाक़ी सदस्यों से चैट कर सकते हैं. इस ऐप में हेल्दी रेसिपीज़ का बहुत बड़ा संग्रह है, जिसे आप सेव कर सकते हैं. इसके अलावा इस ऐप में आपको वेट लॉस से संबंधित टिप्स, लेख व जानकारियां भी मिलेंगी.

HealthyOut (हेल्दीआउट)

अगर आप अपने बढ़े हुए वज़न से परेशान हैं और वेट लॉस करना चाहते हैं, तो हेल्दीआउट आपके लिए बहुत मददगार साबित होगा. इस ऐप को डाउनलोड करके आप अपने वेट लॉस के लक्ष्य को आसान बना सकते हैं और अपने लिए बेस्ट फूड का चुनाव कर सकते हैं. यह ऐप उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है, जो डायट संबंधी फूड के बारे में जानना चाहते हैं या फिर जिन्हें किसी फूड विशेष से एलर्जी होती है.

Fooducate (फूड्यूकेट)

इस वेट लॉस ऐप के द्वारा आप यह जान सकते हैं कि आप जो भोजन खा रहे हैं, वह आपके उपयुक्त है या नहीं. उस भोजन में कितनी कैलोरीज़ और फैट्स हैं, जो आपके वज़न को कम नहीं होने देते हैं. इस ऐप के द्वारा यह जानकारी प्राप्त करने के बाद आप उन फूड्स से दूर रहेंगे, जिनसे आपका वज़न बढ़ सकता है. इसके लिए आपको उस फूड प्रोडक्ट का बारकोड डालना होगा. तुरंत आपके स्मार्टफोन में कैलोरीज़ से जुड़ी सारी जानकारियां आ जाएंगी.

SPARKPEOPLE (स्पार्कपीपल)

इस ऐप में यूज़र को डेली मील, एक्सरसाइज़ और वेट  संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए ट्रेकिंग टूल के द्वारा लॉग इन करना होता है. इस ऐप का न्यूट्रीशनल डाटाबेस बहुत बड़ा है, जिसमें तीन लाख से भी अधिक खाद्य पदार्थों की लिस्ट है. इस ऐप में बारकोड स्कैनर भी है, जिससे आप फूड की न्यूट्रीशनल वैल्यू को ट्रैक कर सकते हैं. इस ऐप को साइन इन करते समय आपको एक्सरसाइज़ के डेमो फोटोज़ और उनके विवरण भी मिलेंगे, ताकि आप यह जान सकें कि एक्सरसाइज़ के दौरान आपको कौन-कौन-सी तकनीक इस्तेमाल करनी है.

MyFitnessPal (मायफिटनेसपाल)

इस ऐप को एक बार अपने स्मार्टफोन में डाउनलोड करने के बाद मायफिटनेसपाल आपके वज़न, लंबाई, डायट और वेट लॉस के लक्ष्यों का पूरा रिकॉर्ड रखता है. इसके अलावा समय-समय पर अधिक कैलोरीज़वाले फूड न खाने का अलर्ट भी देता है. डायट प्लान के साथ-साथ यह ऐप एक्सरसाइज़ करने के लिए भी प्रेरित करता है. वेट लॉस के दौरान यदि आपका मन घर का बना खाना खाने का नहीं है, तो मायफिटनेसपाल ऐप की मदद से आप अपने एरिया के आसपास के रेस्टोरेंट्स में मिलनेवाले फूड के पोेषक तत्वों के बारे में जान सकते हैं.

ideal weight (आइडियल वेट)

यह ऐप आपके बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) को कैलकुलेट करता है और इस बात की जानकारी देता है कि आपका आइडियल वज़न कितना होना चाहिए. आइडियल वज़न को जानने के बाद आप अपनी इच्छानुसार एक्सरसाइज़ और डायट प्लान कर सकते हैं. इस ऐप में आप अपनी लंबाई, उम्र और अन्य फैक्टर्स भी ऐड कर सकते हैं.

MYFITNESS (मायफिटनेस)

इस ऐप में आपको न केवल नए-नए फिटनेस टिप्स मिलेंगे, बल्कि वेट लॉस करने के लिए डायट प्लान और खानपान संबंधी बातों की जानकारी और लेख  भी मिलेंगे. इस ऐप की ख़ासियत है कि इसमें आप स्लाइड शो और वीडियो के द्वारा भी दिलचस्प अंदाज़ में जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं.

– देवांश शर्मा

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लाइफस्टाइल के नए फंडे (How Modern Lifestyle Has Changed Our Perception Of Life & Fitness)

Life & Fitness

लाइफस्टाइल के नए फंडे (How Modern Lifestyle Has Changed Our Perception Of Life & Fitness)

यह तो सच है कि ज़िंदगी और इसे जीने का अंदाज़ (Lifestyle) पहले से बहुत बदल (Changed) गया है और हम उन बदलावों के बीच ख़ुद को एडजस्ट करने में लगे हैं. कुछ बदलाव अच्छे होते हैं, तो कुछ ज़रूरी होते हैं, कुछ हमें तनाव दे जाते हैं, तो कुछ मजबूरी होते हैं… पर ज़िंदगी है, हर पल बदलती है… इसे ही तो लाइफ कहते हैं और इन बदलावों के बीच सामंजस्य बैठाने के तौर-तरीक़ों को हम लाइफस्टाइल का नाम दे देते हैं. क्या कुछ नया जुड़ता जा रहा है और क्या कुछ तेज़ी से बदलता जा रहा, इसी विषय को हम समझने का प्रयास करेंगे, ताकि इस बदलाव की प्रक्रिया को सहजता से ले सकें और अपनी लाइफस्टाइल को भी बेहतर बना सकें. क्या हैं ये लाइफस्टाइल के न्यू फंडे, आइए जानें.

स्वैग ज़रूरी है…
लोग, लोगों की ज़रूरतें, उनके तौर-तरी़के… सब कुछ हर पल में तेज़ी से बदल रहा है. इसी बदलाव का लेटेस्ट व हॉट ट्रेंड है स्वैग. जी हां, आज की लाइफस्टाइल में अगर आपके पास स्वैग नहीं है, तो आपकी ज़िंदगी बेकार है. यही वजह है कि लोग कभी अपने लुक्स के साथ, तो कभी अपने स्टाइल के साथ एक्सपेरिमेंट करने लगे हैं. हेयरस्टाइल और हेयरकलर्स में भी यह स्वैग उतर आया है, कभी देसी स्वैग, तो कभी स्वैगवाली टोपी, कभी चलने का स्टाइल, तो कभी आपका अंदाज़… हर चीज़ में स्वैग ज़रूरी हो गया है. यह बदलते लाइफस्टाइल का सबसे बड़ा बदलाव है.

