Health

सबसे पहले इन बातों का ध्यान रखें-

– पेट में भारीपन, कब्ज़, डायरिया और गैस की शिकायत होने पर दही खाएं.
– संतुलित आहार लें, जिसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर हो.
– जिन खाद्य पदार्थों से आपको तकलीफ़ होती हो, ऐसी चीज़ों को डायरी में नोट करके रखें और उनके सेवन से बचें.

एसिडिटी व गैस

Gastric Problem


– सुबह दो केले खाकर एक कप दूध पीने से कुछ ही दिनों मेें एसिडिटी से आराम मिलता है.
– चोकर सहित आटे की रोटी खाने से भी फायदा होता है.
– खाना खाने के बाद दूध के साथ दो बड़े चम्मच ईसबगोल लेने से एसिडिटी में लाभ होता है.
– संतरे के रस में थोड़ा भुना हुआ जीरा और पिसा हुआ सेेंधा नमक मिलाकर पीने से आराम मिलता है.
– दिन में दो-तीन बार अदरक के रस में पुदीने का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से लाभ होता है.
– एसिडिटी से छुटकारा पाने के लिए अदरक के रस में थोड़ा-सा सेंधा नमक और भुना हुआ जीरा डालकर सेवन करें और ऊपर से आधा ग्लास छाछ पीएं.
– एक चम्मच अजवायन में चौथाई चम्मच नींबू का रस मिलाकर चाटें. गैस शीघ्र शांत होगी.
– पेट में गैस होने पर शुद्ध हींग पीसकर उसे रूई केफाहे पर रखकर नाभि पर रखें. इससे गैस निकल जाएगी व दर्द ठीक हो जाएगा.

पेटदर्द

Gastric Problem


– थोड़ा अजवायन या पुदीना चबाने से पेटदर्द की तकलीफ़ दूर हो जाती है.
– 1 ग्राम सेंधा नमक और 2 ग्राम अजमोद का चूर्ण खाने से पेटदर्द से तुरंत आराम मिलता है.
– 3 ग्राम इमली की कोमल पत्तियों को सिल पर पीसकर उसमें 1 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर पीने से पेटदर्द से छुटकारा मिलता है.
– मूली के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से भोजन के बाद पेट में होनेवाले दर्द या गैस में राहत मिलती है.  
– 2-2 ग्राम जामुन और आम की गुठलियों का चूर्ण छाछ के साथ दिन में तीन बार लेने से पेटदर्द दूर होता है.
– मेथी का चूर्ण दही में मिलाकर खाने से पेट की मरोड़ का शमन होता है या मेथी की सब्ज़ी के रस में काला अंगूर मिलाकर पीने से भी मरोड़ की शिकायत दूर हो जाती है.
– हींग और काला नमक डालकर गर्म किया हुआ तेल पेट पर लगाने से आराम मिलता है.

कब्ज़
– ज्यादा से ज्यादा फाइबर को अपने आहार में शामिल करें.
– अपने आहार में पर्याप्त फल और सब्ज़ियां शामिल करें.
– दिन की शुरुआत शहद मिले एक ग्लास गुनगुने पानी से करें.
– हर घंटे पर एक ग्लास पानी पीएं. दिन में कम से कम 8-10 ग्लास पानी पीएं.
– रात को सोने से पहले एक चम्मच शहद एक ग्लास ताज़े पानी में मिलाकर पीएं. कब्ज़ नहीं होगा.
– दो बड़े पीले पके संतरों का रस सुबह नाश्ते से पहले पीएं.
– खाली पेट एक ग्लास पानी में एक नींबू का रस व एक ग्राम सेंधा नमक मिलाकर कुछ दिन सेवन करें. इससे पुराने से पुराना कब्ज़ भी दूर हो जाता है.
– हरड़ चूर्ण रात को फांककर 250 मि.ली. गुनगुना पानी पीएं. सुबह उठते ही पेट साफ़ हो जाएगा.
– सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ 3 ग्राम सौंफ का चूर्ण लेने से कब्ज़ में फ़ायदा होता है.
– सवेरे उठकर खाली पेट दो सेब का सेवन करने से कब्ज़ की शिकायत दूर होती है.
– सुबह उठने पर बिना कुछ खाए 4-5  मुनक्का खाने से कब्ज़ दूर होता है.

सीने में जलन

Gastric Problem


– अल्कोहल, मसालेदार चीज़ों और कैफीन से दूर रहें. स्मोकिंग न करें, क्योंकि इससे समस्या और बढती है.
– थोड़े-थोड़े अंतराल पर कुछ न कुछ खाते रहें. अच्छी तरह चबाकर खाएं.
– गर्म पानी में अदरक का छोटा-सा टुकड़ा डालें. कुछ मिनट रहने दें और खाने के पहले पी लें.

दस्त
– सुखाए हुए संतरे के छिलके और मुनक्के के सूखे बीज समान मात्रा में घोंटकर पीने से दस्त बंद हो जाते हैं.  
– खूनी दस्त होने पर गाय के दूध का मक्खन 10 ग्राम खाकर ऊपर से छाछ पीएं.
– सौंफ और जीरा समान मात्रा में लेकर भूनकर पीस लें. आधा-आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ लेने से दस्त में फ़ायदा होता है.
– चुटकीभर सोंठ एक चम्मच शहद के साथ लेने से दस्त में आराम मिलता है.
– गर्मी के कारण दस्त हो रहे हों तो 8-10 सिंघाड़े खाकर मट्ठा पीएं. इससे एक दिन में आराम मिलेगा.
– कच्चे केलों को उबालकर छील लें. एक बर्तन में थोड़ा घी गर्म करें और 2-3 लौंग की छौंक देकर केला डालें. धनिया पाउडर, हल्दी, सेंधा नमक मिले हुए दही को इसमें डाल दें. थोड़ा पानी डालकर पकाएं. इसे दस्त में खाने से विशेष लाभ होता है.

हमारा शरीर खुद ही हमें कई बातों का संकेत देता है, बस ज़रूरत है उन संकेतों को पहचानने की. इसी तरह जब हमारावज़न बढ़ता है तो भी शरीर संकेत देता है, समय पर उनको पहचानकर ध्यान दें वर्ना सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.

  • सबसे पहला संकेत है कि आपको खुद अपना शरीर हेवी लगने लगता है. आप अक्सर सोचने लगते हो कि कहीं मेरावज़न बढ़ तो नहीं रहा. 
  • आपके कपड़े आपको टाइट होने लगते हैं, पुराने कपड़े अब नहीं आते.
  • आप खर्राटे लेने लगते हैं, अगर कोई आपका अपना कहे कि आजकल आप खर्राटे लेने लगे हो तो नाराज़ होने कीबजाय गम्भीरता से लें इस बात को क्योंकि सोने के दौरान अनियमित सांसों से ऐसा होता है. दरअसल जब शरीर मेंफैट्स बढ़ता है तो गर्दन के आसपास भी फैट्स बढ़ जाता है जिससे सांस की नली संकरी हो जाती है और सांस लेनेमें रुकावट व दिक़्क़त होने लगती है. बेहतर होगा आप डॉक्टर के पास जाकर हल निकालें.
  • थोड़ी सी शारीरिक गतिविधि से आपकी सांस फूलने लगे, सीढ़ियां चढ़ने पर, चलने फिरने पर भी सांस फूल जाए तोसमझ जाएं कि डायटिंग करके हेल्दी लाइफ़स्टाइल से वज़न कंट्रोल किया जाए.
Healthy Foods
  • रूटीन चेकअप पर पता चले कि आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है. अगर आप वज़न कम करेंगे तो ब्लड प्रेशर भी कमहो जाएगा क्योंकि आपके कार्डीओवैस्क्युलर सिस्टम को शरीर को ऑक्सिजन सप्लाई करने के लिए कम मेहनतकरनी पड़ेगी. 
  • अगर आपका वजन बढ़ता है तो आप टाइप 2 डायबिटीज़ के रिस्क पर आ जाते हैं. बहुत ज़्यादा प्यास लगने लगे, बार बार यूरिन जाना पड़े और पिछले कुछ समय में फैट्स भी बढ़ा हो तो सतर्क हो जाएं. 
  • कॉलेस्टरॉल का बढ़ना भी बड़ा संकेत है और यह मात्र वज़न कम करने से कम नहीं होगा बल्कि हेल्दी ईटिंग, डायटिंगऔर एक्सरसाइज़ से कम होगा.
  • परिवार में कोलोन या ब्रेस्ट कैंसर की हिस्ट्री है तो आपको शुरुआत से ही डायटिंग को अपनी आदत में शुमार करलेना चाहिए, क्योंकि इस तरह के कैंसर का मोटापे से गहरा संबंध होता है.
Healthy Lifestyle

