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निर्णय लेने से क्यों डरते हैं आप? क्या हैं डिसाइडोफोबिया के शिकार? (Do You Suffer From Decidophobia)

Decidophobia

निर्णय लेने से क्यों डरते हैं आप? क्या हैं डिसाइडोफोबिया के शिकार? (Do You Suffer From Decidophobia)

जैसा कि नाम से थोड़ा-बहुत स्पष्ट होता है कि यह फोबिया यानी एक प्रकार का डर है. डिसाइडोफोबिया (Decidophobia) का मतलब है डिसीज़न यानी निर्णय लेने का भय. हम अपने आसपास भी देखते हैं कि बहुत-से लोग निर्णय लेने से घबराते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है. यह डर बहुत-सी बातों को लेकर हो सकता है कि उनका निर्णय कहीं ग़लत न निकल जाए, इस निर्णय से कहीं उन्हें कुछ नुक़सान न हो जाए, कहीं अपने ही लोग उनके बारे में कोई धारणा न बना लें… आदि.जैसा कि नाम से थोड़ा-बहुत स्पष्ट होता है कि यह फोबिया यानी एक प्रकार का डर है. डिसाइडोफोबिया का मतलब है डिसीज़न यानी निर्णय लेने का भय. हम अपने आसपास भी देखते हैं कि बहुत-से लोग निर्णय लेने से घबराते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है. यह डर बहुत-सी बातों को लेकर हो सकता है कि उनका निर्णय कहीं ग़लत न निकल जाए, इस निर्णय से कहीं उन्हें कुछ नुक़सान न हो जाए, कहीं अपने ही लोग उनके बारे में कोई धारणा न बना लें… आदि.

कारण

इस तरह के भय के कई कारण होते हैं, जैसे बाहरी अनुभव, जैसे- पहले कभी कोई दर्दनाक हादसा हुआ है, तो व्यक्ति हर बात को उससे ही जोड़कर देखने लगता है और कहीं न कहीं इसमें उसके जींस का भी हाथ होता है. उसे कुछ गुण, कुछ तत्व अपने पूर्वजों से मिलते हैं, जो उसे ऐसा बनाते हैं. शोध यह बताते हैं कि अनुवांशिकता यानी जेनेटिक्स और ब्रेन केमिस्ट्री के साथ लाइफ एक्सपीरियंस मिलकर इस तरह की स्थिति का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं. इसके अलावा अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि जो लोग तनावग्रस्त होते हैं यानी जब आप डिप्रेशन में होते हैं, तब निर्णय लेने से अधिक डरते हैं, तो डिप्रेशन और डिसाइडोफोबिया का भी कहीं न कहीं एक अलग तरह का संबंध हो सकता है.

लक्षण

इसके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि आप किस हद तक इस तरह के फोबिया का शिकार हैं. सामान्य लक्षणों में घबराहट, बेचैनी, सांस लेने में द़िक्क़त, पसीना आना, हृदय गति का तेज़ होना, मितली, मुंह का सूखना, ठीक से न बोल पाना आदि हो सकते हैं. हालांकि कुछ मामलों में यह डर बहुत नुक़सान नहीं पहुंचाता, लेकिन अगर ये आपकी सामान्य ज़िंदगी पर असर डालने लगे, तो समझ जाइए कि एक्सपर्ट की राय ज़रूरी है.

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कब जाएं एक्सपर्ट के पास?

जब आपके लक्षण बहुत ज़्यादा गंभीर हो जाएं, तो समझ जाएं कि अब देर नहीं करनी चाहिए.

आप निर्णय लेने से बचने के लिए हद से आगे बढ़ जाते हैं: आप कोई काम करना तो चाहते हो, लेकिन निर्णय लेने के डर से उसे नहीं करते. यह डर इतना हावी हो जाता है कि आप निर्णय लेने की स्थिति से बचने के लिए कई तरी़के अपनाने लगते हो. हालांकि यह जानलेवा नहीं है, लेकिन डिसाइडोफोबिया आपके रिश्तों को और प्रोफेशनल लाइफ को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है.

