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जानिए खजूर के 10 बड़े फायदे ( 10 Proven Health Benefits of Dates)

विटामिन, फाइबर और मिनरल्स से भरपूर खजूर (Dates) स्वाद और सेहत की दृष्टि से बहुत ही लाभकारी है. खजूर कोलेस्ट्रॉल फ्री होने के साथ-साथ डायटरी फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और कैल्शियम से भरपूर होता है. इसमें बहुत कम फैट होता है, जो हार्ट संबंधी बीमारियों से होने वाले ख़तरे को कम करता है. खजूर में हाई न्यूट्रीशनल वैल्यू होती है, जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है.

Health Benefits of Dates

– खजूर में सोल्यूबल व इनसोल्यूबल फाइबर और अनेक तरह के अमीनो एसिड होते हैं, जो पाचन तंत्र में सुधार करते हैं.
– इसमें मैग्नीशियम, कॉपर, मैगनीज़, विटामिन बी5, विटामिन बी3 और सेलेनियम आदि तत्व होते हैं, जो हड्डियों और दांतों को स्ट्रॉन्ग व हेल्दी बनाने और आंत संबंधी संक्रमण को दूर करने में मदद करते हैं.
– जिन लोगों को कब्ज़ की शिकायत होती है, उनके लिए खजूर बहुत फ़ायदेमंद है. खजूर को सारी रात भिगोकर रखें और सुबह उठकर खा लें. खजूर में प्राकृतिक रूप से फाइबर, प्रोटीन और अनेक पोषक तत्व होते हैं, जो कब्ज़ को दूर करने में सहायक होते हैं.
– खजूर में आयरन और कैल्शियम होता है. इसे खाने से ख़ून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है और एनर्जी का स्तर भी बढ़ता है.
– खजूर में नेचुरल शुगर, जैसे- ग्लूकोज़, फू्रक्टोज़ और सुक्रोज़ होता है, जो एनर्जी बढ़ाता है. इसलिए इसे मिड डे स्नैक्स के रूप में ले सकते हैं.
– इसमें मौजूद विटामिन्स नर्वस सिस्टम को हेल्दी बनाए रखते हैं. पोटैशियम ब्रेन को अलर्ट रखता है और हार्ट संबंधी बीमारियों के ख़तरे को कम करके उसे हेल्दी बनाता है.
– महिलाओं में ही नहीं, बल्कि आजकल पुरुषों में भी जोड़ों के दर्द की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है. कैल्शियम की कमी होने पर जोड़ों का दर्द होता है. रोज़ाना 5-6 खजूर खाने से कैल्शियम की कमी को पूरा किया जा सकता है.
– डायरिया को नियंत्रित करने के लिए खजूर अच्छा विकल्प है. खजूर में मौजूद पोटैशियम तत्व खाने को अच्छी तरह पचाने में मदद करता है.
खजूर रेसिपी
– खजूर को बीच में से काटकर बीज निकाल लें. क्रश्ड किए हुए अखरोट और बादाम को भरकर खाएं.
– 10-15 खजूर के बीज निकालकर बारीक़ टुकड़ों में काट लें. कटे हुए खजूर से सलाद और डेज़र्ट्स को सजाकर सर्व करें.
– टेस्टी ब्रेकफास्ट स्मूदी बनाने के लिए दूध, 1 चुटकी जायफल पाउडर, 2-3 बूंदें वेनिला एसेंस और खजूर को ब्लेंडर में ब्लेंड कर लें. आइस क्यूब्स डालकर सर्व करें.

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कान के दर्द से छुटकारा पाने के 12 आसान होम रेमेडीज़ ( 12 effective home remedies for earache)

earache

कान दर्द (earache) आमतौर पर छोटे बच्चों में पाया जाता है. ज़ुकाम की वजह से या एक ही करवट काफ़ी समय तक सोने से कान में दर्द होता है, जिससे बच्चे रात को अचानक उठकर रोने लगते हैं. इसके अलावा कान में मैल का ज़्यादा जम जाना, पिन या अन्य वस्तु से कान खुजलाना, कान पर चोट लगना, कान में चींटी या अन्य कीड़ा घुस जाना, गला-दांत-जीभ की बीमारियां आदि कारणों से कानों में दर्द होने लगता है. हम आपको कान दर्द (earache) से छुटकारा पाने के आसान घरेलू उपाय बता रहे हैं.

earache
* 1 चम्मच तिल के तेल में लहसुन की आधी कली डालकर कुनकुना गर्म करके दर्द वाले कान में 4-4 बूंदें टपकाकर दूसरी करवट दस मिनट लेटे रहें.
* मुलहठी को घी में मिलाकर हल्का गर्म करके कान के आसपास लेप लगाएं. दर्द से तुरंत राहत मिलेगी.
* एरंडी के पत्तों को गर्म तिल के तेल में डुबोकर उससे कानों के आसपास हल्का सेंक करें.
* कान से मवाद आता हो तो गुग्गुल का धुआं कान पर लें.
* कान में दर्द होने पर अजवाइन के तेल में सरसों का तेल मिलाकर धीमी आंच पर गुनगुना करके कान में डालना लाभकारी होता है. अजवाइन का तेल एक भाग और सरसों का तेल तीन भाग लिया जा सकता है.
* कान में दर्द होने पर लहसुन की 4-5 कलियों को मीठे तेल (अलसी के तेल) में आंच पर रखकर जला लें, बाद में इस तेल को छानकर एक शीशी में भर लें. सुबह-शाम इस लहसुन के तेल को कान में डालें. कुछ ही दिनों में फ़ायदा हो जाता है.
* तुलसी के पत्तों को पीसकर रस बना लें. इस रस को हल्की आंच पर रखकर थोड़ा-सा गर्म कर लें. सहने लायक होने पर 4-5 बूंदें कान में डालें. इससे कान का दर्द मिटता है.
* कान में दर्द होने पर बाह्य रूप से कान को रुई से सेंका भी जा सकता है. कभी-कभी ठंड के कारण या बाहरी हवा के कारण भी कान में दर्द होने लगता है.
* आम के ताज़े हरे पत्तों का अर्क गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है.
* मूली को बारीक़-बारीक़ टुकड़ों में काट लीजिए. इसे सरसों के तेल में डालकर ख़ूब गरम करके निकाल लीजिए. अब इस तेल को किसी शीशी में सुरक्षित रख लीजिए. दर्द के व़क्त कान में यह तेल डालें. आराम मिलेगा.
* कान में चाहे कितना ही भयंकर दर्द हो, केले के तने को चाकू से छीलकर रस निकालें और हल्का गरम करके रात को सोते समय कान में डालें. उसी रात कान का दर्द समाप्त हो जाएगा.
* अदरक का रस गुनगुना करके कान में डालने से दर्द जल्दी मिटता है.

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एंटीबायोटिक्स के बारे 10 बातें जो हर किसी को जाननी चाहिए ( 10 Facts About Antibiotics Which Everyone Should Know)

आज एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) सबसे ज़्यादा प्रिस्क्राइब की जानेवाली दवा बन गई है और चूंकि इससे तुरंत आराम मिलता है, इसलिए हम भी चाहते हैं कि डॉक्टर एंटीबायोटिक ज़रूर दे. कई डॉक्टर भी ज़रूरी न होने पर भी एंटीबायोटिक्स लिख देते हैं. कुल मिलाकर दुनियाभर में एंटीबायोटिक्स का उपयोग की बजाय दुरुपयोग हो रहा है.

