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अन्नाद्रमुक पार्टी का कहना है कि जयललिता (Jayalalitha) की बीमारी व उनके निधन के सदमे में अब तक 77 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. हालांकि केंद्र की एजेंसी की मानें, तो यह आंकड़ा 30 के आसपास है. दरअसल, जयललिता को लोग अपना भगवान मानते थे और उनकी पूजा की जाती थी. यही वजह है कि वो इतनी पॉप्युलर थीं कि लोग अब उनके जाने का ग़म बर्दाश्त नहीं कर पा रहे.
राज्य सरकार ने जान गंवा चुके लोगों के परिवारों के लिए 3 लाख रुपए के मुआवज़े का भी ऐलान किया है. इसके अलावा कुछ लोगों ने ख़ुद को आग लगाने व अपनी उंगली काटने की भी कोशिश की थी, जिन्हें 50 हज़ार का मुआवज़ा दिया जाएगा.