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जानें हींग के 13 आश्‍चर्यजनक फ़ायदे (13 SURPRISING BENEFITS OF HING OR ASAFOETIDA)

हींग (Hing) का उपयोग विशेषतः दाल-साग को बघारने में होता है. परंतु अनेक रोगों के निवारण में भी यह सक्षम है. इसके सेवन से कफ, वायु दोष नहीं होते. उचित मात्रा में हींग (Asafoetida) का सदैव प्रयोग करना चाहिए. यह बहुत लाभप्रद (Beneficial) है. इसके अनेक औषधीय गुण हैं.

ASAFOETIDA

1. 2 चम्मच सरसों के तेल में 1 ग्राम हींग, दो कली लहसुन और ज़रा-सा सेंधा नमक भून लें. जब हींग जल जाए, तो तेल को छानकर शीशी में भरकर रख लें. कान में दर्द या सांय-सांय होने पर दो-दो बूंद तेल रोज रात को कानों में डालें. प्रतिदिन एक सप्ताह तक ऐसा करने से कान दर्द, खुश्की और सांय-सांय की आवाज की शिकायत दूर हो जाती है.

2. हींग को घी में भून लीजिए. फिर काली मिर्च, वायबिडंग, कूठ, सेंधा नमक और भुनी हुई हींग, सभी 5-5 ग्राम लेकर कूट-पीस-छानकर शीशी में भर लें. कुकुर खांसी होने पर आधा या एक ग्राम चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह-शाम चाटें. यह नुस्ख़ा सिर्फ एक हफ्ते में ही चमत्कार दिखा देता है.

3. कौड़ी (गिल्टी का दर्द) हो, तो एक बीज निकाला हुआ मुनक्का लेकर उसमें दो ग्राम भुनी हींग मिलाकर नबा जाइए. ऊपर से दो घूंट गर्म पानी पी लें. असर होते देर नहीं लगेगी. दूसरे दिन इस दवा की एक ख़ुराक और ले लीजिए. रोग हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा.

4. हींग, सोंठ और मुलहठी 2-2 ग्राम लेकर पीस लें. फिर मधु मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें. भोजन के बाद एक गोली सुबह और एक गोली रात को चूसिए. कब्ज़ से राहत मिलेगी.

5. हींग को शराब में खरल करके सुखा लीजिए. इसे दो रत्ती मक्खन के साथ खाने से खांसी, श्‍वास और दूषित कफ विकार में अत्यंत लाभ होता है.

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6. हींग, सेंधा नमक और घी 10-10 ग्राम लेकर 120 मि.ली. गोमूत्र में मिलाइए. उसे इतना उबालिए कि केवल घी बाकी रह जाए. यह घी पीने से मिर्गी दूर होती है.

7. हींग, कालीमिर्च और कपूर- प्रत्येक 10-10 ग्राम और अफीम 4 ग्राम लेकर अदरक के रस में छह घंटे तक घोंटिए. फिर एक-एक रत्ती की गोलियां बनाइए. एक या दो गोली दिन में तीन बार लेने से दस्त से छुटकारा मिलता है.

8. हींग, कपूर और आम की गुठली समभाग में लेकर पुदीने के रस में पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें. चार-चार घंटे पर यह गोली देने से हैजे में फ़ायदा होता है.

9. घी में सेंकी हुई हींग घी के साथ खाने से प्रसूता स्त्री को आने वाला चक्कर (सिर चकराना) और शूल मिटता है.

10. हींग का चार माशा चूर्ण बीस तोले दही में मिलाकर पीने से और दोपहर को केवल दही-भात खाने से या स़िर्फ दही सेवन करने से तीन दिन में ही नारू बाहर निकल आता है.

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11. पेट में गैस हो गई हो, पेट फूल कर ढोल के समान बन गया हो, पेट में दर्द हो रहा हो, तो नाभि के आसपास और पेट पर हींग का लेप करने से थोड़े समय में ही आराम हो जाता है.

12. हींग और अफीम बराबर-बराबर लेकर तिल के तेल या मोम और तेल में अच्छी तरह पीसें. यह मलहम कंठमाल पर लगाने से कंठमाल पककर फूट जाता है और आराम मिलता है.

13. हींग को पानी में उबालकर उस पानी से कुल्ले करने से दांत की पीड़ा दूर होती है. यदि दांत में पोल हो, तो पोल में हींग भरने से दंतकृमि मर जाते हैं और दांत की पीड़ा दूर हो जाती है.

– मूरत गुप्ता

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आंवला के 17 चमत्कारी फ़ायदे (17 Magical Health Benefits Of Amla)

आंवला हमारे देश के श्रेष्ठ फलों में से एक है. यह आयुवर्द्धक, कल्याणकारी, श्रीफल, अमृतफल आदि नामों से भी जाना जाता है. आंलवा कफ़, पित्त, वायु को दूर करता है. इसके नियमित सेवन से आंखों की ज्योति बढ़ती है. यह हृदय रोग में भी लाभकारी है. इससे जिगर को ताक़त मिलती है. हरा आंवला रसायन होता है, सूखा आंवला कफ़ को नष्ट करता है. यह ख़ून की गर्मी को शांत करता है तथा हड्डियों को मज़बूत बनाता है. यह भूख को बढ़ानेवाला, पाचनशक्ति को ठीक करनेवाला तथा त्वचा रोगों को नष्ट करनेवाला भी माना जाता है.

Amla

 

1. एक छोटा चम्मच पिसा हुआ आंवला रात को दूध के साथ सेवन करें. यह आंतों को साफ़ कर कब्ज़ दूर करता है.

