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Movie Review: दर्शकों को खूब हंसा रही है ‘हैप्पी’ तो ‘जीनियस’ का नहीं चला जादू (Happy Phirr Bhag Jayegi and Genius Movie Review)

आज फिल्मी फ्राइडे है और सोनाक्षी सिन्हा की हैप्पी फिर भाग जाएगी (Happy Phirr Bhag Jayegi) के साथ फिल्म गदर-एक प्रेमकथा में सनी देओल के बेटे का किरदार निभा चुके उत्कर्ष शर्मा की फिल्म जीनियस (Genius) रिलीज़ हुई है. बता दें कि फिल्म हैप्पी फिर भाग जाएगी साल 2016 में आई फिल्म हैप्पी भाग जाएगी का सिक्वल है, जबकि गदर के डायरेक्टर अनिल शर्मा ने अपने बेटे उत्कर्ष शर्मा को लीड रोल में लेकर फिल्म जीनियस को डायरेक्ट किया है. बॉक्स ऑफिस पर रिलीज़ हुई ये दोनों फिल्में दर्शकों को पसंद आ रही हैं या उन्हें निराश कर रही है, चलिए जानते हैं.

Happy Phirr Bhag Jayegi and Genius Movie

मूवी- हैप्पी फिर भाग जायेगी

डायरेक्टर- मुदस्सर अज़ीज़

स्टार कास्ट- सोनाक्षी सिन्हा, जिम्मी शेरगिल, पीयूष मिश्रा, डेंजिल स्मिथ, डायना पेंटी, अली फ़ज़ल

रेटिंग- 3/5

Happy Phirr Bhag Jayegi

कहानी-

साल 2016 में आई डायरेक्टर मुदस्सर अज़ीज़ की फिल्म हैप्पी भाग जाएगी के बाद, उन्होंने एक बार फिर नई स्क्रिप्ट के साथ हैप्पी फिर भाग जाएगी फिल्म बनाई है. पिछली फिल्म में हैप्पी पाकिस्तान भाग जाती हैं, लेकिन इसके सीक्वल में दो-दो हैप्पी हैं जो चीन का सफर तय करती दिखाई देंगी. फिल्म की कहानी की शुरुआत चीन जा रही प्रोफेसर हरप्रीत कौर (सोनाक्षी सिन्हा) यानी हैप्पी और उनके पति गुड्डू (अली फज़ल) से शुरू होती है. इसी बीच दूसरी हरप्रीत कौर (डायना पेंटी) ऊर्फ हैप्पी भी एक स्टेज शो के लिए चीन के सफर पर निकल जाती हैं.

एयरपोर्ट पर कुछ चीनी किडनैपर दूसरी हैप्पी (डायना पेंटी) को किडनैप करने के लिए आते हैं, लेकिन एक जैसे नाम की वजह से वो पहली हैप्पी (सोनाक्षी सिन्हा) को ग़लती से किडनैप कर लेते हैं. कहानी में पवन सिंह बग्गा (जिम्मी शेरगिल) और पाकिस्तान के अफसर अफरीदी (पीयूष मिश्रा) भी हैप्पी की तलाश में चीन जाते हैं. इस बार फिल्म में मौजूद दोनों हैप्पी को किन-किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, यह सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

एक्टिंग- 

इस फिल्म में समय-समय पर आने वाले कॉमेडी के पंच दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर सकते हैं. बात करें इस फिल्म के सितारों की तो सोनाक्षी सिन्हा ने अपने किरदार को बखूबी निभाया है. हिंदी-पंजाबी में अपनी डायलॉग डिलीवरी से सोनाक्षी अमृतसर की हरप्रीत कौर को पर्दे पर जीवंत करती दिखाई देती हैं. वहीं जिम्मी शेरगिल और पीयूष मिश्रा के बीच नोकझोंक और कॉमेडी के पंचेस दर्शकों को काफ़ी हंसाते हैं. जस्सी गिल, डायना पेंटी और अली फज़ल जैसे कलाकारों की मौजूदगी इस फिल्म को और भी दिलचस्प बनाती है.

डायरेक्शन-

स्क्रिप्टिंग में डायरेक्टर मुदस्सर अज़ीज़ की मेहनत साफ़ दिखाई देती है. फिल्म की कहानी और उसे पर्दे पर दिखाने का तरीक़ा भी कमाल का है. फिल्म का डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफी और लोकेशंस काफ़ी बढ़िया हैं. फिल्म भले ही चीन पर बेस्ड हो, लेकिन पूरी फिल्म दर्शकों को बेहद ख़ूबसूरती से पटियाला, अमृतसर, दिल्ली, कश्मीर और पाकिस्तान से भी जोड़कर रखती है. फिल्म के राइटर और डायरेक्टर मुदस्सर अज़ीज़ ने पूरी फिल्म में दमदार डायलॉग से भारत-पाकिस्तान और चीन के बीच की पूरी तनातनी पर व्यंग्य भी किया है जो दर्शकों को बहुत हंसाते हैं.

Genius Movie

मूवी- जीनियस

डायरेक्टर- अनिल शर्मा

स्टार कास्ट- उत्कर्ष शर्मा, इशिता चौहान, नवाज़ुद्दीन सिद्दिकी, मिथुन चक्रवर्ती

रेटिंग- 2/5 

कहानी- 

गदर- एक प्रेम कथा, अपने और वीर जैसी फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर अनिल शर्मा ने इस बार अपने बेटे उत्कर्ष शर्मा को लीड रोल में लेकर फिल्म जीनियस बनाई है. इस फिल्म की कहानी मथुरा के रहने वाले वासुदेव शास्त्री (उत्कर्ष शर्मा) से शुरू होती है, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसी रॉ के लिए काम करता है. इसमें नंदिनी (इशिता चौहान) उनकी प्रेमिका का किरदार निभा रही हैं. जब वासुदेव रॉ के लिए काम करते हैं, उसी दौरान उनकी मुलाक़ात दोबारा उनके कॉलेज का प्यार रह चुकीं नंदिनी से होती है. फिल्म की कहानी में दिलचस्प मोड़ तब आता है, जब नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की एंट्री होती है. ऐसे में वासुदेव के सामने मुश्किल तब आती है जब उसे अपने प्यार या देश की रक्षा में से किसी एक को चुनना पड़ता है. हालांकि पूरी फिल्म के दौरान कई ट्विस्ट और टर्न आते हैं, जिन्हें जानने के लिए आपको सिनेमाघरों का रूख़ करना पड़ेगा.