Facts About Antibiotics
– सबसे पहले तो ये जान लें कि एंटीबायोटिक्स बेहद इफेक्टिव दवा ज़रूर है, लेकिन ये हर बीमारी का इलाज नहीं है.
– ये भी ध्यान रखें कि एंटीबायोटिक्स स़िर्फ बैक्टीरियल इंफेक्शन से होनेवाली बीमारियों पर असरदार है. वायरल बीमारियों जैसे सर्दी-ज़ुकाम, फ्लू, ब्रॉन्काइटिस, गले में इंफेक्शन आदि मेंे ये कोई लाभ नहीं देती.
– ये वायरल बीमारियां ज़्यादातर अपने आप ठीक हो जाती हैं. हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता इन वायरल बीमारियों से ख़ुद ही निपट लेती हैं. इसलिए अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की कोशिश करें.
– हां, बैक्टीरियल इंफेक्शन से होनेवाली हेल्थ प्रॉब्लम्स में कई बार एंटीबायोटिक्स लेना ज़रूरी हो जाता है.
– एंटीबायोटिक्स तभी लें, जब ज़रूरी हो और जब डॉक्टर ने प्रिस्क्राइब किया हो, वरना ऐसा हो जाएगा कि जब आपको सही में एंटीबायोटिक्स की ज़रूरत होगी, तब वो बेअसर हो जाएगी. दरअसल, एंटीबायोटिक्स लेने से सभी बैक्टीरिया नहीं मरते और जो बच जाते हैं, वे ताक़तवर हो जाते हैं. इन बैक्टीरियाज़ को उस एंटीबायोटिक्स से मारना असंभव हो जाता है. ये एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंट बैक्टीरिया कहलाते हैं.
– ये एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंट बैक्टीरिया ज़्यादा लंबी और गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं और इन बीमारियों से लड़ने के लिए ज़्यादा स्ट्रॉन्ग एंटीबायोटिक्स की ज़रूरत होती है, जिनके और ज़्यादा साइड इफेक्ट्स होते हैं.
– ये एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंट बैक्टीरिया बहुत तेज़ी से फैलते हैं और आपके परिवार के सदस्य, बच्चे और आपके साथ काम करनेवालों को भी अपना शिकार बनाते हैं. और हो सकता है कि एक स्टेज ऐसा भी आ जाए कि सभी ऐसे इंफेक्शन से घिर जाएं, जिसका इलाज मुश्किल हो.
– एंटीबायोटिक्स दवाएं अनहेल्दी व हेल्दी बैक्टीरिया के बीच फ़र्क़ नहीं कर पाती, यही वजह है कि ये अनहेल्दी बैक्टीरिया के साथ-साथ हेल्दी बैक्टीरिया को भी मार देती हैं.
– दुनियाभर में नई एंटीबायोटिक्स का विकास रुक गया है और एंटीबायोटिक दवाओं के बहुत ज़्यादा व ग़लत इस्तेमाल से जो एंटीबायोटिक दवाएं उपलब्ध हैं, वे बेअसर हो रही हैं और ये दुनियाभर के मेडिकल एक्सपर्ट्स के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि ऐसी स्थिति में कई बीमारियों का इलाज मुश्किल हो जाएगा.
– ध्यान रखें कि जिन एंटीबायोटिक्स की आपको ज़रूरत नहीं है, उसे लेने से आप अच्छा महसूस नहीं करेंगे, ना ही ये आपकी किसी तकलीफ़ का इलाज है, बल्कि ये आपको नुक़सान ही पहुंचाएंगे.

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जानिए अत्यधिक प्रोटीन के सेवन के साइडइफेक्ट्स (Is Too Much Protein Bad for Your Health?)

हम सभी को लगता है कि प्रोटीन (Protein) हमारे शरीर के लिए सबसे ज़रूरी पोषक तत्व है, इसलिए अक्सर हम बॉडी बनाने या वज़न कम करने के लिए बिना सोचे-समझ अत्यधिक प्रोटीन का सेवन शुरू करना कर देते हैं. जो सेहत बनाने की बजाय बिगाड़ सकते हैं. आपको बता दें कि प्रोटीन शरीर में होने वाली टूट-फूट को रिपेयर करने के साथ ही मसल्स बनाने के लिए भी बहुत आवश्यक होता है.

Protein

क्या होता है नुक़सान ?
* आजकल जिम में एक्सरसाइज़ करने वालों को प्रोटीन शेक पीने या प्रोटीन बार खाने के लिए कहा जाता है. हमारा शरीर हर घंटे स़िर्फ 5 ग्राम प्रोटीन पचा सकता है. जबकि प्रोटीन शेक या बार में 50 ग्राम प्रोटीन होता है, जिसके पचने में 10 घंटे लगते हैं. यह स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है.
* रोजाना 30% से अधिक प्रोटीन के सेवन से किडनी पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है.
* इससे शरीर में कैल्शियम का ह्रास होता है.
* इसके दुष्परिणामों में थकान, त्वचा का शुष्क होना, चक्कर आना, बालों का झड़ना, भूख कम होना, जी मिचलाना, सांसों की बदबू आदि है.
* शरीर में आनेवाला ज़रूरत से ज़्यादा प्रोटीन फैट में बदल जाता है इससे वज़न बढ़ता है.

किसको है ज़्यादा ख़तरा?
* मांसाहारी (नॉन वेजीटेरियन) लोग.
* जिम में जानेवाले लोग जो प्रोटीन शेक या प्रोटीन बार खाकर जल्दबाज़ी में मसल्स बनाना चाहते हैं.

क्या है हेल्दी लिमिट?
* ज़्यादातर लोगों को प्रतिदिन 50 ग्राम से 70 ग्राम तक प्रोटीन की आवश्यकता होती है. अतः नापकर प्रोटीन खाना अच्छा होता है जैसे, 150 ग्राम चिकन में 37 ग्राम प्रोटीन होता है, 1 अंडे में 5 ग्राम प्रोटीन होता है. अतः इनका ज़्यादा सेवन ठीक नहीं है.

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एलर्जी से बचने के 15 अचूक उपाय (15 Smart Ways To Prevent Allergies)

क्या आपको पता है कि हमारे देश में तक़रीबन 20 से 30 फ़ीसदी लोग एलर्जी (Allergies) से पीड़ित हैं, जबकि अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों में एलर्जी के मरीज़ों की संख्या और भी ज़्यादा है. वास्तव में एलर्जी बेहद सामान्य बीमारी है. किसी को खाने की चीज़ से, किसी को किसी ख़ास महक से तो किसी को पालतू जानवरों से एलर्जी होती है. हम आपको एलर्जी से बचने के आसान व कारगर उपाय बता रहे हैं.

Ways To Prevent Allergies

1. बच्चों के इम्यून सिस्टम को मज़बूत करने के लिए उन्हें धूल-मिट्टी और धूप में खेलने दें. ये बच्चों को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. उन्हें बारिश या दूसरे पानी से भी खेलने दें. हां, धूल-मिट्टी में खेलने के बाद उनके हाथ-पैर अच्छे से धुलवाना न भूलें.

2. अगर किसी को धूल और धुएं से एलर्जी है तो घर से बाहर निकलने से पहले नाक पर रुमाल रखना चाहिए. बचाव ही एलर्जी का इलाज है.

