health connection of meditation

एक वक़्त था जब मेंटल हेल्थ यानी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अब एकदम अनजान थे. न उस पर कभी बात होती थी, न हीकभी विचार-विमर्श, क्योंकि हमें ये ग़ैर ज़रूरी लगता था. लेकिन वक़्त बदलने के साथ ही थोड़ी जागरूकता आती गई, लेकिन फिर भी अन्य देशों के मुक़ाबले हम आज भी पीछे हैं.

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लेकिन कोविड ने लोगों को काफ़ी जागरुक किया है और अब लोग, यहां तक कि सेलिब्रिटीज़ भी अब अपने मानसिकस्वास्थ्य पर खुलकर बात करते हैं. 

पहले अक्सर लोग इसे छिपाया करते थे क्योंकि समाज का रवैया ही कुछ ऐसा था. हमारे देश में मानसिक स्वास्थ्य केइलाज को लेकर भी शर्मिंदगी से जोड़कर देखा जाता है, अक्सर लोगों की यही धारणा होती है कि मनोचिकित्सक के पासतो सिर्फ़ पागल लोग ही जाया करते हैं. समाज में मानसिक बीमारी या समस्या से जूझ रहे लोगों को समर्थन व सहयोगनहीं मिलता. उनको अलग ही नज़रिए से देखा जाता है, जबकि उन्हें ही सबसे ज़्यादा सहयोग की आवश्यकता होती है. 

जिस तरह तन के अस्वस्थ होने पर हम इलाज करते हैं, ठीक उसी तरह मन के अस्वस्थ होने पर भी इलाज की ज़रूरत होतीहै. 

लेकिन अब काफ़ी बदलाव आया है और लोग अब तन के साथ साथ मन के स्वास्थ्य को भी तवज्जो देने लगे हैं. 

यहां हम मेंटल हेल्थ के लिए बेस्ट होम रेमेडीज़ बता रहे हैं, जो आपको हमेशा रखेंगी ऊर्जावान और प्रसन्न.

लेकिन उससे पहले आपको खुद अपने मन को पढ़ना होगा, उसे समझना होगा और उसमें झांकना होगा. 

अपने व्यवहार में आए बदलावों को पहचानें… 

कई बार हम ग़ौर ही नहीं करते कि हमारा मन उदास है, दुखी है और इन्हीं अनदेखी के करने मेंटल हेल्थ  इग्नोर हो जातीहै. 

  • अपने शुरुआती लक्षणों को पहचानें.
  • अपने मूड में आए बदलाव को समझें. 
  • अपनी एनर्जी में आए बदलाव को जानें. 
  • अपने डायट में आए चेंजेस को पहचानें. 
  • अपने हैप्पीनेस लेवल में आई गिरावट को नोट करें. 
  • एक डायरी में सब नोट करें. 
  • अपनी परेशानी के कारण को जानने का प्रयास करें.
  • क्या प्यार ने धोखा या करियर में नाकामयाबी है इसकी वजह? 
  • अकेलापन या ग़लत लाइफ़ स्टाइल है इसकी वजह? 
  • खुद से नाराज़गी के कारण आई है ये उदासी या कुछ और? 

कई प्रकार की हो सकती है ये मानसिक समस्या

मेंटल हेल्थ में असंतुलन एक चेन की तरह होती है. एक समस्या दूसरी से जुड़ी होती है या दूसरी समस्या तीसरी को जन्मदेती है. उदासी से अकेलापन और उससे डिप्रेशन आता है. क्रोध और घबराहट से ऐंज़ाइयटी पनपती है. चिंता और परेशानीसे पैनिक अटैक आ सकते है.

क्या उपाय करें? 

अगर समस्या अधिक गंभीर है तो ज़ाहिर है आपको हेल्प लेनी चाहिए. एक्सपर्ट के पास जाना चाहिए, लेकिन इन सबकेसाथ ही आपको कुछ घरेलू उपाय भी करने चाहिए, जिनसे आप बेहतर महसूस करेंगे.

