headache

चाहे कमरदर्द, पीठदर्द या ज्वाइंट पेन- हमेशा पेनकिलर्स लेने से बेहतर है कि कुछ और तरीका ट्राई करें, इससे दर्द से तो राहत मिलेगी ही, इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होगा.

बैक पेन

  • बैक पेन होने पर सबसे ज़रूरी है कंप्लीट बेड रेस्ट. जितना कम मूवमेंट होगा, आराम उतना ही जल्दी होगा. तो बेहतर होगा कि बैक पेन होने पर दो-तीन दिन बेड रेस्ट करें. साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि बेड थोड़ा फर्म हो.
  • न सीधे सोएं और ना ही पेट के बल. इससे आपके बैक पर एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ेगा,
  • सोने की बेस्ट पोज़ीशन है करवट लेकर घुटने मोड़कर सोना. अगर ज़रूरी लगे तो एक तकिया सिर के नीचे और एक दोनों घुटनों के बीच रखें.
  • बेड से उठते समय भी थोड़ा केयरफुल रहें. एकदम झटके से और सीधे न उठें. पहले करवट लेकर कुछ सेकंड इसी पोज़ीशन में रहें, फिर धीरे से उठें.
  • बार-बार झुकने से बचें. वज़न उठाने से भी बचें. सीटिंग पोश्‍चर का ख़ास ख़्याल रखें.
  • एक ही पोजीशन में ज्यादा समय तक खड़े होने या बैठने से भी बचें. अगर आप ऑफ़िस में काम करती हैं तो हर 45 मिनट पर ब्रेक लें.
  • दिनभर में दो-तीन बार बर्फ से सेंकें. गर्म पानी से सेंक भी फायदेमंद होता है.
  • किसी मसाज थेरेपिस्ट से मसाज करवाएं. इससे आप काफी रिलैक्स फील करेंगे.
  • फुटवेयर बदलें. कई बार ग़लत फुटवेयर भी बैक पेन की वजह बन जाता है.
  • दर्द ज़्यादा हो, तो डॉक्टर की सलाह पर पेनकिलर लें.
  • फिज़ियोथेरेपिस्ट से मिलकर कुछ एक्सरसाइज़ सीखें और नियमित रूप से ये एक्सरसाइज़ करें. एक्सरसाइज़ से आपको काफी राहत मिलेगी.
    ये होम रेमेडीज़ ट्राई करें
  • नीम की नरम पत्तियों को तोड़कर उसका काढ़ा बना लें. फिर रुई या साफ़ कपड़ा हल्के गरम काढ़े में भिगोकर पीठ के दर्द वाले स्थान पर सेंक करें.
  • 100 ग्राम अजवायन का चूर्ण और 100 ग्राम गुड़ एक साथ मिलाकर रख लें. 5-5 ग्राम यह चुर्ण सुबह-शाम लेने से कमर दर्द दूर होता है.
  • सुबह उठकर खाली पेट लहसुन की दो कलियां खाएं. आप रोज़ लहुसन के तेल मालिश भी कर सकते हैं.

घुटने में दर्द

Pain Relief Technique
  • भोजन में दालचीनी, जीरा, अदरक और हल्दी का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करें. इससे घुटनों की सूजन और दर्द कम होता है.
  • मेथी दाना, सौंठ और हल्दी बराबर मात्रा में मिला कर तवे या कढ़ाई में भून कर पीस लें. रोजाना एक चम्मच चूर्ण सुबह-शाम भोजन करने के बाद गर्म पानी के साथ लें.
  • सुबह खाली पेट दही के साथ लहसुन की एक कली खाएं.
  • हल्दी चूर्ण, गुड़, मेथी दाना पाउडर और पानी सामान मात्रा में मिलाएं. थोड़ा गर्म करके इनका लेप रात को घुटनों पर लगाएं और पट्टी बांधकर सो जाएं.
  • अलसी के दानों के साथ दो अखरोट की गिरी सेवन करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है.
  • गेहूं के दाने के आकार का चूना दही या दूध में घोलकर दिन में एक बार खाएं. इसे 90 दिन तक लेने से दर्द में आराम आ जाता है.
  • खाने के एक ग्रास को कम से कम 32 बार चबाकर खाएं. इससे कुछ ही दिनों में घुटनों में साइनोबियल फ्लूइड बनने लगता है, जिससे घुटनों की तकलीफ में आराम आता है.
  • पूरे दिन भर में कम से कम 12 गिलास तक पानी अवश्य पीएं. ध्यान रखें, कम पानी पीने से भी घुटनों में दर्द बढ़ जाता है.
  • भोजन के साथ अंकुरित मेथी का सेवन करें.
  • एक्यूप्रेशर-रिंग को दिन से तीन बार, तीन मिनट तक अनामिका एवं मध्यमा उंगली पर एक्यूप्रेशर करें.
  • सुबह-सुबह दौड़ने की आदत डालें. विशेषज्ञों का दावा है कि दिल की तरह ही हमारे पैरों की सेहत भी दौड़ने से बेहतर होती है. दौड़ने से जहां जोड़ों का दर्द खत्म होता है, वहीं सूजन की समस्या भी दूर होती है. घुटने मजबूत बनते हैं.
  • कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर घुटनों को सेकें. दर्द में आराम मिलेगा.

सिरदर्द हो तो

Pain Relief Technique
  • जैसे ही सिरदर्द महसूस हो तुरंत एक्शन लें. कुछ खा या पी लें. अगर लंबे समय से कंप्यूटर के सामने काम कर रहे हों तो छोटा-सा ब्रेक लेकर टहल आएं. इससे दर्द बढने नहीं पाएगा.
  • अगर स्ट्रेस संबंधी सिरदर्द हो तो 10 मिनट की क्विक नींद ले लें. इससे तुरंत आराम मिलता है.
  • एक गहरी सांस लें. थोड़ी देर रुकें. धीरे-धीरे सांस छोड़ें. अब जम्हाई लें. आप तुरंत रिलैक्स महसूस करेंगे.
  • या फिर ब्रिस्क वॉक करें. इससे आपका शरीर एंडॉर्फिन रिलीज़ करेगी, तो नेचुरल पेनकिलर का काम करता है.
  • बालों में अच्छी तरह कंघी करें. ये हेड मसाज का काम करेगा.
  • बर्फ से सेंकना भी फायदेमंद होगा. माथे पर आईब्रो के ऊपर के भा, कनपटी और सिर के टॉप सेंटर को आइस पैक से सेंकने पर इंस्टेंट रिलीफ मिलता है.
  • अगर माइग्रेन है तो थोड़ी देर लाइट्स ऑफ करके अंधेरे कमरे में आराम करें.
    ये होम रेमेडीज़ ट्राई करें
  • सर्दी-ज़ुकाम के कारण सिरदर्द हो तो साबूत धनिया और मिश्री का काढ़ा बनाकर पीने से आराम मिलेगा.
  • तुलसी के पत्तों को पीसकर लेप करने से सिरदर्द में राहत मिलती है.
  • सुबह-सुबह उठते ही खाली पेट सेब पर नमक लगाकर खाने से सिरदर्द में लाभ होता है.
  • सुबह खाली पेट जलेबियां दूध में डालकर खाने से भी सिरदर्द ठीक हो जाता है.

कान में दर्द हो तो

  • हाथों से कानों को कपिंग करें. इसके लिए हथेली से कप बनाकर कानों के पास कपिंग करें. इससे कानों को गर्माहट मिलेगी और दर्द से राहत मिलेगी.
  • डॉक्टर्स कानदर्द में फौरन राहत के लिए ब्लो ड्रायर से कानों को गर्माहट देने की सलाह भी देते हैं. हां कान के पर्दे में होल हो तो ब्लो ड्रायर का इस्तेमाल न करें.
  • अगर तेज़ हवा से कान बंद हो गए हों, तो दोनों नथुनों को अंगूठे और तर्जनी से पकड़ें. मुंह में हवा भरकर मुंह बंद रखें. तेज़ी से हवा छोड़ें.
  • अगर फ्लाइट में टेकऑफ या लैंडिंग के समय कान में तकलीफ होती हो, तो सबसे आसान तरीका है च्युंगम चबाएं. इसके अलावा ध्यान रखें कि टेकऑफ या लैंडिंग के समय ईयरफोन का इस्तेमाल न करें.
  • सरसों का तेल हल्का गर्म करके डालने से कान का दर्द में आराम मिलता है.
  • प्याज़ का रस गुनगुना करके डालने से दर्द में तुरंत आराम मिलता है.
  • अदरक का रस भी गुनगुना करके डालना काफ़ी कारगर होता है.
  • तुलसी के पत्तों को पीसकर रस निकाल लें. इस रस को हल्की आंच पर रखकर थोड़ा गरम करें और कान में डालें.

