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डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए डायट प्लान ( Diet Plan For Diabetic Person)

Diet Plan For Diabetic Person

डायबिटीज़ के मरीज़ों को खान-पान पर बहुत ध्यान  देना चाहिए. इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम बता रहे हैं कि डायबिटीज़ के मरीज़ों को क्या खाना ( Diet Plan For Diabetic Person) चाहिए और किन चीज़ों से परहेज़ करना चाहिए?

Diet Plan For Diabetic Person
डायबिटीज़ के मरीज़ों को बैलेंस्ड डायट( Diet Plan For Diabetic Person) लेनी चाहिए, जिसमें 50-60 फ़ीसदी कार्बोहाइड्रेट, 15-20 फ़ीसदी प्रोटीन और 20-25 फ़ीसदी फैट और दूसरी चीज़ें शामिल हों. एक बार के खाने में 2-4 सर्विंग कार्ब ले सकते हैं.  मरीज़ खाने में ज़्यादा गैप न रखें. ज़्यादा गैप रखने से शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव होता है. हर दो घंटे में कुछ खाएं. खाना थोड़ा-थोड़ा और बार-बार खाएं. न तो ज़्यादा देर भूखे रहें और न ही एक बार में ढ़ेेर सारा खाना खाएं. खाने की मात्रा भी क़रीब-क़रीब बराबर ही रखें.
क्या और कितना खाएं?
खा सकते हैं
कार्बोहाइड्रेट: चोकर वाला आटा, जौ, जई, रागी, दलिया, मल्टीग्रेन ब्रेड, काला चना, सोया, राजमा.
फल: सेब, चेरी, जामुन, मोसंबी, संतरा, स्ट्रॉबेरी, शहतूत, आलूबुखारा, नाशपाती, अंजीर.
सब्ज़ियां: ककड़ी, तोरी, टिंडा, सेम, शलजम, खीरा, चने का साग, सोया का साग, लहसुन, पालक, मेथी, आंवला, घीया.
अन्य: डबल टोंड दूध और उससे बनी चीज़ें, छिलके वाली दालें, मछली (बिना ज़्यादा तेल और मसाले वाली), फ्लैक्स सीड्स, छाछ आदि.
कम खाएं 
कार्बोहाइड्रेट: बिना चोकर का आटा, सूजी, सूजी के रस, ब्राउन ब्रेड, सफेद चना.
फल: अमरूद, पपीता, तरबूज़, खरबूजा.
सब्ज़ियां: अरवी, आलू, जिमीकंद, गोभी. मीठा: आर्टिफिशल स्वीटनर, खांड (बिना रिफाइन वाली शुगर).
अन्य: टोंड दूध और उससे बनी चीजें, बिना छिलके वाली दालें, अंडा, चिकन, बादाम, अखरोट, देसी घी, अच्छे तेल (सरसो, ऑलिव, कनोला, राइसब्रैन आदि)
न खाएं
कार्बोहाइड्रेट: सफेद चावल, मैदा, पूरी, समोसा, वाइट ब्रेड.
फल: आम, चीकू, अंगूर, केला.
सब्ज़ियां: शकरकंद, आलू, मीठा: मिठाई, चीनी, गुड़, शहद, गन्ना, आइसक्रीम, जैम, केक, पेस्ट्री, कुकीज़.
अन्य: फुल क्रीम दूध और उससे बनी चीजें, रेड मीट, कोल ड्रिंक्स, रिफाइंड ऑयल.
नोट: अगर शुगर के साथ-साथ कोई दूसरी बीमारी भी हो जैसे किडनी तो यह डायट लागू नहीं होगी. बेहतर यही होगा कि डॉक्टर की राय से ही अपना डायट चार्ट बनाएं.
ये भी है फ़ायदेमंद
1. डायबिटीज़ के मरीज़ करेला का पाउडर या जूस और घिया का जूस भी पी सकते हैं.
2. रोज़ाना आधा छोटा चम्मच दालचीनी का पाउडर लें. दालचीनी ख़ून में ग्लूकोज़ लेवल,  ब्लडप्रेशर और वज़न को भी कम करती है. इसे पानी के साथ या किसी सलाद आदि पर डालकर भी ले सकते हैं. गर्म चीज़ों में मिलाकर न लें. 18 साल से कम उम्र वाले और प्रेग्नेंट व दूध पिलानेवाली महिलाएं न लें.
नोट: डायट की डायरी रखें और जो भी खाएं, उसमें नोट करें.

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सीखें दाल बनाने के 10 नए तरी़के (10 Best And Easy Dal Recipes)

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रोज़ाना एक ही तरी़के से दाल बनाना वाकई बहुत बोरिंग काम है. रोज़ अलग तरह से दाल बनाकर परिवार और मेहमानों की तारीफ़ पाने के लिए सीखें दाल बनाने के 10 नए तरीक़े (Best And Easy Dal Recipes).

1) तुअर या चना दाल पकाते समय प्रेशर कुकर में मेथी दाने की छोटी पटोली रखकर पकाएं. इससे दाल का स्वाद भी बढ़ेगा और इसे पचाना भी आसान होगा.

2) रोज़ाना दाल के एक जैसे स्वाद से बोर हो गई हैं तो दाल को दूध में पकाएं. पकाते समय नमक न डालें. जब दाल पक जाए तो उसमें तड़का दें और फ्रेश क्रीम मिलाएं. आख़िर में स्वादानुसार नमक डालें. लीजिए, शाकाहारी दाल मुग़लई तैयार है.

3) जब अचानक मेहमान आ जाएं और आपने साबूत उड़द की दाल बना रखी हो तो दाल की मात्रा बढ़ाने के लिए उसमें आधा कप दूध और 50 ग्राम मक्खन मिला दें. थोड़ी देेर पकाने के बाद लहसुन, अदरक, हरी मिर्च व थोड़ा-सा गरम मसाला डालकर छौंक लगा लें. इससे आपकी दाल की मात्रा भी बढ़ जाएगी और टेस्टी दाल मखनी भी तैयार हो जाएगी.

4) सांभर बनाने के लिए पहले से कुकर में पकाई हुई तुअर की दाल में सांभर मसाला, इमली का गूदा और सब्ज़ियां, जैसे- गाजर, फूलगोभी, मूली, बैंगन, बीन्स, भिंडी, कद्दू आदि मिलाएं और कुकर में दोबारा एक सीटी आने तक पका लें. हरी मिर्च, राई और करीपत्ते का छौंक लगाएं. इस विधि से बनाएंगी तो बेशक सांभर स्वादिष्ट बनेगा.

5) कुकर में तेल गरम करके हींग और जीरा का तड़का दें. फिर उड़द दाल और हरी मटर समान मात्रा में मिलाकर भूनें. फिर लालमिर्च, गरम मसाला, नमक और पानी मिलाकर कुकर में प्रेशर लगाएं.

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6) मूंग दाल को हल्का गलने तक पकाएं, इसमें बारीक़ कटी हुई पालक, बारीक़ कटी हुई सेम, कटे हुए गाजर, उबले हुए कॉर्न, हरी मटर, लहसुन का पेस्ट, धनिया पाउडर, हल्दी पाउडर, नमक और कालीमिर्च पाउडर डालकर कुछ देर पकाएं. सौंफ पाउडर छिड़ककर सर्व करें.

7) मसूर दाल में हल्दी व नमक डालकर उबालें. कुकर खोलकर कद्दूकस की हुई आम की कैरी डालकर कुछ देर पकाएं. पैन में तेल गरम करें. जीरा, हींग और सूखी लालमिर्च का तड़का देकर सर्व करें.

8) अरहर की दाल में पानी और दूध डालकर हांडी में पकने के लिए रख दें. इसमें हल्दी पाउडर, लालमिर्च पाउडर और नमक डालकर उबालें. आधा उबाल आने के बाद इमली का गूदा डालें और धीमी आंच पर पकाएं. पैन में घी गरम करें. इसमें जीरा, साबूत लालमिर्च और कालीमिर्च का तड़का लगाएं.

9) दाल पकाते समय थोड़ा-सा तेल डाल दें. इससे दाल का स्वाद बढ़ जाएगा.

