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Psychology Of Relationships
मैं फाइनल ईयर की छात्रा हूं. इंदौर में पली-बढ़ी हूं. आगे की पढ़ाई के लिए मुंबई आई हूं. यहां सब कुछ बहुत एडवांस्ड है. लोग काफ़ी खुले विचारों के हैं. मुझे यहां दोस्त बनाने में भी संकोच होता है. बहुत अकेला महसूस करती हूं. सोचती हूं, वापस इंदौर चली जाऊं.
– रोमा त्रिपाठी, मुंबई.

बदलाव कभी आसान नहीं होता. हमें एक रूटीन जीवन जीने की आदत होती है और उसमें थोड़ा भी बदलाव हमें परेशान कर देता है, पर बदलाव ही संसार का नियम है. जिस चीज़ से हमें डर लगता है या तक़लीफ़ होती है, उससे भागने की बजाय उसका सामना करना उचित है. अपनी सोच बदलें, लोगों और चीज़ों को देखने का नज़रिया बदलें. ख़ुद को भी थोड़ा आत्मविश्‍वासी बनाने का प्रयास करें. लोगों से मिलना-जुलना शुरू करें. धीरे-धीरे संकोच समाप्त हो जाएगा और देखते-देखते आप भी मुंबईकर बन जाएंगी, क्योंकि ये शहर किसी को अजनबी नहीं रहने देता. सबको गले लगाकर अपना बना लेता है, लेकिन थोड़ी कोशिश तो आपको भी करनी होगी. अपनी झिझक दूर करें और यह सोचना बिल्कुल छोड़ दें कि आप किसी छोटे या दूसरे शहर से आई हैं, क्योंकि हर शहर की अपनी ख़ूबियां व ख़ूबसूरती होती है.

मैं 35 साल की नौकरीपेशा महिला हूं. कुछ दिनों से अजीब-सी परेशानी में हूं. मेरा मैनेजर मुझे ग़लत तरी़के से परेशान करके, नौकरी छीन लेने की और मुझे बदनाम करने की धमकी दे रहा है. समझ में नहीं आ रहा है, क्या करूं? घर में बताऊं, तो सब नौकरी छोड़कर घर पर बैठने की सलाह देंगे.
– बबीता शर्मा, पुणे.

आप अकेले ही इस समस्या से नहीं जूझ रहीं, काफ़ी महिलाओं को इन बदतमीज़ियों से गुज़रना पड़ता है. आपको आवाज़ उठानी होगी और हिम्मत करनी होगी. आजकल दफ़्तरों में स्पेशल कमिटी होती है. आप उन पर भरोसा कर सकती हैं और मदद ले सकती हैं, पर भविष्य में दोबारा कोई आपके साथ ऐसा ना करे, उसके लिए सतर्क रहें. अपने कम्यूनिकेशन और पर्सनैलिटी में बदलाव लाएं. कॉन्फिडेंट बनें और पूरी तत्परता से अपने साथ हो रहे अन्याय व शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएं. अपने अन्य सीनियर्स से भी बात करें और यदि सही राह दिखानेवाला न मिले, तो कोई कठोर कदम उठाने से पीछे न हटें. क़ानून का सहारा लें.

मेरी उम्र 32 साल है. मैं पिछले सात सालों से एक लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में हूं. जब भी शादी की बात करती हूं, वह कोई न कोई बहाना बनाकर मुझे समझा लेते हैं. घरवाले शादी के लिए दबाव डाल रहे हैं, पर मैं किसी और से शादी करने की सोच भी नहीं सकती. क्या करूं?
– नेहा सिंह, प्रयागराज.

आप कब तक इस तरह समय गंवाएंगी? घरवालों की चिंता स्वाभाविक है. आपको अपने प्रेमी से साफ़-साफ़ बात करनी होगी और एक अल्टीमेटम देना होगा. कहीं ऐसा न हो कि वो आपके भरोसे का फ़ायदा उठा रहा हो, इसलिए अपने बारे में गंभीरता से सोचना शुरू कर दें. ख़ुद पर विश्‍वास रखें. आपका जीवन और आपका भविष्य बहुत महत्वपूर्ण और क़ीमती है, किसी भी तरह से उससे समझौता करना नादानी होगी. समय रहते सही फैसला लें.

 

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Zeenat Jahan

ज़ीनत जहान
एडवांस लाइफ कोच व
सायकोलॉजिकल काउंसलर

[email protected]

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#HappyFriendshioDay!.. इस बार फ्रेंडशिप डे पर अपने दोस्तों को ख़ास अंदाज़ में बधाई दें.. कुछ शेरो-शायरी या कोई ख़ूबसूरत-सी बात कहकर हमारे साथ.. 
#हैप्पी फ्रेंडशिप डे! 

