health benefits

सर्दियों में ठंड के कारण खाने-पीने की इच्छा पूरी तरह से बदल जाती है. इस मौसम में लोग गर्म और मौसमी चीज़ों पर ज़्यादा ध्‍यान देते हैं. विंटर में एक और चीज़ है, जो लोग खाना पसंद करते हैं, वो है गजक. सर्दियों में हर कोई गजक को बड़े चाव से खाना पसंद करता है. स्वाद और मिठास के अलावा गजक में सेहत के कई राज़ भी छिपे हुए हैं. सर्दियों में गजक के सेवन से कई तरह की समस्याओं से निजात मिलती है. आइए जानते हैं इससे होनेवाले फ़ायदों के बारे में.

गजक के तिल और गुड़ में मौजूद कैल्शियम हड्डियां मज़बूत करती हैं. गुड़ में कैल्शियम, फास्फोरस और आयरन बहुत ज़्यादा मात्रा में होता है. इसे खाने से हड्डियां मज़बूत होती हैं. गुड़ आपके शरीर को साफ़ करने में मदद करता है, जिससे आपकी त्वचा पर भी निखार आता है. डॉक्टर्स भी सर्दी में एक बार खाने के बाद बीस ग्राम गुड़ की गजक नियमित खाने की सलाह देते हैं.

गजक आर्थराइटिस जैसी बीमारी से भी बचाता है. इसका कारण यह है कि इसमें तिल और मूंगफली पर्याप्त मात्रा मे होती है.

गजक मे तिल होता है और इसमें सीसामोलिन पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर को सामान्य करता है और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर करता है.

गजक का तिल, मूंगफली और गुड़ लिवर को हेल्दी और फिट रखता है.


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फाइबर से भरपूर गजक पेट की तकलीफ़ दूर करते हैं.

गजक में जिंक, सेलेनियम जैसे मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो बुढ़ापे की प्रोसेस को स्लो करने में सहायक हैं.

आयरन का सबसे शानदार स्रोत है गजक. शरीर में लौह तत्व बनता है. इसके सेवन से एनीमिया की बीमारी भी दूर होती है.

गजक में मौजूद तिल, मूंगफली, मेवे, इलायची आदि सर्द मौसम में शरीर को गर्म रखते हैं.

तिल और गुड़ शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर सर्दी-ज़ुकाम जैसी बीमारियों से बचाता है.

गजक खाने से कमज़ोरी दूर होती है, शरीर में ऊर्जा पैदा होती है और एनर्जी लेवल भी बढ़ जाता है.

– पूनम पांडे

Gajak


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महिलाएं अजवाइन का उपयोग रसोई के मसाले के रूप में करती हैं. अजवाइन भोजन को स्वादिष्ट तो बनाती ही है, साथ ही साथ तमाम स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी राहत पहुंचाती है. अजवाइन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद मानी जाती है.
अगर खाली पेट अजवाइन का पानी पिया जाए, तो पेट की चर्बी कम होती है. अजवाइन के पानी के साथ-साथ, लाइफस्टाइल में थोड़ा बदलाव और डायट के साथ कुछ घरेलू उपचार किया जाए, तो वज़न को नियंत्रण में किया जा सकता है.
इसके अलावा डायबिटीज़, कब्ज़, पेट की गैस, डायरिया और अस्थमा जैसी बीमारियों में अजवाइन दवा का काम करती है. इससे साफ़ पता चलता है कि अजवाइन में औषधीय गुण भी होते हैं. अजवाइन में प्रोटीन, फैट, खनिज पदार्थ, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्व रहते है. इसके अलावा उसमें कैल्शियम, थायामिन, राइबोफ्लेविन, आयरन, फास्फोरस और नियासिन भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं.

Ajwain

अपच
अगर आप पेट की गैस की समस्या से पीड़ित हैं, तो अजवाइन के पानी से आप को लाभ मिलेगा. अजवाइन के पानी से गैस, अपच और पेट संबंधी तमाम समस्याओं से निजात मिलने में मदद मिलती है. अजवाइन में स्पास्मोडिक और कार्मेनेटिव के गुण होते हैं.

कोलेस्ट्रॉल
अजवाइन के बीज में एंटी-हाइपर लिपिडेमिक के गुण होते हैं, जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल-कोलेस्ट्रॉल, ट्राईग्लिसराइड्स और टोटल लिपिड को कम करने में मदद करता है.


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दांत दर्द में राहत
अजवाइन का पानी दांत दर्द में राहत पहुंचाता है. अजवाइन में स्थित एंटी बैक्टीरियल गुणों के कारण यह ओरल बैक्टीरिया से बचाने में मदद करता है. अजवाइन का पानी दांत दर्द में बहुत लाभकारी है.

चर्बी घटाता है
शरीर में चर्बी बढ़ने से शरीर का वज़न बढ़ जाता है. मोटापे के नियंत्रण के लिए भी अजवाइन के पानी का उपयोग किया जा सकता है.

प्रेग्नेंसी के दौरान भी लाभकारी
ज़्यादातर गर्भवती महिलाओं के आहार में अजवाइन का समावेश किया जाता है. गर्भावस्था के दौरान अक्सर कब्ज़, गैस जैसी पेट संबंधी अन्य समस्याएं बनी रहती हैं. अजवाइन का पानी पीने से इन सभी समस्याओं से राहत मिलती है.

सर्दी में राहत पहुंचाता है
अजवाइन का पानी एक प्राकृतिक सर्दी-ज़ुकाम की दवा है, जो सर्दी के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है. इसके लिए अजवाइन को पीस कर एक ग्लास पानी में मिला कर पीने से राहत मिलती है. इसके अलावा अजवाइन का पेस्ट मुंहासे, फुंसी और एक्जिमा के कारण होने ववाली त्वचा की खुजली, सूजन को कम करने में बहुत उपयोगी है.


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मासिक के दौरान
अजवाइन महिलाओं के मासिक चक्र को नियंत्रण में रखने के लिए दवा के रूप में काम करता है. इसके लिए रात के समय मिट्टी के बर्तन में अजवाइन के बीज को भिगोकर सुबह उसका पानी पीने से महिलाओं का मासिक चक्र नियंत्रण में रहता है. इसके अलावा पीरियड्स के समय होनेवाले पेटदर्द में भी अजवाइन बहुत कारगर है.

Ajwain water

किस तरह बनाएं अजवाइन का पानी
एक ग्लास पानी में एक चम्मच अजवाइन डाल कर रात को रख दें. सुबह उसे छानकर पी लें. अगर खाली पेट अजवाइन का पानी पिएंगे, तो अच्छा रहेगा. अगर अजवाइन का पानी पीने में कड़वा लगे, तो उसमें शहद या नींबू मिला लें.

स्नेहा सिंह


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गिलोय की पत्त‍ियां पान के पत्ते की तरह होती हैं. इसकी पत्त‍ियों में प्रोटीन, कैल्शियम और फॉस्फोरस भरपूर मात्रा में होता है. ये पत्ते स्वाद में कसैले, कड़वे व तीखे होते हैं. वात, कफ़ और पित्त की समस्या को गिलोय के इस्तेमाल से ठीक किया जा सकता है. गिलोय पचने में आसान होने के साथ भूख भी बढ़ाता है. ये नुक़सानदायक बैक्टीरिया से लेकर पेट के कीड़ों तक को मार देती है. साथ ही टीबी की बीमारी में बननेवाले जीवाणु को बढ़ने से भी रोकती है. आंत व यूरीन सिस्टम के साथ-साथ पूरे शरीर को प्रभावित करनेवाले रोगाणुओं को भी दूर करती है. गिलोय डायबिटीज़, पीलिया, बुखार, उलटी, सूखी खांसी, हिचकी, बवासीर आदि बीमारियों में फ़ायदेमंद है.