10) दाल पकाते समय पानी और दाल के अनुपात पर ध्यान दें, जैसे- 1 कप दाल में 2-3 कप पानी होना चाहिए.

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जानिए कौन-सी दवा के साथ क्या नहीं खाना चाहिए? (Common Foods &; Medications You Should NEVER Mix!)

Common Foods, Medications You Should NEVER Mix

दवाएं हम बीमारी को दूर करने के लिए खाते हैं और खाना स्वस्थ रहने के लिए. लेकिन ऐसे कई खाद्य पदार्थ हैं, जो वैसे तो सेहत की दृष्टि से बेहद फ़ायदेमंद होते हैं, लेकिन उन्हें कुछ दवाओं के साथ ग्रहण करने पर न स़िर्फ दवा का असर कम हो जाता है, बल्कि सेहत को नुक़सान भी पहुंच सकता है. हम आपको बता रहे हैं कि किस दवा और किस खाद्य पदार्थ के साथ मिक्स नहीं करना चाहिए.

Common Foods, Medications You Should NEVER Mix

कॉफी
परहेज़ करेंः अगर आप अस्थमा के इलाज के लिए ब्रोन्को डायलेटर ले रहे हैं.
यह दवा फेफड़े के मसल्स को रिलैक्स करती है, जिससे मरीज़ को सांस लेने में आसानी होती है, लेकिन इस दवा के साइड इफेक्ट्स भी हैं. इस दवा का सेवन करने पर
कभी-कभी घबराहट होने के साथ दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है. ऐसे में इस दवा के साथ कैफीन लेने पर साइड इफेक्ट्स होने की संभावना बढ़ जाती है. इतना ही नहीं, ज़्यादा कॉफी का सेवन करने पर दवा का असर भी घट जाता है. अतः बेहतर होगा कि अगर आप अस्थमा की यह दवा ले रहे हैं तो कॉफी न पीएं. अगर इसकी लत हो तो इस बारे में डॉक्टर को अवश्य बताएं.

केला
परहेज़ करेंः यदि आप ब्लड प्रेशर की दवा खाते हैं.
केला में भरपूर मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है, जो कि सेहत के लिए अच्छा है. यदि आप ब्लडप्रेशर की दवाएं, जैसे-कैप्टोप्रिल, एंजियोटेनसिन इत्यादि ग्रहण करते हैं तो केला सहित अन्य पोटैशियम रिच खाद्य पदार्थ, जैसे-पत्तेदार सब्ज़ियां, संतरा इत्यादि का अत्यधिक मात्रा में सेवन न करें, क्योंकि इन दवाओं के साथ पोटैशियम रिच फूड्स का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से दिल की धड़कन बढ़ सकती है. इसलिए बेहतर होगा कि आप ब्लडप्रेशर की दवा के साथ केला जैसे पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करने से पहले इस बारे में डॉक्टर को बताएं.

अल्कोहल
परहेज़ करेंः यदि आप एंटीहिस्टामाइन्स, डायबिटीज़ की दवा या पेन किलर्स खाते हैं.
आमतौर पर किसी भी दवा के साथ अल्कोहल लेने की मनाही होती है, क्योंकि अल्कोहल लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है. लेकिन अल्कोहल, पैरासिटामॉल और कोडीन लिवर द्वारा अवशोषित किए जाते हैं. ऐसे में अल्कोहल और इन दवाओं के साथ ग्रहण करने पर इन्हें पचाने के लिए लिवर को
ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स, जैसे सुस्ती इत्यादि होने की आशंका बढ़ जाती है. इसके अलावा लिवर के क्षतिग्रस्त होने का भी रिस्क होता है.

पत्तेदार सब्ज़ियां
परहेज़ करेंः यदि आप एंटीकॉलैगुलेंट (ख़ून को पतला करने की दवा) लेते हैं
ब्रोकोली, पालक, पत्तागोभी जैसी पत्तेदार सब्ज़ियां सेहत के लिए अच्छी होती हैं, लेकिन यदि आप वॉर्फरिन जैसी एंटीब्लड क्लॉटिंग मेडिसिन लेते हैं तो पत्तेदार सब्ज़ियों का सेवन संभलकर करें. इन सब्ज़ियों में विटामिन के की मात्रा अधिक होती है, जो ब्लड को क्लॉट करने में मदद करता है. आपको बता दें कि वॉर्फरिन का काम ख़ून को पतला करना है. ऐसे में यदि आप अधिक मात्रा में पत्तेदार सब्ज़ियों का सेवन करेंगे तो वॉर्फरिन को अपना काम करने में बाधा उत्पन्न होगी. कैनबेरी जूस और कैनबेरी के प्रोडक्ट्स लेने से भी परहेज़ करें, क्योंकि ये भी वॉर्फरिन के असर को कम करते हैं.

नारंगी
परहेज़ करेंः यदि आप स्टैटिन ग्रहण करते हैं.
यदि आप ब्लड प्रेशर कम करने के लिए स्टैटिन ग्रहण करते हैं तो आपको नारंगी या नारंगी का जूस पीने से बचना चाहिए. नारंगी में एक ऐसा केमिकल होता है, जो शरीर को स्टैटिन को अवशोषित करने से रोकता है. जिसके कारण मरीज़ को मांसपेशियों या शरीर में दर्द की शिकायत हो सकती है.

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डेयरी प्रोडक्ट्स
परहेज़ करेंःयदि आप एंटीबायोटिक्स लेते है.
दूध, दही, चीज़ जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स में पाया जानेवाला कैल्शियम सिप्रोफ्लॉक्ससिन व टेट्रासाइक्लिन जैसे एंटीबायोटिक्स को शरीर में एब्जॉर्ब होने में बाधा पहुंचाता है, जिससे उनका असर कम होता है. अच्छे रिजल्ट के लिए एंटीबायोटिक्स खाने के एक घंटे पहले पानी के साथ, या फिर खाना खाने के दो घंटे बाद ग्रहण करना चाहिए. इसलिए अगर आप दूध के साथ एंटीबायोटिक्स ग्रहण करते हैं तो ऐसा करना छोड़ दें.

नींबू
परहेज़ करेंः यदि आप कफ की दवा ले रहे हैं.
यदि आप डेक्सट्रोमेथॉर्फिन युक्त कफ की दवा ले रहे हैं तो नींबू, संतरा जैसे खट्टे खाद्य पदार्थ लेने से बचें. सिट्रस फूड्स शरीर द्वारा दवा को ब्रेक डाउन करके अवशोषित करने की प्रक्रिया में बाधा पहुंचाते हैं, जिससे सुस्ती इत्यादि जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं.

स्मोक्ड सैल्मन (मछली)
परहेज़ करेंः यदि आप एंटीडिप्रेसेंट खाते हैं.
अगर आपका एंटीडिप्रेसेंट, मोनोमाइन ऑसिडैज इंहिविटर्स (एमएओआईएस) के कैटेगरी में आता है तो किसी भी प्रकार का स्मोक्ड मीट खाने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें. मीट्स में टाइरामाइन की मात्रा अधिक होती है और इन्हें एमएओआईएस के साथ मिक्स करने पर ब्लडप्रेशर बढ़ने का ख़तरा होता है. इस रिक्स लिस्ट में प्रोसेस्ड मीट्स व फिश भी आते हैं.

सोयाबीन व अखरोट
परहेज़ करेंः यदि आप थायरॉइड की दवालेते हैं.
हाई फाइबर फूड दवा को शरीर में अवशोषित होने से रोकते हैं. अगर आप हाई फाइबर डायट ग्रहण करते हैं, तो दवा को देर शाम या रात में ग्रहण करें. एक अध्ययन में यह सिद्ध हुआ है कि नाश्ते के पहले दवा ग्रहण करने की बजाय सोने से पहले लेना ज़्यादा बेहतर होता है.

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सही खाना ही नहीं, सही समय पर खाना भी है ज़रूरी (Healthy Eating: Are You Eating At The Right Time?)