डायटिंग का मतलब ना खाना नहीं, बल्कि हेल्दी खाना होता है

  • अक्सर लोगों के मन में यह धारणा होती है कि डायटिंग का मतलब है खाना बंद कर दो या एकदम कम कर दो.
  • लेकिन यह सोच ग़लत है, डायटिंग का मतलब होता है अनहेल्दी चीज़ों को छोड़कर हेल्दी चीज़ें खाएं. 
  • फ़्राइड चीज़ों को बेक्ड से रिप्लेस करें.
  • चीनी और स्टार्च का सेवन कम कर दें.
  • नमक कम कर दें.
  • ग्रीन टी का सेवन करें, इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं.
  • प्रोटीन का सेवन बेहद ज़रूरी है. प्रोटीन के सोर्स- दालें, ड्राइफ्रूट्स, बींस, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, दही, फिश, सोयाबीन, अंडा.
  • फ़ाइबर का अधिक इस्तेमाल करें. फल और सब्ज़ियां फ़ाइबर का अच्छा सोर्स है. खीरा, गाजर, सलाद और हरीपत्तेदार सब्जियां ज़रूर खाएं.
  • पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें. यह टॉक्सिंस को बाहर करता है, मेटाबॉलिज़्म को बेहतर करता है.
  • गुनगुना पानी पीएं. हो सके तो सुबह शहद और नींबू गुनगुने पानी में लें.
  • हेल्दी ब्रेकफ़ास्ट लें, रिसर्च बताते हैं कि नाश्ता आपको डायबिटीज़ के ख़तरे से बचाता है. जो लोग नाश्ता करते हैंउन्हें डायबिटीज़ का ख़तरा नाश्ता ना करनेवालों की तुलना में कम रहता है.
  • इतना ही नहीं ब्रेकफ़ास्ट आपको मोटापे से बचाता है. जो लोग नाश्ता नहीं करते उनकी वेस्ट लाइन नाश्ता करनेवालों की तुलना में अधिक होती है. भले ही लंच ठीक से ना करें लेकिन नाश्ता हेल्दी करेंगे तो फ़ैट्स से बचेंगे.
Healthy Lifestyle Tips
  • जो लोग नाश्ता करते हैं उनका एनर्जी लेवल अधिक होता है और वो दिनभर ऐक्टिव बने रहते हैं. 
  • नाश्ते से पाचन तंत्र संतुलित रहता है. यह क्रेविंग से बचाता है. जो लोग नाश्ता नहीं करते उन्हें दिनभर में मीठा खानेकी, जंक फ़ूड की और चाय आदि की तलब ज़्यादा लगती है, जिससे वो अधिक कैलरीज़ का सेवन कर लेते हैं औरमोटापे का शिकार होने लगते हैं.
  • एक बार में ज़्यादा खाने की बजाए अपनी मील्स को डिवाइड करें. दिन में 4-6 बार छोटी-छोटी मील्स लें. 
  • हेल्दी सूप्स और सलाद को शामिल करें. 
  • रात को हल्का खाना लें और सोने से दो घंटे पहले डिनर कर लें. 
  • खाने के हेल्दी ऑप्शन्स की लिस्ट बना लें, जैसे- खिचड़ी, ओट्स, ब्राउन ब्रेड सैंडविच, ब्राउन राइस, दाल, इडली, सादा डोसा, उपमा, पोहा आदि.
  • डायट के अलावा रोज़ आधा घंटा कुछ एक्सरसाइज़, वॉक या योगा ज़रूर करें.
  • नींद पूरी लें और स्ट्रेस कम लें.
Healthy Lifestyle
  • सबसे ज़रूरी कि वज़न बढ़ने पर जब कपड़े टाइट होने लगें तो नए साइज़ के कपड़े लेने की बजाय अपना फ़िटनेसलेवल बढ़ाकर, हेल्दी ईटिंग कर, डायट और कसरत से वज़न कम करने पर फ़ोकस करें और उन्हीं कपड़ों में फिटहोने पर ध्यान दें! क्योंकि स्वास्थ्य से बड़ा धन कोई नहीं, वज़न बढ़ने पर कई बीमारियां एक साथ घेर लेती हैं औरइनमें से कई बीमारियां काफ़ी गंभीर और जानलेवा तक हो सकती हैं. आज से बल्कि अभी से अपनी बॉडी के संकेतोंको पहचानें, उन्हें नज़रअंदाज़ क़तई ना करें और उनपर ध्यान देकर एक्शन लें. स्वस्थ रहें और हेल्दी खाएं!
  • भोलू शर्मा

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ब्लड प्योरिफाई करने से लेकर बॉडी को डिटॉक्सीफाई करने और एसिड का संतुलन बनाए रखने जैसे बॉडी के कई महत्वपूर्ण फंक्शन किडनी करती है. यानी अगर किडनी हेल्दी है, तो आपके कई बॉडी फंक्शन्स सही तरीके से होते रहेंगे और आप भी हेल्दी रहेंगे. इसलिए ज़रूरी है किडनी की एक्स्ट्रा केयर. इसके लिए सबसे पहले अपनी कुछ ऐसी डेली हैबिट्स को बदलेें, जो आपकी किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

1. कम पानी पीनाः अगर आपको भी कम पानी पीने की आदत है, तो इसे तुरंत छोड़ दें. दिन भर में कम से चार लीटर पानी ज़रूर पीएं. किडनी के सही फंक्शन के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत ज़रूरी है. ये शरीर से सारे टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में किडनी की मदद करता है. कम पानी पीने से किडनी पर बहुत बुरा प्रेशर पड़ता है और शरीर के टॉक्सिन्स भी नहीं निकल पाते. इसलिए किडनी को हेल्दी रखना है, तो खूब पानी पीएं.

Good Health Habits



2. देर तक यूरिन रोकनाः कई लोगों को आदत होती है कि घर से बाहर होने पर घंटों यूरिन रोक कर रखते हैं. लेकिन यूरिन रोकना या घंटों तक पेशाब न करना किडनी को डैमेज कर सकता है. इससे किडनी पर दबाव पड़ता है. इसलिए यूरिन को देर तक रोकने की आदत फौरन बदल दें.

3. दवाओं का बहुत ज़्यादा सेवनः कुछ दवाएं किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं. डॉक्टरों द्वारा प्रिस्क्राइब की गई दवाएं ज़रूरी हैं, लेकिन दवाओं की उतनी ही डोज़ लें जितनी डॉक्टर ने कहा है. बात-बात पर पेनकिलर खाने की भी आदत छोड़ दें. लंबे समय तक पेनकिलर का सेवन आपकी किडनी को ख़राब कर सकता है. इसके अलावा एस्पिरीन और कुछ एंटीबायोटिक दवाएं भी किडनी को डैमेज कर सकती हैं, इसलिए ख़ुद अपने डॉक्टर बनने की कोशिश न करें.

4. ज्यादा मीठा खानाः ज़्यादा मीठा खाना भी किडनी को नुकसान पहुंचाता है. अधिक मीठा खाने से यूरिन से प्रोटीन निकलने लगता है, जो किडनी की हेल्थ के लिए ठीक नहीं है. इसके अलावा मीठी चीज़ों से लगाव डायबिटीज़ का कारण भी बन सकता है और डायबिटीज़ की वजह से किडनी से जुड़ी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है. इसलिए मीठे से दूर ही रहें.

5. अधिक मात्रा में नमक का सेवनः नमक का अत्यधिक सेवन हाई ब्लडप्रेशर का कारण बन सकता है, जिसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है. ब्लडप्रेशर कंट्रोल करने के साथ ही किडनी को सेहतमंद बनाए रखने के लिए दिनभर में 5 ग्राम से अधिक नमक का सेवन करने से बचें.

6. ब्लडप्रेशर को मॉनिटर न करनाः ब्लडप्रेशर को समय-समय पर मॉनिटर करना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि हाई ब्लडप्रेशर किडनी को नुक़सान पहुंचा सकता है. इसलिए रेग्युलर बेसिस पर अपना ब्लड प्रेशर चेक कराते रहें, वरना आपका बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर आपकी किडनी को डैमेज कर सकता है.

7. प्रोटीन का अत्यधिक सेवनः ज़रूरत से ज़्यादा प्रोटीन का सेवन करना भी किडनी के लिए नुक़सानदेह होता है. दरअसल प्रोटीन से रिलीज़ हुए नाइट्रोजन और अमोनिया जैसे टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालना किडनी की ज़िम्मेदारी होती है. अगर आप ज़रूरत से ज़्यादा प्रोटीन का सेवन करेंगे, तो किडनी को अपना काम करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी, जिससेआपकी किडनी समय से पहले ख़राब हो सकती है.

8. पूरी नींद न लेनाः अगर आप भी औसत से कम सोते हैं, तो समझ जाइए कि आपकी किडनी डेंजर जोन में है, क्योंकि कम नींद से भी किडनी में प्रॉब्लम्स होती हैं. दरअसल नींद के दौरान ही हमारा शरीर, किडनी के टिशूज़ हील होते हैं. अगर आप भरपूर नींद नहीं लेते, तो इससे आपकी आर्टरीज़ भी ब्लॉक हो सकती हैं, जिससे आपका ब्लड प्रेशर बढ़ेगा और किडनी को नुकसान पहुंचेगा, इसलिए रोज़ाना 7-8 घंटे की नींद ज़रूर लें.

Good Health Habits



9. विटामिन्स की कमीः रिसर्च से पता चला है कि विटामिन बी 6 और विटामिन डी की कमी से किडनी डैमेज़ होने और किडनी स्टोन होने का ख़तरा बढ़ जाता है, इसलिए अपनी डायट में ताज़ी हरी सब्ज़ियों और फलों को शामिल करें.

10. कैफीन का अधिक सेवनः अध्ययन से ये भी पता चला है कि लंबे समय तक ज़्यादा मात्रा में कैफीन का सेवन किडनी फेलियर की वजह बन सकता है. दरअसल कैफीन से ब्लडप्रेशर बढ़ता है, जो किडनी पर बहुत ज़्यादा प्रेशर डालता है. इसलिए कैफीन का सेवन आज से ही कम कर दें.

11. स्मोकिंगः स्मोकिंग आपके हार्ट और फेफड़े को सबसे ज़्यादा नुकसान तो पहुंचाता ही है, ये आपकी किडनी की हेल्थ के लिए भी ख़तरे की घंटी है. ख़ासकर अगर आपको हाई ब्लडप्रेशर और डायबिटीज़ है और आप स्मोकिंग भी करते हैं, तो आपकी किडनी को ज़्यादा ख़तरा है.


12. एक्सरसाइज़ न करनाः जो लोग रोज़ाना एक्सरसाइज़ नहीं करते, उन्हें कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं. एक्सरसाइज़ न करनेवालों को ब्लडप्रेशर या डायबिटीज़ का ख़तरा भी ज़्यादा होता है. जिसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है. इसलिए हेल्दी किडनी चाहते हैं, तो नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करें.

