health tips

सर्दियों में हल्दी का सेवन काफ़ी फ़ायदेमंद होता है. हल्दी का इस्तेमाल मसाले, पूजा-पाठ के अलावा कई बीमारियों से बचाव मेंं होता रहा है. हल्दी में विटामिन सी, विटामिन बी 6, आयरन, कैल्शियम, डाइटरी फाइबर, सोडियम, प्रोटीन, जिंक, मैग्नीज व पोटैशियम होता है, जो सेहत को कई तरी़के से लाभ पहुंचाता है.

  • पाचन समस्या होने पर कच्ची हल्दी खाएं. डायरिया, अपच, गैस होने पर कच्ची हल्दी को पानी में उबालकर पीएं.
  • हल्दी का पानी लिवर में जानेवाले रक्त को डिटॉक्सीफाई करने में सक्षम महत्वपूर्ण एंजाइम का उत्पादन करके लिवर को हेल्दी बनाता है.
  • हल्दी का पानी वज़न घटाने के साथ-साथ अपच की समस्या को भी दूर करता है. एक ग्लास दूध में थोड़ी-सी हल्दी मिलाकर सुबह रोज़ पीने से शरीर के फैट्स कम होते हैं और वज़न कम करने में मदद मिलती है.

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  • सर्दी-जुकाम होने पर रात को सोने से पहले एक ग्लास दूध में आधा टीस्पून हल्दी मिलाकर पीएं. हल्दीवाला दूध बनाने के लिए आधा कप गुनगुने दूध में 1/4 चम्मच हल्दी पाउडर और चुटकीभर कालीमिर्च पाउडर मिक्स करें. मीठेपन के लिए शक्कर, गुड आदि मिला सकते हैं.
  • रोज़ाना हल्दी खाने से रक्त में पाए जानेवाले विषैले तत्व शरीर से बाहर निकल जाते है, जिससे रक्त का बहाव अच्छे से होता है. रक्त पतला होने पर धमनियों में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है. इससे हृदय संबंधी समस्याएं नहीं होतीं.
  • पायरिया की समस्या होने पर हल्दी में सरसों का तेल मिक्स करके मसूड़ों पर मालिश करने से आराम मिलता है. मालिश के बाद गर्म पानी से कुल्ला करें.
  • यदि सिर में फोड़े-फुंसियां हों, तो हल्दी में त्रिफला, नीम और चंदन मिलाकर पीसकर पेस्ट बना लें और इसे सिर पर लगाकर मसाज करें.
  • .गले में खराश हो, तो आधा-आधा टीस्पून हल्दी, यवक्षार व चित्रक में एक टीस्पून शहद मिलाकर सेवन करें.
  • दाद, खुजली होने पर उस जगह पर हल्दी का लेप लगाएं.
  • चोट लगने पर तुरंत हल्दी लगाने से चोट से बहनेवाला खून रुक जाता है और घाव भी जल्दी ठीक होते हैं. साथ ही इससे चोट की जलन व दर्द भी कम होती है.

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  • हल्दी के सत को सेवन करने से आर्थराइटिस के दर्द, सूजन को कम करने में मदद मिलती है.
  • शरीर में किसी जगह पर दर्द या सूजन होने पर वहां हल्दी का लेप लगाने से आराम मिलता है.
  • शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने, संक्रमण से लड़ने, डायबिटीज़ को नियंत्रित करने के साथ अच्छी नींद के लिए सोने से पहले हल्दी वाला दूध पीना फ़ायदेमंद रहता है. साथ ही यह कई तरह की बीमारियों के जोख़िम को भी कम करता है.

कैंसर से बचाव
कच्ची हल्दी में कैंसर से लड़ने के गुण होते हैं. ये पुरुषों में होनेवाले प्रोस्टेट कैंसर के सेल्स को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ उन्हें ख़त्म भी कर देते हैं.

सावधानियां

  • जिन लोगों को हल्दी से एलर्जी है, उन्हें पेटदर्द या डायरिया जैसी समस्या हो सकती है.
  • गर्भवती महिलाएं कच्ची हल्दी का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें.
  • यदि किसी की सर्जरी होनेवाली है, तो कच्ची हल्दी का सेवन न करें.
  • एक दिन में एक टीस्पून हल्दी का सेवन कर सकते हैं.

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सर्दी-खांसी होना एक आम समस्या है. ऐसे में यहां दिए गए घरेलू नुस्ख़ों से न केवल सर्दी-खांसी से राहत मिलेगी, बल्कि कुछ ख़ास उपायों से इम्यून सिस्टम भी मज़बूत होगा.

घरेलू नुस्ख़े

  • आधा टीस्पून शहद में चुटकीभर इलायची पाउडर के साथ नींबू के रस की 3-4 बूंदें मिलाकर दिनभर में दो बार लेने से सर्दी-खांसी में काफ़ी आराम मिलता है.
  • सर्दी-ज़ुकाम में राहत के लिए अदरक, कालीमिर्च, तुलसी मिलाकर चाय पीएं.
  • अलसी के बीज को मोटा होने तक उबालें. फिर इसमें शहद व नींबू का रस मिलाकर पीने से खांसी दूर होती है.
  • सूखी खांसी में राहत के लिए अदरक के एक छोटे टुकड़े में नमक मिलाकर दांतों के नीचे दबा लें. जब अदरक का रस धीरे-धीरे मुंह में जाएगा, तो राहत मिलेगी. लगभग 7-8 मिनट बाद गरारा कर लें. इससे सूखी खांसी दूर होने के साथ गला खुलता है.

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  • अनार के जूस में पिपली पाउडर और थोड़ा-सा अदरक मिलाकर पीने से खांसी में फ़ायदा होता है.
  • यदि खांसी में बलगम आता हो, तो देसी घी में आधा टीस्पून कालीमिर्च मिलाकर खाएं.
  • खांसी से राहत पाने के लिए तुलसी के पत्तों का रस निकालकर पीएं.
  • बच्चों की खांसी में ऐलोवीरा के जूस में शहद मिलाकर देना फ़ायदेमंद रहता है.
  • हर रोज़ सुबह लहसुन की कली खाएं. इससे सर्दी-खांसी दूर होने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम भी मज़बूत होता है.
  • सर्दी-खांसी में गाजर का रस भी लाभदायक होता है, पर ध्यान रहे जूस में ब़र्फ न डालें.
  • सर्दी-खांसी होने पर गर्म पानी, सूप, चाय, विटामिन सी का अधिक सेवन करें.
  • खट्टे फलों को खाना खांसी-ज़ुकाम में लाभकारी हैै, क्योंकि इससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसके अलावा यदि किसी एलर्जी के कारण खांसी हो रही है, तो संतरा, कीवी जैसे खट्टे फ्रूट्स खाना उपयोगी रहता है.
  • हर रोज़ दूध में हल्दी डालकर पीएं. इससे न केवल सर्दी-खांसी से दूर रहेंगे, बल्कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मज़बूत होगी.
  • सर्दी में राहत के लिए गुनगुने पानी में आधा टीस्पून नमक मिलाकर गरारे करें.
  • सर्दी-खांसी में स्टीम लेना फ़ायदेमंद
    रहता है.

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हेल्थ अलर्ट

  • मसालेदार भोजन से दूर रहें.
  • प्रोसेस्ड भोजन न खाएं.
  • यदि खांसी के साथ बलगम आता हो, तो दूध का सेवन बिल्कुल न करें.

रिसर्च
शोधों से पता चला है कि अनन्नास खाने से सर्दी दूर होने के अलावा पेट की समस्याएं दूर होती हैं और बलगम की परेशानी भी ख़त्म होती है. दरअसल, रिसर्च में पाया गया कि अनन्नास के तने और फल में ब्रोमलैन एंजाइम होता है, जो खांसी दूर करने में प्रभावशाली भूमिका निभाता है.

