Gardening

लॉकडाउन के दौरान सभी सेलेब्स अपनी रोज़मर्रा की एक्टिविटीज़ अपने फैन्स के साथ शेयर करते रहते हैं. इसी बीच टीवी के पॉप्युलर शो ये है मोहब्बतें की इशिता भल्ला यानी दिव्यांका त्रिपाठी भी अपने पति के साथ रोज़ सोशल मीडिया पर कुछ न कुछ शेयर करती रहती हैं. कभी खाना बनाते, तो कभी साफ़ सफाई करते दिव्यांका और विवेक के फ़ोटोज़ और वीडिओज़ उनके फैन्स काफ़ी पसंद कर रहे हैं. इसी बीच दिव्यांका ने गार्डनिंग करती कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं. आप भी देखें ये तस्वीरें.

Divyanka Tripathi Gardening At Home With Husband Vivek Dahiya

दिव्यांका और विवेक ने ये पौधे कुछ दिनों पहले ही नर्सरी से लेकर रखे हैं. फोटो शेयर करते हुए दिव्यांका ने लिखा कि अपनी पसंद के पौधे चुनना, उन्हें घर लाकर उनकी जरूरत के मुताबिक खाद-पानी देकर उन्हें संजोकर लगाना एक बड़ा टास्क है. फ़ोटोज़ से साफ़ पता चलता है कि दोनों को ही गार्डनिंग का कितना शौक है.

Divyanka Tripathi Gardening At Home With Husband Vivek Dahiya
Divyanka Tripathi Gardening At Home

आपको जानकर हैरानी होगी कि विवेक दहिया को गार्डनिंग के साथ साथ पौधों के बारे में भी काफ़ी अच्छी जानकारी है. विवेक ने बताया कि हर पौधे की अपनी ज़रुरत होती है. किसी को पानी कम लगता है, तो किसी को धूप काम, ऐसे में आपको उन्हें उनकी ज़रूरत के अनुसार रखना और संभालना पड़ता है.

Divyanka TripathiWith Husband Vivek Dahiya cute
Divyanka Tripathi cute
Divyanka Tripathi With Husband Vivek Dahiya
Divyanka Tripathi With Husband Vivek Dahiya

वाकई पौधों की देखभाल करना और उन्हें संभालना बहुत हेल्दी है और यह एक बहुत अच्छा स्ट्रेस बस्टर भी है. गार्डनिंग आपको क्रिएटिव बनाती है. गार्डनिंग करते हुए दोनों साथ में काफ़ी अच्छा और क्वालिटी समय बिता रहे हैं. सभी कपल्स को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए कि किस तरह दोनों एक साथ प्रकृति के नज़दीक क्वालिटी समय बिताएं.

– अनीता सिंह

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Vastu Tips For Gardening
पेड-पौधे न स़िर्फ घर की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि वातावरण को भी स्वच्छ और तरोताजा बनाते हैं. मगर हर पौधे का लगाने की तय जगह होती है. वास्तु के अनुसार सही जगह पर पौधा लगाना लाभदायक है. शुभप्रप्ति के लिए किस दिशा में कौन सा पौधा लगाना चाहिए, बतारही है वास्तु व फेंगशुई कंसल्टेंट दीप्ति एच. अरोरा.

1. मकान की उत्तर या पश्‍चिम दिशा में गार्डन बनवाना बहुत शुभ होता है. वास्तु के अनुसार ये दोनों दिशाएं गार्डन के लिए उपयुक्त होती हैं. आप इस दिशा में निश्‍चित तौर पर गार्डन बनावा सकती हैं.
2. अगर तुलसी का पौधा लगाना चाहती हैं, तो इसे उत्तर, पूर्व या उत्तर पूर्व दिशा में लगाएं. गमले में पौधा लगा रही है, तो गमले को इस दिशा में रखें.
3. बरगद या पीपल का पेड घर के आसपास लगाने की भूल न करें. इनका मंदिर के पास होना शुभ फलदायी होता है, घर के करीब नहीं.
4. अगर आपके घर का आंगन ठीक बीचोंबीच है, तो आंगन में कोई भी पेड या पौधा लगाने से बचें. वास्तु के अनुसार घर के बीचोंबीच बने आंगन में पौधा नहीं लगाना चाहिए.
5 . इस बात का ध्यान रखें कि मुख्य द्वार के ठीक सामने कोई बड़ा पेड़ या पौधा न हो. ऐसे पौधे अवरोध का काम करते हैं. इससे सकारात्मक ऊर्जा द्वार पर आकर वापस लौट जाती है.
6. ऊंचे और घने पेड मकान के दक्षिण या पश्‍चिम की ओर लगाएं. ऐसा करना शुभ फलदायी होता है.
7. छोटे कद के पौधों के लिए पूर्व या उत्तर दिशा का चुनाव करें. भूल से भी इन्हें उत्तर-पूर्व दिशा में न लगाएं. ऐसा करना अशुभ हो सकते है.