एक्टिंग-

फिल्म गदर-एक प्रेम कथा में सनी देओल के बेटे का किरदार निभा चुके उत्कर्ष शर्मा इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. हालांकि उन्होंने फिल्म में अच्छा काम किया है, लेकिन उन्हें अभी एक्टिंग में और निखार लाने की ज़रूरत है. जबकि नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने हर बार की तरह इस बार भी अच्छी एक्टिंग की है, बावजूद इसके फिल्म की कमज़ोर कहानी और स्क्रीनप्ले के कारण जीनियस दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ने में नाकाम होती दिखाई दे रही है.

डायरेक्शन-

इस दौर के हिसाब से फिल्म की कहानी काफ़ी कमज़ोर है और जिस तरह से इसका डायरेक्शन किया गया है उसमें कोई नयापन नहीं दिखाई दे रहा है. कहानी को पर्दे पर उतारने का तरीक़ा भी काफ़ी पुराना लगता है और इसके क्लाइमेक्स में भी कोई नयापन दिखाई नहीं देता है. वहीं मिथुन चक्रवर्ती जैसे कलाकारों का भी सही तरीक़े से इस्तेमाल इस फिल्म में नहीं किया गया है.

ग़ौरतलब है कि पहले से ही बॉक्स ऑफिस पर जॉन अब्राहम की सत्यमेव जयते, अक्षय कुमार की गोल्ड चल रही है. इसी बीच हैप्पी फिर भाग जाएगी की एंट्री दर्शकों को हंसाने में क़ामयाब होती दिख रही है, ऐसे हालात में जीनियस का जादू दर्शकों पर चल पाना थोड़ा मुश्किल लगता है. अब यह आपको तय करना है कि इस वीकेंड परिवार के साथ आप कौन सी फिल्म देखना पसंद करेंगे.

यह भी पढ़ें: Movie Review: ज़बर्दस्त एक्शन, दमदार डायलॉग्स और सस्पेंस से भरपूर है सत्यमेव जयते (Movie Review Satyameva Jayate)

 

Fanney Khan Movie Review: सितारों से सजी कॉमेडी और म्यूज़िकल ड्रामा फिल्म है ‘फन्ने खां’ (Fanney Khan Movie Review)

Fanney Khan Movie Review: अभिनेता अनिल कपूर (Anil Kapoor), ऐश्वर्या राय बच्चन (Aishwarya Rai Bachchan) और राजकुमार राव (Rajkumar Rao) जैसे बड़े सितारों से सजी फिल्म फन्ने खां आज सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है. इस फिल्म में कॉमेडी, म्यूज़िक और ड्रामा का भरपूर तड़का लगाया गया है. यह फिल्म एक ऐसे पिता की कहानी है, जो अपनी बेटी को लता मंगेशकर जैसी बड़ी सिंगर बनाने का ख़्वाब देखता है और इस सपने को साकार करने की जद्दोजहद करता दिखाई देता है.
Fanney Khan Movie
मूवी- फन्ने खां
स्टार कास्ट- अनिल कपूर, ऐश्वर्या राय बच्चन, राजकुमार राव, पीहू सैंड. 
डायरेक्टर- अतुल मांजरेकर
अवधि- 2 घंटा 10 मिनट
रेटिंग- 3/5
Fanney Khan Movie
कहानी-  फिल्म फन्ने खां में प्रशांत वर्मा (अनिल कपूर) अपने परिवार को चलाने के लिए टैक्सी चलाता है और वो अपने दोस्तों के बीच फन्ने खां के नाम से जाना जाता है, क्योंकि गल्ली-नुक्कड़ में उसका अपना एक ऑर्गेनाइज़्ड म्यूज़िकल बैंड है. फिल्म में राजकुमार राव उनके बेस्ट फ्रेंड का किरदार निभा रहे हैं. फन्ने खां के दोस्त होने के साथ-साथ राजकुमार राव मशहूर सिंगर बेबी सिंह (ऐश्वर्या राय बच्चन) के बहुत बड़े फैन हैं. फन्ने खां अपने सपनों को अपनी बेटी लता (पीहू सैंड) के ज़रिए पूरा होते देखना चाहता है. वो चाहता है कि उसकी बेटी लता मंगेशकर जैसी एक बहुत बड़ी सिंगर बने. हालांकि लता अपने भारी-भरकम वज़न के चलते बॉडी शेमिंग का शिकार होती है, लेकिन उसमें टैलेंट कूट-कूट कर भरा हुआ है.
लता को जब दर्शकों के सामने अपना टैलेंट दिखाने का मौका मिलता है तो उसे भारी भरकम वज़न के चलते काफ़ी कुछ सुनना पड़ता है. इससे वो परेशान हो जाती है, लेकिन उसके पिता उसका न सिर्फ़ साथ देते हैं, बल्कि उसे अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित भी करते हैं. इस बीच ऐसा कुछ होता है कि फन्ने खां और उनका दोस्त मशहूर सिंगर बेबी सिंह को किडनैप कर लेते हैं, जिसके बाद इस फिल्म की कहानी में नया ट्विस्ट आता है. किडनैपिंग के बाद फिल्म की कहानी क्या मोड़ लेती है यह जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी पड़ेगी.
डायरेक्शन- डायरेक्टर अतुल मांजरेकर की यह फिल्म उम्मीदों, सपनों और रिश्तों की कहानी बयां करती है. इसमें उन्होंने मुंबई के एक मिडल क्लास व्यक्ति के जीवन को बेहतरीन तरीक़े  से पर्दे पर उतारा है. बेशक फिल्म में ऐश्वर्या राय का लुक काफ़ी ग्लैमरस नज़र आता है, लेकिन उनकी कहानी पर ज़्यादा मेहनत नहीं की गई है. फिल्म में राजकुमार राव और अनिल कपूर के बीच फिल्माए गए कॉमेडी सीन्स आपको पसंद आ सकते हैं. हालांकि सेकेंड हाफ में फिल्म की कहानी लीक से थोड़ी भटकती हुई दिखाई देती है और फिल्म का यह हिस्सा थोड़ा लंबा है.
एक्टिंग- हमेशा की तरह अनिल कपूर अपने किरदार में बिल्कुल फिट नज़र आ रहे हैं. पर्दे पर उन्होंने एक मिडल क्लास आदमी का किरदार बेहतरी तरीक़े से निभाया है. राजकुमार राव एक लाजवाब एक्टर हैं और उन्होंने इस फिल्म में अपने किरदार के साथ पूरा न्याय करने की कोशिश की है. हॉट सिंगर बेबी सिंह के किरदार में ऐश्वर्या काफ़ी ख़ूबसूरत नज़र आ रही हैं, जबकि लता के किरदार से बतौर एक्टर डेब्यू करने वाली पीहू सैंड ने अपने किरदार को काफ़ी संजीदगी से जीया है.
बहरहाल, फन्ने खां बड़े सितारों से सजी हुई एक म्यूज़िकल ड्रामा फिल्म है, जो दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ ही एक मैसेज भी देती है. ऐसे में इस वीकेंड फन्ने खां देखना एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है.

