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जर्म्स से जुड़े मिथक और सच्चाइयां (What Are The Common Myths About Germs And The Truth)

हम सभी जानते हैं कि संक्रमण से बचने का सबसे बेहतरीन उपाय है अपने हाथों को अच्छी तरह से धोते रहना. लेकिन जर्म्स (Germs) यानी रोगाणु को लेकर बहुतों के मन में कई तरह की भ्रांतियां रहती हैं. इन्हीं बातों पर एक नज़र डालते हैं.

Myths About Germs

जर्म्स दरअसल, सूक्ष्म जीव होते हैं, जो यदि हमारे शरीर में प्रवेश कर जाएं, तो संक्रमण व बीमारियों को जन्म दे सकते हैं. जर्म्स सामान्यतया संक्रमित लोगों को छूने, इंफेक्टेड एरिया के संपर्क में आने से अधिक फैलते हैं. छींक, खांसी, हवा में मौजूद धूल-मिट्टी से अधिक जर्म्स फैलते हैं, जैसे- सर्दी-ज़ुकाम, फ्लू आदि. आइए, इससे जुड़े मिथक व सच्चाई के बारे में जानते हैं.

मिथक: पब्लिक टॉयलेट सीट से आप जल्दी बीमारी की चपेट में आते हैं.

सच्चाई: यह सही है कि पब्लिक टॉयलेट हाइजीन के दृष्टिकोण से उतना सुरक्षित नहीं माना जाता है. लेकिन इससे आप बीमार पड़ जाएंगे, इसकी संभावना बहुत कम होती है. टॉयलेट सीट की बजाय टॉयलेट के दरवाज़े का हैंडल अधिक संक्रमित होता है.

मिथक: किचन की सफ़ाई के लिए स्पंज अच्छा है.

सच्चाई: यह सही है कि स्पंज से किचन की सफ़ाई आसानी से हो जाती है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि स्पंज में भी अनगिनत बैक्टीरिया होते हैं. वे प्लेटफॉर्म पर जमा गंदगी को केवल साफ़ कर सकते हैं, पर उसे पूरी तरह से कीटाणुमुक्त नहीं कर सकते. फिर भी यदि स्पंज इस्तेमाल ही करना है, तो इसे रोज़ अच्छी तरह से क्लीन करना बहुत ज़रूरी है. वैसे पेपर टॉवेल इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है.

मिथक: बैक्टीरिया से बचने के लिए जर्म्स फ्री सोप फ़ायदेमंद रहता है.

सच्चाई: यह सच है कि साफ़-सुथरे हाथ से आप ख़ुद को रोगमुक्त रख सकते हैं, पर इसके लिए जर्म्स फ्री साबुन का इस्तेमाल करना अधिक लाभदायक रहता है, ये सच नहीं है. नियमित रूप से इस्तेमाल किए जानेवाले सोप से भी आप हाथों को अच्छी तरह से क्लीन कर सकते हैं.

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मिथक: सार्वजनिक सतहों को छूने से बचना चाहिए.

सच्चाईः बिल्कुल, ऐसा करना सेहत के लिए लाभदायक रहता है, क्योंकि हरेक व्यक्ति बार-बार हाथ धोने जैसे नियमों का पालन कम ही करता है. पब्लिक प्लेस के दरवाज़ों के हैंडल, कार, टेबल आदि पर जर्म्स के अधिक रहने की संभावना भी रहती है. इससे बचने के लिए टिश्यू पेपर, ग्लव्स आदि का उपयोग कर सकते हैं या फिर उन्हें अच्छी तरह से पोंछकर इस्तेमाल कर सकते हैं.

Myths About Germs

मिथक: ऑर्गेनिक फ्रूट्स को धोने की ज़रूरत नहीं होती.

सच्चाई: ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. इन पर भी जर्म्स हो सकते हैं. माना कि ऑर्गेनिक फल सेहत के लिए फ़ायदेमंद रहते हैं, लेकिन बाज़ार से घर तक आने की प्रक्रिया में वे कई स्तरों से गुज़रते हैं, जिससे उनके संक्रमित होने व जर्म्स फैलने की गुंजाइश अधिक रहती है.

मिथक: सभी जर्म्स नुक़सानदायक होते हैं.

सच्चाई: सभी जर्म्स हानिकारक नहीं होते. यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट जॉर्ज (लंदन) के

डॉ. टिम प्लांच सभी जर्म्स को ख़राब नहीं मानते. उनके अनुसार, हमारी बॉडी में अनगिनत बैक्टीरिया मौजूद हैं, इसके बावजूद हम हेल्दी हैं. माना कि जर्म्स बीमारी का कारण बनते हैं, पर सभी बैक्टीरिया नुक़सानदायक नहीं होते. विश्‍वभर में हज़ारों तरह के बैक्टीरिया हैं, जिनमें से बहुत से इंसान के लिए हानिरहित हैं.

मिथक: यदि आपको बुख़ार है, तो एंटीबायोटिक मेडिसिन का कोर्स ज़रूर करना है.

सच्चाई: इस बात में कोई सच्चाई नहीं है, क्योंकि एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरियल इंफेक्शन का इलाज करते हैं. आमतौर पर सभी बुख़ार बैक्टीरिया की वजह से नहीं होते. उनका आम सर्दी, फ्लू या वायरल इंफेक्शन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेता.

मिथक: वैक्सीन (टीके) सुरक्षित नहीं होते. इनसे ख़तरा रहता है.

सच्चाई: सभी टीकों को पूरी तरह से जांच-परखकर इस्तेमाल में लाया जाता है, इसलिए यह सेफ होते हैं. वैसे भी गंभीर संक्रमित बीमारियों से बचने का बेहतरीन व सेफ तरीक़ा है वैक्सीन.

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Myths About Germs

मिथक: एंटीबायोटिक्स से होनेवाले किसी भी तरह के साइड इफेक्ट का मतलब है कि आपको एलर्जी है और इसे फिर कभी नहीं ले सकते.

सच्चाई: ऐसा नहीं है. एंटीबायोटिक दवाओं के बहुत सारे साइड इफेक्ट्स हैं, पर इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि एलर्जी हो.

मिथक: गर्म पानी जर्म्स को अच्छी तरह से साफ़ कर देता है.

सच्चाई: शोधों से यह पता चला है कि ठंडा पानी भी गर्म पानी की तरह ही जर्म्स को दूर कर देता है. साथ ही साबुन का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पानी की अपेक्षा अधिक बैक्टीरिया को दूर करता है.

उपयोगी टिप्स

* हाथ को नियमित रूप से कम-से-कम 20 सेकंड्स तक पानी से अच्छी तरह से धोएं.

* इसके अलावा साबुन या फिर लिक्विड सोप से हाथों को साफ़ करें.

* हर रोज़ छुई जानेवाली सतहें, जैसे- नल, दरवाज़े के हत्थे, टीवी के रिमोट, फोन आदि को साफ़ करके उपयोग करें.

