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Personal Problems: क्या कंसीव करते ही गायनाकोलॉजिस्ट को मिलना चाहिए? (What’s The Right Time To See A Gynecologist After Conception?)

मैं 22 वर्षीया हूं और मेरी शादी को अभी एक साल ही हुआ है. हमने कभी कोई फैमिली प्लानिंग मेथड का इस्तेमाल नहीं किया. इस महीने दो हफ़्ते तक मेरे पीरियड्स नहीं आए, तो मैंने घर पर ही यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट (Pregnancy Test) किया, जो पॉज़िटिव आया. मुझे यह जानना है कि क्या मुझे तुरंत गायनाकोलॉजिस्ट (Gynecologist) को मिलना होगा?
– सत्या शर्मा, वाराणसी.

पहली बार गायनाकोलॉजिस्ट से मिलने के लिए आप 8वें से 10वें हफ़्ते के बीच कभी भी जा सकती हैं. याद रखें, प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने महिलाओं के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए अपना ख़ास ख़्याल रखें, लेकिन अगर आपको इस बीच कभी असामान्य रक्तस्राव हो या पेट के निचले हिस्से में मरोड़ के साथ दर्द हो या फिर बुख़ार हो, तो तुरंत गायनाकोलॉजिस्ट को मिलें.

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Gynecological Problems

मैं 25 वर्षीया कामकाजी महिला हूं. पीरियड्स के दौरान मुझे काफ़ी तकलीफ़ होती है. मैं कभी पेनकिलर नहीं खाती, पर मेरी सहेलियां हमेशा पेनकिलर लेती हैं और मुझे भी लेने की सलाह देती हैं. क्या मुझे पेनकिलर लेना चाहिए? कृपया, सलाह दें.
– शालिनी ओझा, पटना.

अगर पीरियड्स के दौरान आपको दर्द और मरोड़ ज़्यादा हो रहा हो, तभी पेनकिलर लेना चाहिए, वरना घरेलू नुस्ख़ों और गरम पानी की थैली से भी आपको काफ़ी राहत मिल सकती है. पीरियड्स के दौरान भी जितना हो सके फिज़िकली एक्टिव रहें. अगर आपको पेट फूला हुआ महसूस हो रहा हो, तो पानी पीएं, इससे आपको काफ़ी राहत मिलेगी. इस दौरान फलों का जूस और सब्ज़ियों के सूप आपके लिए काफ़ी हेल्दी और दर्द कम करनेवाले ऑप्शन हैं. खाने में फल और सलाद की मात्रा बढ़ा दें. नमक और चाय-कॉफी की मात्रा कम कर दें.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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Personal Problems: योनि में ढीलापन महसूस होता है (Loose Vagina: What Causes It And How To Tighten Up?)

मैं 37 वर्षीय महिला हूं और मेरी दो सामान्य डिलीवरी हो चुकी है. कुछ दिनों से मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरी योनि (Vagina) से कुछ बाहर आ रहा है. इसके अलावा मुझे योनि में ढीलापन भी महसूस होता है. क्या ऐसी कोई एक्सरसाइज़ (Exercise) है, जिससे इस स्थिति में सुधार हो सके?
– मनाली, छत्तीसगढ़

नॉर्मल डिलीवरी के बाद गर्भाशय का लटकना और योनि में ढीलापन दोनों ही सामान्य बातें हैं. इस स्थिति से उबरना मुश्किल है, बल्कि मेनोपॉज़ के बाद तो स्थिति और भी ख़राब होती चली जाती है. आप चाहें तो पेल्विक फ्लोर यानी कीगल एक्सरसाइज़ कर सकती हैं. यदि परमानेंट इलाज चाहती हैं तो सर्जरी ही सबसे अच्छा इलाज है. पेरीनियल रिपेयर विधि द्वारा योनि में कसाव लाया जा सकता है. यह बहुत ही छोटी व आसान-सी विधि है. इसके अलावा कीहोल सर्जरी द्वारा यूटेरस को फिक्स किया जा सकता है.

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How To Tighten Up Vagina

मेरी उम्र 38 वर्ष है और मेरे दो बच्चे हैं. पिछले एक साल से मुझे माहवारी के समय बहुत ज़्यादा दर्द और रक्तस्राव होता है. सोनोग्राफ़ी करवाने पर मुझे पता चला कि मेरेे गर्भाशय में 1-2 बड़े फायब्रॉइड (गांठ) हैं. मुझे डॉक्टर ने सलाह दी है कि यूटेरस निकलवा दूं, पर मैं इसके लिए मानसिक तौर पर तैयार नहीं हूं. क्या इसके अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं है?
– रंजीता, लखनऊ.

यदि गर्भाशय के बीच में अंदर की ओर फायब्रॉइड हो तो यह माहवारी के समय बहुत तकलीफ़ देता है. आधुनिक टेकनीक के चलते अब हीस्टिरोस्कोपिक व लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (कीहोल सर्जरी) द्वारा फायब्रॉइड को आसानी से हटाया जा सकता है. आप चाहें तो इस ट्रीटमेंट का सहारा ले सकती हैं. ऐसे केस में यदि महिला की उम्र कम हो तो कोशिश की जानी चाहिए कि यूटेरस को बगैर हटाए फायब्रॉयड को निकाला जा सके.

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Personal Problems: वज़न बहुत ज़्यादा और चेहरे पर काफ़ी बाल भी हैं (What Does Obesity And Facial Hair Indicate?)

मैं 18 साल की हूं और मेरा वज़न 75 किलो है. पिछले 1 साल से डायटिंग और एक्सरसाइज़ द्वारा मैं अपना वज़न कम करने की कोशिश कर रही हूं, लेकिन वह घटने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है. मेरे चेहरे पर भी काफ़ी बाल हैं. मैं काफ़ी तनावग्रस्त रहती हूं. कृपया, मेरी मदद करें.
– रीना, रांची.

आपने यह नहीं बताया कि इन समस्याओं के साथ क्या आपको अनियमित माहवारी की भी समस्या है. आपको पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिन्ड्रोम की प्रबल संभावना लगती है, जिसके कारण वज़न बढ़ना, हिरसुट़िज़्म (अधिक बाल होना), कील-मुंहासे और अनियमित माहवारी होती है. लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि सभी मरीज़ों में ये सभी लक्षण हों. यह एक सामान्य हार्मोनल समस्या है, जिसका पता सोनोग्राफ़ी और हार्मोन टेस्ट से चल जाता है. कुछ ऐसी दवाइयां हैं, जिनसे आपका मेटाबॉल़ि़ज़म बेहतर होने में मदद मिल सकती है. इससे चेहरे के बाल भी कम होंगे और माहवारी भी नियमित होगी.