Health Benefits of Giloy

घरेलू नुस्ख़े

  • गिलोय की पत्तियों को पानी में उबालकर पीने से इम्यूनिटी बढ़ती है. साथ ही इसकी पत्तियों को अन्य फलों के साथ जूस में मिलाकर भी पी सकते हैं.
  • गिलोय के 10-20 मि. ली. जूस के साथ गुड़ का सेवन करने से कब्ज़ की समस्या दूर होती है.
  • हिचकी हो रही हो, तो गिलोय व सोंठ के चूर्ण को मिक्स कर लें और इसे सूंघे. इसके अलावा गिलोय व सोंठ के चूर्ण की चटनी बनाकर इसे दूध में मिलाकर पिलाने से भी हिचकी आना बंद हो जाता है.
  • एनीमिया की समस्या हो तो गिलोय में घी और शहद मिलाकर लेने से खून की कमी दूर होती है.
  • गिलोय के तने को पानी में घिसकर गुनगुना कर कान में 2-2 बूंद दिन में दो बार डालने से कान की गंदगी निकल जाती है.
  • एसिडिटी के कारण उलटी हो, तो 10 मि. ली. गिलोय रस में 4-6 ग्राम मिश्री मिला लें. इसे सुबह- शाम पीने से उलटी बंद हो जाती है.
  • हरड़, गिलोय तथा धनिया को समान मात्रा में लेकर आधा लीटर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें. इसमें गुड़ डालकर सुबह-शाम पीने से पाइल्स की प्रॉब्लम दूर होती है.


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  • गिलोय के 10-20 पत्तों को पीसकर एक ग्लास छाछ में मिलाकर छानकर सुबह के समय पीने से पीलिया ठीक होता है.
  • 10 मि. ली. गिलोय के रस को पीने से डायबिटीज़, वात विकार के कारण होनेवाली बुखार व टायफायड में लाभ होता है.
  • गिलोय के 5-10 मि. ली. रस या 20-30 मि. ली. काढ़ा रोज़ कुछ समय तक सेवन करने से गठिया में लाभ होता है. इसके अलावा सोंठ के साथ सेवन करने से जोड़ों का दर्द मिटता है.
  • 40 ग्राम गिलोय को अच्छी तरह मसलकर मिट्टी के बर्तन में रखें. फिर इसे पाव लीटर पानी मिलाकर रातभर ढककर रख लें. सुबह मसल लें और छानकर 20 मि. ली. की मात्रा में दिन में तीन बार पीने से पुराना बुखार ठीक हो जाता है.
  • 20 मि. ली. गिलोय के रस में एक ग्राम पिप्पली और एक चम्मच शहद मिला लें. इसे सुबह-शाम सेवन करने से पुराना बुखार, कफ़, खांसी, अरुचि आदि परेशानी दूर होती है.
  • ब्लड कैंसर के मरीज़ों पर गेहूं के ज्वारे के साथ गिलोय का रस मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है.
  • अडूसा छाल और गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर आधा लीटर पानी में पकाकर काढ़ा बनाएं. ठंडा होने पर 10-30 मि. ली. काढ़े में शहद मिलाकर पीने से बदहजमी, सूजन, सूखी खांसी, सांस तेज चलना, बुखार आदि परेशानी दूर होती है.
  • गिलोय के 10-20 मि. ली. रस के साथ गुड़ और मिश्री के साथ सेवन करने से एसिडिटी में लाभ होता है.


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  • 10-20 मि. ली. गिलोय के रस को दिन में दो-तीन बार कुछ महीनों तक नियमित रूप से पिलाने से कुष्ठ यानी लिप्रोसी बीमारी में फ़ायदा होता है.
  • 10 मि. ली. गिलोय के रस में 1-1 ग्राम शहद व सेंधा नमक मिक्स करके आंखों में लगाने से आंखों के आगे अंधेरा छाना, चुभन, काला व सफ़ेद मोतियाबिंद ठीक हो जाता है.

सुपर टिप
कफ़ की तकलीफ़ में गिलोय को शहद के साथ लें.

ऊषा गुप्ता


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हल्दी ही एक ऐसी जड़ है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं, इसलिए इसे हेल्दी हल्दी नाम दिया गया है. आइए, इसके गुणकारी फ़ायदों के बारे में जानते हैं.

हल्दी बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
हल्दी एक ऐसी संजीवनी है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उसे बीमारियों से दूर रखती है. इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं. यह खून को साफ़ करती है. बैक्टीरिया से लड़ती है. लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल भी हल्दी के बहुत सारे कामों में से एक है. ये दोनों ही अंग खून को साफ़ करने का काम करते हैं.

ठीक करती है बुखार
अगर किसी को बार-बार बुखार आता है, तो उसे गुनगुने पानी में हल्दी डालकर उसका घूंट- घूंट सेवन करना चाहिए. हल्दी निमोनिया, टायफाइड आदि हर तरह के बुखार से लड़ने में मदद करती है. इसलिए डेंगू के मरीज़ों को भी हल्दी के सेवन की सलाह दी जाती है. डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आनेवाले बुखार से भी हल्दी छुटकारा दिलाती है.

हल्दी के फ़ायदे डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए
हल्दी एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है. इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिसका फ़ायदा टाइप टू डायबिटीज़ के मरीज़ों को होता है.

पाचन शक्ति बढ़ाती है
यह पाचन तंत्र के सारे कामों को भली-भांति संचालित करती है और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद करती है. इससे व्यक्ति कब्ज़ और पेट की दूसरी गड़बड़ियों से बचा रहता है.

Benefits Of Turmeric

कम करती है स्ट्रेस
गलाकाट प्रतिस्पर्धा के इस दौर में तनाव या स्ट्रेस एक बड़ी समस्या बन चुका है. हल्दी एडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता के स्तर को कम करती है. इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है, बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरूस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है.


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अस्थमा में भी फ़ायदेमंद
मौसम के परिवर्तन पर ख़ासकर सर्दियों में अस्थमा के मरीज़ों को काफ़ी परेशानी होती है. ऐसे में अस्थमा के मरीज़ों को नियमित रूप से गर्म दूध में हल्दी मिलाकर पीना चाहिए. इससे उन्हें काफ़ी आराम मिलेगा.

गठिया में मिलेगा आराम
गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है. हल्दी पाउडर में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फ़ायदा पहुंचाती है

अगर हो गया हो एनीमिया, तो करिए हल्दी का सेवन
भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीड़ित रहती हैं. इससे उन्हें हर वक़्त थकान और कमज़ोरी महसूस होती है. हल्दी के नियमित सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है.

कम होगी पेट की चर्बी
हल्दी शरीर के उपापचय (मेटाबॉलिज़्म) को ठीक करती है, सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है. ऐसा होने से पेट के आस-पास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वज़न कम होता है.

ख़ूबसूरती बढ़ाती है
हल्दी न केवल सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद है, बल्कि यह त्वचा और बालों पर भी चमत्कारी रूप से असर करती है. हल्दी को उबटन की तरह इस्तेमाल करने से चेहरे पर ग्लो आता है.

जवां रखती है हल्दी
हल्दी में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं. इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं, जिसकी कामना हर किसी को होती है. अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं तो घाव बहुत जल्दी भरते हैं. त्वचा पर लगाने के लिए हल्दी का पेस्ट बनाएं. इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है.


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बालों की समस्या भी होगी दूर
अगर आप बालों में ड्रैंडफ, बाल झड़ने या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो हल्दी पानी के सेवन से आपकी ये समस्याएं भी दूर हो जाएंगी.

दांतों की मज़बूती
दो चुटकी हल्दी और नमक दांतों पर रगड़ने से मसूड़े स्वस्थ और दांत मज़बूत होते हैं. हल्दी एक प्राकृतिक रक्त शोधक है. इसके अनेक गुण हैं.

साइड इफेक्ट्स का रखें ध्यान
वैसे तो हल्दी को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के कोई गंभीर दुष्परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं, लेकिन चूंकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है. इसलिए इस बात पर नज़र रखें कि ब्लड शुगर ज़रूरत से ज़्यादा कम न हो जाए. दो साल से छोटे बच्चों को भी बिना डाॅक्टर की सलाह हल्दी दूध न दें. अपने घर में बड़े गमले या आंगन में जहां भी उचित स्थान हो हल्दी की जड़ अवश्य लगाएं. यह बहु उपयोगी वनस्पति ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद का अमृत और ईश्वरीय वरदान है.