जॉइंट पेन

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  • जोड़ों के दर्द के लिए वैसे कोई शॉर्टकट फार्मूला नहीं है. हां आप कुछ बातों को ख़्याल रखकर दर्द से राहत पा सकते हैं.
  • सुबह उठने पर जोड़ों में जकड़न ज़्यादा महसूस होती है. इसके लिए बेड से उठने से पहले ही स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करें. हाथों-पैरों को स्ट्रेच करें. जोड़ों को स्ट्रेच करें. कमर के लिए भी स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करें. इससे जकड़न से राहत मिलेगी.
  • वो ज़माना गया जब जॉइंट पेन होने पर डॉक्टर्स रेस्ट करने की सलाह देते थे. अब डॉक्टर्स कहते हैं कि ज्वाइंट पेन को कम करने के लिए मूवमेंट बहुत ज़रूरी है. इसलिए एक्टिव रहें.
  • वॉकिंग. जॉगिंग और स्वीमिंग आपकी तकलीफ को कम करेगी.
  • वज़न को मेंटेन रखें. बहुत जल्दी बहुत ज़्यादा वज़न घटाने के चक्कर में क्रैश डायट न करें. इससे ऑस्टियोपोरोसिस का ख़तरा बढ़ जाता है.
  • अपने पोश्‍चर पर ध्यान दें. बैठने-उठने का सही पोश्‍चर पता करें. इससे भी आपकी तकलीफ काफी कम होगी.
  • नमक का सेवन कम कर दें. रोज़ाना 6 ग्राम से ज़्यादा नमक का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • अपने डायट में भरपूर मात्रा में कैल्शियम शामिल करें, जैसे दही, कॉटेज चीज़, लो फैट डेयरी प्रोटक्ट्स, बादाम, साल्मन आदि.
  • रिसर्च से पता चला है कि फिश ऑयल कैप्सूल का सेवन करने से आर्थराइटिस की तकलीफ को 33% कम किया जा सकता है.

मसल क्रैम्प आ जाए तो

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  • सबसे आसान तरीका है विपरीत दिशा में स्ट्रेच करें. पैरों के पंजों को स्ट्रेच करें. इससे दर्द में राहत मिलेगी.
  • जहां दर्द है. वहां मसाज करें. वहां हल्के-हल्के मूवमेंट करें.
  • एक हाथ के अंगूठे और तर्जनी से ऊपरी होंठ के एक कॉर्नर पर ज़ोर से चिकोटी काटें. स्किन को हल्का-सा खींचें. ये तरीका भी ज़रूर आजमाएं. दर्द में आराम मिलेगा.
  • नियमित रूप से स्ट्रेचिंग और मसाज आपको मसल क्रैम्प से बचाएगा.
  • रात को सोते समय पैरों के नीचे तकिया रखें. इससे आप रात में अचानक होनेवाले मसल क्रैम्प से बच सकते हैं.

आंखों में तकलीफ होने पर

  • अगर घंटों काम करके आंखें थक गई हों और आंखों में दर्द हो, तो हर आधे घंटे में आंखों को रेस्ट दें.
  • साथ ही कुछ आई एक्सरसाइज़ ट्राई करें. कुछ देर तक दूर डिस्टेंस पर रखी किसी चीज़ को देखें.
  • आंखों पर तीन-चार बार पानी के छींटें मारें. या कोई कूलिंग आई ड्रॉप यूज़ करें. इससे आंखों को तुरंत आराम मिलेगा.
  • साथ में सिरदर्द भी हो, तो एक बार चश्मे का नंबर भी चेक करा लें. चश्मे की फीटिंग सही न हो, तो भी कई बार आंखों को तकलीफ होती है.

एड़ियों में दर्द

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  • सबसे पहले सही फूटवेयर का चुनाव करें. एड़ियों में दर्द का अर्थ है कि आपके चलने की स्टाइल में दोष है या फिर आपको फूटवेयर सही नहीं है. हाई हील या अकंफ़र्टेबल चप्पलों से बचें.
  • ये करें- किसी समतल जगह पर खड़े हो जाएं. एड़ियों पर प्रेशर दें. 30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें. दिन में पांच बार ये एक्सरसाइज़ करें.
  • पैरों को बारी-बारी से पहले गर्म और ठंडे पानी में डुबोएं.

अगर आंख में कुछ चला जाए

  • पलकों को जल्दी-जल्दी झपकाएं. इससे छोटा-मोटा कचरा निकल जाएगा.
  • साफ कॉटन या रूमाल का एक कॉर्नर को हल्का-सा गीला करके आंखें पोंछें.
  • अगर पलक झपकाने से कचरा नहीं निकलता है, तो ऊपरी पलकों को हल्का-सा खींचते हुए निचली पलकों के पास ले आएं. इससे आंसू आएगा, लेकिन कचरा निकल जाएगा.
  • एक छोटे बाउल में पानी लें, इसमें पलकों को झपकाने की कोशिश करें.
  • अगर कोई केमिकल या सोप आंखों में चला गया है, तो आंखों पर पानी के छींटें मारें.
  • अगर फिर भी तकलीफ कम न हो या आंखों का कचरा न निकल पाए, तो फौरन डॉक्टर के पास जाएं. इस दौरान आंखें बंद रखें, ताकि आंखों का मूवमेंट कम हो और आपकी आंखों को नुकसान न पहुंचे.
  • अगर आंख पर बॉल या किसी और चीज़ से चोट लग गई हो तो

डायटिंग एक कठिन और मुश्किल शब्द है, हम इसे करने की कोशिश कर लें, लेकिन बड़े हुए वजन को कम करना इतना आसान नहीं होता है. टीवी, विज्ञापन, होर्डिंग, सोशल मीडिया और लगभग हर स्वास्थ्य, फिटनेस और फैशन मैगज़ीन में डायटिंग को महत्व के साथ-साथ उसके साइड इफेक्ट के बारे में भी बताया जाता है. डायटिंग के बढ़ते हुए क्रेज़ को देखकर कह सकते हैं कि डायटिंग के साइड इफ़ेक्ट भी होते हैं, अगर सही तरीके से न की जाए तो?

शरीर में पोषक तत्वों की कमी

 लंबे समय तक और कड़ी सख्त डायटिंग करने से शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती हैं, जैसे- कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, विटामिंस  (विशेष तौर पर ए, बी, इ और के) और मिनरल्स, जैसे- कैल्शियम, फास्फोरस, सोडियम आदि. ये सभी नूट्रिएंट्स हमारे फ़ूड ग्रुप के अति आवश्यक तत्व होते हैं और डायट करने पर भोजन में इनकी अनुपस्थिति होने पर शरीर में कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं.

मेटाबॉलिज्म का धीमा होना

मेटाबोलिज्म ऐसी प्रक्रिया है, जो शरीर को एक्टिव रखने के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराती है, लेकिन अधिक समय तक डायटिंग करने की वजह से शरीर में कैलोरी की कमी होने लगती है, जिसकी वजह से धीरे-धीरे शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है. डायटिंग के दौरान भूख लगने पर जब शरीर को पर्याप्त कैलोरी नहीं मिलती है, तो शरीर खाना नहीं मिलता है, तो फास्टिंग (उपवास) मोड़ में चला जाता है और मेटाबॉलिज्म कम होने लगता है और मेटाबॉलिज़्म कम होने वजन कम होने लगता है.

