happy love life

तुम मुझे अब पहले की तरह प्यार नहीं करते, तुम्हें अब मेरी परवाह कहां रहती है, तुम्हें तो मुझमें सिर्फ कमियां ही नज़र आती हैं… जैसे उलाहने देना पति-पत्नी के बीच आम बात है. क्या होती हैं पति-पत्नी की शिकायतें और प्यार में क्या चाहते हैं स्री-पुरुष? आइए जानते हैं.

Love Life

1) ख़ूबियां क्यों खामियों में बदल जाती हैं?
शादी के शुरुआती सालों में तो सब कुछ अच्छा लगता है, लेकिन साल-दो साल में ही मुहब्बत की स्क्रिप्ट कमज़ोर पड़ने लगती है. दूसरे शब्दों में कहें तो तुम्हारे दीदार से सुबह की शुरुआत हो, तुम्हारे पहलू में ही हर शाम ढले… के दावे धीरे-धीरे दम तोड़ने लगते हैं. शादी के बाद घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों के बोझ तले मुहब्बत अपना असर खोने लगती है और एक-दूसरे में सिर्फ ख़ूबियां ढूढ़ने वाले शख्स बात-बात पर एक-दूसरे की खामियां गिनाने लगते हैं.

2) क्यों टूटती हैं उम्मीदें?
एक-दूसरे पर दोषारोपण की एक ख़ास वजह होती है एक-दूसरे से ज़रूरत से ़ज़्यादा उम्मीदें, जिसमें महिलाएं पुरुषों से कहीं आगे होती हैं. पुरुष पत्नी के साथ वैसा ही व्यवहार करता है, जैसा उसने अपने पिता का मां के प्रति देखा था, लेकिन पत्नी उसे एक अच्छे दोस्त, बहुत प्यार करने वाले प्रेमी, जिम्मेदार पिता के रूप में देखना चाहती है. पत्नी अगर कामकाजी हो, तो वो उम्मीद करती है कि पति घरेलू जिम्मेदारियों में भी उसका साथ दे. यदि वो ऑफिस से आकर खुद को बहुत थका हुआ महसूस कर रही है, तो पति किचन के कामों में उसकी मदद करे, बच्चे के स्कूल की पैरेंट्स-टीचर मीटिंग के लिए समय निकाले, ज़रूरत पड़े तो अपने कपड़े खुद प्रेस कर ले… लेकिन ़ज़्यादातर पुरुष इन तमाम ज़िम्मेदारियों को बांटना नहीं चाहते, उन्हें लगता है कि घरेलू काम सिर्फ पत्नी की ज़िम्मेदारी है.

3) क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट सीमा हिंगोरानी के अनुसार- स्त्री-पुरुष को प्रकृति ने एक-दूसरे से बिल्कुल अलग बनाया है. स्त्रियां अपनी भावनाओं को आसानी से अभिव्यक्त कर लेती हैं, लेकिन पुरुषों के लिए ये इतना आसान नहीं होता. दूसरा फर्क़ ये भी है कि महिलाएं इमोशनल और ड्रीमी होती हैं, जबकि पुरुष पैक्टिकल होते हैं. पुरुष प्यार तो करता है, लेकिन बात-बात में उसे ज़ाहिर करना ज़रूरी नहीं समझता. हमारे पास ऐसे कई केस आते हैं जहां बीवी की शिकायत होती है कि पति उसका हाथ नहीं पकड़ते, ऑफिस जाते समय उसे किस नहीं करते. जबकि पुरुष की शिकायत होती है कि बीवी ज़रूरत से ़ज़्यादा उम्मीदें रखती है. एक केस तो ऐसा भी आया, जिसमें पत्नी को पति से ये शिकायत थी कि पति ने उसे एनिवर्सरी ग़िफ़्ट देने के बजाय पैसे थमा कर कह दिया कि अपने लिए ग़िफ़्ट ख़रीद लेना. वहीं पति महोदय की शिकायत थी कि पत्नी को उनके लाए तोहफे कभी पसंद नहीं आते, इसलिए उन्होंने पत्नी से ख़रीद लाने को कहा. यदि वह चाहती तो मैं उसके साथ चल सकता था. दरअसल, स्त्री-पुरुष के ब्रेन की वायरिंग ही अलग-अलग होती है. पत्नी चाहती है कि पति उसे दिन में 2-3 बार फोन करे, एसएमएस करे, जबकि पति को लगता है कि जब शाम को घर ही जाना है तो फ़ोन या एसएमएस की ज़रूरत क्या है.

यह भी पढ़ें: इस प्यार को क्या नाम दें: आज के युवाओं की नजर में प्यार क्या है? (What Is The Meaning Of Love For Today’s Youth?)

Couple Goals

4) नज़रिया अपना-अपना

  • बैंक कर्मचारी सागरिका शर्मा कहती हैं, बहुत खीज होती है जब ऑफिस टाइम पर पहुंचने के लिए सुबह जल्दी उठकर घर के सारे काम निपटाने पड़ते हैं और पति महोदय को बिस्तर पर चाय चाहिए होती है. उस पर उनके कपड़े, लंच बॉक्स, टाई, पेन सब कुछ हाथ में थमाने पड़ते हैं. कई बार इस बात को लेकर अनबन भी होती है, लेकिन इन पर तो कोई असर ही नहीं होता. आखिर थक-हारकर मुझे ही सारा कुछ करना पड़ता है. बच्चों का होमवर्क कराना भी इन्हें बोझ लगता है.
  • एक प्राइवेट फर्म में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत सार्थक मेहरा कहते हैं, औरतें वंडरलैंड से बाहर निकलना ही नहीं चाहतीं, उन्हें लगता है कि पति ज़िंदगीभर उनसे चांद-तारे तोड़ लाने की खयाली बातें करता रहे या फिर उनकी ख़ूबसूरती के कलमे पढ़े. हर दूसरे-तीसरे दिन पत्नी की शिकायत शुरू हो जाती है कि कितने दिन से कहीं घूमने नहीं गये, आप अब पहले की तरह बाय करके ऑफ़िस नहीं जाते, कभी डिनर पर ले जाने का नाम नहीं लेते… इन तमाम शिकायतों से बचने के लिए मैं जान बूझकर काम का बहाना बनाकर देर से घर लौटता हूं. ठीक है, शादी के शुरुआती दिनों में पति कुछ ज्यादा ही दरियादिली दिखा देते हैं, लेकिन ऐसा उम्रभर तो नहीं हो सकता, पर ये सब इन बीवियों को कौन समझाए.
  • ऐड एजेंसी में कार्यरत मेघना पुरी कहती हैं, पुरुषों की शिकायत होती है कि पत्नी को हमेशा उनसे शिकायत रहती है, लेकिन इसके पीछे वजह भी तो साफ है, क्योंकि तकलीफ़ भी उन्हीं को ज़्यादा होती है. आज ज़्यादातर घरों में औरतें फाइनेंशियल, इमोशनल, सारे काम संभाल रही हैं, इसके बावजूद उनकी स्थिति पहले जैसी, बल्कि पहले से बदतर हो गई है. उसकी एडिशनल ज़िम्मेदारियों को तो पति एक्सेप्ट कर लेते हैं, बाहरी दुनिया में उससे मॉर्डन अप्रोच भी रखते हैं, लेकिन जहां घर की बात आती है तो उन्हें बिल्कुल पारंपरिक पत्नी चाहिए होती है.
  • एक प्राइवेट फर्म में कार्यरत प्रणव मुखर्जी कहते हैं, जहां तक फ्रीडम की बात है, तो मुझे इसमें किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं. मैं प्राची (पत्नी) के पर्सनल मैटर में ख़ुद भी हस्तक्षेप नहीं करता, लेकिन जब वो इतनी स्मोकिंग क्यों करते हो, तुम्हारा यूं रात-रात तक दोस्तों में घिरे रहना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं, तुम्हारे ऑफिस की लड़कियां इतनी रात गये क्यों फोन करती हैं, इतना वल्गर एसएमएस किसने भेजा… ऐसी बेहूदा शिकायतें करती है तो मैं चिढ़ जाता हूं. भई मैं क्यों किसी के लिए अपनी ख़ुशी को दांव पर लगाऊं, फिर चाहे वो मेरी पत्नी ही क्यों न हो.

यह भी पढ़ें: कैसे जानें कि आपके पति को किसी और से प्यार हो गया है? (9 Warning Signs That Your Partner Is Cheating on You)

5) प्यार को प्यार ही रहने दो
प्यार जताने या एक-दूसरे पर दोषारोपण करने का सभी कपल्स का तरीक़ा भले ही अलग-अलग हो, लेकिन ये बात तो तय है कि जब भी पार्टनर ज़रूरत से ज़्यादा उम्मीद की जाती है, तब रिश्ते में कड़ुवाहट का सिलसिला शुरू हो जाता है. प्यार के इतिहास, भूगोल पर टीका-टिप्पणी किये बिना यदि प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो की तर्ज़ पर स़िर्फ महसूस किया जाए या निभाया जाए, तो शायद हम प्यार के इस ख़ूबसूरत रिश्ते का उम्रभर लुत्फ़ उठा सकते हैं.

6) कंसास यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि महिलाओं को अपनी प्रशंसा सुनना अच्छा लगता है. कॉम्प्लिमेंट्स या फ्लैटरिंग (प्रशंसा या चापलूसी) से महिलाओं में आत्मविश्वाछस बढ़ता है और वे अपने शरीर को लेकर हीनभावना की शिकार नहीं होतीं. शायद ये भी एक बड़ी वजह है पत्नी की पति से अपनी तारीफ़ की चाह रखने की.

7) ये है प्यार का केमिकल लोचा
रॉबर्ट फ्रेयर द्वारा किये गए प्रयोगों के अनुसार, जब किसी को प्यार हो जाता है, तो एक ख़ास तरह के न्यूरो केमिकल फिनाइल इथाइल अमीन की वजह से उसे प्रेमी/प्रेमिका में खामियां नज़र आना बंद हो जाता है. लेकिन यह रसायन हमेशा एक ही स्तर पर नहीं रहता. एक-दो साल बाद इसका स्तर शरीर में कम होता जाता है और चार-पांच साल बाद इसका प्रभाव शरीर पर बिल्कुल बंद हो जाता है. अतः इसके उतार-चढ़ाव का प्रभाव प्रेमियों के स्वभाव में भी साफ़ नज़र आता है. यानी जब प्रेम का उफान कम होने लगता है, तो एक-दूसरे की ख़ूबियां खामियों में बदलने लग जाती हैं.

Couple Goals

8) प्यार बढ़ाने के असरदार फॉर्मूले

  • ज़रूरत से ज़्यादा अपेक्षाओं से बचें.
  • प्यार करें, अधिकार जताएं, पर हकूमत न करें.
  • पति-पत्नी के परंपरागत फ्रेम से बाहर निकलकर अच्छे दोस्त बनें.
  • पज़ेसिव होने से बचें.
  • करीब रहें, पर इतना भी नहीं कि सांस लेना मुश्किल लगने लगे. रिश्तों के स्पेस को समझें.
    – कमला बडोनी

जिस तरह खाना बनाना एक कला है, ठीक उसी तरह रिश्तों को बनाए रखना भी एक कला है. रिश्तों की यह रसोई हमें हमारे दुख के समय सांत्वना देती है और ख़ुशियों के समय जीवन में मिठास भर देती है. हमारी कामयाबी पर हमारी पीठ थपथपाती है, तो हार पर हमारा सिर सहलाती है. रिश्तों की यह रसोई अपने स्वाद की विविधता के कारण हमेशा ही ख़ूबसूरत बनी रहेगी, पर आपको एक कुशल रसोइया बनना होगा. 

Romantic-Love-Couple-HD-Wallpaper-Download (1)
गर आपसे यह कहा जाए कि रिश्ते भी पकते हैं, उबलते हैं, कभी गर्म होते हैं, तो कभी आइस्क्रीम से ठंडे, तो क्या आप यक़ीन करेंगे? यह रिश्तों की रसोई भी बड़ी अजीब है. तरह-तरह के रिश्तों के पकवान रोज़ बनते हैं, तो कभी-कभी बिगड़ भी जाते हैं. रिश्तों की यह रसोई किसी कुशल हाथों में पड़ जाए, तो आप इन पकवानों के स्वाद का मज़ा लेते नहीं थकेंगे, पर वहीं रिश्ते अगर किसी नौसिखिए के हाथ पड़ जाएं, तो पूरी रसोई जलने का ख़तरा है.
इस रसोई का एक नियम है कि अगर कभी कोई पकवान बिगड़ भी जाए, तो उसे समय रहते ठीक करना रसोइए को आना चाहिए. रिश्तों की रसोई में नई-नई रेसिपीज़ बनाने वाले रसोइये का अनुभवी, समझदार, संवेदनशील व संयमी होना आवश्यक है. इसी रसोई से हमारा
घर-परिवार, समाज ख़ुशहाल है. इससे ही हमारे सगे-संबंधी हमसे जुड़े हुए हैं.

ये भी पढें: रिश्तों के लिए ज़रूरी हैं ये 5 रेज़ोल्यूशन्स

आजकल इस रसोई में रिश्तों के कुछ नए पकवान भी बन रहे हैं, पर पकवान चाहे कितने ही नए क्यों न हों, उन्हें स्वादिष्ट बनाने की रेसिपी वही पुरानी है. कहने का तात्पर्य यह है कि जिस तरह घर की रसोई के बिना हमारा घर चलना मुश्किल है, उसी तरह रिश्तों की रसोई के बिना या रिश्तों के बिना हमारा परिवार, समाज और हमारा जीवन चल पाना मुश्किल है, तो आइए ज़रा इस रसोई में झांकते हैं और देखते हैं कि आख़िर क्या है रिश्तों को ख़ूबसूरत बनाए रखने की रेसिपी.
हम कोई मशीन नहीं हैं, इसलिए हमेशा ग़लतियों की गुंजाइश बनी रहती है. हममें ग़ुस्सा, द्वेष, ईर्ष्या आदि सभी अवगुणों का भी समावेश है. इन सब का असर हमारे रिश्तों पर भी पड़ता है. रिश्ते बनाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है, उन्हें संभालकर रखना. जिस तरह आप खाने को रुचिकर बनाए रखने के लिए अलग-अलग रेसिपीज़ बनाते रहते हैं, उसी तरह हमारे रिश्तों को रुचिकर बनाए रखने के लिए भी कई रेसिपीज़ अर्थात् तरीक़ों का उपयोग करना पड़ता है.
जिस तरह खाने में हल्दी, नमक, मिर्च, मिठास सबका सही अनुपात में होना ज़रूरी है, ठीक उसी तरह रिश्तों में भी प्रेम की मिठास, नोकझोंक की मिर्च और रूठने-मनाने का नमक होना आवश्यक है. कोई भी रिश्ता कभी भी हमेशा अच्छा ही अच्छा नहीं हो सकता, उसमें थोड़ी-सी कड़वाहट तो आती ही है, तो क्या हमें अपने रिश्ते को उसी कड़वाहट के साथ छोड़ देना चाहिए या उसमें कुछ बदलाव लाकर उसे नया स्वरूप देना चाहिए. नोकझोंक, ग़ुस्सा अगर मर्यादा में रहे, तो आपके रिश्ते चटपटे बन जाएंगे. तो आइए सीखें रिश्तों की कुछ नई रेसिपीज़.
1. रिश्ते से बाहर निकलकर सोचें रिश्ते के बारे में
क्या हुआ, कुछ अजीब लगा, पर यह बड़ा कारगर उपाय है. अक्सर ऐसा होता है कि कुछ समय के बाद कितने भी सुमधुर रिश्ते क्यों ना हों, पर उसमें एक ठंडापन आ जाता है. तो अगर आपका कोई भी रिश्ता इस ठंडेपन से गुज़रने की कगार पर हो, तो अपने
रिश्ते पर थोड़ा-सा नींबू निचोड़ें. ख़ुद को उस रिश्ते से थोड़ा-सा दूर कर लें, पर याद रहे, इस प्रक्रिया में अपने आपको रिश्तेदारों से दूर ना करें. इस उपाय में नींबू का खट्टापन आपके रिश्तों की खटास दूर कर देगा.
2. तोड़ दें सन्नाटे की ब़र्फ
कभी-कभी ऐसा होता है कि कुछ रिश्ते हमसे रूठ जाते हैं. तब दो लोगों के बीच एक अनजानी-सी दीवार खड़ी हो जाती है. एक
अजीब-सी चुप्पी आ जाती है. ना किसी से कोई कुछ पूछता है और ना ही कोई कुछ बताता है. हालांकि यह दीवार दिखती नहीं है, पर होती है, तो इस ब़र्फ पर भावनाओं और संवाद का गर्म पानी डालें और इस ब़र्फ को पिघला दें.
3. अनुभवों का मसाला डालना ना भूलें
यह मसाला अगर हम समय-समय पर अपने रिश्तों में डालते रहें, तो रिश्तों का स्वाद हमेशा बना रहेगा. यह मसाला हमें हमारी
दादी-नानी के पास मिलेगा. समय-समय पर अपने बुज़ुर्गों से रिश्तों के बारे में थोड़ा-बहुत ज्ञान लेते रहना चाहिए. समय की कमी के चलते हमें बड़े-बुज़ुर्गों के पास बैठने का समय कम ही मिलता है, पर हमारे रिश्तों को ख़ूबसूरत बनाने के लिए यह बहुत ज़रूरी है. दादी-नानी की कहानियां स़िर्फ दिल बहलाने के लिए नहीं होतीं, उनमें कुछ ना कुछ सीख छुपी होती है. तो इन पुराने मसालों के
डिब्बों को खोलिए और अपने रिश्तों को नया ज़ायका दीजिए.

ये भी पढें: पहचानें अपने रिलेशनशिप की केमेस्ट्री

4. नोकझोंक का नमक और मनमुटाव की मिर्च
जिस तरह किसी भी खाने में नमक-मिर्च का होना बहुत आवश्यक है, उसी तरह किसी भी रिश्ते में नोकझोंक और मनमुटाव का होना आम है और कुछ हद तक ज़रूरी भी, क्योंकि यह तो हम सभी जानते हैं कि मनाने का मज़ा तभी आता है, जब कोई रूठा हुआ हो. इस रूठने-मनाने में रिश्ते की मिठास बनी रहती है. पर याद रहे, यह नमक-मिर्च स्वादानुसार ही होनी चाहिए, मतलब यह कि यह नोकझोंक और मनमुटाव सीमा में हो. इससे आपके रिश्ते को कोई स्थायी क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए. ऐसी कितनी ही मीठी नोकझोंक और मनमुटाव हमारे समाज और परिवारों में प्रचलित हैं, जैसे- देवर-भाभी, सास-बहू, ननद-भाभी, जीजा-साली, भाई-बहन आदि.
5. धीमी आंच पर पकने दें
जब नए रिश्ते बनें या पुराने रिश्ते को ही आप नया रूप देना चाह रहे हों, तो उन रिश्तों को थोड़ा समय दें. उन्हें प्रेम और भावनाओं की आंच पर धीरे-धीरे पकने दें. उसका अर्थ यह है कि किसी भी रिश्ते से उसके शुरुआती दौर में बहुत सारी अपेक्षाएं रखना ग़लत है. पहले उसमें विश्‍वास और प्रेम उत्पन्न होने दें. अपेक्षाएं उस रिश्ते को एक झटके में ख़त्म कर देंगी. यह ठीक उसी प्रकार है, जैसे आप रसोई जल्दी बनाने के लिए आंच को बहुत बढ़ा दें, जिससे आपका खाना ही जल जाए. रिश्ते एक दिन में नहीं बनते. इसमें समय लगता है, तो इसमें कोई जल्दबाज़ी ना करें.
6. दर्शनीय हो रिश्तों की परोसी गई थाली
खाना चाहे कितना भी स्वादिष्ट हो, पर जब तक उसे सलीके से परोसा ना जाए, तब तक उसे खाने का मन नहीं करेगा. उसी प्रकार आप किसी रिश्ते को बहुत गंभीरता से लेते हैं. किसी से बहुत प्यार करते हैं, किसी को लेकर चिंतित हैं, तो याद रखें कि आपकी कोई भी भावना व्यक्त किए बग़ैर सामनेवाले के पास ठीक तरी़के से नहीं पहुंचेगी. अपनी भावनाओं को सामनेवाले पर अच्छे से ज़ाहिर करना बहुत ज़रूरी है.
7. आख़िर में ज़रूरी है स्वीट डिश
चाहे खाना अच्छा बने या फिर बेस्वाद, पर अगर अंत में मीठा हो जाए, तो खाना कंप्लीट हो जाता है. कहने का तात्पर्य यह है कि अपने जीवन में रिश्तों की मिठास को ना तो भूलें और ना ही नज़रअंदाज़ करें. किसी भी बिगड़े रिश्ते को छोड़ देना हमेशा सबसे आसान विकल्प होता है, पर ध्यान रखें कि किसी भी रिश्ते को काटकर फेंकने से आपका जीवन अपंग हो जाता है, तो चाहे आपका कोई भी रिश्ता कितनी ही कड़वाहट से गुज़र चुका हो, पर उसमें अपनेपन की मिठास मिलाइए और अतीत की सारी कड़वाहट
भूल जाइए.

ये भी पढें: 6 AMAZING लव रूल्स हैप्पी लव लाइफ के लिए

 

– विजया कठाले निबंधे

कहते हैं, अपोज़िट अट्रैक्ट्स, मगर शादी के बाद ये अट्रैक्शन कहीं खो जाता है. कपल्स के रिश्ते कई बार इतने जटिल हो जाते हैं कि उसमें प्यार की गुंजाइश ही नहीं रह जाती. यदि आप अपने रिश्ते की नाज़ुक डोर को उम्रभर थामे रखना चाहते हैं, तो फॉलो करें ये लव रूल्स.

loving-couple-sitting-on-a-beach-covered-by-a-white-blanket_23-2147595916

ख़र्च करने की आदत

यदि आपको हमेशा लेटेस्ट ट्रेंड और फैशन के मुताबिक़ अपना वॉर्डरोब चेंज करने की आदत है और पति बस चार जोड़ी शर्ट और दो जोड़ी जूतों में ही रहना पसंद करते हैं, तो ज़ाहिर है आपकी ये अति ख़र्चीली आदत पति को बिल्कुल रास नहीं आएगी. वो आपके ख़र्च पर उंगली उठाएंगे, जिससे आपके बीच मनमुटाव हो सकता है. सुनैना कहती हैं, मुझे ऑनलाइन शॉपिंग की बुरी लत है, जिससे कई बार मैं ज़रूरत न होने पर भी चीज़ें मंगा लेती हूं, ये सोचकर कि अभी न सही, बाद में काम आएंगी, मगर मेरी ये आदत पति को बिल्कुल पसंद नहीं. इस बात को लेकर उनका मुझसे कई बार झगड़ा भी हो चुका है. वो बिना ज़रूरत के एक पैसा भी ख़र्च नहीं करना चाहते.
क्या कहती है स्टडी?
एक जैसी ख़र्च की आदत न होने पर कपल्स के बीच मनमुटाव ज़्यादा होता है, वो अपने रिश्ते से संतुष्ट नहीं होते. इसके विपरीत यदि पति-पत्नी दोनों ख़र्चीले हैं या फिर दोनों बहुत किफ़ायती हैं, तो उनके बीच मनमुटाव की गुंजाइश बहुत कम रहती है.

ये भी पढें: सेफ सेक्स के 20 + असरदार ट्रिक्स

मैं नहीं हम

शादी के बाद भले ही आपकी अलग-अलग पहचान हो, मगर बतौर कपल आप एक हो जाते हैं. जो कपल ङ्गमैंफ से ऊपर नहीं उठ पाते उनके रिश्ते में मुश्किलें आ ही जाती हैं और वो अपने रिश्ते से ख़ुश नहीं रहते. बातचीत या बहस के दौरान मैं की बजाय हम जैसे शब्दों का इस्तेमाल करनेवाले पति-पत्नी अन्य कपल्स की तुलना में ज़्यादा संतुष्ट और ख़ुश रहते हैं. रिश्तों की सफलता के लिए अब से आप भी मैं की बजाय हम कहना सीख जाइए.
क्या कहती है स्टडी?
जो कपल्स हम, हमारा जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, उनके बीच प्यार ज़्यादा होता है. उनके रिश्ते में ग़ुस्से और नेगेटिव बिहेवियर के लिए जगह नहीं होती. किसी मुद्दे पर सहमत न होने की स्थिति में उनका साइकोलॉजिकल स्ट्रेस लेवल भी कम होता है. वहीं यदि कपल्स मैं, तुम, मैंने जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो ये उनके बीच अलगाव और असंतुष्टि को दर्शाता है.

सकारात्मक सोच

ज़िंदगी के हर मोर्चे पर सफलता के लिए सकारात्मक सोच जितनी ज़रूरी है, उतनी ही ज़रूरी रिश्ते की सफलता के लिए भी है. पॉज़िटिव इंसान ये नहीं सोचता कि उसके पास क्या नहीं है, बल्कि जो है उसके लिए वो भगवान का शुक्रिया अदा करके ख़ुश रहता है. अपने रिश्ते को पॉज़िटिव बनाए रखने के लिए पार्टनर के प्रति आभार व्यक्त करें, एक-दूसरे की क़ामयाबी का साथ मिलकर जश्‍न मनाएं, फन एक्टिविटी साथ में एन्जॉय करें, पार्टनर को स्पेशल फील कराएं.
क्या कहती है स्टडी?
सकारात्मक सोच रखने वाले कपल्स के रिश्ते मज़बूत बनते हैं और वो पार्टनर से संतुष्ट भी रहते हैं. सकारात्मक सोच का मतलब ये नहीं है कि वो समस्याओं को नज़रअंदाज़ करते हैं, बल्कि सकारात्मक सोच से उनके विचारों को विस्तार मिलता है, जिससे दोनों मिलकर किसी भी समस्या का आसानी से हल निकाल लेते हैं.

बेड पर रहें बेस्ट

हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए एक्टिव सेक्स लाइफ बेहद ज़रूरी है. जो कपल्स सेक्सुअली कम एक्टिव होते हैं, वो अपने रिश्ते से भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं रहते. वहीं दूसरी ओर सेक्सुअली एक्टिव पति-पत्नी का रिश्ता मज़बूत व संतुष्ट रहता है. कुछ लोगों को लगता है कि बढ़ती उम्र के साथ सेक्स लाइफ का रोमांच कम हो जाता है, जबकि ऐसा नहीं है. इसके विपरीत ङ्गप्रैक्टिस मेक्स मैन परफेक्टफ की तर्ज पर कपल्स की सेक्स लाइफ बढ़ती उम्र के साथ और परफेक्ट होती जाती है.
क्या कहती है स्टडी?
30, 40 की बजाय 50 साल की उम्र में पुरुष अपनी सेक्स लाइफ को ज़्यादा एन्जॉय करते हैं, जिससे पार्टनर के साथ उनका रिश्ता भी मज़बूत बनता है.

थैंक्यू कहना भी है ज़रूरी

छोटा-सा शब्द थैंक्यू आपके रिश्ते के लिए बहुत अहम् साबित हो सकता है. ज़रा याद करिए, शादी के शुरुआती दिनों में पार्टनर द्वारा कोई काम करने पर जब आप उन्हें थैंक्यू कहते थे, तो कैसे उनके चेहरे पर मुस्कान बिखर जाती थी. पति-पत्नी यदि एक-दूसरे की मदद की एवज़ में एक-दूसरे के प्रति आभार प्रकट करें, तो निश्‍चय ही ये उनके रिश्ते को सकारात्मक दिशा में ले जाता है और उनके बीच बॉन्डिंग गहरी होती है. अतः इस छोटे शब्द को छोटा समझने की भूल न करें और झट से हमसफ़र को थैंक्यू कहकर स्पेशल फील कराएं.
क्या कहती है स्टडी?
दिल से पार्टनर को कहा गया थैंक्यू शादीशुदा ज़िंदगी को ख़ुशहाल और नई ऊर्जा से भर देता है. जब कपल्स के बीच किसी तरह का मनमुटाव होता है, तो ऐसे नकारात्मक माहौल में किसी छोटी-सी बात के लिए भी दिल से बोला गया थैंक्यू रिश्ते के लिए मरहम का काम करता है.

ये भी पढें: जानें प्यार की एबीसी

साथ हंसना भी है फ़ायदेमंद

हंसना भला कौन नहीं चाहता और हंसी से तनाव भी घटता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पार्टनर के साथ किसी बात/जोक पर हंसना आपके रिश्ते की सेहत के लिए भी अच्छा है? अतः अकेले में कोई जोक/मैसेज पढ़कर मुस्कुराने की बजाय उसे पार्टनर के साथ शेयर करें और दोनों दिल खोलकर हंसें. इससे सेहत और रिश्ता दोनों बने रहेंगे.
क्या कहती है स्टडी?
साथ हंसने वाले कपल्स का रिश्ता मधुर और मज़बूत होता है. अध्ययन के अनुसार, ऐसे कपल्स एक-दूसरे के प्रति ज़्यादा समर्पित और संतुष्ट रहते हैं. कपल्स का एक साथ हंसना उनके रिश्ते की गहराई और अपनेपन को बढ़ाने के लिए टॉनिक का काम करता है. अध्ययन से ये भी साबित हुआ है कि जो पुरुष पार्टनर अपनी हमसफ़र को हंसने के लिए प्रेरित करते हैं उनका पार्टनर से गहरा लगाव होता है.

– कंचन सिंह