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Tips For Parenting

बच्चे तो सभी प्यारे होते हैं, पर कुछ ख़ास मासूम भी होते हैं, जिन्हें विशेष देखभाल की ज़रूरत होती है. ऐसे ही होते हैं ऑटिज्म ग्रस्त बच्चे भी. आज अंतर्राष्ट्रीय विकलांगता व्यक्ति दिवस (International day of disabled persons) पर ऑटिज्म कंसल्टेंट गोपिका कपूर ने इस तरह के बच्चों की देखभाल से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें संक्षेप में बताई.
इससे उन अभिभावकों को काफ़ी मदद मिलेगी, जिनके बच्चे ऑटिज्म ग्रस्त हैं. आइए जानते हैं गोपिकाजी से ऑटिज्म के बारे में. उनका कहना है-

न्यूरोडेवलपमेंट कंडीशन…
मेरे राय में ऑटिज्म एक विश्वभर में बढ़ता हुआ कंडीशन है. रिसर्च दिखाता है कि ऑटिज्म के स्टैटिसटिक्स या नंबर जो है, वह 54 में एक बच्चे को ऑटिज्म होता है. यह एक न्यूरोडेवलपमेंट कंडीशन है. न्यूरो यानी यह दिमाग़ पर असर करता है और डेवलपमेंटल का मतलब है कि यह बच्चों के विकास पर असर करता है.

चिंतित माता-पिता…
जब माता-पिता को पता चलता है कि उनके बच्चे को ऑटिज्म है, तब मैंने देखा है कि ज़्यादातर पैरेंट्स बहुत ही उदास-परेशान हो जाते हैं. उन्हें चिंता रहती है कि हम बच्चे के साथ क्या करेंगे, कैसे सिखाएंगे, क्या वह स्कूल जाएगा, क्या वह बड़ा होकर नौकरी कर पाएगा… ये तमाम चिंताएं उनके दिमाग़ में आती है. जिन माता-पिता को उनके परिवार का साथ मिलता है और जो माता-पिता अपने आपको संभाल पाते हैं, उनके बच्चे ज़्यादातर विकास करते हैं. इसका मतलब यह है कि माता-पिता की मानसिक स्थिति पर ध्यान देना बहुत ही ज़रूरी है. ऑटिज्म एक ऐसा कंडीशन है, जिसका असर सिर्फ़ बच्चे पर नहीं, बल्कि परिवार पर भी होता है. इसलिए हमें यह ध्यान देना चाहिए कि सिर्फ़ बच्चा ही नहीं सीख रहा है, बल्कि पूरे परिवार का विकास हो रहा है. उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए.

Child With Autism

प्रोत्साहित करें…
जब हम ऑटिस्टिक बच्चों के साथ काम करते हैं, तब हमें सबसे पहले यह ध्यान में रखना चाहिए कि उनसे वह अपेक्षाएं नहीं रखनी चाहिए, जो हम एक न्यूरोटिपिकल बच्चे के साथ रखते हैं. अगर हम किसी व्यक्ति के साथ काम कर रहे हैं, जो देख नहीं पाते हैं, तो हम उनसे यह अपेक्षा थोड़ी रखते हैं कि एक दिन वह देख पाएंगे? इसी तरह से हमें उनके साथ यह अपेक्षाएं नहीं रखनी चाहिए कि वह न्यूरोटिपिकल बन जाएंगे. साथ ही हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि बच्चों को क्या पसंद है. इन बच्चों में मोटिवेशन बहुत ही कम होता है. इसलिए जो भी चीज़ उनको पसंद है, भले ही वह दूसरे बच्चों को जो पसंद है वह नहीं हो, उस चीज़ के साथ हमें उनके साथ काम करना है. उनके लगातार प्रोत्साहित करते रहना है. इससे उनका मोटिवेशन बढ़ेगा और वह काम करना पसंद करेंगे.

मानसिक स्तिथि…
ऑटिस्टिक बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को सही रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कभी भी हमें उन्हें यह महसूस नहीं होने देना है कि वह हम से कम हैं. वह अलग ज़रूर हो सकते हैं, लेकिन कम नहीं है. उनमें कोई कमी का एहसास उन्हें हमें कभी महसूस नहीं होने देना चाहिए. इससे उनका मानसिक स्वास्थ्य सही रहेगा. उनको जो अच्छा लगता है, उसी को ध्यान में रखकर उनके साथ काम करना चाहिए. उनकी जो रूचि है, उसे बढ़ानी चाहिए. कई इस तरह के बच्चे हैं, जिन्होंने उनकी रुचि को लेकर करियर बनाया. कई बच्चे बहुत सफल भी हुए, इसलिए उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए. उनकी मानसिक स्थिति को बनाए रखना चाहिए. उन्हें यह कभी महसूस नहीं करने देना चाहिए कि उनमें कोई कमी है. इसकी बजाय उनके जो अच्छे पॉइंट है, उस पर ध्यान देना चाहिए. उन्हें उनके बारे में बताना चाहिए और उनकी मुश्किलों पर काम करना चाहिए, पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए. इसी तरह से हम उनकी मानसिक स्थिति को बनाए रख सकते हैं.

Child With Autism

अभिभावकों का नज़रिया…
हमारे घर में जो वातावरण है वह बहुत ही ख़ुशनुमा वातावरण है. हम सब हंसते-खेलते हैं, बहुत ही ख़ुश हैं. हां पहले-पहले बच्चे की अवस्था को लेकर तनाव होता रहता था, हम बहुत परेशान होते रहते थे. लेकिन धीरे-धीरे हमने सब संभाल लिया. अब हमारे घर का वातावरण ख़ुशनुमा है.

पैरेंटिंग गाइड…
दूसरे बच्चों के माता-पिता को मैं यही कहूंगी कि अगर आप हर वक़्त उदास रहेंगे, हर समय तनाव में रहेंगे, तो यह एंग्जाइटी आपके बच्चों पर आएगी. वह अच्छी तरह से सीख नहीं पाएंगे. आपका तनाव उनके ऊपर आ जाएगा. तो इसकी बजाय आप अपने पास जो बच्चा है, उसे लेकर ख़ुश रहना सीखें. उसके साथ काम करना सीखें. धीरे-धीरे आप देखेंगे कि आपका बच्चा ना केवल अच्छी तरह से सीख पाएगा, बल्कि वह बहुत ख़ुश भी रहेगा. यही तो सभी पैरेंट्स अपने बच्चों के लिए चाहते हैं.

