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चाहे कमरदर्द, पीठदर्द या ज्वाइंट पेन- हमेशा पेनकिलर्स लेने से बेहतर है कि कुछ और तरीका ट्राई करें, इससे दर्द से तो राहत मिलेगी ही, इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होगा.

बैक पेन

  • बैक पेन होने पर सबसे ज़रूरी है कंप्लीट बेड रेस्ट. जितना कम मूवमेंट होगा, आराम उतना ही जल्दी होगा. तो बेहतर होगा कि बैक पेन होने पर दो-तीन दिन बेड रेस्ट करें. साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि बेड थोड़ा फर्म हो.
  • न सीधे सोएं और ना ही पेट के बल. इससे आपके बैक पर एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ेगा,
  • सोने की बेस्ट पोज़ीशन है करवट लेकर घुटने मोड़कर सोना. अगर ज़रूरी लगे तो एक तकिया सिर के नीचे और एक दोनों घुटनों के बीच रखें.
  • बेड से उठते समय भी थोड़ा केयरफुल रहें. एकदम झटके से और सीधे न उठें. पहले करवट लेकर कुछ सेकंड इसी पोज़ीशन में रहें, फिर धीरे से उठें.
  • बार-बार झुकने से बचें. वज़न उठाने से भी बचें. सीटिंग पोश्‍चर का ख़ास ख़्याल रखें.
  • एक ही पोजीशन में ज्यादा समय तक खड़े होने या बैठने से भी बचें. अगर आप ऑफ़िस में काम करती हैं तो हर 45 मिनट पर ब्रेक लें.
  • दिनभर में दो-तीन बार बर्फ से सेंकें. गर्म पानी से सेंक भी फायदेमंद होता है.
  • किसी मसाज थेरेपिस्ट से मसाज करवाएं. इससे आप काफी रिलैक्स फील करेंगे.
  • फुटवेयर बदलें. कई बार ग़लत फुटवेयर भी बैक पेन की वजह बन जाता है.
  • दर्द ज़्यादा हो, तो डॉक्टर की सलाह पर पेनकिलर लें.
  • फिज़ियोथेरेपिस्ट से मिलकर कुछ एक्सरसाइज़ सीखें और नियमित रूप से ये एक्सरसाइज़ करें. एक्सरसाइज़ से आपको काफी राहत मिलेगी.
    ये होम रेमेडीज़ ट्राई करें
  • नीम की नरम पत्तियों को तोड़कर उसका काढ़ा बना लें. फिर रुई या साफ़ कपड़ा हल्के गरम काढ़े में भिगोकर पीठ के दर्द वाले स्थान पर सेंक करें.
  • 100 ग्राम अजवायन का चूर्ण और 100 ग्राम गुड़ एक साथ मिलाकर रख लें. 5-5 ग्राम यह चुर्ण सुबह-शाम लेने से कमर दर्द दूर होता है.
  • सुबह उठकर खाली पेट लहसुन की दो कलियां खाएं. आप रोज़ लहुसन के तेल मालिश भी कर सकते हैं.

घुटने में दर्द

Pain Relief Technique
  • भोजन में दालचीनी, जीरा, अदरक और हल्दी का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करें. इससे घुटनों की सूजन और दर्द कम होता है.
  • मेथी दाना, सौंठ और हल्दी बराबर मात्रा में मिला कर तवे या कढ़ाई में भून कर पीस लें. रोजाना एक चम्मच चूर्ण सुबह-शाम भोजन करने के बाद गर्म पानी के साथ लें.
  • सुबह खाली पेट दही के साथ लहसुन की एक कली खाएं.
  • हल्दी चूर्ण, गुड़, मेथी दाना पाउडर और पानी सामान मात्रा में मिलाएं. थोड़ा गर्म करके इनका लेप रात को घुटनों पर लगाएं और पट्टी बांधकर सो जाएं.
  • अलसी के दानों के साथ दो अखरोट की गिरी सेवन करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है.
  • गेहूं के दाने के आकार का चूना दही या दूध में घोलकर दिन में एक बार खाएं. इसे 90 दिन तक लेने से दर्द में आराम आ जाता है.
  • खाने के एक ग्रास को कम से कम 32 बार चबाकर खाएं. इससे कुछ ही दिनों में घुटनों में साइनोबियल फ्लूइड बनने लगता है, जिससे घुटनों की तकलीफ में आराम आता है.
  • पूरे दिन भर में कम से कम 12 गिलास तक पानी अवश्य पीएं. ध्यान रखें, कम पानी पीने से भी घुटनों में दर्द बढ़ जाता है.
  • भोजन के साथ अंकुरित मेथी का सेवन करें.
  • एक्यूप्रेशर-रिंग को दिन से तीन बार, तीन मिनट तक अनामिका एवं मध्यमा उंगली पर एक्यूप्रेशर करें.
  • सुबह-सुबह दौड़ने की आदत डालें. विशेषज्ञों का दावा है कि दिल की तरह ही हमारे पैरों की सेहत भी दौड़ने से बेहतर होती है. दौड़ने से जहां जोड़ों का दर्द खत्म होता है, वहीं सूजन की समस्या भी दूर होती है. घुटने मजबूत बनते हैं.
  • कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर घुटनों को सेकें. दर्द में आराम मिलेगा.

सिरदर्द हो तो

Pain Relief Technique
  • जैसे ही सिरदर्द महसूस हो तुरंत एक्शन लें. कुछ खा या पी लें. अगर लंबे समय से कंप्यूटर के सामने काम कर रहे हों तो छोटा-सा ब्रेक लेकर टहल आएं. इससे दर्द बढने नहीं पाएगा.
  • अगर स्ट्रेस संबंधी सिरदर्द हो तो 10 मिनट की क्विक नींद ले लें. इससे तुरंत आराम मिलता है.
  • एक गहरी सांस लें. थोड़ी देर रुकें. धीरे-धीरे सांस छोड़ें. अब जम्हाई लें. आप तुरंत रिलैक्स महसूस करेंगे.
  • या फिर ब्रिस्क वॉक करें. इससे आपका शरीर एंडॉर्फिन रिलीज़ करेगी, तो नेचुरल पेनकिलर का काम करता है.
  • बालों में अच्छी तरह कंघी करें. ये हेड मसाज का काम करेगा.
  • बर्फ से सेंकना भी फायदेमंद होगा. माथे पर आईब्रो के ऊपर के भा, कनपटी और सिर के टॉप सेंटर को आइस पैक से सेंकने पर इंस्टेंट रिलीफ मिलता है.
  • अगर माइग्रेन है तो थोड़ी देर लाइट्स ऑफ करके अंधेरे कमरे में आराम करें.
    ये होम रेमेडीज़ ट्राई करें
  • सर्दी-ज़ुकाम के कारण सिरदर्द हो तो साबूत धनिया और मिश्री का काढ़ा बनाकर पीने से आराम मिलेगा.
  • तुलसी के पत्तों को पीसकर लेप करने से सिरदर्द में राहत मिलती है.
  • सुबह-सुबह उठते ही खाली पेट सेब पर नमक लगाकर खाने से सिरदर्द में लाभ होता है.
  • सुबह खाली पेट जलेबियां दूध में डालकर खाने से भी सिरदर्द ठीक हो जाता है.

कान में दर्द हो तो

  • हाथों से कानों को कपिंग करें. इसके लिए हथेली से कप बनाकर कानों के पास कपिंग करें. इससे कानों को गर्माहट मिलेगी और दर्द से राहत मिलेगी.
  • डॉक्टर्स कानदर्द में फौरन राहत के लिए ब्लो ड्रायर से कानों को गर्माहट देने की सलाह भी देते हैं. हां कान के पर्दे में होल हो तो ब्लो ड्रायर का इस्तेमाल न करें.
  • अगर तेज़ हवा से कान बंद हो गए हों, तो दोनों नथुनों को अंगूठे और तर्जनी से पकड़ें. मुंह में हवा भरकर मुंह बंद रखें. तेज़ी से हवा छोड़ें.
  • अगर फ्लाइट में टेकऑफ या लैंडिंग के समय कान में तकलीफ होती हो, तो सबसे आसान तरीका है च्युंगम चबाएं. इसके अलावा ध्यान रखें कि टेकऑफ या लैंडिंग के समय ईयरफोन का इस्तेमाल न करें.
  • सरसों का तेल हल्का गर्म करके डालने से कान का दर्द में आराम मिलता है.
  • प्याज़ का रस गुनगुना करके डालने से दर्द में तुरंत आराम मिलता है.
  • अदरक का रस भी गुनगुना करके डालना काफ़ी कारगर होता है.
  • तुलसी के पत्तों को पीसकर रस निकाल लें. इस रस को हल्की आंच पर रखकर थोड़ा गरम करें और कान में डालें.

जॉइंट पेन

Pain Relief Technique
  • जोड़ों के दर्द के लिए वैसे कोई शॉर्टकट फार्मूला नहीं है. हां आप कुछ बातों को ख़्याल रखकर दर्द से राहत पा सकते हैं.
  • सुबह उठने पर जोड़ों में जकड़न ज़्यादा महसूस होती है. इसके लिए बेड से उठने से पहले ही स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करें. हाथों-पैरों को स्ट्रेच करें. जोड़ों को स्ट्रेच करें. कमर के लिए भी स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करें. इससे जकड़न से राहत मिलेगी.
  • वो ज़माना गया जब जॉइंट पेन होने पर डॉक्टर्स रेस्ट करने की सलाह देते थे. अब डॉक्टर्स कहते हैं कि ज्वाइंट पेन को कम करने के लिए मूवमेंट बहुत ज़रूरी है. इसलिए एक्टिव रहें.
  • वॉकिंग. जॉगिंग और स्वीमिंग आपकी तकलीफ को कम करेगी.
  • वज़न को मेंटेन रखें. बहुत जल्दी बहुत ज़्यादा वज़न घटाने के चक्कर में क्रैश डायट न करें. इससे ऑस्टियोपोरोसिस का ख़तरा बढ़ जाता है.
  • अपने पोश्‍चर पर ध्यान दें. बैठने-उठने का सही पोश्‍चर पता करें. इससे भी आपकी तकलीफ काफी कम होगी.
  • नमक का सेवन कम कर दें. रोज़ाना 6 ग्राम से ज़्यादा नमक का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • अपने डायट में भरपूर मात्रा में कैल्शियम शामिल करें, जैसे दही, कॉटेज चीज़, लो फैट डेयरी प्रोटक्ट्स, बादाम, साल्मन आदि.
  • रिसर्च से पता चला है कि फिश ऑयल कैप्सूल का सेवन करने से आर्थराइटिस की तकलीफ को 33% कम किया जा सकता है.

मसल क्रैम्प आ जाए तो

Pain Relief Technique
  • सबसे आसान तरीका है विपरीत दिशा में स्ट्रेच करें. पैरों के पंजों को स्ट्रेच करें. इससे दर्द में राहत मिलेगी.
  • जहां दर्द है. वहां मसाज करें. वहां हल्के-हल्के मूवमेंट करें.
  • एक हाथ के अंगूठे और तर्जनी से ऊपरी होंठ के एक कॉर्नर पर ज़ोर से चिकोटी काटें. स्किन को हल्का-सा खींचें. ये तरीका भी ज़रूर आजमाएं. दर्द में आराम मिलेगा.
  • नियमित रूप से स्ट्रेचिंग और मसाज आपको मसल क्रैम्प से बचाएगा.
  • रात को सोते समय पैरों के नीचे तकिया रखें. इससे आप रात में अचानक होनेवाले मसल क्रैम्प से बच सकते हैं.

आंखों में तकलीफ होने पर

  • अगर घंटों काम करके आंखें थक गई हों और आंखों में दर्द हो, तो हर आधे घंटे में आंखों को रेस्ट दें.
  • साथ ही कुछ आई एक्सरसाइज़ ट्राई करें. कुछ देर तक दूर डिस्टेंस पर रखी किसी चीज़ को देखें.
  • आंखों पर तीन-चार बार पानी के छींटें मारें. या कोई कूलिंग आई ड्रॉप यूज़ करें. इससे आंखों को तुरंत आराम मिलेगा.
  • साथ में सिरदर्द भी हो, तो एक बार चश्मे का नंबर भी चेक करा लें. चश्मे की फीटिंग सही न हो, तो भी कई बार आंखों को तकलीफ होती है.