पूनम पांडे

Benefits Of Turmeric

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ॐ तीन अक्षरों से बना है, पहला अ, जिसका मतलब हैउत्पन्न होना, दूसरा उ, जिसका मतलब है विकास और तीसरा हैम, जिसका अर्थ है मौन यानी ब्रह्म में विलीन हो जाना. ॐ अस्तित्व की आवाज़ कही जाती है और इसके कई हेल्थ बेनीफिट्स भी हैं, आइए आपको ॐ के उच्चारण से होनवाले हेल्थ बेनिफिट्स के बारे में बताते हैं…

– शरीर के टॉक्सिन्स निकल जाते हैं.

– वोकल कॉर्ड और गले की मांसपेशियों को मज़बूती मिलती है.ख़ासतौर से बढ़ती उम्र में यह और भी फ़ायदेमंद है.

– ॐ के नियमित उच्चारण से जो कंपन पैदा होता है, उसकाअसर वोकल कॉर्ड और साइनस पर भी पड़ता है.

– यह रक्तचाप को नियंत्रित करता है. पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. 

– थकान को मिटाने का बेहतरीन उपाय है कि कुछ देर ॐ का उच्चारण किया जाए.

Health Benefits Of Chanting Om

– कुछ लोगों के निजी अनुभव तो यह भी कहते हैं कि ॐ के जपसे उनका वज़न भी नियंत्रित रहता है, क्योंकि इसके वाइब्रेशन्स पूरे शरीर को प्रभावित करते हैं और बढ़ते वज़न को कम करते हैं.

– थायरॉइड नियंत्रित रहता है.

– यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है, 

– थकान दूर करके एनर्जी देता है, विशेष प्रकारके प्राणायाम के साथ इसका जाप करने से यह फेफड़ों को मज़बूत बनाता है, इससे नींद अच्छी आती है, 

– हड्डियां मज़बूत होती हैं, क्योंकि इसकी फ्रीक्वेंसी शरीर में विशेष प्रकार का कंपन्न पैदा करती है. इसके अलावा यह मानसिक शांति प्रदान करता है, 

यही वजह है मंत्रों में ॐ का इतना महत्व है. कई तरह के क्लिनिकल रिसर्च से भी यह पता चलता है कि ॐ के जाप से मस्तिष्क वशरीर में जो वाइब्रेशन होता है, उसका प्रभाव काफ़ी सकारात्मक होता है.

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जामुन को सबसे अधिक मधुमेह यानी डायबिटीज़ को कंट्रोल करने के लिए जाना जाता है. जामुन में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेड प्रचुर मात्रा होता है, इस कारण ये बच्चों की सेहत के लिए भी काफ़ी अच्छा है. जामुन पाचन क्रिया को ठीक रखने, दांत, आंख, पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने के साथ-साथ किडनी स्टोन के लिए भी बेहद फ़ायदेमंद है.

घरेलू नुस्ख़े

  • डायबिटीज़ वाले जामुन की 100 ग्राम जड़ को साफ़ करके उसे 250 मि. ली. पानी में पीस लें. इसमें 20 ग्राम मिश्री डालकर सुबह-शाम भोजन से पहले पीएं. 300-500 मि. ग्रा. जामुन के बीज को सूखाकर उसका चूर्ण बनाकर दिनभर में तीन बार लेने से भी डायबिटीज़ फ़ायदा होता है. या फिर 250 ग्राम जामुन के पके हुए फलों को 500 मि. ली. उबलते हुए पानी में डालें. कुछ देर उबलने के बाद ठंडा करके मसलकर कपड़े से छान लें. इस जूस को हर रोज़ तीन बार पीएं.
  • बार-बार उल्टी होने पर आम व जामुन के पत्तों को 20-20 ग्राम की मात्रा में लें. इसे 400 मि. ली. पानी में उबालें. जब एक चौथाई बच जाए, तब इसे ठंडा करके पीएं.
Black Plum
  • अगर गले की कोई बीमारी है, तो हर रोज़ 10-15 मि. ली. जामुन का रस पीएं. साथ ही जामुन के पेड़ की छाल का चूर्ण बनाकर शहद मिलाकर लेने से भी गले के दर्द में लाभ मिलता है.
  • लिवर में सूजन है, तो 10 मि. ली. जामुन की गुठली का रस लें. अगर जामुन का सिरका भी हर रोज़ 10 मि. ली. सेवन करें, तो लिवर के बढ़ने के विकार में फ़ायदा होता है.
  • आंखें दुखती हैं या फिर आंखों से जुड़ी कोई समस्या है, तो 15-20 जामुन के पत्तों को 400 मि. ली. पानी में उबाल लें. जब वह एक चौथाई बच जाए, तब इससे आंखों को धोएं.


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  • पथरी या किडनी स्टोन की तकलीफ़ में जामुन रामबाण इलाज है. पके हुए जामुन को खाने से पथरी गल कर निकल जाती है. साथ ही 10 मि. ली. जामुन के रस में सेंधा नमक मिलाकर प्रतिदिन 2-3 बार पीने से मूत्राशय में रहनेवाली पथरी भी टूटकर बाहर निकल जाती है.
  • मोतियाबिन्द में जामुन की गुठली के चूर्ण को शहद में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें. रोज़ सुबह-शाम दो गोली खाएं. इन्हीं गोलियों में थोड़ा शहद मिलाकर काजल की तरह आंखों में लगाएं, इससे भी लाभ होगा.
  • कान से पस निकलने पर जामुन की गुठली को शहद में अच्छी तरह से डुबोकर कान में एक दो बूंद डालें.
  • पायरिया या दांत संबंधी किसी समस्या में जामुन के पत्तों की राख बनाकर मंजन की तरह रगड़ें. इसके अलावा जामुन के पके हुए फलों के रस को मुंह में भरकर अच्छी तरह हिलाकर कुल्ला करने से भी पायरिया की समस्या दूर होती है.
  • डायरिया में भी जामुन फ़ायदेमंद है. जामुन के पत्तों का रस बनाकर 100 मि. ली. बकरी के दूध 5-10 मि. ली. की मात्रा में मिलाकर पीएं.
  • गठिया के दर्द को कम करने के लिए जामुन की जड़ को उबालकर पीस लें. इसे जोड़ों पर रगड़ने से दर्द में लाभ मिलता है.
  • पेचिश में जामुन की छाल का 10 मि. ली. जूस निकालकर 10 मि. ली. बकरी के दूध के साथ सेवन करें. इसके अलावा जामुन के पेड़ की छाल का चूर्ण बनाकर उसमें दो चम्मच शहद मिलाएं. इसे पाव लीटर दूध के साथ लें. यदि जामुन के पेड़ की छाल को 500 मि. ली. पानी में पकाकर जब एक चौथाई रह जाए, तब उसे पीएं. इससे भी पेचिश में फ़ायदा होता है.
  • बवासीर या पाइल्स होने पर जामुन के 20 मि. ली. जूस में शक्कर मिलाकर दिन में तीन बार लें.
  • पीलिया होने पर 10-15 मि. ली. जामुन के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पीएं. इससे पीलिया के अलावा खून की कमी व रक्त-विकार में भी फ़ायदा होता है.
  • सिफलिस रोग में प्रभावित हिस्से में जामुन के पत्तों से पकाया हुआ तेल लगाएं.

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  • त्वचा के विकारों, जैसे- दाद, खुजली में जामुन के रस को लगाने से आराम मिलता है.
  • घाव होने जामुन के पेड़ की छाल को बारीक़ पीसकर घाव पर छिड़कने से घाव तुरंत भर जाता है या फिर जामुन के तने को उबालकर काढ़ा बना लें. इससे घाव को धोने से भी घाव जल्दी ठीक होते हैं.
  • जूतों के कारण पैर में ज़ख़्म हो जाए, तो जामुन की गुठली को पानी में पीसकर लगाएं.
  • जामुन के 8-10 पत्तों को पीसकर लेप करने से आग से जला बना सफ़ेद दाग़ मिट जाता है.

सुपर टीप
मुंह में छाले होने पर जामुन के पत्तों के रस से कुल्ला करने से फ़ायदा होता है.

