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पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या है हार्मोनल इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव? (How Good Is Hormonal Intrauterine Contraceptive (IUCD)?)

Hormonal Intrauterine Contraceptive

मेरा 2 साल का एक बच्चा है और फ़िलहाल मैं दूसरा बच्चा नहीं चाहती, इसलिए हार्मोनल इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव (IUCD) इंसर्ट करवाया है. डॉक्टर के मुताबिक़ हैवी ब्लीडिंग के मामले में यह एक उचित गर्भनिरोधक है. पर अगर यह एक अच्छा गर्भनिरोधक है, तो सभी महिलाएं इसका इस्तेमाल क्यों नहीं करतीं?

– समीरा यादव, कानपुर.

इंट्रायूटेराइन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस (IUCD) काफ़ी लोकप्रिय गर्भनिरोधक है. प्रोजेस्टेरॉन हार्मोंसयुक्त यह डिवाइस हैवी ब्लीडिंग वाली महिलाओं को दिया जाता है. यह एक स्पेशल डिवाइस है, क्योंकि इसके टी शेप प्लास्टिक फ्रेम के साथ हार्मोंस भी होते हैं. आप 5 साल तक इसका इस्तेमाल कर सकती हैं. दरअसल, महंगा होने के कारण यह बहुत लोकप्रिय नहीं हुआ है.

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Hormonal Intrauterine Contraceptive

मेरी नौंवें महीने की प्रेग्नेंसी के शुरुआती चेकअप के बाद डॉक्टर ने तुरंत अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी. टेस्ट के बाद उन्होंने बताया कि मुझे ओलिगोहाइड्रामिनियॉस है और मुझे सीज़ेरियन डिलीवरी ही करवानी होगी. यह क्या है?

– ख्याति झा, रायपुर.

गर्भाशय में बच्चा पानी की थैली के भीतर रहता है, जिसे एम्नियॉटिक फ्लूइड कहते हैं. अल्ट्रासाउंड के ज़रिए उसकी जांच की जाती है. ओलिगोहाइड्रामिनियॉस इसी की कमी की अवस्था है. आम भाषा में कहें, तो गर्भाशय में पानी की कमी है. इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे पानी की थैली में दरार पड़ना, बच्चे की किडनी में एब्नॉर्मिलिटी के कारण यूरिन कम होना, जीन डिफेक्ट, मां को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ आदि. पानी की कमी के कारण बच्चे को सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है. यही कारण है कि आपके डॉक्टर ने सीज़ेरियन डिलीवरी की सलाह दी है.

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क्या आप पहचानती हैं प्रेग्नेंसी के ये शुरुआती लक्षण?

– जिस प्रकार हर महिला अलग होती है, उसी प्रकार उसकी प्रेग्नेंसी के लक्षण भी अलग होते हैं. यहां तक कि एक ही महिला की  दो प्रेग्नेंसीज़ के लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं. ज़रूरी नहीं जैसा वो पहली प्रेग्नेंसी में महसूस कर रही थी, वैसा भी दूसरी बार भी करे.

– पीरियड्स मिस होना इसका सबसे बड़ा लक्षण है, हांलाकि पीरियड्स मिस होने के पहले ही बहुत-सी

– कॉन्सेप्शन के बाद महिलाओं को हल्की-सी ब्लीडिंग होती है और पेट में मरोड़ भी होता है.

– शरीर में हो रहे बदलावों के कारण ब्रेस्ट हैवी लगने लगते हैं.

– थकान प्रेग्नेंसी के शुरुआती लक्षणों में से एक है.

– ज़्यादातर महिलाओं को सुबह-सुबह चक्कर आते हैं.

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डॉ. राजश्री कुमार
डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या शादी से पहले गायनाकोलॉजिस्ट से मिलना ज़रूरी है? (Should I see a gynecologist before my marriage?)

gynecologist problems

मैं 26 वर्षीया युवती हूं और छह महीने बाद मेरी शादी होनेवाली है. आज तक मैं कभी गायनाकोलॉजिस्ट (Gynecologist) से नहीं मिली, पर मेरी सहेलियों का कहना है कि शादी से पहले मुझे एक बार गायनाकोलॉजिस्ट से ज़रूर मिलना चाहिए. आप क्या सलाह देंगी? मुझे क्या करना चाहिए? 

 

– स्नेहा यादव, इंदौर.