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Race 3 Movie Review: सलमान के फैंस को पसंद आएगी ‘रेस 3’, बाकी हो सकते हैं निराश (Race 3 Movie Review)

Race 3 Movie Review: बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान की फिल्म ‘रेस 3’ का उनके फैंस बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे और अपने चाहने वालों को ईदी देने के लिए ही सलमान ने इस फिल्म को ईद के बेहद ख़ास मौके पर रिलीज़ किया है. फिल्म में सलमान के अलावा अनिल कपूर, बॉबी देओल, जैकलीन फर्नांडिस, डेज़ी शाह और साकिब सलीम हैं. सलमान के फैंस के लिए सिनेमाघरों में ‘रेस 3’ का पहला शो सुबह 7 बजे से शुरू किया गया है. हालांकि यह फिल्म सलमान के फैंस को तो पसंद आ सकती है, लेकिन बाकी लोग निराश हो सकते हैं.

मूवी- रेस 3

डायरेक्टर- रेमो डिसूज़ा

स्टार कास्ट- सलमान खान, बॉबी देओल, अनिल कपूर, साकिब सलीम, जैकलीन फर्नांडिस और डेजी शाह. 

अवधि- 2 घंटा 40 मिनट

रेटिंग- 3/5

कहानी- फिल्म की कहानी एक ऐसे परिवार की है, जिसके मुखिया शमशेर सिंह (अनिल कपूर) हैं, जो अवैध हथियारों के डीलर भी हैं. इस परिवार के सदस्यों में  सिकंदर (सलमान खान), सिकंदर का बॉडीगार्ड यश (बॉबी देओल), सूरज (साकिब सलीम) और संजना (डेजी शाह) शामिल हैं. फिल्म में जेसिका (जैकलीन फर्नांडिस) सिकंदर की गर्लफ्रेंड बनी हैं, जो बाद में यस के साथ आ जाती हैं. इस परिवार में हर कोई एक-दूसरे के ख़िलाफ साज़िशों के जाल बुनता हुआ दिखाई देता है. इस परिवार के हर सदस्य के बीच रेस है. फिल्म में सिकंदर बने सलमान खान अपने परिवार पर अपनी जान छिड़कते हैं, लेकिन उनके सौतेले भाई-बहन उनसे नफ़रत करते हैं. परिवार के बीच की इस रेस में कई राज़ खुलते हैं, जिन्हें जानने के लिए आपको फिल्म देखने के लिए सिनेमा हॉल तक जाना पड़ेगा.

एक्टिंग- फिल्म के कलाकारों की एक्टिंग की बात की जाए तो अनिल कपूर हर बार की तरह इस बार भी लाजवाब रहे हैं. वहीं सलमान खान ने फिल्म में ज़बरदस्त एक्शन सीन किए हैं. जैकलीन और डेज़ी शाह ने भले ही अच्छे स्टंट सीन किए हैं, लेकिन डायलॉग डिलीवरी में दोनों ही कुछ ख़ास कमाल नहीं कर पाई हैं. वहीं काफ़ी समय बाद पर्दे पर लौटने वाले बॉबी देओल ने शर्ट उतारकर कुछ एक्शन सीन किए हैं, लेकिन उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे उन्हें पहले की तरह स्क्रीन पर कंफर्टेबल होने में अभी और वक़्त लगेगा, जबकि साकिब सलीम से कुछ ख़ास उम्मीद ही नहीं थी.
डायरेक्शन- ‘रेस’ और ‘रेस 2’ की बात करें तो इन फिल्मों के गाने लोगों की जुबान पर चढ़ गए थे, लेकिन ‘रेस 3’ का म्यूज़िक काफ़ी फ़ीका लग रहा है और फिल्म के एक-दो गाने ही अच्छे हैं. जैसे कि इस फिल्म का नाम ‘रेस 3’ है, लेकिन इससे जुड़ा थ्रिलिंग पॉइंट फिल्म से एकदम नदारद है. हालांकि फिल्म की सिनेमेटोग्राफी बेहद लाजवाब है. फिल्म की शूटिंग बैंकॉक और अबू धाबी के बेहतरीन लोकेशंस पर की गई है, लेकिन फिल्म की कहानी कुछ ख़ास नहीं है. फिल्म का फर्स्ट हाफ आपको बोरिंग लग सकता है, जबकि सेकेंड हाफ में कुछ ट्विस्ट ज़रूर है, लेकिन ले ट्विस्ट भी दर्शकों की उम्मीदों पर पानी फेरने के लिए काफ़ी है.

बहरहाल, रेस 3 सिर्फ़ और सिर्फ़ सलमान के फैंस के लिए है, क्योंकि यह फिल्म न तो दिल में उतरती है और न ही समझ में आती है, लेकिन अगर आप सलमान के बहुत बड़े फैन हैं तो आपको यह फिल्म पसंद आएगी, बाकि दर्शकों के हाथ निराशा लग सकती है.

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फिल्म रिव्यू: ‘इत्तेफाक़’ पुरानी कहानी में सस्पेंस का नया तड़का! (Movie Review: Ittefaq)

Movie Review, Ittefaq

फिल्म- इत्तेफाक़

स्टारकास्ट- सिद्धार्थ मल्होत्रा, सोनाक्षी सिन्हा, अक्षय खन्ना

निर्देशक- अभय चोपड़ा

रेटिंग- 3 स्टार

Movie Review, Ittefaq

इत्तेफाक़ एक थ्रिलर मर्डर मिस्टी है, जिसका निर्देशन किया है अभय चोपड़ा ने. यह फिल्म 1969 में रिलीज़ हुई राजेश खन्ना और नंदा की फिल्म की रीमेक है. आइए, जानते हैं क्या इसे नए अंदाज़ में पेश करने में अभय कामयाब रहे या नहीं?

