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सोरायसिस से पीड़ित हैं! यात्रा के दौरान रखें इन बातों का ख्‍याल (Travel Guide: Easy Tips For Traveling With Psoriasis)

Psoriasis

सोरायसिस से पीड़ित हैं! यात्रा के दौरान रखें इन बातों का ख्‍याल (Travel Guide: Easy Tips For Traveling With Psoriasis)

हरी-भरी वादियों, बर्फ से ढंके पहाड़ों और सूरज की रोशनी से भरपूर, सुनहरे समुद्रतटों पर जाने का मजा ही कुछ और है, लेकिन यदि आपको सोरायसिस हो तो? ऐसे लोगों को यात्रा करने के दौरान असहजता हो सकती है. यदि वे मामूली से लेकर गंभीर प्रकार के सोरायसिस से ग्रस्‍त हैं. खासकर लंबी यात्रा में.सोरायसिस एक स्व-प्रतिरक्षित रोग है, जिसमें त्वचा की नई कोशिकाएं सामान्य की तुलना में अधिक तेजी से विकसित होती हैं.

आमतौर पर हमारा शरीर पुरानी कोशिकाओं की जगह भरने के लिये प्रत्येक 10 से 30 दिन में त्वचा की नई कोशिकाएं बनाता है. सोरायसिस में त्वचा की नई कोशिकाएं 3 से 4 दिन में ही बन जाती हैं और शरीर को पुरानी कोशिकाएं हटाने का समय नहीं मिलता है. इससे त्वचा की सतह पर परत आ जाती है और त्वचा शुष्क, खुजली वाली, पपड़ीदार दिखाई देने लगती है और उस पर लाल चकत्ते या चमकीली परत आ जाती है.

सोरायसिस से पीड़ित लोगों को यदि बिना किसी परेशानी के एक आरामदायक यात्रा का आनंद उठाना है तो उन्‍हें बस पहले से योजना बनाना जरूरी है. चिकित्सा विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि सोरायसिस से पीड़ित लोगों के लिये यात्रा सम्बंधी कोई विशेष मनाही नहीं हैं, उनके लिए हल्की धूप वाला मौसम ठंडे और शुष्क मौसम की तुलना में बेहतर रहता है.  डॉ. शेहनाज़ अरसीवाला, त्वचा रोग विशेषज्ञ, सैफी हॉस्पिटल एवं प्रिंस अली खान हॉस्पिटल और मेडिकल डायरेक्टर, रीन्यूडर्म सेंटर स्किन हेयर लेजर्स एंड एस्थेटिक्स सोरायसिस से पीड़ित लोगों के लिये यात्रा सम्बंधी कुछ उपयोगी टिप्स दे रही हैं, जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए.

 

  1. सबसे पहले योजना बनाएं : चाहे आप छोटी यात्रा पर जा रहे हों या फिर लंबे समय के लिए, आपको दो सप्ताह पहले से तैयारी आरम्‍भ कर देनी चाहिए. ठहरने के दौरान की गतिविधियों को निश्चित करना और यात्रा के लिये आवश्यक चीजों को रखना अच्छा होता है. इन चीजों में आपकी दवाएं भी शामिल हैं और वे आपके सामान में सरलता से शामिल होनी चाहिए. यात्रा के दौरान अपनी भोजन सम्बंधी आदतों का नियमित ध्यान रखें और शराब से बचें. इस बारे में आपके त्वचा रोग विशेषज्ञ बेहतर सलाह दे सकते हैं. तनाव से सोरियासिस की पीड़ा बढ़ जाती है, इसलिये अपने यात्राक्रम की पहले से योजना बनाकर आप अंतिम मिनट की परेशानियों से बच सकते हैं. सोरियासिस के रोगियों को यात्रा पर जाने से पहले खूब आराम करने और अपनी त्वचा को अधिक से अधिक नम रखने की सलाह भी दी जाती है.

 

  1. अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास अवश्य जाएं: छुट्टियों पर जाने से पहले यह सुनिश्चित करना अच्छा होता है कि आपकी त्वचा की स्थिति अच्छी हो, इसलिए यात्रा की योजना बनाने से पहले अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास जाना महत्वपूर्ण है. सुनिश्चित करें कि आपकी दवाओं के सभी पर्चे व्यवस्थित हों और लिखित पर्चों की प्रति भी मांगें, ताकि यात्रा के समय जरूरत पड़ने पर वे काम आ सकें. यदि आपको बायोलॉजिक्स के इंजेक्शन लगते हैं, तो इसके बारे में अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ से पूरी जानकारी प्राप्‍त कर लें. इस जानकारी में वह महत्वपूर्ण वर्णन भी होना चाहिये, जो आपकी यात्रा के स्थान पर वहाँ के त्वचा रोग विशेषज्ञ से मदद लेने में काम आ सके.

 

  1. पैकिंग सावधानी से करें और जरूरी सामान व्‍यवस्थित रखें : आपके गंतव्य के लिये उपयुक्त कपड़े, जूते और अन्य चीजें रखें. उदाहरण के लिए यदि आप गर्म, आर्द्र क्षेत्र में जा रहे हैं, तो हल्के, ढीले, पसीने को बाहर निकालने वाले कपड़े रखें. यदि आप ठंडे स्थान पर जा रहे हैं, तो टोपी, दस्ताने और स्कार्फ रखें, ताकि आपकी त्वचा सुरक्षित रहे. त्वचा रोग विशेषज्ञ द्वारा बताए गए मेडिकैटेड शैम्पू, मॉइश्चराइजर और साबुन या क्लींजर रखें और उनके द्वारा बताया गया सनस्क्रीन ले जाना कतई न भूलें. यात्रा के समय दवाएं लेना न भूलें. किसी भी तरह के दर्द से बचने के लिये अच्छी नींद लें.

 

  1. संक्रमण के जोखिम से बचें: कुछ प्रकार के संक्रमण सोरियासिस की पीड़ा बढ़ा सकते हैं. अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ के निर्देशानुसार उपचार के क्रम में रक्त की आवश्यक जांचें करवाएं. इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपको संक्रमण का जोखिम नहीं है. यात्रा के दौरान स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करें और वायरल संक्रमण वाले व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें. स्वच्छ रहने के लिए अपने हाथ धोएं और त्वचा रोग विशेषज्ञ द्वारा बताए गए सैनिटाइजर का उपयोग करें. शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा होना भी बहुत जरूरी है.

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ब्लड डोनेशन से जुड़े मिथ्स…! (Myths About Blood Donation)

Myths About Blood Donation

ब्लड डोनेशन से जुड़े मिथ्स…! (Myths About Blood Donation)

रक्तदान को जीवनदान कहा जाता है, लेकिन आज भी इसे लेकर लोग बहुत उत्साहित नज़र नहीं आते, कारण- रक्तदान को लेकर बहुत-सी ग़लतफ़हमियां आज भी बनी हुई हैं. क्या हैं वो ग़लतफ़हमियां यह जानना ज़रूरी है, ताकि लोगों के मन से भ्रांतियां दूर हों और रक्तदान को लेकर वो अधिक उत्साहित हों.

1. रक्तदान आपको कमज़ोर बनाता है.
अक्सर लोग सोचते हैं कि रक्तदान करने के बाद उनमें कमज़ोरी आ जाएगी और उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाएगी.
लेकिन यह सोच ग़लत है. रक्तदान के बाद कुछ ही दिनों में रेड ब्लड सेल्स यानी लाल रक्त कण सामान्य संख्या में पहुंच जाते हैं. व्हाइट ब्लड सेल्स को थोड़ा ज़्यादा समय लगता है, लेकिन यदि शरीर को यह सिग्नल मिले कि वो ख़तरे में है, तो यह प्रक्रिया और भी तेज़ हो जाती है.

2. रक्तदान की प्रक्रिया काफ़ी तकलीफ़देह व दर्दनाक होती है.
जी नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. स़िर्फ सुई चुभनेभर का दर्द ज़रूर होता है, लेकिन रक्तदान के बाद आपके हाथ का वह भाग एक-दो दिन में ही सामान्य हो जाता है, जहां से सुई भीतर जाती है.

3. महिलाओं को ब्लड डोनेशन नहीं करना चाहिए.
अक्सर लोगों की यह धारणा होती है कि महिलाएं मासिक स्राव से गुज़रती हैं, इसलिए उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए. कुछ लोग यह भी मानते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर कम होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से दूर रहना चाहिए, वरना वे अधिक कमज़ोर हो सकती हैं. हक़ीक़त यह है कि रक्तदान का लिंग से कोई लेना-देना नहीं होता. जिस तरह से पुरुषों पर रक्तदान असर करता है, महिलाओं को भी उसी तरह प्रभावित करता है. महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर प्राकृतिक रूप से कम ही होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से कोई कमज़ोरी नहीं होगी. हां, यदि वे गर्भवती हों, स्तनपान करा रही हों, किसी बीमारी या समस्या के चलते वे एनिमिक हों, तो उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए.