  • एक्सरसाइज़ करें. रोज़ व्यायाम करने से आप पॉज़िटिव महसूस करेंगे. लेकिन ध्यान रहे कि लाइट एक्सरसाइज़ हीकरें और वही फ़िज़िकल एक्टिविटी करें जो आपको पसंद हो, जैसे- स्विमिंग, साइक्लिंग, वॉकिंग, जॉगिंग, डान्सिंग. 
  • नींद पूरी लें. ये आपके मस्तिष्क को राहत देगी और बेहतर महसूस कराएगी.
  • एक्टिव और अपडेटेड रहें. अलर्ट रहने की कोशिश करें. न्यूज़ देखें और आसपास क्या चल रहा है और आपके मन मेंक्या चल रहा है उन सबके प्रति सचेत रहें. 
  • शराब या अन्य तरह की लत में सुकून न ढूंढ़ें, ये समस्या को और बढ़ाएंगी.
  • लोगों से मिलें-जुलें और शेयर करें. अपने करीबी या दोस्तों से दूर न भागें. सोशल एक्टिविटी का हिस्सा बनें. अपनीसमस्या से अकेले जूझने की बजाय उसे बांटें. इससे आप बेहतर महसूस करेंगे.
  • योग और ध्यान करें, क्योंकि मेडिटेशन इमोशनल हेल्थ को बेहतर बनाता है. बढ़ती उम्र संबंधी भूलने की बीमारी मेंबेहद लाभदायक है और एकाग्रता बढ़ाता है.
  • रिसर्च कहते हैं कि मेडिटेशन घबराहट को कम करके कई तरह के मानसिक रोगों को भी नियंत्रित करने में सक्षम है. यह फोबिया, लत, विकृत सोच, ऑबसेसिव कंपलसिव डिसऑर्डर आदि में भी फ़ायदेमंद है.
  • स्टडीज़ में साबित हुआ है कि मेडिटेशन इंफ्लेमेटरी केमिकल्स को घटाता है. ये केमिकल्स स्ट्रेस के कारण बनते हैं, जो मूड को प्रभावित करके डिप्रेशन पैदा करते हैं. ऐसे में मेडिटेशन इस केमिकल को कम करके डिप्रेशन को कमकरता है.
  • ध्यान से मस्तिष्क अल्फ़ा स्टेट में पहुंच जाता है, जिससे हैप्पी होर्मोंस रिलीज़ होते हैं और मन प्रसन्न व ऊर्जावानहोता है. 

मेंटल हेल्थ के लिए बेस्ट सुपर फ़ूड्स

अखरोट: ये एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं और ये नए न्यूरॉन्स बनाने में मदद करते हैं जिसका मतलब ये है कि इन्हें खानेसे ब्रेंस को नए सेल्स मिलते हैं, जो मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.

हरी पत्तिदार सब्ज़ियां: शोध बताते हैं कि जो लोग पालक व मेथी जैसी हरी सब्ज़ियां खाते हैं उनको मस्तिष्क से जुड़ी वबढ़ती उम्र के साथ होने वाली मस्तिष्क की समस्याएं अपेक्षाकृत कम होती हैं.

मछली: इसमें ओमेगा ३ फ़ैटी एसिड होता है जो ब्रेन हेल्थ के लिए काफ़ी अच्छा होता है. ये मेमरी अच्छी बनाए रखता हैऔर ऐंज़ाइयटी के स्तर को काफ़ी हद तक कम करने में मददगार है.

दही: ये एक नेचुरल प्रोबायोटिक है और पेट व आंतों के लिएबेहतरीन है लेकिन ये मेंटल हेल्थ के लिए भी उतना हीलाभदायक है. ये ऐंज़ाइयटी, डिप्रेशन और तनाव को भी कम करता है. आप इसे ब्रेकफ़ास्ट में लें या छाछ बनाकर लें- येहर तरह से फायदेमंद है.

डायट में शामिल करें इन्हें- 

विटामिन बी: ये हैप्पी होर्मोंस को रिलीज़ करने me मदद करता है. इसकी कमी से मेंटल हेल्थ पर असर होता है. आपडिप्रेशन या स्ट्रेस का शिकार हो सकते हैं. बेहतर होगा अपने खाने में पनीर, साबूत अनाज, डेयरी प्रोडक्ट्स और अंडे आदिशामिल करें.

कार्बोहाइड्रेट: ये भी मेंटल हेल्थ के लिए काफ़ी ज़रूरी हैं, इसलिए गेहूं, चावल, आलू से लेकर ताज़ा फल व सब्ज़ियां ज़रूरखाएं.