मूड स्विंग होना

डायटिंग करने के वजह से शरीर को पौष्टिकता से भरपूर संतुलित भोजन नहीं मिल पाता है, जिसके कारण शरीर में हार्मोंस का असंतुलित होना, ब्लड शुगर का लेवल कम होना और मूड स्विंग होना जैसी समस्याएं होती हैं. भूख लगने पर जब शरीर को भोजन नहीं मिलता है, तो शरीर थका हुआ महसूस करता है और मूड ख़राब रहता है.

सिरदर्द

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इसमें कोई दो राय नहीं है कि क्रैश डायटिंग करने वजन कम होता है. लेकिन तेज़ी से वजन कम होने के कारण लगातार सिर में दर्द रहता है.इसलिए डायटीशियन भी डायटिंग के दौरान डायट चार्ट बनाते समय इस बात का विशेष ख्याल रखती है कि थोड़े-थोड़े आप कुछ न कुछ खाते रहें. वर्कआउट से पहले और बाद में खूब पानी पीएं, ताकि शरीर में पानी की कमी होने पर सिर  दर्द न हो.

थकान और चिड़चिड़ापन

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डायटिंग करते हुए अधिक देर तक भूखा रहने के कारण सबसे पहला साइड इफ़ेक्ट सामने दिखता है वह थकान और चिड़चिड़ापन. भोजन में पोषक तत्वों की कमी होने पर शरीर में उनका स्तर भी गड़बड़ा जाता है. नतीजा यह होता है कि आप थकान और चिड़चिड़ापन महसूस करते हैं और न ही किसी काम में मन लगता है. कीटोजेनिक डाइट पर आधारित ‘जर्नल ऑफ दि अमेरिकन डायटिक एसोसिएशन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, लो कार्बोहाइड्रेट डाइट से बॉडी का एनर्जी लेवल कम रहता है और आप अधिक थकान महसूस करने लगते हैं.

कब्ज

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कड़ी डायटिंग करने पर कब्ज़ होना आम बात है. वैसे तो डायटीशियन भी ऐसा डायट चार्ट बनाकर देती हैं, जिसमें सभी पोषक तत्व शामिल हों, विशेष तौर पर फाइबर. डायटिंग के दौरान खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं. कब्ज़ से बचने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, हरी सब्जियां-फल और पानी अधिकाधिक  मात्रा में पीएं.

गुर्दे में पथरी (किडनी स्टोन)

जब आप डायटिंग करने से शरीर में न्यूट्रिशन की कमी होने लगती है, जिसका असर पूरे शरीर पर दिखाई देने लगता है.क्योंकि डायटिंग के दौरान खाने-पीने की बहुत सारी चीज़ों का सेवन बंद करना पड़ता हैं. इसकी वजह से शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है और डीहाइड्रेशन की समस्या बढ़ जाती है और डीहाइड्रेशन की वजह से गुर्दे में पथरी होने की आशंका बढ़ जाती है.

बालों का झड़ना

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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डायटिंग यानी लो कैलोरी फूड खाने से हमारे शरीर में कैलोरी की मात्रा कम हो जाती है, भोजन में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है जिसकी वजह से हेयर स्ट्रक्चर और हेयर ग्रोथ दोनों पर बुरा असर पड़ता है और बाल तेजी से झड़ने लगते हैं.

डिप्रेशन

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जो लोग लगातार डायटिंग करते हैं, पर्याप्त और सही मात्रा में खाना न खाने कारण वे कभी-कभी डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं. क्योंकि भोजन में कार्बोहाइड्रेट्स और शुगर न लेने के कारण शरीर में सेरोटोनिन का स्तर कम हो जाता है, सेरोटोनिन हैप्पी हार्मोन होता है, जो हमारे मूड को खुश रखता है. इसलिए शरीर में इसका स्तर कम होने का मतलब है डिप्रेशन होना और तनाव का बढ़ना.

मेंस्ट्रुअल प्रॉब्लम्स

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इसमें कोई दो राय नहीं है कि सख्त डायट करने पर वजन तो कम होता ही है. लेकिन वजन कम होने के कारण महिलाओं के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिसका असर पीरियड्स पर भी पड़ता हैं। सही और संतुलित डायट न लेने पर हार्मोन्स में गड़बड़ी होने लगती है और उनका असर पीरियड सायकल पर पड़ने लगता है.

बीमार पड़ना

इंटरमिटेंट फास्टिंग यानी सप्ताह में कम-से-कम 4 दिन तक भूख कंट्रोल करना या फिर भोजन न करना। ऐसा करना आपकी सेहत के लिए नुकसानदायी  हो सकता है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एक्सपर्ट्स के अनुसार, इससे लोगों को सिरदर्द, अनिद्रा, रूखी और बेजान त्वचा, कब्ज, आलस और पेट संबंधी परेशानियां हो सकती हैं

डायटिंग करने अलावा बढ़े हुए वजन को कम करने के और बहुत सारे तरीके हैं, जरुरी नहीं कि डाइटिंग ही की जाए.वजन कम करने का ये तरीका बिल्कुल भी हेल्दी नहीं है. कठोर डाइटिंग करने से शरीर में बहुत सारी कॉम्प्लीकेशन्स पैदा होती हैं. अगर आप डायटिंग करना ही चाहते हैं, तो डायटीशियन और नूट्रिशनिस्ट की निगरानी में करें. वे आपको इस तरह की डायट चार्ट देंगी, जिससे आप खाने में संतुलित आहार ले सकेंगे और डायटिंग का कोई दुष्परिणाम भी नहीं होगा.

-पूनम शर्मा

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बड़ी-बड़ी बीमारियों, जैसे-हृदय रोग, कैंसर, स्ट्रोक इत्यादि में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? इस बारे में तो हम अक्सर सुनते रहते हैं, लेकिन अल्सर, मुंह से बदबू, सिरदर्द जैसी छोटी-छोटी समस्याओं के बारे में ज़्यादा बात नहीं की जाती. इन समस्याओं से निपटने के उपाय आपके किचन में भी उपलब्ध हैं.

 

सिरदर्द

Home Remedies To Get Rid of Disease
सिरदर्द की समस्या बहुत आम है. कम से कम 10 लाख लोग इससे प्रभावित हैं. स्ट्रेस, डिप्रेशन, ग़लत पोश्‍चर, हार्मोन्स में असंतुलन व नींद की कमी इत्यादि के कारण यह समस्या होती है. इसके अलावा साइनसाइटिस के कारण भी सिरदर्द की समस्या होती है. शरीर में पानी की कमी, लो ब्लडशुगर व कभी-कभी कुछ विशेष प्रकार के खाद्य पदार्थों के सेवन के कारण भी सिरदर्द हो सकता है.
क्या करें? अगर आपको अक्सर सिरदर्द की समस्या होती है तो एक डायरी मेंटेन करें और उसमें कम से कम दो हफ़्तों तक अपने खाने-पीने की सभी डिटेल में लिखें. इससे आपको उस खाद्य पदार्थ के बारे में पता लगाने में आसानी होगी, जिसके कारण सिरदर्द की समस्या होती है. लो ब्लड शुगर के कारण भी अक्सर सिरदर्द होता है. इससे बचने के लिए नियमित समय पर खाना खाएं और खाने में हाई फाइबर स्टार्ची खाद्य पदार्थ, जैसे-आलू, ब्राउन राइस व पास्ता इत्यादि शामिल करें.
ध्यान रखेंः शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए ढेर सारा पानी पीएं, ख़ासतौर पर गर्मी के मौसम में और एक्सरसाइज़ से पहले व बाद में. अल्कोहल और कुछ प्रकार के खाद्य पदार्थ, जैसे-चॉकलेट, कैफीन, चीज़ और सिट्रस फल खाने से भी सिरदर्द हो सकता है. अतः ऐसी चीज़ों से दूर रहें.

