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सीताफल के अनगिनत फ़ायदे (Profound Benefits Of Custard Apple)

Benefits Of Custard Apple

Benefits Of Custard Apple

विटामिन से भरपूर सीताफल के कई बेहतरीन फ़ायदे (Benefits Of Custard Apple) हैं. सीताफल एक मीठा व स्वादिष्ट फल होने के साथ-साथ अनगिनत औषधीय गुणों से भरपूर है. सीताफल शरीर को शीतलता पहुंचाता है. यह पित्तशामक, पौष्टिक, रक्तवर्द्धक, वातदोषशामक और हृदय के लिए बहुत ही लाभदायक है. इसमें मौजूद विटामिन ए त्वचा, बालों और आंखों के लिए बेहद उपयोगी है. विटामिन सी से भरपूर होने के कारण यह रोगप्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है. इसमें प्रचुर मात्रा में पोटैशियम व मैग्नीशियम होता है, जो हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता हैै.

*    सीताफल का नियमित सेवन करने से दांत व मसूड़ों में होनेवाले दर्द से छुटकारा मिलता है.

*    सीताफल आंखों की देखने की क्षमता बढ़ाता है, क्योंकि इसमें विटामिन सी और राइबोफ्लेविन काफ़ी ज़्यादा होता है. इससे चश्मे का नंबर भी दूर किया जा सकता है.

*    यदि डायरिया की समस्या हो, तो कच्चे सीताफल को काटकर सुखा लें. फिर इसे पीसकर मरीज़ को खिलाएं. इससे काफ़ी आराम मिलता है.

*    सीताफल का नियमित सेवन करने से शरीर का एनर्जी लेवल बढ़ता है. ये दिमाग़ को रिलैक्स कर अनिद्रा, थकान व मानसिक तनाव को दूर करने में भी मदद करता है.

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*    जूं की परेशानी में सीताफल बेहद उपयोगी है. इसके लिए सीताफल के बीजों का बारीक़ चूर्ण बनाकर थोड़ा-सा पानी डालकर पेस्ट तैयार कर लें. इसे रात को बालों में लगाएं, सुबह बाल धो लें. दो-तीन दिन तक ऐसा करने से जुएं ख़त्म हो जाएंगे.

*    सीताफल में लौह तत्व की प्रचुरता होने से यह एनीमिया में फायदेमंद है.

* बाल कम होने या फिर गंजेपन में भी सीताफल उपयोगी है. सीताफल के बीज को बकरी के दूध के साथ पीसकर पेस्ट बना लें. इसे अच्छी तरह से बालों में लगा लें. इससे बाल बढ़ते हैं. साथ ही इससे मस्तिष्क को ठंडक भी मिलती है.

*    सीताफल में विटामिन सी की पर्याप्त मात्रा होने से ये शरीर से विषैले तत्वों को निकालने में मदद करता है. इसके अलावा इससे त्वचा भी निखरती है.

*    रिसर्च के अनुसार, सीताफल में ऐसे कई पोषक तत्व हैं, जो कैंसर से बचाव करते हैं. इसमें मौजूद ऐलकोनॉइड्स व एसिटोजिनिन ट्यूमर सेल्स को बढ़ने से रोकते हैं.

*    सीताफल का छिलका पीसकर सेवन करने से पतले दस्त या आंव की समस्या दूर होती है.

*    बच्चे के कान में दर्द हो, तो सीताफल के गूदे के रस में कुछ बूंद गाय का ताज़ा दूध मिलाकर कान में डालें.

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*    सीताफल खाने से ब्लड शुगर लेवल कम होता है, इस कारण डायबिटीज़ की प्रॉब्लम से बचा जा सकता है.

*    जो काफ़ी दुबले-पतले हैं और अपना वज़न बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें नियमित रूप से सीताफल का सेवन करना चाहिए.

*    शरीर में कहीं भी दर्द हो, तो सीताफल के गूदे का रस निकालकर लगाने से दर्द में राहत मिलती है.

*    गठिया यानी जोड़ों के दर्द में सीताफल का सेवन काफ़ी फ़ायदेमंद है.

*    यदि आपका शरीर हमेशा गर्म रहता है, तो आपको नियमित रूप से सीताफल का सेवन करना चाहिए. इससे शरीर का ताप

संतुलित रहेगा.

*    सीताफल के पत्ते व छाल भी उपयोगी होते हैं, इससे फोड़े-फुंसी में आराम मिलता है.

सुपर टिप

सीताफल में मौजूद कॉपर व डायटरी फाइबर अपच, कब्ज़ व अन्य पेट संबंधी समस्याओं को दूर करने में काफ़ी कारगर साबित होते हैं.

– अभिषेक गुप्ता

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पेट में कीड़े हो तो आज़माएं ये घरेलू इलाज (Get Rid Of Intestinal Worms With These Effective Home Remedies)

मनुष्य के पेट (Stomach) में विशेषकर आंतों (Intestines) में विभिन्न प्रकार के कीड़े (Worms) पाए जाते हैं. पाचन संस्थान से संबंधित इन कीड़ों को ही आम लोग पेट के कीड़े (Stomach Worms) के नाम से संबोधित करते हैं. ये कई तरह के होते हैं, जो तरह-तरह के विकारों को उत्पन्न करते हैं.

Home Remedies For Intestinal Worms

मधुर-अम्ल पदार्थों का अधिक सेवन तथा अजीर्ण रहने पर भी भोजन करना पेट के कीड़ों को पैदा करने में मुख्य भूमिका अदा करते हैं. इसके अतिरिक्त पतले पदार्थों तथा गुड़ का अधिक सेवन, व्यायाम न करना या शारीरिक श्रम से बचना, दिन में अधिक सेवन, परस्पर विरुद्ध पदार्थों का सेवन आदि कृमियों के उत्पत्ति के सामान्य कारण हैं. ये कारण कृमियों की उत्पजत्त और उनके विकास के लिए अनुकूल परिस्थिति उत्पन्न करते हैं.

