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बहरापन  दूर करने के 15 आसान उपाय (15 Home Remedies For Deafness)

जब कान (Ear) की वायु शब्दवाही स्रोतों को रोक देती है, तो व्यक्ति को बहरेपन (Deafness) की शिकायत होने लगती है. इस बीमारी (Disease) में सुनने की क्षमता कम या बिल्कुल समाप्त हो जाती है. बहरापन तीन प्रकार का होता है. ऊंचा सुनाई देना, कठिनता से सुनना और बिल्कुल न सुनना. वृद्धों का तथा पुराना बहरापन असाध्य होता है. यानी इसे ठीक करना बहुत मुश्किल होता है.

Home Remedies For Deafness

कान के मध्य या भीतरी भाग में सूजन तथा फोड़े के कारण या कानों में जीव-जंतुओं के चले जाने से बहरापन आ सकता है. कई बीमारियों के दुष्परिणामस्वरूप भी बहरापन होने की संभावना रहती है, जैसे- खसरा, टायफॉइड, मम्प्स, सिफिलिस आदि. बहरापन आनुवंशिक भी होता है, जो चार-छह महीने के बाद बच्चे में दिखाई देने लगता है. कान में पानी जाने या कान बह रहा हो, फिर भी उसका इलाज न कराने से बहरापन आ जाता है. किसी आघात से, भयंकर विस्फोटों या धमाकों के कारण भी बहरापन आ सकता है.

जब बच्चा साल-डेढ़ साल का हो जाने पर मां-पापा जैसे सामान्य शब्द भी न बोल पाए, तो किसी कान के विशेषज्ञ यानी ईएनटी डॉक्टर से बच्चे में बहरेपन की जांच ज़रूर करा लेनी चाहिए, क्योंकि अक्सर बहरेपन के कारण ही बच्चा न तो बोल पाता है और न ही कोई प्रतिक्रिया व्यक्त कर पाता है.

* सप्ताह में एक बार कानों में शुद्ध सरसों का तेल हल्का गुनगुना करके डालना फ़ायदेमंद होता है. इससे बहरापन दूर होता है.

* ताज़ा मूली का रस, सरसों का तेल और शहद तीनों बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से मिला लें. इसकी दो से चार बूंद दिन में चार बार कान में डालने से श्रवण शक्ति बढ़ती है.

* बहरापन होने पर नियमित रूप से कुछ दिनों तक तुलसी के पत्तों का रस निकालकर हल्का गर्म करके कान में डालना चाहिए.

* सोंठ, गुड़ और घी खाने से कम सुनने में लाभ होता है और कान की सांय-सांय की आवाज़ भी बंद होती है.

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* 4-5 बूंद सरसों का तेल कान में डालनेे से कम सुनाई पड़ने की शिकायत दूर हो जाती है.

* अदरक के रस और शहद में थोड़ा-सानमक मिलाकर 2-4 बूंद कान में डालें, अवश्य फ़ायदा करेगा.

* बहरेपन की स्थिति में नियमित रूप से दालचीनी का तेल रात को सोते समय कान में डालें. कुछ ही दिनों में लाभ होगा.

* लहसुन की 3-4 कलियां कूटी हुई, एक टेबलस्पून जैतून का तेल व आधा टीस्पून प्याज़ का रस लें. एक कप मेें जैतून का तेल डालकर उसमें प्याज़ का रस व लहसुन की कलियां डालकर अच्छी तरह से मिला लें. इस मिश्रण को दोनों कानों में 3-4 बूंद डालकर रूई से ढंक दें.

* अखरोट या कड़वे बादाम तेल की कुछ बूंदें कान में डालने से भी सुनने की क्षमता बढ़ती है.

* दूध में थोड़ा-सा हींग मिलाकर कान में कुछ बूंद डालने से फ़ायदा होता है.

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* 25 ग्राम गुड़ में एक चम्मच सोंठ मिलाकर क़रीब चार महीने तक नियमित रूप से लेने से बहरेपन की शिकायत दूर होती है.

* हर रोज़ एक ग्लास गर्म पानी में एक चम्मच सेब का सिरका और एक चम्मच शहद मिलाकर दो बार पीएं, इससे सुनने की क्षमता बढ़ेगी.

* सरसों के तेल में कुछ दाने धनिया के डालकर पकाएं. जब आधा रह जाए, तब इसे छानकर दो-दो बूंद कान में डालें. लाभ होगा.

* बारीक़ पिसा हुआ सुहागा कान में डालकर उसके ऊपर 5-6 बूंद नींबू का रस डालने से कान के भीतर गैस उत्पन्न होगी और मैल फूलकर बाहर आ जाएगी. इससे कान का परदा साफ़ हो जाएगा और सुनाई देने लगेगा.

– हरिवंश ममता परमेश्‍वर

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अनिद्रा की समस्या से यूं निजात पाएं (8 Ways To Cure Sleeping Problems Naturally)

अनिद्रा (Insomnia) का मतलब केवल नींद (Sleep) ना आना नहीं है, बल्कि रात में नींद का बार-बार टूटना या सुबह के पहले ही नींद खुल जाना भी अनिद्रा रोग ही है. तनाव, डिप्रेशन, चिंता आदि भी नींद में बाधक होते हैं. यदि रात में देर तक नींद नहीं आती, तो इसका कारण अक्सर तनाव, डिप्रेशन ही होता है. वातावरण से भी हमारी नींद प्रभावित होती है.

Sleeping Problems

शोर-शराबे, तेज़ रोशनी, ज़्यादा गर्मी या ठंडी अथवा नए अपरिचित परिवेश के कारण भी नींद में बाधा आती है, जिससे अनिद्रा की समस्या होने लगती है. आमतौर पर अनिद्रा की समस्या से परेशान लोगों को जागृतावस्था में आलस्य, सुस्ती, थकान और सिरदर्द की शिकायत बनी रहती है. इससे उनकी कार्यक्षमता भी घट जाती है.

* कोकम को चटनी की तरह पीसकर पानी मिलाकर छान लें. इसमें शक्कर मिलाकर शरबत बनाएं. इस शरबत को पीने से अनिद्रा की समस्या दूर होती है. इसका सेवन कम से कम 15 दिन तक अवश्य करना चाहिए.

