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दही खाएं और सेहतमंद जीवन पाएं (Eat Curd And Have A Healthy Life)

आमतौर पर दही (Curd) सभी खाते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को इसके फ़ायदों के बारे में जानकारी होती है. दही में भरपूर मात्रा में विटामिन्स, प्रोटीन, कैल्शियम व मिनरल्स होते हैं. इसके अलावा इसमें लैक्टोज़, आयरन व फास्फोरस भी होता है. लो फैटवाले दही का सेवन करने से वज़न नियंत्रण में रहता है. इसके सेवन से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. दही का नियमित रूप से सेवन करने से त्वचा, बाल व चेहरे की रंगत अच्छी होती है यानी ख़ूबसूरती के लिए भी दही लाभदायक है.

Curd Health Benefits

* दही में सेंधा नमक व भुना हुआ जीरा पाउडर मिलाकर पीने से पेट संबंधी बीमारियों से छुटकारा मिलता है.

* दही पाचन के लिए बेहद फ़ायदेमंद है. दही में अजवायन मिलाकर खाने से कब्ज़ की समस्या दूर हो जाती है.

* मुंह में छाले होने पर दही से कुल्ला करें. इससे छाले में आराम मिलता है.

* गर्मी व ख़ुश्की से हुए सिरदर्द में दही खाने से और दही से सिर पर मालिश करने से दर्द दूर होता है.

* यदि पेट की तकलीफ़ हो, तो दही में पानी मिलाकर शहद के साथ लेने से पेट की तकलीफ़ दूर होती है.

* स्किन प्रॉब्लम्स यानी दाग़-धब्बे होने पर इसे दूर करने के लिए हर रोज़ स्नान करने से पहले शरीर पर दही लगाएं. फिर थोड़ी देर बाद स्नान करें.

* जी मिचलाने व भोजन में अरुचि होने पर दही में पुदीना मिलाकर खाएं.

* पित्त होने और धूप के कारण शारीरिक व मानसिक थकान होने या चक्कर आने पर दही की लस्सी बनाकर पीना फ़ायदेमंद होता है.

* जैतून के तेल में दही और नींबू का रस मिलाकर लगाने से चेहरे का रूखापन दूर होता है.

* दही में नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से झुर्रियां कम होती हैं.

* सनबर्न होने पर उस जगह दही लगाएं. इससे सनबर्न नहीं होता और स्किन टैन भी नहीं होती.

* दही में बादाम का तेल व शहद मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं. 15 मिनट बाद चेहरा धो लें. इससे डेड स्किन निकल जाती है और त्वचा खिल उठती है.

* हल्दी व गुलाबजल दही में मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा नर्म-मुलायम होती है.

* दही की छाछ बनाकर पीने से पेट की गर्मी में आराम मिलता है और पाचन क्रिया भी बेहतर रहती है. साथ ही भूख भी अधिक लगती है.

* हर रो़ज़ एक चम्मच दही खाने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. इसमें मौजूद गुड बैक्टीरिया इम्यून सिस्टम को सही रखते हैं.

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स्टडी

हाल में हुई स्टडी के अनुसार, दही खाने से दिल की बीमारियों के होने का ख़तरा दस प्रतिशत तक कम हो जाता है. दही में मौजूद तत्व शरीर को कई तरी़के से फ़ायदा पहुंचाते हैं. यह प्रो-बायोटिक फूड कैल्शियम से भरपूर होता है, इससे हड्डियों व दांतों को मज़बूती मिलती है. दही खाने का सीधा संबंध मस्तिष्क से भी है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दही का सेवन करनेवालों को तनाव व अवसाद की समस्या कम होती है.

हेल्थ अलर्ट

* रात में दही न खाएं. यदि खाना ज़रूरी हो, तो कालीमिर्च पाउडर या शक्कर मिलाकर खाएं.

* खट्टी दही को गर्म करके न खाएं.

* दही में नमक मिलाकर न खाएं. इसकी बजाय गुड़ या मिश्री मिलाकर खाना फ़ायदेमंद रहता है.

* दही में फैट्स होने के कारण यह दिल की बीमारी व डायबिटीज़ टाइप 2 में नुक़सानदायक हो सकता है.

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सुपर टिप

दही में संतरे के छिलके का पाउडर मिलाकर लगाने से रंगत गोरी हो जाती है.

– ऊषा गुप्ता

दादी मां के अन्य घरेलू नुस्ख़े/होम रेमेडीज़ जानने के लिए यहां क्लिक करें-  Dadi Ma Ka Khazana

दर्दनिवारक नमक (Health Benefits Of Salt)

नमक (Salt) हमारे जीवन में बहुपयोगी भूमिका निभाता है. एक तरफ़ जहां यह भोजन के स्वाद के लिए ज़रूरी है, वहीं इसमें कई औषधीय गुण भी हैं, जिससे कई तरह के दर्द और समस्याओं से छुटकारा मिलता है.

Benefits Of Salt

नमक कई प्रकार के होते हैं, जैसे- सेंधा नमक, काला नमक, समुद्री नमक, सामान्य नमक आदि. नमक के कई फ़ायदे हैं. यह कब्ज़ दूर करने, कोलेस्ट्रॉल कम करने, हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने, दिल के दौरे की संभावना को कम करने में सहायक है. आइए, दर्दनिवारक नमक के बहुपयोगी नुस्ख़ों के बारे में जानते हैं.

* अपच होने पर नींबू के रस में नमक मिलाकर पीएं. तुरंत आराम मिलेगा.

* यदि आधासीसी यानी माइग्रेन की तकलीफ़ हो, तो लहसुन में नमक मिलाकर पीस लें और माथे पर इसका लेप लगाएं.

* यदि पेटदर्द हो, तो केले का जूस बना लें और उसमें काला नमक मिलाकर पीएं.

* खट्टी डकार की समस्या होने पर आधा-आधा टीस्पून पुदीना, बड़ी इलायची, कालीमिर्च, अजवायन, सेंधा व काला नमक लेकर पीस लें. दो-दो घंटे पर सौंफ के पानी के साथ ये चूर्ण एक टीस्पून लेते रहें.

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* गठिया की शिकायत हो, तो नमक और राई बराबर मात्रा में लेकर पीस लें. अब इसे हल्का गर्म करके दर्दवाली जगह पर लेप करके पट्टी बांध लें.

* ज़ुकाम होने पर तुलसी के रस में थोड़ा-सा नमक घोलकर नाक में कुछ बूंद टपकाएं.

* तिल के तेल में नमक को अच्छी तरह से भूनकर जोड़ों के दर्द में मालिश करने से आराम मिलता है.

* चेहरे पर दाग़-धब्बे व झाइयां हों, तो खीरे को सिरे से काटकर उस पर नमक लगाकर खाएं.

* छाले होने पर नमकवाले गुनगुने पानी से कुल्लाकरने से लाभ होता है.