– ऊषा गुप्ता


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दूध सेहत के लिए बेहद फ़ायदेमंद माना जाता है. दूध में कैल्शियम, विटामिन, प्रोटीन और राइबोफ्लेविन (विटामिन बी -२) युक्त होता है. इसमें विटामिन ए, डी, के और ई सहित फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयोडीन व कई खनिज, वसा और ऊर्जा भी होती है. ध्यान रहे, दूध पीने के बाद कोई भी खट्टा पदार्थ नहीं खाना चाहिए. आइए, दूध की उपयोगिता के बारे में जानते हैं.

घरेलू नुस्ख़े

  • आधासीसी यानी माइग्रेन की तकलीफ़ में भी दूध काफ़ी फ़ायदेमंद है. इसमें पाव किलो दूध में 2 चम्मच शुद्ध घी मिलाकर पीएं. इसके अलावा दूध में चार-पांच छुआरा उबालकर खाएं और दूध में थोड़ा-सा शुद्ध घी मिलाकर पीएं. ये दोनों ही उपाय माइग्रेन की तकलीफ़ में बेहद लाभकारी है. इससे सिर का दर्द धीरे-धीरे ख़त्म हो जाता है.
  • गुर्दे में पथरी होने पर 30 ग्राम केले के तने का पानी, 25 ग्राम कलमी शोरा और पाव किलो दूध तीनों को मिला लें. दिनभर में दो या तीन बार इसका सेवन करें. इसके प्रभाव से पथरी गलने लगेगी और पेशाब के रास्ते से धीरे-धीरे बाहर निकल जाएगी.
  • इलायचीवाला दूध पीने से एनीमिया की परेशानी दूर होती है और झुर्रियां भी से कम पड़ती है. रोज़ रात को दूध में इलायची पाउडर मिलाकर पीएं.
  • पेशाब में जलन हो रही हो, तो पाव किलो दूध में एक कप पानी मिला लें. फिर मिश्री मिलाकर दिन में दो बार पिएं. एक हफ़्ते तक इसका सेवन करने से जलन की तकलीफ़ पूरी तरह से दूर हो जाएगी.
  • नींद की समस्या होने पर बकरी के दूध में मिश्री मिलाकर पीने से लाभ मिलता है. इसके अलावा पांच बादाम और एक चम्मच खसखस को पीस लें. इसमें दूध और मिश्री मिलाकर रात में पीएं. अनिद्रा की समस्या दूर हो जाएगी.

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  • दस्त होने पर गाय के दूध को अच्छी तरह से पका लें. बेल का गूदा निकालकर दो सौ ग्राम तक खाएं और उसके ऊपर से दूध पी लें. दिन में दो-तीन बार लेने से दस्त की समस्या दूर हो जाएगी.
  • हल्दीवाला दूध तो हमेशा ही फ़ायदेमंद माना गया है. सर्दी-खांसी और ज़ुकाम के लिए रोज़ रात को हल्दीवाला दूध पीना रामबाण उपाय है.
  • हार्ट प्रॉब्लमवालों को कभी-कभी दिल में दर्द होता है. इसके लिए गाय के दूध की बनी हुई शुद्ध देसी घी दो चम्मच लेकर उसमें 10 ग्राम बेल का रस मिलाकर पीएं.
  • नपुंसकता की समस्या में भी दूध उपयोगी है. एक ग्लास गर्म दूध के साथ 5-5 ग्राम बेल की छाल, पत्ते और गुदा लेकर उसमें एक छुआरा, तीन मुनक्के या पांच किशमिश, 8-10 मूंगफली की गिरी और 3-4 बादाम की गिरी लेकर इन सबको बारीक़ पीस लें. आवश्यकतानुसार मिश्री मिलाकर दूध में डालकर पीएं. महीनेभर यह उपाय करने से समस्या दूर हो जाएगी.
  • यदि गले में दर्द महसूस कर रहे हों, तो एक कप गर्म दूध पीने से आपको दर्द से तुरंत छुटकारा मिल सकता है.
  • त्वचा के रंग को निखारने के लिए भी बहुत से लोग दूध का इस्तेमाल करते हैं. अपने चेहरे और गर्दन पर कच्चे दूध को लगाएं और 10 मिनट तक लगा रहने दें. फिर पानी से चेहरा धो लें. यह आपकी त्वचा को नर्म-मुलायम बनाने में भी मदद करता है.
  • सोयाबीनवाला दूध पीने से वज़न कम होता है और कोलेस्ट्रोल लेवल को भी कंट्रोल में रखता है.
  • दूध में नारियल मिलाकर पीना भी शरीर के लिए बहुत उपयोगी रहता है. नारियल दूध पीने से लिवर, जोड़ों के दर्द और त्वचा की समस्याएं भी दूर होती हैं.
  • दूध में बालों के बढ़ने, मज़बूत और घने होने के लिए ज़रूरी सभी प्रोटीन, कैल्शियम और खनिज मौजूद होते हैं. बालों को हेल्दी बनाए रखने में भी दूध मदद करता है. यह एक अच्छे कंडीशनर के रूप में भी काम करता है. बालों और सिर की त्वचा पर दूध लगाकर कुछ मिनट के लिए छोड़ दें. उसके बाद बालों को शैंपू से धो लें. इससे बाल ख़ूबसूरत, सॉफ्ट और सिल्की होते हैं.
  • यदि आप चाहें तो स्प्रे बोतल को भी ठंडे दूध से भरकर इसकी मदद से बालों पर अच्छी तरह से ठंडा दूध लगा सकती हैं और आधे घंटे बाद बालों को पानी से धोकर फिर शैंपू से दोबारा धो लें.

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रिसर्च

  • कई अध्ययनों से पता चला है कि दूध महिलाओं और पुरुषों दोनों में कैंसर का ख़तरा कम करता है. दूध में विटामिन डी, कैल्शियम और लिनोलिक एसिड की मात्रा अधिक होती है. दूध के सेवन से कोलोरेक्टल, स्तन और पेट के कैंसर की संभावना को भी कम करता है.
  • शोधों से साबित हुआ है कि कि कम फैट्स वाला दूध मस्तिष्क शक्ति को बढ़ाने में और अल्जाइमर बीमारी को रोकने में मदद करता है. यह विटामिन बी 12 का एक अच्छा स्रोत है, जो सोचने की शक्ति को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोटीन है.

सुपर टिप
दूध में शक्कर की बजाय यदि हम गुड़ मिलाकर लें, तो इसके अधिक फ़ायदे होते हैं और यह आयरन की कमी को पूरा करता है.