* एक लीटर पानी को अच्छी तरह उबाल लें. फिर आंच से उतारकर उसमें आधा कप कद्दूकस किया हुआ प्याज़ डालकर 5-10 मिनट रहने दें. ठंडा होने पर छान लें. इस पानी को एक चम्मच की मात्रा में लेकर उसमें पांच बूंद शहद मिलाकर बच्चों को पिलाने से वे गहरी नींद सोते हैं.

* पीपरामूल का पाउडर बनाकर रख लें. हर रोज़ सोने से पहले आधा चम्मच पाउडर गुड़ मिलाकर खाएं और ऊपर से गर्म दूध पीकर सो जाएं. इससे अच्छी नींद आती है और सुबह उठने पर मन प्रसन्न रहता है.

* चार जायफल लेकर पाउडर बनाकर 16 पुड़िया बना लें. हर दिन सोने से पहले एक पुड़िया पानी के साथ सेवन करें. इससे अनिद्रा की समस्या से निजात मिलेगा और अच्छी नींद आएगी.

* एक पका हुआ कद्दू लेकर उसका छिलका निकाल दें. फिर उसे काटकर उसका

बीज और पल्प निकाल दें. इसके बाद कद्दू के बड़े-बड़े टुकड़े करके पानी में उबालें. ज़रा नरम पड़ने पर आंच से उतारकर कपड़े पर डालकर पानी निथार दें. उबले हुए कतरों को दुगुनी शक्कर की चाशनी बनाकर उसमें डाल दें. इसमें केसर और इलायची इच्छानुसार डाले जा सकते हैं. इस मुरब्बे का नियमित सेवन करने से अनिद्रा की समस्या दूर होती है और अच्छी नींद आती है.

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* प्याज़ में मसाले भरकर उसका अचार बनाएं. यह अचार इतना हो कि ज़्यादा से ज़्यादा 15 दिन तक सेवन किया जा सके. हर 15 दिनों में ताज़ा अचार बनाएं. यह अचार खाने से अच्छी नींद आती है. साथ ही थकावट दूर होती है, खाने में रुचि बढ़ती है और पेट भी साफ़ होता है.

* सोने से पहले एक ग्लास गर्म दूध पीने से अच्छी नींद आती है.

सुपर टिप

सोने से पहले मुट्ठीभर चेरी का सेवन या फिर चेरी का जूस लेना फ़ायदेमंद रहता है. इससे अच्छी नींद आती है.

पथ्य पर भी ध्यान दें…

सोने का प्रयास करते समय चिंता-तनाव पर से ध्यान हटाने के लिए मन ही मन अच्छी कविताएं गुनगुनाएं या अपने आराध्य भगवान का ध्यान करें. सुबह उठकर हल्की एक्सरसाइज़ करें और शाम को भोजन के बाद कुछ समय तक टहलें. रात में सिगरेट, चाय, कॉफी आदि उत्तेजक पदार्थों से परहेज़ रखें. दिन में झपकियों से बचें.

भरपूर नींद लेना है ज़रूरी

भोजन की तरह पर्याप्त नींद भी ज़रूरी है. इससे शरीर स्वस्थ रहता है और शारीरिक विकारों से भी बचाव होता है. दिन में परिश्रम करने से शरीर की शक्ति कम हो जाती है. रात को अच्छी नींद सोने से शरीर को आराम मिलता है, स्फूर्ति पैदा होती है तथा अगले दिन काम करने के लिए नई शक्ति मिलती है. यही नींद का सबसे बड़ा रहस्य है. अतः हर व्यक्ति को भरपूर नींद लेनी चाहिए.

– ऊषा गुप्ता

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रागी खाएं, रोग भगाएं (Health Benefits Of Ragi OrFinger Millet)

आजकल ज़्यादातर इंसान किसी न किसी बीमारी से परेशान हैं. किसी को हाई ब्लड प्रेशर है, तो किसी को कब्ज़. कोई डायबिटीज़ से डर रहा है, तो किसी का इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो रहा है. ऐसे में सिर्फ़ कुछ लाल-भूरे दाने कमाल कर सकते हैं. ये दाने हैं अनाज रागी (Ragi) के. एक्स्पर्ट्स भी मानते हैं कि रागी से ढेरों बीमारियों का इलाज संभव है. जानिए कितना फ़ायदेमंद है रागी.

Ragi

वज़न कम करना है, कब्ज़ की भी दिक़्क़त है, डायबिटीज़ भी दस्तक दे रहा है, दिल की भी चिंता है, कैल्शियम की कमी भी है-तो इन सबका सस्ता और बेहतरीन इलाज रागी है. एक ऐसा मोटा अनाज, जो अपने छोटे-छोटे दानों में ढेरों बीमारियों का इलाज समेटे है. बहुत आसान तरी़के से रागी का सेवन किया जा सकता है. ये आपके खाने को इस कदर पौष्टिक बना देता है कि आप सोच भी नहीं सकते. इसको ऐसे समझ सकते हैं कि 100 ग्राम रागी में पूरे 344 मिलीग्राम कैल्शियम होता है. यह ग्लूटन फ्री भी है. इसका सेवन वे लोग भी कर सकते हैं, जिन्हें ग्लूटेन से एलर्जी है.

बॉडी होगी रिलैक्स

रागी को नियमित खानपान में शामिल करना बॉडी रिलैक्सेशन के लिए भी फ़ायदेमंद है. दरअसल, इसमें मौजूद तत्वों के चलते यह अवसाद से निकलने में मदद करती है तो ग़ुस्से और इन्सोम्निया से भी राहत दिलाती है.

इन्सोम्निया नींद न आने की बीमारी होती है. रागी से यह सारे फ़ायदे इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स की वजह से होते हैं. ख़ासतौर पर ट्रिप्टोफ़ैन और अमीनो एसिड नाम के एंटीऑक्सीडेंट्स रागी को बेहद स्पेशल अनाज बना देते हैं.

त्वचा भी चमकाए

रागी के छोटे-छोटे दाने त्वचा पर भी बड़ा असर करते हैं. रागी का सेवन त्वचा को जवां और चमकदार बना देता है. इसमें मौजूद मिथायोनिन और लाइसिन त्वचा की कसावट को बनाए रखने और झुर्रियों को रोकने में मदद करते हैं.