Healthy Eating

अक्सर हम सोचते हैं कि हमें हेल्दी फूड (Healthy Food) खाना चाहिए और जब भी मौका मिलता है, तो हम हेल्दी फूड खाने से पीछे नहीं हटते, लेकिन उस व़क्त हम शायद ही यह सोचते हैं कि भले ही हम हेल्दी फूड खा रहे हैं, लेकिन क्या यह समय उसे खाने के लिए सही है? जी हां, स़िर्फ सही खाना ही नहीं, सही समय (Right Time) पर खाना भी उतना ही ज़रूरी है, वरना कितना भी हेल्दी फूड हो, उसका असर उल्टा भी पड़ सकता है.

Healthy Eating

दही (Curd)
गर्मी के मौसम में दही खाना बहुत फ़ायदेमंद होता है. ये पेट को ठंडा रखता है, लेकिन रात को दही नहीं खाना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार, रात में दही खाने से कफ़ के साथ ही पेट से जुड़ी अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय दही खाना बेस्ट है. दही को ग़लती से भी गरम करके खाने की भूल न करें.

दूध (Milk)
हड्डियों को मज़बूत बनाने के लिए दूध बहुत ज़रूरी है, मगर इसे कब पीना चाहिए, इसे लेकर हर किसी की राय अलग-अलग है. कुछ लोग सुबह नाश्ते के व़क्त दूध पीते हैं, तो कुछ रात को सोने के पहले. वैसे कभी भी सुबह खाली पेट दूध नहीं पीना चाहिए, इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है.
क्या है सही समय?
विशेषज्ञों के मुताबिक़, अगर सुबह में दूध का सेवन किया जाए, तो ये आपको पूरे दिन एनर्जेटिक रखता है, जबकि रात में दूध पीने से दिमाग़ शांत रहता है और नींद भी अच्छी आती है. आयुर्वेद में दूध पीने का सही समय रात में ही बताया गया है.

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चावल (Rice)
आमतौर पर लोगों को लगता है कि चावल खाने से वज़न बढ़ता है, जबकि ये पूरा सच नहीं है. चावल में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर के लिए ज़रूरी है. हां, इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. कुछ लोगों को ये भी लगता है कि दोपहर में चावल खाना फिर भी ठीक है, मगर रात में नहीं खाना चाहिए, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होता.
क्या है सही समय?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, रात में ही चावल खाना चाहिए, मगर बहुत कम मात्रा में. इससे ये आसानी से पच भी जाता है और आपको रात को अच्छी नींद आती है, जबकि दोपहर में चावल अवॉइड करना चाहिए, क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, जिससे काम के समय आपको नींद आने लगती है.

शक्कर
चाय या दूध में बहुत ज़्यादा शक्कर नहीं डालनी चाहिए, मगर इसका ये मतलब नहीं है कि आप शक्कर खाना पूरी तरह से बंद कर दें. थोड़ी शक्कर खानी भी ज़रूरी है.
क्या है सही समय?
शक्कर को दिन में खाना सही होता है, क्योंकि इंसुलिन शुगर को असरदार तरी़के से एब्जॉर्व कर लेता है और ये आसानी से पच जाती है, जबकि रात में शक्कर खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है और आपको ठीक से नींद नहीं आती, तो अगर रात को खाने के बाद आपको मीठा खाने की आदत है, तो इसे बदल लीजिए.

दाल और बींस (Pulses, Lentils, Legumes)
प्रोटीन से भरपूर दाल और बींस को भी डायट में शामिल करना ज़रूरी है, मगर इसे खाने का सही समय भी पता होना चाहिए. रात के समय दाल और बींस खाना ठीक नहीं होता, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होते और फिर पेट में गैस बनने लगती है.
क्या है सही समय?
सुबह और दोपहर के समय इसे खाना अच्छा होता है, क्योंकि तब ये आसानी से पच जाते हैं और गैस की समस्या नहीं होती.

Healthy Eating

जानें इन फ्रूट्स (Fruits) को खाने का राइट टाइम

सभी तरह के फल सेहत के लिए अच्छे होते हैं, मगर इन्हें सही समय पर खाना चाहिए.

सेब (Apple)
विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर सेब में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता. ये बहुत हेल्दी होता है, तभी तो कहते हैं, ङ्गएन एप्पल अ डे कीप्स द डॉक्टर अवेफ. मगर क्या आप जानते हैं कि बेहतर रिज़ल्ट के लिए सेब कब खाना चाहिए?
क्या है सही समय?
खाली पेट एप्पल खाने से बॉडी से सारे हानिकारक टॉक्सिन निकल जाते हैं. इससे एनर्जी मिलती है और वज़न भी नहीं बढ़ता.

ऑरेंज (Orange)
विटामिन सी से भरपूर संतरे में विटामिन ए, बी कॉम्प्लेक्स, फ्लेवोनॉयड, अमीनो एसिड, कैल्शियम, आयोडीन, फॉस्फोरस, सोडियम, मैगनीज़ आदि की भी भरपूर मात्रा होती है. रोज़ाना दो संतरा खाने से सर्दी, कोलेस्ट्रॉल, किडनी में स्टोन और कोलन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है.
क्या है सही समय?
संतरे को सुबह खाली पेट और रात में न खाएं. इसे हमेशा दोपहर के समय खाएं. खाना खाने के 1 घंटा पहले या बाद में संतरा खाना फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि खाना खाने से पहले खाने पर भूख बढ़ती है और बाद में खाने से डाइजेशन ठीक रहता है.

अंगूर (Grapes)
गर्मियों में अंगूर या अंगूर का जूस पीना बहुत फ़ायदेमंद होता है. इससे बॉडी को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है और शरीर में पानी की कमी भी नहीं होती. अंगूर विटामिन्स का बेस्ट स्रोत है.
क्या है सही समय?
सुबह खाली पेट अंगूर खाना बहुत लाभदायक होता है. इसके अलावा धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद ही अंगूर खाएं. अंगूर खाने के तुरंत बाद खाना न खाएं.

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मौसंबी (Sweet Lime)
कैल्शियम, फास्फोरस आदि पोषक तत्वों से भरपूर मौसंबी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होती है. अक्सर पेशेंट को इसका जूस पीने की सलाह दी जाती है. गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मौसंबी का
जूस पीएं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय मौसंबी का सेवन करना लाभदायक होता है. धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद मौसंबी खाना या उसका जूस पीना फ़ायदेमंद होता है.

केला (Banana)
विटामिन्स, मिनरल्स, पौटैशियम, ज़िंक, आयरन, कार्बोहाइड्रेट से भरपूर केला बेहतरीन फल है. इसे खाने से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है.
क्या है सही समय?
अगर आप एक्सरसाइज़ करते हैं, तो एक्सरसाइज़ के बाद केला खाएं, इससे तुरंत एनर्जी मिलती है. दोपहर में भी केला खा सकते हैं, क्योंकि इसे खाने के बाद देर तक पेट भरा होने का एहसास होता है. रात को सोने से पहले केला न खाएं, क्योंकि इससे सर्दी हो सकती है.

तरबूज़ (Watermelon)
इसे बेस्ट समर फ्रूट कहा जा सकता है. इसमें 92 प्रतिशत पानी होता है, जो गर्मियों में आपकी बॉडी में पानी की कमी नहीं होने देता. तरबूज़ खाने से इम्यून सिस्टम भी ठीक रहता है.
क्या है सही समय?
तरबूज़ दिन में कभी भी खा सकते हैं, मगर इसे खाने के बाद एक घंटे तक पानी न पीएं. तरबूज़ को बहुत देर तक काटकर न रखें.

Healthy Eating
इन्हें भी खाएं सही समय पर
  • अखरोट (Walnuts) को रात को सोते समय स्नैक के रूप में खाएं, इससे अच्छी नींद आएगी.
  • अंजीर (Fig) और खुबानी को सुबह खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म (Metabolism) बढ़ता है और पेट को गर्मी मिलती है. अतः इसे सुबह ही खाएं. रात में इन्हें खाने से गैस की समस्या हो सकती है.
  •  चीज़ (Cheese) भी सुबह खाएं, क्योंकि इसे डाइजेस्ट (Digest) होने में समय लगता है और इससे वज़न भी जल्दी बढ़ता है.
  •  कॉफी सुबह के समय पीएं. इससे एनर्जी मिलती है और नींद गायब हो जाती है. रात को कॉफी पीने की ग़लती न करें.

