food

* आलू के परांठे में एक्स्ट्रा स्वाद ऐड करने के लिए मिश्रण में साबूत धनिया कूटकर मिलाएं. 

* डोसे का आटा पीसते समय इसके मिश्रण में चावल व दाल के साथ आधा कटोरी चिवड़ा भी डालकर पीस लें. इससे डोसे कुरकुरे बनेंगे.

Smart Cooking Tricks

* ड्रायफ्रूट चॉकलेट का स्वाद लेना है, तो पिघले हुए चॉकलेट में सूखे मेवे मिलाकर उसे चिकनाई लगी थाली में फैला दें. ठंडा होकर चॉकलेट ड्रायफ्रूट्स में मिल जाएगी.

* हरी मिर्च व पुदीने को बारीक़ काटकर-सुखाकर पाउडर बना लें. इसे फ्लेवर हर्ब की तरह इस्तेमाल करें.

* एक टीस्पून देसी घी में राई का तड़का लगाकर इडली के घोल में मिलाने से इडली अधिक स्वादिष्ट बनती है.

* यदि मोटे आटे की पूरियां बनाएंगे, तो तेल कम लगेगा और पचने में भी आसान होगी. इसके अलावा पूरी के आटे में अरबी उबालकर मसलकर मिला लेने से पूरी कुरकुरी व स्वादिष्ट बनती है.

* फ्रूट डेज़र्ट सर्व करते समय ऊपर से स़फेद तिल व अलसी डालने से टेस्ट बढ़ जाएगा.

* सब्ज़ी बनाते समय मसाले के पेस्ट में लहसुन की मात्रा अधिक व अदरक की कम रखें, इससे ग्रेवी बढ़िया बनती है.

* इलायची, कालीमिर्च व लौंग को हल्का-सा भूनकर पाउडर बना लें. वेज-नॉनवेज स्टार्टर को सर्व करने से पहले उस पर यह पाउडर छिड़कें. स्टार्टर का स्वाद दुगुना हो जाएगा.

* फूलगोभी की सब्ज़ी खिली-खिली बने, इसके लिए सब्ज़ी बनाते समय उसमें दूध मिला दें.

* मठरी को खस्ता बनाने के लिए मैदे को दही से गूंधें, लेकिन दही खट्टा न हो, इस बात का ख़्याल रखें.

* यदि पोहे में तीन टेबलस्पून दूध मिला दिया जाए, तो जब आप बचे हुए पोहे को दोबारा गर्म करके खाएंगी, तब भी वो ताज़ा लगेगा.

* नाश्ते के लिए कुछ अलग ट्राई करना है, तो ढोकले के छोटे-छोटे टुकड़े करके बेसन के घोल में डुबोकर पकौड़े की तरह तल लें.

* यदि अंडे की भुर्जी में टमाटर का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो पल्प व बीज निकालकर टमाटर को बारीक़ काटकर डालें.

* यदि एप्पल पाई बनाते समय सेब को काटकर सिरके के पानी से धो लेंगे, तो पाई ख़ूबसूरत दिखेगी और सेब का रंग भी नहीं बदलेगा.

* इंस्टेंट अचार का स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें गन्ने या सेब का सिरका मिलाएं.

– ऊषा गुप्ता

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Benefits Of Cooking

कुकिंग थेरेपी: हेल्दी रहने का बेस्ट फॉर्मूला (Cooking Therapy: Benefits Of Cooking)

खाना बनाना और उसे दूसरों को खिलाना कई लोगों के शौक में शुमार होता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि खाना बनाने का यह शौक आपको हेल्दी भी रखता है, इसीलिए इसे कुकिंग थेरेपी का नाम दिया गया है. साइंटिस्ट्स अब यह दावे के साथ कहते हैं कि कुकिंग दरअसल एक थेरेपी है, जो आपको हेल्दी रखती है और आपके रिश्तों को भी बेहतर बनाती है.

साइंस के अनुसार कुकिंग दरअसल मेडिटेशन सेशन की तरह है: क्या कभी आपने इस ओर ध्यान दिया है कि स्ट्रेस से भरा दिन और आपकी थकान घर पर आने के बाद कुछ अच्छा पकाने की सोच मात्र से ही कम हो जाती है. बहुत बार ऐसा होता है कि आप कुछ स्वादिष्ट या अपना मनपसंद खाना बनाने की तैयारी करने की सोचते हैं और उसे बनाने के बाद जो संतुष्टि आपको मिलती है, उससे आपके दिनभर की थकान व तनाव दूर होता है. आप भले ही नियमित रूप से खाना न भी बनाते हों, लेकिन यदि आप ऐसा करते हैं, तो पाएंगे कि कुकिंग सेशन एक तरह से आपके लिए मेडिटेशन का काम करता है.

थेरेपिस्ट कुकिंग को मानसिक समस्याओं के इलाज के लिए प्रयोग में लाते हैं: डिप्रेशन, घबराहट, तनाव आदि के इलाज में अब बहुत-से सायकोलॉजिस्ट व थेरेपिस्ट कुकिंग कोर्सेस को थेरेपी की तरह यूज़ करने लगे हैं, क्योंकि जो व़क्त आप कुकिंग में लगाते हो, उससे आपका ध्यान नकारात्मक स्थितियों व बातों से हट जाता है और आप रिलैक्स महसूस करते हैं.

क्रिएटिव बनाती है आपको कुकिंग: एक्सपर्ट्स ने अपने शोधों में यह भी पाया है कि कुकिंग आपको क्रिएटिव बनाती है, क्योंकि आप अपने अनुसार रेसिपी को बनाने के नए-नए तरी़के सोचते हो, नया स्वाद क्रिएट करने की कोशिश करते हो, जिससे आपकी भी क्रिएटिविटी बढ़ती है. दूसरे, कुकिंग आपको पूरे माहौल में कंट्रोल का अनुभव महसूस कराती है. आपको लगता है कि अब आप अपने अनुसार स्वाद में बदलाव ला सकते हो और जब आपको तारी़फें मिलती हैं, तो आप पॉज़िटिव महसूस करते हो.

कुकिंग और मेंटल हेल्थ का सबसे बड़ा कनेक्शन है न्यूट्रिशन: जब आप कुकिंग करते हो, तो आप अपने पोषण, डायट व हेल्थ के प्रति अपने आप ही सचेत हो जाते हो. आपके हाथ में होता है कि कितना ऑयल डालना है, कितना नमक, कितने मसाले और आपका ब्रेन यही सोचने लगता है कि किस तरह से अपनी डिश को आप और हेल्दी बना सकते हो. इससे आपको संतुष्टि महसूस होती है कि आपका खाना हेल्दी है, क्योंकि आप अपने खाने की क्वालिटी को कंट्रोल करते हो.

कुकिंग जो ख़ुशी देती है, वो घर के अन्य काम नहीं देते: एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भले ही आप कुकिंग का शौक न रखते हों, लेकिन आप जब कुकिंग करते हैं, तो यह फ़र्क़ ज़रूर महसूस करते हैं कि खाना बनाने से जो ख़ुशी व संतुष्टि का अनुभव होता है, वह बिस्तर ठीक करने, कपड़े धोने या अन्य कामों से नहीं होता. इसके पीछे की वजह यह है कि कुकिंग अपने आप में रिवॉर्डिंग एक्सपीरियंस होता है, क्योंकि कहीं-न-कहीं सबकॉन्शियस माइंड में भी यह बात रहती है कि खाना बनाने के बाद आपको इसका स्वाद भी मिलेगा. खाना बनाने के दौरान जो ख़ुशबू आती है, उसे बनता देखने का जो अनुभव होता है और यहां तक कि फल व सब्ज़ियों को काटने-छीलने के दौरान उनके रंग व आकार हमें आकर्षित करते हैं, वो मस्तिष्क में पॉज़िटिव वाइब्रेशन्स पैदा करते हैं.

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पार्टनर के साथ कुकिंग आपके रिश्ते को भी बेहतर बनाती है: जब आप साथ में खाना बनाते हो या फिर घर के कोई भी सदस्य मिल-जुलकर खाना बनाने में हाथ बंटाते हैं, तो अपने आप उनके मतभेद कम होने लगते हैं. वो नकारात्मक बातों को एक तरफ़ रखकर खाना बेहतर बनाने व उसे परोसने की तरफ़ ध्यान देने लगते हैं. ऐसे में यदि आप अपने पार्टनर के साथ किचन में काम करेंगे, तो आपके रिश्ते भी बेहतर बनेंगे. आप एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिता पाओगे, जिससे कम्यूनिकेशन बेहतर होगा. यदि खाने में आप दोनों की पसंद-नापसंद एक नहीं है, तब भी आपके विवाद को कम करने में कुकिंग एक थेरेपी की तरह काम करेगी, क्योंकि वहां आप एक-दूसरे के बारे में सोचोगे कि चलो आज तुम्हारी पसंद का खाना बनाते हैं या फिर आज तुम्हारी फेवरेट डिश तैयार करते हैं, पर कल तुम मेरी फेवरेट डिश बनाने में मेरी मदद करोगे… आदि.

कुकिंग से बढ़ते व बेहतर होते हैं आपके कनेक्शन्स: आपके जन्मदिन पर आपके पड़ोस में रहनेवाली दोस्त आपके लिए गिफ्ट लाती है और दूसरी ओर आपकी सास आपके लिए अपने हाथों से आपका मनपसंद खाना बनाती है, तो ज़ाहिर है आपके मन को सास का खाना बनाना ज़्यादा छुएगा, क्योंकि उन्होंने आपके बारे में सोचा और ख़ुद मेहनत करके आपके लिए खाना तैयार किया. इसी तरह आप देखेंगी कि अपनी बेस्ट फ्रेंड को यदि आप अपने हाथों से कुछ बनाकर देती हैं, तो उसकी ख़ुशी दोगुनी हो जाती है. इस तरह से कुकिंग आपके कनेक्शन्स को बेहतर बनाती है. इसलिए कुक करें और कनेक्टेड रहें.