पाचन होगा आसान

रागी पेट का भी भरपूर ख़्याल रखता है. रागी को आहार का हिस्सा बनाने से ये पाचनतंत्र को ठीक रखता है. दरअसल रागी में मौजूद ऐल्कलाइन तत्व खाने को जल्दी पचाने में मदद करता है. बहुत ही मानी हुई बात है कि पेट ख़राब होना, कई और दिक़्क़तों की वजह भी बनता है. ऐसे में रागी का सेवन कई बीमारियों का एक साथ इलाज करेगा.

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हड्डियों का रखता है ख़्याल

आजकल सबसे ज़्यादा परेशान करने वाली  समस्याओं में से एक है हड्डियों से जुड़ी बीमारी. पर रागी के पास इसका भी इलाज है. रागी में पाया जाने वाला फ़ास्फ़ोरस हड्डियों के विकास में सहायक होता है.

नुक़सान भी हैं

रागी का ज़रूरत से ज़्यादा सेवन नुक़सानदायक होता है. ज़्यादा सेवन से शरीर में आक्ज़ैलिक एसिड बढ़ता है. इसके अलावा गुर्दे की पथरी वालों को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए.

रखें ध्यान

रागी के छिलकों को हटाकर ही सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसके छिलके को पचाने में दिक़्क़त होती है. इसके लिए रागी को पहले अच्छे से धो लें और उसकी परत यानी छिलके हटा दें.

– शिल्पी शर्मा

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एसिडिटी व गैस से छुटकारा पाने के 5 चमत्कारी घरेलू नुस्ख़े (5 Best Home Remedies To Get Rid Of Acidity And Gas)

एसिडिटी व गैस (Acidity And Gas) से छुटकारा पाने के 5 चमत्कारी घरेलू नुस्ख़े (Home Remedies) आज़माकर देखिए, आपको मिनटों में एसिडिटी व गैस से राहत मिल जाएगी. दादीमां के घरेलू नुस्ख़े बहुत ही आसान और असरदार हैं. यदि आप भी अक्सर एसिडिटी व गैस से परोशान रहते हैं, तो एसिडिटी व गैस से छुटकारा पाने के 5 चमत्कारी घरेलू नुस्ख़े ज़रूर आपके बहुत काम आएंगे.

Home Remedies for Acidity

क्यों होती है एसिडिटी?
इसे अम्लपित्त भी कहते हैं. इसमें आमाशय में एसिड ज़्यादा बनता है. इससे भोजन ठीक से पचता नहीं. उससे जो अन्न रस बनता है, वह अम्ल में बदल जाता है. इससे पाचन संबंधी कई विकार पैदा हो जाते हैं. लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहने से अम्लपित्त नामक रोग हो जाता है. यह रोग वातावरण में आर्द्रता के कारण होता है, इसलिए यह बरसात में ज़्यादा होता है. इसके अतिरिक्त तेज़ मिर्च-मसाले वाले पदार्थ, खट्टे-चटपटे खाद्य पदार्थों के ज़्यादा सेवन से भी अम्लरस ज़्यादा बनने लगता है. चाय, कॉफी, सिगरेट, शराब आदि के ज़्यादा सेवन से भी अम्लता बढ़ जाती है.एसिडिटी होने पर पेट, छाती व गले में जलन होती है, खट्टी डकारें आती हैं. डकार के साथ-साथ गले में खट्टा व तीखा पानी भी आ जाता है. कभी-कभी उल्टी भी हो जाती है. अम्लपित्त में अपच, कब्ज़ व दस्त की भी शिकायत होती है.

क्यों होती है पेट में गैस?
पेट में गैस एक आम समस्या बनती जा रही है. आमतौर पर पाचन संबंधी गडबड़ी से पेट में गैस बनने लगती है. यह किसी अन्य रोग का लक्षण भी हो सकता है. अनियमित भोजन और नींद से पेट में गैस होती है. तनाव, भय, क्रोध, द्वेष व चिंता में रहने, चाय-कॉफी, धूम्रपान, लंबे समय तक भूखे रहने, मसाला व तैलीय भोजन से भी गैस बनने लगती है. पेट में गैस होने पर खुलकर भूख नहीं लगती. पेट में हवा भरी लगती है. पेट व पीठ में हल्का दर्द होता है, दस्त साफ़ नहीं होती या शौच सूख जाता है, डकारें ज़्यादा आती हैं, थकावट व आलस्य घेरे रहते हैं.

एसिडिटी व गैस से छुटकारा पाने के 5 चमत्कारी घरेलू नुस्ख़े जानने के लिए देखें वीडियो:

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एसिडिटी व गैस से छुटकारा पाने के 5 अन्य घरेलू नुस्ख़े:
1) 1 चम्मच अजवायन में चौथाई चम्मच नींबू का रस मिलाकर चाटें. गैस शीघ्र शांत होगी.
2) एसिडिटी से छुटकारा पाने के लिए अदरक के रस में थोड़ा-सा सेंधा नमक और भुना हुआ जीरा डालकर सेवन करें और ऊपर से आधा ग्लास छाछ पीएं.
3) 1 ग्लास गर्म दूध में 2 चम्मच एरंडी का तेल डालकर पीएं. ऐसा करने से गैस से तुरंत लाभ होगा.
4) चोकर सहित आटे की रोटी खाने से एसिडिटी और गैस में फायदा होता है.
5) 1 ग्लास गन्ने का रस गरम करके उसमें नींबू रस और थोड़ा-सा सेंधा नमक डालकर दिन में कम से कम 2 बार पीएं. ऐसा करने से गैस से राहत मिलती है.

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सौंफ खाने के 19 लाजवाब फ़ायदे (19 Benefits Of Fennel Seeds Or Saunf)

बरसों से सौंफ (Fennel) का इस्तेमाल मुखशुद्धि यानी माउथफ्रेशनर के साथ-साथ औषधि के रूप में होता रहा है. इसके अलावा यह घर-घर में मुखवास के रूप में भी मशहूर है. सूखी सौंफ (Dry Fennel) पाचनतंत्र पर प्रभावकारी असर करती है. सौंफ से अपच, कब्ज़ से लेकर पीरियड्स की समस्या तक में आराम मिलता है.

