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हैप्पी दिवाली! कबड्डी के धाकड़ बॉयज़ का नया अंदाज़! (Diwali Special: Kabaddi Stars In New Avtar)

pro Kabaddi Stars
हैप्पी दिवाली! कबड्डी के धाकड़ बॉयज़ का नया अंदाज़! इनसे पंगा मत लेना!

कबड्डी (Kabaddi) के मैट पर तो हमने इन्हें एक-दूसरे की टांग-खिंचाई करते हुए और पंगा लेते हुए देखा है, लेकिन दिवाली के मौके पर ये सब एक साथ एंजॉय करते नज़र आए. आप भी देखें इन हैंडसम हंक्स का ये सुपर कूल अंदाज़ इन पिक्चर्स के ज़रिए, जिनके कैप्शन्स भी काफ़ी कूल हैं. पुणेरी पल्टन (Puneri Paltan) के कैप्टन दीपक निवास हुड्डा ने लिखा है- डिवाइडेड बाय टीम, यूनाइटेड बाय ब्रदरहुड!

इन सभी प्लेयर्स ने अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स भी अपने फेस्टिवल लुक की तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें ये सभी गेम मोड से बाहर निकलकर लाइट मूड में नज़र आ रहे हैं. तो देखें और मज़ा लें.

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खेल-खेल में बच्चों से करवाएं एक्सरसाइज़ और ख़ुद भी रहें फिट (Indulge In Fitness With Your Children And Get In Shape)

Khel Khel Me Final

यदि एक्सरसाइज़ को खेल के साथ जोड़ दिया जाए यानी खेल-खेल में एक्सरसाइज़ की जाए, तो यह मज़ेदार हो जाता है. इसके अलावा बच्चों के साथ पैरेंट्स भी इस बहाने ख़ुद को फिट रख पाते हैं.

इन दिनों बच्चे मोबाइल फोन, वीडियो गेम, इंटरनेट आदि में इस कदर उलझे रहते हैं कि आउटडोर एक्टिविटीज़ व एक्सरसाइज़ से दूर होते जा रहे हैं. ऐसे में यदि पैरेंट्स बच्चों को खेल-खेल में एक्सरसाइज़ सिखाएं और करवाएं, तो इससे दुगुना फ़ायदा होगा. जहां बच्चे दिमाग़ी और शारीरिक रूप से मज़बूत होंगे, वहीं पैरेंट्स भी फिट रहेंगे.

खेल भी, सेहत भी

* जब बच्चा दो साल का होता है, तभी से उसे हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ खेल-खेल में करवा सकते हैं.
* बच्चे के साथ बॉल से कैच-कैच खेलें. इससे आंखों की एक्सरसाइज़ होगी.
* इस उम्र में सबसे अधिक फोकस मूवमेंट स्किल और बॉडी कंट्रोल पर होना चाहिए.
* बच्चे को फ्री रनिंग, बॉल कैच करना, दौड़ना, एरोबिक्स जैसे खेल खिलाएं. इस तरह के खेल से बच्चों की हड्डी मज़बूत होती है.
* बच्चे के साथ हर रोज़ टहलें, पैदल चलें और घूमें. इससे ब्लड सर्क्युलेशन ठीक रहता है.
* यदि बच्चे की उम्र 12 साल से अधिक है, तो उसे साइकिलिंग, टेनिस, स्विमिंग, स्केटिंग जैसे खेल खेलने के लिए प्रेरित करें.
* क्लाइम्बिंग वाले गेम से बच्चे की पीठ, हाथ मज़ूबत होते हैं, साथ ही उनकी हाइट बढ़ने में भी मदद मिलती है.
* सी सॉ अधिकतर बच्चों का पसंदीदा गेम है. इसमें दो बच्चे आमने-सामने झूले पर बैठकर उठक-बैठक करते हैं, जिससे जहां उनके हाथ-पैर की एक्सरसाइज़ होती है, वहीं उनके साथ बड़ों की भी अच्छी-ख़ासी कसरत हो जाती है.
* बच्चे की याददाश्त बढ़ाने के लिए उनके साथ मेमरी गेम्स खेलें.
* बच्चों के साथ कूदें-फांदें. ऐसा करने से बॉडी स्ट्रेच होती है और फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है.
* रस्सी कूदना- दस मिनट रस्सी कूदना, आठ मिनट के दौड़ने के बराबर होता है.
* एक मिनट रस्सी कूदने से 10 से 15 कैलोरीज़ बर्न होती हैं.
* रस्सी कूदने से शरीर का बैलेंसिंग पावर इम्प्रूव होता है और पैरों के मूवमेंट से फुर्ती और कंट्रोल बढ़ता है, इसलिए बच्चों के साथ रस्सी कूदनेवाला गेम ज़रूर खेलें.
* इन सबके अलावा डांस, योग, वर्कआउट्स आदि को भी आप मनोरंजक तरी़के से बच्चों के साथ कर सकते हैं, जिससे आप दोनों ही फिट और हेल्दी रह सकते हैं.

