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छोटी इलायची के 13 बड़े फ़ायदे (13 Amazing Health Benefits of Cardamom)

cardamom health benefits

Health Benefits of Cardamom

छोटी-सी नज़र आने वाली इलायची (Health Benefits of Cardamom) न स़िर्फ खाने का स्वाद व ज़ायका बदल देती है, बल्कि आपकी सेहत का भी ख़्याल रखती है. सर्दियों के मौसम में शरीर को गर्म रखने के लिए आमतौर पर लोग इलायची वाली चाय पीते हैं. क्या है छोटी इलायची के बड़े फ़ायदे? आइए, जानते हैं.

* दांत व मसूड़ों को इंफेक्शन से बचाने के साथ ही इलायची मुंह की दुर्गंध की समस्या से छुटकारा दिलाती है.

* ब्लड सर्कुलेशन लेवल ठीक रखनेे के साथ ही इलायची अस्थमा व ब्रॉनकाइटिस से पीड़ित लोगों के लिए भी फ़ायदेमंद है.

* ये मैगनेशियम, कैल्शिय, पोटैशियम और विटामिन्स का अच्छा स्रोत है.

* यदि बस में सफ़र के दौरान जी घबराता है या चक्कर आता है तो मुंह में इलायची डाल लें, आराम मिलेगा.

* यदि गले में खराश है या आवाज़ बैठी हुई है तो सुबह उठने के बाद और रात को सोने से पहले इलायची चबाकर खाएं और गुनगुना पानी पिएं.

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* यदि गले में सूजन है तो मूली के पानी में इलायची पीसकर पिएं, फ़ायदा होगा.

* यदि सर्दी-खांसी हैं और छींक आ रही है तो एक छोटी इलायची, एक टुकड़ा अदरक, लौंग व पांच तुलसी के पत्ते पान में रखकर खाएं, सर्दी-खांसी से  राहत मिलेगी.

* इलायची का पेस्ट बनाकर माथे पर लगाने से सिरदर्द से राहत मिलती है.

* धूप में जाते समय मुंह में इलायची रखें, ये आपको लू से बचाएगा.

* इलायची और कालीमिर्च को घी में मिलाकर खाने से पाचन संबंधी समस्या दूर होती है.

* सर्दी के मौसम में नहाने के बाद बेबी ऑयल में इलायची और दालचीनी पाउडर मिलाकर मसाज करें, त्वचा में निखार आ जाएगा.

* सुगंधित होने के कारण इलायची और इसके तेल का इस्तेमाल कई कॉस्मेटिक्स जैसे- परफ्यूम, साबुन, पाउडर, बॉडी वॉश आदि में भी किया जाता  है.

* इलायची में एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ चेहरे की चमक भी बढ़ाता है. इससे जल्दी झुर्रियां भी नहीं पड़ती.

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इलायची वाली चाय

सामग्री
2 कप- पानी
1 कप- दूध
2 टीस्पून- शक्कर
1 टीस्पून- चायपत्ती
1 टुकड़ा- अदरक
2- इलायची (कुटी हुई)
विधि
बर्तन में पानी, दूध और शक्कर डालकर उबाल लें. फिर चायपत्ती, अदरक और इलायची डालें. अच्छी तरह उबल जाने पर छानकर सर्व करें.

स्मार्ट टिप
बेसन के लड्डू, खीर, सेवई आदि में इलायची पाउडर डालें. इससे ख़ुशबू व स्वाद बढ़ जाएगा.

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बहुत गुणकारी है हींग (Benefits Of Hing)

Benefits Of Hing in Hindi

Benefits Of Hing in Hindi

हींग कटु, तीक्ष्ण, पाचन और हृदय के लिए हितकारी है. यह रुचिकारक, वात-कफ़ को दूर करनेवाली उदर संबंधी रोग, पेट की गैस और कृमियों को नष्ट करनेवाली है.

घरेलू नुस्ख़े

* हींग, सोंठ और मुलहठी- समान मात्रा में लेकर पीस लें. फिर शहद मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें. भोजन के बाद एक गोली मुंह में रखकर दोनों व़क्त चूसें. कब्ज़ से राहत मिलेगी.

* 2 चम्मच सरसों के तेल में 1 ग्राम हींग, दो कली लहसुन और ज़रा-सा सेंधा नमक भून लें. जब हींग जल जाए, तो तेल को छानकर बॉटल में भर लें. कान में दर्द या सायं-सायं की आवाज़ होने पर 2-2 बूंद तेल प्रतिदिन रात को कानों में डालें. प्रतिदिन एक सप्ताह तक ऐसा करने से कान का दर्द, खुश्की और सायं-सायं की आवाज़ की शिकायत दूर हो जाती है.

* पेट में गैस हो गई हो, पेट फूल गया हो, पेट में दर्द हो रहा हो, तो नाभि के आसपास और पेट पर हींग का लेप करने से थोड़े समय में ही आराम आ जाता है.

* हींग, कपूर और आम की गुठली सममात्रा में लेकर पुदीने के रस में पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें. 4-4 घंटे के अंतराल पर यह गोली देने पर हैजे में फ़ायदा होता है.

* हींग को घी में भून लें. फिर कालीमिर्च, वायविडंग, कूठ, सेंधा नमक और भुनी हुई हींग- सभी समान मात्रा में लेकर कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रख लें. कुकुर खांसी होने पर आधा से एक ग्राम की मात्रा में इस चूर्ण को शहद में मिलाकर दिन में तीन बार चाटें. यह चमत्कारिक नुस्ख़ा है. इससे एक हफ़्ते में कुकुर खांसी दूर हो जाएगी.

