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सही खाना ही नहीं, सही समय पर खाना भी है ज़रूरी (Healthy Eating: Are You Eating At The Right Time?)

Healthy Eating

अक्सर हम सोचते हैं कि हमें हेल्दी फूड (Healthy Food) खाना चाहिए और जब भी मौका मिलता है, तो हम हेल्दी फूड खाने से पीछे नहीं हटते, लेकिन उस व़क्त हम शायद ही यह सोचते हैं कि भले ही हम हेल्दी फूड खा रहे हैं, लेकिन क्या यह समय उसे खाने के लिए सही है? जी हां, स़िर्फ सही खाना ही नहीं, सही समय (Right Time) पर खाना भी उतना ही ज़रूरी है, वरना कितना भी हेल्दी फूड हो, उसका असर उल्टा भी पड़ सकता है.

Healthy Eating

दही (Curd)
गर्मी के मौसम में दही खाना बहुत फ़ायदेमंद होता है. ये पेट को ठंडा रखता है, लेकिन रात को दही नहीं खाना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार, रात में दही खाने से कफ़ के साथ ही पेट से जुड़ी अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय दही खाना बेस्ट है. दही को ग़लती से भी गरम करके खाने की भूल न करें.

दूध (Milk)
हड्डियों को मज़बूत बनाने के लिए दूध बहुत ज़रूरी है, मगर इसे कब पीना चाहिए, इसे लेकर हर किसी की राय अलग-अलग है. कुछ लोग सुबह नाश्ते के व़क्त दूध पीते हैं, तो कुछ रात को सोने के पहले. वैसे कभी भी सुबह खाली पेट दूध नहीं पीना चाहिए, इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है.
क्या है सही समय?
विशेषज्ञों के मुताबिक़, अगर सुबह में दूध का सेवन किया जाए, तो ये आपको पूरे दिन एनर्जेटिक रखता है, जबकि रात में दूध पीने से दिमाग़ शांत रहता है और नींद भी अच्छी आती है. आयुर्वेद में दूध पीने का सही समय रात में ही बताया गया है.

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चावल (Rice)
आमतौर पर लोगों को लगता है कि चावल खाने से वज़न बढ़ता है, जबकि ये पूरा सच नहीं है. चावल में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर के लिए ज़रूरी है. हां, इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. कुछ लोगों को ये भी लगता है कि दोपहर में चावल खाना फिर भी ठीक है, मगर रात में नहीं खाना चाहिए, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होता.
क्या है सही समय?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, रात में ही चावल खाना चाहिए, मगर बहुत कम मात्रा में. इससे ये आसानी से पच भी जाता है और आपको रात को अच्छी नींद आती है, जबकि दोपहर में चावल अवॉइड करना चाहिए, क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, जिससे काम के समय आपको नींद आने लगती है.

शक्कर
चाय या दूध में बहुत ज़्यादा शक्कर नहीं डालनी चाहिए, मगर इसका ये मतलब नहीं है कि आप शक्कर खाना पूरी तरह से बंद कर दें. थोड़ी शक्कर खानी भी ज़रूरी है.
क्या है सही समय?
शक्कर को दिन में खाना सही होता है, क्योंकि इंसुलिन शुगर को असरदार तरी़के से एब्जॉर्व कर लेता है और ये आसानी से पच जाती है, जबकि रात में शक्कर खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है और आपको ठीक से नींद नहीं आती, तो अगर रात को खाने के बाद आपको मीठा खाने की आदत है, तो इसे बदल लीजिए.

दाल और बींस (Pulses, Lentils, Legumes)
प्रोटीन से भरपूर दाल और बींस को भी डायट में शामिल करना ज़रूरी है, मगर इसे खाने का सही समय भी पता होना चाहिए. रात के समय दाल और बींस खाना ठीक नहीं होता, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होते और फिर पेट में गैस बनने लगती है.
क्या है सही समय?
सुबह और दोपहर के समय इसे खाना अच्छा होता है, क्योंकि तब ये आसानी से पच जाते हैं और गैस की समस्या नहीं होती.