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गेम के साथ स्टडी भी

* यदि बच्चा बहुत छोटा है, तो आप उसे खेल-खेल में किचन में ही गणित सिखा सकती हैं.
* बच्चों को किचन में कुछ बर्तन इकट्ठा करने के लिए कहें और फिर गिनती करवाएं.
* इस तरह आप 1 से 10 और 1 से 20 आसानी से गिनती करवा सकती हैं.
* किचन में एक जैसी दिखनेवाली वस्तुओं को अलग करवाएं, जैसे- सभी कटोरियां, ग्लास, प्लेट आदि.
* बच्चों को इनके आकार के बारे में बताएं. इससे वे अलग-अलग शेप्स के बारे में जानेंगे.
* ध्यान रहे, खेल-खेल के माध्यम से बच्चा जो कुछ भी सीखता है, वो उसे हमेशा याद रखता है.

कुछ एक्सरसाइज़ ऐसी भी

* क्रॉलिंग लाइक ए बेबी यानी बच्चों की तरह रेंगना. यह भी एक मज़ेदार एक्सरसाइज़ है, जो क़रीब 1800 साल पुराना है. इससे बच्चों जैसी चंचलता और मज़बूती आती है. यह एक फन एक्सरसाइज़ है. इससे बॉडी की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है. मसल्स मज़बूत होते हैं और जॉइंट्स स्ट्रॉन्ग होते हैं. इसे आप बच्चों के साथ कर सकते हैं.
* ग्रूव एक्सरसाइज़ में सिंपल म्यूज़िक के साथ मूव करना होता है. इस एक्सरसाइज़ की ख़ास बात यह होती है कि इसमें कोई भी स्टेप ग़लत नहीं होता है. आपको म्यूज़िक को फील करके स्टेप करने होते हैं. जब बच्चे के साथ आप इसे करेंगे, तब गेम+फन+फिटनेस, तीनों का ही लुत्फ़ उठा पाएंगे.
* वेव शेप वर्कआउट में किसी भी मशीन की ज़रूरत नहीं होती. इससे स्ट्रेंथ, बैलेंस और फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर होती है.
* गेम्स फॉर द ब्रेन, एक ऑनलाइन जिम है, जहां पर आप अपने दिमाग़ की एक्सरसाइज़ कर सकते हैं. यहां पर 40 से भी अधिक ब्रेन गेम्स हैं, जिसे खेलकर ब्रेन को हेल्दी और फिट रख सकते हैं.

डिफरेंट स्ट्रोक्स

* आप जब भी बाज़ार जाएं, तो बच्चे को साथ लेकर जाएं. इससे बच्चा यह समझ सकेगा कि जो भी हम ख़रीदते हैं, उसके बदले में हमें पैसे देने पड़ते हैं.
* इस तरह आप बच्चों को दिलचस्प तरी़के से पैसों की अहमियत भी समझा सकते हैं.
* बच्चे से पहेली पूछ सकते हैं, क्रॉसवर्ड, शब्दों को तलाशना, ब्लॉक्स, सुडोकू जैसे खेल दिमाग़ के लिए बेहतरीन एक्सरसाइज़ हैं.