– कंचन सिंह

वेट लॉस टिप ऑफ द डे: 15 ईज़ी वेट लॉस टिप्स (Weight Loss Tip Of The Day: 15 Easy Weight Loss Tips)

 

बॉडी के अनुसार डाइट (Food Choice: Diet according to body)

Diet according to body

Diet according to body

आहार यानी भोजन शरीर का ईंधन है. यह ईंधन जलकर शरीर को काम करने के लिए ज़रूरी ऊर्जा प्रदान करता है. यानी हर शरीर को उसके आकार के मुताबिक़ आहार बहुत ज़रूरी है. ज़ाहिर-सी बात है, हर शरीर को उसकी गतिविधियों के मुताबिक़ भोजन मिलना चाहिए, ताकि शरीर स्वस्थ रहे. आइए, सबसे पहले शरीर की तासीर में बदलाव के साथ जुड़े बीएचआई यानी बॉडी हीट इंडेक्स के बारे में जानें. बीएचआई यानी शरीर में गर्मी के सूचकांक में बदलाव से बेचैनी और च़िड़चिड़ापन आता है. ऐसे में शरीर को नम रखना लाभदायक रहता है. अपच व मुंहासे जैसी आम समस्याएं भी बीएचआई में बदलाव के कारण पनपती हैं.

बीएचआई क्या है?
यह वातावरण की आर्द्रता से शरीर की तुलना कर शरीर के तापमान की जानकारी देता है. यदि आपके शरीर का तापमान औसत (98.3 डिग्री फारेहाइट) से कम है तो आपका हीट इंडेक्स लो यानी निम्न है और औसत से ़ज़्यादा है तो हाई यानी उच्च है.

बीएचआई को प्रभावित करनेवाले कारक
– वैक्सीनेशन या स्टेरॉइड.
– गर्भावस्था और पीरियड्स.
– लंबी दूरी की यात्रा व तनाव.

डायट प्लान
ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि शरीर की तासीर व मौसम के अनुसार डायट प्लान किया जाए. इसके लिए ज़रूरी है कि ठंडे व गर्म क़िस्म के खाद्य पदार्थों के बारे में जानें.

ठंडे खाद्य पदार्थ

1- तरबूज़
तरबज़ में पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है. पका हुआ तरबूज़ पित्तकारक, क्षारयुक्त, गर्म, वात व कफ़ शामक होता है. यह ब्लडप्रेशर को संतुलित रखता है और कई बीमारियों को दूर करता है. भोजन के बाद इसका रस पीने से भोजन जल्दी पचता है और नींद भी अच्छी आती है. इसके रस से लू लगने का ख़तरा नहीं रहता. त्वचा संबंधी बीमारियों के लिए भी यह फ़ायदेमंद है. चेहरे पर फुंसी हो तो तरबूज लगाने से लाभ
मिलता है.

2- ककड़ी
शरीर की तासीर को नम यानी ठंडा रखने का ककड़ी एक ़कुदरती उपाय है, जिसमें प्रचुर मात्रा में फ़ाइबर भी होता है. यह पेट को साफ़ करने में मदद करता है. अध्ययन के अनुसार एक बाउल ककड़ी दिमाग़ को ठंडा करता है, ख़ासकर गर्मियों में.

3- दही
वैज्ञानिकों का कहना है कि दही पूर्ण भोजन है. इसमें सभी पौष्टिक तत्व होते हैं. फैट, कैल्शियम, मैग्नेशियम, सल्फर, आयरन, सोडियम जैसे तंदुरुस्ती बढ़ाने वाले तत्व इसमें प्राकृतिक रूप में पाए जाते हैं. दही का नियमित सेवन करने से पेट संबंधी परेशानियों से भी निजात मिलती है. इसलिए स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह काफ़ी
लाभकारी है.

4- पालक
पालक से रक्त शुद्धि व शक्ति का संचार होता है. आयरन तत्व हमारे शरीर के लिए उपयोगी व ज़रूरी है. आयरन के कारण ही रक्त में बल्ड सेल्स में इम्यूनिटी व लालिमा आती है. गर्मी में नज़ला, सीने व फेफड़े की जलन में यह लाभदायक है. यह पित्त की तेज़ी शांत करता है. गर्मी की वजह से होनेवाले पीलिया व खांसी में यह बहुत लाभदायक है. यह पानी और मैग्नेशियम का अच्छा स्रोत है. यह पाचन क्रिया को सही रखने में भी मदद करता है.

गर्म खाद्य पदार्थ

1- अंडा
अंडा काफ़ी गर्म माना जाता है. हर रोज़ एक अंडा खाना सेहत के लिए फ़ायदेमंद है, लेकिन अधिक नहीं. अध्ययन के अनुसार अंडे की जर्दी और मुंहासों की समस्या में सीधा संबंध है.

2- पपीता
पपीते के वैज्ञानिक विश्‍लेषण से पता चला है कि यह शरीर का क्षार संतुलित रखता है. इसमें विटामिन ए, बी और सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं और डी अल्प मात्रा में. इसके नियमित उपयोग से शरीर में विटामिन्स की कमी नहीं रहती. इसमें पेप्सिन नामक तत्व पाया जाता है, जो बहुत ही पाचक होता है. यह पेप्सिन प्राप्त करने का एकमात्र साधन है. पपीते का रस प्रोटीन को आसानी से पचा देता है. इसलिए पपीता पेट व आंत संबंधी विकारों में बहुत ही लाभदायक है. लेकिन अधिक गर्म पदार्थ होने के कारण गर्भावस्था में महिलाओं को पपीता न खाने की सलाह दी जाती है.

3- लाल मिर्च
लाल मिर्च शरीर की संचार प्रणाली को उत्तेजित करता है. शरीर के हर अंग में रक्त और पोषक तत्व पहुंचाने में मदद करता है. परंतु इसका ज़रूरत से ़ज़्यादा इस्तेमाल कई गंभीर समस्याओं, जैसे- गैस्ट्रिक, एसिड, क़ब्ज़ की समस्याएं बढ़ाता है.

4- नट्स
नट्स ऊर्जा का अच्छा स्रोत है, जिसे पचने में काफ़ी व़क़्त लगता है. यह दिमाग़ व शरीर को स्वस्थ बनाता है. इसमें एनर्जी होती है. साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल फ्री होता है. पर इसे खाली पेट लेने से गैस्ट्रिक की समस्या भी हो सकती है, जो हाइपर हीट इंडेक्स को बढ़ाता है.

ध्यान रखें

  • बासी, ठंडा, कच्चा या जला हुआ व दोबारा गर्म किया हुआ भोजन सेहत के लिए नुक़सानदेह होता है.
  • भोजन करते समय कड़े पदार्थ पहले, नरम बीच में और पतले पदार्थ अंत में खाएं.
  • भूख लगने पर पानी और प्यास लगने पर भोजन नहीं करें, अन्यथा स्वास्थ्य को हानि पहुंचती है.
  • सर्दी के दिनों में भोजन से पहले थोड़ा-सा अदरक व सेंधा नमक खा लेना चाहिए, जिससे पाचन शक्ति बढ़ जाती है.
  • भोजन करने से पहले केला व ककड़ी न खाएं.
  • भोजन में दूध, दही, छाछ लेना आयु को बढ़ाता है.
  • रात को भोजन के बाद दूध पीना सेहत के लिए हितकर है.
  • बिना भूख के भोजन करना बीमारियों को आमंत्रित करता है.
  • दो भोजन के बीच कम से कम छह घंटे का अंतर होना चाहिए.
  • अपनी शरीर की प्रकृति, पाचन शक्ति व शारीरिक क्षमता के अनुसार उचित मात्रा में ही भोजन करें.
  • भोजन करने के बाद क्रोध व तुरंत एक्सरसाइज़ कभी न करें.
  • भोजन करने के बाद कुछ देर ज़रूर टहलें. एसिडिटी होने पर अचार न खाएं.
  • जब मलेरिया हो तो दूध, मोसंबी, संतरा, गन्ने का रस लें. बुख़ार उतरने पर साबूदाना, पतली दाल व दलिया लें. कोई भी ठोस पदार्थ न खाएं.
  • संतरा का फ़ाइबर ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है.