* शरीर में थकान हो और बदन टूट रहा हो, तो एक खुले बर्तन या बाल्टी में गर्म पानी डालकर दो-तीन चम्मच नमक मिला लें. फिर घुटनों तक पैरों को अच्छी तरह से धोएं. बाद में काफ़ी देर तक पैर को डुबोएं रखें.

* दांत में कीड़े लग गए हों, तो आधा ग्लास गर्म पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर अच्छी तरह से घोल लें. फिर इसे घूंट-घूंट भरकर कुल्ला करें.

* नज़ले की समस्या होने पर गुनगुने नमकवाले पानी से नथुनों से पानी खींचें और छोड़ें, जैसे जलनेती करते हैं.

* पेशाब की रुकावट की समस्या हो, तो नमक पीसकर नाभि में डालें और बूंद-बूंद पानी डालें. जल्द ही समस्या दूर हो जाएगी.

* भूख न लगने की परेशानी हो, तो भोजन से आधे घंटे पहले एक चम्मच अदरक के रस में थोड़ा-सा नमक मिलाकर पीएं.

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* सिरदर्द होने पर घी में नमक डालकर गुनगुना गर्म करें और इसे माथे पर और कनपटियों पर मलें.

* हिचकी की समस्या हो, तो सेंधा व काला नमक पीसकर उसमें नींबू का रस मिलाएं और आधा कप पानी में घोलकर पीएं. इससे हिचकी से तुरंत आराम मिलेगा.

* चोट-मोच लगने पर घी गर्म करके उसमें नमक मिलाएं और चोटवाली जगह पर लगाएं.

* गर्दन में ऐंठन और मांसपेशियों में दर्द हो, तो नमक व हल्दी मिलाकर पोटली बना लें. इसे गुनगुने तेल में भिगोकर हल्के हाथों से मालिश करें.

* कब्ज़ में एक ग्लास गर्म पानी में आधा चम्मच सेंधा व काला नमक व आधा नींबू निचोड़कर खाली पेट पीएं. पंद्रह मिनट में पेट साफ़ हो जाएगा.

* तनाव दूर करने और तरोताज़गी के लिए भी नमक बेहद उपयोगी है. नहाने के गुनगुने पानी में दो कप सेंधा नमक मिलाकर स्नान करें. ऐसा हफ़्ते में कम-से-कम दो बार ज़रूर करें.

सुपर टिप

बदहज़मी होने पर प्याज़ के रस में नमक मिलाकर पीने से आराम मिलता है.

– रुचि ख़ुशी गुप्ता

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करीपत्ता के लाजवाब औषधीय गुण (Excellent Medicinal Properties Of Curry Leaves)

करीपत्ते को भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. लेकिन इसके सेहत से जुड़े अनगिनत फ़ायदे भी हैं. पौष्टिक तत्वों से भरपूर करीपत्ते में प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और फास्फोरस होता है. इसे मीठी नीम भी कहते हैं. इसमें कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स व फेनोल्स पाए जाते हैं, जिससे कैंसर जैसी ख़तरनाक बीमारी से भी बचने में मदद भी मिलती है. करीपत्ते में मौजूद ख़ास तत्व प्रोस्टेट, ल्यूकेमिया, कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव करते हैं. इसके बेहतरीन फ़ायदे के लिए हमेशा ताज़े करीपत्ते का ही इस्तेमाल करें.

Curry Leaves Benefits

* जी मिचलाने पर 1/4 कप करीपत्ते के रस में चुटकीभर शक्कर व आधे नींबू का रस मिलाकर पीएं.

* पित्त की समस्या होने पर करीपत्ते को पीसकर इसका रस निकाल लें और इसे छाछ के साथ दिनभर में दो-तीन बार पीएं.

* चेहरे की रंगत निखारने में भी करीपत्ता उपयोगी है. करीपत्ते को सुखाकर पीसकर पाउडर बना लें. इसमें नारियल का तेल, गुलाबजल, मुलतानी मिट्टी व चंदन मिलाकर पैक तैयार कर लें. इसे चेहरे पर लगाकर आधे घंटे बाद धो लें.

* एनीमिया की तकलीफ़ हो, तो हर रोज़ सुबह खाली पेट दो करीपत्ते के साथ एक खजूर खाएं.

* यदि डायरिया की प्रॉब्लम हो, तो करीपत्ते के पाउडर को छाछ में मिलाकर दिन में दो बार पीएं. इससे जल्द ही आराम मिल जाएगा.

* यदि आप डायबिटीज़ के मरीज़ हैं, तो अपने डायट में करीपत्ते को ज़रूर शामिल करें. तीन महीने तक लगातार हर रोज़ सुबह खाली पेट करीपत्ता खाने से इसके चमत्कारिक लाभ मिलेंगे.

* यदि स़़फेद बालों की समस्य हो, बाल टूटते व गिरते हों, तो 10-12 करीपत्ते में रातभर भिगोए हुए 5-6 बादाम मिलाकर पेस्ट बना लें. इससे बालों व स्काल्प की मालिश करें. फिर माइल्ड शैंपू से बाल धो लें. ऐसा तीन-चार हफ़्ते तक करने से बाल मज़बूत, चमकदार व काले होते हैं.

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* नियमित रूप से 7-8 करीपत्ते का सेवन करना शरीर के लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है. इससे वज़न कम होने, आंखों की रोशनी बढ़ने, बालों के काले होने में मदद मिलती है.

* पीरियड में दर्द की समस्या होने पर करीपत्ते का सेवन करना फ़ायदेमंद रहता है. इससे माहवारी में होनेवाले असहनीय दर्द में काफ़ी आराम मिलता है.

* करीपत्ते में एंटीबैक्टीरियल व एंटीफंगल गुण होने के कारण यह सूखी खांसी, कफ़ आदि में बलगम निकालने में मददगार साबित होता है.

* बवासीर की समस्या होने पर करीपत्ते का जूस पीएं. जूस के लिए करीपत्ते को पानी के साथ पीसकर उसका रस निकाल लें और इसे पीएं.

* वज़न कम करने के लिए करीपत्ते की चाय पीएं. इसके लिए पानी में करीपत्ता उबालकर उसमें नींबू का रस और शहद मिलाएं.

* अपच की परेशानी हो, तो एक टीस्पून घी को गर्म करके उसमें पांच-छह करीपत्ता, थोड़ा-सा सोंठ, जीरा, शहद व पानी मिलाकर उबाल लें. फिर इसे ठंडा करके पीएं.

* ब्लड प्रेशर से राहत के लिए सुबह लौकी के रस के साथ करीपत्ते का रस लें.

* खांसी-ज़ुकाम होने पर करीपत्ते के पाउडर में शहद मिलाकर लें.

यह भी पढ़ेचोट-मोच, सूजन के लिए उपयोगी घरेलू नुस्ख़े (Useful Home Remedies For Injury, Swelling)

* चेहरे के जले-कटे निशान को दूर करने में भी करीपत्ता फ़ायदेमंद है. इसके लिए एक कप दूध को गर्म करके उसमें 5-6 करीपत्ते मिलाकर उबालें. जब यह गाढ़ा हो जाए, तब इसे आंच पर से उतारकर ठंडा कर लें. फिर इसे जले-कटे हुए जगहों पर लगाएं.