मैं समझ सकती हूं कि आपको थोड़ा अजीब लग रहा होगा, क्योंकि आप आज तक कभी किसी गायनाकोलॉजिस्ट (gynecologist) से नहीं मिली हैं, पर इसके लिए आपको ज़्यादा संकोच करने की ज़रूरत नहीं. आमतौर पर ज़्यादातर कपल्स शादी से पहले काउंसलिंग के लिए गायनाकोलॉजिस्ट से मिलते हैं. उनसे मिलकर आप गर्भनिरोध के ऑप्शन्स के बारे में जानकारी व सलाह ले सकती हैं. इसके अलावा आप उनसे फैमिली प्लानिंग या उससे जुड़ी अपनी ग़लतफ़हमियां दूर कर सकती हैं. प्रेग्नेंसी से जुड़े किसी अन्य विषय पर भी आप गायनाकोलॉजिस्ट से सलाह ले सकती हैं.

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 gynecologist problems
मैं 50 वर्षीया महिला हूं और पिछले साल ही मेरे पीरियड्स बंद हुए हैं. पिछले दो महीने से मुझे अक्सर योनि में खुजली व डिस्चार्ज हो रहा है. क्या मुझे डॉक्टर से मिलना पड़ेगा?
– तुलिका कमानी, हैदराबाद.

 

आपका मेनोपॉज़ हो चुका है और आपके द्वारा बताए लक्षणों से लग रहा है कि आपको इंफेक्शन है. सबसे पहले आपको चेकअप कराना पड़ेगा, ताकि पता चल सके कि आपको किस तरह का इंफेक्शन है, जिससे सही इलाज किया जा सके. इसके अलावा आपको पैप स्मियर टेस्ट और ब्लड शुगर चेकअप (फास्टिंग और पोस्ट लंच) ज़रूर कराना चाहिए.

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यूरिनरी इंफेक्शन्स के लिए होम रेमेडीज़   

बहुत-सी महिलाओं में यह एक आम समस्या है. संकोच व लिहाज के कारण अक्सर महिलाएं इसे छिपा लेती हैं, ऐसे में ये होम रेमेडीज़ उनके लिए काफ़ी कारगर सिद्ध होंगी.
– इसमें भरपूर पानी पीना आपके लिए बहुत लाभदायक होगा, इसलिए ख़ूब पानी पीएं.
– ककड़ी जैसे पानी से भरपूर फ्रूट्स को अपने डायट में शामिल करें.
– अदरक की चाय आपको इससे राहत दिलाएगी.
– गर्म पानी की थैली से सेंक करें.
– दो कप पानी में 1 टेबलस्पून पार्सले की सूूखी पत्तियों को उबालकर उसका पानी पीएं.

यह भी पढ़ें: बार-बार वेजाइनल इंफेक्शन क्यों होता है?

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डॉ. राजश्री कुमार
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पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या कीमोथेरेपी से पति इंफर्टाइल हो सकते हैं? ( Does Chemotherapy affects fertility in men?)

Chemotherapy, fertility in men

मेरे पति की उम्र 33 साल है, पर हाल ही में हमें पता चला कि उन्हें नॉन हॉकिंग्स लिंफोमा नामक कैंसर है, जिसके लिए उन्हें कीमोथेरेपी (chemotherapy) करानी पड़ेगी. हमारा एक ही बच्चा है, इसलिए डॉक्टर ने पति के स्पर्म और फर्टिलाइज़्ड एग फ्रीज़ करके रखने की सलाह दी है. हम बहुत दुविधा में हैं, क्या करें? क्या कीमोथेरेपी से पति इंफर्टाइल हो जाएंगे?

– सलोनी बांदेकर, नागपुर.

नॉन हॉकिंग्स लिंफोमा के मामलों में कीमोथेरेपी काफ़ी असरदार साबित होती है. पहले हम कपल्स को ऐसी सलाह नहीं दे सकते थे, पर एडवांस होती टेक्नोलॉजी ने यह मुमकिन कर दिया है कि कीमोथेरेपी के बाद भी आप पैरेंट बन सकते हैं. आपको यह समझना होगा कि कैंसर में कैंसरस सेल्स बड़ी तेज़ी से बढ़ते हैं और कीमोथेरेपी का काम इन तेज़ी से बढ़नेवाले सेल्स को ख़त्म करना ही है. इस प्रक्रिया में हेल्दी सेल्स को भी नुक़सान पहुंचता है, जिससे डायरिया, गले में ख़राश, बालों का झड़ना और इंफर्टिलिटी जैसे साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिलते हैं. कीमोथेरेपी स्पर्म को भी नुक़सान पहुंचाती है, इसीलिए आपके डॉक्टर ने ऐसी सलाह दी है.