एड़ियों में दर्द

Pain Relief Technique
  • सबसे पहले सही फूटवेयर का चुनाव करें. एड़ियों में दर्द का अर्थ है कि आपके चलने की स्टाइल में दोष है या फिर आपको फूटवेयर सही नहीं है. हाई हील या अकंफ़र्टेबल चप्पलों से बचें.
  • ये करें- किसी समतल जगह पर खड़े हो जाएं. एड़ियों पर प्रेशर दें. 30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें. दिन में पांच बार ये एक्सरसाइज़ करें.
  • पैरों को बारी-बारी से पहले गर्म और ठंडे पानी में डुबोएं.

अगर आंख में कुछ चला जाए

  • पलकों को जल्दी-जल्दी झपकाएं. इससे छोटा-मोटा कचरा निकल जाएगा.
  • साफ कॉटन या रूमाल का एक कॉर्नर को हल्का-सा गीला करके आंखें पोंछें.
  • अगर पलक झपकाने से कचरा नहीं निकलता है, तो ऊपरी पलकों को हल्का-सा खींचते हुए निचली पलकों के पास ले आएं. इससे आंसू आएगा, लेकिन कचरा निकल जाएगा.
  • एक छोटे बाउल में पानी लें, इसमें पलकों को झपकाने की कोशिश करें.
  • अगर कोई केमिकल या सोप आंखों में चला गया है, तो आंखों पर पानी के छींटें मारें.
  • अगर फिर भी तकलीफ कम न हो या आंखों का कचरा न निकल पाए, तो फौरन डॉक्टर के पास जाएं. इस दौरान आंखें बंद रखें, ताकि आंखों का मूवमेंट कम हो और आपकी आंखों को नुकसान न पहुंचे.
  • अगर आंख पर बॉल या किसी और चीज़ से चोट लग गई हो तो

मेडिकल एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स बार बार कह रहे हैं कि इम्यू‍निटी के कमजोर होने से कोरोना का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए कोरोना से बचना है तो सबसे ज़रूरी है स्ट्रॉन्ग इम्युनिटी. और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए लोग योग, प्राणायाम से लेकर आयुर्वेदिक नुस्खे, काढ़ा तक सब कुछ ट्राई कर रहे हैं. इस बीच सरकार ने भी नेचुरल इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए कुछ डायट प्लान की लिस्ट जारी की है.

Diet Plan To Boost Natural Immunity

सरकार की ओर से mygovindia ट्विटर हैंडल के ज़रिए एक बेसिक डाइट प्लान की सिफारिश की गई है, जो बेहतर इम्यूनिटी के साथ ही मसल्स बनाने और एनर्जी लेवल को ठीक रखने में मदद करेगी. इस ट्वीट में कोविड पेशेंट्स को डार्क चॉकलेट, हल्दी वाला दूध और प्रोटीन रिच डायट लेने की सलाह दी गई है.


सरकारी की गाइडलाइंस के अनुसार

– कोरोना पेशंट्स को अपने डायट में साबुत अनाज जैसे रागी, ओट्स शामिल करने चाहिए.

Diet Plan To Boost Natural Immunity

– प्रोटीन रिच फ़ूड जैसे चिकन, मछली, अंडे, पनीर, सोया भी इम्युनिटी बूस्टर फ़ूड हैं, इन्हें भी डायट में ज़रूर शामिल करें.

– इसके अलावा, सरकार ने अखरोट, बादाम, ऑलिव ऑयल जैसे हेल्दी फैट खाने को भी कहा है.

– ज़रूरी विटामिन और मिनरल के लिए कलरफुल फ्रूट्स और सब्ज़ियां दिन में पांच बार खाने को रिकमेंड किया गया है.

Diet Plan To Boost Natural Immunity


– स्ट्रेस फ्री और पॉजिटिव रहने के लिए डार्क चॉकलेट खाने को कहा गया है.

– जबकि इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए दिन में एक बार हल्दी वाला दूध पीने की सलाह दी गई है.

Diet Plan To Boost Natural Immunity



– चूंकि कोरोना पेशंट्स को न महक आती है और न ही किसी चीज में स्वाद. इसके अलावा उनकी भूख और खाना चबाने की क्षमता भी खो जाती है. इसलिए उन्हें थोड़े थोड़े अंतराल पर सॉफ्ट फ़ूड खाने को कहा गया है.

– साथ ही अमचूर खाने की भी सलाह दी गई है.

– गाइडलाइन में ये भी कहा गया है कि सभी को अपनी क्षमतानुसार फ़िज़िकल एक्टिविटीज भी ज़रूर करनी चाहिए.

– योग-प्राणायाम, ब्रीदिंग एक्सरसाइज आपको फायदा पहुंचाएगी.

गौरतलब है भारत इस समय कोविड के विस्फोट से परेशान है. रोज़ाना लाखों की संख्या में कोविड के मरीज मिल रहे हैं. डॉक्टर्स, मेडिकल सेवाओं, ऑक्सीजन, दवाओं के अभाव से लोग परेशान हैं. ऐसे में सरकार, प्रशासन और मेडिकल एक्सपर्ट्स लोगों को सभी जरूरी एहतियात बरतने को कह रहे हैं, ज़रूरी गाइडलाइन फॉलो करने की अपील कर रहे हैं. ये डायट प्लान भी सरकार की उसी कोशिश का एक हिस्सा है.

हमारा स्वास्थ्य काफ़ी हद तक पेट और आंतोंके स्वास्थ्य से संबंध रखता है, लेकिन आजकल हमारी लाइफ़स्टाइल और हमारा खानपान ऐसा हो चुका है कि पेट संबंधी कई तकलीफ़ें अब आम हो चुकी हैं, जैसे- गैस, एसिडिटी और पाचन संबंधी परेशनियां और जब ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं तो गंभीर रूप औरअन्य रोगों को हुई जन्म देती हैं, जैसे- फ़ैटी लिवर, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और जब इन समस्याओं का समय पर इलाज नहींहो पाता तो ये और गंभीर होकर डायबिटीज़ टाइप 2 और हृदय रोगों ke जन्मों का कारण बन जातीं हैं. 

इनसे बचने के लिए महत्वपूर्ण है कि आप अपनी ज़रूरत अनुसार अपनी लाइफ़स्टाइल और डायट चेंज करें ताकि आपकापेट और पाचन रहे फिट, हेल्दी और गैस्ट्रोइंस्टेस्टाइनल संबंधी समस्याओं से मुक्त!

इसलिए गैस्ट्रोइंस्टेस्टाइनल संबंधी समस्याओं से ग्रसित रोगियों को उनकी स्थिति और व्यक्तिगत परिस्थितियों केअनुसार, आहार और जीवनशैली की में बदलाव की आवश्यकता होती है, जो एक्सपर्ट अड्वाइस से ही संभव है. 

Personalized Diet Plan

डॉ. रमेश गर्ग, सलाहकार गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट इस संदर्भ में दे रहे हैं ज़रूरी जानकारी- पूरे भारत में गैस्ट्रोइंस्टेस्टाइनल संबंधीसमस्याएं काफ़ी व्यापक हैं, जिसकी मुख्य वजह है- इनएक्टिव लाइफ़स्टाइल यानी गतिहीन जीवनशैली और अनहेल्दीडायट! इनसे निपटने का एक ही तरीक़ा है- दवाओं व इलाज के साथ-साथ डायट में बदलाव और एक्सरसाइज़, जिनमेंइस बात का पूरा ध्यान रखना होगा कि भारत भिन्नता का देश है, आपकी भौगोलिक स्थिति, जलवायु, मौसम, खान-पान, रहन-सहन आदि इसमें बड़ी भूमिका अदा करते हैं! इसलिए लाइफ़स्टाइल और डायट में बदलाव के लिए ये 6 तत्व हैं बेहदमहत्वपूर्ण- 

खाना कितनी मात्रा में और कितनी बार खाया जाए: ये हर किसी की व्यक्तिगत ज़रूरत पर निर्भर करता है लेकिन जिन्हेंपेट और आंत संबंधी समस्या है वो 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा खाएं और हाई बीपी से हो ग्रसित हैं वो दिन में 3 बार खाना खाएंजिससे एसिड का अधिक निर्माण और स्राव संतुलित हो.

खाना बनाने का तरीक़ा: जी हां, आप खाने को उबालते हैं, स्टीम करते हैं या तलते हैं- ये तमाम बातें प्रभावित करती हैं. जैसेडीप फ़्राई यानी तला हुआ खाना डायबिटीज़, फ़ैटी लिवर और क़ब्ज़ से परेशान लोगों को अवॉइड करना चाहिए. इसकेअलावा सब्ज़ियों को अगर बिना छीले पकाया जाए तो वो सबसे बेहतर है क्योंकि धोने और साफ़ लेने के बाद बिनाछिलका निकाले उन्हें पकाया जाए तो हेल्दी होता है क्योंकि छिलके पोषण और फाइबर का बेहतरीन स्रोत होते हैं जिससेआंतों का स्वास्थ्य भी बना रहता है. 

Personalized Diet Plan

खाने में क्या-क्या हो: आदर्श खाना वही होता है जिनमें सभी पोषक तत्वों का संतुलन हो. जो लोग मोटापे से ग्रसित हैंउनको अनरिफ़ाइंड ग्रेंस और हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ खानी चाहिए, इसी तरह आपके शरीर की ज़रूरतों को देखते हुए प्रोटीन, फाइबर या अन्य तत्व कितनी मात्रा में चाहिए ये भी आपके डॉक्टर या एक्सपर्ट आपको बताएंगे. खाने को लेकरफ़्लेक्सिबल बनें और ज़्यादा-ज़्यादा वेरायटी अपने खाने में शामिल करें. 

शारीरिक गतिविधि कितनी है: पेट को और खुद को भी स्वस्थ रखने के लिए एक्सरसाइज़ को शामिल करें अपनीलाइफ़स्टाइल में. घंटेभर वॉकिंग, जॉगिंग, स्विमिंग से गैस और क़ब्ज़ से राहत मिलती है. जिनको पेप्टिक अल्सर कीसमस्या है वो रोज़ 30-60 मिनट तक वॉक करें. इसी तरह धीरे-धीरे फ़िज़िकल एक्टिविटी को अपनी ज़िंदगी का हिस्साबनाएं. 

पानी भरपूर मात्रा में पीएं: रोज़ दो से तीन लीटर पानी की सलाह दी जाती है. लेकिन इतना पानी पीना अगर संभव नहीं तोआप वेरायटी एड कर सकते हैं, जैसे- नींबू पानी, सूप, नारियल पानी आदि. लेकिन ये भी व्यक्तिगत ज़रूरत पर निर्भरकरता है इसलिए पाने डॉक्टर से राय ज़रूर लें. 

Personalized Diet Plan

अच्छी नींद और सोने का सही तरीक़ा है बेहद ज़रूरी: सोने की आपकी आदत कैसी है? सोने का पोश्चर, तरीक़ा आदि. एसिड की समस्या वालों को सिर ऊंचा रखकर सोने की सलाह दी जाती है. इसी तरह रात को खाना खाने के फ़ौरन बाद नासोने की भी सलाह दी जाती है. डिनर के एक घंटे के भीतर सोना अवॉइड करें. जितना गैप होगा उतना अच्छा रहेगा. इसीतरह नींद की क्वालिटी भी मायने रखती है. अच्छी गहरी नींद आपके पाचन को बेहतर रखती है. 

डॉक्टर श्रीरूपा दास, मेडिकल डायरेक्टर, एबॉट इंडिया का भी कहना है कि हम लोगों में जागरूकता बढ़ाने के प्रतिप्रतिबद्ध हैं ताकि गैस्ट्रोइंस्टेस्टाइनल समस्याओं से ग्रसित लोगों का इलाज और बीमारी का मैनेजमेंट प्रभावी तरीक़े से हो. उन्हें उनकी निजी ज़रूरतों को देखते हुए सही मार्गदर्शन, सलाह और डायट संबंधी जानकारी मिले और वो एक हेल्दी औरखुशहाल जीवन जी सकें! 

गोल्डी शर्मा

यह भी पढ़ें: कोरोना अलर्ट: करें अपना इम्युनिटी टेस्ट, पहचानें इन 11 लक्षणों को और बढ़ाएं इम्युनिटी का डोज़ (Covid Alert:Take This Immunity Test, Know These11 Signs And boost your Immunity)

पुरुषों में 90% इफंर्टिलिटी के मामलों में मुख्य कारण स्पर्म काउंट कम होना, स्पर्म की क्वालिटी में कमी या दोनों होते हैं. अनहेल्दी लाइफस्टाइल, स्टे्रस, असंतुलित डायट के अलावा स्पर्म काउंट कम होने के और भी कई कारण होते हैं. हमारी रोज़मर्रा की कुछ आदतें भी हमारे स्पर्म की हेल्थ को नुकसान पहुंचाती हैं और हमें इस बात का अंदाज़ा भी नहीं होता. अगर आप स्पर्म को हेल्दी रखना चाहते हैं, तो फौरन इन आदतों को बदल दें.