हमेशा चुस्त-दुरुस्त व सेहतमंद रहने के लिए अपने भोजन में नियमित रूप से करीपत्ते को ज़रूर शामिल करें.

सुपर टिप: उल्टी व घबराहट होने पर करीपत्ते के जूस में नींबू का रस व शक्कर मिलाकर पीएं.

– ऊषा गुप्ता

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आलू- स्वाद भी सेहत भी (Potato- 17 Wonderful Health Benefits)   

आलू भला किसे पसंद नहीं. आमतौर पर आलू को स्नैक्स व भोजन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, पर इसमें कई औषधीय गुण भी हैं. जहां यह आंतों में सड़न की प्रक्रिया को रोकता है, वहीं पाचन में सहायक बैक्टीरिया के विकास में भी मदद करता है. आलू में प्रचुर मात्रा में विटामिन, स्टार्च, कैल्शियम, पोटैशियम व फास्फोरस होता है. कब्ज़, ड्रॉप्सी, यूरिक एसिड व आतों से जुड़ी बीमारियों में आलू काफ़ी फ़ायदेमंद है. स्कर्वी जैसी बीमारी के लिए तो आलू आदर्श आहार औषधी है. आलू का छिलका भी उपयोगी होता है, इसमें फाइबर व विटामिन बी 3 अधिक मात्रा में होती है. आलू को छिलके सहित पकाना चाहिए, क्योंेकि इसके छिलके के नीचे के हिस्से में ही प्रचुर मात्रा में प्रोटीन व खनिज होते हैं.

Potato

* पाचन संबंधी समस्या होने पर एक टेबलस्पून कच्चे आलू का रस भोजन से आधे घंटे पहले दो या तीन बार लें.

* मुंह में छाले हों, तो उबले हुए आलू खाएं. इससे जल्द ही छाले ठीक हो जाएंगे.

* यदि गठिया हो, तो चार आलू भून कर इसका छिलका निकाल लें. इस पर नमक व लाल मिर्च पाउडर छिड़ककर हर रोज़ खाएं. इससे गठिया जल्द ही ठीक हो जाएगा. इसके अलावा भोजन से पहले एक टेबलस्पून आलू का रस लेना भी फ़ायदेमंद होता है.

* गुर्दे की पथरी में मरीज़ को नियमित रूप से आलू खिलाते रहें और भरपूर मात्रा में पानी पिलाएं.

* सिरदर्द होने पर आलू को तीन तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं-

  1. आलू को छीलकर इसके पतले-पतले स्लाइस करके उसे सिर पर रखकर कपड़े से बांधकर शांत जगह पर लेट जाएं. कुछ देर में सिरदर्द से आराम मिल जाएगा.
  2. साफ़ कपड़े की पट्टी को आलू के रस में डुबोकर सिर पर रखें. जब पट्टी गर्म हो जाए, तब उसे बदल दें. कुछ देर तक ये प्रक्रिया करते रहने से सिरदर्द दूर हो जाएगा.
  3. आलू के मोटे छिलके को सिर पर रखकर बांध दें. इससे भी सिरदर्द में लाभ होता है.

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* आयरन की कमी होने पर एनीमिया से परेशान मरीज़ों के लिए आलू का छिलका काफ़ी लाभदायक है. अन्य सब्ज़ियों के साथ आलू के छिलके का सेवन करें. इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में होता है. इसका नियमित रूप से सेवन करते रहने से एनीमिया की समस्या दूर हो जाती है.

* आलू में मैग्नीशियम होता है, जो हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में सहायक होता है. अतः नियमित रूप से उबले हुए आलू अवश्य खाएं.

* शरीर में कहीं जल गया हो, तो कच्चे आलू का रस निकालकर जले हुए स्थान पर लगाएं.

* छोटे बच्चों या बुज़ुर्गों को आलू के रस में शहद मिलाकर पिलाने से उन्हें ताक़त मिलती है और वे हेल्दी भी होते हैं.

* आंखों की जलन और सूजन के लिए कच्चे आलू को कद्दूकस कर उसका रस निकालकर आंखों में काजल की तरह लगाएं.

* सन बर्न होने पर आलू को स्लाइस में काटकर फ्रिज में रख दें. फिर ठंडे आलू को सन बर्न वाले हिस्से में लगाएं.

* झुर्रियां व चेहरे के दाग़-धब्बे को दूर करने व खिली त्वचा के लिए आलू के रस का इस्तेमाल करना फ़ायदेमंद रहता है.

* चेहरे की रंगत निखारने के लिए आलू के रस को चेहरे पर लगाकर आधे घंटे बाद चेहरा धो लें. इसके अलावा इसमें नींबू का रस मिलाकर भी लगा सकते हैं.

यह भी पढ़ेचोट-मोच, सूजन के लिए उपयोगी घरेलू नुस्ख़े (Useful Home Remedies For Injury, Swelling)

* चेहरे के दाग़-धब्बे को दूर करने के लिए आलू को स्लाइस में काटकर इसे चेहरे पर धीरे-धीरे रगड़ते हुए मसाज करें.

* आलू एक नेचुरल क्लींज़र का काम भी करता है. इसमें ककड़ी मिलाकर चेहरे पर लगाएं.

सुपर टिप

आलू में केरोटिनॉयड्स नामक तत्व होता है, जो दिल व शरीर के अंदरूनी हिस्से के लिए उपयोगी होता है, इसलिए नियमित रूप से उबले हुए आलू खाएं.

ऊषा गुप्ता

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जर्म्स से जुड़े मिथक और सच्चाइयां (What Are The Common Myths About Germs And The Truth)

हम सभी जानते हैं कि संक्रमण से बचने का सबसे बेहतरीन उपाय है अपने हाथों को अच्छी तरह से धोते रहना. लेकिन जर्म्स (Germs) यानी रोगाणु को लेकर बहुतों के मन में कई तरह की भ्रांतियां रहती हैं. इन्हीं बातों पर एक नज़र डालते हैं.

Myths About Germs

जर्म्स दरअसल, सूक्ष्म जीव होते हैं, जो यदि हमारे शरीर में प्रवेश कर जाएं, तो संक्रमण व बीमारियों को जन्म दे सकते हैं. जर्म्स सामान्यतया संक्रमित लोगों को छूने, इंफेक्टेड एरिया के संपर्क में आने से अधिक फैलते हैं. छींक, खांसी, हवा में मौजूद धूल-मिट्टी से अधिक जर्म्स फैलते हैं, जैसे- सर्दी-ज़ुकाम, फ्लू आदि. आइए, इससे जुड़े मिथक व सच्चाई के बारे में जानते हैं.

मिथक: पब्लिक टॉयलेट सीट से आप जल्दी बीमारी की चपेट में आते हैं.

सच्चाई: यह सही है कि पब्लिक टॉयलेट हाइजीन के दृष्टिकोण से उतना सुरक्षित नहीं माना जाता है. लेकिन इससे आप बीमार पड़ जाएंगे, इसकी संभावना बहुत कम होती है. टॉयलेट सीट की बजाय टॉयलेट के दरवाज़े का हैंडल अधिक संक्रमित होता है.