माना भीगा मौसम सुहाना लगता है लेकिन बारिश अपने साथ सिर्फ़ ठंडी फुहार ही नहीं बल्कि कई तरह के संक्रमण और बीमारियां भी साथ लाती है. इसलिए इस मौसम का पूरा लुत्फ़ उठाना हो तो बेहरत है कि मॉनसून में अपनी फिटनेस (monsoon health and fitness) बनाए रखें…

रखें डायट का ध्यान… 

  • मॉनसून में पाचन क्रिया थोड़ी धीमी हो जाती है, इस सीज़न में पानी के साथ-साथ भोजन से भी बैक्टिरियलइंफेक्शन्स की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए खानपान का विशेष ध्यान रखें. साफ़ व पूरी तरह से पका हुआ भोजनलें.
  • इस मौसम मेंपाचन क्रिया धीमी होने के कारण हमारा इम्यून सिस्टम भी कमज़ोर हो जाता है, जिससे ऊर्जा की कमीहोती है और साथ ही खाना भी ठीक तरी़के से पचता नहीं, जिससे एसिडिटी और गैस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में आपको खानपान का ख़ास ध्यान रखना चाहिए. संतुलित व हल्का भोजन लें और ओवरईटिंग से बचें.
  • सही तरी़के से खानपान का ख़्याल न रखने पर पेट में संक्रमण, दस्त, हैजा और पीलिया तक हो सकता है. डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया भी आम बरसाती बीमारियां हैं, इनसे बचाव भी ज़रूरी है.
  • पानी जितना ज़्यादा हो सके पिएं. हाइड्रेटेड रहें. बारिश है, तो यह न सोचें कि आपको अब ज़्यादा पानी पीने कीज़रूरत नहीं. मॉनसून में वातावरण में नमी बढ़ती है और पसीना जल्दी से सूखता नहीं, जिस वजह से शरीर की गर्मीरिलीज़ नहीं हो पाती, इसलिए पानी की कमी शरीर में न होने दें.
  • पानी हमेशा उबालकर ठंडा करके यानी प्यूरिफाई करके ही पीएं, क्योंकि इस मौसम में पानी जनित बीमारियों कीसंभावना सबसे अधिक होती है.
  • स्ट्रीट फुड और बाहर रोड साइड में मिलनेवाले में मिलनेवाला फूड इस समय जितना हो सके अवॉइड करें. सड़ककिनारे मिलनेवाला फ्रूट सलाद फूड पॉयज़निंग का सबसे बड़ा कारण होते हैं. इस मौसम में मच्छर-मक्खी व अन्यजंतुओं के अधिक पनपने का ख़तरा रहता है, जो खाने को दूषित कर सकते हैं. इसके अलावा इनमें बैक्टिरिया वगैरहभी हो सकता है, जिससे संक्रमण का डर रहता है.
  • पका हुआ खाना खाएं बजाय कच्चे सलाद वगैरह के. इसी तरह बासी भोजन से बचें.
  • फल व सब्ज़ियों को अच्छी तरह से धोने के बाद ही इस्तेमाल करें. हरी पत्तेदार सब्ज़ियां व फूल गोभी आदि कोउबालने के बाद ही इस्तेमाल करें, तो बेहतर होगा, ताकि कीटाणु वगैरह से आपका बचाव हो. वैसे बेहतर होगा किइस मौसम में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां खाने से बचें, क्योंकि बारिश में उनमें कीड़े लगने लगते हैं.
  • दूध को कंप्लीट डायट कहा जाता है, लेकिन इस मौसम में उसे अवॉइड करें.
  • डेयरी प्रोडक्ट्स इस मौसम में जितना कम खाएंगे, उतना बेहतर होगा क्योंकि उनके ज़रिए इंफेक्शन्स की संभावनाअधिक होती है.
  • ताज़ा सूप पीएं, ये काफ़ी हेल्दी होता है. भूख बढ़ाकर पाचन क्रिया को संतुलित करता है.
  • आप अदरक की चाय, ग्रीन टी या हर्बल टी भी पी सकते हैं.
  • ओट्स, जौ, ब्राउन राइस हल्के और पचने में आसान होते हैं और इस मौसम में बेस्ट रहते हैं.
  • नॉन वेज खाने से बचें, ख़ासतौर से सी फ़ूड, जैसे- फिश या प्रॉन्स, क्योंकि यह उनका ब्रीडिंग सीज़न होता है, जिससेआपको पेट में संक्रमण का ख़तरा हो सकता है. 
  • मसालेदार और तले हुए खाने से अपच, उबकाई आना, वॉटर रिटेंशन आदि की समस्या हो सकती है.
  • इस सीज़न में प्रोसेस्ड फूड अवॉइड करें.
  • इस मौसम में गाय का घी खाना काफ़ी फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि वो पाचन क्रिया  को ठीक रखता है और इम्यूनिटीभी बढ़ाता है.
  • बदहज़मी और अपच से बचने के लिए नियमित रूप से खाने से पहले अदरक के एक छोटे से टुकड़े पर सेंधा नमकलगाकर खाएं.
  • हल्दी, धनिया, कालीमिर्च, हींग, सौंफ, लहसुन, अदरक जैसे मसाले रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं, साथ हीपाचन क्रिया को भी बेहतर बनाते हैं.
  • इसी तरह नीम, हल्दी, करेला जैसी कड़वी चीज़ें और कड़वे हर्ब्स भी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं और इनमेंऔषधीय गुण होते हैं, जो संक्रमण से बचाव करते हैं. 
  • अपने भोजन में लहसुन को भी ज़रूर शामिल करें, क्योंकि यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. 
  • ड्रायफ्रूट्स को अपने डेली डायट का हिस्सा बनाएं.
  • फ्रेश फ्रूट्स में आप सेब, अनार, मोसंबी, केला खाचेरी, अनार, आलू बुखारा, लीची,  नाशपाती जैसे फल खाएं. 
  • इसी तरह गाजर, मूली और मेथी जैसी सब्ज़ियों को अपने डेली डायट का हिस्सा बनाएं.
  • रोज़ाना हल्दीवाला दूध आपकी इम्यूनिटी भी बढ़ाएगा और दूषित पानी के कारण होनेवाली बीमारियों से भीबचाएगा.
  • स्किन एलर्जी की समस्या वालों को स्पाइसी और सी फूड से बचना चाहिए, क्योंकि स्पाइसी फूड सर्कुलेशन कोबढ़ाता है, जिससे स्किन प्रॉब्लम्स बढ़ सकती है.
  • बर्तनों और कटिंग बोर्ड को अच्छी तरह साफ़ रखें.
  • ऐसे फल और सब्ज़ियां खाएं, जिनके छिलके निकाल सकते हैं.

फ़िज़िकल एक्टिविटी को कम न होने दें… 

  • बारिश में आपकी जॉगिंग और डेली वॉक पर रोक लग जाती है, लेकिन फिटनेस बनाए रखने के लिए बेहतर होगाकि आप घर में कुछ लाइट, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ व योगा करें. 
  • लेकिन ध्यान रखें कि इस मौसम में हेवी एक्सरसाइज़ से बचें. 
  • आप मेडिटेशन व योगा करें. 
  • जॉगिंग नहीं जा सकते तो क्या हुआ घर पर ही डान्सिंग करें. 
  • घर या ऑफ़िस में अपनी इंडोर फ़िज़िकल एक्टिविटी बढ़ाने पर ध्यान दें. 
  • बहुत देर तक एक ही जगह पर बैठे न रहें. 

स्किन इंफेक्शन और एलर्जी से रहें सावधान… 

  • बारिश के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से पैची स्किन, रैशेज़ फ़ंगल और बैक्टिरियल इंफेक्शन्स की संभावना बढ़जाती है.
  • नहाने के पानी में नीम का उबला हुआ पानी मिलाएं. 
  • अगर ये समस्या ज़्यादा हो बढ़ जाए तो डॉक्टर से संपर्क करें.
  • डायबिटीज़ के रोगी अधिक सावधानी बरतें. शू बाइट होने पर घाव के भीगने पर फ़ौरन उसे सूखा करें. नंगे पांव गीलीज़मीन पर न चलें, वरना जर्म्स और बैक्टीरिया से आपको इंफेक्शन हो सकता है. समस्या होने पर डॉक्टर से सम्पर्ककरें. 
  • एंटी बैक्टिरियल सोप्स और पाउडर्स का ही इस्तेमाल करें.
  • बारिश में भीग जाने पर जितनी जल्दी हो सके खुद को सूखा कर लें. ज़्यादा देर तक गीला रहने पर सर्दी-बुखार होसकता है और बालों व स्किन में फ़ंगल इंफेक्शन का डर बढ़ जाता है.
  • इस सीज़न में ओपन शूज़ या सैंडल्स पहनें. बंद शूज़ में पानी जमा होने पर पैर देर तक गीले रहते हैं, जिससे फंगलइंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है.
  • पैरों को भी जितना हो सके सूखा रखने की कोशिश करें. गीले होने पर पैरों को अच्छी तरह से साफ़ कर लें. उंगलियोंके बीच में ख़ासकर एंटी फंगल या एंटी बैक्टिरियल पाउडर लगाएं. 
  • जल्दी सूखनेवाले लाइट कपड़े पहनें. जींस न पहनें क्योंकि ये जल्दी सूखती नहीं, जिससे फंगल इंफेक्शन का डरबना रहता है.
  • हाईजीन का ख़याल रखें. हाथों को अच्छी तरह से धोने के बाद ही खाना खाएं.
  • पर्सनल हाइजीन का भी ख़ास ख़्याल रखें. टॉयलेट के बाद और डायपर बदलने पर हैंडवॉश से हाथ ज़रूर धोएं.
  • बार-बार चेहरे व आंखों पर हाथ न लगाएं, क्योंकि इस मौसम में आंखों के इंफेक्शन की समस्या भी बढ़ जाती है. कंजंक्टिवाइटिस या ड्राई आईज़ की समस्या हो सकती है.
  • बारिश से पहले घर में पेस्ट कंट्रोल ज़रूर करवाएं.
  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें वर्ना मच्छरों के पनपने की सम्भावना बढ़ जाती है.