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इन बातों का रखें ख़्याल

* यदि बच्चे का मन नहीं है, तो उसे ज़बर्दस्ती खेलने के लिए न उकसाएं.
* हर रोज़ बच्चे को कम से कम एक घंटा खेलने के लिए प्रेरित करें.
* आप अपने बच्चों के साथ खेलने से हिचकिचाएं नहीं, बल्कि उनका भरपूर साथ दें.
* इससे बच्चों के बीच आपसी समझ और बॉन्डिंग बढ़ेगी.
* बैडमिंटन, फुटबॉल, क्रिकेट जैसे आउटडोर गेम्स में बच्चे का पार्टनर बनकर खेलने से आप बच्चे के अच्छे दोस्त बन सकते हैं.

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एक्सरसाइज़ के फ़ायदे

* बच्चे कम तनाव महसूस करते हैं.
* अच्छा महसूस करते हैं.
* वज़न कंट्रोल में रहता है.
* अच्छी नींद आती है.
* एक्सरसाइज़ से हड्डियां, मांसपेशियां व जोड़ों को मज़बूती मिलती है.

– ऊषा गुप्ता

 

अधिक पैरेंटिंग टिप्स के लिए यहां क्लिक करेंः Parenting Guide 

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पापा धोनी को गेम में हरा दिया जीवा ने (Dhoni is playing with daughter)

Dhoni

Dhoni
क्रिकेट से दूर फैमिली टाइम एंजॉय करते हुए भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपनी बेटी के साथ एक पल भी मिस नहीं करना चाहते. जब वो क्रिकेट से दूर रहते हैं, तो जीवा के बेहद क़रीब रहते हैं. अपनी प्यारी-सी बेटी जीवा के साथ माही खूब खेलते हैं. इस व़क्त वो भूल जाते हैं कि वो क्रिकेट खिलाड़ी हैं, शायद इसीलिए जीवा से वो गेम में हार गए.

माही ने सोशल साइट पर अपनी बेटी के साथ एक प्यारा सा वीडियो अपलोड किया, जिसमें नन्हीं परी जीवा पिंक फ्रॉक पहने हुए हैं. बालों में प्यारी-सी क्लिप, पैरों में प्यार-सा फुटवेयर पहने जीवा किसी मैदान में लेटी हुई हैं. जीवा के साथ इस रेस में उनके डैडी माही भी हैं. दोनों क्राउलिंग कर रहे हैं. जीवा आगे-आगे और माही पीछे-पीछे. इस गेम में जीवा ने अपने डैडी को हरा दिया. आप भी देखिए ये प्यारा वीडियो.

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बाद में धोनी बेटी जीवा के पास पहुंच जाते हैं. दोनों गेम कंप्लीट करते हैं.

श्वेता सिंह 

दे दना दन… रिंग के किंग विजेंदर सिंह- एक्सक्लूसिव और हॉट! (Interaction with Superhit Boxer vijender singh)

vijender singh

मंज़िलें छोटी लगने लगती हैं जब सपने बड़े हो जाते हैं, मुश्किलें गौण हो जाती हैं जब नज़रें आसमान पर होती हैं… जब हथेली में सूरज को कैद कर लेने का हुनर हो और ख़्वाहिशों को अपने क़दमों पर झुका लेने का जिगर, तो हमें समझ जाना चाहिए कि सामने बस एक ही शख़्स है… विजेंदर… विजेंदर और स़िर्फ विजेंदर! पलकों पर सितारों का चमकना और आंखों में चांद का खिलना आसान-सा लगता है और सारी उपमाएं, सारी तारी़फें बेतुकी-सी लगने लगती हैं… इस देसी बॉय के हॉट एंड हिट अंदाज़ के सामने. शब्द बिखर जाते हैं… वक़्त सिमट जाता है और हम बस देखते रह जाते हैं इस टैलेंटेड बॉक्सर के सुपरहिट पंचेज़ को, जिनका जवाब उनका मुकाबला कर रहे विरोधी के पास भी नहीं होता.