2. सूखा आंवला तथा काला नमक समान भाग में लेकर चूर्ण बना लें. अजीर्ण से होनेवाले दस्त में आधा चम्मच चूर्ण दिन में तीन बार पानी के साथ सेवन करें. दस्त बंद हो जाएंगे.

3. बवासीर की शिकायत होने पर आंवले का चूर्ण दही के साथ नियमित लेना चाहिए.

4. तीन भाग ताज़े आंवले के रस में एक भाग शहद मिलाकर सुबह-दोपहर-शाम को लें. पीलिया में आश्चर्यजनक लाभ होगा.

5. नेत्र रोगों में आंवले का चूर्ण गाय के दूध के साथ नियमित सेवन करना चाहिए. इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है.

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6. आंवले को आग पर भूनकर उसमें सेंधा नमक मिलाकर बारीक़ पीस लें. साथ ही इसमें दो-तीन बूंदें सरसों के तेल की मिला दें. इससे नियमित मंजन करने से पायरिया रोग का नाश होता है.

7. आंवले के रस में चंदन अथवा पीपरि का चूर्ण डालकर शहद के साथ चाटने से उल्टी बंद होती है.

8. हड्डी टूटने पर आवश्यक उपचार के बाद नियमित रूप से आंवले का रस किसी फल के रस में मिलाकर लें. विशेष लाभ होगा.

9. आंवला और हल्दी 10-10 ग्राम लेकर काढ़ा बना कर पीने से मूत्र मार्ग और गुदा मार्ग की जलन शांत होती है और पेशाब साफ़ होता है.

10. बीस ग्राम आंवले के रस में एक पका हुआ केला मसलकर, उसमें 5 ग्राम शक्कर मिलाकर खाने से स्त्रियों का सोमरोग (बहुमूत्र रोग) दूर हो जाता है.

11. आंवले का चूर्ण मूली के साथ खाने से मूत्राशय की पथरी में लाभ होता है.

12. एक औंस ताज़े आंवले का रस नित्य प्रातः खाली पेट एक हफ़्ते तक लें. पेट के कीड़े मर जाएंगे.

13. यदि नकसीर किसी प्रकार बंद न हो तो ताज़े आंवले का रस नाक में टपकाएं, नकसीर बंद हो जाएगी. जिन्हें अक्सर नकसीर की शिकायत रहती है, उन्हें नित्य आंवले का सेवन तथा सिर पर आंवले का लेप करना चाहिए.

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14. आंवले और काले तिल का बारीक़ चूर्ण बना लें. यह चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में घी या शहद के साथ नियमित चाटने से वृद्धत्व दूर होता है और शक्ति आती है.

15. बाल गिरते हों या कम उम्र में स़फेद हो गए हों, तो आंवले का चूर्ण पानी में मिलाकर तुलसी की हरी पत्तियों को पीसकर उसमें मिला दें. इसे बालों की जड़ों में मलें. 10 मिनट के बाद बाल धो लें, नियमित कुछ दिन तक ऐसा करने से बालों का गिरना तथा सफ़ेद होना रुक जाता है.

16. ताज़े आंवले के रस में थोड़ा नमक मिलाकर पीने से डायबिटीज़ कुछ महीने में ही ठीक हो जाता है.

17. आंवले के चूर्ण का लेप सिर पर लगाने से सिरदर्द से राहत मिलती है.

– ऊषा गुप्ता

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औषधीय गुणों से भरपूर राई (10 Incredible Mustard Benefits)

राई बहुत ही गुणकारी एवं पाचक है. दादी मां के खज़ाने में दवा के रूप में इसके घरेलू नुस्ख़े उपलब्ध हैं. लाल व सफेद राई कफ व पित्त को हरने वाली, तीक्ष्ण, गर्म और अग्नि को प्रदीप्त करने वाली होती है. यह खुजली, कोढ़ और पेट के कीड़ों को नष्ट करने वाली होती है. काली वाई में भी यही गुण हैं. परंतु यह अत्यंत तीक्ष्ण होती है. इसके प्रसिद्ध घरेलू नुस्ख़े निम्न हैं.

Mustard Benefits

* राई को बारीक पीसकर पेट पर लेप करने से उल्टी तुरंत बंद हो जाती है.

* राई पीसकर सूंघने से जुकाम शीघ्र दूर हो जाता है. जुकाम की वजह से पैर ठंडे हो जाने पर राई का लेप हितकारी है.

* राई के एक-दो माशे चूर्ण में थोड़ी-सी शक्कर मिलाकर खाने और ऊपर से एक कप पानी पीने से पेटदर्द दूर होता है.

* राई चार रत्ती, सेंधा नमक दो रत्ती और शक्कर दो माशा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से खांसी में कफ़ गाढ़ा हो गया हो तो पतला होकर सरलता से निकल जाता है.

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* यदि किसी ने जाने-अनजाने विष खा लिया हो, तो आधा तोला पिसी हुईराई और आधा तोला नमक गर्म पानी में मिलाकर पीने से उल्टी होती है, जिससे विष बाहर निकल जाता है.

* राई के तेल में नमक मिलाकर दांत साफ करें. इससे दांत एवं मसूड़े स्वस्थ एवं मजबूत होते हैं.

* वात-व्याधि से जकड़ गए अंगों पर राई की पुल्टिस बांधने अथवा राई का प्लास्टर करने से लाभ होता है.

* गुड़, गुग्गुल और राई को पीसकर पानी में उबालकर लेप करने से कंखवारी मिटती है. कहावत भी है गुड़, गुग्गुल और पिसी राई, क्या करती उसे कंखवारी.