कहानी

जिन्होंने 1969 की फिल्म इत्तेफाक़ देखी हैं, उन्हें कहानी का अंदाज़ा होगा. लेकिन इस फिल्म की कहानी में कुछ नई चीज़ों को जोड़ा गया है. फिल्म राइटर विक्रम सेठी (सिद्धार्थ मल्होत्रा) और माया (सोनाक्षी सिन्हा) के इर्द-गिर्द घूमती है. विक्रम की पत्नी और माया के पति का मर्डर हो जाता है. जिसका इल्ज़ाम लगता है विक्रम पर, शक़ की सुई माया पर भी घूमती है. फिर एंट्री होती है पुलिस ऑफिसर देव (अक्षय खन्ना) की, जिसे दोनों अलग-अलग कहानी सुनाते हैं. कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ? पूरा सच क्या है और कातिल कौन है, इसका पता लगाने के लिए देव जी जान से जुट जाता है. असली कातिल कौन है ये जानने के लिए आपको थिएटर तक जाना होगा.

फिल्म की यूएसपी और कमज़ोर कड़ी

  • मर्डर मिस्ट्री फिल्मों की सबसे ख़ास बात यही होती है कि फिल्म आपको अंत तक बांधे रखे ये जानने के लिए कि कातिल कौन है. इत्तेफाक़ काफ़ी हद तक इसमें कामयाब होती है.
  • बीआर चोपड़ा के पोते अभय चोपड़ा का निर्देशन बेहतरीन है.
  • फिल्म में कोई गाना नहीं है, क्योंकि फिल्म में गाने के लिए कोई जगह ही नहीं है.
  • बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है.
  • फिल्म को बिना वजह खिंचा नहीं गया है, इसलिए फिल्म बोर नहीं करेगी.
  • सोनाक्षी और सिद्धार्थ मल्होत्रा के बीच की केमेस्ट्री को और बेहतर बनाया जा सकता था.
  • अक्षय खन्ना की ऐक्टिंग हमेशा की तरह लाजवाब है.

फिल्म देखने जाए या नहीं?

अगर आप सिद्धार्थ या अक्षय खन्ना के फैन हैं या सस्पेंस फिल्में देखना पसंद करते हैं, तो एक बार ये फिल्म देख सकते हैं.

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शेफ रिव्यू: ‘शेफ’ में फैमिली और फूड का ज़ायक़ा (Movie Review: Chef)

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फिल्म- शेफ

स्टारकास्ट- सैफ अली खान, पद्मप्रिया जानकिरमन, शोभिता धुलिपाला, स्वर कांबले, चंदन रॉय सान्याल

निर्देशक- राजा कृष्णा मेनन

रेटिंग- 3.5 स्टार

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सलाम नमस्ते के बाद फिल्म शेफ में एक बार फिर सैफ अली खान शेफ की भूमिका में हैं. इस बार सैफ ज़्यादा मेच्योर नज़र आ रहे हैं. पिता-बेटे के रिश्तों को बड़े ही ख़ूबसूरत अंदाज़ में पेश करने की कोशिश की गई है इस फिल्म में. आइए, जानते हैं और क्या ख़ास है फिल्म में.

कहानी

कहानी है थ्री मिशलिन स्टार शेफ रोशन कालरा (सैफ अली खान) की, जिसे बचपन में उसके पापा इंजीनियर बनाना चाहते थे, लेकिन उसे खाना बनाने का शौक़ था. रोशन एक कामयाब शेफ तो बन जाता है, लेकिन रिश्ते पीछे छूट जाते हैं. काम में बिज़ी होने की वजह से वो अपनी पत्नी राधा मेनन (पद्मप्रिया) से भी हो जाता है. राधा सिंगल मदर होने के बाद भी अपने बेटे अरमान (स्वर) को अच्छी तरह संभाल रही है. एक दिन ग़ुस्से की वजह से रोशन की जॉब चली जाती है, वो अपने बेटे के पास कोच्चि चला आता है और बिगड़े हुए रिश्तों को संभालने की कोशिश करता है. क्या रोशन, अरमान और पद्मप्रिया साथ ख़ुशी-ख़ुशी रहते हैं? क्या एक हैप्पी एंडिंग होती है फिल्म की? ये जानने के लिए आपके फिल्म देखनी पड़ेगी.

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फिल्म की यूएसपी

सैफ अली खान की ऐक्टिंग बेहतरीन है. फैमिली और रिश्तों पर आधारित इस फिल्म की कहानी नई नहीं है, लेकिन इसे अच्छे से दर्शाया गया है. सैफ को फिल्म में खाना पकाते हुए देखकर आपकी दिलचस्पी भी कूकिंग में बढ़ जाएगी.

सैफ के बेटे के रोल मे स्वर ने भी कमाल का अभिनय किया है.

पद्मप्रिया भी अपने रोल में जंच रही हैं.

फिल्म की यूएसपी है इसका मैसेज, जो आज के पैरेंट्स के लिए बहुत ज़रूरी है. कई बार अापसी झगड़े या ईगो की वजह से पति-पत्नी में इतनी दूरियां आ जाती हैं कि वो अपने बच्चे के बारे में भूल जाते हैं. एक बच्चे के पालन-पोषण के लिए माता-पिता दोनों की ही ज़रूरत होती है.

कहानी बेहद सिंपल, लेकिन प्यारी है.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

ज़रूर जाएं ये फिल्म देखने. ये फिल्म को मॉर्डन फैमिली ड्रामा है, जिसे आप अपने पूरे परिवार के साथ बैठकर देख सकते हैं.

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फिल्म रिव्यू: ‘सिमरन’ में सारा दारोमदार है कंगना पर, ‘लखनऊ सेंट्रल’ कमज़ोर फिल्म है (Movie Review: Simran And Lucknow Central)

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फिल्म- सिमरन

स्टारकास्ट- कंगना रनौत, सोहम शाह

निर्देशक- हंसल मेहता

रेटिंग- 3 स्टार्स

फिल्म रिव्यू सिमरन

कहानी

ये कहानी है खुलकर अपनी शर्तों पर जीने वाली लड़की प्रफुल पटेल की. प्रफुल पटेल (कंगना) एक बिंदास लड़की है. उसका तलाक हो चुका है और वो अपने माता-पिता के साथ रहती है. एक होटल में वो हाउसकीपर का काम करती है. उसका बॉयफ्रेंड भी है. एक दिन वो पहुंचती है लॉस वेगास, जहां वो गैम्बलिंग करती है और बहुत सा पैसा हार जाती है. कर्ज़ में डूबी बिंदास प्रफुल लूटपाट का काम शुरू करती है और धीरे-धीरे क्राइम की ओर बढ़ जाती है. क्या होता है प्रफुल का? क्या उसकी चोरी की लत उसे बड़ी मुश्किल में फंसा देती है? क्या होता है तब, जब उसके बॉयफ्रेंड को पता चलता है कि प्रफुल को चोरी करने की आदत है? इन सवालों का जवाब आपको फिल्म देखने पर ही मिल पाएगा.