पेट में जब कीड़े हो जाते हैं तो उनके कारण निम्न लक्षण पैदा होते हैं- मिचली, जी मिचलाना, लाल स्राव, अजीर्ण, अरुचि, उल्टी, ज्वर, दुर्बलता, छींक, नज़ला-जुकाम आदि. इसके अतिरिक्त पेट में तीव्र दर्द, भूख की कमी, रक्ताल्पता आदि लक्षण भी पाए जाते हैं.

* नारंगी के सूखे छिलके और बायविडंग दोनों समभाग में लेकर कूट-पीस कर 3 ग्राम चूर्ण को गर्म पानी के साथ प्रतिदिन एक बार तीन दिन तक देने से कीड़े मर जाएंगे. उन मरेग हुए कीड़ों को निकालने के लिए चौथे दिन एरंडी का तेल पिलाएं.

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* ईख के सिरके में 25 ग्राम चना रात को भिगो दें और सुबह उसे चबा-चबा कर खाएं. आठ घंटे तक कुछ भी न खाएं-पीएं. कीड़े मरकर बाहर निकल आएंगे.

* मूली के रस में  थोड़ा नमक मिलाकर सबिह-शाम दिन में दो बार सेवन कीजिए. इस प्रयोग को निरंतर चार दिनों तक करने के बाद पेट की अंतड़ियों में फंसे सारे कीड़े मल के साथ निकल जाएंगे और आपका पेट एकदम स्वच्छ हो जाएगा.

* पीपल के पंचांग का चूर्ण गुड़ में मिलाएं और सौंफ के अर्क के साथ सुबह-शाम पांच-पांच ग्राम मात्रा में दें. तीन दिनों में सारे कीड़े खत्म हो जाएंगे.

* आपके घर का कोई भी सदस्य पेट के कीड़ों से त्रस्त है और बार-बार इलाज कराने पर भी कीड़ों से मुक्ति नहीं मिल पा रही है, तो आप उसे दिन में तीन-चार बार छाछ पिलाएं. छाछ में भुना हुआ जीरा, थोड़ा नमक और पिसी हुई काली मिर्च डाल सकते हैं. आप देखेंगे कि एक सप्ताह के भीतर ही अंतड़ियों में छुपे पड़े कीड़े बाहर निकल आएंगे.

* छाछ में बायविडंग का चूर्ण मिलाकर पिलाने से छोटे बच्चों के पेट के कीड़े मर जाते हैं या निकल जाते हैं.

* सुबह उठते ही दो-तीन माशा नमक पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक नियमित पीने से पेट के भीतर के कीड़े बाहर आ जाते हैं और नये कृमियों की उत्पत्ति रुक जाती है.

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* सोंठ और बायविडंग के चूर्ण को शहद के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े ख़त्म हो जाते हैं.

* कड़ुवे परवल के पत्ते एक तोला और धनिया एक तोला रात को दस-बारह तोला पानी में भिगोकर रखें. सुबह उसे छानकर उसमें शहद मिलाएं. इसे तीन ख़ुराक बनाकर दिन में तीन बार सेवन करने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं.

* सहिजन का क्वाथ शहद में मिलाकर दिन में दो बार पीने से सूक्ष्म से सूक्ष्म कृमि भी निकल जाते हैं.

रोगी को ऐसा आहार न दें जो हजम होने में कठिन हो. अजीर्ण कृमियों की वृद्धि में उपयुक्त वातावरण तैयार करता है, अतः अजीर्ण से बचें. कड़वे आहार ऐसे रोगियों के लिए उपयोगी होते हैं. पत्तेदार आहार, हरड़ व लहसुन पथ्य हैं. चीनी या उससे बने पदार्थों, चॉकलेट आदि से परहेज रखें.

– रेखा गुप्ता

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पेट का मोटापा घटाने के लिए पीएं ये 5 ड्रिंक्स (5 Healthy Drinks To Help You Lose Belly Fat Naturally)

पेट का मोटापा घटाने (Reduce Belly Fat) के लिए पीएं ये 5 ड्रिंक्स और पाएं फ्लैट टमी. मोटापा घटाना वैसे ही मुश्किल काम है और पेट का मोटापा घटाना तो सबसे मुश्किल काम है इसलिए पेट का मोटापा घटाने के लिए अलग से कोशिश करनी ही पड़ती है. यदि आपका पेट भी बहुत बढ़ गया है और आप अपने पेट का मोटापा घटाना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए बहुत मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है, पेट का मोटापा घटाने के लिए आप बस ये 5 ड्रिंक्स पीएं, ऐसा करने से जल्दी ही आपके पेट का मोटापा कम होने लगेगा. अधिक लाभ के लिए आप चाहें तो पेट का मोटापा घटाने वाले ये 5 ड्रिंक्स सोने से पहले पीएं.

Lose Belly Fat Naturally

1) खीरे का रस
खीरे का रस पीने से पेट साफ़ रहता है और पेट के आसपास फैट भी नहीं बढ़ता. खीरे के रस की सबसे बड़ी ख़ासियत ये है कि इसमें कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है इसलिए इसके सेवन से पेट का मोटापा जल्दी घटता है.

2) नींबू पानी
नींबू, शरीर के सभी हानिकारक टॉक्सिन को बाहर निकाल देता है. सारी अशुद्धियों को निकालकर ये शरीर को फ्रेश कर देता है और इससे पेट का मोटापा भी कम होता है.

3) अदरक का रस
एक चम्मच अदरक का रस बढ़ती तोंद को कम करता है. रोज़ाना अदरक का रस पीने से शरीर में जमा फैट कम होता है.

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4) एलोवीरा जूस
रोज़ाना सोने से पहले एक कप एलोवीरा जूस पीने से पेट की चर्बी कम होती है.