13. अल्कोहल का सेवनः अल्कोहल का ज़्यादा सेवन भी किडनी पर दबाव बढ़ाता है. ज़रूरत से ज़्यादा शराब पीने से बॉडी डीहाइड्रेट होती है. आपकी यह आदत शरीर के सभी ऑर्गन्स की कार्यप्रणाली को बाधित करती है. इससे किडनी और लिवर पर बुरा प्रभाव पड़ता है और यह दोनों को ख़राब कर सकता है.

14. इंफेक्शन होने पर तुरंत इलाज न करानाः हां ये सच है कि अगर किसी तरह का इंफेक्शन होने पर आप उसका टाइम पर इलाज नहीं कराते, तो वो आपके किडनी पर असर कर सकता है. इसलिए अगर अगली बार आपको फ्लू भी हो, तो एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स करके उसे पूरी तरह ट्रीट करें. स्टडीज़ से पता चला है कि अगर किसी इंफेक्शन का इलाज नहीं कराया गया, तो वो किडनी में भी स्प्रेड हो सकता है और किडनी के फंक्शन को प्रभावित कर सकता है.

Good Health Habits


15. जंक फूड भी बिगाड़ता है किडनी की सेहतः किडनी की प्रॉब्लम्स से बचना चाहते हैं, तो फौरन जंक फूड खाना बंद कर दें. जंक फूड में नमक और कार्बोहाइडेट्स बहुत ज़्यादा मात्रा में होता है, जो आपकी किडनी के लिए नुकसानदायक है.

16. कोल्ड ड्रिंक्स का ज़्यादा सेवन भी किडनी के लिए है बुराः अगर आपक अक्सर ही सोडा या कोल्ड ड्रिंक पीते हैं, तो अपनी ये आदत तुरंत बदल डालिए. रिसर्च से पता चला है कि आर्टिफिशियली स्वीटंड ड्रिंक्स से किडनी फेलियर का ख़तरा दोगुना हो जाता है.


सावधान, ये लक्षण किडनी में प्रॉब्लम्स के संकेत हो सकते हैं

Good Health Habits

– शरीर का वजन अचानक बढ़ने लगना.
– शरीर में अक्सर सूजन रहना.
– अगर आपको यूरिन कम आने लगे.
– पेशाब का रंग गाढ़ा हो जाना या रंग में बदलाव आना भी किडनी प्रॉब्लम का लक्षण हो सकता है.
– जब आपको बार-बार पेशाब होने का एहसास हो, पर पेशाब न हो.
– पेशाब की मात्रा बढ़ जाना या कम हो जाना.
– पेशाब करते वक्त दर्द या जलन महसूस होना.
– पेशाब करते वक्त रक्त का आना.
– झाग जैसा पेशाब आना.
– अत्यधिक कमजोरी और थकान महसूस होना.
– चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी.
– हर समय ठंड महसूस होना.
– त्वचा में रैशेज़ और खुजली.

Mammogram

कैंसर को लेकर कई लोगों को कुछ भ्रम बना रहता है, ख़ासकर ब्रेस्ट कैंसर के मामले में. इसी से जुड़े मैमोग्राम के बारे में भी महिलाओं को बहुत कम जानकारी होती है. उन्हें इसके बारे में संपूर्ण जानकारी हो, इसलिए यहां इसके बारे में प्रश्नोत्तर के रूप बता रहे हैं. पुणे के जुपिटर हॉस्पिटल की डॉ. प्रांजली गाडगिल, जो ब्रेस्ट कैंसर सर्जन हैं, ने इसके बारे में विस्तारपूर्वक बताया.

मैमोग्राम होता क्या है?
मैमोग्राम यह ब्रेस्ट (स्तन) के मुलायम ऊतक का निकाला गया विशेष प्रकार का एक्स-रे होता है. यह जांच मैमोग्राफी सेंटर में ख़ास उपकरण द्वारा की जाती है. अति सूक्ष्म, कम ऊर्जावाले रेडिएशन द्वारा हर एक ब्रेस्ट के दो एक्स-रे निकाले जाते है. रेडिओलॉजिस्ट इन चित्रों का परिक्षण करके रिजल्ट तैयार करते है.

स्तन की कोई शिकायत न होने पर मैमोग्राम क्यों करवाना?
स्तन का कर्करोग यानी ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे अधिक होनेवाला कैंसर है, इसीलिए विशेषज्ञों द्वारा सलाह दी जाती है कि महिलाओं को ४० साल की उम्र के बाद इसकी वार्षिक जांच ज़रूर करवानी चाहिए. नियमित जांच करनेवाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का निदान, हाथ को गांठ का स्पर्श होने से पहले ही हो सकता है. प्रारंभिक अवस्था में इलाज करने से इसका इलाज आसानी से होता है. साथ ही कोई गम्भीर समस्या या जान का ख़तरा भी नहीं रहता. स्वस्थ महिलाओं में इस उद्देश्य से की गई जांच को स्क्रिनिंग मैमोग्राफी कहा जाता है.

स्तन में गांठ होनेपर मैमोग्राफी करवानी चाहिए या सोनोग्राफी?
४० साल से कम उम्र की महिलाओ के लिए प्रथम स्तन की सोनोग्राफी अर्थात अल्ट्रासाउंड जांच की जाती है. सोनोग्राफी के अंतर्गत एक्स-रे का उपयोग ना करके, ध्वनि तरंग का उपयोग किया जाता है. ४० साल से अधिक उम्र की महिलाओं का, प्रथम मैमोग्राफी उसके बाद आवश्यकतानुसार सोनोग्राफी की जाती है. दोनों ही जांच एक-दूसरे के पूरक होने से, कई बार पूर्ण निदान के लिए दोनों उपकरणों का उपयोग किया जाता है. इन जांच के लिए विशेषज्ञों की सलाह भी अनिवार्य है.

मैमोग्राम में दिखनेवाली हर गांठ, ज़रुरी है कि कैंसर ही हो?
८० प्रतिशत गांठें कैंसर की (मतलब मलिग्नंट) न होकर अन्य कई वजहों से भी हो सकती है. इन दोषों को बिनाइन ब्रेस्ट डिसीज़ कहा जाता है. इसके अंतर्गत ब्रेस्ट सिस्ट फाइब्रोएड़ेनोमा इन्फेक्शन्स तथा अन्य कई क़िस्म के स्तन की बीमारी आती है.


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मैमोग्राफी के लिए जाते समय क्या-क्या तैयारी करनी चाहिए?
सुबह स्नान के बाद पाउडर, क्रीम, डिओड्रेंट आदि का इस्तेमाल किए बिना चेकअप के लिए जाना चाहिए. इस जांच के लिए खाली पेट रहने की ज़रुरत नहीं है. पूर्व में किए गए सभी मैमोग्राफी तथा सोनोग्राफी के रिपोर्ट अपने साथ रखें. नई जांच की तुलना पुरानी फिल्म की रिपोर्ट को देख उसके साथ करना आवश्यक होता है. पहले के बायोप्सी तथा महत्वपूर्ण सर्जरी के रिपोर्ट भी साथ में रखना आवश्यक है.

मैमोग्राफी करते समय दर्द होता है क्या?
एक्स-रे लेते समय स्तन को ५ से १० सेकंड प्लेट्स के बीच में रखा जाता है, जिससे स्तन के ऊपर दबाव महसूस होता है. अनुभवी टेक्निशियन और आधुनिक उपकरण होने से जांच बिल्कुल आसानी से होता है. इसके लिए आई.वी. इंजेक्शन तथा कॉन्ट्रास्ट डाय की आवश्यकता नहीं होती.

मैमोग्राम एब्नार्मल आने पर क्या करना चाहिए?
मैमोग्राम में कुछ अनुचित दिखाए देने पर उसका उचित निदान करने के लिए कुछ और जांच की जाती है. अधिकतर सोनोग्राफी द्वारा ही संदेह को दूर किया जाता है. कभी टोमोसिंथेसिस या ब्रेस्ट एमआरआई तथा विशेष इमेजिंग उपकरणों का उपयोग भी किया जाता है. कैंसर की या उसके प्राथमिक अवस्था की अगर ज़रा भी संभावना है, तो सुई की जांच मतलब बायोप्सी की जाती है. हाथ को स्पर्श न होनेवाली गांठ की बायोप्सी के लिए सोनोग्राफी का उपयोग किया जाता है.

मैमोग्राफी करने से क्या कैंसर से बच सकते है?
नियमित रूप से वार्षिक मैमोग्राम करनेवाली महिलाओं में कैंसर का निदान प्रथम चरण में ही होता है. इस वजह से इलाज आसान होकर किसी गम्भीर ख़तरे को टाला जा सकता है. मैमोग्राफी से कैंसर का प्रजनन रुकता नहीं है, किंतु समयानुसार निदान और उपचार संपन्न करने से नुक़सान कम होता है.

फैमिली हिस्ट्री में मां, बहन, मौसी, बुआ आदि इनमें से किसी को कैंसर हो, तो क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
ब्रेस्ट कैंसर यह ५ से १० प्रतिशत मरीज़ों में आनुवांशिक होता है. ऐसी संभावना होने पर उचित स्तन रोग चिकित्सक/ब्रेस्ट सर्जन से सलाह लेकर जेनेटिक टेस्टिंग करवाना चाहिए. आप की आयु, अब तक के स्तन की जांच के रिपोर्ट, फैमिली हिस्ट्री, जेनेटिक रिपोर्ट इन सभी का अध्ययन करके योग्य चेकअप और उपचार की सलाह दी जाती है.


