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वज़न कम करना और स्लिम होना आसान काम नहीं. इसके लिए डायट-एक्सरसाइज़ के साथ ही आपको कुछ बातों का भी ध्यान रखना होगा. स्लिमिंग रूल्स को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाना होगा. इससे ना सिर्फ आपका वज़न कम होगा, बल्कि वेट मैनेजमेंट भी आसान हो जाएगा.

स्लिमिंग रूल्स
1. कार्बोहाइड्रेट कम करेंः कार्बोहाइडे्रट भी दो तरह के होते हैं- कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और सिंपल कार्बोहाइड्रेट. कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जो सेहत के लिए अच्छे होते हैं. मोटापा कम करना है तो इनका इस्तेमाल करें. ये साबुत अनाज, दालों, ओट्स, ज्वार आदि में मिलता है. सिंपल कार्बोहाइड्रेट का ग्लासेमिक इंडेक्स ज़्यादा होता है. जो हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज़, मोटापा जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं. इसलिए इनसे बचें. ये पास्ता, मैदा, ब्रेड, चावल, शक्कर आदि में होता है.
2. प्रोटीन का सेवन बढ़ाएंः प्रोटीन शरीर का मेटाबोलिज़म लेवल बढ़ाता है, जिससे फैट खाने के बावजूद आपका शरीर तेज़ी से कैलोरी बर्न करने लगता है. इससे वज़न घटता है. सभी दालों, ड्राइफ्रूट्स, बींस, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां. सोयाबीन, दही, फिश, अंडा आदि प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं.
3. फाइबर भी हैं ज़रूरीः फाइबर मोटापा कम करता है और बैड कोलेस्ट्रॉल को भी. इसके सेवन से आपको जल्दी ही पेट भर जाने का एहसास होता है. ऐसे में आप कम कैलोरी खाते हैं. इसलिए अपने डायट में फाइबर ज़रूर शामिल करें. ये ओटमील, बीन्स, मटर, फल, आदि में शामिल होता है.
4. ख़ूब पानी पीएंः पानी आपके मेटाबोलिज़म लेवन को ठीक रखता है और इससे पेट भरा होने का एहसास भी होता है. खाना खाने से आधा घंटे एक गिलास पानी पीएं. इससे कम खाने से भी आपको पेट भरने का एहसास होगा. गुनगुना पानी पीएं. इससे मेटाबोलिज़म बेहतर होता है और एक्स्ट्रा कैलोरीज़ भी बर्न होती हैं.
5. रोज़ 30 से 60 मिनट एक्सरसाइज़ करेंः यदि आपके पास समय की कमी है और आप एक बार में 30 से 60 मिनट का समय नहीं निकाल पाती हैं तो एक्सरसाइज़ को 10-10 मिनट के तीन हिस्सों में बांट लें और जब भी 10 मिनट का समय मिले, झटपट एक्सरसाइज़ कर लें.

Weight Loss and Slimming Tips


6. हेल्दी नाश्ते सहित दिन में 3 बार खाना ज़रूर खाएंः ब्रेकफास्ट, लंच या डिनर में से यदि आप कुछ भी स्किप करेंगी तो ज़्यादा भूख लगेगी और आप ज़रूरत से ज़्यादा स्नैक्स खा लेंगी, जो आपके वज़न को बढ़ाने का काम करेगा. इसलिए कोई भी मील स्किप ना करें. साथ ही हर दो घंटे में कुछ न कुछ खाते रहें, इससे मेटाबॉलिज़्म भी ठीक रहता है.
7. सब्ज़ियों और फलों पर रखें फोकसः अपने ब्रेकफास्ट में फल, जैसे- सेब, केले, स्ट्रॉबेरी आदि शामिल करें. फ्रूट सलाद खाएं या फ्रूट योगर्ट यानी दही में फल मिलाकर खाएं. यदि आप सैंडविच खा रही हैं, तो उसमें ढेर सारी सब्ज़ियां डालें और यदि उपमा आपकी पसंद है तो उसमें भी रवा कम और सब्ज़ियां ज़्यादा शामिल करें. नाश्ते में कुछ मीठा, जैसे- कॉर्नफ़्लैक्स, ओटमील या पोरेज खाती हों, तो उसमें ढेर सारे फल डाल दें.
8. वज़न पर रखें नज़रः नियमित रूप से वज़न चेक करने से आपको पता चलता रहेगा कि वज़न को मेंटेन रखने की कोशिशें कितनी क़ामयाब हो रही हैं. यही नहीं, यदि थोड़ी-सी लापरवाही से वज़न बढ़ गया हो तो इससे पहले कि वो और बढ़ जाए, उस पर नियंत्रण पाने की कोशिशें शुरू कर सकती हैं. इसलिए बेहतर होगा कि रेग्युलर वज़न चेक करते रहें.
9. घर में रेडी टु ईट्स फूड्स न रखेंः हम जब भी स्ट्रेस में होते हैं, यूं ही फुर्सत में बैठे होते हैं या फिर बोर होते हैं तो न चाहते हुए भी रेडी टु ईट हाई फैट या हाई कैलोरी फूड, जैसे- नमकीन, समोसे, कचौरी, बिस्किट्स, केक आदि खा ही लेते हैं. इससे बचने के लिए बेहतर होगा कि आप अपने घर में रेडी टु ईट और इस तरह के दूसरे कंफर्ट फूड रखना ही बंद कर दें.
10. हेल्दी फूड पहले खाएंः जब भी खाना खाएं, पहले हेल्दी चीज़ें खाएं, जैसे- सलाद, दही, स्प्राउट्स, सब्ज़ियां वगैरह. इसके बाद ही अपना फेवरेट फूड खाएं. इससे यह फ़ायदा होगा कि जब आप हाई कैलोरी फूड खा रही होंगी, तब तक आपकी भूख कम हो चुकी होगी और आप उसे कम मात्रा में ही खाएंगे.
11. एक्टिव बने रहेंः बच्चों के खिलौने समेटना होे, कपड़े सुखाने हों, बाहर बच्चों के साथ खेलना हो, ऑफिस में सहकर्मी से कुछ पूछने उनकी सीट तक जाना पड़े या प्रिंट लेने प्रिंटर तक, एक्टिव रहने का कोई मौका न छोड़ें. ख़ुद को एक्टिव बनाए रखने वाले काम करती रहें. इससे भी कैलोरीज़ बर्न होती हैं और वज़न को कंट्रोल में रखना आसान हो जाता है.
12. एक्सरसाइज़ में बदलाव करते रहेंः रोज़-रोज़ एक ही तरह की एक्सरसाइज़ न करें, इसमेें बदलाव लाएं. दो दिन जॉगिंग करें तो दो दिन स्विमिंग. बीच में एक दिन एरोबिक्स, साइकलिंग या योग करें, तो एक दिन डांस करें या आउटडोर गेम्स खेलें. इससे एक्सरसाइज़ में वेरिएशन तो मिलेगा ही, एक्सरसाइज़ करने का उत्साह भी बना रहेगा.
13. स्ट्रेस से बचेंः जब भी हम स्ट्रेस में होते हैं, कुछ-न-कुछ खाते रहते हैं. इसलिए जैसे ही लगे कि आप स्ट्रेस्ड फ़ील कर रहे हैं तो तुरंत ही एक ग्लास पानी पीएं और तनावमुक्त होने के लिए एक्सरसाइज़ करें, गहरी सांसें लें, मसल रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं या फिर फनी बुक्स पढ़ें. इससे खाने पर से आपका ध्यान हटेगा और आप बेवजह कैलोरीज़ खाने से बच जाएंगे.