जानें किन खाद्य पदार्थों को एक साथ खाना चाहिए (7 Best Food Combinations)

स्वाद भरा करियर- फूड इंडस्ट्री में बनाएं करियर (Tasty Career- make career in food industry)

Tasty Career

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अगर आपको भी खाने के सिवाय कुछ और नहीं दिखता, रात-दिन स़िर्फ खाने से सजी प्लेट ही दिखती है, तो आप इसी प्लेट में, मेरा मतलब है कि इस इंडस्ट्री में अपना फ्यूचर बना सकते हैं. फूड इंडस्ट्री ग्रोइंग इंडस्ट्री है. यहां कभी भी जॉब की कमी नहीं होती. कब, कैसे करें शुरुआत? आइए, हम आपको बताते हैं.

एजुकेशनल स्किल
इस सेक्टर में करियर बनाने के लिए ज़रूरी है कि आप दसवीं पास हों. इसके बाद बारहवीं और फिर होम साइंस में ग्रैज्युएशन करके आप आगे की पढ़ाई के लिए परस्यु कर सकते हैं. इसके अलावा आप डिप्लोमा कोर्सेस भी कर सकते हैं.

पर्सनल स्किल
अगर आपको लगता है कि इसमें स़िर्फ खाना बनाना ही आना चाहिए, तो आप ग़लत हैं. इस इंडस्ट्री में आगे बहुत कुछ सिखाया और पढ़ाया जाता है. करियर बनाने से पहले जान लें निम्म बातें:
– प्ऱजेंटेशन की कला
– तहज़ीब
– पेशेंस
– गेस्ट मैनर्स
– गुड कम्युनिकेशन स्किल्स
– टीम स्पीरिट
– हार्ड वर्क
– उत्साह
– प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी

पैशन फॉर फूड
जिस फील्ड में आप करियर बनाना चाहते हैं, उसके लिए आपके अंदर पैशन होना चाहिए. किसी के कहने पर करियर बनाने की होड़ में नहीं लग जाना चाहिए. तो अगर आप चाहते हैं कि लोग बड़े-बड़े रेस्टॉरेंट का खाना भूल जाएं और आपके हाथ का खाना खाने को तरसें, तो अपने कार्य के प्रति पैशनेट हो जाइए. इसकी हर जानकारी अपने पास रखिए. कब क्या नया हो रहा है, उसकी पूरी जानकारी आपको पास होना चाहिए.

इंटरनेशनल फूड की रखें जानकारी
अगर आप चाहते हैं कि आप द्वारा बनाया खाना पूरी दुनिया को उंगली चाटने पर मजबूर कर दे, तो इस बात का ध्यान रखिए कि आपको हर देश के फूड की जानकारी होनी चाहिए. किस देश के लोगों को क्या पसंद है और उसे वहां कैसे बनाते हैं, ये आपको बख़ूबी आना चाहिए.

बी इन ट्रेंड
आपको क्या लगता है कि स़िर्फ फैशन की दुनिया में ही ट्रेंड चलता है, नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है. अगर आप इस इंडस्ट्री पर राज करना चाहते हैं, तो आपको ट्रेंड फॉलोवर के साथ ट्रेंड सेटर भी होना चाहिए. आपको खाने में कुछ नया ट्राई करते रहना चाहिए. इसके अलावा खाने का भी एक दौर चलता है, कभी कोई चीज़ बहुत पसंद की जाती है, तो कभी उसकी डिमांड ज़ीरो हो जाती है. ऐसे में आप भी इस ट्रेंड को जानें और उसके अनुरूप ख़ुद को तैयार करें.

हैंडसम सैलरी
इस इंडस्ट्री में करियर बनाने वालों के लिए पैसा बहुत है. करियर के शुरुआती दौर में 10 से 15 हज़ार रुपये मिलते हैं. एक्सपीरियंस बढ़ने पर हर महीने 40 से 50 हज़ार रुपये सैलरी मिलने लगती है. अगर फाइव स्टार होटल में जॉब मिल गई, तो इनकम 1 से 2 लाख रुपये या इससे भी अधिक हो सकती है. इसके अलावा अगर आपने अपना होटल/रेस्टॉरेंट ओपन किया, तो पैसे की कोई कमी नहीं होगी.

तो देर किस बात की, अपना हुनर दिखाइए और इस इंडस्ट्री में छा जाइए. आपके हाथों का जादू आपके करियर को नई ऊंचाई देगा.

– श्वेता सिंह

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए क्या खाएं?(Top Immunity booster food)

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हमारी इम्यूनिटी काफ़ी हद तक हमारे खान-पान व लाइफस्टाइल से जुड़ी होती है. अगर आप भी चाहते हैं कि हमेशा हेल्दी और फिट रहें और बीमारियां आपके पास आने से भी डरें, तो आप भी ऐसी चीज़ें खाएं, जिनसे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े.

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इम्यूनिटी बढ़ानेवाले फूड्स

दही: प्रोबायोटिक्स, जिन्हें हम गुड बैक्टीरिया भी कहते हैं, दही में भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इनका नियमित सेवन इम्यूनिटी बढ़ाता है.
ग्रीन टी: यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है और इम्यून सिस्टम पर इसके सकारात्मक प्रभाव से आजकल सभी वाक़िफ़ हैं. कुछ शोध बताते हैं कि इसमें मौजूद पॉलीफीनॉल्स के एक प्रकार के कारण इंफ्लूएंज़ा के वायरस का ख़ात्मा होता है. तो रोज़ाना ग्रीन टी ज़रूर पीएं. इसका पूरा फ़ायदा लेने व कड़वापन दूर करने के लिए पानी उबलने से थोड़ा पहले ग्रीन टी मिलाएं और 1-2 मिनट से ज़्यादा पानी में ग्रीन टीन को न रखें. इसके स्वाद में इज़ाफ़ा करना हो, तो नींबू का रस व शहद मिलाकर पी सकते हैं, लेकिन दूध न मिलाएं, वरना प्रोटीन्स पॉलीफीनॉल्स के साथ मिलकर उसे बेअसर कर देंगे.
विटामिन डी: अमेरिका में एक अध्ययन किया गया, जिसमें यह पता चला कि जिन बच्चों को रोज़ाना विटामिन डी सप्लीमेंट्स दिए गए, उन्हें अन्य बच्चों के मुकाबले फ्लू होने की संभावना 40% तक कम हो गई. ऐसे माना जाता है कि विटामिन डी हमारे इम्यून सेल्स को उन बैक्टीरिया व वायरस को पहचानकर ख़त्म करने में मदद करता है, जो हमें बीमार कर सकते हैं. विटामिन डी आपको धूप से मिलेगा. खाने में साल्मन जैसी फैटी फिश से भी कुछ मात्रा में विटामिन डी मिल सकता है.
चिकन सूप: अगर सर्दी है, नाक बह रही है, तो चिकन सूप बेहतरीन इलाज है. यह कफ को पतला करके वायरस व बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मदद करता है और आपके इम्यून सिस्टम को सर्दी से लड़ने में मदद करता है. चिकन सूप में थोड़ी हरी मिर्च मिलाकर और स्पाइसी बना लें, तो दुगुना लाभ होगा.
सोल्यूबल फाइबर्स: सिट्रस फ्रूट्स, सेब, गाजर, बींस और ओट्स सोल्यूबल फाइबर्स से भरपूर होते हैं. ये शरीर को विभिन्न प्रकार के शोथों से लड़ने में मदद करते हैं.
जौ और ओट्स: इनमें बीटा-ग्लूकैन होता है, जो एक तरह का फाइबर है, जिसमें एंटीमाइक्रोबियल और एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज़ होती हैं और यह कई तरह की बीमारियों व फ्लू से रक्षा करता है. यह इम्यूनिटी तो बढ़ाता ही है, साथ ही घाव को जल्दी भरने में मदद करता है और एंटीबायोटिक्स को भी और असरकारक बनाने में मदद करता है.
लहसुन: इसमें अलाइसिन नाम का तत्व होता है, जो इंफेक्शन्स और बैक्टीरिया से लड़ता है. जो लोग लहसुन का नियमित सेवन करते हैं, उन्हें सर्दी व अन्य इंफेक्शन्स होने की संभावना काफ़ी कम रहती है. यही नहीं, जो लोग एक हफ़्ते में लहसुन की 6 कलियां खाते हैं, उन्हें कोलोरेक्टल कैंसर होने की 30% संभावना और पेट के कैंसर की संभावना 50% तक कम होती है.
ब्लैक टी: हार्वर्ड की एक स्टडी में यह पाया गया, जिन लोगों ने 2 हफ़्तों तक दिन में 5 कप ब्लैक टी पी, उनके रक्त में अन्य लोगों की अपेक्षा 10 गुना अधिक वायरस से लड़नेवाले इंटरफिरॉन यानी विषाणु अवरोधक पाए गए. दरअसल, उसमें मौजूद अमीनो एसिड इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार है.
मशरूम: यह सेलिनियम (एक प्रकार का मिनरल) और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है. सेलिनियम की कमी से फ्लू की संभावना बहुत हद तक बढ़ जाती है. साथ ही इसमें राइबोफ्लेविन और नायसिन भी पाए जाते हैं, जो इम्यून सिस्टम को हेल्दी रखते हैं.
तरबूज़: इसमें बहुत ही स्ट्रॉन्ग एंटीऑक्सीडेंट- ग्लूटाथायॉन होता है, जो इम्यून सिस्टम को मज़बूत करके इंफेक्शन्स से लड़ने में मदद करता है.
पत्तागोभी: इम्यूनिटी बढ़ानेवाले तत्व ग्लूटामाइन से यह भरपूर होती है. इसका सूप भी बनाकर पी सकते हैं या सब्ज़ी बनाकर खाएं.
बादाम: विटामिन ई से भरपूर बादाम भी रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. विटामिन ई इम्यूनिटी को बढ़ाता है, साथ ही इसमें राइबोफ्लेविन और नायसिन भी होता है, जो तनाव के कारण हुए नुक़सान से उबरने में मदद करता है.
पालक: इसे सुपर फूड कहा जाता है. यह कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होता है. नई कोशिकाओं के निर्माण व डीएनए के रिपेयर में मदद करता है. हेल्दी रहने के लिए व इसका भरपूर लाभ लेने के लिए हल्का या कम पके रूप में इसका सेवन करें.
शकरकंद: एंटीऑक्सीडेंट्स और बीटाकेरोटीन से भरपूर शकरकंदरोगप्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है और कैंसर से भी बचाव करता है.
एंटीऑक्सीडेंट्स: ब्रोकोली, हरी मिर्च, पपीता, संतरा, कीवी, स्ट्रॉबेरी, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां भी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं, जो इम्यून सिस्टम को मज़बूत करके आपको हेल्दी रखती हैं.

