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माइग्रेन और सिरदर्द के लिए असरदार होम रेमेडीज़(Super Efffective Home Remedies For Migraine and Headache)

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आप अक्सर माइग्रेन या सिररर्द से परेशान रहते हैं तो पेनकिलर्स लेने की बजाय कुछ होम रेमेडीज़ ट्राई करें. ये फौरन आराम तो देते ही हैं. इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता.

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सिरदर्द होने पर क्या करें?

– सिरदर्द का मुख्य कारण डिहाइड्रेशन और लो ब्लड शुगर है. इसलिए पर्याप्त पानी पीएं और संतुलित आहार लें.
– अगर आपको अक्सर सिरदर्द की शिकायत रहती हो तो एक डायरी रखें और उसमें नोट करें कि कब-कब सिरदर्द हुआ.
– जैसे ही सिरदर्द महसूस हो तुरंत एक्शन लें. कुछ खा या पी लें. अगर लंबे समय से कंप्यूटर के सामने काम कर रहे हों तो छोटा-सा ब्रेक लेकर टहल आएं. इससे दर्द बढने नहीं पाएगा.
– पानी में घुलनेवाला कोई पेनकिलर लें या किसी फिज़ी ड्रिंक के साथ इन्हें लें, ताकि जल्दी राहत मिले. लेकिन ध्यान रहे, सिरदर्द के लिए ह़फ़्ते में दो या तीन दिन से ज्यादा पेनकिलर्स न लें.

 

माइग्रेन हो तो अपनाएं ये होम रेमेडीज़

– माइग्रेन में रोगी के पूरे सिर में दर्द न होकर आधे भाग में ही दर्द होता है. यह दर्द काफ़ी तेज़ होता है और यह 10-15 मिनट से लेकर 1 घंटे तक हो सकता है. यह बेहद तकलीफ़देह होता है. ऐसे में यहां हम कुछ घरेलू टिप्स दे रहे हैं, जो इस दर्द से छुटकारा पाने में आपकी मदद करेंगे.
– लहसुन को पानी में पीसकर लेप तैयार करें. इसे कनपटी पर लगाने से काफ़ी राहत मिलती है.
– लहसुन पीसकर उसका रस निकाल लें. रस की 1-1 बूंद दर्द की तरफ़वाली नाक में टपकाने से भी दर्द में आराम मिलता है.
– 1 ग्राम कपूर व 10 ग्राम नौसादर को एक साथ पीसकर मिश्रण बना लें. माइग्रेन के दौरे के दौरान इस चूर्ण को नकसीर की तरह प्रयोग करें.
– गाय के घी की 2-2 बूंदें नाक के दोनों छिद्रों में डालने से बहुत आराम मिलता है. ध्यान रखें कि इस प्रयोग के कुछ समय पश्‍चात् तक लेटे रहना चाहिए.
– राई के दानों को बारीक पीसकर लेप बना लें और उसे दर्दवाले हिस्से पर लगाएं.
– सूर्योदय से पहले रोज़ाना 11 कालीमिर्च के दानों को पीसकर सेवन करने और उसके बाद चीनी का शर्बत पीने से इस रोग में आश्‍चर्यजनक रूप से लाभ मिलता है.
– शतावर की जड़ को पानी में पीसकर घोल तैयार कर लें. इस घोल को समान मात्रा में तिल के तेल में मिलाकर गर्म करें. जब पानी पूरी तरह जल जाए और स़िर्फ तेल बचा रहे, तब इसे ठंडा कर लें. इस तेल की मालिश सिर में धीरे-धीरे रोज़ाना करने से बहुत फ़ायदा होता है.
– दूध और अरहर के पत्तों को पानी में पीसकर उसके रस की दो-दो बूंद नाक के दोनों छिद्रों में टपकाने से लाभ होगा.

 

सिरदर्द के लिए ईज़ी रेमेडीज़

– पुदीने की पत्तियों का रस निकालकर माथे और कनपटी पर लगाने से सिरदर्द में आराम मिलता है.
– तुलसी की पत्तियां चबाएं. सिरदर्द में आराम मिलेगा.
– 1-1 टीस्पून अदरक का रस और नींबू का रस मिलाकर दिन में एक-दो बार लें.
– अदरक का एक टुकड़ा मुंह में रखें. या अदरक वाली गोली खा लें. आराम मिलेगा.