Weight Loss and Slimming Tips


14. आउटसाइड फूड हफ्ते में एक बार ही खाएंः एक नियम बनाएं कि चाहे जो हो, बाहर का खाना कम खाएंगे. आजकल होटलों और रेस्टॉरेंट्स में खाने का चलन बहुत बढ़ गया है. इससे वज़न तो बढ़ता ही है, दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम्स भी सकती हैं. इसलिए जहां तक संभव हो, खाना घर का बना हुआ ही खाएं. यदि बाहर खाना आपकी मजबूरी है तो यह तय कर लें कि क्या और कितना खाना है.
15. साथ रखें हेल्दी स्नैक्सः यदि आपको कुछ-न-कुछ खाते रहने की आदत है तो बैग में हेल्दी स्नैक्स रखें, लेकिन इन्हें भी सीमित मात्रा में ही खाएं. फ्रूट, होल व्हीट लो शुगर बिस्किट्स, वेजीटेबल सैंडविच, डॉयफ्रूट्स, कुरमुरा-चना आदि. इससे आप ऊलजुलूल खाने से बच जाएंगे.
16. दिन की शुरुआत हाई फाइबर ब्रेकफास्ट से करेंः सुबह का नाश्ता कभी-भी स्किप न करें और ध्यान रखें कि आपका नाश्ता ऐसा हो, जिसमें फाइबर की मात्रा ज़्यादा हो. आप दलिया, कॉर्नफ्लैक्स, ओटमील, ब्राउन ब्रेड सैंडविच, चीला या फाइबरयुक्त कोई अन्य नाश्ता खा सकती हैं.
17. वॉक के लिए दस मिनट निकालेंः सुबह थोड़ा जल्दी उठें और 10 मिनट ज़रूर टहलें. वर्किंग हैं तो लंच टाइम में खाने के बाद 10 मिनट की वॉक आपको एनर्जेटिक बनाए रखेगी. शाम को भी वॉक के लिए 10 मिनट का टाइम तो निकाला ही जा सकता है. सोने के पहले धीमे-धीमे टहलना भी अच्छा आइडिया है.
18. खाना समय पर खाएंः थोड़ा मुश्किल ज़रूर है, फिर भी कोशिश करें कि आपके हर मील का टाइम फिक्स हो. ख़ासकर डिनर सोने के दो घंटे पहले करने की आदत डालें. लेट नाइट डिनर वज़न बढ़ाता है.
19. क्रेविंग को कंट्रोल करना सीखेंः कई बार भूख नहीं होती, बस कुछ खाने का मन करता रहता है. चटपटा खाने की क्रेविंग होती है. आपके साथ भी ऐसा हो, तो अपना ध्यान डायवर्ट करें. म्यूज़िक ऑन कर डांस करें, अपनी वॉर्डरोब मैनेज करने में मन लगाएं या फिर अपना फेवरेट कोई भी काम करें. इससे आपको भूख की याद ही नहीं आएगी.
20. ख़ुद को रिवॉर्ड देंः वज़न कम करना आसान नहीं, लेकिन अगर आपने अपनी विल पावर और कोशिशों से वज़न कम कर लिया है तो ख़ुद को इसके लिए रिवॉर्ड दें. फ्रेंड्स के साथ सेलिब्रेट करें या ख़ुद को वो प्यारी-सी ड्रेस ग़िफ़्ट करें, जो वज़न बढ़ जाने की वजह से आप नहीं ख़रीद पाई थीं. ये आपके लिए मोटीवेशन का काम करेंगे.

कोरोना ने जहां पूरे संसार की रफ़्तार को धीमा कर दिया वहीं मानव जाति पर भी यह एक बड़ा संकट है यह कहना ग़लत नहीं होगा, ऐसे में सभी को इंतज़ार है तो बस वैक्सीन का. इसकी कोशिशें भी हो रही हैं और उम्मीद है कि जल्द ही वैक्सीन के रूप में हमारे पास कोरोना को हराने का हथियार होगा.

कई देशों में वैक्सीन के निर्माण का काम तेज़ी से चल रहा है और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी भी इस ओर तेज़ी से कदम बढ़ा रही है और भारत में सिरम इंस्टिट्यूट और आईसीएमआर के साथ मिलकर एक सशक्त वैक्सीन- ‘कोविशील्ड’ के निर्माण की दिशा में वो काफ़ी आगे बढ़ चुकी है क्योंकि उसने ह्यूमन वैक्सिनेशन भी लगभग पूरा कर लिया है और अब वो इसके असर और प्रभाव पर नज़र बनाए हुए है.
ह्यूमन ट्रायल के लिए कुल भारत में 1600 वॉलंटियर्स की ज़रूरत थी और केईएम में 100, जिसमें से एक हैं महाराष्ट्र के नामी डॉक्टर सुरेश सुंदर जिनसे हमारी इस प्रक्रिया को लेकर बात हुई और हमें इस विषय को बेहतर तरीक़े से समझने में मदद मिली.

COVID-19 Vaccine

इतने महत्वपूर्ण मिशन के लिए वॉलंटियर बनने की क्या शर्तें और मानक होते हैं?

मैं भी डॉक्टर हूं तो ज़ाहिर है हमारा संपर्क और बातचीत होती रहती है इस तरह की कोशिशों से जुड़े लोगों से, इसीलिए मुझे भी अवसर मिला कि मैं इस अच्छे काम का हिस्सा बनूं.

आप कैसे इस मिशन से जुड़े?

आप एडल्ट हों और पूरी तरह हेल्दी हों. आपको कोरोना ना हुआ हो और आप मानसिक रूप से भी मज़बूत हों. पहले स्टेप में स्क्रीनिंग होती है जिसमें आपका हेल्थ चेकअप, कोविड टेस्टिंग वैग़ैरह होता है और दूसरा स्टेप होता है काउन्सलिंग का जिसमें आपको पूरी प्रक्रिया की गंभीरता और साइडइफ़ेक्ट्स की संभावनाओं के बारे में मानसिक रूप से तैयार किया जाता है.

इसके रिस्क फ़ैक्टर्स के बारे में कुछ बताइए?