* सफ़ाई के लिए इस्तेमाल होनेवाले नैपकीन, कपड़े, स्पंज आदि को भी नियमित रूप से अच्छी तरह से गर्म पानी से साफ़ करते रहें.

रिसर्च

एक रिसर्च के दौरान इकट्ठा किए गए किचन

नैपकीन्स में से 49% नैपकीन्स में बैक्टीरिया अधिक पाए गए. दरअसल, किचन नैपकीन या तौलिया बर्तन पोंछने से लेकर हाथ पोंछने तक कई तरह के कामों में उपयोग में लाया जाता है. इसके द्वारा कई तरह के जर्म्स या बैक्टीरिया से इंफेक्शन फैलने की संभावनाएं अधिक होती हैं. कई तरह के जर्म्स से दूषित नैपकीन उनके फैलने का कारण बन जाते हैं. फिर वो नुक़सानदायक जर्म्स भोजन तक फैल जाता है. इसलिए किचन में इस्तेमाल किए जानेवाले नैपकीन को नियमित रूप से धोना व साफ़ किया जाना बेहद ज़रूरी है. ध्यान रहे, इसे दोबारा उपयोग में लाए जाने से पहले इसे अच्छी तरह से पूरी तरह सुखाना भी बेहद ज़रूरी है.

Dr. Ajay Rana

इंस्टिट्यूट ऑफ लेज़र एंड एस्थेटिक मेडिसिन के संस्थापक डॉ. अजय राणा के अनुसार, “जर्म्स हर जगह होते हैं और वे डरावने भी हो सकते हैं, ख़ासकर जब आप उन्हें एक माइक्रोस्कोप के ज़रिए देखते हैं. लेकिन ये छोटे बैक्टीरिया, जो आम सर्दी-ज़ुकाम से लेकर जीवन के लिए ख़तरनाक संक्रमण तक सब कुछ पैदा कर सकते हैं, को अक्सर ग़लत समझा जाता है. हमारे मुंह, त्वचा और यहां तक कि हमारी इंटेस्टाइन में मौजूद बैक्टीरिया के रूप में जर्म्स का हमारे साथ गहरा संबंध है. हमारे शरीर में ऐसे बहुत सारे जर्म्स भी होते हैं, जो हमारी अच्छी सेहत के लिए ज़रूरी हैं. ये गुड बैक्टीरिया ख़तरनाक बीमारियों से भी हमारी रक्षा करते हैं, हमारे इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाते हैं, ताकि वे उनसे लड़ सकें. जब सहायक बैक्टीरिया हमारे शरीर में बढ़ते हैं, तो वे हमारे रक्षक के रूप में काम करते हैं, लेकिन अक्सर हम इंफेक्शन का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करके गुड बैक्टीरिया को मार डालते हैं. जब कि ये गुड बैक्टीरियाज़ कई बीमारियों से लड़ने में हमारी मदद करते हैं. इसलिए कह सकते हैं कि जर्म्स से हर कोई डरता है, पर यह भी उतना ही सच है कि कई जर्म्स हमारे सेहत के साथी भी होते हैं.”

– ऊषा गुप्ता

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कपूर का कमाल (11 Incredible Benefits Of Camphor)

हिंदू धर्म में पूजा के बाद कपूर जलाकर आरती करने की परंपरा है. पूजन, आरती जैसे धार्मिक कार्यों में कपूर का विशेष महत्व है. पूजा में प्रयोग किया जानेवाला कपूर हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फ़ायदेमंद है.

Benefits Of Camphor

वैज्ञानिक शोधों से सिद्ध हुआ है कि कपूर की सुगंध से जीवाणु, विषाणु इत्यादि बीमारी फैलानेवाले जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है व बीमारियां नहीं फैलती हैं.

* त्वचा संबंधी रोगों के इलाज में कपूर बेहद फ़ायदेमंद होता है. नारियल के तेल में कपूर व गंधक का पाउडर मिलाकर दाद, खाज, खुजली वाले स्थान पर लगाने से फ़ायदा मिलता है. मुहांसों पर भी कपूर का तेल लगाने की सलाह दी जाती है.

* फटी एड़ियों को ठीक करने में कपूर बहुत उपयोगी होता है. इसके लिए टब में गर्म पानी लें और उसमें कपूर मिलाकर पैर डालकर 10-15 बैठें. ऐसा करने से एड़ियां ठीक होती हैं.

* कपूर की टिकिया को रूमाल में लपेटकर सूंघते रहने से सर्दी-ज़ुकाम से राहत मिलती है.

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* कपूर व चंदन को तुलसी के रस में घिसकर लेप बनाकर सिर पर लगाने से सिरदर्द में आराम मिलता है. इसके अलावा कपूर को नींबू के रस के साथ मिलाकर सिर पर मलें. यह सिरदर्द का अचूक इलाज है. जोड़ों का दर्द या कमर दर्द होने पर कपूर के तेल से उस स्थान की मालिश करें. तुरंत आराम मिलेगा. शरीर के किसी भी अंग में दर्द होने पर आप इस तेल से मालिश कर सकते हैं. कपूर गठिया के रोगियों के लिए फ़ायदेमंद होता है. मांसपेशियों में दर्द होने पर इसे लगाने पर तुरंत आराम मिलता है.

* नारियल के तेल में कपूर डालें. इस तेल से बालों की जड़ों में हल्के हाथों से मालिश करें. इससे बाल स्वस्थ व मज़बूत होते हैं. रूसी, जुएं, बालों का गिरना इत्यादि समस्या होने पर सरसों के तेल में कपूर मिलाकर बालों पर लगाएं. इससे काफ़ी फ़ायदा होगा. इसके अलावा सौ ग्राम नारियल के तेल में चार ग्राम कपूर मिलाकर बॉटल में रखें. इस तेल को रात में सोने से पहले बालों में लगाकर मालिश करें. कुछ दिनों के अंदर रूसी गायब हो जाएगी.

* हींग और कपूर के पाउडर को  बराबर मात्रा में मिलाकर दांत के बीच दबाकर रखें. दर्द से तत्काल आराम मिलेगा. पान में देसी कपूर डालकर दिन में तीन-चार बार चबाने से पायरिया की शिकायत दूर हो जाती है. मसूड़ों में किसी तरह की समस्या होने पर कैस्टर ऑयल में कपूर मिलाकर मसूड़ों पर मलने से बहुत फ़ायदा मिलता है.

* आग से जलने या चोट के कारण त्वचा पर दाग़ पड़ने पर थोड़ा-सा कपूर पानी में मिलाकर प्रभावित स्थान पर नियमित रूप से कुछ दिनों तक लगाने से निशान मिट जाता है.

* देसी घी में कपूर मिलाकर रात को सोते समय पैरों के तलवों पर मालिश करने से अच्छी नींद आती है.