* राई के आटे को आठ गुने गाय के पुराने घी में मिलाकर उसका लेप करने से थोड़े दिनों में सफेद कोढ़ मिट जाता है. इस लेप से खाज-खुजली और दाद में भी फ़ायदा होता है.

* मिर्गी-मूर्च्छा में राई के आटे का नस्य दिया जाता है.

– ओमप्रकाश गुप्ता

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अमरूद खाने के 7 चमत्कारी फ़ायदे (7 Health Benefits of Guava)

Guava

 

अमरूद बारहमासी फल है, जो अनेक पोषक गुणों से युक्त होने के कारण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है. आंवला, नींबू और चेरी के बाद अमरूद ही ऐसा फल है, जिसमें विटामिन ‘सी’ की सर्वाधिक मात्रा पायी जाती है

1. कब्ज़ होने पर खाली पेट निरंतर कुछ दिनों तक पके अमरूद का सेवन करने से कब्ज़ हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगी.

2. भोजन के साथ अमरूद की सब्जी खाने से गरिष्ठ से गरिष्ठ भोजन भी पच जाता है.

3. अमरूद की डाली से दातून करने से दांत साफ़ होते हैं और सांस की दुर्गंध का नाश होता है.

4. अमरूद के बीजों को कुनकुने पानी के साथ लेने से जुकाम भाग जाता है. वैसे जुकाम और सर्दी से पीड़ित व्यक्ति को अमरूद का सेवन नहीं करना चाहिए.

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5. अमरूद की पत्तियों को उबालकर कुल्ला करने से गला-जीभ साफ़ होता है और मुंह के छाले ठीक होते हैं.

6. अमरूद को काट कर छिलके सहित पीसकर उसमें दूध मिलाकर छान लें. उसमें मिश्री मिलाकर सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है.

7. अमरूद के बीज, पत्तियां और फल का सेवन करने से भांग, गांजा, शराब आदि का नशा उतरता ही नहीं, बल्कि इसका नियमित उपयोग करने से उनकी आदत भी छूट जाती है. सिगरेट पीने और पान खाने की आदत भी अमरूद के पत्तों को चबाने से छूट जाती है.

– रेषा गुप्ता

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सिरके के अनगिनत फ़ायदे (Top 25 Vinegar Benefits)

Vinegar Benefits

गन्ने के रस के अलावा सेब, जामुन आदि से भी सिरका बनाया जाता है, जो सेहत के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद होता है. सिरका यानी विनेगर रुचिकर, पेट रोगों में लाभप्रद, हृदय के लिए हितकारी व आहार को पचानेवाला है. सिरका बदहज़मी व गैस की समस्या को भी दूर करता है.

* गले की सूजन, जलन आदि दूर करने के लिए पानी में सिरका मिलाकर कुल्ला करें.

* पेटदर्द हो रहा हो, तो एक ग्लास पानी में आधा चम्मच सिरका मिलाकर पीने से तुरंत आराम मिलता है.

* यदि दस्त व कब्ज़ हो, तो सलाद या पानी में थोड़ा-सा सिरका डालकर इस्तेमाल करना फ़ायदेमंद होता है.

* किडनी की पथरी में महीनेभर सेब का सिरका सेवन करने से लाभ होता है.

* डायबिटीज़ के मरीज़ सेब के सिरके का सेवन करें, तो बीमारी कंट्रोल में रहती है और बैड कोलेस्ट्रॉल भी कम होता है.

* सिरका व शहद को पानी में मिलाकर पीने से आंखों की चमक व रोशनी तेज़ होती है.

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* जहरीले कीड़ों के काटने पर हुए घाव में सिरका भरने से विष का प्रभाव कम हो जाता है.

* सिरका तथा प्याज़ मिलाकर खाने से लू नहीं लगती.

* यदि आपको लगातार हिचकियां आ रही हैं, तो एक टीस्पून सिरका पी लें.

* गले की ख़राश को दूर करने के लिए एक कप गर्म पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर कुल्ला करें.

* बहुत अधिक शारीरिक मेहनत करने के कारण मांसपेशियों में दर्द की शिकायत हो जाती है. ऐसे में सिरके से मालिश करना लाभप्रद होता है.

* वज़न घटाने के लिए भी हर रोज़ एक टेबलस्पून सिरके का सेवन कर सकते हैं.

* सेब के सिरके से दांतों की मालिश करने या फिर एक कप पानी में एक टीस्पून सिरका मिलाकर गरारा करने से दांतों का पीलापन दूर होता है.

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* भोजन करते समय दाल-सब्ज़ी या सलाद आदि के साथ ज़रा-सा सिरका मिलाकर लेने से भोजन का स्वाद बढ़ जाता है और भोजन शीघ्र पचता है.

* पानी में सिरका मिलाकर सिर धोने से बाल झड़ने रुक जाते हैं.

* बेसन, हल्दी व मलाई में सिरका मिलाकर लेप बनाएं. इस लेप को चेहरे पर लगाने से दाग़-धब्बे दूर होकर रंग निखरता है.

* पनीर को अधिक दिनों तक ताज़ा रखने के लिए उसे सिरके से भीगे कपड़े में लपेटकर रखें.

* सिरका मिले पानी में कपड़ा धोने से कपड़ों का रंग नहीं निकलता.

* किसी भी नमकीन अचार में सिरका डाल देने से वह ख़राब नहीं होता.

* खिड़की व दरवाज़े के शीशे सिरके मिले पानी से साफ़ करने पर चमक उठते हैं.

* दूध में सिरका डालकर पनीर बनाने से पनीर मुलायम बनता है.

