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चाहते हैं गुडलक और सक्सेस, तो घर में रखिए एलिफेंट सिंबल (Fengshui Tips: Elephant Symbol for good luck & Success)

चाहते हैं गुडलक और सक्सेस, तो घर में रखिए एलिफेंट सिंबल (Fengshui Tips: Elephant Symbol for good luck & Success)

घर में हाथी की प्रतिमा यानी एलिफेंट सिंबल रखना बहुत शुभ होता है. एलिफेंट सिंबल आपकी कई इच्छाओं को पूरा कर सकता है, लेकिन इसके लिए आपको इसे सही जगह पर रखना होगा.

 

सौभाग्य के लिए
अगर आप गुड लक यानी सौभाग्य के लिए अपने घर में हाथी की प्रतिमा रखना चाहती हैं, तो हाथी के जोड़े को मेन डोर की ओर अंदर की तरफ़ रखें, ताकि ऐसा प्रतीत हो, जैसे- हाथी अंदर की ओर आ रहा है.

नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए
नकारात्मक ऊर्जा से घर की रक्षा करने के लिए हाथी के जोड़े को मेन डोर के ठीक बाहर रखें, ऐसे जैसे हाथी बाहर की ओर जा रहा हो. इससे नेगेटिव एनर्जी घर में प्रवेश नहीं कर पाएगी.

सफलता के लिए
अगर आप और आपका पार्टनर दोनों एक ही ऑफिस में काम करते हैं, तो ऐसी स्थिति में ऑफिस में हाथी की प्रतिमा रखने से पति-पत्नी के बीच प्रेम भी बढ़ता है और व्यापार में मुनाफ़ा भी होता है.

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संतान प्राप्ति के लिए
अगर आप चाहती हैं कि नन्हा-मुन्हा बच्चा आपकी गोद में खेले और आपका आंगन बच्चे की किलकारी से गूंज उठे, तो अपने बेडरूम में ठीक बेड के बगल में हाथी की प्रतिमा रखें.

मां और बच्चे के बीच प्रेम बढ़ाने के लिए
मां और बच्चे के बीच अच्छे संबंध स्थापित करने के लिए हाथी और उसके बच्चे की प्रतिमा को एक साथ एक ओर घर में रखें. इससे मां और बच्चे के बीच प्रेम बढ़ता है.

बच्चों को बुद्धिमान बनाने के लिए
हाथी की प्रतिमा बच्चों की पढ़ाई में भी मददगार साबित होती है. अतः अगर आपका बच्चा पढ़ने में कमज़ोर है, तो उसके स्टडी टेबल पर हाथी की प्रतिमा रखें.

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28 असरदार वास्तु टिप्स से पाएं सौभाग्य व समृद्धि (28 Effective Vastu Tips for Good Luck & Prosperity )

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यदि आप जीवन में सौभाग्य व समृद्धि चाहते हैं, तो वास्तु से जुड़ीं इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें.

* तुलसी के गमले में दूसरा और कोई पौधा न लगाएं, ऐसा करने से धनहानि हो सकती है या बनते काम बिगड़ सकते हैं.

* पूर्व या उत्तर में तुलसी अवश्य लगाएं. इससे घर में शारीरिक, मानसिक, आर्थिक लाभ बना रहता है.

* पलंग पर स्टील के बर्तन न रखें, इससे स्वास्थ्य लाभ में कमी आ सकती है.

* चलते हुए आभूषण पहनने से उनकी वृद्धि में कमी आती है. अतः ऐसा न करें.

* पूर्व या उत्तरमुखी होकर आभूषण पहनना सौभाग्यशाली होता है. इससे प्रतिष्ठा बढ़ती है और अपयश से बचाव भी होता है.

* मकान बनवाते समय सबसे पहले बोरिंग, फिर चौकीदार का कमरा और बाद में बाहरी दीवार बनवाएं. इससे काम समय पर पूरा होता है.

* एक्सपायर्ड दवाएं रात को ही फेंकनी चाहिए. इससे घर में दवाओं का आना बंद हो जाता है.