बेस्ट फ्रेंडशिप डे मैसेजेज़, meri saeli magazine

1. ज़िंदगी में एक ऐसा दोस्त होना बेहद ज़रूरी है
जिसको दिल का हाल बताने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत न पड़े

2. वक़्त चलता रहा, ज़िंदगी सिमटती रही
दोस्त बढ़ते गए, दोस्ती घटती गई

3. अब मैंने भी कलम रखना सीख लिया है दोस्तों
जिस दिन भी कोई कहेगा कि हम तुम्हारे हैं
दस्तख़त करवा लेंगे

4. कुछ पल ख़ामोशियों में ख़ुद से रू-ब-रू हो लेने दो यारों
ज़िंदगी के शोर में ख़ुद को सुना नहीं मुद्दतों से मैंने

5. इस बार मिलने की शर्त ये रखेंगे
दोनों अपनी घड़ियां उतार फेंकेंगे

6. मसरूफ हम भी बहुत हैं ज़िंदगी की उलझनों में दोस्तों
पर उलझनों में दोस्तों को भुला देना दोस्ती नहीं होती

7. लिखा था आज राशि में ख़ज़ाना मिल सकता है कि गली में अचानक दोस्त पुराना दिख गया

8. दोस्त शब्द का मतलब बड़ा ही मस्त होता है
हमारे दोष को जो अस्त कर दे वही दोस्त होता है

9. मुझे लिखकर कहीं महफूज़ कर लो दोस्तों
आपकी यादों से निकलता जा रहा हूं मैं

10. किस्मतवालों को ही मिलती है पनाह दोस्तों के दिल में
यूं ही हर शख़्स जन्नत का हक़दार नहीं होता

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11. क्या फ़र्क है दोस्ती और मुहब्बत में
रहते दोनों दिल में हैं, लेकिन फ़र्क बस इतना है
बरसों बाद मिलने पर मुहब्बत नज़र चुरा लेती है
और दोस्ती गले से लगा लेती है

12. ज़रूरत ही नहीं अल्फाज़ की
दोस्ती तो चीज़ है बस एहसास की
पास होते तो मंज़र ही क्या होता
दूर से ही ख़बर है हमें आपकी हर सांस की

13. गए तो सोचकर बात बचपन की होगी
दोस्त मुझे अपनी तरक्की के क़िस्से सुनाने लगे

14. कुछ मीठी-सी ठंडक है आज इन हवाओं में
शायद दोस्तों की यादों का कमरा खुला रह गया है

15. गुण मिले तो गुरु बनाओ, चित्त मिले तो चेला
मन मिले तो मित्र बनाओ, वरना रहो अकेला

16. सारे साथी काम के सबको अपना मोल
जो मुश्किल में साथ दें, वो सबसे अनमोल

17. फ्रेंड्स की कमी को जानते हैं हम
दुनिया के दर्द को पहचानते हैं हम
साथ है आप जैसे फ्रेंड्स का तभी तो
ज़िंदगी हंसकर जीना जानते हैं हम

18. दोस्त के साथ अंधेरे में चलना उजाले में अकेले चलने से बेहतर होता है

19. फोन होल्ड पर रख सकते हैं दोस्ती नहीं..

20. रूठना-मनाना ही तो दोस्ती का टॉनिक है..

 

 

 

Kids Stories

Kids Story: अमरूद किसका? (Amrood Kiska?)

कुछ बच्चे पार्क में खेल रहे थे. उनमें से दो दोस्त भी थे. खेलते-खेलते उन्हें दूर एक अमरूद का पेड़ नज़र आया. दोनों उस पेड़ के पास गए, तो देखा एक अमरूद लगा हुआ है. दोनों ने सोचा क्यों न इसको तोड़कर खाया जाए. पर दोनों के मन में एक सवाल था कि ये अमरूद कौन खाएगा. ख़ैर दोनों ने मिलकर अमरूद तोड़ लिया.

अब उनमें झगड़ा होने लगा, एक ने कहा कि मैंने यह पेड़ पहले देखा, तो यह अमरूद मेरा, दूसरे का कहना था कि इस अमरूद को मैंने पहले देखा, तो यह मेरा.

Kahani

दोनों का झगड़ा इतना बढ़ गया कि बाकी के बच्चे भी वहां आ गए. सबने पूछा कि क्यों लड़ रहे हो, तो उन्होंने बताया. उन बच्चों में से एक लड़के ने कह कि मैं तुम्हारे झगड़े का निपटारा कर सकता हूं. यह अमरूद मुझे दिखाओ.

 

उन दोनों ने उसे अमरूद दे दिया. वो लड़के मज़े से अमरूद खाने लगा और देखते ही देखते पूरा अमरूद खा गया. बाद में बोला, वाह अमरूद सच में बहुत ही मीठा था और हंसते हुए वहां से चला गया.

Bacho Ki Kahaniya

दोनों दोस्त देखते रह गए और फिर सोचने लगे कि काश, झगड़ा करने की बजाय यह अमरूद दोनों ने आधा-आधा बांट लिया होता, तो आज कोई और इसे नहीं हथिया सकता था.

सीख: इस कहानी से यही सीख मिलती है कि कभी भी छोटी-छोटी बात पर आपस में झगड़ा नहीं करना चाहिए, वरना दूसरे इसका फ़ायदा उठा लेते हैं. जो भी हो आपस में मिल-बांटकर ही फैसला करना चाहिए.