चूंकी यह पूरी तरह नई वैक्सीन है तो इसके बारे में हमें ज़्यादा कुछ पता नहीं होता, ऐसे में इसके साइडइफ़ेक्ट्स भी कई तरह के हो सकते हैं, जैसे- मसल वीकनेस, किसी तरह की कमज़ोरी और यहां तक कि जान को भी ख़तरा हो सकता है.

Dr. Suresh Sundar

ऐसे में आप और आपके परिवार वाले कैसे तैयार हुए?

मेरी पत्नी भी डॉक्टर हैं और मैं भी तो ज़ाहिर है ये वैक्सीन कितनी ज़रूरी है आज हमारे पूरे देश, दुनिया और समाज के लिए हम समझ सकते हैं. यह गर्व की बात है कि मुझे मौक़ा मिला इस तरह के कार्य का हिस्सा बनने का. चूंकी वैक्सीन को बिना ट्रायल के बाज़ार में उतारा नहीं जा सकता तो यह प्रक्रिया बेहद ज़रूरी हो जाती है.

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मेरे परिजनों और दोस्तों ने मुझे हौसला दिया और यह भी कहना चाहूंगा कि प्रोफ़ेसर डॉक्टर गोगटे और केईएम डीन डॉक्टर देशमुख जिस तरह के प्रयास कर रहे हैं इस वैक्सीन के निर्माण व ट्रायल में वो क़ाबिले तारीफ़ है.

आपने अपना ट्रायल पूरा कर लिया?

मुझे 2 शॉट्स वैक्सीन के लग चुके हैं और नियम के मुताबिक़ 28 दिनों के अंतराल पर इसे लगाया जाता है. दो ही बार इसे इंजेक्ट किया जाता है और उसके बाद 5 महीनों तक मॉनिटर किया जाता है कि हमें किसी तरह के कॉम्प्लिकेशन्स या साइडइफ़ेक्ट तो नहीं हो रहे.
यह ट्रायल 5 महीनों तक चलता रहेगा और अभी तक वॉलंटियर्स को वैक्सिनेशन का काम पूरा हुआ है.

COVID-19 Vaccine

अब तक तो मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं और उम्मीद है कि यह वैक्सीन जल्द ही मानकों पर खरी उतरेगी और लोगों तक पहुंचेगी!

लेकिन तब तक सभी ध्यान रखें, सुरक्षित रहें, मास्क सही तरह से मुंह और नाक ढंककर पहनें, सोशल डिसटैंसिंग का पालन करें और स्वच्छता का पूरा ख़्याल रखें, सतर्क रहें!

यह भी पढ़ें: हेल्थ अलर्ट: ब्रेस्ट कैंसर- जानें कारण, लक्षण और उपाय… (Health alert: Breast Cancer- Causes, Symptoms And Remedies)

अगर आप भी चाहते हैं बढ़े हुए फैट और वज़न से जल्दी छुटकारा और वो भी बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के, तो ये होम रेमेडीज ट्राई करें, जो सेफ तो हैं ही, आपको कुछ ही दिनों में देंगे स्लिम ट्रिम फिगर.

– रोजाना सुबह खाली पेट गर्म पानी के साथ शहद पीने से वेटलॉस होता है. इससे शुगर का लेवल मेनटेन रहता है.
– रोज सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने से भी वज़न कम होता है. जिन्हें सर्दी या साइनस की प्रॉब्लम है, वे पानी को गुनगुना करके उसमें नींबू डालकर पी सकते हैं.
– वेटलॉस के लिए टमाटर-दही का शेक ट्राई करें. एक कप टमाटर के जूस में एक कप दही (फैट फ्री), आधा चम्मच नींबू का रस, बारीक कटा अदरक, काली मिर्च व स्वादानुसार नमक मिलाकर ब्लेंड  कर लें. रोज एक गिलास पीएं. वजन तेजी से कम होगा.
-करौंदे का जूस भी वजन घटाने में कारगर है. इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है और फैट्स कम करने में आसानी होती है.
– ये स्पाइस ड्रिंक ट्राई करें. 2-3 तेज पत्ता, दालचीनी के 3-4 छोटे टुकड़े, 1 चम्मच जीरा, 2 छोटी इलायची सबको एक लीटर पानी में15 मिनट तक उबालकर छान लें. सुबह खाली पेट, लंच और डिनर के आधे घण्टे बाद- दिन में तीन बार नियमित पीएं. इससे महीने में 5 किलो वजन आसानी से कम किया जा सकता है.
– शहद और दालचीनी की चाय पीएं. एक गिलास पानी गर्म करें. इसमें दो टुकड़ा दालचीनी और एक चम्मच शहद मिलाएं. रोज सुबह खाली ये चाय पीएं.
– रोज सुबह 2-4 कच्चे लहसुन की कली खाने से भी एक्स्ट्रा वेट कम करने में मदद मिलती है.
– लौकी की सब्जी या जूस का नियमित सेवन करें. इससे वजन तो कम होगा ही, स्‍किन भी ग्‍लो करेगी.
– एप्पल साइडर का रोजाना सेवन भी वेटलॉस में मदद करता है.
– पत्तागोभी का सूप या सलाद के तौर पर इसका सेवन भी वज़न कम करने में सहायता करता है.
– लाल मिर्च आपके वजन को संतुलित रखने में मदद करती है. एक रिसर्च के मुताबिक भोजन में लाल मिर्च पाउडर मिलाने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और एक्स्ट्रा कैलोरीज़ बर्न होती है, जिससे मोटापा कम होता है.
– खाने से 15 मिनट पहले एक कप सौंफ की चाय पी लें. इससे भूख कंट्रोल होगी और आप एक्स्ट्रा खाने से बचेंगे. सौंफ पेट से संबधित बीमारियों के लिए भी फायदेमंद है.

Home Remedies For Quick Weight Loss


– दही खाने से भी वजन कम होता है. इंटरनेशनल जरनल ऑफ ओबेसिटी के अनुसार ज्यादा दही खाने वालों का वजन तेजी से घटता है या कम बढ़ता है. दरअसल दही में मौजूद कैल्शियम और प्रोटीन फैट को कम करने में सहायक होता है.
– लगभग 30 मि.ली. अदरक के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले पीएं. इससे मेटाबॉल्जिम तेज़ होता है और वेटलॉस में मदद मिलती है.
– सुबह उठते ही 250 ग्राम टमाटर का रस 2-3 महीने तक पीने से भी फैट्स कम होता है.
-पके हुए पपीते का सेवन ख़ूब करें. इससे शरीर में अतिरिक्त चर्बी नहीं जमती व वज़न भी तेज़ी से घटता है.
– एक चम्मच पुदीने के रस में 2 चम्मच शहद मिलाकर नियमित रूप से लेते रहने से मोटापा कम होता है.
– आंवले और हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को छाछ के साथ लें. ये कमाल का स्लिमिंग फार्मूला है.