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हाथों को गांठ का स्पर्श महसूस हो, किंतु मैमोग्राफी में दिखाई न दे तो क्या करना चाहिए?
स्तन की कोई भी शिकायत होने पर मैमोग्राफी करने से पहले डॉक्टर द्वारा चेकअप करवाना चाहिए. मैमोग्राफी में गांठ न दिखाई देने के और भी कई कारण हो सकते है. जांच के समय ठीक से पोजीशन न दी गई हो, तो स्तन का पूर्ण भाग चित्र में नहीं आता है. कुछ महिलाओं में स्तन का गहन घनिष्ठ (डेन्स ब्रेस्ट) होने पर सिर्फ़ एक्स-रे की जांच पर्याप्त नहीं होती, इसीलिए सोनोग्राफी या अन्य उपकरण की सहायता ली जाती है. जांच द्वारा संतुष्टि न होने पर स्तन रोग चिकित्सक या ब्रेस्ट सर्जन की सलाह अवश्य ले.

जिस महिला का ब्रेस्ट कैंसर का निदान होने के बाद उपचार हुआ हो, तो क्या उसे भी मैमोग्राफी करवानी चाहिए?
मास्टेक्टॉमी की ऑपरेशन द्वारा स्तन का पूर्ण हिस्सा अगर निकाला गया हो, फिर भी दूसरे स्तन की वार्षिक जांच आवश्यक है. स्तन का कुछ ही हिस्सा रखकर लम्पेक्टॉमी की गई हो, तो शुरुआती एक-दो साल हर छह महीने में मैमोग्राफी की जाती है और उसके बाद वार्षिक जांच की जाती है. कैंसर के मरीज़ों को ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाहनुसार नियमित जांच करवाते रहना ज़रूरी है.

– ऊषा गुप्ता


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सर्दियों में डायट का ख़ास ध्यान रखना बहुत जरूरी है. सर्दी का सुहाना मौसम अपने साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं भी लेकर आता है, इनसे बचने और हेल्दी रहने के लिए अपनी डायट में ये चीजें जरूर शामिल करें. शामिल करें कुछ ख़ास पोषक तत्व. सर्दियों में इन चीजों से मिलती है शरीर को गर्मी.

Winter Diet Plan

ऐसे प्लान करें अपना विंटर डायट चार्ट

विंटर में ये नाश्ता करें
सर्दियों में पूरे दिन एनर्जेटिक रहने के लिए सुबह का नाश्ता करना न भूलें. नाश्ते में ब्रेड, उपमा, सैंडविच, डोसा आदि ले सकते हैं. एक ग्लास मलाई निकाला हुआ दूध भी पीएं.

विंटर में ये लंच करें
सर्दियों में लंच में हरी सब्ज़ी, रोटी, दही या छाछ, चावल के साथ छिलके वाली दाल, गरम सूप और हरी चटनी खाएं.

विंटर में ये डिनर करें
सर्दियों में डिनर यानी रात का खाना जल्दी खाएं. रात का खाना दोपहर के खाने की अपेक्षा हल्का होना चाहिए. सोने से करीब 4 घंटे पहले डिनर कर लें. खाने में खिचड़ी, दलिया जैसी हल्की चीज़ें खाएं. खाने के बाद अदरक वाला गरम दूध पीएं.

सर्दियों में ये चीजें जरूर खाएं

  • ठंड के मौसम में शकरकंद खाना फ़ायदेमंद होता है. ये शरीर को गरम रखने के साथ ख़ून भी बढ़ाता है. इसे आप भूनकर या उबालकर खा सकते हैं.
  • ठंड के मौसम में अदरक वाली चाय तो सभी पीते हैं, मगर इसे अन्य रूप में जैसे- सब्ज़ी आदि में डालकर भी खाएं, क्योंकि अदरक में ज़िंक, क्रोमियम और मैगनीशियम की मात्रा अधिक होती है जिससे सर्दियों के मौसम में कोल्ड व फ्लू से लड़ने में शरीर को मदद मिलती है.
  • सर्दियों में इम्यून सिस्टम को मज़बूत करने के लिए पत्तागोभी ज़रूर खाएं. इसे आप सब्ज़ी बनाकर या सलाद के रूप में खा सकती हैं. पत्तागोभी को बारीक़ काटकर इसमें नमक, कालीमिर्च और नींबू का रस मिलाकर खाएं.
  • ठंड के मौसम में बीटरूट खाना फ़ायदेमंद है, ये शरीर की ताकत बढ़ाता है. इसे आप सलाद के रूप में खा सकते हैं या फिर सैंडविच आदि में डालकर.
  • सर्दियों में रागी, ज्वार, जौ, बाजरा आदि को भी अपनी डायट में शामिल करें. इन सबको मिक्स करके पीस लें और रोटी बनाकर खाएं.

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Winter Diet Tips

सर्दियों में शरीर के लिए ज़रूरी विटामिन्स
सर्दियों में फिट और हेल्दी रहने के लिए अपनी डायट में ये जरूरी विटामिन्स शामिल करें. ये पोषक तत्व आपको सर्दियों में होने वाली बीमारियों से बचाकर रखेंगे.

विटामिन सी
सर्दियां आते ही खांसी, ज़ुकाम, बुखार, फ्लू आदि की शिकायत होने लगती है. अतः डायट में विटामिन सी से भरपूर चीज़ें शामिल करें. ये आपके इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाकर बीमारियों से बचाता है. विटामिन सी कोलेजन के निर्माण में भी मदद करता है. इससे सर्दियों में भी त्वचा की चमक बरक़रार रहती हैं

स्रोत
सभी तरह के खट्टे फलों में विटामिन सी पाया जाता है, जैसे- संतरा, मौसंबी, नींबू आदि. इसके अलावा खजूर में भी विटामिन सी होता है. वैसे आजकल मार्केट में विटामिन सी के टैबलेट्स भी उपलब्ध हैं. आप चाहें तो ये भी खा सकती हैं.

विटामिन डी
वैसे तो पूरे साल शरीर को विटामिन डी की ज़रूरत होती है, मगर ठंड में इसकी ज़रूरत बढ़ जाती है. सर्दियों के मौसम में कुछ देर धूप ज़रूर सेंके. ठंडी में कई लोगों को जोड़ों में दर्द की शिकायत हो जाती है, अतः उनके लिए विटामिन डी बेहद ज़रूरी है. सुबह की धूप ज़्यादा फ़ायदेमंद होती है.

स्रोत
विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत है धूप, लेकिन आप यदि किसी कारण से पर्याप्त धूप नहीं ले पातें, तो बाज़ार में मिलने वाले विटामिन डी फोर्टिफाइड मिल्क और सीरियल्स भी खा सकते हैं.

विटामिन ई
सर्दियों में त्वचा रूखी और पपड़ीनुमा हो जाती है, अतः विटामिन ई का सेवन ज़रूरी है. इसमें मौजूद मॉइश्‍चर के गुण आपकी त्वचा को कोमल बनाए रखने में मदद करते हैं.

स्रोत
मीट, फिश, पालक, ब्रोकोली आदि विटामिन ई का अच्छा स्रोत है. इमली में भी विटामिन ई की भरपूर मात्रा होती है.

विटामिन बी कॉम्पलेक्स
बी ग्रुप के विटामिन्स बी1 से लेकर बी12 तक ठंड के मौसम में ज़रूरी होते हैं. ये स्किन को सॉफ्ट बनाए रखने में सहायक हैं. साथ ही फटी एड़ियों, फटे होंठ और स्किन को भी फटने से बचाते हैं.

स्रोत
हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, अंडे, चिकन लीवर, फिश आदि विटामिन बी कॉम्पलेक्स के अच्छे स्रोत हैं.

ओमेगा 3 फैटी एसिड
ये विटामिन नहीं है, मगर सर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक है. ये एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता है. जिन लोगों को ठंड में जोड़ों के दर्द की शिकायत होती है, उनके लिए ओमेगा 3 फैटी एसिड बहुत ज़रूरी होता है, ये शरीर में कैल्शिमय लेवल को बढ़ाकर हड्डियों को मज़बूत बनाने में मदद करता है. फलैक्ससीड ओमेगा 3 का बेहतरीन स्रोत है. इसके अलावा अखोरट, सामन और टूना जैसी मछलियां भी ओमेगा 3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत हैं.

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अगर आपकी इम्युनिटी अच्छी है तो आप कई रोगों और संक्रमणों सेअपने आप बचे रह सकते हैं या उनसे बेहतर तरीक़े से लड़ सकते हैं. यहीवजह है कि फिट रहने के लिए इम्युनिटी बेहतर रखना बेहद ज़रूरी हैऔर यह आसन भी है. आपके किचन में ही ऐसी चीज़ें और मसाले हैं जो आपकी इम्युनिटी को बेहतर बना सकते हैं. इन्हें अपने डायट में शामिल करें और हेल्दी रहें.

अदरक: इसमें एंटी इंफ्लेमेट्री गुण होते हैं जो इम्युनिटी को बेहतर बनाते हैं. यह सर्दी-ज़ुकाम व गले की सूजन आदि से भीआपका बचाव करती है. अदरक की चाय शहद व नींबू मिला के पियें या अदरक के टुकडों पे काला नमक व नींबू का रसडाल के खाने के साथ लें.

नींबू: विटामिन सी से भरपूर नींबू में एंटीसेप्टिक व एंटीफंगल गुण होते हैं जो आपकी इम्युनिटी को बेहतर करते हें. इसेकिसी भी रूप में अपने खानपान में शामिल ज़रूर करें.

लहसुन: यह इम्युनिटी को बढ़ाने में एक तरह से सप्लीमेंट का काम करता है. यह भी आपको सर्दी-ज़ुकाम से बचाता है. इसमें अलाइसिन नाम का तत्व होता है, जो इंफेक्शन्स और बैक्टीरिया से लड़ता है. जो लोग एक हफ़्ते में लहसुन की 6 कलियां खाते हैं, उन्हें पेट के कैंसर की संभावना 50% तक कम होती है. इसे खाने में शामिल करें. अगर आपको ऐसिडिटीकी समस्या है तो रोज़ सुबह खाली पेट लहसुन की दो कलियां पानी के साथ निगल जायें.