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 Facial Hair
मेरी उम्र 48 वर्ष है. 2 साल पहले मेरी रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) हो गयी थी. मेरी समस्या ये है कि मुझे डिप्रेशन, अचानक बहुत ़ज़्यादा गर्मी लगना, योनि में सूखापन जैसी तकलीफ़ रहती है. कृपया, इस समस्या का उपाय बताएं.
– रचना, दिल्ली

आपको बहुत जल्दी मेनोपॉज़ हो गया है, अत: आपको इस बात का ख़ास ध्यान रखना चाहिए कि कहीं आपको ऑस्टियोपोेेेरोसिस की तकलीफ़ न हो जाए. अमूमन मेनोपॉज़ के बाद ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों में कमज़ोरी की शिकायत होती है. इसके लिए आप नियमित एक्सरसाइज़ व कैल्शियमयुक्त डायट ले सकती हैं. सोया प्रोडक्ट से भी आपको फ़ायदा हो सकता है.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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Personal Problems: क्या पॉलिप बहुत ख़तरनाक होता है? (Is Polyp In Uterus Dangerous?)

मैं 36 वर्ष की शादीशुदा महिला हूं. मुझे पिछले 6 महीने से पीरियड (Periods) के दौरान बहुत ज़्यादा रक्तस्राव होता है. मैंने सोनोग्राफ़ी टेस्ट (Sonography Test) करवाया, जिससे पता चला कि मेरे यूटेरस (Uterus) में गांठ (पॉलिप) है. यह क्या है? क्या यह बहुत ख़तरनाक (Dangerous) है? क्या इसके लिए मुझे यूटेरस हटाना पड़ सकता है?
– ज्योति, अहमदाबाद

सबसे पहली बात जो हर महिला को ध्यान में रखना चाहिए वह ये कि जब भी माहवारी के समय हैवी ब्लीडिंग हो तो सबसे पहले इसका कारण जानने के लिए चेकअप करवाएं. साथ ही कैंसर के लिए पीएपी स्मीयर और सोनोग्राफ़ी टेस्ट भी करवाएं. आपने बताया कि सोनोग्राफ़ी टेस्ट में पॉलिप (गांठ) बताया गया है. यह भी अनियमित और भारी रक्तस्राव का कारण है. पॉलिप एक तरह का ट्यूमर है जो कि यूटेरस में पाया जाता है. इसे हीस्टिरोस्कोपी सर्जरी द्वारा हटाया जा सकता है. यदि यह ट्यूमर कैंसर का नहीं है तो सर्जरी के बाद फिर से ट्यूमर आने की संभावना नहीं होती.

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Polyp In Uterus

मैं 30 वर्षीय महिला हूूंं और पिछले साल मेरा दो बार तीन-तीन महीने का गर्भपात हो चुका है. मैं मां बनना चाहती हूं, लेकिन डरती हूं कि कहीं फिर से कोई परेशानी न आ जाए. क्या मुझे नॉर्मल प्रेगनेंसी हो पाएगी?
– संजना, मुरादाबाद

वैसे तो दो बार गर्भपात होने के बाद तीसरी बार गर्भपात होने की संभावना और ़ज़्यादा बढ़ जाती है. आप यदि गर्भधारण करने के बारे में सोच रही हैं तो बेहतर होगा कि सबसे पहले सारे टेस्ट करवा लें, ताकि यह पता चल जाए कि आपका यूटेरस सामान्य है या नहीं. कोई बर्थ ड़िफेक्ट, जैसे- सेप्टम या डबल यूटेरस की समस्या तो नहीं है आदि. यदि इस तरह के ड़िफेक्ट्स हैं भी तब भी कीहोल सर्जरी, जैसे- लेप्रोस्कोपी, हीस्टिरोस्कोपी से इसका इलाज संभव है. इसके अलावा जेनेटिक टेस्टिंग और इम्यूनोलॉजी प्रॉब्लम्स के लिए विशेष तरह का ब्लड टेस्ट भी किया जाता है. गर्भधारण के पहले फोलिक एसिड और हार्मोन्स की टेबलेट लेने की आवश्यकता पड़ सकती है.

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Personal Problems: चॉकलेट सिस्ट से बहुत परेशान हूं (Chocolate Cyst: Causes, Symptoms And Treatment)

मेरी उम्र 28 वर्ष है और मेरी शादी को 5 वर्ष हो गए हैं. मुझे मासिक धर्म में काफ़ी दर्द और रक्तस्राव होता है. मेरी सोनोग्राफ़ी से पता चला है कि मुझे चॉकलेट ओवेरियन सिस्ट (Chocolate Ovarian Cyst) है और इसकी सर्जरी करवानी होगी. लेकिन मैं अभी तक मां नहीं बन पाई हूं, इसलिए किसी भी तरह के ऑपरेशन से डरती हूं. मुझे क्या करना चाहिए?
– परमजीत कौर, दिल्ली.

एंडोमेट्रियोसिस में हर मासिक चक्र के दौरान ओवरी (अंडाशय) में रक्त इकट्ठा हो जाता है. धीरे-धीरे इसका आकार बढ़ने लगता है और इकट्ठा हुआ रक्त चॉकलेट सिस्ट बना लेता है. इस कारण मासिक धर्म के दौरान दर्द होता है एवं गर्भधारण करने में भी समस्या हो जाती है. लेप्रोस्कोपिक (कीहोल) सर्जरी ही इसका एकमात्र उपाय है. लेज़र जैसी आधुनिक तकनीक ने अब इस तरह की सर्जरी को और भी आसान बना दिया है.