फिटनेस है न्यू हॉटनेस…
लाइफस्टाइल का सबसे ज़्यादा असर हमारी हेल्थ और फिटनेस पर पड़ता है. हमारी डायट बदलती है, रहने का ढंग भी बदलता है, साथ ही ढेर सारा स्ट्रेस भी होता है. ये सब हमें अनफिट और अनहेल्दी बनाता है. लेकिन अब नहीं, क्योंकि लोग अब फिट रहना पसंद करते हैं. चाहे कितना भी तनाव हो या कितना ही वर्कलोड हो, फिटनेस के लिए टाइम निकालते हैं. जिम जाते हैं, हेल्दी डायट भी लेते हैं और यह बहुत ही पॉज़ीटिव बदलाव है, क्योंकि फिटनेस ही अब हॉटनेस की नई परिभाषा.

सोशल साइट्स अब बन गई हैं शो ऑफ साइट्स…
लोगों का नया घर बन चुकी हैं ये सोशल साइट्स. क्या खा रहे हैं, क्या सोच रहे हैं, रिलेशनशिप स्टेटस क्या है, हॉलीडे प्लान्स, वीकेंड पार्टीज़… सब कुछ वो यहीं शेयर और पोस्ट करते हैं. घर के मेंमर्स अब फिज़िकली पास होकर भी वो सब नहीं जान पाते, जो सोशल साइट्स पर फ्रेंड बने दूर-दराज़ बसे लोग जान लेते हैं. लेकिन इसमें भी चौंकानेवाली बात यह है कि लोग यहां ईमानदार नहीं हैं, हर किसी का मक़सद स़िर्फ ‘दिखावा’ यानी ‘शो ऑफ’ ही होता है. भले ही निजी ज़िंदगी उतनी हैपनिंग न हो, लेकिन सोशल साट्स भी सबकी ज़िंदगी की एक अलग ही तस्वीर नज़र आती है. एक नक़लीपन होता है वहां, जिसे जानबूझकर हम हक़ीक़त समझकर ख़ुद को ख़ुश करने का बहाना बना लेते हैं. यह जितना रोमांचक है, उतना ही ख़तरनाक भी हो सकता है. लेकिन आज की लाइफस्टाइल का यह अभिन्न हिस्सा बन चुका है, जिससे फिल्हाल तो दूर-दूर तक निजात मिलना नामुमकिन ही लग रहा है.

इंस्टाग्राम पर फिटनेस का बोलबाला- इन सेलेब्स ने उड़ाए सबके होश…
जैसाकि हम पहले भी बता चुके हैं कि आज की लाइफस्टाइल में फिटनेस ही हॉटनेस की नई परिभाषा बन चुकी है, तो ऐसे में कई ऐसे सेलेब्स हैं, जो इन दिनों इंस्टाग्राम पर अपनी फिटनेस को लेकर ही काफ़ी हॉट टॉपिक बन चुके हैं. वो अक्सर अपने फिटनेस वीडियोज़ और डायट टिप्स व हेल्दी लाइफस्टाइल के पिक्चर्स शेयर करते रहते हैं. वो अपनी कॉन्टैक्ट डिटेल्स भी देते हैं यदि कोई उनसे पर्सनली फिटनेस ट्रेनिंग लेना चाहे तो. इनमें सेलेब्स में टॉप पर हैं- मंदिरा बेदी, भाग्यश्री, मिलिंद सोमन, विराट कोहली, शिल्पा शेट्टी, सुष्मिता सेन, जैकलिन फर्नांडिस, मलिका शेरावत, शीबा, करिश्मा तन्ना, जॉन अब्राहम, गौतम गुलाटी, प्रिंस नरुला आदि.

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इंडिया के टॉप फिटनेस इंस्टाग्रामर्स, जिन्हें ज़रूर करें फॉलो

आज के समय में अधिकतर लोग फिटनेस फ्रीक हैं, ऐसे में आप भी अगर फिटनेस में दिलचस्पी रखते हैं, तो इन इंस्टाग्रामर्स को ज़रूर फॉलो करें.

– रोहित खंडेलवाल: मिस्टर इंडिया 2016 रोहित को देखते ही आप उनकी फिटनेस लेवल को जान जाएंगे. फिट रहना न स़िर्फ उनके प्रोफेशन की डिमांड है, बल्कि उनका पैशन भी है.

– मिलिंद सोमन: इन्हें कौन नहीं जानता और फिटनेस के प्रति इनके पैशन से भी हम सभी वाक़िफ़ हैं. मिलिंद के लिए मानो उम्र रुक सी गई हो और वो आज हम सभी को इंस्पायर करते हैं.

– बानी: अपनी ख़ूबसूरती से लेकर बिंदास अंदाज़ के लिए बानी जानी जाती हैं, वहीं उनकी फिटनेस भी किसी से छिपी नहीं. बानी को उनके रफ-टफ अंदाज़ के लिए ही सभी पसंद करते हैं.

Fitness

– गौतम गुलाटी: बिग बॉस के विनर बनकर गौतम ने हर किसी का दिल जीत लिया था. शो के दौरान भी गौतम की फिटनेस और हॉट बॉडी सबकी चर्चा का विषय बनी रहती थी. मल्टी टैलेंटेड गौतम फिटनेस को लेकर काफ़ी गंभीर हैं और यही वजह है कि फिटनेस उनकी पहचान बन चुकी है.

Gautam Gulati

 

– नम्रता पुरोहित: नम्रता राष्ट्रीय स्तर की स्क्वैश प्लेयर थीं और स्टेट लेवल की फुटबॉल प्लेयर भी थीं, लेकिन एक बार घुड़सवारी के दौरान वो गिर गई थीं और उनके घुटने में गंभीर चोट आ गई थी, जिसके चलते उनकी सर्जरी तो हो गई, लेकिन उन्हें स्पोर्ट्स को करियर के तौर पर छोड़ना पड़ा. उनके पिता, जो एक सेलिब्रिटी फिटनेस एक्सपर्ट थे, उन्होंने नम्रता को पिलेट्स प्रैक्टिस करने की सलाह दी. उसके बाद नम्रता दुनिया की सबसे कम उम्र की सर्टिफाइड स्टॉट पिलेट्स इंस्ट्रक्टर बनीं. आज फिटनेस की दुनिया में वो एक जाना-माना नाम हैं.

– रेसलर संग्राम सिंह: कोई सोच भी नहीं सकता था कि आर्थराइटिस से पीड़ित कोई व्यक्ति अंतर्राष्ट्रीय स्तर का पहलवान बन सकता है, लेकिन संग्राम सिंह ने यह कर दिखाया. उन्होंने न स़िर्फ देश का नाम रौशन किया है, बल्कि वो मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं और फिटनेस के लिए लोगों को प्रेरित करते रहते हैं. बिग बॉस में भी संग्राम के देसी अंदाज़ को सभी ने पसंद किया था और रियल लाइफ में भी उनके फाइटिंग स्पिरिट के सभी कायल हैं.