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Bollywood Songs About Friendship, meri saheli magazine

प्यार क्या है… प्यार दोस्ती है… दोस्ती में नो सॉरी…नो थैंक्यू… दोस्ती की है निभानी तो पड़ेगी ही. ऐसे ही ढेर सारे डायलॉग्स ने दोस्ती के इस रिश्ते को और भी ख़ास बना दिया है. दोस्त बस दोस्त होते हैं. दोस्तों से आप वो सब कुछ शेयर कर सकते हैं, जो किसी और से नहीं कर सकते. बॉलीवुड में कई ऐसी फिल्में हैं, जो दोस्ती पर बनी हैं. कभी दोस्त के लिए कुर्बानी देना हो या दोस्तों के साथ मिलकर मज़ें करना. फ्रेंडशिप के हर ख़ास पलों को फिल्मों में गानों के ज़रिए बेहतरीन ढंग से पेश किया गया है.

आइए, आपको देखते हैं इस प्यारे से रिश्ते पर बने बॉलीवुड के टॉप 10 गाने, जो आप अपने दोस्तों को डेडीकेट कर सकते हैं.

फिल्म- दिल चाहता है

फिल्म- 3 इडियट्स

फिल्म- दोस्ताना

फिल्म- ज़ंजीर

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फिल्म- याराना

फिल्म- सुहाग

https://www.youtube.com/watch?v=Zah4MfwTSg4

फिल्म- दोस्ताना

फिल्म- नसीब

https://www.youtube.com/watch?v=u-JKeJLv8P4

फिल्म- दोस्ताना

फिल्म- शोले

https://www.youtube.com/watch?v=k36NTMifx6E

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giving loans to dear ones

हर किसी के सामने कभी न कभी ऐसी स्थिति आती है जब उसे अतिरिक्त पैसों की ज़रूरत पड़ती है और तब मदद के लिए उसके दिमाग़ में सबसे पहले दोस्त व रिश्तेदार ही आते हैं. यदि आपका भी कोई दोस्त/रिश्तेदार आपसे पैसों की मदद मांगे, तो उनकी मदद ज़रूर करें, मगर कुछ बातों का ध्यान रखें. आमतौर पर लोग रिश्तेदारी में पैसों के लेनदेन से बचते हैं क्योंकि कई बार पैसा बेहद क़रीबी रिश्तों में भी कड़वाहट घोल देता है. इसलिए लोग दोस्त/रिश्तेदारों के साथ बिज़नेस पार्टनरशिप करने से भी बचते हैं, मगर बावजूद इसके कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है कि आपका कोई क़रीबी आपसे मदद मांगता है और आप रिश्तों का लिहाज़ करके ना नहीं बोल पातें. अपनों की मदद करना अच्छी बात है, मगर पैसों के मामले में थोड़ी एहतियात भी बरतनी चाहिए, यदि आपको किसी अपने को उधार देना ही पड़ें, तो इन बातों का ध्यान ज़रूर रखें.

परिस्थितियों का आकलन करें
किसी अपने को उधार देने से पहले परिस्थितियों का अच्छी तरह से विश्‍लेषण कर लें, साथ ही मामले की गंभीरता को भी समझने की कोशिश करें. क्या सामने वाले को सचमुच किसी बेहद ज़रूरी काम के लिए पैसे चाहिए या फिर बस अपना कोई शौक़ पूरा करने लिए वो आपसे पैसे मांग रहा है. हालांकि इस मामले में बहुत ़ज़्यादा पूछताछ न करें, मगर इतना ज़रूर जानने की कोशिश करें कि उसे किस काम के लिए पैसे चाहिए? हो सके तो उसे तुरंत पैसे देने की बजाय कोई दूसरा रास्ता सुझाएं. यदि फिर भी बात न बनें और पैसे देने ही पड़े, तो अच्छी तरह से उसकी ज़रूरत की पड़ताल करने के बाद ही पैसे दें, कहीं ऐसा न हो कि वो आपके पैसों का ग़लत इस्तेमाल करें जिससे भविष्य में आपके रिश्ते में दरार पड़ जाए.

शर्त और नियम पर चर्चा कर लें
पैसों के मामले में भावनाओं को दूर ही रखें. आपकी क्या शर्तें और नियम है इसकी लिस्ट बना लें, जैसे- वो कितने दिनों में आपके पैसे लैटाएगा, पेमेंट कैसे करेगा? यदि ज़्याद अमाउंट है तो इंस्टॉलमेंट कितनी होगी आदि. ये सारी चीज़ें सामने वाले से डिस्कस कर लें ताकि भविष्य में किसी तरह की ग़लतफ़हमी की गुंजाइश न रहे. एक बात याद रखिए कि एक बार पैसे देने के बाद उससे बार-बार ये न पूछे कि उसने पैसों का क्या किया, कैसे ख़र्च किए. आपके बार-बार पूछने से रिश्ते में तनाव और दरार आ सकती है. यदि बहुत बड़ी रकम उधार दे रहे हैं, तो उसका लिखित सबूत (प्रूफ) ज़रूर रखें.