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chemotherapy

मैं 17 साल की कॉलेज स्टूडेंट हूं. 13 साल की उम्र में मेरे पीरियड्स शुरू हो गए थे, पर कभी नियमित रूप से पीरियड्स आए नहीं. पिछले दो साल में स़िर्फ दो बार पीरियड्स आए हैं. डॉक्टर का कहना है कि इस उम्र में ऐसा होना सामान्य है, पर मेरी सभी सहेलियों के पीरियड्स नियमित हैं, इसलिए मुझे चिंता हो रही है. कृपया, मार्गदर्शन करें.

– रूपल मेहता, सूरत.

आमतौर पर पीरियड्स शुरू होने के दो साल तक अनियमित रहते हैं. कभी-कभार तो डेढ़ या दो महीने बाद पीरियड्स आते हैं, पर ज़्यादातर मामलों में 2 साल के बाद पीरियड्स नियमित हो जाते हैं, जबकि आपके मामले में ऐसा नहीं हुआ. आपको डरने की ज़रूरत नहीं. डॉक्टर से मिलकर आपको जनरल चेकअप के साथ-साथ कुछ ब्लड टेस्ट्स कराने होंगे, ताकि किसी भी तरह के हार्मोनल इश्यूज़ के बारे में पता चल सके. हो सकता है, इसका कारण थायरॉइड या पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसीज़ हो, पर आप घबराएं नहीं, क्योंकि हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए तुलना न करें, बल्कि डॉक्टर से मिलें.

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अनियमित पीरियड्स के लिए होम रेमेडीज़

– एक कप पानी में अदरक का छोटा टुकड़ा उबालें. स्वाद के लिए इसमें शक्कर या शहद मिला लें. इसे दिन में तीन बार, खाने के बाद लें.
– पीरियड्स अनियमित हो गए हों, तो रोज़ रात को एक कप दूध में आधा टीस्पून दालचीनी पाउडर मिला लें या फिर पुदीने की पत्तियों को सुखाकर पाउडर बना लें और 1-1 टीस्पून शहद और पुदीना मिलाकर दिन में तीन बार लें.
– एक ग्लास पानी में 2 टीस्पून सौंफ रातभर भिगोकर रखें. सुबह छानकर पी लें.
– तिल में गुड़ मिलाकर पीस लें. इस मिश्रण को रोज़ाना खाली पेट 1 टीस्पून लें.
– गुड़ पीरियड्स को नियमित करने में मदद करता है, इसलिए इसे ऐसे भी खा सकते हैं.

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पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या एबॉर्शन के कारण कंसीव नहीं कर पा रही हूं? (Does an abortion affects the chances of getting pregnant?)

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मैं 32 वर्षीया शादीशुदा महिला हूं. मेरी शादी को 5 साल हो गए हैं, पर अभी तक हमारा कोई बच्चा नहीं है. दरअसल, शादी के तुरंत बाद मैंने कंसीव कर लिया था, पर मानसिक रूप से उसके लिए तैयार नहीं थी, इसलिए एबॉर्शन (abortion) करा लिया था. पिछले 4 साल से हम कोशिश कर रहे हैं, पर मैं कंसीव नहीं कर पा रही हूं. कहीं ऐसा एबॉर्शन के कारण तो नहीं हो रहा है?
– श्रेयसी सिंह, पटना.

कंसीव न कर पाने के कई कारण होते हैं, जैसे- लो स्पर्म काउंट, ट्यूबल ब्लॉकेज, ओव्यूलेशन न होना आदि. कंसीव करने के लिए पति-पत्नी दोनों का ही समान योगदान होता है, इसलिए एबॉर्शनवाली (abortion) घटना को ध्यान में रखकर ख़ुद को दोषी ना ठहराएं. सबसे पहले तो आप दोनों पति-पत्नी किसी अच्छे गायनाकोलॉजिस्ट से मिलकर उनसे अपनी हिस्ट्री डिस्कस करें. हो सकता है, वो आपको कुछ टेस्ट्स करवाने की सलाह भी दें. आप दोनों की सारी रिपोर्ट्स देखने के बाद ही डॉक्टर आपको सही कारण व उपचार
बता पाएंगे.