 

सिरदर्द-बदनदर्द के लिए आज़माएं ये होम टिप्स (Home Remedies for Headache and Body Pain)

जानें अपने सिरदर्द को(Types of Headaches: Causes & How to Get Rid of Them)

Types of Headaches

बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव से सिरदर्द की शिकायत आम बात हो गई है. सिरदर्द होने के अनेक कारण होते हैं, लेकिन यदि इन कारणों की पूरी और सही जानकारी न हो, तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं. सिरदर्द के प्रकार, कारण और उनकी सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं मुंबई के जाने-माने न्यूरो सर्जन डॉ. विनायक जोशी.

Types of Headaches

किन कारणों से होता है सिरदर्द?

1 मस्तिष्क के आसपास के भाग (जिसे डूयामेटर कहते हैं) के खिंचने के कारण सिर में दर्द होता है.
1 मस्तिष्क के ब्लड वेसल्स की दीवारों में नर्व एंडिंग होते हैं, जिनके खिंचने से सिर में दर्द होता है.
1 नाक के आसपास हवा की थैलियां होती हैं, जिसे साइनस कहते हैं. इसमें सूजन आने के कारण सिर में दर्द होता है.
1 स्पॉन्डिलाइटिस के कारण भी सिरदर्द होता है.

सिरदर्द के प्रकार
1. माइग्रेन

आज की व्यस्त और तनावभरी जीवनशैली में माइग्रेन एक आम समस्या है, जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक होता है. माइग्रेन सिर के एक हिस्से में या दोनों तरफ़ होता है. यह दर्द 4 से 12 घंटे तक रहता है. कभी-कभी तो 12 घंटे से ज़्यादा देर तक भी हो सकता है.

 

कारण

मस्तिष्क को ऑक्सीजन और ग्लूकोज़ की आवश्यकता होती है और ये दोनों ही न मिलने पर ब्लड वेसल्स का आकार धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. एक स्तर के बाद इन वेसल्स में खिंचाव आना शुरू हो जाता है, जिसके कारण माइग्रेन होता है. इसके अलावा माइग्रेन के कुुछ अन्य कारण भी हैं:
– हार्मोंस में परिवर्तन.
– नींद पूरी न होना और अधिक समय तक भूखा रहना.
– अधिक तनाव और खान-पान की ग़लत आदतें.
– आनुवांशिक कारण.
लक्षण

– जी घबराना, उल्टी होना, सिर भारी होना आदि.
– फोटोफोबिया (लाइट) और मोनोफोबिया (आवाज़) सहन न होना.
– कान और गर्दन के आसपास की नसें फूली हुई लगती हैं और तेज़ दर्द महसूस होने लगता है.
– दर्द की तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ने लगती है.
सावधानियां

– 4 घंटे से ज़्यादा देर तक भूखे न रहें.
– अधिक से अधिक पानी पीएं.
– एनीमिया से बचें, क्योंकि हीमोग्लोबिन की कमी होने पर शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है.
– शरीर में शुगर का लेवल कम न होने दें. शुगर की मात्रा कम होने के कारण ब्लड सेल्स भी कम हो जाते हैं, जिसके कारण माइग्रेन होता है.
– मानसिक तनाव से बचें.
– अधिक दर्द होने पर डॉक्टरी सलाह के अनुसार प्रिवेंटिव मेडिसिन लें.

2. टेंशन हेडेक

माइग्रेन के बाद टेंशन हेडेक एक आम बीमारी है, जो 90 फीसदी लोगों को होती है. यह दर्द पुरुष और महिला, दोनों में समान रूप से होता है. इस दर्द में रिलैक्सेशन टेकनीक और फिज़ियोथेरेपी से काफ़ी राहत मिलती है.
कारण

– चश्मे का नंबर बढ़ना.
– शारीरिक व मानसिक तनाव.
– ग़लत पोश्‍चर में बैठना.
– एंज़ाइटी, थकान और अधिक शारीरिक श्रम.
– दांतों की बीमारियां.
लक्षण

– आंखों का भारी होना.
– पूरे सिर या बालों की जड़ों में दर्द होना.
– कान, गले और जबड़े की मसल्स में ऐंठन होना.
– सिर का फीते से बंधा हुआ महसूस होना.
सावधानियां

– मानसिक तनाव से बचें.
– ज़्यादा देर तक कंप्यूटर पर काम न करें.
– कंप्यूटर पर काम करते समय सही पोश्‍चर में बैठें.
– बहुत ठंडे ड्रिंक्स और फूड खाने से भी टेंशन हेडेक हो सकता है, इसलिए बहुत अधिक ठंडे ड्रिंक्स और फूड न खाएं.