निर्णय लेने के लिए आप दूसरों पर निर्भर रहते हो: काउंसलर्स का कहना है कि आप हर निर्णय के लिए दूसरों पर ही निर्भर रहते हो और धीरे-धीरे आपकी दूसरों पर निर्भरता इतनी अधिक बढ़ जाती है कि आप ख़ुद कुछ कर ही नहीं पाते.

ग़लत लोगों और ग़लत तरीक़ों से गाइडेंस लेने लगते हो: ख़ुद निर्णय लेने की क्षमता को इस कदर खो देते हो कि आप ज्योतिषियों, बाबाओं या अन्य लोगों से सलाह लेने लगते हो. यहां तक कि अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए भी इन्हीं पर निर्भरता बढ़ जाती है, जो पूरी तरह अस्वस्थ है.

निर्णय लेने की स्थिति में पैनिक अटैक की आशंका: जैसे ही ऐसी परिस्थिति आती है कि आपको निर्णय लेना है, आपको पैनिक अटैक होने लगता है. आप बेचैन होने लगते हो, पसीना, हार्टबीट, मुंह का सूखना, चक्कर आना आदि लक्षण उभरने लगते हैं.

आपका निजी जीवन प्रभावित होने लगता है: निर्णय न ले पाने का यह डर जब आपके रिश्तों, करियर व अन्य बातों को प्रभावित करने लगता है, तब समझ जाइए कि आपको प्रोफेशनल की मदद लेनी होगी.

Decidophobia

ख़ुद करें अपनी मदद

  • सेल्फ हेल्प टेक्नीक्स के ज़रिए आप अपने इस डर पर काबू पा सकते हैं.
  • जब भी निर्णय लेने की स्थिति आए, लंबी व गहरी सांसें लें और इस परिस्थिति को तनावपूर्ण बनाने से बचें.
  • ख़ुद पर विश्‍वास जताएं कि हां, मैं यह कर सकता/सकती हूं. श्र जल्दबाज़ी न करें.
  • अपने मन की बात बोलने से हिचकिचाएं नहीं.
  • अगर आपको लगता है कि आपको सेकंड ओपिनियन की ज़रूरत है, तो जो आपके क़रीबी हैं और जिन पर आप भरोसा करते हो, उनसे शेयर करो और उनसे सलाह लो.
  • अपने इंस्टिंक्ट्स की आवाज़ सुनें यानी आपका दिल अगर किसी बात की गवाही दे रहा है, तो उसे नज़रअंदाज़ न करें.
  • अगर आपका निर्णय ग़लत भी साबित हुआ, तो उसे स्वीकारने से पीछे न हटें. इस बात से डरें नहीं कि आपने ग़लत निर्णय ले लिया.
  • अगर आपको नशे की लत है, तो उसे कम करने का प्रयास करें.
  • हारने के डर को मन से निकाल दें.
  • कुछ ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ेस करें, योग व ध्यान करें. इससे आपका मन शांत होगा, डर दूर होगा और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी.
  • अपनी सोच व अप्रोच बदलें. यह सोचें कि आप भी बाकी लोगों की तरह ही हैं और आप से भी ग़लती हो सकती है, क्योंकि ऐसा कोई नहीं, जिससे गलती न हो.
  • ग़लतियों से ही सीखा जाता है, इस नज़रिए के साथ आगे बढ़ें.
  • यदि बचपन में या कभी अतीत में आपके साथ कुछ ऐसा हादसा हुआ हो, जिससे आप अभी निर्णय लेने से डर रहे हों, तो उस हादसे से वर्तमान को न जोड़ें. हर परिस्थिति अलग होती है और ज़रूरी नहीं कि हर बार ग़लती ही हो.
  • बुरी यादों को याद करने से बेहतर है सकारात्मक बातों के साथ वर्तमान को जोड़ा जाए.
  • हादसे सभी के साथ होते हैं, इसका यह मतलब नहीं कि उसे ज़िंदगीभर हावी रखें. उन्हें भुलाकर आगे बढ़ना सीखें.
  • यदि सेल्फ हेल्प से भी आप अपने डर को दूर नहीं कर पा रहे, तो एक्सपर्ट के पास ज़रूर जाएं और अपने जीवन को बेहतर बनाएं.

