Ganapati Bappa

अंकिता लोखंडे ने आज यानी मंगलवार को गौरी गणपति की पूजा की, जिसमें वो महरष्ट्रियन स्टाइल में नज़र आ रही हैं. इस पूजा में अंकिता के साथ उनकी मां भी हैं.

अंकिता ने लाल रंग की साड़ी पहनी है और उनकी मां ने पीले रंग की साड़ी में नज़र आ रही हैं. दोनों बेहद प्यारी लग रही है. दोनों पूरी तरह से पारंपरिक महाराष्ट्रियन लिबास और शृंगार में नज़र आ रही हैं.

Ankita Lokhande
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गणेश चतुर्थी का महाराष्ट्र में विशेष महत्व होता है और अंकिता भी बप्पा की भक्त हैं. उन्होंने गणेशजी की स्थापना की है और आज गौरी की पूजा.

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अंकिता ने इसकी तस्वीरें और वीडीयोज़ भी सोशल मीडिया पर शेयर किए हैं. साथ ही उन्होंने अपने दोस्त सुशांत सिंह राजपूत के लिए भी प्रार्थना की.

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उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा था कि बप्पा आपका घर में स्वागत है. बप्पा तू सब जानता है. आप और मैं बहुत ही स्पेशल बॉन्ड शेयर करते हैं बप्पा.

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सभी एकसाथ आकर पूरे दिल से बप्पा से प्रार्थना करें. इसके बाद अंकिता ने हैशटैग में सुशांत का नाम लिखा है- गायत्री मंत्र SSR के लिए (#GayatriMantra4SSR)
सुशांत के लिए वैश्विक प्रार्थना (#globalprayers4ssr)

Ankita Lokhande Gauri Ganpati Puja

ग़ौरतलब है कि सुशांत सिंह को न्याय दिलाने की लड़ाई में अंकिता भी अहम भूमिका निभा रही हैं और वो खुलकर सुशांत के परिवार के साथ और उन लोगों के ख़िलाफ़ सामने आई हैं जिन्होंने सुशांत के साथ ग़लत किया. वो समय समय पर अपनी पोस्ट के ज़रिए सुशांत का समर्थन करती रहती हैं.

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पूजा में सबसे पहले गणेश जी का ही स्मरण किया जाता है इसलिए उन्हें प्रथम पूज्य कहा जाता है. भगवान शिव ने गणेश जी को ये आशीर्वाद दिया था कि जब भी पूजा होगी, तो सबसे पहले उनका ही स्मरण होगा, इसीलिए पूजा में सबसे पहले गणेश जी का ही स्मरण किया जाता है. भगवान गणेश के यूं तो अनेक नाम हैं, लेकिन श्री गणेश के 108 नामों की नामावली का जाप करने से विघ्नहर्ता सारे कष्ट हर लेते हैं और सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. आप भी श्री गणेश के 108 नाम जरूर जपें, आपकी मनोकामना जरूर पूरी होगी.