1. मोबाइल को जेब में रखने की आदत
शर्ट की जेब में मोबाइल रखने से हार्ट डिसीज़ होने के ख़तरे के बारे में तो आपने सुना होगा, लेकिन पैंट के जेब में मोबाइल रखना भी आपके लिए ख़तरनाक हो सकता है. मोबाइल सीधे आपके स्पर्म पर असर करेगा और आपका स्पर्म काउंट कम होना शुरू हो जाएगा. रिसर्च के अनुसार मोबाइल का रेडिएशन इतना ज़्यादा होता है कि रोज़ अगर पैंट की जेब में मोबाइल रखा जाए, तो हर महीने आपका स्पर्म काउंट 9 प्रतिशत तक कम हो सकता है. अगर स्पर्म को हेल्दी रखना चाहते हैं, तो बेहतर होगा कि पैंट की जेब में मोबाइल रखने से बचें.

2. शुगर ड्रिंक्स की आदत
अगर आपको कोल्ड ड्रिंक्स या कोई भी शुगर बेस्ड ड्रिंक्स पीने की आदत है, तो इसे भी तुरंत बदल दें, क्योंकि ये भी आपके स्पर्म काउंट पर सीधा असर डालता है. कार्बोनेटेड ड्रिंक्स में शक्कर की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है. इसे रोज़ाना या ज़्यादा पीने से स्पर्म बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती हे.

3. लैपटॉप को गोद में रखकर काम करना

Sperm Count


अगर आप भी रेग्युलर लैपटॉप को गोद में रखकर काम करते हैं, तो ये भी आपके स्पर्म की हेल्थ के लिए ठीक नहीं. लैपटॉप से निकलने वाली हीट टेस्टिकल्स यानी अंडकोष का तापमान बढ़ा सकती है. टेस्टिकल्स का तापमान सामान्यतः 2 डिग्री होना चाहिए, लेकिन गोद में लैपटॉप रखने से ये तापमान बढ़ जाता है, जिससे आपके स्पर्म को नुकसान पहुंचता है. लंबे समय तक ऐसा करने से स्पर्म काउंट घटता है. इसलिए लैपटॉप को हमेशा मेज़ या बेड पर रख कर काम करें. यदि आप लैपटॉप गोद में रखकर ही काम करने में कंफर्टेबल फील करते हैं, तो एक्स्ट्रा केयर के लिए लैप पैड का इस्तेमाल करें और बीच-बीच में ब्रेक लेते रहें, ताकि हीट बहुत ज़्यादा न हो.

4. टाइट जींस, पैंट या अंडरवेयर पहनना
टाइट जींस पहनकर भले ही आप हैंडसम लगते हों, लेकिन ये आपके स्पर्म काउंट के लिए सही नहीं. टाइट कपड़े पहनने से अंडकोष की थैली का टेम्प्रेचर बढ़ने लगता है, जिससे स्पर्म काउंट घटने लगता है. इसी तरह टाइट अंडरवेयर पहनने से भी बचें. एक रिसर्च में पाया गया है कि जो पुरुष ढीले अंडरवियर पहनते हैं, उनके स्पर्म की क्वालिटी टाइट अंडरवियर पहनने वाले पुरुषों से बेहतर होती है.

5. ड्रिंकिंग और स्मोकिंग
आज के समय में ड्रिंकिंग और स्मोकिंग सोशल लाइफ का हिस्सा बन गया है, लेकिन ड्रिंकिंग या स्मोकिंग से बॉडी में स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है. इससे स्पर्म काउंट कम होने लगता है. ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार 5 यूनिट शराब पीने से न केवल पुरुषों के स्पर्म की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है, बल्कि यह स्पर्म काउंट को भी कम करता है. इसके अलावा स्मोकिंग डीएनए को भी नुकसान पहुंचाता है, जिससे स्पर्म म्यूटेशन को बढ़ावा मिलता है. इसलिए जहां तक हो सके, स्मोकिंग और ड्रिंकिंग से दूर रहें.

6. तनाव
आजकल ज़िंदगी बहुत स्ट्रेसफुल हो गई है. स्ट्रेस के शरीर पर कई साइड इफेक्ट्स होते हैं. ये कई हेल्थ प्रॉब्लम्स की वजह तो बनता ही है, स्पर्म को भी प्रभावित करता है. लगातार स्ट्रेस में रहने से बॉडी का हार्मोनल लेवल बिगड़ जाता है. इससे बॉडी का ब्लड सर्कुलेशन भी बिगड़ता है, जिससे न केवल स्पर्म काउंट कम होता है, बल्कि स्पर्म प्रोडक्शन और स्पर्म की क्वालिटी भी प्रभावित होती है.

7. पर्याप्त नींद न लेना
पर्याप्त नींद न लेने से कई हेल्थ प्रॉब्लम्स तो होती ही हैं, ये आपके स्पर्म की हेल्थ के लिए भी नुकसानदायक है. दरअसल रोज़ाना कम से कम 7 घंटे की नींद न लेने से बॉडी में स्ट्रेस बढ़ाने वाले हार्मोन्स का लेवन बढ़ जाता है. इससे बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन भी गड़बड़ हो जाता है. इसका असर स्पर्म काउंट पर पड़ता है.

8. एक्सरसाइज़ न करना और मोटापा
बीएमआई का हाई लेवल शरीर में कई बीमारियों के ख़तरे को तो बढ़ाता ही है, फर्टिलिटी को भी प्रभावित करता है. ओबेसिटी से शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर स्पर्म के प्रोडक्शन पर असर करता है. बॉडी में फैट का एक्स्ट्रा लेवल शरीर के टेम्प्रेचर ख़ासकर टेस्टिकल एरिया के तापमान को बढ़ा देता है, जिससे स्पर्म काउंट कम होता है.

9. हॉट बाथ
हॉट बाथ से शरीर रिलैक्स भले ही फील करता हो, लेकिन इसका स्पर्म काउंट पर उल्टा असर होता है. दरअसल हॉट बाथ से शरीर के साथ-साथ टेस्टिकल्स यानी अंडकोष का तापमान बढ़ जाता है, जिससे स्पर्म की क्वालिटी ख़राब होती है और स्पर्म काउंट भी घटता है. फर्टिलिटी बनाए रखना चाहते हैं तो रोज़ाना हॉट बाथ से बचें.

10. सनस्क्रीन
आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन ये सच है कि सनस्क्रीन में मौजूद केमिकल्स आपके स्पर्म काउंट को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए सनस्क्रीन इस्तेमाल करते समय भी सावधानी बरतें. सनस्क्रीन में पाए जानेवाले केमिकल्स स्पर्म काउंट को 33% कम कर सकते हैं. इसमें मौजूद ऑक्टीनॉक्सेट हार्मोन लेवल में बदलाव लाता है, जबकि ऑक्सीबेनज़ोन स्पर्म प्रोडक्शन को धीमा कर देता है. इसलिए बेहतर होगा कि धूप में कम ही निकलें और अगर सनस्क्रीन अप्लाई कर रहे हैं, तो धूप से लौटते ही तुरंत चेहरा धो लें.

11. आहार में सोया शामिल करें
ये सच है कि शाकाहारी लोगों के लिए सोया को प्रोटीन का बढ़िया स्रोत माना जाता है, लेकिन ये भी सच है कि सोया शरीर में महिला हार्मोन के प्रोडक्शन को बढ़ावा देता है, जिससे पुरुष हार्मोन कम हो जाता है. इससे स्पर्म को नुकसान पहुंचता है. हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की एक रिसर्च के अनुसार डायट में ज़्यादा सोया प्रोडक्ट्स शामिल करने से इसमें मौजूद आइसोफ्लेवॉन स्पर्म की संख्या को कम कर देते हैं. अध्ययन से पता चला कि एक दिन में सोया के हाफ सर्विंग का सेवन भी स्पर्म को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है. इसीलिए फर्टिलिटी को बनाए रखना चाहते हैं, तो सोया दूध और टोफू का सेवन कम कर दें.


स्पर्म काउंट बढ़ाना है तो खाएं ये फूड

Sperm Count

अनारः एक रिसर्च के अनुसार अनार का जूस स्पर्म काउंट और स्पर्म की क्वालिटी बढ़ाता है. रोज़ एक ग्लास अनार का जूस पीने से पुरुषों की फर्टिलिटी बेहतर बनती है.
कद्दू के बीजः कद्दू के बीज में मौजूद ज़िंक और ओमेगा 3 फैटी एसिड पुरुषों के अंगों में ब्लड सर्कुलेशन को तेज़ करते हैं. रोज़ाना एक मुट्ठी कद्दू का बीज खाने से टेस्टोस्टेरॉन और स्पर्म काउंट बढ़ता है.
केलाः केले में मौजूद ब्रोमेलिन नामक एंजाइम और विटामिन बी पुरुषों का स्टेमिना, एनर्जी और स्पर्म काउंट बढ़ाते हैं. इसलिए रोज़ सुबह-शाम एक केला ज़रूर खाएं.
अखरोटः रोज़ एक मुट्ठी अखरोट खाने से स्पर्म काउंट बेहतर होता है और उसकी क्वालिटी भी इम्प्रूव होती है. दरअसल अखरोट में मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड मेल आर्गन में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाते हैं, जिसका असर स्पर्म पर दिखाई देता है.
अंडाः प्रोटीन और विटामिन ई से भरपूर अंडे खाने से स्पर्म हेल्दी होता है और उसकी क्वालिटी भी बेहतर बनती है. रोज़ नाश्ते में 2 अंडे को ज़रूर शामिल करें.
गाजरः गाजर में मौजूद विटामिन ए स्पर्म प्रोडक्शन को बेहतर बनाता है. गाजर के सेवन से फर्टिलिटी बढ़ती है.






हेल्दी और फिट रहने के लिए हार्मोन्स का संतुलित रहना बेहद ज़रूरी है. भूख, नींद, सेक्स लाइफ से लेकर मूड तक हार्मोन्स से प्रभावित होते हैं. इतना ही नहीं अगर आपका वज़न लगातार बढ रहा है या बहुत कोशिशों के बाद भी कम नहीं हो रहा है. तो इसके लिए भी कुछ हार्मोन्स ज़िम्मेदार हो सकते हैं.
 
हार्मोन्स में असंतुलन की कई वजहें हो सकती हैं, जिसमें प्यूबर्टी, प्रेग्नेंसी, कुछ दवाओं का सेवन मुख्य वजहें हैं. हार्मोन्स के असंतुलन से शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य तो प्रभावित होता ही है, इससे वेट गेन की प्रॉब्लम भी हो सकती है. इतना ही नहीं, अगर आपके हार्मोन्स का लेवल गड़बड़ हैं तो वेटलॉस भी आपके लिए उतना ईज़ी नहीं होगा. इसलिए ज़रूरी है वज़न बढानेवाले हार्मोन्स को कंट्रोल में रखना.

1. थायरॉइड हार्मोन्स
थायरॉयड ग्लैंड्स का काम टी3, टी4 और कैल्सिटॉनिन हार्मोन्स प्रोड्यूस करना है. ये हार्मोन्स बॉडी का मैटाबोलिज़म मेंटेन करते हैं. अगर शरीर में इन हार्मोन्स का स्राव कम होता है, तो आप हाइपोथायरॉइडिज़म का शिकार हो सकते हैं, जिसका सीधा संबंध वज़न बढने से है.
क्या करें?
– नियमित रूप से थायरॉयड का टेस्ट कराते रहें. डॉक्टर को कंसल्ट करें.
– कच्ची सब्ज़ियां खाने से परहेज़ करें. पकी हुई सब्ज़ी ही खाएं.
– आयोडाइज़्ड नमक इस्तेमाल करें.
– अपने डायट में ज़िंक शामिल करें. ऑयस्टर और कद्दू के बीज ज़िंक के अच्छे स्रोत हैं.
– फिश ऑयल का सेवन करें. विटामिन डी सप्लीमेंट्स लें.
– अगर डॉक्टर ने थायरॉयड के लिए कोई दवा दी है, तो उसे नियमित खाएं.