 – ब्रह्मानंद शर्मा 

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विंटर डायट टिप्स (Winter Diet: Best Foods To Eat In Winter To Stay Healthy)

Winter Diet Tips

विंटर डायट टिप्स (Winter Diet: Best Foods To Eat In Winter To Stay Healthy)

सर्दियों (Winter) का मौसम अपने साथ लो इम्यूनिटी (Low Immunity) की समस्या लेकर आता है, जिसके कारण लोग आसानी से सर्दी-ज़ुकाम और इंफेक्शन्स के शिकार हो जाते हैं. इन सबसे बचने के लिए आपको अपने डायट (Diet) का ख़ास ध्यान रखना होगा, साथ ही ऐसे सुपर फूड्स (Super Foods) अपने डायट में शामिल करने होंगे, जो आपको अंदर से स्ट्रॉन्ग बनाने के साथ-साथ सेहतमंद (Healthy) भी बनाएं.

डेली डायट टिप्स

–     मौसमी फल, जैसे- संतरा, स्ट्रॉबेरी और आंवला एंटी ऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी के गुणों से भरपूर हैं. इन्हें अपने डेली डायट में शामिल करें.

–     इसी तरह हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, जैसे- पालक, मेथी, सरसों, सोवा और हरी प्याज़ आपकी सेहत के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकती हैं.

–     सर्दियों में हमारी जठराग्नि तेज़ हो जाती है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है. ऐसे में ज्वार, बाजरा, नाचनी जैसे साबूत अनाज के अलावा आप प्रोटीन से भरपूर उड़द दाल, राजमा और बीन्स को अपने रोज़ाना की डायट में शामिल करें.

–     विटामिन सी से भरपूर सिट्रस फ्रूट्स, टमाटर, रेड पेपर और शकरकंद आदि को अपने डेली डायट का हिस्सा बनाएं, ताकि आपकी प्रतिरोधक क्षमता बेहतर बने और एनर्जी लेवल भी बूस्ट हो.

–    ज़िंक आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बनाने में मदद करता है, ऐसे में ज़िंक से भरपूर फल, जैसे- ब्लैक बेरी, अनार, एवोकैडो, अमरूद, पीच, कीवी को डायट में शामिल करें. इसके अलावा काबुली चना, बीन्स, मीट, अंडा आदि भी ज़िंक रिच फूड हैं.

–    साल्मन और कॉड फिश के साथ दूध, चीज़  विटामिन बी 12 के अच्छे स्रोत हैं. ये आपकी इम्यूनिटी को स्ट्रॉन्ग बनाने के साथ-साथ थकान व तनाव से आपको बचाते हैं.

–    आलू और शकरकंद को भूनकर खाना आपके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होगा.

–    सर्दियों में घर का बना ताज़ा और गर्म खाना ही खाएं. पहले से बनाया हुआ या पैक्ड फूड न खाएं.

–     हाइड्रेशन का भी पूरा ख़्याल रखें. पानी के अलावा हर्बल टी, ग्रीन टी, सूप आदि का सेवन करें.

–     अगर सर्द मौसम के कारण मूड अच्छा नहीं लग रहा हो, तो डार्क चॉकलेट खाएं. यह मूड चेंजर है, जिससे आपको अच्छी फीलिंग आएगी.

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विंटर सुपर फूड्स

सर्दियों का मौसम अपने साथ सुपर फूड की बेहतरीन वेरायटी लेकर आता है. फल-सब्ज़ियों के अलावा कुछ और भी खाद्य पदार्थ हैं, जिन्हें आप अपने विंटर डायट में ज़रूर शामिल करें, ताकि सर्दियों का असर आपकी सेहत पर न पड़े. ये आपको गर्म बनाए रखने में मदद करते हैं.

शहद: विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर शहद सर्दियों के लिए बेस्ट रेमेडी है. सर्दी-ज़ुकाम, गले के इंफेक्शन और कई तरह की एलर्जी से यह आपको राहत दिलाता है.

ड्रायफ्रूट्स: दिनभर एनर्जेटिक बने रहने के लिए सुबह-सुबह ड्रायफूट्स से बेहतर भला क्या हो सकता है. विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर बादाम, पिस्ता, अखरोट के अलावा आप मुनक्का, अंजीर और ऐप्रीकोट को भी अपने विंटर डायट में शामिल करें.