Benefits Of Fennel Seeds

* सौंफ को भूनकर उसमें आवश्यकतानुसार सेंधा नमक व नींबू का रस मिलाकर एक बॉटल में रख दें. इसका इस्तेमाल मुखवास के तौर पर करें. भोजन करने के बाद इसका सेवन करने से मुखशुद्धि होती है और खाना आसानी से पचता है.

* कब्ज़ की शिकायत हो, तो रात में सोते समय गुनगुने पानी के साथ सौंफ का चूर्ण लें.

* गले में खराश होने पर सुबह-सुबह सौंफ चबाने से बंद गला खुल जाता है.

* पेटदर्द में भुनी हुई सौंफ चबाने से तुरंत आराम मिलता है.

* हाथ-पांव में जलन होने की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया कूट-छानकर मिश्री मिला लें. भोजन के बाद एक टीस्पून इस चूर्ण को लेने से कुछ ही दिनों में आराम मिल जाता है.

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* सौंफ का काढ़ा बनाकर पीने से पित्त बुख़ार से तुरंत छुटकारा मिलता है.

* आंखों की जलन व थकान को दूर करने के लिए सौंफ के पत्ते का रस या फिर सौंफ का पानी पीना काफ़ी फ़ायदेमंद होता है.

* सौंफ के रस में थोड़ी-सी हींग मिलाकर पीने से पेशाब की समस्या, रुक-रुककर पेशाब होना आदि परेशानी दूर होती है.

* पेचिश की समस्या होने पर पानी में सौंफ मिलाकर उबाल लें. फिर उसमें थोड़ा-सा नमक मिलाकर दिनभर में दो-तीन बार पीएं.

* यदि दांत निकलते समय दर्द के कारण बच्चा बहुत रोता हो, तो गाय के दूध में थोड़ी-सी सौंफ मिलाकर उबाल लें. हर रोज़ 1-1 चम्मच दिनभर में तीन-चार बार बच्चे को पिलाएं.

* भोजन करने के आधे घंटे बाद एक चम्मच सौंफ खाने से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है.

* यदि आप सिगरेट-बीड़ी पीने की आदत से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो सौंफ को घी में भूनकर बॉटल में भरकर रख लें. जब भी सिगरेट पीने की तलब हो, तब आधा चम्मच सौंफ का सेवन कर लें.

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* एक-एक चम्मच सौंफ व धनिया को पीसकर चूर्ण बना लें. इसमें एक चम्मच मिश्री मिलाकर दिनभर में आधा-आधा चम्मच तीन बार पानी के साथ लेने से माइग्रेन (आधासीसी) की समस्या दूर होती है.

* सौंफ का रस और गुलाबजल बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से हिचकी दूर होती है.

* आधे लीटर पानी में एक टीस्पून सौंफ को डालकर उबाल लें. जब पानी एक चौथाई रह जाए, तब उसमें 2 टीस्पून घी और एक कप गाय का दूध मिलाकर पीएं. इससे बहरेपन की समस्या दूर होती है.

* सौंफ रक्त को शुद्ध करनेवाली एवं चर्मरोग नाशक है. प्रतिदिन सुबह-शाम दो टीस्पून सौंफ बिना मीठा यानी शक्कर मिलाए, वैसे ही चबा-चबाकर नियमित रूप से कुछ दिनों तक खाने से रक्त शुद्ध होता है.

* गर्भावस्था के दौरान प्रतिदिन भोजन के बाद सौंफ चबाने से संतान गौर वर्ण की होती है.

* 500 ग्राम सौंफ को बारीक़ कूटकर आधे लीटर पानी में भिगो दें. फिर उबालकर छान लें. इसमें पाव किलो शक्कर डालकर दोबारा उबालकर गाढ़ा शर्बत बना लें. जिन स्त्रियों के शरीर की प्रकृति गर्म हो, उनके लिए सौंफ का यह शर्बत रामबाण के समान है. सौंफ के शर्बत का सेवन करने से मां के स्तन में दूध की वृद्धि भी होती है.

सुपर टिप

सौंफ के पानी का काढ़ा बनाकर उसमें दूध मिलाकर पीने से अनिद्रा यानी नींद न आने की समस्या दूर होती है.

– ऊषा गुप्ता

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दर्द से यूं पाएं छुटकारा (How To Get Relief From Different Types Of Pain)

How To Get Relief From Pain

अक्सर हम कई तरह के दर्द (Pain) से परेशान रहते हैं. जहां चोट या अन्य कारणों से उत्पन्न दर्दवाली त्वचा, मांसपेशी व तंत्रिकाओं की क्षति में उपचार, दवाइयों आदि से आराम मिलता है, वहीं मांसपेशियों में उत्पन्न दर्द में मालिश और सेंक से भी लाभ होता है, क्योंकि इससे वात दोष का शमन होता है.

सेंक के लिए सादा गर्म पानी, नमक, कपूर या तारपीन के तेल मिले गर्म पानी से स्नान करना फ़ायदेमंद रहता है. यह सेंक दवा या मरहम लगाने के बाद ही करना चाहिए. सेंक करने से रक्तवाहिनियां फैल जाती हैं और प्रकुपित तंत्रिकाएं शांत हो जाती हैं. इस प्रकार हमारे शरीर का दर्द शांत हो जाता है. इसके अलावा यहां पर हम कुछ उपयोगी घरेलू नुस्ख़े दे रहे हैं, जिनके प्रयोग से तमाम तरह के दर्द से राहत मिलती है.

* घुटनों, हाथों की उंगलियों या बांहों के जोड़ों में टीस भरा दर्द उठता हो और कोई भी काम करने में या वज़न उठाने पर जोड़ों में दर्द होता हो, तो दिन में चार-पांच बार टमाटर का सेवन करते रहें या टमाटर का एक ग्लास रस सुबह-शाम लें. इससे कुछ दिनों में ही आपको आश्‍चर्यजनक रूप से लाभ होगा.

* चूना व शहद मिलाकर लेप करने से पसली के दर्द से राहत मिलती है या फिर सरसों को पानी में पीसकर गरम करके इसका लेप दर्दवाले स्थान पर बार-बार लगाएं.