मुंह से बदबू
धूम्रपान, मसूढ़ों की बीमारी, गले में इंफेक्शन, साइनसाइटिस व डायबिटीज़ जैसी बीमारियों के कारण कुछ लोगों को मुंह से बदबू आने की समस्या होती है. दांतों में खाना फंस जाने पर बैक्टीरिया उसे ब्रेकडाउन करते हैं और फिर बदबूदार गैसेज़ निकालते हैं, जिसके कारण मुंह से बदबू आती है.
क्या करें? मुंह की बदबू दूर करने के लिए पुदीने की पत्तियां व पार्स्ले चबाना चाहिए. शुगर फ्री च्यूइंगम चबाने से भी फ़ायदा होता है, क्योंकि इससे मुंह में ज़्यादा लार बनता है, जो दांतों में फंसे हुए खाने के कणों को साफ़ कर देता है. इसके अलावा बिना शक्कर वाली दही खाने से काफ़ी फ़ायदा होता है. अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि दिन में दो बार शुगर फ्री दही का सेवन करने से मुंह से गंदी बदबू लानेवाली गैस 80 फ़ीसदी तक कम हो जाती है.
ध्यान रखेंः शरीर में पानी की कमी होने पर भी मुंह से बदबू आती है, इसलिए समुचित मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें. बहुत ज़्यादा शक्कर का सेवन करने से दांतों में सड़न की समस्या होती है, जिसके कारण मुंह से बदबू आती है. लो-कार्ब डायट से भी मुंह से बदबू आती है, क्योंकि ऐसा खाना खाने पर शरीर ऊर्जा के लिए फैट ब्रेक करता है, जिससे कीटोन्स या केमिकल का प्रोडक्शन होता है, जो मुंह से बदबू आने की वजह
बनते हैं.

कब्ज़

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सात में से एक व्यक्ति कब्ज़ की समस्या से परेशान है. इसके कारण पेट में दर्द, मरोड़, पेट फूलना व भूख न लगना, यहां तक कि बवासीर जैसी समस्याएं होती हैं. आमतौर खाने में फाइबर और तरल पदार्थ की कमी के कारण कब्ज़ की समस्या होती है.
क्या करें? स्ट्रॉबेरी जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करने से कब्ज़ में आराम मिलता है. इसके अलावा छिलके सहित आलू, नट्स, ओट्स, दाल, चना इत्यादि का सेवन करने से भी फ़ायदा होता है. होलवीट पास्ता, ब्राउन ब्रेड इत्यादि भी अच्छे विकल्प हैं, क्योंकि इनमें इनसॉल्यूबल फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जिससे मल मुलायम होता है और डायजेस्टिव सिस्टम में आसानी से मूूव होता है.
ध्यान रखेंः रोज़ाना 30 ग्राम फाइबर का सेवन करना ज़रूरी है. 100 ग्राम के प्रोडक्ट में कम से कम 6 ग्राम फाइबर होना ज़रूरी है. अतः धीरे-धीरे खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं, क्योंकि अचानक ज़्यादा फाइबर का सेवन करने से भी पेट फूलने, पेट में दर्द जैसी समस्याएं होती हैं.

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अपच
जब पेट में अत्यधिक एसिड एकत्रित हो जाता है तो वो भोजन-नलिका तक पहुंच जाता है, जिसके कारण जी मिचलाना, पेट भरा हुआ लगना, पेट फूलना व छाती के निचले हिस्से व गले में जलन जैसी समस्याएं होती हैं. अपच की समस्या कुछ प्रकार की दवाइयों के सेवन, स्ट्रेस, धूम्रपान, पेट में अल्सर, हार्निया, मोटापा व गर्भावस्था से अपच की समस्या होती है. इसके अलावा अत्यधिक खाने के कारण भी अपच की समस्या होती है, क्योंकि इससे पेट में प्रेशर व स्ट्रेच बढ़ता है.
क्या करें? अपच की समस्या दूर करने के लिए सबसे ज़रूरी है खाने पर नियंत्रण रखना. ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाने से बचें और अपने पाचन तंत्र को आराम दें. शराब का सेवन सीमित मात्रा में करें और खाली पेट शराब पीने की ग़लती न करें. शोधों से यह सिद्ध हुआ है कि अदरक का सेवन करने से पेट साफ़ होने की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है. इसके अलावा कैमोमाइल टी पीने से भी फ़ायदा होता है.
ध्यान रखेंः अपच की समस्या होने पर मसालेदार, तला-भुना खाना, चाय, कॉफी इत्यादि के अत्यधिक सेवन से तकलीफ बढ़ जाती है. अगर वज़न ज़्यादा हो तो कम करने की कोशिश करें और सोने से पहले गरिष्ठ भोजन करने से बचें. अगर फिर भी आराम न मिले तो डॉक्टर से संपर्क करें.

थकान

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अनिद्रा और तनाव के कारण थकान और ऊर्जा की कमी महसूस होती है. इसके अलावा कुछ अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, जैसे-डिप्रेशन, डायबिटीज़, थायरॉइड इत्यादि के कारण भी थकान होती है. शरीर में पानी की कमी और ग़लत खान-पान इसके अन्य कारण हैं.
क्या करें? सबसे पहले नियमित रूप से खाना शुरू करें और खाना स्किप करने की ग़लती न करें, क्योंकि ऐसा करने से ब्लड शुगर का स्तर नीचे चला जाता है, जिससे ऊर्जा की कमी महसूस होती है. सुबह का नाश्ता सबसे ज़रूरी होता है. इससे दिनभर काम करने की एनर्जी मिलती है. क्रैश डायटिंग, डिटॉक्स जूस, डायट्स इत्यादि से परहेज़ करें, क्योंकि इसमें कैलोरीज़ की मात्रा बहुत कम होती है. जिससे ऊर्जा का स्तर एकदम नीचे चला जाता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि खा-खाकर मोटे हो जाएं, क्योंकि मोटे व्यक्ति को हर काम करने के लिए ज़्यादा प्रयास करना पड़ता है. इसलिए अपने खाने में संतुलन बनाए रखें. खाने में कार्बोहाइड्रेट शामिल करें, लेकिन नियंत्रित मात्रा में. इसके अलावा खाने में गाजर जैसे हाई फाइबर शामिल करें. शक्कर युक्त खाद्य पदार्थ से परहेज़ करें. इससे आपको इंस्टेंट एनर्जी तो मिलेगी, लेकिन बाद में एनर्जी लो हो जाएगी.
ध्यान रखेंः शरीर में पानी की कमी से भी थकान महसूस होती है. अतः ख़ूब पानी पीएं. एनर्जी ड्रिंक्स पीने में तो स्वादिष्ट लगते हैं, लेकिन उनमें कैलोरीज़ की मात्रा अधिक होती है, जिससे थोड़ी देर के लिए शुगर लेवल बढ़ता है, लेकिन बाद में दोबारा कम हो जाता है. अल्कोहल का सेवन भी सीमित मात्रा में करें, क्योंकि ज़्यादा शराब पीने से गहरी नींद नहीं आती, जिसके कारण थकान महसूस होती है.

ये भी पढ़ेंः पेट फूलने की समस्या के कारण व उपचार (Bloating: Causes And Prevention Tips)

आप अक्सर माइग्रेन या सिररर्द से परेशान रहते हैं तो पेनकिलर्स लेने की बजाय कुछ होम रेमेडीज़ ट्राई करें. ये फौरन आराम तो देते ही हैं. इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता.

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सिरदर्द होने पर क्या करें?

– सिरदर्द का मुख्य कारण डिहाइड्रेशन और लो ब्लड शुगर है. इसलिए पर्याप्त पानी पीएं और संतुलित आहार लें.
– अगर आपको अक्सर सिरदर्द की शिकायत रहती हो तो एक डायरी रखें और उसमें नोट करें कि कब-कब सिरदर्द हुआ.
– जैसे ही सिरदर्द महसूस हो तुरंत एक्शन लें. कुछ खा या पी लें. अगर लंबे समय से कंप्यूटर के सामने काम कर रहे हों तो छोटा-सा ब्रेक लेकर टहल आएं. इससे दर्द बढने नहीं पाएगा.
– पानी में घुलनेवाला कोई पेनकिलर लें या किसी फिज़ी ड्रिंक के साथ इन्हें लें, ताकि जल्दी राहत मिले. लेकिन ध्यान रहे, सिरदर्द के लिए ह़फ़्ते में दो या तीन दिन से ज्यादा पेनकिलर्स न लें.