– ऊषा गुप्ता

दादी मां के अन्य घरेलू नुस्ख़े/होम रेमेडीज़ जानने के लिए यहां क्लिक करें- Dadi Ma Ka Khazana

Milk

रोज नींबू पानी पीने के ये 10 हेल्थ बेनिफिट्स जानकर हैरान रह जाएंगे आप. आपके किचन में मौजूद नींबू आपके लिए कितना फायदेमंद है, इसका आपको अंदाजा भी नहीं होगा. नींबू पानी से आप अपनी सुंदरता और स्वास्थ्य दोनों को बढ़ा सकते हैं. हम आपको नींबू पानी के 10 फायदे बता रहे हैं, जिन्हें जानकर आप भी रोज नींबू पानी पीना शुरू कर देंगे.

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1) नींबू पानी इम्युनिटी बढ़ाता है
जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमज़ोर है उन्हें रोज़ाना नींबू पानी पीना चाहिए, इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) मज़बूत होगी. कोरोना वायरस से बचने के लिए भी नींबू पानी पीना फायदेमंद है.

2) नींबू पानी वजन कम करने में मदद करता है
यदि आप अपना बढ़ा हुआ वजन कम करना चाहते हैं, रोज सुबह नींबू पानी पीएं. वजन घटाने के साथ ही नींबू पानी शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकाल देता है, जिससे शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन भी हो जाता है.

3) नींबू पानी मुंहासों से राहत देता है
जिन लोगों को मुंहासे की समस्या ज़्यादा होती है उन्हें नींबू पानी का सेवन करना चाहिए, इससे उनके शरीर में मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया मर जाएंगे और स्किन ग्लो करेगी. नींबू पानी को आप फेसवॉश की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं, इससे डेड स्किन और एक्स्ट्रा ऑयल निकल जाता है.

4) नींबू पानी भूख बढ़ाता है
यदि आपको भूख नहीं लगती, तो नींबू पानी पीएं. इससे भूख तेज़ी से लगती है.

5) नींबू पानी किडनी स्टोन में फ़ायदेमंद
किडनी स्टोन यदि शुरुआती दौर में है, तो नींबू पानी पीना बहुत फ़ायदेमंद होगा. नींबू पानी में प्राकृतिक साइट्रेट होता है, जो स्टोन को तोड़ देता है या उसे बनने से रोकता है.

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Lemon
Lemon

6) नींबू पानी सर्दी/फ्लू से बचाता है
जिन्हें सर्दी और फ्लू अक्सर होता रहता है, उन्हें नींबू पानी का सेवन करना चाहिए. इससे उन्हें जकड़न नहीं होगी और शरीर भी डिहाइड्रेट नहीं होगा. नींबू पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीना ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है.

7) नींबू पानी सूजन व सांस संबंधी समस्या से राहत देता है
यदि किसी व्यक्ति को कहीं भी सूजन है तो नींबू पानी लाभदायक होता है. साथ ही अस्थमा के मरीज़ों के लिए भी नींबू पानी फ़ायदेमंद है. इसके सेवन से जोड़ों में दर्द व सूजन की समस्या दूर होती है.

8) नींबू पानी हैंगओवर दूर करता है
जिन लोगों को अल्कोहल की लत है और सुबह उठने पर चलना भी मुश्किल हो जाता है, तो उनके लिए नींबू पानी लाभदायक होगा. आधे ग्लास नींबू पानी से ही आंखें खुल जाती हैं और सिर घूमना बंद हो जाता है.

9) नींबू पानी फूड पॉइज़निंग में फायदेमंद है
फूड पॉइज़निंग होने पर नींबू पानी का सेवन करें, इसमें मौजूद एसिड शरीर को लाभ पहुंचाते हैं और मरीज़ को ठीक होने में मदद करते हैं.

10) नींबू पानी पेट संबंधी समस्या से छुटकारा देता है
यदि आप भी अक्सर गैस, कब्ज़, अपच जैसी पेट संबंधी समस्या से परेशान रहते हैं, तो नींबू पानी का सेवन शुरू कर दीजिए.

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विटामिन सी से भरपूर नाशपाती वज़न कम करने में मददगार है. नाशपाती में अधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करता है और हार्ट अटैक से भी बचाता है. यह पौष्टिकता से भरपूर फल है और इसे रोज़ाना डाइट में शामिल करके आप अपने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता आसानी से बढ़ा सकते हैं. नाशपाती मधुर, रसीली अम्लीय गुणोंवाली, ठंडे तासिर की, वात-पित्त को कम करती है. यह स्पर्म काउन्ट और क्वालिटी को बढ़ाने में भी सहायक है. यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करती है. कैंसर, त्वचा की समस्या, आंखों आदि के लिए उपयोगी है. स्किन प्रॉब्लम और कई तरह की बीमारियों को ठीक करने के लिए भी नाशपाती का उपयोग औषधि के रुप में किया जाता है. यह अतिसार या दस्त में लाभदायक है. इन सभी फ़ायदों को देखते हुए हर रोज़ नाशपाती ज़रूर खाना चाहिए.

घरेलू नुस्खे़

  • यदि सिरदर्द हो, तो एक ग्लास नाशपाती के रस में शक्कर, बेलगिरि चूर्ण, बेर चूर्ण, सेंधा नमक, कालीमिर्च पाउडर और भुना हुआ जीरा मिलाकर पिएं. इस जूस को पीने से सिरदर्द दूर होने के अलावा यूरिन करते समय होनेवाली जलन या दर्द, रक्त की उल्टी तथा खाने में अरुचि जैसे समस्याओं में भी काफ़ी लाभ होता है.
  • आंखों में जलन या दर्द जैसे किसी भी तरह की तकलीफ़ हो, तो नाशपाती को पीसकर आंखों के बाहर चारों तरफ़ लगाने से आराम मिलता है.

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  • नाशपाती का सेवन करने से यकृत व प्लीहा संबंधी बीमारियों के अलावा पाचनतंत्र संबंधी समस्या भी दूर होती है. ये फेफड़े के बीमारी में भी फ़ायदेमंद होता है, इसलिए हर रोज़ नाशपाती खाना सेहत के लिए फ़ायदेमंद होता है.
  • डाइजेस्टिव टैक्ट में सूजन या इंफेक्शन होने पर पेट में सूजन हो जाता है, जिसके कारण बदहजमी, एसिडिटी जैसी समस्याएं होने लगती है. ऐसे में दो टेबलस्पून नाशपाती के जूस में 500 मि. ग्रा. पिप्पली चूर्ण मिलाकर पीने से अपच की समस्या से निजात मिलता है और भूख भी अच्छी तरह से लगती है.
  • नाशपाती के मुरब्बे में 250 मि. ग्रा. नागकेशर चूर्ण मिलाकर सेवन करने से बवासीर की परेशानी से छुटकारा मिलता है.
  • किडनी में स्टोन हो, तो 2 टेबलस्पून नाशपाती के रस को सुबह-शाम भोजन के पहले सेवन करने से स्टोन टूट-टूटकर निकल जाता है.
  • चेहरे पर दाग़-धब्बे या झांइयां हों, तो इसे नाशपाती के पौधे के रस से इसे ठीक किया जा सकता है. इसके रस से मेलानिन का बनना नियंत्रित होता है, जिसके कारण दाग़-धब्बे का होना कम हो जाता है.
  • यदि सांप काट लें, तो नाशपाती के पत्तों को पीसकर पिलाने से जिस जगह पर काटा है, उस जगह का विषाक्त प्रभाव कम होता है.