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 Chocolate Cyst
मेरी उम्र 52 वर्ष है. 2 साल पहले ही मुझे मेनोपॉज़ हो गया था. मेरी समस्या यह है कि मुझे बहुत ़ज़्यादा गर्मी लगने लगी है, यहां तक कि फैन चालू रहने पर भी मैं पसीने में भीगी होती हूं. मुझे इन दिनों बहुत चिड़चिड़ाहट होने लगी है और ग़ुस्सा भी बहुत आने लगा है, जिसके कारण सब मुझसे परेशान रहने लगे हैं. क्या हर स्त्री ऐसे दौर से गुज़रती है? क्या मेरी समस्या का कोई उपाय है?
– रजनी मल्होत्रा, हिसार.

जब 40 के बाद और 50 के पहले की उम्र में हार्मोन्स का स्तर गिरने लगता है, तब कई स्त्रियों में मेनोपॉज़ के लक्षण नज़र आने लगते हैं. इसी की वजह से ़ज़्यादा गर्मी महसूस होना, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, ग़ुस्सा, नींद न आना जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में आपके लिए सबसे अच्छा उपाय है एस्ट्रोजन के साथ हार्मोनल ट्रीटमेंट. इसके अलावा आजकल नॉन हार्मोनल थेरेपी भी ली जा सकती है, जिसमें सोया एक्सट्रैक्ट व विटामिन्स लिए जा सकते हैं. इस समय ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव भी ज़रूरी है. इसके लिए कैल्शियम सप्लीमेंट्स लें.

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बड़ी बीमारी के संकेत हो सकते हैं ये शारीरिक संकेत (Never ignore these signs by your body)

शरीर (Body) में छोटी-मोटी तकली़फें होती ही रहती हैं और अक्सर हम इन तकलीफ़ों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन यह अनदेखी महंगी भी पड़ सकती है, क्योंकि कभी-कभार ये छोटे-छोटे लक्षण ही किसी बड़ी व गंभीर बीमारी की ओर इशारा करते हैं. बेहतर होगा कि समय रहते इन्हें पहचान कर सतर्क हो जाएं, ताकि आनेवाली किसी भी बड़ी समस्या से बचा जा सके.

सिर में दर्द रहना
हमें लगता है- मामूली दर्द या एसिडिटी.
हो सकता है- माइग्रेन, हाई ब्लड प्रेशर, ब्रेन ट्यूमर, साइनस या फिर ब्रेन हैमरेज.
आपको सिर में अक्सर दर्द रहता है, जो पेनकिलर्स लेने पर ठीक हो जाता है, तो इसे भी नज़रअंदाज़ न करें. अगर दर्द के साथ उल्टियां भी होती हों, तो डॉक्टर से तुरंत मिलें. इसके अलावा आंखों की रौशनी कम होती जाए या दृष्टिभ्रम होने लगे, चक्कर भी आएं, तो यह ट्यूमर का संकेत हो सकता है.

अचानक वज़न कम होना
हमें लगता है- थकान, स्ट्रेस या खाने-पीने में गड़बड़ी के चलते ऐसा हो रहा है.
हो सकता है- टीबी, पेप्टिक अल्सर, थायरॉइड, डायबिटीज़ या फिर कैंसर.
बिना डायटिंग के या फिर बिना किसी बीमारी के अचानक वज़न कम होने लगे, तो सतर्क हो जाइए. मुमक़िन है, एंडोक्राइन ग्लैंड्स में किसी असामान्यता के चलते ऐसा हो रहा हो या फिर कैंसर भी इसकी एक वजह हो सकती है.
ये भी पढ़ेंः पहचानें स्ट्रोक के 10 संकेतों को (Learn To Recognize The 10 Signs Of A Stroke)

चोट लगने पर ब्लड क्लॉट न होना या ज़ख़्म का देरी से भरना
हमें लगता है- स्किन या ख़ून में बदलाव के कारण ऐसा होता है.
हो सकता है- डायबिटीज़ या फिर प्लेटलेट्स में कमी.
ज़ख़्म भरने में अगर सामान्य से ज़्यादा वक़्त लग रहा हो, तो यह डायबिटीज़ का लक्षण हो सकता है. इसके साथ-साथ यदि स्किन एलर्जी भी हो और चक्कर आने व वज़न कम होने की समस्या भी हो, तो बिना देर किए एक्सपर्ट के पास जाएं.

दिल का ज़ोर-ज़ोर से धड़कना
हमें लगता है- उत्तेजना या कमज़ोरी.
हो सकता है- हार्ट अटैक का लक्षण या फिर हाई ब्लड प्रेशर.
हो सकता है कि कमज़ोरी या नींद न पूरी होने पर धड़कन असामान्य हो रही हो, लेकिन यह हार्ट अटैक का लक्षण भी हो सकता है. सतर्क रहें और यदि यह लक्षण लगातार दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

पेशाब करते समय तेज़ दर्द होना
हमें लगता है- सामान्य इंफेक्शन.
हो सकता है- स्टोन, प्रोस्ट्रेटग्रंथि का बढ़ जाना, मूत्राशय का कैंसर.
मूत्रत्याग के समय अगर हमेशा ही बहुत दर्द होता हो, तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है. यदि पेशाब के साथ ख़ून भी आने लगे, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि समय रहते इलाज हो सके.

 

उठते वक़्त चक्कर आना
में लगता है- मामूली कमज़ोरी.
हो सकता है- नर्व से संबंधित समस्या, कान की नसों में कोई गड़बड़ी, सायनस, स्पॉन्डिलाइटिस, लो ब्लड प्रेशर.
यूं तो इसके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, लेकिन लो ब्लडप्रेशर भी इसकी एक बड़ी वजह हो सकती है और लो ब्लड प्रेशर के भी कई कारण हो सकते हैं, जो आपको टेस्ट करवाने पर ही पता चलेगा, इसलिए तुरंत डॉक्टर से मिलें.

अचानक आंखों के आगे अंधेरा छा जाना
हमें लगता है- नींद न पूरी होने पर या कमज़ोरी के कारण ऐसा हो हो रहा है.
हो सकता है- स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर.
यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल है, तो आप स्ट्रोक के शिकार हो सकते हैं. यदि आंखों के सामने अंधेरा छाने के साथ-साथ शरीर के एक तरफ़ का भाग सुन्न होता है, तो अलर्ट हो जाएं. इसके अलावा अगर उच्चारण में भी तकलीफ़ होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

हाथों का कांपना, घबराहट, नाक से ख़ून आना
हमें लगता है- कमज़ोरी, शरीर में गर्मी का बढ़ जाना इसकी वजह हो सकती है.
हो सकता है- थायरॉइड, पार्किंसन्स.
अचानक घबराहट होने के साथ-साथ हाथ-पैर कांपने लगते हैं, नाक से ख़ून आने लगता है और उल्टियां भी होने लगती हैं. ऐसी स्थिति को नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं. हो सकता है बहुत ज़्यादा एसिडिटी या शरीर में गर्मी बढ़ने के कारण भी ऐसा हो, लेकिन ये तमाम लक्षण किसी गंभीर समस्या के भी संकेत हो सकते हैं.