फिल्म की यूएसपी और कमज़ोर कड़ी

फिल्म की यूएसपी है कंगना की ऐक्टिंग, जो हमेशा की तरह अच्छी है. फिल्म में कंगना के कई शेड्स हैं, जो आपको मज़ेदार लगेंगे.

बात करें अगर कमज़ोर कड़ी कि तो फिल्म की कहानी थोड़ी-सी बिखरी नज़र आती है. कई जगहों पर कहानी में कुछ ऐसा होता है, जिस पर यक़ीन करना मुश्किल हो जाता है.

शाहिद, अलीगढ़ और सिटीलाइट जैसी बेहतरीन फइल्में बना चुके हंसल मेहता इस फिल्म में वो कमाल नहीं दिखा पाए.

फिल्म का ट्रेलर काफ़ी मज़ेदार थी, लेकिन फिल्म से ये उम्मीद नहीं की जा सकती है.

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

अगर आप कंगना रनौत के फैन हैं और हल्की-फुल्की कॉमेडी पसंद करते हैं, तो एक बार ये फिल्म देख सकते हैं.

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फिल्म रिव्यू लखनऊ सेंट्रल

फिल्म- लखनऊ सेंट्रल

स्टारकास्ट- फरहान अख्तर, डायना पेंटी, गिप्पी ग्रेवाल, रोनित रॉय, रवि किशन और दीपक डोबरियाल

निर्देशक- रंजीत तिवारी

रेटिंग- 2.5

लखनऊ सेंट्रल का विषय अच्छा है. आइए, जानते हैं फिल्म कैसी है.

कहानी

कहानी है किशन मोहन गिरहोत्रा (फरहान अख़्तर) की, जो मुरादाबाद में रहता है और म्यूज़िक डायरेक्टर बनना चाहता है. एक दिन उसके साथ कुछ ऐसा होता है कि वो एक मामले में आरोपी बना दिया जाता है और जेल पहुंच जाता है. जेल में वो वहां के कैदियों गिप्पी ग्रेवाल, दीपक डोबरियाल, इनामुलहक और राजेश शर्मा के साथ मिलकर बैंड बनाता है. जेलर (रोनित रॉय) की नज़रें इन सब कैदियों पर होती है. सोशल वर्कर बनी डायना पेंटी इन कैदियों से सहानभूति रखती हैं. क्या किशन मोहन ख़ुद को निर्देष साबित कर पाता है? क्या वो संगीतकार बनने का अपना सपना पूरा कर पाता है? इन सब सवालों का जवाब फिल्म में आखिर में मिल जाता है.

फिल्म की यूएसपी और कमज़ोर कड़ी

फिल्म का विषय अच्छा था, लेकिन फिल्म इस विषय पर खरी नहीं उतरती है. बेहद ही कमज़ोर डायरेक्शन है फिल्म का.

फरहान अख़्तर की ऐक्टिंग हमेशा की तरह अच्छी है, लेकिन कमज़ोर डायरेक्शन का असर उन पर साफ़ नज़र आता है.

रवि किशन, दीपक डोबरियाल का काम अच्छा है.

फिल्म में यूं तो बैंड दिखाया गया है, लेकिन गाने ऐसे नहीं की याद रखे जाएं.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

अगर आप फरहान अख़्तर के फैन हैं, तो ये फिल्म देखने जा सकते हैं. वैसे किसी कारणवश अगर ये फिल्म आप नहीं भी देख पाते हैं, तो कोई नुक़सान नहीं होगा आपका.

फिल्म रिव्यू: एंटरटेन करेगी ‘शुभ मंगल सावधान’, मसाला एेक्शन फिल्म है ‘बादशाहो’ (Movie Review: Shubh Mangal Saavdhan And Baadshaho)

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फिल्म- शुभ मंगल सावधान

स्टारकास्ट- आयुष्मान खुराना, भूमि पेडनेकर, ब्रजेंद्र काला, सीमा पाहवा, अनमोल बजाज

निर्देशक- आर.एस. प्रसन्ना

रेटिंग- 3.5 स्टार

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शुभ मगंल सावधान एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है. ये फिल्म तमिल फिल्म कल्याण समायल साधम् की हिंदी रीमेक है. आइए जानते हैं कैसी है फिल्म.

कहानी

शुभ मंगल सावधान दिल्ली के मुदित शर्मा (आयुष्मान खुराना) और सुगंधा (भूमि पेडनेकर) की कहानी है, जिनकी सगाई हो चुकी है. शादी से पहले जब एक दिन दोनों एक-दूसरे के क़रीब आते हैं, तब मुदित को पता चलता है कि उसे सेक्सुअल प्रॉब्लम है. सुंगधा को भी ये बात पता चलती है, लेकिन उससे दूर होे की बजाय वो हर कदम पर मुदित का साथ देती है. सुंगधा के घर वालों को जब मुदित के सेक्सुअल प्रॉब्लम की बात पता चलती है, तो वो इस शादी के खिलाफ़ हो जाते हैं. अब मुदित और सुगंधा की शादी होती है या नहीं? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

फिल्म की यूएसपी

फिल्म की यूएसपी है फिल्म का सब्जेक्ट. इस सब्जेक्ट पर फिल्म बनाना बेहद ही रिस्की हो सकता था, लेकिन आर. एस. प्रसन्ना ने इसे बड़ी ही ख़ूबसूरती से डायलॉग्स के ज़रिए कॉमिक अंदाज़ में दिखाया है. लड़को की सेक्सुअल प्रॉब्लम को भले ही मज़ाकिया अंदाज़ में दिखाया गया है, लेकिन इससे युवाओं में जागरूकता बढ़ेगी.

आयुष्मान खुराना की ऐक्टिंग हमेशा की तरह कमाल की है. ऐसे अलग सब्जेक्ट पर बनी फिल्मों के लिए आयुष्मान एकदम फिट हैं.