3. जिन लोगों को ठंड से एलर्जी है, वे ठंडी और खट्टी चीज़ों जैसे कि अचार, इमली, आइस्क्रीम आदि के इस्तेमाल से बचें.

Ways To Prevent Allergies

4. गंदगी से एलर्जी वाले लोगों को समय-समय पर चादर, तकिए के कवर और पर्दे भी बदलते रहना चाहिए. कार्पेट यूज़ न करें या फिर उसे कम से कम 6 महीने में ड्रायक्लीन करवाते रहें.

5. जिस दवा से एलर्जी है, उसे खाने से बचें. डॉक्टर को ऐसी एलर्जी के बारे में ज़रूर बताएं.

6. किचन में एग्जॉस्ट फैन ज़रूर लगवाएं और खाना पकाते समय उसे चलाएं.

7. घर को हमेशा बंद न रखें. घर को खुला और हवादार बनाए रखें, ताकि साफ़ हवा आती रहे.

8. खिड़कियों में महीन जाली लगवाएं और जाली वाली खिड़कियों को हमेशा बंद रखें, क्योंकि खुली खिड़की से कीड़े और मच्छर आपके घर में घुस सकते हैं.

9. दीवारों पर फफूंद और जाले हो गए हों, तो उन्हें साफ़ करते रहें, क्योंकि फफूंद के कारण भी एलर्जी हो सकती है.

10. बारिश के मौसम में फूल वाले प्लांट्स को घर के अंदर न रखें.

Allergies

11. योग और नैचुरोपैथी एलर्जी से लड़ने में काफ़ी कारगर होते हैं. एलर्जी से बचने के लिए पेट साफ़ रखना चाहिए. बहुत गर्म या बहुत ठंडा खाना नहीं खाना चाहिए. हमेशा साफ़ पानी पीना चाहिए. रोज़ाना क़रीब 15 मिनट अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका प्राणायाम करने से एलर्जी में फ़ायदा होता है, क्योंकि इनसे इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है.

12.  योग और नैचुरोपैथी एलर्जी से लड़ने में काफ़ी कारगर होते हैं. एलर्जी से बचने के लिए पेट साफ़ रखना चाहिए. बहुत गर्म या बहुत ठंडा खाना नहीं खाना चाहिए. हमेशा साफ़ पानी पीना चाहिए. रोज़ाना क़रीब 15 मिनट अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका प्राणायाम करने से एलर्जी में फ़ायदा होता है, क्योंकि इनसे इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है.

13. अगर जल्दी-जल्दी सर्दी और ज़ुकाम की एलर्जी हो तो सुबह उठकर गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीएं.

14. प्रदूषण से होने वाली एलर्जी से बचने के लिए गुनगुने पानी में तुलसी, नींबू, काली मिर्च और शहद डालकर पीएं.

15. बदलते मौसम में होने वाली एलर्जी से बचने के लिए खट्टी चीजें, जैसे- अचार और तली-भुनी चीजें खाने से परहेज़ करें.

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टाइगर श्रॉफ के इस वीडियो को मिल चुके हैं 16 लाख से ज़्यादा व्यूज, शिल्पा शेट्टी भी वीडियो देखकर हैरान (Tiger Shroff latest Gym Video has set internet on fire, Celebrities Are praising him)

फिल्म इंडस्ट्री के स्टार्स फिटनेस के प्रति बेहद सचेत रहते हैं. वे अक्सर फैन्स के साथ फिटनेस वीडियोज़ व टिप्स शेयर करते हैं और अपने आम लोगों को फिट रहने के लिए प्रेरित करते हैं. इन्हीं में से एक हैं टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff). इन दिनों सोशल मीडिया पर टाइगर का जिम वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह 200 किलोग्राम का वजन उठाते नजर आ रहे हैं. टाइगर ने वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, ‘जिम में इस तरह से कड़ी मेहनत करते हुए काफी वक्त हो गया, 200 किलोग्राम. हाई स्कूल के दिनों में बहुत हल्का महसूस किया करता था.” टाइगर के इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर अब तक 16 लाख से भी ज्यादा लोग देख चुके हैं.

Tiger Shroff

टाइगर के इस वीडियो को देखने के बाद ना केवल उनके प्रशंसक बल्कि फिल्म जगत की हस्तियां भी तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाए. यह वीडियो देखकर शिल्पा शेट्टी ने कमेंट किया..बाप रे. जबकि  उनके अलावा डीनो ने भी लिखा- ‘बेहतरीन, मेरे विचार से यह सबसे अच्छा व्यायाम है. वहीं ईशान खट्टर ने कमेंट करते हुए लिखा, सुपरह्यूमन. दूसरी ओर टाइगर श्रॉफ के फैन्स उन्हें हल्क और मास्टर जैसे कमेंट्स दे रहे हैं. आपको बता दें कि टाइगर श्रॉफ अंतिम बार फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 में नज़र आए थे.  इस फिल्म में उनके अलावा अनन्या पांडे और तारा सुतारिया भी थीं, हालांकि यह फिल्म बेहद चर्चा में थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के अनुसार परफॉर्म नहीं कर पाई थी. उनकी अगली फिल्म वॉर है. जिसमें वे रितिक रोशन के साथ नज़र आनेवाले हैं.

Tiger Shroff

कुछ दिनों पहले इस फिल्म का पोस्टर सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए टाइगर श्रॉफ ने लिखा था, ” इस लड़ाई में सिर्फ एक ही जीतेगा. रितिक रोशन, क्या आप हारने को तैयार हैं?’ रितिक ने भी शानदार अंदाज में टाइगर को जवाब दिया है, ऋतिक ने लिखा, ”यह एक जंग है. मेरा एक्शन मेरे शब्दों से ज्यादा धमाकेदार होगा. 2 अक्टूबर को तुमसे मिलता हूं.” आपको बता दें कि टाइगर श्रॉफ अपनी पर्सनल लाइफ के कारण भी खबरों में बने रहते हैं. सूत्रों के अनुसार वे बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पटानी को डेट कर रहे हैं और दोनों को अक्सर एक साथ लंच डेट पर देखा जाता है.
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डिप्रेशन को ऐसे करें मैनेज (Self Help: Tips For Managing Depression)

Tips For Managing Depression
डिप्रेशन को ऐसे करें मैनेज (Self Help: Tips For Managing Depression)

डिप्रेशन ऐसी नकारात्मक भावना, जहां आपकी सारी ऊर्जा लगभग ख़त्म हो जाती है, उम्मीदें, आशाएं, ख़ुशियां… सब कुछ धूमिल-सी नज़र आती हैं. ज़िंदगी बेकार लगने लगती है… ऐसा महसूस होता है जैसे इन परिस्थितियों से निकलना अब नामुमकिन है, ज़िंदा रहना मुश्किल लगने लगता है. ऐसे में बहुत ज़रूरी हो जाता है कि आप ख़ुद कुछ प्रयास करें, ताकि अपने इस डिप्रेशन को मैनेज कर सकें और पॉज़िटिव सोच अपना सकें.