Sangram Singh

– विनोद चन्ना: विनोद आज फिटनेस फील्ड का बहुत बड़ा नाम हैं. ये सेलिब्रिटी फिटनेस ट्रेनर हैं. बड़े-बड़े सेलेब्स इनके काम का लोहा मान चुके हैं. हालांकि विनोद के लिए यहां तक का सफ़र बेहद मुश्किलों भरा था. बचपन उन्होंने बेहद ग़रीबी देखी. शरीर से वो बहुत ही दुबले-पतले थे. उन्हें अक्सर लोग ‘सुकड़ा’ कहकर चिढ़ाते थे. इसी बात ने उन पर ऐसा असर डाला कि उन्होंने अपने शरीर पर ही काम करने का इरादा बना लिया, लेकिन पैसों की तंगी के कारण वो जिम नहीं जा सके. तब उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ ख़ुद काम करने की सोची. वो सैलेरी का छोटा-सा हिस्सा ही घर में देते थे, बाकी अपनी फिटनेस ट्रेनिंग पर ख़र्च करते थे. घरवाले उन पर तब नाराज़ होते थे, क्योंकि घर पर पैसों की ज़रूरत थी, लेकिन उनके अनुसार यदि मैं आज ख़ुद पर ध्यान देकर काबिल बन जाऊंगा, तब ही तो परिवार को भविष्य में बेहतर कुछ दे पाऊंगा… विनोद टॉप रेटेड फिटनेस ट्रेनर बनना चाहते थे और फिटनेस के प्रति उनके पैशन ने ही उन्हें वो सब कुछ दिया, जिसके सपने वो देखा करते थे. वो प्रोफेशनल बॉडी बिल्डर भी थे और कई प्रतियोगिताओं में विजेता भी बने.

– प्रशांत सावंत: इनकी इंस्टा आईडी से ही आपको इनके फिटनेस प्रेम का अंदाज़ा हो जाएगा. जी हां, प्रशांतसिक्सपैक नाम से है इनकी आईडी और ये भी बहुत बड़े सेलिब्रिटी फिटनेस ट्रेनर हैं. चाहे शाहरुख हों या आलिया, वरुण धवन, अजय देवगन और अभिषक बच्चन इनके क्लाइंट्स हैं. दहिसर के 10/10 के छोटे से कमरे में बड़े परिवार के साथ रहनेवाले प्रशांत इस मुक़ाम तक पहुंचेंगे यह किसी ने नहीं सोचा था. कॉलेज ड्रापआउट, जिन्हें परिवार के लोग भी गंभीरता से नहीं लेते थे, आज बादशाह ख़ान के फिटनेस ट्रेनर हैं. प्रशांत बचपन में बहुत मोटे थे, लेकिन वो हमेशा से अच्छा दिखना चाहते थे. जो चीज़ फैशन के लिए शुरू हुई, वो पैशन में बदल गई और उनके वर्क स्टाइल के बड़े-बड़े स्टार्स भी कायल हो गए.

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लाइफस्टाइल तो बदल रही है, पर क्या हम बदल रहे हैं… फिटनेस एथलीट श्‍वेता मेहता
रोडीज़ राइज़िंग 2017 की विनर श्‍वेता की स्टोरी आपको ज़रूर इंस्पायर करेगी. एक आईटी प्रोफेशनल से रोडीज़ तक का सफ़र आसान नहीं था श्‍वेता के लिए. वो फिटनेस और बिकनी एथलीट हैं. एशियन बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में भी वो भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. आज की बदलती लाइफस्टाइल और उसके इंपैक्ट के बारे में हमने ख़ुद श्‍वेता से बात की…

“आज से बस 3 साल पहले तक की बात है कि मुझे यह भी नहीं पता था कि जिम आख़िर होता क्या है. मैं पीठ दर्द से परेशान रहती थी. यह समस्या तब से थी, जब में 12वीं में पढ़ रही थी. स्पॉन्डिलाइटिस से जूझना वैसे भी आसान नहीं होता. पढ़ाई पूरी होने के बाद में जॉब करने लगी और मेरा 12 घंटे का डेस्क जॉब मेरे बैक पेन को और बढ़ा रहा था. मुझे एक्सरसाइज़ करने का समय ही नहीं मिलता था, लेकिन मेरे लिए यह ज़रूरी हो गया था कि सिक्योर फ्यूचर, जॉब, सैलरी के मायाजाल से बाहर निकलूं. मैंने हिम्मत की और आज रिज़ल्ट सबके सामने है. आज फिटनेस ही मेरी पहचान बन चुकी है. मैंने अपनी लाइफस्टाइल चेंज की और मुझे मेरे सपनों की लाइफ मिली. मैं फिटनेस एथलीट हूं, पिछले 3 सालों में 5-6 कॉम्पटीशन्स जीत चुकी हूं. मैं हरियाणा की हूं और मैंने कभी स्लीवलेस कपड़े तक नहीं पहने थे. मेरे पैरेंट्स को मेरी बिकनी की पिक्चर्स के लिए यहां तक सुनना पड़ता था कि क्या आपकी बेटी नाइट क्लब में काम करती है… लेकिन आज मैं कामयाब हूं, तो वही लोग मेरा सम्मान करते हैं. मेरा यही कहना है कि अपने सपनों को मत बदलो, कुछ ऐसा करो कि लोगों का नज़रिया बदले.  मेरी कामयाबी में बहुत बड़ा रोल मेरे पैरेंट्स के सपोर्ट का है और हेल्दी लाइफस्टाल का भी है और अब मैं इस लाइफस्टाइल को बदलना नहीं चाहती, जो भी चीज़ मेरी फिटनेस के आड़े आती है, मैं उसे करती ही नहीं. क्योंकि फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल से कोई समझौता नहीं करना है.

 

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हमारे यहां प्रॉब्लम यह है कि हम समय और परिस्थितियों के अनुसार न ख़ुद को ढालते हैं और न ही अपना डायट बदलते हैं. उदाहरण के तौर पर कोई कहता है कि भई हम तो पंजाबी हैं, हम तो तगड़ा ही खाते हैं, कोई कहता है हम गुजराती हैं, मीठा तो छोड़ नहीं सकते… इसी तरह से हम ट्रेडिशन के नाम पर वही डायट फॉलो करते हैं, जो हमारे दादाजी के समय में खाया जाता था. लेकिन यह भी तो सोचो कि वो समय अलग था, उनका काम अलग था. आज हम सभी डेस्क जॉब करते हैं, कहां से पचेगा तगड़ा खाना…? बेहतर होगा कि मीठा कंट्रोल करें, ऑयली फूड अवॉइड करें, एक्सरसाइज़ करें. ख़ुद की बॉडी से प्यार करें. तब जाकर आप हेल्दी बनोगे. कुछ चीज़ें हम सभी को पता होती हैं, लेकिन हम फॉलो नही करते, जैसे- पानी भरपूर पीएं, ऑयली-फैटी फूड कम खाएं, मीठा ज़्यादा न खाएं, प्रोटीन अधिक लें… आदि… लेकिन हम जानते हुए भी फॉलो नहीं करते. मैं बस हेल्दी चीज़ें लेती हूं और अनहेल्दी चीज़ें अवॉइड करती हूं, यही है डायट. मैं अपना खाना ख़ुद बनाती हूं. दिन में 6 बार खाती हूं, 2 बार जिम जाती हूं… मैं अपना ये रूटीन नहीं बदलती और इसीलिए फिट रहती हूं.”