* मिश्री को बारीक पीसकर उसमें थोड़ा-सा कपूर पाउडर मिलाकर छालों पर लगाएं. यह नुस्ख़ा बच्चों के मुंह के छालों के लिए बेहद लाभकारी होता है.

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* ऊनी या रेश्मी कपड़े रखते समय छोटी-सी पोटली में कपूर बांधकर कपड़ों के बीच में रख दें. इससे कीड़े नहीं लगेंगे. तकिये के नीचे व पलंग के चारों तरफ़ कपूर की पोटली बांधकर रखने से खटमल नहीं आते हैं.

– आभा जैन

दादी मां के अन्य घरेलू नुस्ख़े/होम रेमेडीज़ जानने के लिए यहां क्लिक करें-  Dadi Ma Ka Khazana

जानें कालीमिर्च के 17 फ़ायदे (17 Amazing Black Pepper Benefits: More Than Just A Spice)

कालीमिर्च (Black Pepper) वातनाशक व पित्तकारक है. इसमें पेपराइन नामक केमिकल होता है, जिसके कारण इसका स्वाद तीखा होता है. इसी कारण यह पाचन क्रिया में भी उपयोगी होता है. इससे पाचन क्षमता बढ़ती है. कालीमिर्च में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो कैंसर से लड़ते हैं, ख़ासकर ब्रेस्ट कैंसर से. कालीमिर्च का उपयोग कफ़, खांसी, फोड़े-फुंसी, पेट संबंधी समस्या आदि के इलाज में भी किया जाता है.

Black Pepper Benefits

* ज़ुकाम के साथ हल्का बुख़ार भी हो, तो 5-6 साबूत कालीमिर्च, 7-8 तुलसी के पत्ते, 2-3 लौंग, एक इंच अदरक का टुकड़ा, एक इलायची- इन सभी को पानी में उबाल लें. फिर इसमें दूध डालकर चाय की तरह गरम-गरम दिन में तीन बार पीएं. इससे पसीना आकर शरीर हल्का होता है और बुख़ार उतर जाता है.

* आधा टीस्पून कालीमिर्च पाउडर और आधा टीस्पून शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार चाटें. इससे खांसी ठीक हो जाती है.

* पाचनशक्ति कमज़ोर हो और भोजन डायजेस्ट न होता हो, तो जीरा, सोंठ, सेंधा नमक, पीपरि, कालीमिर्च- सब समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर रख लें. भोजन के बाद एक चम्मच चूर्ण पानी से लें. भोजन शीघ्र पचने लगेगा.

* गैस की शिकायत होने पर एक कप पानी में आधे नींबू का रस, आधा चम्मच कालीमिर्च का चूर्ण व आधा चम्मच काला नमक मिलाकर नियमित रूप से कुछ दिनों तक सेवन करने से गैस की शिकायत दूर हो जाती है.

* कालीमिर्च पाउडर को घी और मिश्री के साथ मिलाकर चाटने से बंद गला खुल जाता है और आवाज़ सुरीली होती है.

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* कालीमिर्च को घी में बारीक़ पीसकर लेप करने से दाद, खाज, फोड़े-फुंसी आदि चर्म रोग दूर हो जाते हैं. छोटी फुंसियां भी दिन में दो बार लेप करने से तुरंत बैठ जाती हैं.

* 8-10 कालीमिर्च पानी में उबालकर इस पानी से गरारे करें. इससे गले का संक्रमण ठीक हो जाता है.

* मस्तिष्क में ताज़गी लाने तथा स्मरणशक्ति बढ़ाने के लिए कालीमिर्च का प्रयोग ब्राह्मी की पत्तियों के साथ मिलाकर किया जाता है. थोड़े-से घी में 3-4 ग्राम ब्राह्मी की पत्ती उबाल लें. इसमें पिसी कालीमिर्च तथा शक्कर मिलाकर चाटें.

* आधा चम्मच घी, आधा चम्मच पिसी हुई कालीमिर्च और आधा चम्मच मिश्री, तीनों को मिलाकर सुबह चाटें. इससे आंखों की कमज़ोरी दूर होती है व रोशनी भी बढ़ती है.

* बदहज़मी की शिकायत होने पर एक नींबू काटकर कालीमिर्च और काला नमक लगाएं. और उसे गरम करके चूसें.

* कालीमिर्च को उबालकर उसके पानी से गरारा करने से मसूड़ों की सूजन कम हो जाती है. मसूड़े स्वस्थ तथा मज़बूत होते हैं.

* कालीमिर्च का चूर्ण तुलसी के रस और शहद में मिलाकर सेवन करने से मलेरिया दूर हो जाता है.

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* अदरक और नींबू के रस में एक टीस्पून कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से पेटदर्द दूर होता है.

* कालीमिर्च का बारीक़ चूर्ण शहद के साथ चाटकर ऊपर से छाछ पीने से दीर्घकालीन पेचिश मिटता है. इस नुस्ख़े का सेवन दिन में तीन बार करें.

* कालीमिर्च का चूर्ण, शक्कर और घी एक साथ मिलाकर सेवन करने से सिर का चकराना दूर होता है.

* कालीमिर्च को दही और पुराने गुड़ में मिलाकर पीने से नकसीर (नाक में से ख़ून गिरना) बंद होता है.

सुपर टिप

पाचन क्रिया ठीक करने के लिए कालीमिर्च व सेंधा नमक पीसकर इसे भुनी हुई अदरक के बारीक़ टुकड़ों के साथ मिलाकर खाएं.

– ऊषा गुप्ता

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प्रतिदिन कितना खाएं नमक? (How Much Salt Should You Have per Day?)

खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही नमक स्वास्थ्य के लिए भी ज़रूरी है, मगर जिस तरह किसी भी चीज़ की अधिकता हानिकारक होती है, उसी तरह ज़रूरत से ज़्यादा नमक का सेवन भी आपकी सेहत बिगाड़ सकता है. अतः स्वस्थ रहने के लिए कैसे संतुलित रखें नमक की मात्रा? आइए, जानते हैं.

Salt
क्यों ज़रूरी है नमक?
नमक शरीर में पानी के स्तर को नियंत्रित करने के अलावा पाचन तंत्र व किडनी को ठीक से काम करने, ब्लड शुगर लेवल को कम करने, तनाव, अवसाद और अन्य भावनात्मक समस्याओं से भी राहत दिलाता है. यह मांसपेशियों को सही तरी़के से काम करने में भी मदद करता है. शरीर में नमक की मात्रा कम होने से कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ जाता है. साथ ही थकान, मांसपेशियों में जकड़न, चक्कर आना, भूख न लगना और लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है.