vijender singh

विजेंदर के देसी मुक्कों में कितना दम है, ये तो चेका जैसे खूंख़ार बॉक्सर को मात्र चंद मिनटों में चारों खाने चित्त करके ही उन्होंने दुनिया को दिखा दिया था …बड़बोले चेका को घर का रास्ता दिखा चुके विजेंदर ख़ुद क्या कहते हैं और क्या सोचते हैं बॉक्सिंग और उसके फ्यूचर के बारे में आइए विजेंदर (vijender singh) से ही जानते हैं इस दिलचस्प मुलाक़ात में…

vijender singh

सबसे पहले Congratulations आपकी इस बड़ी जीत के लिए और अपने टाइटल (डब्लूबीओ एशिया-पेसिफिक सुपर मिडलवेट) को डिफेंड करने के लिए.
थैंक यू वैरी मच! सच कहूं तो मैं स़िर्फ जीता हूं, इस जीत को बड़ा तो मेरे देशवासियों और आप सबने बनाया है… जो भी स्पोर्ट्स को प्यार करता है, गेम की क़द्र करता है उन सभी को दिल से शुक्रिया कहना चाहता हूं. सबने सपोर्ट किया, हौसला दिया और उनकी दुआओं ने मुझे विनर बनाया.

बॉक्सिंग का फ्यूचर कितना ब्राइट है इंडिया में?
बहुत ही ज़्यादा ब्राइट है… लोग गेम को समझते हैं, इतना प्यार देते हैं, ऐसे में प्लेयर्स को भी बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है. इंडिया में भी अब लोग इस स्पोर्ट्स के महत्व को समझने लगे हैं और उसे गंभीरता से भी लेने लगे हैं.

vijender singh

पिछली बार के मुकाबले इस बार लोगों का और भी अच्छा रेस्पॉन्स मिला… तो अपने फैंस को कुछ कहना चाहेंगे?
सभी को थैंक्स कहूंगा और आगे भी इसी तरह प्यार देते रहें… मुझमें और गेम में विश्‍वास जताते रहें… उनको निराश नहीं होने देंगे हम.

जो युवा बॉक्सिंग को करियर के तौर पर देखते हैं उनको क्या राय देना चाहेंगे?
मेहनत के अलावा आगे बढ़ने का कोई रास्ता या शर्त नहीं है… इसलिए चाहे कोई भी स्पोर्ट्स हो या ज़िन्दगी में आप जो भी करना चाहें, एकमात्र ऑप्शन है तो स़िर्फ और स़िर्फ मेहनत ही है.

vijender singh

अपनी फिटनेस और डायट के लिए क्या ख़ास करते हैं?
जमकर प्रैक्टिस करता हूं. बिना प्रैक्टिस और मेहनत के रिज़ल्ट नहीं मिलता, तो सबसे ज़रूरी है कि इनको नज़रअंदाज़ न करें. डायट में मैं प्रोटीन लेता हूं, क्योंकि फिटनेस बनाए रखने के लिए वो बहुत ज़रूरी है… इसलिए उसे अपने डायट का हिस्सा ज़रूर बनाता हूं.

आप सब विदेशी प्लेयर्स के साथ भी खेलते हैं… उनकी तकनीक और फिटनेस हमसे कितनी बेहतर होती है या क्या कुछ फर्क होता है उनमें और हमारी अप्रोच में?
हम उनसे अच्छे और बेहतर हैं… ये सब स़िर्फ कहने की बात है कि उनका फिटनेस लेवल या टेकनीक हमसे बेहतर होती है, जबकि इसमें कोई सच्चाई नहीं है. हमको ख़ुद को कभी भी कम नहीं आकना चाहिए. ख़ुद पर भरोसा रखेंगे, तो बेहतर परफॉर्म करेंगे.

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अन्य गेम्स के मुकाबले बॉक्सिंग को कहां देखते हैं जहां तक सुविधाओं और पैसों की भी बात करें तो ?
बॉक्सिंग काफी आगे है, न पैसों की कमी है, न सुविधाओं की… न टैलेंट की कमी है और न ही जज़्बे की… हम तैयार हैं दुनिया की नज़रों में नज़रें डालकर बात करने के लिए…
पैसों की भी बात करे, तो वर्ल्ड का हाइयेस्ट पेड प्लेयर भी एक बॉक्सर ही है, तो इसी से अंदाज़ा लगा लीजिए कि बॉक्सिंग का लेवल कितना ऊंचा है और लोग इसे कितनी गंभीरता से लेते हैं.

बात करें आपकी हॉबीज़ की तो गेम से हटकर क्या करना भाता है…?
खूब सोना … हां, ये सच है, मुझे सोना बहुत पसंद है और जब भी समय मिलता है, मैं जमकर सोता हूं.