मस्तिष्क को शांत करती है कुकिंग: साइंटिस्ट्स कहते हैं कि कुकिंग के समय आपको कभी भी अकेलापन महसूस नहीं होगा. उस व़क्त आपकी चिंताएं दूर हो जाती हैं और आपका मस्तिष्क शांति का अनुभव करता है, क्योंकि आपका पूरा ध्यान अपने टास्क पर लग जाता है, जिससे कई तरह की चिंताएं व दबाव की तरफ़ ध्यान नहीं जाता और आप बेहतर महसूस करते हैं. यही नहीं कुकिंग की प्रैक्टिस आपके शरीर को भी रिलैक्स करती है. कुकिंग के समय आप फ्लो में आ जाते हो, जिससे व्यर्थ के डर, चिंताओं व तनाव से उपजा दर्द, शरीर की ऐंठन व थकान भी दूर हो जाती है.

दूसरों के लिए कुछ करने का अनुभव बेहतर महसूस कराता है: ज़ाहिर-सी बात है कि आप खाना अपने लिए नहीं बनाते, बल्कि पूरे परिवार के लिए बनाते हैं. ऐसे में उनकी पसंद-नापसंद को ध्यान में रखकर उनके लिए कुछ अच्छा करने का अनुभव आपको कुकिंग से मिलता है. कुकिंग के ज़रिए आप अपनी भावनाएं व केयर भी सामनेवाले को ज़ाहिर कर सकते हैं. यह एक तरह से मूक प्रदर्शन है प्यार व देखभाल का.

भावनाओं का प्रभाव भी होता है कुकिंग में: आप जिस भाव से खाना बनाते हैं, उसका असर आपके खाने में नज़र आता है. लेकिन खाना बनाते समय हर कोई यही चाहता है कि उसके खाने को तारीफ़ ज़रूर मिले, इसलिए जब आप बच्चों के लिए कुछ ख़ास बनाते हो, तो उनके स्वाद व पोषण का ध्यान रखते हो, लेकिन जब आप बुज़ुर्गों के लिए कुछ बनाते हो, तो स्वाद के अलावा उनकी उम्र व सेहत का भी ख़्याल रखते हो. उन्हें क्या नहीं खाना चाहिए, इस तरफ़ भी आपका पूरा ध्यान रहता है.

कुकिंग से आप पैसे भी बचाते हो: होटल या बाहर से कुछ अनहेल्दी मंगाकर खाना आपको वो संतुष्टि नहीं देगा, जो अपने हाथों से कुछ हेल्दी बनाकर खाना देता है और इसके साथ ही आप अपने पैसे भी बचाते हो. हेल्थ और वेल्थ साथ-साथ सेव होने का एहसास आपके रिश्तों को भी बेहतर बनाता है और आपकी सेहत को भी.

– गीता शर्मा

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अभी कुछ दशकों पहले तक हाल यह था कि त्योहारों की आहट सुनाई देते ही घर-परिवार, समाज- हर जगह रौनक़ की झालरें लहराने लगती थीं, ख़ुशी, उमंग और ऊर्जा से भरे चेहरों की चमक व उत्साह यहां-वहां बिखर जाता था. क्या करना है, कहां जाना है, किसे क्या उपहार देने हैं और रसोई में से कितने पकवानों की ख़ुुशबू आनी चाहिए- सबकी सूची बनने लगती थी. महीनों पहले से बाज़ार के चक्कर लगने लगते थे और ख़रीददारी का लंबा सिलसिला  चलता था.

Technology and Relationships

समय बदला, हमारी परंपराओं, संस्कृति और सबसे ज़्यादा हमारी सोच पर तकनीक ने घुसपैठ कर ली. हर समय किसी-न-किसी रूप में तकनीक हमारे साथ रहने लगी और फिर वह हमारी सबसे बड़ी ज़रूरत बन गई. अब आलम यह है कि त्योहारों का आगमन होता है, तो माहौल में चहल-पहल बेशक दिखाई देती है, पर उसमें से उमंगवाला अंश गायब हो गया है और तनावभरा एक शोर यहां-वहां बिखरा सुनाई देता है. दूसरों से बढ़-चढ़कर दिखावा करने की होड़ ने त्योहारों के महत्व को जैसे कम कर दिया है. त्योहार अब या तो अपना स्टेटस दिखाने के लिए, दूसरों पर रौब जमाने के लिए कि देखो हमने कितना ख़र्च किया है, मनाया जाता है या फिर एक परंपरा निभाने के लिए कि बरसों से ऐसा होता आया है, इसलिए मनाना तो पड़ेगा.

फॉरवर्डेड मैसेजेस का दौर

पहले लोग त्योहारों की शुभकामनाएं अपने मित्र-संबंधियों के घर पर स्वयं जाकर देते थे. बाज़ारवाद के कारण पहले तो इसका स्थान बड़े और महंगे ग्रीटिंग कार्ड्स ने लिया, फिर ई-ग्रीटिंग्स ने उनकी जगह ली. ग्रीटिंग कार्ड या पत्र के माध्यम से अपने हाथ से लिखकर जो बधाई संदेश भेजे जाते थे, उसमें एहसास की ख़ुशबू शामिल होती थी, लेकिन उसकी जगह अब फेसबुक और व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजे जाने लगे हैं. ये मैसेज भी किसी के द्वारा फॉरवर्ड किए हुए होते हैं, जो आगे फॉरवर्ड कर दिए जाते हैं. कई बार तो बिना पढ़े ही ये मैसेजेस फॉरवर्ड कर दिए जाते हैं. उनमें न तो कोई भावनाएं होती हैं, न ही भेजनेवाले की असली अभिव्यक्ति. ये तो इंटरनेट से लिए मैसेज ही होते हैं. इसी से पता लगाया जा सकता है कि तकनीक कितनी हावी हो गई है हम पर, जिसने संवेदनाओं को ख़त्म कर दिया है.

रिश्तों की गढ़ती नई परिभाषाएं

परस्पर प्रेम और सद्भाव, सामाजिक समरसता, सहभागिता, मिल-जुलकर उत्सव मनाने की ख़ुुशी, भेदभावरहित सामाजिक शिष्टाचार आदि अनेक ख़ूबियों के साथ पहले त्योहार हमारे जीवन को जीवंत बनाते थे और नीरसता या एकरसता को दूर कर स्फूर्ति और उत्साह का संचार करते थे, पर आजकल परिवार के टूटते एकलवाद तथा बाज़ारवाद ने त्योहारों के स्वरूप को केवल बदला नहीं, बल्कि विकृत कर दिया है. सचमुच त्योहारों ने संवेदनशील लोगों के दिलों को भारी टीस पहुंचाना शुरू कर दिया है.

सोशल मीडिया के ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल ने जहां हमारी एकाग्रता को भंग किया है, वहीं सामाजिकता की धज्जियां उड़ा दी हैं. फोन कर बधाई देना भी अब जैसे आउटडेटेड हो गया है. बेवजह क्यों किसी को फोन कर डिस्टर्ब किया जाए, इस सोच ने मैसेज करने की प्रवृत्ति को बढ़ाकर सामाजिकता की अवधारणा पर ही प्रहार कर दिया है. लोगों का मिलना-जुलना जो त्योहारों के माध्यम से बढ़ जाता था, उस पर विराम लग गया है. ज़ाहिर है जब सोशल मीडिया बात कहने का ज़रिया बन गया है, तो रिश्तों की संस्कृति भी नए सिरे से परिभाषित हो रही है.

हो गई है सामाजिकता ख़त्म

‘मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है’, यह वाक्य हमें बचपन से रटाया गया, परंतु तकनीक ने शायद अब हमें असामाजिक बना दिया है. सोशल मीडिया के बढ़ते वर्चस्व ने मनुष्य की सामाजिकता को ख़त्म कर दिया है. देखा जाए, तो सोशल मीडिया आज की ज़िंदगी की सबसे बड़ी ज़रूरत बन गया है. व्हाट्सऐप, ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और न जाने क्या-क्या? स़िर्फ एक टच पर दुनिया के इस हिस्से से उस हिस्से में पहुंचा जा सकता है. देश-दुनिया की दूरियां सिमट गई हैं, लेकिन रिश्तों में दूरियां आ गई हैं.

संवादहीनता और अपनी बात शेयर न करने से आपसी जुड़ाव कम हो गया है और इसका असर त्योहारों पर पड़ा है. माना जाता था कि त्योहारों पर सारे गिले-शिकवे दूर हो जाते थे. एक-दूसरे से गले मिलकर, मिठाई खिलाकर मन की सारी कड़वाहट ख़त्म हो जाती थी. पर अब किसी के घर जाना समय की बर्बादी लगने लगा है, इसलिए बहुत ज़रूरी है तो ऑनलाइन गिफ़्ट ख़रीद कर भेज दिया जाता है.

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Technology and Relationships
रसोई से नहीं उठती ख़ुशबू

आजकल प्रत्येक क्षेत्र में बाज़ारवाद हावी हो रहा है. इस बनावटी माहौल में भावनाएं गौण हो गई हैं. ऑनलाइन संस्कृति ने अपने हाथों से उपहार को सजाकर, उसे स्नेह के धागे से बांधकर और अपनी प्यार की सौग़ात के रूप में अपने हाथों से देने की परंपरा को पीछे धकेल दिया है. बाज़ार में इतने विकल्प मौजूद हैं कि ख़ुद कुछ करने की क्या ज़रूरत है.

एक समय था कि त्योहारों पर घर में न जाने कितने तरह के पकवान बनाए जाते थे. न जाने कितने नाते-रिश्तेदारों के लिए लड्डू, मठरी, नमकपारे, नमकीन, बर्फी, गुलाब जामुन और न जाने कितने डिब्बे पैक होते थे और यह भी तय किया जाता था कि कौन किसके घर जाएगा.