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मैं 27 वर्षीया वर्किंग वुमन हूं. पिछले दिनों पेट के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत के कारण डॉक्टर की सलाह पर सोनोग्राफी करवाई. रिपोर्ट में मेरी ओवरीज़ में 5 से.मी. का सिस्ट दिखा है. मेरे गायनाकोलॉजिस्ट ने कहा है कि घबराने की कोई बात नहीं और 3 महीने बाद फॉलोअप करने की सलाह दी है. मैं बहुत परेशान हूं, कृपया मार्गदर्शन करें.
– रीना शुक्ला, नई दिल्ली.

आपकी रिपोर्ट में जिस सिस्ट के बारे में लिखा गया है, उसे फिज़ियोलॉजिकल सिस्ट कहते हैं. महिलाओं की रिप्रोडक्टिव एज में यह आम बात है. अगर घबराने की कोई बात होती, तो डॉक्टर आपको ब्लड टेस्ट्स करने की सलाह देतीं, क्योंकि आपको 3 महीने बाद फॉलोअप के लिए बुलाया गया है, इससे पता चलता है कि कोई गंभीर बात नहीं है. सिस्ट के आकार में कोई बदलाव आया या नहीं, यह जानने के लिए फॉलोअप बहुत ज़रूरी है.

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क्या होता है सिस्ट?

डॉक्टर्स के मुताबिक़ आमतौर पर हर महिला के पूरे जीवनकाल में एक सिस्ट तो होता ही है. सिस्ट दरअसल, तरल पदार्थों से भरी छोटी-छोटी थैलियां या पॉकेट्स होते हैं, जो ओवरीज़ के भीतर या उसकी सतह पर बन जाते हैं. ज़्यादातर ओवेरियन सिस्ट माहवारी के दौरान आते हैं, पर अधिकतर मामलों में ये किसी गंभीर समस्या का कारण नहीं बनते. इन्हें फिज़ियोलॉजिकल सिस्ट कहा जाता है, जबकि दूसरे तरह के सिस्ट को पैथोलॉजिकल सिस्ट कहते हैं, जो कैंसरस होते हैं. ज़्यादातर सिस्ट्स के कारण कोई समस्या नहीं होती, पर कुछ मामलों में महिलाओं को जी मिचलाना, पेटदर्द, असामान्य माहवारी, सेक्स के दौरान दर्द, दर्दयुक्त माहवारी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हालांकि ये कुछ महीनों बाद अपने आप ग़ायब हो जाते हैं, फिर भी अगर आपको तकलीफ़ हो रही है, तो दर्द से आराम के लिए गर्म पानी से 15 मिनट तक सेंक करें.

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डॉ. राजश्री कुमार
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पर्सनल प्रॉब्लम्स: ब्रेस्ट में गांठ के लिए क्या बार-बार मैमोग्राफी करानी होगी? (Personal Problems: How often do I need mammography?)

Breast Mammography
मैं 37 वर्षीया महिला हूं. मेरा 9 साल का बेटा भी है. कुछ महीने पहले ही मैंने बाएं ब्रेस्ट में एक गांठ महसूस की. डॉक्टर ने बायोप्सी करके बताया कि वो कैंसर की गांठ नहीं है, पर मैं बहुत डरी हुई हूं. क्या मुझे बार-बार मैमोग्राफी (Mammography) करानी पड़ेगी?
– रश्मि कुंद्रा, नोएडा.

अगर आपकी बायोप्सी की रिपोर्ट यह कहती है कि वह गांठ कैंसर की नहीं है, तो आपको डरने की कोई ज़रूरत नहीं. आपको पता करना होगा कि आपकी मां, मौसी या नानी में से किसी को ब्रेस्ट कैंसर तो नहीं था, क्योंकि कुछ ब्रेस्ट कैंसर फैमिली हिस्ट्री के कारण ही होते हैं, ऐसे में आपको ध्यान रखना होगा. सबसे ज़रूरी बात, नियमित रूप से हर महीने आपको ब्रेस्ट्स का सेल्फ एक्ज़ामिनेशन करना होगा, ताकि किसी तरह की गांठ के बारे में आपको समय से पता चल सके. मैमोग्राफी (Mammography) हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही कराएं. डॉक्टर को ज़रूरत महसूस होगी, तभी वो इसकी सलाह देंगे.