कालीमिर्च, मेथी और हींग: यह मौसम ही ऐसा है कि आपको गर्माहट देनेवाली चीज़ें अपने खाने में शामिल करने की ज़रूरत है. रोज़मर्रा के खाने में चाय हो या सूप या फिर दाल- कालीमिर्च, मेथी, हींग, जीरा और राई की मात्रा थोड़ी बढ़ा दें.

तुलसी और अदरक: एंटीबैक्टीरियल, एंटीबायोटिक और एंटीवायरल गुणों से भरपूर तुलसी वैसे तो हर मौसम में आपके लिए ज़रूरी है, पर सर्दियों में सर्दी-ज़ुकाम के कारण इसकी ज़रूरत कुछ ज़्यादा ही बढ़ जाती है. गले की खराश हो या फिर कफ़ की शिकायत- अदरक ठंड के कारण होनेवाली सभी छोटी-मोटी समस्याओं से आपको निजात दिलाता है.

घी: लोगों को बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है कि घी से फैट बढ़ता है, जबकि रिसर्च में भी यह बात साबित हो चुकी है कि यह आपके शरीर से बैड फैट को कम करता है. यह आपको शेप में बने रहने में मदद करता है. सर्दियों में रोज़ाना एक चम्मच घी ज़रूर खाएं.

गुड़: पाचनशक्ति को बेहतर बनाने के साथ-साथ यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मज़बूत बनाता है. साथ ही यह आपको गर्म बनाए रखता है, जिससे कोल्ड और फ्लू की समस्या नहीं होती.

लहसुन: एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल ख़ूबियों के कारण लहसुन सर्दियों में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. यह इस मौसम में होनेवाली बीमारियों से आपको बचाता है.

– अनीता सिंह

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सर्दियों में यूं रखें सेहत का ख़्याल (Winter Health Care)

Winter Health Care

सर्दियों में यूं रखें सेहत का ख़्याल (Winter Health Care)

ठंड का मौसम अपने साथ सर्दी-ज़ुकाम और कई तरह की एलर्जी (Allergies) और इंफेक्शन्स (Infections) लेकर आता है. ऐसे में ज़रूरी है कि आप अपना और अपनों का ख़ास ख़्याल रखें, ताकि सर्दियों (Winter) के सुहाने मौसम का लुत्फ़ उठा सकें.

विंटर हेल्थ प्रॉब्लम्स

सर्दी के मौसम में गठिया और अस्थमा के मरीज़ों की द़िक्क़तें काफ़ी बढ़ जाती हैं. किसी को सालभर पुरानी चोट परेशान करने लगती है, तो किसी को मसल पेन. इनके अलावा और

कौन-कौन-सी बीमारियां हैं, जो सर्दियों के मौसम में आपको परेशान कर सकती हैं, आइए जानें.

सर्दी-खांसी

सर्दी-खांसी एक आम समस्या है, लेकिन सर्दी के मौसम में यह आपको काफ़ी परेशान कर सकती है. यह  रोग काफ़ी संक्रामक होता है, इसलिए अगर घर में किसी को सर्दी है, तो वह  छींकते-खांसते व़क्त रुमाल का इस्तेमाल करे. बहती नाक, सीने में जकड़न, छींकें आना, सिरदर्द, गले में खराश और हल्का बुख़ार इसके लक्षण हैं.

होम रेमेडीज़

–    जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है, वे बार-बार सर्दी-ज़ुकाम से परेशान रहते हैं. ऐसे लोगों को, ख़ासतौर से सर्दियों में, आंवले का मुरब्बा खाना चाहिए.

–     आधा टीस्पून शहद में कुछ बूंदें नींबू का रस और चुटकीभर दालचीनी पाउडर मिलाकर दिन में दो बार लें.

–    गुनगुने नींबू पानी में शहद मिलाकर लेने से सर्दी-खांसी से राहत मिलती है.

–     सर्दी-खांसी से राहत पाने के लिए एक कप पानी में थोड़ी-सी अलसी मिलाकर उबालें. पांच मिनट बाद आंच से उतार लें. छानकर उसमें नींबू का रस और शहद मिलाकर पीएं.

–    घी में लहसुन की कुछ कलियां गरम करके खाएं. गरम-गरम लहसुन खाने से खांसी में काफ़ी राहत मिलती है.