अपनी सहूलियत देखें
‘अरे चाचा जी ने आज पहली बार मुझसे पैसे मांगे है, अब तो किसी भी तरह से पैसों का इंतज़ाम करना ही पड़ेगा…’ अपने किसी क़रीबी द्वारा उधार मांगने पर क्या ऐसा रिएक्शन आपको ही मुश्किल में डाल देगा. मान लीजिए आपने अभी तो अपनी क्षमता से बाहर जाकर अपने किसी दोस्त या कलीग से पैसे मांगकर उन्हें दे दिए, लेकिन यदि सामने वाले ने आपको समय पर पैसे नहीं लौटाएं तब आप क्या करेगें. दोस्तों के बीच आपकी क्या इज़्ज़त रह जाएगी? अतः यदि आपके पास पैसे नहीं है तो इनकार करने में संकोच न करें. अपनी ज़रूरते पूरी होने के बाद यदि आपके पास अतिरिक्त पैसे हैं तो ही किसी को उधार दें. यदि आपको दोस्त/रिश्तेदार ने जितने पैसे मांगे है आपके पास उतना नहीं है, तो उनसे साफ़ शब्दों में कह दीजिए की आपके पास फिलहाल उतने पैसे नहीं हैं और जितना आपसे बन पड़े उतने ही पैसे दें.

पैसे वापस करने का समय निश्चित करें
चूंकि आप किसी अपने को ही उधार दे रहे हैं, ऐसे में शायद आपको लगे कि पैसे वापस करने का समय निश्‍चित करने की ज़रूरत नहीं है, मगर आपकी ये सोच सही नहीं है. आप चाहे किसी को भी उधार दें, पैसे देते समय ही उसे वापस करने का समय भी तय कर लें. इस बात का ध्यान रखें कि सामने वाला भी समय तय करने की ज़रूरत को समझें. दरअसल, ऐसा करना उसके लिए भी फ़ायदेमंद ही रहेगा क्योंकि समय तय करने से उस पर निश्‍चित तारीख़ तक पैसे देने का दबाव बढ़ेगा और आपके पैसे चुकता करने के लिए सेविंग करने में जुट जाएगा. जहां तक संभव हो कम पैसों के लिए ज़्याद लंबा समय न रखें. हां, यदि पैसे ज़्यादा दिए हैं, तो आप साल दो साल का समय तय कर सकते हैं. आपने कितना उधार दिया है, ये ज़रूर याद रखें.

ब्याज न वसूलें
आपने कोई बिज़नेस डील नहीं की है और न ही किसी बैंक या फायनेस कंपनी में निवेश किया है कि आपको ब्याज मिले. अपने किसी सगे-संबंधी को दिए पैसों पर ब्याज वसूलने की ग़लती न करें, हो सके उस व़क्त वो शख़्स आपकी बात मान लें, मगर आगे चलकर निश्‍चय ही आपके रिश्तों में दूरियां आ जाएंगी. एक बात याद रखिए कि उन्होंने बैंक या किसी फायनेंशियल कंपनी की बजाय आपसे पैसे इसलिए मांगे क्योंकि उन्हें आप पर विश्‍वास है कि आप उनकी मजबूरी समझेंगे और उसका नाजायज़ फ़ायदा नहीं उठाएंगे.

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उधार को न बनाएं आदत
हालांकि आप अपने किसी क़रीबी को पैसे देकर उसकी मदद कर रहे हैं, मगर उधार देने को अपनी आदत में शुमार न करें. वरना सामने वाला व्यक्ति आपको ग्रांटेड लेने लगेगा. वो पैसों की अहमियत भी नहीं समझेगा क्योंकि उसे पता है कि जब उसे ज़रूरत होगी तो आप तो हैं ही उसकी मदद करने के लिए और ये हालात आपके लिए ख़तरनाक हो सकते हैं. क्योंकि लंबे समय पैसे न चुकाने पर यदि आप उससे बार-बार तकादा करते हैं, तो वो अपमानति और असुरक्षित महसूस करने लगता है. इस स्थिति में कई बार उधार लेने वाला व्यक्ति आपके साथ कुछ ग़लत भी कर सकता है. ऐसे कई मामले देखे गए हैं जहां उधार लेने वाले व्यक्ति ने तंगहाली के कारण पैसे देने वाले को ही रास्ते से हटा दिया है.

पहचान वालों को बनाएं गवाह
आप जो उधार दे रहे हैं यदि उसके लिए कोई लिखित सबूत नहीं है, तो कभी भी अकेले में पैसे उधार न दें भले ही वो आपके भाई/बहन ही क्यों न हो. जहां तक संभव हो ऐसे कुछ लोगों (2-3) के सामने पैसे दें, जो आप दोनों को जानते हों. इससे पैसे लेने वाले को अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास रहेगा और वो जल्द पैसे वापस करने की कोशिश करेगा. इसी तरह इन्हीं जानकार लोगों के सामने पैसे वापस लौटाने पर उधार वापस करने वाले को भी तसल्ली रहती है.