भूमि पेडनेकर ने टॉयलेट एक प्रेम कथा के बाद एक बार फिर उन्होंने अपने अभिनय की छाप छोड़ी है. आयुष्मान और भूमि की जोड़ी दम लगा के हईशा में भी पसंद की गई थी और इस फिल्म में भी ये आपको निराश नहीं करेंगे.

फिल्म के डायलॉग्स नए हैं और आपको ख़ूब हसाएंगे.

फिल्म की कमज़ोर कड़ी

फिल्म का क्लाइमेक्स आपको बड़ा ही बनावटी-सा लगेगा.

फिल्म देखने जाएं या नहीं? 

बिल्कुल जाएं फिल्म देखने. ये हल्की-फुल्की कॉमेडी फिल्म आपके वीकेंड को एंटरटेनिंग बना देगी. फुल पैसा वसूल फिल्म है शुभ मंगल सावधान.

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 फिल्म- बादशाहो

स्टारकास्ट- अजय देवगन, इलियाना डीक्रूज़, इमरान हाशमी, विद्युत जामवाल, ईशा गुप्ता, संजय मिश्रा, शरद केलेकर, लिज़ा हेडन, 

निर्देशक- मिलन लूथरिया

रेटिंग- 3 स्टार

बादशाहो में है स्टार्स की पूरी फौज. बात करें अगर मिलन लूथरिया के साथ अजय की जोड़ी की तो, ये जोड़ी वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई जैसी सुपरहिट फिल्म साथ में दे चुके हैं. आइए जानते हैं इस मल्टीस्टारर फिल्म में क्या है ख़ास.

कहानी

फिल्म की कहानी 1975 के इमर्जेंसी के दौरान की है, लेकिन पूरी तरह से इमर्जेंसी पर आधारित नहीं है. उस दौरान राजस्थान के कुछ राजघराने अपनी अरबों की सम्पति को सरकार से बचाने में लगे थे, उस हिस्से को ये फिल्म दर्शाएगी.

फिल्म की कहानी महारानी गीतांजलि (इलियाना डिक्रूज) के आसपास घूमती है. इमर्जेंसी के दौरान महारानी के महल में भी छापा पड़ता है. महल में मिले ख़ज़ाने को सरकार मेजर सहर (विद्युत जाम्मवाल) के साथ दिल्ली भेजने का फैसला करती है. इस ख़ज़ाने को दिल्ली पहुंचने से पहले लुटने के लिए गीतांजलि एक टीम बनाती है, जिसकी ज़िम्मेदारी सौंपी जाती है वफादार भवानी सिंह (अजय देवगन) को. इस टीम में संजना ( ईशा गुप्ता), दलिया ( इमरान हाशमी), शराबी तिकला ( संजय मिश्रा) भी शामिल हैं. अब ख़ज़ाना सरकार तक पहुंचता है या महारानी के महल में, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

फिल्म की यूएसपी

फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी है, इसमें दिखाए गए ऐक्शन सीन्स, जिन्हें दमदार अंदाज़ में पेश किया गया है.

अजय देवगन एक बार फिर ऐक्शन अवतार में नज़र आएंगे. अजय और इमरान हाशमी की ऐक्टिंग दमदार है, दोनों को ऐसे रोल में आपने पहले कभी नहीं देखा होगा.

इलियाना डीक्रूज़ और ईशा गुप्ता की ऐक्टिंग भी अच्छी है.

विद्युत जामवाल का ऐक्शन एक बार फिर आपको सीट से उठने नहीं देगा.

80 के दशक को फिल्म में बेहद ही ख़ूबसूरती से दिखाया गया है.

फिल्म का गाना रश्के कमर… बेहतरीन है.

कमज़ोर कड़ी

स्क्रिप्ट अच्छी थी, लेकिन उसे पूरी तरह से पर्दे पर दिखा नहीं पाए मिलन. फिल्म की कहानी भी बीच-बीच में ट्रैक से भटकती भी नज़र आई.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

अगर आप ऐक्शन फिल्में पसंद करते हैं, तो सितारों से भरपूर ये फिल्म ज़रूर देखने जाएं. अजय देवगन का ऐक्शन आपको निराश नहीं करेगा.

‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ 3 कट्स के साथ होगी रिलीज़ (Censor Board Cleared ‘Toilet: Ek Prem Katha’ 3 verbal cuts)

'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' 3 कट्स के साथ होगी रिलीज़

'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' 3 कट्स के साथ होगी रिलीज़

टॉयलेट: एक प्रेम कथा को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने तीन कट्स के साथ रिलीज़ होने की मंजूरी दे दी है. फिल्म 11 अगस्त को रिलीज होगी. पहले ख़बरें आ रही थीं कि सीबीएफसी ने फिल्म को 8 कट्स दिए हैं, लेकिन ख़ुद अक्षय ने इस ख़बर को ग़लत बताया है, उन्होंने कहा कि केवल तीन वर्बल कट्स फिल्म से किए गए हैं. 

टॉयलेट: एक प्रेम कथा रिलीज़ से पहले ही अपने अलग सब्जेक्ट को लेकर काफ़ी चर्चा में है. ख़ास बात ये है कि फिल्म ने रिलीज़ से पहले ही कई रिकॉर्ड्स बना दिए हैं. ये पहली ऐसी फिल्म होगी, जो 22 यूरोपियन देशों में रिलीज़ की जाएगी. 

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अक्षय कुमार अपनी इस फिल्म का जमकर प्रमोशन भी कर रहे हैं. प्रमोशन के चलते फिल्म की टीम ने मिलकर 24 जगहों पर 24 टॉयलेट भी बनवाए हैं.

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फिल्म रिव्यू: ‘ट्यूबलाइट’ में सलमान खान तो चमके, लेकिन फिल्म नहीं (Movei Review: Tubelight)

Tubelight Review

फिल्म- ट्यूबलाइट

स्टारकास्ट- सलमान खान, सोहेल खान, शाहरुख खान (गेस्ट अपीयरेंस),  स्व. ओमपुरी, झू झू, मातिन रे तंगु, बिजेंद्र काला, मोहम्मद जीशान अयूब, यशपाल शर्मा

निर्देशक- कबीर खान

रेटिंग- 3 स्टार

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ईद का मौक़ा सलमान खान के लिए हमेशा ही लकी साबित होता है. इस बार ईद के मौक़े पर रिलीज़ हुई है सलमान की फिल्म ट्यूबलाइट. कबीर खान के साथ सलमान की ये तीसरी फिल्म होगी. इससे पहले एक था टाइगर और बजरंगी भाईजान दोनों ही फिल्में सुपरहिट साबित हुई हैं. आइए, जानते हैं कि इस बार क्या ईद और कबीर खान का साथ सलमान के लिए लकी साबित होगा?