एंटीऑक्सीडेंट्स: ये आपको बेरीज़ में काफ़ी मात्रा में मिलेंगे. स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, ताज़ा फल, सब्ज़ियां और नींबू में ये पाएजाते हैं और आपको स्ट्रेस फ्री करके हैप्पी हॉर्मोन को बढ़ाने में मदद करते हैं.

ओमेगा ३ फ़ैटी एसिड: ये ब्रेन हेल्थ के लिए काफ़ी फायदेमंद है. डिप्रेशन को कम करके मेंटल हेल्थ को बनाए रखता है. येआपको फ़िश, नट्स, ऑलिव ऑयल, अंडे आदि में मिलेगा.

मेंटल हेल्थ अब सबकी और सेलेब्स की भी प्राथमिकता है 

पिछले दिनों रूबीना दिलैक से लेकर हिना खान तक ने मेंटल हेल्थ के महत्व पर खुलकर कहा. अपने बढ़ते वज़न को लेकरउन्होंने कहा कि बुरे वक़्त में हमने अपने शरीर की ब्यूटी व उसको आकर्षक बनाए रखने की बजाय अपनी मेंटल हेल्थ कोमहत्व दिया. ग्लैम इंडस्ट्री में होने के बावजूद हम ये समझ चुके कि हमें खुद से प्यार करना और खुद को स्वीकारना ज़रूरीहै. 

हालांकि इन सेलेब्स को अपने बढ़े वज़न को लेकर ट्रोल भी होना पड़ा और शुरुआत में वो खुद भी डिप्रेशन महसूस करनेलगी थी लेकिन उन्होंने कमबैक किया और ट्रोल्स को भी मुंहतोड़ जवाब दिया.

  • गीता शर्मा 

मेडिटेशन यानी ध्यान की वो अवस्था जहां सारा फोकस मन पर होता है. भीतर की ओर होता है. भीतरी शक्तियों व ऊर्जाको पहचानने व जगाने पर होता है. मेडिटेशन के बहुत से फ़ायदे हैं और चूँकि यह मन पे फोकस करता है तो ज़ाहिर हैडिप्रेशन जैसे रोग जो मन से ही जुड़े होते हैं उनसे निपटने में यह बेहद कारगर साबित हुआ है.

ध्यान से कैसे दूर भागता है डिप्रेशन?

मेडिटेशन किस तरह डिप्रेशन को कम कर सकता है इसके कई वैज्ञानिक आधार हैं. दरअसल ध्यानावस्था में मस्तिष्क अल्फा स्टेट में पहुंच जाता है, जिससे शरीर में हैप्पी हार्मोंस का रिसाव होता है, यही वजह है कि मेडिटेशन से स्ट्रेस वडिप्रेशन संबंधी तकलीफ़ों में भी राहत मिलती है. 

मेडिटेशन करने पर शरीर में ऊर्जा का संचार होता है, क्योंकि मेडिटेशन शरीर के चक्रों को जागृत करता है, जिससे होर्मोन्समें संतुलन पैदा होता है और विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं.

World Meditation Day 2021

रिसर्च कहते हैं कि मेडिटेशन से ब्रेन में रक्त संचार और इम्यूनिटी बढ़ती है

  • स्टडीज़ व कई तरह के शोधों से यह पता चला है कि मेडिटेशन से पैरासिम्पथेटिक नर्वस सिस्टम सुकून की अवस्थामें पहुंच जाता है, जिससे ब्रेन के उस हिस्से में एक्टीविटी बढ़ जाती है, जो फील गुड केमिकल्स व हार्मोंस रिलीज़करता है.  
  • मेडिटेशन आपके सोचने का नज़रिया बदलकर अकेलेपन की भावना को दूर करता है जिससे नेगेटिविटी दूर होतीऔर डिप्रेशन से राहत मिलती है.
  • रिसर्च कहते हैं कि मेडिटेशन कार्टिसॉल हार्मोन का स्तर घटता है, जिससे ब्रेन हैप्पी स्टेट में पहुंच जाता है.
  • स्टडीज़ यह साबित कर चुकी हैं कि मेडिटेशन स्ट्रेस के कारण बने इंफ्लेमेटरी केमिकल्स को कम करता है. येकेमिकल्स मूड को प्रभावित करके डिप्रेशन पैदा करते हैं. ऐसे में मेडिटेशन के ज़रिए इन केमिकल्स को कम करकेडिप्रेशन को भी कम किया का सकता है.
  • मेडिटेशन से मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ता है और शरीर ऑक्सीजन का इस्तेमाल बेहतर ढंग से कर पाता है.
  • मेडिटेशन से सेल्स का निर्माण बेहतर होता है. स्टैमिना बढ़ता है और साथ ही इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होती है. इस तरहमेडिटेशन पॉज़िटिविटी बढ़ाता है डिप्रेशन के एहसास को दूर करता है.
  • यही नहीं मेडिटेशन कर चुके लोगों ने भी अपने अनुभवों में यह बताया है कि मेडिटेशन सेल्फ डिस्ट्रक्शन से जुड़े विचारों और भावनाओं को दूर करता है और पॉज़िटिव विचारों को बढ़ाता है.
World Meditation Day 2021