पर एकल परिवारों ने त्योहारों की रौनक़ को अलग ही दिशा दे दी. महंगाई की वजह से त्योहार फ़िज़ूलख़र्ची के दायरे में आ गए हैं. ऐसे में मिठाइयां या अन्य चीज़ें बनाने का कोई औचित्य दिखाई नहीं पड़ता. पहले के दौर में संयुक्त परिवार हुआ करते थे और घर की सारी महिलाएं मिलकर पकवान घर पर ही बना लिया करती थीं. लेकिन अब न लोगों के पास इन सबके लिए व़क्त है और न ही आज की हेल्थ कॉन्शियस पीढ़ी को वह पारंपरिक मिठाइयां पसंद ही आती हैं.

कोई घर पर आ जाता है, तो झट से ऑनलाइन खाना ऑर्डर कर उनकी आवभगत करने की औपचारिकता को पूरा कर लिया जाता है. कौन झंझट करे खाना बनाने का. यह सोच हम पर इसीलिए हावी हो पाई है, क्योंकि तकनीक ने जीवन को आसान बना दिया है. बस फ़ोन पर एक ऐप डाउनलोड करने की ही तो बात है. फिर खाना क्या, गिफ़्ट क्या, घर को सजाने का सामान भी मिल जाएगा और घर आकर लोग आपका हर काम भी कर देंगे. यहां तक कि पूजा भी ऑनलाइन कर सकते हैं. डाक से प्रसाद भी आपके घर पहुंच जाएगा. हो गया फेस्टिवल सेलिब्रेशन- कोई थकान नहीं हुई, कोई तैयारी नहीं करनी पड़ी- तकनीक के एहसास ने मन को झंकृत कर दिया. बाज़ार से आई मिठाइयों ने मुंह का स्वाद बदल दिया और बाज़ारवाद ने उपहारों की व्यवस्था कर रिश्तों को एक साल तक और सहेजकर रख दिया- नहीं हैं इनमें जुड़ाव का कोई अंश तो क्या हुआ, एक मैसेज जगमगाते दीयों का और भेज देंगे और त्योहार मना लेंगे.

– सुमन बाजपेयी

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Summer Care Tips

  • पसीने की दुर्गंध से बचने के लिए प पसीने की दुर्गंध से बचने के लिए अच्छी कंपनी का डियो या सुगंधित पाउडर लगाएं.
  • दिन में दो बार स्नान करें.प यदि आप कामकाजी हैं, तो शाम को घर लौटने पर 10-15 मिनट तक ठंडे पानी में पैरों को डुबोकर रखें. इससे पैरों को आराम मिलेगा और आपको गर्मी से राहत.
  • ज़्यादा से ज़्यादा पानी पीएं. ख़ासकर घर से बाहर निकलते समय पानी ज़रूर पीएं. इससे आपके शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाएंगे और त्वचा भी ग्लो करेगी.
  • सुबह जल्दी उठकर लॉन में हरी घास पर टहलें.प घर से बाहर हों, तो थोड़ी-थोड़ी देर में नींबू पानी या जूस पीएं. हो सके, तो अपने साथ एक बॉटल में नींबू का शर्बत कैरी करें. इससे इंस्टेंट एनर्जी मिलती है.प दूध पोषक होने के साथ ठंडी तासीर का भी है, इसलिए रोज़ाना एक ग्लास दूध ज़रूर पीएं.
  • ज़्यादा ऑयली व गरिष्ठ भोजन करने से बचें.
  • अपने डायट में सलाद, जूस और फल शामिल करें. ढेर सारे फलों का सेवन करें, इससे त्वचा ग्लो करेंगी व गर्मी से भी राहत मिलेगी.
  • गर्मियों में अक्सर शरीर में पित्त की प्रॉब्लम हो जाती है, इसके लिएसुबह-सुबह ठंडा दूध पीएं.
  • छाछ को अपने भोजन का नियमित रूप से हिस्सा बनाएं. यह शरीर को ठंडक देता है.
  • लस्सी भी गर्मी से राहत दिलाती है.प गर्मी के कुछ महीनों में हो सके, तो चाय-कॉफी का सेवन बिल्कुल छोड़ दें, क्योंकि ये शरीर को गर्मी पहुंचाते हैं और सेंट्रल नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित करते हैं.
  • अगर बहुत ज़्यादा ज़रूरी न हो तो दिन में 11 बजे से 3 बजे तक धूप में न निकलें, क्योंकि इस समय सूरज की अल्ट्रा वॉयलेट किरणों का बहुत तेज़ और बुरा प्रभाव पड़ता है.
  • घर से बाहर जाएं या घर में रहें. अपनी त्वचा को सनस्क्रीन प्रोटेक्शन ज़रूर दें.
  • जिस तरह गर्मियों में शरीर डिहाइड्रेट होता है, उसी तरह स्किन भी डिहाइड्रेट होती है. ऐसे में स्किन का मॉइश्‍चर लेवल बनाए रखने के लिए ज़रूरी है उसे मॉइश्‍चराइज़ करना, ताकि स्किन को नरिशमेंट मिले. इसलिए गर्मियों में भी मॉइश्‍चराइज़र लगाना न भूलें.

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Thyroid Causes

इन लक्षणों से जानें थायरॉइड कंट्रोल में  है या नहीं (Thyroid: Causes, Symptoms And Treatment)

समय के साथ-साथ हमारी जीवनशैली बदल रही है, खानपान बदल रहा है, काम करने के तरी़के बदल रहे हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि इन बदलावों को हमारे मन के साथ-साथ हमारा तन भी स्वीकार करे. कई बार हमें इस बात का बिल्कुल एहसास नहीं होता है कि सामान्य से लगनेवाले ये छोटे-छोटेे बदलाव किसी गंभीर बीमारी के संकेत भी हो सकते हैं. ऐसी ही एक हेल्थ प्रॉब्लम (Health Problem) है थायरॉइड (Thyroid), जिसके बारे में हम आपको बता रहे हैं.

क्या है थायरॉइड?

हम में से अधिकतर लोगों को यह बात मालूम नहीं होगी कि थायरॉइड किसी बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह एक ग्रंथि का नाम है, जो गर्दन में सांस की नली के ऊपर और वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागों में तितली के आकार में बनी होती है. यह ग्रंथि थायरॉक्सिन नामक हार्मोन का उत्पादन करती है. हम जो भी खाते हैं, उसे यह हार्मोन ऊर्जा में बदलता है. जब यह ग्रंथि ठीक तरह से काम नहीं करती है, तो शरीर में अनेक समस्याएं होने लगती हैं.

पहचानें थायरॉइड के लक्षणों को?

एनर्जी का स्तर बदलना

थायरॉइड की समस्या होने पर शरीर में ऊर्जा का स्तर बदलता रहता है. ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) में मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है या फिर उसमें अनियमित बदलाव होता रहता है, जिसके कारण अधिक भूख लगना, नींद न आना, चिड़चिड़ापन और बेचैनी जैसी समस्याएं होती हैं. इसी तरह से अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) में शरीर में ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है, जिसकी वजह से अधिक थकान, एकाग्रता में कमी, घबराहट और याद्दाश्त में कमी आने लगती है.

वज़न का घटना-बढ़ना

ओवरएक्टिव थायरॉइड (हाइपरथायरॉइडिज़्म) ग्रंथि की समस्या होने पर मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है, जिसके कारण व्यक्ति की भूख बढ़ जाती है. वह ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाने लगता है, लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा खाने पर भी उसका वज़न घटने लगता है. वहीं दूसरी ओर अंडरएक्टिव थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज़्म) होने पर मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है, जिसके कारण भूख कम लगती है और कम खाना खाने पर भी वज़न लगातार बढ़ता रहता है.

आंतों की समस्या

ओवरएक्टिव थायरॉइड और अंडरएक्टिव थायरॉइड दोनों के कारण आंतों में  भी गड़बड़ी की समस्या हो सकती है. ये दोनों ही भोजन पचाने और मल-मूत्र के विसर्जन करने की क्रियाओं में मुख्य भूमिका निभाते हैं. अंडरएक्टिव थायरॉइड होने पर व्यक्ति कब्ज़ और डायरिया से परेशान रहता है.

गले में सूजन

सर्दी-जुक़ाम के कारण गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन आने लगता है, लेकिन इन लक्षणों की अनदेखी बिल्कुल न करें. कई बार सिंपल से दिखनेवाले ये लक्षण थायरॉइड के भी हो सकते हैं, क्योंकि थायरॉइड होने पर भी गले में दर्द और आवाज़ में भारीपन के साथ-साथ गले में सूजन आती है. अगर गले में सूजन हो, तो इसकी अनदेखी करने की बजाय थायरॉइड टेस्ट कराएं.

मांसपेशियों में दर्द

शारीरिक मेहनत और वर्कआउट करने के बाद बॉडी पेन होना आम बात है. लेकिन ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी मांसपेशियों में दर्द होता है. कई बार मांसपेशियों में दर्द के साथ-साथ कमज़ोरी, थकान, कमर व जोड़ों में दर्द और सूजन भी आती है.

अनिद्रा की समस्या

थायरॉइड के प्रमुख लक्षणों में अनिद्रा भी एक लक्षण है. थायरॉइड ग्रंथि का असर व्यक्ति की नींद पर भी पड़ता है, जैसे- रात को नींद नहीं आना, बेचैनी, सोते समय अधिक पसीना आना आदि. नींद न आने के कारण कई बार चक्कर भी आने लगते हैं.