* बिजली के स्विचेज़, बिजली का मुख्य मीटर, टीवी आदि कमरे में आग्नेय कोण अथवा वायव्य कोण पर रखने से धन में वृद्धि होती है.

* मकान की सब दिशाओं की तुलना में उत्तरी व पूर्वी भाग में खाली स्थान अधिक हो तो आर्थिक उन्नति के साथ व्यापार में भी विशेष वृद्धि होगी.

* छत की ढलान उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखें. इससे आर्थिक उन्नति होती है.

* घर में कन्याओं का स्थान उत्तर-पश्‍चिम क्षेत्र में ही बनाना चाहिए. ऐसा करने से कन्याओें से संबंधित कार्य जल्दी होते हैं.

* भूलकर भी दर्पण पश्‍चिम या दक्षिण की दीवार पर न लगाएं. दर्पण पूर्व या उत्तर की दीवार पर लगाएं. ऐसा करने से प्रगति जल्दी होती है.

* भवन की ऊंचाई दक्षिण व पश्‍चिम भाग में अधिक तथा उत्तर व पूर्व भाग में कम हो. इससे कार्यों में आसानी होती है.

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* सूर्य की किरणों तथा शुद्ध वायु से वंचित मकान अच्छा नहीं होता तथा मध्याह्न के पश्‍चात् की सूर्य किरणें भी घर में स्थित कूप या जलस्थान आदि  पर पड़ें तो भी अच्छा नहीं होता. तात्पर्य यह है कि प्रातःकालीन सूर्य की किरणों का प्रवेश घर में अवश्य ही होना चाहिए, जो कि श्रेष्ठ है.

* भवन निर्माण इस प्रकार से किया जाए कि भूखण्ड में भवन के चारों ओर खुला स्थान रहे. इससे यशवृद्धि होती है.

* वास्तु की दृष्टि से पश्‍चिम तथा दक्षिण की तुलना में उत्तर तथा पूर्व में अधिक खुला हुआ भाग होना चाहिए. फ्लैट्स में इस सूत्र का उपयोग करके लाभ  लिया जा सकता है. ऐसा करने से जीवन में स्थायित्व भी आता है.

* मकान की नींव खोदने का काम आग्नेय कोण से शुरू करके नैऋत्य कोण की तरफ़बढ़े. कंस्ट्रक्शन नैऋत्य कोण की तरफ़ से आरंभ करके आग्नेय  कोण की तरफ़ बढ़े. ऐसा करने से वास्तुदोष का प्रभाव कम होता है.

* उत्तर या पूर्व में लॉन, सुंदर वृक्ष या फुलवारी होनी चाहिए.

* बिल्डिंग प्लॉट के नैऋत्य कोण में बनवाएं. ऐसा करने से सरकारी विभाग परेशान नहीं करता.

* भूखण्ड व वास्तु की चार दीवारें उत्तर व पूर्व की ओर की अपेक्षा दक्षिण व पश्‍चिम की ओर अधिक मोटी तथा ऊंचाई लिए हों.

* सदा पूर्व की ओर मुख करके ही ब्रश करना चाहिए.

* क्षौरकर्म (बाल कटवाना) पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुख करके ही कराना चाहिए.

* तोते का आना शुभ माना जाता है. इनके आवागमन से कोई हानि नहीं है.

* बेसमेंट में दुकान या ऑफ़िस लेना आवश्यक हो तो पूर्व या उत्तर की दिशा में ही लें.

* प्लॉट के तीनों तरफ़ रास्तों का होना शुभ होता है.

* घर के दक्षिण या पश्‍चिमी भाग में फर्नीचर होना अत्यंत लाभदायक है. फर्नीचर को उत्तर या पूर्वी दीवार से सटा कर कभी नहीं रखना चाहिए.

* गृह-प्रवेश के समय वास्तुशांति हवन, वास्तु जाप, कुलदेवी-देवताओं की पूजा, बड़ों को सम्मान, ब्राह्मणों एवं परिजनों को भोजन कराना चाहिए.

* पानी का निकास वायव्य कोण, उत्तर व ईशान कोण में रखने से कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं.