शहद: यह अमृत की तरह काम करता है. यह एनर्जी बूस्टर है और आयुर्वेद में इसे बेहद गुणकारी बताया गया है. यह हार्ट डिसीज़, बीपी, अस्थमा से लेकर सर्दी-ज़ुकाम व एलर्जी तक से बचाव करता है. 

काली मिर्च: इसमें भी एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. विटामिन सी से भरपूर होती है, यह शरीर से ज़हरीले तत्वों को दूर करने का काम करती है.

हल्दी: यह नेचुरल एंटीसेप्टिक है और इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. खाने में इसका नियमित प्रयोग रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है. 

दही: यह कैल्शियम, विटामिन ई व प्रोटीन से भरपूर होता है. दही में ज़िंक होता है, जिसकी कमी से इम्यून सिस्टम कमज़ोरहो जाता है. यह प्रोबायोटिक है यानी गुड बैक्टीरिया दही में भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इनका नियमित सेवन इम्यूनिटीबढ़ाता है. दही खायें इम्युनिटी बढ़ाएं. 

हींग: इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी, एंटीबायोटिक और एंटीवायरल गुण होते हैं. जिससे हमारी इम्युनिटी बढ़ती है.

Immunity Boosters

आंवला: यह विटामिन सी का बेहतरीन स्रोत है और इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाता है. नियमित रूप से सुबह आंवले कारस व शहद मिलाकर लें, तो कई बीमारियों व संक्रमण से बचाव होता है.

आजवाइन: यह बेहद गुणकारी है. एक टीस्पून आजवाइन को पानी में उबालकर पीने से, बुख़ार, बीमारियों व इंफेक्शन सेबचाव होता है. 

पालक: इसमें आयरन, कैल्शियम काफ़ी मात्रा में होता है. पालक व अन्य हरी सब्ज़ियों में विटामिन, मिनरल, फॉलिकएसिड व फाइबर्स होते हैं. हरी पत्तेदार सब्ज़ियां एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं, जो इम्यून सिस्टम को मज़बूत करकेआपको हेल्दी रखती हैं. यह नई कोशिकाओं के निर्माण व डीएनए के रिपेयर में मदद करता है. यही वजह है कि इसे सुपरफूड कहा जाता है.

लौंग: इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है. यह गले के व दांतों के इंफेक्शनको कम करती है.

गाजर: गाजर एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है, इसके अलावा यह विटामिन ए व कैरोटिनाइड का स्रोत है.

पत्तागोभी: यह ग्लूटामाइन से भरपूर होती है. ग्लूटामाइन दरअसल इम्यूनिटी बढ़ानेवाला तत्व है.

दालचीनी: इसमें एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो हर तरह के इंफेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं. इसकापाउडर दही, सलाद या चाय में मिलाके भी लिया जा सकता है. अगर गले में ख़राश है तो चुटकीभर दालचीनी पाउडर ले केऊपर से पानी पी लें. खांसी होने पे शहद में दालचीनी पाउडर मिलाके लें.

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टमाटर: इसमें लाइकोपीन होता है, जो शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रलाइज़ कर देता है और कैंसर से बचाव करताहै. ये एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम करने में भी सहायक होता है.

ग्रीन टी: शोध बताते हैं कि इसमें मौजूद पॉलीफीनॉल्स इंफ्लूएंज़ा के वायरस का ख़ात्मा करने में सहायक हैं. यहएंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है और इम्यून सिस्टम पर सकारात्मक प्रभाव डालती है.

ओट्स/जौ: यह कई तरह की बीमारियों व फ्लू से रक्षा करता है, क्योंकि इनमें बीटा-ग्लूकैन नाम का फाइबर है, जोइम्यूनिटी बढ़ाता है. जिसमें एंटीमाइक्रोबियल और एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज़ भी होती हैं.

ब्लैक टी: इसमें मौजूद अमीनो एसिड इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार है और यह संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाती है.

तुलसी: इसके हेल्थ बेनिफिट्स से हम सभी वाक़िफ़ हैं इसीलिए इसे पूजा जाता है. यह एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल औरएंटीइन्फ्लामेट्री है. यह सर्दी-ज़ुकाम में राहत देती है. तुलसी की पत्तियां खाने से कई तरह के संक्रमणों से बचाव होता हैऔर इसका काढ़ा बनाकर पीने से भी काफ़ी लाभ होता है.

बादाम: इसमें मौजूद विटामिन ई इम्यूनिटी को बढ़ाता है, साथ ही इसमें राइबोफ्लेविन और नायसिन भी होता है, जो स्ट्रेससे बेहतर तरीक़े से लड़ने में मदद करता है.

अनार: यह विटामिन्स, फॉलिक एसिड और एंटीऑक्सीटेंड के गुणों से भरपूर है और कई तरह के कैंसर से बचाव करता है. 

सरसों का तेल: इसमें काफ़ी मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है, जो अस्थमा व सर्दी से राहत दिलाता है. इसका सेवनइम्यूनिटी बढ़ाता है. जिन्हें सांस की बीमारी या सर्दी की समस्या हो तो सरसों के तेल को गर्म करके उसमें लहसुन या सेंधानमक मिलाकर सीने पे लगाने से राहत मिलती है. 

Immunity Boosters

इस तरह बढ़ायें इम्यूनिटी

  • रोज़ योग, ध्यान और कसरत करें.
  • सिगरेट-शराब का कम सेवन करें.
  • एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर चीज़ों का सेवन करें,जैसे- नट्स, ब्रोकोली, हरी मिर्च, पपीता, संतरा, शकरकंद, कीवी, स्ट्रॉबेरी, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां.
  • जिंक इम्यूनिटी बढ़ाने व बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी है. डार्क चॉकलेट, कद्दू के बीज व फलियां जिंक केबेहतरीन स्रोत हैं. इनका सेवन समय-समय पर करें.
  • वज़न को नियंत्रण में रखें.
  • जंक फ़ूड कम खायें.
  • नींद पूरी लें.
  • स्ट्रेस कम लें.
  • हाईजीन का ख़्याल रखें.
  • हाइड्रेटेड रहें, पानी भरपूर पियें.
  • हेल्दी सूप पियें. बेहतर होगा घर पे ही तैयार किया हुआ सूप लें, ताकि आर्टिफिशियल कलर व प्रिज़र्वेटिव से बचेरहें.
  • कोल्ड ड्रिंक्स की बजाय ताज़ा फलों का रस, सब्ज़ी का जूस, नींबू पानी या नारियल पानी पियें.
  • इम्यूनिटी बढ़ानेवाले फ़ूड्स को डायट में शामिल करें.
  • डायट के चक्कर में पोषण कम ना होने दें, वर्ना इम्यूनिटी कमज़ोर होने लगेगी.
  • बेवजह दवाएं ना खायें और ख़ासतौर से बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर ना लें.
  • डायट को बैलेंस रखने की कोशिश करें यानी आपकी थाली में तरह-तरह के रंग की सब्ज़ियाँ व फल हों.
  • मौसम के अनुसार खाने व लाइफस्टाइल में बदलाव करें. 
  • प्रदूषण से बचाव करें.
  • बहुत अधिक शुगर, आर्टिफ़िशियल स्वीटनर व प्रोसेस्ड फ़ूड से बचें, ये इम्यूनिटी को कमज़ोर करते हें.

गणपति

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हमारा स्वास्थ्य काफ़ी हद तक हमारे पेट और पाचन तंत्र से जुड़ा रहता है, इसलिए हेल्दी रहने के लिए पाचन तंत्र औरमेटाबॉलिज़्म का सही और हेल्दी रहना बेहद ज़रूरी है. कैसे रखें अपने पाचन तंत्र का ख़्याल आइए जाने.

हो सही शुरुआत: जी हां, दिन की शुरुआत सही होगी तो पूरा दिन सही होगा और सेहत भी दुरुस्त रहेगी. सही शुरुआत केलिए हेल्दी और पौष्टिक नाश्ता ज़रूरी है. नाश्ता पौष्टिक होना ज़रूरी है- फल, ड्राई फ़्रूट्स, दलिया, उपमा, पोहा, कॉर्नफ़्लेक्स, दूध, फ़्रूट जूस, अंकुरित अनाज,दालें, अंडा, पराठे, दही आदि. पौष्टिक नाश्ता आपका दिनभर संतुष्ट रखताऔर इससे पाचन तंत्र संतुलित रहता है. ये दिनभर की ऊर्जा प्रदान करता है. एसिडिटी से राहत दिलाता है, क्योंकि अगरआप नाश्ता नहीं करते हैं, तो ऐसिड बनने लगती है, जो काफ़ी तकलीफ़ देती है.

हेल्दी डायजेशन के लिए प्रोबायोटिक्स ज़रूरी है: क्या आप जानते हैं कि बैक्टीरिया भी हेल्दी और अनहेल्दी होते हैं. हेल्दीबैक्टीरिया पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं. हेल्दी बैक्टीरिया आपको प्रोबायोटिक्स सेमिलते हैं. आप प्रोबायोटिक्स के प्राकृतिक स्रोतों को भोजन में शामिल करें. दही, ख़मीर वाले प्रोडक्ट्स, छाछ व रेडीमेडप्रोबायोटिक्स ड्रिंक्स का सेवन करें.

Digestive Health Tips

स्ट्रेस से दूर रहें: स्ट्रेस यानी तनाव पूरे शरीर व ख़ासतौर से पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. इससे गैस, ऐसिडिटी, क़ब्ज़ जैसी समस्या हो सकती है. तनाव के कारण पेट में ब्लड व ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है जिससेपेट में ऐंठन, जलन जैसी समस्या होने लगती है, साथ ही पेट में मैजूद हेल्दी बैक्टीरिया में भी असंतुलन आने लगता है. इसके अलावा तनाव से नींद भी नहीं आती और नींद पूरी ना होने से पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता. 