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एलोवेरा में विटामिन ए, सी और ई प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. इसमें फॉलिक एसिड, कोलीन, बी1, बी2, बी3 व बी6 भी होता है. इसे घृतकुमारी और ग्वारपाठा भी कहा जाता है. एलोवेरा की पत्तियों में पाए जानेवाले जेल में 99% पानी होता है. औषधीय गुणों से भरपूर एलोवेरा कई बीमारियों से लड़ने में मदद करता है. एलोवेरा में कई ऐसे गुण भी होते हैं, जो त्वचा को हेल्दी और शाइनिंग बनाते हैं. दाग़-धब्बों, त्वचा, बालों, पाचन, डायबिटीज़, पेट की बीमारियों, जोड़े के दर्द, आंखों आदि समस्या में एलोवेरा का इस्तेमाल बेहद फ़ायदेमंद साबित होता है.

घरेलू नुस्ख़े

  • अपच की समस्या में 10-20 ग्राम एलोवेरा के जड़ को उबाल लें. इसे छानकर इसमें भुनी हुई हींग मिला लें. इसे पीने से पेटदर्द में आराम मिलता है और बदहजमी की तकलीफ़ भी दूर होती है.
  • खांसी-ज़ुकाम में एलोवेरा का भस्म तैयार कर पांच ग्राम की मात्रा में मुनक्का के साथ सुबह-शाम सेवन करें. इससे पुरानी खांसी-ज़ुकाम में भी लाभ होता है.
  • पीलिया में 10-20 मि.ग्रा. एलोवेरा के रस को दिन में दो-तीन बार पीने से फ़ायदा होता है.
  • सिरदर्द होने पर एलोवेरा पल्प में थोड़ी मात्रा में दारु हल्‍दी का चूर्ण मिला लें. इसे गर्म करके दर्दवाले स्‍थान पर बांधें. इससे वात और कफ़ से होनेवाले सिरदर्द में लाभ होता है.
  • बुखार हो, तो एलोवेरा की जड़ का काढ़ा बनाएं. 10-20 मि. ग्रा. काढ़े को दिन में तीन बार पिलाने से बुखार ठीक होता है.


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  • एलोवेरा के कोमल गूदे को नियमित रूप से 10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से गठिया में लाभ होता है.
  • यदि आप कमरदर्द की तकलीफ़ से परेशान हैं, तो एलोवेरा का लड्डू खाएं. इसके लिए गेंहू का आटा, घी और एलोवेरा के पल्प लेकर गूंथ लें. इससे रोटी बनाएं. फिर इसका चूर्ण बनाकर लड्डू बना लें. हर रोज़ एक-दो लड्डू खाने से कमरदर्द ठीक होता है.
  • एलोवेरा का गूदा आंखों में लगाने से आंखों की लालिमा और गर्मी दूर होती है. यह आंखों की सूजन और वायरल कंजंक्टिवाइटिस में भी लाभदायक है. साथ ही इसके गूदे पर हल्दी डालकर थोड़ा गर्म करके आंखों पर बांधने से आंखों का दर्द दूर होता है.
  • यदि बवासीर की समस्या है, तो 50 ग्राम एलोवेरा के पल्प में 2 ग्राम पिसा हुआ गेरू मिलाएं. इसे रूई के फाहे पर फैलाकर गुदा स्थान पर बांध दें. इससे मस्सों में होनेवाली जलन और दर्द में आराम मिलता है.
  • कान में दर्द हो तो एलोवेरा के रस को हल्का गर्म करके जिस कान में दर्द हो रहा है, उसके दूसरी तरफ़ के कान में दो-दो बूंद टपकाने से कान के दर्द में आराम मिलता है.


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  • एलोवेरा के रस को तिल व कांजी के साथ पकाकर घाव पर लेप करने से लाभ होता है.
  • 6 ग्राम एलोवेरा का पल्प, 6 ग्राम गाय का घी, 1 ग्राम हरड़ चूर्ण और 1 ग्राम सेंधा नमक लेकर मिक्स कर लें. इसे सुबह-शाम खाने से वात विकार से होनेवाले गैस की समस्या दूर हो जाती है.
  • एलोवेरा के पत्ते को एक ओर से छीलकर उस पर थोड़ा-सा हरड़ का चूर्ण डालकर हल्का गर्म कर लें. इसे गांठों पर बांधने से गांठों की सूजन दूर होती है.
  • चेचक से होनेवाले घावों पर एलोवेरा के गूदे का लेप करने से लाभ होता है.
  • दो भाग एलोवेरा के पत्तों का रस और एक भाग शहद लेकर उसे चीनी मिट्टी के बर्तन में एक हफ़्ते रखने के बाद सेवन करने पर लीवर से संबंधित बीमारियों में लाभ होता है.

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  • 5-10 ग्राम एलोवेरा जेल में शक्कर मिलाकर खाने से पेशाब में दर्द और जलन से आराम मिलता है.
  • चेहरे पर चकत्ते या फिर खुजली-जलन को दूर करने में भी एलोवेरा फ़ायदेमंद है. इसके लिए रात के समय प्रभावित जगह पर एलोवेरा लगाकर उसे छोड़ दें. फिर सुबह धो लें.
  • एलोवेरा के गूदे को पेट के ऊपर बांधने से पेट की गांठ बैठ जाती है. इससे आंतों में जमा हुआ मल भी सरलता से बाहर निकल जाता है.
  • एलोवेरा को स्क्रब के तौर पर भी इस्तेमाल कर चेहरे पर रौनक और ताज़गी ला सकते हैं. एलोवेरा जेल में ग्राउंड ओटमील मिला लें. ख़राब होने से बचाने के लिए उसमें चुटकीभर बेकिंग सोडा मिला लें. फिर रोज़ाना इससे अपने चेहरे पर स्क्रब करें. इससे चेहरे की रंगत निखर आएगी.

सुपर टिप

  • एलोवेरा के पल्प को आग से जले स्थान पर लगाने से जलन शांत होती है और फफोले भी नहीं उठते.

– ऊषा गुप्ता

मक्का, कॉर्न कहे या भुट्टा स्वाद के साथ-साथ हमारे सेहत के लिए भी काफ़ी फ़ायदेमंद है. आयुर्वेद के अनुसार, यह पित्तनाशक है. इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि पकाने के बाद इसकी पौष्टिकता और भी बढ़ जाती है. पके हुए भुट्टे में कैरोटीनायड होता है, जो विटामिन ए का अच्छा स्रोत है. यह कैंसर से लड़ने में भी मदद करता है. पके हुए भुट्टे में फोलिक एसिड होता है, जो कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने में सहायता करता है. कच्चा मक्का मूत्र संबंधी बीमारियों में दवा की तरह काम करता है. साथ ही पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है. कॉर्न में मिनरल्स व विटामिन प्रचुर मात्रा में होते हैं. यह एक बेहतरीन कोलेस्ट्रॉल फाइटर माना जाता है, जो दिल के मरीज़ों के लिए बेहद फ़ायदेमंद है.

घरेलू नुस्ख़े

  • किडनी में पथरी हो, तो एक ग्लास पानी में 65 मि. ग्रा. मक्के की भस्म को मिलाकर लें.
  • यदि यूरिन के समय दर्द हो, तो मक्के का काढ़ा बनाकर इसे 15-20 मि. ली. मात्रा में लेने से आराम मिलता है.
  • टीबी के मरीज़ों के लिए कॉर्न लाभदायक है. उन्हें रोज़ मक्के की रोटी खानी चाहिए. इससे टीबी के इलाज में फ़ायदा होता है.
  • ताज़ा भुट्टे को पानी में उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन व गुर्दों की कमज़ोरी दूर होती है.
  • यदि मौसम के बदलाव के कारण खांसी से परेशान है, तो भुने मक्के का सेवन करें. खांसी में राहत मिलेगी.