कहानी

कहानी है लक्ष्मण सिंह बिस्ट (सलमान खान) की, जिसे उसके आसपड़ोस वाले ट्यूबलाइट कहकर बुलाते हैं, क्योंकि वो बातें थोड़ी देर से समझता है. भले ही लोग उसे ट्यूबलाइट बुलाते हों, लेकिन लक्ष्मण का जीवन जीने का एक ही तरीक़ा है कि अपने विश्वास को ज़िंदा रखो, अगर विश्वास कायम है, तो आप जीवन में कुछ भी कर सकते हो, जंग भी रोक सकते हो. लक्ष्मण का भाई है भरत (सोहेल खान), दोनों अनाथ हैं और भारत-चीन बॉर्डर के पास एक गांव में रहते हैं. फिल्म की कहानी साल 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान सेट की गई है. इस दौरान सेना में भर्ती चल रही होती है, भरत भी सेना में भर्ती हो जाता है. भरत को को ये डर रहता है कि उसके चले जाने के बाद लक्ष्‍मण अकेला हो जाएगा, पर फिर भी वो युद्ध में जाने का फैसला कर लेता है. लक्ष्‍मण भाई का इंतज़ार करता है. भरत की कोई ख़बर नहीं आती है, लोगों को लगता है कि अब भरत वापस नहीं आएगा, लेकिन लक्ष्मण का विश्वास उसके साथ है. क्या उस विश्वास के दम पर लक्ष्मण अपने भआई भरत को वापस ले आ पाएगा? ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी.

फिल्म की यूएसपी

फिल्म की यूएसपी हैं सलमान खान. एक नए और अलग अंदाज़ में सलमान को आप देख पाएंगे. पूरी फिल्म उन्ही के आसपास रची गई है. एक बेहद ही स्ट्रॉन्ग संदेश भी है फिल्म में, जिसकी जानने और समझने की ज़रूरत है लोगों को. फिल्म का म्यूज़िक और गाने भी अच्छे हैं, जो दर्शकों को बांधे रखेंगे.

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कमज़ोर कड़ी

फिल्म की कहानी कमज़ोर है. स्क्रिप्ट और स्क्रिनप्ले दोनों ही कमज़ोर है. कबीर खान अपनी पहली दोनों फिल्मों का जादू इस फिल्म में नहीं दिखा पाए हैं. कहीं-कहीं कहानी में कुछ ऐसे सीन्स शामिल किए गए हैं, जिनकी बिल्कुल ज़रुरत नहीं थी फिल्म में. सेकंड हाफ में फिल्म बहुत ही स्लो हो जाती है. अंत में क्या होने वाला है, ये आप पहले ही जान जाएंगे. फिल्म में स्व. ओमपुरी, बिजेंद्र काला, मोहम्मद जीशान अयूब और यशपाल शर्मा जैसे टैलेंट कलाकारों को अपना अभिनय दिखाने का मौक़ा ही नहीं मिला.

फिल्म देखने जाएं या नहीं?

सलमान खान की फिल्मों को देखने के लिए शायद ही फैन्स फिल्म की कहानी के बारे में सोचते होंगे. आप सलमान खाने के फैन हों या ना हो, एक बार उनकी फिल्म को देखना तो बनता ही है. इस बार सलमान एक नए अंदाज़ में नज़र आएंगे. वैसे भी ये फिल्म एक बार देखी जा सकती है. इस बार वीकेंड तीन दिनों का है, शनिवार, रविवार और सोमवार को ईद की छुट्टी को एंजॉय करें इस फिल्म के साथ.

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Film Review: प्रियंका चोपड़ा की बेवॉच और मनीषा कोइराला की डियर माया के साथ 8 फिल्में हुईं रिलीज़ (Movie Review: Baywatch And Dear Maya)

Baywatch Review

इस शुक्रवार को 8 फिल्में रिलीज़ हुई हैं. जिनमें प्रियंका चोपड़ा की हॉलीवुड फिल्म बेवॉच, मनीषा कोइराला की डियर माया के साथ हनुमान द दमदार, स्वीटी वेड्स एनआरआई, मिरर गेम- अब खेल शुरू, फ्लैट 211, दोबारा और बच्चे कच्चे सच्चे जैसी फिल्में शामिल हैं.collage-2017-06-02 (1)

प्रियंका चोपड़ा की हॉलीवुड फिल्म बेवॉच की बात की जाए, तो ये फिल्म एक बार ज़रूर देखी जा सकती है. प्रियंका चोपड़ा को रोल छोटा ही सही, लेकिन दमदार है और वो फिल्में में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रही हैं. विक्टोरिया लीड्स के नेगेटिव रोल में प्रियंका का अंदाज़ आपको पसंद आएगा.

डियर माया फिल्म से मनीषा कोइराला लंबे समय बाद वापसी कर रही हैं. फिल्म में वो एक उम्र दराज़ महिला के किरदार में हैं, जो हमेशा अपने घर में रहती है और घर से बाहर की दुनिया नहीं देखना चाहती.फिल्म में दो लड़कियां भी हैं, जो माया की लाइफ के बारे में जानना चाहती हैं, उसे ख़ुश रहना सिखाना चाहती हैं, लेकिन अचानक एक दिन माया गायब हो जाती है और इन लड़कियों की ज़िंदगी बदल जाती है. फिल्म में आगे क्या होता है, इसके लिए आपके ये फिल्म देखनी होगी. अगर आप मनीषा कोइराला के फैन हैं, तो एक बार ये फिल्म देख सकते हैं.

अब बात हनुमान द दमदार की करते हैं. बच्चो के लिए है ये एनिमेटेड फिल्म. फिल्म में एक दमदार संदेश भी है, जो फिल्म देखने के बाद आपको पता चलेगा. फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसमें सलमान खान, जावेद अख्तर जैसे कई सेलेब्रिटीज़ ने अपनी आवाज़ दी है. अगर आप भी एनिमेटेड फिल्में पसंद करते हैं, तो अपने बच्चों के साथ ज़रूर जाएं ये फिल्म देखने.