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वीकेंड्स के बदलते रूल्स…
एक व़क्त था, जब वीकेंड्स को आराम करने में ही बिताया जाता था. सभी लोग ज़्यादातर घर पर ही रहना पसंद करते थे, ताकि हफ़्तेभर की थकान मिट सके, लेकिन अब थकान व स्ट्रेस भगाने के तरी़के बदल गए हैं. लोग बाहर घूमने जाते हैं. पूरी प्लानिंग करते हैं कि कैसे हर वीकेंड को वो यादगार बना सकें.

वर्क मोर, पार्टी हार्ड…
वर्क लोड हर जगह, हर क्षेत्र में बढ़ा है. ऐसे में ज़्यादा काम करना ज़रूरी भी है और मजबूरी भी, लेकिन इस वर्क लोड के बदले लोग ख़ुद को ख़ुश करने के रास्ते भी ढूंढ़ लेते हैं. यह ख़ुशी उन्हें मिलती है पार्टी करके. फ्रेंड्स के साथ पार्टी करने का एक भी मौका आजकल कोई नहीं छोड़ता, बल्कि लोग तो बहाने ढूंढ़ते हैं कि कब पार्टी करके अपने वर्क लोड के स्ट्रेस को दूर कर सकें, क्योंकि बदलती लाइफस्टाइल में स्ट्रस बस्टर्स भी बदल गए हैं. एक समय था, जब परिवार के साथ बैठकर खाना खाने व अपनी तकली़फें शेयर करने से तनाव दूर होता था, वहीं अब फ्रेंड्स के साथ पार्टी करके, एंजॉय करके स्ट्रेस दूर किया जाने लगा है.

Life

महंगे गैजेट्स बन गए हैं सबकी ज़रूरत…
भले ही आपकी सैलरी या घर की कंडीशन ऐसी न हो कि आप लैग्ज़री को अपनी लाइफस्टाइल बना सकें, लेकिन यह भी सच है कि जैसे-तैसे महंगे गैजेट्स आप ज़रूरी अफोर्ड या मैनेज कर लेते हैं, क्योंकि वो इस लाइफस्टाइल की ज़रूरत बन चुके हैं. पर्सनल काम ही नहीं, ऑफिशियल काम के लिए भी यह ज़रूरी हो गया है. बेसिक फोन्स अब आउटडेटेड हो गए हैं, स्मार्ट फोन्स ने लाइफ में जगह बना ली है. वाईफाई अब घर-घर की ज़रूरत है, डेटा कार्ड से लेकर नोट पैड तक सभी कुछ एक ही घर में अब देखने को मिलता है, क्योंकि बच्चों के स्कूल प्रोजेक्ट्स से लेकर घरवालों की शॉपिंग तक इन्हीं से होती है.

क्या शो ऑफ बनकर रह गई है ज़िंदगी…?
आज लोग ज़िंदगी जीने से कहीं ज़्यादा दिखावे में यकीन करने लगे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है सोशल नेटवर्किंग साइट्स, जो एक तरह से तो बहुत बड़ा ज़रिया है लोगों से जुड़ने का, लेकिन हमने इन्हें शो ऑफ की जगह बना डाला. यहां लोग अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ से ख़ुद को बहुत अलग दिखाने की होड़ में लगे रहते हैं. अपनी लाइफस्टाइल को बहुत ही हैपनिंग दिखाते हैं. इसके पीछे एक वजह यह भी होती है कि यहां लोगों का स्ट्रेस कम हो जाता है, कुछ पल के लिए भ्रम में रहकर ख़ुद को हल्का और पॉज़ीटिव महसूस करते हैं, लेकिन यह सही है कि अपने नए जूते-कपड़ों से लेकर लेटेस्ट गैजेट्स व कार तक की पिक्चर्स लोग यहां सबसे पहले शेयर करते हैं. घरवालों को भी पता नहीं होता है, लेकिन आप कहां पार्टी कर रहे हो और किन के साथ, यह आपके चेकइन्स से सोशल साइट्स पर सभी को पता चल जाता है.

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रिलेशनशिप स्टेटस- इसमें छुपाने की क्या बात है…
अब लोग हिचकते नहीं है, भले ही वो लिव इन में हों या एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर कर रहे हों, उन्हें लगता है कि इसमें छिपाने की क्या बात है. आख़िर हमारी लाइफ है, हमें चाहे जैसे जीएं. लोग क्या कहेंगे का डर अब लोगों के मन से काफ़ी हद तक निकल चुका है और यह अच्छी बात भी है, क्योंकि कम से कम नकली ज़िंदगी तो नहीं जीते. जो हैं, जैसे हैं, सबके सामने हैं.

ऑउटस्पोकन, आउटगोइंग बन गई है कॉन्फिडेंस और स्मार्टनेस की नई पहचान…
शर्म-संकोच आज के समय में दब्बूपन की निशानी मानी जाती है. ज़्यादा बोलना, खुलकर बोलना यह जताता है कि आप कॉन्फिडेंट और स्मार्ट हो. पहले कम बोलनेवाले और संकोची इंसान को लोग संस्कारी मानते थे, लेकिन बदलती लाइफस्टाइल ने संस्कारों के मायने भी बदल दिए हैं. अगर आप कम बोलते हैं, ज़्यादा शर्माते हैं, तो आपको पर्सनैलिटी डेवलेपमेंट क्लासेस जॉइन करने की सलाह भी मिलते देर नहीं लगेगी, क्योंकि आज के समय की ज़रूरत है कि आप शर्म-संकोच हटाकर बिंदास बनें. चाहे पर्सनल लाइफ हो या प्रोफेशनल, सभी जगह यही डिमांड है.

सेक्स पर बात करना अब संकोच या शर्म की बात नहीं
जैसे खाना-पीना-सोना, वैसे ही सेक्स, इसमें शर्माने की क्या बात है… जी हां, आजकल अधिकांश लोग यही मानते हैं. सेक्स अब प्राइवेसी का विषय नहीं रहा. लोग उस पर खुलकर बात भी करते हैं और इसे बुरा भी नहीं समझते. एक तरह से हम कह सकते हैं कि सेक्स को लेकर थोड़ी मैच्योरिटी और खुलापन तो आया है समाज में. लड़कियां भी इसे सहजता से लेती हैं. अपनी मूल ज़रूरत पर शर्माने की क्या बात है, ऐसा लोग मानने लगे हैं. लोग अब सेक्स को गंदा या बेशर्मी न मानकर स्वाभाविक व नैसर्गिक चीज़ समझने लगे हैं, यही वजह है कि अब वो खुलकर उस पर बात करते हैं. इसकी ज़रूरत भी है, ताकि सेक्सुअल डिसीज़ व सेक्स संबंधी अन्य मानसिक व शारीरिक समस्याओं का निवारण आसानी से हो सके. बच्चों को भी सेक्स एजुकेशन मे महत्व पर ज़ोर दिया जाने लगा है, ताकि वो भी यौन शोषण से बच सकें.

