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कैसे बनाएं ब्रेकअप प्रूफ रिश्ते? (Make your relationship breakup proof)

Breakup-proofs Your Relationship

पहले के ज़माने में अगर मई की कड़कती धूप में किसी से आंखें चार होने से सांसों की गर्मी बढ़ती थी, तो पूरा सावन उसे छुप-छुपकर देखने में कटता था. पतझड़ में थोड़ी-बहुत बातचीत शुरू होती, फिर पूरी गुलाबी ठंड उसके बारे में जानकारी जुटाने में गुज़र जाती. अगली मई में दोनों के दिल धड़कते थे, तब कहीं जाकर सावन में प्यार परवान चढ़ता था. कहने का तात्पर्य यह है कि पहले लोग अपने रिश्तों को कितनी संजीदगी से लेते थे और ताउम्र उसकी हिफ़ाज़त करते थे. आजकल इंस्टेंट नूडल्स की तरह रिश्ते दोे मिनट में पक भी जाते हैं और अगले दो ही मिनटों में लोग इसके स्वाद से बोर भी हो जाते हैं. आजकल प्यार स़िर्फ एक एहसास नहीं है. यह एक फैशन बन गया है और यह तो हम सभी जानते हैं कि फैशन के इस दौर में गांरटी की अपेक्षा ना करें.

Breakup-proofs Your Relationship

आपने मार्केट में कई तरह के जार व बोतलें वगैरह देखी होंगी, जिन पर अनब्रेकेबल होने की गारंटी दी जाती है. आप पचास रुपए की बोतल या जार ख़रीदते समय भी यह ज़रूर देखते हैं कि यह बे्रकेबल है या नहीं, पर ऐसे ही कोई रिश्ता बनाते समय क्या आपको यह गारंटी होती है कि वह अनबे्रकेबल है या नहीं. रिश्ते जो अनमोल होते हैं, उन्हें बनाते व़क्त ज़रा भी नहीं सोचते कि क्या हम इन्हें निभा पाएंगे या नहीं?
बदलते ज़माने के साथ प्यार के मायने भी बदले और रूप भी, पर एक चीज़ नहीं बदली और वो है- रिश्तों को लेकर हमारी ज़रूरतें और अपेक्षाएं. आपका रिश्ता अनब्रेकेबल रहे यह आपकी ज़रूरत है. दूसरी तरफ़ यह भी सही है कि हर बार उन्हीं पुराने मापदंडों या सांचे में रखकर नहीं सोचा जा सकता. परिस्थितियां बहुत ज़्यादा बदली हैं. अब न तो हमें अपने लिए समय मिलता है और न ही अपनों के लिए. ऐसे में रिश्तों (Breakup-proofs Your Relationship) का ब्रेकेबल होना लाज़मी है.

तो क्या करें?

‘ब्रेकअप’ युवाओं में यह जुमला आजकल बड़ा चल पड़ा है. यह नई पीढ़ी में जहां कूल फैशन का हिस्सा है, वहीं प्रौढ़ों में अपने रिश्ते की ज़िम्मेदारियों से आसानी से मुक्ति पाने का ज़रिया. पर क्या आप जानते हैं कि यह ब्रेकअप समाज और आपके जीवन को किसी कैंसर की तरह ख़त्म कर रहा है. तो आइए हम अपने रिश्तों को भी अनब्रेकेबल बनाने की कोशिश करते हैं.

रिश्ते की अहमियत या ज़रूरत को स्वीकारें

आपको एक साथी की ज़रूरत ताउम्र होती है और यही सच है. यह प्रकृति का बनाया पहला नियम है. ‘मुझे किसी की कोई ज़रूरत नहीं’ यह वाक्य निरर्थक है. सामाजिक शास्त्र में हमें सामाजिक प्राणी के नाम से जाना जाता है, तो इस बात को स्वीकारने में कोई शर्म या झिझक नहीं होनी चाहिए कि आपको आपके साथी की आवश्यकता है.