5) मिक्स जूस
1 खीरा, पार्स्ले या हरा धनिया का एक गुच्छा, 1 नींबू, 1 टीस्पून कद्दूकस किया हुआ अदरक 1 टीस्पून एलोवीरा जूस में आधा कप पानी मिलाकर छान लें. इसे रोज़ाना रात को सोने से पहले पीएं. ऐसा करने से जल्दी ही आपके पेट का बढ़ा हुआ मोटापा कम हो जाएगा.

फ्लैट टमी पाने के लिए करें 4 योगासन, देखें वीडियो:

 

 

जायफल के औषधीय 21 गुण (21 Surprising Ways Nutmeg Can Improve Your Health)

Nutmeg

भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए जायफल (Nutmeg) का इस्तेमाल किया जाता रहा है. मिठाइयों और पकवानों में इसका उपयोग किया जाता है. यह फाइबर, पोषक तत्व, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनरल्स व एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है. लेकिन औषधीय तत्वों से भरपूर जायफल कई बीमारियों को भी दूर करता है. यह अस्थमा, पेट के कीड़े, खांसी, उल्टी, सर्दी-ज़ुकाम, बवासीर आदि में लाभप्रद हैै.

* जायफल और सोंठ को गाय के घी में घिसकर चटाने से बच्चों को ज़ुकाम के कारण होनेवाले दस्त बंद हो जाते हैं.

* यदि बवासीर की समस्या है, तो जायफल को देसी घी में भूनकर सुखा लें. इसे पीसकर आटे में मिलाकर दोबारा देसी घी में सेंक लें. इसमें शक्कर मिलाकर हर रोज़ एक टीस्पून खाली पेट लें.

* 10 ग्राम जायफल के चूर्ण को गुड़ में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें. एक-एक गोली आधे-आधे घंटे पर देकर ऊपर से थोड़ा गर्म पानी पीने से हैजे के दस्त बंद होते हैं.

* 100 मि.ली. तेल में एक टीस्पून जायफल का चूर्ण मिलाकर धीमी आंच पर गर्म करें. ठंडा होने पर यह तेल हैजे के रोगी के हाथ-पैर पर मलने से दर्द में राहत मिलती है.

* जायफल का एक-दो बूंद तेल, शक्कर या बताशे में डालकर सेवन करने से पेटदर्द व पेट की गैस से छुटकारा मिलता है.

* जायफल के तेल को सरसों के तेल में मिलाकर जोड़ों की पुरानी सूजन पर मलने से त्वचा में गर्मी पैदा होती है. पसीना निकलता है, संधिवात के कारण अकड़े हुए संधि-स्थान खुलते हैं और संधिवात मिटता है.

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* जायफल के तेल का फाहा दांत में रखने से दांत के कीड़े मर जाते हैं और दांत की पीड़ा शांत होती है.

* यदि सिरदर्द हो, तो कच्चे दूध में जायफल घिसकर लेप की तरह माथे पर लगाएं. सिरदर्द में राहत मिलेगी.

* जायफल का तेल मिलाकर बनाया हुआ मलहम घाव पर लगाने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है.

* जायफल का काढ़ा बनाकर 3-4 बार कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं.

* जायफल, जावित्री व सोंठ को एक साथ पीसकर किसी कपड़े में बांधकर सूंघने से सर्दी-ज़ुकाम की समस्या दूर होती है.

* खांसी से परेशान हैं, तो जायफल को पीसकर इसमें शहद मिला लें. इसे पानी के साथ चाटें.

* जायफल के तेल से मालिश करने पर गठिया रोग की समस्या के साथ-साथ हाथ-पैरों की ऐंठन भी दूर हो जाएगी.

* जायफल को चावल के धोवन में घिसकर पीने से हिचकी व उल्टी बंद हो जाती है.

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* जायफल व लौंग का काढ़ा पीने से भी जोड़ों के दर्द मेंं आराम मिलता है.

* यदि गैस व एसिडिटी की समस्या हो, तो जायफल, जीरा व सोंठ को पीसकर पाउडर बना लें. भोजन के बाद इसे पानी के साथ लें.

* जायफल के टुकड़े को पांच मिनट दांतों के नीचे रखने से दांत के कीड़े मर जाते हैं और कैविटी की समस्या भी दूर होती है.

* आधा टीस्पून जायफल के चूर्ण में आधा टीस्पून लौंग, एक टीस्पून शहद व चुटकीभर बंग भस्म मिलाकर खाने से सांस संबंधी समस्या दूर होती है.

* कान में सूजन हो, तो जायफल को घिसकर लगाने से आराम मिलता है.

* जायफल चेहरे की ख़ूबसूरती भी बढ़ाता है. यदि कील-मुंहासों की समस्या है, तो हर रोज़ चुटकीभर जायफल का सेवन करना चाहिए.

* यदि आपको नींद न आने की समस्या है, तो गाय के घी में जायफल घिसकर पैर के तलुवों और पलकों पर लगाने से अच्छी नींद आती है.

– ऊषा गुप्ता

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घर के 5 काम करें और वज़न घटाएं (5 Household Work That Can Help You Lose Weight)

घर के 5 काम करके आप आसानी से अपना वज़न घटा (Weight Loss) सकती हैं और ऐसा करना कोई मुश्किल काम नहीं है. आमतौर पर देखा गया है कि बहुत से लोग मोटापा कम करने के लिए स़िर्फ सूप या सलाद का सेवन करते हैं, लेकिन यह तरीक़ा सही नहीं है. इन तरीक़ों से फ़ायदे की जगह नुक़सान ही होता है. वज़न कम (Lose Weight) करने के लिए आहार में कैलोरी कम करना बहुत ज़रूरी है, परंतु इस तरह नहीं. आपको वज़न घटाने के लिए एक्सरसाइज़ भी करनी होगी.यदि आपके पास एक्सरसाइज़ करने के लिए समय नहीं है, तो आप घर के 5 काम करके अपना वज़न आसानी से घटा सकती हैं.