ज़्यादा मात्रा है हानिकारक
नमक शरीर के लिए ज़रूरी तो है, मगर इसकी अधिकता कई बीमारियों को न्योता देती है. अधिक नमक के सेवन से हाइपर टेंशन, हाई ब्लड प्रेशर का ख़तरा बढ़ जाता है, नतीजतन हार्ट अटैक और स्ट्रोक की संभावना भी बढ़ जाती है. ज़्यादा नमक से ख़ून में आयरन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे एसिडिटी बढ़ जाती है. भूख न लगने पर भी भूख का एहसास बना रहता है, जिससे शरीर में ज़्यादा कैलोरी बनने लगती है और मोटापा बढ़ता है.

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यूं संतुलित करें नमक
1. खाने में तेज़ नमक न खाएं.
2. नमकीन स्नैक्स कम से कम खाएं.
3. दही में नमक मिलाकर न खाएं.
4. तला हुआ भोजन कम खाएं.
5. बिना नमक मिला सलाद खाएं.
6. पापड़, चटनी, चिप्स, सॉल्टेड पीनट (मूंगफली), पॉपकॉर्न, सोया सॉस, कैचअप और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं.
7. हार्ट, किडनी व फेफड़ों के बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को लो सोडियम नमक खाना चाहिए.
8. सोडिमय क्लोराइड की मात्रा संतुलित करने के लिए अपनी डायट में ज़्यादा पोटैशियम वाली चीज़ें जैसे- फल व सब्ज़ियां शामिल करें.

उम्र के मुताबिक़ प्रतिदिन नमक का सेवन
विश्‍व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, हर व्यक्ति को उम्र के अनुसार नमक का सेवन कम करना चाहिए.
0-12 महीने- एक ग्राम से कम
1-3 साल- 2 ग्राम
4-6 साल- 3 ग्राम
7-10 साल- 4 ग्राम
11 साल और उससे ऊपर- 5 ग्राम

ये भी जानें
. हमारे शरीर में कुल नमक का 24 प्रतिशत हड्डियों में होता है.
. नमक में 40 प्रतिशत सोडियम और 60 प्रतिशत क्लोरीन होता है.
. आयोडिन की कमी से होने वाले गॉइटर रोग को दूर करने के लिए 1924 में आयोडिन युक्त नमक का प्रचलन शुरू हुआ.

 

चोट-मोच, सूजन के लिए उपयोगी घरेलू नुस्ख़े (Useful Home Remedies For Injury, Swelling)

राह चलते, घर का कामकाज करते हुए, फिसल जाने पर या गिर जाने पर मोच, चोट या घाव हो जाए या फिर सूजन आ जाए, तो निम्न घरेलू नुस्ख़ों (Home Remedies) द्वारा इन्हें दूर किया जा सकता है.

Home Remedies For Swelling

* मोच के स्थान पर सरसों का तेल लगाकर उस पर हल्दी का पाउडर छिड़कें तथा छोटे तौलिए से ढंक दें. एक कपड़े में नमक की पोटली बांध लें. इसे तवे के ऊपर गर्म करके तौलिए के ऊपर से सहने योग्य सेंक करें.

* त्वचा या घाव से बहते ख़ून पर फिटकरी पीसकर बुरक दीजिए. इससे ख़ून का बहना रुक जाएगा.

* नीम की हरी पत्तियों को पीसकर उसकी लुगदी बनाकर घाव पर रखकर पट्टी बांध दें.

* गूलर के पत्तों को पीसकर घाव पर कुछ दिनों तक लगाने से घाव शीघ्र भर जाता है.

* चोटवाली जगह पर खानेवाला चूना व शहद मिक्स करके लगाने से चोट जल्द ठीक हो जाती है.

* हाथ-पैर में हुए फ्रैक्चर से सूजन व दर्द होने पर प्याज़ को कूटकर उसमें हल्दी व सरसों का तेल मिला लें. इसे हल्का गर्म करके चोटवाले स्थान पर बांधकर रातभर रहने दें.

* चोट के कारण घाव हो गया हो, तो वहां पर घी में कपूर मिलाकर लगाएं.

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* दूब को पीसकर चोट पर लगाने से भी लाभ होता है.

* 4 चम्मच सरसों के तेल में 4-5 लहसुन की कलियां व एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर धीमी आंच पर हल्का-सा गर्म कर लें. इसे चोटवाली जगह पर लगाकर कपड़े से बांध लें.

* घाववाली जगह पर फिटकरी को भूनकर लगाएं. इससे भी घाव जल्दी भरता है.

* हल्दी व सरसों को मिक्स करके हल्का गर्म कर लें. इसे चोट पर लगाकर उसके ऊपर एरंड के पत्ते लगाकर बांध देने से चोट में लाभ होता है.

* यदि पत्थर या लकड़ी की चोट से सूजन हुई हो, तो इमली के पत्तों को उबालकर चोटवाली जगह पर लगाकर बांधें. इसके अलावा चूना व हल्दी को गर्म करके लगाने से भी फ़ायदा होगा.

* जब कभी शरीर के किसी अंग पर चोट लग जाए, तब अदरक को कद्दूकस करके पानी में हल्का-सा उबालकर उस स्थान पर लगाएं.

* चोट के कारण घाव होने पर 20-25 नीम की ताज़ी पत्तियों को तोड़कर पानी के साथ पीस लें और साफ़ कपड़े से छान लें. इसमें चुटकीभर हल्दी डाल दें. फिर इस रस में रुई के फाहे को भिगोकर तवे पर थोड़ा-सा घी डालकर गर्म करें. जब रुई जलने लगे, तो उसे हटाकर थोड़ा-सा ठंडा कर घाव पर लगाकर पट्टी बांध दें.

* सेंधा नमक को पानी में डालकर इसमें कपड़े को भिगोकर चोटवाले स्थान पर सेंक करने से आराम मिलता है.

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* जहां चोट लगी हो, वहां पर अजवायन पीसकर लगाएं और कपड़े से बांध दें.

* यदि कोई अंदरूनी चोट लगी हो, तो एरंड के पत्ते पर सरसों का तेल लगाएं. इसे आग में हल्का सेंककर चोट पर लगाकर बांध दें.

* यदि चोट लगे हुए स्थान से लगातार ख़ून बह रहा हो, तो कपड़े को मिट्टी के तेल में भिगोकर बांधे. ख़ून का बहना रुक जाएगा.

* यदि मोच की वजह से सूजन हुई हो, तो सूजन को दूर करने के लिए गुनगुने पानी में फिटकरी मिलाकर मोचवाली जगह पर सिंकाई करें.

* चोट लग जाने पर गेहूं के आटे में सरसों का तेल मिलाकर चोट पर रखकर कपड़े से बांध दें.

सुपर टिप

तुलसी के पत्तों को पीसकर चोट पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है.

– ऊषा गुप्ता

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बीमारियों से बचने के लिए वास्तु टिप्स (Vastu Tips For Better Health)

बीमारियों (Diseases) से बचने के लिए यदि आप कुछ वास्तु उपाय (Vastu Remedies) करते हैं, तो अच्छी सेहत (Good Health) और निरोगी तन पा सकते हैं. स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए घर का वास्तु सही होना बहुत ज़रूरी है. यदि आपके घर का वास्तु सही नहीं है, तो इसका असर आपकी सेहत पर भी पड़ सकता है. अच्छी सेहत पाने और निरोगी रहने के लिए आप भी ये वास्तु टिप्स (Vastu Tips) ज़रूर ट्राई करें.