4. रक्तदान करनेवाले को जानलेवा इंफेक्शन्स का ख़तरा अधिक होता है.
रक्तदान के समय संक्रमण का डर भी बड़ी वजह है लोगों को रक्तदान से रोकने की. लेकिन रक्तदान के समय नई सुई का ही इस्तेमाल होता है और आप स्वयं भी जागरूक रहेंगे, तो ऐसा कोई ख़तरा नहीं होगा, इसलिए बेझिझक रक्तदान करें.

5. रक्तदान के बाद एक-दो दिन का आराम ज़रूरी होता है.
ऐसा कोई नियम नहीं है और न ही इसकी ज़रूरत है. आप रक्तदान के फ़ौरन बाद ही अपने काम पर लौट सकते हैं, बशर्ते आपने रक्तदान के बाद भरपूर पानी या जूस वगैरह पिया हो, ताकि शरीर में पानी की आपूर्ति हो जाए. हां, रक्तदान के बाद 24 घंटों तक अल्कोहल व तेज़ धूप से बचना चाहिए.

6. अगर आप स्मोक करते हैं, तो आप रक्तदान नहीं कर सकते.
भले ही आप स्मोकर हों, पर आप ब्लड डोनेट कर सकते हैं. हां, ब्लड डोनेशन के बाद तीन घंटे तक स्मोक न करें और डोनेशन से एक दिन पहले शराब का सेवन भी न करें.

7. रक्तदान बहुत ही समय लेनेवाली प्रक्रिया है.
ब्लड डोनेशन में 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लगता है, जिसमें ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया मात्र 10-12 मिनट की ही होती है, लेकिन फॉर्म भरना और डोनेशन के बाद रिफ्रेशमेंट वगैरह मिलाकर 45 मिनट से एक घंटे तक का ही समय लगता है.

8. दुबले-पतले लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
आपका वज़न 50 किलो से अधिक हो और आपकी आयु 18 वर्ष या अधिक हो, तो आप रक्तदान कर सकते हैं.

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Blood Donation Myths

9. उच्च रक्तचापवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. यदि आपका रक्तचाप 180 और 100 है, तो भी आप रक्तदान कर सकते हैं. यह रक्तचाप हालांकि अधिक है, लेकिन यह आपको रक्तदान से नहीं रोक सकता. यहां तक कि रक्तचाप की दवाइयां भी इस प्रक्रिया में अवरोध नहीं बनतीं.

10. डायबिटीज़ से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
अगर आप इंसुलिन जैसे सप्लीमेंट्स लेते हैं, तो ही रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन यदि आप पिल्स लेते हैं और लाइफस्टाइल के ज़रिए डायबिटीज़ नियंत्रित करते हैं, तो आप रक्तदान ज़रूर कर सकते हैं. जिन्हें हृदय रोग हों और जो टाइप 2 डायबिटीज़ की वजह से ब्लड प्रेशर से ग्रसित हों, वे किन्हीं असाधारण परिस्थितियों में रक्तदान न कर पाएं, लेकिन बाक़ी कोई वजह नहीं जो आपको रक्तदान से रोके.

11. रक्तदान के बाद स्पोर्ट्स या फिज़िकल एक्टीविटीज़ नहीं कर सकते.
यह मात्र एक भ्रांति है. रक्तदान के एक घंटे बाद ही आपकी ज़िंदगी पूरी तरह से सामान्य हो जाती है. यदि आप खेल-कूद के शौकीन हैं या किसी स्पोर्ट्स एक्टीविटी में हिस्सा लेना चाहते हैं, तो जिस दिन ब्लड डोनेट किया, उसी दिन आप हिस्सा ले सकते हैं या मनपसंद खेल खेल सकते हैं.

12. दवा खानेवाला व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सकता.
आमतौर पर लोगों की यही धारणा होती है कि यदि आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन सच तो यह है कि अधिकांश दवाएं आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. अगर आप सर्दी-ज़ुकाम की दवा, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स, विटामिन या न्यूट्रिएंट सप्लीमेंट, पेनकिलर, पैरासिटामॉल, एंटैसिड या एंटी एलर्जिक दवाएं ले रहे हैं, तो आप रक्तदान कर सकते हैं. हां, अगर आप एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रहे हैं, तो आपको कोर्स पूरा होने के बाद 72 घंटे इंतज़ार करना होगा. यदि आप किसी मानसिक समस्या की दवा ले रहे हैं, तो अपने सायकिएट्रिस्ट से पूछकर ही रक्तदान करें.

13. सीज़नल एलर्जी से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
सर्दी-ज़ुकाम जैसी सीज़नल एलर्जी आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. आप बेझिझक रक्तदान कर सकते हैं.

14. बहुत जल्दी-जल्दी रक्तदान नहीं करना चाहिए, वरना शरीर कमज़ोर हो जाएगा.
एक स्वस्थ व्यक्ति साल में चार बार रक्तदान कर सकता है. हर तीन महीने के अंतराल पर आप रक्तदान कर सकते हैं, इसलिए यह भ्रम मन से निकाल दें कि आप कमज़ोर हो जाएंगे.

15. हाई कोलेस्ट्रॉलवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
यदि आप हाई कोलेस्ट्रॉल की दवाएं भी ले रहे हैं, तब भी रक्तदान कर सकते हैं.

16. रक्तदान से मोटापा बढ़ता है.
रक्तदान से वज़न नहीं बढ़ता, लेकिन कुछ लोग रक्तदान के बाद मानसिक तौर पर यह मान लेते हैं कि वो कमज़ोर हो गए और उन्हें अधिक पोषण की ज़रूरत है. ऐसे में वो अधिक खाने लगते हैं और एक्सरसाइज़ या शारीरिक गतिविधियां घटा देते हैं, जिससे उनका वज़न बढ़ सकता है. तो सीधे तौर पर यह मोटापे से नहीं जुड़ा है.

कौन रक्तदान नहीं कौन रक्तदान नहीं कर सकता?
  • 60 वर्ष से अधिक व 18 वर्ष से कम आयु के लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
  • गर्भवती स्त्रियां.
  • स्तनपान करानेवाली मांएं.
  • अगर आपने व्रत रखा है, तो रक्तदान नहीं कर सकते, क्योंकि रक्तदान से चार घंटे पहले अच्छा भोजन करना बेहतर होता है.
  • अल्कोहल के सेवन के बाद.
  • इंसुलिन लेनेवाले डायबिटीज़ के रोगी.

– गीता शर्मा

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फेस्टिवल ब्यूटी टिप्स: 7 दिन का ब्यूटी प्लान (Festival Beauty Tips – Seven Day Beauty Plan)

फेस्टिव सीज़न में सबसे ख़ास, सबसे ख़ूबसूरत नज़र आने के लिए आपको थोड़ी तैयारी पहले से करनी होगी. अपने ब्यूटी प्लान को यदि आप 7 दिनों में बांट देती हैं, तो आप समय की बचत भी कर पाएंगी और आपके ब्यूटी प्लान में कोई कमी भी नहीं रहेगी. आपका फेस्टव लुक सबसे स्पेशल बनाने के लिए हम आपके लिए लेकर आए हैं 7 दिन का ब्यूटी प्लान (Beauty Plan).

Festival Beauty Tips

पहला दिन
* सुबह जल्दी उठें. गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीएं.
* सुबह 40 मिनट वॉक के लिए जाएं या घर में योगा व एक्सरसाइज़ करें.
* अपनी स्किन टाइप के अनुसार फेस वॉश से चेहरा धोएं.
* अल्कोहल फ्री टोनर अप्लाई करें. साथ ही मॉइश्‍चराइज़र और सनस्क्रीन लगाना न भूलें.
* मेकअप करना चाहें, तो लाइट मेकअप कर सकती हैं.
* होंठों को नर्म-मुलायम बनाए रखने के लिए रोज़ाना 3 से 4 बार होंठों पर लिप बाम लगाएं.
* घर से बाहर निकलते समय भी सनस्क्रीन साथ ले जाएं और कुछ घंटों के अंतराल पर इसे अप्लाई करें.
* धूप में जा रही हैं, तो छाता या सनग्लासेस ज़रूर साथ ले जाएं.
* घर लौटने पर या घर पर हैं तो भी, शाम के समय चेहरे पर होममेड उबटन लगाएं. इसके लिए- दूध में हल्दी और चंदन पाउडर मिलाकर उबटन तैयार करें. इस उबटन को नियमित रूप से 1 हफ़्ते तक चेहरे पर लगाएं. इससे झाइयां और कालापन दूर होता है और त्वचा की रंगत निखरती है. इस उबटन को हाथ, पैर और गले पर भी लगाएं.
* त्वचा की तरह बालों को पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है और सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है ऑयल मसाज की. सप्ताह में एक दिन ऑयल मसाज के लिए ज़रूरी है इसलिए आप भी इसके लिए वक़्त निकालें. बालों की लंबाई को देखते हुए एक कटोरी में कोकोनट ऑयल यानी नारियल का तेल लें. इसमें कुछ करीपत्ता डालकर हल्का गरम करें और बालों में लगाएं. धीरे-धीरे स्कैल्प की मालिश करें.