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  • मक्के के बाल (सिल्क) यानी रेशे का उपयोग पथरी की समस्या को दूर करता है. रातभर बाल को पानी में भिगोकर रख दें. सुबह इस पानी को छानकर पी लें. इसके अलावा बाल को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पीने से भी लाभ होगा.
  • भुट्टे के कोमल बाल दर्द कम करनेवाला और मूत्र को बढ़ानेवाला भी होता है. साथ ही पथरी के अलावा सूजाक या गोनोरिया और सूजन में भी भुट्टे का काढ़ा बनाकर पीने से फ़ायदा होता है.
  • मक्के के दानों का काढ़ा बनाकर कमर से स्नान करने से बवासीर में भी फ़ायदा होता है.
  • खुजली की समस्या हो, तो भुट्टे का स्टॉर्च इस्तेमाल करें.
  • कॉर्न स्टार्च चेहरे की सुंदरता भी बढ़ाता है. इसके प्रयोग से त्वचा ख़ूबसूरत और नर्म-मुलायम बनती है.
  • ज़ुकाम की समस्या में भी भुट्टा लाभकारी है. भुट्टे के दानों को खाने के बाद भुट्टे को बीच से तोड़कर सूंघें. इससे ज़ुकाम में फ़ायदा होता है यानी भुट्टे के दोनों बीचवाले हिस्सों को एक साथ नाक के पास रखकर ज़ोर से सूंघना है. ऐसा 4- 5 बार करें. ज़ुकाम में आराम मिलेगा.
  • लीवर के लिए मक्के के आटे का उपयोग फ़ायदेमंद है, क्योंकि यह प्रचुर मात्रा में रेशे से भरा हुआ है, इसलिए इसे खाने से पेट ठीक रहता है. इससे कब्ज़, बवासीर और पेट के कैंसर के होने की संभावना भी नहीं रहती.
  • मक्के के आटे में भरपूर मात्रा में फाइबर और ग्लूटेन होता है, जिससे इसका सेवन करने से यह शरीर को डायबिटीज़, हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों से बचाता है. साथ ही ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है.

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  • बच्चों के विकास के लिए भुट्टा बहुत उपयोगी होता है. ताज़े दूधिया मक्के के दाने पीसकर एक खाली शीशी में भरकर धूप में रखें. जब उसका दूध सूखकर उड़ जाए और शीशी में केवल तेल रह जाए, तो उसे छान लें. इस तेल से शिशु के पैरों की मालिश करें. इससे उसके पैर मज़बूत होंगे और वह जल्दी चलने लगेगा.
  • साथ ही इस तेल को पीने से शरीर शक्तिशाली भी होता है. हर रोज़ एक टीस्पून तेल को शक्कर के बने शर्बत में मिलाकर पीने से ताक़त मिलती है.

हेल्थ अलर्ट

  • ध्यान दें कि कॉर्न हर किसी को सूट नहीं करता. कई लोगों को इसे खाने से एलर्जी, त्वचा पर चकत्ते आदि समस्याएं हो ती है.
  • मीठे मक्के को कच्‍चा न खाएं. इससे दस्‍त की समस्या हो सकती है.
  • कुछ लोगों को कॉर्न का अधिक सेवन करने से गैस, पेट फूलना, सूजन जैसी समस्‍याएं होती है.
  • मक्का खाने से वज़न बढ़ता है, इसलिए जो अपना वज़न कम करना चाहते हैं, उन्‍हें मक्के का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए.
  • कुछेक को मक्के की रोटी डाइजेस्ट नहीं होती. यदि मक्के की रोटी के साथ छाछ या लस्सी पीएं, तो रोटी आसानी से डाइजेस्ट होगी.

– ऊषा गुप्ता

दादी मां के अन्य घरेलू नुस्ख़े/होम रेमेडीज़ जानने के लिए यहां क्लिक करें- Dadi Ma Ka Khazana

Health Benefits Of Corn

हमारा शरीर खुद ही हमें कई बातों का संकेत देता है, बस ज़रूरत है उन संकेतों को पहचानने की. इसी तरह जब हमारावज़न बढ़ता है तो भी शरीर संकेत देता है, समय पर उनको पहचानकर ध्यान दें वर्ना सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.

  • सबसे पहला संकेत है कि आपको खुद अपना शरीर हेवी लगने लगता है. आप अक्सर सोचने लगते हो कि कहीं मेरावज़न बढ़ तो नहीं रहा. 
  • आपके कपड़े आपको टाइट होने लगते हैं, पुराने कपड़े अब नहीं आते.
  • आप खर्राटे लेने लगते हैं, अगर कोई आपका अपना कहे कि आजकल आप खर्राटे लेने लगे हो तो नाराज़ होने कीबजाय गम्भीरता से लें इस बात को क्योंकि सोने के दौरान अनियमित सांसों से ऐसा होता है. दरअसल जब शरीर मेंफैट्स बढ़ता है तो गर्दन के आसपास भी फैट्स बढ़ जाता है जिससे सांस की नली संकरी हो जाती है और सांस लेनेमें रुकावट व दिक़्क़त होने लगती है. बेहतर होगा आप डॉक्टर के पास जाकर हल निकालें.
  • थोड़ी सी शारीरिक गतिविधि से आपकी सांस फूलने लगे, सीढ़ियां चढ़ने पर, चलने फिरने पर भी सांस फूल जाए तोसमझ जाएं कि डायटिंग करके हेल्दी लाइफ़स्टाइल से वज़न कंट्रोल किया जाए.
Healthy Foods
  • रूटीन चेकअप पर पता चले कि आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है. अगर आप वज़न कम करेंगे तो ब्लड प्रेशर भी कमहो जाएगा क्योंकि आपके कार्डीओवैस्क्युलर सिस्टम को शरीर को ऑक्सिजन सप्लाई करने के लिए कम मेहनतकरनी पड़ेगी. 
  • अगर आपका वजन बढ़ता है तो आप टाइप 2 डायबिटीज़ के रिस्क पर आ जाते हैं. बहुत ज़्यादा प्यास लगने लगे, बार बार यूरिन जाना पड़े और पिछले कुछ समय में फैट्स भी बढ़ा हो तो सतर्क हो जाएं. 
  • कॉलेस्टरॉल का बढ़ना भी बड़ा संकेत है और यह मात्र वज़न कम करने से कम नहीं होगा बल्कि हेल्दी ईटिंग, डायटिंगऔर एक्सरसाइज़ से कम होगा.
  • परिवार में कोलोन या ब्रेस्ट कैंसर की हिस्ट्री है तो आपको शुरुआत से ही डायटिंग को अपनी आदत में शुमार करलेना चाहिए, क्योंकि इस तरह के कैंसर का मोटापे से गहरा संबंध होता है.
Healthy Lifestyle