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* लालटेन में नई बत्ती डालने से पहले उसे सिरके में डालकर सुखा लें. इससे रोशनी अधिक होगी और धुआं भी नहीं उठेगा.

* यदि साइनस की समस्या है, तो उबलते पानी में 1/4 एप्पल विनेगर मिलाएं. थोड़ी देर बाद उसमें 1-1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर व शहद डालें. फिर 1 नींबू का रस मिलाकर अच्छी तरह मिक्स कर लें. इस मिश्रण को सुबह खाली पेट और शाम को सोने से पहले लें.

समस्या अनेक इलाज एक

यदि आप सर्दी-ज़ुकाम, मोटापा, सिरदर्द, जोड़ों के दर्द, हाई ब्लड प्रेशर, बदहज़मी, अल्सर, कोलेस्ट्रॉल आदि समस्याओं से परेशान हैं, तो सिरके को निम्न तरी़के से इस्तेमाल करें.

100 ग्राम सेब के सिरके में 100 ग्राम शहद और छह लहसुन की कलियों को छीलकर मिक्सर में पीसकर पेस्ट बना लें. इसे कांच के बॉटल में रखकर पांच दिन के लिए फ्रिज में रख दें. बाद में इस मिश्रण को अंगूर या कोई भी फ्रूट जूस के साथ या फिर पानी में 2 चम्मच मिलाकर पीएं.

सुपर टिप

एसिडिटी की समस्या से निजात पाने के लिए एक ग्लास पानी में 1 चम्मच सेब का सिरका और 1 चम्मच शहद मिलाकर पीएं.

– संगीता श्यामा गुप्ता

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बच्चों के दस्त (Diarrhoea) रोकने के 13 प्रभावकारी घरेलू नुस्ख़े (13 Home Remedies To Cure Diarrhoea In Babies)

Diarrhoea In Babies

 

दूध व भोजन की अधिकता, संक्रमण आदि कारणों से बच्चों को दस्त होने लगता है. दूध पीते बच्चों को बार-बार दस्त होने से उनके रक्त व शरीर से पानी व अन्य आवश्यक खनिज निकल जाते हैं. दस्तों की कमी या अधिकता के अनुसार अनेक लक्षण पैदा हो जाते हैं. इससे ज्वर, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, उल्टी, चेहरा व शरीर पीला पड़ जाना, बेहोशी, आंखें अंदर धंस जाना आदि विकार उत्पन्न हो जाते हैं.

जिन बच्चों को गाय व डिब्बों का दूध पिलाया जाता है, उन्हें कीटाणुओं के संक्रमण से यह रोग अधिक होता है. इस रोग में पहले पतले हरे रंग के बदबूदार दस्त होते हैं. कभी दस्तों में आंव और रक्त भी आ जाता है.

* मीठे सेब का रस कपड़े से छानकर बार-बार पिलाने से दस्त रुक जाते हैं और रक्त व शरीर में तरल तत्वों की कमी भी दूर हो जाती है.

* जौ का पानी और अंडे की स़फेदी पानी में घोलकर बार-बार थोड़ा-थोड़ा पिलाते रहने से लाभ होता है.

* फलों का रस, सब्जियों के पके रस और पानी बार-बार पिलाते रहने से शरीर में तरल तत्व पहुंच जाता है.

* छोटे बच्चे को लगातार पतली दस्त हो रही हो, तो 6 मि.ग्रा. सौंफ को 6 मि.ली. पानी में उबालें. जब आधा पानी रह जाए, तो 1 चम्मच       की मात्रा में दिन में तीन बार पिलाएं. शीघ्र लाभ होगा.

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* शिशुओं को दस्त होने पर जायफल, लौंग, सफेद जीरा व सुहागा खील- इन चारों को समान मात्रा में लेकर कपड़छान चूर्ण बना लें. 50 से     100 मि.ग्रा. तक की मात्रा आवश्यकतानुसार शहद के साथ दिन में 1-1 बार चटाएं.

* 60 मि.ग्रा. से 125 की मात्रा में कपूर रस शहद के साथ सुबह-शाम देने से   विशेष लाभ होता है.

* दस्त होते हों, तो भी शिशु का दूध बंद नहीं करना चाहिए, बल्कि साथ-साथ नारियल का पानी, अनार का रस, सेब का रस एवं नींबू पानी     दें.

* बगैर दूध की चाय या कॉफी बनाकर उसमें नींबू का रस डालकर पिलाने से लाभ होता है.

* जायफल घिसकर शहद के साथ बच्चे को सुबह-शाम चटाएं.

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* तेजपत्ते का चूर्ण एक भाग, बेलफल की गिरी 2 भाग गुड़ के साथ दें.

* सौंफ और सोंठ का काढ़ा बनाकर शिशु को 1-2 चम्मच की मात्रा में पिलाएं. इससे दस्त बंद होगा.

* सोंठ का चूर्ण 125 मि.ग्रा. की मात्रा में गुड़ में मिलाकर देने से बच्चे को दस्त से राहत मिलती है.

* यदि शिशु बार-बार हरे रंग की दस्त करता है, तो घबराइए नहीं. आप उंगली पर एरंड का तेल लगाकर चटाएं. दो-तीन दिन में ही आराम     हो जाएगा.