108 Names Of Lord Ganesha

श्री गणेश के 108 नाम और उनका अर्थ
1) बालगणपति – सबसे प्रिय बालक
2) भालचन्द्र – जिसके मस्तक पर चंद्रमा हो
3) बुद्धिनाथ – बुद्धि के भगवान
4) धूम्रवर्ण – धुंए को उड़ाने वाले
5) एकाक्षर – एकल अक्षर
6) एकदन्त – एक दांत वाले
7) गजकर्ण – हाथी की तरह आंखों वाले
8) गजानन – हाथी के मुख वाले भगवान
9) गजवक्र – हाथी की सूंड वाले
10) गजवक्त्र – हाथी की तरह मुंह है
11) गणाध्यक्ष – सभी जनों के मालिक
12) गणपति – सभी गणों के मालिक
13) गौरीसुत – माता गौरी के बेटे
14) लम्बकर्ण – बड़े कान वाले देव
15) लम्बोदर – बड़े पेट वाले
16) महाबल – अत्यधिक बलशाली
17) महागणपति – देवादिदेव
18) महेश्वर – सारे ब्रह्मांड के भगवान
19) मंगलमूर्ति – सभी शुभ कार्यों के देव
20) मूषकवाहन – जिनका सारथी मूषक है
21) निदीश्वरम – धन और निधि के दाता
22) प्रथमेश्वर – सब के बीच प्रथम आने वाले
23) शूपकर्ण – बड़े कान वाले देव
24) शुभम – सभी शुभ कार्यों के प्रभु
25) सिद्धिदाता – इच्छाओं और अवसरों के स्वामी
26) सिद्दिविनायक – सफलता के स्वामी
27) सुरेश्वरम – देवों के देव
28) वक्रतुण्ड – घुमावदार सूंड वाले
29) अखूरथ – जिसका सारथी मूषक है
30) अलम्पता – अनन्त देव
31) अमित – अतुलनीय प्रभु
32) अनन्तचिदरुपम – अनंत और व्यक्ति चेतना वाले
33) अवनीश – पूरे विश्व के प्रभु
34) अविघ्न – बाधाएं हरने वाले
35) भीम – विशाल
36) भूपति – धरती के मालिक
37) भुवनपति – देवों के देव
38) बुद्धिप्रिय – ज्ञान के दाता
39) बुद्धिविधाता – बुद्धि के मालिक
40) चतुर्भुज – चार भुजाओं वाले
41) देवादेव – सभी भगवान में सर्वोपरि
42) देवांतकनाशकारी – बुराइयों और असुरों के विनाशक
43) देवव्रत – सबकी तपस्या स्वीकार करने वाले
44) देवेन्द्राशिक – सभी देवताओं की रक्षा करने वाले
45) धार्मिक – दान देने वाले
46) दूर्जा – अपराजित देव
47) द्वैमातुर – दो माताओं वाले
48) एकदंष्ट्र – एक दांत वाले
49) ईशानपुत्र – भगवान शिव के बेटे
50) गदाधर – जिनका हथियार गदा है
51) गणाध्यक्षिण – सभी पिंडों के नेता
52) गुणिन – सभी गुणों के ज्ञानी
53) हरिद्र – स्वर्ण के रंग वाले
54) हेरम्ब – मां का प्रिय पुत्र
55) कपिल – पीले भूरे रंग वाले
56) कवीश – कवियों के स्वामी
57) कीर्ति – यश के स्वामी
58) कृपाकर – कृपा करने वाले
59) कृष्णपिंगाश – पीली भूरी आंख वाले
60) क्षेमंकरी – माफी प्रदान करने वाला
61) क्षिप्रा – आराधना के योग्य
62) मनोमय – दिल जीतने वाले
63) मृत्युंजय – मौत को हराने वाले
64) मूढ़ाकरम – जिनमें खुशी का वास होता है
65) मुक्तिदायी – शाश्वत आनंद के दाता
66) नादप्रतिष्ठित – जिन्हें संगीत से प्यार हो
67) नमस्थेतु – सभी बुराइयों पर विजय प्राप्त करने वाले
68) नन्दन – भगवान शिव के पुत्र
69) सिद्धांथ – सफलता और उपलब्धियों के गुरु
70) पीताम्बर – पीले वस्त्र धारण करने वाले
71) प्रमोद – आनंद
72) पुरुष – अद्भुत व्यक्तित्व
73) रक्त – लाल रंग के शरीर वाले
74) रुद्रप्रिय – भगवान शिव के चहेते
75) सर्वदेवात्मन – सभी स्वर्गीय प्रसाद के स्वीकर्ता
76) सर्वसिद्धांत – कौशल और बुद्धि के दाता
77) सर्वात्मन – ब्रह्मांड की रक्षा करने वाले
78) ओमकार – ओम के आकार वाले
79) शशिवर्णम – जिनका रंग चंद्रमा को भाता हो
80) शुभगुणकानन – जो सभी गुणों के गुरु हैं
81) श्वेता – जो सफेद रंग के रूप में शुद्ध हैं
82) सिद्धिप्रिय – इच्छापूर्ति वाले
83) स्कन्दपूर्वज – भगवान कार्तिकेय के भाई
84) सुमुख – शुभ मुख वाले
85) स्वरूप – सौंदर्य के प्रेमी
86) तरुण – जिनकी कोई आयु न हो
87) उद्दण्ड – शरारती
88) उमापुत्र – पार्वती के पुत्र
89) वरगणपति – अवसरों के स्वामी
90) वरप्रद – इच्छाओं और अवसरों के अनुदाता
91) वरदविनायक – सफलता के स्वामी
92) वीरगणपति – वीर प्रभु
93) विद्यावारिधि – बुद्धि के देव
94) विघ्नहर – बाधाओं को दूर करने वाले
95) विघ्नहत्र्ता – विघ्न हरने वाले
96) विघ्नविनाशन – बाधाओं का अंत करने वाले
97) विघ्नराज – सभी बाधाओं के मालिक
98) विघ्नराजेन्द्र – सभी बाधाओं के भगवान
99) विघ्नविनाशाय – बाधाओं का नाश करने वाले
100) विघ्नेश्वर – बाधाओं के हरने वाले भगवान
101) विकट – अत्यंत विशाल
102) विनायक – सब के भगवान
103) विश्वमुख – ब्रह्मांड के गुरु
104) विश्वराजा – संसार के स्वामी
105) यज्ञकाय – सभी बलि को स्वीकार करने वाले
106) यशस्कर – प्रसिद्धि और भाग्य के स्वामी
107) यशस्विन – सबसे प्यारे और लोकप्रिय देव
108) योगाधिप – ध्यान के प्रभु