Vastu Tips For Better Health

1) अच्छी सेहत पाने और निरोगी रहने के लिए नियमित रूप से योग और ध्यान अवश्य करें. यदि आप घर की उत्तर पूर्व दिशा की तरफ़ मुंह करके ऐसा करते हैं, तो आपको इसके सकारात्मक परिणाम जल्दी ही दिखने लग जाएंगे.

2) शांति से काम करने, पॉज़िटिव एनर्जी बढ़ाने, तनाव से बचने और अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए घर की उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा करें. यदि आप कोई जाप करते हैं, तो वो भी इसी दिशा में बैठकर करें.

3) अच्छी सेहत पाने के लिए घर में हल्के रंगों का प्रयोग करें. घर की दावारों से लेकर फर्नीचर, पर्दे, बेडशीट, कुशन आदि सभी हल्के रंग के ही चुनें. घर में गहरे रंगों के प्रयोग से बचें.

बीमारियों से बचने के लिए करें ये वास्तु उपाय, देखें वीडियो:

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4) पूरे परिवार की अच्छी सेहत के लिए घर के मुखिया या पूरे परिवार की मुस्कुराती हुई फोटो उत्तर पश्‍चिम दिशा में लगाएं.

5) घर में यदि किसी व्यक्ति का इलाज चल रहा है, तो उसे अपनी दवाई उत्तर से उत्तर पूर्व दिशा वाले क्षेत्र में रखनी चाहिए. ऐसे व्यक्ति का बेडरूम भी यदि इसी दिशा में हो तो और अच्छा है.

6) घर के लोगों को स्वास्थ्य समस्याएं न हों इसके लिए घर में कहीं भी बेकार का सामान न पड़ा हुआ हो. बंद पड़ी घड़ियां, बिजली के खराब उपकरण घर में न रखें. घर में स्टोरेज की समय-समय पर सफ़ाई करते रहें.

7) घर में दरवाज़े, खिड़कियां खोलते या बंद करते समय उनसे आवाज़ नहीं आनी चाहिए. इसके लिए समय-समय पर इनकी ऑयलिंग करते रहें. मुख्यद्वार खुलते या बंद करते समय भी आवाज़ नहीं आनी चाहिए. इससे घर के लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

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सेल्फी की लत से कैसे बचें (Side Effects Of Selfie Addiction)

सेल्फी (Selfie) लेना जब तक शौक है तब तक तो ठीक है, लेकिन सेल्फी लेना जब आपकी लत (Addiction) बन जाए, तो ये चिंता का विषय है. क्या आप भी किसी रेस्टॉरेंट में खाना चखने से पहले उस डिश के साथ सेल्फी लेती हैं, कहीं घूमने जाने पर उस जगह की सैर का लुत्फ़ उठाने के बजाय हर व़क्त स़िर्फ सेल्फी लेती रहती हैं, सोशल मीडिया पर एक सेल्फी पोस्ट करने के लिए क्या आप 10-20 सेल्फी लेती हैं और जो बेस्ट है उसे पोस्ट करती हैं, सेल्फी लेने के लिए क्या आप बार-बार मेकअप करती हैं, नए-नए कपड़े ख़रीदती हैं, जबकि आपको इतने कपड़ों की ज़रूरत नहीं है…? सेल्फी का भूत यदि आप पर भी इसी तरह सवार है, तो समझ लीजिए सेल्फी की लत आपको भी बीमार कर सकती है.

Selfie Addiction

सेल्फी एडिक्शन से बचने के लिए क्या करें?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर व़क्त सेल्फी लेना एक तरह का मनोरोग बनता जा रहा है. सेल्फी का एडिक्शन लोगों को सोशल मीडिया पर अपना स्टेटस चमकाने के लिए उकसाता है. ऐसे लोगों को यदि उनकी सेल्फी के लिए लाइक्स या कमेंट्स नहीं मिलते तो, वो स्ट्रेस में आ जाते हैं. ऐसे लोग अपने आसपास के करीबी लोगों पर ध्यान नहीं देते, उनके साथ समय नहीं बिताते, लेकिन सोशल मीडिया के अजनबी लोगों के सामने अपनी इमेज चमकाने के लिए बेस्ट से बेस्ट सेल्फी लेने की कोशिश में लगे रहते हैं. सेल्फी लेते हुए कई लोगों ने अपनी जान तक गवां दी है. अत: सेल्फी के एडिक्शन से बचना बेहद ज़रूरी है. सेल्फी एडिक्शन के साइड इफेक्टस से बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं, बता रही हैं काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ.

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सेल्फी की लत से कैसे बचें, जानने के लिए देखें वीडियो:

ककड़ी के 15 बेमिसाल फ़ायदे (15 Amazing Health Benefits Of Cucumbers You May Not Know)

ककड़ी (Cucumber) स्वाद में मधुर, वातकारक, पित्त का शमन करनेवाली व मूत्रकारक होती है. इसमें विटामिन, मिनरल, पोटैशियम व फॉस्फोरस प्रचुर मात्रा में होता है. यह वज़न कम करने में मदद करती है. ककड़ी में 95 प्रतिशत पानी होने के कारण यह न केवल भूख को मिटाती है, बल्कि मेटाबॉलिज़्म भी बेहतर बनाती है. इसकी तासीर ठंडी होने के कारण गर्मियों के मौसम में शरीर में ठंडक के लिए इसका अधिक सेवन करते हैं. ककड़ी आंत संबंधी सभी तरह की बीमारियों में फ़ायदेमंद है. इससे हड्डियां मज़बूत होती हैं. ककड़ी को सलाद, जूस, सूप, रस व सब्ज़ी के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं. यह गर्मी व लू से भी बचाती है.  

Health Benefits Of Cucumbers

* यूरिन में जलन या फिर यूरिन कम होने पर ककड़ी का रस बेहद उपयोगी है. इसे दिनभर में चार बार तीन-तीन घंटे के अंतराल पर लें.

* रिसर्च के अनुसार, हर रोज़ ककड़ी का सेवन करने से कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है. इसमें मौजूद प्रोटीन ट्यूमर या कैंसर को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ शरीर में कैंसर से लड़ने की ताक़त को भी बढ़ाता है.

* ककड़ी के साथ मूली, गाजर, बीट, प्याज़ व नींबू का रस मिलाकर सलाद बनाकर खाने से अरुचि व ख़ून की कमी दूर होती है.

* 150 मि.ली. की मात्रा में ककड़ी का रस दिनभर में 2-3 बार पीने से गुर्दे की पथरी से छुटकारा मिलता है.