–  रेखा कुंदर

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हिस्टीरिया का घरेलू इलाज (Home Remedies for Hysteria)

Home Remedies for Hysteria

हिस्टीरिया स्नायु संस्थान या नर्वस सिस्टम की विकृति से होनेवाले रोगों में एक प्रमुख रोग है. यह बीमारी 15 से 25 वर्ष की लड़कियों को अधिक होता है. इस रोग से पीड़ित महिलाओं का मस्तिष्क, स्मरणशक्ति और स्नायुमंडल कमज़ोर हो जाता है. अत्यधिक चिंता, भय, शोक, पारिवारिक कष्ट, मानसिक आघात, धन हानि, गर्भाशय विकार आदि कारणों से ये बीमारी हो सकती है. इसके अलावा लाड़-प्यार में पली युवतियों की इच्छा की पूर्ति न होना, विवाह में देरी, पति की पौरुषहीनता, तलाक़, किसी क़रीबी के मृत्यु का गंभीर सदमा जैसे कारणों से महिलाएं हिस्टीरिया की शिकार हो जाती हैं.

लक्षण
इससे पीड़ित महिला बिना कारण या बहुत मामूली कारणों से हंसने या रोने लगती है. आवाज़ या प्रकाश उसे अप्रिय लगता है. चक्कर आना, सांस फूलना, चिंता, थकान, सिरदर्द, कमज़ोरी, अपच, शरीर के विभिन्न अंगों में पीड़ा, पीरियड्स में गड़बड़ी, सेक्स व्यवहार में विषमताएं आदि अनेक लक्षण हिस्टीरिया में प्रकट हो सकते हैं.

* सबसे पहले पीड़ित को होश में लाएं. होश में आने पर उसे सांत्वना दें. शरबत, फलों का रस, मीठा दूध पीने को दें.
* केले के तने का ताजा रस हिस्टीरिया के रोगिणी को ठीक करने का अचूक नुस्ख़ा है. प्रतिदिन दिन में तीन बार एक-एक ग्लास केले के तने के ताज़े रस के सेवन से लाभ होता है. 3-4 माह इस नुस्ख़े का सेवन करने से अच्छा प्रभाव देखा जा सकता है.

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* हिस्टीरिया रोग में धनिया अत्यंत लाभदायक है. 25 ग्राम धनिया और 10 ग्राम सर्पगंधा मिलाकर बारीक़ चूर्ण बनाएं. 1 से 2 ग्राम की मात्रा में रात में सोते समय पानी के साथ सेवन करें. इस नुस्ख़े को निरंतर कुछ दिनों तक सेवन करने से अवश्य लाभ होता है.
* तीन दिन तक तीनों समय (सुबह-दोपहर-शाम) गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लें. इसके बाद 100-100 ग्राम पांचों नमक लेकर उसे पीसकर एक साथ मिलाकर किसी साफ़ बर्तन में रख लें. ग्वारपाठा धोकर उसका एक लंबा टुकड़ा लेकर छील लें. फिर उसके छोटे-छोटे टुकड़े करके उस पर मिश्रित नमक डालकर एक महीने तक सेवन करें. इससे हिस्टीरिया रोग से अवश्य राहत मिलेगी.
* चुकंदर के एक कप ताज़ा जूस में एक चम्मच आंवले का जूस मिलाकर प्रतिदिन सुबह पीना चाहिए. एक महीने तक इसे नियमित पीने से अवश्य ही हिस्टीरिया का शमन होता है.

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* जो रोगी बालवच के चूर्ण को शहद में मिलाकर हर रोज़ 40 दिन तक खाता है और भोजन में केवल दूध-चावल का सेवन करता है, उसका भयानक और पुराना हिस्टीरिया रोग भी शांत हो जाता है.
* हिस्टीरिया का दौरा पड़ने पर हींग सुंघाने से राहत मिलती है. आधा ग्राम से एक ग्राम तक हींग नियमित खाने से लाभ होता है. साथ में 120 मि.ली. पानी में 2 ग्राम हींग मिलाकर एनिमा भी लेना चाहिए.

– रेषा गुप्ता

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औषधीय गुणों से भरपूर केला (Health Benefits of Banana)

Health Benefits of Banana

Health Benefits of Banana

केले में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम व विटामिन बी 6 है. केला खाने से कब्ज़ व गैस की समस्या दूर होती है. हर रोज़ केले व दूध का सेवन करने से तंदुरुस्ती बढ़ने के साथ-साथ शरीर में ख़ून की मात्रा भी बढ़ती है. केले में पाए जानेवाले फाइबर से पाचन क्रिया अच्छी रहती है. यह खून को पतला कर धमनियों में ख़ून के संचालन को भी ठीक करता है. दरअसल, इसमें पाया जानेवाला मैग्नीशियम शरीर में जाकर रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है. कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होने से धमनियों में रक्त का संचालन सही रहता है.

* पीलिया यानी जॉन्डिस के मरीज़ को कच्चा या अधपका केला खिलाने से फ़ायदा होता है.

* पेचिश होने पर पके केले को मसलकर नमक और पिसा जीरा मिलाकर मरीज़ को खिलाएं.

* जीभ पर पड़े छालों को दूर करने के लिए दो-तीन दिन तक लगातार सुबह दही के साथ केला खाएं और इसके बाद ही कुछ खाएं. छाले ठीक हो जाएंगे.

* सूखी खांसी होने पर दो केले को मिक्सर में पीसकर उसमें दूध व स़फेद इलायची मिलाकर पीने से राहत मिलती है.

* यदि प्रदर रोग की समस्या हो, तो केला व दूध की खीर बनाकर हर रोज़ सुबह-शाम खाएं या फिर भोजन करने के बाद दो केले नियमित रूप से लें.

* दस्त यानी लूज़ मोशन होने पर पके हुए केले को मक्खन की तरह फेंटकर उसमें थोड़ी-सी कुछ दाने मिश्री मिलाकर दिनभर में दो-तीन बार खाने से राहत मिलती है.