मिथक: किचन की सफ़ाई के लिए स्पंज अच्छा है.

सच्चाई: यह सही है कि स्पंज से किचन की सफ़ाई आसानी से हो जाती है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि स्पंज में भी अनगिनत बैक्टीरिया होते हैं. वे प्लेटफॉर्म पर जमा गंदगी को केवल साफ़ कर सकते हैं, पर उसे पूरी तरह से कीटाणुमुक्त नहीं कर सकते. फिर भी यदि स्पंज इस्तेमाल ही करना है, तो इसे रोज़ अच्छी तरह से क्लीन करना बहुत ज़रूरी है. वैसे पेपर टॉवेल इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है.

मिथक: बैक्टीरिया से बचने के लिए जर्म्स फ्री सोप फ़ायदेमंद रहता है.

सच्चाई: यह सच है कि साफ़-सुथरे हाथ से आप ख़ुद को रोगमुक्त रख सकते हैं, पर इसके लिए जर्म्स फ्री साबुन का इस्तेमाल करना अधिक लाभदायक रहता है, ये सच नहीं है. नियमित रूप से इस्तेमाल किए जानेवाले सोप से भी आप हाथों को अच्छी तरह से क्लीन कर सकते हैं.

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मिथक: सार्वजनिक सतहों को छूने से बचना चाहिए.

सच्चाईः बिल्कुल, ऐसा करना सेहत के लिए लाभदायक रहता है, क्योंकि हरेक व्यक्ति बार-बार हाथ धोने जैसे नियमों का पालन कम ही करता है. पब्लिक प्लेस के दरवाज़ों के हैंडल, कार, टेबल आदि पर जर्म्स के अधिक रहने की संभावना भी रहती है. इससे बचने के लिए टिश्यू पेपर, ग्लव्स आदि का उपयोग कर सकते हैं या फिर उन्हें अच्छी तरह से पोंछकर इस्तेमाल कर सकते हैं.

Myths About Germs

मिथक: ऑर्गेनिक फ्रूट्स को धोने की ज़रूरत नहीं होती.

सच्चाई: ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. इन पर भी जर्म्स हो सकते हैं. माना कि ऑर्गेनिक फल सेहत के लिए फ़ायदेमंद रहते हैं, लेकिन बाज़ार से घर तक आने की प्रक्रिया में वे कई स्तरों से गुज़रते हैं, जिससे उनके संक्रमित होने व जर्म्स फैलने की गुंजाइश अधिक रहती है.

मिथक: सभी जर्म्स नुक़सानदायक होते हैं.

सच्चाई: सभी जर्म्स हानिकारक नहीं होते. यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट जॉर्ज (लंदन) के

डॉ. टिम प्लांच सभी जर्म्स को ख़राब नहीं मानते. उनके अनुसार, हमारी बॉडी में अनगिनत बैक्टीरिया मौजूद हैं, इसके बावजूद हम हेल्दी हैं. माना कि जर्म्स बीमारी का कारण बनते हैं, पर सभी बैक्टीरिया नुक़सानदायक नहीं होते. विश्‍वभर में हज़ारों तरह के बैक्टीरिया हैं, जिनमें से बहुत से इंसान के लिए हानिरहित हैं.

मिथक: यदि आपको बुख़ार है, तो एंटीबायोटिक मेडिसिन का कोर्स ज़रूर करना है.

सच्चाई: इस बात में कोई सच्चाई नहीं है, क्योंकि एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरियल इंफेक्शन का इलाज करते हैं. आमतौर पर सभी बुख़ार बैक्टीरिया की वजह से नहीं होते. उनका आम सर्दी, फ्लू या वायरल इंफेक्शन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेता.

मिथक: वैक्सीन (टीके) सुरक्षित नहीं होते. इनसे ख़तरा रहता है.

सच्चाई: सभी टीकों को पूरी तरह से जांच-परखकर इस्तेमाल में लाया जाता है, इसलिए यह सेफ होते हैं. वैसे भी गंभीर संक्रमित बीमारियों से बचने का बेहतरीन व सेफ तरीक़ा है वैक्सीन.

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Myths About Germs

मिथक: एंटीबायोटिक्स से होनेवाले किसी भी तरह के साइड इफेक्ट का मतलब है कि आपको एलर्जी है और इसे फिर कभी नहीं ले सकते.

सच्चाई: ऐसा नहीं है. एंटीबायोटिक दवाओं के बहुत सारे साइड इफेक्ट्स हैं, पर इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि एलर्जी हो.

मिथक: गर्म पानी जर्म्स को अच्छी तरह से साफ़ कर देता है.

सच्चाई: शोधों से यह पता चला है कि ठंडा पानी भी गर्म पानी की तरह ही जर्म्स को दूर कर देता है. साथ ही साबुन का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पानी की अपेक्षा अधिक बैक्टीरिया को दूर करता है.

उपयोगी टिप्स

* हाथ को नियमित रूप से कम-से-कम 20 सेकंड्स तक पानी से अच्छी तरह से धोएं.

* इसके अलावा साबुन या फिर लिक्विड सोप से हाथों को साफ़ करें.

* हर रोज़ छुई जानेवाली सतहें, जैसे- नल, दरवाज़े के हत्थे, टीवी के रिमोट, फोन आदि को साफ़ करके उपयोग करें.

* सफ़ाई के लिए इस्तेमाल होनेवाले नैपकीन, कपड़े, स्पंज आदि को भी नियमित रूप से अच्छी तरह से गर्म पानी से साफ़ करते रहें.

रिसर्च

एक रिसर्च के दौरान इकट्ठा किए गए किचन

नैपकीन्स में से 49% नैपकीन्स में बैक्टीरिया अधिक पाए गए. दरअसल, किचन नैपकीन या तौलिया बर्तन पोंछने से लेकर हाथ पोंछने तक कई तरह के कामों में उपयोग में लाया जाता है. इसके द्वारा कई तरह के जर्म्स या बैक्टीरिया से इंफेक्शन फैलने की संभावनाएं अधिक होती हैं. कई तरह के जर्म्स से दूषित नैपकीन उनके फैलने का कारण बन जाते हैं. फिर वो नुक़सानदायक जर्म्स भोजन तक फैल जाता है. इसलिए किचन में इस्तेमाल किए जानेवाले नैपकीन को नियमित रूप से धोना व साफ़ किया जाना बेहद ज़रूरी है. ध्यान रहे, इसे दोबारा उपयोग में लाए जाने से पहले इसे अच्छी तरह से पूरी तरह सुखाना भी बेहद ज़रूरी है.