Film Review: ‘सरकार 3’ में ‘सरकार’ जैसा दम नहीं (Movie Review: Sarkar 3)

Sarkar 3 Review

फिल्म- सरकार 3

स्टारकास्ट- अमिताभ बच्चन, अमित साध, जैकी श्रॉफ, यामी गौतम, मनोज बाजपेयी, रॉनित रॉय

निर्देशक- राम गोपाल वर्मा

रेटिंग- 3 स्टार

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सरकार. सरकार राज और अब सरकार 3. 12 साल से दर्शक सरकार और फिल्म के किरदारों को जानते हैं. ऐसे में ये फिल्म लोगों के लिए नई नहीं है. राम गोपाल वर्मा इस फिल्म के साथ अपने पुराने फॉर्म में लौट आए हैं. आइए जानते हैं कि कैसी है सरकार 3.

कहानी

सरकार यानी सुभाष नागरे (अमिताभ बच्चन) का किरदार बूढ़ा भले ही हो गया हो, लेकिन अब भी उतना ही दमदार है. पिछली दो फिल्मों में दोनों बेटों को खोने के बाद अब ये कहानी आगे बढ़ती है पोते शिवाजी नागरे (अमित साध) के साथ. शिवाजी की लव इंट्रेस्ट अनु (यामी गौतम) अपने पिता के मर्डर का बदला सरकार से लेना चाहती है और इसके लिए वो शिवाजी की मदद चाहती है. सुभाष नागरे के क़रीबी और भरोसा करने लायक लोगों में शामिल हैं गोकुल (रोनित रॉय) और गोरख (भरत दाभोलकर) सरकार का काम संभालते हैं. शिवाजी के आने से उनके काम पर असर पड़ता है. घर के बाहर गोविंद देशपांडे (मनोज बाजपेयी) और बिजनेसमैन माइकल वाल्या (जैकी श्रॉफ) भी सरकार के ख़लिाफ साजिश करते हैं. साजिश, षड्यंत्र और बहुत सारे ट्विस्ट्स के साथ कहानी आगे बढ़ती है. फिल्म के अंत में क्या होता है, ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

यूएसपी

अमिताभ बच्चन से बड़ी कोई यूएसपी इस फिल्म में भला कहां हो सकती है. उनका अंदाज़ देखने लायक है. रामगोपाल वर्मा इस फिल्म से ये याद दिलाएंगे कि ऐसी फिल्मों पर उनकी पकड़ अब भी मज़बूत है. फिल्म के डायलॉग्स दमदार हैं. बैकग्राउंड में चलने वाला गाना गोविंदा-गोविंदा और बिग बी का गाया हुआ गणेश आरती शानदार है.

कमज़ोर कड़ी

फिल्म की कहानी कमज़ोर है. जो सस्पेंस क्रिएट होना चाहिए था, वो नहीं हो पाया है. आप आसानी से अंदाज़ा लगा लेंगे कि आगे क्या होने वाला है. जबकि पिछली दो फिल्मों की कहानी ही फिल्म की जान थी.

फिल्म देखें या नहीं

एक बार ज़रूर देखी जा सकती है सरकार 3. बिग बी को बड़े स्क्रीन पर देखना तो बनता है. राम गोपाल वर्मा एक बार फिर अपने स्टाइल की फिल्म लेकर आएं हैं, जिसे देखा जा सकता है. वीकेंड पर ये फिल्म आपको बोर नहीं करेगी.

 

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फिल्म रिव्यू: ‘नाम शबाना’ है एक दमदार फिल्म (Movie Review: Naam Shabana)

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फिल्म- नाम शबाना

स्टारकास्ट- अक्षय कुमार, ताप्सी पन्नू, मनोज बाजपयी, अनुपम खेर

निर्देशक- शिवम नायर

रेटिंग- 3.5 स्टार

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अक्सर फिल्मों का सिक्वल बनाया जाता है, लेकिन इस बार प्रीक्वल बनाया गया है फिल्म बेबी का. नाम शबाना की कहानी बेबी के कहानी से जुड़ी हुई है, लेकिन उसके आगे की कहानी है. कैसी है नाम शबाना फिल्म आइए जानते हैं.

कहानी

फिल्म की कहानी ताप्सी के आसपास ही रची गई है. बेबी फिल्म की एजेंट शबाना खान की पहली की ज़िंदगी को दिखाया गया है, जो बेहद तकलीफ़ों से भरी थी. शबाना (ताप्सी पन्नू) का बचपन बेहद ही बुरा बीतता है. वो रोज़ अपनी मां को पिता के हाथों पिटते हुए देखती है. एक दिन तंग आकर अपने पिता पर ऐसा वार करती है कि उसके पिता दम तोड़ देते हैं. इसके बाद शबाना को जूवेनाइल कोर्ट दो साल की सज़ा दे देता है. जीवन के बुरे अनुभव शबाना को सख़्त बना देते हैं. कॉलेज में वो जूडो-कराटे सीखती है. टास्क फोर्स के चीफ रणवीर सिंह (मनोज बाजपयी) की नज़र शबाना पर तब से होती है, जब उसे सज़ा दी गई थी. शबाना के सामने जब एक दिन उसके प्रेमी की हत्या कर दी जाती है, तब रणवीर शबाना की मदद करता है. इसके बाद शबाना टास्क फोर्स का हिस्सा बन जाती है और उसे एक खास मिशन के लिए मलेशिया भेजा जाता है, जहां उसका सामना टोनी उर्फ मिखाइल (पृथ्वीराज सुकुमारन) से होता है, जो हथियारों की सप्लाई करता है. शबाना की मदद के लिए मलेशिया में ऑफिसर अजय (अक्षय कुमार) को भेजा जाता है. क्या शबाना मिशन को पूरा कर पाती है? कैसे वो लड़ती हैं इन सबसे? इसके लिए आपको देखनी होगी ये फिल्म.

फिल्म की यूएसपी

फिल्म की यूएसपी है ताप्सी पन्नू की ऐक्टिंग. पिंक फिल्म के बाद एक बार बार फिर ताप्सी ने ख़ुद को साबित किया है कि वो एक टैलेंट ऐक्ट्रेस हैं. पूरी फिल्म ताप्सी पर आधारित है और उन्होंने ऐक्शन सीन्स भी कमाल के किए हैं.

अक्षय कुमार का रोल भले ही फिल्म में छोटा हो, लेकिन अहम् हैं. मनोज बाजपयी टास्क फोर्स के चीफ की भूमिका में अपनी छाप छोड़ते हैं.

देखने जाएं या नहीं?

अगर आप इस वीकेंड पर एक अच्छी फिल्म देखना चाहते हैं, तो ये फिल्म आपको ज़रूर एंटरटेन करेगी. पैसा वसूल फिल्म है नाम शबाना.