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बालों का झड़ना और त्वचा का ड्राई होना  

हाइपरथायरॉइडिज़्म से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा धीरे-धीरे ड्राई होने लगती है. त्वचा के ऊपर की कोशिकाएं (सेल्स) क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिसके कारण त्वचा में रूखापन आने लगता है. थायरॉइड के कारण त्वचा में रूखेपन के अलावा बालों की भी कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं, जैसे- बालों का झड़ना, रूखापन आदि.

तनाव में रहना

दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद थकान होना लाज़िमी है, लेकिन अगर आपको ज़रूरत से ज़्यादा ही थकान महसूस हो, तो इसकी वजह थायरॉइड भी हो सकती है. शुरुआत में इस बात का एहसास नहीं होता है कि थकान किस वजह से है, लेकिन जब थायरॉइड ग्रंथि ओवरएक्टिव हो जाती है, तो यह ग्रंथि शरीर में ज़रूरत से बहुत अधिक मात्रा में थायरॉइड हार्मोंस का निर्माण करने लगती है, जिसके कारण तनाव व बेचैनी होने लगती है.

पीरियड्स की अनियमितता

अधिकतर महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना आम बात है, लेकिन उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं होता है कि अंडरएक्टिव और ओवरएक्टिव थायरॉइड के कारण भी पीरियड्स अनियमित होते हैं. इसके लक्षणों में लगातार बदलाव होने पर महिलाएं इस बात से परेशान रहती हैं. जब महिलाओं को हाइपरथायरॉइडिज़्म (ओवरएक्टिव थायरॉइड) की समस्या होती है, तो उन्हें सामान्य से अधिक रक्तस्राव होता है और जब महिलाएं हाइपोथायरॉइडिज़्म (अंडरएक्टिव थायरॉइड) से ग्रस्त होती हैं, तब उन्हें रक्तस्राव बहुत कम होता है या फिर होता ही नहीं है.

डिप्रेशन

अवसाद होने की एक वजह थायरॉइड भी हो सकती है, क्योंकि अवसाद में अधिक नींद आना या अनिद्रा की समस्या होती है. यदि व्यक्तिअंडरएक्टिव थायरॉइड से ग्रस्त है, तो मूड स्विंग होना, आलस, काम में मन न लगना जैसी समस्याएं होती हैं.

थायरॉइड को नियंत्रित करने के लिए क्या खाएं?

थायरॉइड के मरीज़ अगर उपचार के साथ-साथ अपने खानपान पर ध्यान दें, तो बहुत हद तक इसे नियंत्रित किया जा सकता है. उन्हें अपनी डायट में इन चीज़ों को शामिल करना चाहिए, जैसे-

मशरूम: इसमें सेलेनियम अधिक मात्रा में होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करता है.

अंडा: थायरॉइड के रोगियों को अपनी डायट में अंडा ज़रूर शामिल करना चाहिए. इसमें भी सेलेनियम होता है, जो थायरॉइड को नियंत्रित करने के साथ कमज़ोरी को भी दूर करता है.

नट्स: वैसे तो नट्स सभी को खाने चाहिए, लेकिन थायरॉइड के मरीज़ों को नट्स ज़रूर खाना चाहिए. नट्स में ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो थायरॉइड के कारण होनेवाले हार्ट अटैक के ख़तरे को कम करते हैं.

दही: इसे खाने से इम्यूनिटी लेवल बढ़ता है और थायरॉइड भी नियंत्रित रहता है.

मेथी: इसमें ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो थायरॉक्सिन नामक हार्मोन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं.

   – पूनम शर्मा

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Health Problems

किस हेल्थ प्रॉब्लम में क्या खाएं, क्या न खाएं? (Health Problems Associated With Foods)

रोज़मर्रा की व्यस्त जीवनशैली में हम अक्सर कुछ न कुछ ऐसा खा लेते हैं, जो संतुलित तो बिल्कुल नहीं होता, लेकिन उसे खाने से कोई न कोई स्वास्थ्य समस्या (Health Problems) ज़रूर खड़ी हो जाती है. न चाहते हुए डॉक्टर के पास जाना ही पड़ता है. यदि आप डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहते हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि किस बीमारी में क्या खाएं और क्या न खाएं?

डायबिटीज़

क्या खाएं?

–    हरी सब्ज़ियां, सोया, मूंग, काला चना, ब्राउन राइस, राजमा और अंडे का  स़फेदवाला भाग- ये लो ग्लाइसेमिक इंडेक्सवाली चीज़ें होती हैं, जो शरीर में जाकर धीरे-धीरे ग्लूकोज़ में बदलती हैं.

–    प्रोटीन और फाइबर से भरपूर चीज़ें खाएं, जैसे- लोबिया और स्प्राउट्स आदि.

–    फलों में चेरी, स्ट्रॉबेरी, सेब, संतरा, अनार, पपीता आदि और सब्ज़ियों में करेला, लौकी, तोरई, कद्दू, खीरा, टमाटर आदि खाएं.

–    रोज़ाना एक मुट्ठी मिक्स ड्रायफ्रूट्स ज़रूर खाएं.

–    करेला, लौकी, टमाटर, ऐलोवीरा का जूस डायबिटीज़ में बहुत फ़ायदेमंद होता है.

क्या न खाएं?

–    गुड़, शक्कर, शहद, चॉकलेट, केक, पेस्ट्री आदि मीठी चीज़ें न खाएं.

–    मैदा, सूजी, स़फेद चावल, स़फेद ब्रेड, नूडल्स, पिज़्ज़ा, बिस्किट्स न खाएं. ये हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्सवाली चीज़ें होती हैं, जो शरीर में जाकर जल्दी-जल्दी ग्लूकोज़ में परिवर्तित होती हैं.

–    तली हुई चीज़ें, मक्के का आटा, पैक्ड फूड बिल्कुल न लें.

–    आम, चीकू, केला, अंगूर, अनन्नास में ज़्यादा शक्कर होता है, इसलिए इन्हें न खाएं.

–    स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर सब्ज़ियां- आलू, अरवी, जिमीकंद, कटहल, शकरकंद, चुकंदर न खाएं, क्योंकि इनमें ग्लूकोज़ अधिक होता है.

हार्ट अटैक

क्या खाएं?

–    हरी सब्ज़ियां, दालें, स्ट्रॉबेरी, संतरा, केला, सीताफल- इनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम होता है.

–    सूप, सलाद, खट्टे फल, आड़ू, सोया, नींबू पानी, काला चना, लोबिया खाना बहुत फ़ायदेमंद होता है.

–    ओमेगा3 से भरपूर- बादाम, अलसी, फिश ऑयल और अखरोट ज़रूर लें.

क्या न खाएं?

–    हाई फैट डायट (मक्खन, घी, मलाई आदि) में सैचुरेटेड फैट होता है, इसलिए इनका सेवन कम करें.

–    खाने में नमक की मात्रा कम रखें. टेबल सॉल्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें.

–    अजीनोमोटो, बेकिंग पाउडर, सॉस, अचार, पैक्ड फूड, बेकरी फूड न खाएं.

अस्थमा

क्या खाएं?

–    नींबू, कीवी, आंवला, ब्रोकोली, टमाटर, शिमला मिर्च में विटामिन सी अधिक होता है.

–    डायट में जौ और चोकर सहित गेहूं के आटे की रोटियां, दलिया, मूंग दाल ज़रूर लें.

–    चेरी, खुबानी, शकरकंद, हरी मिर्च, गाजर में बीटा कैरोटिन होता है, इन्हें ज़रूर खाएं.

–    प्रोटीन, विटामिन बी और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे- दाल, सोयाबीन, अंडा, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां आदि खाएं.

–    भिगोई हुई मूंगफली अस्थमा में बहुत फ़ायदेमंद होती है.

क्या न खाएं?

–    तला हुआ भोजन, जंक फूड, पैक्ड फूड, बासी खाना, मक्खन न लें.

–    तली हुई मूंंगफली बिल्कुल न खाएं.

–    डेयरी प्रोडक्ट्स, खट्टी व ठंडी चीज़ें न खाएं.

–    केला, पका हुआ चुकंदर, कटहल, लोबिया आदि न लें.

कब्ज़

क्या खाएं?

–    कब्ज़ होने पर बिना नमक और बटरवाले पॉपकॉर्न खाएं. कम कैलोरीवाले इस फूड आइटम में फाइबर बहुत अधिक होता है.

–    आलूबुखारे में फाइबर के साथ-साथ सोर्बिटोल (विशेष तरह का कार्बोहाइड्रेट) होता है, जो कब्ज़ से राहत दिलाता है.

–    सब्ज़ियों की तुलना में बीन्स में दोगुना फाइबर होता है. बीन्स को सब्ज़ी के तौर पर ही नहीं, सूप, पास्ता और पुलाव में भी डालकर खा सकते हैं.

–    खुबानी, अंजीर, खजूर और किशमिश में फाइबर अधिक मात्रा में होते हैं, जो कब्ज़ दूर करते हैं.

–    ब्रोकोली, साबूत अनाज, होल गे्रन ब्रेड, पका हुआ केला, फल और फाइबरयुक्त चीज़ें विशेष रूप से खानी चाहिए.

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क्या न खाएं?

–    पनीर, आइस्क्रीम आदि डेयरी प्रोडक्ट्स दूध से बने होते हैं और दूध कब्ज़ बढ़ाता है.

–    फैट बढ़ानेवाले स्नैक्स, विशेष रूप से पोटैटो वेफर्स, फे्रंचफ्राइज कब्ज़ की समस्या और बढ़ा सकते हैं.

–    बेकरी प्रोडक्ट्स, जैसे- कुकीज़, पेस्ट्री और केक न खाएं, क्योंकि इनमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं.

–    कच्चा केला, प्याज़, मूली, रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड (व्हाइट राइस, व्हाइट ब्रेड, व्हाइट पास्ता आदि) से कब्ज़ बढ़ता है.