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22 वास्तु टिप्स: कैसे बनाएं सौभाग्यशाली नेमप्लेट?

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वास्तु के अनुसार नेमप्लेट का विशेष महत्व होता है. ये मुख्य द्वार की शोभा बढ़ाने के साथ ही सकारात्मक ऊर्जा को भी अपनी ओर आकर्षित करती है. वास्तु के अनुसार नेमप्लेट का चुनाव कैसे करें? चलिए, हम बताते हैं.

 

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1. नेमप्लेट मुख्य प्रवेश द्वार की बायीं ओर होनी चाहिए या फिर सुविधानुसार भी लगा सकते हैं.

2. नेमप्लेट मुख्य प्रवेश द्वार की आधी ऊंचाई के ऊपर होनी चाहिए.

3. नेमप्लेट वृत्ताकार, त्रिकोण एवं विषम आकृति में होनी चाहिए.

4. नेमप्लेट हिलनी नहीं चाहिए.

5. नेमप्लेट लिफ़्ट के सामने नहीं होनी चाहिए.

6. नेमप्लेट के सामने सफ़ाई संबंधी उपकरण नहीं रहने चाहिए.

7. नेमप्लेट टूटी-फूटी और कटी हुई नहीं होनी चाहिए.

8. नेमप्लेट पर अधिकतम दो लाइन में अपना नाम आदि लिखना चाहिए.

9. नेमप्लेट पर पशु-पक्षियों की सजावट नहीं करनी चाहिए.

10. नेमप्लेट का रंग घर के स्वामी की राशि के अनुरूप होना चाहिए.

11. नेमप्लेट के अक्षरों का अंकों के अनुसार मूल्यांकन करके उचित समीकरण बैठाना चाहिए.

12. नेमप्लेट में किसी भी तरह का छेद नहीं होना चाहिए.

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13. नेमप्लेट पर धूल, गंदगी, मकड़ी के जाले वगैरह नहीं होने चाहिए.

14. नेमप्लेट की लिखावट व प्रकाश व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए, ताकि पढ़ने में परेशानी न हो.

15. नेमप्लेट बनानेवाले को तय मजदूरी से अतिरिक्त उपहार राशि देनी चाहिए.

16. दो नेमप्लेट एक साथ नहीं होनी चाहिए. यदि दो नेमप्लेट आवश्यक हों, तो ऊपर वाली नेमप्लेट नीचे वाली से छोटी होनी चाहिए.

17. नेमप्लेट के पीछे जीव-जंतु, छिपकली आदि अपना बसेरा न बनाने पाएं, ऐसी सावधानी बरतनी चाहिए.

18. नेमप्लेट पर काली चींटियों का घूमना मंगलकारी होता है.

19. नेमप्लेट के निर्माण में सम संख्या में धातु व लकड़ी की क़िस्मों का उपयोग करना चाहिए. विषम संख्या में नहीं.

20. नेमप्लेट पर मुद्रित अक्षर व अंकों का अपने स्थान से खिसकना, टूटना या गिरना अशुभ संकेत है.

21. नेमप्लेट की स्थापना के बाद किसी सुहागन का कर-स्पर्श समृद्धि लाता है.

22. विशेष अवसर एवं तीज-त्योहारों पर नेमप्लेट को दूर्वा से नौ बार स्पर्श कराकर दूर्वा को बहते पानी या बहती हवा में छोड़ देना चाहिए.

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गुड लक के लिए चुनें सही रंग

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वास्तुशास्त्र के नियमानुसार कमरे की कौन-सी दीवार को किस रंग से रंगवाना लाभदायक होता है? चलिए, जानते हैं.

 

लाल रंग

  • लाल रंग ऊर्जा का प्रतीक है. इस रंग का इस्तेमाल घर के दक्षिणी या दक्षिण-पूर्वी हिस्से में नाम मात्र के लिए करें, लेकिन इस हिस्से में अगर बेडरूम हो, तो यहां लाल रंग के प्रयोग से बचें और हल्के पिंक या हल्के क्रीम रंग का सिलेक्शन करें.