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  • नाशपाती के सेवन से प्रेग्नेंट महिलाओं को कई प्रकार की बीमारियों से सुरक्षा मिलती है. इसके अलावा नाशपाती में उपलब्ध फॉलिक एसिड के कारण बच्चे को जन्म लेते समय कई प्रकार के दोषों से भी मुक्ति मिलती है.

सुपर टिप
नाशपाती के पत्तों को पीसकर त्वचा पर लगाने से त्वचा संबंधी समस्याएं दूर होती हैं और घाव पर लगाने से घाव जल्दी भरता है.

– ऊषा गुप्ता

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Benefits Of Pears

हर साल सितंबर महीने के अंतिम बुधवार को ‘राष्‍ट्रीय महिला स्‍वास्‍थ्‍य और तंदुरुस्‍ती दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. इस ‘नेशनल वुमन्स हेल्थ एंड फिटनेस डे’ का उद्देश्‍य महिलाओं की तंदुरुस्‍ती और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में जागरूकता पैदा करना है. कोविड महामारी में इसका महत्‍व और अधिक बढ़ गया है.

महामारी की स्थिति महिलाओं के लिए चिंताजनक है. वो घर से काम कर रही हैं, घर के लिए काम कर रही हैं. इस भागदौड़ में वे ख़ुद की अनदेखी कर देती हैं. महिलाओं को यह समझना चाहिए कि उनकी ज़िम्मेदारियां कई गुना बढ़ गई हैं और ऐसे में उनके लिए अपने स्‍वयं के स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल और अधिक महत्‍वपूर्ण हो गया है. इसी सन्दर्भ में डॉ. बंदिता सिन्हा, जो हेड ऑफ ऑब्‍स्‍टेट्रिक्‍स एंड गायनकोलॉजी, रिलायंस हॉस्पिटल से हैं, ने कई उपयोगी जानकारियां दीं.

सकारात्‍मकता
सकारात्‍मक सोच के साथ दिन की शुरुआत करें. अनुशासित दिनचर्या का पालन इस दिशा में पहला कदम है. आप स्‍वयं को संवारकर रखें, क्‍योंकि इससे मन में अच्‍छी स्‍वस्‍थ भावना पैदा होती है. काम के बाद कुछ देर के लिए ही सही, लेकिन आराम ज़रूर करें. अपनी हॉबी पूरी करने पर ध्यान दें. मूवी देखें, पुस्‍तक पढ़ें, नई-नई रेसिपी बनाएं या कोई भी ऐसी चीज़ करने की कोशिश करें, जिससे आपको ख़ुशी और सुकून मिलता हो.

आहार
संपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य में आहार की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है. आपको प्रोटीनयुक्‍त, सेहतमंद नाश्‍ते के साथ दिन की शुरुआत करनी चाहिए, ताकि आपका मेटाबोलिज्‍म ठीक रहे. नाश्‍ते में नट्स और फलों को शामिल करें, जिससे आप सक्रिय रहें. शाम साढ़े सात से लेकर साढ़े आठ बजे के बीच हल्का डिनर लें, क्‍योंकि रात के समय पाचन क्रिया धीमी होती है. देर रात को डिनर लेने से आपको सुबह में आलस महसूस हो सकता है और आपके शरीर में अतिरिक्‍त फैट जमा होते हैं. स्‍वयं को हाइड्रेटेड रखें, क्‍योंकि आपके शरीर की क्रियाओं को सुचारू रखने के लिए यह आवश्‍यक है. जब आप घर पर रहें, तो आपको चिप्‍स, स्‍वीट्स जैसे फूड्स से परहेज करना चाहिए. आपके भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होनी चाहिए. यदि आप हल्‍का लंच लेना चाहें, तो भोजन में सलाद लें. अपनी शारीरिक क्रियाओं के सुचारू संचालन के लिए स्‍वयं को हाइड्रेटेड रखें.

व्‍यायाम
दिन में कम-से-कम 30 मिनट तक व्‍यायाम करें. योग, सांस से जुड़े व्‍यायाम, जुम्‍बा आदि जैसे एक्सरसाइज़ काम करते हुए घर पर भी किए जा सकते हैं. तनाव-चिंता भगाने के लिए कम-से-कम 10 मिनट तक ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ काफ़ी सहायक साबित हो सकती है. इसके अलावा आप इस बात का भी ध्‍यान रखें कि आपके द्वारा ग्रहण की जानेवाली कैलोरी की मात्रा आपके द्वारा बर्न की जानेवाली कैलोरी मात्रा से कम हो, ताकि आपके शरीर का वज़न संतुलित बना रहे.

तनाव को दूर भगाएं
परिवार और दोस्‍तों के साथ अच्छा समय बिताएं, इससे तनाव से राहत मिलती है. अपने दोस्‍तों से बात करें. फोन करके उनके साथ मज़ेदार बातचीत करें. बच्‍चों के साथ समय गुज़ारें. उनके साथ इनडोर गेम्‍स खेलें. इससे आप रिलैक्‍स्ड रहेंगे, साथ ही आपको उनके साथ अधिक समय गुज़ारने का मौक़ा भी मिलेगा. यदि आपके घर में बालकनी हो, तो वहां कुछ समय बिताएं, क्‍योंकि सूर्य की धूप और हरियाली का सुकूनभरा प्रभाव होता है. बागवानी करें, इससे आपके मन को सुकून मिलेगा. डायरी लिखने की आदत डालें और उसमें उन चीज़ों के बारे में लिखें, जिनसे आपको ख़ुशी और ग़म होता है.

कंप्लीट विटामिन्स
डॉक्‍टर की सलाह से अपने आहार में विटामिन डी, विटामिन बी12, मल्‍टी-विटामिन्‍स, कैल्शियम और एंटीऑक्‍सीडेंट्स के सप्‍लीमेंट्स लें, इससे आपकी प्रतिरोधी क्षमता और जीवन-शक्ति बढ़ेगी. यदि आप पर्याप्‍त मात्रा में धूप नहीं ले पाते हैं, तो विटामिन डी लें, क्योंकि इसकी कमी से मानसिक समस्‍याएं हो सकती हैं.