Festival Beauty Tips

दूसरा दिन
* नींबू और शहद मिला गुनगुना पानी पीने के बाद कम से कम 15 मिनट स्ट्रेचिंग करें.
* फिर चेहरा धोकर फ्रूट फेस पैक लगाएं. इसके लिए- एक सेब को छील व काटकर ब्लेंडर में पीस लें. इसमें 2 टेबलस्पून शहद मिलाकर चेहरे पर लगाएं. चेहरे पर फेस पैक लगाकर मेडिटेशन करें. इससे आपका समय भी बचेगा और आपको दुगुना फ़ायदा भी होगा. आधे घंटे बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें. फेस पैक और मेडिटेशन का ग्लो आपके चेहरे पर साफ़ नज़र आगे लगेगा.
* अगर आप वर्किंग वुमन हैं, तो ऑफिस जाने से पहले मॉइश्‍चराइज़र, सनस्क्रीन लगाना न भूलें. साथ ही छाता या सनग्लासेस भी ज़रूर साथ ले जाएं.
* चेहरे के ऑयल कंट्रोल और एक्स्ट्रा प्रोटेक्शन के लिए कॉम्पैक्ट भी लगाएं.
* मेकअप अप्लाई करती हैं, तो लाइट मेकअप भी कर लें.
* शाम को घर लौटने के बाद चेहरे को फेसवॉस से अच्छी तरह धो लें.
* आज के दिन आप पार्लर में जाकर फेशियल करा सकती हैं या फिर घर पर भी फेशियल कर सकती हैं. फेशियल करने के लिए आप मार्केट में उपलब्ध डायमंड, गोल्ड, सिल्वर या पर्ल फेशियल में से किसी को भी चुन सकती हैं. फेशियल से आपके चेहरे का ग्लो और बढ़ जाएगा.

Festival Beauty Tips

तीसरा दिन
* अपने दिन की शुरुआत नींबू-शहद मिले गरम पानी से करें.
* आज की सुबह जॉगिंग के लिए जाएं. इससे आपको चेंज भी मिलेगा और खुली हवा का पूरा फ़ायदा भी.
* आज बालों को शैम्पू भी कर लें. बालों को अच्छी तरह शैम्पू-कंडीशनर करने के बाद चाहें तो सीरम भी अप्लाई कर सकती हैं.
* घर से निकलने से पहले मॉइश्‍चराइज़र और सनस्क्रीन अप्लाई कर लें. अपनी पसंद का लाइट मेकअप भी कर लें. इतनी तैयारी के बाद घर से निकलते समय आप एक अलग ही कॉन्फिडेंस महसूस करेंगी.
* घर लौटने बाद पूरे शरीर को स्क्रब करें. स्क्रब बनाने के लिए एक चम्मच तिल के तेल में आधा चम्मच हल्दी और कुछ तिल मिलाकर स्क्रब तैयार करें. इस मिश्रण से शरीर को धीरे-धीरे रगड़ें. हफ्ते में एक बार ऐसा करने से त्वचा में निखार आता है.
* स्क्रबिंग के बाद गुनगुने पानी से स्नान करें. ऐसा करने से आप फ्रेश महसूस करेंगी.
* आज आप पार्लर या घर पर मेनीक्योर-पेडिक्योर कर सकती हैं.
* यदि घर पर मेनीक्योर-पेडिक्योर कर रही हैं, तो सबसे पहले पुरानी नेल पॉलिश निकाल दें. फिर अपने हाथ और पैर को नमक और माइल्ड शैम्पू मिले गुनगुने पानी में डिप करें. फिर नाखूनों को फाइल करें. अब स्क्रबर से डेड सेल निकालें. फिर साफ पानी से हाथ-पैर धोकर बॉडी लोशन लगा लें. नाखूनों पर बेस कोट लगा लें.
* आज आपको बहुत अच्छी नींद आएगी, जिससे आप सुबह फ्रेश महसूस करेंगी.

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Festival Beauty Tips

चौथा दिन
* सुबह नींबू-शहद वाला गरम पानी पीने के बाद आज 30 मिनट दौड़ें. घर लौटने के बाद थोड़ी स्ट्रेचेस और सिट-अप्स भी कर लें. वर्कआउट के कारण ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होगा और आपकी स्किन ज़्यादा ग्लो करने लगेगी.
* स्किन को और सॉफ्ट बनाने के लिए नहाने से पहले स्किन सॉफ्टनर स्क्रब अप्लाई करें. इसके लिए सरसों के दानों में दही, शहद और आटा मिलाकर पेस्ट तैयार करें. इससे धीरे-धीरे बॉडी स्क्रब करें. इसके बाद स्नान करें. स्नान के बाद आप तरोताज़ा और एनर्जेटिक महसूस करेंगी.
* घर से निकलते समय रोज़ की तरह मॉइश्‍चराइज़र, सनस्क्रीन, हल्का मेकअप अप्लाई करें. सनग्लासेस पहनकर बाहर निकलें.
* शाम को लौटते समय पार्लर जाकर आईब्रो, अपरलिप, वैक्सिंग वगैरह करा लें.
* आज चाहें तो कोकोनट, ऑलिव और आल्मंड ऑयल मिलाकर हेड मसाज भी कर लें. ऐसा करने से आपको लग्ज़ीरियस स्पा का अनुभव होगा और आप अच्छा महसूस करेंगी.
* थ्रेडिंग की जलन दूर करने के लिए चाहें तो हेड मसाज के साथ ही फेस पैक भी अप्लाई कर सकती हैं. इसके लिए ऐलोवेरा जेल में खीरे का रस, दही और रोज़ ऑयल मिलाकर पैक बनाएं और उसे चेहरे पर लगाएं. 15 मिनट बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें. ये पैक आपकी स्किन को हमेशा ख़ूबसूरत बनाए रखेगा.
* सोने से पहले बॉडी लोशन या नाइट क्रीम अप्लाई करें.

Festival Beauty Tips

पांचवां दिन
* अपने डेली डोज़ यानी नींबू-शहद मिले गरम पानी से दिन की शुरुआत करें.
* आज आप 20 सूर्य नमस्कार करें. ये एक बेहतरीन वर्कआउट है और इससे आपको स्किन व हेल्थ दोनों के फ़ायदे मिलेंगे. कई सेलिब्रिटीज़ अपने दिन की शुरुआत सूर्य नमस्कार से ही करते हैं.
* अब अपने ऑयली बालों को शैम्पू करें. शैम्पू-कंडीशनर के बाद ज़रूरत हो तो सीरम भी अप्लाई करें.
* घर से निकलते समय स्किन को प्रोटेक्ट करने के लिए मॉइश्‍चराइज़र, सनस्क्रीन, कॉम्पैक्ट आदि लगा लें. सनग्लासेस पहनना न भूलें.
* शाम को घर लौटने के बाद आज कम से कम 15 मिनट मेडिटेशन के लिए निकालें. ऐसा करने से आप रिलैक्स महसूस करेंगी.
* आज आप नेल पेंट भी अप्लाई कर सकती हैं. फेस्टिवल सीज़न में ब्राइड कलर की नेलपॉलिश अच्छी लगती है. आप अपनी पसंद और लुक के हिसाब से नेलपॉलिश का चुनाव कर सकती हैं.
* सोने से पहले चेहरे को क्लीन करना और नाइट क्रीम लगाना न भूलें.