– गीता शर्मा

ब्यूटी विटामिन्स

विटामिन ए: एंटी एजिंग

हेल्दी स्किन और महत्वपूर्ण स्किन टिश्यू़ूज के रिपेयर और केयर के लिए विटामिन ए बहुत ज़रूरी है. इसकी कमी होने पर त्वचा ड्राई और पपड़ीदार हो जाती है. विटामिन ए को रेटिनॉइड्स नामक कंटेंट के तौर पर भी जाना जाता है. विटामिन ए से भरपूर डायट और रेटिनॉइड्स युक्त नाइट क्रीम व लोशन लगाकर हेल्दी त्वचा पाई जा सकती है.

बेस्ट ब्यूटी विटामिन फूड: ब्रोकोली, ऐवोकैडो, शकरकंद, गाजर, पालक, तरबूज़ और खरबूजा आदि.

ब्यूटी बेनीफिट्स: रोज़ाना विटामिन ए युक्त क्रीम व लोशन लगाने से फाइन लाइन्स और रिंकल्स को कम किया जा सकता है.

– ये क्रीम्स व लोशन दाग़ धब्बों को मिटाकर स्किन को स्मूद बनाते हैं.

– रेटिनॉइड्स बेस्ड क्रीम में मौजूद तत्व दिन में भी सूर्य की तेज़ धूप से होनेवाले नुक़सान से त्वचा की रक्षा करते हैं.

– ये क्रीम्स त्वचा पर तेज़ी से अपना असर दिखाती हैं. इनका असर चार से आठ सप्ताह के अंदर त्वचा पर देखा जा सकता है.

कैसे करें अप्लाई: रोज़ाना रात को सोने से पहले चेहरे पर रेटिनॉइड कंटेंट मिश्रित क्रीम से मसाज करें.

– पहली बार अप्लाई करते समय त्वचा पर बहुत थोड़ी मात्रा में क्रीम लगाएं और क्रीम का रिएक्शन चेक करें.

– पहली बार क्रीम अप्लाई करने पर त्वचा पर रेडनेस हो सकती है या स्किन की लेयर निकल सकती है, लेकिन दूसरे दिन से क्रीम का असर दिखने लगेगा. धीरे-धीरे त्वचा स्मूद होने लगेगी.

विटामिन बी3: रेडनेस

नायसिनअमाइड नामक तत्व को विटामिन बी3 के रूप में जाना जाता है. विटामिन बी3 बेस्ड क्रीम्स, लोशन्स और सीरम्स में नायसिनअमाइड नामक कंटेंट होता है, जो त्वचा की रेडनेस को कम करने और मुंहासों को जल्दी ठीक करने में मदद करता है. विटामिन बी3 त्वचा में हाइड्रेशन के स्तर को बूस्ट करता है, साथ ही त्वचा में सैरेमाइड के प्रोडक्शन और फैटी एसिड की मात्रा में वृद्धि करने में मदद करता है.

बेस्ट ब्यूटी विटामिन फूड: चिकन, टूना, सालमन, मूंगफली, ब्राउन राइस, एस्पेरागस, हरी मटर, जौ, मशरूम, खरबूजा, सनफ्लावर सीड आदि.

ब्यूटी बेनीफिट्स: विटामिन बी3 त्वचा के लिए रक्षात्मक कवच का काम करता है.

– ड्राई और सेंसिटिव स्किन के लिए विटामिन बी3 बहुत फ़ायदेमंद है.

– विटामिन बी3 युक्त क्रीम आदि लगाने से त्वचा में नेचुरल ग्लो आता है और स्किन सॉफ्ट होती है.

– रोज़ाना क्रीम व लोशन से मसाज करने पर त्वचा में कसाव आता है.

कैसे करें अप्लाई: रोज़ाना सुबह और शाम को विटामिन बी3 मिश्रित क्रीम या लोशन से 2 मिनट तक मसाज करें.

विटामिन सी: दाग़-धब्बे

विटामिन सी में स्किन ब्राइटनिंग प्रॉपटीऱ्ज होती हैं, जो दाग़-धब्बों को दूर करने में मदद करता है. यह विटामिन कोलैजन का निर्माण अधिक मात्रा में करता है, जो डैमेज्ड टिश्यूज़ को रिपेयर करने में मदद करता है. विटामिन सी युक्त मॉइश्‍चराइज़र, सीरम और ऑयल लगाने से दाग़-धब्बे दूर होते हैं.

बेस्ट ब्यूटी विटामिन फूड: एवोकैडो, ब्रोकोली, टमाटर, ककड़ी, लाल शिमला मिर्च, मोसंबी, संतरा और स्ट्रॉबेरी.

ब्यूटी बेनीफिट्स: विटामिन सी एजिंग प्रोसेस को धीमा करता है, जिससे स्किन रिंकल फ्री रहती है.

– यह फाइन लाइन्स और ड्राईनेस को दूर करता है.

– विटामिन सी की हीलिंग प्रॉपर्टीज़ डैमेज स्किन को हील करती हैं.

– विटामिन सी टिश्यूज़ की ग्रोथ को बढ़ाने में मदद करता है.

कैसे करें अप्लाई: त्वचा पर रोज़ सुबह विटामिन सी युक्त क्रीम से 2 मिनट तक मसाज करें.

– घर से बाहर निकलने से पहले विटामिन सी युक्तक्रीम लगाएं. फिर सनस्क्रीन लगाएं.