फ्री टाइम में और क्या करना पसंद करते हैं जब सोते नहीं हैं तो ?
आई लव म्यूज़िक. म्यूज़िक का मैं बहुत शौक़ीन हूं. वो एक थेरेपी की तरह काम करता है… मन-मस्तिष्क को सुकून देता है… गीत हों, ग़ज़ल हों, पंजाबी सॉन्ग्स हों… सब सुनता हूं.

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घर से दूर जब होते हैं, तो क्या सबसे ज़्यादा मिस करते हैं?
विदेश में होता हूं, तो अपने देश को मिस करता हूं. अपनी मिट्टी… अपना मुल्क तो सभी को याद आता है…

दोबारा आपको रिंग में कब देख पाएंगे?
मार्च या अप्रैल तक. दूसरे टाइटल्स पर भी हमारी नज़र है कि वो भी हमारे देश के नाम हों, तो तैयारी चल रही है और उम्मीद है बहुत जल्द आप सब मुझे फिर से रिंग में देखेंगे.

शुक्रिया इतने बिज़ी शेड्यूल में भी हमें अपना समय देने के लिए.
थैंक यू.

– गीता शर्मा

Congratulations!पीवी सिंधु ने जीती चाइना ओपन सीरीज़ (PV Sindhu Wins China Open Series Title)

 

P V Sindhu

  • भारत की बैडमिंटन खिलाडी पीवी सिंधु (P V Sindhu) ऐसी दूसरी भारतीय खिलाडी बन गई जिन्होंने चाइना ओपन सीरीज अपने नाम की.
  • उन्होंने चीन की सुन यु को 21-11, 17 -21, 21-11 से हराकर टाइटल अपने नाम किया.
  • सिंधु ने कमाल का खेल दिखाया और उनकी फुर्ती के सामने सुन यु की एक न चली.
  • पहले हाफ में सिंधु खेल में पूरी तरह हावी रहीं, लेकिन दूसरे हाफ में सुन यु ने वापसी की और सिंधु को टफ फाइट दी, लेकिन आखिरी में सिंधु ने खेल को पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया.
  • सिंधु से पहले चाइना ओपन का ख़िताब सायना नेहवाल भी वर्ष २०१४ में अपने नाम कर चुकी हैं.
  • सिंधु को इस जीत के लिए

गेमिंग वर्ल्ड में बनाएं करियर (Make career in gaming world)

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बचपन से लेकर अब तक क्या आप भी वीडियो गेम, कंप्यूटर गेम आदि पर घंटों समय बिताते हैं, तो आप इस क्षेत्र में करियर बनाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं. नए-नए गेम्स बनाकर पैसे कमाने के साथ ही आप बच्चों के चेहरे पर मुस्कान भी बिखेर सकते हैं. इस क्षेत्र में कैसे बढ़ें आगे? आइए, जानते हैं.

शैक्षणिक योग्यता
इस फील्ड में करियर बनाने की चाह रखनेवालों के लिए ग्रैज्युएट होना ज़रूरी है. इसके बाद ही आप आगे की पढ़ाई के लिए आवेदन भर सकते हैं.

प्रकार
खेल की दुनिया में करियर बनाना चाह रहे हैं, तो सबसे पहले उसके बारे में अच्छी तरह जान लें, उसके बाद ही आगे बढ़ें. आइए, हम आपको बताते हैं कि किस तरह के काम आप कर सकते हैं.

गेम प्रोड्यूसर
इसके लिए डिज़ाइनिंग की जानकारी के अलावा, 3डी मॉड्यूलिंग और 2डी सॉफ्टवेयर का नॉलेज होना ज़रूरी है. वहीं ऑडियो इंजीनियर के लिए ल++, साउंड इंजीनियरिंग के अलावा अन्य भाषा की जानकारी भी ज़रूरी है.

क्या करते हैं?
वीडियो गेम प्रोड्यूसर का काम पूरे प्रोडक्शन के काम पर नज़र रखना होता है.

गेम डिज़ाइनर
गेम डिज़ाइनर बनने के लिए आपको लेटेस्ट टेक्नोलॉजी को अपना दोस्त बनाना होगा. दुनिया में कब क्या नया हो रहा है, ये आपको पता होना चाहिए. इसमें समय की चिंता किए बग़ैर आपको काम करते रहना होगा.