Home Remedies For Quick Weight Loss


– 2 चम्मच करेले के रस में एक नींबू का रस मिलाकर सुबह पीएं.
– खाने के बाद हमेशा गरम पानी पीएं. इससे पाचन क्रिया ठीक रहती है और एक्स्ट्रा फैट्स भी नहीं बनता.
– एप्पल साइडर विनेगर को जूस या पानी के साथ मिलाकर पीने से
मोटापा व कोलेस्ट्रॉल दोनों में तुरंत ही कमी आती है.
– एलोवीरा के पत्तों के सेवन से भी वेट कंट्रोल में रहता है, इसलिए एलोवीरा का सेवन रोज़ करें.
– अश्वगंधा की 2-3 पत्तियां दिन में तीन बार चबाएं. इससे वज़न कम करने में सहायता मिलती है. पत्तियां न उपलब्ध हों तो आप अश्वगंधा टैबलेट का सेवन भी कर सकते हैं.
– ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो झुर्रियों को दूर रखती है और मोटापा घटाने में भी उपयोगी है.
– सेब को उबालकर खाएं. इसमें फाइबर व आयरन प्रचुर मात्रा में होता है. ये मोटापा भी घटाता है.
– छोटी पीपल का बारीक़ चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें. यह चूर्ण तीन ग्राम रोज़ाना सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है.
– दो बड़े चम्मच मूली के रस में शहद मिलाकर बराबर मात्रा में पानी के साथ पीएं. ऐसा करने से एक महीने के बाद मोटापा कम होने लगेगा.
– 10 दिन सुबह-शाम खाली पेट एक ताज़े पान के पत्ते में 5 साबूत कालीमिर्च रखकर खाएं. फिर एक घंटे तक कुछ भी न खाएं. 10 दिन के बाद केवल सुबह ही सेवन करें. इसका क़रीब तीन महीने तक सेवन करें, इससे आपके पूरे शरीर का एक्स्ट्रा फैट्स निकलने लगेगा. ध्यान रहे, पान के पत्ते सूखे या काले न हों.

Home Remedies For Weight Loss


– डायट में खीरा को शामिल करें. इसमें पानी की मात्रा अधिक पाई जाती है. खीरे में 90% पानी होता है और यह शरीर के फैट्स को भी कम
करता है.
– नारियल पानी मेटाबॉलिज़्म बढ़ाता है और इलेक्ट्रोलाइटिस से भरपूर होता है. हर रोज़ एक से दो ग्लास नारियल पानी पीने से वज़न घटाने में मदद मिलती है.
– बादाम भी फैट्स को बर्न करने में मददगार होता है, इसलिए नियमित रूप से बादाम भी ज़रूर खाएं.
– चिया सीड्स का सेवन करें, ये वेटलॉस में सहायता करता है.
– अलसी के बीज से मोटापा को कम किया जा सकता है. अलसी में डाइटरी फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इस वजह से अलसी खाने पर जल्दी भूख नहीं लगती.
– खाना खाने के बाद एक गिलास छाछ में काला नमक और अजवाइन मिलाकर पीएं. इस उपाय से खाना भी पचता है और मोटापा भी कण्ट्रोल में रहता है.
– 3 चम्मच असली के बीज, 2 चम्मच जीरा और 2 चम्मच अजवाइन लें. अलसी के बीज को हल्का सा भून लें. तीनों को अच्छे से मिलाकर पीसकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण का नियमित सेवन पेट की चर्बी को तेजी से पिघलाएगा.
– सोंठ, दालचीनी और काली मिर्च (3 ग्राम प्रत्येक) को पीसकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को दो हिस्सों में बांटकर एक हिस्सा सुबह खाली पेट और दूसरा रात सोने से पहले लें.

इन बातों का भी रखें ख़्याल
– अधिक कार्बोहाइड्रेट वाली चीज़ों से परहेज़ करें.
– शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है. ये फैट्स बढ़ाते हैं.
– नमक का सेवन कम करें, एक्सपर्ट्स के अनुसार रात को 7 बजे के बाद नमक का सेवन कम करना चाहिए. 
– गेहूं के आटे की रोटी की बजाय गेहूं, सोयाबीन व चने के मिश्रित आटे की रोटी अधिक फ़ायदेमंद है.
– अगर आपको भूख लग रही है, तो पहले पानी पीजिए. इससे आपका पेट भरा हुआ लगेगा और आप कम खाएंगे.
– आयुर्वेद के अनुसार खाना खाने के एक घंटे के बाद एक ग्लास गर्म पानी पीने से मोटापा कम होता है. गर्म पानी का मतलब है, जितना आप आसानी से सिप कर सकें.
– एक्सरसाइज करें. ये शरीर के मेटाबॉलिक रेट को दुगुना कर सकता है. हफ़्ते में कम-से-कम तीन दिन आधे घंटे तक एक्सरसाइज करना आपके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकता है.
– अच्छी नींद का लें. थका हुआ शरीर अधिक ऊर्जा के लिए बार-बार भूख का सिग्नल देता है, जिससे आप ओवरईटिंग करने लगते हैं. यही वजह है कि रोज़ाना 6-8 घंटे की अच्छी नींद लेना ज़रूरी है.

Decidophobia

निर्णय लेने से क्यों डरते हैं आप? क्या हैं डिसाइडोफोबिया के शिकार? (Do You Suffer From Decidophobia)

जैसा कि नाम से थोड़ा-बहुत स्पष्ट होता है कि यह फोबिया यानी एक प्रकार का डर है. डिसाइडोफोबिया (Decidophobia) का मतलब है डिसीज़न यानी निर्णय लेने का भय. हम अपने आसपास भी देखते हैं कि बहुत-से लोग निर्णय लेने से घबराते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है. यह डर बहुत-सी बातों को लेकर हो सकता है कि उनका निर्णय कहीं ग़लत न निकल जाए, इस निर्णय से कहीं उन्हें कुछ नुक़सान न हो जाए, कहीं अपने ही लोग उनके बारे में कोई धारणा न बना लें… आदि.जैसा कि नाम से थोड़ा-बहुत स्पष्ट होता है कि यह फोबिया यानी एक प्रकार का डर है. डिसाइडोफोबिया का मतलब है डिसीज़न यानी निर्णय लेने का भय. हम अपने आसपास भी देखते हैं कि बहुत-से लोग निर्णय लेने से घबराते हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है. यह डर बहुत-सी बातों को लेकर हो सकता है कि उनका निर्णय कहीं ग़लत न निकल जाए, इस निर्णय से कहीं उन्हें कुछ नुक़सान न हो जाए, कहीं अपने ही लोग उनके बारे में कोई धारणा न बना लें… आदि.