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Breast Mammography
मैं 24 वर्षीया कॉलेज स्टूडेंट हूं. हर महीने पीरियड्स के एक-दो दिन पहले से ही मेरे ब्रेस्ट्स में बहुत दर्द होता है, पर मुझे डॉक्टर के पास जाने में बहुत डर भी लग रहा है. मैं क्या करूं? कृपया, मेरी मदद करें.
– आराध्या वासवानी, बनारस.

इसमें डरने की कोई बात नहीं है. आप ऐसी अकेली नहीं हैं, जिसके साथ यह हो रहा है, ऐसीबहुत-सी लड़कियां व महिलाएं हैं, जिन्हें पीरियड्स से पहले ब्रेस्ट्स में दर्द होता है. दर्द से राहत पाने के लिए पीरियड्स के दौरान अच्छी फिटिंगवाली ब्रा पहनें और पेनकिलर ले लें. ज्यादातर मामलों में इससे फ़र्क़ पड़ता है, लेकिन अगर आपको इससे राहत न मिले, तो किसी गायनाकोलॉजिस्ट को ज़रूर दिखाएं. वो आपको सही दवाइयां देंगे, ताकि आपको दर्द से राहत मिले.

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ब्रेस्ट कैंसर शहरी महिलाओं में मौत का प्रमुख कारण

हाल ही में जारी आंकड़ों पर नज़र डालें, तो पता चलेगा कि ब्रेस्ट कैंसर शहरी महिलाओं की मौत का प्रमुख कारण बनता जा रहा है. ऐसे में इसके प्रति जागरूकता बहुत ज़रूरी है. हर महीने पीरियड्स के बाद अपने ब्रेस्ट्स को सेल्फ एक्ज़ामिन करें. यह आप लेटकर या शावर लेते समय भी कर सकती हैं. इसके कारण समय रहते महिलाओं को गांठ या सूजन का पता चल जाता है, जिससे सही समय पर इलाज हो जाता है. मैमोग्राफी एक ख़ास एक्स-रे है, जिसकी मदद से ब्रेस्ट की जांच होती है, पर यह हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही करवाएं. अगर ब्रेस्ट कैंसर की फैमिली हिस्ट्री है, तो नियमित रूप से ब्रेस्ट्स का सेल्फ एक्ज़ामिनेशन करें.

rajeshree kumarडॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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पर्सनल प्रॉब्लम्स: बार-बार वेजाइनल इंफेक्शन क्यों होता है? (Personal Problems: what to do for recurrent vaginal infection ?)

irregular periods during exams
मैं 43 वर्षीया महिला हूं. मैं  बार-बार होनेवाले वेजाइनल इंफेक्शन (Vaginal infection) से परेशान हूं. एक साल पहले डॉक्टर ने मुझे एक वेजाइनल टैबलेट दी थी, जब उसका इस्तेमाल करती हूं, तो ठीक हो जाता है, पर कुछ दिनों बाद वापस से डिस्चार्ज और खुजली शुरू हो जाती है. साथ ही यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन भी हो जाता है. कृपया, बताएं कि इन टैबलेट्स का इस्तेमाल मैं कितने दिनों में कर सकती हूं?
– रुचिका मल्होत्रा, जयपुर.
जैसा कि आपने बताया आप काफ़ी समय से इस समस्या से परेशान हैं, ऐसे में सबसे पहले आपको अपना ब्लड शुगर लेवल चेक करवा लेना चाहिए, क्योंकि आपके बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और वेजाइनल इंफेक्शन (vaginal infection) के पीछे कोई और कारण हो सकता है. इसलिए टैबलेट लेने की बजाय पहले अपना टेस्ट करवाएं.

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 vaginal infection
मैं 16 वर्षीया कॉलेज स्टूडेंट हूं. मुझे बहुत ज़्यादा वेजाइनल डिस्चार्ज होता है. कई बार तो व्हाइट ड्रेस पहनना मेरे लिए मुसीबत बन जाता है. मेरी एक सहेली ने गायनाकोलॉजिस्ट से मिलने की सलाह दी है, पर मुझे डॉक्टर से मिलने में झिझक हो रही है. कृपया, मेरी मदद करें.
– कारुण्या महाजन, पुणे.
लड़कियों में वेजाइनल डिस्चार्ज होना सामान्य बात है, पर मेंस्ट्रुअल साइकल के मुताबिक़ हर महिला का वेजाइनल डिस्चार्ज भी अलग-अलग होता है. अगर डिस्चार्ज के कारण खुजली, जलन या बदबू नहीं आ रही है, तो डरने की कोई बात नहीं है. कॉटन अंडरगार्मेंट्स पहनें. बहुत ज़्यादा सेंटेड सोप इस्तेमाल न करें. प्राइवेट पार्ट को अच्छी तरह क्लीन करें और सूखा रखने की कोशिश करें. अगर फिर भी आपकी समस्या कम नहीं होती, तो आपको डॉक्टर से मिलना ही होगा.