3. मेडिकेशन ओवरयूज़ हेडेक/रिबॉन्ड हेडेक

कई बार कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स से मस्तिष्क की नसें फूल जाती हैं, विशेष रूप से हार्ट और ब्लड प्रेशर की दवाओं के कारण सिर में दर्द शुरू हो जाता है. यह दर्द भी माइग्रेन की तरह कनपटी के आसपास होता है.
कारण

आम पेन किलर दवाएं, जैसे- एस्प्रिन आदि का रोज़ाना अधिक मात्रा में सेवन.
लक्षण

– बेचैनी, गर्दन में दर्द होना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन और नाक बंद होना.
– सुबह उठते ही सिरदर्द शुरू होता है, जो दिनभर बना रहता है.
सावधानियां

– अधिक मात्रा में दर्द निवारक दवाएं लेने से शरीर की दर्द सहन करने की क्षमता कम हो जाती है. इसलिए जब तक बहुत ज़रूरी न हो, तब तक ये दर्द निवारक दवाएं न लें.
– सप्ताह में एक या दो से अधिक बार सिरदर्द की गोलियां न लें.
– डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं ही लेें.
– दर्द निवारक दवाएं लेते समय कैफीन बेस्ड प्रोडक्ट्स न लें.
– एक्सरसाइज़, वॉक और प्राणायाम करें.

4. क्लस्टर हैडेक

यह सिरदर्द भी माइग्रेन की तरह अधिक पेनफुल होता है, लेकिन महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को अधिक होता है. यह दर्द एक आंख या दोनों आंखों के आसपास होता है. दर्द तेज़ होने पर आंखों से पानी निकलने लगता है. कई बार यह दर्द नेज़ल कंजेशन और नाक बहने के कारण भी होेता है. यह दर्द 2 तरह का होता है- एपिसोडिक और क्रॉनिक हेडेक. एपिसोडिक हेडेक एक-तीन महीने के अंतराल में होता है, जबकि क्रॉनिक हेडेक जल्दी-जल्दी होता है.
कारण

अल्कोहल या सिगरेट आदि की तेज़ गंध से सिरदर्द होना.

लक्षण

– आंखों से पानी आना.
– आंखों में सूजन और तेज़ दर्द होना.
– नाक का बहना या बंद होना.
– थकान व बेचैनी महसूस होना.
– पलकों के आसपास सूजन होना.
– सिर के एक तरफ़ दर्द होना.
– कुछ लोगों को कनपटी के आसपास भी दर्द होता है.
सावधानियां

– क्लस्टर हेडेक होने पर तुरंत प्रिवेंटिव मेडिकेशन लें.
– तेज़ गंध, जैसे- अल्कोहल, सिगरेट या परफ्यूम का इस्तेमाल न करें.
– क्लस्टर हेडेक से बचने के लिए तनाव को कम करें.
– पर्याप्त नींद लें.
– सिरदर्द के दौरान अल्कोहल का सेवन न करें. क्योंकि इसकी तेज़ गंध से सिरदर्द हो सकता है.

5. साइनस हेडेक

नाक के आसपास की हड्डियों में फ्रोन्टल, मैग्ज़ीलरी आदि जैसे एयर बैग्स होते हैं, जिन्हें साइनस कहते हैं. इन एयर बैग्स में सर्दी-ज़ुकाम और एलर्जी के कारण सूजन आने पर फोरहेड, चीकबोन और नाक के टी ज़ोन में दर्द होता है, जिसे साइनस हेडेक कहते है.
कारण 

साइनस हेडेक मुख्यत: साइनस इंफेक्शन या एलर्जी (कोल्ड/फ्लू) के कारण होता है.
लक्षण

– नाक बहना, चेहरे पर सूजन और बुख़ार आना.
– आंख, गाल और जबड़े के आसपास दर्द होना.
– गले में खराश, हल्का-सा बुख़ार, बेचैनी, थकान, नेज़ल कंजेशन आदि.
– नाक से पीले और हरे रंग का डिस्चार्ज होना.
सावधानियां