* यदि चोट लग जाए और ख़ून बंद न हो, तो वहां पर केले के डंठल का रस लगाएं या फिर केले का छिलका लगाने से भी लाभ होता है.

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* बेचैनी व घबराहट होने पर पके हुए केले को फेंटकर उसमें एक टीस्पून मिश्री व एक छोटी इलायची पीसकर मिलाएं और खाएं.

* दाद होने पर केले के गूदे को नींबू के रस में पीसकर पेस्ट बनाकर दाद पर लगाएं.

* अल्सर की शिकायत होने पर कच्चा केला खाने से लाभ होता है.

* यदि आपको बार-बार यूरिन होने की समस्या है, तो केले के रस में घी मिलाकर पीएं.

* जलने पर केले को मसलकर जले हुए स्थान पर लगाएं.

* छोटे बच्चे को दस्त हो, तो पके केले को इतना घोंटें कि वह मक्खन की तरह पतला हो जाए और इसे बच्चे को चटा दें. दस्त बंद हो जाएगा.

* पके केले को घी के साथ खाने से पित्त रोग तुरंत शांत होता है.

* एक पका हुआ केला मीठे दूध के साथ लगातार आठ दिन तक सेवन करने से नकसीर की समस्या दूर हो जाती है.

* दो केले को एक टीस्पून शहद में मिलाकर खाने से सीने के दर्द में आराम मिलता है.

* बाल गिरने की समस्या होने पर केले के गूदे में नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं.

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सुपर टिप

ब्लड प्रेशर की समस्या होने पर नियमित रूप से केला खाएं. यह रक्त की अशुद्धियों को दूर करने के साथ-साथ शरीर में रक्त के बहाव को भी सही करता है.

रिसर्च

रिसर्च के अनुसार, अवसाद यानी डिप्रेशन के मरीज़ों के लिए केला फ़ायदेमंद है. दरअसल, केले में ऐसे प्रोटीन पाए जाते हैं, जो शरीर को रिलैक्स करते हैं. इसी कारण डिप्रेशन के मरीज़ जब भी केला खाते हैं, तो उन्हें आराम मिलता है.

हेल्थ अलर्ट

केला फ़ायदेमंद तो है, पर इसमें कुछ परहेज़ भी रखें.

* रात में केला न खाएं.

* केला खाने के बाद पानी न पीएं.

* पाचनशक्ति कमज़ोर होने पर इसे न खाएं.

* गठिया और डायबिटीज़ के मरीज़ भी इसे न खाएं.

* केला खाली पेट न खाकर भोजन के बाद ही खाएं, तो अधिक लाभप्रद होगा, क्योंकि यह कब्ज़नाशक और पाचक दोनों है.

– नरेंद्र भुल्लर

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…ताकि सलामत रहें बच्चों की आंखें (Take Care Of Your Kids Eyes)

eye Care, Kids Eyes care, eyes health

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आंखें इंसान के शरीर का वो ख़ास अंग हैं- जिससे वो इस ख़ूबसूरत दुनिया को देखता है, लेकिन कई बार लोग आंखों में दर्द, जलन, खुजली और पानी आने की समस्या को गंभीरता से लेने की बजाय नज़रअंदाज़ कर देते हैं. ख़ासकर छोटे बच्चों की आंखों में होनेवाली इन समस्याओं को आम समझने की ग़लती उन्हें आंखों के कैंसर का मरीज़ बना सकती है. कई बार बच्चों में होनेवाले आंखों के कैंसर का पता एडवांस स्टेज में जाकर चलता है और ऐसी स्थिति में कीमो थेरेपी देना लगभग नामुमक़िन हो जाता है, जिसके चलते कई बच्चे हमेशा-हमेशा के लिए अपने आंखों को रोशनी गंवा बैठते हैं.

क्या है रेटिनोब्लास्टोमा?

5 साल से कम उम्र के बच्चों के रेटिना में होनेवाले कैंसर को रेटिनोब्लास्टोमा कहते हैं. ये रोग आंख में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि के कारण होता है और क़रीब 20 हज़ार बच्चों में से 1 बच्चा ही इसका शिकार होता है. हालांकि अधिकांश लोग यह भी नहीं जानते कि बच्चों की आंखों में भी कैंसर होता है, लेकिन समय रहते अगर इसके लक्षणों को पहचानकर इलाज कराया जाए, तो आंखों के बचने की संभावना 90 फ़ीसदी तक होती है.

कैसे पता लगाएं?

आपके बच्चे की आंखों में कहीं यह समस्या तो नहीं है, इसका पता आप ख़ुद भी बेहद आसानी से लगा सकते हैं. इसके लिए बच्चे के दोनों आंखों की मध्यम रोशनी के फ्लैश से फोटो खींचें. अगर इस तस्वीर में एक आंख लाल और दूसरी स़फेद नज़र आए, तो समझ लीजिए कि बच्चे को इस बीमारी का ख़तरा है. बच्चे की आंखों की सलामती के लिए आपको फ़ौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

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लक्षण

अगर आपके बच्चे की आंखों में नीचे दिए गए लक्षण दिखाई देने लगें, तो संभल जाएं और वक़्त रहते इलाज करवाएं.

* रोशनी पड़ने पर रेटिना में स़फेद धब्बा दिखाई देना.

* आंखों का लाल होना और उसमें दर्द महसूस होना.

* दिखाई देने में दिक्कत और आंखों का बाहर उभर आना.

* दोनों आंखों की पुतलियों का रंग अलग हो जाना.

* आंखों का भेंगापन भी इस रोग का एक लक्षण है.