9. शुभफल प्राप्ति के लिए लताओं वाले पौधे मुख्य द्वार पर लगाएं. लेकिन इन्हें बाउंड्री वॉल पर न लगाएं.

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8. कांटेवाले पौधे घर में लगाने की भूल न करें. ऐसे पौधों से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में अशांति फैलती है.
10. आम, केला और जामुन के पेड़ आंगन में या घर से बिल्कुल सटाकर न लगाएं.
11. फलों में अनार का पौधा और नारियल का पेड आंगन में लगाया जा सकता है. ये बहुत शुभ माने जाते हैं.
12. फूलों में गुलाब, चमेली, चंपा आदि को अपने घर में जगह दे सकती हैं. ये पौधे सौभाग्यवर्द्धक होते हैं.
13. ऐसे पौधे, जिनमे से दूध निकलता है, उन्हें घर पर रखने की भूल न करें. इससे सेहत पर बुरा असर पड़ता है.

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हमें अपने देश पर नाज़ है, लेकिन क्या आपने कभी कुछ ऐसा किया है कि देश भी आप पर गर्व कर सके? यदि नहीं, तो इस स्वतंत्रता दिवस पर देश के भविष्य यानी अपने बच्चों को सिखाइए कुछ ऐसी आदतें, जिनसे वो उन्मुक्त और स्वच्छ वातावरण में आज़ादी से रह सकें. बच्चों को अच्छा व सच्चा सिटिज़न बनाने के लिए कौन-सी आदतें सिखानी हैं ज़रूरी? आइए जानते हैं.

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आमतौर पर 15 अगस्त और 26 जनवरी की छुट्टी हम सबके लिए एक छुट्टी के अलावा और कुछ नहीं होती. इस दिन हम पूरे परिवार के साथ बाहर घूमने जाने से लेकर और भी कई तरह के प्लान बनाते हैं. ऐसा नहीं है कि ऐसी प्लानिंग करके हम कुछ ग़लत करते हैं, लेकिन ज़रा सोचिए, देश के लिए अहम् इस दिन यदि आप अपने बच्चे को देशहित में कुछ सिखाएं तो कितना अच्छा होगा. आज तो आप और आपके बच्चे आज़ाद हैं, लेकिन जिस रफ़्तार से हमारे प्राकृतिक संसाधन ख़त्म हो रहे हैं, कहीं ऐसा न हो कि एक दिन आपके बच्चों को पानी, बिजली जैसी बुनियादी चीज़ों का भी मोहताज़ होना पड़े. अतः देश के लिए महत्वपूर्ण इस दिन आप अपने बच्चे को भी कुछ ज़रूरी चीज़ें सिखाना न भूलें.

पानी बचाना

ये एक आम समस्या है. गांव हो या शहर हर जगह पानी की समस्या से लोगों को दो-चार होना पड़ता है. बाथरूम में टैप (नल) खोलने के बाद आप भी अगर किचन में कोई काम कर रही हैं और पानी बह रहा है, तो आपकी इस आदत को बच्चा भी फॉलो करेगा. अतः सबसे पहले अपनी आदत बदलिए और बच्चे को पानी का महत्व समझाने के साथ ही उसे पानी बचाने के लिए कहिए. ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण हर साल मॉनसून का स्तर गिरता जा रहा है, जिससे पानी की कमी होती जा रही है. ये बुनियादी ज़रूरत है, अतः इसका संरक्षण करना आपकी ज़िम्मेदारी बनती है. आपका जीवन तो किसी तरह बीत जाएगा, लेकिन आने वाली पीढ़ी को परेशानी न हो, इसलिए आज से ही अपने बच्चे को इस ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाएं और पानी की बचत करना सिखाएं, जैसे- खुले टैप को बंद करना, वॉटर बॉटल के पानी को नहीं फेंकना, ग्लास में पानी नहीं छोड़ना आदि.