डायटिंग का मतलब ना खाना नहीं, बल्कि हेल्दी खाना होता है

  • अक्सर लोगों के मन में यह धारणा होती है कि डायटिंग का मतलब है खाना बंद कर दो या एकदम कम कर दो.
  • लेकिन यह सोच ग़लत है, डायटिंग का मतलब होता है अनहेल्दी चीज़ों को छोड़कर हेल्दी चीज़ें खाएं. 
  • फ़्राइड चीज़ों को बेक्ड से रिप्लेस करें.
  • चीनी और स्टार्च का सेवन कम कर दें.
  • नमक कम कर दें.
  • ग्रीन टी का सेवन करें, इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं.
  • प्रोटीन का सेवन बेहद ज़रूरी है. प्रोटीन के सोर्स- दालें, ड्राइफ्रूट्स, बींस, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, दही, फिश, सोयाबीन, अंडा.
  • फ़ाइबर का अधिक इस्तेमाल करें. फल और सब्ज़ियां फ़ाइबर का अच्छा सोर्स है. खीरा, गाजर, सलाद और हरीपत्तेदार सब्जियां ज़रूर खाएं.
  • पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें. यह टॉक्सिंस को बाहर करता है, मेटाबॉलिज़्म को बेहतर करता है.
  • गुनगुना पानी पीएं. हो सके तो सुबह शहद और नींबू गुनगुने पानी में लें.
  • हेल्दी ब्रेकफ़ास्ट लें, रिसर्च बताते हैं कि नाश्ता आपको डायबिटीज़ के ख़तरे से बचाता है. जो लोग नाश्ता करते हैंउन्हें डायबिटीज़ का ख़तरा नाश्ता ना करनेवालों की तुलना में कम रहता है.
  • इतना ही नहीं ब्रेकफ़ास्ट आपको मोटापे से बचाता है. जो लोग नाश्ता नहीं करते उनकी वेस्ट लाइन नाश्ता करनेवालों की तुलना में अधिक होती है. भले ही लंच ठीक से ना करें लेकिन नाश्ता हेल्दी करेंगे तो फ़ैट्स से बचेंगे.
Healthy Lifestyle Tips
  • जो लोग नाश्ता करते हैं उनका एनर्जी लेवल अधिक होता है और वो दिनभर ऐक्टिव बने रहते हैं. 
  • नाश्ते से पाचन तंत्र संतुलित रहता है. यह क्रेविंग से बचाता है. जो लोग नाश्ता नहीं करते उन्हें दिनभर में मीठा खानेकी, जंक फ़ूड की और चाय आदि की तलब ज़्यादा लगती है, जिससे वो अधिक कैलरीज़ का सेवन कर लेते हैं औरमोटापे का शिकार होने लगते हैं.
  • एक बार में ज़्यादा खाने की बजाए अपनी मील्स को डिवाइड करें. दिन में 4-6 बार छोटी-छोटी मील्स लें. 
  • हेल्दी सूप्स और सलाद को शामिल करें. 
  • रात को हल्का खाना लें और सोने से दो घंटे पहले डिनर कर लें. 
  • खाने के हेल्दी ऑप्शन्स की लिस्ट बना लें, जैसे- खिचड़ी, ओट्स, ब्राउन ब्रेड सैंडविच, ब्राउन राइस, दाल, इडली, सादा डोसा, उपमा, पोहा आदि.
  • डायट के अलावा रोज़ आधा घंटा कुछ एक्सरसाइज़, वॉक या योगा ज़रूर करें.
  • नींद पूरी लें और स्ट्रेस कम लें.
Healthy Lifestyle
  • सबसे ज़रूरी कि वज़न बढ़ने पर जब कपड़े टाइट होने लगें तो नए साइज़ के कपड़े लेने की बजाय अपना फ़िटनेसलेवल बढ़ाकर, हेल्दी ईटिंग कर, डायट और कसरत से वज़न कम करने पर फ़ोकस करें और उन्हीं कपड़ों में फिटहोने पर ध्यान दें! क्योंकि स्वास्थ्य से बड़ा धन कोई नहीं, वज़न बढ़ने पर कई बीमारियां एक साथ घेर लेती हैं औरइनमें से कई बीमारियां काफ़ी गंभीर और जानलेवा तक हो सकती हैं. आज से बल्कि अभी से अपनी बॉडी के संकेतोंको पहचानें, उन्हें नज़रअंदाज़ क़तई ना करें और उनपर ध्यान देकर एक्शन लें. स्वस्थ रहें और हेल्दी खाएं!
  • भोलू शर्मा

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सर्दियों में डायट का ख़ास ध्यान रखना बहुत जरूरी है. सर्दी का सुहाना मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं भी लेकर आता है, इनसे बचने और हेल्दी रहने के लिए अपनी डायट में ये चीजें जरूर शामिल करें. शामिल करें कुछ ख़ास पोषक तत्व. सर्दियों में इन चीजों से मिलती है शरीर को गर्मी.

Winter Diet Plan

ऐसे प्लान करें अपना विंटर डायट चार्ट

विंटर में ये नाश्ता करें
सर्दियों में पूरे दिन एनर्जेटिक रहने के लिए सुबह का नाश्ता करना न भूलें. नाश्ते में ब्रेड, उपमा, सैंडविच, डोसा आदि ले सकते हैं. एक ग्लास मलाई निकाला हुआ दूध भी पीएं.

विंटर में ये लंच करें
सर्दियों में लंच में हरी सब्ज़ी, रोटी, दही या छाछ, चावल के साथ छिलके वाली दाल, गरम सूप और हरी चटनी खाएं.

विंटर में ये डिनर करें
सर्दियों में डिनर यानी रात का खाना जल्दी खाएं. रात का खाना दोपहर के खाने की अपेक्षा हल्का होना चाहिए. सोने से करीब 4 घंटे पहले डिनर कर लें. खाने में खिचड़ी, दलिया जैसी हल्की चीज़ें खाएं. खाने के बाद अदरक वाला गरम दूध पीएं.

सर्दियों में ये चीजें जरूर खाएं

  • ठंड के मौसम में शकरकंद खाना फ़ायदेमंद होता है. ये शरीर को गरम रखने के साथ ख़ून भी बढ़ाता है. इसे आप भूनकर या उबालकर खा सकते हैं.
  • ठंड के मौसम में अदरक वाली चाय तो सभी पीते हैं, मगर इसे अन्य रूप में जैसे- सब्ज़ी आदि में डालकर भी खाएं, क्योंकि अदरक में ज़िंक, क्रोमियम और मैगनीशियम की मात्रा अधिक होती है जिससे सर्दियों के मौसम में कोल्ड व फ्लू से लड़ने में शरीर को मदद मिलती है.
  • सर्दियों में इम्यून सिस्टम को मज़बूत करने के लिए पत्तागोभी ज़रूर खाएं. इसे आप सब्ज़ी बनाकर या सलाद के रूप में खा सकती हैं. पत्तागोभी को बारीक़ काटकर इसमें नमक, कालीमिर्च और नींबू का रस मिलाकर खाएं.
  • ठंड के मौसम में बीटरूट खाना फ़ायदेमंद है, ये शरीर की ताकत बढ़ाता है. इसे आप सलाद के रूप में खा सकते हैं या फिर सैंडविच आदि में डालकर.
  • सर्दियों में रागी, ज्वार, जौ, बाजरा आदि को भी अपनी डायट में शामिल करें. इन सबको मिक्स करके पीस लें और रोटी बनाकर खाएं.

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Winter Diet Tips

सर्दियों में शरीर के लिए ज़रूरी विटामिन्स
सर्दियों में फिट और हेल्दी रहने के लिए अपनी डायट में ये जरूरी विटामिन्स शामिल करें. ये पोषक तत्व आपको सर्दियों में होने वाली बीमारियों से बचाकर रखेंगे.

विटामिन सी
सर्दियां आते ही खांसी, ज़ुकाम, बुखार, फ्लू आदि की शिकायत होने लगती है. अतः डायट में विटामिन सी से भरपूर चीज़ें शामिल करें. ये आपके इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाकर बीमारियों से बचाता है. विटामिन सी कोलेजन के निर्माण में भी मदद करता है. इससे सर्दियों में भी त्वचा की चमक बरक़रार रहती हैं

स्रोत
सभी तरह के खट्टे फलों में विटामिन सी पाया जाता है, जैसे- संतरा, मौसंबी, नींबू आदि. इसके अलावा खजूर में भी विटामिन सी होता है. वैसे आजकल मार्केट में विटामिन सी के टैबलेट्स भी उपलब्ध हैं. आप चाहें तो ये भी खा सकती हैं.

विटामिन डी
वैसे तो पूरे साल शरीर को विटामिन डी की ज़रूरत होती है, मगर ठंड में इसकी ज़रूरत बढ़ जाती है. सर्दियों के मौसम में कुछ देर धूप ज़रूर सेंके. ठंडी में कई लोगों को जोड़ों में दर्द की शिकायत हो जाती है, अतः उनके लिए विटामिन डी बेहद ज़रूरी है. सुबह की धूप ज़्यादा फ़ायदेमंद होती है.

स्रोत
विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है धूप, लेकिन आप यदि किसी कारण से पर्याप्त धूप नहीं ले पातें, तो बाज़ार में मिलने वाले विटामिन डी फोर्टिफाइड मिल्क और सीरियल्स भी खा सकते हैं.

विटामिन ई
सर्दियों में त्वचा रूखी और पपड़ीनुमा हो जाती है, अतः विटामिन ई का सेवन ज़रूरी है. इसमें मौजूद मॉइश्‍चर के गुण आपकी त्वचा को कोमल बनाए रखने में मदद करते हैं.

स्रोत
मीट, फिश, पालक, ब्रोकोली आदि विटामिन ई का अच्छा स्रोत है. इमली में भी विटामिन ई की भरपूर मात्रा होती है.

विटामिन बी कॉम्पलेक्स
बी ग्रुप के विटामिन्स बी1 से लेकर बी12 तक ठंड के मौसम में ज़रूरी होते हैं. ये स्किन को सॉफ्ट बनाए रखने में सहायक हैं. साथ ही फटी एड़ियों, फटे होंठ और स्किन को भी फटने से बचाते हैं.