* जिन्हें लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो, उन्हें 200 ग्राम खीरे में सेंधा नमक व नींबू का रस डालकर हर रोज़ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए.

* पेटदर्द होने पर गुनगुने पानी में आधा टीस्पून ककड़ी का रस मिलाकर पीएं.

* पेशाब की रुकावट होने पर ककड़ी के रस में मिश्री या शक्कर मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है.

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* बेहोश व्यक्ति की बेहोशी दूर करने के लिए ककड़ी काटकर सुंघाएं.

* गर्मी के कारण सिर चकराने पर ककड़ी खाने से या फिर इसमें टमाटर, मूली व चुकंदर को मिक्स करके जूस बनाकर पीने से आराम मिलता है.

* कब्ज़ या बदहज़मी की समस्या हो, तो भोजन के साथ ककड़ी का सेवन करें.

* ककड़ी के रस का उपयोग गुर्दे व त्वचा की सभी प्रकार की बीमारियां, गुर्दे की पथरी, मूत्रनली में जलन, अस्थमा, डायबिटीज़, उल्टी, मोटापा, दस्त आदि को दूर करने में किया जाता है.

* हड्डियों की मज़बूती के लिए ककड़ी को छिलके सहित खाएं, क्योंकि इसमें कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को स्वस्थ व मज़बूत बनाता है.

* चेहरे पर झाइयां हों, तो एक ककड़ी का रस निकालकर उसमें आधा-आधा टीस्पून गुलाबजल व नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट बाद चेहरा धो लें.

* ककड़ी के बीज को ठंडई में पीसकर लेने से गर्मियों के मौसम में होनेवाली समस्याएं दूर होती हैं.

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* ककड़ी में मौजूद विटामिन सी, बीटा कैरोटीन जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स बॉडी में मौजूद फ्री रैडिकल्स को दूर करते हैं और इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं.

सुपर टिप

* ककड़ी के बीज को पानी में पीसकर चेहरे पर लगाने से त्वचा हेल्दी बनती है.

हेल्थ अलर्ट

ककड़ी खाते समय या फिर खाने के बाद कभी भी पानी न पीएं. भोजन को डायजेस्ट करने के लिए पीएच लेवल की ज़रूरत होती है. ककड़ी खाने के बाद पानी पीने से पीएच लेवल बाधित होता है.

– ऊषा गुप्ता

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केले के 20 चमत्कारी फ़ायदे (20 Surprising Health Benefits Of Bananas)

केला (Bananas) एनर्जी लेवल को काफ़ी बढ़ाता है. दुनियाभर में तीन सौ से भी अधिक क़िस्म के केले पाए जाते हैं. इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन्स होते हैं. यह आयरन, पोटैशियम, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, विटामिन ए से भरपूर होता है. आयुर्वेद के अनुसार पका केला शीतल, वीर्यवर्द्धक, भूख-प्यास, आंखों से संबंधित बीमारियों आदि को दूर करता है. रिसर्च के अनुसार केले के सेवन से तनाव, डिप्रेशन में भी राहत मिलती है. नियमित रूप से एक केला खाने से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि बीमारियां भी पास नहीं आतीं. 

 Health Benefits Of Bananas

* यदि कब्ज़ की परेशानी है, तो केले का सेवन लाभदायक है, क्योंकि यह आंतों की अच्छी तरह से सफ़ाई कर देता है. इसे दही के साथ खाएं.

* यदि मुंह में छाले हों, तो गाय के दूध से बनी दही में केला मिलाकर खाएं.

* लूज़ मोशन यानी दस्त होने पर पके हुए केले को मैश करके मक्खन की तरह बनाकर उसमें मिश्री के कुछ दाने मिलाकर दिनभर में दो-तीन बार लेने से आराम मिलता है.

* गैस की समस्या होने पर रोज़ रात को सोने से पहले ईसबगोल या दूध के साथ केला खाएं.

* खांसी की तकलीफ़ होने पर पके हुए केले को काटकर उसमें शक्कर मिलाकर ढंक दें. इसे गर्म पानी में थोड़ी देर डुबोकर रखें. फिर इसे शरबत की तरह पी लें. खांसी में काफ़ी आराम मिलेगा.

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* यदि आंतों में सूजन है, तो केले का नियमित सेवन करने से यह समस्या दूर हो जाती है.

* यदि जल जाएं, तो उस स्थान पर केले का पल्प लगाएं. तुरंत आराम मिलेगा.

* दाद, खाज-खुजली होने पर केले को मसलकर उसमें नींबू का रस मिलाकर लगाएं. तुरंत आराम मिलता है.

* शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो यानी एनीमिया की समस्या हो, तो प्रतिदिन नियमित रूप से केले खाएं.

* श्‍वेत प्रदर की तकलीफ़ होने पर हर रोज़ एक केला एक चम्मच देसी घी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से लाभ होता है.

* यदि शरीर में ख़ून की कमी हो, तो हर रोज़ सुबह दो-तीन केले खाएं और इलायचीवाला दूध पीएं.

* यदि अस्थमा यानी दमा की समस्या हो, तो केले को छिलके के साथ काटकर उसमें कालीमिर्च पाउडर व नमक लगाकर रातभर चांदनी में रखें. सुबह इस केले को आग में भूनकर खाने से अस्थमा में लाभ होता है.

* यदि नाक से रक्त निकलने लगे यानी नकसीर फूटने की समस्या होने पर एक पका केला शक्कर मिले दूध के साथ नियमित रूप से खाने पर हफ़्तेभर में आराम मिल जाता है. इसके अलावा नकसीर की समस्या भी दूर हो जाती है.

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* सूखी खांसी या फिर पुरानी खांसी की तकलीफ़ हो, तो दो केले को मिक्सर में पीसकर उसमें दूध व इलायची मिलाकर शर्बत की तरह पीएं.

* नियमित रूप से केला खाते रहने से किडनी के कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है.

* चोट या खरोंच आने पर उस जगह पर केले का छिलका बांध दें.

* यदि आप दुबले-पतले हैं और अपना वज़न बढ़ाना चाहते हैं, तो हर रोज़ एक ग्लास दूध के साथ दो पके हुए केले खाएं.

* चेहरे के ग्लो के लिए केले के पल्प को चेहरे पर लगाकर थो़ड़ी देर बाद चेहरा धो लें.

* एक्सरसाइज़ करने के आधे घंटे पहले एक केला खाने से वर्कआउट्स करने पर होनेवाली थकान नहीं होती और एनर्जी लेवल भी अच्छा रहता है.

सुपर टिप

केले में विटामिन ए अधिक मात्रा में होता है, इस कारण हर रोज़ एक केला खाने से आंखों की रोशनी तेज़ होती है.