Household Work

घर के 5 काम करें और वज़न घटाएं
1) पोंछा लगाते समय 30 मिनट में 145 कैलोरी खर्च होती है जो ट्रेडमिल पर 15 मिनट दौड़ने के बराबर है.
2) कपड़े धोते समय 60 मिनट में 85 कैलोरी बर्न होती है जो 100 सिटअप करने के बराबर है.
3) खाना बनाते समय 60 मिनट में 150 कैलोरी खर्च होती है जो 15 मिनट एरोबिक्स करने के बराबर है.
4) डस्टिंग करते समय 30 मिनट में 180 कैलोरी खर्च होती है जो 15 मिनट तक साइकिल चलाने के बराबर है.
5) बिस्तर लगाते समय 15 मिनट में 66 कैलोरी बर्न होती है जो डेढ़ कि.मी. पैदल चलने के बराबर है.

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फूड कैलोरी काउंट
घर के कामों से वज़न घटाने के साथ-साथ आपको डायट का भी ध्यान रखना होगा. डायटिंग करते समय कुछ भी खाने से पहले आपको उसमें मौजूद कैलोरी की जानकारी होना बेहद ज़रूरी है, वरना आपकी सारी मेहनत बेकार जा सकती है. डायट और एक्सरसाइज़ के सही कॉम्बिनेशन से ही आप वज़न घटा सकती हैं. आइए, हम आपको बताते हैं कि किन चीज़ों में कितनी कैलोरी होती है, ताकि आप उस हिसाब से अपना डायट प्लान करें.

* डायटिंग के हिसाब से यदि नॉन वेज फूड का कैलोरी काउंट जानना चाहती हैं, तो आपको बता दें कि एक अंडे में 80 कैलोरी होती है और 60 ग्राम मटन, मछली और चिकन में लभगग 70 कैलोरी होती है.
* साउथ इंडियन डिशेज़ में तीन-चौथाई डोसा, डेढ़ इडली, 50 ग्राम पोहा, 60 ग्राम उपमा इन सभी में लगभग 100 कैलोरी होती है.
* डेयरी प्रॉडक्ट्स में 750 ग्राम छाछ में 100 कैलोरी होती है. इसी तरह 30 ग्राम चीज़, 180 मि.ली. गाय के दूध, 260 मि.ली. स्किम्ड मिल्क और 160 ग्राम दही में 100 कैलोरी होती है.
* 100 ग्राम उबले चावल में 100 कैलोरी होती है. 44 ग्राम फुलके और 40 ग्राम या 2 स्लाइस ब्रेड में 100 कैलोरी होती है.
* इसी तरह 140 ग्राम दही की कढ़ी, 100 ग्राम राजमा और 120 ग्राम सांभर में 100 कैलोरी होती है.
* एक कप पालक में 40 कैलोरी और एक कप ब्रोकली में 55 कैलोरी.

4 योगासन घटाते हैं वज़न, जानने के लिए देखें वीडियो:

 

जानें हींग के 13 आश्‍चर्यजनक फ़ायदे (13 SURPRISING BENEFITS OF HING OR ASAFOETIDA)

हींग (Hing) का उपयोग विशेषतः दाल-साग को बघारने में होता है. परंतु अनेक रोगों के निवारण में भी यह सक्षम है. इसके सेवन से कफ, वायु दोष नहीं होते. उचित मात्रा में हींग (Asafoetida) का सदैव प्रयोग करना चाहिए. यह बहुत लाभप्रद (Beneficial) है. इसके अनेक औषधीय गुण हैं.

ASAFOETIDA

1. 2 चम्मच सरसों के तेल में 1 ग्राम हींग, दो कली लहसुन और ज़रा-सा सेंधा नमक भून लें. जब हींग जल जाए, तो तेल को छानकर शीशी में भरकर रख लें. कान में दर्द या सांय-सांय होने पर दो-दो बूंद तेल रोज रात को कानों में डालें. प्रतिदिन एक सप्ताह तक ऐसा करने से कान दर्द, खुश्की और सांय-सांय की आवाज की शिकायत दूर हो जाती है.

2. हींग को घी में भून लीजिए. फिर काली मिर्च, वायबिडंग, कूठ, सेंधा नमक और भुनी हुई हींग, सभी 5-5 ग्राम लेकर कूट-पीस-छानकर शीशी में भर लें. कुकुर खांसी होने पर आधा या एक ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह-शाम चाटें. यह नुस्ख़ा सिर्फ एक हफ्ते में ही चमत्कार दिखा देता है.

3. कौड़ी (गिल्टी का दर्द) हो, तो एक बीज निकाला हुआ मुनक्का लेकर उसमें दो ग्राम भुनी हींग मिलाकर नबा जाइए. ऊपर से दो घूंट गर्म पानी पी लें. असर होते देर नहीं लगेगी. दूसरे दिन इस दवा की एक ख़ुराक और ले लीजिए. रोग हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा.

4. हींग, सोंठ और मुलहठी 2-2 ग्राम लेकर पीस लें. फिर मधु मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें. भोजन के बाद एक गोली सुबह और एक गोली रात को चूसिए. कब्ज़ से राहत मिलेगी.

5. हींग को शराब में खरल करके सुखा लीजिए. इसे दो रत्ती मक्खन के साथ खाने से खांसी, श्‍वास और दूषित कफ विकार में अत्यंत लाभ होता है.

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6. हींग, सेंधा नमक और घी 10-10 ग्राम लेकर 120 मि.ली. गोमूत्र में मिलाइए. उसे इतना उबालिए कि केवल घी बाकी रह जाए. यह घी पीने से मिर्गी दूर होती है.