स्रोत
हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, अंडे, चिकन लीवर, फिश आदि विटामिन बी कॉम्पलेक्स के अच्छे स्रोत हैं.

ओमेगा 3 फैटी एसिड
ये विटामिन नहीं है, मगर सर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है. ये एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता है. जिन लोगों को ठंड में जोड़ों के दर्द की शिकायत होती है, उनके लिए ओमेगा 3 फैटी एसिड बहुत ज़रूरी होता है, ये शरीर में कैल्शिमय लेवल को बढ़ाकर हड्डियों को मज़बूत बनाने में मदद करता है. फलैक्ससीड ओमेगा 3 का बेहतरीन स्रोत है. इसके अलावा अखोरट, सामन और टूना जैसी मछलियां भी ओमेगा 3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत हैं.

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हमारा स्वास्थ्य काफ़ी हद तक हमारे पेट और पाचन तंत्र से जुड़ा रहता है, इसलिए हेल्दी रहने के लिए पाचन तंत्र औरमेटाबॉलिज़्म का सही और हेल्दी रहना बेहद ज़रूरी है. कैसे रखें अपने पाचन तंत्र का ख़्याल आइए जाने.

हो सही शुरुआत: जी हां, दिन की शुरुआत सही होगी तो पूरा दिन सही होगा और सेहत भी दुरुस्त रहेगी. सही शुरुआत केलिए हेल्दी और पौष्टिक नाश्ता ज़रूरी है. नाश्ता पौष्टिक होना ज़रूरी है- फल, ड्राई फ़्रूट्स, दलिया, उपमा, पोहा, कॉर्नफ़्लेक्स, दूध, फ़्रूट जूस, अंकुरित अनाज,दालें, अंडा, पराठे, दही आदि. पौष्टिक नाश्ता आपका दिनभर संतुष्ट रखताऔर इससे पाचन तंत्र संतुलित रहता है. ये दिनभर की ऊर्जा प्रदान करता है. एसिडिटी से राहत दिलाता है, क्योंकि अगरआप नाश्ता नहीं करते हैं, तो ऐसिड बनने लगती है, जो काफ़ी तकलीफ़ देती है.

हेल्दी डायजेशन के लिए प्रोबायोटिक्स ज़रूरी है: क्या आप जानते हैं कि बैक्टीरिया भी हेल्दी और अनहेल्दी होते हैं. हेल्दीबैक्टीरिया पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं. हेल्दी बैक्टीरिया आपको प्रोबायोटिक्स सेमिलते हैं. आप प्रोबायोटिक्स के प्राकृतिक स्रोतों को भोजन में शामिल करें. दही, ख़मीर वाले प्रोडक्ट्स, छाछ व रेडीमेडप्रोबायोटिक्स ड्रिंक्स का सेवन करें.

Digestive Health Tips

स्ट्रेस से दूर रहें: स्ट्रेस यानी तनाव पूरे शरीर व ख़ासतौर से पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. इससे गैस, ऐसिडिटी, क़ब्ज़ जैसी समस्या हो सकती है. तनाव के कारण पेट में ब्लड व ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है जिससेपेट में ऐंठन, जलन जैसी समस्या होने लगती है, साथ ही पेट में मैजूद हेल्दी बैक्टीरिया में भी असंतुलन आने लगता है. इसके अलावा तनाव से नींद भी नहीं आती और नींद पूरी ना होने से पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता. 

प्रोटीन रिच फूड खाएं: ये मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाता है. प्रोटीन के लिए आप पनीर, चीज़ व अन्य डेयरी प्रॉडक्ट्स शामिल करसकते हें. इसके अलावा अंडा, चिकन, फिश भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं और ये मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाते हैं.

Digestive Health Food

सेब, केला और पपीता ज़रूर खाएं: सेब में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जो पेट के स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं. सेबफाइबर का अच्छा स्रोत भी है और गुड बैक्टीरिया को पनपाने में भी मदद करता है. पपीते में विटामिन ए, बी और सी औरकई तरह के एन्ज़ाइम्स होते हैं, जो खाने को डायजेस्ट करने में मदद करते हैं. रिसर्च बताते हैं कि पपीता खाने सेडायजेस्टिव सिस्टम में सुधार होता है. केले में फाइबर और पेक्टिन भरपूर मात्रा में होता है, जो आंतों के स्वास्थ्य के लिएबहुत फायदेमंद होता है.

डायट में फाइबर शामिल करें: भोजन में फाइबर जितना ज़्यादा होगा पेट उतना ही स्वस्थ होगा क्योंकि आपको क़ब्ज़ कीसमस्या नहीं होगी. फाइबर कोलोन की कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है और पेट साफ़ रखता है. अपने भोजन में साबूतअनाज, दालें, गाजर, ब्रोकोली, नट्स, छिलके सहित आलू, मकई, बींस व ओट्स को शामिल करें.

अदरक का सेवन करें: अदरक पेट के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है. यह पाचन को बेहतर करता है. अदरक के टुकड़ेकरके ऊपर से नींबू का थोड़ा सा रस डालें और भोजन के साथ खाएं. आपका हाज़मा बेहतर होगा. अपच की समस्या नहीं होगी.

Digestive Health Tips

लहसुन मेटाबॉलिज़्म को बूस्ट करता है: लहसुन को भी डायट में शामिल करें. यह ना सिर्फ़ मेटाबॉलिज़्म को बेहतर करता है बल्कि वज़न कम करने में भी सहायक है और हार्ट को भी हेल्दी रखता है.

जीरा भी है बेहद हेल्दी: जीरा आंतों को और गर्भाशय को भी साफ़ रखता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. जीरा भूख भीबढ़ाता है और पेट संबंधी कई समस्याओं से राहत दिलाता है.

ग्रीन टी है मेटाबॉलिज़्म बूस्टर: जी हां, ग्रीन टी ज़रूर लें इससे पाचन बेहतर होता है. यह मेटाबॉलिज़्म बूस्टर मानी जाती हैऔर वज़न भी कम करती है.

Digestive Health Tips

साबूत अनाज और बींस: यह पाचन तंत्र को ठीक रखने में सहायक होते हैं. क़ब्ज़ से बचाते हैं और पेट संबंधी कईसमस्याओं से राहत दिलाते हैं. इसी तरह बींस में भी फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर करता है. बींस से गुड़बैक्टीरिया भी बढ़ते हैं और कब्ज़ की समस्या भी नहीं होती.

हरी पत्तेदार सब्ज़ियां: ये प्रोटीन व आयरन का भी अच्छा सोर्स मानी जाती हैं और विटामिंस से भरपूर होती हैं. साथ ही साथये पेट को व पाचन तंत्र को हेल्दी रखती हैं. ये फाइबर का बेहतर स्रोत होती हैं, इनमें ख़ासतौर से पालक और गोभी में कईपोषक तत्व- फोलेट, विटामिन ए, सी और के होता है. शोध बताते हैं कि हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में एक ख़ास तरह का शुगरहोता है जो आंतों के हेल्दी बैक्टीरिया (गट बैक्टीरिया) के निर्माण को बढ़ाता है.

रसीले व मौसमी फल व ड्राई फ़्रूट्स खाएं: फल पेट को हेल्दी रखते हैं. क़ब्ज़ की समस्या नहीं होने देते. फाइबर से भरपूरहोते हैं. ड्राई फ़्रूट्स भी फाइबर से भरपूर होते हैं और आंतों को हेल्दी रखते हैं. हाल ही के रिसर्च से पता चला है कि प्रूनयानी सूखा आलूबखारा आंतों, मुंह और वजाइना में पाया जानेवाला ख़ास क़िस्म का बैक्टीरिया के निर्माण में सहायकहोता है जिससे पाचन तंत्र भी मज़बूत होता है. इसी तरह से खजूर भी पेट के लिए काफ़ी हेल्दी माना जाता है.

Boost Metabolism

हाईड्रेटेड रहें: पानी ख़ूब पिएं क्योंकि यह ज़हरीले तत्वों को बाहर करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. शरीर मेंपानी व नमी की कमी ना होने पाए. नींबू पानी, नारियल पानी या ताज़ा फल व सब्ज़ी का जूस भी लें. 