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2. इंसुलिन
इंसुनिल पैनक्रियाज़ से स्रावित होनेवाला हार्मोन है, जिसका काम ग्लूकोज़ को कोशिकाओं तक पहुंचाना है. इसी ग्लूकोज़ के ज़रिए हमें एनर्जी मिलती है और हम तमाम काम कर पाते हैं. जब शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है, तो ग्लूकोज़ शरीर के अन्य भागों में पहुंच नहीं पाता, जिससे शरीर में काम करने की एनर्जी ही नहीं रह जाती. इससे शरीर का ब्लड शुगर लेवल भी प्रभावित होता है, जिससे वेट गेन होता है.
क्या करें?
– ब्लड शुगर लेवल चेक करते रहें. डॉक्टर से कंसल्ट करें.
– बैलेंस डायट लें. लो कार्ब डायट लें.
– स्टे्रस से दूर रहें.
– ज़्यादा से ज़्यादा फल और सब्ज़ियां खाएं.
– शराब-सिगरेट से परहेज़ करें.
– लेट नाइट स्नैकिंग से बचें.
– योग-एक्सरसाइज़ इंसुलिन को नियमित करने में मदद करता है.
– आठ घंटे की नींद ज़रूर लें. कम सोने से हार्मोन्स का बैलेंस गड़बड़ा सकता है, ख़ासकर इंसुलिन लेवल पर इसका सीधा असर होता है.

3. एस्ट्रोजन
एस्ट्रोजन का हाई या लो लेवल दोनों ही वज़न बढने का कारण बन सकता है. ओवेरियन सेल्स द्वारा अधिक मात्रा में एस्ट्रोजन का निर्माण या ऐसे फूड, जो एस्ट्रोजन रिच होते हैं, का सेवन एस्ट्रोजन लेवल को बढा सकते हैं. दरअसल स्वस्थ शरीर उचित मात्रा में इंसुलिन प्रोड्यूस करता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है. लेकिन शरीर में एस्ट्रोजन का हाई लेवल ऐसे सेल्स प्रोड्यूस करता है, जो इंसुलिन प्रोड्यूस करते हैं. इससे हमारा शरीर इंसुलिन रेज़िस्टेंट बन जाता है, जिससे ग्लूकोज़ लेवल हाई हो जाता है और वज़न बढने लगता है. जबकि लो एस्ट्रोजन की प्रॉब्लम ज़्यादातर उम्र बढने पर होती है, क्योंकि उम्र बढने के साथ एस्ट्रोजन प्रोडक्शन कम हो जाता है. एस्ट्रोजन प्रोड्यूस करने के लिए शरीर फैटी सेल्स का इस्तेमाल करता है और पूरी एनर्जी को फैट में कन्वर्ट कर देता है, जिससे वेट गेन होता है.
क्या करें?
– प्रोसेस्ड मीट खाने से बचें. मीट लोकल माकेंट से ही ख़रीदें.
– अल्कोहल से परहेज़ करें.
– नियमित योग-एक्सरसाइज़ करें. स्ट्रेस फ्री रहने की कोशिश करें.
– डायट में ज़्यादा से ज़्यादा साबुत अनाज, फ्रेश वेजीटेबल और फल शामिल करें.
– डॉक्टर से कंसल्ट करें. उन्हें बताएं कि एस्ट्रोजन लेवल मेंटेन रखने के लिए आपने लाइफस्टाइल में क्या-क्या बदलाव किए हैं, ताकि वो आपको सही सलाह दे सकें.

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4. टेस्टोस्टेरॉन
आमतौर पर टेस्टोस्टेरॉन को मेल हार्मोन समझा जाता है, लेकिन महिलाओं के शरीर में भी इसका स्राव होता है. टेस्टोस्टेरॉन सेक्स डिज़ायर को मेंटेन करता है, फैट बर्न करता है और हड्डियों व मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है. लेकिन बढती उम्र, स्ट्रेस आदि कारणों से कई बार टेस्टोस्टेरॉन का लेवल कम होने लगता है, जिससे मोटापा बढता है.
क्या करें?
– डॉक्टर से कंसल्ट करके टेस्टोस्टेरॉन के लेवल की जांच करवाएं.
– डायट में फ्लैक्स सीड, पंपकिन सीड्स, साबुत अनाज आदि हाई फाइबर वाली चीज़ें शामिल करें. इससे वेटलॉस में भी मदद मिलेगी.
– नियमित एक्सरसाइज़ करें. इससे टेस्टोस्टेरॉन लेवल इंप्रूव होगा और मेटाबोलिज़म भी बूस्ट होगा.
– विटामिन सी, प्रोबायोटिक और मैग्नीशियम सप्लीमेंट्स लें.
– अल्कोहल से परहेज़ करें.
– ज़िंक और प्रोटीन सप्लीमेंट्स लें. इससे आपका टेस्टोस्टेरॉन लेवल ठीक होगा.

5. प्रोजेस्टेरॉन
शरीर के स्मूद फंक्शनिंग के लिए प्रोजेस्टेरॉन ज़रूरी है. लेकिन कई बार स्ट्रेस, मेनोपॉज़ या कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स के सेवन से इसका लेवल कम हो जाता है, जिससे वज़न बढने लगता है.
क्या करें?
– अपने गायनेकोलॉजिस्ट से कंसल्ट करें.
– अगर कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स ले रही हैं तो अपने डॉक्टर से पूछें कि आपके लिए कौन-सा पिल बेहतर होगा.
– प्रोसेस्ड मीट का सेवन न करें.
– नियमित एक्सरसाइज़ करें. प्राणायाम भी फायदेमंद साबित होगा.
– स्ट्रेस से बचें. ज़रूरी हो तो स्ट्रेस मैनेजमेंट थेरेपी की मदद लें.

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स्लिमिंग मंत्र
लाइफ स्टाइलः लाइफस्टाइल में बदलाव लाएं. बिज़ी रूटीन से समय निकालकर एक्सरसाइज़ करें. सही डायट और एक्सरसाइज़ से फिट रहना मुश्किल काम नहीं है.  
जंक फूडः आज के दौर में जंक फूड से पूरी तरह बचना तो मुमकिन नहीं, लेकिन उनमें भी हेल्दी ऑप्शन अपनाए जा सकते हैं. इसके अलावा जंक फूड के लिए हफ्ते या महीने में एक-दो दिन फिक्स कर लें और स़िर्फ उसी समय जंक फूड खाएं.
समय की कमीः बिज़ी लाइफ ने रेडी टु ईट खाना आदत बना दिया है. समय के अभाव ने फास्ट फूड और दो मिनट में बन जाने वाली चीज़ों की डिमांड बढ़ा दी है और इन्हीं चीज़ों से मोटापा बढ़ने लगता है. लेकिन कम समय में भी हेल्दी खाना बनाया जा सकता है जैसे- सूप, सलाद, ओट्स, दलिया आदि. वर्किंग कपल थोड़ी-सी प्लानिंग करके हेल्दी डायट अपना सकते हैं.
स्ट्रेसः तनाव भी वज़न बढ़ने की एक बड़ी वजह है. तनाव में अक्सर हम ज़्यादा खाते हैं. जब भी लगे कि आप तनाव महसूस कर रही हैं, तो एक ग्लास पानी पी लें. साथ ही तनावमुक्त होने के लिए एक्सरसाइज़ करें, जैसे- गहसी सांसें लें, मसल रिलैक्शेसन तकनीक अपनाएं.
नींद की कमीः लेट नाइट जागने की आदत और नींद पूरी न होने से भी मोटापा बढ़ता है. बेहतर होगा कि अपना हर काम समय पर पूरा करने की कोशिश करें ताकि आप समय पर सो सकें और पर्याप्त नींद ले सकें. रोज़ाना 7-8 घंटे की नींद बेहद ज़रूरी है.

चाहे सिरदर्द हो, कमरदर्द, पीठदर्द या ज्वाइंट पेन- हमेशा पेनकिलर्स लेने से बेहतर है कि कुछ नेचुरल पेनकिलर्स ट्राई करें, होम रेमेडीज़ आज़माएं. इससे दर्द से तो राहत मिलेगी ही, इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होगा.

सिरदर्द

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– लहसुन की 1-5 कलियों को 1-2 ग्राम नमक के साथ पीसकर खाना खाने के साथ खाएं. इससे वात से उत्पन्न सिरदर्द में आराम मिलता है.
– तुलसी के पत्तों को पीसकर लेप करने से राहत मिलती है.
– 1 कप दूध में पिसी इलायची मिलाकर पीने से भी सिरदर्द में आराम मिलता है.
– अगर तेज़ गर्मी की वजह से सिरदर्द हो तो धनिया पीसकर सिर पर लगाएं.
– सुबह-सुबह उठते ही खाली पेट सेब पर नमक लगाकर खाने से सिरदर्द में लाभ होता है.
– सुबह खाली पेट जलेबियां दूध में डालकर खाने से भी सिरदर्द ठीक हो जाता है.
–  लौकी का गूदा निकालकर एकदम बारीक़ कर लें और माथे पर लेप करें. गर्मी से होने वाले सिरदर्द में बेहद कारगर है.
– दालचीनी को पीसकर माथे पर लेप करने से भी आराम मिलता है.
– गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पीने से गैस से उत्पन्न सिरदर्द में राहत मिलती है.
– गुड़ को पानी में घोल-छानकर पीने से सिरदर्द में आराम मिलता है.
– दही, चावल और मिश्री मिलाकर सूर्योदय से पहले खाने से सूर्योदय के साथ घटने-बढ़ने वाले दर्द में आराम मिलता है.
– दिन में दो बार दही और चावल का सेवन करने से लाभ होता है.
– लौंग पीसकर हल्का गरम करके सिर पर लेप लगाने से दर्द मिटता है.
– केसर को घी में पीसकर सूंघने से माइग्रेन का दर्द चला जाता है.
– गाय का शुद्ध ताज़ा घी सुबह-शाम 2-2 बूंद नाक मेें डालने से आराम मिलता है.
– बड़ी इलायची का छिलका बारीक़ पीसकर हल्का गर्म करके सिर पर लेप करने से आराम मिलेगा.
– सूर्योदय से पहले नारियल व गुड़ के साथ छोटे चने के बराबर कपूर मिलाकर तीन दिन तक खाएं. माइग्रेन का दर्द चला जाएगा. स्मरणशक्ति कमज़ोर होना
– 7 बादाम रात भर पानी मेंें भिगोएं. सुबह पीसकर पेस्ट बना लें, फिर दूध मेंें मिलाकर उबाल कर पीएं. ऐसा 15 से 40 दिनों तक करें.
– 20 ग्राम अखरोट 10 ग्राम किशमिश या अंजीर के साथ खाएं.


इन बातों का भी रखें ध्यान
– सिरदर्द का मुख्य कारण डिहाइड्रेशन और लो ब्लड शुगर है. इसलिए पर्याप्त पानी पीएं और संतुलित आहार लें.
– अगर आपको अक्सर सिरदर्द की शिकायत रहती हो तो एक डायरी रखें और उसमें नोट करें कि कब-कब सिरदर्द हुआ.
– जैसे ही सिरदर्द महसूस हो तुरंत एक्शन लें. कुछ खा या पी लें. अगर लंबे समय से कंप्यूटर के सामने काम कर रहे हों तो छोटा-सा ब्रेक लेकर टहल आएं. इससे दर्द बढने नहीं पाएगा.
– पानी में घुलनेवाला कोई पेनकिलर लें या किसी फिज़ी ड्रिंक के साथ इन्हें लें, ताकि  जल्दी राहत मिले. लेकिन ध्यान रहे, सिरदर्द के लिए ह़फ़्ते में दो या तीन दिन से ज्यादा पेनकिलर्स न लें.

कमर-पीठ दर्द

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– पेनकिलर लेने से बेहतर है कि जहां दर्द है, वहां बर्फ से सेकें. दिन में तीन बार 20 मिनट तक सेंक दें.
– एक ही पोजीशन में ज्यादा समय तक खड़े होने या बैठने से बचें. अगर आप ऑफ़िस में काम करती हैं तो हर 45 मिनट पर ब्रेक लें.
– नीम की नरम पत्तियों को तोड़कर उसका काढ़ा बना लें. फिर रुई या साफ़ कपड़ा हल्के गरम काढ़े में भिगोकर पीठ के दर्द वाले स्थान पर सेंक करें.
– 20 ग्राम तिल, 3 ग्राम सोंठ व 40 ग्राम गुड़ को एक साथ मिलाकर दूध में पीस कर चाटें. दिन में दो बार इसका सेवन करने से तीन दिनों में ही पीठ दर्द गायब हो जाता है.
– 100 ग्राम अजवायन का चूर्ण और 100 ग्राम गुड़ एक साथ मिलाकर रख लें. 5-5 ग्राम यह चुर्ण सुबह-शाम लेने से कमर दर्द दूर होता है.
– अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके पानी में उबालें. छान लें और इस पानी में शहद मिलाकर पीएं.
– 5 ग्राम खजूर को उबालकर उसमें 2 ग्राम मेथी का चूर्ण डालकर नियमित पीने से दर्द से राहत मिलती है.
– कमलककड़ी के चूर्ण को दूध में उबालकर पीने से भयंकर से भयंकर कमर दर्द में आराम मिलता है.
– अदरक को पीसकर दर्दवाली जगह पर लगाएं.
– सुबह उठकर खाली पेट लहसुन की दो कलियां खाएं. आप रोज़ लहुसन के तेल मालिश भी कर सकते हैं.
– सोंठ व गोखरू समभाग में लेकर उसका क्वाथ बनाकर सुबह-शाम पीने से कमर दर्द दूर होता है.