बाहर जाएं, कनेक्टेड रहें: यह सच है कि डिप्रेशन के दौरान बाहर जाना और लोगों से मिलना-जुलना बेहद मुश्किल काम है, क्योंकि आपमें वो ऊर्जा नहीं रहती, लेकिन थोड़ा-सा प्रयास आपकी मदद कर सकता है. सोशल गैदरिंग्स में जाएं, दोस्तों से मिलें, रिश्तेदारों से कनेक्टेड रहें. अकेलापन आपकी तकलीफ़ और बढ़ाएगा. बेहतर होगा, नए दोस्त बनाएं और पुरानों से मिलना-जुलना शुरू करें. आपके क़रीबी हमेशा आपकी मदद करने को तत्पर रहेंगे, इसलिए अपनी तकलीफ़ उनसे शेयर करें, इससे आपका मूड बदलेगा और मन हल्का होगा.

किस तरह से कनेक्ट करें?

  • जिनके साथ आप सुरक्षित महसूस करते हों और जिन पर विश्‍वास करते हों, उनसे मिलें.
  • मिलने का अर्थ है आमने-सामने मिलना. यह सही है कि सोशल नेटवर्किंग और फोन कॉल्स से भी कनेक्ट किया जा सकता है, लेकिन फ़ायदा अधिक तभी होगा, जब फेस टु फेस मिलेंगे.
  • दूसरों की सहायता करने का मन बनाएं. दूसरों के लिए कुछ करेंगे, तो आपको कहीं न कहीं संतुष्टि महसूस होगी. मदद चाहे छोटी ही क्यों न हो, किसी के काम आने की भावना आपको पॉज़िटिव बनाएगी.
  • पेट्स रखें और उसके साथ समय बिताएं. यह काफ़ी कारगर तरीक़ा है डिप्रेशन से निपटने का. जानवरों से प्यार करते हैं, तो उनकी केयर करें, इससे आप बेहतर महसूस करेंगे.
  • एक्सरसाइज़, वर्कआउट, योग व मेडिटेशन करें. यह काफ़ी अच्छा उपाय है. इससे आप ऊर्जा व नई शक्ति महसूस करेंगे. मेडिटेशन व योग से मन शांत होगा और नकारात्मक भाव बाहर निकलेंगे.
  • एक्सपर्ट की मदद लें. हिचकिचाएं नहीं. आप सच में अच्छा महसूस करेंगे. ज़िंदगी को देखने का नज़रिया बदलेगा और डिप्रेशन से बाहर आने में मदद मिलेगी.

कनेक्शन के बेस्ट टिप्स

  • किसी क़रीबी या भरोसेमंद से अपनी तकलीफ़ व दुख का कारण शेयर करें.
  • किसी दोस्त के साथ कॉफी या टी डेट पर जाएं.
  • मूवी या डिनर प्लान करें.
  • किसी पुराने दोस्त को कॉल करें.
  • कोई हॉबी क्लास जॉइन कर लें.

अच्छा महसूस करानेवाली गतिविधियां करें: जिन बातों से, जिन गतिविधियों से आप रिलैक्स्ड और ऊर्जावान महसूस करते हों, उन पर ध्यान दें. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं. शेड्यूल बनाएं और दिनभर में फन एक्टिविटीज़ के लिए टाइम फिक्स करें.

कैसे करें?

  • जो चीज़ें आपको पहले मज़ेदार लगती थीं, उन्हें फिर करना शुरू करें.
  • यह सच है कि आपका मन नहीं करेगा, ये तमाम चीज़ें करने का, लेकिन ख़ुद को फोर्स करें, क्योंकि एक बार आप इस तरह की फन एक्टिविटीज़ में ख़ुद को व्यस्त कर लेंगे, तो आपको विश्‍वास ही नहीं होगा कि कितना बेहतर महसूस करेंगे.
  • हो सकता है कि एक बार में आप डिप्रेशन से बहुत ज़्यादा बाहर न आ पाएं, लेकिन धीरे-धीरे आप ख़ुद को अधिक सकारात्मक व ऊर्जावान महसूस करने लगेंगे.
  • आप कोई स्पोर्ट्स एक्टिविटी या स्विमिंग, डांस व साइकिलिंग जैसे शौक अपना सकते हैं.

अपनी हेल्थ को ज़रूर सपोर्ट करें

  • डिप्रेशन सबसे पहले आपकी नींद पर असर डालता है. या तो आप बहुत कम या बहुत अधिक सोने लगते हैं. अच्छी नींद लेने की कोशिश करें. हेल्दी स्लीप टेक्नीक्स के बारे में जानें और नींद पूरी लें. इससे आपको रेस्ट मिलेगा और आप फ्रेश फील करेंगे.
  • स्ट्रेस को बढ़ने न दें, क्योंकि स्ट्रेस से डिप्रेशन और बढ़ सकता है. उन तमाम तत्वों पर ध्यान दें, जो स्ट्रेस बढ़ाते हैं, जैसे- काम का प्रेशर, आर्थिक समस्या, ख़राब रिलेशनशिप… बेहतर होगा इन सबसे निपटने के तरीक़ों पर ध्यान दें. एक्सपर्ट की सहायता भी ले सकते हैं.
  • रिलैक्सेशन तकनीकों को अपनाएं. ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ करें, ध्यान करें, म्यूज़िक सुनें, मसल रिलैक्सेशन तकनीक सीखें.

वेलनेस टूलबॉक्स

  • अपने बारे में सकारात्मक बातें लिखें.
  • लिस्ट बना लें कि आपको अपनी कौन-सी बातें और आदतें सबसे ज़्यादा पसंद हैं.
  • कोई फनी मूवी या टीवी सीरीज़ देखें.
  • म्यूज़िक सुनें.
  • नेचर में समय बिताएं. समंदर के किनारे या किसी पार्क में सुबह-शाम जाएं.
  • हॉट बाथ लें. जल्दबाज़ी न करके आराम से गर्म पानी से नहाएं, इससे शरीर हल्का लगेगा.
  • ख़ुद को किसी न किसी काम में बिज़ी रखें. हेल्दी डायट लें. मनपसंद डिश बनाएं.

एक्टिव रहने की कोशिश करें: एक्सरसाइज़ डिप्रेशन से लड़ने का सबसे बेहतर तरीक़ा है. शोध कहते हैं कि एक्सरसाइज़ डिप्रेशन से लड़ने में उतनी ही कारगर है, जितनी दवा. इसके अलावा एक्सरसाइज़ से डिप्रेशन के दोबारा होने की संभावना भी कम हो जाती है.

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एक्सरसाइज़ से मूड को बूस्ट कैसे करें?

  • यह सच है कि डिप्रेशन के चलते एक्सरसाइज़ का मन बनाना बेहद मुश्किल है, लेकिन एक बार आप इच्छाशक्ति दिखा देंगे, तो यह बेहद फ़ायदा पहुंचाएगी.
  • रिसर्च बताते हैं कि डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति को एक्सरसाइज़ से ऊर्जा मिलती है और हताशा कम होती है.
  • रिदमवाली एक्सरसाइज़ अधिक फ़ायदेमंद होती है, जैसे- वॉकिंग, वेट ट्रेनिंग, स्विमिंग या डान्सिंग.
  • किसी क्लब के मेंबर बनकर अन्य लोगों के साथ एक्सरसाइज़ करना और बेहतर परिणाम देगा.
  • घर में अगर पेट्स हैं, तो उनके साथ ईवनिंग वॉक पर जाएं.

हेल्दी खाएं, डिप्रेशन से लड़नेवाली डायट फॉलो करें: जैसा खावे अन्न, वैसा होवे मन… ये कहावत यूं ही नहीं बनी है. हम जो खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे शरीर व मन पर पड़ता है. फैटी, ऑयली, कैफीन या अल्कोहल जैसी चीज़ों का सेवन कम करें, क्योंकि ये आपके हार्मोंस पर असर करते हैं और मूड पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं.