मेडिटेशन चक्रों को जगाकर भावनाओं को संतुलित करता है.

हमारे शरीर में मौजूद सात ऊर्जा चक्र शरीर के किसी ना किसी अंग और भावना से जुड़े होते हैं. ये चक्रों सुप्त अवस्था मेंरहते हैं तो इनकी ऊर्जा का हम इस्तेमाल नहीं कर पाते. ये तभी जागते हैं जब हम प्रयास करते हैं और उस प्रयास का रास्तामेडिटेशन से होकर ही गुज़रता है. 

मेडिटेशन से इन चक्रों में वाइब्रेशन पैदा होता है जिससे ये चक्र जाग जाते हैं. इनके जागने से ऊर्जा पैदा होती है, ग्लैंड्सएक्टीव होते हैं, टॉकसिन्स दूर होते हैं, होर्मोन्स बैलेंस्ड होते हैं और भावनायें संतुलित व नियंत्रित रहती हैं. सकारात्मकभावनायें बढ़ती हैं. नकारात्मक और डिप्रेशन से जुड़ी भावनायें दूर होती हैं.

World Meditation Day 2021

सेल्फ अवेयरनेस बढ़ाकर, थिंकिंग प्रोसेस को बदलता है मेडिटेशन

  • मेडिटेशन हमें भीतर से जागरुक करता और सेल्फ अवेयरनेस बढ़ाता है, जिससे हम अपने विचारों को कंट्रोल करसकते हैं. मेडिटेशन से हम अपने प्रति अच्छा महसूस कर पाते हैं, सही दिशा में सोच पाते हैं, क्योंकि मेडिटेशन हमारेथिंकिंग प्रोसेस को बदलता है. जिससे मेंटल हेल्थ बेहतर होती है. जब मेंटली हम मज़बूत होंगे तो डिप्रेशन दूर रहेगा. 
  • मेडिटेशन से ब्रेन में ब्लड फ्लो बेहतर होता है जिससे हानिकारक केमिकल्स घटते हैं.
  • मेडिटेशन से नींद बेहतर होती है और हम सभी जानते हैं कि डिप्रेशन को दूर करने के लिए अच्छी और बेहतर नींदकितनी ज़रूरी है.
  • मेडिटेशन आपके कॉन्फ़िडेंस को बूस्ट करता है, जिससे खुद पर विश्वास बढ़ने लगता है, शरीर में एनर्जी महसूस होनेलगती है और नकारात्मक भाव दूर होने लगते हैं. बढ़ा हुआ आत्मविश्वास ही डिप्रेशन को दूर करता है क्योंकिडिप्रेशन में सबसे ज़्यादा कमी आत्मविश्वास में आती है, जिससे एनर्जी लो होने लगती है. 
  • ऐसे में मेडिटेशन किसी वरदान से कम नहीं.

– गुड्डु शर्मा

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क्या कभी आपके ज़ेहन में यह बात आई है कि मंत्रों का क्या और कितना महत्व है? मंत्रों की शक्ति और उनके हेल्थ बेनीफिट्स के बारे में अक्सर हम सुनते रहते हैं, लेकिन शायद कभी भी हमने हेल्थ और मंत्र के साइंटिफिक कनेक्शन को जानने की कोशिश की हो. अगर हम मंत्रों के हेल्थ कनेक्शन को जान जाएंगे, तो ज़ाहिर है उन्हें बेहतर तरी़के से अपने जीवन में अपनाकर हेल्दी और बेहतर ज़िंदगी जी सकेंगे.