इलेक्ट्रिसिटी बचाना

आज भी हमारे देश में बहुत से इलाके ऐसे हैं, जहां लोग अंधेरे में ही रहते हैं. कई जगह तो लाइट के नाम पर महज़ 3-4 घंटे ही बिजली आती है. ऐसे में घर के हर कमरे में बिना मतलब की लाइट जलाए रखना, टीवी देखने के साथ कंप्यूटर के इस्तेमाल की आदत बच्चों को भी लापरवाह बना देती है. अपने बच्चे के भविष्य की चिंता करते हुए उसे उसकी बेसिक ड्यूटी बताएं, जैसे- अगर बच्चा लाइट जलाकर ही सोने जा रहा है या किसी कमरे का चलता हुआ फैन छोड़कर दोस्त के बुलाने पर बाहर खेलने जा रहा है, तो उसे समझाएं कि पहले लाइट/फैन का स्विच ऑफ करे. उसे इलेक्ट्रिसिटी का महत्व बताएं. आज के दिन से उसे ऐसा न करने की बात सिखाएं. इससे बच्चे को भी अच्छा महसूस होगा कि इस ख़ास दिन से वो कुछ नया करेगा.

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फ्यूल बचाना

फ्यूल से मतलब है वेहिकल ऑयल और गैस. वैसे तो बच्चों का इससे पाला नहीं पड़ता, लेकिन जैसे-जैसे वो बड़े होते हैं उनका संपर्क इससे होता है. ऐसे में बचपन से ही उन्हें फ्यूल सेविंग के बारे में बताएं. साथ ही ख़ुद आप भी ऐसा करें. हो सके तो बच्चे को वो विज्ञापन ज़रूर दिखाएं, जिसमें एक बच्चा सिग्नल पर रुकी कार में अपने पापा के साथ बैठा है और अचानक कहता है कि बड़ा होकर वो साइकिल रिपेयर की दुकान खोलेगा. पिता के पूछने पर बच्चा कहता है कि वो ऐसा इसलिए करेगा, क्योंकि जब वो बड़ा होगा तब तक तो फ्यूल बचेगा ही नहीं. बच्चे की बात से प्रभावित होकर पिता अपनी कार का इंजन बंद कर देता है और फिर सिग्नल ग्रीन होने पर कार स्टार्ट करता है. ये विज्ञापन बहुत प्रभावी है.

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गार्डनिंग

गार्डनिंग यानी अपने आसपास ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाना. इमारतें और सड़क बनाने के चक्कर में पेड़ों की कटाई तेज़ी से हो रही है. ऐसे में एक दिन ऐसा आएगा जब शायद पेड़ बचे ही नहीं. ये आप भी जानते हैं कि पेड़ों से हमें ऑक्सीज़न मिलता है. अतः बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए उन्हें पेड़ों की हिफाज़त और नए पौधे लगाने को कहें, शुरुआत घर के गमलों से करें. चाहें तो सोसाइटी के कुछ लोगों के साथ मिलकर आप ऐसा प्लान बनाएं कि 15 अगस्त के ख़ास दिन सभी बच्चे एक-एक पौधा लगाएं. ख़ुद लगाए पौधे से बच्चों को प्यार होगा और वो उसका ज़्यादा ध्यान रखेंगे. इतना ही नहीं, धीरे-धीरे उनका रुझान इसके प्रति बढ़ेगा. बच्चों में इस आदत को विकसित करने के लिए आप उन्हें बचपन से ही नर्सरी (पौधों की) में ले जाएं. उन्हें इस विषय पर बनी फिल्में दिखाएं. हरियाली व पेड़ों का महत्व बताएं. उन्हें समझाएं कि अगर पेड़ नहीं होंगे, तो जानवर बेचारे कहां रहेंगे, चिड़िया घोंसला कहां बनाएगी? और जब जानवर और पक्षी नहीं रहेंगे, तो आगे की पीढ़ी इन्हें कैसे देख पाएगी. आपकी इन भावनात्मक बातों का बच्चे पर असर होगा और उसे अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास होगा.