घुटने का दर्द

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Closeup young woman sitting on sofa and feeling knee pain and she massage her knee at home. Healthcare and medical concept.

– राई को पीसकर घुटनों पर उसका लेप करें. तुरंत आराम मिलेगा.
– अजवायन को पानी में उबालकर उसकी भाप घुटनों पर लेने से दर्द से राहत मिलती है.
– लहसुन को पीसकर दर्दवाली जगह पर लगाने से तुरंत राहत मिलती है. पर इसे ज़्यादा देर तक न लगाएं, वरना फफोले पड़ जाएंगे
– आधा टीस्पून सोंठ और हल्दी पाउडर को पानी में उबाल लें. दिनभर घूंट-घूंटकर इसे पीते रहें.
– 50 मि.ली. गाय के दूध में 10 मि.ली. एरंड तेल मिलाकर पीना भी लाभप्रद है.
– नारियल के तेल में सेंधा नमक मिलाकर उसे गरम करके लेप करें और ऊपर से कपड़े की पट्टी रखकर बांध दें.
– लहसुन का कल्क 20 ग्राम, गाय का दूध 20 मि.ली., पानी 200 मि.ली. सब को एक साथ मिलाकर पकाएं. जब केवल दूध शेष रह जाए तो उसे उतार-छानकर पीएं.
 

जोड़ों का दर्द

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– अजवायन को पानी में डालकर पका लें. उस पानी की भाप दर्द वाले स्थान पर दें.
– अजवायन के तेल की मालिश से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है.
– नीम के तेल की मालिश भी काफ़ी लाभदायक है.
– सोंठ, काली मिर्च, बायविडंग और सेंधा नमक का चूर्ण बनाकर रख लें. इस चूर्ण को 3-3 ग्राम की मात्रा में शहद में मिलाकर चाटें.
– बथुआ के ताज़े पत्तों का रस 15 ग्राम प्रतिदिन पीने से जोड़ों का दर्द दूर होता है. इस रस में नमक, शक्कर आदि न मिलाएं. हर रोज़ सुबह खाली पेट लें. इसके सेवन के आगे-पीछे दो घंटे तक कुछ न लें. यह प्रयोग 2-3 महीने तक करें.
– 100 ग्राम मेथीदाने को भूनकर चूर्ण बना लें. 50 ग्राम सोंठ, 25 ग्राम हल्दी, 250 ग्राम मिश्री- सभी को पीसकर मिलाकर बॉटल में भर लें. सुबह-शाम एक-एक चम्मच दूध के साथ लें.
– हरड़, सोंठ और अजवायन समान मात्रा में लेकर कपड़छन चूर्ण बना लें. सुबह-शाम 5 ग्राम की मात्रा में गरम पानी से लें.
– दिन में चार-पांच बार टमाटर का सेवन करते रहें या टमाटर का एक ग्लास रस सुबह-शाम पीने से आश्‍चर्यजनक रूप से लाभ होगा.
– लहसुन पीसकर लगाने से बदन के हर अंग का दर्द जाता रहेगा. लेकिन इसे ज़्यादा देर तक लगाकर न रखें, वर्ना फफोले पड़ने का डर रहेगा.
– कड़वे तेल में अजवायन और लहसुन जलाकर उस तेल की मालिश करने से हर तरह के दर्द से छुटकारा मिलता है.
– लहसुन की दो कलियां कुचलकर तिल के तेल में डालकर तेल गर्म कर लेें और जोड़ोें की मालिश करेें.
– 10 मि.ली. एरंड के तेल को सोंठ के काढ़े मेें मिलाकर सुबह-शाम पीने से लाभ होता है.


एड़ियों में दर्द


– सबसे पहले सही फूटवेयर का चुनाव करें. एड़ियों में दर्द का अर्थ है कि आपके चलने की स्टाइल में दोष है या फिर आपको फूटवेयर सही नहीं है. हाई हील या अकंफ़र्टेबल चप्पलों से बचें.
– ये करें- किसी समतल जगह पर खड़े हो जाएं. एड़ियों पर प्रेशर दें. 30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें. दिन में पांच बार ये एक्सरसाइज़ करें.
– पैरों को बारी-बारी से पहले गर्म और ठंडे पानी में डुबोएं.

कान का दर्द

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– सरसों का तेल हल्का गर्म करके डालने से कान का दर्द में आराम मिलता है.
– प्याज़ का रस गुनगुना करके डालने से दर्द में तुरंत आराम मिलता है.
– अदरक का रस भी गुनगुना करके डालना काफ़ी कारगर होता है.
– तुलसी के पत्तों को पीसकर रस निकाल लें. इस रस को हल्की आंच पर रखकर थोड़ा गरम करें और कान में डालें.
– एक चम्मच तिल के तेल में लहसुन की आधी कली डालकर कुनकुना गरम करके दर्द वाले कान में 4-4 बूंदें डालकर दूसरी करवट दस मिनट तक लेटें रहें.
– एरंडी के पत्तों को गरम तिल के तेल में डुबोकर उससे कानों के आसपास हल्का सेंक करें.
– कान से पस (मवाद) आता हो तो गुग्गुल का धुआं कान पर लें.
– तुलसी के पत्तों को पीसकर रस निकाल लें. इस रस को हल्की आंच पर रखकर थोड़ा गरम करें और कान में डालें. इससे कान का दर्द मिटता है.
– मुलहठी को पीसकर घी मेें मिलाकर हल्का गर्म करके कान के आसपास लेप करने से दर्द में आराम मिलता है.
– एक भाग अजवायन का तेल और तीन भाग सरसों का तेल मिलाकर मंद आंच पर गुनगुना करके कान में डालें.
– मूली को बारीक़ टुकड़ों में काट कर सरसों के तेल में ख़ूब गर्म करें. फिर इस तेल को कपड़े से छानकर शीशी में रख लें. जब कभी भी कान में दर्द हो तो इस तेल को डालें. आराम लेगा.

अगर आपको बार-बार सर्दी-ज़ुकाम होता है, आप हमेशा छींकते रहते हैं… आपकी नाक भी बंद रहती है, तो इसे कैजुअली न लें. हो सकता है ये शरीर में किसी अंदरूनी गड़बड़ी का संकेत हो. तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और सही इलाज कराएं.

क्यों होती है अक्सर सर्दी?

Home Remedies For Quick Relief From Cold

हाइजीन पर ध्यान न देनाः सर्दी-ज़ुकाम एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से ट्रांसफर होता है. इसलिए हाइजीन का ध्यान न रखने से आपको भी सर्दी-ज़ुकाम का ख़तरा रहता है, ख़ासकर हाथों की सफाई का. सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार हेल्दी रहना है तो हमें कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह हाथ धोना चाहिए. इसके अलावा बाहर से आने के बाद, खाना खाने से पहले, टॉयलेट यूज़ करने के बाद, बीमार व्यक्ति की केयर के बाद और खांसने-छींकने के बाद हाथों को अच्छी तरह धोना चाहिए. इससे आप सर्दी-ज़ुकाम ही नहीं, बल्कि अन्य बीमारियों से भी सुरक्षित रहेंगे.


प्रतिरोधक क्षमता ठीक न होने परः अगर आपकी इम्यूनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होगी, तो आप बार-बार बीमार पड़ सकते हैं, रोगों से लड़ने की आपकी क्षमता भी कम हो जाती है. अगर आपको अक्सर सर्दी रहती है, तो इसका एक कारण कमज़ोर इम्युनिटी भी हो सकती है. इसलिए सबसे पहले अपनी इम्युनिटी को स्ट्रॉन्ग बनाएं.

किसी चीज़ की एलर्जीः अगर आपको एलर्जी की शिकायत है, तो बार-बार सर्दी- ज़ुकाम होने की संभावना ज़्यादा होगी. इतना ही नहीं एलर्जी से होनेवाली सर्दी से जल्दी आराम भी नहीं मिलता. अगर आपकी सर्दी एक हफ्ते में ठीक नहीं होती, तो डॉक्टर से मिलकर एलर्जी  टेस्ट करवाएं.


डिहाइड्रेशनः अगर आपका शरीर डिहाइड्रेटेड है यानि शरीर में पानी की कमी है, तब भी आपकी प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो जाती है, जिससे आपको इंफेक्शन होने या आपके बार-बार बीमार पड़ने का रिस्क बढ जाता है. इससे आपको बार-बार सर्दी हो सकती है. इसलिए ख़ूब सारा पानी पीएं और हाइडे्रटेड रहें.
इसके अलावा मौसम में बार-बार बदलाव. बढता पोल्यूशन. घर में धूल, खान-पान में लापरवाही भी बार-बार सर्दी की वजह हो सकते हैं.



बार-बार सर्दी से कैसे बचें?

Home Remedies For Quick Relief From Cold

अगर आपको भी बार-बार सर्दी-ज़ुकाम होता है, तो बेहतर होगा कि आप कुछ सावधानियां बरतें, कुछ बातों को ध्यान रखें. इससे आप सर्दी से सुरक्षित रहेंगे.
– ऐसे लोगों से दूर रहें जिन्हें सर्दी हुई हो.
– विटामिन से भरपूर फलों और सब्ज़ियों को सेवन करें, ताकि आपकी इम्युनिटी बेहतर हो सके.
– छींकते या खांसते समय टिशू से मुंह और नाक को ढंकें और इस्तेमाल के बाद इन्हें डस्टबिन में डाल दें.
– छींकने के बाद हाथों को हैंड वॉश से अच्छी तरह धो लें.
– घर के वेंटीलेशन सिस्टम को सुधारे्ं.
– घर की खिड़कियां खोलकर वेंटिलेशन करे्ं.
– पोल्यूशन से अपना बचाव करे्ं. इसके लिए घर से बाहर निकलते समय मुंह को अच्छी तरह ढंक लें.
– परफ्यूम, डियो और दूसरे सेंटेड आइटम से दूर रहे्ं.
– एलर्जी से बचने के लिए अपने तकियों और बिस्तरों की नियमित सफाई करे्ं.
– तापमान में अचानक आने वाले बदलाव से बचें.

सर्दी के लिए घरेलू नुस्खे

Home Remedies For Quick Relief From Cold

– गर्म पानी या दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर पीएं.
– सर्दी में अदरक भी बहुत फायदेमंद है. अदरक के बारीक टुकड़े करके पानी में उबालें. छानकर गरम ही पीएं.
– अदरक वाली एक कप गरम-गरम चाय भी सर्दी में आराम देती है.
– एक ग्लास गुनगुने पानी में दो चम्मच शहद और एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर पीने से भी सर्दी में फायदा होता है.
– सर्दी-जुकाम के संक्रमण को लहसुन तेज़ी से दूर करता है. इसकी पांच कलियां घी में भुनकर खाएं. दो बार इसका सेवन करने से ही सर्दी-जुकाम में आराम आ जाएगा.
– एक कप पानी में पांच-सात तुलसी की पत्तियां और अदरक के टुकड़े डालकर उबाल लें. इसे गुनगुना पीएं. सर्दी के लिए ये रामबाण का काम करती है.
– चाय में अदरक, कालीमिर्च पाउडर, लौंग, इलायची और तुलसी की पांच-छः पत्तियां मिलाकर हर्बल टी बनाएं. इसका दिन में दो-तीन बार सेवन करें.
– प्याज़ काटकर सूंघने से बंद नाक खुलती है.
– इसके अलावा पानी उबालकर उसमें नीलगिरी तेल की कुछ बूंदें मिलाएं. इसकी भाप लें.

हमारी बॉडी को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी की ज़रूरत होती है. इसका एक बड़ा सोर्स है धूप. अगर हम नियमित रूप से 10 मिनट सुबह की नर्म धूप में बैठते हैं तो इसके कई हेल्थ बेनिफिट्स होते हैं.
गांव में तो ठीक है, पर शहर के घरों में धूप बहुत कम ही नसीब होती है, लेकिन हेल्दी रहने के लिए धूप बेहद ज़रूरी है. इसलिए बालकनी, छत या बरामदे में ही सही, जहां भी मिले थोड़ी देर धूप जरूर सेंकें.