कैसी हो आपकी डायट?

  • शुगर और रिफाइंड कार्ब्स का सेवन कम कर दें. फ्रेंच फ्राइज़, पास्ता, एरिएटेड ड्रिंक्स कुछ समय के लिए ही बेहतर महसूस करवाते हैं. आगे चलकर ये आपके मूड को प्रभावित कर सकते हैं.
  • दिन में 3-4 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं. खाने में बहुत ज़्यादा अंतर रखेंगे, तो चिड़चिड़ापन बढ़ेगा.
  • विटामिन बी ज़रूर लें, क्योंकि फॉलिक एसिड और विटामिन बी 12 की कमी से डिप्रेशन बढ़ता है. हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, अंडा, बींस, सिट्रस फ्रूट्स अधिक लें.
  • ओमेगा 3 फैटी एसिडयुक्त भोजन लें. मूड को संतुलित रखने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. फैटी फिश और ठंडे पानी की मछलियों के तेल का सेवन करें.

ज़रूरी है सनलाइट का डेली डोज़: सनलाइट सेरोटोनिन हार्मोंस के स्तर को बढ़ाकर मूड बेहतर करने में मददगार है. जब भी मौक़ा मिले, रोज़ाना 15 मिनट की धूप ज़रूर लें.

कब और कैसे लें यह डेली डोज़?

  • आप लंच टाइम में बाहर जा सकते हैं, कुछ देर टहलें.
  • आसपास कोई गार्डन वगैरह हो, तो वहां जा सकते हैं.
  • अपने घर पर और वर्कप्लेस में जितना संभव हो, नेचुरल लाइट में रहने की कोशिश करें.
  • छुट्टी के दिन सुबह-सुबह की धूप लेने के लिए छत का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर रोज़ाना वॉक के लिए भी जा सकते हैं.

विंटर ब्लूज़ से कैसे निपटें?

  • सर्दियों के मौसम में सनलाइट वैसे भी कम होती है और इस मौसम में डिप्रेशन अधिक महसूस होता है, जिसे सीज़नल इफेक्टिव डिसऑर्डर कहते हैं. लेकिन यदि आप प्रयास करें, तो सालभर आपका मूड बेहतर बना रह सकता है.

नकारात्मक सोच को चुनौती दें: ज़िंदगी से ऊब महसूस होना, कमज़ोरी-थकान लगना, निराशा महसूस होना… इस तरह के नकारात्मक भाव डिप्रेशन के चलते आते हैं. आपको यह बात मन में बैठा लेनी होगी कि ये तमाम नकारात्मक विचार असल में हैं ही नहीं. आपको अपने माइंड को पॉज़िटिव सोचने के लिए प्रशिक्षित करना होगा. हालांकि यह मुश्किल है, लेकिन लगातार प्रयास से यह संभव हो सकता है.

इस तरह के विचारों से रहें दूर

बहुत कुछ या कुछ भी नहीं सोचना: ब्लैक एंड व्हाइट में चीज़ों को न देखें. ये सही है और ये ग़लत… ऐसा नहीं होता. बीच का रास्ता भी होता है.

बुरे अनुभव को मन में बैठा लेना: एक जगह अगर असफलता हाथ लगी हो, तो इसका यह मतलब नहीं कि हर बार और हर जगह ही असफलता मिलेगी. अपने बुरे अनुभवों को मन में बैठा न लें.

पॉज़िटिव बातों को भूलकर स़िर्फ निगेटिव ही याद रखना: आपके साथ बहुत कुछ अच्छा होता है, लेकिन आप उसे अधिक समय तक याद नहीं रखते, लेकिन कोई एक बात ग़लत हो, तो उसे बार-बार याद करते हैं. इस सोच से बाहर निकलें. अच्छा-बुरा सभी के साथ होता है और दोनों को ही समान रूप से लें और जब मन निराश हो, तो पॉज़िटिव बातों को याद करें.

पॉज़िटिव बातों को कम आंकना: कुछ अच्छा हो, तो उसके बारे में भी यह सोचना कि ये तो सामान्य-सी बात है, इसमें कुछ ख़ास क्या है… इस तरह के विचारों से दूर रहें और हर छोटी-छोटी बात में ख़ुशियां ढूंढ़ें.

फ़ौरन निष्कर्ष पर पहुंच जाना: प्रयास करने से पहले ही यह सोच लेना कि परिणाम ग़लत ही होगा या हमें असफलता ही मिलेगी… ग़लत व नकारात्मक पहलू है. इससे दूर रहें.

अपने बारे में इमोशनली निगेटिव सोचना: ‘मैं ज़िंदगी में कुछ नहीं कर सकता’ या ‘मेरे साथ कभी भी कुछ अच्छा नहीं हो सकता’… इस तरह की बातों से अपने बारे में निगेटिविटी न बढ़ाएं. हम जो सोचते हैं हम वही बन जाते हैं, इसलिए अपनी सोच को पॉज़िटिव बनाएं.

बहुत अधिक नियमों में ख़ुद को बांध लेना: अपने लिए बहुत स्ट्रिक्ट रूल्स बना लेना, जिससे आप ज़िंदगी जीना ही भूल जाएं, आपको नकारात्मकता की ओर ले जाएंगे. फ्लेक्सिबल बनें.

कब लें एक्सपर्ट एडवाइस?

जब तमाम सेल्फ हेल्प टेक्नीक्स के बाद भी आपको लग रहा हो कि आपका डिप्रेशन ठीक नहीं हो रहा, तब आपको एक्सपर्ट के पास जाने से हिचकिचाना नहीं चाहिए. आपको अपनी मदद ख़ुद ही करनी होगी. ये न सोचें कि एक्सपर्ट के पास जाना किसी कमज़ोरी की निशानी है. अगर शरीर में तकलीफ़ हो, तो आप डॉक्टर के पास जाते ही हैं, तो मन की तकलीफ़ के लिए क्यों नहीं जाना चाहते?

हां, एक बात का ध्यान रहे कि प्रोफेशनल हेल्प के बाद भी ये सेल्फ हेल्प टेक्नीक्स फॉलो करते रहें और यह बात भी मन में बैठा लें कि डिप्रेशन ठीक हो सकता है और आप इससे निकलकर बेहतर व हैप्पी लाइफ जी सकते हैं.

– गीता शर्मा

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एसिडिटी से हैं परेशान? तो अपनाएं ये उपाय (Home Remedies To Get Rid Of Acidity)

एसिडिटी (Acidity) की समस्या (Problem) बहुत आम होती जा रही है. गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या के कारण अक्सर लोगों को एसिडिटी की समस्या से दोचार होना पड़ता है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम आपको एसिडिटी दूर करने के आसान घरेलू उपाय (Easy Home Remedies) बता रहे हैं.