हंसते-खांसते वक़्त या फिर अचानक ही पेशाब निकल जाना
हमें लगता है– बढ़ती उम्र या कमज़ोरी.
हो सकता है- यूरिन इंफेक्शन, ब्लैडर की कोई बीमारी या डायबिटीज़.
अचानक पेशाब निकल जाने की समस्या को हम कमज़ोरी या बढ़ती उम्र से जोड़कर ही देखते हैं, लेकिन यह यूरिनरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन की वजह से या फिर कुछ मामलों में डायबिटीज़ के कारण भी हो सकता है. इसलिए किसी भी तकलीफ़ को नज़रअंदाज़ न करें और न ही ख़ुद अंदाज़ा लगाएं. बेहतर होगा एक बार डॉक्टर की सलाह ले ली जाए.

सीने में दर्द रहना
हमें लगता है- गैस या एसिडिटी का दर्द.
हो सकता है- हृदय रोग या एंजाइना पेन.
सीने में या उसके आस-पास दर्द बना रहे और सांस लेने में भी दिक़्क़त आए, तो शायद यह हार्ट ट्रबल यानी हृदय रोग का संकेत हो सकता है या फिर एंजाइना का दर्द भी हो सकता है, जिसमें हार्ट अटैक की आशंका हमेशा बनी रहती है. बेहतर होगा कि इस तरह के दर्द को गैस का छोटा-मोटा दर्द न समझकर डॉक्टरी परामर्श ले लिया जाए.

मुंह में छाले होना
हमें लगता है- पेट या आंतों की गड़बड़ी या गर्मी से.
हो सकता है- एड्स, हर्पिस, सेक्स संबंधी किसी इंफेक्शन के कारण या फिर मुंह या गले का कैंसर.
मुंह में छाले होना आम-सी बात है. हमें लगता है पेट साफ़ नहीं होगा, इसलिए छाले हो रहे हैं या फिर कभी-कभार बुख़ार या दवाओं की गर्मी से भी छाले हो जाते हैं. लेकिन यदि ये छाले लंबे समय तक बने रहें या फिर इनका आकार और इनमें दर्द बढ़ रहा हो, तो देर न करें.

शरीर में सूजन
हमें लगता है- थकान या खान-पान की गड़बड़ी हो सकती है.
हो सकता है- एनीमिया, किडनी की बीमारी या हृदय रोग.
अक्सर दिनभर एक ही पोज़िशन में बैठे रहने या फिर बहुत ज़्यादा थकान या वॉटर रिटेंशन से शरीर या पैरों में सूजन आ जाती है, लेकिन यदि सूजन शरीर के ऊपरी भाग में है तो यह किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है और अगर निचले हिस्से में सूजन आती है तो हृदय रोग का लक्षण हो सकता है.

बहुत ज़्यादा हांफना
हमें लगता है- थकान, कमज़ोरी.
हो सकता है- कोलेस्ट्रॉल व ट्रायग्लिसरॉइड्स का बढ़ जाना, एनीमिया, थायरॉइड, मोटापा, बीमारी के बाद की कमज़ोरी.
अगर थोड़ा-सा चलने से ही बहुत ज़्यादा हांफने लगें, तो सचेत हो जाएं और अपना चेकअप ज़रूर करवाएं.

अत्यधिक भूख लगना
हमें लगता है- मौसम परिवर्तन के कारण या फिर हाज़मा अच्छा हो गया है.
हो सकता है– डायबिटीज़, मोटापा या फिर पेट में कीड़े.
जब ज़रूरत से ज़्यादा भूख लगने लगे, तो इसे हर बार मौसम परिवर्तन से जोड़कर न देखें. हो सकता है वजह कुछ और हो. एक्सपर्ट की राय ज़रूर लें.

कब्ज़
हमें लगता है- पानी कम पीने या फिर खाने-पीने की गड़बड़ी से हो रहा है.
हो सकता है- अत्यधिक गैस, बवासीर, आंतों में गड़बड़ी या फिर कैंसर हो सकता है.
यदि कब्ज़ लंबे समय से है और कोई भी नुस्ख़ा काम नहीं कर रहा हो, तो डॉक्टरी परामर्श लेने में कोई हर्ज़ नहीं है.

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Personal Problems: गर्भावस्था में सर्जरी से डर रही हूं (Is Surgery During Pregnancy Safe?)

मैं चार माह की गर्भवती (Pregnant) हूं और पूरी तरह ठीक हूं. लेकिन मेरा पहला बच्चा सातवें माह में ही पैदा हो गया था. इसलिए अब डॉक्टर का कहना है कि मुझे गर्भाशय के मुंह पर टांके लगवा लेने चाहिए, ताकि डिलीवरी पहले की तरह समय से पहले न हो. मैं गर्भावस्था में सर्जरी (Surgery) कराने से डरती हूं. क्या यह ज़रूरी हैै?
– अर्चना, मंदसौर.

आपकी समस्या सर्वाइकल इनकॉम्पिटेंस की है. इसके अंतर्गत सर्विक्स (गर्भाशय का मुंह) कुछ कमज़ोर हो जाता है और प्रेगनेंसी के दौरान समय से पहले ही खुल जाता है. यदि सर्विक्स छोटा है और खुल जाता है तो प्रीमैच्योर डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है. इस स्थिति में पेशेंट को किसी तरह का दर्द या परेशानी नहीं होती है, क्योंकि उसे पता ही नहीं चल पाता कि सर्विक्स खुल गया है. इसका पता सोनोग्राफ़ी कराने पर ही चलता है. चूंकि आपका पहला बच्चा समय से पूर्व हो गया था और फिर से ऐसा न हो, इसके लिए आपको सर्वाइकल स्टिच लगवा लेना चाहिए. यह बहुत ही साधारण व सुरक्षित तरीक़ा है. इससे आपका बच्चा 9 माह तक गर्भ में सुरक्षित रह पाएगा. डिलीवरी के कुछ ह़फ़्ते बाद टांकों को खोल दिया जाता है.

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Surgery During Pregnancy

मैं 24 वर्ष की हूं. मेरी शादी को दो साल हुए हैं. मुझे पिछले ह़फ़्ते पीरियड आना था, लेकिन नहीं आया. मैं यह सोचकर बेहद ख़ुश थी कि मैं गर्भवती हूं, लेकिन डॉक्टर का कहना है कि यह एक्टोपिक प्रेगनेंसी है और मुझे ऑपरेशन करवाकर इसे हटवाना पड़ेगा. क्या इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है?
– संध्या, भोपाल.

एक्टोपिक प्रेगनेंसी ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भ गर्भाशय की जगह ओवरी या नली में अटक जाता है. इसका पता सोनोग्राफ़ी द्वारा ही चलता है. यह बहुत ही ख़तरनाक स्थिति है, क्योंकि ट्यूब कभी भी फट सकती है और पेल्विस में अत्यधिक ब्लीडिंग हो सकती है. इसलिए तुरंत इलाज कराना चाहिए. इसके लिए ख़ास तरह का इंजेक्शन, जैसे- मेथोट्रेक्सेट दिया जाता है या कीहोल सर्जरी की जाती है.

यह भी पढ़ें: Personal Problems: पीरियड्स में होनेवाले दर्द के लिए क्या कोई ख़ास टेस्ट कराना होगा? (Menstrual Cramps- Diagnosis And Treatments)

Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
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Personal Problems: गर्भधारण नहीं कर पा रही हूं (Possible Reasons You Can’t Get Pregnant)

मैं 27 वर्षीय विवाहिता हूं. मैं मां बनना चाहती हूं, लेकिन गर्भधारण नहीं कर पा रही हूं. मुझे अनियमित मासिक चक्र की समस्या (Irregular Menstrual Cycle Problem) है और मेरा वज़न भी ज़्यादा है. मेरे पति के वीर्य की मेडिकल रिपोर्ट भी सामान्य है. कृपया सहायता करें.
– मालती जैन, हैदराबाद.

हो सकता है कि आपको पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम हो. ऐसे मरीज़ों में अंडाणु हर महीने बाहर नहीं आते, इसी कारण माहवारी भी अनियमित रहती है और गर्भधारण करने में भी मुश्किल होती है. बाज़ार में कई तरह की दवाइयां और इंजेक्शन उपलब्ध हैं, जिनसे अंडाणु विकसित होता है. सोनोग्राफ़ी से अंडाणु के विकसित होने व फटने का सही समय का पता चलता है. इस व़क़्त यदि पति द्वारा इनसेमिनेशन होता है तो गर्भ धारण की संभावना बढ़ जाती है. इस प्रक्रिया के लिए आपकी फेलोपियन ट्यूब खुली व सामान्य होनी चाहिए, जिसकी जांच एक्स-रे या लेप्रोस्कोपी द्वारा की जा सकती है.

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Reasons You Can't Get Pregnant

मैं 19 वर्षीया महिला हूं और मेरा वज़न 73 किलो है. पिछले एक साल से मैं एक्सरसाइज़ और डायटिंग से वज़न कम करने की कोशिश कर रही हूं, लेकिन फ़र्क़ नहीं लग रहा है. इसके अलावा मेरे चेहरे पर काफ़ी बाल भी हैं. इस वजह से मैं बहुत तनाव में हूं. कृपया, सहायता करें.
– राखी टंडन, जमशेदपुर.

आपने यह नहीं बताया कि आपको माहवारी नियमित है या नहीं, क्योंकि ़ज़्यादातर ये दोनों समस्याएं साथ-साथ होती हैं. हो सकता है आपको पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम हो, जिसकी वजह से वज़न का बढ़ना, मुंहासे, चेहरे पर अत्यधिक बाल और अनियमित माहवारी की समस्या पैदा हो जाती है. यह एक सामान्य हार्मोनल समस्या है. इसकी जांच सोनोग्राफ़ी या हार्मोनल टेस्ट से की जा सकती है. कुछ ऐसी दवाइयां हैं, जो पाचन क्रिया बढ़ाती हैं और वज़न कम करने में सहायक होती हैं. इससे चेहरे के बाल भी कम होते हैं और माहवारी भी नियमित रहती है. इसके अलावा कीहोल सर्जरी से ओवरी में बनी सिस्ट को जलाया जा सकता है. बेहतर होगा कि आप किसी अच्छे गायनाकोलॉजिस्ट से सलाह लें.

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ऐसे बीट करें समर हीट को (24 Ways To Beat The Summer Heat)

Ways To Beat The Heat

ऐसे बीट करें समर हीट को (Best Ways To Beat The Summer Heat)

गर्मी का मौसम (Summer Season) सुहाना तो नहीं लगता, लेकिन आप समर हीट (Summer Heat) को बीट करने के कुछ ट्रिक्स (Tricks) यूज़ कर सकते हैं, जिससे आप इस मौसम को भी ख़ुशगवार बना सकते हैं.

1. अपना दिन प्लान करें: कितने बजे उठना है और सुबह-सुबह क्या-क्या करना है, इसकी प्लानिंग करें, कुछ काम जो सुबह हो सकते हैं और कुछ काम जो सूरज छिपने के बाद किए जा सकते हैं, उनकी लिस्ट तैयार कर लें, क्योंकि इन दोनों ही समय पर गर्मी कम होती है.

2. जल्दी उठें और वॉक के लिए जाएं: गर्मियों में जल्दी उठने का नियम बना लें, क्योंकि उस व़क्त मौसम सच में सुहाना और ठंडा होता है. मंद-मंद हवा चलती है, जो आपको रिफ्रेश कर देती है. जॉगिंग या वॉक के लिए निकल जाएं. इससे आप दिनभर तरो-ताज़ा महसूस करेंगे.

3. वॉक के बाद ब्रेकफास्ट करें किसी कैफे में: यह आपको दिनभर की ऊर्जा देगा. किसी दिन या छुट्टी के दिन आप किसी कैफे में सुबह की ताज़गी का मज़ा ले सकते हैं. कॉफी या फ्रूट जूस और हेल्दी ब्रेकफास्ट करें. वहां बैठकर दोस्तों से फोन पर बात भी कर सकते हैं या फिर ऑफिस में क्या-क्या करना है, उसकी लिस्ट भी तैयार कर सकते हैं.

4. हाइड्रेट रहें: इस मौसम में शरीर में पानी की कमी हो सकती है. पसीना भी अधिक आता है. अपने साथ पानी की बोतल ज़रूर रखें. अपने डेस्क पर भी पानी की बोतल हमेशा भरी रखें, ताकि बीच-बीच में पानी पी सकें.

5. कूलिंग डायट लें: फ्रेश फ्रूट सलाद, फ्रेश वेजीटेबल जूस, नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ आदि लें. इससे आप लाइट और हेल्दी महसूस करेंगे. स्पाइसी, मसालेदार और जंक फूड अवॉइड करें. एरिएटेड ड्रिंक्स का भी अधिक सेवन न करें.

6. स्विमिंग करें: सुबह या शाम पूल में स्विम करके ख़ुद को रिफ्रेश करें. उसके बाद शावर लेंगे, तो और भी फ्रेश फील करेंगे.

7. कूलिंग स्पॉट्स की सहायता लें: कलाइयां, गर्दन के पीछे, पैरों में कई ऐसे स्पॉट्स होते हैं, जो आपको कूल रखते हैं. वहां वेट टिश्यू या टॉवेल को कुछ देर के लिए रखें और बॉडी हीट को बाहर आने दें.

8. फ्रेग्रेंस: पसीना दूर रखनेवाले कूल डीयो, बॉडी मिस्ट या टेल्कम पाउडर आसानी से उपलब्ध हैं आजकल. उनका इस्तेमाल करें.

9. हेयर स्टाइल: बालों को छोटा ही रखें. महिलाएं बालों का स्टाइल लूज़ और कंफर्टेबल रखें, ताकि पसीना अधिक न आए.

10. आउटफिट्स: लाइट कपड़े पहनें. कॉटन ही पहनें. बहुत अधिक टाइट या फिटेड कपड़े पहनने से बचें. सिल्क या हैवी फैब्रिक इस मौसम में अवॉइड करें. इसी तरह से व्हााइट या लाइट कलर के ही कपड़े पहनें, डार्क कलर्स अवॉइड करें.

11. मेडिटेशन करें: यह आपको बैलेंस करता है. ऊर्जा देता है. कोशिश करें कि रोज़ाना कुछ देर मेडिटेशन ज़रूर करें.

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12. शीतली प्राणायाम: यह बॉडी टेंप्रेचर को कंट्रोल करता है. गर्मी दूर करके शरीर को कूलिंग इफेक्ट देता है.
कैसे करें: आरामदायक स्थान पर बैठ जाएं. शरीर रिलैक्स रहे. जीभ को बाहर निकालकर दोनों किनारों से रोल करें, जैसे कोई ट्यूब हो. जीभ से सांस लें और अंत में जीभ को अंदर लेकर सांस को नाक के माध्यम से छोड़ें. आपको मुंह के भीतर काफ़ी ठंडक महसूस होगी. इस तरह यह प्रक्रिया 8-10 बार करें.

13. कूलिंग पैक्स का इस्तेमाल करें: सनटैन या सनबर्न होने पर एलोवीरा, ककड़ी, तरबूज़, चंदन पाउडर या मुल्तानी मिट्टी के पैक्स यूज़ करें. गुलाबजल को भी ठंडा करके फेस पर अप्लाई कर सकते हैं.

14. रूम को कूल रखें: ब्लाइंड कर्टेंस यूज़ करें, जिससे तेज़ धूप कमरे में न आ सके. इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स का प्रयोग कम करें, क्योंकि ये भी हीट प्रोड्यूस करते हैं. हालांकि एयरकंडिशन का ऑप्शन है, पर अगर आपको उससे एलर्जी है, तो पंखे का इस्तेमाल करें.

15. गुलाब की पत्तियों का प्रयोग करें: आयुर्वेदानुसार आपके मन, मस्तिष्क और भावनाओं पर गुलाब का कूलिंग और सूदिंग इफेक्ट होता है. गुलाब की पत्तियों को अपने सलाद, डेज़र्ट और ड्रिंक्स में डालें. गार्निश करें.

16. मून बाथ: फुल मून बाथ लें. मून की कूलिंग प्रॉपर्टीज़ आपको रिफ्रेश कर देंगी.

17. एरोमा थेरेपी: यह आपको समर में रिलैक्स करेगी और सुकून की नींद में भी मदद करेगी. एरोमा ऑयल्स, एसेंशियल ऑयल्स कूलिंग इफेक्ट देते हैं, क्योंकि इनमें मेंथॉल होता है. आप चाहें, तो अपने रूम में लाइट्स ऑफ करके एरोमैटिक कैंडल्स जलाएं.

18. वॉटर स्पोर्ट्स और वर्कआउट्स: समर में यहां टाइम ज़्यादा स्पेंड करें. आउटिंग के लिए भी जाएं, तो बीचेस या बोटिंग के लिए जाएं. अगर बाहर कहीं और जा रहे हैं, तो इस बात का ध्यान रखें कि तेज़ धूप में देर तक रहने की बजाय पेड़ या शेड्स की छांव में आकर कुछ देर आराम कर लें.

19. आइस कूल: बाहर जाने से पहले और बाहर से आने के बाद भी फेस व हाथ-पैरों पर आइस रब करें. इसके अलावा अपने पैरों को भी आइस वॉटर में कुछ देर तक रखें. इससे हीट का इफेक्ट कम हो जाएगा.

20. फैन को बनाएं कूलिंग एजेंट: यह काफ़ी पुराना, लेकिन कारगर तरीक़ा है कूलिंग का. याद कीजिए अपने आइस बॉक्स को आपने आख़िरी बार कब यूज़ किया था. अब समय आ गया है कि फ्रीज़र में पड़ी आइस ट्रेज़ का इस्तेमाल किया जाए. ढेर सारी आइस लेकर फैन के सामने रख दें. फिर फैन ऑन करके उसके सामने लेट जाएं. ठंडी-ताज़ा हवा मिलेगी और एसी का बिल भी नहीं बढ़ेगा.

21. बेड की बजाय फ्लोर पर जाएं: अगर आप बेड या सोफे पर सोते हैं, तो समर में अपना बिस्तर फ्लोर पर लगाएं और अगर आपका 2 मंज़िल या अधिक का अपार्टमेंट है, तो ग्राउंड फ्लोर पर जाकर ही सोएं. इससे हीट का असर कम होगा.

22. लाइट्स ऑफ रखें: समर में नेचुरल लाइट अधिक देर तक रहती है, उसका फ़ायदा उठाएं. सुबह भी बेवजह लाइट्स ऑन न करें और शाम को भी बहुत जल्दी लाइट्स ऑन न करें. डिम लाइट ही ऑन रखें, क्योंकि लाइट्स हीट बढ़ाती हैं.

23. स्टोव की हीट से बचें, रूम टेम्प्रेचर डिशेज़ लें: समर सीज़न हॉट चिकन या गर्मागर्म परांठे खाने का नहीं होता. इन्हें पकाने और पचाने में भी समय अधिक लगता है, जिससे आप ज़्यादा देर तक स्टोव के सामने एक्सपोस्ड रहते हो और हीट अधिक महसूस होती है. बेहतर होगा रूम टेम्प्रेचर डिशेज़ व लाइट फूड लें, जिन्हें पकाने में अधिक समय न लगे या फिर आप डेज़र्ट व सलाद अधिक लें. नेचुरल फ्रूट जूस लें.

24. सोने से पहले भरपूर पानी पीएं: बेड पर जाने से पहले पानी ज़रूर पीएं, क्योंकि सोने के बाद जब पसीना आता है, तो डीहाइड्रेशन का ख़तरा बढ़ जाता है.

– ब्रह्मानंद शर्मा

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समर केयर टिप्स (Summer Care Tips)

Summer Care Tips

  • पसीने की दुर्गंध से बचने के लिए प पसीने की दुर्गंध से बचने के लिए अच्छी कंपनी का डियो या सुगंधित पाउडर लगाएं.
  • दिन में दो बार स्नान करें.प यदि आप कामकाजी हैं, तो शाम को घर लौटने पर 10-15 मिनट तक ठंडे पानी में पैरों को डुबोकर रखें. इससे पैरों को आराम मिलेगा और आपको गर्मी से राहत.
  • ज़्यादा से ज़्यादा पानी पीएं. ख़ासकर घर से बाहर निकलते समय पानी ज़रूर पीएं. इससे आपके शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाएंगे और त्वचा भी ग्लो करेगी.
  • सुबह जल्दी उठकर लॉन में हरी घास पर टहलें.प घर से बाहर हों, तो थोड़ी-थोड़ी देर में नींबू पानी या जूस पीएं. हो सके, तो अपने साथ एक बॉटल में नींबू का शर्बत कैरी करें. इससे इंस्टेंट एनर्जी मिलती है.प दूध पोषक होने के साथ ठंडी तासीर का भी है, इसलिए रोज़ाना एक ग्लास दूध ज़रूर पीएं.
  • ज़्यादा ऑयली व गरिष्ठ भोजन करने से बचें.
  • अपने डायट में सलाद, जूस और फल शामिल करें. ढेर सारे फलों का सेवन करें, इससे त्वचा ग्लो करेंगी व गर्मी से भी राहत मिलेगी.
  • गर्मियों में अक्सर शरीर में पित्त की प्रॉब्लम हो जाती है, इसके लिएसुबह-सुबह ठंडा दूध पीएं.
  • छाछ को अपने भोजन का नियमित रूप से हिस्सा बनाएं. यह शरीर को ठंडक देता है.
  • लस्सी भी गर्मी से राहत दिलाती है.प गर्मी के कुछ महीनों में हो सके, तो चाय-कॉफी का सेवन बिल्कुल छोड़ दें, क्योंकि ये शरीर को गर्मी पहुंचाते हैं और सेंट्रल नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित करते हैं.
  • अगर बहुत ज़्यादा ज़रूरी न हो तो दिन में 11 बजे से 3 बजे तक धूप में न निकलें, क्योंकि इस समय सूरज की अल्ट्रा वॉयलेट किरणों का बहुत तेज़ और बुरा प्रभाव पड़ता है.
  • घर से बाहर जाएं या घर में रहें. अपनी त्वचा को सनस्क्रीन प्रोटेक्शन ज़रूर दें.
  • जिस तरह गर्मियों में शरीर डिहाइड्रेट होता है, उसी तरह स्किन भी डिहाइड्रेट होती है. ऐसे में स्किन का मॉइश्‍चर लेवल बनाए रखने के लिए ज़रूरी है उसे मॉइश्‍चराइज़ करना, ताकि स्किन को नरिशमेंट मिले. इसलिए गर्मियों में भी मॉइश्‍चराइज़र लगाना न भूलें.

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Personal Problems: मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग कहीं गंभीर समस्या तो नहीं? (What Does It Mean If You’re Bleeding After Menopause?)

मैं 53 वर्षीया महिला हूं. तीन साल पहले मेरा मेनोपॉज़ (Menopause) हो चुका है. इन दिनों अचानक मुझे हल्की वेजाइनल ब्लीडिंग (Vaginal Bleeding) शुरू हो गई है. क्या यह कोई गंभीर समस्या है? क्या मुझे चेकअप करवाना चाहिए?
– सुमति राव, मैंगलोर.

एक बार जब मासिकधर्म एक साल के लिए बंद हो जाए तो यह स्थिर हो जाता है. इसके बाद कभी आपको वेजाइनल ब्लीडिंग नहीं होनी चाहिए, यहां तक कि दाग़-धब्बे भी नहीं दिखनेे चाहिए. आपको तुरंत गायनाकोलॉजिस्ट से चेकअप करवाना चाहिए, जो इंटरनल एक्ज़ामिनेशन या पीएपी स्मीअर जांच से सर्विक्स के कैंसर का पता लगा सकते हैं. यूट्रीन लाइन पर सूजन है या नहीं, इसकी जांच के लिए आप सोनोग्राफ़ी भी करवा लें. यूट्रीन लाइन पर सूजन एंडोमेट्रियल हाइपरप्लेसिया, कैंसर या ओवरी ट्यूमर का संकेत है. वेजाइनल ब्लीडिंग का कारण इनमें से कोई भी हो सकता है, इसलिए सही जांच ज़रूरी है.

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 Bleeding After Menopause
मैं 40 वर्षीया महिला हूं. मैंने अपनी सहेलियों से सुना है कि उन्होंने पीएपी स्मीअर करवाया है. यह क्या है और इस उम्र में क्या यह सभी को करवाना
पड़ता है?
– रजनी शर्मा, दिल्ली.

40 वर्ष की उम्र ऐसी उम्र है, जहां किसी भी तरह के कैंसर या ट्यूमर की संभावना से पहले ही नियमित चेकअप करवाते रहना चाहिए. पीएपी स्मीअर एक साधारण-सा टेस्ट है, जिसमें कॉटन या ब्रश को सर्विक्स से छूकर स्लाइड तैयार की जाती है और इस स्लाइड की जांच द्वारा कैंसर या अन्य किसी बीमारी का पता लगाया जा सकता है. यह जांच किसी भी डॉक्टर के क्लिनिक में दो मिनट में की जा सकती है. यह जांच हर साल करवानी चाहिए और इसकी शुरुआत तभी कर देनी चाहिए, जब महिला सेक्सुअली एक्टिव हो. इसके अलावा 40 की उम्र में पेल्विक सोनोग्राफ़ी करवानी चाहिए, जिससे गर्भाशय और ओवरी के कैंसर का पता चलता है. साथ ही मैमोग्राफ़ी भी करवा लेनी चाहिए, जिससे स्तन कैंसर का पता चलता है. किसी भी महिला को कैंसर की जांच के लिए ये सामान्य से टेस्ट अवश्य करवाने चाहिए.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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जानिए क्यों आते हैं सपने (Dreams: Why Do We Dream?)

सपने (Dreams) क्यों आते हैं? नींद में सोते समय मस्तिष्क में ऐसा क्या होता है जो सपनों की दुनिया में ले जाता है? इन सवालों पर कई रिसर्च्स की गई हैं. हालांकि इन सवालों के कोई पुख़्ता जवाब नहीं मिले हैं. लेकिन शोधों के आधार पर सपनों के बारे में कई तथ्य सामने आए हैं.

Dreaming

नींद और सपने का कनेक्शन
1. वैज्ञानिकों ने नींद को दो चरणों में बांटा है. पहला है- आरईएम और दूसरा है- नॉन आरईएम, जिसके चार चरण होते हैं. सबसे ज़्यादा सपने आरईएम यानी रैपिड आई मूवमेंट चरण में आते हैं. इस दौरान शरीर शिथिल रहता है, लेकिन पलकों के नीचे आंखों की पुतलियां तेज़ी से घूमती रहती हैं.
2. 70 मिनट के नॉन आरईएम चरण के बाद व्यक्ति पहले आरईएम चरण में पहुंचता है, जो केवल 5 मिनट का होता है.
3. आरईएम-नॉन आरईएम का चक्र 90 मिनटों का होता है और पूरी रात में नींद के दौरान यह पैटर्न 5 बार रिपीट होता है.
4. जैसे-जैसे समय गुज़रता है, नॉन आरईएम स्टेज छोटा होता जाता है और आरईएम स्टेज बढ़ा होता जाता है और व्यक्ति सपनों की दुनिया में पहुंच जाता है.
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Dreams

क्यों आते हैं सपने?
यूं तो सपने क्यों आते हैं? इसका कोई पुख़्ता जवाब नहीं मिल पाया है, लेकिन रिसर्च के आधार पर जो कारण सामने आए हैं, वे ये हो सकते हैं
– कुछ छिपी इच्छाएं या भावनाएं, जो पूरी न हो सकी हों या पूरी न हो पा रही हों.
– पूरे दिन ख़ुद के साथ घटित हुई बातों  व घटनाओं का पुनर्परीक्षण करने के लिए सपने आते हैं.
– कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि सपने इसलिए आते हैं, ताकि शरीर आराम कर सके.
– जब आप बेहद तनाव में होते हैं, तब सपने आते हैं.
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सपने का सच
1. हर व्यक्ति सपने देखता है. फिर चाहे वो पुरुष हो, स्त्री हो या बच्चा. फ़र्क़ इतना है कि कुछ लोगों को सपने याद रह जाते हैं और कुछ को नहीं.
2. नींद के लगभग 2 घंटे सपने देखने में जाते हैं.
3. हर व्यक्ति रात में 3 से 6 सपने देखता है, जिनमें से एकाध सपना ही याद रह जाता है.
4. नींद में हर 90 मिनट पर एक सपना आता है. हर सपना पिछलेवाले से बड़ा होता है. एक्सपर्ट्स की माने तो रात का पहला सपना 5 मिनट लंबा होता है, जबकि आख़िरी सपना लगभग 45 मिनट से 1 घंटे का होता है.
5.  एक रिसर्च के मुताबिक़, एक इंसान अपने पूरे जीवनकाल में तक़रीबन 100000 से ज़्यादा सपने देखता है या यह भी कह सकते हैं कि जीवन के 6 साल वो सपने देखने में बिताता है.
6. नींद से जागने के बाद 95 फ़ीसदी लोगों को उनके सपने याद नहीं रहते हैं.
7.  सपने कुछ सीखने में मदद करते हैं और याद्दाश्त को मज़बूत बनाते हैं.
8. महिला और पुरुष के सपनों में फ़र्क़ होता है. दोनों अलग-अलग तरह के सपने देखते हैं. पुरुषों की तुलना में महिलाएं परिवार व अपने बच्चों से जुड़े सपने ज़्यादा देखती हैं.
9. रैपिड आई मूवमेंट और नॉन रैपिड आई मूवमेंट के दौरान देखे गए सपनों में फ़र्क़ होता है.
10. 48 फ़ीसदी ऐसे लोग सपने में आते हैं, जिन्हे आप जानते हैं.
11. नेत्रहीन लोगों को देख पानेवाले लोगों के मुक़ाबले ज़्यादा सपने आते हैं.
12. अल्कोहल पीने से नींद और सपने दोनों की क्वालिटी पर असर होता है.
13. सपनों पर कंट्रोल करना भी संभव है. कई सपने ऐसे होते हैं, जिनमें व्यक्ति भले ही सो रहा हो पर उसे पता होता है कि वो सपना देख रहा है और इस सपने को अपनी इच्छानुसार कंट्रोल कर सकता है. इसे ल्यूसिड ड्रीम्स कहा जाता है.