धूप के फायदे

Health Benefits Of Sunlight

1. धूप से हड्डियां मज़बूत होती हैं. शरीर के लिए आवश्यक 90 फीसदी विटामिन डी हमें धूप से मिल सकता है, जो हड्डियों को हेल्दी रखने के लिए ज़रूरी है. इससे ऑस्टियोपोरोसिस होने के चांसेस भी कम हो जाते हैं.
2. धूप से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है, जो सदीर्र्-ज़ुकाम, खांसी-बुखार जैसी बीमारियों से हमें बचाता है.
3. धूप से मेटाबोलिज़म में सुधार आता है. जिससे वज़न घटाने में सहायता मिलती है. एक शोध से ये बात भी सामने आई है कि सूर्यप्रकाश और बीएमआई के बीच गहरा संबंध है. वज़न कम करने में ये भी सहायक होता है.
4. धूप सेंकने से शरीर में मेलाटोनिन नामक हार्मोन बनने लगता है, जिससे अनिद्रा की समस्या से छुटकारा मिलता है और अच्छी नींद आती है.
5. धूप में थोड़ी देर बैठने से शरीर बैक्टीरिया फ्री तो होता ही है, साथ ही स्किन ग्लो करने लगती है. इससे पिंपल्स, एक्ने और स्किन इंफेक्शन जैसी समस्याएं भी दूर होती हैं.

Health Benefits Of Sunlight


6. नियमित रूप से थोड़ी देर धूप में बैठने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है. ब्लडप्रेशर कंट्रोल में रहता है और हार्ट डिसीज़ का रिस्क भी कम हो जाता है.
7. धूप ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है.
8. धूप सेंकने से रक्त में रेड ब्लड सेल्स यानि लाल रक्त कण और व्हाइट ब्लड सेल्स यानि सफेद कण की संख्या बढती है.
9. इससे पाचन तंत्र ठीक रहता है. कब्ज़ की समस्या दूर होती है.
10. सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें हमारे इम्यून सिस्टम की हाइपर एक्टिविटी को कम करती हैं, जिससे सोरायसिस जैसी स्किन प्रॉब्लम से बचाव होता है.
11. धूप सेंकने से दिमाग स्वस्थ रहता है.
12. सूर्य की रोशनी से सभी तरह के इंफेक्शन, फंगल इंफेक्शन और कई अन्य बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं.

Health Benefits Of Sunlight


13. विटामिन-डी की कमी पूरी करने का सबसे आसान तरीका है, सुबह 10 बजे से पहले सूरज की रोशनी में बैठें. रोजाना 15 से 20 मिनट धूप सेंककर विटामिन-डी की कमी पूरी की जा सकती है. रिसर्च के अनुसार विटामिन डी कोरोना से लड़ने में भी मदद करता है. विटामिन-डी कोरोना मरीजों में वायरस को गंभीर होने से रोकता है और मौत का खतरा भी घटाता है.


कितनी धूप ज़रूरी?

Health Benefits Of Sunlight

हफ्ते में तीन दिन सुबह-सुबह 20-30 मिनट धूप सेंकना पर्याप्त है. इससे शरीर के लिए आवश्यक विटामिन डी की पूर्ति हो जाती है.

इन बातों का ध्यान रखें

Health Benefits Of Sunlight


– तेज़ धूप से बचें. इससे निकलनेवाली अल्ट्रा वायलेट किरणें आपकी स्किन को नुकसान पहुंचा सकती हैं. ये स्किन कैंसर का कारण भी बन सकती हैं.
– पसीना आने के बाद धूप में नहीं बैठना चाहिए.
– दोपहर बाद धूप में बैठने से ख़ास फायदा नहीं होता, हां ये नुकसान ज़रूर पहुंचा सकती हैं. इसलिए दोपहर के बाद धूप में जाने से बचें.
 
80 फीसदी लोगों में है विटामिन-डी की कमी
हाल में एक रिसर्च में यह तथ्य सामने आया कि भारत में करीब 80 फीसदी लोगों में विटामिन-डी की कमी है. चिंता की बात यह है कि 90 फीसदी बच्चे भी विटामिन-डी की कमी से कई हेल्थ प्रॉब्लम्स झेल रहे हैं. अकेले दिल्ली में 90 से 97 फीसदी स्कूली बच्चों में (6-17 वर्ष की आयु के) विटामिन-डी की कमी पाई गई है, जबकि भारत दुनिया के ऐसे देशों में शामिल है, जहां सूर्य की पर्याप्त रोशनी आती है.

वज़न कम करना और स्लिम होना आसान काम नहीं. इसके लिए डायट-एक्सरसाइज़ के साथ ही आपको कुछ बातों का भी ध्यान रखना होगा. स्लिमिंग रूल्स को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाना होगा. इससे ना सिर्फ आपका वज़न कम होगा, बल्कि वेट मैनेजमेंट भी आसान हो जाएगा.

स्लिमिंग रूल्स
1. कार्बोहाइड्रेट कम करेंः कार्बोहाइडे्रट भी दो तरह के होते हैं- कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और सिंपल कार्बोहाइड्रेट. कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जो सेहत के लिए अच्छे होते हैं. मोटापा कम करना है तो इनका इस्तेमाल करें. ये साबुत अनाज, दालों, ओट्स, ज्वार आदि में मिलता है. सिंपल कार्बोहाइड्रेट का ग्लासेमिक इंडेक्स ज़्यादा होता है. जो हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज़, मोटापा जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं. इसलिए इनसे बचें. ये पास्ता, मैदा, ब्रेड, चावल, शक्कर आदि में होता है.
2. प्रोटीन का सेवन बढ़ाएंः प्रोटीन शरीर का मेटाबोलिज़म लेवल बढ़ाता है, जिससे फैट खाने के बावजूद आपका शरीर तेज़ी से कैलोरी बर्न करने लगता है. इससे वज़न घटता है. सभी दालों, ड्राइफ्रूट्स, बींस, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां. सोयाबीन, दही, फिश, अंडा आदि प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं.
3. फाइबर भी हैं ज़रूरीः फाइबर मोटापा कम करता है और बैड कोलेस्ट्रॉल को भी. इसके सेवन से आपको जल्दी ही पेट भर जाने का एहसास होता है. ऐसे में आप कम कैलोरी खाते हैं. इसलिए अपने डायट में फाइबर ज़रूर शामिल करें. ये ओटमील, बीन्स, मटर, फल, आदि में शामिल होता है.
4. ख़ूब पानी पीएंः पानी आपके मेटाबोलिज़म लेवन को ठीक रखता है और इससे पेट भरा होने का एहसास भी होता है. खाना खाने से आधा घंटे एक गिलास पानी पीएं. इससे कम खाने से भी आपको पेट भरने का एहसास होगा. गुनगुना पानी पीएं. इससे मेटाबोलिज़म बेहतर होता है और एक्स्ट्रा कैलोरीज़ भी बर्न होती हैं.
5. रोज़ 30 से 60 मिनट एक्सरसाइज़ करेंः यदि आपके पास समय की कमी है और आप एक बार में 30 से 60 मिनट का समय नहीं निकाल पाती हैं तो एक्सरसाइज़ को 10-10 मिनट के तीन हिस्सों में बांट लें और जब भी 10 मिनट का समय मिले, झटपट एक्सरसाइज़ कर लें.

Weight Loss and Slimming Tips


6. हेल्दी नाश्ते सहित दिन में 3 बार खाना ज़रूर खाएंः ब्रेकफास्ट, लंच या डिनर में से यदि आप कुछ भी स्किप करेंगी तो ज़्यादा भूख लगेगी और आप ज़रूरत से ज़्यादा स्नैक्स खा लेंगी, जो आपके वज़न को बढ़ाने का काम करेगा. इसलिए कोई भी मील स्किप ना करें. साथ ही हर दो घंटे में कुछ न कुछ खाते रहें, इससे मेटाबॉलिज़्म भी ठीक रहता है.
7. सब्ज़ियों और फलों पर रखें फोकसः अपने ब्रेकफास्ट में फल, जैसे- सेब, केले, स्ट्रॉबेरी आदि शामिल करें. फ्रूट सलाद खाएं या फ्रूट योगर्ट यानी दही में फल मिलाकर खाएं. यदि आप सैंडविच खा रही हैं, तो उसमें ढेर सारी सब्ज़ियां डालें और यदि उपमा आपकी पसंद है तो उसमें भी रवा कम और सब्ज़ियां ज़्यादा शामिल करें. नाश्ते में कुछ मीठा, जैसे- कॉर्नफ़्लैक्स, ओटमील या पोरेज खाती हों, तो उसमें ढेर सारे फल डाल दें.
8. वज़न पर रखें नज़रः नियमित रूप से वज़न चेक करने से आपको पता चलता रहेगा कि वज़न को मेंटेन रखने की कोशिशें कितनी क़ामयाब हो रही हैं. यही नहीं, यदि थोड़ी-सी लापरवाही से वज़न बढ़ गया हो तो इससे पहले कि वो और बढ़ जाए, उस पर नियंत्रण पाने की कोशिशें शुरू कर सकती हैं. इसलिए बेहतर होगा कि रेग्युलर वज़न चेक करते रहें.
9. घर में रेडी टु ईट्स फूड्स न रखेंः हम जब भी स्ट्रेस में होते हैं, यूं ही फुर्सत में बैठे होते हैं या फिर बोर होते हैं तो न चाहते हुए भी रेडी टु ईट हाई फैट या हाई कैलोरी फूड, जैसे- नमकीन, समोसे, कचौरी, बिस्किट्स, केक आदि खा ही लेते हैं. इससे बचने के लिए बेहतर होगा कि आप अपने घर में रेडी टु ईट और इस तरह के दूसरे कंफर्ट फूड रखना ही बंद कर दें.
10. हेल्दी फूड पहले खाएंः जब भी खाना खाएं, पहले हेल्दी चीज़ें खाएं, जैसे- सलाद, दही, स्प्राउट्स, सब्ज़ियां वगैरह. इसके बाद ही अपना फेवरेट फूड खाएं. इससे यह फ़ायदा होगा कि जब आप हाई कैलोरी फूड खा रही होंगी, तब तक आपकी भूख कम हो चुकी होगी और आप उसे कम मात्रा में ही खाएंगे.
11. एक्टिव बने रहेंः बच्चों के खिलौने समेटना होे, कपड़े सुखाने हों, बाहर बच्चों के साथ खेलना हो, ऑफिस में सहकर्मी से कुछ पूछने उनकी सीट तक जाना पड़े या प्रिंट लेने प्रिंटर तक, एक्टिव रहने का कोई मौका न छोड़ें. ख़ुद को एक्टिव बनाए रखने वाले काम करती रहें. इससे भी कैलोरीज़ बर्न होती हैं और वज़न को कंट्रोल में रखना आसान हो जाता है.
12. एक्सरसाइज़ में बदलाव करते रहेंः रोज़-रोज़ एक ही तरह की एक्सरसाइज़ न करें, इसमेें बदलाव लाएं. दो दिन जॉगिंग करें तो दो दिन स्विमिंग. बीच में एक दिन एरोबिक्स, साइकलिंग या योग करें, तो एक दिन डांस करें या आउटडोर गेम्स खेलें. इससे एक्सरसाइज़ में वेरिएशन तो मिलेगा ही, एक्सरसाइज़ करने का उत्साह भी बना रहेगा.
13. स्ट्रेस से बचेंः जब भी हम स्ट्रेस में होते हैं, कुछ-न-कुछ खाते रहते हैं. इसलिए जैसे ही लगे कि आप स्ट्रेस्ड फ़ील कर रहे हैं तो तुरंत ही एक ग्लास पानी पीएं और तनावमुक्त होने के लिए एक्सरसाइज़ करें, गहरी सांसें लें, मसल रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं या फिर फनी बुक्स पढ़ें. इससे खाने पर से आपका ध्यान हटेगा और आप बेवजह कैलोरीज़ खाने से बच जाएंगे.