 

Festival Beauty Tips

छठा दिन
* सुबह उठते ख़ुद को आईने में निहारें. आपको अपनी स्किन बहुत ख़ूबसूरत नज़र आएगी, आप ख़ुद को फिट महसूस करेंगी और आपका कॉन्फिडेंस बढ़ जाएगा.
* अब रोज़ की तरह अपने दिन की शुरुआत नींबू-शहद मिले गुनगुने पानी से करें.
* आज फिर से 30 मिनट दौड़ें. यकीन मानिए, आज आपको दौड़ने में बहुत ख़ुशी महसूस होगी, क्योंकि आज आप फिट महसूस कर रही हैं.
* लौटकर स्ट्रेचेस और सिट-अप्स करें.
* इसके बाद वॉर्म शावर लें, इससे आपके टॉक्सिन बाहर निकल जाएंगे. फिर ख़ुद को आईने में निहारें. यकीन मानिए, अपनी स्किन का निखार देखकर आप दंग रह जाएंगी.
* रोज़ की तरह स्किन प्रोटेक्टिव प्रॉडक्ट्स, जैसे- मॉइश्‍चराइज़र, सनस्क्रीन, कॉम्पैक्ट आदि लगाकर ही घर से बाहर निकलें.
* शाम को घर लौटने पर फेशवॉस से चेहरा धोएं और सोने से पहले नाइटक्रीम लगाएं.

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Festival Beauty Tips

सातवां दिन
* रोज़ की तरह नींबू-शहद मिला गरम पानी पीने के बाद 100 बार रस्सी कूदें और 30 मिनट मेडिटेशन करें.
* आज नहाने से पहले ब्रॉडी स्क्रब अप्लाई करें. इसके लिए आधा कप अलसी के बीज में तीन चम्मच शहद और थोड़ा-सा पानी व दूध मिलाकर स्क्रब तैयार करें. इससे चेहरे और बॉडी का मसाज करें. इस स्क्रब को अप्लाई करने बाद जब आप गुनगुने पानी से स्नान करेंगी, तो ख़ुद में नया निखार महसूस करेंगी.
* आज बालों को शैम्पू करें. शैम्पू-कंडीशनर के बाद ज़रूरत हो तो सीरम अप्लाई करें.
* अब नरिशिंग बॉडी लोशन अप्लाई करें.
* आज आपको फेस्टिवल के लिए तैयार होना है इसलिए आप हैवी मेकअप कर सकती हैं.

5 घरेलू फेस पैक से पाएं गोरी-सुंदर त्वचा, देखें वीडियो:

ऐसे करें मेकअप की शुरुआत
* फेस्टिवल मेकअप करने के लिए सबसे पहले मॉइश्‍चराइज़र लगाएं.
* फिर अपनी स्किन टोन से मैच करता फाउंडेशन और फेस पाउडर लगाएं.
* फेस्टिवल लुक के लिए आप स्मोकी आई मेकअप कर सकती हैं.

Festival Beauty Tips

ऐसे करें स्मोकी आई मेकअप
स्मोकी आई मेकअप के लिए सबसे पहले एक बूंद प्राइमर आईलिड पर लगाएं. इसे लगाना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि गर्मी और ऑयली फेस की वजह से आईशैडो क्रीज़ लाइन से फैल जाता है. फिर लाइट शेड का आई कंसीलर लगाएं. इसे आंखों के नीचे और आईलिड पर अच्छी तरह लगाएं. इससे आईशैडो आसानी से लगेगा. अब आंखों के कलर से मैच करता आईशैडो लगाएं औरब्रश से स्मज करें. फिर डार्क ग्रे आईशैडो आंखों की ऊपरी आईलिड पर लगाकर अच्छी तरह स्मज करें. ज़्यादा स्मोकी लुक के लिए ग्रे आईशैडो के ऊपर ब्लैक आईशैडो लगाएं. दोनों को बड़े ब्रश से ब्लेंड करें. लैशलाइन पर आईलाइनर लगाएं. लिक्विड की बजाय जेल/स्केच आईलाइनर चुनें. ये आसानी से लग जाता है. स्मोकी लुक के लिए ये बेहतर भी होता है. अब स्मजर ब्रश या आई बड की मदद से आईलाइनर को अच्छी तरह स्मज कर लें. काजल लगाकर आई मेकअप कंप्लीट करें.

Festival Beauty Tips

ऐसे कंप्लीट करें मेकअप
* आई मेकअप के बाद पिंक, पीच जैसे लाइट शेड का ब्लश अप्लाई करें.
* आख़िर में लिपस्टिक या लिप ग्लॉस लगाकर मेकअप पूरा करें.
* लीजिए, हो गईं आप तैयार फेस्टिव लुक के साथ.
* अब अपने आउटफिट के अनुसार हेयर स्टाइल बनाएं और पाएं परफेक्ट फेस्टिव लुक.

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Festival Beauty Tips

स्मार्ट टिप्स
* ख़ूबसूरत नज़र आने के लिए पूरी नींद लें.
* सोने से पहले मेकअप रिमूव करना न भूलें.
* हेल्दी डायट को अपनी दिनचर्या में शामिल करें.
* रोज़ान 8-10 ग्लास पानी ज़रूर पाएं.
* तनाव और प्रदूषण से दूर रहें. योग व मेडिटेशन करें.

– कमला बडोनी

World Mental Health Day: मानसिक बीमारी है अकेलापन, अनदेखा न करें (The Health Consequences of Loneliness)

दोस्त को देखकर रास्ता बदल देना, सामाजिक कार्यक्रमों में जाने से हिचकिचाना, भीड़ में ख़ुद को अकेला महसूस करना…क्या ये लक्षण सामान्य हैं? या किसी समस्या की ओर इशारा करते हैं? इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने बात की सॉल्यूशन काउंसलिंग सेंटर की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ से. हममें से ज़्यादातर लोग कभी न कभी अकेलापन महसूस करते हैं. ऐसा होना एक सामान्य बात है, लेकिन अगर अक्सर ऐसा होने लगे यह ख़तरे की घंटी हो सकती है. आज वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे के अवसर पर हम आपको अकेलेपन की समस्या से निपटने के उपाय बता रहे हैं.

Health Tips

शरीर और मन के बीच है गहरा कनेक्शन
शरीर और मन जुड़ा हुआ होता है. हम शरीर और मन को अलग नहीं कर सकते. दोनों साथ में चलनेवाली चीज़ें हैं. हमारी शारीरिक समस्याएं हमें मानसिक समस्याएं दे सकती हैं, ठीक उसी तरह मानसिक समस्याएं भी शारीरिक समस्याएं दे सकती हैं. शारीरिक समस्याओं के कारण होनेवाली मानसिक समस्याओं से निपटना आसान होता है, बशर्ते कि हमें समय रहते हमें यह समझ में आ जाए. समझ न आने पर स्वभाव में चिड़चिड़ापन, दर्द, बैचेनी इत्यादि समस्याएं हो सकती हैं. आम लोगों के लिए यह समझना बहुत मुश्क़िल होता है कि कोई समस्या मानसिक कारण से हो रहा है या शारीरिक कारण से. मानसिक समस्या को समझने में बहुत समय लगता है. लोग इस बात को स्वीकार नहीं करना चाहते कि उन्हें कोई प्रॉब्लम है. अकेलापन महसूस करना भी ऐसी ही मानसिक स्थिति है. लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि यह एक वॉर्निंग वेल है.

समस्या की शुरुआत हो सकती है
अकेलापन एंज़ाइटी से आता है. एंज़ाइटी होने पर सबसे पहले व्यक्ति को अकेलापन महसूस करता है. ऐसे लोग दूसरों को अवॉइड करने लगते हैं. क्योंकि वे दूसरे के सवाल-जवाब से बचना चाहते हैं. इसे विथड्रावल या अवॉइडेंस सिम्टम कहते हैं. ऐसे व्यक्ति लोगों के बीच जाना ही नहीं चाहते. न ही किसी से मिलना पसंद करते हैं. जाहिर है ख़ुद को समाज से काट लेने पर उन्हें अकेलापन महसूस होता है. यह एक शुरुआत है. अगर आपको भी भीड़ में भी अकेला महसूस हो तो यह समझ जाना चाहिए कि यह मानसिक समस्या का संकेत है. तो बेहतर होगा कि आप अलर्ट हो जाएं. समस्या से लड़ने का यह पहला स्टेप है.

