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शर्म-संकोच और बच्चों का विकास (hesitation will impact child growth)

child growth

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मासूम बचपन….. निश्छल मन में न जाने कितनी सही-ग़लत बातें घर कर जाती हैं. लेकिन जागरुक अभिभावकों के कारण कुछ बच्चे आगे निकल जाते हैं. वहीं ध्यान न देने पर कुछ शर्म-संकोच में उलझ कर रह जाते हैं. अतः बच्चों के बहुमुखी विकास के लिए उनका शर्म-संकोच से उबरना बेहद ज़रूरी है.

संकेत के माता-पिता उसे अनेक बार समझा चुके हैं कि जो प्रश्‍न या विषय क्लास में समझ में नहीं आता, उसे टीचर से दोबारा पूछ लेना चाहिए. चाहता तो संकेत भी यही है, लेकिन वो समझता है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि सारे बच्चे समझ गए और एक वो ही नहीं समझा है. हो सकता है, अगर वो टीचर से दोबारा समझाने के लिए कहे तो अन्य बच्चे उसे बेवकूफ़ समझने लगें. दुविधा व चिंता से उसका मन टूटने लगता है और उस विषय से मन हटने लगता है. साथ ही तनाव की स्थिति पीछा नहीं छोड़ती.

वार्षिक उत्सव में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बच्चों का चयन हो रहा था. लगभग सभी बच्चे उत्साह से हर कार्यक्रम में भाग लेने के लिए उतावले हो रहे थे. सुकिता का मन भी हो रहा था, लेकिन संकोच के कारण बोल नहीं पाई. घर पर मां से अपने मन की बात कही. दूसरे दिन मां ने टीचर से बात की. टीचर ने उसे एक नाटक के रोल के लिए चुन लिया और फिर पूछा कि तुमने कल मुझसे क्यों नहीं कहा? इसका उत्तर सुचिता के पास नहीं था, बल्कि टीचर के इस प्रश्‍न से उसके चेहरे पर डर के भाव थे.

बच्चों के साथ अक्सर ऐसा हो जाता है, वे शर्म व संकोच के कारण कई बार पीछे रह जाते हैं. बाद में उन्हें पछतावा होता है, पर हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं. फिर पिछड़ने लगते हैं, जिससे उनका आत्मविश्‍वास भी खोने लगता है. संकोची या शर्मीला व्यक्ति लोगों का नुक़सान कम ही करता है, लेकिन कभी-कभी अपना काफ़ी नुक़सान कर बैठता है. डॉ. अजीत दांडेकर कहते हैं, ङ्गङ्घमाता-पिता भी बच्चे के संकोच की तह में छिपी समस्याओं का अंदाज़ा नहीं लगा पाते हैं. शर्म एक भय है. सामाजिक व पारिवारिक स्थितियों से एक दूरी है. कोई भी नहीं चाहता कि वो ऐसी स्थिति से गुज़रे, फिर भी यह हो जाता है और इसकी वजह से ज़िंदगी के अनेक मौ़के हाथ से निकल जाते हैं.फफ कई बच्चे काफ़ी संवेदनशील होते हैं. शर्म व संकोच की भावना के साथ अंदर-ही-अंदर घुटन व पीड़ा झेलते हैं और जिसका नकारात्मक असर मनोवैज्ञानिक समस्याओं को जन्म देता है. शर्म या संकोच की भावना क्यों होती है? मनोवैज्ञानिकों के अनुसार इसके कुछ सामान्य कारण हैं, जैसे- वंशानुगत. अध्ययनों के अनुसार यह स्वभाव वंशानुगत भी हो सकता है. संकोची स्वभाव के माता-पिता के बच्चे भी संकोची होते हैं. हालांकि अपवाद भी हो सकते हैं.

अधिक सुरक्षा देने वाले अभिभावकः जिन बच्चों को माता-पिता अपनी छत्र-छाया से ज़रा भी अलग नहीं होने देते, स्वतंत्र तौर पर कुछ भी नहीं करने देते, ऐसे बच्चे संकोची होते हैं.

आलोचनाः अधिक आलोचना भी बच्चे में संकोची भाव उत्पन्न करती है. उन्हें हर व़क़्त यही डर रहता है कि उनसे कोई ग़लती न हो जाए. ऐसे बच्चों में नकारात्मक भावना घर कर लेती है. अतः बच्चों को हर समय डराना-धमकाना या चिढ़ाना उचित नहीं है.
अभ्यास व अनुभव की कमीः पढ़ाई हो या कोई अन्य काम, अभ्यास व अनुभव की कमी बच्चों में आत्मविश्‍वास कम करती है, लिहाज़ा संकोच होने लगता है.