– ऊषा गुप्ता

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बहरापन  दूर करने के 15 आसान उपाय (15 Home Remedies For Deafness)

जब कान (Ear) की वायु शब्दवाही स्रोतों को रोक देती है, तो व्यक्ति को बहरेपन (Deafness) की शिकायत होने लगती है. इस बीमारी (Disease) में सुनने की क्षमता कम या बिल्कुल समाप्त हो जाती है. बहरापन तीन प्रकार का होता है. ऊंचा सुनाई देना, कठिनता से सुनना और बिल्कुल न सुनना. वृद्धों का तथा पुराना बहरापन असाध्य होता है. यानी इसे ठीक करना बहुत मुश्किल होता है.

Home Remedies For Deafness

कान के मध्य या भीतरी भाग में सूजन तथा फोड़े के कारण या कानों में जीव-जंतुओं के चले जाने से बहरापन आ सकता है. कई बीमारियों के दुष्परिणामस्वरूप भी बहरापन होने की संभावना रहती है, जैसे- खसरा, टायफॉइड, मम्प्स, सिफिलिस आदि. बहरापन आनुवंशिक भी होता है, जो चार-छह महीने के बाद बच्चे में दिखाई देने लगता है. कान में पानी जाने या कान बह रहा हो, फिर भी उसका इलाज न कराने से बहरापन आ जाता है. किसी आघात से, भयंकर विस्फोटों या धमाकों के कारण भी बहरापन आ सकता है.

जब बच्चा साल-डेढ़ साल का हो जाने पर मां-पापा जैसे सामान्य शब्द भी न बोल पाए, तो किसी कान के विशेषज्ञ यानी ईएनटी डॉक्टर से बच्चे में बहरेपन की जांच ज़रूर करा लेनी चाहिए, क्योंकि अक्सर बहरेपन के कारण ही बच्चा न तो बोल पाता है और न ही कोई प्रतिक्रिया व्यक्त कर पाता है.

* सप्ताह में एक बार कानों में शुद्ध सरसों का तेल हल्का गुनगुना करके डालना फ़ायदेमंद होता है. इससे बहरापन दूर होता है.

* ताज़ा मूली का रस, सरसों का तेल और शहद तीनों बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से मिला लें. इसकी दो से चार बूंद दिन में चार बार कान में डालने से श्रवण शक्ति बढ़ती है.

* बहरापन होने पर नियमित रूप से कुछ दिनों तक तुलसी के पत्तों का रस निकालकर हल्का गर्म करके कान में डालना चाहिए.

* सोंठ, गुड़ और घी खाने से कम सुनने में लाभ होता है और कान की सांय-सांय की आवाज़ भी बंद होती है.

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* 4-5 बूंद सरसों का तेल कान में डालनेे से कम सुनाई पड़ने की शिकायत दूर हो जाती है.

* अदरक के रस और शहद में थोड़ा-सानमक मिलाकर 2-4 बूंद कान में डालें, अवश्य फ़ायदा करेगा.

* बहरेपन की स्थिति में नियमित रूप से दालचीनी का तेल रात को सोते समय कान में डालें. कुछ ही दिनों में लाभ होगा.

* लहसुन की 3-4 कलियां कूटी हुई, एक टेबलस्पून जैतून का तेल व आधा टीस्पून प्याज़ का रस लें. एक कप मेें जैतून का तेल डालकर उसमें प्याज़ का रस व लहसुन की कलियां डालकर अच्छी तरह से मिला लें. इस मिश्रण को दोनों कानों में 3-4 बूंद डालकर रूई से ढंक दें.

* अखरोट या कड़वे बादाम तेल की कुछ बूंदें कान में डालने से भी सुनने की क्षमता बढ़ती है.

* दूध में थोड़ा-सा हींग मिलाकर कान में कुछ बूंद डालने से फ़ायदा होता है.

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* 25 ग्राम गुड़ में एक चम्मच सोंठ मिलाकर क़रीब चार महीने तक नियमित रूप से लेने से बहरेपन की शिकायत दूर होती है.

* हर रोज़ एक ग्लास गर्म पानी में एक चम्मच सेब का सिरका और एक चम्मच शहद मिलाकर दो बार पीएं, इससे सुनने की क्षमता बढ़ेगी.

* सरसों के तेल में कुछ दाने धनिया के डालकर पकाएं. जब आधा रह जाए, तब इसे छानकर दो-दो बूंद कान में डालें. लाभ होगा.

* बारीक़ पिसा हुआ सुहागा कान में डालकर उसके ऊपर 5-6 बूंद नींबू का रस डालने से कान के भीतर गैस उत्पन्न होगी और मैल फूलकर बाहर आ जाएगी. इससे कान का परदा साफ़ हो जाएगा और सुनाई देने लगेगा.

– हरिवंश ममता परमेश्‍वर

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अनिद्रा की समस्या से यूं निजात पाएं (8 Ways To Cure Sleeping Problems Naturally)

अनिद्रा (Insomnia) का मतलब केवल नींद (Sleep) ना आना नहीं है, बल्कि रात में नींद का बार-बार टूटना या सुबह के पहले ही नींद खुल जाना भी अनिद्रा रोग ही है. तनाव, डिप्रेशन, चिंता आदि भी नींद में बाधक होते हैं. यदि रात में देर तक नींद नहीं आती, तो इसका कारण अक्सर तनाव, डिप्रेशन ही होता है. वातावरण से भी हमारी नींद प्रभावित होती है.

Sleeping Problems

शोर-शराबे, तेज़ रोशनी, ज़्यादा गर्मी या ठंडी अथवा नए अपरिचित परिवेश के कारण भी नींद में बाधा आती है, जिससे अनिद्रा की समस्या होने लगती है. आमतौर पर अनिद्रा की समस्या से परेशान लोगों को जागृतावस्था में आलस्य, सुस्ती, थकान और सिरदर्द की शिकायत बनी रहती है. इससे उनकी कार्यक्षमता भी घट जाती है.

* कोकम को चटनी की तरह पीसकर पानी मिलाकर छान लें. इसमें शक्कर मिलाकर शरबत बनाएं. इस शरबत को पीने से अनिद्रा की समस्या दूर होती है. इसका सेवन कम से कम 15 दिन तक अवश्य करना चाहिए.

* एक लीटर पानी को अच्छी तरह उबाल लें. फिर आंच से उतारकर उसमें आधा कप कद्दूकस किया हुआ प्याज़ डालकर 5-10 मिनट रहने दें. ठंडा होने पर छान लें. इस पानी को एक चम्मच की मात्रा में लेकर उसमें पांच बूंद शहद मिलाकर बच्चों को पिलाने से वे गहरी नींद सोते हैं.

* पीपरामूल का पाउडर बनाकर रख लें. हर रोज़ सोने से पहले आधा चम्मच पाउडर गुड़ मिलाकर खाएं और ऊपर से गर्म दूध पीकर सो जाएं. इससे अच्छी नींद आती है और सुबह उठने पर मन प्रसन्न रहता है.