गैजेट्स का कम प्रयोग
गैजेट्स के उपयोग का समय तय करें, क्‍योंकि इसके चलते आपकी नींद प्रभावित हो सकती है. सेहतभरी नींद महत्‍वपूर्ण है. नींद बाधित होने के चलते तनाव बढ़ सकता है. इसके कारण आपके हॉर्मोन्‍स प्रभावित हो सकते हैं. कोविड-19 से जुड़ी नकारात्‍मक ख़बरों को लगातार देखने व पढ़ने से बचें. आशावादी रहें और ख़ुश रहें, इसका तन-मन दोनों पर प्रभावशाली असर होता है.

ऊषा गुप्ता

Women's Health And Fitness

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एसिडिटी, कब्ज़, दस्त, उल्टी, पेटदर्द आदि के कारण यदि आपको भी इनडाइजेशन या अपच की तकलीफ रहती है, तो अपच व बदहज़मी के ये 5 आयुर्वेदिक उपचार आपके बहुत काम आएंगे. इनडाइजेशन या अपच होने पर ये 5 आयुर्वेदिक होम रेमेडीज़ तुरंत राहत देती हैं, इसलिए इनडाइजेशन या अपच के 5 आयुर्वेदिक उपचार ज़रूर ट्राई करें.

Indigestion

ये हैं इनडाइजेशन या अपच के 5 आयुर्वेदिक उपचार

1) यदि आपको एसिडिटी की तकलीफ रहती है और कुछ भी खाते ही एसिडिटी बढ़ जाती है, तो पांच-छह तुलसी की पत्तियां या सौंफ चबाएं. ऐसा करने से एसिडिटी की तकलीफ से छुटकारा मिलता है.

2) जिन लोगों को कब्ज़ की तकलीफ रहती है, उन्हें अपच की शिकायत भी रहती है. यदि आपको भी कब्ज़ की तकलीफ रहती है, तो रोज़ाना आधा ग्लास गुनगुने पानी के साथ आधा टीस्पून भुना हुआ जीरा पाउडर लें. ऐसा करने से कब्ज़ में राहत मिलती है.

3) यदि आपको दस्त के कारण अपच की समस्या हो रही है, तो दो टेबलस्पून दही में आधा-आधा टीस्पून मेथीदाना और जीरा मिलाकर खाएं. दिन में तीन बार ऐसा करने से दस्त में तुरंत आराम मिलता है और खाना भी ठीक से पचता है.

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4) यदि आपको पेटदर्द, अपच या बदहज़मी की तकलीफ रहती है, तो 1 ग्लास गरम पानी में चुटकीभर हींग और चुटकीभर काला नमक मिलाकर दिन में दो-तीन बार पीएं. आपको जल्दी ही आराम मिलेगा.

5) यदि आपको उल्टी हो रही है, जिसके कारण आपका खाया हुआ खाना बाहर आ जाता है, तो 1-1 टीस्पून अदरक का रस और नींबू का रस मिलाकर दिन में 2-3 बार लें. ऐसा करने से उल्टी में आराम मिलता है.

पीरियड के दर्द से छुटकारा पाने के 5 आसान घरेलू उपाय जानने के लिए देखें ये वीडियो:

कोरोना लॉकडाउन पीरियड में सबसे ज़्यादा ज़रूरत हैंड सैनिटाइज़र की पड़ रही है. ऐसे में यदि कोई आपको घर पर ही होममेड हैंड सैनिटाइज़र बनाना सिखा दे तो? ऐक्ट्रेस मंदिरा बेदी ने अपने बेटे वीर के साथ मिलकर घर पर ही होममेड हैंड सैनिटाइज़र बनाया और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया. आप भी मंदिरा बेदी से सिर्फ 3 चीज़ों से घर पर ही होममेड हैंड सैनिटाइज़र बनाना सीखें.

Mandira Bedi making hand sanitizer

ये है होममेड हैंड सैनिटाइज़र बनाने की सामग्री

1) 50 मिली रबिंग अल्कोहल
2) 25 मिली एलोवेरा जेल
3) कुछ बूंदें एसेंशियल ऑयल (अपनी पसंद का कोई भी एसेंशियल ऑयल इस्तेमाल करें)

होममेड हैंड सैनिटाइज़र बनाने के लिए एक जार में 50 मिली रबिंग अल्कोहल डालें, फिर इसमें 25 मिली एलोवेरा जेल डालें और अच्छी तरह मिलाएं. फिर इसमें कुछ बूंदें अपनी पसंद का कोई भी एसेंशियल ऑयल मिलाकर अच्छी तरह मिलाएं. स्प्रे बॉटल में भर दें और ज़रूरत के अनुसार इस्तेमाल करें.

मंदिरा बेदी और उनके बेटे वीर का बनाया हुआ होममेड हैंड सैनिटाइज़र बनाना सीखने के लिए देखें ये वीडियो

* बदनदर्द हो, तो गरम दूध में तीन-चार इलायची पीसकर मिला लें और चुटकीभर हल्दी डालकर उसे रात को सोते समय मरीज़ को पिलाएं. सुबह लगेगा जैसे रात को दर्द उठा ही नहीं था.

* अधिक सिरदर्द हो, तो तुलसी के पत्तों को पीसकर लेप करने से तुरंत आराम मिलता है.

Health Tricks

* पांच खजूर को उबालकर उसमें एक टीस्पून मेथीदाना का चूर्ण डालकर नियमित रूप से पीने से कमरदर्द दूर होता है.

* दांतों में दर्द की टीस उठने पर एक टीस्पून सोंठ पीसकर गर्म पानी के साथ फांक लें. दांत के दर्द से राहत मिलेगी.

* चूना व शहद मिलाकर लेप करने से पसली के दर्द से राहत मिलती है.

* गुड़ को पानी में छानकर पीने से सिरदर्द में लाभ होता है.

* शरीर के किसी अंग में दर्द की टीस उठती हो, तो आप सुबह-शाम पिसे हुए आंवले का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें. फिर कुछ देर बाद कुटी-पिसी हुई इलायची दूध में डालकर पीएं. इस प्रयोग से शरीर में चुस्ती-फूर्ती बनी रहेगी और शरीर के किसी अंग में दर्द की टीस नहीं उठेगी.

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*100 ग्राम मेथीदाना हल्का-सा भूनें. फिर इसे हल्का-सा कूटकर उसमें चौथाई भाग काला नमक मिला लें. सुबह-शाम दो चम्मच गुनगुने पानी के साथ लें. इस प्रयोग को निरंतर 15 दिनों तक करने से कैसा भी असहनीय दर्द हो, दूर हो जाएगा.