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संकोच व शर्म के कारण बच्चों को नई प्रकार की द़िक़्क़तों का सामना करना पड़ सकता है.

* प्रायः इन बच्चों के लिए दोस्ती निभा पाना मुश्किल होता है. ऐसे बच्चों के मन की बात मुश्किल से जानी जा सकती है. भावनाओं को व्यक्त करना  कठिन होता है.

* प्रभावशाली यानी, इफेक्टिव कम्युनिकेशन में इन बच्चों को कठिनाई होती है. सामाजिक स्थितियों का सामना करने से घबराते हैं.

* चूंकि स्वयं को भलीभांति व्यक्त नहीं कर पाते, अतः अक्सर ही मूर्ख व बेवकूफ़ माने जाते हैं, जो इनके आत्मविश्‍वास को कम करता है.
* स्कूल के माहौल में भी अपने से बेहतर बच्चों या टीचर के सामने बोलने से कतराते हैं. कक्षा में प्रश्‍न पूछने या प्रश्‍न का उत्तर मालूम होने के बावजूद  भी नहीं बोल पाते हैं. इस वजह से इनकी ओर शिक्षक का ध्यान कम हो जाता है. उपेक्षित महसूस करते हैं. कभी-कभी पढ़ाई में भी पिछड़ जाते हैं.

* अन्य क्रियाएं जैसे खेल-कूद या दूसरे कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा नहीं ले पाते हैं.

इसके लिए ज़रूरी है बच्चे को संकोच या शर्म से बाहर निकाला जाए. मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यदि बच्चा अपने संकोच को खुलकर स्वीकार करता है तो संभवतः दूसरे लोग उसकी मदद कर सकते हैं. बच्चों को हर किसी के साथ बातचीत करने के लिए उत्साहित कीजिए. लेकिन हां, सही भाषा व सही शैली के लिए टोकते रहें, इससे उसमें आत्मविश्‍वास बढ़ेगा और संकोच कम होगा, इस प्रकार की शुरुआत बच्चे की आरंभिक अवस्था से ही शुरू कर देनी चाहिए. सही सामाजिक व्यवहार को विकसित कर उचित कार्यों के लिए प्रशंसा की जानी चाहिए.
कभी भी सबके सामने उनसे ऐसे वाक्य जैसे, ङ्गङ्घक्यों शर्मा रहे होफफ आदि न कहें. ऐसे वाक्य सुन बच्चे और भी संकोची हो उठते हैं. ना ही दूसरों के सामने यह कहें कि बच्चा संकोची है. यदि कहना ही है तो इस तरह कह सकते हैं, “इसे सबके साथ मिक्स होने में थोड़ा व़क़्त लगता है.” कभी भी बच्चे की ड्रेस, हेयर स्टाइल या आदत का मज़ाक न बनाएं.

उसके साथ विश्‍वास का रिश्ता बनाएं. ईमानदारी व खुलापन रिश्तों को प्रगाढ़ बनाता है. जिन बच्चों को माता-पिता का विश्‍वास प्राप्त है, वो कम संकोची होते हैं. माता-पिता की आंखों में प्यार व स्नेह की भावना उनका आत्मविश्‍वास बढ़ाती है, सुरक्षा प्रदान करती है.
यह बहुत ज़रूरी है कि बच्चों को प्रभावशाली बातचीत का तरीक़ा सिखाया जाए. क्रोध व प्रशंसा को व्यक्त करने का सही ढंग सिखाया जाए. सही तरी़के से बातचीत करना एक सोशल स्किल है, जो सफलता के हर क़दम का अहम् हिस्सा है. सही भाषा व शब्दों का प्रयोग आवाज़ का उचित उतार-चढ़ाव, व्यवहार व आचरण संबंधी शब्द ये सभी बच्चों में सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं.
अमूमन बच्चों के विकास में अभिभावकों का व्यवहार महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. बच्चे अपने माता-पिता का अनुकरण करते हैं, इसलिए बच्चों की हर ख़ूबी या कमी के लिए माता-पिता ही ज़िम्मेदार हैं. वे ही उनके सामने सही या ग़लत उदाहरण पेश कर सकते हैं.