Acidity

– जब भी एसिडिटी का अटैक हो, तो सबसे बेहतर उपाय है एक पका केला खा लें. केला थोड़ा ज़्यादा पका होगा, तो असर अच्छा होगा. केले में मौजूद पोटैशियम के कारण इसमें पीएच अधिक होता है, जो एसिडिटी को ख़त्म करता है.
– तुलसी के कुछ पत्ते चबा लें. तुलसी पेट में पेप्टिक एसिड के प्रभाव को कम करके एसिडिटी को कम करती है. यह पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाती है.
– ठंडा दूध पीने से भी एसिडिटी कम होती है. इसमें मौजूद कैल्शियम एसिडिटी को कम करता है. ठंडा होने के कारण यह जलन को कम करता है. ध्यान रहे कि इसमें शक्कर न मिलाएं. अगर अधिक एसिडिटी है, तो इसमें 1 चम्मच देसी घी मिलाकर लें.
– सौंफ न स़िर्फ पाचक होती है, बल्कि ठंडक देकर एसिडिटी और कब्ज़ को भी दूर करती है. इसके अलावा यह मुंह के छालों में भी लाभदायक है.

Home Remedies To Get Rid Of Acidity
– एसिडिटी होने पर जीरा चबा-चबाकर खाएं या फिर उसे पानी में उबालें और ठंडा होने पर यह पानी पिएं.
– लौंग भी बहुत फ़ायदेमंद है. जब भी एसिडिटी हो, तो एक लौंग को चबाकर उसका तेल मुंह में ही कुछ देर रखें. इससे एसिडिटी भी दूर होती है, सलाइवा बढ़ता है, जिससे पाचन क्रिया भी बेहतर होती है.
– इलायची के लिए वर्षों से आयुर्वेद में भी यह माना जाता रहा है कि इसमें तीनों दोषों- वात, पित्त और कफ़ को संतुलित करने के गुण हैं. एसिडिटी होने पर दो इलायची चबाकर खाएं (छिलके के साथ भी खा सकते हैं) या फिर फ़ौरन राहत के लिए इलायची के दानों का पाउडर पानी में मिलाकर उबालें और इस जूस को ठंडा होने पर पिएं.

Home Remedies To Get Rid Of Acidity
– पुदीने के पत्तों को काटकर पानी में उबालें और ठंडा करके इस पानी को पिएं. यह एसिडिटी के कारण होनेवाले दर्द व जलन को भी कम करता है.
– अदरक न स़िर्फ पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है, बल्कि पेट को एसिड के प्रभाव से भी बचाता है. अदरक के टुकड़े को चबाने से एसिडिटी से राहत मिलती है. अगर आपके लिए उसे चबाना संभव नहीं, तो उसे पानी के साथ उबालकर पिएं या फिर क्रश करके गुड़ के साथ चूसें.
– आंवला कफ़ और पित्त से राहत देता है. एसिडिटी को दूर रखने का सबसे अच्छा उपाय है कि रोज़ाना 1 टीस्पून आंवला पाउडर लें.

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जानिए छवि मित्तल ने कैसे लूज़ किया अपना पोस्ट प्रेग्नेंसी वेट (Weight loss: We tell you how exactly actress Chhavi Mittal lost all the post-pregnancy weight!)

कुछ महीनों पहले टीवी एक्ट्रेस छवि मित्तल दूसरी बार मां बनी हैं. उन्होंने 13 मई को बेटे को जन्म दिया. छवि सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. उन्होंने प्रेग्नेंसी के दौरान भी अपने फैन्स के साथ अपनी पूरी जर्नी शेयर की. वे प्रेग्नेंसी के समय वर्कआउट वीडियोज़ शेयर करके फैन्स को फिट व ऐक्टिव रहने के लिए प्रोत्साहित करती रहती थीं. छवि ने प्रेग्नेंसी से जुड़े कई मिथक से पर्दा हटाया. छवि ने मां बनने की परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया. गर्भावस्था के दौरान महिलाएं किस तरह की समस्याओं से गुजरती हैं, छवि ने उस पर भी कई पोस्ट लिखे और इसके लिए उन्हें बहुत सराहा गया. बेटे के जन्म के बाद भी छवि अपनी लाइफ के बारे में व बच्चे के जन्म के बाद आनेवाली परेशानियों का जिक्र करती रहती थीं.  हाल ही में छवि ने इंस्टाग्राम पर बिफोर एंड आफ्टर प्रेग्नेंसी की कोलाज पिक्चर शेयर की. इस फोटो को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि छवि ने अपनी प्रेग्नेंसी वेट से पूरी तरह छुटकारा पा लिया है. फोटो में वे  काफी हॉट व फ्रेश दिख रही हैं.

Chhavi Mittal

 

इंस्टाग्राम पर यह फोटो शेयर करते हुए छवि ने पोस्ट लिखा. उन्होंने बताया पोस्ट प्रेग्नेंसी वेट लॉस एक कभी न खत्म होनेवाला सफर है. इस पिक्चर को देखकर मुझे एहसास हो रहा है कि मैं तो अब भूल भी चुकी हूं कि मेरा बेबी बम्प कितना बड़ा था. उस दौरान मैं बहुत थकी हुई महसूस करती थी. अब मैं फिर से प्रेग्नेंसी के बाद वजन कम करने की बात करती हूं. बहुत महिलाएं मुझसे पूछती हैं कि मैंने इतना वजन कम कैसे किया. वैसे मैं फिलहाल बहुत ज़्यादा नहीं कर रही हूं, क्योंकि बच्चा छोटा है. लेकिन फिलहाल में सिर्फ एक ही चीज़ पर ध्यान देती हूं वो है अनुशासन. मैं शक्कर नहीं खाती और मैंने डेयरी प्रोडक्ट्स लेना बंद कर दिया है. हां, दूध पीने से दूध नहीं बनता, जैसे अंडे खाने से कोई अंडे नहीं दे सकता. मुझे 4 किलो और कम करना है, हालांकि सी सेक्शन के बाद बॉडी पहले जैसी नहीं रहती. सर्जरी के तीन महीने बाद भी मैं स्ट्रगल कर रही हूं. लेकिन जल्द ही सब ठीक हो जाएगा और अच्छे दिन वापस आएंगे. दो सिर्फ डायट में दो चीज़ें अवॉइड से किलो से ज़्यादा इंचेज में लूज कर रही हूं. इसलिए मैं खुश हूं. यानी छवि मित्तल ने साफ-साफ बताया कि शक्कर छोड़ने और डेयरी प्रोडक्ट्स का त्याग करके आसानी से वजन कम किया जा सकता है.

Chhavi Mittal

35 साल की छवि ने साल 2005 में टीवी डायरेक्टर मोहित हुसैन से शादी की थी । साल 2012 में छवि ने एक बेटी अरीजा को जन्म दिया था.

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स्पर्म काउंट बढ़ाने के आसान देसी उपाय (Super Foods That Increase Sperm Count)

एक स्वस्थ पुरुष के शरीर में प्रति सेकेंड 1,500 स्पर्म्स यानी शुक्राणु बनते हैं, लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी तनावपूर्ण ज़िंदगी व आधुनिक जीवनशैली के कारण बहुत से पुरुष शुक्राणुओं की कमी की समस्या का सामना कर रहे हैं. इतना ही नहीं, शुक्राणुओं की गुणवत्ता भी घट रही है. स्पर्म काउंट कम होने से उनकी फर्टिलिटी पर बुरा असर पड़ता है. एक अध्ययन के अनुसार, पुरुषों की फर्टिलिटी से जुड़ी 90 फ़ीसदी समस्याएं शुक्राणुओं की कमी के कारण होती हैं.  आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि आपके स्पर्म काउंट का सीधा संबंध आपके खानपान से है. आपकी डायट जितनी अच्छी होगी, स्पर्म काउंट उतना बेहतर ही होगा. इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों की जानकारी दे रहे हैं, जो  शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ आपकी सेक्सलाइफ बेहतर बनाने में मददगार सिद्ध होंगे. यदि आप अपना परिवार बढ़ाने की सोच रहे हैं तो अपने मेनू में इन चीज़ों को शामिल कीजिए.