प्रोटीन रिच फूड खाएं: ये मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाता है. प्रोटीन के लिए आप पनीर, चीज़ व अन्य डेयरी प्रॉडक्ट्स शामिल करसकते हें. इसके अलावा अंडा, चिकन, फिश भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं और ये मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाते हैं.

Digestive Health Food

सेब, केला और पपीता ज़रूर खाएं: सेब में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जो पेट के स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं. सेबफाइबर का अच्छा स्रोत भी है और गुड बैक्टीरिया को पनपाने में भी मदद करता है. पपीते में विटामिन ए, बी और सी औरकई तरह के एन्ज़ाइम्स होते हैं, जो खाने को डायजेस्ट करने में मदद करते हैं. रिसर्च बताते हैं कि पपीता खाने सेडायजेस्टिव सिस्टम में सुधार होता है. केले में फाइबर और पेक्टिन भरपूर मात्रा में होता है, जो आंतों के स्वास्थ्य के लिएबहुत फायदेमंद होता है.

डायट में फाइबर शामिल करें: भोजन में फाइबर जितना ज़्यादा होगा पेट उतना ही स्वस्थ होगा क्योंकि आपको क़ब्ज़ कीसमस्या नहीं होगी. फाइबर कोलोन की कोशिकाओं को स्वस्थ रखता है और पेट साफ़ रखता है. अपने भोजन में साबूतअनाज, दालें, गाजर, ब्रोकोली, नट्स, छिलके सहित आलू, मकई, बींस व ओट्स को शामिल करें.

अदरक का सेवन करें: अदरक पेट के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है. यह पाचन को बेहतर करता है. अदरक के टुकड़ेकरके ऊपर से नींबू का थोड़ा सा रस डालें और भोजन के साथ खाएं. आपका हाज़मा बेहतर होगा. अपच की समस्या नहीं होगी.

Digestive Health Tips

लहसुन मेटाबॉलिज़्म को बूस्ट करता है: लहसुन को भी डायट में शामिल करें. यह ना सिर्फ़ मेटाबॉलिज़्म को बेहतर करता है बल्कि वज़न कम करने में भी सहायक है और हार्ट को भी हेल्दी रखता है.

जीरा भी है बेहद हेल्दी: जीरा आंतों को और गर्भाशय को भी साफ़ रखता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. जीरा भूख भीबढ़ाता है और पेट संबंधी कई समस्याओं से राहत दिलाता है.

ग्रीन टी है मेटाबॉलिज़्म बूस्टर: जी हां, ग्रीन टी ज़रूर लें इससे पाचन बेहतर होता है. यह मेटाबॉलिज़्म बूस्टर मानी जाती हैऔर वज़न भी कम करती है.

Digestive Health Tips

साबूत अनाज और बींस: यह पाचन तंत्र को ठीक रखने में सहायक होते हैं. क़ब्ज़ से बचाते हैं और पेट संबंधी कईसमस्याओं से राहत दिलाते हैं. इसी तरह बींस में भी फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर करता है. बींस से गुड़बैक्टीरिया भी बढ़ते हैं और कब्ज़ की समस्या भी नहीं होती.

हरी पत्तेदार सब्ज़ियां: ये प्रोटीन व आयरन का भी अच्छा सोर्स मानी जाती हैं और विटामिंस से भरपूर होती हैं. साथ ही साथये पेट को व पाचन तंत्र को हेल्दी रखती हैं. ये फाइबर का बेहतर स्रोत होती हैं, इनमें ख़ासतौर से पालक और गोभी में कईपोषक तत्व- फोलेट, विटामिन ए, सी और के होता है. शोध बताते हैं कि हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में एक ख़ास तरह का शुगरहोता है जो आंतों के हेल्दी बैक्टीरिया (गट बैक्टीरिया) के निर्माण को बढ़ाता है.

रसीले व मौसमी फल व ड्राई फ़्रूट्स खाएं: फल पेट को हेल्दी रखते हैं. क़ब्ज़ की समस्या नहीं होने देते. फाइबर से भरपूरहोते हैं. ड्राई फ़्रूट्स भी फाइबर से भरपूर होते हैं और आंतों को हेल्दी रखते हैं. हाल ही के रिसर्च से पता चला है कि प्रूनयानी सूखा आलूबखारा आंतों, मुंह और वजाइना में पाया जानेवाला ख़ास क़िस्म का बैक्टीरिया के निर्माण में सहायकहोता है जिससे पाचन तंत्र भी मज़बूत होता है. इसी तरह से खजूर भी पेट के लिए काफ़ी हेल्दी माना जाता है.

Boost Metabolism

हाईड्रेटेड रहें: पानी ख़ूब पिएं क्योंकि यह ज़हरीले तत्वों को बाहर करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. शरीर मेंपानी व नमी की कमी ना होने पाए. नींबू पानी, नारियल पानी या ताज़ा फल व सब्ज़ी का जूस भी लें. 

एक्टिव रहें, एक्सरसाइज़ व योगा करें: रोज़ाना 30 मिनट एक्सरसाइज़ करें, वॉक करें, एक्टिव रहें. लिफ़्ट की बजायसीढ़ियों का इस्तेमाल करें. योगा भी कर सकते हैं. साइक्लिंग, स्विमिंग भी कर सकते हें. यह रूटीन आपकी मांसपेशियोंको लचीला बनाएगा और पाचन को बेहतर. वरना शारीरिक गतिविधियों की कमी से क़ब्ज़ जैसी समस्या होने लगेगी.

अनहेल्दी चीज़ों से रहें दूर: पाचन तंत्र की हेल्थ के लिए ज़रूरी है कि अनहेल्दी चीज़ों से भी दूरी बनाए रखें. शराब व कैफेनका सेवन कम करें क्योंकि यह भीतर से शरीर को ड्राई करते हैं और डीहाईड्रेट करते हैं. साथ ही ये क़ब्ज़ की समस्या भीपैदा करते हैं. पानी के नाम पर शुगरी ड्रिंक ना पिएं. तला हुआ ज़्यादा ना खाएं. प्रोसेस्ड फूड व शुगर का सेवन कम या नाकरें. मैदा और ज़्यादा मसालेदार भोजन ना करें, क्योंकि ये क़ब्ज़, गैस, एसिडिटी, अपच को बढ़ाकर पाचन को कमज़ोरकरते हैं.

पूर्वा शर्मा

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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और महान क्रिकेटर कपिल देव को गुरुवार रात एक बजे सीने में दर्द की शिकायत हुई, उन्हें दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इमेर्जेंसी में उनकी एंजियोप्लास्टी की गई. फ़िलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और कहा जा रहा है कि वो ख़तरे से बाहर हैं.

फैंस इस खबर से घबरा गए हैं और उनके जल्द ठीक होने की दुआ कर रहे हैं. उनके जानकार बता रहे हैं कि कुछ दिन पहले जब उन्होंने देखा था तो काफ़ी कमज़ोर लग रहे थे. कपिल का कहना था कि वो डायबिटीज के कारण स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं.

Kapil Dev

सभी जानते हैं कि कपिल ने भारत को 1983 में उस वक़्त विश्व विजेता बनाया था जब क्रिकेट की दुनिया में वेस्ट इंडीज़ की तूती बोलती थी और भारत को बेहद कमज़ोर टीम माना जाता था.

Kapil Dev

कई सेलिब्रिटीज़ उनके जल्द ठीक होने की दुआएँ कर रहे हैं और सोशल मीडिया के ज़रिए उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामनाएँ भेज रहे हैं.

Kapil Dev
Kapil Dev
Kapil Dev

हम भी उनके बेहतर स्वास्थ्य की दुआ करते हैं.

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अधिकांश महिलाओं के लिए पीरियड्स एक बेहद दर्दनाक अनुभव होता है, उन्हें इतना दर्द होता है कि पीरियड्स को लेकर मन में डर बैठ जाता है. इससे छुटकारा पाने के लिए वो अक्सर पेनकिलर का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन दर्दनिवारक दवाओं के अपने साइडइफेक्ट होते हैं इसलिए बेहतर होगा कि घरेलू उपायों को जाना और अपनाया जाए तो बेहद सरल होने के साथ साथ कारगर भी हैं.

पपीते का सेवन: पपीते की तासीर गर्म मानी जाती है और अक्सर दर्द की वजह होती है खुलकर फ्लो का ना होना, ऐसे में पपीता खायें क्योंकि इससे खुलकर फ्लो होता है और दर्द में आराम आता है. यही नहीं पपीता पेट के लिए भी काफ़ी अच्छा माना जाता है और पाचन को सही रखता है.

अदरक और काली मिर्च: अदरक को पानी में उबाल कर चाय की तरह पिएँ. अदरक के टुकड़े करके पानी में डालकर चाय बना लें, चाहें तो काली मिर्च भी मिला लें या फिर अदरक के टुकड़े करके उन्हें चबाकर खाएँ. यह पाचन को भी बेहतर करता है.
अजवायन: यह भी पेट के लिए बेहद फ़ायदेमंद है. इसकी भी तासीर गर्म होती है और यह गैस की समस्या से निजात दिलाने में कारगर है. अक्सर माहवारी के समय गैस की समस्या बढ़ जाती है जो दर्द की एक वजह होती है.

तुलसी की पत्तियाँ: चाय में इसे डालें क्योंकि इसमें दर्दनिवारक तत्व होते हैं जो काफ़ी तहाए पहुँचाते हैं.

जीरा: यह गर्भाशय को साफ़ करता है. इसमें दर्दनिवारक गुण भी हैं. जीरे की चाय बनाकर पिएं, पानी में भी उबालकर इसे पी सकती हैं या यूं ही चटकीभर जीरा चबा चबा कर खाएँ. इससे काफ़ी आराम मिलेगा.

Menstrual Cramps

मेथी: रात को एक कप पानी में एक टीस्पून मेथीदाना भिगो दें और अगले दिन इस पानी क सेवन करें.