7. हींग, कालीमिर्च और कपूर- प्रत्येक 10-10 ग्राम और अफीम 4 ग्राम लेकर अदरक के रस में छह घंटे तक घोंटिए. फिर एक-एक रत्ती की गोलियां बनाइए. एक या दो गोली दिन में तीन बार लेने से दस्त से छुटकारा मिलता है.

8. हींग, कपूर और आम की गुठली समभाग में लेकर पुदीने के रस में पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें. चार-चार घंटे पर यह गोली देने से हैजे में फ़ायदा होता है.

9. घी में सेंकी हुई हींग घी के साथ खाने से प्रसूता स्त्री को आने वाला चक्कर (सिर चकराना) और शूल मिटता है.

10. हींग का चार माशा चूर्ण बीस तोले दही में मिलाकर पीने से और दोपहर को केवल दही-भात खाने से या स़िर्फ दही सेवन करने से तीन दिन में ही नारू बाहर निकल आता है.

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11. पेट में गैस हो गई हो, पेट फूल कर ढोल के समान बन गया हो, पेट में दर्द हो रहा हो, तो नाभि के आसपास और पेट पर हींग का लेप करने से थोड़े समय में ही आराम हो जाता है.

12. हींग और अफीम बराबर-बराबर लेकर तिल के तेल या मोम और तेल में अच्छी तरह पीसें. यह मलहम कंठमाल पर लगाने से कंठमाल पककर फूट जाता है और आराम मिलता है.

13. हींग को पानी में उबालकर उस पानी से कुल्ले करने से दांत की पीड़ा दूर होती है. यदि दांत में पोल हो, तो पोल में हींग भरने से दंतकृमि मर जाते हैं और दांत की पीड़ा दूर हो जाती है.

– मूरत गुप्ता

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आंवला के 17 चमत्कारी फ़ायदे (17 Magical Health Benefits Of Amla)

आंवला हमारे देश के श्रेष्ठ फलों में से एक है. यह आयुवर्द्धक, कल्याणकारी, श्रीफल, अमृतफल आदि नामों से भी जाना जाता है. आंलवा कफ़, पित्त, वायु को दूर करता है. इसके नियमित सेवन से आंखों की ज्योति बढ़ती है. यह हृदय रोग में भी लाभकारी है. इससे जिगर को ताक़त मिलती है. हरा आंवला रसायन होता है, सूखा आंवला कफ़ को नष्ट करता है. यह ख़ून की गर्मी को शांत करता है तथा हड्डियों को मज़बूत बनाता है. यह भूख को बढ़ानेवाला, पाचनशक्ति को ठीक करनेवाला तथा त्वचा रोगों को नष्ट करनेवाला भी माना जाता है.

Amla

 

1. एक छोटा चम्मच पिसा हुआ आंवला रात को दूध के साथ सेवन करें. यह आंतों को साफ़ कर कब्ज़ दूर करता है.

2. सूखा आंवला तथा काला नमक समान भाग में लेकर चूर्ण बना लें. अजीर्ण से होनेवाले दस्त में आधा चम्मच चूर्ण दिन में तीन बार पानी के साथ सेवन करें. दस्त बंद हो जाएंगे.

3. बवासीर की शिकायत होने पर आंवले का चूर्ण दही के साथ नियमित लेना चाहिए.

4. तीन भाग ताज़े आंवले के रस में एक भाग शहद मिलाकर सुबह-दोपहर-शाम को लें. पीलिया में आश्चर्यजनक लाभ होगा.

5. नेत्र रोगों में आंवले का चूर्ण गाय के दूध के साथ नियमित सेवन करना चाहिए. इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है.

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6. आंवले को आग पर भूनकर उसमें सेंधा नमक मिलाकर बारीक़ पीस लें. साथ ही इसमें दो-तीन बूंदें सरसों के तेल की मिला दें. इससे नियमित मंजन करने से पायरिया रोग का नाश होता है.

7. आंवले के रस में चंदन अथवा पीपरि का चूर्ण डालकर शहद के साथ चाटने से उल्टी बंद होती है.

8. हड्डी टूटने पर आवश्यक उपचार के बाद नियमित रूप से आंवले का रस किसी फल के रस में मिलाकर लें. विशेष लाभ होगा.

9. आंवला और हल्दी 10-10 ग्राम लेकर काढ़ा बना कर पीने से मूत्र मार्ग और गुदा मार्ग की जलन शांत होती है और पेशाब साफ़ होता है.

10. बीस ग्राम आंवले के रस में एक पका हुआ केला मसलकर, उसमें 5 ग्राम शक्कर मिलाकर खाने से स्त्रियों का सोमरोग (बहुमूत्र रोग) दूर हो जाता है.

11. आंवले का चूर्ण मूली के साथ खाने से मूत्राशय की पथरी में लाभ होता है.

12. एक औंस ताज़े आंवले का रस नित्य प्रातः खाली पेट एक हफ़्ते तक लें. पेट के कीड़े मर जाएंगे.

13. यदि नकसीर किसी प्रकार बंद न हो तो ताज़े आंवले का रस नाक में टपकाएं, नकसीर बंद हो जाएगी. जिन्हें अक्सर नकसीर की शिकायत रहती है, उन्हें नित्य आंवले का सेवन तथा सिर पर आंवले का लेप करना चाहिए.

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14. आंवले और काले तिल का बारीक़ चूर्ण बना लें. यह चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में घी या शहद के साथ नियमित चाटने से वृद्धत्व दूर होता है और शक्ति आती है.

15. बाल गिरते हों या कम उम्र में स़फेद हो गए हों, तो आंवले का चूर्ण पानी में मिलाकर तुलसी की हरी पत्तियों को पीसकर उसमें मिला दें. इसे बालों की जड़ों में मलें. 10 मिनट के बाद बाल धो लें, नियमित कुछ दिन तक ऐसा करने से बालों का गिरना तथा सफ़ेद होना रुक जाता है.