* इसके अलावा एक ग्लास पानी में दो चम्मच जीरा डालकर गरम करें और उस गरम पानी में तौलिया भिगोकर अच्छी तरह निचोड़ें और उसकी भाप से सेंक करें. कुछ ही घंटों में आराम मिल जाएगा.

* 100 ग्राम मेथीदाना हल्का-सा भूनें. फिर इसे हल्का-सा कूटकर उसमें चौथाई भाग काला नमक मिला लें. सुबह-शाम दो चम्मच गरम पानी के साथ इसकी फंकी लें. इस प्रयोग को निरंतर 15 दिनों तक करने से कैसा भी असहय दर्द हो, दूर हो जाएगा.

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* शरीर के किसी अंग में दर्द की टीस उठती हो, तो आप सुबह-शाम पीसे हुए आंवले का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ फांक लें. फिर कुछ देर बाद पिसी हुई इलायची दूध में डालकर पीएं. इस प्रयोग से अंगों में चुस्ती-स्फूर्ति बनी रहेगी और शरीर के किसी भी अंग में दर्द की टीस नहीं उठेगी.

* लहसुन पीसकर लगाने से बदन के हर अंग का दर्द जाता रहेगा. किंतु इसे जल्द हटा लेना चाहिए, नहीं तो फफोले पड़ने का डर रहता है.

* राई यानी सरसों का लेप करने से हर प्रकार का दर्द मिट जाता है.

* गठिया के दर्द में एरंडी का छिला हुआ बीज पहले दिन एक, दूसरे दिन दो, इस प्रकार सात बीज तक खाएं. फिर प्रतिदिन एक-एक कम करके एक बीज पर ले आएं. इससे गठिया का दर्द हमेशा के लिए गायब हो जाएगा.

* जोड़ों के दर्द में अजवायन को पानी में डालकर पका लें और उस पानी की भाप दर्दवाले स्थान पर दें. देखते ही देखते दर्द दूर हो जाएगा.

* लहसुन की दो कलियां कुचलकर तिल के तेल में डालकर तेल गर्म करें और उससे जोड़ों पर मालिश करें. इससे भी बहुत लाभ होता है.

पथ्य-अपथ्यः जोड़ों के दर्द से बचने व इससे पीड़ित मरीज़ को दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए रोग उत्पादक कारणों को टालना चाहिए. खट्टा, तीखा, ठंडा, रूखा भोजन नहीं करना चाहिए. चर्बी बढ़ानेवाले खाद्य पदार्थों से परहेज़ करना चाहिए. पौष्टिक और पचने में आसान चीज़ों को आहार में शामिल करें. शारीरिक श्रमवाले कामों से बचना चाहिए. साथ ही जागरण व मानसिक तनावों से भी दूर रहना चाहिए.

सुपर टिप

कड़वे तेल में अजवायन और लहसुन जलाकर उस तेल से मालिश करने से हर प्रकार के दर्द से छुटकारा मिलता है.

– मूरत पन्नालाल गुप्ता

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नकसीर फूटना रोकने के 5 आसान घरेलू उपाय (5 Best Natural Home Remedies To Stop Nose Bleeding)

नकसीर फूटना (Nose Bleeding) रोकने के 5 आसान घरेलू उपाय (Home Remedies) से आप मिनटों में नकसीर फूटने की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं. नकसीर फूटना एक आम समस्या है, लेकिन जब कभी अचानक नाक से खून बहने लगता है तो अक्सर हम घबरा जाते हैं. हालांकि नकसीर फूटना कोई गंभीर समस्या नहीं है, लेकिन ऐसा यदि बार-बार हो, तो ये किसी बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम का संकेत हो सकता है. यदि आप या आपके आसपास किसी को अचानक नकसीर फूटे, तो नकसीर फूटना रोकने के 5 आसान घरेलू उपाय ज़रूर ट्राई करें.

Remedies To Stop Nose Bleeding

 

नकसीर फूटने के क्या कारण होते हैं?
* जब वातावरण में आद्रता कम हो जाती है तो गर्म और सूखे वातावरण में भी नोज ब्लीडिंग होने लगती है.
* चिलचिलाती धूप से सीधे एयर कंडीशन वाले रूम में आने से भी नकसीर फूट सकती है.
* सर्दियों में नोज ब्लीडिंग यानी नकसीर फूटने की समस्या ज़्यादा पाई जाती है, क्योंकि इस समय श्‍वसन मार्ग के ऊपरी हिस्से में संक्रमण की संभावना अधिक होती है.
* नाक का दबाव के साथ बहना भी नकसीर फूटने का कारण हो सकता है.
* लगातार छींकने से भी कई बार नकसीर फूट सकती है.
* शराब के अधिक सेवन से भी नकसीर फूट सकती है.
* नाक में ट्यूमर होने के कारण भी नकसीर फूटने की समस्या हो सकती है.

नकसीर फूटना रोकने के 5 आसान घरेलू उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

 

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नकसीर फूटना रोकने के अन्य घरेलू उपचार:
* नकसीर फूटने पर सबसे पहले रोगी को तुरन्त ठंडे स्थान पर ले जाना चाहिए. पैर से जूते-मोजे उतार देने चाहिए, ताकि शरीर की गर्मी तलुवों द्वारा बाहर निकल सके.
* नकसीर फूटने पर तुरंत बैठ जाएं और आगे की तरफ झुक जाएं. सिर ऊंचा न करें, ऐसा करने से खून फिर से नाक में जा सकता है.
* नाक पर रूमाल या टिशू पेपर रखें, ताकि वो खून को सोख ले.
* अंगूठे और तर्जनी उंगलियोंं की मदद से नाक की जड़ को थोडी देर तक दबाए रखें, ताकि खून का प्रवाह रुक जाए.
* सामान्य उपचार के आधे घंटे बाद भी यदि नाक से खून का बहना न रुके, तो डॉक्टर से संपर्क करें.

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हर बीमारी का इलाज नीम (Cure Your Ailments With Neem)

Neem Benefits

सिर से लेकर पैर तक के रोगों की इलाज की दवा है नीम. इसके साथ ही यह घर में कीड़े-मकोड़ों से भी रक्षा करता है. नीम के कुछ असरदार उपाय इस प्रकार हैं.