Healthy Eating

जानें इन फ्रूट्स (Fruits) को खाने का राइट टाइम

सभी तरह के फल सेहत के लिए अच्छे होते हैं, मगर इन्हें सही समय पर खाना चाहिए.

सेब (Apple)
विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर सेब में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता. ये बहुत हेल्दी होता है, तभी तो कहते हैं, ङ्गएन एप्पल अ डे कीप्स द डॉक्टर अवेफ. मगर क्या आप जानते हैं कि बेहतर रिज़ल्ट के लिए सेब कब खाना चाहिए?
क्या है सही समय?
खाली पेट एप्पल खाने से बॉडी से सारे हानिकारक टॉक्सिन निकल जाते हैं. इससे एनर्जी मिलती है और वज़न भी नहीं बढ़ता.

ऑरेंज (Orange)
विटामिन सी से भरपूर संतरे में विटामिन ए, बी कॉम्प्लेक्स, फ्लेवोनॉयड, अमीनो एसिड, कैल्शियम, आयोडीन, फॉस्फोरस, सोडियम, मैगनीज़ आदि की भी भरपूर मात्रा होती है. रोज़ाना दो संतरा खाने से सर्दी, कोलेस्ट्रॉल, किडनी में स्टोन और कोलन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है.
क्या है सही समय?
संतरे को सुबह खाली पेट और रात में न खाएं. इसे हमेशा दोपहर के समय खाएं. खाना खाने के 1 घंटा पहले या बाद में संतरा खाना फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि खाना खाने से पहले खाने पर भूख बढ़ती है और बाद में खाने से डाइजेशन ठीक रहता है.

अंगूर (Grapes)
गर्मियों में अंगूर या अंगूर का जूस पीना बहुत फ़ायदेमंद होता है. इससे बॉडी को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है और शरीर में पानी की कमी भी नहीं होती. अंगूर विटामिन्स का बेस्ट स्रोत है.
क्या है सही समय?
सुबह खाली पेट अंगूर खाना बहुत लाभदायक होता है. इसके अलावा धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद ही अंगूर खाएं. अंगूर खाने के तुरंत बाद खाना न खाएं.

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मौसंबी (Sweet Lime)
कैल्शियम, फास्फोरस आदि पोषक तत्वों से भरपूर मौसंबी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होती है. अक्सर पेशेंट को इसका जूस पीने की सलाह दी जाती है. गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मौसंबी का
जूस पीएं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय मौसंबी का सेवन करना लाभदायक होता है. धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद मौसंबी खाना या उसका जूस पीना फ़ायदेमंद होता है.

केला (Banana)
विटामिन्स, मिनरल्स, पौटैशियम, ज़िंक, आयरन, कार्बोहाइड्रेट से भरपूर केला बेहतरीन फल है. इसे खाने से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है.
क्या है सही समय?
अगर आप एक्सरसाइज़ करते हैं, तो एक्सरसाइज़ के बाद केला खाएं, इससे तुरंत एनर्जी मिलती है. दोपहर में भी केला खा सकते हैं, क्योंकि इसे खाने के बाद देर तक पेट भरा होने का एहसास होता है. रात को सोने से पहले केला न खाएं, क्योंकि इससे सर्दी हो सकती है.

तरबूज़ (Watermelon)
इसे बेस्ट समर फ्रूट कहा जा सकता है. इसमें 92 प्रतिशत पानी होता है, जो गर्मियों में आपकी बॉडी में पानी की कमी नहीं होने देता. तरबूज़ खाने से इम्यून सिस्टम भी ठीक रहता है.
क्या है सही समय?
तरबूज़ दिन में कभी भी खा सकते हैं, मगर इसे खाने के बाद एक घंटे तक पानी न पीएं. तरबूज़ को बहुत देर तक काटकर न रखें.

Healthy Eating
इन्हें भी खाएं सही समय पर
  • अखरोट (Walnuts) को रात को सोते समय स्नैक के रूप में खाएं, इससे अच्छी नींद आएगी.
  • अंजीर (Fig) और खुबानी को सुबह खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म (Metabolism) बढ़ता है और पेट को गर्मी मिलती है. अतः इसे सुबह ही खाएं. रात में इन्हें खाने से गैस की समस्या हो सकती है.
  •  चीज़ (Cheese) भी सुबह खाएं, क्योंकि इसे डाइजेस्ट (Digest) होने में समय लगता है और इससे वज़न भी जल्दी बढ़ता है.
  •  कॉफी सुबह के समय पीएं. इससे एनर्जी मिलती है और नींद गायब हो जाती है. रात को कॉफी पीने की ग़लती न करें.