–     रात को सोने पर खांसी की समस्या बढ़ जाती है, क्योंकि लेटने पर नाक में मौजूद कफ़ धीरे-धीरे गले तक जाने लगता है, जिससे खांसी बढ़ जाती है. इसके लिए बेहतरीन उपाय है कि आप सिर को थोड़ा ऊंचा रखें. इससे खांसी कम होगी और आप सो भी पाएंगे.

गले में इंफेक्शन

गले में खिचखिच और ड्राईनेस, जो धीरे-धीरे दर्द का कारण बनता है, यह गले के इंफेक्शन के कारण होता है. मौसम में आई ठंडक और इंफेक्शन्स के कारण ऐसा होता है.

होम रेमेडीज़

–    इसके लिए हमारी दादी-नानी का फेवरेट नुस्ख़ा है गरारा करना. गुनगुने पानी में चुटकीभर नमक डालकर गरारा करने से बैक्टीरिया निकल जाते हैं, जिससे गले की खराश से छुटकारा मिलता है. इसे दिन में दो-तीन बार करें.

–     हल्दीवाला दूध भी एक ऐसा ही रामबाण नुस्ख़ा है. यह गले की सूजन और दर्द से राहत दिलाता है. बार-बार होनेवाली खांसी में भी हल्दीवाला दूध काफ़ी राहत पहुंचाता है.

–     एप्पल साइडर विनेगर को आप हर्बल टी या गरारेवाले पानी में डालकर इस्तेमाल करें.

–     लहसुन की एक कली चूसने से भी गले के इंफेक्शन और दर्द से राहत मिलती है.

–     इसके अलावा हर्बल टी और गरमागरम सूप आपके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होगा.

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अस्थमा

यह फेफड़े की बीमारी है, जिसमें श्‍वासनली में जलन और दर्द होने लगता है. सीने में जकड़न, छींकें आना, खांसी और सांस फूलना इसके लक्षण हैं. यह दो तरह का होता है, एलर्जिक और नॉन एलर्जिक. एलर्जिक अस्थमा धूल, धुएं, पेंट आदि के कारण होता है, जबकि नॉन एलर्जिक अस्थमा कोल्ड, फ्लू, स्ट्रेस और ख़राब मौसम के कारण होता है.

होम रेमेडीज़

–    एक कप पानी में आधा टीस्पून मुलहठी पाउडर और आधा टीस्पून अदरक मिलाकर चाय बनाकर पीएं.

–     एक ग्लास दूध में आधा टीस्पून कद्दूकस अदरक और आधा टीस्पून हल्दी पाउडर डालकर दिन में दो बार लें.

–     एक कप उबलते पानी में एक टीस्पून दालचीनी पाउडर और 1/4 टीस्पून कालीमिर्च, पिप्पली और सोंठ का समान मात्रा में मिलाया हुआ चूर्ण मिलाकर 10 मिनट तक उबालें. पीने से पहले एक टीस्पून शहद मिलाएं. यह अस्थमा अटैक्स से काफ़ी राहत देता है.

–    एक बाउल गरम पानी में पांच-छह बूंदें लैवेंडर ऑयल डालकर भाप लें.

इन्फ्लूएंज़ा

सर्दियों के मौसम में सर्दी और फ्लू कभी भी किसी को भी अपनी गिरफ़्त में ले सकते हैं. यह एक ऐसी समस्या है, जिसमें आपकी सारी एनर्जी ख़त्म हो जाती है. नाक बहना, सिरदर्द, बदनदर्द, बुख़ार और थकान फ्लू के आम लक्षण हैं.

–     आधा टीस्पून गिलोय को पीसकर एक कप पानी में उबालकर पीएं. इससे फ्लू के लक्षणों से काफ़ी राहत मिलती है.

–     समान मात्रा में शहद और प्याज़ का रस मिलाकर दिन में तीन बार फ्लू जाने तक लें.

–     एक टीस्पून शहद में 10-12 तुलसी की पत्तियों का रस मिलाकर दिन में एक बार लेने से भी राहत मिलती है.

–     गरम पानी में कुछ बूंदें नीलगिरी तेल की डालकर भाप लेने से काफ़ी राहत मिलेगी.