* चार जायफल लेकर पाउडर बनाकर 16 पुड़िया बना लें. हर दिन सोने से पहले एक पुड़िया पानी के साथ सेवन करें. इससे अनिद्रा की समस्या से निजात मिलेगा और अच्छी नींद आएगी.

* एक पका हुआ कद्दू लेकर उसका छिलका निकाल दें. फिर उसे काटकर उसका

बीज और पल्प निकाल दें. इसके बाद कद्दू के बड़े-बड़े टुकड़े करके पानी में उबालें. ज़रा नरम पड़ने पर आंच से उतारकर कपड़े पर डालकर पानी निथार दें. उबले हुए कतरों को दुगुनी शक्कर की चाशनी बनाकर उसमें डाल दें. इसमें केसर और इलायची इच्छानुसार डाले जा सकते हैं. इस मुरब्बे का नियमित सेवन करने से अनिद्रा की समस्या दूर होती है और अच्छी नींद आती है.

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* प्याज़ में मसाले भरकर उसका अचार बनाएं. यह अचार इतना हो कि ज़्यादा से ज़्यादा 15 दिन तक सेवन किया जा सके. हर 15 दिनों में ताज़ा अचार बनाएं. यह अचार खाने से अच्छी नींद आती है. साथ ही थकावट दूर होती है, खाने में रुचि बढ़ती है और पेट भी साफ़ होता है.

* सोने से पहले एक ग्लास गर्म दूध पीने से अच्छी नींद आती है.

सुपर टिप

सोने से पहले मुट्ठीभर चेरी का सेवन या फिर चेरी का जूस लेना फ़ायदेमंद रहता है. इससे अच्छी नींद आती है.

पथ्य पर भी ध्यान दें…

सोने का प्रयास करते समय चिंता-तनाव पर से ध्यान हटाने के लिए मन ही मन अच्छी कविताएं गुनगुनाएं या अपने आराध्य भगवान का ध्यान करें. सुबह उठकर हल्की एक्सरसाइज़ करें और शाम को भोजन के बाद कुछ समय तक टहलें. रात में सिगरेट, चाय, कॉफी आदि उत्तेजक पदार्थों से परहेज़ रखें. दिन में झपकियों से बचें.

भरपूर नींद लेना है ज़रूरी

भोजन की तरह पर्याप्त नींद भी ज़रूरी है. इससे शरीर स्वस्थ रहता है और शारीरिक विकारों से भी बचाव होता है. दिन में परिश्रम करने से शरीर की शक्ति कम हो जाती है. रात को अच्छी नींद सोने से शरीर को आराम मिलता है, स्फूर्ति पैदा होती है तथा अगले दिन काम करने के लिए नई शक्ति मिलती है. यही नींद का सबसे बड़ा रहस्य है. अतः हर व्यक्ति को भरपूर नींद लेनी चाहिए.

– ऊषा गुप्ता

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रागी खाएं, रोग भगाएं (Health Benefits Of Ragi OrFinger Millet)

आजकल ज़्यादातर इंसान किसी न किसी बीमारी से परेशान हैं. किसी को हाई ब्लड प्रेशर है, तो किसी को कब्ज़. कोई डायबिटीज़ से डर रहा है, तो किसी का इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो रहा है. ऐसे में सिर्फ़ कुछ लाल-भूरे दाने कमाल कर सकते हैं. ये दाने हैं अनाज रागी (Ragi) के. एक्स्पर्ट्स भी मानते हैं कि रागी से ढेरों बीमारियों का इलाज संभव है. जानिए कितना फ़ायदेमंद है रागी.

Ragi

वज़न कम करना है, कब्ज़ की भी दिक़्क़त है, डायबिटीज़ भी दस्तक दे रहा है, दिल की भी चिंता है, कैल्शियम की कमी भी है-तो इन सबका सस्ता और बेहतरीन इलाज रागी है. एक ऐसा मोटा अनाज, जो अपने छोटे-छोटे दानों में ढेरों बीमारियों का इलाज समेटे है. बहुत आसान तरी़के से रागी का सेवन किया जा सकता है. ये आपके खाने को इस कदर पौष्टिक बना देता है कि आप सोच भी नहीं सकते. इसको ऐसे समझ सकते हैं कि 100 ग्राम रागी में पूरे 344 मिलीग्राम कैल्शियम होता है. यह ग्लूटन फ्री भी है. इसका सेवन वे लोग भी कर सकते हैं, जिन्हें ग्लूटेन से एलर्जी है.

बॉडी होगी रिलैक्स

रागी को नियमित खानपान में शामिल करना बॉडी रिलैक्सेशन के लिए भी फ़ायदेमंद है. दरअसल, इसमें मौजूद तत्वों के चलते यह अवसाद से निकलने में मदद करती है तो ग़ुस्से और इन्सोम्निया से भी राहत दिलाती है.

इन्सोम्निया नींद न आने की बीमारी होती है. रागी से यह सारे फ़ायदे इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स की वजह से होते हैं. ख़ासतौर पर ट्रिप्टोफ़ैन और अमीनो एसिड नाम के एंटीऑक्सीडेंट्स रागी को बेहद स्पेशल अनाज बना देते हैं.

त्वचा भी चमकाए

रागी के छोटे-छोटे दाने त्वचा पर भी बड़ा असर करते हैं. रागी का सेवन त्वचा को जवां और चमकदार बना देता है. इसमें मौजूद मिथायोनिन और लाइसिन त्वचा की कसावट को बनाए रखने और झुर्रियों को रोकने में मदद करते हैं.

पाचन होगा आसान

रागी पेट का भी भरपूर ख़्याल रखता है. रागी को आहार का हिस्सा बनाने से ये पाचनतंत्र को ठीक रखता है. दरअसल रागी में मौजूद ऐल्कलाइन तत्व खाने को जल्दी पचाने में मदद करता है. बहुत ही मानी हुई बात है कि पेट ख़राब होना, कई और दिक़्क़तों की वजह भी बनता है. ऐसे में रागी का सेवन कई बीमारियों का एक साथ इलाज करेगा.

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हड्डियों का रखता है ख़्याल

आजकल सबसे ज़्यादा परेशान करने वाली  समस्याओं में से एक है हड्डियों से जुड़ी बीमारी. पर रागी के पास इसका भी इलाज है. रागी में पाया जाने वाला फ़ास्फ़ोरस हड्डियों के विकास में सहायक होता है.

नुक़सान भी हैं

रागी का ज़रूरत से ज़्यादा सेवन नुक़सानदायक होता है. ज़्यादा सेवन से शरीर में आक्ज़ैलिक एसिड बढ़ता है. इसके अलावा गुर्दे की पथरी वालों को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए.

रखें ध्यान

रागी के छिलकों को हटाकर ही सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसके छिलके को पचाने में दिक़्क़त होती है. इसके लिए रागी को पहले अच्छे से धो लें और उसकी परत यानी छिलके हटा दें.

– शिल्पी शर्मा

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