16. ताज़े आंवले के रस में थोड़ा नमक मिलाकर पीने से डायबिटीज़ कुछ महीने में ही ठीक हो जाता है.

17. आंवले के चूर्ण का लेप सिर पर लगाने से सिरदर्द से राहत मिलती है.

– ऊषा गुप्ता

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औषधीय गुणों से भरपूर राई (10 Incredible Mustard Benefits)

राई बहुत ही गुणकारी एवं पाचक है. दादी मां के खज़ाने में दवा के रूप में इसके घरेलू नुस्ख़े उपलब्ध हैं. लाल व सफेद राई कफ व पित्त को हरने वाली, तीक्ष्ण, गर्म और अग्नि को प्रदीप्त करने वाली होती है. यह खुजली, कोढ़ और पेट के कीड़ों को नष्ट करने वाली होती है. काली वाई में भी यही गुण हैं. परंतु यह अत्यंत तीक्ष्ण होती है. इसके प्रसिद्ध घरेलू नुस्ख़े निम्न हैं.

Mustard Benefits

* राई को बारीक पीसकर पेट पर लेप करने से उल्टी तुरंत बंद हो जाती है.

* राई पीसकर सूंघने से जुकाम शीघ्र दूर हो जाता है. जुकाम की वजह से पैर ठंडे हो जाने पर राई का लेप हितकारी है.

* राई के एक-दो माशे चूर्ण में थोड़ी-सी शक्कर मिलाकर खाने और ऊपर से एक कप पानी पीने से पेटदर्द दूर होता है.

* राई चार रत्ती, सेंधा नमक दो रत्ती और शक्कर दो माशा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से खांसी में कफ़ गाढ़ा हो गया हो तो पतला होकर सरलता से निकल जाता है.

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* यदि किसी ने जाने-अनजाने विष खा लिया हो, तो आधा तोला पिसी हुईराई और आधा तोला नमक गर्म पानी में मिलाकर पीने से उल्टी होती है, जिससे विष बाहर निकल जाता है.

* राई के तेल में नमक मिलाकर दांत साफ करें. इससे दांत एवं मसूड़े स्वस्थ एवं मजबूत होते हैं.

* वात-व्याधि से जकड़ गए अंगों पर राई की पुल्टिस बांधने अथवा राई का प्लास्टर करने से लाभ होता है.

* गुड़, गुग्गुल और राई को पीसकर पानी में उबालकर लेप करने से कंखवारी मिटती है. कहावत भी है गुड़, गुग्गुल और पिसी राई, क्या करती उसे कंखवारी.

* राई के आटे को आठ गुने गाय के पुराने घी में मिलाकर उसका लेप करने से थोड़े दिनों में सफेद कोढ़ मिट जाता है. इस लेप से खाज-खुजली और दाद में भी फ़ायदा होता है.

* मिर्गी-मूर्च्छा में राई के आटे का नस्य दिया जाता है.

– ओमप्रकाश गुप्ता

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अमरूद खाने के 7 चमत्कारी फ़ायदे (7 Health Benefits of Guava)

Guava

 

अमरूद बारहमासी फल है, जो अनेक पोषक गुणों से युक्त होने के कारण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है. आंवला, नींबू और चेरी के बाद अमरूद ही ऐसा फल है, जिसमें विटामिन ‘सी’ की सर्वाधिक मात्रा पायी जाती है

1. कब्ज़ होने पर खाली पेट निरंतर कुछ दिनों तक पके अमरूद का सेवन करने से कब्ज़ हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगी.

2. भोजन के साथ अमरूद की सब्जी खाने से गरिष्ठ से गरिष्ठ भोजन भी पच जाता है.

3. अमरूद की डाली से दातून करने से दांत साफ़ होते हैं और सांस की दुर्गंध का नाश होता है.

4. अमरूद के बीजों को कुनकुने पानी के साथ लेने से जुकाम भाग जाता है. वैसे जुकाम और सर्दी से पीड़ित व्यक्ति को अमरूद का सेवन नहीं करना चाहिए.

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5. अमरूद की पत्तियों को उबालकर कुल्ला करने से गला-जीभ साफ़ होता है और मुंह के छाले ठीक होते हैं.

6. अमरूद को काट कर छिलके सहित पीसकर उसमें दूध मिलाकर छान लें. उसमें मिश्री मिलाकर सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है.

7. अमरूद के बीज, पत्तियां और फल का सेवन करने से भांग, गांजा, शराब आदि का नशा उतरता ही नहीं, बल्कि इसका नियमित उपयोग करने से उनकी आदत भी छूट जाती है. सिगरेट पीने और पान खाने की आदत भी अमरूद के पत्तों को चबाने से छूट जाती है.

– रेषा गुप्ता

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सिरके के अनगिनत फ़ायदे (Top 25 Vinegar Benefits)

Vinegar Benefits

गन्ने के रस के अलावा सेब, जामुन आदि से भी सिरका बनाया जाता है, जो सेहत के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद होता है. सिरका यानी विनेगर रुचिकर, पेट रोगों में लाभप्रद, हृदय के लिए हितकारी व आहार को पचानेवाला है. सिरका बदहज़मी व गैस की समस्या को भी दूर करता है.

* गले की सूजन, जलन आदि दूर करने के लिए पानी में सिरका मिलाकर कुल्ला करें.

* पेटदर्द हो रहा हो, तो एक ग्लास पानी में आधा चम्मच सिरका मिलाकर पीने से तुरंत आराम मिलता है.

* यदि दस्त व कब्ज़ हो, तो सलाद या पानी में थोड़ा-सा सिरका डालकर इस्तेमाल करना फ़ायदेमंद होता है.

* किडनी की पथरी में महीनेभर सेब का सिरका सेवन करने से लाभ होता है.