कारण

इस तरह के भय के कई कारण होते हैं, जैसे बाहरी अनुभव, जैसे- पहले कभी कोई दर्दनाक हादसा हुआ है, तो व्यक्ति हर बात को उससे ही जोड़कर देखने लगता है और कहीं न कहीं इसमें उसके जींस का भी हाथ होता है. उसे कुछ गुण, कुछ तत्व अपने पूर्वजों से मिलते हैं, जो उसे ऐसा बनाते हैं. शोध यह बताते हैं कि अनुवांशिकता यानी जेनेटिक्स और ब्रेन केमिस्ट्री के साथ लाइफ एक्सपीरियंस मिलकर इस तरह की स्थिति का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं. इसके अलावा अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि जो लोग तनावग्रस्त होते हैं यानी जब आप डिप्रेशन में होते हैं, तब निर्णय लेने से अधिक डरते हैं, तो डिप्रेशन और डिसाइडोफोबिया का भी कहीं न कहीं एक अलग तरह का संबंध हो सकता है.

लक्षण

इसके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि आप किस हद तक इस तरह के फोबिया का शिकार हैं. सामान्य लक्षणों में घबराहट, बेचैनी, सांस लेने में द़िक्क़त, पसीना आना, हृदय गति का तेज़ होना, मितली, मुंह का सूखना, ठीक से न बोल पाना आदि हो सकते हैं. हालांकि कुछ मामलों में यह डर बहुत नुक़सान नहीं पहुंचाता, लेकिन अगर ये आपकी सामान्य ज़िंदगी पर असर डालने लगे, तो समझ जाइए कि एक्सपर्ट की राय ज़रूरी है.

यह भी पढ़ें: प्रतिदिन कितना खाएं नमक? (How Much Salt Should You Have Per Day?)

कब जाएं एक्सपर्ट के पास?

जब आपके लक्षण बहुत ज़्यादा गंभीर हो जाएं, तो समझ जाएं कि अब देर नहीं करनी चाहिए.

आप निर्णय लेने से बचने के लिए हद से आगे बढ़ जाते हैं: आप कोई काम करना तो चाहते हो, लेकिन निर्णय लेने के डर से उसे नहीं करते. यह डर इतना हावी हो जाता है कि आप निर्णय लेने की स्थिति से बचने के लिए कई तरी़के अपनाने लगते हो. हालांकि यह जानलेवा नहीं है, लेकिन डिसाइडोफोबिया आपके रिश्तों को और प्रोफेशनल लाइफ को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है.

निर्णय लेने के लिए आप दूसरों पर निर्भर रहते हो: काउंसलर्स का कहना है कि आप हर निर्णय के लिए दूसरों पर ही निर्भर रहते हो और धीरे-धीरे आपकी दूसरों पर निर्भरता इतनी अधिक बढ़ जाती है कि आप ख़ुद कुछ कर ही नहीं पाते.

ग़लत लोगों और ग़लत तरीक़ों से गाइडेंस लेने लगते हो: ख़ुद निर्णय लेने की क्षमता को इस कदर खो देते हो कि आप ज्योतिषियों, बाबाओं या अन्य लोगों से सलाह लेने लगते हो. यहां तक कि अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए भी इन्हीं पर निर्भरता बढ़ जाती है, जो पूरी तरह अस्वस्थ है.

निर्णय लेने की स्थिति में पैनिक अटैक की आशंका: जैसे ही ऐसी परिस्थिति आती है कि आपको निर्णय लेना है, आपको पैनिक अटैक होने लगता है. आप बेचैन होने लगते हो, पसीना, हार्टबीट, मुंह का सूखना, चक्कर आना आदि लक्षण उभरने लगते हैं.

आपका निजी जीवन प्रभावित होने लगता है: निर्णय न ले पाने का यह डर जब आपके रिश्तों, करियर व अन्य बातों को प्रभावित करने लगता है, तब समझ जाइए कि आपको प्रोफेशनल की मदद लेनी होगी.

Decidophobia

ख़ुद करें अपनी मदद

  • सेल्फ हेल्प टेक्नीक्स के ज़रिए आप अपने इस डर पर काबू पा सकते हैं.
  • जब भी निर्णय लेने की स्थिति आए, लंबी व गहरी सांसें लें और इस परिस्थिति को तनावपूर्ण बनाने से बचें.
  • ख़ुद पर विश्‍वास जताएं कि हां, मैं यह कर सकता/सकती हूं. श्र जल्दबाज़ी न करें.
  • अपने मन की बात बोलने से हिचकिचाएं नहीं.
  • अगर आपको लगता है कि आपको सेकंड ओपिनियन की ज़रूरत है, तो जो आपके क़रीबी हैं और जिन पर आप भरोसा करते हो, उनसे शेयर करो और उनसे सलाह लो.
  • अपने इंस्टिंक्ट्स की आवाज़ सुनें यानी आपका दिल अगर किसी बात की गवाही दे रहा है, तो उसे नज़रअंदाज़ न करें.
  • अगर आपका निर्णय ग़लत भी साबित हुआ, तो उसे स्वीकारने से पीछे न हटें. इस बात से डरें नहीं कि आपने ग़लत निर्णय ले लिया.
  • अगर आपको नशे की लत है, तो उसे कम करने का प्रयास करें.
  • हारने के डर को मन से निकाल दें.
  • कुछ ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ेस करें, योग व ध्यान करें. इससे आपका मन शांत होगा, डर दूर होगा और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी.
  • अपनी सोच व अप्रोच बदलें. यह सोचें कि आप भी बाकी लोगों की तरह ही हैं और आप से भी ग़लती हो सकती है, क्योंकि ऐसा कोई नहीं, जिससे गलती न हो.
  • ग़लतियों से ही सीखा जाता है, इस नज़रिए के साथ आगे बढ़ें.
  • यदि बचपन में या कभी अतीत में आपके साथ कुछ ऐसा हादसा हुआ हो, जिससे आप अभी निर्णय लेने से डर रहे हों, तो उस हादसे से वर्तमान को न जोड़ें. हर परिस्थिति अलग होती है और ज़रूरी नहीं कि हर बार ग़लती ही हो.
  • बुरी यादों को याद करने से बेहतर है सकारात्मक बातों के साथ वर्तमान को जोड़ा जाए.
  • हादसे सभी के साथ होते हैं, इसका यह मतलब नहीं कि उसे ज़िंदगीभर हावी रखें. उन्हें भुलाकर आगे बढ़ना सीखें.
  • यदि सेल्फ हेल्प से भी आप अपने डर को दूर नहीं कर पा रहे, तो एक्सपर्ट के पास ज़रूर जाएं और अपने जीवन को बेहतर बनाएं.