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व्हाइट डिस्चार्ज की समस्या के 5 आसान घरेलू उपाय- देखें वीडियो: 

 

ज़रूरी नहीं आपको वेजाइनल इंफेक्शन हो!

वेजाइनल इंफेक्शन को लेकर महिलाओें में काफ़ी भ्रांतियां हैं. अगर आपको सामान्य से थोड़ा ज़्यादा डिस्चार्ज हो रहा है, तो ज़रूरी नहीं कि वो इंफेक्शन हो. पीरियड्स के क़रीब 10-15 दिनों बाद एग व्हाइट डिस्चार्ज होता है, जो कुछ दिनों में बदलकर गाढ़ा हो जाता है. अगर आपको फंगल इंफेक्शन होगा, तो वह गाढ़ा होगा और साथ में खुजली भी होगी. हाइजीन का पूरा ख़्याल रखें और बहुत ज़्यादा सोप के इस्तेमाल से बचें. वेजाइना को क्लीन करने के लिए माइल्ड सोप या इंटीमेट सोप का इस्तेमाल करें. अगर आपको डायबिटीज़ है और आप गर्भनिरोधक गोलियां ले रही हैं, तो इसकी संभावना बढ़ जाती है. ब्लड शुगर कंट्रोल में रखें, इससे बार-बार इंफेक्शन भी नहीं होगा. हमेशा कॉटन अंडरगार्मेंट्स ही पहनें.
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पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या प्रेग्नेंसी के दौरान ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है? (Personal Problems: Can a woman get breast cancer during pregnancy?)

breast cancer during pregnancy
मेरी चचेरी बहन 28 साल की है. वह प्रेग्नेंट है. शुरुआती जांच में डॉक्टर को आशंका है कि उसे ब्रेस्ट कैंसर (breast cancer) है. प्रेग्नेंसी के व़क्त ब्रेस्ट कैंसर और वो भी इतनी कम उम्र में? क्या यह मुमकिन है?
– नेहा देसाई, सोलापुर.
प्रेग्नेंसी के दौरान बे्रस्ट कैंसर (breast cancer) काफ़ी असामान्य है, पर जिनके घर में फैमिली हिस्ट्री हो, उन महिलाओं के लिए इसकी संभावना अन्य महिलाओं के मुक़ाबले 5-10% बढ़ जाती है. आमतौर पर प्रीनैटल चेकअप के दौरान डॉक्टर ब्रेस्ट्स भी चेक करते हैं, पर सभी महिलाओं को नियमित रूप से क्लीनिकली अपने ब्रेस्ट्स चेक करवाने चाहिए यानी डॉक्टर की सलाह पर समय-समय पर मैमोग्राफी कराते रहना चाहिए. ज़्यादातर मामलों में यह देखा गया है कि गांवों के मुक़ाबले शहरी महिलाएं इससे अधिक प्रभावित होती हैं.

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breast cancer during pregnancy
मैं 40 वर्षीया महिला हूं और पिछले एक साल से यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से पीड़ित हूं. पिछले एक साल में यह क़रीब पांच-छह बार हो चुका है. गायनाकोलॉजिस्ट ने सारे चेकअप्स के बाद सब नॉर्मल बताया, पर फिर भी इंफेक्शन बार-बार हो रहा है. मैं फिर से एंटीबायोटिक्स नहीं खाना चाहती. कृपया, उचित सलाह दें.
– पुनीता शुक्ला, मेरठ.
कभी-कभी अगर इंफेक्शन पूरी तरह ठीक न हो, तो वह फिर से हो सकता है. वहीं कुछ लोग थोड़ा आराम मिलते ही एंटीबायोटिक लेना बंद कर देते हैं, जिससे कोर्स पूरा नहीं होता और इंफेक्शन वापस से आ जाता है. चूंकि आप इस समस्या से काफ़ी दिनों से परेशान हैं, तो आपको यूरोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए. सिस्टोस्कोपी के ज़रिए वो आपका ब्लैडर आदि चेक करेंगे, जिससे इंफेक्शन के बार-बार होनेे का कारण पता चल जाएगा.