विटामिन ई: मॉइश्‍चराइज़ेशन

विटामिन ई फ्री रेडिकल्स (त्वचा को हानि पहुंचानेवाले कण) से त्वचा की रक्षा करता है, इसलिए इस विटामिन को त्वचा के लिए बहुत प्रभावी माना जाता है. विटामिन सी की तरह विटामिन ई भी कोलैजन का अधिक मात्रा में उत्पादन करता है, जो स्किन एजिंग के प्रोसेस को धीमा करता है.

बेस्ट ब्यूटी विटामिन फूड: बादाम, अंडे, सूखे मेवे, हरी सब्ज़ियां, साबूत अनाज, शकरकंद, शलजम, पपीता आदि.

ब्यूटी बेनीफिट्स: नियमित रूप से विटामिन ई युक्तऑयल या लोशन लगाने से झुर्रियों को कम किया जा सकता है.

– विटामिन ई मिश्रित ऑयल लगाने से त्वचा की रेडनेस दूर होती है.

– इस विटामिन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को प्रदूषण और अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से होनेवाले नुक़सान से बचाते हैं.

– विटामिन ई युक्त ऑयल या सीरम ड्राई स्किन को न केवल नमी प्रदान करता है, बल्कि सॉफ्ट और स्मूद भी बनाता है.

– नियमित रूप से विटामिन ई युक्त क्रीम व ऑयल लगाने से स्ट्रेच मार्क्स और दाग़-धब्बे भी दूर होते हैं.

– विटामिन ई बेस्ड क्रीम त्वचा में होनेवाली जलन को कम करने में मदद करती है.

कैसे करें अप्लाई: ड्राई स्किन को मॉइश्‍चराइज़ करने के लिए रोज़ाना नाइट क्रीम से मसाज करें.

– देवांश शर्मा

केमिकल से पके फल-सब्ज़ियों से हो सकती हैं गंभीर बीमारियां

 

पोषण और स्वास्थ्य की बात आते ही हमारा ध्यान जाता है ताज़ा, रंग-बिरंगे, स्वादिष्ट फलों और सब्ज़ियों पर, क्योंकि हर कोई जानता है कि इनमें पोषण और सेहत का ख़ज़ाना छिपा है. लेकिन पोषण का यह ख़ज़ाना आपको कुपोषित और गंभीर बीमारियों की चपेट में भी ले सकता है, क्योंकि आजकल अधिकतर फल व सब्ज़ियों को कृत्रिम तरी़के यानी केमिकल्स से पकाकर आकर्षक बनाकर बेचा जा रहा है. इसमें कोई दो राय नहीं कि शुद्ध रूप में फल व सब्ज़ियां हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद हैं, लेकिन मात्र मुना़फे के लिए इन्हें पकाने के लिए जिन हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, वे बेहद ख़तरनाक होते हैं.

– मुख्यतौर पर कैल्शियम कार्बाइड, एसिटिलीन, एथिलीन, प्रॉपलीन, इथरिल, ग्लाइकॉल और एथनॉल आदि को लोकल फ्रूट इंडस्ट्री द्वारा कृत्रिम रूप से फलों को पकाने के काम में लाया जाता है. इनमें से कैल्शियम कार्बाइड के हानिकारक असर को देखते हुए कई जगह उसे प्रतिबंधित कर दिया गया है, लेकिन आज भी भारत में अधिकतर फल विक्रेता फलों को कृत्रिम तरी़के से पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल करते हैं.

– कैल्शियम कार्बाइड हमारे शरीर के लिए बेहद ख़तरनाक होता है, क्योंकि इसमें आर्सेनिक और फॉस्फोरस होते हैं, जो सेहत के लिए बहुत ही हानिकारक होते हैं. बहुत-से देशों में तो इस पर रोक है, लेकिन भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश व नेपाल जैसे देशों में यह खुलेआम बिकता है.

– केमिकली पके हुए फल बहुत ज़्यादा सॉफ्ट और कम स्वादिष्ट होते हैं. इनकी शेल्फ लाइफ भी बहुत कम होती है. ऐसे फलों के सेवन से बहुत-सी बीमारियां जन्म लेती हैं.

– भारत में कैल्शियम कार्बाइड से फलों को पकाने पर प्रिवेंशन ऑफ फूड एडल्ट्रेशन (पीएफए) एक्ट के तहत प्रतिबंध है. जो भी इसमें दोषी पाया जाएगा, उसे तीन वर्ष की ़कैद और 1000 जुर्माना होगा. लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक शायद ही इस क़ानून के तहत किसी को सज़ा हुई हो.

– केमिकली पके फलों के सेवन से चक्कर आना, उल्टियां, दस्त, खूनी दस्त, पेट और सीने में जलन, प्यास, कमज़ोरी, निगलने में तकलीफ़, आंखों और त्वचा में जलन, आंखों में हमेशा के लिए गंभीर क्षति, गले में सूजन, मुंह, नाक व गले में छाले और सांस लेने में तकलीफ़ जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

– केमिकल यदि अधिक मात्रा में शरीर में चला जाए, तो फेफड़ों में पानी भी भर सकता है.

– कृत्रिम तरी़के से पके आमों को खाने से पेट ख़राब हो सकता है. आंतों में गंभीर समस्या, यहां तक कि पेप्टिक अल्सर भी हो सकता है.

– इनसे न्यूरोलॉजिकल सिस्टम भी डैमेज हो सकता है, जिससे सिर में दर्द, चक्कर, याददाश्त व मूड पर असर, नींद में द़िक्क़त, कंफ्यूज़न और हाइपोक्सिया (इसमें शरीर में या शरीर के एक या कुछ हिस्सों में ऑक्सीजन की मात्रा पर्याप्त रूप में नहीं पहुंचती) तक हो सकता है.

– यदि गर्भवती महिलाएं इन केमिकल्स से पके फलों का सेवन करती हैं, तो बच्चे में भी कई असामान्यताएं हो सकती हैं.

 

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कैसे चुनें फल-सब्ज़ियां?

– उन पर कोई दाग़-धब्बे न लगे हों. वो कहीं से कटे हुएन लगें.

– हमेशा फल व सब्ज़ियों को खाने से पहले अच्छी तरह से धो लें.

– छिलका निकालकर इस्तेमाल करने से केमिकल्स का असर कम होगा.

– केमिकल्स का प्रभाव कम करने के लिए कुछ सब्ज़ियों के ऊपरी पत्ते व परतों को निकालने के बाद उसका इस्तेमाल करें, जैसे- पत्तागोभी या सलाद के पत्ते.

– कृत्रिम तरी़के से पके आम में पीले और हरे रंग के पैचेस होंगे यानी पीले रंग के बीच -बीच में हरा रंग भी दिखेगा.

– जबकि प्राकृतिक रूप से पके आम में यूनीफॉर्म कलर होगा या तो पीला या हरा.

– इसके अलावा केमिकली पके आम का जो पीला रंग होगा, वो नेचुरली पके आम के मुक़ाबले बहुत ही ब्राइट होगा यानी अननेचुरल ब्राइट यलो कलर.

– केमिकली पके आम को खाने पर मुंह में हल्की-सी जलन महसूस होगी. कुछ लोगों को तो दस्त, पेट में दर्द और गले में जलन तक महसूस हो सकती है.

– प्राकृतिक रूप से पके आम को काटने पर पल्प का कलर ब्राइट रेडिश यलो होगा, जबकि केमिकली पके आम के पल्प का रंग लाइट और डार्क यलो होगा, जिसे देखकर समझ में आ जाता है कि यह पूरी तरह से पका नहीं है.

– प्राकृतिक रूप से पके आम बहुत ही रसीले होंगे, जबकि केमिकल से पके आम में मुश्किल से रस मिलेगा.

– जो फल बाहर से देखने में बहुत ही ब्राइट कलर के और आकर्षक लगें और सबका कलर एक जैसा यानी यूनीफॉर्म लगे, जैसे- केले के एक बंच में सभी केले एक ही तरह के लगें, तो बहुत हद तक संभव है कि वो केमिकल से पकाए गए हों.

– इसी तरह से सारे टमाटर या पपीते का रंग एक जैसा ब्राइट लगे, तो वो केमिकल से पके होंगे.