Dr. Ajay Rana

इंस्टिट्यूट ऑफ लेज़र एंड एस्थेटिक मेडिसिन के संस्थापक डॉ. अजय राणा के अनुसार, “जर्म्स हर जगह होते हैं और वे डरावने भी हो सकते हैं, ख़ासकर जब आप उन्हें एक माइक्रोस्कोप के ज़रिए देखते हैं. लेकिन ये छोटे बैक्टीरिया, जो आम सर्दी-ज़ुकाम से लेकर जीवन के लिए ख़तरनाक संक्रमण तक सब कुछ पैदा कर सकते हैं, को अक्सर ग़लत समझा जाता है. हमारे मुंह, त्वचा और यहां तक कि हमारी इंटेस्टाइन में मौजूद बैक्टीरिया के रूप में जर्म्स का हमारे साथ गहरा संबंध है. हमारे शरीर में ऐसे बहुत सारे जर्म्स भी होते हैं, जो हमारी अच्छी सेहत के लिए ज़रूरी हैं. ये गुड बैक्टीरिया ख़तरनाक बीमारियों से भी हमारी रक्षा करते हैं, हमारे इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाते हैं, ताकि वे उनसे लड़ सकें. जब सहायक बैक्टीरिया हमारे शरीर में बढ़ते हैं, तो वे हमारे रक्षक के रूप में काम करते हैं, लेकिन अक्सर हम इंफेक्शन का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करके गुड बैक्टीरिया को मार डालते हैं. जब कि ये गुड बैक्टीरियाज़ कई बीमारियों से लड़ने में हमारी मदद करते हैं. इसलिए कह सकते हैं कि जर्म्स से हर कोई डरता है, पर यह भी उतना ही सच है कि कई जर्म्स हमारे सेहत के साथी भी होते हैं.”

– ऊषा गुप्ता

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कपूर का कमाल (11 Incredible Benefits Of Camphor)

हिंदू धर्म में पूजा के बाद कपूर जलाकर आरती करने की परंपरा है. पूजन, आरती जैसे धार्मिक कार्यों में कपूर का विशेष महत्व है. पूजा में प्रयोग किया जानेवाला कपूर हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फ़ायदेमंद है.

Benefits Of Camphor

वैज्ञानिक शोधों से सिद्ध हुआ है कि कपूर की सुगंध से जीवाणु, विषाणु इत्यादि बीमारी फैलानेवाले जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है व बीमारियां नहीं फैलती हैं.

* त्वचा संबंधी रोगों के इलाज में कपूर बेहद फ़ायदेमंद होता है. नारियल के तेल में कपूर व गंधक का पाउडर मिलाकर दाद, खाज, खुजली वाले स्थान पर लगाने से फ़ायदा मिलता है. मुहांसों पर भी कपूर का तेल लगाने की सलाह दी जाती है.

* फटी एड़ियों को ठीक करने में कपूर बहुत उपयोगी होता है. इसके लिए टब में गर्म पानी लें और उसमें कपूर मिलाकर पैर डालकर 10-15 बैठें. ऐसा करने से एड़ियां ठीक होती हैं.

* कपूर की टिकिया को रूमाल में लपेटकर सूंघते रहने से सर्दी-ज़ुकाम से राहत मिलती है.

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* कपूर व चंदन को तुलसी के रस में घिसकर लेप बनाकर सिर पर लगाने से सिरदर्द में आराम मिलता है. इसके अलावा कपूर को नींबू के रस के साथ मिलाकर सिर पर मलें. यह सिरदर्द का अचूक इलाज है. जोड़ों का दर्द या कमर दर्द होने पर कपूर के तेल से उस स्थान की मालिश करें. तुरंत आराम मिलेगा. शरीर के किसी भी अंग में दर्द होने पर आप इस तेल से मालिश कर सकते हैं. कपूर गठिया के रोगियों के लिए फ़ायदेमंद होता है. मांसपेशियों में दर्द होने पर इसे लगाने पर तुरंत आराम मिलता है.

* नारियल के तेल में कपूर डालें. इस तेल से बालों की जड़ों में हल्के हाथों से मालिश करें. इससे बाल स्वस्थ व मज़बूत होते हैं. रूसी, जुएं, बालों का गिरना इत्यादि समस्या होने पर सरसों के तेल में कपूर मिलाकर बालों पर लगाएं. इससे काफ़ी फ़ायदा होगा. इसके अलावा सौ ग्राम नारियल के तेल में चार ग्राम कपूर मिलाकर बॉटल में रखें. इस तेल को रात में सोने से पहले बालों में लगाकर मालिश करें. कुछ दिनों के अंदर रूसी गायब हो जाएगी.

* हींग और कपूर के पाउडर को  बराबर मात्रा में मिलाकर दांत के बीच दबाकर रखें. दर्द से तत्काल आराम मिलेगा. पान में देसी कपूर डालकर दिन में तीन-चार बार चबाने से पायरिया की शिकायत दूर हो जाती है. मसूड़ों में किसी तरह की समस्या होने पर कैस्टर ऑयल में कपूर मिलाकर मसूड़ों पर मलने से बहुत फ़ायदा मिलता है.

* आग से जलने या चोट के कारण त्वचा पर दाग़ पड़ने पर थोड़ा-सा कपूर पानी में मिलाकर प्रभावित स्थान पर नियमित रूप से कुछ दिनों तक लगाने से निशान मिट जाता है.

* देसी घी में कपूर मिलाकर रात को सोते समय पैरों के तलवों पर मालिश करने से अच्छी नींद आती है.

* मिश्री को बारीक पीसकर उसमें थोड़ा-सा कपूर पाउडर मिलाकर छालों पर लगाएं. यह नुस्ख़ा बच्चों के मुंह के छालों के लिए बेहद लाभकारी होता है.

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* ऊनी या रेश्मी कपड़े रखते समय छोटी-सी पोटली में कपूर बांधकर कपड़ों के बीच में रख दें. इससे कीड़े नहीं लगेंगे. तकिये के नीचे व पलंग के चारों तरफ़ कपूर की पोटली बांधकर रखने से खटमल नहीं आते हैं.

– आभा जैन

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जानें कालीमिर्च के 17 फ़ायदे (17 Amazing Black Pepper Benefits: More Than Just A Spice)

कालीमिर्च (Black Pepper) वातनाशक व पित्तकारक है. इसमें पेपराइन नामक केमिकल होता है, जिसके कारण इसका स्वाद तीखा होता है. इसी कारण यह पाचन क्रिया में भी उपयोगी होता है. इससे पाचन क्षमता बढ़ती है. कालीमिर्च में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो कैंसर से लड़ते हैं, ख़ासकर ब्रेस्ट कैंसर से. कालीमिर्च का उपयोग कफ़, खांसी, फोड़े-फुंसी, पेट संबंधी समस्या आदि के इलाज में भी किया जाता है.

Black Pepper Benefits

* ज़ुकाम के साथ हल्का बुख़ार भी हो, तो 5-6 साबूत कालीमिर्च, 7-8 तुलसी के पत्ते, 2-3 लौंग, एक इंच अदरक का टुकड़ा, एक इलायची- इन सभी को पानी में उबाल लें. फिर इसमें दूध डालकर चाय की तरह गरम-गरम दिन में तीन बार पीएं. इससे पसीना आकर शरीर हल्का होता है और बुख़ार उतर जाता है.