ज़रूरी सावधानियां… 

  • बच्चों और बुजुर्गों व दमा व सांस के रोगियों को इस मौसम में ख़ास सावधानी बरतनी चाहिए. नमी वाली जगह परबहुत देर तक रहने से बचें. बारिश में भीगने से बचें. बाहर फिसलन बढ़ने से फिसलने का भी डर बढ़ जाता है इसलिएख़राब मौसम में बाहर जाने से बचें.
  • जब भी बाहर से आएं, तो गर्म पानी से नहाएं और पानी में एंटीसेप्टिक लिक्विड की कुछ बूंदों ज़रूर मिलाएं.
  • पैरों को गर्म रखें. बालों को बहुत देर तक गीला न रहने दें. जितना जल्दी हो सके उन्हें सुखा लें. 
  • डायट में भी ठंडी चीज़ों के सेवन से बचें. ताज़ा व गर्म भोजन ही खाएं. 
  • दिन के दौरान सोने से बचें. इससे वात, पित और कफ में असंतुलन हो जाता है. कफ़ व पित्त बढ़ सकता है. 
  • चश्मा या आई ड्रॉप्स या फिर मेकअप भी किसी के साथ शेयर न करें.
  • हेपेटाइटिस ए और बी का वैक्सीन लें, क्योंकि मॉनसून के दौरान लिवर में वायरल इंफेक्शन काफ़ी आम बात है. हेपेटाइटिस के वायरस पानी के ज़रिए तेज़ी से फैलते हैं. यह इंफेक्शन गंभीर हो सकता है, क्योंकि हेपेटाइटिस काकारण पीलिया हो जाता है.

बरसाती समस्याओं व बीमारियों से बचने के घरेलू उपाय… 

  • पेट दर्द, गैस, बदहज़मी होने पर थोड़ी-सी अजवायन को पानी में डालकर उबाल लें. इस पानी को गुनगना पीएं. 
  • सर्दी-खांसी से राहत के लिए एक कप पानी में सोंठ पाउडर उबालकर पीएं, राहत मिलेगी.
  • सर्दी, खांसी और ज़ुकाम के लिए गाजर के जूस में काला नमक मिलाकर पीएं. बहुत फ़ायदेमंद है.
  • गले में ख़राश या दर्द है, तो गुनगुने पानी में नमक और हल्दी मिलाकर गरारे करें.
  • अदरक को काटकर नींबू का रस डाल लें. भोजन के साथ इसका सेवन पाचन शक्ति को बढ़ाता है.
  • सर्दी से नाक बंद हो गई हो, तो गर्म पानी में नीलगिरी तेल की कुछ बूंदें डालकर भाप लें या फिर रुमाल में उसकीकुछ बूंदें छिड़ककर सूंघें.
  • धनिये और सौंफ के सेवन से भी पाचन तंत्र मज़बूत होता है, गैस, एसिडिटी से आराम मिलता है. कफ़ में भीफ़ायदेमंद है.
  • सर्दी-खांसी से राहत के लिए शहद में काली मिर्च पाउडर मिलाकर लें.
  • हेल्दी मसालों का मिश्रण- जीरा, अजवायन और सोंठ को समान मात्रा में मिलाकर भूनकर पाउडर कर लें और एकड्राय कंटेनर में स्टार करके रख लें. इसें फ्रिज में न रखें. अगर यह नमी से दूर रहता है, तो 2 महीने तक चल सकता है. इसके सेवन से पेट की तकली़फें दूर रहती हैं. टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं.
  • वायरल फीवर के एक कप पानी में तुलसी और अदरक मिलाकर उबाल लें. आंच से उतारकर शहद मिलाएं औरचाय की तरह पीएं. इससे सर्दी, खांसी और ज़ुकाम में भी राहत मिलती है. 
  • बुख़ार में संतरे का जूस पीने से फ़ायदा होता है. यह ऊर्जा बढ़ाता है और यूरिन के ज़रिए विषैले तत्वों को बाहर करकेबुखार कम करता है. 
  • वायरल फीवर में लहसुन और प्याज़ के कच्चे सेवन से फ़ायदा मिलेगा. आप सूप के रूप में इनका सेवन करें.
  • तुलसी व अदरक के रस को शहद में मिलाकर लेने से भी बुखार में लाभ मिलता है.

नोट: कोई भी समस्या बढ़ने पर, चाहे बुख़ार हो, पेट की समस्या, स्किन संबंधी या सांस संबंधी रोग  अगर ठीक न हो रहे होंतो ख़ुद दवा खाने की बजाय डॉक्टर को दिखाएं, वर्ना रोग के गम्भीर होने का ख़तरा बढ़ सकता है. स्टे सेफ और हैप्पी वहेल्दी मॉनसून! 

  • भोलू शर्मा 

अगर आप बीमारी से रहना चाहते हैं दो क़दम दूर, तो चलिए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे टिप्स जिससे आप रहेंगे 24/7 हेल्दी एंड फ्रेश.

जल्दी उठो और जल्दी सोओ

कहते हैं सुबह भली तो पूरा दिन भला. अगर आप भी स्वस्थ और चुस्त-दुरुस्त रहना चाहते हैं, तो सुबह बिस्तर जल्दी छोड़ें और रात को बिना देर किए जल्दी सोएं. स़िर्फ ये दो काम आपको दिनभर फ्रेश और फाइन रखेंगे.

स़िर्फ 10 मिनट करें योगा

सुबह उठते ही रोज़ाना 10 मिनट योगा करने से आपका पूरा दिन अच्छा बीतता है. रेग्युलर योगा करने से ब्लड प्रेशर, शुगर और ऐसी कई बीमारियां आपसे कोसों दूर रहती हैं, जिससे अमूमन हर दूसरा व्यक्ति परेशान रहता है.

ठंडे पानी से नहाएं

गरम पानी से नहाने के बाद नींद अच्छी आती है, लेकिन अगर आप ऑफिस के लिए निकल रहे हैं तो गरम नहीं बल्कि ठंडे पानी से नहाएं. ठंडे पानी से नहाने से ब्लड सर्कुलेशन बराबर रहता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और साथ ही आप लंबे समय तक तरोताज़ा महसूस करते हैं. तो अब से हर दिन 5 मिनट ठंडे पानी से नहाना न भूलें.

खाने में दही शामिल करें

खाने में दही शामिल करने से स़िर्फ आपका चेहरा ही नहीं खिलता, बल्कि आप तमाम बीमारियों से भी दूर रहते हैं. डेली डायट में दही शामिल करने से आप कई तरह की परेशानी जैसे- गैस, लो ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल आदि से दूर रहते हैं.

लंबे समय तक बैठे न रहें

ऑफिस में अगर 8 घंटे बैठकर काम करना पड़ता है, तो सेहत पर बुरा असर तो पड़ेगा ही, लेकिन अगर बीच-बीच में ऑफिस में ही दो-चार क़दम चल लेंगे तो आप दिनभर स्वस्थ और ताज़ा महसूस करेंगे. दोपहर के लंच के बाद और शाम को ऑफिस कलीग के साथ बाहर चाय पीने के बहाने थोड़ा लेफ्ट-राइट करना तो बनता है.

1 से 3 के बीच पावर नैप लें

डॉक्टर्स के अनुसार सुबह उठने के बाद काम करते हुए बॉडी दोपहर तक थक जाती है. ऐसे में आपके शरीर को पावर नैप की बहुत ज़रूरत होती है. दोपहर में 1 से 3 के बीच पावर नैप लेने से शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है. ऑफिस में अगर पॉसिबल हो तो बॉस की नज़रों से बचकर पावर नैप ज़रूर लें.

दोस्त बनाएं

काम का स्ट्रेस हो या फिर बॉस की झिकझिक, शेयर करने के लिए दोस्त तो ज़रूरी हैं. दोस्तों के बिना लाइफ बोझ सी है. अपने अंदर ही दुनियाभर की टेंशन लेने से आप स़िर्फ बीमारियों को बुलावा देते हैं. कभी डिप्रेशन तो कभी हाई ब्लड प्रेशर. दोस्त बनाएं और अपनी बातें उनसे शेयर करें. इससे अपना टेंशन भगाएं और स्वस्थ रहें.

कम खाएं खूब पीएं

ज़्यादा खाना सेहत के लिए अच्छी बात नहीं. डॉक्टर्स कहते हैं कि जितनी भूख लगी हो उससे एक रोटी कम खाएं. इससे खाना जल्दी पचेगा और आप स्वस्थ रहेंगे. अपने डेली डायट में ज़्यादा-से-ज़्यादा लिक्विड फूड शामिल करें. इससे आप ख़ुद को ज़्यादा फुर्तिला महसूस करेंगे.

आपको कई बार लोगों ने गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पीने की सलाह दी होगी. अक्सर लोग वज़न घटाने के लिए इस नुस्ख़े को आज़माते हैं, मगर वज़न कम करने के अलावा भी नींबू पानी के कई फ़ायदे हैं.