–    उड़द दाल, अरवी, बैंगन, मसूर, मैदा से बनी चीज़ें, ठंडा व बासी खाना न खाएं.

डायरिया

क्या खाएं?

–    केला, दही-चावल, मूंग दाल खिचड़ी, धुली मसूर या मूंग दाल का सूप, लौकी का रायता जैसी हल्की चीज़ें खाएं.

–    ककड़ी, खीरा, तरबूज़, खरबूजा आदि वॉटरी फ्रूट्स ज़्यादा लें.

–    पपीता, बेल का मुरब्बा, मीठा सेब, अनार आदि फलों का सेवन करें.

–    नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, लस्सी, गन्ने का रस या फलों का जूस पीएं.

–    दही में केला मिलाकर नाश्ते, दोपहर और शाम को खाने से डायरिया में आराम मिलता है.

क्या न खाएं?

–    आलू, इमली, बैंगन, अरवी, ब्रोकोली, प्याज़, बीन्स, पत्तागोभी, अचार न खाएं.

–    तला, मसालेदार, बासी और गरिष्ठ भोजन खाने से बचें.

–    बिना ढकी हुई या बहुत देर से काटकर रखी हुई चीज़ें न खाएं.

–   सड़क के किनारे खड़े हॉकर्स या

शादी-पार्टी में पहले से कटा हुआ फ्रूट चाट-सलाद न खाएं.

सर्दी-ज़ुकाम

क्या खाएं?

–    सेब, चीकू, पपीता, अंजीर, शहतूत, अनार, कीवी, अंगूर आदि विटामिन सी से भरपूर फल व सब्ज़ियां खाएं.

–    सब्ज़ियों में पालक, चुकंदर, ब्रोकोली, लाल शिमला मिर्च, मशरूम, शलगम और गाजर ज़रूर खाएं.

–    गुड़ की तासीर गरम होती है, इसलिए गुड़ से बनी हुई चीज़ें खाएं.

क्या न खाएं?

–    यदि आपको सर्दी-ज़ुकाम जल्दी-जल्दी होता है, तो दही, पनीर, चीज़ कम खाएं. ये चीज़ें कफ़बढ़ाती हैं. सर्दी-ज़ुकाम सीज़नल प्रॉब्लम है, तो रात को दही न खाएं.

–    फ्राइड फूड, मसालेदार खाना, ठंडी चीज़ें, व्हाइट ब्रेड, पास्ता, नूडल्स न खाएं.

कफ़

क्या खाएं?

–    जिन चीज़ों की तासीर गरम हो, वे अधिक खाएं, जैसे- गरम सूप, गरम चाय आदि.

–    सिट्रस फल, अनन्नास, अनार, सेब, मौसंबी, बेरीज़, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, सोयाबीन, फलियां ज़्यादा से ज़्यादा खाएं.

–    तुलसी, सोंठ, शहद और अदरक का सेवन अधिक करना चाहिए.

क्या न खाएं?

–    दूध, बटर, पनीर, फैट बढ़ानेवाले फूड और नॉनवेेज फूड कम खाएं.

–    ठंडी चीज़ें खाने से कफ़ बढ़ता है, इसलिए उन्हें अवॉइड करें.

– देवांश शर्मा

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डायबिटीज़ के मरीज़ों को खान-पान पर बहुत ध्यान  देना चाहिए. इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम बता रहे हैं कि डायबिटीज़ के मरीज़ों को क्या खाना ( Diet Plan For Diabetic Person) चाहिए और किन चीज़ों से परहेज़ करना चाहिए?

Diet Plan For Diabetic Person
डायबिटीज़ के मरीज़ों को बैलेंस्ड डायट( Diet Plan For Diabetic Person) लेनी चाहिए, जिसमें 50-60 फ़ीसदी कार्बोहाइड्रेट, 15-20 फ़ीसदी प्रोटीन और 20-25 फ़ीसदी फैट और दूसरी चीज़ें शामिल हों. एक बार के खाने में 2-4 सर्विंग कार्ब ले सकते हैं.  मरीज़ खाने में ज़्यादा गैप न रखें. ज़्यादा गैप रखने से शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव होता है. हर दो घंटे में कुछ खाएं. खाना थोड़ा-थोड़ा और बार-बार खाएं. न तो ज़्यादा देर भूखे रहें और न ही एक बार में ढ़ेेर सारा खाना खाएं. खाने की मात्रा भी क़रीब-क़रीब बराबर ही रखें.
क्या और कितना खाएं?
खा सकते हैं
कार्बोहाइड्रेट: चोकर वाला आटा, जौ, जई, रागी, दलिया, मल्टीग्रेन ब्रेड, काला चना, सोया, राजमा.
फल: सेब, चेरी, जामुन, मोसंबी, संतरा, स्ट्रॉबेरी, शहतूत, आलूबुखारा, नाशपाती, अंजीर.
सब्ज़ियां: ककड़ी, तोरी, टिंडा, सेम, शलजम, खीरा, चने का साग, सोया का साग, लहसुन, पालक, मेथी, आंवला, घीया.
अन्य: डबल टोंड दूध और उससे बनी चीज़ें, छिलके वाली दालें, मछली (बिना ज़्यादा तेल और मसाले वाली), फ्लैक्स सीड्स, छाछ आदि.
कम खाएं 
कार्बोहाइड्रेट: बिना चोकर का आटा, सूजी, सूजी के रस, ब्राउन ब्रेड, सफेद चना.
फल: अमरूद, पपीता, तरबूज़, खरबूजा.
सब्ज़ियां: अरवी, आलू, जिमीकंद, गोभी. मीठा: आर्टिफिशल स्वीटनर, खांड (बिना रिफाइन वाली शुगर).
अन्य: टोंड दूध और उससे बनी चीजें, बिना छिलके वाली दालें, अंडा, चिकन, बादाम, अखरोट, देसी घी, अच्छे तेल (सरसो, ऑलिव, कनोला, राइसब्रैन आदि)
न खाएं
कार्बोहाइड्रेट: सफेद चावल, मैदा, पूरी, समोसा, वाइट ब्रेड.
फल: आम, चीकू, अंगूर, केला.
सब्ज़ियां: शकरकंद, आलू, मीठा: मिठाई, चीनी, गुड़, शहद, गन्ना, आइसक्रीम, जैम, केक, पेस्ट्री, कुकीज़.
अन्य: फुल क्रीम दूध और उससे बनी चीजें, रेड मीट, कोल ड्रिंक्स, रिफाइंड ऑयल.
नोट: अगर शुगर के साथ-साथ कोई दूसरी बीमारी भी हो जैसे किडनी तो यह डायट लागू नहीं होगी. बेहतर यही होगा कि डॉक्टर की राय से ही अपना डायट चार्ट बनाएं.
ये भी है फ़ायदेमंद
1. डायबिटीज़ के मरीज़ करेला का पाउडर या जूस और घिया का जूस भी पी सकते हैं.
2. रोज़ाना आधा छोटा चम्मच दालचीनी का पाउडर लें. दालचीनी ख़ून में ग्लूकोज़ लेवल,  ब्लडप्रेशर और वज़न को भी कम करती है. इसे पानी के साथ या किसी सलाद आदि पर डालकर भी ले सकते हैं. गर्म चीज़ों में मिलाकर न लें. 18 साल से कम उम्र वाले और प्रेग्नेंट व दूध पिलानेवाली महिलाएं न लें.
नोट: डायट की डायरी रखें और जो भी खाएं, उसमें नोट करें.

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रोज़ाना एक ही तरी़के से दाल बनाना वाकई बहुत बोरिंग काम है. रोज़ अलग तरह से दाल बनाकर परिवार और मेहमानों की तारीफ़ पाने के लिए सीखें दाल बनाने के 10 नए तरीक़े (Best And Easy Dal Recipes).

1) तुअर या चना दाल पकाते समय प्रेशर कुकर में मेथी दाने की छोटी पटोली रखकर पकाएं. इससे दाल का स्वाद भी बढ़ेगा और इसे पचाना भी आसान होगा.

2) रोज़ाना दाल के एक जैसे स्वाद से बोर हो गई हैं तो दाल को दूध में पकाएं. पकाते समय नमक न डालें. जब दाल पक जाए तो उसमें तड़का दें और फ्रेश क्रीम मिलाएं. आख़िर में स्वादानुसार नमक डालें. लीजिए, शाकाहारी दाल मुग़लई तैयार है.

3) जब अचानक मेहमान आ जाएं और आपने साबूत उड़द की दाल बना रखी हो तो दाल की मात्रा बढ़ाने के लिए उसमें आधा कप दूध और 50 ग्राम मक्खन मिला दें. थोड़ी देेर पकाने के बाद लहसुन, अदरक, हरी मिर्च व थोड़ा-सा गरम मसाला डालकर छौंक लगा लें. इससे आपकी दाल की मात्रा भी बढ़ जाएगी और टेस्टी दाल मखनी भी तैयार हो जाएगी.

4) सांभर बनाने के लिए पहले से कुकर में पकाई हुई तुअर की दाल में सांभर मसाला, इमली का गूदा और सब्ज़ियां, जैसे- गाजर, फूलगोभी, मूली, बैंगन, बीन्स, भिंडी, कद्दू आदि मिलाएं और कुकर में दोबारा एक सीटी आने तक पका लें. हरी मिर्च, राई और करीपत्ते का छौंक लगाएं. इस विधि से बनाएंगी तो बेशक सांभर स्वादिष्ट बनेगा.

5) कुकर में तेल गरम करके हींग और जीरा का तड़का दें. फिर उड़द दाल और हरी मटर समान मात्रा में मिलाकर भूनें. फिर लालमिर्च, गरम मसाला, नमक और पानी मिलाकर कुकर में प्रेशर लगाएं.