Weight Loss and Slimming Tips


14. आउटसाइड फूड हफ्ते में एक बार ही खाएंः एक नियम बनाएं कि चाहे जो हो, बाहर का खाना कम खाएंगे. आजकल होटलों और रेस्टॉरेंट्स में खाने का चलन बहुत बढ़ गया है. इससे वज़न तो बढ़ता ही है, दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम्स भी सकती हैं. इसलिए जहां तक संभव हो, खाना घर का बना हुआ ही खाएं. यदि बाहर खाना आपकी मजबूरी है तो यह तय कर लें कि क्या और कितना खाना है.
15. साथ रखें हेल्दी स्नैक्सः यदि आपको कुछ-न-कुछ खाते रहने की आदत है तो बैग में हेल्दी स्नैक्स रखें, लेकिन इन्हें भी सीमित मात्रा में ही खाएं. फ्रूट, होल व्हीट लो शुगर बिस्किट्स, वेजीटेबल सैंडविच, डॉयफ्रूट्स, कुरमुरा-चना आदि. इससे आप ऊलजुलूल खाने से बच जाएंगे.
16. दिन की शुरुआत हाई फाइबर ब्रेकफास्ट से करेंः सुबह का नाश्ता कभी-भी स्किप न करें और ध्यान रखें कि आपका नाश्ता ऐसा हो, जिसमें फाइबर की मात्रा ज़्यादा हो. आप दलिया, कॉर्नफ्लैक्स, ओटमील, ब्राउन ब्रेड सैंडविच, चीला या फाइबरयुक्त कोई अन्य नाश्ता खा सकती हैं.
17. वॉक के लिए दस मिनट निकालेंः सुबह थोड़ा जल्दी उठें और 10 मिनट ज़रूर टहलें. वर्किंग हैं तो लंच टाइम में खाने के बाद 10 मिनट की वॉक आपको एनर्जेटिक बनाए रखेगी. शाम को भी वॉक के लिए 10 मिनट का टाइम तो निकाला ही जा सकता है. सोने के पहले धीमे-धीमे टहलना भी अच्छा आइडिया है.
18. खाना समय पर खाएंः थोड़ा मुश्किल ज़रूर है, फिर भी कोशिश करें कि आपके हर मील का टाइम फिक्स हो. ख़ासकर डिनर सोने के दो घंटे पहले करने की आदत डालें. लेट नाइट डिनर वज़न बढ़ाता है.
19. क्रेविंग को कंट्रोल करना सीखेंः कई बार भूख नहीं होती, बस कुछ खाने का मन करता रहता है. चटपटा खाने की क्रेविंग होती है. आपके साथ भी ऐसा हो, तो अपना ध्यान डायवर्ट करें. म्यूज़िक ऑन कर डांस करें, अपनी वॉर्डरोब मैनेज करने में मन लगाएं या फिर अपना फेवरेट कोई भी काम करें. इससे आपको भूख की याद ही नहीं आएगी.
20. ख़ुद को रिवॉर्ड देंः वज़न कम करना आसान नहीं, लेकिन अगर आपने अपनी विल पावर और कोशिशों से वज़न कम कर लिया है तो ख़ुद को इसके लिए रिवॉर्ड दें. फ्रेंड्स के साथ सेलिब्रेट करें या ख़ुद को वो प्यारी-सी ड्रेस ग़िफ़्ट करें, जो वज़न बढ़ जाने की वजह से आप नहीं ख़रीद पाई थीं. ये आपके लिए मोटीवेशन का काम करेंगे.

कोरोना ने जहां पूरे संसार की रफ़्तार को धीमा कर दिया वहीं मानव जाति पर भी यह एक बड़ा संकट है यह कहना ग़लत नहीं होगा, ऐसे में सभी को इंतज़ार है तो बस वैक्सीन का. इसकी कोशिशें भी हो रही हैं और उम्मीद है कि जल्द ही वैक्सीन के रूप में हमारे पास कोरोना को हराने का हथियार होगा.

कई देशों में वैक्सीन के निर्माण का काम तेज़ी से चल रहा है और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी भी इस ओर तेज़ी से कदम बढ़ा रही है और भारत में सिरम इंस्टिट्यूट और आईसीएमआर के साथ मिलकर एक सशक्त वैक्सीन- ‘कोविशील्ड’ के निर्माण की दिशा में वो काफ़ी आगे बढ़ चुकी है क्योंकि उसने ह्यूमन वैक्सिनेशन भी लगभग पूरा कर लिया है और अब वो इसके असर और प्रभाव पर नज़र बनाए हुए है.
ह्यूमन ट्रायल के लिए कुल भारत में 1600 वॉलंटियर्स की ज़रूरत थी और केईएम में 100, जिसमें से एक हैं महाराष्ट्र के नामी डॉक्टर सुरेश सुंदर जिनसे हमारी इस प्रक्रिया को लेकर बात हुई और हमें इस विषय को बेहतर तरीक़े से समझने में मदद मिली.

COVID-19 Vaccine

इतने महत्वपूर्ण मिशन के लिए वॉलंटियर बनने की क्या शर्तें और मानक होते हैं?

मैं भी डॉक्टर हूं तो ज़ाहिर है हमारा संपर्क और बातचीत होती रहती है इस तरह की कोशिशों से जुड़े लोगों से, इसीलिए मुझे भी अवसर मिला कि मैं इस अच्छे काम का हिस्सा बनूं.

आप कैसे इस मिशन से जुड़े?

आप एडल्ट हों और पूरी तरह हेल्दी हों. आपको कोरोना ना हुआ हो और आप मानसिक रूप से भी मज़बूत हों. पहले स्टेप में स्क्रीनिंग होती है जिसमें आपका हेल्थ चेकअप, कोविड टेस्टिंग वैग़ैरह होता है और दूसरा स्टेप होता है काउन्सलिंग का जिसमें आपको पूरी प्रक्रिया की गंभीरता और साइडइफ़ेक्ट्स की संभावनाओं के बारे में मानसिक रूप से तैयार किया जाता है.

इसके रिस्क फ़ैक्टर्स के बारे में कुछ बताइए?

चूंकी यह पूरी तरह नई वैक्सीन है तो इसके बारे में हमें ज़्यादा कुछ पता नहीं होता, ऐसे में इसके साइडइफ़ेक्ट्स भी कई तरह के हो सकते हैं, जैसे- मसल वीकनेस, किसी तरह की कमज़ोरी और यहां तक कि जान को भी ख़तरा हो सकता है.

Dr. Suresh Sundar

ऐसे में आप और आपके परिवार वाले कैसे तैयार हुए?

मेरी पत्नी भी डॉक्टर हैं और मैं भी तो ज़ाहिर है ये वैक्सीन कितनी ज़रूरी है आज हमारे पूरे देश, दुनिया और समाज के लिए हम समझ सकते हैं. यह गर्व की बात है कि मुझे मौक़ा मिला इस तरह के कार्य का हिस्सा बनने का. चूंकी वैक्सीन को बिना ट्रायल के बाज़ार में उतारा नहीं जा सकता तो यह प्रक्रिया बेहद ज़रूरी हो जाती है.

COVID-19 Vaccine


मेरे परिजनों और दोस्तों ने मुझे हौसला दिया और यह भी कहना चाहूंगा कि प्रोफ़ेसर डॉक्टर गोगटे और केईएम डीन डॉक्टर देशमुख जिस तरह के प्रयास कर रहे हैं इस वैक्सीन के निर्माण व ट्रायल में वो क़ाबिले तारीफ़ है.

आपने अपना ट्रायल पूरा कर लिया?

मुझे 2 शॉट्स वैक्सीन के लग चुके हैं और नियम के मुताबिक़ 28 दिनों के अंतराल पर इसे लगाया जाता है. दो ही बार इसे इंजेक्ट किया जाता है और उसके बाद 5 महीनों तक मॉनिटर किया जाता है कि हमें किसी तरह के कॉम्प्लिकेशन्स या साइडइफ़ेक्ट तो नहीं हो रहे.
यह ट्रायल 5 महीनों तक चलता रहेगा और अभी तक वॉलंटियर्स को वैक्सिनेशन का काम पूरा हुआ है.

COVID-19 Vaccine

अब तक तो मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं और उम्मीद है कि यह वैक्सीन जल्द ही मानकों पर खरी उतरेगी और लोगों तक पहुंचेगी!

लेकिन तब तक सभी ध्यान रखें, सुरक्षित रहें, मास्क सही तरह से मुंह और नाक ढंककर पहनें, सोशल डिसटैंसिंग का पालन करें और स्वच्छता का पूरा ख़्याल रखें, सतर्क रहें!

यह भी पढ़ें: हेल्थ अलर्ट: ब्रेस्ट कैंसर- जानें कारण, लक्षण और उपाय… (Health alert: Breast Cancer- Causes, Symptoms And Remedies)

अगर आप भी चाहते हैं बढ़े हुए फैट और वज़न से जल्दी छुटकारा और वो भी बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के, तो ये होम रेमेडीज ट्राई करें, जो सेफ तो हैं ही, आपको कुछ ही दिनों में देंगे स्लिम ट्रिम फिगर.

– रोजाना सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ शहद पीने से वेटलॉस होता है. इससे शुगर का लेवल मेनटेन रहता है.
– रोज सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने से भी वज़न कम होता है. जिन्हें सर्दी या साइनस की प्रॉब्लम है, वे पानी को गुनगुना करके उसमें नींबू डालकर पी सकते हैं.
– वेटलॉस के लिए टमाटर-दही का शेक ट्राई करें. एक कप टमाटर के जूस में एक कप दही (फैट फ्री), आधा चम्मच नींबू का रस, बारीक कटा अदरक, काली मिर्च व स्वादानुसार नमक मिलाकर ब्लेंड  कर लें. रोज एक गिलास पीएं. वजन तेजी से कम होगा.
-करौंदे का जूस भी वजन घटाने में कारगर है. इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है और फैट्स कम करने में आसानी होती है.
– ये स्पाइस ड्रिंक ट्राई करें. 2-3 तेज पत्ता, दालचीनी के 3-4 छोटे टुकड़े, 1 चम्मच जीरा, 2 छोटी इलायची सबको एक लीटर पानी में15 मिनट तक उबालकर छान लें. सुबह खाली पेट, लंच और डिनर के आधे घण्टे बाद- दिन में तीन बार नियमित पीएं. इससे महीने में 5 किलो वजन आसानी से कम किया जा सकता है.
– शहद और दालचीनी की चाय पीएं. एक गिलास पानी गर्म करें. इसमें दो टुकड़ा दालचीनी और एक चम्मच शहद मिलाएं. रोज सुबह खाली ये चाय पीएं.
– रोज सुबह 2-4 कच्चे लहसुन की कली खाने से भी एक्स्ट्रा वेट कम करने में मदद मिलती है.
– लौकी की सब्जी या जूस का नियमित सेवन करें. इससे वजन तो कम होगा ही, स्‍किन भी ग्‍लो करेगी.
– एप्पल साइडर का रोजाना सेवन भी वेटलॉस में मदद करता है.
– पत्तागोभी का सूप या सलाद के तौर पर इसका सेवन भी वज़न कम करने में सहायता करता है.
– लाल मिर्च आपके वजन को संतुलित रखने में मदद करती है. एक रिसर्च के मुताबिक भोजन में लाल मिर्च पाउडर मिलाने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और एक्स्ट्रा कैलोरीज़ बर्न होती है, जिससे मोटापा कम होता है.
– खाने से 15 मिनट पहले एक कप सौंफ की चाय पी लें. इससे भूख कंट्रोल होगी और आप एक्स्ट्रा खाने से बचेंगे. सौंफ पेट से संबधित बीमारियों के लिए भी फायदेमंद है.

Home Remedies For Quick Weight Loss


– दही खाने से भी वजन कम होता है. इंटरनेशनल जरनल ऑफ ओबेसिटी के अनुसार ज्यादा दही खाने वालों का वजन तेजी से घटता है या कम बढ़ता है. दरअसल दही में मौजूद कैल्शियम और प्रोटीन फैट को कम करने में सहायक होता है.
– लगभग 30 मि.ली. अदरक के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले पीएं. इससे मेटाबॉल्जिम तेज़ होता है और वेटलॉस में मदद मिलती है.
– सुबह उठते ही 250 ग्राम टमाटर का रस 2-3 महीने तक पीने से भी फैट्स कम होता है.
-पके हुए पपीते का सेवन ख़ूब करें. इससे शरीर में अतिरिक्त चर्बी नहीं जमती व वज़न भी तेज़ी से घटता है.
– एक चम्मच पुदीने के रस में 2 चम्मच शहद मिलाकर नियमित रूप से लेते रहने से मोटापा कम होता है.
– आंवले और हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को छाछ के साथ लें. ये कमाल का स्लिमिंग फार्मूला है.