* नीम के पत्ते डालकर उबाले गए पानी से स्नान करने से चर्मरोग, फोड़े-फुंसी, खाज-खुजली मिट जाती है.

* पेट में दर्द होने पर 10 ग्राम नीम के बीज, 10 ग्राम सोंठ, 10 ग्राम तुलसी की पत्तियां तथा 8-10 काली मिर्च मिलाकर गाढ़ी चटनी  बनाकर थोड़ी-थोड़ी देर में रोगी को चटाएं. अवश्य फ़ायदा होगा.

* भोजन न पचने के कारण खट्टी डकारें, सिरदर्द, जी मिचलाना और कभी-कभी बुखार की शिकायत भी हो जाती है. ऐसे में निम्बोली खाने से पेट के उपर्युक्त तकलीफें ठीक हो जाती हैं.

* रोज़ सुबह नीम की दातून करने से दांत मजबूत और चमकदार बनते हैं व पायरिया की शिकायत भी नहीं होती.

* नीम का तेल प्रतिदिन सिर पर लगाने से जुएं और लीखें ख़त्म हो जाती हैं.

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* फोड़ा यदि पककर फूट गया हो, तो नीम के पत्तों को पीसकर उसकी लुगदी फोड़े पर बांधने से आराम मिलता है.

* पायरिया तथा मसूड़ों से ख़ून निकलने की समस्या हो तो नीम का तेल फ़ायदेमंद होता है. ऐसे में नियमित रूप से मसूड़ों पर इसकी मालिश करनी चाहिए.

* 10 बूंद नीम का तेल पान पर लगाकर खाने से दमा व खांसी में फ़ायदा होता है.

* यदि उल्टी हो रही हो तो 25 ग्राम नीम की पत्तियां पीस लें. इसमें 5-6 दानें काली मिर्च मिलाकर आधा कप पानी में घोलकर एक बार पी लें. उल्टी रुक जाएगी

* नीम की पत्तियों का रस निकालकर रुई के फाहे को भिगोएं और आंखों पर रखें. आंखों की जलन और लालिमा दूर हो जाएगी.

* यदि आंखों में सूजन व खुजली हो, तो नीम की 15-20 पत्तियों को पानी में उबालें. फिर उसमें 5 ग्राम फिटकरी घोल कर छान लें. साफ़ रुई द्वारा इस पानी से आंखें धोएं. दो-तीन बार ऐसा करने से सूजन और खुजली समाप्त हो जाती है.

* गाय के दूध में नीम का तेल मिलाकर पीने से प्रदर रोग में बहुत फ़ायदा होता है.

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* नीम के बीज को पानी में भिगोकर व पीसकर तथा पोटली बनाकर योनि पर रखने से योनि का दर्द समाप्त हो जाता है.

* नीम की पत्तियों को पीसकर हाथ-पैरों पर लेप करने से जलन शांत होती है.

* मलेरिया में नीम के रस का काढ़ा सर्वोत्तम दवा है. 50 ग्राम नीम के पत्ते को 4-5 काली मिर्च मिलाकर पीसें. इसे गर्म पानी में घोलकर पिलाएं. मलेरिया ठीक हो जाएगा.

* नीम की पत्तियों के रस में शहद मिलाकर चाटने से पेट के कीड़े मर जाते हैं. शहद की जगह हींग भी मिला सकते हैं.

* नकसीर फूटती हो तो नीम की छाल को पानी में पीसकर गाढ़ा लेप बनाएं. इस लेप को माथे पर लगाने से नकसीर से राहत मिलती है.

* खसरा होने पर नीम की कच्ची कोपलें तथा काली मिर्च बराबर मात्रा में पीसकर प्रतिदिन खाएं. खसरा सूखने पर नीम के पानी से नहलाएं तथा नीम का ही तेल लगाएं.

* शरीर में अम्लपित्त की वजह से कई विकार पैदा हो जाते हैं. ऐसे में नीम की छाल, सोंठ और काली मिर्च बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाएं. 20 ग्राम चूर्ण रोज़ सवेरे ताज़े पानी के साथ लेने से अम्लपित्त की शिकायत दूर हो जाती है.

–  शिल्पी शर्मा

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मुंह/सांसों की बदबू से छुटकारा पाने के 5 घरेलू उपाय (5 Home Remedies To Get Rid Of Bad Breath Instantly)

मुंह/सांसों (Mouth/Breath) की बदबू हटाने के 5 घरेलू उपाय (Home Remedies) अपनाकर आप मिनटों में मुंह/सांसों की बदबू से छुटकारा पा सकते हैं. मुंह/सांसों की बदबू हटाने के 5 घरेलू उपाय बहुत ही कारगर हैं और इनके कोई साइड इफेक्ट भी नहीं हैं. यदि आप भी मुंह/सांसों की बदबू से परेशान रहते हैं और सांसों की बदबू की वजह से आपको भी शर्मिंदा होना पड़ता है, तो मुंह/सांसों की बदबू हटाने के 5 घरेलू उपाय ज़रूर ट्राई करे.

Home Remedies For Bad Breath

मुंह /सांसो की बदबू के 5 प्रमुख कारण
जिन लोगों के मुंह /सांसो से बदबू आती है, उन्हें इसके कारण अक्सर शर्मिंदगी महसूस होती है. मुंह /सांसो की बदबू के 5 प्रमुख कारण हैं:

1) लहसुन-प्याज़, तैलीय पदार्थ आदि का अधिक सेवन करने से मुंह /सांसो से बदबू आती है.
2) अधिक समय तक खाली पेट रहने या डायटिंग करने से मुंह /सांसो से बदबू आती है.
3) धूम्रपान या मादक पदार्थों का सेवन करने से मुंह /सांसो से बदबू आती है.
4) दांतों की सफाई ठीक से न करने से मुंह /सांसो से बदबू आती है.
5) दांतों की बीमारियों के कारण भी मुंह /सांसो से बदबू आती है.