साइनस हेडेक होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
– बार-बार साइनस हेडेक होने पर ईएनटी स्पेशलिस्ट को दिखाएं, वरना स्थिति गंभीर होने पर ऑपरेशन भी करना पड़ सकता है.
– एक्सरसाइज़, प्राणायाम और फिज़ियोथेरेपी से भी साइनस हेडेक में काफ़ी राहत मिलती है.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

सिरदर्द दूर करने के घरेलू उपाय

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सिरदर्द अपने आप में कोई बीमारी न होकर अन्य विकारों का एक लक्षण मात्र है. मानसिक तनाव, मांसपेशियों के सिकुड़ने, ख़ून की नलिकाओं के फैलने या कुछ रासायनिक पदार्थों के कारण सिरदर्द हो सकता है. सिरदर्द अधिकतर अजीर्ण, बदहज़मी, कब्ज़, चिंता, आंखों पर ज़ोर पड़ने, नींद पूरी न होने या अधिक काम करने के कारण होता है. ज़ुकाम, बुख़ार, उच्च रक्तचाप आदि बीमारियों के कारण भी सिरदर्द होने लगता है.

घरेलू नुस्ख़े

* सुबह उठने के साथ ही खाली पेट सेब पर नमक लगाकर खाएं. फिर ऊपर से गुनगुना पानी या एक प्याला हल्का गरम दूध पी लें. कुछ ही दिनों के भीतर सिरदर्द गायब हो जाएगा.

* कितना भी भयंकर सिरदर्द या किसी भी कारण से सिरदर्द हो, आप लहसुन की एक कली छीलकर आराम से चबाइए और धीरे-धीरे निगल जाइए. कुछ ही देर में सिरदर्द छूमंतर हो जाएगा.

* दालचीनी को पीसकर माथे पर लेप करने से सिरदर्द दूर हो जाता है.

* रात को बादाम की गिरी भिगोकर रखें. सुबह उसे पीसकर व घी में भूनकर गर्म पानी में मिलाकर पी लें. इससे पुराना सिरदर्द भी ठीक हो जाएगा.

* सर्दी-ज़ुकाम में सिरदर्द होने पर साबूत धनिया व मिश्री का काढ़ा पीने से लाभ होगा.

* पेट में गैस होने के कारण यदि सिरदर्द या चक्कर आता हो, तो गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पीने से तुरंत आराम मिलता है.

* सिरदर्द के समय जिस नथुने से सांस चल रही हो, उसे रुई से बंद करके दूसरे नथुने में सरसों का तेल लगाकर धीरे-धीरे सांस लें, सिरदर्द गायब हो जाएगा.

* लहसुन की कलियों को पीसकर कनपटी पर उसका लेप करने से सिरदर्द दूर होता है.

* गर्मी के कारण यदि सिरदर्द हो, तो लौकी का गूदा निकालकर ख़ूब बारीक़ करके माथे पर लेप करें. घंटेभर में ही सिरदर्द दूर हो जाएगा.

* तुलसी के पत्तों को पीसकर माथे पर लेप करने से सिरदर्द में आराम मिलता है.

* सूखे आंवले 10 दिन तक सरसों के तेल में डुबोकर रखें. यह तेल सिर में लगाने से सिरदर्द दूर हो जाएगा.

* एक कप दूध में पिसी इलायची मिलाकर पीने से सिरदर्द में आराम मिलता है.

* हरड़, बहेड़ा, आंवला, हल्दी, नीम की छाल व गिलोय- इनका काढ़ा बनाकर पीने से पुराना व भयंकर सिरदर्द भी ठीक हो जाता है.

* सुबह खाली पेट जलेबियां दूध में डालकर खाएं, सिरदर्द ठीक हो जाएगा.

* सोंठ को पानी या दूध में घिसकर उसका नस्य (सूंघने) लेने व लेप करने से सिरदर्द व आधासीसी (माइग्रेन) का दर्द भी दूर होता है.