Foods That Increase Sperm Count

स्पर्म प्रोडक्शन के लिए ऑयस्टर
शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में ज़िंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ऑयस्टर यानी घोंघा ज़िंक का उत्तम स्रोत है. यह स्पर्म प्रोडक्शन यानी शुक्राणुओं का उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है. अतः रोज़ाना 50 ग्राम ऑयस्टर का सेवन करें.

स्वस्थ स्पर्म के लिए अंडे
प्रोटीन व विटामिन ई से भरपूर अंडे स्वस्थ शुक्राणुओं के उत्पादन में मदद करते हैं. स़िर्फ इतना ही नहीं, यह स्पर्म काउंट बढ़ाने के साथ-साथ प्रजनन क्षमता को कम करने वाले फ्री रैडिकल्स से लड़ने में भी मदद करते हैं. इसलिए रोज़ाना दो अंडे खाएं.

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एंटीऑक्सीडेंट्स के लिए डार्क चॉकलेट
डार्क चॉकलेट्स में अमीनो एसिड्स पाए जाते हैं जो स्पर्म काउंट को दोगुना करने के साथ ही सीमन (वीर्य) को गाढ़ा बनाने में भी मदद करते हैं. इसके अलावा डार्क चॉकलेट में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो पुरुषों की फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाले फ्री रैडिकल्स को दूर करने में मददगार होते हैं. लेकिन बहुत ज़्यादा चॉकलेट नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इससे वज़न बढ़ सकता है, जिसकी वजह से शरीर में टेस्टोस्टेरॉन नामक सेक्स हार्मोन कासंतुलन बिगड़ जाता है, नतीजतन स्पर्म काउंट कम होता है. दिनभर में एक टुकड़ा डार्क चॉकलेट काफ़ी है. चॉकलेट जितना डार्क होगा, स्पर्म काउंट बढ़ाने में उतना ही फ़ायदेमंद होगा.

शुक्राणुओं की गतिशीलता के लिए लहसुन
अगर लहसुन की तेज़ महक से आपको कोई परेशानी नहीं है तो इसका सेवन शुरू कर दीजिए. इसमें दो जादुई तत्व पाए जाते हैं- पहला है एलिसिन, जो पुरुषों के सेक्सुअल ऑर्गन में ब्लड फ्लो को बढ़ाता है और स्पर्म को क्षतिग्रस्त होने से बचाता है और दूसरा है सेलेनियम- यह एक प्रकार का एंटीऑक्सिडेंट है, जो शुक्राणुओं की गतिशीलता को बढ़ाता है. प्रतिदिन दो लहसुन की कलियां खाना पर्याप्त होगा.

कामेच्छा के लिए केला

Banana
यह फल पुरुषों के सेक्सुअल हेल्थ के लिए अच्छा होता है. केले में ब्रोमेलिन नामक एंज़ाइम पाया जाता है, जो पुरुषों की कामेच्छा बढ़ाने व सेक्स हार्मोन्स को नियंत्रित करने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी, ए और बी 1 पाया जाता है, जो पुरुषों के शरीर में शुक्राणु पैदा करने की क्षमता को बढ़ाता है.

सेक्स हार्मोन्स के लिए कद्दू के बीज
इसमें मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड मेल ऑर्गन्स में रक्त संचार बढ़ाते हैं. रोज़ाना एक मुट्ठी कद्दू के बीज खाने से शरीर में टेस्टोस्टेरॉन नामक सेक्स हार्मोन का स्राव व स्पर्म काउंट बढ़ता है.

ऐक्टिव शुक्राणुओं के लिए ब्रोकोली
शरीर में विटामिन ए की कमी से प्रजनन क्षमता कम होती है, क्योंकि इसकी कमी से स्पर्म्स सुस्त हो जाते हैं. इससे बचने के लिए अपने खाने में विटामिन ए से भरपूर ब्रोकोली शामिल करें. इसका सेवन करने से शुक्राणु ऐक्टिव व हेल्दी बनेंगे.

स्पर्म काउंट के लिए अखरोट
Walnuts for sperm count

ओमेगा 3 फैटी एसिड स्पर्म काउंट व मेल ऑर्गन्स में ब्लड फ्लो बढ़ाने में मदद करता है. अखरोट ओमेगा 3 फैटी एसिड का बढ़िया स्रोत है. रोज़ाना एक मुट्ठीअखरोट खाने से स्पर्म की संख्या बढ़ेगी और उनका आकार भी बेहतर होगा.

टेस्टोस्टेरॉन के लिए जिनशेंग
सालों से इनफर्टिलिटी की समस्या को दूर करने के लिए इस चमत्कारी पौधे का प्रयोग किया जा रहा है. यह शरीर में टेस्टोस्टेरॉन के लेवल को बढ़ाता है और पुरुषों के जननांगों में ब्लड सर्कुलेशन को तेज़ करता है. अतः जिनशेंग युक्त चाय पीएं या रात में सोने से पहले आधा टीस्पून जिनशेंग पाउडर ग्रहण करें.

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ब्लड प्रेशर से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई (Myths And Facts About Blood Pressure)

हाइपरटेंशन (Hypertension) यानी हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure), बदलते लाइफस्टाइल के चलते होने वाली एक आम स्वास्थ्य समस्या है. हालांकि अधिकांश लोग इस बात से बेख़बर होते हैं कि वो ब्लड प्रेशर से संबंधित बीमारी की गिरफ़्त में हैं. चूंकि इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं, इसलिए इस रोग को साइलेंट किलर भी कहा जाता है. आंकड़ों के मुताबिक़, दुनिया में हर तीसरा व्यक्ति इस बीमारी से ग्रसित है. हालांकि कई लोग इस रोग से जुड़ी कुछ भ्रांतियों को सच मानकर टेंशन में आ जाते हैं, तो चलिए जानते हैं ब्लड प्रेशर से जुड़ी 10 भ्रांतियां और उनकी वास्तविकता.

Myths About Blood Pressure
भ्रम- अगर ब्लड प्रेशर कम हो जाए, तो नमक खाने से वह नॉर्मल हो जाता है.
सच– अगर आप यह सोचते हैं कि ब्लड प्रेशर कम होने पर नमक खाने से वह नॉर्मल हो जाता है, तो आपकी यह धारणा बिल्कुल ग़लत है. ब्लड प्रेशर कम है या ज़्यादा यह हम ख़ुद तय नहीं कर सकते. इसके बारे में हमें सही जानकारी स़िर्फ डॉक्टर ही दे सकता है. हालांकि जिन लोगों का ब्लड प्रेशर ज़्यादा रहता है, उन्हें कम नमक खाना चाहिए.

भ्रम- ब्लड प्रेशर कम हो जाने पर दवाइयों का सेवन बंद कर देना चाहिए.
सच- ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है जो जीवनभर व्यक्ति का पीछा नहीं छोड़ती. इससे पूरी तरह से निजात पाना नामुमक़िन है, लेकिन इसे कंट्रोल किया जा सकता है. इसलिए अगर दवाइयों के सेवन से ब्लड प्रेशर कम हो गया हो, तब भी दवाइयां बंद नहीं करनी चाहिए. ऐसी स्थिति में डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए.