* हींग को पानी में उबालकर उस पानी से कुल्ले करने से दांत की पीड़ा दूर होती है. यदि दांत में पोल हो, तो पोल में हींग भरने से दांत के कीड़े मर जाते हैं और दांत की पीड़ा दूर हो जाती है.

Benefits Of Hing in Hindi

* हींग, सेंधा नमक और घी 10-10 ग्राम लेकर 120 मि.ग्रा. गोमूत्र में मिलाएं. फिर इसे आंच पर रखकर इतना पकाएं कि केवल घी बाकी रह जाए. यह घी पीने से मिर्गी रोग का शमन होता है.

* 10-10 ग्राम हींग, कालीमिर्च और कपूर व 4 ग्राम अफीम लेकर अदरक के रस में छह घंटे तक घोंटें. फिर 1-1 रत्ती की गोलियां बनाएं. 1 से 2 गोली दिन में तीन बार लेने से दस्त से छुटकारा मिलता है.

* बिच्छू के दंश मारने पर हींग को घिसकर दंशवाले स्थान पर लगाने से लाभ होता है.

* गिल्टी के दर्द में एक बीज निकाला हुआ मुनक्का लेकर उसमें दो ग्राम भुनी हींग मिलाकर चबाकर खाएं. जाएं. ऊपर से दो घूंट गरम पानी पी लें. असर होते देर नहीं लगेगी. दूसरे दिन इस दवा की एक ख़ुराक और ले लें. रोग हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा.

* हींग और अफीम बराबर मात्रा में लेकर तिल के तेल या मोम व तिल में अच्छी तरह पीसें और फेंटकर मलहम बना लें. इस मलहम को कंठमाला पर लगाने से कंठमाला पककर फूट जाता है और आराम मिलता है.

* घी में भूनी हुई हींग घी के साथ खाने से गर्भवती स्त्री को आनेवाला चक्कर (सिर चकराना) और शूल मिटता है.

सेहत भी दुरुस्त रखता है जीरा (Benefits Of Jeera (Cumin Seeds)

 Benefits Of Jeera

जीरा शीतल, रुचिकर, विषनाशक, नेत्रों के लिए हितकारी और पेट के गैस को दूर करनेवाला है. आफ़रा, अरुचि, रक्तविकार, अतिसार, पित्त आदि में जीरा अति प्रभावकारी है. बुख़ार में इसका सेवन करने से शरीर की जलन व पेशाब की वेदना कम होती है. जीरा को कई बीमारियों में घरेलू औषधि (Benefits Of Jeera) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

घरेलू नुस्ख़े
* बुख़ार होने पर 50 ग्राम जीरा गुड़ में अच्छी तरह मिलाकर 10-10 ग्राम की गोलियां बना लें. 1-1 गोली दिन में 3 बार सेवन करने से पसीना आता है और शरीर का बढ़ा हुआ ताप कम होता है. इसको 21 दिन तक नियमपूर्वक लेने से पुराना बुख़ार भी ठीक हो
जाता है.

* जीरा, सोंठ, पिप्पली, कालीमिर्च और सेंधा नमक- सभी को समान मात्रा में लेकर बारीक़ चूर्ण बनाकर रख लें. इसकी 3 से 6 ग्राम मात्रा दिन में दो बार शहद के साथ सेवन करने से पेटदर्द और पेट संबंधी समस्याएं दूर होती हैं.

* जीरे का चूर्ण 5 से 10 ग्राम की मात्रा में मूंग के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से पुराना अतिसार कुछ दिनों में दूर हो जाता है.

* भोजन के प्रति अरुचि हो, भूख न लगती हो, तो 1 ग्राम भुने हुए जीरे का चूर्ण 15 ग्राम अनार के रस में मिलाकर सेवन करने से लाभ
होता है.

 Benefits Of Jeera
* बवासीर की वेदनापूर्ण सूजन में इसे मिश्री के साथ देने और जीरे को पानी के साथ पीसकर लेप की तरह लगाने से विशेष लाभ होता है.

* जीरा, जायफल और बेल के गूदे को समान भाग में लेकर चूने के पानी के साथ पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें. इसकी 1-1 गोली दिन में तीन बार चावल के पानी के साथ लेने से पेचिश (आंव) से छुटकारा मिलता है.

* छोटे बच्चों को उल्टी होने पर आंवला, जीरा, लौंग, कालीमिर्च और शक्कर सभी को सममात्रा में लेकर चूर्ण बना लें. इसे शहद के साथ अवस्थानुसार दिन में तीन बार दें. इससे बच्चों को होनेवाली उल्टी ठीक हो जाती है.

* खूनी पेचिश होने पर जीरे के चूर्ण को 2 से 5 ग्राम की मात्रा में लेकर 250 ग्राम मट्ठे में मिलाकर दिन में 2-3 बार पीने से लाभ होता है.

* 3 ग्राम जीरे का चूर्ण शक्कर के साथ मिलाकर चावल के धोवन के
साथ पीने से श्‍वेत प्रदर रोग दूर होता है. यह नुस्ख़ा रक्तप्रदर में भी हितकारी है.

* जीरे का चूर्ण और नमक शहद में मिलाकर हल्का गर्म करके बिच्छू के डंक पर लगाने से उसका विष उतर जाता है.

* जीरे को नींबू के रस में मिलाकर उसमें अंदाज़ से नमक मिलाकर खटाई जीरा बना लें. यह जीरा गर्भवती महिला को देने से उसका जी मिचलाना बंद हो जाता है.

* जीरा, त्रिकुट, भुनी हुई हींग और काला नमक- सभी को समभाग लेकर चूर्ण बनाकर रख लें. इसे 1 से 3 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार दही के पानी के साथ सेवन करने से मोटापा कम होता है.

* जीरे को घी में डुबोकर उसे चिलम में भरकर धूम्रपान करने से हिचकी बंद हो जाती है.