पीरियड्स पर अब खुलकर बोलते हैं…
इसी तरह से पीरिड्स पर भी बात करना, खुलकर चर्चा करने को लोग सहजता से लेने लगे हैं. यह एक प्राकृतिक क्रिया है, तो इसमें शर्मिंदगी या झिझक क्यों? ख़ुद लड़कियां व कई संस्थाएं भी आगे आकर सोशल साइट्स के ज़रिए अपने कैंपेन को चला रही हैं और लोगों में जागरूकता ला रही हैं. ऐसे में लाइफस्टाइल में आए कुछ नए बदलाव वाक़ई काबिले तारीफ़ हैं, जिससे समाज पहले के मुकाबले अधिक परिपक्व व सहज हो सकेगा.

– गीता शर्मा

त्रिफला के 5 चमत्कारी हेल्थ बेनीफिट्स (5 Health Benefits Of Triphala)

Health Benefits Of Triphala
Health Benefits Of Triphala
त्रिफला के 5 चमत्कारी हेल्थ बेनीफिट्स (5 Health Benefits Of Triphala)

आज के दौर में हर उम्र के व्यक्ति को जीवनशैली यानी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां होना आम बात है. बदलते फास्ट लाइफ और बदलते समय के साथ-साथ, हमारे खाने-पीने की आदतों में एक बड़ा बदलाव आया है, जिसने हमारे स्वास्थ्य को भी बुरी तरह प्रभावित किया है, ख़ासतौर से हमारे पाचन तंत्र पर इसका काफ़ी असर हुआ है. लेकिन अपने पाचन तंत्र को हेल्दी बनाए रखने का एक बेहद आसान तरीका है अपने डेली रुटीन में त्रिफला को शामिल करना.

त्रिफला सबसे प्रसिद्ध आयुर्वेदिक हर्बल उपचारों में से एक है. यह तीन फलों- आंवला, बहेड़ा और हरितकी का मिश्रण है. डॉ. हरिप्रसाद, अनुसंधान वैज्ञानिक, हिमालय ड्रग कंपनी आपको ऐसे पांच कारण बता रहा है, जिन्हें पढ़कर आपको लगेगा कि अपने दैनिक आहार में त्रिफला को क्यों शामिल करना चाहिए.

कब्ज़ से राहत: आयुर्वेद ग्रंथों और समकालीन शोध अध्ययनों में कहा गया है कि त्रिफला पेट को खाली करने की प्रक्रिया को तेज़ करता है और लंबे समय से बनी कब्ज़ से राहत देतीा है. त्रिफला के तीन हर्बल अवयवों में से प्रत्येक हमारे शरीर की देखभाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसकी जड़ी-बूटियां हमारे शरीर से आंतरिक कचरे को बाहर निकालकर सफाई करने में मदद करती है. साथ ही साथ, इससे पाचन में भी सुधार होता है.

जठरांत्र या गैस्ट्रो-इंटेस्टानल टिश्यूज़ को शांत और जीवंत करना: त्रिफला में मिले आंवला में शामक और प्रदाह शांत करनेवाले गुण होते हैं, जो आंतों के अंदरूनी परत को फिर से जीवंत करने में मदद करता है. यह आंतों की दीवारों को ठंडा और
शांत करता है, इससे पेट फूलने और डकार-उबकाई से राहत मिलती है.

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धीरे-धीरे नियमितता बनाए रखता है: त्रिफला चयापचय को उत्तेजित करने में मदद करता है और हमारे शरीर के पाचनतंत्र को आराम देता है. हर रात सोने से पहले एक छोटी-सी खुराक मल त्याग को विनियमित करने में मदद करती है.

शरीर को विषमुक्त करता है: आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार त्रिफला का चूर्ण शरीर से चयापचय और पाचन के बाद बचे व्यर्थ पदार्थों से शरीर को शुद्ध करके पेट और बड़ी आंत के विषमुक्त करता है.

प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट: त्रिफला में कई एंटीऑक्सीडेंट तत्व शामिल हैं, जिनमें गैलिक एसिड, फ्लेवोनॉइड्स और टैनिन प्रमुख हैं, ये शरीर में स्वाभाविक रूप से ऐसे मुक्त कणों को निशाना बनाता है, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने में

सक्षम होते हैं. तीन फलों से प्राप्त हुए सक्रिय तत्व एंटीऑक्सीडेंट के प्रभाव को बढ़ाते हैं और मल त्याग के लिए प्रेरित करते हैं.
तो त्रिफला का प्रयोग अब नियमित रूप से करें और अपनी संपूर्ण सेहत का ध्यान रखें, ताकि आनेवाला कल सेहतमंद बने.

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इन 10 तरीक़ों से शक्कर कर सकती है आपको बीमार (10 Reasons Why Too Much Sugar Is Bad For You)

Sugar Tips

इन 10 तरीक़ों से शक्कर कर सकती है आपको बीमार (10 Reasons Why Too Much Sugar Is Bad For You)

खाने में मिठास घोलनेवाली शक्कर (Sugar) की सच्चाई कितनी कड़वी है, इस बारे में शायद ही आपने कभी ध्यान दिया हो. शक्कर न स़िर्फ हमारी ज़िंदगी में पूरी तरह घुल-मिल गई है, बल्कि इसके साइड इफेक्ट्स (Side Effects) से हमारा स्वास्थ्य (Health) भी धीरे-धीरे घुल रहा है. रिफाइंड शक्कर का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल कर अनजाने में ही आप कई बीमारियों को न्योता दे रहे हैं. कौन-सी हैं वो बीमारियां और कितनी हानिकारक है शक्कर, आइए देखते हैं.

मैं शक्कर हूं!

सबसे पहले तो आपको बता दें कि शक्कर एक कार्बोहाइड्रेट है. मार्केट में मिलनेवाली शक्कर गन्ने या स़फेद चुकंदर से बनी प्रोसेस्ड व रिफाइंड शक्कर होती है, जिसमें कोई भी पोषक तत्व नहीं होते. यह हमारे शरीर में स़िर्फ कैलोरीज़ जमा करती है.

क्यों हानिकारक है शक्कर?

प्रोसेसिंग के दौरान शक्कर की चमक बढ़ाने के लिए उसमें सल्फर डाइऑक्साइड, फॉस्फोरिक एसिड, कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, एक्टिवेटेड कार्बन जैसे ख़तरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसके सारे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. यह पचने में भी इतनी हेवी होती है कि इसे पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है. यह हमारे शरीर में धीरे-धीरे फैट के रूप में जमा होती रहती है, जो किसी न किसी बीमारी के रूप में बाहर निकलती है. यही वजह है कि इसे ‘स्लो व्हाइट पॉयज़न’ भी कहते हैं.