वजह जानना है ज़रूरी
अकेलेपन की वजह जाननी बहुत ज़रूरी है. इसे सेल्फ इवैल्यूशन कहते हैं. कहने का अर्थ है कि आप यह जानने की कोशिश कीजिए कि आपको ऐसा क्यों हो रहा है? आप किसी से क्यों नहीं मिलना चाहते? लोगों को देखकर आप रास्ता क्यों बदल देते हैं? ऐसी क्या वजह है कि आपको लोगों से मिलने का मन नहीं करता? आपको लोग क्यों नहीं पसंद आते? ऐसी क्या वजह है कि जो लोग आपको पहले अच्छे लगते थे, अब वे पसंद नहीं आते. आपके लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि बदलाव आपमें आया है कि लोगों में, क्योंकि लोग तो वही हैं. कुछ आपमें है तो अलग हो रहा है. कुछ लोग इस समस्या से बाहर आने के लिए, सेल्फ हेल्फ बुक्स और वीडियोज़ का सहारा लेते हैं. उन्हें लगता है कि एक-दो बुक्स पढ़ने या वीडियो देखने से इस समस्या से निकला जा सकता है, उनकी यह सोच ही ग़लत है. बुक या वीडियो देखने से काम नहीं बनने वाला. आपको किसी व्यक्ति के मदद की ज़रूरत है.

Health Tips

किसी के साथ शेयर कीजिए
ज़रूरी नहीं है कि आप प्रोफेशनल के पास जाएं. आपको ऐसे व्यक्ति के पास जाना होगा, जो आपको सुन व समझ सके. आपके आस-पास कोई न कोई ऐसा ज़रूर होगा, जो आपमें दिलचस्पी रखता होगा और आपकी भलाई चाहता होगा. उससे बात कीजिए. अक्सर लोग किसी से कुछ कहने से इसलिए भी कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे बात फैल जाएगी. लेकिन ध्यान दें किसी से बात शेयर न करना, प्रेशर कुकर की तरह है. आपको यह समझना होगा कि कि आपने अपने शरीर के अंदर प्रेशर कुकर पालकर रखा है. अगर बहुत प्रेशर हो गया तो उसके ब्लास्ट होना ही है. इसलिए फीलिंग को बाहर निकलना बहुत ज़रूरी है. किसी न किसी से शेयर करना पड़ेगा.

Health Care Tips

लिखकर फाड़ दें
अगर शेयर नहीं कर सकते तो किसी नोटबुक में लिखकर फाड़ दीजिए. इसे थीळींश- ठशरव-र्इीीप टेक्नीक कहते हैं. लिखते समय आप अपनी पूरी भड़ास निकाल लीजिए. एक-दो घंटे बाद उसे पढ़िए और पढ़कर फाड़ दीजिए. उसे इकट्ठा नहीं करना है. कई मामलों में तो ऐसा होता है कि लोगों को अपना लिखा पढ़कर ही हंसी आती है कि आख़िर कैसी छोटी-सी बात परेशान कर रही थी. अगर आप उसे फड़ा रहे हैं तो इसका अर्थ हुआ कि आप अतीत भूलना चाहते हैं और अगर एकत्रित करेंगे तो इसका अर्थ होगा कि आप अपने दुखों को जमा कर रहे हैं.
मेडिटेशन और काउंसलिंग मेडिटेशन से फ़ायदा होता है, लेकिन सिर्फ़ इससे ही कुछ नहीं होना. अगर इन उपायों को अपनाने के बाद और अपनी ओर से पूरी कोशिश करने के बाद ही बात न बने तो थेरेपिस्ट से संपर्क करें.

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क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

Vaginal Health
क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

सतर्कता व जागरूकता की कमी के चलते आज भी अधिकांश महिलाएं वेजाइनल हेल्थ को इग्नोर करती हैं. शायद कम ही लोग जानते हैं कि वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन का ख़्याल न रखने की वजह से कई गंभीर यौन रोग व इंफेक्शन का ख़तरा पनप सकता है.
बेहतर होगा कि ऐसे में वेजाइनल हाइजीन का पूरा ख़्याल रखें.

हेल्दी वेजाइना के बेसिक रूल्स
अक्सर महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट की हेल्थ की ज़रूरत का महत्व नहीं समझतीं. शायद इस तरफ़ उनका ध्यान ही नहीं जाता, क्योंकि ये बातें उन्हें बचपन से घर पर भी नहीं सिखाई जातीं. लेकिन अब व़क्त बदल रहा है, ऐसे में वेजाइनल हेल्थ के महत्व को समझना बेहद ज़रूरी है.

वेजाइनल हेल्थ को प्रोटेक्ट करने ईज़ी स्टेप्स

– वेजाइनल पीएच बैलेंस को करें प्रोटेक्ट
यदि सही पीएच बैलेंस बना रहे, तो वो हेल्दी बैक्टीरिया की ग्रोथ को बढ़ाता है. इस वजह से बेहद ज़रूरी है कि वेजाइनल पीएच बैलेंस को प्रोटेक्ट किया जाए.

– हेल्दी वेजाइना के लिए ज़रूरी है हेल्दी डायट
हाइजीन के साथ-साथ वेजाइना की हेल्थ की लिए सही-संतुलित डायट भी बेहद ज़रूरी है.

– करें सेफ सेक्स
अक्सर झिझक के चलते महिलाएं अपने मेल पार्टनर से सेफ सेक्स पर चर्चा तक नहीं करतीं. लेकिन आपकी सेहत आपके हाथ में है. संकोच न करें और पार्टनर से कंडोम यूज़ करने को कहें, क्योंकि यह कई तरह के यौन संक्रमण से आपका बचाव करता है.

– रेग्यूलर चेकअप करवाएं
भारत में अभी भी यह कल्चर डेवलप नहीं हुआ. यही वजह है कि वेजाइनल इंफेक्शन और यहां तक कि कैंसर तक भी सतर्कता की कमी के चलते हो रहे हैं. नियमित चेकअप से आप इन सबसे बच सकती हैं.

– क्या करें अगर इंफेक्शन हो जाए?
इंफेक्शन होने पर सही इलाज व सही केयर करें, ताकि वह बढ़ नहीं और भविष्य में इंफेक्शन न हो इसके लिए भी सतर्कता बरतें.

– सही हो अंडरगार्मेंट सिलेक्शन

कॉटन पैंटीज़ लें. सिंथेटिक से बचें. वेजाइनल भाग ड्राय रखने की कोशिश करें.

– हाइजीन का रखें ख़ास ख़्याल
साफ़-सफ़ाई रखें. टॉयलेट में भी इसका ख़्याल रखें. पब्लिक टॉयलेट्स के इस्तेमाल के व़क्त सावधानी बरतें.

पेल्विक एक्सरसाइज़ से रखें वेजाइना को हेल्दी
स़िर्फ डायट ही नहीं सही एक्सरसाइज़ भी वेजाइनल हेल्थ के लिए ज़रूरी है.

सर्वे- क्यों झिझकती हैं महिलाओं?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज भी बहुत बड़ी संख्या में भारतीय महिलाएं वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन के महत्व को न तो समझती हैं और न ही इस पर खुलकर बात करती हैं. यही वजह है कि वो वेजाइनल प्रॉब्लम्स से दो-चार होती हैं.

जागरूकता की कमी भी एक सबसे बड़ी वजह
हमारा सामाजिक ढांचा इसकी बड़ी वजह है. यहां इन अंगों पर बात तक करने से लोग हिचकते हैं. यहां तक के अपने डॉक्टर्स से भी इस पर बात करने से कतराते हैं..

आंखों के लिए अच्छे नहीं हैं ये 5 रोग (5 Diseases That Can Harm Your Eyes and Vision)

आंखें मानव शरीर का एक अहम् अंग हैं जिससे वो इस ख़ूबसूरत दुनिया को देख सकता है, लेकिन ज़रा सोचिए, अगर इन आंखों की रोशनी कमज़ोर पड़ जाए या फिर आंखों की रोशनी ही चली जाए तो ये रंगीन दुनिया कितनी बेरंग और अंधकारमय लगने लगेगी. इसलिए आंखों को लंबे समय तक सेहतमंद बनाए रखने के लिए उनकी सही देखभाल बहुत ज़रूरी है. दरअसल, हमारी आंखें शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी होती हैं. ऐसे में शरीर में होने वाली किसी भी स्वास्थ्य समस्या का दुष्प्रभाव आंखों पर भी दिखाई देता है. हालांकि कई बार हम इन स्वास्थ्य समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो आंखों की सेहत के लिए घातक साबित हो सकती हैं. चलिए जानते हैं ऐसे ही 5 रोग, जो आंखों की सेहत को नुक़सान पहुंचाते हैं. 

Eye Diseases

हाई कोलेस्ट्रॉल
जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है तो इसका असर चेहरे पर साफ़ दिखाई देने लगता है. चेहरे पर कोलेस्ट्रॉल जमा होने के कारण आंखों के ऊपर और नीचे निशान पड़ जाते हैं. इसके अतिरिक्त अधिक कोलेस्ट्रॉल जमा होने से आंखों की ओर होने वाला रक्त संचार भी बंद हो जाता है, जिसके कारण धीरे-धीरे आंखों की रोशनी कमज़ोर होने लगती है और आंखों में दर्द की शिकायत होती है. हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली आंखों की इस समस्या को डायस्लिपिडेमिया भी कहा जाता है.
लक्षण
. आंखों के ऊपर व नीचे निशान पड़ना.
. आंखों का बदसूरत नज़र आना.
. आंखों में दर्द व तकलीफ़ महसूस होना.
. आंखों से कम दिखाई देना.