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5 स्टेप्स में करें सेल्फ ब्रेस्ट एक्ज़ामिनेशन

स्टेप 1: बिना कपड़ों के आईने के सामने खड़ी हो जाएं और हाथों को कूल्हे पर रखें. ध्यान से दोनों ब्रेस्ट्स को देखें कि कहीं उनके कलर और शेप में कोई फ़र्क़ तो नहीं आया है.
स्टेप 2: अब दोनों हाथों को ऊपर उठाकर देखें, कहीं कोई बदलाव तो नज़र नहीं आ रहा.
स्टेप 3: निप्पल्स को ध्यान से देखें, वो अंदर की तरफ़ धंसे हुए तो नहीं या उनसे किसी तरह का द्रव तो नहीं निकल रहा.
स्टेप 4: बेड पर लेटकर दाएं हाथ की उंगलियों से बाएं ब्रेस्ट को और बाएं हाथ की उंगलियों से दाएं ब्रेस्ट को सर्कुलर मोशन में चेक करें कि कहीं कोई गांठ तो नहीं.
स्टेप 5: अब बैठकर या खड़े होकर बिल्कुल स्टेप 4 के अनुसार ब्रेस्ट एक्ज़ामिन करें.
डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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पर्सनल प्रॉब्लम्स: एग्ज़ाम्स के व़क्त पीरियड्स अनियमित क्यों हो जाते हैं? (Personal Problems: Why do I have irregular periods during exams?)

irregular periods during exams
मेरी 16 वर्षीया भांजी के पीरियड्स (periods) वैसे तो नियमित हैं, पर अक्सर एग्ज़ाम्स के दौरान अनियमित हो जाते हैं और एग्ज़ाम्स के बाद वापस से सामान्य हो जाते हैं. क्या यह नॉर्मल है?
– विनिता मल्होत्रा, रायपुर.
परीक्षा के दौरान सभी बच्चे तनाव महसूस करते हैं, पर कुछ में उस तनाव का असर ज़्यादा दिखाई देता है. कुछ लड़कियों को तो परीक्षा के दौरान पीरियड्स (periods) ही नहीं आते, पर परीक्षा के बाद पीरियड्स अपने नियमित समय पर आने लगते हैं. दरअसल, तनाव के कारण शरीर में हार्मोंनल चेंजेज़ होते हैं, जो पीरियड्स को प्रभावित करते हैं. आपकी भांजी को इस तनाव से निपटना सीखना होगा. वो योग या एक्सरसाइज़ कर सकती है या फिर म्यूज़िक सुनकर भी ख़ुद को रिलैक्स रख सकती है. साथ ही पैरेंट्स को भी समझना होगा कि एग्ज़ाम्स के व़क्त बच्चों पर बहुत ज़्यादा दबाव न डालें.

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irregular periods during exams
कुछ ही महीने में मेरी दूसरी डिलीवरी है. दो साल पहले, पहली डिलीवरी के व़क्त डिलीवरी की तारीख़ के एक हफ़्ते बाद भी जब डिलीवरी नहीं हुई, तब डॉक्टर ने लेबर पेन शुरू करनेवाली दवाइयां दी थीं. मेरे डॉक्टर ने कहा है कि इस बार भी शायद मेरा लेबर पेन ख़ुद से शुरू न हो. क्या ऐसा ही होता है?
– श्रुति झा, दरभंगा.
आप अकेली नहीं हैं, जिसके साथ ऐसा हुआ है. ऐसा लगभग 7% महिलाओं के साथ होता है. चूंकि पिछली प्रेग्नेंसी के व़क्त ऐसा हुआ था, इसलिए दोबारा इसकी संभावना बनी हुई है. हालांकि हर प्रेग्नेंसी अलग होती है, फिर भी अभी आपके पास कुछ महीने हैं, डॉक्टर से संपर्क बनाए रखें.
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हैप्पी पीरियड्स के लिए टिप्स

  • रोज़ाना कम से कम दो लीटर पानी पीएं. शरीर हाइड्रेटेड रहेगा, तो वॉटर रिटेंशन का असर कम होगा और आप अच्छा महसूस करेंगी.
  • खाने में नमक और चाय-कॉफी की मात्रा कम कर दें.
  • डार्क चॉकलेट खाएं. इसमें मौजूद तत्व शरीर में सेराटॉनिन की मात्रा बढ़ा देते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन, थकान और मूड स्विंग्स से आपको राहत मिलती है.
  • अधिक रक्तस्राव या दर्द हो रहा हो, तो गर्म पानी की बॉटल से पेट के निचले हिस्से में सेंक करें, अच्छा लगेगा.
     