 

माइग्रेन हो तो अपनाएं ये होम रेमेडीज़

– माइग्रेन में रोगी के पूरे सिर में दर्द न होकर आधे भाग में ही दर्द होता है. यह दर्द काफ़ी तेज़ होता है और यह 10-15 मिनट से लेकर 1 घंटे तक हो सकता है. यह बेहद तकलीफ़देह होता है. ऐसे में यहां हम कुछ घरेलू टिप्स दे रहे हैं, जो इस दर्द से छुटकारा पाने में आपकी मदद करेंगे.
– लहसुन को पानी में पीसकर लेप तैयार करें. इसे कनपटी पर लगाने से काफ़ी राहत मिलती है.
– लहसुन पीसकर उसका रस निकाल लें. रस की 1-1 बूंद दर्द की तरफ़वाली नाक में टपकाने से भी दर्द में आराम मिलता है.
– 1 ग्राम कपूर व 10 ग्राम नौसादर को एक साथ पीसकर मिश्रण बना लें. माइग्रेन के दौरे के दौरान इस चूर्ण को नकसीर की तरह प्रयोग करें.
– गाय के घी की 2-2 बूंदें नाक के दोनों छिद्रों में डालने से बहुत आराम मिलता है. ध्यान रखें कि इस प्रयोग के कुछ समय पश्‍चात् तक लेटे रहना चाहिए.
– राई के दानों को बारीक पीसकर लेप बना लें और उसे दर्दवाले हिस्से पर लगाएं.
– सूर्योदय से पहले रोज़ाना 11 कालीमिर्च के दानों को पीसकर सेवन करने और उसके बाद चीनी का शर्बत पीने से इस रोग में आश्‍चर्यजनक रूप से लाभ मिलता है.
– शतावर की जड़ को पानी में पीसकर घोल तैयार कर लें. इस घोल को समान मात्रा में तिल के तेल में मिलाकर गर्म करें. जब पानी पूरी तरह जल जाए और स़िर्फ तेल बचा रहे, तब इसे ठंडा कर लें. इस तेल की मालिश सिर में धीरे-धीरे रोज़ाना करने से बहुत फ़ायदा होता है.
– दूध और अरहर के पत्तों को पानी में पीसकर उसके रस की दो-दो बूंद नाक के दोनों छिद्रों में टपकाने से लाभ होगा.

 

सिरदर्द के लिए ईज़ी रेमेडीज़

– पुदीने की पत्तियों का रस निकालकर माथे और कनपटी पर लगाने से सिरदर्द में आराम मिलता है.
– तुलसी की पत्तियां चबाएं. सिरदर्द में आराम मिलेगा.
– 1-1 टीस्पून अदरक का रस और नींबू का रस मिलाकर दिन में एक-दो बार लें.
– अदरक का एक टुकड़ा मुंह में रखें. या अदरक वाली गोली खा लें. आराम मिलेगा.

 

सिरदर्द-बदनदर्द के लिए आज़माएं ये होम टिप्स (Home Remedies for Headache and Body Pain)

बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव से सिरदर्द की शिकायत आम बात हो गई है. सिरदर्द होने के अनेक कारण होते हैं, लेकिन यदि इन कारणों की पूरी और सही जानकारी न हो, तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं. सिरदर्द के प्रकार, कारण और उनकी सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं मुंबई के जाने-माने न्यूरो सर्जन डॉ. विनायक जोशी.

Types of Headaches

किन कारणों से होता है सिरदर्द?

1 मस्तिष्क के आसपास के भाग (जिसे डूयामेटर कहते हैं) के खिंचने के कारण सिर में दर्द होता है.
1 मस्तिष्क के ब्लड वेसल्स की दीवारों में नर्व एंडिंग होते हैं, जिनके खिंचने से सिर में दर्द होता है.
1 नाक के आसपास हवा की थैलियां होती हैं, जिसे साइनस कहते हैं. इसमें सूजन आने के कारण सिर में दर्द होता है.
1 स्पॉन्डिलाइटिस के कारण भी सिरदर्द होता है.

सिरदर्द के प्रकार
1. माइग्रेन

आज की व्यस्त और तनावभरी जीवनशैली में माइग्रेन एक आम समस्या है, जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक होता है. माइग्रेन सिर के एक हिस्से में या दोनों तरफ़ होता है. यह दर्द 4 से 12 घंटे तक रहता है. कभी-कभी तो 12 घंटे से ज़्यादा देर तक भी हो सकता है.

 

कारण

मस्तिष्क को ऑक्सीजन और ग्लूकोज़ की आवश्यकता होती है और ये दोनों ही न मिलने पर ब्लड वेसल्स का आकार धीरे-धीरे बढ़ने लगता है. एक स्तर के बाद इन वेसल्स में खिंचाव आना शुरू हो जाता है, जिसके कारण माइग्रेन होता है. इसके अलावा माइग्रेन के कुुछ अन्य कारण भी हैं:
– हार्मोंस में परिवर्तन.
– नींद पूरी न होना और अधिक समय तक भूखा रहना.
– अधिक तनाव और खान-पान की ग़लत आदतें.
– आनुवांशिक कारण.
लक्षण

– जी घबराना, उल्टी होना, सिर भारी होना आदि.
– फोटोफोबिया (लाइट) और मोनोफोबिया (आवाज़) सहन न होना.
– कान और गर्दन के आसपास की नसें फूली हुई लगती हैं और तेज़ दर्द महसूस होने लगता है.
– दर्द की तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ने लगती है.
सावधानियां

– 4 घंटे से ज़्यादा देर तक भूखे न रहें.
– अधिक से अधिक पानी पीएं.
– एनीमिया से बचें, क्योंकि हीमोग्लोबिन की कमी होने पर शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है.
– शरीर में शुगर का लेवल कम न होने दें. शुगर की मात्रा कम होने के कारण ब्लड सेल्स भी कम हो जाते हैं, जिसके कारण माइग्रेन होता है.
– मानसिक तनाव से बचें.
– अधिक दर्द होने पर डॉक्टरी सलाह के अनुसार प्रिवेंटिव मेडिसिन लें.

2. टेंशन हेडेक

माइग्रेन के बाद टेंशन हेडेक एक आम बीमारी है, जो 90 फीसदी लोगों को होती है. यह दर्द पुरुष और महिला, दोनों में समान रूप से होता है. इस दर्द में रिलैक्सेशन टेकनीक और फिज़ियोथेरेपी से काफ़ी राहत मिलती है.
कारण

– चश्मे का नंबर बढ़ना.
– शारीरिक व मानसिक तनाव.
– ग़लत पोश्‍चर में बैठना.
– एंज़ाइटी, थकान और अधिक शारीरिक श्रम.
– दांतों की बीमारियां.
लक्षण

– आंखों का भारी होना.
– पूरे सिर या बालों की जड़ों में दर्द होना.
– कान, गले और जबड़े की मसल्स में ऐंठन होना.
– सिर का फीते से बंधा हुआ महसूस होना.
सावधानियां

– मानसिक तनाव से बचें.
– ज़्यादा देर तक कंप्यूटर पर काम न करें.
– कंप्यूटर पर काम करते समय सही पोश्‍चर में बैठें.
– बहुत ठंडे ड्रिंक्स और फूड खाने से भी टेंशन हेडेक हो सकता है, इसलिए बहुत अधिक ठंडे ड्रिंक्स और फूड न खाएं.