* डायबिटीज़ के मरीज़ सेब के सिरके का सेवन करें, तो बीमारी कंट्रोल में रहती है और बैड कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है.

* सिरका व शहद को पानी में मिलाकर पीने से आंखों की चमक व रोशनी तेज़ होती है.

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* जहरीले कीड़ों के काटने पर हुए घाव में सिरका भरने से विष का प्रभाव कम हो जाता है.

* सिरका तथा प्याज़ मिलाकर खाने से लू नहीं लगती.

* यदि आपको लगातार हिचकियां आ रही हैं, तो एक टीस्पून सिरका पी लें.

* गले की ख़राश को दूर करने के लिए एक कप गर्म पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर कुल्ला करें.

* बहुत अधिक शारीरिक मेहनत करने के कारण मांसपेशियों में दर्द की शिकायत हो जाती है. ऐसे में सिरके से मालिश करना लाभप्रद होता है.

* वज़न घटाने के लिए भी हर रोज़ एक टेबलस्पून सिरके का सेवन कर सकते हैं.

* सेब के सिरके से दांतों की मालिश करने या फिर एक कप पानी में एक टीस्पून सिरका मिलाकर गरारा करने से दांतों का पीलापन दूर होता है.

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* भोजन करते समय दाल-सब्ज़ी या सलाद आदि के साथ ज़रा-सा सिरका मिलाकर लेने से भोजन का स्वाद बढ़ जाता है और भोजन शीघ्र पचता है.

* पानी में सिरका मिलाकर सिर धोने से बाल झड़ने रुक जाते हैं.

* बेसन, हल्दी व मलाई में सिरका मिलाकर लेप बनाएं. इस लेप को चेहरे पर लगाने से दाग़-धब्बे दूर होकर रंग निखरता है.

* पनीर को अधिक दिनों तक ताज़ा रखने के लिए उसे सिरके से भीगे कपड़े में लपेटकर रखें.

* सिरका मिले पानी में कपड़ा धोने से कपड़ों का रंग नहीं निकलता.

* किसी भी नमकीन अचार में सिरका डाल देने से वह ख़राब नहीं होता.

* खिड़की व दरवाज़े के शीशे सिरके मिले पानी से साफ़ करने पर चमक उठते हैं.

* दूध में सिरका डालकर पनीर बनाने से पनीर मुलायम बनता है.

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* लालटेन में नई बत्ती डालने से पहले उसे सिरके में डालकर सुखा लें. इससे रोशनी अधिक होगी और धुआं भी नहीं उठेगा.

* यदि साइनस की समस्या है, तो उबलते पानी में 1/4 एप्पल विनेगर मिलाएं. थोड़ी देर बाद उसमें 1-1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर व शहद डालें. फिर 1 नींबू का रस मिलाकर अच्छी तरह मिक्स कर लें. इस मिश्रण को सुबह खाली पेट और शाम को सोने से पहले लें.

समस्या अनेक इलाज एक

यदि आप सर्दी-ज़ुकाम, मोटापा, सिरदर्द, जोड़ों के दर्द, हाई ब्लड प्रेशर, बदहज़मी, अल्सर, कोलेस्ट्रॉल आदि समस्याओं से परेशान हैं, तो सिरके को निम्न तरी़के से इस्तेमाल करें.

100 ग्राम सेब के सिरके में 100 ग्राम शहद और छह लहसुन की कलियों को छीलकर मिक्सर में पीसकर पेस्ट बना लें. इसे कांच के बॉटल में रखकर पांच दिन के लिए फ्रिज में रख दें. बाद में इस मिश्रण को अंगूर या कोई भी फ्रूट जूस के साथ या फिर पानी में 2 चम्मच मिलाकर पीएं.

सुपर टिप

एसिडिटी की समस्या से निजात पाने के लिए एक ग्लास पानी में 1 चम्मच सेब का सिरका और 1 चम्मच शहद मिलाकर पीएं.

– संगीता श्यामा गुप्ता

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बच्चों के दस्त (Diarrhoea) रोकने के 13 प्रभावकारी घरेलू नुस्ख़े (13 Home Remedies To Cure Diarrhoea In Babies)

Diarrhoea In Babies

 

दूध व भोजन की अधिकता, संक्रमण आदि कारणों से बच्चों को दस्त होने लगता है. दूध पीते बच्चों को बार-बार दस्त होने से उनके रक्त व शरीर से पानी व अन्य आवश्यक खनिज निकल जाते हैं. दस्तों की कमी या अधिकता के अनुसार अनेक लक्षण पैदा हो जाते हैं. इससे ज्वर, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, उल्टी, चेहरा व शरीर पीला पड़ जाना, बेहोशी, आंखें अंदर धंस जाना आदि विकार उत्पन्न हो जाते हैं.

जिन बच्चों को गाय व डिब्बों का दूध पिलाया जाता है, उन्हें कीटाणुओं के संक्रमण से यह रोग अधिक होता है. इस रोग में पहले पतले हरे रंग के बदबूदार दस्त होते हैं. कभी दस्तों में आंव और रक्त भी आ जाता है.

* मीठे सेब का रस कपड़े से छानकर बार-बार पिलाने से दस्त रुक जाते हैं और रक्त व शरीर में तरल तत्वों की कमी भी दूर हो जाती है.

* जौ का पानी और अंडे की स़फेदी पानी में घोलकर बार-बार थोड़ा-थोड़ा पिलाते रहने से लाभ होता है.

* फलों का रस, सब्जियों के पके रस और पानी बार-बार पिलाते रहने से शरीर में तरल तत्व पहुंच जाता है.

* छोटे बच्चे को लगातार पतली दस्त हो रही हो, तो 6 मि.ग्रा. सौंफ को 6 मि.ली. पानी में उबालें. जब आधा पानी रह जाए, तो 1 चम्मच       की मात्रा में दिन में तीन बार पिलाएं. शीघ्र लाभ होगा.