Mantra, Mudra And Meditation

धर्म या अंधविश्‍वास नहीं, ये है विज्ञान
* अक्सर लोग आज भी इसी ग़लतफ़हमी में हैं कि मंत्रों का संबंध किसी विशेष धर्म से है, जबकि तमाम साइंटिफिक रिसर्च और शोधों से यह साफ़ हो चुका है कि मंत्रों का आधार विज्ञान है. धर्म से इनका कोई संबंध नहीं, इसीलिए हर धर्म, समुदाय के लोग इनका प्रयोग करके स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं.
* मंत्र का यदि गूढ़ अर्थ जानें, तो मन का मतलब है- माइंड और त्र का अर्थ है तरंग या कंपन. मंत्रों के जप से जो कंपन होता है, वह न स़िर्फ हमारे मस्तिष्क को प्रभावित करता है, बल्कि मंत्रोच्चारण के समय श्‍वास-प्रश्‍वास की क्रिया व रिदम हमारे ग्लांड्स पर असर डालते हैं, जिसका सीधा प्रभाव हमारी हेल्थ पर होता है.

साउंड इज़ पावर
* मंत्र दरअसल साउंड यानी ध्वनि होते हैं, जिनकी एक निश्‍चित फ्रिक्वेंसी होती है और विज्ञान कहता है, ध्वनि ऊर्जा के सिवा कुछ नहीं है यानी मंत्र का सीधा-सीधा मतलब है- एनर्जी.
* मंत्र जप करने का अर्थ है शक्ति के अलग-अलग स्तर को महसूस करना.
* मंत्र किस तरह से हमारे जीवन व हेल्थ को प्रभावित करते हैं, इसका वर्णन वेदों में हज़ारों वर्ष पूर्व ही किया गया है. लेकिन इसके वैज्ञानिक आधार की खोज अब तक जारी थी. मंत्र और साइंस में बहुत ही गहरा कनेक्शन है.
* मंत्रों के नियमित जाप से हमारे शरीर के नर्वस सिस्टम में एक रिदम में दबाव यानी प्रेशर पैदा होता है, जिससे हमारे चक्र जाग जाते हैं और शरीर एवं मस्तिष्क में एनर्जी पैदा होती है.
* ओहायो यूनिवर्सिटी के शोध के मुताबिक भी यह साबित हुआ है कि ध्यान यानी डीप मेडिटेशन से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफ़ी बढ़ जाती है. यही नहीं, जो लोग रोज़ाना ध्यान करते हैं, उन्हें ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा भी कम हो जाता है, साथ ही मांसपेशियों के दर्द से भी राहत मिलती है.
* साउंड व मंत्रों पर किए गए रिसर्च से यह पता चलता है कि निश्‍चित साउंड फ्रिक्वेंसी हमारे माइंड को विशेष प्रकार की आरामदायक परिस्थिति में पहुंचा देती हैं, जिसे वैज्ञानिक भाषा में अल्फा स्टेट कहा जाता है.
* मंत्रों के जप से शरीर रिलैक्स होता है और तनाव दूर होता है. मंत्र जप के व़क्त हम ध्यानावस्था में पहुंच जाते हैं और हमारा मस्तिष्क अल्फा स्टेट में, जिससे नर्वस सिस्टम बैलेंस होता है और तनाव दूर होता है.
* मंत्रों के नियमित जप से इम्यूनिटी बढ़ती है, क्योंकि इनका प्रभाव मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम पर इस तरह से होता है, जिससे हमारे हार्मोंस प्रभावित होते हैं. सेरोटोनिन और डोपामाइन को हैप्पीनेस हार्मोंस कहा जाता है, मंत्रों के सकारात्मक प्रभाव से हैप्पी हार्मोंस रिलीज़ होकर मस्तिष्क को सुखद अवस्था में पहुंचाते हैं. स़िर्फ इतना ही नहीं, हमारे मूड से लेकर भूख और नींद तक से जुड़े मस्तिष्क के केंद्रों को यह प्रभावित करके हार्मोंस के स्तर को बैलेंस करते हैं, जिससे हमारी इम्यूनिटी बेहतर होती है.