गर्म पानी से सिकाई: एक बोतल में गर्म पानी भरकर उससे सिकाई करें काफ़ी आराम मिलेगा. यह पारंपरिक उपाय काफ़ी लोग अपनाते हैं, क्योंकि यह सबसे आसान और कारगर भी है.

तिल का तेल: इससे पेडू में यानी पेट के निचले भाग में हल्के हाथों से मालिश करें. यह गर्माहट और आराम देगा.
एक्सरसाइज़: शोध बताते हैं कि एरोबिक्स से पेन में काफ़ी राहत मिलती है. जो महिलाएँ लगातार दो महीनों तक हफ़्ते में तीन बार आधे घंटे एरोबिक्स करती हैं उन्हें पीरियड्स में दर्द बेहद कम होने लगता है. अगर एरोबिक्स नहीं करना चाहतीं तो सिर्फ़ नंगे पैर ज़मीन पर या घास पर चलें इससे भी दर्द में आराम मिलता है. अगर आप नियमित रूप से योग करती हैं तो भी पेन में आराम मिलेगा और आप ऐसे योगा पोज़ भी ट्राई कर सकती हैं जो इस दर्द में आराम दिलाते हैं.

मेडिटेशन: सांस लेने की तकनीक आपको काफ़ी निजात दिला सकती है. यह मांसपेशियों को रिलैक्स करती है और इसे रिलैक्सेशन टेकनीक ही कहा जाता है. यह रक्त संचार बेहतर करके मस्तिष्क को सुकून का एहसास कराती हैं, दर्द पैदा करनेवाले हार्मोन्स को कम करके राहत का आभास कराती है.
नमक का सेवन कम करें और पानी खूब पिएं: पीरियड्स आने से कुछ दिन पहले से नमक खाना या तो बंद कर दें या कम करें, मसालेदार भोजन, तला-भुना भी ना खाएँ और फ़र्क़ देखें. इस तरह का खाना वॉटर रिटेंशन को बढ़ाता है जिससे गैस, अपच, भारीपन होता है और दर्द का एहसास ज़्यादा होता है. साथ ही पानी खूब पिएँ ताकी डीहाईड्रेट ना हों.

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पीरियड्स को आज भी शर्मिंदगी का विषय माना जाता है! यही वजह है कि बहुत सी महिलाएँ आज भी काफ़ी तकलीफ़ में रहती हैं. इसी के चलते टाटा ट्रस्ट्स ने पहल की मेंस्ट्रुअल हाइजीन प्रोग्राम की. यह शुरुआत द टाटा वाटर मिशन के तहत हुई और इसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.

भारत के कई राज्यों के गाँवों में फेज़ वाइज़ इसको लेकर सर्वे किए गए. राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, उत्तराखंड, झारखंड, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के गाँवों को भी इसमें शामिल किया गया.

Menstruation Stigma

आज भी कई महिलाएँ पैड्स की जगह कपड़ा ही यूज़ करती हैं जो काफ़ी अनहाइजिनिक होता है और कई तरह के इंफ़ेक्शन्स का डर बना रहता है.

सर्वे में पाया गया कि

  • 70% महिलाओं को यह भी पता नहीं होता कि उन्हें पीरियड्स क्यों होते हैं.
  • 92% महिलाओं को लगता है कि वाइट डिसचार्ज उनके शरीर के लिए हानिकारक होता है.
  • 40% महिलाओं को लगता है कि पीरियड्स के बारे में बात करने में कोई बुराई नहीं.
  • लेकिन उनमें से मात्र 10.25% ने ही इसको लेकर अपनी मां से बात की.
  • 55% महिलाएँ पीरियड्स के दौरान किचन में नहीं जातीं.
  • कई महिलाओं को 9km पैदल चलकर जाना पड़ता है पीरियड्स से जुड़ा सामान लाने के लिए.
  • 20% महिलाएँ पीरियड्स के दौरान टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं करतीं.
Menstrual Hygiene

इन तथ्यों के आधार पे टाटा वाटर मिशन ने मेंस्ट्रुअल हाइजीन प्रोग्राम बनाया जिसमें किशोरों को जागरुक करने का काम किया गया. महिलाओं से बात की, लड़कों और पुरुषों से भी बात की गई. इस अभियान के तहत इन बातों पे ध्यान दिया गया-

  • स्कूल में व समाज में भी किशोरियों व महिलाओं से बात करके एजुकेट किया गया, उनको ट्रेनिंग व सैनिटाइज़ेशन सेशंस दिए गए.
  • समाज में पुरुषों व स्कूल में भी किशोरों से बात करके उन्हें पीरियड्स के बारे में जागरूक किया गया और इस बात का एहसास कराया गया कि उनका सहयोग कितना ज़रूरी है और यह सहयोग किस तरह से मदद कर सकता है.
  • महिलाओं को ईको फ़्रेंडली प्रोडक्ट्स मिल पाएं इसके लिए सप्लाई चेन की व्यवस्था की गई, साथ ही स्थानीय लोगों व महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित किया गया इस तरह के प्रोडक्ट्स का निर्माण स्थानीय स्तर पर ही हो पाए.
  • सैनिटरी वेस्ट को सुरक्षित तरीक़े से डिसपोज़ किया जा सके इसके प्रबंध से जुड़ी बातों की व्यवस्था भी की गई.
Menstrual Hygiene

पिछले तीन सालों से यह प्रयास चल रहा है और इसका असर व प्रभाव भी नज़र आया. कई महिलायें व बच्चियां इससे लाभान्वित हुईं, लेकिन लॉकडाउन के चलते इस क्रम में बदलाव व रुकावट निश्चित तौर पे आई है जिससे जो महिलायें व बच्चियाँ पैड्स यूज़ करने लगी थीं वो फिर से कपड़े के इस्तेमाल को मजबूर हो गईं.

Menstrual Hygiene

काम बंद है तो पैड्स भी उन्हें उपलब्ध नहीं. इसी के चलते उन्हें अब इस दिशा में जागरुक किया का रहा है कि कपड़े को हाइजिनिक तरीक़े से कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्हें खुद अपना कपड़े का पैड बनाने की दिशा में भी आत्मनिर्भर किया जा रहा है.

Menstrual Hygiene

सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को भी इस काम में आत्म निर्भर बनाया गया जिससे वो भी उधोग की शुरुआत कर सकें और इसी वजह से उत्तर प्रदेश में 1500 कपड़े के पैड्स बनाए व बेचे गए. यही नहीं लगभग 20,000 से अधिक महिलाओं को खुद घर में इस तरह के क्लोथ पैड्स बनाने की ट्रेनिंग भी दी गई.

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ख़ूबसूरत नज़र आने के लिए महिलाएं हर तरह की एक्सरसाइज़ और डायटिंग करने के साथ ही आउटफ़िट से लेकर एक्सेसरीज़ तक ढेरों एक्सपेरिमेंट करती हैं, लेकिन ऐसा करते समय कई बार वो ऐसी गलतियां करती हैं, जो उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती हैं. आइए, हम आपको सेहत से जुड़ी ऐसी 10 गलतियों के बारे में बताते हैं, जो लगभग सभी महिलाएं करती हैं.

Health Mistakes All Women Make

1) हाई हील वाले फुटवेयर्स पहनना
अक्सर महिलाएं कॉन्फिडेंट और इंप्रेसिव नज़र आने के लिए हाई हील वाली सैंडल पहनती हैं. अगर आप भी ऐसा करती हैं, तो ज़रा संभल जाइए, क्योंकि हाई हील वाले फुटवेयर्स आपका कॉन्फिडेंस बढ़ाएं न बढ़ाएं, लेकिन आपकी सेहत का ग्राफ़ ज़रूर गिरा देते हैं. दरअसल, हाई हील वाली सैंडल पहनने से बॉडी पोस्चर प्रभावित होता है, जिससे जोड़ों में दर्द, पैरों में सूजन, बैक पेन आदि की समस्या हो सकती है.
कैसे बचें इस गलती से?
अगर आप अपनी सेहत के साथ समझौता नहीं करना चाहतीं, तो 1.5 इंच या उससे कम हील वाले फुटवेयर्स पहनें. इससे आपका शौक़ भी पूरा हो जाएगा और किसी तरह की समस्या भी नहीं होगी.

2) हैवी हैंडबैग का इस्तेमाल
मोबाइल, वॉलेट, एक्सेसरीज़, कॉस्मेटिक्स आदि को हैंडबैग में एडजस्ट करने के चक्कर में महिलाएं अक्सर बड़ा बैग चुनती हैं और उनका ये ओवरसाइज़्ड बैग कब ओवर लोड हो जाता है, उन्हें पता ही नहीं चलता. ऐसे में भारी-भरकम बैग की वजह से पीठ, गर्दन व कंधे में दर्द की शिकायत हो जाती है और धीरे-धीरे ये दर्द गंभीर रूप लेता है.
कैसे बचें इस गलती से?
प्लस साइज़ की बजाय छोटी साइज़ का हैंडबैग यूज़ करें और अगर आप ओवरसाइज़्ड बैग ट्राई करना ही चाहती हैं, तो उसमें कम से कम सामान रखने की कोशिश करें.

3) मेकअप उतारे बिना सो जाना
कई महिलाएं देर रात पार्टी-फंक्शन से लौटने के बाद थकान की वजह से बिना मेकअप उतारे ही सो जाती हैं, जिससे उनके चेहरे की ख़ूबसूरती बिगड़ सकती है. रात में बिना मेकअप उतारे सोने से दिनभर की जमी चिकनाई और धूल-मिट्टी त्वचा पर ही चिपकी रह जाती है, जिससे रोम छिद्र बंद हो जाते हैं और त्वचा खुलकर सांस नहीं ले पाती. नतीजतन पिंपल्स की समस्या हो जाती है. इसी तरह मस्कारा व आई मेकअप से आंखों में जलन हो सकती है.
कैसे बचें इस गलती से?
पार्टी से आने के बाद अच्छी क्वालिटी के मेकअप रिमूवर से मेकअप उतारें.