लीवर को डिटॉक्सिफाई करता है


नींबू में मौजूद सीट्रिक एसिड एन्जाइम्स को बेहतर तरी़के से काम करने में मदद करता है. साथ ही लीवर को संतुलित रखकर ये डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करता है.

पीएच बैलेंस को बनाए रखता है
एसिडिटी शरीर को नुक़सान पहुंचाती है, नींबू पानी एसिटिडी की समस्या को कम करता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, नींबू ब्लड के पीएच बैलेंस में बदलाव करने के साथ ही यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से लड़ने में भी मदद करता है.

इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाता है


इसमें विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है जो सर्दी से बचाने के साथ ही इम्यून सिस्टम को भी मज़बूत बनाता है. नींबू में मौजूद पोटैशियम ब्रेन (मस्तिष्क) और नर्व (नाड़ी) के काम में संतुलन बनाकर ब्लड प्रेशर को निंयत्रित रखता है.

त्वचा को साफ़ और सुंदर बनाता है
नींबू में मौजूद विटामिन सी त्वचा को जवां बनाए रखने में मदद करता है. विटामिन सी कोलेजन के निर्माण में मदद करता है, जो हेल्दी स्किन के लिए ज़रूरी है. गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीने से हानिकारक टॉक्सिन शरीर से निकल जाते हैं. साथ ही त्वचा के दाग़-धब्बों पर नींबू का रस लगाने से भी वो हल्के होते हैं.

सांसों की दुर्गंध दूर करता है

Close up of fresh and wet lemons isolated on white background

यदि आपको सांसों के दुर्गंध की समस्या है, तो रोज़ाना गुनगुने पानी में नींबू का रस डालकर पीएं, फ़ायदा होगा. नींबू बैक्टीरिया को दूर करके मुंह के दुर्गंध से छुटकारा दिलाता है.

वेटलॉस में करता है मैजिकल असर
रोज़ाना नियमित रूप से सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से वज़न कम होता है. साथ ही आप पूरे दिन तरोताज़ा महसूस करेंगे.

डायजेशन को ठीक रखता है


नींबू में फ्लेवनॉयड्स होते हैं जो पाचन तंत्र को ठीक रखते हैं. यही वजह है कि पेट ख़राब होने पर नींबू पानी पिलाया जाता है. इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर में पेप्टिक अल्सर नहीं बनने देता.

ब्लड प्यूरिफाई करता है
नींबू में मौजूद साइट्रिक और एस्कोर्बिक एसिड रक्त से तमाम तरह के एसिड दूर करता है. यह मेटाबॉलिज़्म बढ़ाता है जिससे एसिड बाहर निकलते हैं.

गले की खराश दूर करता है
यदि आपको कफ और गले की खराश की समस्या है, तो गुनगुने पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीएं. शहद में एंटी बैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर से बैक्टीरिया और जर्म्स को साफ़ करते हैं. गरम पानी कफ साफ़ करने में मदद करता है.

किडनी में पथरी होने से बचाता है


अगर आप किडनी स्टोन से परेशान हैं तो नींबू पानी पीने से आपको फायदा हो सकता है. नींबू में सिट्रिक एसिड होता है, जरे कैलिश्यम स्टोन बनने से रोकता है. ये किडनी को हेल्दी भी रखता है.

डायबि‍टीज में है फायदेमंद
नींबू पानी, हाई शुगर वाले जूस व ड्रिंक का बेहतर विकल्प माना जाता है. डायबिटीज के मरीज हैं या वो लोग् जो वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए ये बेहद असरदार है. यह शुगर को गंभीर स्तर तक पहुंचाए बिना शरीर को रिहाइड्रेट व एनर्जाइज करता है.

कब्ज़ में राहत देता है
अगर आपको कब्ज की समस्या है, तो नींबू पानी आपके लिए बेहद फायदेमंद है. इसके लिए रोज़ाना सुबह गर्म नींबू पानी पीएं.

ब्लड प्रेशर और स्ट्रेस को कंट्रोल करता है
नींबू पानी पीने से ब्लड प्रेशर तो कंट्रोल में रहता ही है, इसमें तनाव, डिप्रेशन और अवसाद कम करने के गुण भी पाये जाते हैं. अगर आप कभी बहुत ज़्यादा स्ट्रेस महसूस करें या लो फील हो रहा हो तो नींबू पानी पिएं. आपको तुरंत अच्छा महसूस होगा.

 Jaggery

औषध‍िय गुणों से भरपूर गुड़ एक सुपर फूड है, जो अच्‍छी सेहत के लिए ज़रूरी है. इसके न‍ियमित इस्‍तेमाल से शरीर निरोगी और स्‍वस्‍थ बना रहता है. गुड़ में भरपूर मात्रा में कैल्‍शियम और फास्‍फोरस पाया जाता है. यह दोनों तत्‍व हड्डियों को मज़बूती देने में सहायक हैं. इससे शरीर मज़बूत व एक्टिव भी रहता है. गुड़ स्‍वाद का ही नहीं बल्‍कि सेहत का भी ख़ज़ाना है. इसके फ़ायदों के बारे में लोग कम ही जानते हैं. गुड़ का इस्तेमाल आयुर्वेदिक डॉक्टरों द्वारा कड़वी दवा को मीठा करने और कई बीमारियों में दवा के तौर पर भी किया जाता था. अधिकतर लोग सर्दियों के मौसम में ही इसका प्रयोग करते हैं, जबकि गुड़ सालभर खाया जा सकता है और शरीर को इससे भरपूर लाभ भी मिलते हैं.

घरेलू नुस्ख़े

• खट्टी डकारें आने या पेट की अन्य समस्या में गुड़ में काला नमक मिलाकर चाटने से लाभ होता है.
• जोड़ों में दर्द की समस्या हो, तो गुड़ का अदरक के साथ सेवन लाभदायक है. हर रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक खाने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है.
• अस्थमा के इलाज में गुड़ फ़ायदेमंद है. गुड़ और काले तिल के लड्डू बनाकर खाने से अस्थमा की तकलीफ़ नहीं होती और शरीर में आवश्यक गर्मी भी बनी रहती है.
• पीलिया हो जाने पर पांच ग्राम सोंठ में दस ग्राम गुड़ मिलाकर खाने से लाभ मिलता है.
• काफ़ी थकावट है, तो गुड़ को दूध के साथ लें. यदि आपको दूध नहीं पसंद, तो एक कप पानी में पांच ग्राम गुड़, थोड़ा-सा नींबू का रस और काला नमक मिलाकर सेवन करने से शरीर की थकान दूर होती है.


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• पेट में गैस बनने की समस्या होने पर हर रोज़ एक ग्लास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से पेट में ठंडक होती है और गैस भी नहीं बनती.
• गला बैठ जाने और आवाज़ जकड़ जाने पर पके हुए चावल में गुड़ मिलाकर खाने से बैठा हुआ गला ठीक होता है व आवाज़ भी खुल जाती है.
• कान में दर्द होने पर गुड़ को घी के साथ मिलाकर खाने से कान में होनेवाले दर्द की समस्या ये निजात मिलती है.
• गुड़ सर्दी-ज़ुकाम भगाने में भी बेहद असरदार है. काली मिर्च और अदरक के साथ गुड़ खाने से सर्दी-ज़ुकाम में आराम मिलता है.
• खांसी की श‍िकायत है, तो गुड़ खाएं. गुड़ को अदरक के साथ गर्म कर खाने से गले की खराश में राहत मिलती है.

Health Benefits Of Jaggery


• सांस संबंधी बीमारियों के लिए पांच ग्राम गुड़ को समान मात्रा में सरसों के तेल में मिलाकर खाने से सांस संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिलता है.
• शारीरिक कमज़ोरी में दूध के साथ गुड़ का सेवन करने से ताक़त आती है और शरीर ऊर्जावान बना रहता है.

सुपर टिप
गुड़ को अदरक के साथ हल्का गर्म कर खाने से गले की जलन दूर होती है. 

– अभिषेक गुप्ता


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आपने देखा ही नहीं ख़ुद अनुभव भी किया होगा कि लोग अपनी सेहत का ख़्याल कई तरह की थेरेपी के मुताबिक करते हैं. मसलन कोई एलोपैथिक मेडिसिन्स ले रहा है, कोई होमियोपैथी, तो कोई आयुर्वेद से अपना इलाज करवाता है, इसी क्रममें स्वस्थ रहने के लिए आज हम आपको मंत्र और ख़ासतौर से तुलसी मंत्र के बारे में जानकारी देंगे, ताकि आप भी मंत्रों केहेल्थ और साइंटिफिक कनेक्शन को बेहतर तरी़के से समझ सकें.

दरअसल, तुलसी एक होली प्लांट तो है ही इस पौधे के अनेक हेल्थ बेनिफिट्स भी हैं. लेकिन यह तुलसी जब तुलसी मंत्रसे सिंक्रोनाइज़्ड होता है, तब यह बीमारियों को ठीक करने में अद्भुत परिणाम देता है.