थायरॉइड
गर्दन के बीचों बीच मौजूद तितली के आकार की थायरॉइड ग्रंथि से थायरॉइड हार्मोन का स्राव होता है, जो पूरे शरीर के मेटाबॉलिज़्म को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है. हालांकि इस ग्रंथि से आवश्यकता से कम या अधिक मात्रा में थायरॉइड हार्मोन्स का स्राव कई शारीरिक समस्याओं को जन्म दे सकता है और यह आंखों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. थायरॉइड ग्रंथि से जुड़े किसी भी विकार के चलते आंखों के आसपास के टिशूज़ में सूजन आने लगती है और डबल विज़न यानी हर चीज़ डबल दिखाई देती है. इतना ही नहीं, कई बार तो थायरॉइड के मरीज़ों की आंखें पूरी तरह से बंद भी नहीं हो पाती हैं. आंखें पूरी तरह से बंद भी नहीं हो पाती हैं.
लक्षण
. आंखों के आसपास के टिशूज़ में सूजन.
. आंखों में पानी भरना व दबाव महसूस होना.
. एक ही चीज़ का डबल-डबल नज़र आना.
. आंखों में सिकुड़न और ड्राइनेस की समस्या.

डायबिटीज़
डायबिटीज़जो लोग डायबिटीज़ से पीड़ित हैं उन्हें अपनी आंखों की नियमित जांच करवानी चाहिए, क्योंकि इसका असर उनके शरीर के साथ-साथ आंखों पर भी पड़ता है. डायबिटीज़ के कारण आंखों की रोशनी कम हो जाती है और सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है. इससे पीड़ित लोगों में रेटिनोपैथी, ग्लूकोमा और मोतियाबिंद जैसे कई नेत्र रोगों के होने की आशंका बढ़ जाती है. दरअसल, ब्लड शुगर में होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण आंखों को ब्लड सप्लाई करने वाली कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे इमेज व कलर धुंधले दिखाई देने लगते हैं और रेटिना में सूजन आ जाती है. हालांकि कई बार इस समस्या का पता तब चलता है, जब यह बीमारी बहुत गंभीर रूप ले चुकी होती है.
लक्षण
. ग्लूकोमा या मोतियाबिंद की समस्या.
. आंखों का बार-बार संक्रमित होना.
. बार-बार चश्मे का नंबर बदलना.

स्ट्रोक
स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में हर साल 1.5 लाख लोग ब्रेन स्ट्रोक के शिकार होते हैं. जबकि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक़, ब्रेन स्ट्रोक के 41 फ़ीसदी मामलों में व्यक्ति की जान को ख़तरा होता है और 59 फ़ीसदी लोगों में शारीरिक या मानसिक दुर्बलता की आशंका बनी रहती है. हालांकि स्ट्रोक के बाद कुछ लोग चलने-फिरने में असमर्थ हो जाते हैं, जबकि कुछ की स्मरण शक्ति कमज़ोर पड़ जाती है और कई लोगों की आंखों से धुंधला दिखाई देने लगता है. कई बार स्ट्रोक के कारण आंखों की नर्व्स डैमेज हो जाती है, ऐसे में मरीज़ को एक ही चीज़ डबल दिखाई देने लगती है या फिर उसकी आंखों से सब कुछ धुंधला दिखता है.

लक्षण
. आंखों से सब कुछ धुंधला दिखाई देना.
. एक ही वस्तु का डबल नज़र आना.
. एक आंख से कम दिखाई देना.
. दोनों आंखों की रोशनी का प्रभावित होना.

रेटिनल माइग्रेन
रेटिनल माइग्रेन की समस्या होने पर आंखों में दर्द की शिकायत हो सकती है और जिन लोगों को रेटिनल माइग्रेन होता है उन लोगों की एक आंख की रोशनी क़रीब 10-20 मिनट के लिए चली जाती है, जबकि कुछ मामलों में तक़रीबन 1 घंटे के लिए आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है. कई बार आपको ऐसा भी लग सकता है कि आंखों के सामने लाइट फ्लैश हो रही है और आपको कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है. रेटिनल माइग्रेन में इन लक्षणों के आने से पहले या बाद में आपको सिरदर्द की परेशानी हो सकती है. रेटिनल माइग्रेन के लिए अत्यधिक एक्सरसाइज़, स्मोकिंग, डिहाइड्रेशन, हाइपरटेंशन और कैफीन जैसी कई चीज़ें ज़िम्मेदार हो सकती हैं.

लक्षण
. क़रीब एक घंटे तक सब कुछ धुंधला दिखाई देना.
. एक आंख की रोशनी का अचानक से कम हो जाना.
. रेटिनल माइग्रेन के बाद या पहले तेज़ सिरदर्द होना.
. सिरदर्द और मितली के साथ आंखों की रोशनी का कमज़ोर होना.

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कब्ज़ से छुटकारा पाने के आसान व असरदार घरेलू उपाय (Home Remedies To Get Rid Of Constipation)

. 1 टेबलस्पून ऑलिव ऑयल सुबह खाली पेट लें, चाहें तो इसमें 1 टीस्पून नींबू का रस भी मिला सकते हैं. यह बहुत ही अच्छा उपाय है. अगर खाली पेट लेना भूल जाएं, तो खाना खाने के बाद जब आपको दोबारा भूख महसूस हो, तब लें.
. 1 नींबू का रस 1 कप गर्म पानी में मिलाकर पिएं.

Remedies To Get Rid Of Constipation
.1 टीस्पून गुड़ और ख़ासतौर से काला गुड़ कब्ज़ में फ़ायदेमंद है. चाहें तो इसे पानी या चाय में मिलाकर भी ले सकते हैं. बाद में इसकी मात्रा 2 टेबलस्पून तक कर सकते हैं. रात में खाना खाने के बाद गुड़ के सेवन से सुबह कब्ज़ नहीं होता.
.अगर संतुलित मात्रा में पी जाए, तो कॉफी भी कब्ज़ से राहत देती है. दिन में 1-2 कप कॉफी पाचन क्रिया को बढ़ती है. लेकिन अधिक पीने से डिहाइड्रेशन होकर कब्ज़ बढ़ने का ख़तरा भी रहता है.
. ल्की एक्सरसाइज़ और वॉक ज़रूरी है. इससे अंदरूनी अंगों में क्रियाशीलता व गतिशीलता आती है और कब्ज़ की समस्या भी नहीं होती.
.पानी ख़ूब पिएं और फाइबरयुक्त आहार लें, जिसमें ताज़ सब्ज़ियां व फल भी शामिल हों.
.1 ग्लास संतरे का जूस पल्प के साथ लें. इसमें 1 टेबलस्पून फ्लैक्स सीड ऑयल मिलाकर पिएं. 5 घंटे बाद आपका पेट साफ़ हो जाएगा.
.2 टेबलस्पून एलोवीरा जेल को फ्रूट जूस में मिलाकर सुबह-सुबह लें या फिर 1 कप एलोवीरा जूस पिएं.
.दिन में 1-3 कप दही ज़रूर खाएं. 1 कप नाश्ते में लें और बाकी खाने के साथ. दही के हेल्दी बैक्टिरिया पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं और कब्ज़ से बचाते हैं.
.गर्म पानी में बेकिंग सोडा मिलाकर पीने से भी पेट साफ़ होता है.
.रिफाइन्ड फूड से बचें.
.1 टेबलस्पून शहद दिन में 3 बार लें. आप चाहें तो इसे गर्म पानी में मिलाकर भी ले सकते हैं.
. तिल का सेवन करें. चाहें तो सलाद में मिलाकर भी उसे ले सकते हैं. पर ध्यान रहे कि इसका सेवन संतुलित मात्रा में ही करें. तिल को खाने के बाद पानी ख़ूब पिएं.

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जानिए खजूर के 10 बड़े फायदे ( 10 Proven Health Benefits of Dates)

विटामिन, फाइबर और मिनरल्स से भरपूर खजूर (Dates) स्वाद और सेहत की दृष्टि से बहुत ही लाभकारी है. खजूर कोलेस्ट्रॉल फ्री होने के साथ-साथ डायटरी फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और कैल्शियम से भरपूर होता है. इसमें बहुत कम फैट होता है, जो हार्ट संबंधी बीमारियों से होने वाले ख़तरे को कम करता है. खजूर में हाई न्यूट्रीशनल वैल्यू होती है, जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है.