– कंचन सिंह

वेट लॉस टिप ऑफ द डे: 15 ईज़ी वेट लॉस टिप्स (Weight Loss Tip Of The Day: 15 Easy Weight Loss Tips)

 

टॉप 30 Amazing इम्यूनिटी बूस्टर फूड(30 power foods that boost immunity)

immunity booster food

क्या आप अक्सर सर्दी-ज़ुकाम की शिकार हो जाती हैं या आपको इंफेक्शन बहुत जल्दी हो जाता है? इन सबका कारण कमज़ोर इम्यून सिस्टम है, जिसकी वजह से आप जल्दी बीमार हो जाती हैं. डायट से कैसे सुधारें इम्यून सिस्टम?

immunity booster food

इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरोधक प्रणाली दुरुस्त न हो, तो हम बहुत जल्द बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं. इम्यून सिस्टम के कमज़ोर होने का सबसे बड़ा कारण है डायट में न्यूट्रीएंट्स की कमी. तो आइए जानते हैं, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले कुछ खाद्य पदार्थों के बारे में, ताकि इन्हें अपनी रोज़मर्रा की डायट में शामिल कर आप हमेशा सेहतमंद बने रहें.

सब्ज़ियां

सब्ज़ियां खाने से कोलेस्ट्रॉल व हृदय रोग की संभावना कम होती है. इनसे शरीर को विटामिन व मिनरल्स मिलते हैं, जिनसे इम्यून सिस्टम तंदुरुस्त रहता है.
मेथी
– रोज़ाना मेथी खाने से एनीमिया से राहत मिलती है.
– मेथी डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए भी लाभदायक है.
– डिलीवरी (प्रसव) के बाद इसे खाने से मां को अच्छा दूध आता है.
पालक
– इसमें आयरन, कैल्शियम काफ़ी मात्रा में होता है, जो एनीमिया में लाभदायक है.
– पालक व अन्य हरी सब्ज़ियों में विटामिन, मिनरल, फॉलिक एसिड व फाइबर्स होते हैं.
गाजर
– गाजर विटामिन ए, कैरोटिनाइड और एंटी ऑक्सीडेंट का स्रोत है.
– गाजर के सेवन से लंग कैंसर की संभावना कम होती है.
– विटामिन ए आंखों के लिए अच्छा होता है एवं मोतियाबिंद की संभावना को भी कम करता है.
टमाटर
– टमाटर का नियमित सेवन दिल की बीमारी में आराम पहुंचाता है.
– कोलेस्ट्रॉल हाई हो, तो नियमित रूप से टमाटर का जूस पीएं.
– टमाटर एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रॉल) का लेवल कम करने में भी सहायक होता है.
– इसमें लाइकोपेन होता है, जो शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रलाइज़ कर देता है, जिससे फ्री रेडिकल्स हमारे शरीर को नुक़सान नहीं पहुंचा पाते.
– इसके नियमित सेवन से त्वचा पर पड़ने वाली झुर्रियों से लेकर हार्ट अटैक जैसी संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का ख़तरा कम हो जाता है.