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6) मूंग दाल को हल्का गलने तक पकाएं, इसमें बारीक़ कटी हुई पालक, बारीक़ कटी हुई सेम, कटे हुए गाजर, उबले हुए कॉर्न, हरी मटर, लहसुन का पेस्ट, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, नमक और कालीमिर्च पाउडर डालकर कुछ देर पकाएं. सौंफ पाउडर छिड़ककर सर्व करें.

7) मसूर दाल में हल्दी व नमक डालकर उबालें. कुकर खोलकर कद्दूकस की हुई आम की कैरी डालकर कुछ देर पकाएं. पैन में तेल गरम करें. जीरा, हींग और सूखी लालमिर्च का तड़का देकर सर्व करें.

8) अरहर की दाल में पानी और दूध डालकर हांडी में पकने के लिए रख दें. इसमें हल्दी पाउडर, लालमिर्च पाउडर और नमक डालकर उबालें. आधा उबाल आने के बाद इमली का गूदा डालें और धीमी आंच पर पकाएं. पैन में घी गरम करें. इसमें जीरा, साबूत लालमिर्च और कालीमिर्च का तड़का लगाएं.

9) दाल पकाते समय थोड़ा-सा तेल डाल दें. इससे दाल का स्वाद बढ़ जाएगा.

10) दाल पकाते समय पानी और दाल के अनुपात पर ध्यान दें, जैसे- 1 कप दाल में 2-3 कप पानी होना चाहिए.

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दवाएं हम बीमारी को दूर करने के लिए खाते हैं और खाना स्वस्थ रहने के लिए. लेकिन ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं, जो वैसे तो सेहत की दृष्टि से बेहद फ़ायदेमंद होते हैं, लेकिन उन्हें कुछ दवाओं के साथ ग्रहण करने पर न स़िर्फ दवा का असर कम हो जाता है, बल्कि सेहत को नुक़सान भी पहुंच सकता है. हम आपको बता रहे हैं कि किस दवा और किस खाद्य पदार्थ के साथ मिक्स नहीं करना चाहिए.

Common Foods, Medications You Should NEVER Mix

कॉफी
परहेज़ करेंः अगर आप अस्थमा के इलाज के लिए ब्रोन्को डायलेटर ले रहे हैं.
यह दवा फेफड़े के मसल्स को रिलैक्स करती है, जिससे मरीज़ को सांस लेने में आसानी होती है, लेकिन इस दवा के साइड इफेक्ट्स भी हैं. इस दवा का सेवन करने पर
कभी-कभी घबराहट होने के साथ दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है. ऐसे में इस दवा के साथ कैफीन लेने पर साइड इफेक्ट्स होने की संभावना बढ़ जाती है. इतना ही नहीं, ज़्यादा कॉफी का सेवन करने पर दवा का असर भी घट जाता है. अतः बेहतर होगा कि अगर आप अस्थमा की यह दवा ले रहे हैं तो कॉफी न पीएं. अगर इसकी लत हो तो इस बारे में डॉक्टर को अवश्य बताएं.

केला
परहेज़ करेंः यदि आप ब्लड प्रेशर की दवा खाते हैं.
केला में भरपूर मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है, जो कि सेहत के लिए अच्छा है. यदि आप ब्लडप्रेशर की दवाएं, जैसे-कैप्टोप्रिल, एंजियोटेनसिन इत्यादि ग्रहण करते हैं तो केला सहित अन्य पोटैशियम रिच खाद्य पदार्थ, जैसे-पत्तेदार सब्ज़ियां, संतरा इत्यादि का अत्यधिक मात्रा में सेवन न करें, क्योंकि इन दवाओं के साथ पोटैशियम रिच फूड्स का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से दिल की धड़कन बढ़ सकती है. इसलिए बेहतर होगा कि आप ब्लडप्रेशर की दवा के साथ केला जैसे पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करने से पहले इस बारे में डॉक्टर को बताएं.

अल्कोहल
परहेज़ करेंः यदि आप एंटीहिस्टामाइन्स, डायबिटीज़ की दवा या पेन किलर्स खाते हैं.
आमतौर पर किसी भी दवा के साथ अल्कोहल लेने की मनाही होती है, क्योंकि अल्कोहल लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है. लेकिन अल्कोहल, पैरासिटामॉल और कोडीन लिवर द्वारा अवशोषित किए जाते हैं. ऐसे में अल्कोहल और इन दवाओं के साथ ग्रहण करने पर इन्हें पचाने के लिए लिवर को
ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स, जैसे सुस्ती इत्यादि होने की आशंका बढ़ जाती है. इसके अलावा लिवर के क्षतिग्रस्त होने का भी रिस्क होता है.

पत्तेदार सब्ज़ियां
परहेज़ करेंः यदि आप एंटीकॉलैगुलेंट (ख़ून को पतला करने की दवा) लेते हैं
ब्रोकोली, पालक, पत्तागोभी जैसी पत्तेदार सब्ज़ियां सेहत के लिए अच्छी होती हैं, लेकिन यदि आप वॉर्फरिन जैसी एंटीब्लड क्लॉटिंग मेडिसिन लेते हैं तो पत्तेदार सब्ज़ियों का सेवन संभलकर करें. इन सब्ज़ियों में विटामिन के की मात्रा अधिक होती है, जो ब्लड को क्लॉट करने में मदद करता है. आपको बता दें कि वॉर्फरिन का काम ख़ून को पतला करना है. ऐसे में यदि आप अधिक मात्रा में पत्तेदार सब्ज़ियों का सेवन करेंगे तो वॉर्फरिन को अपना काम करने में बाधा उत्पन्न होगी. कैनबेरी जूस और कैनबेरी के प्रोडक्ट्स लेने से भी परहेज़ करें, क्योंकि ये भी वॉर्फरिन के असर को कम करते हैं.

नारंगी
परहेज़ करेंः यदि आप स्टैटिन ग्रहण करते हैं.
यदि आप ब्लड प्रेशर कम करने के लिए स्टैटिन ग्रहण करते हैं तो आपको नारंगी या नारंगी का जूस पीने से बचना चाहिए. नारंगी में एक ऐसा केमिकल होता है, जो शरीर को स्टैटिन को अवशोषित करने से रोकता है. जिसके कारण मरीज़ को मांसपेशियों या शरीर में दर्द की शिकायत हो सकती है.

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डेयरी प्रोडक्ट्स
परहेज़ करेंःयदि आप एंटीबायोटिक्स लेते है.
दूध, दही, चीज़ जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स में पाया जानेवाला कैल्शियम सिप्रोफ्लॉक्ससिन व टेट्रासाइक्लिन जैसे एंटीबायोटिक्स को शरीर में एब्जॉर्ब होने में बाधा पहुंचाता है, जिससे उनका असर कम होता है. अच्छे रिजल्ट के लिए एंटीबायोटिक्स खाने के एक घंटे पहले पानी के साथ, या फिर खाना खाने के दो घंटे बाद ग्रहण करना चाहिए. इसलिए अगर आप दूध के साथ एंटीबायोटिक्स ग्रहण करते हैं तो ऐसा करना छोड़ दें.

नींबू
परहेज़ करेंः यदि आप कफ की दवा ले रहे हैं.
यदि आप डेक्सट्रोमेथॉर्फिन युक्त कफ की दवा ले रहे हैं तो नींबू, संतरा जैसे खट्टे खाद्य पदार्थ लेने से बचें. सिट्रस फूड्स शरीर द्वारा दवा को ब्रेक डाउन करके अवशोषित करने की प्रक्रिया में बाधा पहुंचाते हैं, जिससे सुस्ती इत्यादि जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं.

स्मोक्ड सैल्मन (मछली)
परहेज़ करेंः यदि आप एंटीडिप्रेसेंट खाते हैं.
अगर आपका एंटीडिप्रेसेंट, मोनोमाइन ऑसिडैज इंहिविटर्स (एमएओआईएस) के कैटेगरी में आता है तो किसी भी प्रकार का स्मोक्ड मीट खाने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें. मीट्स में टाइरामाइन की मात्रा अधिक होती है और इन्हें एमएओआईएस के साथ मिक्स करने पर ब्लडप्रेशर बढ़ने का ख़तरा होता है. इस रिक्स लिस्ट में प्रोसेस्ड मीट्स व फिश भी आते हैं.

सोयाबीन व अखरोट
परहेज़ करेंः यदि आप थायरॉइड की दवालेते हैं.
हाई फाइबर फूड दवा को शरीर में अवशोषित होने से रोकते हैं. अगर आप हाई फाइबर डायट ग्रहण करते हैं, तो दवा को देर शाम या रात में ग्रहण करें. एक अध्ययन में यह सिद्ध हुआ है कि नाश्ते के पहले दवा ग्रहण करने की बजाय सोने से पहले लेना ज़्यादा बेहतर होता है.

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अक्सर हम सोचते हैं कि हमें हेल्दी फूड (Healthy Food) खाना चाहिए और जब भी मौका मिलता है, तो हम हेल्दी फूड खाने से पीछे नहीं हटते, लेकिन उस व़क्त हम शायद ही यह सोचते हैं कि भले ही हम हेल्दी फूड खा रहे हैं, लेकिन क्या यह समय उसे खाने के लिए सही है? जी हां, स़िर्फ सही खाना ही नहीं, सही समय (Right Time) पर खाना भी उतना ही ज़रूरी है, वरना कितना भी हेल्दी फूड हो, उसका असर उल्टा भी पड़ सकता है.

Healthy Eating

दही (Curd)
गर्मी के मौसम में दही खाना बहुत फ़ायदेमंद होता है. ये पेट को ठंडा रखता है, लेकिन रात को दही नहीं खाना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार, रात में दही खाने से कफ़ के साथ ही पेट से जुड़ी अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय दही खाना बेस्ट है. दही को ग़लती से भी गरम करके खाने की भूल न करें.