 – ब्रह्मानंद शर्मा 

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Winter Diet Tips

विंटर डायट टिप्स (Winter Diet: Best Foods To Eat In Winter To Stay Healthy)

सर्दियों (Winter) का मौसम अपने साथ लो इम्यूनिटी (Low Immunity) की समस्या लेकर आता है, जिसके कारण लोग आसानी से सर्दी-ज़ुकाम और इंफेक्शन्स के शिकार हो जाते हैं. इन सबसे बचने के लिए आपको अपने डायट (Diet) का ख़ास ध्यान रखना होगा, साथ ही ऐसे सुपर फूड्स (Super Foods) अपने डायट में शामिल करने होंगे, जो आपको अंदर से स्ट्रॉन्ग बनाने के साथ-साथ सेहतमंद (Healthy) भी बनाएं.

डेली डायट टिप्स

–     मौसमी फल, जैसे- संतरा, स्ट्रॉबेरी और आंवला एंटी ऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी के गुणों से भरपूर हैं. इन्हें अपने डेली डायट में शामिल करें.

–     इसी तरह हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, जैसे- पालक, मेथी, सरसों, सोवा और हरी प्याज़ आपकी सेहत के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकती हैं.

–     सर्दियों में हमारी जठराग्नि तेज़ हो जाती है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है. ऐसे में ज्वार, बाजरा, नाचनी जैसे साबूत अनाज के अलावा आप प्रोटीन से भरपूर उड़द दाल, राजमा और बीन्स को अपने रोज़ाना की डायट में शामिल करें.

–     विटामिन सी से भरपूर सिट्रस फ्रूट्स, टमाटर, रेड पेपर और शकरकंद आदि को अपने डेली डायट का हिस्सा बनाएं, ताकि आपकी प्रतिरोधक क्षमता बेहतर बने और एनर्जी लेवल भी बूस्ट हो.

–    ज़िंक आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बनाने में मदद करता है, ऐसे में ज़िंक से भरपूर फल, जैसे- ब्लैक बेरी, अनार, एवोकैडो, अमरूद, पीच, कीवी को डायट में शामिल करें. इसके अलावा काबुली चना, बीन्स, मीट, अंडा आदि भी ज़िंक रिच फूड हैं.

–    साल्मन और कॉड फिश के साथ दूध, चीज़  विटामिन बी 12 के अच्छे स्रोत हैं. ये आपकी इम्यूनिटी को स्ट्रॉन्ग बनाने के साथ-साथ थकान व तनाव से आपको बचाते हैं.

–    आलू और शकरकंद को भूनकर खाना आपके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होगा.

–    सर्दियों में घर का बना ताज़ा और गर्म खाना ही खाएं. पहले से बनाया हुआ या पैक्ड फूड न खाएं.

–     हाइड्रेशन का भी पूरा ख़्याल रखें. पानी के अलावा हर्बल टी, ग्रीन टी, सूप आदि का सेवन करें.

–     अगर सर्द मौसम के कारण मूड अच्छा नहीं लग रहा हो, तो डार्क चॉकलेट खाएं. यह मूड चेंजर है, जिससे आपको अच्छी फीलिंग आएगी.

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विंटर सुपर फूड्स

सर्दियों का मौसम अपने साथ सुपर फूड की बेहतरीन वेरायटी लेकर आता है. फल-सब्ज़ियों के अलावा कुछ और भी खाद्य पदार्थ हैं, जिन्हें आप अपने विंटर डायट में ज़रूर शामिल करें, ताकि सर्दियों का असर आपकी सेहत पर न पड़े. ये आपको गर्म बनाए रखने में मदद करते हैं.

शहद: विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर शहद सर्दियों के लिए बेस्ट रेमेडी है. सर्दी-ज़ुकाम, गले के इंफेक्शन और कई तरह की एलर्जी से यह आपको राहत दिलाता है.

ड्रायफ्रूट्स: दिनभर एनर्जेटिक बने रहने के लिए सुबह-सुबह ड्रायफूट्स से बेहतर भला क्या हो सकता है. विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर बादाम, पिस्ता, अखरोट के अलावा आप मुनक्का, अंजीर और ऐप्रीकोट को भी अपने विंटर डायट में शामिल करें.

कालीमिर्च, मेथी और हींग: यह मौसम ही ऐसा है कि आपको गर्माहट देनेवाली चीज़ें अपने खाने में शामिल करने की ज़रूरत है. रोज़मर्रा के खाने में चाय हो या सूप या फिर दाल- कालीमिर्च, मेथी, हींग, जीरा और राई की मात्रा थोड़ी बढ़ा दें.

तुलसी और अदरक: एंटीबैक्टीरियल, एंटीबायोटिक और एंटीवायरल गुणों से भरपूर तुलसी वैसे तो हर मौसम में आपके लिए ज़रूरी है, पर सर्दियों में सर्दी-ज़ुकाम के कारण इसकी ज़रूरत कुछ ज़्यादा ही बढ़ जाती है. गले की खराश हो या फिर कफ़ की शिकायत- अदरक ठंड के कारण होनेवाली सभी छोटी-मोटी समस्याओं से आपको निजात दिलाता है.

घी: लोगों को बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी है कि घी से फैट बढ़ता है, जबकि रिसर्च में भी यह बात साबित हो चुकी है कि यह आपके शरीर से बैड फैट को कम करता है. यह आपको शेप में बने रहने में मदद करता है. सर्दियों में रोज़ाना एक चम्मच घी ज़रूर खाएं.

गुड़: पाचनशक्ति को बेहतर बनाने के साथ-साथ यह आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मज़बूत बनाता है. साथ ही यह आपको गर्म बनाए रखता है, जिससे कोल्ड और फ्लू की समस्या नहीं होती.

लहसुन: एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल ख़ूबियों के कारण लहसुन सर्दियों में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. यह इस मौसम में होनेवाली बीमारियों से आपको बचाता है.

– अनीता सिंह

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Winter Health Care

सर्दियों में यूं रखें सेहत का ख़्याल (Winter Health Care)

ठंड का मौसम अपने साथ सर्दी-ज़ुकाम और कई तरह की एलर्जी (Allergies) और इंफेक्शन्स (Infections) लेकर आता है. ऐसे में ज़रूरी है कि आप अपना और अपनों का ख़ास ख़्याल रखें, ताकि सर्दियों (Winter) के सुहाने मौसम का लुत्फ़ उठा सकें.

विंटर हेल्थ प्रॉब्लम्स

सर्दी के मौसम में गठिया और अस्थमा के मरीज़ों की द़िक्क़तें काफ़ी बढ़ जाती हैं. किसी को सालभर पुरानी चोट परेशान करने लगती है, तो किसी को मसल पेन. इनके अलावा और

कौन-कौन-सी बीमारियां हैं, जो सर्दियों के मौसम में आपको परेशान कर सकती हैं, आइए जानें.

