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शायरी: निदा फ़ाज़ली की उम्दा ग़ज़लें (Shayari: Nida Fazli Special)

Shayari, Nida Fazli Special
Shayari, Nida Fazli Special
ग़ज़ल 1

गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया

होते ही सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया

इक इश्क़ नाम का जो परिंदा ख़ला में था

उतरा जो शहर में तो दुकानों में बट गया

पहले तलाशा खेत फिर दरिया की खोज की

बाक़ी का वक़्त गेहूँ के दानों में बट गया

जब तक था आसमान में सूरज सभी का था

फिर यूँ हुआ वो चंद मकानों में बट गया

हैं ताक में शिकारी निशाना हैं बस्तियाँ

आलम तमाम चंद मचानों में बट गया

ख़बरों ने की मुसव्वरी ख़बरें ग़ज़ल बनीं

ज़िंदा लहू तो तीर कमानों में बट गया

ग़ज़ल 2

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता

कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता

तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो

जहाँ उमीद हो इस की वहाँ नहीं मिलता

कहाँ चराग़ जलाएँ कहाँ गुलाब रखें

छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता

ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैं

ज़बाँ मिली है मगर हम-ज़बाँ नहीं मिलता

चराग़ जलते हैं बीनाई बुझने लगती है

ख़ुद अपने घर में ही घर का निशाँ नहीं मिलता

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मैं शायर तो नहीं… (Hindi Shayari: Main Shayar To Nahi…)

 

mansoon (1)

 अहमद फ़राज़ की ग़ज़ल

दिल को अब यूँ तेरी हर एक अदा लगती है

दिल को अब यूँ तेरी हर एक अदा लगती है
जिस तरह नशे की हालत में हवा लगती है

रतजगे खवाब परेशाँ से कहीं बेहतर हैं
लरज़ उठता हूँ अगर आँख ज़रा लगती है

ऐ, रगे-जाँ के मकीं तू भी कभी गौर से सुन,
दिल की धडकन तेरे कदमों की सदा लगती है

गो दुखी दिल को हमने बचाया फिर भी
जिस जगह जखम हो वाँ चोट सदा लगती है

शाखे-उममीद पे खिलते हैं तलब के गुनचे
या किसी शोख के हाथों में हिना लगती है

तेरा कहना कि हमें रौनके महफिल में “फराज़”
गो तसलली है मगर बात खुदा लगती है

मैं शायर तो नहीं… (Hindi Shayari: Main Shayer To Nahi…)

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बशीर बद्र की उम्दा ग़ज़ल 

कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बंधा हुआ,
वो ग़ज़ल का लहजा नया-नया, न कहा हुआ न सुना हुआ
जिसे ले गई अभी हवा, वे वरक़ था दिल की किताब का,
कहीँ आँसुओं से मिटा हुआ, कहीं, आँसुओं से लिखा हुआ
कई मील रेत को काटकर, कोई मौज फूल खिला गई,
कोई पेड़ प्यास से मर रहा है, नदी के पास खड़ा हुआ
मुझे हादिसों ने सजा-सजा के बहुत हसीन बना दिया,
मिरा दिल भी जैसे दुल्हन का हाथ हो मेंहदियों से रचा हुआ
वही शहर है वही रास्ते, वही घर है और वही लान भी,
मगर इस दरीचे से पूछना, वो दरख़्त अनार का क्या हुआ
वही ख़त के जिसपे जगह-जगह, दो महकते होंठों के चाँद थे,
किसी भूले बिसरे से ताक़ पर तहे-गर्द होगा दबा हुआ

मैं शायर तो नहीं… (Hindi Shayari: Main Shayer To Nahi.)

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निदा फ़ाज़ली की उम्दा ग़ज़ल 
बेसन की सोंधी रोटी पर 
खट्टी चटनी जैसी मां 
याद आती है चौका-बासन 
चिमटा फुकनी जैसी मां 
बाँस की खुर्री खाट के ऊपर 
हर आहट पर कान धरे 
आधी सोई आधी जागी 
थकी दोपहरी जैसी मां 
चिड़ियों के चहकार में गूंजे
राधा-मोहन अली-अली 
मुर्गे की आवाज़ से खुलती 
घर की कुंडी जैसी मां 
बीवी, बेटी, बहन, पड़ोसन 
थोड़ी-थोड़ी-सी सब में 
दिन भर इक रस्सी के ऊपर 
चलती नटनी जैसी मां 
बाँट के अपना चेहरा, माथा, 
आँखें जाने कहाँ गई 
फटे पुराने इक अलबम में 
चंचल लड़की जैसी मां…

बर्थ डे स्पेशल: आवाज़ ही पहचान है… देखें भूपेंद्र सिंह के 5 गानें (Happy Birthday Bhupinder Singh)

Bhupinder Singh

Bhupinder Singhएक अलग किस्म की खनकती आवाज और गाने का अनोखा अंदाज़, यही पहचान है गायक भूपेंद्र सिंह की. उन्होंने गाया भी है- मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहे… यह गीत उन पर बिल्कुल फिट बैठता है. वह बेहतरीन गज़लों और अर्थपूर्ण गीतों के लिए जाने जाते हैं.
किसी नज़र को तेरा इंतजार आज भी है…, होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा… , दिल ढूंढ़ता है फिर वही…, एक अकेला इस शहर में…, जैसे नज़्मों को भला कौन भूल सकता है. भूपेंद्र के गाए गीतों ने संगीत प्रेमियों के दिल पर एक अलग छाप छोड़ी है. 77 साल के हो गए हैं भूपेंद्र जी.

मेरी सहेली (Meri Saheli) की ओर से आवाज़ के इस जादूगर को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं.

भूपेंद्र का जन्म 6 फरवरी, 1940 को अमृतसर के पंजाब में हुआ था. उनके पिता ने ही उन्हें संगीत की शिक्षा दी. करियर की शुरुआत में भूपेंद्र ने ऑल इंडिया रेडियो पर प्रस्तुति दी. मदन मोहन ने भूपेंद्र को फिल्म हकीकत में मोहम्मद रफ़ी साहब के साथ होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा… गाने का मौका दिया. यह गाना बहुत लोकप्रिय हुआ, लेकिन भूपेंद्र को इससे कोई ख़ास पहचान नहीं मिली. इसके बाद भूपेंद्र ने स्पैनिश गिटार और ड्रम के सहारे कुछ गज़लें पेश कीं. साल 1978 में रिलीज़ वो जो शहर था से उन्हें प्रसिद्धि मिली.

उनके जन्मदिन के मौक़े पर भूपेंद्र सिंह के गाए 5 बेहतरीन नगमें देखते हैं,

फिल्म- किनारा

फिल्म- मौसम

फिल्म- एतबार

फिल्म- घरौंदा

फिल्म- बाज़ार