Mantra and Meditation

मुद्रा विज्ञान
मंत्र और साइंस में बहुत ही गहरा कनेक्शन है. मंत्रों के उच्चारण के साथ उनके जाप के समय आप किस मुद्रा में बैठे हैं, यह भी बहुत मायने रखता है. जिस तरह से मंत्रों का वैज्ञानिक आधार है, ठीक उसी तरह मुद्राओं का भी वैज्ञानिक आधार है.
मुद्राओं को यदि सिंपल तरी़के से समझें, तो यह हाथों का योगा है. हमारे हाथों और उंगलियों में जो ऊर्जा है, उसमें संतुलन बनाकर हम स्वस्थ रह सकते हैं.
आयुर्वेद के मूल सिद्धांत पर ही आधारित है योग मुद्रा. आयुर्वेद की मानें, तो वात, पित्त और कफ़- इन तीनों तत्वों के संतुलन से ही शरीर स्वस्थ रहता है. इनमें असंतुलन का अर्थ है शरीर में रोग या अस्वस्थता का पनपना. जिस तरह से योग हमारे शरीर में ऊर्जा उत्पन्न करके तीनों तत्वों को संतुलित करता है, ठीक इसी तरह योग मुद्राएं भी काम करती हैं. हाथों में जो मैग्नेटिक वेव्स होती हैं, उनका प्रयोग करके हम वात, पित्त और कफ़ को संतुलित कर सकते हैं.
हम सभी जानते हैं कि हमारा शरीर 5 तत्वों से बना है- अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी और ईथर. हमारे हाथों की उंगलियां इन तत्वों का प्रतीक हैं. इन तत्वों में असंतुलन से वात, पित्त और कफ़ भी असंतुलित हो जाते हैं और वही हमारी बीमारी व अस्वस्थ होने की वजह बनते हैं, क्योंकि इनमें असंतुलन होने पर हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है. इन तत्वों को संतुलित रखने का सबसे कारगर तरीक़ा है योग मुद्रा!
जो उंगली, जिस तत्व का प्रतिनिधित्व करती है, उसे जब अंगूठे के संपर्क में लाया जाता है, तो वो तत्व संतुलन में आ जाता है. दरअसल मुद्रा शरीर में चुंबकीय तरंगें (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स) निर्मित करती है, जिससे शरीर में संबंधित तत्व संतुलित होता है.

मेडिटेशन: ध्यान की संपूर्ण अवस्था
हमारे मन में बहुत-सी शक्तियां छिपी होती हैं, लेकिन हम उन्हें पहचानते ही नहीं या फिर कभी प्रयास ही नहीं करते उनसे एकाकार होने का और मन में उतरकर उन शक्तियों को जागृत करने का. अपने मन को जानने या उससे एकाकार होने की प्रक्रिया ही है मेडिटेशन यानी ध्यान!
* यह शरीर के चक्रों को जागृत करके ऊर्जा प्रदान करता है.
* दरअसल हमारे शरीर का हर अंग किसी न किसी चक्र से संबंध रखता है. यदि किसी अंग में कोई समस्या आ जाए, तो संबंधित चक्र को एक्टिवेट करके उस अंग को संतुलित किया जा सकता है और उससे संबंधित बीमारी को ठीक किया जा सकता है.
* ध्यान की अवस्था में शरीर में हैप्पी हार्मोंस का रिसाव होता है.
* मेडिटेशन कई तरह के शारीरिक कष्टों का भी निवारण करता है.
* मेडिटेशन से इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होती है.
* हाई बीपी, अनिद्रा, मांसपेशियों के दर्द, हार्ट डिसीज़, डायबिटीज़, ओबेसिटी और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारी को भी बेहतर तरी़के से मैनेज किया जा सकता है.

मस्तिष्क में रक्तसंचार बढ़ाता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है मेडिटेशन…
कई तरह के शोधों से पता चला है कि मेडिटेशन से स्ट्रेस से संबंध रखनेवाले हार्मोन कार्टिसॉल का स्तर घटता है, पैरासिम्पथेटिक नर्वस सिस्टम सुकून की अवस्था का निर्माण करता है, जिससे मस्तिष्क के उस हिस्से में क्रियाशीलता बढ़ जाती है, जो हैप्पी हार्मोंस रिलीज़ करता है. हार्ट रेट संतुलित होती है, मस्तिष्क में रक्तसंचार बढ़ता है, स्टैमिना बढ़ता है, शरीर ऑक्सीजन का इस्तेमाल बेहतर ढंग से कर पाता है, सेल्स का निर्माण बेहतर होता है.

Meditation

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