तुलसी मंत्र

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।

पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।

य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

तुलसी मंत्र के सही जाप करने वाले की सेहत भी दुरुस्त रहती है और अगर उसे कोई बीमारी है तो तुलसी मंत्र के जाप सेबीमारी भी भाग जाती है.

आपको पता ही होगा कि प्राचीन काल में भारतीय ऋषियों और मुनियों ने मंत्र विज्ञान का आविष्कार किया था. दरअसल, तपस्या से समाधि की यात्रा के दौरान ऋषियों-मुनियों का ध्वनि के प्रभाव का अद्भुत ज्ञान हो गया था. उन्हें पता चल गयाथा कि ध्वनि के प्रभावों का इस्तेमाल इंसान की सेहत ठीक रखने में किया जा सकता है. लिहाज़ा, ईसा पूर्व 1700 से1300 ईसवी के दौरान, जिसे भारतीय इतिहास में वैदिक काल के रूप में जाना जाता है, अनेक मंत्र बनाए गए. संस्कृत मेंलिखे गए इन मंत्रों को इस तरह पिरोया गया था कि इन तमाम मंत्रों के जाप से हमारे शरीर के नर्वस सिस्टम में एक रिदमपैदा होता है. इस रिदम का कनेक्शन दिमाग़ से होता है और दिमाग़ बहुत ज़्यादा ऐक्टिव हो जाता है. ऐक्टिव दिमाग़ शरीरमें ऊर्जा का अतिरक्त संचार करता है. कमोबेश तुलसी मंत्र भी इसी थ्यौरी के मुताबिक काम करता है.

इतना ही नहीं तुलीस मंत्रों के जाप यानी उच्चारण के दौरान जीभ और होंठ में जो मूवमेंट होता है यानी तुलसी मंत्र के जापसे जो फ्रीक्वेंसी पैदा होती है. इस फ्रीक्वेंसी का सकारात्मक असर जाप करने वाले के मन और शरीर पड़ता है. आपनेदेखा होगा, या जब जाप करेंगे तो देखेंगे, तुलसी मंत्र के लगातार जाप से जीभ और तालू बार-बार एक दूसरे को एक ख़ासरिदम से टच करते हैं. इस रिदम का असर इंसान की नाभि या बेलीबटन पर भी पड़ता है. इसका अल्टीमेट असर शरीर केहर प्रेशर पॉइंट पर पड़ता है.. अंततोगत्वा शरीर का हर अंग ऐक्टिव और एनर्जेटिक हो जाता है. इससे हर अंग को ज़रूरीऑक्सीजन मिलने लगता है और ऑक्सीजन मिलते से इंसान स्वस्थ्य महसूस करने लगता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें… तुलसी मंत्र किसी ख़ास बीमारी को दूरी नहीं करता… बल्कि यह अद्भुत मंत्र इंसान केपूरे शरीर को निरोग रखने में मदद करता है. आपको हम बताते चलें कि तुलसी मंत्र का सबसे ज़्यादा असर तुलसी के पौधेके सानिध्य में होता है. इसीलिए, इसीलिए हर थेरेपी की दवा बनाते समय तुलसी के पौधे को भी लिया जाता है.

Tulsi Mantra

सनातन धर्म में तुलसी का पौधा वैदिक काल से ही विष्णु प्रिया के रूप में पूजा जाता है. इसीलिए तुलसी ही नहीं उसकेपौधे को धार्मिक, पावन, शुद्ध और शुभ माना जाता है. मानयता के अनुसार तुलसी के पत्तों को आमतौपर पर सूर्योदय होनेके बाद ही तोड़ा जाता है. यह भी मान्यता है कि तुलसी के पत्ते 11 दिनों तक बासी नहीं माने जाते. इसीलिए इन पत्तियों कोरोज़ाना जल से धोकर फिर से भगवान को चढ़ाया जा सकता है. 

अगर आप अपने घर-परिवार को खुशहाल, रोगमुक्त और धन धान्य से संपन्न करना चाहते हैं तो तुलसी मंत्र का जाप करे्ं।अगर मैक्सिमम हेल्थ बेनिफिट्स चाहते हैं, तो विशेष तौर पर एकादशी तिथि पर तुलसी मंत्र का सही जाप ज़रूर करें… 

तुलसी मंत्र का जाप तुलसी के पौधे को जल चढ़ाते हुए करने से ज़्यादा लाभ स्वास्थ्य लाभ मिलता है. सुबह नहा-धोकरतुलसी के पौधे में जल चढ़ाते हुए तुलसी मंत्र का 108 बार जाप करने से घर में जाप करने वाला सुखी और निरोग रहता हीहै, उसके घर में वैभव भी बढ़ता है.

अगर आप अपने शरीर को तंदरुस्त रखना चाहते हैं तो रोजाना सुबह नहाने के बाद तुलसी के पौधे को पानी देते हुए तुलसीमंत्र का 108 बार जाप ज़रूर करें…

– रिंकु शर्मा

वैसे तो ज़्यादातर भारतीय महिलाएं अपनी सेहत को लेकर लापरवाह ही रहती हैं, जिसके चलते उन्हें कई तकलीफ़ों का सामना करना पड़ता है, लेकिन सेहत से जुड़ी कुछ ऐसी ग़लतियां भी हैं, जिन्हें महिलाएं अनजाने में करती हैं. आइए जानते हैं सेहत से जुड़ी ऐसी 10 ग़लतियों के बारे में, जिन्हें महिलाएं अक्सर करती हैं.

Health Mistakes

1) अपनी सेहत पर ध्यान न देना
महिलाएं अक्सर घर-परिवार और ऑफ़िस का तो पूरा ख़्याल रखती हैं, लेकिन इन सबके बीच वो ख़ुद की अनदेखी कर जाती हैं. घर-परिवार की देखभाल और बच्चों की मांग पूरी करने में वो इतनी बिज़ी रहती हैं कि उन्हें अपनी सेहत का ख़्याल ही नहीं रहता. ऐसा करते समय वो ये भूल जाती हैं कि दूसरों का ख़्याल रखने के लिए पहले ख़ुद सेहतमंद होना ज़रूरी है.
क्या करें
परिवार के साथ-साथ अपना भी ध्यान रखें. ख़ुद के लिए वक़्त निकालें. हेल्दी डायट लें, सुबह वॉक पर जाएं या घर पर ही एक्सरसाइज़, योगा आदि करें. इससे आप फिट और हेल्दी रहेंगी.

2) पर्याप्त नींद न लेना
ख़राब सेहत के लिए कई बार अपर्याप्त नींद भी ज़िम्मेदार होती है और इसकी ज़्यादातर शिकार कामकाजी महिलाएं होती हैं. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, 5 घंटे से कम सोने से हाइपरटेंशन और हार्ट डिसीज़ का ख़तरा बढ़ जाता है. साथ ही नींद पूरी न होने से हार्मोनल बैलेंस भी बिगड़ने लगता है, जिससे भूख बढ़ जाती है और ज़्यादा खाने से वज़न बढ़ने लगता है.
क्या करें
हार्मोन्स के स्तर को बैलेंस करनेे के लिए रोज़ाना कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद लें. अच्छी सेहत के लिए ये बहुत ज़रूरी है. इससे पाचन शक्ति और याददाश्त भी बढ़ती है.

3) तनावग्रस्त रहना
कॉम्पिटीशन के इस दौर में घर और ऑफ़िस दोनों जगह ख़ुद को बेहतर साबित करने के चक्कर में अक्सर महिलाएं तनावग्रस्त हो जाती हैं. लंबे समय तक तनावग्रस्त रहने से डिप्रेशन, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिसीज़, कैंसर जैसी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, पीरियड्स के दौरान तनावग्रस्त रहने वाली महिलाओं के प्रेग्नेंट होने की संभावना कम हो जाती है. साथ ही वे सिरदर्द, पेट में ख़राबी, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों की शिकार हो जाती हैं. इतना ही नहीं, धीरे-धीरे उनमें सेक्स की इच्छा भी ख़त्म होने लगती है.
क्या करें
इन समस्याओं से निजात पाने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करें और सकारात्मक सोच विकसित करें. इससे आपको नई ऊर्जा मिलेगी. मुमकिन हो तो वीकेंड पर दोस्तों से मिलें या उनके साथ घूमने जाएं, इससे आप फ्रेश और तनावमुक्त महसूस करेंगी.

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Health Mistakes

4) इमोशनल ईटिंग
पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज़्यादा इमोशनल होती हैं और अपनी भावनाओं को क़ाबू में रखने के लिए कई महिलाएं खाने का सहारा लेती हैं. ऐसे में अक्सर वो मीठी और अधिक कैलोरी वाली चीज़ें खा लेती हैं, जिससे उनका वज़न बढ़ने लगता है और वो मूड स्विंग, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी बीमारियों की शिकार हो जाती हैं.
क्या करें
‘इमोशनल ईटर’ बनने से बचें. जब भी आप पर इमोशन्स हावी होने लगें, तो उस वक़्त खाने पर से ध्यान हटाने के लिए ख़ुद को दूसरे कामों में व्यस्त रखें, जैसे- घर की सफ़ाई करें, गाना सुनें, क़िताब पढ़ें आदि.