* 10-12 तुलसी के पत्ते में 5-10 कालीमिर्च मिलाकर बारीक़ पीसकर चाट लें. इससे अजीर्ण के सारे विकार दूर हो जाएंगे.

* दांतों में दर्द की टीस उठने पर एक टीस्पून सोंठ पीसकर गर्म पानी के साथ फांक लें. दांत के दर्द से राहत मिलेगी.

* सोंठ और एरंड मूल का क्वाथ बनाकर उसमें पिसी हुई हींग और काला नमक डालकर पीने से कमरदर्द में आराम मिलता है.

* बहुत पुराना सिरदर्द है, तो 11 बेलपत्र पीसकर उसका रस निकालें और सर्दियों में यह रस बिना कुछ मिलाए ही पी लें. हां, गर्मियों में थोड़ा पानी मिलाकर पीएं. कितना ही पुराना सिरदर्द हो, तीन दिन में ही आराम मिल जाएगा.

ऊषा गुप्ता

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आमतौर पर दही (Curd) सभी खाते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को इसके फ़ायदों के बारे में जानकारी होती है. दही में भरपूर मात्रा में विटामिन्स, प्रोटीन, कैल्शियम व मिनरल्स होते हैं. इसके अलावा इसमें लैक्टोज़, आयरन व फास्फोरस भी होता है. लो फैटवाले दही का सेवन करने से वज़न नियंत्रण में रहता है. इसके सेवन से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. दही का नियमित रूप से सेवन करने से त्वचा, बाल व चेहरे की रंगत अच्छी होती है यानी ख़ूबसूरती के लिए भी दही लाभदायक है.

Curd Health Benefits

* दही में सेंधा नमक व भुना हुआ जीरा पाउडर मिलाकर पीने से पेट संबंधी बीमारियों से छुटकारा मिलता है.

* दही पाचन के लिए बेहद फ़ायदेमंद है. दही में अजवायन मिलाकर खाने से कब्ज़ की समस्या दूर हो जाती है.

* मुंह में छाले होने पर दही से कुल्ला करें. इससे छाले में आराम मिलता है.

* गर्मी व ख़ुश्की से हुए सिरदर्द में दही खाने से और दही से सिर पर मालिश करने से दर्द दूर होता है.

* यदि पेट की तकलीफ़ हो, तो दही में पानी मिलाकर शहद के साथ लेने से पेट की तकलीफ़ दूर होती है.

* स्किन प्रॉब्लम्स यानी दाग़-धब्बे होने पर इसे दूर करने के लिए हर रोज़ स्नान करने से पहले शरीर पर दही लगाएं. फिर थोड़ी देर बाद स्नान करें.

* जी मिचलाने व भोजन में अरुचि होने पर दही में पुदीना मिलाकर खाएं.

* पित्त होने और धूप के कारण शारीरिक व मानसिक थकान होने या चक्कर आने पर दही की लस्सी बनाकर पीना फ़ायदेमंद होता है.

* जैतून के तेल में दही और नींबू का रस मिलाकर लगाने से चेहरे का रूखापन दूर होता है.

* दही में नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से झुर्रियां कम होती हैं.

* सनबर्न होने पर उस जगह दही लगाएं. इससे सनबर्न नहीं होता और स्किन टैन भी नहीं होती.

* दही में बादाम का तेल व शहद मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं. 15 मिनट बाद चेहरा धो लें. इससे डेड स्किन निकल जाती है और त्वचा खिल उठती है.

* हल्दी व गुलाबजल दही में मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा नर्म-मुलायम होती है.

* दही की छाछ बनाकर पीने से पेट की गर्मी में आराम मिलता है और पाचन क्रिया भी बेहतर रहती है. साथ ही भूख भी अधिक लगती है.

* हर रो़ज़ एक चम्मच दही खाने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसमें मौजूद गुड बैक्टीरिया इम्यून सिस्टम को सही रखते हैं.

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स्टडी

हाल में हुई स्टडी के अनुसार, दही खाने से दिल की बीमारियों के होने का ख़तरा दस प्रतिशत तक कम हो जाता है. दही में मौजूद तत्व शरीर को कई तरी़के से फ़ायदा पहुंचाते हैं. यह प्रो-बायोटिक फूड कैल्शियम से भरपूर होता है, इससे हड्डियों व दांतों को मज़बूती मिलती है. दही खाने का सीधा संबंध मस्तिष्क से भी है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दही का सेवन करनेवालों को तनाव व अवसाद की समस्या कम होती है.

हेल्थ अलर्ट

* रात में दही न खाएं. यदि खाना ज़रूरी हो, तो कालीमिर्च पाउडर या शक्कर मिलाकर खाएं.

* खट्टी दही को गर्म करके न खाएं.

* दही में नमक मिलाकर न खाएं. इसकी बजाय गुड़ या मिश्री मिलाकर खाना फ़ायदेमंद रहता है.

* दही में फैट्स होने के कारण यह दिल की बीमारी व डायबिटीज़ टाइप 2 में नुक़सानदायक हो सकता है.

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सुपर टिप

दही में संतरे के छिलके का पाउडर मिलाकर लगाने से रंगत गोरी हो जाती है.

– ऊषा गुप्ता

दादी मां के अन्य घरेलू नुस्ख़े/होम रेमेडीज़ जानने के लिए यहां क्लिक करें-  Dadi Ma Ka Khazana

नमक (Salt) हमारे जीवन में बहुपयोगी भूमिका निभाता है. एक तरफ़ जहां यह भोजन के स्वाद के लिए ज़रूरी है, वहीं इसमें कई औषधीय गुण भी हैं, जिससे कई तरह के दर्द और समस्याओं से छुटकारा मिलता है.

Benefits Of Salt

नमक कई प्रकार के होते हैं, जैसे- सेंधा नमक, काला नमक, समुद्री नमक, सामान्य नमक आदि. नमक के कई फ़ायदे हैं. यह कब्ज़ दूर करने, कोलेस्ट्रॉल कम करने, हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने, दिल के दौरे की संभावना को कम करने में सहायक है. आइए, दर्दनिवारक नमक के बहुपयोगी नुस्ख़ों के बारे में जानते हैं.

* अपच होने पर नींबू के रस में नमक मिलाकर पीएं. तुरंत आराम मिलेगा.

* यदि आधासीसी यानी माइग्रेन की तकलीफ़ हो, तो लहसुन में नमक मिलाकर पीस लें और माथे पर इसका लेप लगाएं.

* यदि पेटदर्द हो, तो केले का जूस बना लें और उसमें काला नमक मिलाकर पीएं.