–    एक कप पानी में कालीमिर्च पाउडर, जीरा और गुड़ डालकर उबालें. यह चाय फ्लू के लक्षणों से राहत दिलाती है. आप चाहें, तो गुड़ में तिल मिलाकर उसके लड्डू बनाकर खाएं.

जोड़ों में दर्द

ठंड के कारण मसल्स और हड्डियों में अकड़न-सूजन के कारण यह मौसम कुछ लोगों के लिए कष्टदायक बन जाता है. इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है कि सोकर उठने पर आप स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करें.

हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ आपको जोड़ों के दर्द से छुटकारा दिला सकती है.

–     आधी बाल्टी गरम पानी में दो कप सेंधा नमक मिलाकर उसमें टॉवेल डुबोकर प्रभावित जोड़ की सिंकाई करें.

–    रोज़ाना सुबह एक टीस्पून मेथी पाउडर फांककर एक ग्लास गुनगुना पानी पीएं.

–     नीलगिरी के तेल से जोड़ों पर मालिश करें. इससे दर्द और जलन दोनों में आराम मिलता है.

–    रात को सोने से पहले गुनगुने सरसों के तेल से जोड़ों पर मसाज करें. यह प्रभावित जोड़ों में रक्तसंचार बढ़ाता है, जिससे दर्द और अकड़न से राहत मिलती है.

–     एक कप गुनगुने पानी में एक टीस्पून एप्पल साइडर विनेगर और थोड़ा-सा शहद मिलाकर दिन में दो बार खाने से पहले लें.

हार्ट प्रॉब्लम्स

आपको जानकर हैरानी होगी कि ठंड में हार्ट अटैक्स के मामले बढ़ जाते हैं, क्योंकि ठंड के कारण हार्ट की कोरोनरी आर्टरीज़ सिकुड़ने लगती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर कम हो जाता है.

–     जिन्हें हार्ट प्रॉब्लम्स हैं, उन्हें ख़ासतौर से सर्दियों में रोज़ाना चार-पांच लहसुन की कलियां खानी चाहिए. यह खून को पतला करने का काम करता है, जिससे ब्लड फ्लो सही तरी़के से होता है.

–     एक ग्लास गुनगुने पानी में आधा टीस्पून अर्जुन की छाल का पाउडर और शहद मिलाकर लें. इससे आपको काफ़ी राहत मिलेगी.

–     अदरक-लहसुन के रस में शहद या गुड़ मिलाकर खाने से भी हार्ट प्रॉब्लम्स में राहत मिलती है.

–     इसके अलावा खानपान का ध्यान रखें. दो बार में हैवी खाने की बजाय चार-पांच बार में थोड़ा-थोड़ा खाएं. अपने वज़न को नियंत्रित रखें. अगर वज़न अचानक से बढ़ने लगे, तो डॉक्टर को बताएं.

– सुनीता सिंह

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष: हेल्दी रहने के लिए अपनाएं यौगिक लाइफस्टाइल (International Yoga Day: Follow Yogic Lifestyle For Healthy life)

International Yoga Day

स्वस्थ व सेहतमंद बने रहने के लिए सुबह से शाम तक आपकी जीवनशैली भी बहुत मायने रखती है. सुबह से लेकर शाम तक की सभी गतिविधियां अगर योग के अनुसार हों, तो आप हमेशा चुस्त-दुरुस्त और तंदुरुस्त रहेंगे.

International Yoga Day
सुबह की सही शुरुआत

– योग के अनुसार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना लाभदायक होता है, लेकिन अगर आप 5.30 बजे तक भी उठें, तो ठीक रहेगा.
– उठने के बाद 2 ग्लास पानी पीएं. पानी रात को तांबे के बर्तन में भरकर रख दें और सुबह उठकर पीएं. पानी खड़े होकर नहीं पीना चाहिए. बैठकर पीएं, उकड़ू बैठकर पीना और भी फ़ायदेमंद होता है. वज़न ज़्यादा है, तो गर्म पानी पीएं.
– पानी पीकर फ्रेश हो जाएं और एक घंटे तक योग व प्राणायाम करें. चाहें तो, मॉर्निंग वॉक पर भी जा सकते हैं.
– नहा-धोकर तैयार हो जाएं. ईश्‍वर का ध्यान करें और अपने सफल दिन की सही शुरुआत के लिए प्रार्थना करें.
– 7.30-8 बजे तक नाश्ता करें. नाश्ते में फल, पोहा, उपमा, दलिया, ओट्स, दूध जैसी पौष्टिक चीज़ों को शामिल करें.
– उसके बाद दिनभर के कामों की लिस्ट बना लें. जैसे-जैसे आपके काम ख़त्म होते जाएं, उन्हें टिक कर दें और बचे हुए कामों को अगले दिन की लिस्ट में शामिल कर लें.