5) ज़रूरत से ज़्यादा डायटिंग
हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, ज़रूरत से ज़्यादा डायटिंग करने से शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे आंखों के नीचे काले घेरे, चेहरे का रंग फीका पड़ना, हड्डियां कमज़ोर होना, लो ब्लड प्रेशर जैसी तकलीफें हो सकती हैं. लंबे समय तक डायटिंग करने से शरीर में कैलोरीज़, मिनरल और विटामिन्स की भी कमी हो जाती है, जिससे बालों का झड़ना, दोमुंहे और बेजान बालों की समस्या बढ़ जाती है. साथ ही नाखून और त्वचा की रंगत भी फीकी पड़ जाती है.
क्या करें
डायटिंग करने में कोई बुराई नहीं, बशर्ते वो किसी अच्छी डायटीशियन की सलाह से की जाए. डायटिंग का मतलब ये नहीं कि आप खाना-पीना पूरी तरह बंद कर दें. बेहतर होगा कि ऐसा करने की बजाय अपनी डायट में कम फैट, हाई प्रोटीन व फाइबर से भरपूर चीज़ों को शामिल करें, ताकि स्लिम रहने के साथ ही आप हेल्दी भी बनी रहें.

6) ड्रिंक करना
करियर के साथ ही अब शराब पीने के मामले में भी महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं, लेकिन अधिक शराब के सेवन से सेहत पर बुरा असर पड़ता है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ज़्यादा शराब पीने से महिलाओं के मस्तिष्क के उस हिस्से को नुक़सान पहुंचता है, जो याददाश्त को नियंत्रित करता है यानी उनकी याददाश्त कमज़ोर हो जाती है. इसी तरह गर्भावस्था में भी शराब पीना ख़तरनाक हो सकता है. इससे न केवल भ्रूण के विकास में समस्या आती है, बल्कि बच्चा मिर्गी आदि का भी शिकार हो सकता है.
क्या करें
हेल्दी रहने के लिए शराब की लत से बचें और पैसिव स्मोकिंग से भी दूर रहें.

Health Mistakes

7) ग़लत साइज़ की ब्रा
हाल में हुए एक शोध से यह बात सामने आई है कि लगभग 70 फ़ीसदी महिलाएं ग़लत साइज़ की ब्रा पहनती हैं, जिससे लुक के साथ ही उनकी सेहत भी प्रभावित होती है. ग़लत साइज़ की ब्रा की वजह से बैक, नेक व ब्रेस्ट पेन की संभावना बढ़ जाती है. साथ ही रैशेज़, ब्लड सर्कुलेशन प्रॉब्लम व ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा भी बढ़ जाता है.
क्या करें
ब्रा ख़रीदने से पहले ब्रेस्ट साइज़ का माप जान लें. अगर आप प्रेग्नेंट हैं, तो एक साइज़ बड़ी ब्रा ख़रीदें, ताकि वो ब्रेस्ट साइज़ के साथ एडजस्ट हो जाए.

8) हाई हील वाले फुटवेयर्स पहनना
अक्सर महिलाएं कॉन्फिडेंट और इंप्रेसिव नज़र आने के लिए हाई हील वाली सैंडल पहनती हैं. अगर आप भी ऐसा करती हैं, तो ज़रा संभल जाइए, क्योंकि हाई हील वाले फुटवेयर्स आपका कॉन्फिडेंस बढ़ाएं न बढ़ाएं, लेकिन आपकी सेहत का ग्राफ़ ज़रूर गिरा देते हैं. हाई हील वाली सैंडल पहनने से बॉडी पोस्चर प्रभावित होता है, जिससे जोड़ों में दर्द, पैरों में सूजन, बैक पेन आदि की समस्या हो सकती है.
क्या करें
अगर आप अपनी सेहत के साथ समझौता नहीं करना चाहतीं, तो 1.5 इंच या उससे कम हील वाले फुटवेयर्स पहनें. इससे आपका शौक़ भी पूरा हो जाएगा और किसी तरह की समस्या भी नहीं होगी.

9) हैवी बैग का इस्तेमाल
मोबाइल, वॉलेट, एक्सेसरीज़, कॉस्मेटिक्स आदि को हैंडबैग में एडजस्ट करने के चक्कर में महिलाएं अक्सर बड़ा बैग चुनती हैं और उनका ये ओवरसाइज़्ड बैग कब ओवर लोड हो जाता है, उन्हें पता ही नहीं चलता. ऐसे में भारी-भरकम बैग की वजह से पीठ, गर्दन व कंधे में दर्द की शिकायत हो जाती है और धीरे-धीरे ये दर्द गंभीर रूप लेता है.
क्या करें
प्लस साइज़ की बजाय छोटे साइज़ का हैंडबैग इस्तेमाल करें और आप यदि ओवरसाइज़्ड बैग ट्राई करना ही चाहती हैं, तो उसमें कम से कम सामान रखने की कोशिश करें.

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Health Mistakes

10) मेकअप उतारे बिना सो जाना
कई महिलाएं देर रात पार्टी-फंक्शन से लौटने के बाद थकान की वजह से बिना मेकअप उतारे ही सो जाती हैं, जिससे उनके चेहरे की ख़ूबसूरती बिगड़ सकती है. रात में बिना मेकअप उतारे सोने से दिनभर की जमी चिकनाई और धूल-मिट्टी त्वचा पर ही चिपकी रह जाती है, जिससे रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और त्वचा खुलकर सांस नहीं ले पाती. इससे पिंपल्स की समस्या होती है. इसी तरह मस्कारा व आई मेकअप से आंखों में जलन हो सकती है.
क्या करें
पार्टी-फंक्शन से लौटने के बाद अच्छी क्वालिटी के मेकअप रिमूवर से मेकअप जरूर उतारें, वरना आपकी स्किन को नुक़सान हो सकता है.

दही को अमृत के समान आहार माना जाता है. इसके प्रतिदिन सेवन से शरीर स्वस्थ और लंबे समय तक युवा रहता है. यह आपको ऊर्जावान बनाए रखने में बेहद कारगर साबित होता है. दही पाचन तंत्र को मज़बूत और सक्रिय रहने में मददगार होता है. इसमें विटामिन सी और आयरन की बहुत अधिक मात्रा होती है, जो पाचन क्रिया को सही बनाए रखती है.
दही में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं. यह एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ए, बी, सी व ई से भरपूर होता है. एंटीऑक्सीडेंट की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, वहीं इसमें मौजूद वसा शरीर की दूसरी आवश्यकतों को भी पूरा करते हैं. इसमें फॉस्फोरस, आयरन, कैल्शियम, ज़िंक और मैग्नीशियम जैसे प्रमुख लवण पाए जाते हैं.
दही में कई प्रकार के विटामिन और आयरन पाए जाते हैं, जिसकी वजह से शरीर को ताकत मिलती है और मांसपेशियां भी मज़बूत बनती हैं.
दही में बहुत कम मात्रा में कैलोरी होती है. ऐसे में जो लोग नहीं चाहते कि उनका वजन बढ़े, वे दही को अपनी डायट का हिस्सा बना सकते हैं. नाश्ते में एक बाउल दही खाने से पेट दिनभर भरा रहता है, जिससे आप ओवरइटिंग से बच जाते हैं और वज़न कंट्रोल में रहता है.

Benefits Of Curd


दही मधुमेह यानी डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए रामबाण है. मधुमेह रोगी को बार-बार भूख लगती है, ऐसे में दही का सेवन बिल्कुल सही है, क्योंकि इससे शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है.
प्रेग्नेंसी में महिलाओं को अपनी डायट का ख़ास ख़्याल रखने की ज़रूरत होती है. ऐसे में दही का सेवन बहुउपयोगी है.


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इसमें मौजूद एंटीआक्सीडेंट्स गुण शरीर से विषैले टॉक्सिंस को निकालने में मदद करते हैं, जिससे आप कब्ज़ और पेट से जुड़ी समस्याओं से बचे रहते हैं. दही का नियमित सेवन त्वचा को कांतिमान बनाता है.
नियमित रूप से दही का सेवन पेट व आंतों का कैंसर, ब्रेस्ट और अन्य तरह के कैंसर से भी बचाव करता है. इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स तत्व ट्यूमर जैसी ख़तरनाक बीमारियों से भी बचाते हैं.
दही व ताज़ी रोटी का नाश्ता करने से आपका दिल भी सुरक्षित रहेगा. दही दिल की बैचेनी व घबराहट कम करने मे बड़ा सहायक होता है, जो दिल के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद होता है. यह निम्न रक्तचाप, हाई बीपी और हार्ट अटैक के ख़तरे को कम करता है. साथ ही यह कोलेस्ट्रॉल लेवल भी को भी कंट्रोल करता है.