फल

ये एंटी-ऑक्सीडेंट के भंडार होते हैं. इन्हें रोज़ खाया जाना चाहिए.
सेब
– सेब विटामिन सी व पोटैशियम का अच्छा स्रोत है.
– यदि 1 या 2 सेब रोज़ खाए जाएं, तो एनर्जी लेवल में बढ़ोतरी होती है.
– इससे इम्यून सिस्टम स्ट्रॉन्ग होता है और ब्लडप्रेशर भी कम होता है.
संतरा
– यह विटामिन ङ्गसीफ का स्रोत है.
– संतरा कैंसर से बचाव, ब्लड सर्कुलेशन (रक्तसंचार) बढ़ाने, घावों को जल्दी भरने मेें भी सहायक है.
अंगूर
– हरे व काले दोनों तरह के अंगूरों में एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं.
– ये नसों को संकीर्ण और कड़ा होने से बचाते हैं.
– अंगूर में पाए जाने वाले इलॉजिक एसिड में एंटी कैंसर गुण भी होते हैं.
– इसमें एन्थोसाएनिन्स की मात्रा अधिक होती है.
– ये शरीर में मौजूद ख़राब एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को नष्ट करता है और ख़ून के थक्के नहीं जमने देता.
बेरीज़
– सभी बेरीज़, जैसे- स्ट्रॅाबेरी, ब्लूबेरी, केनबेरी आदि विटामिन एवं फाइटोकेमिकल्स के अच्छे स्रोत हैं.
– फाइटोकेमिकल्स ऐसे पदार्थ हैं, जो बीमारियों से बचाते हैं.
– स्ट्रॉबेरी में एंटी कैंसर गुण भी होते हैं.
– इसे खाने से कमज़ोरी और डिप्रेशन दूर होता है.
केला
– इसे ङ्गइंस्टेंट एनर्जी बूस्टरफ कहना सही होगा, क्योंकि इसे खाने पर तुरंत एनर्जी मिलती है.
– इसमें 3 प्रकार की प्राकृतिक शर्करा होती है- ग्लूकोज़, सूक्रोज़ और फ्रक्टोज़.
– इसमें पाए जानेवाले हाई फाइबर कब्ज़ दूर करने में सहायक होते हैं.
– इसके अलावा केले का सेेवन अल्सर, एनीमिया, ब्लडप्रेशर, डिप्रेशन आदि में भी उपयोगी होता है.
नाशपाती
– यह पेक्टीन फाइबर व पोटैशियम का स्रोत है.
– पेक्टीन कोलेस्ट्रॉल कम करता है, शरीर को टॉक्सीन से मुक्त रखता है.
– इसमें सोडियम, फॉस्फोरस, कॉपर, विटामिन ए, सी भी होता है. यह व्हाइट सेल्स को इंफेक्शन से लड़ने के लिए उत्तेजित करता है और फ्री रेडिकल्स से होनेवाले नुक़सान से बचाता है.
तरबूज़
– इसमें प्रचुर मात्रा में लाइकोपेन पाया जाता है.
– ये प्रोस्टेट कैंसर के ख़तरे को कम करता है.
आड़ू
– इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइट्रेट विटामिन सी, ए और फाइबर होते हैं.
– मेनोपॉज़ के बाद की समस्याओं से बचने के लिए रोज़ 2 पीचेज़ खाना लाभदायक है, क्योंकि इसमें पाया जानेवाला ङ्गबोरोनफ एस्ट्रोजन हार्मोन लेवल को बढ़ाता है.
आंवला
– आंवले में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो इम्यून सिस्टम को बहुत मज़बूत बनाता है.
– रोज़ सुबह आंवले का रस और शहद मिलाकर खाया जाए, तो अनेक बीमारियों से बचाव होता है.