* खट्टी डकार की समस्या होने पर आधा-आधा टीस्पून पुदीना, बड़ी इलायची, कालीमिर्च, अजवायन, सेंधा व काला नमक लेकर पीस लें. दो-दो घंटे पर सौंफ के पानी के साथ ये चूर्ण एक टीस्पून लेते रहें.

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* गठिया की शिकायत हो, तो नमक और राई बराबर मात्रा में लेकर पीस लें. अब इसे हल्का गर्म करके दर्दवाली जगह पर लेप करके पट्टी बांध लें.

* ज़ुकाम होने पर तुलसी के रस में थोड़ा-सा नमक घोलकर नाक में कुछ बूंद टपकाएं.

* तिल के तेल में नमक को अच्छी तरह से भूनकर जोड़ों के दर्द में मालिश करने से आराम मिलता है.

* चेहरे पर दाग़-धब्बे व झाइयां हों, तो खीरे को सिरे से काटकर उस पर नमक लगाकर खाएं.

* छाले होने पर नमकवाले गुनगुने पानी से कुल्लाकरने से लाभ होता है.

* शरीर में थकान हो और बदन टूट रहा हो, तो एक खुले बर्तन या बाल्टी में गर्म पानी डालकर दो-तीन चम्मच नमक मिला लें. फिर घुटनों तक पैरों को अच्छी तरह से धोएं. बाद में काफ़ी देर तक पैर को डुबोएं रखें.

* दांत में कीड़े लग गए हों, तो आधा ग्लास गर्म पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर अच्छी तरह से घोल लें. फिर इसे घूंट-घूंट भरकर कुल्ला करें.

* नज़ले की समस्या होने पर गुनगुने नमकवाले पानी से नथुनों से पानी खींचें और छोड़ें, जैसे जलनेती करते हैं.

* पेशाब की रुकावट की समस्या हो, तो नमक पीसकर नाभि में डालें और बूंद-बूंद पानी डालें. जल्द ही समस्या दूर हो जाएगी.

* भूख न लगने की परेशानी हो, तो भोजन से आधे घंटे पहले एक चम्मच अदरक के रस में थोड़ा-सा नमक मिलाकर पीएं.

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* सिरदर्द होने पर घी में नमक डालकर गुनगुना गर्म करें और इसे माथे पर और कनपटियों पर मलें.

* हिचकी की समस्या हो, तो सेंधा व काला नमक पीसकर उसमें नींबू का रस मिलाएं और आधा कप पानी में घोलकर पीएं. इससे हिचकी से तुरंत आराम मिलेगा.

* चोट-मोच लगने पर घी गर्म करके उसमें नमक मिलाएं और चोटवाली जगह पर लगाएं.

* गर्दन में ऐंठन और मांसपेशियों में दर्द हो, तो नमक व हल्दी मिलाकर पोटली बना लें. इसे गुनगुने तेल में भिगोकर हल्के हाथों से मालिश करें.

* कब्ज़ में एक ग्लास गर्म पानी में आधा चम्मच सेंधा व काला नमक व आधा नींबू निचोड़कर खाली पेट पीएं. पंद्रह मिनट में पेट साफ़ हो जाएगा.

* तनाव दूर करने और तरोताज़गी के लिए भी नमक बेहद उपयोगी है. नहाने के गुनगुने पानी में दो कप सेंधा नमक मिलाकर स्नान करें. ऐसा हफ़्ते में कम-से-कम दो बार ज़रूर करें.

सुपर टिप

बदहज़मी होने पर प्याज़ के रस में नमक मिलाकर पीने से आराम मिलता है.

– रुचि ख़ुशी गुप्ता

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करीपत्ते को भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. लेकिन इसके सेहत से जुड़े अनगिनत फ़ायदे भी हैं. पौष्टिक तत्वों से भरपूर करीपत्ते में प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और फास्फोरस होता है. इसे मीठी नीम भी कहते हैं. इसमें कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स व फेनोल्स पाए जाते हैं, जिससे कैंसर जैसी ख़तरनाक बीमारी से भी बचने में मदद भी मिलती है. करीपत्ते में मौजूद ख़ास तत्व प्रोस्टेट, ल्यूकेमिया, कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव करते हैं. इसके बेहतरीन फ़ायदे के लिए हमेशा ताज़े करीपत्ते का ही इस्तेमाल करें.

Curry Leaves Benefits

* जी मिचलाने पर 1/4 कप करीपत्ते के रस में चुटकीभर शक्कर व आधे नींबू का रस मिलाकर पीएं.

* पित्त की समस्या होने पर करीपत्ते को पीसकर इसका रस निकाल लें और इसे छाछ के साथ दिनभर में दो-तीन बार पीएं.

* चेहरे की रंगत निखारने में भी करीपत्ता उपयोगी है. करीपत्ते को सुखाकर पीसकर पाउडर बना लें. इसमें नारियल का तेल, गुलाबजल, मुलतानी मिट्टी व चंदन मिलाकर पैक तैयार कर लें. इसे चेहरे पर लगाकर आधे घंटे बाद धो लें.

* एनीमिया की तकलीफ़ हो, तो हर रोज़ सुबह खाली पेट दो करीपत्ते के साथ एक खजूर खाएं.

* यदि डायरिया की प्रॉब्लम हो, तो करीपत्ते के पाउडर को छाछ में मिलाकर दिन में दो बार पीएं. इससे जल्द ही आराम मिल जाएगा.

* यदि आप डायबिटीज़ के मरीज़ हैं, तो अपने डायट में करीपत्ते को ज़रूर शामिल करें. तीन महीने तक लगातार हर रोज़ सुबह खाली पेट करीपत्ता खाने से इसके चमत्कारिक लाभ मिलेंगे.

* यदि स़़फेद बालों की समस्य हो, बाल टूटते व गिरते हों, तो 10-12 करीपत्ते में रातभर भिगोए हुए 5-6 बादाम मिलाकर पेस्ट बना लें. इससे बालों व स्काल्प की मालिश करें. फिर माइल्ड शैंपू से बाल धो लें. ऐसा तीन-चार हफ़्ते तक करने से बाल मज़बूत, चमकदार व काले होते हैं.

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* नियमित रूप से 7-8 करीपत्ते का सेवन करना शरीर के लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है. इससे वज़न कम होने, आंखों की रोशनी बढ़ने, बालों के काले होने में मदद मिलती है.

* पीरियड में दर्द की समस्या होने पर करीपत्ते का सेवन करना फ़ायदेमंद रहता है. इससे माहवारी में होनेवाले असहनीय दर्द में काफ़ी आराम मिलता है.

* करीपत्ते में एंटीबैक्टीरियल व एंटीफंगल गुण होने के कारण यह सूखी खांसी, कफ़ आदि में बलगम निकालने में मददगार साबित होता है.