मैंने अपने एक रिश्तेदार को 2-3 बार उधार दिए और उसने समय पर पैसे लौटा भी दिए, मगर एक बार उनके कहने पर मैंने 1 लाख रुपए 1 साल के लॉकिंग पिरियड पर उन्हें इन्वेस्ट करने के लिए दिए, मगर इस इनवेस्मेंट का उन्होंने मुझे कोई प्रूफ नहीं दिया. वो बेहद क़रीबी और विश्‍वसनीय रिश्तेदार थे इसलिए मैंने भी उनसे दुबारा प्रूफ के बारे में नहीं पूछा, मगर एक साल बाद जब मैंने उनसे पैसों के बारे में पूछा तो हर बार नए-नए बहाने बनाकर वो पैसे देने से बचते रहें. तब मुझे एहसास हुआ कि रिश्तेदारी में पैसे देकर मैंने कितनी बड़ी ग़लती की है. उनके बार-बार के झूठ से तंग आकर एक दिन मैंने उन्हें बहुत भला-बुरा सुनाया फिर क़रीब 6 महीने बाद उन्होंने पैसे तो लौटाए, मगर जिस इंटरेस्ट रेट की बाद करके उन्होंने पैसे निवेश करवाए थे वो इंटरेस्ट नहीं दिया. कम से कम मुझे मेरे मूल पैसे तो मिल गए इसी बात की तसल्ली है. इस वाक़ये के बाद से मैंने दुबारा अपने किसी रिश्तेदार से पैसे की लेन देन नहीं की और नही भविष्य में करूंगी.
नेहा शर्मा, दिल्ली

– कंचन सिंह

किसने कितना दिया… किससे कितना मिला… किसको क्या देना है… किससे क्या लेना है… आजकल इन्हीं तानोबानों में घिरकर हम हर रिश्ते को तोल रहे हैं. मतलब की दुनिया में मतलबी हो रहे रिश्ते हमें भी कैल्कुलेटिव बनाते जा रहे हैं, जिससे रिश्तों में छिपा अपनापन और प्रेम खो रहा है.

Practical With Relationships

रिश्तों का हिसाब-क़िताब या रिश्तों में हिसाब-क़िताब?
हम जब उनके घर गए थे, तो उन्होंने हमें क्या दिया? बच्चे के हाथ में बस 100 का नोट थमा दिया. तो अब जब वो आ रहे हैं, तो इतना सोचने की क्या ज़रूरत. हम भी वैसा ही करेंगे, जैसा उन्होंने किया… हर रिश्ते को हम पैसों के पैमाने पर ही तोलते हैं. प्यार, स्नेह, अपनापन तो जैसे बीते ज़माने की बात हो गई.

ज़रूरी नहीं, ज़रूरत के रिश्ते
भला इनसे रिश्ता रखकर हमें क्या फ़ायदा होगा? न तो ये इतने पैसेवाले हैं और न ही इनकी इतनी पहुंच है कि हमारे कभी काम आ सकें… चाहे दोस्ती हो या रिश्तेदारी अब हम स़िर्फ ज़रूरत और फ़ायदा ही देखते हैं. उन्हीं लोगों से मिलने-जुलने का व़क्त निकालते हैं, जिनसे हमें फ़ायदा हो सकता है. ज़रूरत के व़क्त कौन कितना काम आ सकता है, जैसे- कौन रेलवे में रिज़र्वेशन करवा सकता है, कौन हॉस्पिटल का बिल कम करवा सकता है, कौन हम पर मुसीबत आने पर हमें उससे बाहर निकलवा सकता है… किसका कितना रसूख है, किसकी कितने बड़े अधिकारियों से पहचान व ऊपर तक पहुंच है… यही बातें अब अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं.

सोच-समझकर बनाते हैं दूरियां
एक समय था हमें घर पर ही यह सीख मिलती थी कि ये हमारे दूर के रिश्ते के मामाजी लगते हैं और इनसे भी हमें उसी शिद्दत से रिश्ता निभाना है, जैसे अपने मामाजी से. लेकिन अब हम सोचते हैं, जितना ज़्यादा संबंध रखेंगे, उतने झंझट बढ़ेंगे. हम अपने बच्चों की शादी में उन्हें बुलाएंगे, तो उनके बच्चों की शादी में भी जाना पड़ेगा… कौन इतना लेन-देन व समय निकाले. बेहतर है धीरे-धीरे दूरियां बना लें. यानी बहुत ही कैल्कुलेटिव तरी़के से हम दूरियां बनाते हैं, ताकि हमें भी उस रिश्ते से जुड़ी ज़िम्मेदारियां न निभानी पड़े.

ख़त्म हो रही है बेलौस मुहब्बत
बिना मतलब के, नि:स्वार्थ भाव से किसी से प्यार-मुहब्बत भरे रिश्ते रखना तो अब बेव़कूफ़ी ही समझी जाती है. यहां तक कि आपको समझाने वाले भी यही समझाएंगे कि ऐसे लोगों पर अपना क़ीमती व़क्त और पैसा क्यों ज़ाया करते हो, जो किसी काम के नहीं.

पैसा और कामयाबी सोच बदल रही है
हम अपने दोस्तों या रिश्तेदारों से अधिक कामयाब हो जाते हैं और उनसे अधिक कमाने लगते हैं, तो हमारे भीतर का अभिमान भी हावी होने लगता है. ऐसे में हम हर रिश्ते को शक की निगाह से देखते हैं. हमें लगता है कि हमारी कामयाबी व पैसों के कारण ही ये तमाम लोग हमसे जुड़े रहना चाहते हैं. इस नकारात्मक सोच को हवा देनेवालों की भी कमी नहीं, इसलिए हम धीरे-धीरे ख़ुद ही अपनों से दूरी बनाने लगते हैं.