* यदि गर्मी या ठंड की वजह से सिरदर्द हो रहा हो, तो 2-3 तेजपत्ते व उसके 1-2 डंठलों को पानी में पीसकर हल्का गर्म कर लें व सिर पर मोटा लेप करें. एक बार में दर्द कम न हो, तो दोबारा लेप करें. इससे सिरदर्द में अवश्य लाभ होता है.

* आंवले के चूर्ण का लेप सिर पर लगाने से सिरदर्द से राहत मिलती है.

* कालीमिर्च, लौंग, पीपरि पीसकर हल्का गर्म करें. इसे नाक में डालने से सिरदर्द दूर हो जाएगा.

* एक ग्राम अफीम व दो लौंग पीसकर व गर्म करके लेप करने से सर्दी से होनेवाला सिरदर्द मिट जाता है.

* पुराना सिरदर्द है, तो 11 बेलपत्र पीसकर उसका रस निकालें व सर्दियों में यह रस बिना कुछ मिलाए ही पी जाएं व गर्मियों में थोड़ा पानी मिलाकर पीएं.

20 हेल्थ अलर्ट्स ( Health Warning Signs of Serious Problems )

Health Warning Signs of Serious Problems
शरीर में छोटी-मोटी तकलीफ़ होती ही रहती है और अक्सर हम इन तकलीफ़ों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं. लेकिन यह अनदेखी महंगी भी पड़ सकती है, क्योंकि कभी-कभार ये छोटे-छोटे लक्षण ही किसी बड़ी व गंभीर बीमारी की ओर संकेत करते हैं. बेहतर होगा कि समय रहते इन्हें पहचानकर अलर्ट (Health Warning) रहें, ताकि आनेवाली किसी भी बड़ी समस्या से बचा जा सके.

सिर में दर्द रहना

हमें लगता है- मामूली दर्द या एसिडिटी.
हो सकता है- माइग्रेन, हाई ब्लड प्रेशर, ब्रेन ट्यूमर, साइनस या फिर ब्रेन हैमरेज.
आपको सिर में अक्सर दर्द रहता है, जो पेनकिलर्स लेने पर ठीक भी हो जाता है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें. अगर दर्द के साथ उल्टियां भी होती हों, तो डॉक्टर से तुरंत मिलें. इसके अलावा आंखों की रौशनी कम होती जाए या दृष्टिभ्रम होने लगे, चक्कर भी आएं, तो यह ट्यूमर का संकेत हो सकता है.

अचानक वज़न कम होना

हमें लगता है- थकान, स्ट्रेस या खाने-पीने में गड़बड़ी के चलते ऐसा हो रहा है.
हो सकता है- टीबी, पेप्टिक अल्सर, थायरॉइड, डायबिटीज़ या फिर कैंसर.
बिना डायटिंग के या फिर बिना किसी बीमारी के अचानक वज़न कम होने लगे, तो सतर्क हो जाइए. मुमकिन है, एंडोक्राइन ग्लैंड्स में किसी असामान्यता के चलते ऐसा हो रहा हो या फिर कैंसर भी इसकी एक वजह हो सकती है.

चोट लगने पर ब्लड क्लॉट न होना या फिर ज़ख़्म का देरी से भरना

हमें लगता है- स्किन या ख़ून में बदलाव के कारण ऐसा होता हो.
हो सकता है- डायबिटीज़ या फिर प्लेटलेट्स में कमी.
ज़ख़्म भरने में अगर सामान्य से ज़्यादा वक़्त लग रहा हो, तो यह डायबिटीज़ का लक्षण हो सकता है. इसके साथ-साथ यदि स्किन एलर्जी भी हो और चक्कर व वज़न कम होने की समस्या भी हो, तो बिना देर किए एक्सपर्ट के पास जाएं.

दिल का ज़ोर-ज़ोर से धड़कना

हमें लगता है- उत्तेजना या कमज़ोरी.
हो सकता है- हार्ट अटैक का लक्षण या फिर हाई ब्लडप्रेशर.
हो सकता है कि कमज़ोरी या नींद न पूरी होने पर धड़कन असामान्य हो रही हो, लेकिन यह हार्ट अटैक का लक्षण भी हो सकता है. अलर्ट रहें और यदि यह लक्षण लगातार बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

पेशाब करते समय तेज़ दर्द होना

हमें लगता है- सामान्य इंफेक्शन.
हो सकता है- स्टोन, प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ जाना, मूत्राशय का कैंसर.
मूत्र त्याग के समय अगर हमेशा ही बहुत दर्द होता हो, तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है. यदि पेशाब के साथ ख़ून भी आने लगे, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि समय रहते इलाज हो सके.