सर्दी-खांसी

सर्दी-खांसी एक आम समस्या है, लेकिन सर्दी के मौसम में यह आपको काफ़ी परेशान कर सकती है. यह  रोग काफ़ी संक्रामक होता है, इसलिए अगर घर में किसी को सर्दी है, तो वह  छींकते-खांसते व़क्त रुमाल का इस्तेमाल करे. बहती नाक, सीने में जकड़न, छींकें आना, सिरदर्द, गले में खराश और हल्का बुख़ार इसके लक्षण हैं.

होम रेमेडीज़

–    जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है, वे बार-बार सर्दी-ज़ुकाम से परेशान रहते हैं. ऐसे लोगों को, ख़ासतौर से सर्दियों में, आंवले का मुरब्बा खाना चाहिए.

–     आधा टीस्पून शहद में कुछ बूंदें नींबू का रस और चुटकीभर दालचीनी पाउडर मिलाकर दिन में दो बार लें.

–    गुनगुने नींबू पानी में शहद मिलाकर लेने से सर्दी-खांसी से राहत मिलती है.

–     सर्दी-खांसी से राहत पाने के लिए एक कप पानी में थोड़ी-सी अलसी मिलाकर उबालें. पांच मिनट बाद आंच से उतार लें. छानकर उसमें नींबू का रस और शहद मिलाकर पीएं.

–    घी में लहसुन की कुछ कलियां गरम करके खाएं. गरम-गरम लहसुन खाने से खांसी में काफ़ी राहत मिलती है.

–     रात को सोने पर खांसी की समस्या बढ़ जाती है, क्योंकि लेटने पर नाक में मौजूद कफ़ धीरे-धीरे गले तक जाने लगता है, जिससे खांसी बढ़ जाती है. इसके लिए बेहतरीन उपाय है कि आप सिर को थोड़ा ऊंचा रखें. इससे खांसी कम होगी और आप सो भी पाएंगे.

गले में इंफेक्शन

गले में खिचखिच और ड्राईनेस, जो धीरे-धीरे दर्द का कारण बनता है, यह गले के इंफेक्शन के कारण होता है. मौसम में आई ठंडक और इंफेक्शन्स के कारण ऐसा होता है.

होम रेमेडीज़

–    इसके लिए हमारी दादी-नानी का फेवरेट नुस्ख़ा है गरारा करना. गुनगुने पानी में चुटकीभर नमक डालकर गरारा करने से बैक्टीरिया निकल जाते हैं, जिससे गले की खराश से छुटकारा मिलता है. इसे दिन में दो-तीन बार करें.

–     हल्दीवाला दूध भी एक ऐसा ही रामबाण नुस्ख़ा है. यह गले की सूजन और दर्द से राहत दिलाता है. बार-बार होनेवाली खांसी में भी हल्दीवाला दूध काफ़ी राहत पहुंचाता है.

–     एप्पल साइडर विनेगर को आप हर्बल टी या गरारेवाले पानी में डालकर इस्तेमाल करें.

–     लहसुन की एक कली चूसने से भी गले के इंफेक्शन और दर्द से राहत मिलती है.

–     इसके अलावा हर्बल टी और गरमागरम सूप आपके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होगा.

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अस्थमा

यह फेफड़े की बीमारी है, जिसमें श्‍वासनली में जलन और दर्द होने लगता है. सीने में जकड़न, छींकें आना, खांसी और सांस फूलना इसके लक्षण हैं. यह दो तरह का होता है, एलर्जिक और नॉन एलर्जिक. एलर्जिक अस्थमा धूल, धुएं, पेंट आदि के कारण होता है, जबकि नॉन एलर्जिक अस्थमा कोल्ड, फ्लू, स्ट्रेस और ख़राब मौसम के कारण होता है.

होम रेमेडीज़

–    एक कप पानी में आधा टीस्पून मुलहठी पाउडर और आधा टीस्पून अदरक मिलाकर चाय बनाकर पीएं.

–     एक ग्लास दूध में आधा टीस्पून कद्दूकस अदरक और आधा टीस्पून हल्दी पाउडर डालकर दिन में दो बार लें.

–     एक कप उबलते पानी में एक टीस्पून दालचीनी पाउडर और 1/4 टीस्पून कालीमिर्च, पिप्पली और सोंठ का समान मात्रा में मिलाया हुआ चूर्ण मिलाकर 10 मिनट तक उबालें. पीने से पहले एक टीस्पून शहद मिलाएं. यह अस्थमा अटैक्स से काफ़ी राहत देता है.

–    एक बाउल गरम पानी में पांच-छह बूंदें लैवेंडर ऑयल डालकर भाप लें.

इन्फ्लूएंज़ा

सर्दियों के मौसम में सर्दी और फ्लू कभी भी किसी को भी अपनी गिरफ़्त में ले सकते हैं. यह एक ऐसी समस्या है, जिसमें आपकी सारी एनर्जी ख़त्म हो जाती है. नाक बहना, सिरदर्द, बदनदर्द, बुख़ार और थकान फ्लू के आम लक्षण हैं.

–     आधा टीस्पून गिलोय को पीसकर एक कप पानी में उबालकर पीएं. इससे फ्लू के लक्षणों से काफ़ी राहत मिलती है.

–     समान मात्रा में शहद और प्याज़ का रस मिलाकर दिन में तीन बार फ्लू जाने तक लें.

–     एक टीस्पून शहद में 10-12 तुलसी की पत्तियों का रस मिलाकर दिन में एक बार लेने से भी राहत मिलती है.

–     गरम पानी में कुछ बूंदें नीलगिरी तेल की डालकर भाप लेने से काफ़ी राहत मिलेगी.

–    एक कप पानी में कालीमिर्च पाउडर, जीरा और गुड़ डालकर उबालें. यह चाय फ्लू के लक्षणों से राहत दिलाती है. आप चाहें, तो गुड़ में तिल मिलाकर उसके लड्डू बनाकर खाएं.

जोड़ों में दर्द

ठंड के कारण मसल्स और हड्डियों में अकड़न-सूजन के कारण यह मौसम कुछ लोगों के लिए कष्टदायक बन जाता है. इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है कि सोकर उठने पर आप स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करें.

हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ आपको जोड़ों के दर्द से छुटकारा दिला सकती है.

–     आधी बाल्टी गरम पानी में दो कप सेंधा नमक मिलाकर उसमें टॉवेल डुबोकर प्रभावित जोड़ की सिंकाई करें.

–    रोज़ाना सुबह एक टीस्पून मेथी पाउडर फांककर एक ग्लास गुनगुना पानी पीएं.

–     नीलगिरी के तेल से जोड़ों पर मालिश करें. इससे दर्द और जलन दोनों में आराम मिलता है.

–    रात को सोने से पहले गुनगुने सरसों के तेल से जोड़ों पर मसाज करें. यह प्रभावित जोड़ों में रक्तसंचार बढ़ाता है, जिससे दर्द और अकड़न से राहत मिलती है.