दूध (Milk)
हड्डियों को मज़बूत बनाने के लिए दूध बहुत ज़रूरी है, मगर इसे कब पीना चाहिए, इसे लेकर हर किसी की राय अलग-अलग है. कुछ लोग सुबह नाश्ते के व़क्त दूध पीते हैं, तो कुछ रात को सोने के पहले. वैसे कभी भी सुबह खाली पेट दूध नहीं पीना चाहिए, इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है.
क्या है सही समय?
विशेषज्ञों के मुताबिक़, अगर सुबह में दूध का सेवन किया जाए, तो ये आपको पूरे दिन एनर्जेटिक रखता है, जबकि रात में दूध पीने से दिमाग़ शांत रहता है और नींद भी अच्छी आती है. आयुर्वेद में दूध पीने का सही समय रात में ही बताया गया है.

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चावल (Rice)
आमतौर पर लोगों को लगता है कि चावल खाने से वज़न बढ़ता है, जबकि ये पूरा सच नहीं है. चावल में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर के लिए ज़रूरी है. हां, इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. कुछ लोगों को ये भी लगता है कि दोपहर में चावल खाना फिर भी ठीक है, मगर रात में नहीं खाना चाहिए, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होता.
क्या है सही समय?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, रात में ही चावल खाना चाहिए, मगर बहुत कम मात्रा में. इससे ये आसानी से पच भी जाता है और आपको रात को अच्छी नींद आती है, जबकि दोपहर में चावल अवॉइड करना चाहिए, क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, जिससे काम के समय आपको नींद आने लगती है.

शक्कर
चाय या दूध में बहुत ज़्यादा शक्कर नहीं डालनी चाहिए, मगर इसका ये मतलब नहीं है कि आप शक्कर खाना पूरी तरह से बंद कर दें. थोड़ी शक्कर खानी भी ज़रूरी है.
क्या है सही समय?
शक्कर को दिन में खाना सही होता है, क्योंकि इंसुलिन शुगर को असरदार तरी़के से एब्जॉर्व कर लेता है और ये आसानी से पच जाती है, जबकि रात में शक्कर खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है और आपको ठीक से नींद नहीं आती, तो अगर रात को खाने के बाद आपको मीठा खाने की आदत है, तो इसे बदल लीजिए.

दाल और बींस (Pulses, Lentils, Legumes)
प्रोटीन से भरपूर दाल और बींस को भी डायट में शामिल करना ज़रूरी है, मगर इसे खाने का सही समय भी पता होना चाहिए. रात के समय दाल और बींस खाना ठीक नहीं होता, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होते और फिर पेट में गैस बनने लगती है.
क्या है सही समय?
सुबह और दोपहर के समय इसे खाना अच्छा होता है, क्योंकि तब ये आसानी से पच जाते हैं और गैस की समस्या नहीं होती.

Healthy Eating

जानें इन फ्रूट्स (Fruits) को खाने का राइट टाइम

सभी तरह के फल सेहत के लिए अच्छे होते हैं, मगर इन्हें सही समय पर खाना चाहिए.

सेब (Apple)
विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर सेब में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता. ये बहुत हेल्दी होता है, तभी तो कहते हैं, ङ्गएन एप्पल अ डे कीप्स द डॉक्टर अवेफ. मगर क्या आप जानते हैं कि बेहतर रिज़ल्ट के लिए सेब कब खाना चाहिए?
क्या है सही समय?
खाली पेट एप्पल खाने से बॉडी से सारे हानिकारक टॉक्सिन निकल जाते हैं. इससे एनर्जी मिलती है और वज़न भी नहीं बढ़ता.

ऑरेंज (Orange)
विटामिन सी से भरपूर संतरे में विटामिन ए, बी कॉम्प्लेक्स, फ्लेवोनॉयड, अमीनो एसिड, कैल्शियम, आयोडीन, फॉस्फोरस, सोडियम, मैगनीज़ आदि की भी भरपूर मात्रा होती है. रोज़ाना दो संतरा खाने से सर्दी, कोलेस्ट्रॉल, किडनी में स्टोन और कोलन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है.
क्या है सही समय?
संतरे को सुबह खाली पेट और रात में न खाएं. इसे हमेशा दोपहर के समय खाएं. खाना खाने के 1 घंटा पहले या बाद में संतरा खाना फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि खाना खाने से पहले खाने पर भूख बढ़ती है और बाद में खाने से डाइजेशन ठीक रहता है.

अंगूर (Grapes)
गर्मियों में अंगूर या अंगूर का जूस पीना बहुत फ़ायदेमंद होता है. इससे बॉडी को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है और शरीर में पानी की कमी भी नहीं होती. अंगूर विटामिन्स का बेस्ट स्रोत है.
क्या है सही समय?
सुबह खाली पेट अंगूर खाना बहुत लाभदायक होता है. इसके अलावा धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद ही अंगूर खाएं. अंगूर खाने के तुरंत बाद खाना न खाएं.

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मौसंबी (Sweet Lime)
कैल्शियम, फास्फोरस आदि पोषक तत्वों से भरपूर मौसंबी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होती है. अक्सर पेशेंट को इसका जूस पीने की सलाह दी जाती है. गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मौसंबी का
जूस पीएं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय मौसंबी का सेवन करना लाभदायक होता है. धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद मौसंबी खाना या उसका जूस पीना फ़ायदेमंद होता है.

केला (Banana)
विटामिन्स, मिनरल्स, पौटैशियम, ज़िंक, आयरन, कार्बोहाइड्रेट से भरपूर केला बेहतरीन फल है. इसे खाने से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है.
क्या है सही समय?
अगर आप एक्सरसाइज़ करते हैं, तो एक्सरसाइज़ के बाद केला खाएं, इससे तुरंत एनर्जी मिलती है. दोपहर में भी केला खा सकते हैं, क्योंकि इसे खाने के बाद देर तक पेट भरा होने का एहसास होता है. रात को सोने से पहले केला न खाएं, क्योंकि इससे सर्दी हो सकती है.

तरबूज़ (Watermelon)
इसे बेस्ट समर फ्रूट कहा जा सकता है. इसमें 92 प्रतिशत पानी होता है, जो गर्मियों में आपकी बॉडी में पानी की कमी नहीं होने देता. तरबूज़ खाने से इम्यून सिस्टम भी ठीक रहता है.
क्या है सही समय?
तरबूज़ दिन में कभी भी खा सकते हैं, मगर इसे खाने के बाद एक घंटे तक पानी न पीएं. तरबूज़ को बहुत देर तक काटकर न रखें.

Healthy Eating
इन्हें भी खाएं सही समय पर
  • अखरोट (Walnuts) को रात को सोते समय स्नैक के रूप में खाएं, इससे अच्छी नींद आएगी.
  • अंजीर (Fig) और खुबानी को सुबह खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म (Metabolism) बढ़ता है और पेट को गर्मी मिलती है. अतः इसे सुबह ही खाएं. रात में इन्हें खाने से गैस की समस्या हो सकती है.
  •  चीज़ (Cheese) भी सुबह खाएं, क्योंकि इसे डाइजेस्ट (Digest) होने में समय लगता है और इससे वज़न भी जल्दी बढ़ता है.
  •  कॉफी सुबह के समय पीएं. इससे एनर्जी मिलती है और नींद गायब हो जाती है. रात को कॉफी पीने की ग़लती न करें.

– कंचन सिंह

वेट लॉस टिप ऑफ द डे: 15 ईज़ी वेट लॉस टिप्स (Weight Loss Tip Of The Day: 15 Easy Weight Loss Tips)

 

Diet according to body

आहार यानी भोजन शरीर का ईंधन है. यह ईंधन जलकर शरीर को काम करने के लिए ज़रूरी ऊर्जा प्रदान करता है. यानी हर शरीर को उसके आकार के मुताबिक़ आहार बहुत ज़रूरी है. ज़ाहिर-सी बात है, हर शरीर को उसकी गतिविधियों के मुताबिक़ भोजन मिलना चाहिए, ताकि शरीर स्वस्थ रहे. आइए, सबसे पहले शरीर की तासीर में बदलाव के साथ जुड़े बीएचआई यानी बॉडी हीट इंडेक्स के बारे में जानें. बीएचआई यानी शरीर में गर्मी के सूचकांक में बदलाव से बेचैनी और च़िड़चिड़ापन आता है. ऐसे में शरीर को नम रखना लाभदायक रहता है. अपच व मुंहासे जैसी आम समस्याएं भी बीएचआई में बदलाव के कारण पनपती हैं.

बीएचआई क्या है?
यह वातावरण की आर्द्रता से शरीर की तुलना कर शरीर के तापमान की जानकारी देता है. यदि आपके शरीर का तापमान औसत (98.3 डिग्री फारेहाइट) से कम है तो आपका हीट इंडेक्स लो यानी निम्न है और औसत से ़ज़्यादा है तो हाई यानी उच्च है.

बीएचआई को प्रभावित करनेवाले कारक
– वैक्सीनेशन या स्टेरॉइड.
– गर्भावस्था और पीरियड्स.
– लंबी दूरी की यात्रा व तनाव.

डायट प्लान
ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि शरीर की तासीर व मौसम के अनुसार डायट प्लान किया जाए. इसके लिए ज़रूरी है कि ठंडे व गर्म क़िस्म के खाद्य पदार्थों के बारे में जानें.

ठंडे खाद्य पदार्थ

1- तरबूज़
तरबज़ में पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है. पका हुआ तरबूज़ पित्तकारक, क्षारयुक्त, गर्म, वात व कफ़ शामक होता है. यह ब्लडप्रेशर को संतुलित रखता है और कई बीमारियों को दूर करता है. भोजन के बाद इसका रस पीने से भोजन जल्दी पचता है और नींद भी अच्छी आती है. इसके रस से लू लगने का ख़तरा नहीं रहता. त्वचा संबंधी बीमारियों के लिए भी यह फ़ायदेमंद है. चेहरे पर फुंसी हो तो तरबूज लगाने से लाभ
मिलता है.