Home Remedies For Quick Weight Loss


– 2 चम्मच करेले के रस में एक नींबू का रस मिलाकर सुबह पीएं.
– खाने के बाद हमेशा गरम पानी पीएं. इससे पाचन क्रिया ठीक रहती है और एक्स्ट्रा फैट्स भी नहीं बनता.
– एप्पल साइडर विनेगर को जूस या पानी के साथ मिलाकर पीने से
मोटापा व कोलेस्ट्रॉल दोनों में तुरंत ही कमी आती है.
– एलोवीरा के पत्तों के सेवन से भी वेट कंट्रोल में रहता है, इसलिए एलोवीरा का सेवन रोज़ करें.
– अश्वगंधा की 2-3 पत्तियां दिन में तीन बार चबाएं. इससे वज़न कम करने में सहायता मिलती है. पत्तियां न उपलब्ध हों तो आप अश्वगंधा टैबलेट का सेवन भी कर सकते हैं.
– ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो झुर्रियों को दूर रखती है और मोटापा घटाने में भी उपयोगी है.
– सेब को उबालकर खाएं. इसमें फाइबर व आयरन प्रचुर मात्रा में होता है. ये मोटापा भी घटाता है.
– छोटी पीपल का बारीक़ चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें. यह चूर्ण तीन ग्राम रोज़ाना सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है.
– दो बड़े चम्मच मूली के रस में शहद मिलाकर बराबर मात्रा में पानी के साथ पीएं. ऐसा करने से एक महीने के बाद मोटापा कम होने लगेगा.
– 10 दिन सुबह-शाम खाली पेट एक ताज़े पान के पत्ते में 5 साबूत कालीमिर्च रखकर खाएं. फिर एक घंटे तक कुछ भी न खाएं. 10 दिन के बाद केवल सुबह ही सेवन करें. इसका क़रीब तीन महीने तक सेवन करें, इससे आपके पूरे शरीर का एक्स्ट्रा फैट्स निकलने लगेगा. ध्यान रहे, पान के पत्ते सूखे या काले न हों.

Home Remedies For Weight Loss


– डायट में खीरा को शामिल करें. इसमें पानी की मात्रा अधिक पाई जाती है. खीरे में 90% पानी होता है और यह शरीर के फैट्स को भी कम
करता है.
– नारियल पानी मेटाबॉलिज़्म बढ़ाता है और इलेक्ट्रोलाइटिस से भरपूर होता है. हर रोज़ एक से दो ग्लास नारियल पानी पीने से वज़न घटाने में मदद मिलती है.
– बादाम भी फैट्स को बर्न करने में मददगार होता है, इसलिए नियमित रूप से बादाम भी ज़रूर खाएं.
– चिया सीड्स का सेवन करें, ये वेटलॉस में सहायता करता है.
– अलसी के बीज से मोटापा को कम किया जा सकता है. अलसी में डाइटरी फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इस वजह से अलसी खाने पर जल्दी भूख नहीं लगती.
– खाना खाने के बाद एक गिलास छाछ में काला नमक और अजवाइन मिलाकर पीएं. इस उपाय से खाना भी पचता है और मोटापा भी कण्ट्रोल में रहता है.
– 3 चम्मच असली के बीज, 2 चम्मच जीरा और 2 चम्मच अजवाइन लें. अलसी के बीज को हल्का सा भून लें. तीनों को अच्छे से मिलाकर पीसकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण का नियमित सेवन पेट की चर्बी को तेजी से पिघलाएगा.
– सोंठ, दालचीनी और काली मिर्च (3 ग्राम प्रत्येक) को पीसकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को दो हिस्सों में बांटकर एक हिस्सा सुबह खाली पेट और दूसरा रात सोने से पहले लें.

इन बातों का भी रखें ख़्याल
– अधिक कार्बोहाइड्रेट वाली चीज़ों से परहेज़ करें.
– शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है. ये फैट्स बढ़ाते हैं.
– नमक का सेवन कम करें, एक्सपर्ट्स के अनुसार रात को 7 बजे के बाद नमक का सेवन कम करना चाहिए. 
– गेहूं के आटे की रोटी की बजाय गेहूं, सोयाबीन व चने के मिश्रित आटे की रोटी अधिक फ़ायदेमंद है.
– अगर आपको भूख लग रही है, तो पहले पानी पीजिए. इससे आपका पेट भरा हुआ लगेगा और आप कम खाएंगे.
– आयुर्वेद के अनुसार खाना खाने के एक घंटे के बाद एक ग्लास गर्म पानी पीने से मोटापा कम होता है. गर्म पानी का मतलब है, जितना आप आसानी से सिप कर सकें.
– एक्सरसाइज करें. ये शरीर के मेटाबॉलिक रेट को दुगुना कर सकता है. हफ़्ते में कम-से-कम तीन दिन आधे घंटे तक एक्सरसाइज करना आपके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकता है.
– अच्छी नींद का लें. थका हुआ शरीर अधिक ऊर्जा के लिए बार-बार भूख का सिग्नल देता है, जिससे आप ओवरईटिंग करने लगते हैं. यही वजह है कि रोज़ाना 6-8 घंटे की अच्छी नींद लेना ज़रूरी है.

Decidophobia

निर्णय लेने से क्यों डरते हैं आप? क्या हैं डिसाइडोफोबिया के शिकार? (Do You Suffer From Decidophobia)

जैसा कि नाम से थोड़ा-बहुत स्पष्ट होता है कि यह फोबिया यानी एक प्रकार का डर है. डिसाइडोफोबिया (Decidophobia) का मतलब है डिसीज़न यानी निर्णय लेने का भय. हम अपने आसपास भी देखते हैं कि बहुत-से लोग निर्णय लेने से घबराते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है. यह डर बहुत-सी बातों को लेकर हो सकता है कि उनका निर्णय कहीं ग़लत न निकल जाए, इस निर्णय से कहीं उन्हें कुछ नुक़सान न हो जाए, कहीं अपने ही लोग उनके बारे में कोई धारणा न बना लें… आदि.जैसा कि नाम से थोड़ा-बहुत स्पष्ट होता है कि यह फोबिया यानी एक प्रकार का डर है. डिसाइडोफोबिया का मतलब है डिसीज़न यानी निर्णय लेने का भय. हम अपने आसपास भी देखते हैं कि बहुत-से लोग निर्णय लेने से घबराते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है. यह डर बहुत-सी बातों को लेकर हो सकता है कि उनका निर्णय कहीं ग़लत न निकल जाए, इस निर्णय से कहीं उन्हें कुछ नुक़सान न हो जाए, कहीं अपने ही लोग उनके बारे में कोई धारणा न बना लें… आदि.

कारण

इस तरह के भय के कई कारण होते हैं, जैसे बाहरी अनुभव, जैसे- पहले कभी कोई दर्दनाक हादसा हुआ है, तो व्यक्ति हर बात को उससे ही जोड़कर देखने लगता है और कहीं न कहीं इसमें उसके जींस का भी हाथ होता है. उसे कुछ गुण, कुछ तत्व अपने पूर्वजों से मिलते हैं, जो उसे ऐसा बनाते हैं. शोध यह बताते हैं कि अनुवांशिकता यानी जेनेटिक्स और ब्रेन केमिस्ट्री के साथ लाइफ एक्सपीरियंस मिलकर इस तरह की स्थिति का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं. इसके अलावा अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि जो लोग तनावग्रस्त होते हैं यानी जब आप डिप्रेशन में होते हैं, तब निर्णय लेने से अधिक डरते हैं, तो डिप्रेशन और डिसाइडोफोबिया का भी कहीं न कहीं एक अलग तरह का संबंध हो सकता है.

लक्षण

इसके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि आप किस हद तक इस तरह के फोबिया का शिकार हैं. सामान्य लक्षणों में घबराहट, बेचैनी, सांस लेने में द़िक्क़त, पसीना आना, हृदय गति का तेज़ होना, मितली, मुंह का सूखना, ठीक से न बोल पाना आदि हो सकते हैं. हालांकि कुछ मामलों में यह डर बहुत नुक़सान नहीं पहुंचाता, लेकिन अगर ये आपकी सामान्य ज़िंदगी पर असर डालने लगे, तो समझ जाइए कि एक्सपर्ट की राय ज़रूरी है.

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कब जाएं एक्सपर्ट के पास?

जब आपके लक्षण बहुत ज़्यादा गंभीर हो जाएं, तो समझ जाएं कि अब देर नहीं करनी चाहिए.

आप निर्णय लेने से बचने के लिए हद से आगे बढ़ जाते हैं: आप कोई काम करना तो चाहते हो, लेकिन निर्णय लेने के डर से उसे नहीं करते. यह डर इतना हावी हो जाता है कि आप निर्णय लेने की स्थिति से बचने के लिए कई तरी़के अपनाने लगते हो. हालांकि यह जानलेवा नहीं है, लेकिन डिसाइडोफोबिया आपके रिश्तों को और प्रोफेशनल लाइफ को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है.

निर्णय लेने के लिए आप दूसरों पर निर्भर रहते हो: काउंसलर्स का कहना है कि आप हर निर्णय के लिए दूसरों पर ही निर्भर रहते हो और धीरे-धीरे आपकी दूसरों पर निर्भरता इतनी अधिक बढ़ जाती है कि आप ख़ुद कुछ कर ही नहीं पाते.

ग़लत लोगों और ग़लत तरीक़ों से गाइडेंस लेने लगते हो: ख़ुद निर्णय लेने की क्षमता को इस कदर खो देते हो कि आप ज्योतिषियों, बाबाओं या अन्य लोगों से सलाह लेने लगते हो. यहां तक कि अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए भी इन्हीं पर निर्भरता बढ़ जाती है, जो पूरी तरह अस्वस्थ है.

निर्णय लेने की स्थिति में पैनिक अटैक की आशंका: जैसे ही ऐसी परिस्थिति आती है कि आपको निर्णय लेना है, आपको पैनिक अटैक होने लगता है. आप बेचैन होने लगते हो, पसीना, हार्टबीट, मुंह का सूखना, चक्कर आना आदि लक्षण उभरने लगते हैं.

आपका निजी जीवन प्रभावित होने लगता है: निर्णय न ले पाने का यह डर जब आपके रिश्तों, करियर व अन्य बातों को प्रभावित करने लगता है, तब समझ जाइए कि आपको प्रोफेशनल की मदद लेनी होगी.

Decidophobia

ख़ुद करें अपनी मदद

  • सेल्फ हेल्प टेक्नीक्स के ज़रिए आप अपने इस डर पर काबू पा सकते हैं.
  • जब भी निर्णय लेने की स्थिति आए, लंबी व गहरी सांसें लें और इस परिस्थिति को तनावपूर्ण बनाने से बचें.
  • ख़ुद पर विश्‍वास जताएं कि हां, मैं यह कर सकता/सकती हूं. श्र जल्दबाज़ी न करें.
  • अपने मन की बात बोलने से हिचकिचाएं नहीं.
  • अगर आपको लगता है कि आपको सेकंड ओपिनियन की ज़रूरत है, तो जो आपके क़रीबी हैं और जिन पर आप भरोसा करते हो, उनसे शेयर करो और उनसे सलाह लो.
  • अपने इंस्टिंक्ट्स की आवाज़ सुनें यानी आपका दिल अगर किसी बात की गवाही दे रहा है, तो उसे नज़रअंदाज़ न करें.
  • अगर आपका निर्णय ग़लत भी साबित हुआ, तो उसे स्वीकारने से पीछे न हटें. इस बात से डरें नहीं कि आपने ग़लत निर्णय ले लिया.
  • अगर आपको नशे की लत है, तो उसे कम करने का प्रयास करें.
  • हारने के डर को मन से निकाल दें.
  • कुछ ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ेस करें, योग व ध्यान करें. इससे आपका मन शांत होगा, डर दूर होगा और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी.
  • अपनी सोच व अप्रोच बदलें. यह सोचें कि आप भी बाकी लोगों की तरह ही हैं और आप से भी ग़लती हो सकती है, क्योंकि ऐसा कोई नहीं, जिससे गलती न हो.
  • ग़लतियों से ही सीखा जाता है, इस नज़रिए के साथ आगे बढ़ें.
  • यदि बचपन में या कभी अतीत में आपके साथ कुछ ऐसा हादसा हुआ हो, जिससे आप अभी निर्णय लेने से डर रहे हों, तो उस हादसे से वर्तमान को न जोड़ें. हर परिस्थिति अलग होती है और ज़रूरी नहीं कि हर बार ग़लती ही हो.
  • बुरी यादों को याद करने से बेहतर है सकारात्मक बातों के साथ वर्तमान को जोड़ा जाए.
  • हादसे सभी के साथ होते हैं, इसका यह मतलब नहीं कि उसे ज़िंदगीभर हावी रखें. उन्हें भुलाकर आगे बढ़ना सीखें.
  • यदि सेल्फ हेल्प से भी आप अपने डर को दूर नहीं कर पा रहे, तो एक्सपर्ट के पास ज़रूर जाएं और अपने जीवन को बेहतर बनाएं.

 – ब्रह्मानंद शर्मा 

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