* बवासीर की समस्या होने पर करीपत्ते का जूस पीएं. जूस के लिए करीपत्ते को पानी के साथ पीसकर उसका रस निकाल लें और इसे पीएं.

* वज़न कम करने के लिए करीपत्ते की चाय पीएं. इसके लिए पानी में करीपत्ता उबालकर उसमें नींबू का रस और शहद मिलाएं.

* अपच की परेशानी हो, तो एक टीस्पून घी को गर्म करके उसमें पांच-छह करीपत्ता, थोड़ा-सा सोंठ, जीरा, शहद व पानी मिलाकर उबाल लें. फिर इसे ठंडा करके पीएं.

* ब्लड प्रेशर से राहत के लिए सुबह लौकी के रस के साथ करीपत्ते का रस लें.

* खांसी-ज़ुकाम होने पर करीपत्ते के पाउडर में शहद मिलाकर लें.

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* चेहरे के जले-कटे निशान को दूर करने में भी करीपत्ता फ़ायदेमंद है. इसके लिए एक कप दूध को गर्म करके उसमें 5-6 करीपत्ते मिलाकर उबालें. जब यह गाढ़ा हो जाए, तब इसे आंच पर से उतारकर ठंडा कर लें. फिर इसे जले-कटे हुए जगहों पर लगाएं.

हमेशा चुस्त-दुरुस्त व सेहतमंद रहने के लिए अपने भोजन में नियमित रूप से करीपत्ते को ज़रूर शामिल करें.

सुपर टिप: उल्टी व घबराहट होने पर करीपत्ते के जूस में नींबू का रस व शक्कर मिलाकर पीएं.

– ऊषा गुप्ता

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आलू भला किसे पसंद नहीं. आमतौर पर आलू को स्नैक्स व भोजन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, पर इसमें कई औषधीय गुण भी हैं. जहां यह आंतों में सड़न की प्रक्रिया को रोकता है, वहीं पाचन में सहायक बैक्टीरिया के विकास में भी मदद करता है. आलू में प्रचुर मात्रा में विटामिन, स्टार्च, कैल्शियम, पोटैशियम व फास्फोरस होता है. कब्ज़, ड्रॉप्सी, यूरिक एसिड व आतों से जुड़ी बीमारियों में आलू काफ़ी फ़ायदेमंद है. स्कर्वी जैसी बीमारी के लिए तो आलू आदर्श आहार औषधी है. आलू का छिलका भी उपयोगी होता है, इसमें फाइबर व विटामिन बी 3 अधिक मात्रा में होती है. आलू को छिलके सहित पकाना चाहिए, क्योंेकि इसके छिलके के नीचे के हिस्से में ही प्रचुर मात्रा में प्रोटीन व खनिज होते हैं.

Potato

* पाचन संबंधी समस्या होने पर एक टेबलस्पून कच्चे आलू का रस भोजन से आधे घंटे पहले दो या तीन बार लें.

* मुंह में छाले हों, तो उबले हुए आलू खाएं. इससे जल्द ही छाले ठीक हो जाएंगे.

* यदि गठिया हो, तो चार आलू भून कर इसका छिलका निकाल लें. इस पर नमक व लाल मिर्च पाउडर छिड़ककर हर रोज़ खाएं. इससे गठिया जल्द ही ठीक हो जाएगा. इसके अलावा भोजन से पहले एक टेबलस्पून आलू का रस लेना भी फ़ायदेमंद होता है.

* गुर्दे की पथरी में मरीज़ को नियमित रूप से आलू खिलाते रहें और भरपूर मात्रा में पानी पिलाएं.

* सिरदर्द होने पर आलू को तीन तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं-

  1. आलू को छीलकर इसके पतले-पतले स्लाइस करके उसे सिर पर रखकर कपड़े से बांधकर शांत जगह पर लेट जाएं. कुछ देर में सिरदर्द से आराम मिल जाएगा.
  2. साफ़ कपड़े की पट्टी को आलू के रस में डुबोकर सिर पर रखें. जब पट्टी गर्म हो जाए, तब उसे बदल दें. कुछ देर तक ये प्रक्रिया करते रहने से सिरदर्द दूर हो जाएगा.
  3. आलू के मोटे छिलके को सिर पर रखकर बांध दें. इससे भी सिरदर्द में लाभ होता है.

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* आयरन की कमी होने पर एनीमिया से परेशान मरीज़ों के लिए आलू का छिलका काफ़ी लाभदायक है. अन्य सब्ज़ियों के साथ आलू के छिलके का सेवन करें. इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में होता है. इसका नियमित रूप से सेवन करते रहने से एनीमिया की समस्या दूर हो जाती है.

* आलू में मैग्नीशियम होता है, जो हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में सहायक होता है. अतः नियमित रूप से उबले हुए आलू अवश्य खाएं.

* शरीर में कहीं जल गया हो, तो कच्चे आलू का रस निकालकर जले हुए स्थान पर लगाएं.

* छोटे बच्चों या बुज़ुर्गों को आलू के रस में शहद मिलाकर पिलाने से उन्हें ताक़त मिलती है और वे हेल्दी भी होते हैं.

* आंखों की जलन और सूजन के लिए कच्चे आलू को कद्दूकस कर उसका रस निकालकर आंखों में काजल की तरह लगाएं.

* सन बर्न होने पर आलू को स्लाइस में काटकर फ्रिज में रख दें. फिर ठंडे आलू को सन बर्न वाले हिस्से में लगाएं.

* झुर्रियां व चेहरे के दाग़-धब्बे को दूर करने व खिली त्वचा के लिए आलू के रस का इस्तेमाल करना फ़ायदेमंद रहता है.

* चेहरे की रंगत निखारने के लिए आलू के रस को चेहरे पर लगाकर आधे घंटे बाद चेहरा धो लें. इसके अलावा इसमें नींबू का रस मिलाकर भी लगा सकते हैं.

यह भी पढ़ेचोट-मोच, सूजन के लिए उपयोगी घरेलू नुस्ख़े (Useful Home Remedies For Injury, Swelling)

* चेहरे के दाग़-धब्बे को दूर करने के लिए आलू को स्लाइस में काटकर इसे चेहरे पर धीरे-धीरे रगड़ते हुए मसाज करें.

* आलू एक नेचुरल क्लींज़र का काम भी करता है. इसमें ककड़ी मिलाकर चेहरे पर लगाएं.

सुपर टिप

आलू में केरोटिनॉयड्स नामक तत्व होता है, जो दिल व शरीर के अंदरूनी हिस्से के लिए उपयोगी होता है, इसलिए नियमित रूप से उबले हुए आलू खाएं.

ऊषा गुप्ता

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