कारण

विशेषज्ञों की मानें तो 40 फ़ीसदी मामलों में यह बीमारी जेनेटिक कारणों से होती है. अगर किसी के पहले बच्चे को बीमारी हो, तो दूसरे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसके आंखों की जांच करानी चाहिए. टेस्ट हर तीन महीने में होना चाहिए. व़क्त पर लेज़र ट्रीटमेंट और कीमो थेरेपी से आंखों को बचाया जा सकता है, लेकिन कई बार ट्यूमर फैलने की वजह से आंख निकालने तक की नौबत आ जाती है.

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अलर्ट

* 5 साल से कम उम्र के बच्चों में रेटिना का कैंसर सामान्य.

* 20 हज़ार बच्चे में से एक में दिखता है यह रोग.

* इलाज में देरी छीन सकता है आंखों की रोशनी.

– डॉ. जे. एल. गुप्ता

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तिल के 11 अमेज़िंग हेल्थ बेनिफिट्स (11 Amazing Health Benefits Of Sesame Seeds)

Health Benefits Of Sesame Seeds

Health Benefits Of Sesame Seeds

छोटी होने के बावजूद तिल गुणों से भरपूर होती है. तिल का उपयोग मकर संक्रांति के अवसर पर तिल के लड्डू, बर्फी, गजक आदि के रूप में करने की हमारे यहां परंपरा है. आइए, तिल के औषधीय गुणों (Health Benefits Of Sesame Seeds) का लाभ भी जानें.

* दांतों की मज़बूती के लिए एक चम्मच तिल रात को चबाकर खाइए.

* तिलों को पानी में पीसकर घावों पर बांधने से घाव जल्दी भर जाते हैं.

* 2 चम्मच काले तिलों को चबाकर ऊपर से ठंडा पानी पीने से बवासीर में लाभ होता है.

* ज़्यादा मूत्र आने की दशा में तिल भूनकर गुड़ के साथ लड्डू बनाएं. इसे सुबह-शाम खाएं. बहुमूत्र की शिकायत दूर हो जाएगी.

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* तिल को पीसकर गोमूत्र में पकाएं. इसे पुल्टिस की तरह फोड़े पर बांधने से फोड़ा पककर फूट जाता है.

* पेटदर्द होने पर एक चम्मच साफ़ तिल चबाकर ऊपर से गर्म पानी पीने से दर्द मिटता है.

* 4 चम्मच काले तिलों को पानी में भिगो दें. दूसरे दिन पीसकर छान लें. इस जल को प्रसवासन्न महिला को पिला देने से शीघ्र प्रसव हो जाता है.

* काले तिल को पीसकर मिश्री मिलाकर बकरी के दूध के साथ पीने से ख़ूनी दस्त में लाभ होगा.

* जाड़े के दिनों में तिल का शुद्ध तेल शरीर पर मलने से शरीर में गर्मी आती है. रक्त की गति तीव्र होती है. स्वास्थ्य बढ़ता है तथा त्वचा का रूखापन समाप्त हो जाता है.

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* मूली अधिक खा लेने पर होनेवाले अजीर्ण में थोड़ी-सी तिल चबा लेने से तुरंत आराम मिलता है.

* तिल को मक्खन के साथ पीसकर मुंह पर लेप करने से रंग गोरा होता है और कील-मुंहासे आदि ठीक हो जाते हैं.

* तिल के पौधों पर पड़ी ओस को नेत्रों में डालने से खुजली, गर्मी, लालिमा आदि विकार समाप्त हो जाते हैं.

– जहांआरा ख़ान

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ब्रेस्ट कैंसर से छुटकारा पाने के 5 घरेलू उपाय (5 Best Home Remedies That Prevent Breast Cancer)

Prevent Breast Cancer

ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) की चपेट में आजकल कम उम्र की महिलाएं भी आ रही हैं. ब्रेस्ट कैंसर की सबसे बड़ी वजह है बदलती लाइफ स्टाइल. घरेलू उपचार से ब्रेस्ट कैंसर जैसी ख़तरनाक बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है. ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) से बचाव के लिए आप भी ये घरेलू नुस्ख़े जरूर आज़माएं.

Prevent Breast Cancer

स्तन कैंसर (Breast Cancer) के कारण
बासी खाना, ज़्यादा मांस, मछली, अंडे खाने और बीड़ी-सिगरेट पीने के कारण यह रोग पैदा होता है. शरीर के विपरीत कोशिश करने, टेढ़ी शैया पर सोने से भी स्तन कैंसर हो जाता है. दुग्ध वाहिनी में अवरोध हो जाने व चोट लगने से भी इस रोग के होने की संभावना रहती है.

स्तन कैंसर (Breast Cancer) के लक्षण
स्तन कैंसर में कभी-कभी असहनीय दर्द होता है और कभी-कभी तो दर्द बिल्कुल नहीं होता. कभी-कभी स्पर्श करने से ही दर्द होता है. स्तन फूला हुआ (बड़ी गांठ के समान फूला हुआ), गरम गोल अथवा चपटा, कड़ा और दर्दयुक्त होता है. इससे तेज़ बेचैनी और सुस्ती रहती है. स्तन कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में निम्न नुस्ख़े लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं.