प्राथमिकताएं बदल जाती हैं
समय के साथ हमारी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं. हमारे गहरे दोस्तों से अधिक महत्वपूर्ण वो लोग हो जाते हैं, जिनसे हमें हमारे करियर या बिज़नेस में फ़ायदा हो. हमें ऐसे ही लोगों के साथ समय गुज़ारने में अधिक दिलचस्पी होती है.

क्यों हो रहे हैं हम इतने कैल्कुलेटिव?
– व़क्त व समय बदल रहा है. समय की कमी के चलते हमें भी लगता है कि जिनसे सीधा काम पड़े, उन्हें से बातचीत का क्रम जारी रहे.
– लोग प्रैक्टिकल बन रहे हैं और जब हमारा सामने ऐसे ही लोगों से होता है, तो हमारी सोच भी बदलने लगती है.
– कड़वे अनुभव भी यही सीख देते हैं कि जब समय पड़ने पर किसी ने हमारा साथ नहीं दिया, तो भला हम भी क्यों किसी से इतना अपनापन रखें.
– भले ही सामनेवाला मदद करने की स्थिति में हो या न हो, लेकिन हमारा पैमाना यही हो गया है कि हमें इनसे संबंध रखकर क्या फ़ायदा हो सकता है.
– बड़े शहरों में वर्क लाइफ के बाद स़िर्फ वीकेंड में अपने लिए समय मिलता है, उसमें हम अपने कलीग्स या सो कॉल्ड फ्रेंड्स के साथ वीकेंड एंजॉय करना पसंद करते हैं. यानी कल्चर ही ऐसा हो गया है कि न जाने-अनजाने हम कैल्कुलेटिव हो रहे हैं.
– रिश्ते निभाने का समय और एनर्जी दोनों ही नहीं. हमको लगता है कि जिनसे कोई काम ही नहीं पड़ेगा, तो उन पर अपना समय व एनर्जी ख़र्च करने से बेहतर है, ऐसे लोगों के साथ टच में रहें, जो हमारे काम आ सकें. समय की यह कमी हमारी सोच को संकीर्ण बना रही है.
– यहां तक कि हम अपने उस पुराने दोस्त से मिलने को भी इतने आतुर नहीं रहते अब, जो किसी ज़माने में हमारे लिए सब कुछ होते थे.

क्या करें, क्या न करें?
– ज़रूरत और रिश्तों को अलग-अलग रखें.
– रिश्तों में प्यार व अपनेपन को अधिक महत्व दें.
– भले ही सामनेवाला इस स्थिति में न हो कि आपके काम आ सके, लेकिन अगर वो आपसे सच्चे दिल से जुड़ा है, तो उसकी भावनाओं का सम्मान करें.
– भले ही मुसीबत के समय वो अन्य तरीक़ों से आपकी मदद न कर सके, लेकिन उसका भावनात्मक सहारा ही आपको बहुत संबल देगा.
– कई बार ऐसा होता है कि हमारे पास सब कुछ होते हुए भी हम अकेले होते हैं, ऐसे में यही रिश्ते आपका सहारा बनते हैं.
– मतलब के रिश्ते तो थोड़े समय के लिए ही होते हैं, दिल के रिश्ते ताउम्र साथ रहते हैं.
– अपने दोस्तों को, क़रीबी लोगों को समय दें.
– उनके प्रति भी वही सम्मान मन में बनाकर रखें, जो अन्य लोगों के लिए है.
– आप उन्हें व़क्त देंगे, तो वो भी व़क्त पड़ने पर आपके साथ खड़े नज़र आएंगे.
– हर रिश्ते को मात्र फ़ायदे-नुक़सान की नज़र से न देखें. रिश्तों में मतलब ढूंढ़ना कम कर दें.
– हर बात को आर्थिक स्तर पर तोलना बंद कर दें. हमने 2000 का गिफ्ट दिया, उन्होंने 1000 का, यही छोटी-छोटी बातें दिलों में दूरियां पैदा करती हैं. अपना दिल बड़ा और दिमाग़ खुला रखें.
– रिश्तों का अर्थ स़िर्फ लेन-देन ही नहीं होता. अपने रिश्तों को इससे कहीं बड़े दायरे में देखें वरना व्यापार व रिश्तों में अंतर नहीं कर पाएंगे.
– आप अपनी सोच बदल देंगे, तो आपको व़क्त भी मिलेगा और मन में संतोष भी होगा कि
कैल्कुलेटिव होते इन रिश्तों के बीच आपने अपने रिश्तों को सहेजने की कला सीख ली है.

– गीता शर्मा

दूसरों की ज़िंदगी में झांकना कहीं आपका शौक़ तो नहीं? (Why Do We Love To Gossip?)

srksalman1शाहरुख़ खान और सलमान खान एक-दूसरे के कितने अच्छे दोस्त बन चुके हैं, उसकी याद वो समय-समय पर दिलाते रहते हैं. शाहरुख ने टि्वटर पर शेयर की अपनी और सलमान की फोटो, जिसमें दोनों ही साइकल पर सुबह की सैर करने निकले हैं. शाहरुख ने फोटो के साथ लिखा है, ”Bhai bhai on bike bike. no pollution…bhai says ”Michael Lal Cycle Lal.” दोनों ही इन दिनों अपने बिज़ी शेड्यूल से वक़्त निकाल कर साइकलिंग करने जाते हैं. वैसे ये कोई पहला मौक़ा नहीं है, इससे पहले भी शाहरुख सलमान की फिल्म सुल्तान के सेट पर जा चुके हैं, जिसकी फोटो भी काफ़ी वायरल हुई थी. चलिए, अच्छा है जब दोस्ती की बहार चल रही हो, तो भला दुश्मनी की वजह क्यों ढूंढ़ना.