– प्रसून भार्गव

क्या काम करने के इन 5 नियमों को जानते हैं आप? (5 Work rules for career growth)

Career growth

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करियर में आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी है कि आप ऑफिस में बताए गए सभी रूल्स को फॉलो करें. वर्क रूल्स फॉलो करने से आपका काम भी ठीक रहेगा और ऑफिस का माहौल भी. ऐसे में तरक्क़ी करने के चांस भी ज़्यादा होंगे. वर्कप्लेस पर अपना रूल्स न बनाएं. इससे बॉस और आपको दोनों को नुक़सान होगा. ऑफिस चाहे छोटा हो बड़ा, उसके नियमों का पालन आपको करना ही चाहिए. वहां काम करने के रूल्स को आप बदल नहीं सकते. हां, अगर आपको किसी चीज़ से परहेज़ है, तो उसके लिए बॉस से बात करें. क्या हैं ऑफिस में काम करने के नियम? आइए, जानते हैं.

रूल नं 1- माइंड योर बिज़नेस
जी हां, वर्कप्लेस पर काम करने का पहला रूल है कि आप अपने काम से काम रखें. किसी दूसरे के काम में टांग अड़ाने की ज़रूरत नहीं है. इससे आपका ही नुक़सान होता है. एक तो आपकी रेप्युटेशन ख़राब होती है और दूसरे आपका काम पीछे रह जाता है. दूसरे आपसे आगे निकल जाते हैं.

रूल नं 2- अपनी पोस्ट का ख़्याल
आमतौर पर ऑफिस के प्यून भी जब आपस में बात करते हैं, तो ख़ुद को बॉस ही समझते हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि बॉस को उनके हिसाब से चलना चाहिए. आपकी मानसिकता भी अगर कुछ ऐसी ही है, तो इससे बचिए. जिस पोस्ट पर काम कर रहे हैं, उसके हिसाब से ही बात कीजिए. अपने सीनियर्स की बुराई कीजिए, लेकिन ऐसा कभी मत कहिए कि सारा काम तो आप ही करते हैं, वो तो बस गॉसिप करते हैं.

रूल नं 3- सेल्फ मार्केटिंग
अगर आपको लगता होगा कि अपनी सेल्फ मार्केटिंग करके आप बॉस के दिमाग़ में अपनी अच्छी इमेज डाल देंगे, लेकिन कुछ समय के बाद आपके बार-बार ऐसा करने पर सबको आपकी सच्चाई पता चल जाती है. अगर आप काम में अच्छे हैं, तो भी सेल्फ मार्केटिंग इतनी मत कीजिए कि कंपनी का प्रोफाइल आपसे नीचे हो जाए.

रूल नं 4- नो वर्क प्रेशर
ऐसा नहीं है कि सारे वर्क रूल्स आपको ही फॉलो करने होते हैं. ऑफिस के सीनियर्स के लिए भी रूल्स हैं. उन्हें भी इसको फॉलो करना चाहिए. ऑफिस में वर्क प्रेशर न बनाना, वर्क रूल्स का अहम हिस्सा है. प्रेशर में न तो काम किया जा सकता है और न ही किसी से काम कराया जा सकता है

रूल नं 5- ब्रेक टाइम
हर ऑफिस का अपना नियम होता है. आप जहां भी काम करें उसके अनुसार ही करें. ख़ुद को ऑफिस रूल्स से बढ़कर न समझें. ऑफिस में लंच ब्रेक, टी ब्रेक आदि का एक टाइम निश्‍चित होता है. आपको उनके अनुसार ही काम करना चाहिए. कभी भी इस टाइम को क्रॉस न करें. इससे आपकी रेप्युटेशन डाउन हो सकती है.

क्या आप जानते हैं?
नौकरीपेशा लोगों के लिए पुर्तगाल किसी स्वर्ग से कम नहीं है. यहां के एंप्लॉयमेंट लॉ में किसी एंप्लाई को टर्मिनेट करने का क़ानून नहीं है. बॉस वहां से किसी को फायर नहीं कर सकता. हां, अगर किसी एंप्लॉई के साथ नहीं जम रही है, तो कंपनी को उसे एक हैंडसम रेज़िगनेशन पैकेज ऑफर करना होता है.