सलाद

सलाद में खाए जानेवाले पदार्थ भी इम्यून सिस्टम दुरुस्त करने में सहायक होते हैं.
खीरा
– यह ठंडी प्रकृति का, डाययूरेटिक (मूत्रवर्द्धक) व त्वचा के लिए फ़ायदेमंद होता है.
– खीरे का ताज़ा रस सीने की जलन, एसिडिटी, एक्ज़िमा, आर्थराइटिस, गेस्ट्राइटिस व अल्सर में भी फ़ायदा
पहुंचाता है.
शतावरी
– इसमें कैलोरीज़ न के बराबर और विटामिन व मिनरल प्रचुर मात्रा में होते हैं, जैसे- विटामिन ए, बी, सी, बी 9 आदि.
– एस्पेरेगस में पाया जानेवाला विटामिन ए त्वचा व बालों के लिए एवं फाइबर आंतों की सफ़ाई के लिए फ़ायदेमंद होता है.
मूली
– इसमें ज़िंक काफ़ी मात्रा में होता है.
– यह मूत्रवर्द्धक होती है.
– इसकी पत्तियों में आयरन, कैल्शियम व विटामिन सी होता है.
बीटरूट
– इसमें आयरन, पोटैशियम व विटामिन सी होता है.
– यह लिवर को डिटॉक्स करता है और इम्यून सिस्टम को तंदुरुस्त रखता है.
नींबू
– इसमें इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाने वाला विटामिन सी व फ्लेवोनॉइड नामक कंपाउंड पाया जाता है.
– इसमें एंटी-कैंसर व एंटी-ऑक्सीडेंट के गुण भी होते हैं.
– यह त्वचा और मसूड़ों को हेल्दी बनाता है.
हरी धनिया
– इसमें आयरन होता है.
– यह भोजन का स्वाद बढ़ाता है तथा एलर्जी व अपचन से बचाता है.
दही
– दही में ज़िंक होता है, जिसकी कमी से इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाता है.
– इसमें कैल्शियम, विटामिन ई व प्रोटीन होता है.
– दही खाने से मुंह से आनेवाली बदबू कम होती है.
– पाचन नली के हानिकारक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद मिलती है, जिससे पाचन क्रिया ठीक रहती है.
साथ ही पेट संबंधी सारी समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है.
शहद
– इसमें प्राकृतिक शर्करा व कार्बोहाइड्रेट होेता है, जो शरीर में आसानी से अवशोषित हो कर इंस्टेंट एनर्जी देते हैं, जिसका असर लंबे समय तक रहता है. अतः एथलीट व रनर्स अपनी डेली डायट में इसका उपयोग करते हैं.
– यह स्ट्रेस बूस्टर व एंटीसेप्टिक भी है.
पार्सले
– इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी, कैल्शियम, पोटैशियम, मैगनीज़, आयरन होता है.
– यह भी इम्यून सिस्टम को दुरुस्त रखने में सहायक है.
तुलसी
– इसके पत्ते गैस की समस्या, मितली व पेट की समस्या से भी निजात दिलाते हैं.
– हेपेटाइटिस व टाइफ़ाइड से बचने के लिए इसके 5 पत्ते रोज खाएं.
ड्रायफ्रूट्स
– सभी ड्रायफ्रूट्स विटामिन्स, फ़ाइबर, मिनरल आयरन व कैल्शियम के स्रोत हैं.
– ये बहुत हेल्दी होते हैं. इनमें हाई प्रोटीन व फैट होता है.
– ब्रेनफूड बादाम विटामिन ई का स्रोत है, जो त्वचा की झुर्रियां व कोलेस्ट्रॉल कम करता है.
– अखरोट में ओमेगा 3 ़फैटी एसिड होता है, जो आर्थराइटिस कम करता है.

अनाज

विभिन्न अनाजों में मौजूद उपयोगी पदार्थ भी इम्यून सिस्टम बढ़ाते हैं, जिससे हम बने रहते हैं सेहतमंद.
दालें (सभी तरह की)
– इनमें सभी आवश्यक एमीनो एसिड्स होते हैं.
– इनमें 20-25% प्रोटीन होता है, जो गेहूं में पाए जाने वाले प्रोटीन से दुगुना और चावल के प्रोटीन से तिगुना होता है.
सोयाबीन
– इसमें ओमेगा 3 व ओमेगा 6 फैटी एसिड्स होते हैं, जो हेल्थ के लिए अच्छे हैं.
– मेनोपॉज़ व ऑस्टियोपोरोसिस में इसका उपयोग बहुत फ़ायदा पहुंचाता है.
बीन्स
– बीन्स में विटामिन बी व पोटैशियम होता है.
– ये कोलेस्ट्रॉल कम करने, ब्लड शुगर नियंत्रित करने और ब्लडप्रेशर, कैंसर व मोटापे का रिस्क कम करने में
सहायक हैं.
ओट्स (जई)
– इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, सिलिकॉन, विटामिन बी व ई होते हैं. नाश्ते में इनका सेवन सेहतमंद होता है.
ये पाचन में भी मदद करते हैं.
– कोलेस्ट्रॉल कम करने व डायबिटीज़ के लिए फ़ायदेमंद हैं.
फ्लेक्स सीड्स (अलसी)
– फ्लेक्स सीड्स में ओमेगा 3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होता है, अतः इसके सेवन से हृदय रोग, कैंसर, आर्थराइटिस जैसी बीमारियों से बचाव होता है.
– इसमें मैगनीज़, फ़ॉलिक एसिड, कॉपर, फ़ॉस्फ़ोरस व विटामिन बी 6 होता है.
– यदि रोज़ इसका सेवन किया जाए तो सोरायसिस, ऑस्टियोपोरोसिस, डायबिटीज़ व एलर्जी में फ़ायदा
होता है.
तिल
– इसमें विटामिन ए, बी, ई के अलावा कैल्शियम, कॉपर, फ़ॉस्फ़ोरस, मैगनीज़, पोटैशियम व ज़िंक भी होता है.
पॉपी सीड्स (खसखस)
– यह गर्भवती व दूध पिलाने वाली मांओं के लिए बहुत फ़ायदेमंद है.
– इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस होता है.
– यह शरीर के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है.