कहां-कहां से मिलती है शक्कर?

मार्केट में मिलनेवाली रिफाइंड शक्कर के अलावा कई और प्राकृतिक स्रोतों से भी हमें शक्कर मिलती है.

ग्लूकोज़: यह फलों और पौधों में पाया जाता है, जो फोटोसिंथेसिस के कारण बनता है. ज़रूरत पड़ने पर हमारा शरीर भी ग्लूकोज़ बनाता है.

फ्रूक्टोज़: यह फ्रूट शुगर होता है, जो फलों से मिलता है. यह गन्ने और शहद में पाया जाता है.

सुक्रोज़: यह गन्ना, स़फेद चुकंदर और कुछ ग्लूकोज़ के साथ कुछ फलों व सब्ज़ियों में भी पाया जाता है.

लैक्टोज़: दूध से मिलनेवाली इस शक्कर को हम मिल्क शुगर भी कहते हैं.

क्या होता है जब हम खाते हैं शक्कर?

जब हम किसी भी फॉर्म में शक्कर खाते हैं, तो हमारे शरीर के पास उसके लिए दो ऑप्शन्स होते हैं-

  1. उन कैलोरीज़ को बर्न करके एनर्जी में कनवर्ट करना.
  2. कार्बोहाइड्रेट्स को फैट में बदलकर फैट सेल्स में जमा करना.

हमारी बॉडी की एक्टिविटी इस बात पर निर्भर करती है कि उस दिन हमारे शरीर में कितनी शक्कर गई है. अगर शक्कर सही मात्रा में है, तो वो एनर्जी में कन्वर्ट होगी, लेकिन अगर ज़रूरत से ज़्यादा है, तो बॉडी फैट में बदल जाएगी.

कितनी शक्कर की होती है ज़रूरत?

वैसे तो हमें फलों और सब्ज़ियों से ज़रूरत के मुताबिक़ शक्कर मिल जाती है, लेकिन अगर आप रोज़ाना फल, सब्ज़ी और दूध नहीं लेते, तो अपने खाने में निम्नलिखित मात्रा से ज़्यादा शक्कर न लें.

पुरुष: रोज़ाना 9 टीस्पून या लगभग

37.5 ग्राम (150 कैलोरीज़)

महिला: रोज़ाना 6 टीस्पून या लगभग

25 ग्राम (100 कैलोरीज़)

रोज़ाना हमारे शरीर को लगभग 2000 कैलोरीज़ की ज़रूरत होती है, जिनमें से शक्कर का हिस्सा इतना ही है, लेकिन अगर आप इससे ज़्यादा शक्कर लेंगे, तो वो एक्स्ट्रा कैलोरीज़ आपको ही नुक़सान पहुंचाएंगी.

किस तरह बना सकती है रोगी?

शक्कर हमारे शरीर को कई तरह से प्रभावित करती है. किसी विशेष अंग को प्रभावित करने के साथ-साथ यह कई शारीरिक क्रियाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है.

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Sugar Control

  1. वज़न बढ़ाकर दे सकती है मोटापा

आजकल हम जो भी पैक्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड और शुगरी ड्रिंक्स ले रहे हैं, उनमें भारी मात्रा में शक्कर होती है. इन प्रोडक्ट्स में आमतौर पर फ्रूक्टोज़ का इस्तेमाल किया जाता है, जो शक्कर की क्रेविंग्स को और बढ़ा देता है. जो लोग सॉफ्ट ड्रिंक्स, सोडा और पैक्ड फ्रूट जूसेज़ पीते हैं, उनका वज़न बाकी लोगों के मुक़ाबले तेज़ी से बढ़ता है.

  1. प्रभावित करती है इंसुलिन की प्रक्रिया

ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए हमारा शरीर इंसुलिन रिलीज़ करता रहता है, लेकिन जब हम ज़रूरत से ज़्यादा शक्करवाली चीज़ें

खाने-पीने लगते हैं, तब शरीर को बहुत ज़्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है, जिससे इंसुलिन प्रोडक्शन का पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है और शरीर इंसुलिन की ज़रूरत को पूरा नहीं कर पाता. इससे टाइप 2 डायबिटीज़, हार्ट डिसीज़ और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी बीमारियां जन्म लेती हैं.

  1. बढ़ा सकती है हार्ट डिसीज़ का ख़तरा

शक्कर के ओवरडोज़ से कई बीमारियां हो सकती हैं, उन्हीं में से एक है, हार्ट प्रॉब्लम्स, जो पूरी दुनिया में इस समय मौत का सबसे बड़ा कारण बन गया है. रिसर्च में यह बात साबित हो गई है कि ज़्यादा शक्कर के सेवन से ओबेसिटी,

इंफ्लेमेशन, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर हो सकता है. ये सभी हार्ट प्रॉब्लम्स के रिस्क फैक्टर्स हैं.

  1. बढ़ाती है कैंसर के रिस्क फैक्टर्स

मोटापा और इंसुलिन की कमी दोनों ही फैक्टर्स कैंसर को ट्रिगर कर सकते हैं. एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो महिलाएं हफ़्ते में तीन बार या उससे ज़्यादा कुकीज़ और बिस्किट्स खाती हैं, उनमें इंडोमेट्रियल कैंसर का ख़तरा बाकी महिलाओं के मुक़ाबले डेढ़ गुना ज़्यादा बढ़ जाता है.

  1. फंसा सकती है एनर्जी ड्रेनिंग साइकल में

अगर कमज़ोरी महसूस कर रहे हों, तो कुछ मीठा खा लें, एनर्जी तुरंत बूस्ट हो जाती है, पर क्या आप जानते हैं कि अगर शक्कर के साथ प्रोटीन, फाइबर या फैट नहीं हो, तो वो एनर्जी टिक नहीं पाती और तुरंत नष्ट हो जाती है. जितनी तेज़ी से एनर्जी लेवल बढ़ता है, उसी तेज़ी से घट जाएगा, जिससे आप दोबारा विकनेस फील करेंगे. इस एनर्जी ड्रेनिंग साइकल से बचना चाहते हैं, तो स़िर्फ शक्करवाली चीज़ें लेना अवॉइड करें. आप लो फील कर रहे हैं, तो कोई शुगरी ड्रिंक पीने की बजाय सेब के साथ कुछ बादाम खा लें.

  1. दे सकती है आपको फैटी लिवर

लंबे समय तक हाई फ्रूक्टोज़ डायट के इस्तेमाल से फैटी लिवर का ख़तरा बढ़ जाता है. ग्लूकोज़ और अन्य तरह की शक्कर शरीर के अन्य सेल्स में घुल जाती हैं, पर फ्रूक्टोज़ स़िर्फ और स़िर्फ लिवर में घुलती है. लिवर उसे एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करता है, लेकिन जब ज़रूरत से ज़्यादा फ्रूक्टोज़ लिवर में आने लगता है, तो वह फैट में बदलने लगता है, जिससे धीरे-धीरे लिवर फैटी होने लगता है.