क्या करते हैं?
गेम डिज़ाइनिंग के साथ गेम को फनी बनाना, गेम राइटिंग और डायग्राम तैयार करना होता है. एक तरह से इनके ऊपर बहुत सारी ज़िम्मेदारियां होती हैं.

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एनिमेटर
एनिमेशन की दुनिया में मस्त रहनेवालों के लिए ये फील्ड बेहतरीन है. इसके लिए आपको 2डी कॉन्सेप्ट आर्ट के माध्यम से 3डी मॉडल्स और 2डी टेक्स्चर मैप तैयार करना आना चाहिए.

क्या करते हैं?
एनिमेटर आमतौर पर प्रोग्रामर और सीनियर आर्टिस्ट के साथ गेम के कैरेक्टर के हर पहलू पर काम करते हैं.

ऑडियो प्रोग्रामर
आवाज़ से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करनेवालों के लिए ये क्षेत्र बेहतरीन हैै. अलग-अलग गेम कैरेक्टर की तरह-तरह की आवाज़ें जनरेट करने की कला इस फील्ड में आपको आगे ले जाएगी. वैसे यह फील्ड कंप्यूटर इंजीनियर के लिए बेहतरीन माना जाता है. ऑडियो प्रोग्रामर को गेम में स्पेशल इफेक्ट के इस्तेमाल के लिए साउंड के बारे में अच्छी नॉलेज रखना ज़रूरी है.

क्या करते हैं?
इस तरह के प्रोग्रामर गेम के लिए ऑडियो तैयार करने के अलावा साउंड इंजीनियरिंग का भी काम करते हैं.

ग्राफिक प्रोग्रामर
गेम को डेवलप करने में ग्राफिक प्रोग्रामर टेक्निकल सपोर्ट देता है, लेकिन इसके लिए ग्राफिक प्रोग्रामर को ल, ल++, डायरेक्ट एक्स, ओपन जीएल, विंडो प्रोग्रामिंग, 3डी पैकेज आदि के बारे में मालूम होना चाहिए.

क्या करते हैं?
गेम का ग्राफिक डिज़ाइन करते हैं.

अट्रैक्टिव सैलरी पैकेज
देश में गेमिंग की दुनिया में 2डी और 3डी डेवलपमेंट प्रोफेशनल्स की मांग है. इस हाईटेक गेम वर्ल्ड में शुरुआती दौर में ही आपकी सैलरी 2 लाख सालाना हो सकती है.

रोज़गार
मॉडर्न ज़माने में इस क्षेत्र में कई स्कोप हैं. देश से लेकर विदेश तक आप इस फील्ड में करियर बना सकते हैं. कई गेमिंग कंपनियां भारत में अपना सेटअप तैयार करवा रही हैं, लेकिन अच्छे गेम डेवलपर्स की बहुत कमी है. ऐसे में आपके लिए ये बेहतरीन विकल्प हो सकता है.

प्रमुख संस्थान

  • नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिज़ाइन पाल्दी, अहमदाबाद
  • सेंटर फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन एंड टेक्नोलॉजी ऑफ इंडिया, चंडीगढ़
  • फॉरच्यून इंस्टिट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन, नई दिल्ली
  • महात्मा गांधी विश्‍वविद्यालय, केरल
  • माया एकेडमी ऑफ एडवांस सिनेमेटिक्स, मुंबई

इस फील्ड में कंप्यूटर के साथ-साथ मोबाइल गेमिंग का क्रेज़ भी बढ़ रहा है. ऐसे में आप घर बैठे मोबाइल गेम्स बनाकर भी बड़ी-बड़ी कंपनियों को अप्रोच कर सकते हैं. आप इसमें मन मुताबिक़ सैलरी की डिमांड भी कर सकते हैं.

नेम-फेम दोनों
ये एक ऐसा क्षेत्र है, जहां पैसे के साथ-साथ नाम भी होता है. आपको इंटरनेशनल मार्केट तक में जाना जाता है. आप चाहें, तो अपने नाम से गेम बनाकर देश-दुनिया में मशहूर हो सकते हैं.

– श्वेता सिंह