    डॉ. राजश्री कुमार
    स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
    [email protected] 

 

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पर्सनल प्रॉब्लम्स: क्या कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स से सर्वाइकल कैंसर हो सकता है? (can contraceptive pills cause cervical cancer?)

contraceptive pills cause cervical cancer
 मैं 40 वर्षीया महिला हूं. हाल ही में मैं रूटीन चेकअप के लिए गई थी, तब डॉक्टर ने मुझे पैप टेस्ट की बजाय एचपीवी (ह्यूमन पैपीलोमा वायरस) डीएनए टेस्ट करवाने की सलाह दी. यह क्या है? इसके क्या फ़ायदे हैं? और क्या यह पैप टेस्ट से बेहतर है? 
– दीपा कुमार, सिकंदराबाद.
एचपीवी डीएनए पैप टेस्ट से बेहतर है, क्योंकि यह कैंसर का कारण बननेवाले कई प्रकार के ह्यूमन पैपीलोमा वायरस को डिटेक्ट कर सकता है, जो पैप टेस्ट से मुमकिन नहीं है. आपसे मिले सैंपल को डॉक्टर एक लिक्विड कंटेनर में रखेंगे, जिसे लैब में प्रोसेस कर टेस्ट किया जाएगा. इस टेस्ट के ज़रिए समय से पहले कैंसर का कारण बननेवाले सेल्स के बारे में पता लगाया जा सकता है. यही कारण है कि आपके डॉक्टर ने आपको इस टेस्ट की सलाह दी है.

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contraceptive pills cause cervical cancer
मैं 27 वर्षीया हूं. 4 महीने पहले ही मेरी शादी हुई है, पर फ़िलहाल कुछ सालों तक मैं कंसीव नहीं करना चाहती, इसलिए कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स (contraceptive pills) लेती हूं, पर कुछ दिनों पहले ही मेरी एक सहेली ने बताया कि इसका इस्तेमाल गर्भाशय के कैंसर का कारण बनता है. क्या यह सच है?
– लक्ष्मी राणे, कोल्हापुर.
ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स बहुत ही प्रभावशाली गर्भनिरोधक होते हैं. यह एक मिथक है कि इससे गर्भाशय का कैंसर होता है, बल्कि यह गर्भाशय के कैंसर से आपकी सुरक्षा करता है. कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के हार्मोनल गुणों के कारण पिल्स लेनेवाली महिलाओं में गर्भाशय के कैंसर की संभावना, पिल्स न लेनेवाली महिलाओं के मुक़ाबले बहुत कम होती है. सर्वाइकल कैंसर के कई कारण हो सकते हैं, जैसे- सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ (ह्यूमन पैपीलोमा वायरस), मल्टीपल सेक्सुअल पार्टनर्स, धूम्रपान, कम उम्र में सेक्सुअली एक्टिव होना आदि.
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सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए ज़रूरी टेस्ट्स

35 साल की उम्र के बाद सभी महिलाओं को सर्वाइकल स्क्रीनिंग ज़रूर करवानी चाहिए. चाहे आप पैप टेस्ट करवाएं, विनेगर टेस्ट या फिर एचपीवी डीएनए टेस्ट. इन टेस्ट्स की मदद से समय से पहले कैंसर की संभावना का पता लगाया जा सकता है. अगर आपकी रिपोर्ट निगेटिव आती है, तो आप पांच साल बाद टेस्ट रिपीट कर सकती हैं. लेकिन अगर इस बीच कभी आपको बेवजह ब्लीडिंग हो, तो ये टेस्ट्स ज़रूर करवाएं. सर्वाइकल कैंसर को होने में क़रीब 10-15 साल लगते हैं, इसलिए अगर आप नियमित रूप से अपने टेस्ट्स करवा रही हैं, तो इससे आसानी से बचा जा सकता है. जितनी जल्दी इसका पता चलेगा, उतनी जल्दी इसकी रोकथाम हो सकेगी, इसलिए 35 साल की उम्र के बाद सभी महिलाओं को ये टेस्ट्स ज़रूर करवाने चाहिए.

 

 

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ

[email protected] 

 

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