  1. बढ़ने लगती हैं दांतों की बीमारियां

पिछले कुछ सालों में दांतों की बीमारियां तेज़ी से बढ़ी हैं, क्योंकि हमारे

खान-पान में शक्कर की मात्रा तेज़ी से बढ़ी है. हमारे मुंह में बहुत से हेल्दी व अनहेल्दी बैक्टीरिया रहते हैं. शक्कर एक ऐसी चीज़ है, जिसके कारण अनहेल्दी बैक्टीरिया तेज़ी से बढ़ते हैं और हमें दांतों की समस्याएं होने लगती हैं. शक्कर के कारण दांतों पर एसिड अटैक्स ज़्यादा होते हैं, जो कैविटी का मुख्य कारण बनते हैं.

  1. बढ़ाती है यूरिक एसिड की मात्रा

यूरिक एसिड बनने का मुख्य कारण फ्रूक्टोज़ है. जब शरीर में फ्रूक्टोज़ का लेवल बढ़ जाता है, तो शरीर उसे यूरिक एसिड के रूप में बाहर निकालने लगता है, जिससे हार्ट और किडनी प्रॉब्लम्स शुरू हो जाती हैं.

  1. शुगर एडिक्शन को बढ़ाती है

क्या आप जानते हैं कि शक्कर किसी ड्रग एडिक्शन से कम नहीं है? जी हां, यह हम नहीं बल्कि रिसर्चर्स कहते हैं. उनके मुताबिक़, जब हम शक्करवाली चीज़ें खाते हैं, तो हमारे ब्रेन से डोपामाइन नामक हार्मोन रिलीज़ होता है, जो हमें और शक्कर खाने के लिए उकसाता है और न चाहते हुए भी हम शक्कर का ओवरडोज़ ले लेते हैं.

  1. कम उम्र में बना सकती है अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार

हमारा खानपान हमारे ब्रेन के स्ट्रक्चर और फंक्शनिंग को प्रभावित करता है. रिसर्चर्स के मुताबिक़, ज़रूरत से ज़्यादा शक्कर ब्रेन की उस फंक्शनिंग को प्रभावित करती है, जो हमारी मेमोरी को कंट्रोल करती है. लगातार शक्कर का ओवरडोज़ बहुत कम उम्र में आपको अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार बना सकता है.

क्या हैं शक्कर के हेल्दी विकल्प?

ऑर्गैनिक शहद: इसकी एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज़ के कारण यह बेस्ट स्वीटनर माना जाता है. यह शक्कर से ज़्यादा मीठा होता है, इसलिए कम क्वांटिटी में इस्तेमाल होता है.

गुड़: इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने, आयरन लेवल को बढ़ाने, लिवर को डिटॉक्सिफाई करने के साथ-साथ यह सर्दी-खांसी में भी आपको राहत दिलाता है. जहां भी आपको शक्कर की ज़रूरत पड़ती हो, वहां गुड़ का इस्तेमाल करें.

खजूर: खजूर का इस्तेमाल आप हलवा, खीर जैसे डेज़र्ट्स और मिठाइयां बनाने के लिए कर सकते हैं. शक्कर की बजाय खजूर और काजू पाउडर आदि इस्तेमाल कर सकते हैं. ब्राउन शुगर की बजाय आप डेट शुगर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

अनरिफाइंड शुगर: इसे रिफाइंड नहीं किया जाता, जिससे आयरन और मैग्नीशियम जैसे प्राकृतिक तत्व बने रहते हैं. देखने में यह भूरे रंग का होता है, जिसका स्वाद शहद जैसा होता है. रिफाइन्ड शक्कर की जगह इसका इस्तेमाल करें.

कोकोनट या पाम शुगर: यह एक बेहतरीन नेचुरल स्वीटनर है, क्योंकि इसे प्रोसेस करने के लिए किसी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता. रोज़ाना की कुकिंग में इसे शामिल करें. चाय में डालकर आप रिफाइंड शक्कर से बच सकते हैं.

– अनीता सिंह

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मॉनसून में फिटनेस के लिए इंडोर एक्टिविटीज़ (Fitness Special: Indoor Activities For Monsoon)

Fitness Special
मॉनसून में फिटनेस के लिए इंडोर एक्टिविटीज़ (Fitness Special: Indoor Activities For Monsoon)

ख़ुद को फिट रखना आपका पैशन है, लेकिन बारिश की वजह से आप जिम नहीं जा पा रहे हैं. कोई बात नहीं, इंडोर एक्टिविटीज़ करके भी आप फिट रह सकते हैं. ट्रेडमिल, स्किपिंग, सूर्य नमस्कार, ऐरोबिक्स आदि बहुत सारी इंडोर एक्टिविटीज़ हैं, जिनके लिए किसी इक्विपमेंट की ज़रूरत नहीं होती और न ही जिम जाने की.

सूर्य नमस्कार
यह अपने आप में कंप्लीट एक्सरसाइज़ है. सूर्य नमस्कार करने के बाद अन्य वर्कआउट करने की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि इसमें इतने सारे स्टेप्स होते हैं, जिनसे पूरी बॉडी स्ट्रेच होती है और बॉडी भी शेप में रहती है. यदि आप भी मॉनसून में फिट एंड फाइन रहना चाहते हैं, तो प्रतिदिन कम से कम 20 बार सूर्य नमस्कार करें. धीरे-धीरे अपने स्टैमिना के अनुसार सूर्य नमस्कार का समय बढ़ाएं.

ब्रिस्क वॉक
मॉनसून में अगर वर्कआउट करने का मूड नहीं है, तो कोई बात नहीं. कान में ईयर फोन लगाकर म्यूज़िक सुनते हुए आप घर के अंदर ही 15-20 मिनट की ब्रिस्क वॉक कर सकते हैं.

स्किपिंग
मॉनसून में स्किपिंग करके भी आप फिट रह सकते हैं. फिटनेस एक्सपर्ट्स का मानना है कि रोज़ाना 20 मिनट स्किपिंग करने से 700 कैलोरीज़ बर्न होती है. हड्डियां व जोड़ मज़बूत होते हैं और मांसपेशियां लचीली बनती हैं.

पुशअप्स एंड प्लैंक्स
पुशअप और प्लैंक्स करने के लिए किसी इक्विपमेंट की ज़रूरत नहीं होती. इसे करने से पीठ, पेट और पैर मज़बूत होते हैं, साथ ही फिज़िकल स्टैमिना बढ़ता है. मॉनसून में अगर फिट रहना चाहते हैं, तो प्रतिदिन कम से कम 20 पुशअप एंड प्लैंक्स करें. धीरे-धीरे अपने स्टैमिना के अनुसार बढ़ाते जाएं.