Health Benefits of Dates

– खजूर में सोल्यूबल व इनसोल्यूबल फाइबर और अनेक तरह के अमीनो एसिड होते हैं, जो पाचन तंत्र में सुधार करते हैं.
– इसमें मैग्नीशियम, कॉपर, मैगनीज़, विटामिन बी5, विटामिन बी3 और सेलेनियम आदि तत्व होते हैं, जो हड्डियों और दांतों को स्ट्रॉन्ग व हेल्दी बनाने और आंत संबंधी संक्रमण को दूर करने में मदद करते हैं.
– जिन लोगों को कब्ज़ की शिकायत होती है, उनके लिए खजूर बहुत फ़ायदेमंद है. खजूर को सारी रात भिगोकर रखें और सुबह उठकर खा लें. खजूर में प्राकृतिक रूप से फाइबर, प्रोटीन और अनेक पोषक तत्व होते हैं, जो कब्ज़ को दूर करने में सहायक होते हैं.
– खजूर में आयरन और कैल्शियम होता है. इसे खाने से ख़ून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है और एनर्जी का स्तर भी बढ़ता है.
– खजूर में नेचुरल शुगर, जैसे- ग्लूकोज़, फू्रक्टोज़ और सुक्रोज़ होता है, जो एनर्जी बढ़ाता है. इसलिए इसे मिड डे स्नैक्स के रूप में ले सकते हैं.
– इसमें मौजूद विटामिन्स नर्वस सिस्टम को हेल्दी बनाए रखते हैं. पोटैशियम ब्रेन को अलर्ट रखता है और हार्ट संबंधी बीमारियों के ख़तरे को कम करके उसे हेल्दी बनाता है.
– महिलाओं में ही नहीं, बल्कि आजकल पुरुषों में भी जोड़ों के दर्द की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है. कैल्शियम की कमी होने पर जोड़ों का दर्द होता है. रोज़ाना 5-6 खजूर खाने से कैल्शियम की कमी को पूरा किया जा सकता है.
– डायरिया को नियंत्रित करने के लिए खजूर अच्छा विकल्प है. खजूर में मौजूद पोटैशियम तत्व खाने को अच्छी तरह पचाने में मदद करता है.
खजूर रेसिपी
– खजूर को बीच में से काटकर बीज निकाल लें. क्रश्ड किए हुए अखरोट और बादाम को भरकर खाएं.
– 10-15 खजूर के बीज निकालकर बारीक़ टुकड़ों में काट लें. कटे हुए खजूर से सलाद और डेज़र्ट्स को सजाकर सर्व करें.
– टेस्टी ब्रेकफास्ट स्मूदी बनाने के लिए दूध, 1 चुटकी जायफल पाउडर, 2-3 बूंदें वेनिला एसेंस और खजूर को ब्लेंडर में ब्लेंड कर लें. आइस क्यूब्स डालकर सर्व करें.

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कान के दर्द से छुटकारा पाने के 12 आसान होम रेमेडीज़ ( 12 effective home remedies for earache)

earache

कान दर्द (earache) आमतौर पर छोटे बच्चों में पाया जाता है. ज़ुकाम की वजह से या एक ही करवट काफ़ी समय तक सोने से कान में दर्द होता है, जिससे बच्चे रात को अचानक उठकर रोने लगते हैं. इसके अलावा कान में मैल का ज़्यादा जम जाना, पिन या अन्य वस्तु से कान खुजलाना, कान पर चोट लगना, कान में चींटी या अन्य कीड़ा घुस जाना, गला-दांत-जीभ की बीमारियां आदि कारणों से कानों में दर्द होने लगता है. हम आपको कान दर्द (earache) से छुटकारा पाने के आसान घरेलू उपाय बता रहे हैं.

earache
* 1 चम्मच तिल के तेल में लहसुन की आधी कली डालकर कुनकुना गर्म करके दर्द वाले कान में 4-4 बूंदें टपकाकर दूसरी करवट दस मिनट लेटे रहें.
* मुलहठी को घी में मिलाकर हल्का गर्म करके कान के आसपास लेप लगाएं. दर्द से तुरंत राहत मिलेगी.
* एरंडी के पत्तों को गर्म तिल के तेल में डुबोकर उससे कानों के आसपास हल्का सेंक करें.
* कान से मवाद आता हो तो गुग्गुल का धुआं कान पर लें.
* कान में दर्द होने पर अजवाइन के तेल में सरसों का तेल मिलाकर धीमी आंच पर गुनगुना करके कान में डालना लाभकारी होता है. अजवाइन का तेल एक भाग और सरसों का तेल तीन भाग लिया जा सकता है.
* कान में दर्द होने पर लहसुन की 4-5 कलियों को मीठे तेल (अलसी के तेल) में आंच पर रखकर जला लें, बाद में इस तेल को छानकर एक शीशी में भर लें. सुबह-शाम इस लहसुन के तेल को कान में डालें. कुछ ही दिनों में फ़ायदा हो जाता है.
* तुलसी के पत्तों को पीसकर रस बना लें. इस रस को हल्की आंच पर रखकर थोड़ा-सा गर्म कर लें. सहने लायक होने पर 4-5 बूंदें कान में डालें. इससे कान का दर्द मिटता है.
* कान में दर्द होने पर बाह्य रूप से कान को रुई से सेंका भी जा सकता है. कभी-कभी ठंड के कारण या बाहरी हवा के कारण भी कान में दर्द होने लगता है.
* आम के ताज़े हरे पत्तों का अर्क गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है.
* मूली को बारीक़-बारीक़ टुकड़ों में काट लीजिए. इसे सरसों के तेल में डालकर ख़ूब गरम करके निकाल लीजिए. अब इस तेल को किसी शीशी में सुरक्षित रख लीजिए. दर्द के व़क्त कान में यह तेल डालें. आराम मिलेगा.
* कान में चाहे कितना ही भयंकर दर्द हो, केले के तने को चाकू से छीलकर रस निकालें और हल्का गरम करके रात को सोते समय कान में डालें. उसी रात कान का दर्द समाप्त हो जाएगा.
* अदरक का रस गुनगुना करके कान में डालने से दर्द जल्दी मिटता है.

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एंटीबायोटिक्स के बारे 10 बातें जो हर किसी को जाननी चाहिए ( 10 Facts About Antibiotics Which Everyone Should Know)

आज एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) सबसे ज़्यादा प्रिस्क्राइब की जानेवाली दवा बन गई है और चूंकि इससे तुरंत आराम मिलता है, इसलिए हम भी चाहते हैं कि डॉक्टर एंटीबायोटिक ज़रूर दे. कई डॉक्टर भी ज़रूरी न होने पर भी एंटीबायोटिक्स लिख देते हैं. कुल मिलाकर दुनियाभर में एंटीबायोटिक्स का उपयोग की बजाय दुरुपयोग हो रहा है.