– मौसमी फलों को ही चुनें, यदि मौसम से पहले ही फल-सब्ज़ियां मिल रही हैं, तो उन्हें न ख़रीदना ही समझदारी होगी.

किन केमिकल्स के इस्तेमाल की इजाज़त है?

– कुछ केमिकल्स की सीमित मात्रा के इस्तेमाल की इजाज़त ज़रूर है. ये केमिकल्स एक तरह से कम हानिकारक होते हैं, जैसे- एथेफॉन (एथिलीन रिलीज़र). इस केमिकल से फलों को पकाने के लिए इसके घोल में फलों को डालना होता है या फिर इसके धुएं से फलों को पकाया जाता है.

– इस केमिकल से आमतौर पर आम, केले और पपीते को पकाया जाता है.

– इससे पके फलों का रंग प्राकृतिक रंगों से भी कहीं अधिक बेहतर होता है, जिससे फल प्राकृतिक लगते हैं और इनकी शेल्फ लाइफ भी कैल्शियम कार्बाइड से पके फलों से अधिक
होती है.

– एथिलीन भी काफ़ी सुरक्षित माना जाता है. यह फलों में मौजूद प्राकृतिक एजेंट होता है, जो फलों को पकाता है. इसीलिए पकाने की प्रक्रिया को थोड़ा तेज़ करने के लिए भी इसका बाहर से इस्तेमाल किया जाता है. एवोकैडो, केला, आम, पाइनेप्पल, अमरूद और पपीता पकाने के काम में लाया जाता है.

– गीता शर्मा

जैसा ब्लड ग्रुप, वैसा डायट प्लान (Blood Group Type Diet: Eating for Types O, A, B, & AB)

Blood Group Type Diet

ख़ूबसूरत नज़र आने के लिए आप जिस तरह पर्सनैलिटी के अनुसार आउटफिट और एक्सेसरीज़ का चुनाव करते हैं. ठीक उसी तरह ब्लड ग्रुप के अनुसार डायट प्लान फॉलो करके भी आप हेल्दी और फिट रह सकते हैं. सेहतमंद ज़िंदगी के लिए ब्लड ग्रुप के अनुसार कैसा हो डायट प्लान (Blood Group Type Diet)? आइए, जानते हैं.
Blood Group Type Diet

ब्लड ग्रुप के अनुसार शरीर की ज़रूरतें भी अलग-अलग होती हैं. ऐसे में यदि अपने ब्लड ग्रुप को ध्यान में रखते हुए कोई डायट प्लान फॉलो करते हैं, तो आप न स़िर्फ फिट एंड हेल्दी रह सकते हैं, बल्कि एसिडिटी, कॉन्सटिपेशन जैसी कई समस्याओं से मुक्ति भी पा सकते हैं. साथ ही वज़न भी आसानी से घटा सकते हैं.Type-A-blood-drop

ए ब्लड ग्रुप

ए ब्लड ग्रुपवालों का शाकाहारी होना सेहत की दृष्टि से फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि ए ब्लड ग्रुपवालों की पाचन शक्ति बाक़ी ब्लड ग्रुपवालों की अपेक्षा कमज़ोर होती है. ऐसे में वे नॉन-वेज या कोई भी हैवी फूड पचा नहीं पाते, जिससे इन्हें पेट संबंधी समस्या, जैसे एसिडिटी का सामना करना पड़ता है.

क्या खाएं?
– ए ब्लड ग्रुपवालों का ख़ून अन्य ब्लड ग्रुप से अधिक गाढ़ा होता है. इसलिए सब्ज़ी और फलों का सेवन इनके लिए ज़्यादा फ़ायदेमंद है.
– प्रोटीन की आपूर्ति के लिए सोया रोटी, सोया ब्रेड, बीन्स आदि का सेवन इन्हें तंदुरुस्त रखता है.
किससे करें परहेज़?
– चूंकि आपका पाचन तंत्र कमज़ोर है, इसलिए मीट की बजाय मछली का सेवन करें.
– पपीता, आम और संतरा जैसे फलों का सेवन कम से कम करने की कोशिश करें.
वेट लॉस टिप
अगर आप वज़न कम करना चाहते हैं, तो अपने डायट रूटीन में ज़्यादा से ज़्यादा हरी सब्ज़ियां और सोया से बनी चीज़ें शामिल करें. मीट, डेयरी प्रोडक्ट्स, राजमा जैसे फैट वाले आहार से परहेज़ करें, वरना आपका वज़न बढ़ सकता है.blood-type-diet-for-blood-group-b

बी ब्लड ग्रुप

बी ब्लड ग्रुपवाले बेहद लकी होते हैं, क्योंकि इन्हें स्वादिष्ट चीज़ों से परहेज़ की ज़रूरत नहीं होती. साथ ही ये खाने में वेरायटी का मज़ा भी ले सकते हैं. बी ब्लड ग्रुपवालों को संतुलित आहार स्वस्थ और तंदुरुस्त बनाए रखता है.
क्या खाएं?
– फलों का सेवन आपके लिए फ़ायदेमंद साबित हो सकता है.
– आप डेयरी प्रोडक्ट्स और फिश खा सकती हैं, मगर इनका सेवन संतुलित मात्रा में करें.
किससे करें परहेज़?
– कॉर्न, चना, मसूर और अरहर की दाल का सेवन कम करें. ये आपके लिए नुक़सानदायक हो सकते हैं.
– गेहूं या टमाटर का अधिक सेवन भी आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है.
वेट लॉस टिप
वज़न कम करने के लिए कॉर्न, मूंगफली, चिकन, गेंहू और तिल का सेवन करने से बचें और अपने डायट प्लान में अंडा, ग्रीन टी, मीट और हरी सब्ज़ियां सबसे ऊपर रखें.

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एबी ब्लड ग्रुप

एबी ब्लड ग्रुपवालों में ए और बी दोनों ब्लड ग्रुपवालों के लक्षण होते हैं. मगर इनका ब्लड ग्रुप ए की तरह शाकाहारी होना ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है. ब्लड ग्रुप बी की तरह ये नॉन-वेज का अधिक सेवन नहीं कर सकते, क्योंकि मीट खाने से इन्हें अपच की शिकायत हो सकती है.
क्या खाएं?
– शाकाहारी खाना खाएं.
– फलों का सेवन भी कर सकते हैं.
– आप फिश भी खा सकते हैं.
किससे करें परहेज़?
– चिकन से परहेज़ करें, पेट में एसिड की मात्रा कम होने से ये अच्छी तरह पच नहीं पाता, जिससे अपच की शिकायत हो सकती है.
– कॉर्न भी न खाएं. ये भी आपके लिए तकलीफ़देह हो सकता है.
वेट लॉस टिप
अगर आप वज़न कंट्रोल में रखना चाहती हैं, तो सोया पनीर, सीफूड, अनन्नास आदि खाएं. रेड मीट और राजमा से परहेज़ करें.

Type-O-blood-drop

ओ ब्लड ग्रुप

ओ ब्लड ग्रुपवालों के पेट में एसिड की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण ये आसानी से नॉन-वेज फूड पचा लेते हैं. चूंकि ओ ब्लड ग्रुपवालों में थायरॉइड हार्मोन की मात्रा कम होती है, इसलिए इन्हें ऐसी चीज़ें नहीं खानी चाहिए, जिससे थायरॉइड का स्राव कम हो, जैसे- पत्तागोभी, फूलगोभी आदि.
क्या खाएं?
– आप ख़ूब सारे फल और सब्ज़ियों का सेवन कर सकते हैं.
– अगर आप नॉन-वेज खाने के शौक़ीन हैं, तो रेड मीट से लेकर चिकन और फिश भी खा सकते हैं.
किससे करें परहेज़?
– दूध या दूध से बने कोई भी पदार्थ खाने से बचें.
– ड्रायफ्रूट्स का अधिक सेवन आपके लिए फ़ायदेमंद नहीं है.
वेट लॉस टिप
वज़न कम करना हो, तो ब्रेड, चावल और फली यानी बीजवाली सब्ज़ियां न खाएं. पालक और ब्रोकोली वज़न घटाने में सहायक हो सकते हैं.