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हरा रंग

  • हरा यानी बुध से संबंधित रंग. इस रंग का प्रयोग घर के उत्तर में करना चाहिए. इससे आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा और आपको उन्नति के अवसर मिलेंगे.
  •  बच्चों, लड़कियों और नवविवाहित जोड़ों के कमरे में हल्के सी ग्रीन या आयवरी रंग का इस्तेमाल करें.

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पीला रंग

  •  रंग का इस्तेमाल घर के पूर्वोत्तर में स्थित किसी भी कमरे में किया जा सकता है. अगर यहां पर आपका ऑफ़िस, ड्रॉइंग रूम आदि है तो हल्का पीला रंग आपके लिए अति शुभ होगा. अगर इस दिशा में स्टडी रूम, लाइब्रेरी या बच्चों का कमरा हो तो भी हल्के पीले रंग का इस्तेमाल करें.

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नीला रंग

  • आसमानी रंग का इस्तेमाल मकान की उत्तर दिशा में करना चाहिए. यह रंग जल तत्व को इंगित करता है. इसके अलावा घर की उत्तर दिशा में भी बहते जल वाली तस्वीरें या पेंटिंग्स लगानी चाहिए. इससे करियर में सफलता मिलती है.

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स्मार्ट टिप्स

  • उत्तर दिशा में स्थित मकान के बाहरी हिस्से को ख़ूबसूरत बनाने के लिए हल्के नीले व पीले रंग का प्रयोग करें.
  •  दक्षिण पूर्व में कभी भी हल्के या गहरे नीले रंग का इस्तेमाल न करें.
  •  पूर्वोत्तर या उत्तर दिशा में स्थित कमरों में कभी लाल या ऑरेंज रंगों का इस्तेमाल न करें, क्योंकि ये जल स्थान है और लाल रंग अग्नि का प्रतीक है.
  • मकान की बाहरी दीवारों पर ग्रे, ब्राउन या काले रंग का इस्तेमाल कभी न करें.

फेंगशुई टिप्स: मनचाही मुरादें क्रिस्टल करेगा पूरी (Fengshui Tips)

Fengshui tips- Crystal to fulfil your wish

क्रिस्टल में मौजूद ऊर्जा हमारे आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाने में सक्षम होती है. ये हमारे स्वास्थ्य, भाग्य, रिश्ते और पर्यावरण में सकारात्मक बदलाव लाते हैं. क्रिस्टल हमारी इच्छाओं की पूर्ति करने में सक्षम हैं. कैसे? चलिए, हम बताते हैं.

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कैसे करें क्रिस्टल को शुद्ध?
अपने मन की मुराद पूरी करने के लिए क्रिस्टल को शुद्ध करना ज़रूरी है. इसके शुद्धिकरण की विधि नीचे दी गई हैः
* एक नॉन-मेटैलिक ग्लास में चार चम्मच नमक और पानी मिलाएं.
* इसमें क्रिस्टल को सप्ताह भर डुबो कर रखें.
* सप्ताह पूरा होने पर क्रिस्टल को इस पानी से निकाल कर नल के बहते पानी में धोएं. ग्लास के पानी को फेंक दें.
* अब किसी सिरामिक के बर्तन में क्रिस्टल रखकर सुबह की धूप में 2-3 घंटे के लिए छोड़ दें.
* इस प्रक्रिया के बाद क्रिस्टल अपनी सभी पुरानी तरंगों से मुक्तहो जाता है और अब इसे व्यक्तिगत रूप से प्रोग्रामिंग की ज़रूरत पड़ती है.