4) ड्रिंक करना
करियर के साथ ही अब शराब पीने के मामले में भी महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं, लेकिन अधिक शराब के सेवन से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में भी यह बात सामने आई है कि ज़्यादा शराब पीने से महिलाओं के मस्तिष्क के उस हिस्से को नुक़सान पहुंचता है, जो याददाश्त को नियंत्रित करता है यानी उनकी याददाश्त कमज़ोर हो जाती है. इसी तरह गर्भावस्था में भी शराब पीना ख़तरनाक हो सकता है. इससे न केवल भ्रूण के विकास में समस्या आती है, बल्कि बच्चा मिर्गी आदि का भी शिकार हो सकता है.
कैसे बचें इस गलती से?
सेहतमंद बने रहने के लिए शराब की लत से बचें और पैसिव स्मोकिंग से भी दूर रहें.

5) गलत साइज़ की ब्रा पहनना
हाल में हुए एक शोध से यह बात सामने आई है कि लगभग 70 फ़ीसदी महिलाएं ग़लत साइज़ की ब्रा पहनती हैं, जिससे लुक के साथ ही उनकी सेहत भी प्रभावित होती है. ग़लत साइज़ की ब्रा की वजह से बैक, नेक व ब्रेस्ट पेन के चांसेस बढ़ जाते हैं. साथ ही स्किन इरीटेशन, ब्लड सर्कुलेशन प्रॉब्लम व ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा भी बढ़ जाता है.
कैसे बचें इस गलती से?
ब्रा ख़रीदने से पहले अपनी ब्रेस्ट साइज़ का माप जान लें. अगर आप प्रेग्नेंट हैं, तो एक साइज़ बड़ी ब्रा ख़रीदें, ताकि वो ब्रेस्ट साइज़ के साथ एडजस्ट हो जाए.

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women

6) तनावग्रस्त रहना
कॉम्पिटीशन के इस दौर में घर और ऑफ़िस दोनों जगह ख़ुद को बेहतर साबित करने के चक्कर में अक्सर महिलाएं तनावग्रस्त हो जाती हैं. लंबे समय तक तनावग्रस्त रहने से डिप्रेशन, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिसीज़, कैंसर जैसी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, पीरियड्स के दौरान तनावग्रस्त रहने वाली महिलाओं के प्रेग्नेंट होने की संभावना कम हो जाती है. साथ ही वे सिरदर्द, पेट में ख़राबी, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों की शिकार हो जाती हैं. इतना ही नहीं, धीरे-धीरे उनमें सेक्स की इच्छा भी ख़त्म होने लगती है.
कैसे बचें इस गलती से?
इन समस्याओं से निजात पाने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करें और सकारात्मक सोच विकसित करें. इससे आपको नई ऊर्जा मिलेगी. मुमकिन हो तो वीकेंड पर दोस्तों के साथ हॉलिडे पर चली जाएं, इससे आप फ्रेश और तनावमुक्त महसूस करेंगी.

7) साइज़ ज़ीरो फिगर पाने के लिए डायटिंग
साइज़ ज़ीरो फिगर के प्रति महिलाओं की दीवानगी उन्हें डायटिंग के लिए मजबूर कर रही है, लेकिन ऐसा करते समय वो ये नहीं सोचती कि स्लिम होने की उनकी इस कोशिश का उनकी सेहत पर कितना बुरा असर होता है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, डायटिंग करने से शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिसका नतीजा आंखों के नीचे काले घेरे, चेहरे का रंग फीका पड़ना, कमज़ोर हड्डियों और लो ब्लड प्रेशर के रूप में सामने आता है. इतना ही नहीं, क्रश डायटिंग (जल्दी पतला होने के लिए डायनिंग करना) से शरीर में कैलोरीज़, मिनरल और विटामिन्स की भी कमी हो जाती है, जिससे बालों का झड़ना, दोमुंहे और बेजान बालों की समस्या बढ़ जाती है. साथ ही नाखून और त्वचा की रंगत भी फीकी पड़ जाती है.
कैसे बचें इस गलती से?
डायटिंग करने में कोई बुराई नहीं, बशर्ते वो किसी अच्छे डायटीशियन की सलाह से की जाए. डायटिंग का मतलब ये नहीं कि आप खाना-पीना पूरी तरह बंद कर दें. बेहतर होगा कि ऐसा करने की बजाय अपनी डायट में कम ़फैट, हाई प्रोटीन व फ़ाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें, ताकि स्लिम रहने के साथ ही आप हेल्दी भी बनी रहें.

8) इमोशनल ईटिंग
पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज़्यादा इमोशनल होती हैं और अपनी भावनाओं को क़ाबू में रखने के लिए कई महिलाएं खाने का सहारा लेती हैं. ऐसे में अक्सर वो मीठी और अधिक कैलोरी वाली चीज़ें खा लेती हैं, जिससे उनका वज़न बढ़ने लगता है और वो मूड स्विंग, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी बीमारियों की शिकार हो जाती हैं.
कैसे बचें इस गलती से?
‘इमोशनल ईटर’ बनने से बचें. जब भी आप पर इमोशन्स हावी होने लगें, तो उस वक़्त खाने पर से ध्यान हटाने के लिए ख़ुद को दूसरे कामों में व्यस्त रखें, जैसे- घर की सफ़ाई करें, गाना सुनें, क़िताब पढ़ें आदि.

9) पर्याप्त नींद न लेना
ख़राब सेहत के लिए कई बार अपर्याप्त नींद भी ज़िम्मेदार होती है और इसकी ज़्यादातर शिकार कामकाजी महिलाएं ही होती हैं. हाल ही में हुए एक शोध में कहा गया है कि 5 घंटे से कम सोने से हाइपरटेंशन और हार्ट डिसीज़ का ख़तरा बढ़ जाता है. साथ ही नींद पूरी न होने से हार्मोनल बैलेंस भी बिगड़ने लगता है, जिससे भूख बढ़ जाती है और ज़्यादा खाने से वज़न बढ़ने लगता है.
कैसे बचें इस गलती से?
हार्मोन्स के स्तर को बैलेंस करनेे के लिए रोज़ाना कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद लें. अच्छी सेहत के लिए ये बहुत ज़रूरी है. इससे पाचन शक्ति और याददाश्त भी बढ़ती है.

10) ख़ुद की अनदेखी
महिलाएं अक्सर घर-परिवार और ऑफ़िस का तो पूरा ख़्याल रखती हैं, लेकिन इन सबके बीच वो ख़ुद की अनदेखी कर जाती हैं. घर-परिवार की देखभाल और बच्चों की मांग पूरी करने में वो इतनी बिज़ी रहती हैं कि उन्हें अपनी सेहत का ख़्याल ही नहीं रहता. ऐसा करते समय वो ये भूल जाती हैं कि दूसरों का ख़्याल रखने के लिए पहले ख़ुद सेहतमंद होना ज़रूरी है.
कैसे बचें इस गलती से?
परिवार के साथ ही अपना भी ख़्याल रखें. ख़ुद के लिए वक़्त निकालें. संतुलिट डायट लें, सुबह वॉक पर जाएं या घर पर ही एक्सरसाइज़, योगा आदि करें. इससे आप फिट और हेल्दी रहेंगी.

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मैं 21 वर्षीया कॉलेज स्टूडेंट हूं. हर महीने पीरियड्स के एक-दो दिन पहले से ही मेरे ब्रेस्ट्स में बहुत दर्द होता है, पर मुझे डॉक्टर के पास जाने में बहुत डर भी लग रहा है. मैं क्या करूं? कृपया, मेरी मदद करें.
– राध्या गोस्वामी, हैदराबाद.

इसमें डरने की कोई बात नहीं है. आप ऐसी अकेली नहीं हैं, जिसके साथ यह हो रहा है, ऐसीबहुत-सी लड़कियां व महिलाएं हैं, जिन्हें पीरियड्स से पहले ब्रेस्ट्स में दर्द होता है. दर्द से राहत पाने के लिए पीरियड्स के दौरान अच्छी फिटिंगवाली ब्रा पहनें और पेनकिलर ले लें. ज्यादातर मामलों में इससे फ़र्क़ पड़ता है, लेकिन अगर आपको इससे राहत न मिले, तो किसी गायनाकोलॉजिस्ट को ज़रूर दिखाएं. वो आपको सही दवाइयां देंगे, ताकि आपको दर्द से राहत मिले.

Premenstrual Breast Pain
मैं 24 वर्षीया वर्किंग वुमन हूं. पिछले दिनों पेट के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत के कारण डॉक्टर की सलाह पर सोनोग्राफी करवाई. रिपोर्ट में मेरी ओवरीज़ में 4.5 से.मी. का सिस्ट दिखा है. मेरे गायनाकोलॉजिस्ट ने कहा है कि घबराने की कोई बात नहीं और 3 महीने बाद फॉलोअप करने की सलाह दी है. मैं बहुत परेशान हूं, कृपया मार्गदर्शन करें.
मान्वी मिश्रा, जयपुर.

आपकी रिपोर्ट में जिस सिस्ट के बारे में लिखा गया है, उसे फिज़ियोलॉजिकल सिस्ट कहते हैं. महिलाओं की रिप्रोडक्टिव एज में यह आम बात है. अगर घबराने की कोई बात होती, तो डॉक्टर आपको ब्लड टेस्ट्स करने की सलाह देतीं, क्योंकि आपको 3 महीने बाद फॉलोअप के लिए बुलाया गया है, इससे पता चलता है कि कोई गंभीर बात नहीं है. सिस्ट के आकार में कोई बदलाव आया या नहीं, यह जानने के लिए फॉलोअप बहुत ज़रूरी है.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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