नतीजों पर न पहुंचें

छोटी-मोटी नोक-झोंक या लड़ाइयां प्यार का हिस्सा होती हैं. इन्हें हल्के तौर पर लेना सीखें. आजकल कॉर्पोरेट कल्चर के चलते हमें नतीजों पर पहुंचने की बड़ी जल्दी होती है, पर प्यार में हुई तकरार को बेनतीजा छोड़ना हमेशा फ़ायदेमंद होता है. इसका मतलब अगर कभी आपका साथी आपसे झगड़ा करे, तो सीधे किसी नतीजे पर न पहुंचें.

रिश्ता जोड़ने से पहले अच्छी तरह से सोच लें

अगर इन दिनों आपकी नींद किसी के कारण उड़ी हुई है, तो फिर से एक बार नहीं, कम से कम चार बार सोचिए. हमारे साथ अक्सर यह होता है कि हम हड़बड़ी में रिश्ते बनाते हैं और फिर रिश्ते बनाने के बाद सोचते हैं कि हमने ग़लत किया या सही. किसी को अपनी ज़िंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने से पहले ख़ुद से सवाल करना न भूलें कि क्या वाक़ई आप दोनों एक-दूसरे के लिए बने हैं?

एक्सपर्ट की राय ज़रूर लें

जब आपको सर्दी या ज़ुकाम होता है, तो आप क्या करते हैं? ज़ाहिर-सी बात है हम तुरंत डॉक्टर के यहां जाते हैं. तो फिर जब हमारा रिश्ता बीमार पड़ता है, तो हम डॉक्टर के पास क्यों नहीं जाते? आजकल कई तरह के रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स हैं, जो आपके बीमार रिश्ते को ठीक कर सकते हैं. तो आपका ब्रेकअप ना हो, इसके लिए रिश्तों के डॉक्टर यानी रिलेशनशिप एक्सपर्ट के पास जाना ना भूलें.

रिश्तों को फैशन ना बनाएं

किसी का बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड स़िर्फ इसलिए ना बनें कि यह कूल है. इससे रिश्तों की गरिमा कम हो जाती है. हम अगर एक बार किसी रिश्ते का अपमान करते हैं, तो फिर हमें इसकी आदत पड़ जाती है. फिर उसके टूटने या बने रहने से हमें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. रिश्ते फैशन नहीं हैं और अगर आप इन्हें फैशन मानेंगे, तो फिर फैशन तो आए दिन बदलता रहता है.

डर

किसी को खोने का डर और रिश्तों के टूटने का डर हमेशा बना रहना चाहिए. इससे रिश्ते अपने आप अनब्रेकेबल हो जाएंगे. किसी अपने के साथ ना होनेे का डर रिश्तों को बनाए रखता है. अपने दिमाग़ से यह फ़ितूर भी निकाल दें कि किसी रिश्ते को तोड़ा भी जा सकता है. रिश्तों का कोई विकल्प नहीं होता. तोड़ना बड़ा ही आसान होता है, पर इसके परिणामों को भुगतना शायद आपके लिए आसान ना हो.

– विजया कठाले निबंधे

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शादी फॉरएवर का कॉन्सेप्ट क्यों भूल रहे हैं हम? (Failing to understand the concept of marriage forever)