3. मेडिकेशन ओवरयूज़ हेडेक/रिबॉन्ड हेडेक

कई बार कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स से मस्तिष्क की नसें फूल जाती हैं, विशेष रूप से हार्ट और ब्लड प्रेशर की दवाओं के कारण सिर में दर्द शुरू हो जाता है. यह दर्द भी माइग्रेन की तरह कनपटी के आसपास होता है.
कारण

आम पेन किलर दवाएं, जैसे- एस्प्रिन आदि का रोज़ाना अधिक मात्रा में सेवन.
लक्षण

– बेचैनी, गर्दन में दर्द होना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन और नाक बंद होना.
– सुबह उठते ही सिरदर्द शुरू होता है, जो दिनभर बना रहता है.
सावधानियां

– अधिक मात्रा में दर्द निवारक दवाएं लेने से शरीर की दर्द सहन करने की क्षमता कम हो जाती है. इसलिए जब तक बहुत ज़रूरी न हो, तब तक ये दर्द निवारक दवाएं न लें.
– सप्ताह में एक या दो से अधिक बार सिरदर्द की गोलियां न लें.
– डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं ही लेें.
– दर्द निवारक दवाएं लेते समय कैफीन बेस्ड प्रोडक्ट्स न लें.
– एक्सरसाइज़, वॉक और प्राणायाम करें.

4. क्लस्टर हैडेक

यह सिरदर्द भी माइग्रेन की तरह अधिक पेनफुल होता है, लेकिन महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को अधिक होता है. यह दर्द एक आंख या दोनों आंखों के आसपास होता है. दर्द तेज़ होने पर आंखों से पानी निकलने लगता है. कई बार यह दर्द नेज़ल कंजेशन और नाक बहने के कारण भी होेता है. यह दर्द 2 तरह का होता है- एपिसोडिक और क्रॉनिक हेडेक. एपिसोडिक हेडेक एक-तीन महीने के अंतराल में होता है, जबकि क्रॉनिक हेडेक जल्दी-जल्दी होता है.
कारण

अल्कोहल या सिगरेट आदि की तेज़ गंध से सिरदर्द होना.

लक्षण

– आंखों से पानी आना.
– आंखों में सूजन और तेज़ दर्द होना.
– नाक का बहना या बंद होना.
– थकान व बेचैनी महसूस होना.
– पलकों के आसपास सूजन होना.
– सिर के एक तरफ़ दर्द होना.
– कुछ लोगों को कनपटी के आसपास भी दर्द होता है.
सावधानियां

– क्लस्टर हेडेक होने पर तुरंत प्रिवेंटिव मेडिकेशन लें.
– तेज़ गंध, जैसे- अल्कोहल, सिगरेट या परफ्यूम का इस्तेमाल न करें.
– क्लस्टर हेडेक से बचने के लिए तनाव को कम करें.
– पर्याप्त नींद लें.
– सिरदर्द के दौरान अल्कोहल का सेवन न करें. क्योंकि इसकी तेज़ गंध से सिरदर्द हो सकता है.

5. साइनस हेडेक

नाक के आसपास की हड्डियों में फ्रोन्टल, मैग्ज़ीलरी आदि जैसे एयर बैग्स होते हैं, जिन्हें साइनस कहते हैं. इन एयर बैग्स में सर्दी-ज़ुकाम और एलर्जी के कारण सूजन आने पर फोरहेड, चीकबोन और नाक के टी ज़ोन में दर्द होता है, जिसे साइनस हेडेक कहते है.
कारण 

साइनस हेडेक मुख्यत: साइनस इंफेक्शन या एलर्जी (कोल्ड/फ्लू) के कारण होता है.
लक्षण

– नाक बहना, चेहरे पर सूजन और बुख़ार आना.
– आंख, गाल और जबड़े के आसपास दर्द होना.
– गले में खराश, हल्का-सा बुख़ार, बेचैनी, थकान, नेज़ल कंजेशन आदि.
– नाक से पीले और हरे रंग का डिस्चार्ज होना.
सावधानियां

साइनस हेडेक होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
– बार-बार साइनस हेडेक होने पर ईएनटी स्पेशलिस्ट को दिखाएं, वरना स्थिति गंभीर होने पर ऑपरेशन भी करना पड़ सकता है.
– एक्सरसाइज़, प्राणायाम और फिज़ियोथेरेपी से भी साइनस हेडेक में काफ़ी राहत मिलती है.

– पूनम नागेंद्र शर्मा

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सिरदर्द अपने आप में कोई बीमारी न होकर अन्य विकारों का एक लक्षण मात्र है. मानसिक तनाव, मांसपेशियों के सिकुड़ने, ख़ून की नलिकाओं के फैलने या कुछ रासायनिक पदार्थों के कारण सिरदर्द हो सकता है. सिरदर्द अधिकतर अजीर्ण, बदहज़मी, कब्ज़, चिंता, आंखों पर ज़ोर पड़ने, नींद पूरी न होने या अधिक काम करने के कारण होता है. ज़ुकाम, बुख़ार, उच्च रक्तचाप आदि बीमारियों के कारण भी सिरदर्द होने लगता है.

घरेलू नुस्ख़े

* सुबह उठने के साथ ही खाली पेट सेब पर नमक लगाकर खाएं. फिर ऊपर से गुनगुना पानी या एक प्याला हल्का गरम दूध पी लें. कुछ ही दिनों के भीतर सिरदर्द गायब हो जाएगा.

* कितना भी भयंकर सिरदर्द या किसी भी कारण से सिरदर्द हो, आप लहसुन की एक कली छीलकर आराम से चबाइए और धीरे-धीरे निगल जाइए. कुछ ही देर में सिरदर्द छूमंतर हो जाएगा.

* दालचीनी को पीसकर माथे पर लेप करने से सिरदर्द दूर हो जाता है.

* रात को बादाम की गिरी भिगोकर रखें. सुबह उसे पीसकर व घी में भूनकर गर्म पानी में मिलाकर पी लें. इससे पुराना सिरदर्द भी ठीक हो जाएगा.

* सर्दी-ज़ुकाम में सिरदर्द होने पर साबूत धनिया व मिश्री का काढ़ा पीने से लाभ होगा.

* पेट में गैस होने के कारण यदि सिरदर्द या चक्कर आता हो, तो गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पीने से तुरंत आराम मिलता है.

* सिरदर्द के समय जिस नथुने से सांस चल रही हो, उसे रुई से बंद करके दूसरे नथुने में सरसों का तेल लगाकर धीरे-धीरे सांस लें, सिरदर्द गायब हो जाएगा.

* लहसुन की कलियों को पीसकर कनपटी पर उसका लेप करने से सिरदर्द दूर होता है.

* गर्मी के कारण यदि सिरदर्द हो, तो लौकी का गूदा निकालकर ख़ूब बारीक़ करके माथे पर लेप करें. घंटेभर में ही सिरदर्द दूर हो जाएगा.

* तुलसी के पत्तों को पीसकर माथे पर लेप करने से सिरदर्द में आराम मिलता है.

* सूखे आंवले 10 दिन तक सरसों के तेल में डुबोकर रखें. यह तेल सिर में लगाने से सिरदर्द दूर हो जाएगा.

* एक कप दूध में पिसी इलायची मिलाकर पीने से सिरदर्द में आराम मिलता है.

* हरड़, बहेड़ा, आंवला, हल्दी, नीम की छाल व गिलोय- इनका काढ़ा बनाकर पीने से पुराना व भयंकर सिरदर्द भी ठीक हो जाता है.

* सुबह खाली पेट जलेबियां दूध में डालकर खाएं, सिरदर्द ठीक हो जाएगा.

* सोंठ को पानी या दूध में घिसकर उसका नस्य (सूंघने) लेने व लेप करने से सिरदर्द व आधासीसी (माइग्रेन) का दर्द भी दूर होता है.

* यदि गर्मी या ठंड की वजह से सिरदर्द हो रहा हो, तो 2-3 तेजपत्ते व उसके 1-2 डंठलों को पानी में पीसकर हल्का गर्म कर लें व सिर पर मोटा लेप करें. एक बार में दर्द कम न हो, तो दोबारा लेप करें. इससे सिरदर्द में अवश्य लाभ होता है.

* आंवले के चूर्ण का लेप सिर पर लगाने से सिरदर्द से राहत मिलती है.

* कालीमिर्च, लौंग, पीपरि पीसकर हल्का गर्म करें. इसे नाक में डालने से सिरदर्द दूर हो जाएगा.

* एक ग्राम अफीम व दो लौंग पीसकर व गर्म करके लेप करने से सर्दी से होनेवाला सिरदर्द मिट जाता है.