– श्वेता सिंह

सफल होने के सक्सेस मंत्र (Success mantra)

मेरे पास गाड़ी है.. बंगला है.. बैंक बैलेंस है, तुम्हारे पास क्या है? अब अगर आप भी इस क्या का जवाब देना चाहते हैं और दूसरे लोगों की तरह जीवन में सफलता का परचम लहराना चाहते हैं, तो आइए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे मूल मंत्र, जिसे अपनाकर आप भी करियर में बुलंदियों को छू सकते हैं.(Success mantra)business-woman-clip-art-png-2PHDN0-clipart

जॉब बदलने से बचें
करियर काउंसलर मालिनी शाह के अनुसार, ङ्गङ्घआज की युवा पीढ़ी ज़्यादा सैलरी के चक्कर में एक साल भी किसी कंपनी में टिक नहीं पाती. ऐसे में कई बार वो अच्छे अवसर से चूक जाते हैं. सफलता पाने के लिए बहुत ज़रूरी है कि बिना सही समय आए जॉब न छोड़ें. बार-बार जॉब बदलने से आपकी सैलरी तो बढ़ जाएगी, लेकिन आप अपने आप पर फोकस नहीं कर पाएंगे. करियर में ठहराव बहुत ज़रूरी है. जब तक अच्छे विकल्प ना मिलें एक कंपनी से दूसरी कंपनी में जंप करना उचित नहीं है, स़िर्फ पैसों की ख़ातिर अच्छी कंपनी से जंप करना करियर के लिए नुक़सानदायक हो सकता है.फफ

काम में माहिर बनें
ङ्गजैक ऑफ ऑलफ बनने की बजाय ङ्गमास्टर ऑफ वनफ बनना आज की दुनिया में सफल होने का मूल मंत्र है. दो नाव की सवारी करने पर आप पानी में गिर सकते हैं. इसलिए जितना मुमक़िन हो अपने काम में महारत हासिल करें. आगे जिस क्षेत्र में आपको अपना करियर बनाना है, उसी पर पूरा ध्यान दें. दोस्तों या आसपास के लोगों के कहने में आकर हर क्षेत्र में क़िस्मत आज़माने की ग़लती न करें.

लक्ष्य से अवगत हों
करियर में सफल होने के लिए बहुत ज़रूरी है कि आप अपने लक्ष्य से भलीभांति अवगत हों. हवा में तीर मारने और बार-बार लक्ष्य बदलने की प्रक्रिया आपको सफलता से कोसों दूर कर देती है. ज़माना भले ही बदल गया हो, लेकिन आज भी सफलता पाने के लिए आपको अर्जुन की तरह लक्ष्यभेदी चिड़िया की आंख पर निशाना साधना होगा, तभी आप अपने जीवन में सफल हो पाएंगे.

डिक्शनरी से No शब्द मिटाएं
जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. कभी जॉब से बहुत ज़्यादा उम्मीद तो कभी निराशा झलकती है और जॉब छोड़ने का मन करता है, लेकिन इन बातों से निराश नहीं होना चाहिए. आप कमज़ोर हैं या फिर उस काम को आप नहीं कर सकते. इस तरह की बेवजह व नकारात्मक बातों को अपने अंदर से निकाल दें. अपने मन के शब्दकोश से ङ्गनफ शब्द को हमेशा-हमेशा के लिए ख़त्म कर दें.

बी प्रैक्टिकल
व्यक्तिगत जीवन में इमोशनल होना अच्छी बात है, लेकिन कार्यक्षेत्र में प्रैक्टिकल होना बहुत ज़रूरी है. सफलता उसी को मिलती है जो कार्यस्थल पर प्रैक्टिकल रहता है. उदाहरण के लिए अगर आपकी पहली कंपनी सैलरी नहीं बढ़ा रही है और आपको किसी दूसरी कंपनी से अच्छा ऑफर मिल रहा है, तो तुरंत उस ऑफर की तरफ़ हाथ बढ़ाएं, न कि पहली कंपनी से जुड़ी अपनी यादों के घेरे में बंधे रहें.

अपनी क्षमता को ख़ुद पहचानें
राजू डॉक्टर बन गया… रमेश अमेरिका से मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा है या फिर पारुल बड़े फर्म में अच्छे पे स्केल पर नौकरी कर रही है. इस तरह की बातें सोचकर ख़ुद भी उसी राह पर चलने से पहले ज़रा सोचिए कि क्या आप भी अपने उन्हीं दोस्तों की ही तरह शैक्षणिक, मानसिक और आर्थिक रूप से सक्षम हैं? जीवन में सफल होने के लिए बहुत ज़रूरी है कि आप अपनी क्षमता को ख़ुद परखें और जानें कि आप कितने पानी में हैं? दूसरों के कहने पर बिना सोचे-समझे उठाया गया आपका हर क़दम आपको पीछे की ओर ले जाएगा.