* आधा टीस्पून कालीमिर्च पाउडर और आधा टीस्पून शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार चाटें. इससे खांसी ठीक हो जाती है.

* पाचनशक्ति कमज़ोर हो और भोजन डायजेस्ट न होता हो, तो जीरा, सोंठ, सेंधा नमक, पीपरि, कालीमिर्च- सब समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर रख लें. भोजन के बाद एक चम्मच चूर्ण पानी से लें. भोजन शीघ्र पचने लगेगा.

* गैस की शिकायत होने पर एक कप पानी में आधे नींबू का रस, आधा चम्मच कालीमिर्च का चूर्ण व आधा चम्मच काला नमक मिलाकर नियमित रूप से कुछ दिनों तक सेवन करने से गैस की शिकायत दूर हो जाती है.

* कालीमिर्च पाउडर को घी और मिश्री के साथ मिलाकर चाटने से बंद गला खुल जाता है और आवाज़ सुरीली होती है.

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* कालीमिर्च को घी में बारीक़ पीसकर लेप करने से दाद, खाज, फोड़े-फुंसी आदि चर्म रोग दूर हो जाते हैं. छोटी फुंसियां भी दिन में दो बार लेप करने से तुरंत बैठ जाती हैं.

* 8-10 कालीमिर्च पानी में उबालकर इस पानी से गरारे करें. इससे गले का संक्रमण ठीक हो जाता है.

* मस्तिष्क में ताज़गी लाने तथा स्मरणशक्ति बढ़ाने के लिए कालीमिर्च का प्रयोग ब्राह्मी की पत्तियों के साथ मिलाकर किया जाता है. थोड़े-से घी में 3-4 ग्राम ब्राह्मी की पत्ती उबाल लें. इसमें पिसी कालीमिर्च तथा शक्कर मिलाकर चाटें.

* आधा चम्मच घी, आधा चम्मच पिसी हुई कालीमिर्च और आधा चम्मच मिश्री, तीनों को मिलाकर सुबह चाटें. इससे आंखों की कमज़ोरी दूर होती है व रोशनी भी बढ़ती है.

* बदहज़मी की शिकायत होने पर एक नींबू काटकर कालीमिर्च और काला नमक लगाएं. और उसे गरम करके चूसें.

* कालीमिर्च को उबालकर उसके पानी से गरारा करने से मसूड़ों की सूजन कम हो जाती है. मसूड़े स्वस्थ तथा मज़बूत होते हैं.

* कालीमिर्च का चूर्ण तुलसी के रस और शहद में मिलाकर सेवन करने से मलेरिया दूर हो जाता है.

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* अदरक और नींबू के रस में एक टीस्पून कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से पेटदर्द दूर होता है.

* कालीमिर्च का बारीक़ चूर्ण शहद के साथ चाटकर ऊपर से छाछ पीने से दीर्घकालीन पेचिश मिटता है. इस नुस्ख़े का सेवन दिन में तीन बार करें.

* कालीमिर्च का चूर्ण, शक्कर और घी एक साथ मिलाकर सेवन करने से सिर का चकराना दूर होता है.

* कालीमिर्च को दही और पुराने गुड़ में मिलाकर पीने से नकसीर (नाक में से ख़ून गिरना) बंद होता है.

सुपर टिप

पाचन क्रिया ठीक करने के लिए कालीमिर्च व सेंधा नमक पीसकर इसे भुनी हुई अदरक के बारीक़ टुकड़ों के साथ मिलाकर खाएं.

– ऊषा गुप्ता

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प्रतिदिन कितना खाएं नमक? (How Much Salt Should You Have per Day?)

खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही नमक स्वास्थ्य के लिए भी ज़रूरी है, मगर जिस तरह किसी भी चीज़ की अधिकता हानिकारक होती है, उसी तरह ज़रूरत से ज़्यादा नमक का सेवन भी आपकी सेहत बिगाड़ सकता है. अतः स्वस्थ रहने के लिए कैसे संतुलित रखें नमक की मात्रा? आइए, जानते हैं.

Salt
क्यों ज़रूरी है नमक?
नमक शरीर में पानी के स्तर को नियंत्रित करने के अलावा पाचन तंत्र व किडनी को ठीक से काम करने, ब्लड शुगर लेवल को कम करने, तनाव, अवसाद और अन्य भावनात्मक समस्याओं से भी राहत दिलाता है. यह मांसपेशियों को सही तरी़के से काम करने में भी मदद करता है. शरीर में नमक की मात्रा कम होने से कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ जाता है. साथ ही थकान, मांसपेशियों में जकड़न, चक्कर आना, भूख न लगना और लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है.

ज़्यादा मात्रा है हानिकारक
नमक शरीर के लिए ज़रूरी तो है, मगर इसकी अधिकता कई बीमारियों को न्योता देती है. अधिक नमक के सेवन से हाइपर टेंशन, हाई ब्लड प्रेशर का ख़तरा बढ़ जाता है, नतीजतन हार्ट अटैक और स्ट्रोक की संभावना भी बढ़ जाती है. ज़्यादा नमक से ख़ून में आयरन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे एसिडिटी बढ़ जाती है. भूख न लगने पर भी भूख का एहसास बना रहता है, जिससे शरीर में ज़्यादा कैलोरी बनने लगती है और मोटापा बढ़ता है.

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यूं संतुलित करें नमक
1. खाने में तेज़ नमक न खाएं.
2. नमकीन स्नैक्स कम से कम खाएं.
3. दही में नमक मिलाकर न खाएं.
4. तला हुआ भोजन कम खाएं.
5. बिना नमक मिला सलाद खाएं.
6. पापड़, चटनी, चिप्स, सॉल्टेड पीनट (मूंगफली), पॉपकॉर्न, सोया सॉस, कैचअप और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं.
7. हार्ट, किडनी व फेफड़ों के बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को लो सोडियम नमक खाना चाहिए.
8. सोडिमय क्लोराइड की मात्रा संतुलित करने के लिए अपनी डायट में ज़्यादा पोटैशियम वाली चीज़ें जैसे- फल व सब्ज़ियां शामिल करें.

उम्र के मुताबिक़ प्रतिदिन नमक का सेवन
विश्‍व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, हर व्यक्ति को उम्र के अनुसार नमक का सेवन कम करना चाहिए.
0-12 महीने- एक ग्राम से कम
1-3 साल- 2 ग्राम
4-6 साल- 3 ग्राम
7-10 साल- 4 ग्राम
11 साल और उससे ऊपर- 5 ग्राम

ये भी जानें
. हमारे शरीर में कुल नमक का 24 प्रतिशत हड्डियों में होता है.
. नमक में 40 प्रतिशत सोडियम और 60 प्रतिशत क्लोरीन होता है.
. आयोडिन की कमी से होने वाले गॉइटर रोग को दूर करने के लिए 1924 में आयोडिन युक्त नमक का प्रचलन शुरू हुआ.