भ्रम- वाइन दिल के लिए सेहतमंद होती है, इसलिए अत्यधिक मात्रा मंें इसका सेवन करने पर भी यह नुकसान नहीं पहुंचाती.
सच- वाइन फ़ायदा तभी पहुंचाती है, जब इसका सेवन सीमित मात्रा में किया जाए. ख़ासकर जिन लोगों को हाइपरटेंशन की समस्या है उन लोगों को अल्कोहल का सेवन करने से बचना चाहिए या फिर बहुत सीमित मात्रा में पीना चाहिए. ऐसे लोग अगर ज़्यादा शराब पीते हैं तो उन्हें हार्ट फेल, स्ट्रोक, अनियमित हार्टबीट जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

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भ्रम– हाई ब्लड प्रेशर ज़िंदगी भर ठीक नहीं हो सकता.
सच- हां, यह सच है कि ब्लड प्रेशर ज़िंदगी भर व्यक्ति के साथ रहता है, लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल की मदद से इस समस्या को काफ़ी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. इसे कंट्रोल करने के लिए हेल्दी डायट लें, वेट कंट्रोल करें व खाने में कम नमक का इस्तेमाल करें. इसके अलावा शराब और सिगरेट से परहेज़ करें.

भ्रम- जब ब्लड प्रेशर हाई होता है तो सिरदर्द होता है.
सच- यह धारणा बिल्कुल ग़लत है, क्योंकि सिरदर्द से ये पता नहीं चलता कि ब्लड प्रेशर बढ़ गया है, लेकिन यह सच है कि अगर आपको किसी तरह का दर्द महसूस होता है, तो इससे हार्ट रेट बढ़ जाती है.

भ्रम- हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को केला नहीं खाना चाहिए.
सच- यह बिल्कुल भी सच नहीं है कि ब्लड प्रेशर के मरीज़ केला नहीं खा सकते. सच्चाई तो यह है कि अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर है तो आपको केले का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि केला ब्लड प्रेशर के स्तर को कम करने में मदद करता है.

भ्रम- शरीर में किसी तरह की परेशानी या बीमारी महसूस नहीं होने का अर्थ यह है कि आपको ब्लड प्रेशर की समस्या नहीं है.
सच- अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो यह ग़लत है, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर होने पर शरीर में तुरंत किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं होती है. यह रोग धीरे-धीरे शरीर के अंगों को नुक़सान पहुंचाना शुरू करता है और आगे चलकर यह हार्ट व किडनी फेल होने के अलावा हार्ट स्ट्रोक जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है.

भ्रम- एक्सरसाइज़ व डायट से बीपी कंट्रोल हो जाए तो इससे डरने की ज़रूरत नहीं है.
सच- वेट कंट्रोल, हेल्दी डायट और एक्सरसाइज़ की मदद से हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह समस्या जड़ से ख़त्म हो गई है. यह समस्या कंट्रोल में रहे इसके लिए अनुशासित जीवनशैली का पालन करने के साथ समय-समय पर बीपी चेक करवाना आवश्यक है.

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भ्रम– हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़ रक्तदान नहीं कर सकते.
सच- हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़ भी रक्तदान कर सकते हैं, बशर्ते रक्तदान के समय आपका बीपी 180 सिस्टोलिक से कम और 100 डायस्टोलिक तक होना चाहिए. बीपी की गोलियों का रक्तदान से कोई संबंध नहीं है, लेकिन हां, सर्दी-ज़ुकाम, पेट की समस्या या एंटीबायोटिक्स लेते समय रक्तदान करने
से बचें.

भ्रम- गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर होना आम है, इससे कोई गंभीर समस्या नहीं होती.
सच– गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की संभावना उन महिलाओं में अधिक होती है, जिन्हें पहले से हाई बीपी की समस्या होती है. ज़्यादातर मामलों में गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर ज़्यादा होना परेशानी पैदा नहीं करता, जबकि कुछ मामलों में यह विकासशील भ्रूण और मां के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है.

प्रतिदिन कितना खाएं नमक? (How Much Salt Should You Have per Day?)

खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही नमक स्वास्थ्य के लिए भी ज़रूरी है, मगर जिस तरह किसी भी चीज़ की अधिकता हानिकारक होती है, उसी तरह ज़रूरत से ज़्यादा नमक का सेवन भी आपकी सेहत बिगाड़ सकता है. अतः स्वस्थ रहने के लिए कैसे संतुलित रखें नमक की मात्रा? आइए, जानते हैं.

Salt
क्यों ज़रूरी है नमक?
नमक शरीर में पानी के स्तर को नियंत्रित करने के अलावा पाचन तंत्र व किडनी को ठीक से काम करने, ब्लड शुगर लेवल को कम करने, तनाव, अवसाद और अन्य भावनात्मक समस्याओं से भी राहत दिलाता है. यह मांसपेशियों को सही तरी़के से काम करने में भी मदद करता है. शरीर में नमक की मात्रा कम होने से कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ जाता है. साथ ही थकान, मांसपेशियों में जकड़न, चक्कर आना, भूख न लगना और लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है.

ज़्यादा मात्रा है हानिकारक
नमक शरीर के लिए ज़रूरी तो है, मगर इसकी अधिकता कई बीमारियों को न्योता देती है. अधिक नमक के सेवन से हाइपर टेंशन, हाई ब्लड प्रेशर का ख़तरा बढ़ जाता है, नतीजतन हार्ट अटैक और स्ट्रोक की संभावना भी बढ़ जाती है. ज़्यादा नमक से ख़ून में आयरन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे एसिडिटी बढ़ जाती है. भूख न लगने पर भी भूख का एहसास बना रहता है, जिससे शरीर में ज़्यादा कैलोरी बनने लगती है और मोटापा बढ़ता है.

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यूं संतुलित करें नमक
1. खाने में तेज़ नमक न खाएं.
2. नमकीन स्नैक्स कम से कम खाएं.
3. दही में नमक मिलाकर न खाएं.
4. तला हुआ भोजन कम खाएं.
5. बिना नमक मिला सलाद खाएं.
6. पापड़, चटनी, चिप्स, सॉल्टेड पीनट (मूंगफली), पॉपकॉर्न, सोया सॉस, कैचअप और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं.
7. हार्ट, किडनी व फेफड़ों के बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को लो सोडियम नमक खाना चाहिए.
8. सोडिमय क्लोराइड की मात्रा संतुलित करने के लिए अपनी डायट में ज़्यादा पोटैशियम वाली चीज़ें जैसे- फल व सब्ज़ियां शामिल करें.

उम्र के मुताबिक़ प्रतिदिन नमक का सेवन
विश्‍व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, हर व्यक्ति को उम्र के अनुसार नमक का सेवन कम करना चाहिए.
0-12 महीने- एक ग्राम से कम
1-3 साल- 2 ग्राम
4-6 साल- 3 ग्राम
7-10 साल- 4 ग्राम
11 साल और उससे ऊपर- 5 ग्राम

ये भी जानें
. हमारे शरीर में कुल नमक का 24 प्रतिशत हड्डियों में होता है.
. नमक में 40 प्रतिशत सोडियम और 60 प्रतिशत क्लोरीन होता है.
. आयोडिन की कमी से होने वाले गॉइटर रोग को दूर करने के लिए 1924 में आयोडिन युक्त नमक का प्रचलन शुरू हुआ.