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* शिशुओं को दस्त होने पर जायफल, लौंग, सफेद जीरा व सुहागा खील- इन चारों को समान मात्रा में लेकर कपड़छान चूर्ण बना लें. 50 से     100 मि.ग्रा. तक की मात्रा आवश्यकतानुसार शहद के साथ दिन में 1-1 बार चटाएं.

* 60 मि.ग्रा. से 125 की मात्रा में कपूर रस शहद के साथ सुबह-शाम देने से   विशेष लाभ होता है.

* दस्त होते हों, तो भी शिशु का दूध बंद नहीं करना चाहिए, बल्कि साथ-साथ नारियल का पानी, अनार का रस, सेब का रस एवं नींबू पानी     दें.

* बगैर दूध की चाय या कॉफी बनाकर उसमें नींबू का रस डालकर पिलाने से लाभ होता है.

* जायफल घिसकर शहद के साथ बच्चे को सुबह-शाम चटाएं.

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* तेजपत्ते का चूर्ण एक भाग, बेलफल की गिरी 2 भाग गुड़ के साथ दें.

* सौंफ और सोंठ का काढ़ा बनाकर शिशु को 1-2 चम्मच की मात्रा में पिलाएं. इससे दस्त बंद होगा.

* सोंठ का चूर्ण 125 मि.ग्रा. की मात्रा में गुड़ में मिलाकर देने से बच्चे को दस्त से राहत मिलती है.

* यदि शिशु बार-बार हरे रंग की दस्त करता है, तो घबराइए नहीं. आप उंगली पर एरंड का तेल लगाकर चटाएं. दो-तीन दिन में ही आराम     हो जाएगा.

–  रेखा कुंदर

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हिस्टीरिया का घरेलू इलाज (Home Remedies for Hysteria)

Home Remedies for Hysteria

हिस्टीरिया स्नायु संस्थान या नर्वस सिस्टम की विकृति से होनेवाले रोगों में एक प्रमुख रोग है. यह बीमारी 15 से 25 वर्ष की लड़कियों को अधिक होता है. इस रोग से पीड़ित महिलाओं का मस्तिष्क, स्मरणशक्ति और स्नायुमंडल कमज़ोर हो जाता है. अत्यधिक चिंता, भय, शोक, पारिवारिक कष्ट, मानसिक आघात, धन हानि, गर्भाशय विकार आदि कारणों से ये बीमारी हो सकती है. इसके अलावा लाड़-प्यार में पली युवतियों की इच्छा की पूर्ति न होना, विवाह में देरी, पति की पौरुषहीनता, तलाक़, किसी क़रीबी के मृत्यु का गंभीर सदमा जैसे कारणों से महिलाएं हिस्टीरिया की शिकार हो जाती हैं.

लक्षण
इससे पीड़ित महिला बिना कारण या बहुत मामूली कारणों से हंसने या रोने लगती है. आवाज़ या प्रकाश उसे अप्रिय लगता है. चक्कर आना, सांस फूलना, चिंता, थकान, सिरदर्द, कमज़ोरी, अपच, शरीर के विभिन्न अंगों में पीड़ा, पीरियड्स में गड़बड़ी, सेक्स व्यवहार में विषमताएं आदि अनेक लक्षण हिस्टीरिया में प्रकट हो सकते हैं.

* सबसे पहले पीड़ित को होश में लाएं. होश में आने पर उसे सांत्वना दें. शरबत, फलों का रस, मीठा दूध पीने को दें.
* केले के तने का ताजा रस हिस्टीरिया के रोगिणी को ठीक करने का अचूक नुस्ख़ा है. प्रतिदिन दिन में तीन बार एक-एक ग्लास केले के तने के ताज़े रस के सेवन से लाभ होता है. 3-4 माह इस नुस्ख़े का सेवन करने से अच्छा प्रभाव देखा जा सकता है.

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* हिस्टीरिया रोग में धनिया अत्यंत लाभदायक है. 25 ग्राम धनिया और 10 ग्राम सर्पगंधा मिलाकर बारीक़ चूर्ण बनाएं. 1 से 2 ग्राम की मात्रा में रात में सोते समय पानी के साथ सेवन करें. इस नुस्ख़े को निरंतर कुछ दिनों तक सेवन करने से अवश्य लाभ होता है.
* तीन दिन तक तीनों समय (सुबह-दोपहर-शाम) गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लें. इसके बाद 100-100 ग्राम पांचों नमक लेकर उसे पीसकर एक साथ मिलाकर किसी साफ़ बर्तन में रख लें. ग्वारपाठा धोकर उसका एक लंबा टुकड़ा लेकर छील लें. फिर उसके छोटे-छोटे टुकड़े करके उस पर मिश्रित नमक डालकर एक महीने तक सेवन करें. इससे हिस्टीरिया रोग से अवश्य राहत मिलेगी.
* चुकंदर के एक कप ताज़ा जूस में एक चम्मच आंवले का जूस मिलाकर प्रतिदिन सुबह पीना चाहिए. एक महीने तक इसे नियमित पीने से अवश्य ही हिस्टीरिया का शमन होता है.

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* जो रोगी बालवच के चूर्ण को शहद में मिलाकर हर रोज़ 40 दिन तक खाता है और भोजन में केवल दूध-चावल का सेवन करता है, उसका भयानक और पुराना हिस्टीरिया रोग भी शांत हो जाता है.
* हिस्टीरिया का दौरा पड़ने पर हींग सुंघाने से राहत मिलती है. आधा ग्राम से एक ग्राम तक हींग नियमित खाने से लाभ होता है. साथ में 120 मि.ली. पानी में 2 ग्राम हींग मिलाकर एनिमा भी लेना चाहिए.

– रेषा गुप्ता

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