 

चोट-मोच, सूजन के लिए उपयोगी घरेलू नुस्ख़े (Useful Home Remedies For Injury, Swelling)

राह चलते, घर का कामकाज करते हुए, फिसल जाने पर या गिर जाने पर मोच, चोट या घाव हो जाए या फिर सूजन आ जाए, तो निम्न घरेलू नुस्ख़ों (Home Remedies) द्वारा इन्हें दूर किया जा सकता है.

Home Remedies For Swelling

* मोच के स्थान पर सरसों का तेल लगाकर उस पर हल्दी का पाउडर छिड़कें तथा छोटे तौलिए से ढंक दें. एक कपड़े में नमक की पोटली बांध लें. इसे तवे के ऊपर गर्म करके तौलिए के ऊपर से सहने योग्य सेंक करें.

* त्वचा या घाव से बहते ख़ून पर फिटकरी पीसकर बुरक दीजिए. इससे ख़ून का बहना रुक जाएगा.

* नीम की हरी पत्तियों को पीसकर उसकी लुगदी बनाकर घाव पर रखकर पट्टी बांध दें.

* गूलर के पत्तों को पीसकर घाव पर कुछ दिनों तक लगाने से घाव शीघ्र भर जाता है.

* चोटवाली जगह पर खानेवाला चूना व शहद मिक्स करके लगाने से चोट जल्द ठीक हो जाती है.

* हाथ-पैर में हुए फ्रैक्चर से सूजन व दर्द होने पर प्याज़ को कूटकर उसमें हल्दी व सरसों का तेल मिला लें. इसे हल्का गर्म करके चोटवाले स्थान पर बांधकर रातभर रहने दें.

* चोट के कारण घाव हो गया हो, तो वहां पर घी में कपूर मिलाकर लगाएं.

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* दूब को पीसकर चोट पर लगाने से भी लाभ होता है.

* 4 चम्मच सरसों के तेल में 4-5 लहसुन की कलियां व एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर धीमी आंच पर हल्का-सा गर्म कर लें. इसे चोटवाली जगह पर लगाकर कपड़े से बांध लें.

* घाववाली जगह पर फिटकरी को भूनकर लगाएं. इससे भी घाव जल्दी भरता है.

* हल्दी व सरसों को मिक्स करके हल्का गर्म कर लें. इसे चोट पर लगाकर उसके ऊपर एरंड के पत्ते लगाकर बांध देने से चोट में लाभ होता है.

* यदि पत्थर या लकड़ी की चोट से सूजन हुई हो, तो इमली के पत्तों को उबालकर चोटवाली जगह पर लगाकर बांधें. इसके अलावा चूना व हल्दी को गर्म करके लगाने से भी फ़ायदा होगा.

* जब कभी शरीर के किसी अंग पर चोट लग जाए, तब अदरक को कद्दूकस करके पानी में हल्का-सा उबालकर उस स्थान पर लगाएं.

* चोट के कारण घाव होने पर 20-25 नीम की ताज़ी पत्तियों को तोड़कर पानी के साथ पीस लें और साफ़ कपड़े से छान लें. इसमें चुटकीभर हल्दी डाल दें. फिर इस रस में रुई के फाहे को भिगोकर तवे पर थोड़ा-सा घी डालकर गर्म करें. जब रुई जलने लगे, तो उसे हटाकर थोड़ा-सा ठंडा कर घाव पर लगाकर पट्टी बांध दें.

* सेंधा नमक को पानी में डालकर इसमें कपड़े को भिगोकर चोटवाले स्थान पर सेंक करने से आराम मिलता है.

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* जहां चोट लगी हो, वहां पर अजवायन पीसकर लगाएं और कपड़े से बांध दें.

* यदि कोई अंदरूनी चोट लगी हो, तो एरंड के पत्ते पर सरसों का तेल लगाएं. इसे आग में हल्का सेंककर चोट पर लगाकर बांध दें.

* यदि चोट लगे हुए स्थान से लगातार ख़ून बह रहा हो, तो कपड़े को मिट्टी के तेल में भिगोकर बांधे. ख़ून का बहना रुक जाएगा.

* यदि मोच की वजह से सूजन हुई हो, तो सूजन को दूर करने के लिए गुनगुने पानी में फिटकरी मिलाकर मोचवाली जगह पर सिंकाई करें.

* चोट लग जाने पर गेहूं के आटे में सरसों का तेल मिलाकर चोट पर रखकर कपड़े से बांध दें.

सुपर टिप

तुलसी के पत्तों को पीसकर चोट पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है.

– ऊषा गुप्ता

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बीमारियों से बचने के लिए वास्तु टिप्स (Vastu Tips For Better Health)

बीमारियों (Diseases) से बचने के लिए यदि आप कुछ वास्तु उपाय (Vastu Remedies) करते हैं, तो अच्छी सेहत (Good Health) और निरोगी तन पा सकते हैं. स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए घर का वास्तु सही होना बहुत ज़रूरी है. यदि आपके घर का वास्तु सही नहीं है, तो इसका असर आपकी सेहत पर भी पड़ सकता है. अच्छी सेहत पाने और निरोगी रहने के लिए आप भी ये वास्तु टिप्स (Vastu Tips) ज़रूर ट्राई करें.

Vastu Tips For Better Health

1) अच्छी सेहत पाने और निरोगी रहने के लिए नियमित रूप से योग और ध्यान अवश्य करें. यदि आप घर की उत्तर पूर्व दिशा की तरफ़ मुंह करके ऐसा करते हैं, तो आपको इसके सकारात्मक परिणाम जल्दी ही दिखने लग जाएंगे.

2) शांति से काम करने, पॉज़िटिव एनर्जी बढ़ाने, तनाव से बचने और अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए घर की उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा करें. यदि आप कोई जाप करते हैं, तो वो भी इसी दिशा में बैठकर करें.

3) अच्छी सेहत पाने के लिए घर में हल्के रंगों का प्रयोग करें. घर की दावारों से लेकर फर्नीचर, पर्दे, बेडशीट, कुशन आदि सभी हल्के रंग के ही चुनें. घर में गहरे रंगों के प्रयोग से बचें.

बीमारियों से बचने के लिए करें ये वास्तु उपाय, देखें वीडियो:

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4) पूरे परिवार की अच्छी सेहत के लिए घर के मुखिया या पूरे परिवार की मुस्कुराती हुई फोटो उत्तर पश्‍चिम दिशा में लगाएं.

5) घर में यदि किसी व्यक्ति का इलाज चल रहा है, तो उसे अपनी दवाई उत्तर से उत्तर पूर्व दिशा वाले क्षेत्र में रखनी चाहिए. ऐसे व्यक्ति का बेडरूम भी यदि इसी दिशा में हो तो और अच्छा है.

6) घर के लोगों को स्वास्थ्य समस्याएं न हों इसके लिए घर में कहीं भी बेकार का सामान न पड़ा हुआ हो. बंद पड़ी घड़ियां, बिजली के खराब उपकरण घर में न रखें. घर में स्टोरेज की समय-समय पर सफ़ाई करते रहें.