–     एक कप गुनगुने पानी में एक टीस्पून एप्पल साइडर विनेगर और थोड़ा-सा शहद मिलाकर दिन में दो बार खाने से पहले लें.

हार्ट प्रॉब्लम्स

आपको जानकर हैरानी होगी कि ठंड में हार्ट अटैक्स के मामले बढ़ जाते हैं, क्योंकि ठंड के कारण हार्ट की कोरोनरी आर्टरीज़ सिकुड़ने लगती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर कम हो जाता है.

–     जिन्हें हार्ट प्रॉब्लम्स हैं, उन्हें ख़ासतौर से सर्दियों में रोज़ाना चार-पांच लहसुन की कलियां खानी चाहिए. यह खून को पतला करने का काम करता है, जिससे ब्लड फ्लो सही तरी़के से होता है.

–     एक ग्लास गुनगुने पानी में आधा टीस्पून अर्जुन की छाल का पाउडर और शहद मिलाकर लें. इससे आपको काफ़ी राहत मिलेगी.

–     अदरक-लहसुन के रस में शहद या गुड़ मिलाकर खाने से भी हार्ट प्रॉब्लम्स में राहत मिलती है.

–     इसके अलावा खानपान का ध्यान रखें. दो बार में हैवी खाने की बजाय चार-पांच बार में थोड़ा-थोड़ा खाएं. अपने वज़न को नियंत्रित रखें. अगर वज़न अचानक से बढ़ने लगे, तो डॉक्टर को बताएं.

– सुनीता सिंह

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स्वस्थ व सेहतमंद बने रहने के लिए सुबह से शाम तक आपकी जीवनशैली भी बहुत मायने रखती है. सुबह से लेकर शाम तक की सभी गतिविधियां अगर योग के अनुसार हों, तो आप हमेशा चुस्त-दुरुस्त और तंदुरुस्त रहेंगे.

International Yoga Day
सुबह की सही शुरुआत

– योग के अनुसार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना लाभदायक होता है, लेकिन अगर आप 5.30 बजे तक भी उठें, तो ठीक रहेगा.
– उठने के बाद 2 ग्लास पानी पीएं. पानी रात को तांबे के बर्तन में भरकर रख दें और सुबह उठकर पीएं. पानी खड़े होकर नहीं पीना चाहिए. बैठकर पीएं, उकड़ू बैठकर पीना और भी फ़ायदेमंद होता है. वज़न ज़्यादा है, तो गर्म पानी पीएं.
– पानी पीकर फ्रेश हो जाएं और एक घंटे तक योग व प्राणायाम करें. चाहें तो, मॉर्निंग वॉक पर भी जा सकते हैं.
– नहा-धोकर तैयार हो जाएं. ईश्‍वर का ध्यान करें और अपने सफल दिन की सही शुरुआत के लिए प्रार्थना करें.
– 7.30-8 बजे तक नाश्ता करें. नाश्ते में फल, पोहा, उपमा, दलिया, ओट्स, दूध जैसी पौष्टिक चीज़ों को शामिल करें.
– उसके बाद दिनभर के कामों की लिस्ट बना लें. जैसे-जैसे आपके काम ख़त्म होते जाएं, उन्हें टिक कर दें और बचे हुए कामों को अगले दिन की लिस्ट में शामिल कर लें.

दोपहर को दुरुस्त बनाएं

– अगर आप ऑफिस में काम करते हैं, तो लंच टाइम में खाना खाएं और खाने में सलाद ज़रूर शामिल करें.
– खाने को ख़ूब चबा-चबाकर खाएं और खाने के आधे घंटे बाद ही पानी पीएं. खाते समय भी पानी नहीं पीना चाहिए.
– ऑफिस में दो घंटे से ज़्यादा लगातार सीट पर न बैठें. ऑफिस के छोटे-छोटे काम, मसलन- पानी की बॉटल भरकर लाना, चाय-कॉफी लेना, प्रिंटर से प्रिंटआउट लाना आदि ख़ुद ही करें.
– खाने के बाद अगर आपके पास फ्री टाइम है, तो थोड़ी देर टहलें.
– घर पर हैं, तो बाकी काम निपटाकर थोड़ा रिलैक्स हो जाएं. खाना खाकर अपनी पसंद का कुछ काम कर सकते हैं. काम ख़त्म कर रात – खाने की तैयारी कर लें.

शाम हो सुकूनभरी

– ऑफिस में हैं, तो 4 बजे के क़रीब सीट पर बैठे-बैठे बॉडी स्ट्रेचिंग करें. इससे आप रिलैक्स और फ्रेश महसूस करेंगे.
– शाम की भूख मिटाने के लिए भुने हुए चने, मूंगफली, कुरमुरा, भेल, फल, चाय-बिस्किट आदि लें. पकौड़े और वड़े-समोसे से दूर रहें.
– दिनभर में कम से कम 10-12 गिलास पानी पीएं.
– ऑफिस से लौटकर थोड़ी देर रिलैक्स करें.
– 7 बजे थोड़ा ध्यान करना आपके लिए फ़ायदेमंद साबित होगा. 20 मिनट तक ध्यान करें. दिनभर की सारी थकान, तनाव और निगेटिविटी दूर हो जाएगी.

ताकि न हो रतजगा

– रात 8 बजे तक खाना खा लें. रात का भोजन बहुत हल्का होना चाहिए.
– रात का भोजन टीवी देखते हुए या बातचीच करते हुए न लें. खाना खाते व़क्त बातें न करें, स़िर्फ खाने पर ध्यान दें, इससे खाना जल्दी व अच्छी तरह पचता है. ओवरईटिंग से बचें.
– रात के खाने और सोने के बीच कम से कम 2 घंटे का अंतर ज़रूर होना चाहिए और खाने के थोड़ी देर बाद 15 मिनट तक हल्की वॉक करनी चाहिए.
– खाने के बाद ज़रूरी काम निपटा लें. सोने में जब तक समय है, तब तक आप बच्चों के होमवर्क देख सकते हैं, उनके साथ खेल सकते हैं या फिर गप्पे मार सकते हैं.
– अपने लिए थोड़ा समय निकालकर म्यूज़िक सुनें या कोई अच्छी क़िताब पढ़ें.
– रात 10 से 10.30 बजे तक सो जाएं. सोने से पहले पूरे दिन का विश्‍लेषण कर लें. अगर कोई काम अधूरा रह गया हो, तो उसे अगले दिन की लिस्ट में शामिल कर लें.
– रोज़ाना 6-8 घंटे सोएं. ऐसा कहा जाता है कि रात 10 बजे से 2 बजे तक का समय नींद के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. इन चार घंटों की नींद बाकी समय के आठ घंटों के बराबर है. ऐसे में देर से सोने का मतलब है नींद की क्वॉलिटी के साथ समझौता करना. और हां, दिन में सोने से बचें.

 

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– सत्येंद्र सिंह