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मुंह/सांसों की बदबू हटाने के 5 घरेलू उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

संतरा खाने के 11 लाजवाब फ़ायदे (11 Amazing Benefits Of Eating Orange)

Benefits Of Orange

  1. हर रोज़ भोजन के बाद दो संतरा खाने से पेट के भारीपन, अपच व वायु विकार से छुटकारा मिलता है.
  2. खाली पेट संतरे के रस में हल्का नमक मिलाकर नियमित सेवन करने से बरसों पुराना कब्ज़ भी दूर हो जाता है.
  3. पेटदर्द होने पर आधे कप संतरे के रस में थोड़ी-सी भुनी हुई हींग मिलाकर पीएं. तुरंत लाभ होगा.
  4. एक कप संतरे के रस में चुटकीभर काला नमक और थोड़ी-सी मिर्च मिलाकर पीने से तुरंत लाभ पहुंचता है. पुराने अजीर्ण में कुछ दिन इसका नियमित रूप से सेवन करें. अजीर्ण जड़ से समाप्त हो जाएगा.
  5. आधे कप संतरे के रस में थोड़ा-सा शहद डालकर पीएं. गर्भवती स्त्रियों को होनेवाली उल्टी में यह विशेष रूप से लाभकारी है.

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  1. संतरे के रस में अंगूर का रस मिलाकर पीने से बच्चों को सूखा रोग में लाभ पहुंचता है.
  2. इंफ्लूएंजा में आधा कप संतरे का रस दिन में तीन बार पीएं. आराम मिलेगा.
  3. ठंडी तासीर होने की वजह से गर्मियों में होनेवाले दस्त में संतरे के रस का सेवन फ़ायदा पहुंचाता है.
  4. संतरा एसीडीटी की रामबाण औषधि है. संतरे के रस को थोड़े भुने हुए जीरे तथा सेंधा नमक के साथ सेवन करने से एसीडीटी से होनेवाली बीमारियां दूर हो जाती हैं, जैसे-खट्टी डकार, छाती में जलन आदि.

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  1. यदि जीभ का स्वाद बिगड़ गया हो तथा भोजन से अरुचि हो गई हो, तो भोजन के तुरंत बाद एक संतरा रोज़ खाएं. यह भोजन को पचाने में मदद करता है तथा किसी भी प्रकार का विकार नहीं होने देता.
  2. यदि हाथ-पैर में दर्द-ऐंठन होती हो, तो एक ग्लास संतरे का रस पीने से आराम मिलता है.

* इसके अलावा दाद, खाज, फुंसी आदि चर्म रोग में ताज़े संतरे के छिलके को पीसकर लगाएं. शीघ्र लाभ होगा.

* संतरे के ताज़े छिलकों को चेहरे पर रगड़ें. धीरे-धीरे दाग़ गायब हो जाएंगे. इससे चेचक के दाग़ भी हल्के हो जाते है.

– वंशज बडोनी

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सीताफल के अनगिनत फ़ायदे (Profound Benefits Of Custard Apple)

Benefits Of Custard Apple

Benefits Of Custard Apple

विटामिन से भरपूर सीताफल के कई बेहतरीन फ़ायदे (Benefits Of Custard Apple) हैं. सीताफल एक मीठा व स्वादिष्ट फल होने के साथ-साथ अनगिनत औषधीय गुणों से भरपूर है. सीताफल शरीर को शीतलता पहुंचाता है. यह पित्तशामक, पौष्टिक, रक्तवर्द्धक, वातदोषशामक और हृदय के लिए बहुत ही लाभदायक है. इसमें मौजूद विटामिन ए त्वचा, बालों और आंखों के लिए बेहद उपयोगी है. विटामिन सी से भरपूर होने के कारण यह रोगप्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है. इसमें प्रचुर मात्रा में पोटैशियम व मैग्नीशियम होता है, जो हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता हैै.

*    सीताफल का नियमित सेवन करने से दांत व मसूड़ों में होनेवाले दर्द से छुटकारा मिलता है.

*    सीताफल आंखों की देखने की क्षमता बढ़ाता है, क्योंकि इसमें विटामिन सी और राइबोफ्लेविन काफ़ी ज़्यादा होता है. इससे चश्मे का नंबर भी दूर किया जा सकता है.

*    यदि डायरिया की समस्या हो, तो कच्चे सीताफल को काटकर सुखा लें. फिर इसे पीसकर मरीज़ को खिलाएं. इससे काफ़ी आराम मिलता है.

*    सीताफल का नियमित सेवन करने से शरीर का एनर्जी लेवल बढ़ता है. ये दिमाग़ को रिलैक्स कर अनिद्रा, थकान व मानसिक तनाव को दूर करने में भी मदद करता है.

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*    जूं की परेशानी में सीताफल बेहद उपयोगी है. इसके लिए सीताफल के बीजों का बारीक़ चूर्ण बनाकर थोड़ा-सा पानी डालकर पेस्ट तैयार कर लें. इसे रात को बालों में लगाएं, सुबह बाल धो लें. दो-तीन दिन तक ऐसा करने से जुएं ख़त्म हो जाएंगे.

*    सीताफल में लौह तत्व की प्रचुरता होने से यह एनीमिया में फायदेमंद है.

* बाल कम होने या फिर गंजेपन में भी सीताफल उपयोगी है. सीताफल के बीज को बकरी के दूध के साथ पीसकर पेस्ट बना लें. इसे अच्छी तरह से बालों में लगा लें. इससे बाल बढ़ते हैं. साथ ही इससे मस्तिष्क को ठंडक भी मिलती है.

*    सीताफल में विटामिन सी की पर्याप्त मात्रा होने से ये शरीर से विषैले तत्वों को निकालने में मदद करता है. इसके अलावा इससे त्वचा भी निखरती है.

*    रिसर्च के अनुसार, सीताफल में ऐसे कई पोषक तत्व हैं, जो कैंसर से बचाव करते हैं. इसमें मौजूद ऐलकोनॉइड्स व एसिटोजिनिन ट्यूमर सेल्स को बढ़ने से रोकते हैं.

*    सीताफल का छिलका पीसकर सेवन करने से पतले दस्त या आंव की समस्या दूर होती है.

*    बच्चे के कान में दर्द हो, तो सीताफल के गूदे के रस में कुछ बूंद गाय का ताज़ा दूध मिलाकर कान में डालें.