दोपहर को दुरुस्त बनाएं

– अगर आप ऑफिस में काम करते हैं, तो लंच टाइम में खाना खाएं और खाने में सलाद ज़रूर शामिल करें.
– खाने को ख़ूब चबा-चबाकर खाएं और खाने के आधे घंटे बाद ही पानी पीएं. खाते समय भी पानी नहीं पीना चाहिए.
– ऑफिस में दो घंटे से ज़्यादा लगातार सीट पर न बैठें. ऑफिस के छोटे-छोटे काम, मसलन- पानी की बॉटल भरकर लाना, चाय-कॉफी लेना, प्रिंटर से प्रिंटआउट लाना आदि ख़ुद ही करें.
– खाने के बाद अगर आपके पास फ्री टाइम है, तो थोड़ी देर टहलें.
– घर पर हैं, तो बाकी काम निपटाकर थोड़ा रिलैक्स हो जाएं. खाना खाकर अपनी पसंद का कुछ काम कर सकते हैं. काम ख़त्म कर रात – खाने की तैयारी कर लें.

शाम हो सुकूनभरी

– ऑफिस में हैं, तो 4 बजे के क़रीब सीट पर बैठे-बैठे बॉडी स्ट्रेचिंग करें. इससे आप रिलैक्स और फ्रेश महसूस करेंगे.
– शाम की भूख मिटाने के लिए भुने हुए चने, मूंगफली, कुरमुरा, भेल, फल, चाय-बिस्किट आदि लें. पकौड़े और वड़े-समोसे से दूर रहें.
– दिनभर में कम से कम 10-12 गिलास पानी पीएं.
– ऑफिस से लौटकर थोड़ी देर रिलैक्स करें.
– 7 बजे थोड़ा ध्यान करना आपके लिए फ़ायदेमंद साबित होगा. 20 मिनट तक ध्यान करें. दिनभर की सारी थकान, तनाव और निगेटिविटी दूर हो जाएगी.

ताकि न हो रतजगा

– रात 8 बजे तक खाना खा लें. रात का भोजन बहुत हल्का होना चाहिए.
– रात का भोजन टीवी देखते हुए या बातचीच करते हुए न लें. खाना खाते व़क्त बातें न करें, स़िर्फ खाने पर ध्यान दें, इससे खाना जल्दी व अच्छी तरह पचता है. ओवरईटिंग से बचें.
– रात के खाने और सोने के बीच कम से कम 2 घंटे का अंतर ज़रूर होना चाहिए और खाने के थोड़ी देर बाद 15 मिनट तक हल्की वॉक करनी चाहिए.
– खाने के बाद ज़रूरी काम निपटा लें. सोने में जब तक समय है, तब तक आप बच्चों के होमवर्क देख सकते हैं, उनके साथ खेल सकते हैं या फिर गप्पे मार सकते हैं.
– अपने लिए थोड़ा समय निकालकर म्यूज़िक सुनें या कोई अच्छी क़िताब पढ़ें.
– रात 10 से 10.30 बजे तक सो जाएं. सोने से पहले पूरे दिन का विश्‍लेषण कर लें. अगर कोई काम अधूरा रह गया हो, तो उसे अगले दिन की लिस्ट में शामिल कर लें.
– रोज़ाना 6-8 घंटे सोएं. ऐसा कहा जाता है कि रात 10 बजे से 2 बजे तक का समय नींद के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. इन चार घंटों की नींद बाकी समय के आठ घंटों के बराबर है. ऐसे में देर से सोने का मतलब है नींद की क्वॉलिटी के साथ समझौता करना. और हां, दिन में सोने से बचें.

 

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– सत्येंद्र सिंह