2- ककड़ी
शरीर की तासीर को नम यानी ठंडा रखने का ककड़ी एक ़कुदरती उपाय है, जिसमें प्रचुर मात्रा में फ़ाइबर भी होता है. यह पेट को साफ़ करने में मदद करता है. अध्ययन के अनुसार एक बाउल ककड़ी दिमाग़ को ठंडा करता है, ख़ासकर गर्मियों में.

3- दही
वैज्ञानिकों का कहना है कि दही पूर्ण भोजन है. इसमें सभी पौष्टिक तत्व होते हैं. फैट, कैल्शियम, मैग्नेशियम, सल्फर, आयरन, सोडियम जैसे तंदुरुस्ती बढ़ाने वाले तत्व इसमें प्राकृतिक रूप में पाए जाते हैं. दही का नियमित सेवन करने से पेट संबंधी परेशानियों से भी निजात मिलती है. इसलिए स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह काफ़ी
लाभकारी है.

4- पालक
पालक से रक्त शुद्धि व शक्ति का संचार होता है. आयरन तत्व हमारे शरीर के लिए उपयोगी व ज़रूरी है. आयरन के कारण ही रक्त में बल्ड सेल्स में इम्यूनिटी व लालिमा आती है. गर्मी में नज़ला, सीने व फेफड़े की जलन में यह लाभदायक है. यह पित्त की तेज़ी शांत करता है. गर्मी की वजह से होनेवाले पीलिया व खांसी में यह बहुत लाभदायक है. यह पानी और मैग्नेशियम का अच्छा स्रोत है. यह पाचन क्रिया को सही रखने में भी मदद करता है.

गर्म खाद्य पदार्थ

1- अंडा
अंडा काफ़ी गर्म माना जाता है. हर रोज़ एक अंडा खाना सेहत के लिए फ़ायदेमंद है, लेकिन अधिक नहीं. अध्ययन के अनुसार अंडे की जर्दी और मुंहासों की समस्या में सीधा संबंध है.

2- पपीता
पपीते के वैज्ञानिक विश्‍लेषण से पता चला है कि यह शरीर का क्षार संतुलित रखता है. इसमें विटामिन ए, बी और सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं और डी अल्प मात्रा में. इसके नियमित उपयोग से शरीर में विटामिन्स की कमी नहीं रहती. इसमें पेप्सिन नामक तत्व पाया जाता है, जो बहुत ही पाचक होता है. यह पेप्सिन प्राप्त करने का एकमात्र साधन है. पपीते का रस प्रोटीन को आसानी से पचा देता है. इसलिए पपीता पेट व आंत संबंधी विकारों में बहुत ही लाभदायक है. लेकिन अधिक गर्म पदार्थ होने के कारण गर्भावस्था में महिलाओं को पपीता न खाने की सलाह दी जाती है.

3- लाल मिर्च
लाल मिर्च शरीर की संचार प्रणाली को उत्तेजित करता है. शरीर के हर अंग में रक्त और पोषक तत्व पहुंचाने में मदद करता है. परंतु इसका ज़रूरत से ़ज़्यादा इस्तेमाल कई गंभीर समस्याओं, जैसे- गैस्ट्रिक, एसिड, क़ब्ज़ की समस्याएं बढ़ाता है.

4- नट्स
नट्स ऊर्जा का अच्छा स्रोत है, जिसे पचने में काफ़ी व़क़्त लगता है. यह दिमाग़ व शरीर को स्वस्थ बनाता है. इसमें एनर्जी होती है. साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल फ्री होता है. पर इसे खाली पेट लेने से गैस्ट्रिक की समस्या भी हो सकती है, जो हाइपर हीट इंडेक्स को बढ़ाता है.

ध्यान रखें

  • बासी, ठंडा, कच्चा या जला हुआ व दोबारा गर्म किया हुआ भोजन सेहत के लिए नुक़सानदेह होता है.
  • भोजन करते समय कड़े पदार्थ पहले, नरम बीच में और पतले पदार्थ अंत में खाएं.
  • भूख लगने पर पानी और प्यास लगने पर भोजन नहीं करें, अन्यथा स्वास्थ्य को हानि पहुंचती है.
  • सर्दी के दिनों में भोजन से पहले थोड़ा-सा अदरक व सेंधा नमक खा लेना चाहिए, जिससे पाचन शक्ति बढ़ जाती है.
  • भोजन करने से पहले केला व ककड़ी न खाएं.
  • भोजन में दूध, दही, छाछ लेना आयु को बढ़ाता है.
  • रात को भोजन के बाद दूध पीना सेहत के लिए हितकर है.
  • बिना भूख के भोजन करना बीमारियों को आमंत्रित करता है.
  • दो भोजन के बीच कम से कम छह घंटे का अंतर होना चाहिए.
  • अपनी शरीर की प्रकृति, पाचन शक्ति व शारीरिक क्षमता के अनुसार उचित मात्रा में ही भोजन करें.
  • भोजन करने के बाद क्रोध व तुरंत एक्सरसाइज़ कभी न करें.
  • भोजन करने के बाद कुछ देर ज़रूर टहलें. एसिडिटी होने पर अचार न खाएं.
  • जब मलेरिया हो तो दूध, मोसंबी, संतरा, गन्ने का रस लें. बुख़ार उतरने पर साबूदाना, पतली दाल व दलिया लें. कोई भी ठोस पदार्थ न खाएं.
  • संतरा का फ़ाइबर ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है.

जानें किन खाद्य पदार्थों को एक साथ खाना चाहिए (7 Best Food Combinations)

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अगर आपको भी खाने के सिवाय कुछ और नहीं दिखता, रात-दिन स़िर्फ खाने से सजी प्लेट ही दिखती है, तो आप इसी प्लेट में, मेरा मतलब है कि इस इंडस्ट्री में अपना फ्यूचर बना सकते हैं. फूड इंडस्ट्री ग्रोइंग इंडस्ट्री है. यहां कभी भी जॉब की कमी नहीं होती. कब, कैसे करें शुरुआत? आइए, हम आपको बताते हैं.

एजुकेशनल स्किल
इस सेक्टर में करियर बनाने के लिए ज़रूरी है कि आप दसवीं पास हों. इसके बाद बारहवीं और फिर होम साइंस में ग्रैज्युएशन करके आप आगे की पढ़ाई के लिए परस्यु कर सकते हैं. इसके अलावा आप डिप्लोमा कोर्सेस भी कर सकते हैं.

पर्सनल स्किल
अगर आपको लगता है कि इसमें स़िर्फ खाना बनाना ही आना चाहिए, तो आप ग़लत हैं. इस इंडस्ट्री में आगे बहुत कुछ सिखाया और पढ़ाया जाता है. करियर बनाने से पहले जान लें निम्म बातें:
– प्ऱजेंटेशन की कला
– तहज़ीब
– पेशेंस
– गेस्ट मैनर्स
– गुड कम्युनिकेशन स्किल्स
– टीम स्पीरिट
– हार्ड वर्क
– उत्साह
– प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी

पैशन फॉर फूड
जिस फील्ड में आप करियर बनाना चाहते हैं, उसके लिए आपके अंदर पैशन होना चाहिए. किसी के कहने पर करियर बनाने की होड़ में नहीं लग जाना चाहिए. तो अगर आप चाहते हैं कि लोग बड़े-बड़े रेस्टॉरेंट का खाना भूल जाएं और आपके हाथ का खाना खाने को तरसें, तो अपने कार्य के प्रति पैशनेट हो जाइए. इसकी हर जानकारी अपने पास रखिए. कब क्या नया हो रहा है, उसकी पूरी जानकारी आपको पास होना चाहिए.

इंटरनेशनल फूड की रखें जानकारी
अगर आप चाहते हैं कि आप द्वारा बनाया खाना पूरी दुनिया को उंगली चाटने पर मजबूर कर दे, तो इस बात का ध्यान रखिए कि आपको हर देश के फूड की जानकारी होनी चाहिए. किस देश के लोगों को क्या पसंद है और उसे वहां कैसे बनाते हैं, ये आपको बख़ूबी आना चाहिए.

बी इन ट्रेंड
आपको क्या लगता है कि स़िर्फ फैशन की दुनिया में ही ट्रेंड चलता है, नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. अगर आप इस इंडस्ट्री पर राज करना चाहते हैं, तो आपको ट्रेंड फॉलोवर के साथ ट्रेंड सेटर भी होना चाहिए. आपको खाने में कुछ नया ट्राई करते रहना चाहिए. इसके अलावा खाने का भी एक दौर चलता है, कभी कोई चीज़ बहुत पसंद की जाती है, तो कभी उसकी डिमांड ज़ीरो हो जाती है. ऐसे में आप भी इस ट्रेंड को जानें और उसके अनुरूप ख़ुद को तैयार करें.

हैंडसम सैलरी
इस इंडस्ट्री में करियर बनाने वालों के लिए पैसा बहुत है. करियर के शुरुआती दौर में 10 से 15 हज़ार रुपये मिलते हैं. एक्सपीरियंस बढ़ने पर हर महीने 40 से 50 हज़ार रुपये सैलरी मिलने लगती है. अगर फाइव स्टार होटल में जॉब मिल गई, तो इनकम 1 से 2 लाख रुपये या इससे भी अधिक हो सकती है. इसके अलावा अगर आपने अपना होटल/रेस्टॉरेंट ओपन किया, तो पैसे की कोई कमी नहीं होगी.

तो देर किस बात की, अपना हुनर दिखाइए और इस इंडस्ट्री में छा जाइए. आपके हाथों का जादू आपके करियर को नई ऊंचाई देगा.

– श्वेता सिंह