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कैसे मांगें मुराद?
* इसके बाद सबसे पहले यह तय करें कि आप क्रिस्टल के ज़रिए क्या पाना चाहती हैं?
* आप जो कुछ भी चाहती हैं उसका स्पष्ट चित्र अपने मन में सोचें. जैसे- यदि आपको प्रमोशन चाहिए तो कल्पना करेें कि आप उस पद की कुर्सी पर बैठे हैं और टेबल पर आपका नाम और पोस्ट लिखा है.
* ध्यान रखें कि किसी भी चीज़ की कल्पना करते समय मुस्कुराते रहें.
* इसी तरह यदि आप क्रिस्टल्स से पूरे परिवार की ख़ुशहाली और स्वास्थ्य चाहते हैं तो अपने मन में पूरे परिवार की मुस्कुराती हुई तस्वीर की कल्पना करें, जिसमें सभी लोग स्वस्थ हों और महिलाओं ने बहुत गहने पहने हों.
* ध्यान रखें, आपके मन में उभरी तस्वीर किसी फोटोग्राफ जैसी होनी चाहिए. एक ही तस्वीर में आपको सब कुछ दिखना चाहिए. इसका तब तक अभ्यास करें, जब तक कि आप इस तस्वीर से पूरी तरह संतुष्ट न हों.
* अब अपने बाएं हाथ में क्रिस्टल लेें और उसे दाएं हाथ से ढंक कर रखें.
* अब मन में सोची हुई तस्वीर की कल्पना करें और उसे 5-10 सेकेंड तक मन में रखें.
* ऐसा करने से क्रिस्टल आपकी इच्छा को आत्मसात कर लेता है. ऐसा कहा जाता है कि प्रोग्रामिंग के बाद क्रिस्टल से निकलने वाली ऊर्जा आपकी इच्छापूर्ति के लिए सकारात्मक होती है और आपके मन की मुराद पूरी हो जाती है.

 

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कैसे करें इस्तेमाल?
* क्लीयर क्वार्ट्ज़ क्रिस्टल से बना पेंडेंट किसी चेन या धागे में डालकर गले में पहनने से मन शांत होता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. आप चाहें तो इसका ब्रेसलेट भी पहन सकती हैं.
* अगर आप विपरीत लिंग को अपनी ओर आकर्षित करना चाहती हैं तो लाइट पिंक कलर का क्रिस्टल धारण कर सकती हैं.

कहां रखें?
* घर में सुख़-शांति और रिश्तों को मज़बूत बनाने के लिए घर के दक्षिण-पश्‍चिम की ओर दो क्लीयर क्वार्ट्ज़ क्रिस्टल बॉल टांगें या रखें.
* बेडरूम की दक्षिण-पश्‍चिम दिशा में क्रिस्टल बॉल्स रखने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है.
* लिविंग रूम में क्रिस्टल रखने पर परिवार के सदस्यों में परस्पर प्रेम की भावना बनी रहती है.
* अगर आप बेटी की शादी की कामना कर रहे हैं, तो बेटी के रूम और घर के कॉमन दक्षिण-पश्‍चिम हिस्से में पिंक कलर का क्रिस्टल बॉल रखें. क्रिस्टल बॉल की प्रोग्रामिंग करते हुए बेटी को दुल्हन के रूप में और दूल्हे के साथ मुस्कुराते हुए कल्पना करें.

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करियर में तरक्क़ी के लिए वास्तु टिप्स

Vastu Tips for Career

किसी भी व्यक्ति का करियर उसकी जन्म पत्रिका के दशम, सप्तम और भाग्य भाव से प्रभावित होता है, जो कि क्रमशः दक्षिण, पश्‍चिम एवं नैऋत्य दिशाओं के प्रभाव में रहते हैं. जबकि किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके- बुद्धिबल, व्यवहार, उसके रहन-सहन, घर की व्यवस्था, उसकी कार्यप्रणाली इत्यादि पर निर्भर है और ये सभी लक्षण मुख्यतः ईशान क्षेत्र तथा उसकी सहयोगी दिशाओं से प्रभावित होते हैं. हमारा व्यक्तित्व हमारे करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