उठते वक़्त चक्कर आना

हमें लगता है- मामूली कमज़ोरी.
हो सकता है- नर्व से संबंधित समस्या, कान की नसों में कोई गड़बड़ी, साइनस, स्पॉन्डिलाइटिस, लो ब्लड प्रेशर.
यूं तो इसके कई अन्य कारण हो सकते हैं, लेकिन लो ब्लडप्रेशर भी इसकी एक बड़ी वजह हो सकती है और लो ब्लडप्रेशर के भी कई कारण हो सकते हैं, जो आपको टेस्ट करवाने पर ही पता चलेंगे. इसलिए तुरंत डॉक्टर से मिलें.

अचानक आंखों के आगे अंधेरा छा जाना

हमें लगता है- नींद न पूरी होने पर या कमज़ोरी के कारण ऐसा हो रहा है.
हो सकता है- स्ट्रोक, लो ब्लडप्रेशर.
यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल है, तो आप स्ट्रोक के शिकार हो सकते हैं. यदि आंखों के सामने अंधेरा छाने के साथ-साथ शरीर के एक तरफ़ का भाग सुन्न होता है, तो अलर्ट हो जाएं. इसके अलावा अगर उच्चारण में भी तकलीफ़ होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

हाथों का कांपना, घबराहट, नाक से ख़ून आना

हमें लगता है- कमज़ोरी, शरीर में गर्मी का बढ़ जाना इसकी वजह हो सकती है.
हो सकता है- थायरॉइड, पार्किंसन्स.
अचानक घबराहट होने के साथ-साथ हाथ-पैर कांपने लगते हैं, नाक से ख़ून आने लगता है और उल्टियां भी होने लगती हैं. ऐसी स्थिति को नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं. हो सकता है बहुत ज़्यादा एसिडिटी या शरीर में गर्मी बढ़ने के कारण भी ऐसा हो, लेकिन ये तमाम लक्षण किसी गंभीर समस्या के भी संकेत हो सकते हैं.

हंसते-खांसते वक़्त या फिर अचानक ही पेशाब निकल जाना

हमें लगता है- बढ़ती उम्र या कमज़ोरी.
हो सकता है- यूरिन इंफेक्शन, ब्लैडर की कोई बीमारी या डायबिटीज़.
अचानक पेशाब निकल जाने की समस्या को हम कमज़ोरी या बढ़ती उम्र से जोड़कर ही देखते हैं, लेकिन यह यूरिनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन की वजह से या फिर कुछ मामलों में डायबिटीज़ के कारण भी हो सकता है. इसलिए किसी भी तकलीफ़ को नज़रअंदाज़ न करें और न ही ख़ुद अंदाज़ा लगाएं. बेहतर होगा एक बार डॉक्टर की सलाह ले ली जाए.

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सीने में दर्द रहना

हमें लगता है- गैस या एसिडिटी का दर्द.
हो सकता है- हृदय रोग या एंजाइना पेन.
सीने में या उसके आस-पास दर्द बना रहे और सांस लेने में भी दिक़्क़त आए, तो शायद यह हार्ट ट्रबल यानी हृदय रोग का संकेत हो सकता है, या फिर एंजाइना का दर्द भी हो सकता है, जिसमें हार्ट अटैक की आशंका हमेशा बनी रहती है. बेहतर होगा कि इस तरह के दर्द को गैस का छोटा-मोटा दर्द न समझकर डॉक्टरी परामर्श ले लिया जाए.

मुंह में छाले होना

हमें लगता है- पेट या आंतों की गड़बड़ी या गर्मी से.
हो सकता है- एड्स, हर्पिस, सेक्स संबंधी किसी इंफेक्शन के कारण या फिर मुंह या गले का कैंसर.
मुंह में छाले होना आम-सी बात है. हमें लगता है पेट साफ़ नहीं होगा, इसलिए छाले हो रहे हैं या फिर कभी-कभार बुख़ार या दवाओं की गर्मी से भी छाले हो जाते हैं. लेकिन यदि ये छाले लंबे समय तक बने रहें या फिर इनका आकार और इनमें दर्द बढ़ रहा हो, तो देर न करें.