Benefits Of Curd


आयरन, खनिज के साथ इसमें विटामिन सी व ए की भी भरपूर मात्रा होती है, जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है. इतना ही नहीं, दही का नियमित इस्तेमाल दिमाग़ को भी तेज़ करता है, जिससे आप बुढ़ापे में होनेवाली अल्जाइमर जैसी बीमारियों से बचे रहते हैं.
विटामिन सी से भरपूर होने के कारण इसका सेवन बालों के लिए बहुत फ़ायदेमंद है. इससे बालों का झड़ना, टूटना जैसी समस्या दूर हो जाती है और बाल जड़ों से मज़बूत होते हैं.

पूनम पांडे


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Tips For Parenting

बच्चे तो सभी प्यारे होते हैं, पर कुछ ख़ास मासूम भी होते हैं, जिन्हें विशेष देखभाल की ज़रूरत होती है. ऐसे ही होते हैं ऑटिज्म ग्रस्त बच्चे भी. आज अंतर्राष्ट्रीय विकलांगता व्यक्ति दिवस (International day of disabled persons) पर ऑटिज्म कंसल्टेंट गोपिका कपूर ने इस तरह के बच्चों की देखभाल से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें संक्षेप में बताई.
इससे उन अभिभावकों को काफ़ी मदद मिलेगी, जिनके बच्चे ऑटिज्म ग्रस्त हैं. आइए जानते हैं गोपिकाजी से ऑटिज्म के बारे में. उनका कहना है-

न्यूरोडेवलपमेंट कंडीशन…
मेरे राय में ऑटिज्म एक विश्वभर में बढ़ता हुआ कंडीशन है. रिसर्च दिखाता है कि ऑटिज्म के स्टैटिसटिक्स या नंबर जो है, वह 54 में एक बच्चे को ऑटिज्म होता है. यह एक न्यूरोडेवलपमेंट कंडीशन है. न्यूरो यानी यह दिमाग़ पर असर करता है और डेवलपमेंटल का मतलब है कि यह बच्चों के विकास पर असर करता है.

चिंतित माता-पिता…
जब माता-पिता को पता चलता है कि उनके बच्चे को ऑटिज्म है, तब मैंने देखा है कि ज़्यादातर पैरेंट्स बहुत ही उदास-परेशान हो जाते हैं. उन्हें चिंता रहती है कि हम बच्चे के साथ क्या करेंगे, कैसे सिखाएंगे, क्या वह स्कूल जाएगा, क्या वह बड़ा होकर नौकरी कर पाएगा… ये तमाम चिंताएं उनके दिमाग़ में आती है. जिन माता-पिता को उनके परिवार का साथ मिलता है और जो माता-पिता अपने आपको संभाल पाते हैं, उनके बच्चे ज़्यादातर विकास करते हैं. इसका मतलब यह है कि माता-पिता की मानसिक स्थिति पर ध्यान देना बहुत ही ज़रूरी है. ऑटिज्म एक ऐसा कंडीशन है, जिसका असर सिर्फ़ बच्चे पर नहीं, बल्कि परिवार पर भी होता है. इसलिए हमें यह ध्यान देना चाहिए कि सिर्फ़ बच्चा ही नहीं सीख रहा है, बल्कि पूरे परिवार का विकास हो रहा है. उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए.

Child With Autism

प्रोत्साहित करें…
जब हम ऑटिस्टिक बच्चों के साथ काम करते हैं, तब हमें सबसे पहले यह ध्यान में रखना चाहिए कि उनसे वह अपेक्षाएं नहीं रखनी चाहिए, जो हम एक न्यूरोटिपिकल बच्चे के साथ रखते हैं. अगर हम किसी व्यक्ति के साथ काम कर रहे हैं, जो देख नहीं पाते हैं, तो हम उनसे यह अपेक्षा थोड़ी रखते हैं कि एक दिन वह देख पाएंगे? इसी तरह से हमें उनके साथ यह अपेक्षाएं नहीं रखनी चाहिए कि वह न्यूरोटिपिकल बन जाएंगे. साथ ही हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि बच्चों को क्या पसंद है. इन बच्चों में मोटिवेशन बहुत ही कम होता है. इसलिए जो भी चीज़ उनको पसंद है, भले ही वह दूसरे बच्चों को जो पसंद है वह नहीं हो, उस चीज़ के साथ हमें उनके साथ काम करना है. उनके लगातार प्रोत्साहित करते रहना है. इससे उनका मोटिवेशन बढ़ेगा और वह काम करना पसंद करेंगे.

मानसिक स्तिथि…
ऑटिस्टिक बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को सही रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कभी भी हमें उन्हें यह महसूस नहीं होने देना है कि वह हम से कम हैं. वह अलग ज़रूर हो सकते हैं, लेकिन कम नहीं है. उनमें कोई कमी का एहसास उन्हें हमें कभी महसूस नहीं होने देना चाहिए. इससे उनका मानसिक स्वास्थ्य सही रहेगा. उनको जो अच्छा लगता है, उसी को ध्यान में रखकर उनके साथ काम करना चाहिए. उनकी जो रूचि है, उसे बढ़ानी चाहिए. कई इस तरह के बच्चे हैं, जिन्होंने उनकी रुचि को लेकर करियर बनाया. कई बच्चे बहुत सफल भी हुए, इसलिए उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए. उनकी मानसिक स्थिति को बनाए रखना चाहिए. उन्हें यह कभी महसूस नहीं करने देना चाहिए कि उनमें कोई कमी है. इसकी बजाय उनके जो अच्छे पॉइंट है, उस पर ध्यान देना चाहिए. उन्हें उनके बारे में बताना चाहिए और उनकी मुश्किलों पर काम करना चाहिए, पर बहुत ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए. इसी तरह से हम उनकी मानसिक स्थिति को बनाए रख सकते हैं.

Child With Autism

अभिभावकों का नज़रिया…
हमारे घर में जो वातावरण है वह बहुत ही ख़ुशनुमा वातावरण है. हम सब हंसते-खेलते हैं, बहुत ही ख़ुश हैं. हां पहले-पहले बच्चे की अवस्था को लेकर तनाव होता रहता था, हम बहुत परेशान होते रहते थे. लेकिन धीरे-धीरे हमने सब संभाल लिया. अब हमारे घर का वातावरण ख़ुशनुमा है.

पैरेंटिंग गाइड…
दूसरे बच्चों के माता-पिता को मैं यही कहूंगी कि अगर आप हर वक़्त उदास रहेंगे, हर समय तनाव में रहेंगे, तो यह एंग्जाइटी आपके बच्चों पर आएगी. वह अच्छी तरह से सीख नहीं पाएंगे. आपका तनाव उनके ऊपर आ जाएगा. तो इसकी बजाय आप अपने पास जो बच्चा है, उसे लेकर ख़ुश रहना सीखें. उसके साथ काम करना सीखें. धीरे-धीरे आप देखेंगे कि आपका बच्चा ना केवल अच्छी तरह से सीख पाएगा, बल्कि वह बहुत ख़ुश भी रहेगा. यही तो सभी पैरेंट्स अपने बच्चों के लिए चाहते हैं.

– ऊषा गुप्ता


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दूध सेहत के लिए बेहद फ़ायदेमंद माना जाता है. दूध में कैल्शियम, विटामिन, प्रोटीन और राइबोफ्लेविन (विटामिन बी -२) युक्त होता है. इसमें विटामिन ए, डी, के और ई सहित फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयोडीन व कई खनिज, वसा और ऊर्जा भी होती है. ध्यान रहे, दूध पीने के बाद कोई भी खट्टा पदार्थ नहीं खाना चाहिए. आइए, दूध की उपयोगिता के बारे में जानते हैं.

घरेलू नुस्ख़े

  • आधासीसी यानी माइग्रेन की तकलीफ़ में भी दूध काफ़ी फ़ायदेमंद है. इसमें पाव किलो दूध में 2 चम्मच शुद्ध घी मिलाकर पीएं. इसके अलावा दूध में चार-पांच छुआरा उबालकर खाएं और दूध में थोड़ा-सा शुद्ध घी मिलाकर पीएं. ये दोनों ही उपाय माइग्रेन की तकलीफ़ में बेहद लाभकारी है. इससे सिर का दर्द धीरे-धीरे ख़त्म हो जाता है.
  • गुर्दे में पथरी होने पर 30 ग्राम केले के तने का पानी, 25 ग्राम कलमी शोरा और पाव किलो दूध तीनों को मिला लें. दिनभर में दो या तीन बार इसका सेवन करें. इसके प्रभाव से पथरी गलने लगेगी और पेशाब के रास्ते से धीरे-धीरे बाहर निकल जाएगी.
  • इलायचीवाला दूध पीने से एनीमिया की परेशानी दूर होती है और झुर्रियां भी से कम पड़ती है. रोज़ रात को दूध में इलायची पाउडर मिलाकर पीएं.
  • पेशाब में जलन हो रही हो, तो पाव किलो दूध में एक कप पानी मिला लें. फिर मिश्री मिलाकर दिन में दो बार पिएं. एक हफ़्ते तक इसका सेवन करने से जलन की तकलीफ़ पूरी तरह से दूर हो जाएगी.
  • नींद की समस्या होने पर बकरी के दूध में मिश्री मिलाकर पीने से लाभ मिलता है. इसके अलावा पांच बादाम और एक चम्मच खसखस को पीस लें. इसमें दूध और मिश्री मिलाकर रात में पीएं. अनिद्रा की समस्या दूर हो जाएगी.