Reasons when a woman needs woman

अक्सर नारी मन को सच्चा सुकून मिलता है, तो बस मां-बहन, सहेली की प्यारभरी स्नेह (Reasons when a woman needs woman) की छांव में… कारणों की क्या बात करें? बस यह कह सकते हैं कि यह तो कभी ख़ुशी, तो कभी ग़म से जुड़ा साझा रिश्ता है एक स्त्री का दूसरी स्त्री से.

एक ख़ुशहाल जीवन जीने के लिए हमें प्यार, अपनापन, साथ… जैसी न जाने कितनी ही छोटी-छोटी बातों की आवश्यकता होती है. ऐसे में कितने ही मामलों में एक स्त्री को दूसरी स्त्री की ही बेहद ज़रूरत महसूस होती है, ख़ासकर शॉपिंग करते समय. आइए, और भी वजहों के बारे में जानते हैं.

1. तनावमुक्त रहने के लिएः महिलाओं से जुड़ी ऐसी कई बातें होती हैं, जिसे वे चाहकर भी पुरुषों से शेयर नहीं कर पातीं. ऐसे नाज़ुक समय में उन्हें किसी नारी के साथ की ही बहुत ज़रूरत होती है. फिर चाहे वो पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ी कोई समस्या या संवेदनशील मुद्दा हो, पीरियड्स की प्रॉब्लम्स हों या फिर आपसी अहम् की बात हो, पति-पत्नी की आपसी कहा-सुनी हो, पारिवारिक सास-बहू, ननद-जेठानी से जुड़े वाद-विवाद हों या अविवाहित बेटी से तनाव… इन तमाम विषयों पर अपनी क़रीबी स्त्री से ही बात कर एक स्त्री ख़ुद को काफ़ी हल्का महसूस करती है. एक नारी को नारी के साथ की ज़रूरत ख़ासतौर पर स्ट्रेस फ्री होने, मन को हल्का करने यानी तनाव को दूर करने के लिए होती ही है.

2. जब ज़िम्मेदारीभरा कार्य करना होः तीज-त्योहार हो या शादी-ब्याह, तब महिलाओं का साथ ही माहौल को ख़ूबसूरत व आकर्षक बनाता है. हमारे यहां शादी की रस्में और ज़िम्मेदारियां काफी होती हैं, जहां पर न जाने कितने काम ऐसे होते हैं, जो महिलाओं को ही करने होते हैं. ऐसे में एक स्त्री को दूसरी स्त्री का साथ मिल जाने पर मानो सोने पे सुहागा वाली स्थिति हो जाती है. वैसे इस तरह के कार्यों में हर किसी की अपनी बहुत सारी जवाबदेही होती है, पर दो नारी के साथ भर से भी कई काम आसानी से हो जाते हैं.

3. जो सच्चाई से अवगत करा सकेः हम चाहे कितने ही अच्छे और समझदार हों, पर हम सभी में कुछ-न-कुछ कमी तो होती ही है. स्त्री के इस पहलू को एक स्त्री ही बेहतर ढंग से कह व समझ पाती है. अतः हमें अक्सर ऐसे शख़्स की ज़रूरत होती है, जो हमसे कड़वा सच कहने की हिम्मत रखता हो, जो बिना लाग-लपेट के हमारी अच्छी-बुरी दोनों ही बातों के बारे में हमें स्पष्ट रूप से बता सके, जो सही मायने में शुभचिंतक-आलोचक हो.

Reasons when a woman needs woman

4. परवरिश का नैसर्गिक गुणः चूंकि मातृत्व सुख का सौभाग्य एक स्त्री को ही मिलता है, इसलिए जाने-अनजाने में सहेजने, संवारने, परवरिश करने जैसे गुण उसमें स्वाभाविक रूप से होते हैं. हरेक स्त्री अपने इस स्वभाव को कभी मां, तो कभी बहन-बेटी, सहेली आदि के रूप में जीती है. वो अपने रिश्ते की इस पौध को प्यार व स्नेह के खाद-पानी से सींचती है. उसका यह नैसर्गिक गुण ताउम्र उसके साथ रहता है और रिश्तों के कई नए आयाम लिखता है.

5. जब जीवनसाथी से सब कुछ कहना न हो मुमकिनः एक पत्नी अपने पति से अपना सब कुछ कह-सुन ले, यह संभव नहीं. उस पर यह ज़रूरी भी नहीं कि पति महोदय के पास अपनी पत्नी की आपबीती सुनने-समझने के लिए वक़्त हो. ऐसे में पत्नी की कोई बेस्ट फ्रेंड या फिर कोई क़रीबी महिला ही उसकी सबसे बड़ी राज़दार होती है. वैसे भी यह कहां तक उचित है कि किसी एक शख़्स से ही हम सब कुछ कहने-सुनने की अपेक्षा रखें.