* पुराना सिरदर्द है, तो 11 बेलपत्र पीसकर उसका रस निकालें व सर्दियों में यह रस बिना कुछ मिलाए ही पी जाएं व गर्मियों में थोड़ा पानी मिलाकर पीएं.

Health Warning Signs of Serious Problems
शरीर में छोटी-मोटी तकलीफ़ होती ही रहती है और अक्सर हम इन तकलीफ़ों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं. लेकिन यह अनदेखी महंगी भी पड़ सकती है, क्योंकि कभी-कभार ये छोटे-छोटे लक्षण ही किसी बड़ी व गंभीर बीमारी की ओर संकेत करते हैं. बेहतर होगा कि समय रहते इन्हें पहचानकर अलर्ट (Health Warning) रहें, ताकि आनेवाली किसी भी बड़ी समस्या से बचा जा सके.

सिर में दर्द रहना

हमें लगता है- मामूली दर्द या एसिडिटी.
हो सकता है- माइग्रेन, हाई ब्लड प्रेशर, ब्रेन ट्यूमर, साइनस या फिर ब्रेन हैमरेज.
आपको सिर में अक्सर दर्द रहता है, जो पेनकिलर्स लेने पर ठीक भी हो जाता है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें. अगर दर्द के साथ उल्टियां भी होती हों, तो डॉक्टर से तुरंत मिलें. इसके अलावा आंखों की रौशनी कम होती जाए या दृष्टिभ्रम होने लगे, चक्कर भी आएं, तो यह ट्यूमर का संकेत हो सकता है.

अचानक वज़न कम होना

हमें लगता है- थकान, स्ट्रेस या खाने-पीने में गड़बड़ी के चलते ऐसा हो रहा है.
हो सकता है- टीबी, पेप्टिक अल्सर, थायरॉइड, डायबिटीज़ या फिर कैंसर.
बिना डायटिंग के या फिर बिना किसी बीमारी के अचानक वज़न कम होने लगे, तो सतर्क हो जाइए. मुमकिन है, एंडोक्राइन ग्लैंड्स में किसी असामान्यता के चलते ऐसा हो रहा हो या फिर कैंसर भी इसकी एक वजह हो सकती है.

चोट लगने पर ब्लड क्लॉट न होना या फिर ज़ख़्म का देरी से भरना

हमें लगता है- स्किन या ख़ून में बदलाव के कारण ऐसा होता हो.
हो सकता है- डायबिटीज़ या फिर प्लेटलेट्स में कमी.
ज़ख़्म भरने में अगर सामान्य से ज़्यादा वक़्त लग रहा हो, तो यह डायबिटीज़ का लक्षण हो सकता है. इसके साथ-साथ यदि स्किन एलर्जी भी हो और चक्कर व वज़न कम होने की समस्या भी हो, तो बिना देर किए एक्सपर्ट के पास जाएं.

दिल का ज़ोर-ज़ोर से धड़कना

हमें लगता है- उत्तेजना या कमज़ोरी.
हो सकता है- हार्ट अटैक का लक्षण या फिर हाई ब्लडप्रेशर.
हो सकता है कि कमज़ोरी या नींद न पूरी होने पर धड़कन असामान्य हो रही हो, लेकिन यह हार्ट अटैक का लक्षण भी हो सकता है. अलर्ट रहें और यदि यह लक्षण लगातार बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

पेशाब करते समय तेज़ दर्द होना

हमें लगता है- सामान्य इंफेक्शन.
हो सकता है- स्टोन, प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ जाना, मूत्राशय का कैंसर.
मूत्र त्याग के समय अगर हमेशा ही बहुत दर्द होता हो, तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है. यदि पेशाब के साथ ख़ून भी आने लगे, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि समय रहते इलाज हो सके.

उठते वक़्त चक्कर आना

हमें लगता है- मामूली कमज़ोरी.
हो सकता है- नर्व से संबंधित समस्या, कान की नसों में कोई गड़बड़ी, साइनस, स्पॉन्डिलाइटिस, लो ब्लड प्रेशर.
यूं तो इसके कई अन्य कारण हो सकते हैं, लेकिन लो ब्लडप्रेशर भी इसकी एक बड़ी वजह हो सकती है और लो ब्लडप्रेशर के भी कई कारण हो सकते हैं, जो आपको टेस्ट करवाने पर ही पता चलेंगे. इसलिए तुरंत डॉक्टर से मिलें.

अचानक आंखों के आगे अंधेरा छा जाना

हमें लगता है- नींद न पूरी होने पर या कमज़ोरी के कारण ऐसा हो रहा है.
हो सकता है- स्ट्रोक, लो ब्लडप्रेशर.
यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल है, तो आप स्ट्रोक के शिकार हो सकते हैं. यदि आंखों के सामने अंधेरा छाने के साथ-साथ शरीर के एक तरफ़ का भाग सुन्न होता है, तो अलर्ट हो जाएं. इसके अलावा अगर उच्चारण में भी तकलीफ़ होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

हाथों का कांपना, घबराहट, नाक से ख़ून आना

हमें लगता है- कमज़ोरी, शरीर में गर्मी का बढ़ जाना इसकी वजह हो सकती है.
हो सकता है- थायरॉइड, पार्किंसन्स.
अचानक घबराहट होने के साथ-साथ हाथ-पैर कांपने लगते हैं, नाक से ख़ून आने लगता है और उल्टियां भी होने लगती हैं. ऐसी स्थिति को नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं. हो सकता है बहुत ज़्यादा एसिडिटी या शरीर में गर्मी बढ़ने के कारण भी ऐसा हो, लेकिन ये तमाम लक्षण किसी गंभीर समस्या के भी संकेत हो सकते हैं.

हंसते-खांसते वक़्त या फिर अचानक ही पेशाब निकल जाना

हमें लगता है- बढ़ती उम्र या कमज़ोरी.
हो सकता है- यूरिन इंफेक्शन, ब्लैडर की कोई बीमारी या डायबिटीज़.
अचानक पेशाब निकल जाने की समस्या को हम कमज़ोरी या बढ़ती उम्र से जोड़कर ही देखते हैं, लेकिन यह यूरिनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन की वजह से या फिर कुछ मामलों में डायबिटीज़ के कारण भी हो सकता है. इसलिए किसी भी तकलीफ़ को नज़रअंदाज़ न करें और न ही ख़ुद अंदाज़ा लगाएं. बेहतर होगा एक बार डॉक्टर की सलाह ले ली जाए.

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सीने में दर्द रहना

हमें लगता है- गैस या एसिडिटी का दर्द.
हो सकता है- हृदय रोग या एंजाइना पेन.
सीने में या उसके आस-पास दर्द बना रहे और सांस लेने में भी दिक़्क़त आए, तो शायद यह हार्ट ट्रबल यानी हृदय रोग का संकेत हो सकता है, या फिर एंजाइना का दर्द भी हो सकता है, जिसमें हार्ट अटैक की आशंका हमेशा बनी रहती है. बेहतर होगा कि इस तरह के दर्द को गैस का छोटा-मोटा दर्द न समझकर डॉक्टरी परामर्श ले लिया जाए.

मुंह में छाले होना

हमें लगता है- पेट या आंतों की गड़बड़ी या गर्मी से.
हो सकता है- एड्स, हर्पिस, सेक्स संबंधी किसी इंफेक्शन के कारण या फिर मुंह या गले का कैंसर.
मुंह में छाले होना आम-सी बात है. हमें लगता है पेट साफ़ नहीं होगा, इसलिए छाले हो रहे हैं या फिर कभी-कभार बुख़ार या दवाओं की गर्मी से भी छाले हो जाते हैं. लेकिन यदि ये छाले लंबे समय तक बने रहें या फिर इनका आकार और इनमें दर्द बढ़ रहा हो, तो देर न करें.