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*    सीताफल खाने से ब्लड शुगर लेवल कम होता है, इस कारण डायबिटीज़ की प्रॉब्लम से बचा जा सकता है.

*    जो काफ़ी दुबले-पतले हैं और अपना वज़न बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें नियमित रूप से सीताफल का सेवन करना चाहिए.

*    शरीर में कहीं भी दर्द हो, तो सीताफल के गूदे का रस निकालकर लगाने से दर्द में राहत मिलती है.

*    गठिया यानी जोड़ों के दर्द में सीताफल का सेवन काफ़ी फ़ायदेमंद है.

*    यदि आपका शरीर हमेशा गर्म रहता है, तो आपको नियमित रूप से सीताफल का सेवन करना चाहिए. इससे शरीर का ताप

संतुलित रहेगा.

*    सीताफल के पत्ते व छाल भी उपयोगी होते हैं, इससे फोड़े-फुंसी में आराम मिलता है.

सुपर टिप

सीताफल में मौजूद कॉपर व डायटरी फाइबर अपच, कब्ज़ व अन्य पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में काफ़ी कारगर साबित होते हैं.

– अभिषेक गुप्ता

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पेट में कीड़े हो तो आज़माएं ये घरेलू इलाज (Get Rid Of Intestinal Worms With These Effective Home Remedies)

मनुष्य के पेट (Stomach) में विशेषकर आंतों (Intestines) में विभिन्न प्रकार के कीड़े (Worms) पाए जाते हैं. पाचन संस्थान से संबंधित इन कीड़ों को ही आम लोग पेट के कीड़े (Stomach Worms) के नाम से संबोधित करते हैं. ये कई तरह के होते हैं, जो तरह-तरह के विकारों को उत्पन्न करते हैं.

Home Remedies For Intestinal Worms

मधुर-अम्ल पदार्थों का अधिक सेवन तथा अजीर्ण रहने पर भी भोजन करना पेट के कीड़ों को पैदा करने में मुख्य भूमिका अदा करते हैं. इसके अतिरिक्त पतले पदार्थों तथा गुड़ का अधिक सेवन, व्यायाम न करना या शारीरिक श्रम से बचना, दिन में अधिक सेवन, परस्पर विरुद्ध पदार्थों का सेवन आदि कृमियों के उत्पत्ति के सामान्य कारण हैं. ये कारण कृमियों की उत्पजत्त और उनके विकास के लिए अनुकूल परिस्थिति उत्पन्न करते हैं.

पेट में जब कीड़े हो जाते हैं तो उनके कारण निम्न लक्षण पैदा होते हैं- मिचली, जी मिचलाना, लाल स्राव, अजीर्ण, अरुचि, उल्टी, ज्वर, दुर्बलता, छींक, नज़ला-जुकाम आदि. इसके अतिरिक्त पेट में तीव्र दर्द, भूख की कमी, रक्ताल्पता आदि लक्षण भी पाए जाते हैं.

* नारंगी के सूखे छिलके और बायविडंग दोनों समभाग में लेकर कूट-पीस कर 3 ग्राम चूर्ण को गर्म पानी के साथ प्रतिदिन एक बार तीन दिन तक देने से कीड़े मर जाएंगे. उन मरेग हुए कीड़ों को निकालने के लिए चौथे दिन एरंडी का तेल पिलाएं.

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* ईख के सिरके में 25 ग्राम चना रात को भिगो दें और सुबह उसे चबा-चबा कर खाएं. आठ घंटे तक कुछ भी न खाएं-पीएं. कीड़े मरकर बाहर निकल आएंगे.

* मूली के रस में  थोड़ा नमक मिलाकर सबिह-शाम दिन में दो बार सेवन कीजिए. इस प्रयोग को निरंतर चार दिनों तक करने के बाद पेट की अंतड़ियों में फंसे सारे कीड़े मल के साथ निकल जाएंगे और आपका पेट एकदम स्वच्छ हो जाएगा.

* पीपल के पंचांग का चूर्ण गुड़ में मिलाएं और सौंफ के अर्क के साथ सुबह-शाम पांच-पांच ग्राम मात्रा में दें. तीन दिनों में सारे कीड़े खत्म हो जाएंगे.

* आपके घर का कोई भी सदस्य पेट के कीड़ों से त्रस्त है और बार-बार इलाज कराने पर भी कीड़ों से मुक्ति नहीं मिल पा रही है, तो आप उसे दिन में तीन-चार बार छाछ पिलाएं. छाछ में भुना हुआ जीरा, थोड़ा नमक और पिसी हुई काली मिर्च डाल सकते हैं. आप देखेंगे कि एक सप्ताह के भीतर ही अंतड़ियों में छुपे पड़े कीड़े बाहर निकल आएंगे.

* छाछ में बायविडंग का चूर्ण मिलाकर पिलाने से छोटे बच्चों के पेट के कीड़े मर जाते हैं या निकल जाते हैं.

* सुबह उठते ही दो-तीन माशा नमक पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक नियमित पीने से पेट के भीतर के कीड़े बाहर आ जाते हैं और नये कृमियों की उत्पत्ति रुक जाती है.

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* सोंठ और बायविडंग के चूर्ण को शहद के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े ख़त्म हो जाते हैं.

* कड़ुवे परवल के पत्ते एक तोला और धनिया एक तोला रात को दस-बारह तोला पानी में भिगोकर रखें. सुबह उसे छानकर उसमें शहद मिलाएं. इसे तीन ख़ुराक बनाकर दिन में तीन बार सेवन करने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं.

* सहिजन का क्वाथ शहद में मिलाकर दिन में दो बार पीने से सूक्ष्म से सूक्ष्म कृमि भी निकल जाते हैं.

रोगी को ऐसा आहार न दें जो हजम होने में कठिन हो. अजीर्ण कृमियों की वृद्धि में उपयुक्त वातावरण तैयार करता है, अतः अजीर्ण से बचें. कड़वे आहार ऐसे रोगियों के लिए उपयोगी होते हैं. पत्तेदार आहार, हरड़ व लहसुन पथ्य हैं. चीनी या उससे बने पदार्थों, चॉकलेट आदि से परहेज रखें.

– रेखा गुप्ता

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