ट्रेडमिल
मॉनसून वर्कआउट के बारे में सोचते ही सबसे पहला नाम ट्रेडमिल का आता है. ट्रेडमिल पर रोज़ाना 15 मिनट से 45 मिनट तक चल सकते हैं. इसके अलावा ट्रेडमिल पर आप ब्रिस्क वॉक और जॉगिंग भी कर सकते हैं.

इंडोर साइकिलिंग
पार्क जैसी खुली हवादार जगह पर साइकिलिंग करने का मज़ा ही अलग है, लेकिन बारिश में साइकिलिंग करना थोड़ा ख़तरनाक हो सकता है, पर परेशान होने की ज़रूरत नहीं है. टे्रडमिल की तरह इंडोर साइकिलिंग करके भी आप मॉनसून में एक्टिव रह सकते हैं.

होम कार्डियो वर्कआउट
जिम जाने का मूड नहीं, तो होम कार्डियो वर्कआउट करें. इस वर्कआउट की शुरुआत क्विक वॉर्मअप सेशन से करें, फिर जंपिंग जैक, डंबल्स, बाईसेप्स कर्ल, ट्राईसेप्स कर्ल, स्कवैट्स और माउंटेन क्लाइंबर भी ट्राई कर सकते हैं. इन एक्सरसाइज़ को प्रतिदिन 30 मिनट करने से बांहें और पैर मज़बूत होते हैं.

डांस
इंडोर मॉनसून वर्कआउट को एंजॉय करने का बेस्ट तरीक़ा है डांस. वर्कआउट के लिए ऐसे सॉन्ग का सिलेक्शन करें, जो हाई एनर्जीवाले हों. इन हाई एनर्जीवाले सॉन्ग पर आप सोलो डांस भी कर सकते हैं और पार्टनर के साथ भी. डांस करने से एक्स्ट्रा कैलोरीज़ बर्न होती है और मांसपेशियां भी स्ट्रेच होती हैं.

ऐरोबिक्स
ऐरोबिक्स करने का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि आप जिम गए बिना अपना वज़न कम कर सकते हैं और अपने को फिट रख सकते हैं. इस इंडोर एक्टिविटी को करने से मसल्स टोन्ड होती हैं और आप ख़ुद को भी एक्टिव महसूस करते हैं.

योगा
बारिश के कारण अगर जिम नहीं जा पा रहे हैं, तो आप योगा करके ख़ुद को फिट रख सकते हैं. क्या आप जानते हैं कि रोज़ाना 45 मिनट योगा करने से 700 कैलोरीज़ बर्न होती हैं. इसे करने से बॉडी में फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है, इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होती है और श्‍वसन तंत्र में होनेवाली समस्याएं दूर होती हैं, जो मॉनसून में होना आम बात है.

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Indoor Fitness

हाउसहोल्ड एक्टिविटीज़
मॉनसून में हाउसहोल्ड एक्टिविटीज़ करके आप एक्टिव रह सकते हैं. शेल्फ्स और अलमारियां साफ़ करें, मशीन की जगह हाथों से कपड़े धोएं, पोछा लगाएं आदि. इन एक्टिविटीज़ से आप फिट भी रहेंगे और धीरे-धीरे आपका घर भी क्लीन हो जाएगा.

सीढ़ियां चढ़ना-उतरना
बारिश के मौसम में वॉकिंग या जॉगिंग करना संभव नहीं है, तो रोज़ाना 20 मिनट तक सीढ़ियां चढ़ें और उतरें. इस मौसम में एक्स्ट्रा कैलोरीज़ बर्न करने के लिए यह बेस्ट वर्कआउट है. फिटनेस एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आप रोज़ाना 15 मिनट भी सीढ़ियां चढ़ते-उतरते हैं, तो आपका 80% तक वर्कआउट होता है. यह ट्रेडमिल पर चलने जैसा ही वर्कआउट है. अगर आपके पास ट्रेडमिल नहीं है, तो ख़रीदने की बजाय सीढ़ियां चढ़ें-उतरें. सीढ़ियां चढ़ने व उतरने से न केवल मांसपेशियां लचीली होती हैं, बल्कि मेटाबॉलिक रेट भी बढ़ता है.

स्पोर्ट्स
अगर आपके घर के आसपास कोई क्लब हाउस या जिम है, तो वहां जाकर इंडोर गेम्स भी खेल सकते हैं, जैसे- बैडमिंटन, टेबल टेनिस, स्न्वैश आदि. स्पोर्ट्स बॉडी में एकत्रित फैट्स को कम करने और ख़ुद को एनर्जेटिक रखने का बेस्ट ऑप्शन है.

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Home Fitness

बच्चों के लिए बेस्ट इंडोर एक्टिविटीज़
आर्ट एंड क्राफ्ट: इसमें बच्चों को कलरफुल क्राफ्ट पेपर की मदद से फ्लावर मेकिंग, ग्रीटिंग कॉर्ड आदि बनाना सिखा सकते हैं.
कार्ड और बोर्ड गेम्स: इन गेम्स में बच्चों को फ्रूट्स, वेजीटेबल्स, अल्फाबेट्स, एनीमल कार्ड को अलग-अलग शेप्स और डिज़ाइन में अरेंज करना सिखा सकते हैं.

फन गेम्स: चेस, कैरम, पज़ल्स, लूडो, मैकेनिकल गेम्स आदि.

मूवी टाइम: बच्चों को एनिमेटेड 3डी/4डी मूवी दिखा सकते हैं. उनके मूवी टाइम को फन टाइम बनाने के लिए स्नैक्स का अरेंजमेंट ज़रूर करें.

इंडोर गार्डनिंग: इसमें बच्चे बैंगन, टमाटर, लहसुन, प्याज़ और हरे धनिया को छोटे गमलों में उगा सकते हैं. ये पौधे मॉनसून के लिए परफेक्ट प्लान्ट्स हैं, क्योंकि इन्हें अधिक सनलाइट की आवश्यकता नहीं होती.

स्टोरी टाइम: बच्चों के लिए ऐसा स्टोरी टाइम प्लान करें, जिसे वे एंजॉय कर सकें. बड़े बच्चों को स्टोरी बुक पढ़ने के लिए कहें और छोटे बच्चों को पिक्चर बुक्स और बोर्ड बुक्स दिखाकर स्टोरी सुनाएं.

पार्टी टाइम: बिना किसी कारण के बच्चों और उनके दोस्तों के लिए इनहाउस पार्टी प्लान करें, जैसे- गुड़िया का बर्थडे, उसकी शादी, पप्पी का बर्थडे. डांस और यम्मी स्नैक्स के साथ उनकी पार्टी को सफल बनाएं.

असिस्टेंट बनाएं: बच्चों को कुकिंग, क्लीनिंग, डस्टिंग में मदद करने के लिए प्रेरित करें. रिवॉर्ड के तौर पर उन्हें मूवी दिखाएं, फेवरेट गेम और फेवरेट ट्रीट दें.

कुकिंग एंड बेकिंग: इसमें बच्चों को सलाद, सैंडविच, कपकेक बनाना सिखा सकते हैं.

– पूनम कोठारी

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