अच्छा नहीं, सबसे अच्छा करने की ज़िद्द
बीत गए वो दिन जब लोग एक जॉब पाकर उसी से संतुष्ट हो जाते थे और सारी ज़िंदगी एक ही कंपनी में बिता देते थे. आज अगर आपको सफल होना है तो करियर का बेस्ट देने की सोचें. किसी भी कंपनी में काम करते हुए स़िर्फ अच्छा करके संतुष्ट होने की बजाय सबसे अच्छा करने की सोचें. जब तक आप अपने सहकर्मियों से अच्छा नहीं करेंगे आप भी उन्हीं की श्रेणी में रह जाएंगे.

प्रेरणादायक है असफलता
जिस तरह से ठोकर लगने पर आप चलना सीखते हैं, ठीक उसी तरह सफलता का असली आनंद तभी आता है, जब आप अपनी असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ने की सोचते हैं और सफलता के क़रीब पहुंचते हैं. पहले की गई अपनी ग़लतियों से प्रेरणा लेकर भविष्य में अच्छा करने की कोशिश करें.

ख़ुद का बिज़नेस
करियर काउंसलर मालिनी शाह के अनुसार, 8 से 9 घंटे किसी और के यहां काम करके महीने के अंत में सैलरी लेने की प्रक्रिया को जितनी जल्दी हो सके ख़त्म करें. जीवन की दौड़ में सबसे आगे निकलना है, तो जल्द ही अपना बिज़नेस शुरू करें. इससे न स़िर्फ आपका प्रॉफिट बढ़ेगा, बल्कि आपका स्किल और कॉन्फिडेंस भी

अपने मिशन में क़ामयाब होने के लिए आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित निष्ठावान होना पड़ेगा- अब्दुल कलाम

जीतने वाले अलग चीज़ें नहीं करते, वो चीज़ों को अलग तरह से करते हैं- शिव खेड़ा

– श्वेता सिंह

तरक्क़ी के लिए सोने के सिक्कोंवाला जहाज ( Trkkhi Sikkonwala gold ship)

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फेंगशुई के अनुसार सोने के सिक्कों से भरा समुद्री जहाज़ व्यवसाय में सफलता का प्रतीक माना जाता है. इसकी मौज़ूदगी से व्यापार में वृद्धि होती है और संबंधित व्यक्ति का करियर ग्राफ़ तेज़ी से ऊंचाई की ओर बढ़ता जाता है. तो आइए जानते हैं जब रखना हो इसे घर में तो किन बातों का रखें ख़्याल?

कैसे बनाएं सोने के सिक्कों से भरा समुद्री जहाज़?
* बाज़ार में सोने के सिक्कों से भरे जहाज़ की कई प्रतिमाएं मिलती हैं. आप चाहें तो उन प्रतिमाओं को भी ऑफिस में रख सकते हैं या फिर ख़ुद ही सोने के सिक्कों से भरा जहाज़ बना सकते हैं.
* इसके लिए बाज़ार से सामान्य-सा पानी वाला जहाज ख़रीदकर ले आएं.
* इसमें कुछ नकली सुनहरे सिक्के, तो कुछ असली सिक्के व रुपए भर दें. इससे सिक्कों से भरा जहाज़ तैयार हो जाएगा.

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कहां रखें सोने के सिक्कों से भरा समुद्री जहाज़?
सोने के सिक्के से भरे समुद्री जहाज़ को ऑफिस में इस तरह रखें, जिससे लगे कि जहाज़ बाहर से ऑफिस के अंदर की तरफ़ आ रहा है, न कि बाहर की तरफ़ जा रही है. ऐसा करने से आनेवाला सौभाग्य उल्टे पैर वापस जा सकता है और व्यापार में भारी नुक़सान हो सकता है.

कहां न रखें?
* सोने के सिक्के से भरे समुद्री जहाज को भूल से भी ऑफिस के मुख्य द्वार के ठीक सामने न रखें, वरना सारी संपत्ति दरवाज़े से होकर बाहर जा सकती है.
* इसे घर में रखने की ग़लती भी न करें.