शरीर में सूजन

हमें लगता है- थकान या खान-पान की गड़बड़ी हो सकती है.
हो सकता है- एनीमिया, किडनी की बीमारी, हृदय रोग.
अक्सर दिनभर एक ही पोज़िशन में बैठे रहने या फिर बहुत ज़्यादा थकान या वॉटर रिटेंशन से शरीर में या पैरों में सूजन आ जाती है, लेकिन यदि सूजन शरीर के ऊपरी भाग में है तो यह किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है और अगर निचले हिस्से में सूजन आती है तो हृदय रोग का लक्षण हो सकता है.

जोड़ों में दर्द

हमें लगता है- कमज़ोरी, किसी बीमारी या फिर बढ़ती उम्र का असर.
हो सकता है- चिकनगुनिया के कारण, कैल्शियम व मिनरल की कमी, आमवात, गठियावात, ऑस्टियोआर्थराइटिस या फिर स्पॉन्डिलाइटिस.
यदि उम्र 40 से कम है और जोड़ों में अचानक दर्द शुरू हो गया हो, तो आमवात हो सकता है, जिसमें जोड़ों में सूजन, गर्मी व दर्द महसूस होता है. यदि छोटे जोड़ों में अकड़न, सूजन और दर्द है, तो यह गठियावात हो सकता है. इसके अलावा शरीर का पोश्‍चर भी जोड़ों में दर्द का कारण हो सकता है. जो लोग दिनभर कंप्यूटर पर काम करते हैं, उन्हें भी गर्दन, पीठ या पैरों में दर्द हो सकता है. कैल्शियम व मिनरल की कमी से भी यह दर्द हो सकता है.
यदि 40 के बाद दर्द होता है, तो इसकी वजह ऑस्टियोआर्थराइटिस या स्पॉन्डिलाइटिस हो सकती है, जिसमें शुरुआत में हल्का-हल्का दर्द होता है और ध्यान न दिया जाए, तो बढ़ जाता है. कैल्शियम व मिनरल की कमी से भी दर्द हो सकता है.

बहुत ज़्यादा हांफना

हमें लगता है- थकान, कमज़ोरी.
हो सकता है- कोलेस्ट्रॉल व ट्रायग्लिसरॉइड्स का बढ़ जाना, एनीमिया, थायरॉइड, मोटापा, बीमारी के बाद की कमज़ोरी.
अगर थोड़ा-सा चलने से ही बहुत ज़्यादा हांफने लगें, तो सचेत हो जाएं और अपना चेकअप ज़रूर करवाएं.

अत्यधिक भूख लगना

हमें लगता है- मौसम परिवर्तन के कारण या फिर हाज़मा अच्छा हो गया है.
हो सकता है- डायबिटीज़, मोटापा या फिर पेट में कीड़े.
जब ज़रूरत से ज़्यादा भूख लगने लगे, तो इसे हर बार मौसम परिवर्तन से जोड़कर न देखें. हो सकता है वजह कुछ और हो. एक्सपर्ट की राय ज़रूर लें.

कब्ज़

हमें लगता है- पानी कम पीने या फिर खाने-पीने की गड़बड़ी से हो रहा है.
हो सकता है- अत्यधिक गैस, बवासीर, आंतों में गड़बड़ी या फिर कैंसर हो सकता है.
यदि कब्ज़ लंबे समय से है और कोई भी नुस्ख़ा काम नहीं कर रहा, तो डॉक्टरी परामर्श लेने में कोई नुक़सान नहीं है.

एनल ब्लीडिंग
हमें लगता है- शरीर में गर्मी बढ़ जाने या फिर बवासीर की समस्या से यह परेशानी हो रही है.
हो सकता है- आंतों में शोथ, ज़ख़्म या फिर कैंसर हो सकता है.
ख़ूनी बवासीर, फिशर्स या फिर कोलाइटिस के अलावा आंतों में शोथ व ज़ख़्म के कारण भी एनल ब्लीडिंग हो सकती है. लेकिन यह रेक्टल कैंसर का भी पहला लक्षण हो सकता है. यदि मोशन के बाद भी ख़ून, और वह भी ताज़ा ख़ून आता है, तो सतर्क हो जाइए.

मल के रंग में बदलाव

हमें लगता है- खाने-पीने में बदलाव के कारण हो सकता है.
हो सकता है- अल्सर या पित्ताशय में गड़बड़ी, पीलिया.
अगर मल का रंग स़फेद है, तो पित्त की कमी इसका कारण है, यदि रंग ब्लैकिश-रेड है, तो इसका मतलब है मल में ख़ून भी आ रहा है और इसकी वजह हो सकती है अल्सराइटिव कोलाइटिस. यदि शौच ज़रूरत से ज़्यादा पीला है, तो जॉन्डिस का लक्षण हो सकता है.

मूत्र के रंग में बदलाव

हमें लगता है- पानी कम पीने से या फिर खाने में कुछ बदलाव करने से ऐसा होता है.
हो सकता है- इंफेक्शन, जॉन्डिस, ब्लैडर की गड़बड़ी या फिर कैंसर.
यदि पेशाब का रंग दूधिया स़फेद है, तो इसका अर्थ है मूत्र के साथ प्रोटीन भी निकल रहा है. यदि रंग पीला है, तो जॉन्डिस या फिर यूरिन इंफेक्शन हो सकता है. अगर रंग लाल है तो स्टोन, ब्लैडर, यूरिथ्रा में ज़ख़्म या फिर प्रोस्टेट कैंसर का भी लक्षण हो सकता है.

अत्यधिक थकान

हमें लगता है- सामान्य कमज़ोरी.
हो सकता है- मिनरल्स की कमी, आयरन, सोडियम, कैल्शियम और विटामिन्स की कमी, डायबिटीज़, लो ब्लड प्रेशर.
किसी-किसी केस में बहुत पसीना भी आता है तो, यह आनेवाली बीमारी का संकेत भी होता है, जैसे- जॉन्डिस, बुख़ार या फिर तनाव इत्यादि में पसीना ज़्यादा आता है.

 

अक्सर हम सिरदर्द के लिए पेनकिलर्स का सहारा लेते हैं, जिनके अपने साइडइफेक्ट्स होते हैं. बेहतर है दर्दनिवारक दवाओं की बजाय आप योगासन करें और सिरदर्द से मुक्ति पाएं (Cure Migraine with Yoga).
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महासिर मुद्रा

* सुखासन में बैठ जाएं.
* मध्यमा, तर्जनी और अंगूठे के आगे के भाग आपस में मिलाएं.
* अनामिका को मोड़कर अंगूठे की जड़ के पास लगाएं. छोटी उंगली सीधी रहनी चाहिए.
* आंखें बंद रखें और रिलैक्स रहें.

  • यदि माइग्रेन है, तो भुजंगासन, ब्रह्म मुद्रा व महासिर मुद्रा करें.
  • सामान्य सिरदर्द के लिए अनुलोम-विलोम, शलभासन, मकरासन, बालासन व ताड़ासन
    भी करें.
चंद्रभेदन प्राणायाम
* पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं.
* बाईं नाक से सांस लें और दाईं नाक से सांस छोड़ें. इस प्रकार इसे करते रहें. आंखें बंद रखें.
* कमर व रीढ़ एकदम सीधी रखें.
* 2 मिनट तक कर सकते हैं.
युवराज सिंह, क्रिकेटर
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कैंसर से लड़ने के बाद युवराज सिंह पूरी तरह से योग की शरण में आ गए. उनका मानना है कि योग के ज़रिए वो बेहतर तरी़के से रिकवर कर सकते हैं. बीमारी के बाद दोबारा भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी की कोशिश में जुटे युवराज सिंह ने फिटनेस के लिए योग को ज़रूरी बताते हुए कहा था, “मैं अपनी ऊर्जा को वापस पाने के लिए नियमित योग कर रहा हूं. शारीरिक व मानसिक तौर पर फिर से ऊर्जावान होना बहुत मुश्किल होता है. लेकिन मैंने चुनौतियों का सामना किया और मुश्किलों से बाहर भी आया, अब मेरा लक्ष्य है कि शत-प्रतिशत फिट होकर वापसी करना. अगले 5-6 साल मेरे करियर के बेहतरीन साल होंगे और मैं बहुत आशान्वित हूं अपने भविष्य को लेकर.”