6. सुखद लंबी आयु के लिएः हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, स्त्रियों के लंबे जीवन जीने में उनकी टेंशन फ्री लाइफ की बहुत बड़ी भूमिका रही है. और ऐसा जीवन जीने में किसी स्त्री का साथ होना व एक अच्छी सोशल लाइफ जीना काफ़ी मायने रखता है यानी घर-गृहस्थी, सामाजिक कार्यक्रम, फेस्टिवल आदि में आपका एक्टिव होना, महिलाओं का संग-साथ, उन्हें हेल्दी, ख़ुशमिज़ाज और ख़ुशहाल लंबा जीवन जीने में मदद करता है. ये सभी बातें आपके हर दिन को ख़ुशगवार व ऊर्जा से भर देती हैं.

7. लक्ष्य के सहयोग में मदद के लिएः कहते हैं, हर कामयाब पुरुष के पीछे किसी स्त्री का सहयोग होता है. लेकिन यही बात महिलाओं पर भी लागू होती है. एक स्त्री के आगे बढ़ने, अपने लक्ष्य को पूरा करने, उद्देश्यपूर्ण जीवन की सार्थकता में भी किसी दूसरी स्त्री का भरपूर सहयोग रहा है. नारी को उसके लक्ष्य की ओर बढ़ने में प्रोत्साहित करने में नारी का भी उल्लेखनीय योगदान रहता है. समय-समय पर एक मां, बहन, सहेली या फिर कोई ऐसी स्त्री, जो बेहद क़रीबी होती है, स्त्री को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है.

– ऊषा गुप्ता

 

होम सेफ्टी के 21 बेस्ट रूल्स (21 Home Safety Best Rules)

बिपाशा बासु मिस से मिसेज़ बनने के लिए बिल्कुल तैयार हैं. 30 अप्रैल को करण सिंह ग्रोवर और बिपाशा बासु शादी करने वाले हैं. अपनी शादी को ग्रैंड बनाने के लिए दोनों कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, फिर चाहे वो तीसरी बार शादी करने वाले करण हों, जिन्होंने गोवा में अपने फ्रेंड्स के साथ बैचलर्स पार्टी मनाई थी या फिर बिपाशा हों, जिन्होंने सेलिब्रेट किया अपना ब्राइड शावर. बिपाशा के फ्रेंड्स और फैमिली ने उनके लिए रखा ब्राइडल शावर, जहां का डेकोरेशन और माहौल था काफ़ी इंट्रेस्टिंग. कभी बिपाशा मिस से मिसेज़ का बोर्ड अपने हाथों में थामे नज़र आईं तो कभी ब्राइड टु बी का टैग पहने नज़र आईं. करण सिंह ग्रोवर भी पहुंचे बिपाशा की इस पार्टी में और बिप्स को कर दिया सरप्राइज़. ये सारी पिक्चर्स बिपाशा ने इंस्टाग्राम पर शेयर की हैं.

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सौजन्य- इंस्टाग्राम (@bipashabasu)

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deepika-ranbir_650_010314065432जब से रणबीर कपूर कीकैटरीना कैफ़ से दूरियां बढ़ी हैं, तब से लगता है उन्हें याद पुराना प्यार आने लगा है. यूं भी रणबीर कपूर से ब्रेकअप के बाद दीपिका पादुकोण ने उनका साथ कभी नहीं छोड़ा. रणबीर की अच्छी दोस्त वो हमेशा से रही हैं और इनका दोस्ताना इनके ब्रेकअप के बाद की फिल्मों में दिखाई भी दिया था. दीपिका एक बार फिर दोस्ती का फर्ज़ निभा रही हैं, रणबीर कपूर के टूटे दिल का दर्द बांट कर. ख़बरें हैं कि दीपिका 18 मार्च, 2016 को अपनी हॉलीवुड फिल्म ट्रिपल एक्स की शूटिंग कर कनाडा से मुंबई आईं, जिसके बाद उन्हें अपने फ्रेंड की शादी के लिए श्रीलंका रवाना होना था, लेकिन व़क्त निकाल कर देर शाम दीपिका पहुंचीं रणबीर कपूर के घर. सूत्रों की मानें तो दोनों ने रणबीर के घर की छत पर एक-दूसरे के साथ काफ़ी व़क्त बिताया.news_1447855686_bb8cf75e24ad71c4b0ef3b_1दोनों ही काफ़ी प्रोफेशनल हैं, इनके पास्ट रिलेशनशिप का असर कभी इनकी फिल्मों पर नहीं पड़ा. फिल्म ये जवानी है दिवानी और तमाशा में दोनों की केमेस्ट्री कमाल की रही और अब ये जोड़ी जल्द ही दोबारा ऑन स्क्रीन साथ नज़र आ सकती है. ख़बरें हैं कि दोनों ने साजिद नाडियाडवाला की अपकमिंग फिल्म के लिए दोनों ने हामी भर दी है. फिल्म की शूटिंग शुरू होने में अभी थोड़ा व़क्त है, क्योंकि जहां दीपिका अपनी हॉलीवुड फिल्म ट्रिपल एक्स में बिज़ी हैं, वहीं रणबीर कपूर की डायरी भी फुल है जग्गा जासूस, अयान मुखर्जी और राजकुमार हिरानी की फिल्मों से.