Vastu Tips for Career

वास्तु के अनुसार करियर में कौन-कौन-सी बातें प्रभावित करती हैं, आइए, जानते हैं-

  • घर के दक्षिण-पश्‍चिम में न्यून भार होने से अर्थात् घर के नैऋत्य क्षेत्र पर अधिक भार न होने से अर्थात् इस क्षेत्र के हल्के होने से वहां के रहवासियों के करियर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. उनकी मनोवांछित उन्नति नहीं होती है.
  • जिस घर का दक्षिण क्षेत्र नीचा होता है और उत्तर ऊंचा, ऐसे घर के निवासी उनके करियर से सदैव असंतुष्ट रहते हैं, फिर चाहे उन्हें कितना ही अधिक धन अथवा ऊंचा पद प्राप्त हो. उनको धन की असंतुष्टि भी बनी रहती है. उनका समय-समय पर नुक़सान भी होता रहता है.
  • जिस घर का दक्षिण अथवा नैऋत्य ज़्यादा खुला रहता है तथा ईशान क्षेत्र खुला हुआ नहीं होता, उस घर के मुखिया का करियर, मान-सम्मान- ये सभी कुछ कभी भी नकारात्मक प्रभाव दर्शाने लगते हैं. नैऋत्य का अधिकाधिक ढका रहना तथा ईशान क्षेत्र का अधिकाधिक खुला रहना करियर पर शुभ प्रभाव डालता है.
  • नैऋत्य या दक्षिण या पश्‍चिम में जिस घर में गड्ढा होता है, वहां के अधिकांश निवासियों के करियर सदैव बाधाग्रसित होते हैं या यूं कहें कि वहां के निवासियों के प्रमोशन्स, कार्यक्षेत्र में वृद्धि इत्यादि रुक जाती है. कभी-कभी उनके करियर मेेें अचानक ऐसा मोड़ आ जाता है, जो उन्हें लाभ के बजाए हानि देने लगता है.

Vastu Tips for Career

अब हम घर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर एक नज़र डालते हैं-

  • घर को साफ़ व सुंदर रखें. साथ अपने आसपास का माहौल सजीव और सकारात्मक रखें.
  • अपने व्यवहार को सकारात्मक बनाए रखने के लिए क्रिस्टल या रोज़ क्वार्ट्स की रॉक या शोपीस अपने कमरे के पूर्वोत्तर के ईशान कोण में रखें.
  • बौद्धिक क्षमता तथा कार्यकुशलता में वृद्धि के लिए अध्ययन, पठन-पाठन आदि जैसी क्रियाएं सदैव पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके करें.
  • अपने कमरे के बाहर, बालकनी या गैलरी में सुगंधित व आकर्षक फूलों के पौधे लगाएं.
  • कमरे में सजे क्रिस्टल, बेल्जियम ग्लास अथवा प्ऱिज़्म जैसे पारदर्शी शोपीस भी ज़िंदगी में आगे बढ़ने में सहायक होते हैं.
  • अपने कमरे में टेबल के आसपास ताज़ा फूलों का गुलदस्ता रखना पढ़ाई के प्रति आपकी रुचि जाग्रत करेगा.
  • विदेशों में भविष्य की संभावनाओं को तलाशने की इच्छा रखने वालेे अपने काम करने की टेबल पर एक ग्लोब रखें या फिर दक्षिण दिशा की दीवार पर विश्‍व का एक मानचित्र लगाएं. इसके अतिरिक्त सेलिंग बोट, समुद्री जहाज या हवाई जहाज के पोस्टर कमरे की उत्तर दिशा की दीवार पर लगाएं.
  • करियर के प्रतीक उत्तर दिशा को सदा साफ़-सुथरा रखें.
  • कमरे में अपनी पसंद का रूम फ्रेशनर, धूप, अगरबत्ती, ऐरोमेटिक कैंडल आदि का उपयोग ज़रूर करें. इसके लिए आप कमरे में रजनीगंधा या चमेली के फूलों का गुलदस्ता भी रख सकते हैं.
  • अपने कमरे के बाहर पूर्वोत्तर में छोटे से फाउंटेन का प्रयोग करें.
  • पढ़ाई के लंबे समय के बीच अंतराल देने के लिए बरामदे, बालकनी या छत पर कुछ देर टहलने से आकाश तत्व की प्राप्ति होती है, जिससे दूर तक फैले क्षितिज से सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा होता है, जो स्वयं में सुखद विस्तृत भविष्य को इंगित करता है.
  • क़ामयाबी की संभावनाएं तलाशने के लिए चिंतन-मनन का सर्वोत्तम समय प्रातःकाल है, अतः इस समय भविष्य की योजनाएं बनाएं.