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  • दस्त होने पर गाय के दूध को अच्छी तरह से पका लें. बेल का गूदा निकालकर दो सौ ग्राम तक खाएं और उसके ऊपर से दूध पी लें. दिन में दो-तीन बार लेने से दस्त की समस्या दूर हो जाएगी.
  • हल्दीवाला दूध तो हमेशा ही फ़ायदेमंद माना गया है. सर्दी-खांसी और ज़ुकाम के लिए रोज़ रात को हल्दीवाला दूध पीना रामबाण उपाय है.
  • हार्ट प्रॉब्लमवालों को कभी-कभी दिल में दर्द होता है. इसके लिए गाय के दूध की बनी हुई शुद्ध देसी घी दो चम्मच लेकर उसमें 10 ग्राम बेल का रस मिलाकर पीएं.
  • नपुंसकता की समस्या में भी दूध उपयोगी है. एक ग्लास गर्म दूध के साथ 5-5 ग्राम बेल की छाल, पत्ते और गुदा लेकर उसमें एक छुआरा, तीन मुनक्के या पांच किशमिश, 8-10 मूंगफली की गिरी और 3-4 बादाम की गिरी लेकर इन सबको बारीक़ पीस लें. आवश्यकतानुसार मिश्री मिलाकर दूध में डालकर पीएं. महीनेभर यह उपाय करने से समस्या दूर हो जाएगी.
  • यदि गले में दर्द महसूस कर रहे हों, तो एक कप गर्म दूध पीने से आपको दर्द से तुरंत छुटकारा मिल सकता है.
  • त्वचा के रंग को निखारने के लिए भी बहुत से लोग दूध का इस्तेमाल करते हैं. अपने चेहरे और गर्दन पर कच्चे दूध को लगाएं और 10 मिनट तक लगा रहने दें. फिर पानी से चेहरा धो लें. यह आपकी त्वचा को नर्म-मुलायम बनाने में भी मदद करता है.
  • सोयाबीनवाला दूध पीने से वज़न कम होता है और कोलेस्ट्रोल लेवल को भी कंट्रोल में रखता है.
  • दूध में नारियल मिलाकर पीना भी शरीर के लिए बहुत उपयोगी रहता है. नारियल दूध पीने से लिवर, जोड़ों के दर्द और त्वचा की समस्याएं भी दूर होती हैं.
  • दूध में बालों के बढ़ने, मज़बूत और घने होने के लिए ज़रूरी सभी प्रोटीन, कैल्शियम और खनिज मौजूद होते हैं. बालों को हेल्दी बनाए रखने में भी दूध मदद करता है. यह एक अच्छे कंडीशनर के रूप में भी काम करता है. बालों और सिर की त्वचा पर दूध लगाकर कुछ मिनट के लिए छोड़ दें. उसके बाद बालों को शैंपू से धो लें. इससे बाल ख़ूबसूरत, सॉफ्ट और सिल्की होते हैं.
  • यदि आप चाहें तो स्प्रे बोतल को भी ठंडे दूध से भरकर इसकी मदद से बालों पर अच्छी तरह से ठंडा दूध लगा सकती हैं और आधे घंटे बाद बालों को पानी से धोकर फिर शैंपू से दोबारा धो लें.

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रिसर्च

  • कई अध्ययनों से पता चला है कि दूध महिलाओं और पुरुषों दोनों में कैंसर का ख़तरा कम करता है. दूध में विटामिन डी, कैल्शियम और लिनोलिक एसिड की मात्रा अधिक होती है. दूध के सेवन से कोलोरेक्टल, स्तन और पेट के कैंसर की संभावना को भी कम करता है.
  • शोधों से साबित हुआ है कि कि कम फैट्स वाला दूध मस्तिष्क शक्ति को बढ़ाने में और अल्जाइमर बीमारी को रोकने में मदद करता है. यह विटामिन बी 12 का एक अच्छा स्रोत है, जो सोचने की शक्ति को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोटीन है.

सुपर टिप
दूध में शक्कर की बजाय यदि हम गुड़ मिलाकर लें, तो इसके अधिक फ़ायदे होते हैं और यह आयरन की कमी को पूरा करता है.

– ऊषा गुप्ता

दादी मां के अन्य घरेलू नुस्ख़े/होम रेमेडीज़ जानने के लिए यहां क्लिक करें- Dadi Ma Ka Khazana

Milk

रोज नींबू पानी पीने के ये 10 हेल्थ बेनिफिट्स जानकर हैरान रह जाएंगे आप. आपके किचन में मौजूद नींबू आपके लिए कितना फायदेमंद है, इसका आपको अंदाजा भी नहीं होगा. नींबू पानी से आप अपनी सुंदरता और स्वास्थ्य दोनों को बढ़ा सकते हैं. हम आपको नींबू पानी के 10 फायदे बता रहे हैं, जिन्हें जानकर आप भी रोज नींबू पानी पीना शुरू कर देंगे.

Lemon Juice

1) नींबू पानी इम्युनिटी बढ़ाता है
जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमज़ोर है उन्हें रोज़ाना नींबू पानी पीना चाहिए, इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) मज़बूत होगी. कोरोना वायरस से बचने के लिए भी नींबू पानी पीना फायदेमंद है.

2) नींबू पानी वजन कम करने में मदद करता है
यदि आप अपना बढ़ा हुआ वजन कम करना चाहते हैं, रोज सुबह नींबू पानी पीएं. वजन घटाने के साथ ही नींबू पानी शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकाल देता है, जिससे शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन भी हो जाता है.

3) नींबू पानी मुंहासों से राहत देता है
जिन लोगों को मुंहासे की समस्या ज़्यादा होती है उन्हें नींबू पानी का सेवन करना चाहिए, इससे उनके शरीर में मुंहासे पैदा करने वाले बैक्टीरिया मर जाएंगे और स्किन ग्लो करेगी. नींबू पानी को आप फेसवॉश की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं, इससे डेड स्किन और एक्स्ट्रा ऑयल निकल जाता है.

4) नींबू पानी भूख बढ़ाता है
यदि आपको भूख नहीं लगती, तो नींबू पानी पीएं. इससे भूख तेज़ी से लगती है.

5) नींबू पानी किडनी स्टोन में फ़ायदेमंद
किडनी स्टोन यदि शुरुआती दौर में है, तो नींबू पानी पीना बहुत फ़ायदेमंद होगा. नींबू पानी में प्राकृतिक साइट्रेट होता है, जो स्टोन को तोड़ देता है या उसे बनने से रोकता है.

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Lemon
Lemon

6) नींबू पानी सर्दी/फ्लू से बचाता है
जिन्हें सर्दी और फ्लू अक्सर होता रहता है, उन्हें नींबू पानी का सेवन करना चाहिए. इससे उन्हें जकड़न नहीं होगी और शरीर भी डिहाइड्रेट नहीं होगा. नींबू पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीना ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है.

7) नींबू पानी सूजन व सांस संबंधी समस्या से राहत देता है
यदि किसी व्यक्ति को कहीं भी सूजन है तो नींबू पानी लाभदायक होता है. साथ ही अस्थमा के मरीज़ों के लिए भी नींबू पानी फ़ायदेमंद है. इसके सेवन से जोड़ों में दर्द व सूजन की समस्या दूर होती है.

8) नींबू पानी हैंगओवर दूर करता है
जिन लोगों को अल्कोहल की लत है और सुबह उठने पर चलना भी मुश्किल हो जाता है, तो उनके लिए नींबू पानी लाभदायक होगा. आधे ग्लास नींबू पानी से ही आंखें खुल जाती हैं और सिर घूमना बंद हो जाता है.

9) नींबू पानी फूड पॉइज़निंग में फायदेमंद है
फूड पॉइज़निंग होने पर नींबू पानी का सेवन करें, इसमें मौजूद एसिड शरीर को लाभ पहुंचाते हैं और मरीज़ को ठीक होने में मदद करते हैं.

10) नींबू पानी पेट संबंधी समस्या से छुटकारा देता है
यदि आप भी अक्सर गैस, कब्ज़, अपच जैसी पेट संबंधी समस्या से परेशान रहते हैं, तो नींबू पानी का सेवन शुरू कर दीजिए.

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