 

10 गुड फूड, 10 बैड फूड (10 Good Food 10 Bad Food)

शक्कर के हेल्दी विकल्प ( Natural Substitutes for Sugar)

Natural Substitutes for Sugar

Healthy sugar

Natural Substitutes for Sugar

अक्सर लोग ख़ुशी के मौके पर कहते हैं कि कुछ मीठा हो जाए. लेकिन अगर आप मीठी खाने की सोच रहे हैं, तो सतर्क हो जाएं. शक्कर सेहत के लिए किसी मीठे ज़हर से कम नहीं है. लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर शक्कर न खाएं तो फिर अपनी शुगर क्रेविंग्स को कैसे कंट्रोल करें. कौन से दूसरे विकल्प हैं शक्कर. चलिए, आपकी इस मुश्किल को हल करते हैं और जानते हैं चीनी के हेल्दी विकल्प (Natural Substitutes for Sugar).

 

खजूर
* खजूर एक नेचुरल स्वीटनर है और इसे न्यूट्रिशन का पावरहाउस माना जाता है.
* इसे आप शक्कर की जगह आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें पोटैशियम, विटामिन बी6 व कैल्शियम होता है
* यह शुगर क्रेविंग्स आसानी से कम कर देता है. इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में होती है, जिससे एनर्जी मिलती है.
* इसे खाना खाने के बाद मीठे के तौर पर भी खाया जा सकता है.
* इसे ब्राउन शुगर का अच्छा सब्सिट्यूट माना जाता है.
* मिल्क शेक, दही, बेकिंग, शुगर फ्री खीर, केक, पुडिंग आदि में चीनी की जगह खीर का इस्तेमाल किया जा सकता है.

Natural Substitutes for Sugar

गुड़
* गन्ने से बना गुड़ चीनी से बेहतर है, क्योंकि चीनी की तरह इसे कई रिफाइनिंग प्रोसेस से होकर नहीं गुज़रना पड़ता है और इसमें मौजूद मिनरल्स  बरकरार रहते हैं.
* गुड मीठी तो होती ही है, साथ ही यह शरीर की सफ़ाई भी करती है
* गुड़ से पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है. चाय में शक्कर की जगह गुड़ का इस्तेमाल फ़ायदेमंद होता है.
* गुड में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और फाइबर इसे एक स्वास्थ्यवर्धक स्वीटनर बनाता है.

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शहद
* इसमें फ्लेवोनॉइड होता है. इसके अलावा यह एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल व एंटीफंगल गुणों से भरपूर होता है.
* यह दूसरे नेचुरल स्वीटनर से ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है. इसमें फ्रक्टोज़
* चाय, दूध, नींबू पानी आदि में चीनी की जगह शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है.
* चीनी खाने से वज़न बढ़ जाता है, जबकि शहद न केवल वज़न को कंट्रोल करता है, बल्कि इसे बढ़ने से भी रोकता है.

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गन्ने का जूस
* शक्कर से बेहतर है गन्ने का जूस, क्योंकि इसे शक्कर की तरह रिफाइनिंग प्रोसेस से होकर नहीं गुज़रना पड़ता है. इसकी वजह से इसमें मौजूद  पोषक तत्व, जैसे- विटामिन बी,सी, कैल्शियम आयरन और मैगनीज़ इसमें बरकरार रहते हैं.
* गर्मियों के मौसम में गन्ने का एक ग्लास जूस आपको स्फूर्ति देगा.

