Foods to Help Your Acid Reflux

हेल्दी तो हम सभी रहना चाहते हैं लेकिन कुछ छोटे छोटे सूत्र हैं जिन पर हम ध्यान ही नहीं देते, अगर ये सूत्र और सीक्रेट हमसमझ जाएँ तो हेल्दी रहना आसान हो जाए. 

आइए जानते हैं इन्हीं सीक्रेट सूत्रों को-

  • सकारात्मक रहें और अपना महत्व समझें. 
  • खुद पर ध्यान देना ज़रूरी है इस तथ्य को समझ लें.
  • दूसरों के लिए जीना अच्छी सोच है लेकिन उससे पहले खुद के लिए जीना सीखें.
  • आप हेल्दी रहेंगे तभी तो दूसरों के लिए भी कुछ कर पाएँगे.
  • हाईड्रेटेड रहें ताकि शरीर में पानी व नमी की कमी ना हो. पानी ज़हरीले तत्वों को बाहर करता है और पाचन क्रियाको बेहतर बनाता है.
  • फ़िज़िकली एक्टिव रहें. एक्सरसाइज़ व योगा करें. आप भले ही कितना भी हेल्दी खा लें पर जब तक शरीर कोक्रियाशील नहीं रखेंगे तब तक कहीं न कहीं कोई कमी रह ही जाएगी. 
  • रोज़ाना कम से कम आधा घंटा कसरत करें. जॉगिंग और वॉकिंग करें.
  • लिफ़्ट की बजाए सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. यह रूटीन आपकी मांसपेशियों को लचीला बनाएगा और पाचन कोबेहतर. 
  • ध्यान और योगा भी कर सकते हैं. मेडिटेशन से ब्रेन में हैप्पी हार्मोंस रिलीज़ होते हैं और एक नई ऊर्जा का एहसासहोता है.
  • ध्यान रहे फ़िज़िकल एक्टिविटी की कमी से क़ब्ज़ जैसी समस्या हो सकती है.
Sutras For Healthy Life
  • हेल्दी खाना खायें. अपने दिन की शुरुआत पोषण भरे नाश्ते से करें. 
  • भले ही लंच ठीक से ना करें लेकिन नाश्ता अच्छी तरह और हेल्दी करेंगे तो फ़ैट्स से बचेंगे.
  • रिसर्च बताते हैं कि जो लोग नाश्ता करते हैं उनका एनर्जी लेवल अधिक होता है और वो दिनभर ऐक्टिव बने रहते हैं.
  • जंक फूड से बचें. हेल्दी खाना खाएँ. 
  • मंचिंग के लिए भी हेल्दी ऑप्शन पर ध्यान दें. फ़्राइड सनैक्स की बजाए ड्राई फ़्रूट्स, बेक्ड फ़ूड रखें.
  • स्ट्रेस ना लें, क्योंकि तनाव पूरे शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. इस से गैस, ऐसिडिटी, क़ब्ज़ जैसी समस्या होसकती है.
  • स्ट्रेस के कारण पेट में रक्त व ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है जिससे पेट में ऐंठन, जलन जैसी समस्या होनेलगती है, साथ ही पेट में मैजूद हेल्दी बैक्टीरिया में भी असंतुलन आने लगता है.
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  • शराब व कैफेन का सेवन कम करें क्योंकि यह भीतर से शरीर को ड्राई और डीहाईड्रेट करते हैं.
  • अपने भोजन में साबूत अनाज, गाजर, ब्रोकोली, नट्स, मकई, बींस, ओट्स, दालें व छिलके सहित आलू को शामिलकरें.
  • मौसमी फल खाएँ और अपने खाने में हर रंग की फल-सब्ज़ियाँ शामिल करें.
  • दही व छाछ का सेवन करें, क्योंकि इनमें हेल्दी बैक्टीरिया होते हैं जो पेट और आँतों को स्वस्थ रखते हैं.
  • पनीर का सेवन करें क्योंकि यह वज़न को भी नियंत्रित रखने में कारगर है.
  • हफ़्ते में एक या दो दिन अपनी क्रेविंग्स के लिए रखें. मनपसंद कुछ खाएँ क्योंकि अगर आप बहुत ज़्यादा स्ट्रिक्टडायट करते हो तो बहुत ज़्यादा समय तक उसको फ़ॉलो कर पाना बेहद मुश्किल है.
  • हेल्दी सूप को अपने डायट का हिस्सा बनाएँ. 
  • किचन में मौजूद मसाले भी बहुत हेल्दी होते हैं , काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, इलाइची,धनिया आदि को खाने में शामिल करें.
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  • अगर गले में ख़राश या सिर में दर्द हो तो चटकीभर दालचीनी पाउडर को पानी के साथ लें. यही नहीं दालचीनी वज़नभी कम करती है. इसे सलाद या दही में मिलाकर ले सकते हैं. यह मुँहासों को भी कम करता है. दालचीनी पाउडर कोपानी में मिलाकर पेस्ट तैयार करें और अप्लाई करें.
  • अगर कफ़ की समस्या हो तो सरसों के तेल में लहसुन और सेंधा नमक मिलाकर गुनगुना करें और सीने पर मालिशकरें.
  • वज़न को नियंत्रण में रखें क्योंकि बढ़ता वज़न कई बीमारियों को जन्म देता है. हार्ट से लेकर ब्लड प्रेशर औरडायबिटीज़ तक जैसी समस्याएँ बढ़ते वज़न के कारण हो सकती हैं.
  • वज़न कम करने के लिए छोटे गोल्स सेट करें और धैर्य ना खोएँ.
  • वज़न कम करने में नींबू और शहद बेहद कारगर हैं. गुनगुने पानी में रोज़ सुबह खाली पेट सेवन करें.
  • स्पोर्ट्स, स्विमिंग या डांस क्लास से जुड़ सकते हैं.
  • अपने शौक़ को ज़रूर पूरा करें, उन्हें मरने ना दें, क्योंकि यही शौक़ आपको जीवंत बनाए रखते हैं.
  • पर्सनल हाइजीन से लेकर ओरल हाइजीन तक के महत्व को समझें और उनपर ध्यान भी दें.
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  • हेल्दी सोशल लाइफ़ मेंटेन करें, क्योंकि इससे आपको अकेलापन और डिप्रेशन नहीं होगा. लोगों की मदद करें यहआपको बेहतर महसूस कराएगा.
  • पार्टी करें, दोस्तों से मिलें और रिश्तों में इंवेस्ट करें.
  • धोखा ना दें क्योंकि यह आपमें अपराधबोध की भावना को जन्म देगा और आप भीतर से अनहेल्दी मेहसूस करेंगे.
  • ज़िम्मेदारी लेना सीखें, यह आपमें आत्मविश्वास बढ़ाएगा.
  • नींद पूरी लें, यह आदत आपको कई तरह के तनावों से बचाएगी और साथ ही दिनभर ऊर्जावान रखेगी. साथ ही यहडिप्रेशन जैसी नकारात्मक भावनाओं से भी आपका बचाव करती है.
  • ओवर ईटिंग और ओवर स्लीपिंग से भी बचें, ये आपको अनहेल्दी बनाती हैं.
  • बहुत ज़्यादा टीवी ना देखें, यह आपको आलसी और इनएक्टिव तो बनाएगा ही साथ ही रिसर्च बताते हैं कि ज़्यादाटीवी देखने वालों की लाइफ़ कम होती जाती है.
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  • इसी तरह मोबाइल और बहुत ज़्यादा सोशल साइट्स पर भी ना बने रहें. ये आपके रिश्तों की सेहत के लिएहानिकारक है जिसका असर आपने शरीर पर भी पड़ता है.
  • कुकिंग थेरेपी आज़माएँ. रिसर्च के अनुसार जब आप खुद खाना बनाते हैं तो स्ट्रेस कम होता है, आप बेहतर महसूसकरते हैं, क्रिएटिव बनते हैं और हेल्दी रहते हैं.
  • नए दोस्त बनाएँ और हो सके तो पेट्स रखें. ये आपको खुश और हेल्दी रखने में मदद करते हैं.
  • खुश होने का मौक़ा ना छोड़ें. बड़ी चीज़ों की बजाए छोटी छोटी चीज़ों में ख़ुशियाँ देखें. यह आपको सकारात्मकबनाती है और मन के संतोष को दूर करती हैं.
  • ये तमाम बातें आपको पहले से ही पता होती हैं लेकिन कमी सिर्फ़ जज़्बे की होती है. बेहतर होगा बिना देर किएआज से ही हेल्दी लाइफ़ के इन सीक्रेट और सूत्रोंको अमल में लाया जाए.

सरस्वती शर्मा

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आजकल लोग स्वाद पाने के लालच में सेहत को नज़रअंदाज़ करने लगे हैं और घर के बने हेल्दी खाने की बजाय बाहर की तली-भुनी, मसालेदार और फास्ट फूड जैसी चीज़ों को प्राथमिकता देने लगे हैं. इसके विपरीत कई लोग ऐसे भी हैं जो इन चीज़ों को जमकर खाने के बाद डायटिंग करने लग जाते हैं, ताकि मोटापा उन पर हावी न हो सके. इसका नतीजा यह होता है कि पेट में अचानक से एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है और अम्लपित्त यानी एसिडिटी के अलावा कई समस्याएं हो जाती हैं. चलिए नज़र डालते हैं इससे होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं पर.

Acidic Stomach

पेट फूलना
पेट में जब एसिड की मात्रा बढ़ जाती है तो पेट फूलने की समस्या होने लगती है. अगर आपको बार-बार ऐसा महसूस होने लगे कि आपके पेट में गैस बन रही है या आपका पेट फूल रहा है तो इसका सीधा अर्थ ये है कि आपके पेट में एसिड की मात्रा बढ़ गई है. इस स्थिति में आपको ठंडी चीज़ें खानी चाहिए.

एसिड रिफ्लक्स

Acidic Stomach
ज़्यादा देर तक ख़ाली पेट रहने से एसिड रिफ्लक्स की समस्या होती है. दरअसल, जब देर तक पेट ख़ाली रहता है तो एन्ज़ाइम्स और एसिड पेट के खाने को हज़म नहीं होने देते हैं और एसिड बनने लगता है. ऐसे में लोअर इसोफेगल स्पिंचर (एलईएस) ठीक से काम नहीं करता और पेट के ऊपरी भाग में तेज़ जलन महसूस होती है.

डकार आना
आपने भी कभी न कभी अपने आस-पास कुछ लोगों को बार-बार डकार लेते हुए देखा होगा. दरअसल, जिन लोगों की आहार नलिका व पेट में एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है और सीने में जलन की शिकायत होती है, तब उन्हें डकार आने लगती है.

पेट का अल्सर
पेट में एसिड की मात्रा बढ़ने पर आपको पेट का अल्सर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. पेट में अल्सर होना स़िर्फ तकलीफ़देह ही नहीं, बल्कि बेहद ख़तरनाक भी साबित हो सकता है. इस समस्या का पता चलते ही इसका इलाज कराना चाहिए, अन्यथा यह आंतों में कैंसर के ख़तरे को बढ़ा सकता है.

हार्टबर्न
पेट में एसिड की मात्रा बढ़ जाने पर हार्टबर्न की समस्या होने लगती है. हार्टबर्न होने पर सीने के निचले हिस्से में जलन, पेट व सीने में दर्द और गैस की शिक़ायत हो सकती है. अगर आप घर का खाना कम और बाहर का ज़्यादा खाते हैं तो आपको यह समस्या हो सकती है.

क्या खाएं?
अगर आप भी इस तरह की किसी समस्या से पीड़ित हैं तो आपको अपने खान-पान की आदतों में सुधार लाने की आवश्यकता है. हर 2-3 घंटे में कुछ न कुछ हेल्दी खाएं, ताकि पेट में एसिड की मात्रा बढ़ने न पाए.

हरी सब्ज़ियां – अपने आहार में गाजर, पत्तागोभी, शिमला मिर्च और हरी पत्तेदार सब्ज़ियों को शामिल करें. बेहतर होगा कि इन्हें अधिक तेल-मसाले में पकाने की बजाय उबाल कर खाएं.

डेयरी प्रोडक्ट्स – गाय का दूध, घी, कॉटेज चीज़, बकरी का दूध, दही जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें. इनके सेवन से सेहत ठीक रहती है और एसिड की समस्या भी नहीं होती है.

फ्रेश फ्रूट्स – ताज़े-रसीले फलों को अपने आहार में शामिल करें. फलों के सेवन से पेट में एसिड की मात्रा नहीं बढ़ती और पेट से जुड़ी कोई समस्या भी नहीं होती है.

अनाज और फलियां – अनाज में फाइबर होता है और हाई फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को खाने से पेट में बढ़ा हुआ एसिड कम होने लगता है. इसके अलावा फलियां, जैसे-ब्लैक बीन्स, काबुली चना, राजमा, मूंग और सोयाबीन्स आदि का सेवन करें.

क्या न खाएं?
रेड मीट – अगर आपको एसिड रिफ्लक्स की समस्या है तो रेड मीट खाने से बचें, अन्यथा पेट में एसिड की मात्रा बढ़ सकती है.

कॉफी – कॉफी में मौजूद कैफीन पेट में एसिड को बढ़ाने का काम करता है, इसलिए बेहतर यही होगा कि इसका सेवन कम से कम करें.

प्रोसेस्ड मीट – इस तरह के खाद्य पदार्थ पाचन तंत्र के लिए ख़राब होते हैं, ख़ासकर उन लोगों के लिए जिन्हें एसिड रिफ्लक्स की समस्या है.

मसाले – स्पाइसी मसालों का सेवन करने से एसिड की समस्या बढ़ सकती है और यह गैस्ट्रिक म्युकोसा के लिए भी उलझन पैदा कर सकता है.

तली – भुनी चीज़ें- इस तरह के खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट से जुड़ी समस्याओं के बढ़ने की संभावना होती है और एसिड रिफ्लक्स की दिक्कत होने लगती है.

रिफाइंड आटा – प्रोसेस्ड ब्रेड व बेकरी प्रोडक्ट्स में रिफाइंड फ्लोरस्कैन होता है, जो स्वास्थ्य के लिए नुक़सानदेह है. इसके सेवन से पेट में अल्सर और गैस्ट्राइटिस होने का ख़तरा होता है.

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