Marriage forever concept

कुछ रस्में, सात फेरे, सात वचन और एक बंधन, वो भी जन्म-जन्मांतर (Marriage forever concept) का! शादी को लेकर हर किसी की अपनी अपेक्षाएं और उम्मीदें होती हैं, कुछ पूरी होती हैं, तो कुछ नहीं भी. शत-प्रतिशत संतुष्टि तो हमें किसी भी रिश्ते से नहीं मिलती, लेकिन क्या हम उन रिश्तों को तोड़ने का निर्णय इतनी आसानी से लेते हैं, जितनी आसानी से आज हम शादी को तोड़ने का निर्णय लेने लगे हैं? चूंकि इस रिश्ते से बाहर आने का एक विकल्प हमें नज़र आता है तलाक़ के रूप में, तो फिर समस्या चाहे कितनी ही मामूली क्यों न हो, हम समझौता नहीं करते. तलाक़ के मामले दिन-ब-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं. यहां हम उन मामलों का ज़िक्र नहीं कर रहे, जहां तलाक़ लेना ही एकमात्र रास्ता रह जाता है, लेकिन जहां शादी को बचाए रखने के कई रास्ते खुले होते हैं, वहां भी अब हमारी कोशिशें कम ही होती हैं उसे बचाने की. पहले माना जाता था कि शादी जन्म-जन्मांतर (Marriage forever concept) का साथ है, लेकिन अब एक जन्म भी निभाना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि शादी फॉरएवर का कॉन्सेप्ट ही हम भूल चुके हैं. क्या वजहें हैं कि ऐसा हो रहा है?

Marriage forever concept

– रिश्ता निभाना या उससे जुड़ी ज़िम्मेदारियां पूरी करना आजकल के कपल्स को बोझ लगता है. उन्हें लगता है कि हम क्यों सामनेवाले के अनुसार अपनी ज़िंदगी जीएं, हम क्यों एडजेस्ट करें… आदि. जब रिश्ते में इस तरह के विचार आने लगते हैं, तो उसे तोड़ने के रास्ते हमें ज़्यादा आसानी से नज़र आने लगते हैं.

– शादी एक बंधन और ज़िम्मेदारी है. कोई चाहे या न चाहे, इसमें त्याग-समर्पण करना ही पड़ता है. लेकिन इस तरह की भावनाएं व बातें आजकल हमें आउटडेटेड लगती हैं. हम अब रिश्तों में भी प्रैक्टिकल होते जा रहे हैं, जिससे भावनाएं गौण और स्वार्थ की भावना महत्वपूर्ण होती जा रही है.

– कपल्स आजकल अपने ईगो को अपने रिश्ते से भी बड़ा मानते हैं. पति-पत्नी दोनों में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं होता. आपसी टकराव बढ़ने के साथ-साथ मनमुटाव भी बढ़ता जाता है और नतीजा होता है- रिश्ते का अंत.

– आजकल लोग शादी तो करते हैं, लेकिन कई शर्तों के साथ और जहां कहीं भी उन्हें लगता है कि उनकी आज़ादी या लाइफस्टाइल में उनकी शादी एक बेड़ी या बंधन बन रही है, वहीं उसे तोड़ने का निर्णय आसानी से ले लेते हैं.

Marriage forever concept

और भी हैं वजहें…

– लड़कियां भी आत्मनिर्भर हो रही हैं, जिस वजह से वो कोई भी निर्णय लेने से हिचकिचाती नहीं.

– घरवालों का सपोर्ट भी अब उन्हें मिलता है, पहले जहां उन्हें रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करने से संबंधित कई तरह की सीख व नसीहतें दी जाती थीं, वहीं अब समझौता न करने की बात समझाई जाती है. हालांकि जहां बात लड़की या लड़के के स्वाभिमान व अस्तित्व की रक्षा से जुड़ी हो और जहां शोषण हो रहा हो, तो वहां शादी फॉरएवर का कॉन्सेप्ट (Marriage forever concept) भूलना ही पड़ता है, लेकिन यहां हम उन छोटी-छोटी बातों का ज़िक्र कर रहे हैं, जिन्हें बड़ा मुद्दा बनाकर शादी जैसे महत्वपूर्ण बंधन को तोड़ने का सिलसिला बढ़ रहा है.