Facts About Antibiotics
– सबसे पहले तो ये जान लें कि एंटीबायोटिक्स बेहद इफेक्टिव दवा ज़रूर है, लेकिन ये हर बीमारी का इलाज नहीं है.
– ये भी ध्यान रखें कि एंटीबायोटिक्स स़िर्फ बैक्टीरियल इंफेक्शन से होनेवाली बीमारियों पर असरदार है. वायरल बीमारियों जैसे सर्दी-ज़ुकाम, फ्लू, ब्रॉन्काइटिस, गले में इंफेक्शन आदि मेंे ये कोई लाभ नहीं देती.
– ये वायरल बीमारियां ज़्यादातर अपने आप ठीक हो जाती हैं. हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता इन वायरल बीमारियों से ख़ुद ही निपट लेती हैं. इसलिए अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की कोशिश करें.
– हां, बैक्टीरियल इंफेक्शन से होनेवाली हेल्थ प्रॉब्लम्स में कई बार एंटीबायोटिक्स लेना ज़रूरी हो जाता है.
– एंटीबायोटिक्स तभी लें, जब ज़रूरी हो और जब डॉक्टर ने प्रिस्क्राइब किया हो, वरना ऐसा हो जाएगा कि जब आपको सही में एंटीबायोटिक्स की ज़रूरत होगी, तब वो बेअसर हो जाएगी. दरअसल, एंटीबायोटिक्स लेने से सभी बैक्टीरिया नहीं मरते और जो बच जाते हैं, वे ताक़तवर हो जाते हैं. इन बैक्टीरियाज़ को उस एंटीबायोटिक्स से मारना असंभव हो जाता है. ये एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंट बैक्टीरिया कहलाते हैं.
– ये एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंट बैक्टीरिया ज़्यादा लंबी और गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं और इन बीमारियों से लड़ने के लिए ज़्यादा स्ट्रॉन्ग एंटीबायोटिक्स की ज़रूरत होती है, जिनके और ज़्यादा साइड इफेक्ट्स होते हैं.
– ये एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंट बैक्टीरिया बहुत तेज़ी से फैलते हैं और आपके परिवार के सदस्य, बच्चे और आपके साथ काम करनेवालों को भी अपना शिकार बनाते हैं. और हो सकता है कि एक स्टेज ऐसा भी आ जाए कि सभी ऐसे इंफेक्शन से घिर जाएं, जिसका इलाज मुश्किल हो.
– एंटीबायोटिक्स दवाएं अनहेल्दी व हेल्दी बैक्टीरिया के बीच फ़र्क़ नहीं कर पाती, यही वजह है कि ये अनहेल्दी बैक्टीरिया के साथ-साथ हेल्दी बैक्टीरिया को भी मार देती हैं.
– दुनियाभर में नई एंटीबायोटिक्स का विकास रुक गया है और एंटीबायोटिक दवाओं के बहुत ज़्यादा व ग़लत इस्तेमाल से जो एंटीबायोटिक दवाएं उपलब्ध हैं, वे बेअसर हो रही हैं और ये दुनियाभर के मेडिकल एक्सपर्ट्स के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि ऐसी स्थिति में कई बीमारियों का इलाज मुश्किल हो जाएगा.
– ध्यान रखें कि जिन एंटीबायोटिक्स की आपको ज़रूरत नहीं है, उसे लेने से आप अच्छा महसूस नहीं करेंगे, ना ही ये आपकी किसी तकलीफ़ का इलाज है, बल्कि ये आपको नुक़सान ही पहुंचाएंगे.

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जानिए अत्यधिक प्रोटीन के सेवन के साइडइफेक्ट्स (Is Too Much Protein Bad for Your Health?)

हम सभी को लगता है कि प्रोटीन (Protein) हमारे शरीर के लिए सबसे ज़रूरी पोषक तत्व है, इसलिए अक्सर हम बॉडी बनाने या वज़न कम करने के लिए बिना सोचे-समझ अत्यधिक प्रोटीन का सेवन शुरू करना कर देते हैं. जो सेहत बनाने की बजाय बिगाड़ सकते हैं. आपको बता दें कि प्रोटीन शरीर में होने वाली टूट-फूट को रिपेयर करने के साथ ही मसल्स बनाने के लिए भी बहुत आवश्यक होता है.

Protein

क्या होता है नुक़सान ?
* आजकल जिम में एक्सरसाइज़ करने वालों को प्रोटीन शेक पीने या प्रोटीन बार खाने के लिए कहा जाता है. हमारा शरीर हर घंटे स़िर्फ 5 ग्राम प्रोटीन पचा सकता है. जबकि प्रोटीन शेक या बार में 50 ग्राम प्रोटीन होता है, जिसके पचने में 10 घंटे लगते हैं. यह स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है.
* रोजाना 30% से अधिक प्रोटीन के सेवन से किडनी पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है.
* इससे शरीर में कैल्शियम का ह्रास होता है.
* इसके दुष्परिणामों में थकान, त्वचा का शुष्क होना, चक्कर आना, बालों का झड़ना, भूख कम होना, जी मिचलाना, सांसों की बदबू आदि है.
* शरीर में आनेवाला ज़रूरत से ज़्यादा प्रोटीन फैट में बदल जाता है इससे वज़न बढ़ता है.

किसको है ज़्यादा ख़तरा?
* मांसाहारी (नॉन वेजीटेरियन) लोग.
* जिम में जानेवाले लोग जो प्रोटीन शेक या प्रोटीन बार खाकर जल्दबाज़ी में मसल्स बनाना चाहते हैं.

क्या है हेल्दी लिमिट?
* ज़्यादातर लोगों को प्रतिदिन 50 ग्राम से 70 ग्राम तक प्रोटीन की आवश्यकता होती है. अतः नापकर प्रोटीन खाना अच्छा होता है जैसे, 150 ग्राम चिकन में 37 ग्राम प्रोटीन होता है, 1 अंडे में 5 ग्राम प्रोटीन होता है. अतः इनका ज़्यादा सेवन ठीक नहीं है.

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एलर्जी से बचने के 15 अचूक उपाय (15 Smart Ways To Prevent Allergies)

क्या आपको पता है कि हमारे देश में तक़रीबन 20 से 30 फ़ीसदी लोग एलर्जी (Allergies) से पीड़ित हैं, जबकि अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों में एलर्जी के मरीज़ों की संख्या और भी ज़्यादा है. वास्तव में एलर्जी बेहद सामान्य बीमारी है. किसी को खाने की चीज़ से, किसी को किसी ख़ास महक से तो किसी को पालतू जानवरों से एलर्जी होती है. हम आपको एलर्जी से बचने के आसान व कारगर उपाय बता रहे हैं.

Ways To Prevent Allergies

1. बच्चों के इम्यून सिस्टम को मज़बूत करने के लिए उन्हें धूल-मिट्टी और धूप में खेलने दें. ये बच्चों को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. उन्हें बारिश या दूसरे पानी से भी खेलने दें. हां, धूल-मिट्टी में खेलने के बाद उनके हाथ-पैर अच्छे से धुलवाना न भूलें.

2. अगर किसी को धूल और धुएं से एलर्जी है तो घर से बाहर निकलने से पहले नाक पर रुमाल रखना चाहिए. बचाव ही एलर्जी का इलाज है.

3. जिन लोगों को ठंड से एलर्जी है, वे ठंडी और खट्टी चीज़ों जैसे कि अचार, इमली, आइस्क्रीम आदि के इस्तेमाल से बचें.

Ways To Prevent Allergies

4. गंदगी से एलर्जी वाले लोगों को समय-समय पर चादर, तकिए के कवर और पर्दे भी बदलते रहना चाहिए. कार्पेट यूज़ न करें या फिर उसे कम से कम 6 महीने में ड्रायक्लीन करवाते रहें.

5. जिस दवा से एलर्जी है, उसे खाने से बचें. डॉक्टर को ऐसी एलर्जी के बारे में ज़रूर बताएं.

6. किचन में एग्जॉस्ट फैन ज़रूर लगवाएं और खाना पकाते समय उसे चलाएं.

7. घर को हमेशा बंद न रखें. घर को खुला और हवादार बनाए रखें, ताकि साफ़ हवा आती रहे.

8. खिड़कियों में महीन जाली लगवाएं और जाली वाली खिड़कियों को हमेशा बंद रखें, क्योंकि खुली खिड़की से कीड़े और मच्छर आपके घर में घुस सकते हैं.

9. दीवारों पर फफूंद और जाले हो गए हों, तो उन्हें साफ़ करते रहें, क्योंकि फफूंद के कारण भी एलर्जी हो सकती है.

10. बारिश के मौसम में फूल वाले प्लांट्स को घर के अंदर न रखें.

Allergies

11. योग और नैचुरोपैथी एलर्जी से लड़ने में काफ़ी कारगर होते हैं. एलर्जी से बचने के लिए पेट साफ़ रखना चाहिए. बहुत गर्म या बहुत ठंडा खाना नहीं खाना चाहिए. हमेशा साफ़ पानी पीना चाहिए. रोज़ाना क़रीब 15 मिनट अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका प्राणायाम करने से एलर्जी में फ़ायदा होता है, क्योंकि इनसे इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है.

12.  योग और नैचुरोपैथी एलर्जी से लड़ने में काफ़ी कारगर होते हैं. एलर्जी से बचने के लिए पेट साफ़ रखना चाहिए. बहुत गर्म या बहुत ठंडा खाना नहीं खाना चाहिए. हमेशा साफ़ पानी पीना चाहिए. रोज़ाना क़रीब 15 मिनट अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका प्राणायाम करने से एलर्जी में फ़ायदा होता है, क्योंकि इनसे इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है.

13. अगर जल्दी-जल्दी सर्दी और ज़ुकाम की एलर्जी हो तो सुबह उठकर गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीएं.

14. प्रदूषण से होने वाली एलर्जी से बचने के लिए गुनगुने पानी में तुलसी, नींबू, काली मिर्च और शहद डालकर पीएं.

15. बदलते मौसम में होने वाली एलर्जी से बचने के लिए खट्टी चीजें, जैसे- अचार और तली-भुनी चीजें खाने से परहेज़ करें.

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