Natural Substitutes for Sugar

फल
* सभी तरह के फलों में भी प्राकृतिक मिठास होती है.
* मिल्क शेक बनाना हो या जूस नेचुरल स्वीटनर होने की वजह से इनमें शक्कर डालने की ज़रूरत नहीं होती है.
* एप्पल खीर के अलावा फलों से अलग-अलग तरह के डेज़र्ट्स भी बनाए जा सकते हैं, जिनमें शक्कर डालने की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं होती है.
* अंगूर भी ग्लूकोज़ अच्छा स्रोत माना जाता है.

Natural Substitutes for Sugar

स्टेविया
* यह एक पौधा होता है, जिसकी पत्तियां मीठी होती है. इस पौधे को मीठी पत्तियां भी कहा जाता है.
* इस पौधे की पत्तियों में शक्कर से 300 गुना ज़्यादा मिठास है.
* इसमें कार्ब्स और कैलोरी भी कम होती है.

Natural Substitutes for Sugar

क्यों ख़तरनाक है शक्कर?
* चीनी में कोई पोषक तत्व नहीं होते हैं. चीनी बनाने में रासयनिक प्रक्रिया के दौरान उसमें मौजूद सारे पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं और केवल कैलोरी रह जाती है.
* ज़्यादा शक्कर इम्यून सिस्टम पर असर डालता है.
* चीनी को पचाने में शरीर को काफ़ी मेहनत करनी पड़ती है.
* एक रिसर्च के मुताबिक़, फ्रक्टोज और ग्लूकोज का ज़्यादा मात्रा में सेवन करने से लिवर पर टॉक्सिक असर होता है.
* ज़्यादा मीठा खाने से मोटापा तो बढ़ता ही है साथ ही टाइप-2 डायबिटीज़ और हाई ब्लडप्रेशर का ख़तरा भी बढ़ जाता है.
* ज़्यादा मीठा दिमाग़ को नुक़सान पहुंचाता है, जिससे याद्दाश्त कमज़ोर हो जाती है.
* यह शरीर में अतिरिक्त इंसुलिन बनाती है, जिससे धमनियों में ब्लॉकेज का ख़तरा बढ़ जाता है और हार्टअटैक और स्ट्रोक का ख़तरा बढ़ जाता है.

Natural Substitutes for Sugar

क्या कहती है रिसर्च?

* वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के दिशा निर्देशों के मुताबिक़, रोज़ाना ली जानेवाली कैलोरी में शक्कर की मात्रा 10 फ़ीसदी से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए और भविष्य में इसे 5 फ़ीसदी तक लाने की कोशिश करनी चाहिए. ध्यान रखें की केवल चीनी ही नहीं, बल्कि रोज़ाना खाए जानेवाले ब्रेड, चावल, आलू, सोड़ा, कूकीज़, केक, फल आदि में भी मिठास होती है.
* अगर पूरे दिन में केवल 25 ग्राम शुगर का सेवन किया जाए तो स्वास्थ्य पर बूरा प्रभाव नहीं पड़ेगा. लेकिन ब्रेड, पैक्ड जूस, प्रोसेस्ड फूड, कोल्ड्रिंक्स आदि में शक्कर काफी होती है. इनका सेवन करते समय ध्यान रखें, ताकि अतिरिक्त चीनी न खा लें.
* डब्ल्यूएचओ के मुताबिक़ डायबिटीज़, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों से बचना है तो शक्कर कम खाएं.
* एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि चीनी या मीठे का सेवन अल्कोहल और धूम्रपान की ही तरह एक नशा है.

चीनी की चेतावनी

कई विशेषज्ञों का मानना है कि जिन प्रोडक्ट्स में चीनी अधिक इस्तेमाल की गई हो, उसके पैकेट या बॉटल पर सिगरेट की पैकेट की तरह चेतावनी लिखी होनी ज़रूरी है कि चीनी की लत भी लगती है और यह स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं.