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बचें इन छोटी-छोटी बातों से, जो बिगाड़ सकती हैं आपका रिश्ता (Some Common Habits That Can Ruin Your Relationship)

किसी भी रिश्ते (Common Habits That Can Ruin Your Relationship) में आए फासले या बिखराव का विश्‍लेषण किया जाए, तो कोई बड़ी वजह कम ही सामने आएगी. दरअसल, रिश्तों में दूरियां अक्सर उन छोटी-छोटी बातों के कारण आती हैं, जिन्हें हम या तो नज़रअंदाज़ कर देते हैं या फिर हमें पता ही नहीं होता.

Common Habits That Can Ruin Your Relationship

हम अपने रिश्तों की मज़बूती और प्यार के लिए न जाने क्या-क्या करते हैं. शादी की सालगिरह याद रखते हैं, अपने साथी को महंगा तोहफ़ा देते हैं, शानदार पार्टी का आयोजन करते हैं, साल में दो-तीन बार बाहर घूमने जाते हैं आदि. लेकिन इन सब के बावजूद कई बार रिश्ते में नीरसता आने लगती है. और फिर एक समय ऐसा आता है कि रिश्ते बिखर जाते हैं. रिश्तों में बड़ी-बड़ी बातों को चाहे तो आप भूल जाएं, पर रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातें आपके रिश्ते की ना स़िर्फ उम्र, बल्कि उसकी गुणवत्ता को भी बढ़ा सकती हैं. तो आइए, जानें रिश्ते से जुड़ी उन छोटी-छोटी बातों को, जिन्हें अपनाकर आप रिश्तों को और बेहतर बना सकते हैं.

ख़ुशगवार शुरुआत

– क्या आपको याद है कि आख़िरी बार कब आप सुबह-सुबह मुस्कुराकर उठे थे.
– चाहे बात आपको छोटी लगे, पर इसका आपके रिश्ते पर बहुत असर पड़ता है.
– यदि अपने साथी के साथ आपकी सुबह चिड़चिड़ी या बुझी-सी होती है, तो समझ लीजिए कि यह छोटी-सी बात पहला क़दम है आपके रिश्ते के बीच आनेवाले फासलों का.

तुलनात्मक रवैया

– जब रिश्ते की उम्र एक पड़ाव पार कर लेती है, तो वह स्थिति आती है, जब साथी एक-दूसरे में कुछ नया ढूंढ़ने की कोशिशें छोड़ देते हैं.
– इसकी बजाय वे एक-दूसरे में क्या नहीं है, उसे ढूंढ़ने में लग जाते हैं.
– तब होने लगती है तुलना. ङ्गतुमने देखा रवि का थोड़ा पेट बढ़ा, तो वह फ़ौरन जिम जाने लगा और एक तुम हो जो कुछ करते ही नहीं.
र्ीं सीमा ने देखा बालों में स्ट्रेटनिंग करवाई है, तुम ऐसा कुछ ट्राई क्यों नहीं करती?
– इस तरह की तुलनाएं धीमे ज़हर की तरह होती हैं.
– आपको ऐसा लग रहा होगा कि यह छोटी-सी बात है, पर जनाब यही हल्की दरार अगर समय रहते ना भरी गई, तो खाई बन जाती है.

जीतने की कोशिशें

Common Habits That Can Ruin Your Relationship
– आपकी लाइफ को थोड़ा रिवाइंड करते हैं और उस समय में जाते हैं, जब आप अपने साथी को छुप-छुपकर देखा करते थे.
– किसी ना किसी तरी़के से उसके प्यार को जीतने की कोशिश करते थे.
– लेकिन जैसे-जैसे आपका प्यार आपको मिलता जाता है, वैसे-वैसे कोशिशें कम हो जाती हैं.
– एक समय ऐसा भी आता है, जब यह दिल जीतने की कवायद पूरी तरह से ख़त्म हो जाती है.
– हम यह भूल जाते हैं कि चाहे पेड़ कितना ही बड़ा क्यों ना हो जाए, उसे पानी और धूप की ज़रूरत हमेशा रहती है.
– यदि आप अपने साथी की तरफ़ ध्यान नहीं देते या उसके प्रति उदासीन हो गए हैं, तो रिश्ते को उदासीन होने में समय
नहीं लगेगा.

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रुचियों का ख़त्म होना

– चाहे रिश्ते कितने ही मज़बूत क्यों ना हों, छोटे-मोटे तनाव तो होते ही हैं, पर आगे का रिश्ता इस बात पर निर्भर करता है कि आप उस मनमुटाव को कितना जल्दी भूलकर फिर से एक साथ आते हैं.
– अब ऐसी किसी भी विकट परिस्थिति में आपका ख़ुशमिज़ाज होना आपकी मदद करेगा.
– इसके लिए आपके शौक़ मददगार सिद्ध होंगे.
– फिर वह चाहे गाना-बजाना हो, डांस हो या फिर कुछ और, यह आपके व्यक्तित्व को नए आयाम देता है और तनाव को कम करता है.
– यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो तनाव कम होने की बजाय बढ़ता ही जाएगा.

पैसों की चर्चा

– यह बात सच है कि गृहस्थी व जीवन को
चलाने के लिए पैसे की ज़रूरत होती है, पर इसे ही सब कुछ मान लेना सही नहीं है.
– इसके लिए दिन-रात अपने साथी के सामने घर के बजट व पैसों को लेकर बात करेंगे, तो उसका आपसे विरक्त हो जाना तय है.
– आपको शायद लगेगा कि यह बात आप अपने परिवार के लिए ही तो कर रहे हैं, पर ऐसा बार-बार करने से आपके साथी की आपमें रुचि कम हो जाएगी.
– इसलिए पैसों की चिंता को अपने रिश्ते के बीच की दीवार ना बनने दें.

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समर्पण की अति

– अक्सर ही हम कहते हैं कि रिश्ते में समर्पण होना चाहिए, पर सवाल यह है कि कितना होना चाहिए.
– क्यों आप चौंक गए न, हां यह सही है कि किसी भी रिश्ते में ज़रूरत से ज़्यादा समर्पण अच्छा नहीं होता.
– जहां ज़रूरत से ज़्यादा समर्पण होता है, वहां आप अपना ख़ुद का व्यक्तित्व खो देते हैं.
– अपनी एक अलग पहचान को बनाए रखना बहुत ज़रूरी है.
– दूसरे को प्यार करने का मतलब यह नहीं होता कि आप ख़ुद से प्यार करना बंद कर दें.
– अक्सर ही यह देखा गया है कि किसी दूसरे की पसंद-नापसंद का ख़्याल रखते-रखते हम अपनी पसंद को भूल ही जाते हैं.
– ऐसा अक्सर महिलाओं के साथ होता है, पर अगर हम देखें, तो पाएंगे कि आप जब ख़ुद को महत्व देना बंद कर देते हैं, तब आपका साथी भी आपको तवज्जो नहीं देता.

ज़िम्मेदारियों की झिकझिक

– कभी-कभी ज़िम्मेदारियों का बोझ रिश्तों की नाज़ुक डोर को संभाल नहीं पाता.
– हमेशा अपने साथी से किसी न किसी काम या ज़िम्मेदारी को लेकर नोंक-झोंक रिश्ते में रूखापन ले आती है.
– ज़िम्मेदारियां हमेशा बांटनी चाहिए, पर उन्हें निभाने के लिए किसी के पीछे लग जाना या हमेशा यह याद दिलाते रहना कि उसने कोई काम नहीं किया, यह उन जिम्मेदारियों को बोझिल बना देता है.
– किसी भी काम को अपने रिश्ते से ज़्यादा महत्व देना लंबे समय में रिश्ते के लिए ख़तरा है.

नियंत्रण की कोशिश

– रिश्ते में कुछ समय के बाद हम अपने साथी को नियंत्रित करने की कोशिश करने लगते हैं.
– और यह अक्सर ही अनजाने में होता है, इसलिए अपने बर्ताव पर हमेशा ख़ुद की ही कड़ी नज़र रखें.
– ख़ुद को अपने साथी पर कभी भी हावी ना होने दें.
– यदि नियंत्रित करना ही है, तो परिस्थितियों को करें.

कहीं का ग़ुस्सा, कहीं पर

– यदि यह आपकी आदत है, तो चाहे यह आपको कोई बड़ी बात ना लगे, पर आपके साथी को यह रिश्ते से दूर करने के लिए काफ़ी है.
– बाहर के तनाव के कारण घर आकर अपने साथी पर बरसना रिश्ते में दूरियां लाने का काम करता है.
– अपने तनावों के लिए अपने साथी को दोष देना रिश्ते को गर्त में धकेलना है.
– आपसी प्यार व सामंजस्य न केवल रिश्तों को मज़बूती देते हैं, बल्कि उसकी गर्माहट को भी बनाए रखते हैं. इसी के साथ उपरोक्त छोटी-छोटी बातों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए, तो आपके रिश्ते में दूरियां कभी भी पनपने नहीं पाएंगी.

– विजया कठाले निबंधे