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स्तन कैंसर (Breast Cancer) की समस्या से छुटकारा पाने के 5 आसान घरेलू उपाय जानने के लिए देखें वीडियो:

ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) से छुटकारा पाने के घरेलू नुस्ख़े:
* हर रोज़ अंगूर या अनार का जूस पीने से कैंसर से बचाव होता है.
* प्रतिदिन लहसुन का सेवन करने से स्तन कैंसर की संभावनाओं को रोका जा सकता है.
* नमक, सोंठ, शमी, मूली, सरसों और सहिजन के बीज सममात्रा में लेकर खट्टे छाछ में पीसकर स्तनों पर लेप करें. एक घंटे के बाद नमक की पोटली से 10-15 मिनट तक सेंक करें.
* पोई के पत्तों को पीसकर पिण्ड बनाकर लेप करने तथा पत्तों द्वारा अच्छी तरह ढंककर पट्टी बांधने से शुरुआती अवस्था का स्तन कैंसर अच्छा हो जाता है.
* एक ग्लास पानी में हर्बल ग्रीन टी को आधा होने तक उबालें और फिर पीएं.

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ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) होने पर इन चीज़ों से परहेज़ करें:
* जिस स्त्री को स्तन कैंसर हुआ हो, उसे ज़्यादा हाथ हिलाने-डुलाने वाले काम नहीं करने चाहिए.
* आहार में दूध, पनीर, फल एवं इनके रस, दूध, मूंगफली, गेहूं का दलिया, हरी सब्ज़ी आदि का सेवन करना चाहिए.
* रोगी को चाय, कॉफी, सिगरेट, शराब का सेवन बंद कर देना चाहिए.
* उड़द, सेम, मसूर, अंडे, मांस आदि के सेवन से बचना चाहिए.

 

इन घरेलू नुस्ख़ों से पाएं घमौरियों से छुटकारा (Get Rid Of The Heat Rash From These Home Remedies)

Heat Rash, Home Remedies

Heat Rash, Home Remedies

गर्मी के दिनों में शरीर पर छोटे-छोटे लाल-लाल दाने निकल आते हैं, जिसे घमौरी कहते हैं. यह घामपित्ती, गर्मी के दाने आदि नामों से भी जाना जाता है. मस्तक, छाती, पीठ, गर्दन आदि स्थानों पर यह अधिक होती है. ठंडी जगह पर रहने या ठंडी हवा लगने से इसकी उग्रता कम हो जाती है.

कारण
घमौरियां मुख्य रूप से त्वचा की स्वेद ग्रंथियों (पसीनेवाली ग्रंथियां) के विकार के कारण उत्पन्न होती हैं. इसलिए जिन अंगों में पसीना अधिक होता है, वहां पर ये अधिक निकलती हैं. चाय, कॉफी तथा उत्तेजक पदार्थों के अधिक सेवन से भी घमौरियां हो जाती हैं.

लक्षण
जब घमौरियां अपने उग्र रूप में होती हैं, तो उनमें जलन व खुजलाहट बढ़ जाती है. ये प्रायः कमज़ोर बच्चों, गर्भवती स्त्रियों तथा रोगग्रसित व्यक्तियों में अधिक होती हैं, जिससे व्यक्ति बेचैन हो उठता है. रोगी शरीर को जितना अधिक खुजलाता है, चुनचुनाहट एवं जलन उतनी ही बढ़ती जाती है. कभी-कभी खुजलाते-खुजलाते शरीर पर घाव भी हो जाता है.

* जामुन की पत्तियों को पीसकर उसमें खाने का सोडा मिलाकर घमौरियों पर लेप कीजिए.

* सुबह-दोपहर और शाम नींबू पानी का निरंतर सेवन करने से घमौरी निकलती ही नहीं. यदि निकल भी आयी हो, तो इसके सेवन से एक पखवाड़े के भीतर-भीतर शांत हो जाएगी.
* सुबह और दोपहर को एक-एक गन्ना चूसने से भी शरीर की गर्मी शांत होती है और घमौरी मिट जाती है.
* नीम के तेल में कपूर का चूर्ण मिलाकर उस तेल से जहां घमौरियां हुई हैं, वहां मालिश करें. आधे घंटे बाद स्नान करें. इससे आराम मिलता है.
* घमौरी से बचने के लिए नीम के साबुन से स्नान करें.

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* मिट्ठी के कुल्हड़ में आधा लीटर स्वच्छ पीने का पानी भर लें. उस पानी में आंवलों को कपड़े से पोंछकर साफ़ कर डाल दें. आंवले दस-पंद्रह से लेकर बीस तक इस्तेमाल कर सकते हैं. कुल्हड़ पर ढक्कन रख कर रातभर आंवलों को उसमें भिगोये रखें. सुबह हाथ धोकर उन आंवलों को पानी में मसल डालें. फिर उस पानी को छान लें और इच्छानुसार नमक या चीनी मिलाकर पीएं. जितनी प्यास हो, उतना पीयें. इस प्रयोग से पेट साफ़ रहेगा, भूख भी लगेगी और शरीर की गर्मी शांत होगी. घमौरियां एक सप्ताह के भीतर ही साफ़ हो जाएंगी.
* खरबूज का गूदा निकालकर जहां घमौरियां हुई हैं, उस जगह पर लगाने से घमौरियों से राहत मिलती है.

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* कोकम की चार फांके दो गिलास पानी में रातभर भिगोकर सुबह वह पानी तब तक उबालें, जब तक कि वह जलकर एक ग्लास न बन जाए. ठंडा होने पर उसमें 3 चम्मच शक्कर मिलाकर वह पानी पीने से शरीर की गर्मी दूर होती है और घमौरियां मिट जाती हैं.

पथ्यः गर्म चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए तथा ठंडे वातावरण में रहना चाहिए. मोटे कपड़ों के बजाय हवादार झीने कपड़े पहनने चाहिए. नीम के साबुन से सुबह-शाम स्नान करना चाहिए.

परमिंदर निज्जर

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