एक्टिव रहें, एक्सरसाइज़ व योगा करें: रोज़ाना 30 मिनट एक्सरसाइज़ करें, वॉक करें, एक्टिव रहें. लिफ़्ट की बजायसीढ़ियों का इस्तेमाल करें. योगा भी कर सकते हैं. साइक्लिंग, स्विमिंग भी कर सकते हें. यह रूटीन आपकी मांसपेशियोंको लचीला बनाएगा और पाचन को बेहतर. वरना शारीरिक गतिविधियों की कमी से क़ब्ज़ जैसी समस्या होने लगेगी.

अनहेल्दी चीज़ों से रहें दूर: पाचन तंत्र की हेल्थ के लिए ज़रूरी है कि अनहेल्दी चीज़ों से भी दूरी बनाए रखें. शराब व कैफेनका सेवन कम करें क्योंकि यह भीतर से शरीर को ड्राई करते हैं और डीहाईड्रेट करते हैं. साथ ही ये क़ब्ज़ की समस्या भीपैदा करते हैं. पानी के नाम पर शुगरी ड्रिंक ना पिएं. तला हुआ ज़्यादा ना खाएं. प्रोसेस्ड फूड व शुगर का सेवन कम या नाकरें. मैदा और ज़्यादा मसालेदार भोजन ना करें, क्योंकि ये क़ब्ज़, गैस, एसिडिटी, अपच को बढ़ाकर पाचन को कमज़ोरकरते हैं.

पूर्वा शर्मा

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जब अदरक पककर सूख जाता है, तब उसकी सोंठ बनती है. इसी सूखी अदरक को सोंठ कहते हैं. सोंठ में आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फाइबर, सोडियम, विटामिन ए और सी, जिंक, फोलेट एसिड, फैटी एसिड, पोटैशियम जैसे पौषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं. इसी कारण यह ना केवल हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करती है, बल्कि मौसमी बीमारियों, जैसे- खांसी-ज़ुकाम जैसी बीमारी से भी बचाती है.
एक रिसर्च के अनुसार, सोंठ में दर्द कम करनेवाले औषधीय तत्व पाए जाते हैं, इसलिए सोंठ को नेचुरल पेनकिलर भी कहा जाता है. यह उपयोगी एवं प्रत्येक घर की प्रसिद्ध वस्तु है. दाल-साग के मसाले में इसका उपयोग होता है. यह पाचन तंत्र के लिए अत्यंत उपयोगी है. सोंठ उल्टी, खांसी, ह्रदय रोग, सूजन आदि बीमारियों को दूर करती है.

घरेलू नुस्ख़े

  • कांजी में सोंठ का चूर्ण डालकर पीने गठिया या जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है.
  • एक शोध के अनुसार, गर्भवती महिलाओं के लिए सोंठ बेहद फ़ायदेमंद होता है. इससे पेट के रोगों के अलावा मॉर्निग सिकनेस यानी सुबह होनेवाली घबराहट से निजात मिलती है.
  • यदि पुराना ज़ुकाम हो, तो सोंठ डालकर पानी को उबाल लें. दिन में तीन बार यह पानी गुनगुना करके पीने से पुराना ज़ुकाम दूर हो जाता है.
  • 10 ग्राम सोंठ का चूर्ण, 10 ग्राम गुड़ और एक चम्मच घी मिलाकर उसमें थोड़ा-सा पानी डालकर रबड़ी जैसा बनाएं. हर रोज़ सुबह इसका सेवन करने से तीन दिन में ही सर्दी-ज़ुकाम ठीक हो जाता है.
  • खांसी और दमा की समस्या होने पर सोंठ, छोटी हरड़ और नागरमोथा का चूर्ण समान मात्रा में लेकर उसमें दुगुना गुड़ मिलाएं और चने बराबर गोलियां बना लें. दिनभर में तीन-चार बार 1-1 गोली मुंह में रखकर चूसने से खांसी व दमा की बीमारी दूर हो जाती है.
  • सोंठ को छाछ से निथारे पानी में घिसकर 21 दिन तक पीने से पुराने बुखार से छुटकारा मिलता है.
  • यदि प्रेग्नेंट महिला को मलेरिया का बुखार हो, तो 3 ग्राम सोंठ को बकरी के दूध में पीसकर दिन में तीन बार पिलाने से मलेरिया का बुखार मिटता है.

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  • अपच या बदहजमी की परेशानी में सोंठ और जवाखार का चूर्ण समान मात्रा में लेकर घी के साथ मिलाकर चाटे और ऊपर से गर्म पानी पीएं. इससे अपच से मुक्ति मिलती है और भूख खुलकर लगती है.
  • सोंठ, हल्दी और गुड़ का काढ़ा बनाकर सुबह एक महीने तक नियमित पीने से धातु स्राव रुकता है और पेशाब के साथ जानेवाली धातु भी बंद हो जाती है.
  • 5 ग्राम सोंठ का चूर्ण बकरी या गाय के दूध के साथ सेवन करने से रक्तस्राव में लाभ होता है. दर्द के साथ पेशाब में ख़ून जाता हो, तो वह भी ठीक हो जाता है.
  • कमरदर्द की समस्या हो, तो सोंठ और एरंड की जड़ का काढ़ा बनाकर उसमें पिसी हुई हींग और काला नमक डालकर पीने से वायु के कारण होनेवाला कमरदर्द दूर होता है.
  • सोंठ और गोखरू समभाग में लेकर सुबह-शाम क्वाथ बनाकर पीने से भी कमरदर्द दूर होता है.
  • सोंठ, जीरा और सेंधा नमक का चूर्ण मट्ठे में मिलाकर भोजन के बाद पीने से पतले दस्त की परेशानी दूर होती है.
  • सोंठ और खसखस की जड़ को पानी में उबालकर पीने से भी दस्त बंद होते हैं.
  • हर रोज़ सुबह गर्म पानी के साथ सोंठ का चूर्ण फांकने या सोंठ का काढ़ा बनाकर उसमें एरंड का तेल मिलाकर पीने से पेचिश मिटती है.
  • सोंठ और बेल फल का काढ़ा बनाकर पीने से हैजे में होनेवाली उल्टी, दस्त व पेटदर्द दूर होता है.
  • सोंठ को पानी या दूध में घिसकर उसका नस्य लेने और लेप करने से सिरदर्द और आधासीसी का दर्द दूर होता है.
  • सोंठ को पानी में घिसकर नस्य से लेने से बिच्छू का विष उतरता है.
  • 500 मि. ली. उबलते हुए पानी में 25 ग्राम सोंठ का चूर्ण डालकर उसे 20-25 मिनट तक ढककर पकाएं. फिर उसे उतारकर ठंडा होने पर कपड़े से छान लीजिए. इसमें से रोज़ 25 से 40 मि. ली. पानी दिन में तीन बार सेवन करने से अपच, खट्टी डकार, पेटदर्द आदि तकलीफ़ दूर होती है.

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रिसर्च
शोधकर्ताओं के अनुसार, सोंठ का सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को दूर करने में भी मदद मिलती है. सोंठ का नियमित सेवन करने से शरीर में कैंसर कोशिकाओं, ट्यूमर व शरीर में मौजूद डीएनए में होनेवाली प्रक्रिया को कम कर देती है. साथ ही खून के थक्के बनने से रोकती है.

हेल्थ अलर्ट

  • डॉक्टर्स का मानना है कि सोंठ का सेवन कम मात्रा में यानी 5 ग्राम तक ही करना चाहिए, वरना फ़ायदे की जगह नुक़सान भी हो सकता है.
  • सोंठ का अधिक सेवन करने से पेट संबंधी समस्या और पीरिड्स में हैवी ब्लीडिंग होने की संभावना होती है.
  • लगातार लंबे समय तक सोंठ का उपयोग करने से सीने में जलन, गैस, मुंह में जलन जैसी परेशानी हो सकती है.

सुपर टिप
सोंठ या अदरक की चाय पीने से पीरियड्स में होनेवाले दर्द में आराम मिलता है.

ऊषा गुप्ता

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