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गणपति उत्सव के दौरान महाराष्ट्र का कोना-कोना भगवान श्री गणेश की भक्ति में सराबोर रहता है. इस दौरान बप्पा बड़े-बड़े पंडालों से लेकर लोगों के घरों में विराजमान रहते हैं. महाराष्ट्र दर्शन का यह सबसे अच्छा समय होता है. आप भी अगर भगवान गणेश की भक्ति में लीन हो जाना चाहते हैं, तो चलिए, महाराष्ट्र के अष्टविनायक की यात्रा पर.

श्री मयूरेश्‍वर
ये महाराष्ट्र के पुणे जिले से 80 किलोमीटर दूर मोरगांव में है. मयूरेश्‍वर मंदिर के चारों कोनों में मीनारें हैं और लंबे पत्थरों की दीवारें हैं. इस मंदिर में चार द्वार हैं. इन द्वारों का अपना महत्व है. ऐसी मान्यता है कि ये चारों द्वार चारों युगों का वर्णन करते हैं. ये क्रमशः सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग के प्रतीक हैं. मंदिर के द्वार पर शिवजी के वाहन नंदी बैल की मूर्ति स्थापित है. इसका मुंह भगवान गणेश की मूर्ति की ओर है. नंदी और मूषक दोनों ही मंदिर के रक्षक के रूप में तैनात हैं. मंदिर में गणेशजी बैठी मुद्रा में विराजमान हैं तथा उनकी सूंड़ बाएं हाथ की ओर है. श्री मयूरेश्‍वर की चार भुजाएं एवं तीन नेत्र हैं.

क्या है मान्यता?
मान्यताओं के अनुसार मयूरेश्‍वर के मंदिर में भगवान गणेश द्वारा सिंधुरासुर नामक एक राक्षस का वध किया गया था. गणेशजी ने मोर पर सवार होकर सिंधुरासुर से युद्ध किया था. इसी कारण यहां स्थित गणेशजी को मयूरेश्‍वर कहा जाता है.

सिद्धिविनायक
अष्टविनायक में दूसरे गणेशजी हैं सिद्धिविनायक. यह मंदिर पुणे से क़रीब 200 किलोमीटर दूर अहमदनगर में है. यह मंदिर लगभग 200 साल पुराना है. पहाड़ की चोटी पर बने इस मंदिर का मुख्य द्वार उत्तर दिशा की ओर है. मंदिर की परिक्रमा के लिए पहाड़ की यात्रा करनी होती है. यहां गणेशजी की मूर्ति 3 फीट ऊंची और ढाई फीट चौड़ी है.

क्या है मान्यता?
इस मंदिर को सिद्ध स्थान माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु ने सिद्धियां हासिल की थीं.

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बल्लालेश्‍वर
अष्टविनायक में अगला मंदिर है बल्लालेश्‍वर मंदिर. यह मुंबई-पुणे हाइवे पर रायगढ़ जिले के पाली गांव में स्थित है. इस मंदिर का नाम भगवान गणेशजी के भक्त बल्लाल के नाम पर पड़ा है.

क्या है मान्यता?
ऐसी मान्यता है कि सालों पहले बल्लाल नाम का एक लड़का, जो गणेशजी का परम भक्त था, एक दिन उसने पाली गांव में विशेष पूजा का आयोजन किया. कई दिनों तक लगातार पूजा चलती रही, जिससे वहां बैठे बच्चे अपने घर नहीं गए. ऐसे में उनके माता-पिता ने ग़ुस्से में आकर बल्लाल और भगवान गणेश की मूर्ति को जंगल में फेंक दिया. ऐसी हालत में भी बल्लाल गणेशजी का मंत्र जाप करना नहीं भूला. इससे गणेशजी उसे दर्शन देते हैं और उसके कहने पर सदा के लिए यहीं रुक जाते हैं.