शरीर में सूजन

हमें लगता है- थकान या खान-पान की गड़बड़ी हो सकती है.
हो सकता है- एनीमिया, किडनी की बीमारी, हृदय रोग.
अक्सर दिनभर एक ही पोज़िशन में बैठे रहने या फिर बहुत ज़्यादा थकान या वॉटर रिटेंशन से शरीर में या पैरों में सूजन आ जाती है, लेकिन यदि सूजन शरीर के ऊपरी भाग में है तो यह किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है और अगर निचले हिस्से में सूजन आती है तो हृदय रोग का लक्षण हो सकता है.

जोड़ों में दर्द

हमें लगता है- कमज़ोरी, किसी बीमारी या फिर बढ़ती उम्र का असर.
हो सकता है- चिकनगुनिया के कारण, कैल्शियम व मिनरल की कमी, आमवात, गठियावात, ऑस्टियोआर्थराइटिस या फिर स्पॉन्डिलाइटिस.
यदि उम्र 40 से कम है और जोड़ों में अचानक दर्द शुरू हो गया हो, तो आमवात हो सकता है, जिसमें जोड़ों में सूजन, गर्मी व दर्द महसूस होता है. यदि छोटे जोड़ों में अकड़न, सूजन और दर्द है, तो यह गठियावात हो सकता है. इसके अलावा शरीर का पोश्‍चर भी जोड़ों में दर्द का कारण हो सकता है. जो लोग दिनभर कंप्यूटर पर काम करते हैं, उन्हें भी गर्दन, पीठ या पैरों में दर्द हो सकता है. कैल्शियम व मिनरल की कमी से भी यह दर्द हो सकता है.
यदि 40 के बाद दर्द होता है, तो इसकी वजह ऑस्टियोआर्थराइटिस या स्पॉन्डिलाइटिस हो सकती है, जिसमें शुरुआत में हल्का-हल्का दर्द होता है और ध्यान न दिया जाए, तो बढ़ जाता है. कैल्शियम व मिनरल की कमी से भी दर्द हो सकता है.

बहुत ज़्यादा हांफना

हमें लगता है- थकान, कमज़ोरी.
हो सकता है- कोलेस्ट्रॉल व ट्रायग्लिसरॉइड्स का बढ़ जाना, एनीमिया, थायरॉइड, मोटापा, बीमारी के बाद की कमज़ोरी.
अगर थोड़ा-सा चलने से ही बहुत ज़्यादा हांफने लगें, तो सचेत हो जाएं और अपना चेकअप ज़रूर करवाएं.

अत्यधिक भूख लगना

हमें लगता है- मौसम परिवर्तन के कारण या फिर हाज़मा अच्छा हो गया है.
हो सकता है- डायबिटीज़, मोटापा या फिर पेट में कीड़े.
जब ज़रूरत से ज़्यादा भूख लगने लगे, तो इसे हर बार मौसम परिवर्तन से जोड़कर न देखें. हो सकता है वजह कुछ और हो. एक्सपर्ट की राय ज़रूर लें.

कब्ज़

हमें लगता है- पानी कम पीने या फिर खाने-पीने की गड़बड़ी से हो रहा है.
हो सकता है- अत्यधिक गैस, बवासीर, आंतों में गड़बड़ी या फिर कैंसर हो सकता है.
यदि कब्ज़ लंबे समय से है और कोई भी नुस्ख़ा काम नहीं कर रहा, तो डॉक्टरी परामर्श लेने में कोई नुक़सान नहीं है.

एनल ब्लीडिंग
हमें लगता है- शरीर में गर्मी बढ़ जाने या फिर बवासीर की समस्या से यह परेशानी हो रही है.
हो सकता है- आंतों में शोथ, ज़ख़्म या फिर कैंसर हो सकता है.
ख़ूनी बवासीर, फिशर्स या फिर कोलाइटिस के अलावा आंतों में शोथ व ज़ख़्म के कारण भी एनल ब्लीडिंग हो सकती है. लेकिन यह रेक्टल कैंसर का भी पहला लक्षण हो सकता है. यदि मोशन के बाद भी ख़ून, और वह भी ताज़ा ख़ून आता है, तो सतर्क हो जाइए.