– छोटी-छोटी तक़रार भी हमें इतनी हर्ट करती है कि हम उसे अपने स्वाभिमान से जोड़ने लगते हैं. सहनशीलता अब लोगों में बहुत कम हो गई है, यह भी एक बड़ी वजह है कि रिश्ते ताउम्र नहीं टिकते और जल्दी टूट जाते हैं.

– वहीं दूसरी ओर रिश्ता बनाए रखने व उसमें बने रहने के लिए सारे समझौते करने की अपेक्षा अब भी स्त्रियों से ही की जाती है. व़क्त व दौर जब बदल रहा है, तो अपेक्षाओं के इस दायरे में पुरुषों को भी लाना ही होगा. रिश्ता बनाए रखने की जितनी ज़िम्मेदारी स्त्रियों की होती है, उतनी ही पुरुषों की भी होती है. इस परिपाटी को अब तक बदलने की दिशा में कोई सार्थक प्रयास भी नहीं किए गए. इस ओर भी ध्यान देना ज़रूरी है.

– शादी जैसे रिश्तों को आजकल की जनरेशन बहुत कैज़ुअली लेती है. यदि इसके प्रति थोड़ा सम्मान व गंभीरता दिखाएं, तो रिश्ते की मज़बूती बढ़ेगी. समय व समाज में बदलाव के साथ-साथ रिश्तों के समीकरण व मायने भी अब बदल रहे हैं, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं होना चाहिए कि हम रिश्तों को इतने हल्के में लें कि उन्हें आसानी से तोड़(Marriage forever concept) सकें.

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क्या किया जा सकता है?

– शादी जैसे रिश्ते के प्रति थोड़ी गंभीरता व सम्मान रखना बेहद ज़रूरी है.

– अपने रिश्ते को और अपने पार्टनर को कैज़ुअली न लें.

– छोटी-छोटी बातों को बड़े झगड़े में न बदलें. सहन करना, एडजस्ट करना हर रिश्ते की मांग होती है. इसे अपने ईगो से जोड़कर न देखें.

– अपने मन-मस्तिष्क में रिश्ता तोड़ने जैसे विचार न लाएं. आपस में बहस के दौरान भी इस तरह की बातें मुंह से न निकालें.

– किन्हीं मुद्दों या बातों पर मनमुटाव हो, तो बातचीत ही पहला रास्ता है विवादों को सुलझाने का.

– पहल करने से कोई भी छोटा नहीं होता. रिश्ते को बचाने में अगर आपकी पहल काम आ सकती है, तो अपने झूठे दंभ की ख़ातिर पहल करने से पीछे न हटें. अलग होने के बाद भी ज़िंदगी आसान नहीं होती, गंभीरता से हर पहलू पर विचार करें.

– माफ़ करना सीखें और सॉरी बोलना भी.

– अपने पार्टनर की कद्र करें. भावनात्मक रूप से यदि आपसे कोई जुड़ा है, तो उसे जितना हो सके, आहत या दुखी करने से बचें. आपस में एक-दूसरे के प्रति सम्मान तो हर रिश्ते की ज़रूरत होती है.

– आजकल छोटी-छोटी बातों पर रिश्ता तोड़ देने का जो ट्रेंड बन गया है, उसके परिणाम बेहद घातक होते हैं. कम उम्र में ही तनाव, अकेलापन, डिप्रेशन व अनहेल्दी लाइफ स्टाइल का शिकार होकर अपनी ही ज़िंदगी को लोग बहुत कठिन बना लेते हैं.

– इस बात का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है कि रिश्ते व भौतिक चीज़ों में बहुत फ़र्क़ होता है. रिश्तों को कपड़ों या गाड़ियों की तरह बार-बार बदलकर सुकून नहीं मिल सकता. रिश्तों में भावनाएं होती हैं और कोई कितना भी प्रैक्टिकल क्यों न हो जाए, रिश्ता टूटने पर आहत होता ही है. जब भावनाएं आहत होती हैं, तो ज़िंदगी बहुत मुश्किल हो जाती है.

– विजयलक्ष्मी

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