श्री वरदविनायक
अष्टविनायक में चौथे गणेशजी हैं श्री वरदविनायक. यह मंदिर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के कोल्हापुर क्षेत्र में स्थित है. यहां एक सुंदर पर्वतीय गांव है महाड़. इसी गांव में श्री वरदविनायक मंदिर है. इस मंदिर में नंददीप नाम का एक दीपक है, जो कई वर्षों से जल रहा है.

क्या है मान्यता?
लोगों की ऐसी मान्यता है कि यहां जो भक्त आता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है.

चिंतामणि
अष्टविनायक में पांचवें स्थान पर हैं चिंतामणि गणपति. यह मंदिर पुणे के हवेली क्षेत्र में स्थित है. यह पुणे से 25 किलोमीटर की दूरी पर है. भीम, मुला और मुथा तीनों नदियों का संगम आपको यहीं देखने को मिलेगा. यहां पर आपको अपार शांति की अनुभूति होगी.

क्या है मान्यता?
ऐसी मान्यता है कि स्वयं भगवान ब्रह्मा ने अपने विचलित मन को वश में करने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी. यदि किसी भक्त का मन बहुत विचलित है और जीवन में दुख ही दुख प्राप्त हो रहे हैं, तो इस मंदिर में आने पर सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं.

श्री गिरजात्मज
अष्टविनायक में अगले गणपति हैं श्री गिरजात्मज. गिरजात्मज का अर्थ है गिरिजा यानी माता पार्वती के पुत्र गणेश. यह मंदिर पुणे-नासिक राजमार्ग पर पुणे से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. बौद्ध गुफाओं के बीच यह मंदिर है. इन गुफाओं को गणेश गुफा भी कहा जाता है. मंदिर में जाने के लिए आपको क़रीब 300 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं.

क्या है मान्यता?
लोगों की ऐसी मान्यता है कि यहां पर आने मात्र से मन में चल रही उथल-पुथल और रिश्तों की कटुता ख़त्म हो जाती है. मन शांत हो जाता है.

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विघ्नेश्‍वर
अष्टविनायक में सातवें स्थान पर हैं विघ्नेश्‍वर गणपति. यह मंदिर पुणे से 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह कुकड़ी नदी के किनारे पर बना है. मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा में है. मंदिर की कलाकृति देखने लायक है. दर्शन के बाद आप मंदिर के बड़े और भव्य परिसर का आनंद लेना न भूलें.

क्या है मान्यता?
एक प्रचलित कथा के अनुसार विघ्नासुर नामक एक असुर था, जो संतों को प्रताड़ित करता था. भगवान गणेश ने इसी क्षेत्र में उस असुर का वध किया और सभी को कष्टों से मुक्ति दिलाई. तभी से यह मंदिर विघ्नेश्‍वर, विघ्नहर्ता और विघ्नहार के रूप में जाना जाता है. ऐसा माना जाता है कि चाहे कितने भी दुख क्यों न हों, विघ्नेश्‍वर के दर्शन मात्र से मन को शांति मिलती है.

महागणपति
अष्टविनायक मंदिर के आठवें गणेशजी हैं महागणपति. यह मंदिर पुणे के रंजन गांव में स्थित है. यह पुणे से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मंदिर का प्रवेशद्वार पूर्व दिशा की ओर है, जो बहुत विशाल और सुन्दर है. यहां की गणेशजी की प्रतिमा अद्भुत है. इसे माहोतक नाम से भी जाना जाता है.

क्या है मान्यता?
प्रचलित मान्यता के अनुसार मंदिर की मूल मूर्ति तहखाने में छुपी हुई है. विदेशियों के आक्रमण के समय मूर्ति को पुजारियों ने तहखाने में छुपा दिया था.

अष्टविनायक का अर्थ है आठ गणपति. ये आठ प्राचीन मंदिर भगवान गणेश के आठ शक्तिपीठ भी कहलाते हैं, जो महाराष्ट्र में स्थित हैं. इन मंदिरों का पौराणिक महत्व और इतिहास है. इनमें विराजित भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्वयंभू मानी जाती हैं यानी ये स्वयं प्रकट हुई हैं.

– श्वेता सिंह 

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