 

गार्डनिंग से बच्चों को जोड़ने के लिए सबसे पहले उनकी छोटे-छोटे पौधों से दोस्ती कराएं. उनसे कहें कि ये पौधे ही उन्हें ऑक्सीज़न देते हैं, जिससे उनकी ज़िंदगी चलती है और हम लोग ही पौधों को मार (काट) देते हैं. इससे बच्चा भावनात्मक रूप से पौधों से जुड़ेगा. वो उन्हें अपना दोस्त समझेगा और फिर किसी को भी उन्हें नुक़सान नहीं पहुंचाने देगा. बच्चे के हर जन्मदिन पर उसे एक पौधा लगाने को कहें. इससे पौधे और पर्यावरण के प्रति बच्चे का लगाव बढ़ेगा.

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सफ़ाई रखना

जिस तरह आप पूरा दिन घर की सफ़ाई में लगी रहती हैं, उसी तरह बच्चे को भी सफ़ाई की आदत डालें. जब भी वो कागज़ का कोई टुकड़ा या चॉकलेट का रैपर घर में इधर-उधर फेंके, तो उसे रोकें और डस्टबिन में डालने को कहें. घर में आपके इस तरह से रोकने पर बच्चा आगे से घर के बाहर भी ऐसी हरक़त करने से पहले कई बार सोचेगा. उसे प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के बारे में बताएं. इस तरह की न्यूज़ भी दिखाएं जिसमें हमारे सेलिब्रिटीज़ घर के आसपास की सफ़ाई करते हैं. इससे बच्चे को अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास होगा. धीरे-धीरे ही सही, वो भी स्वच्छता का ध्यान रखेगा.

मदद करना

बदलते ज़माने के साथ लोग स्वार्थी होते जा रहे हैं. उदाहरण के लिए, आप अपने आपको ही देख लीजिए. किसी रिश्तेदार के अचानक बीमार होने पर जब आपको वहां जाना पड़ता है, तो आपका मूड बिगड़ जाता है. आप अपने दैनिक कार्य की लिस्ट से एक क़दम भी इधर-उधर जाना पसंद नहीं करते. आपकी यही आदत आपके बच्चे में भी आने लगती है. अपने लाड़ले/लाड़ली को समाज में रहते हुए ये बात ज़रूर सिखाएं कि वो ज़रूरतमंद लोगों की मदद करे, जैसे- अगर बच्चा खेल रहा है और आप भी अपनी सहेलियों के साथ नीचे सोसाइटी के ग्राउंड में हैं और सामने से कोई बूढ़ा पुरुष/बूढ़ी महिला हाथ में सामान से भरा बैग लिए चला आ रहा है, तो झट से आप उसकी मदद करने पहुंचें. आपको देखकर अगली बार से जब आप उस जगह नहीं रहेंगी, तब बच्चा भी झट से उसकी मदद के लिए दौड़ेगा.

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अपनों से जुड़ना

आमतौर पर शहरी परिवेश में पलने वाले बच्चे साल के 365 दिन अपने मम्मी-पापा के साथ ही बिताते हैं. ऐसे में अपने रिश्तेदारों से जुड़ना तो दूर वो उनके नाम भी नहीं जानते. ये आप दोनों के लिए गंभीर समस्या है. ये आपकी ज़िम्मेदारी बनती है कि बच्चों को रिश्तों के सही मायने बताएं. मामा-मामी, चाचा-चाची, दादा-दादी आदि से बच्चे को जोड़े रखें. कभी आप उनके घर तो कभी उन्हें अपने घर रहने के लिए बुलाएं. इससे बच्चे की बॉन्डिंग आपके अलावा घर के दूसरे सदस्यों के साथ भी बढ़ेगी और वो सामाजिक बनेगा, दूसरों के लिए भी कुछ करने की सोचेगा.

 

अचानक किसी रिश्तेदार का आपके घर आना और आपका मुंह बन जाना… इससे बच्चा भी बाद में वैसा ही व्यवहार करेगा, वो भी किसी मेहमान के आने से दुखी हो जाएगा और किसी से अपनी चीज़ें शेयर नहीं करना चाहेगा. अतः ऐसी आदत से बचें.
सड़क पर चलते समय अगर कोई भिखारी पानी के लिए कह रहा है, तो उसे पानी पिलाना, अंधे को सड़क पार करवाना, दादाजी/दादीजी की मदद करना जैसी बातें सिखाएं.
15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन बच्चों को सोसाइटी के फ्लैग होस्टिंग में ज़रूर ले जाएं. इससे उनमें देश के प्रति सम्मान की भावना जागेगी.
– श्‍वेता सिंह