मल के रंग में बदलाव

हमें लगता है- खाने-पीने में बदलाव के कारण हो सकता है.
हो सकता है- अल्सर या पित्ताशय में गड़बड़ी, पीलिया.
अगर मल का रंग स़फेद है, तो पित्त की कमी इसका कारण है, यदि रंग ब्लैकिश-रेड है, तो इसका मतलब है मल में ख़ून भी आ रहा है और इसकी वजह हो सकती है अल्सराइटिव कोलाइटिस. यदि शौच ज़रूरत से ज़्यादा पीला है, तो जॉन्डिस का लक्षण हो सकता है.

मूत्र के रंग में बदलाव

हमें लगता है- पानी कम पीने से या फिर खाने में कुछ बदलाव करने से ऐसा होता है.
हो सकता है- इंफेक्शन, जॉन्डिस, ब्लैडर की गड़बड़ी या फिर कैंसर.
यदि पेशाब का रंग दूधिया स़फेद है, तो इसका अर्थ है मूत्र के साथ प्रोटीन भी निकल रहा है. यदि रंग पीला है, तो जॉन्डिस या फिर यूरिन इंफेक्शन हो सकता है. अगर रंग लाल है तो स्टोन, ब्लैडर, यूरिथ्रा में ज़ख़्म या फिर प्रोस्टेट कैंसर का भी लक्षण हो सकता है.

अत्यधिक थकान

हमें लगता है- सामान्य कमज़ोरी.
हो सकता है- मिनरल्स की कमी, आयरन, सोडियम, कैल्शियम और विटामिन्स की कमी, डायबिटीज़, लो ब्लड प्रेशर.
किसी-किसी केस में बहुत पसीना भी आता है तो, यह आनेवाली बीमारी का संकेत भी होता है, जैसे- जॉन्डिस, बुख़ार या फिर तनाव इत्यादि में पसीना ज़्यादा आता है.

 

योग द्वारा सिरदर्द से छुटकारा (Yoga for Migraine and Headache | Cure Migraine with Yoga)

अक्सर हम सिरदर्द के लिए पेनकिलर्स का सहारा लेते हैं, जिनके अपने साइडइफेक्ट्स होते हैं. बेहतर है दर्दनिवारक दवाओं की बजाय आप योगासन करें और सिरदर्द से मुक्ति पाएं (Cure Migraine with Yoga).
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महासिर मुद्रा

* सुखासन में बैठ जाएं.
* मध्यमा, तर्जनी और अंगूठे के आगे के भाग आपस में मिलाएं.
* अनामिका को मोड़कर अंगूठे की जड़ के पास लगाएं. छोटी उंगली सीधी रहनी चाहिए.
* आंखें बंद रखें और रिलैक्स रहें.

  • यदि माइग्रेन है, तो भुजंगासन, ब्रह्म मुद्रा व महासिर मुद्रा करें.
  • सामान्य सिरदर्द के लिए अनुलोम-विलोम, शलभासन, मकरासन, बालासन व ताड़ासन
    भी करें.
चंद्रभेदन प्राणायाम
* पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं.
* बाईं नाक से सांस लें और दाईं नाक से सांस छोड़ें. इस प्रकार इसे करते रहें. आंखें बंद रखें.
* कमर व रीढ़ एकदम सीधी रखें.
* 2 मिनट तक कर सकते हैं.
युवराज सिंह, क्रिकेटर
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कैंसर से लड़ने के बाद युवराज सिंह पूरी तरह से योग की शरण में आ गए. उनका मानना है कि योग के ज़रिए वो बेहतर तरी़के से रिकवर कर सकते हैं. बीमारी के बाद दोबारा भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी की कोशिश में जुटे युवराज सिंह ने फिटनेस के लिए योग को ज़रूरी बताते हुए कहा था, “मैं अपनी ऊर्जा को वापस पाने के लिए नियमित योग कर रहा हूं. शारीरिक व मानसिक तौर पर फिर से ऊर्जावान होना बहुत मुश्किल होता है. लेकिन मैंने चुनौतियों का सामना किया और मुश्किलों से बाहर भी आया, अब मेरा लक्ष्य है कि शत-प्रतिशत फिट होकर वापसी करना. अगले 5-6 साल मेरे करियर के बेहतरीन साल होंगे और मैं बहुत आशान्वित हूं अपने भविष्य को लेकर.”