7) घर में दरवाज़े, खिड़कियां खोलते या बंद करते समय उनसे आवाज़ नहीं आनी चाहिए. इसके लिए समय-समय पर इनकी ऑयलिंग करते रहें. मुख्यद्वार खुलते या बंद करते समय भी आवाज़ नहीं आनी चाहिए. इससे घर के लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

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सेल्फी की लत से कैसे बचें (Side Effects Of Selfie Addiction)

सेल्फी (Selfie) लेना जब तक शौक है तब तक तो ठीक है, लेकिन सेल्फी लेना जब आपकी लत (Addiction) बन जाए, तो ये चिंता का विषय है. क्या आप भी किसी रेस्टॉरेंट में खाना चखने से पहले उस डिश के साथ सेल्फी लेती हैं, कहीं घूमने जाने पर उस जगह की सैर का लुत्फ़ उठाने के बजाय हर व़क्त स़िर्फ सेल्फी लेती रहती हैं, सोशल मीडिया पर एक सेल्फी पोस्ट करने के लिए क्या आप 10-20 सेल्फी लेती हैं और जो बेस्ट है उसे पोस्ट करती हैं, सेल्फी लेने के लिए क्या आप बार-बार मेकअप करती हैं, नए-नए कपड़े ख़रीदती हैं, जबकि आपको इतने कपड़ों की ज़रूरत नहीं है…? सेल्फी का भूत यदि आप पर भी इसी तरह सवार है, तो समझ लीजिए सेल्फी की लत आपको भी बीमार कर सकती है.

Selfie Addiction

सेल्फी एडिक्शन से बचने के लिए क्या करें?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर व़क्त सेल्फी लेना एक तरह का मनोरोग बनता जा रहा है. सेल्फी का एडिक्शन लोगों को सोशल मीडिया पर अपना स्टेटस चमकाने के लिए उकसाता है. ऐसे लोगों को यदि उनकी सेल्फी के लिए लाइक्स या कमेंट्स नहीं मिलते तो, वो स्ट्रेस में आ जाते हैं. ऐसे लोग अपने आसपास के करीबी लोगों पर ध्यान नहीं देते, उनके साथ समय नहीं बिताते, लेकिन सोशल मीडिया के अजनबी लोगों के सामने अपनी इमेज चमकाने के लिए बेस्ट से बेस्ट सेल्फी लेने की कोशिश में लगे रहते हैं. सेल्फी लेते हुए कई लोगों ने अपनी जान तक गवां दी है. अत: सेल्फी के एडिक्शन से बचना बेहद ज़रूरी है. सेल्फी एडिक्शन के साइड इफेक्टस से बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं, बता रही हैं काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ.

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सेल्फी की लत से कैसे बचें, जानने के लिए देखें वीडियो:

ककड़ी के 15 बेमिसाल फ़ायदे (15 Amazing Health Benefits Of Cucumbers You May Not Know)

ककड़ी (Cucumber) स्वाद में मधुर, वातकारक, पित्त का शमन करनेवाली व मूत्रकारक होती है. इसमें विटामिन, मिनरल, पोटैशियम व फॉस्फोरस प्रचुर मात्रा में होता है. यह वज़न कम करने में मदद करती है. ककड़ी में 95 प्रतिशत पानी होने के कारण यह न केवल भूख को मिटाती है, बल्कि मेटाबॉलिज़्म भी बेहतर बनाती है. इसकी तासीर ठंडी होने के कारण गर्मियों के मौसम में शरीर में ठंडक के लिए इसका अधिक सेवन करते हैं. ककड़ी आंत संबंधी सभी तरह की बीमारियों में फ़ायदेमंद है. इससे हड्डियां मज़बूत होती हैं. ककड़ी को सलाद, जूस, सूप, रस व सब्ज़ी के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं. यह गर्मी व लू से भी बचाती है.  

Health Benefits Of Cucumbers

* यूरिन में जलन या फिर यूरिन कम होने पर ककड़ी का रस बेहद उपयोगी है. इसे दिनभर में चार बार तीन-तीन घंटे के अंतराल पर लें.

* रिसर्च के अनुसार, हर रोज़ ककड़ी का सेवन करने से कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है. इसमें मौजूद प्रोटीन ट्यूमर या कैंसर को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ शरीर में कैंसर से लड़ने की ताक़त को भी बढ़ाता है.

* ककड़ी के साथ मूली, गाजर, बीट, प्याज़ व नींबू का रस मिलाकर सलाद बनाकर खाने से अरुचि व ख़ून की कमी दूर होती है.

* 150 मि.ली. की मात्रा में ककड़ी का रस दिनभर में 2-3 बार पीने से गुर्दे की पथरी से छुटकारा मिलता है.

* जिन्हें लो ब्लड प्रेशर की समस्या हो, उन्हें 200 ग्राम खीरे में सेंधा नमक व नींबू का रस डालकर हर रोज़ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए.

* पेटदर्द होने पर गुनगुने पानी में आधा टीस्पून ककड़ी का रस मिलाकर पीएं.

* पेशाब की रुकावट होने पर ककड़ी के रस में मिश्री या शक्कर मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है.

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* बेहोश व्यक्ति की बेहोशी दूर करने के लिए ककड़ी काटकर सुंघाएं.

* गर्मी के कारण सिर चकराने पर ककड़ी खाने से या फिर इसमें टमाटर, मूली व चुकंदर को मिक्स करके जूस बनाकर पीने से आराम मिलता है.

* कब्ज़ या बदहज़मी की समस्या हो, तो भोजन के साथ ककड़ी का सेवन करें.

* ककड़ी के रस का उपयोग गुर्दे व त्वचा की सभी प्रकार की बीमारियां, गुर्दे की पथरी, मूत्रनली में जलन, अस्थमा, डायबिटीज़, उल्टी, मोटापा, दस्त आदि को दूर करने में किया जाता है.

* हड्डियों की मज़बूती के लिए ककड़ी को छिलके सहित खाएं, क्योंकि इसमें कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को स्वस्थ व मज़बूत बनाता है.

* चेहरे पर झाइयां हों, तो एक ककड़ी का रस निकालकर उसमें आधा-आधा टीस्पून गुलाबजल व नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट बाद चेहरा धो लें.

* ककड़ी के बीज को ठंडई में पीसकर लेने से गर्मियों के मौसम में होनेवाली समस्याएं दूर होती हैं.

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* ककड़ी में मौजूद विटामिन सी, बीटा कैरोटीन जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स बॉडी में मौजूद फ्री रैडिकल्स को दूर करते हैं और इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं.

सुपर टिप

* ककड़ी के बीज को पानी में पीसकर चेहरे पर लगाने से त्वचा हेल्दी बनती है.

हेल्थ अलर्ट

ककड़ी खाते समय या फिर खाने के बाद कभी भी पानी न पीएं. भोजन को डायजेस्ट करने के लिए पीएच लेवल की ज़रूरत होती है. ककड़ी खाने के बाद पानी पीने से पीएच लेवल बाधित होता है.

– ऊषा गुप्ता

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