Health

पीरियड्स को आज भी शर्मिंदगी का विषय माना जाता है! यही वजह है कि बहुत सी महिलाएँ आज भी काफ़ी तकलीफ़ में रहती हैं. इसी के चलते टाटा ट्रस्ट्स ने पहल की मेंस्ट्रुअल हाइजीन प्रोग्राम की. यह शुरुआत द टाटा वाटर मिशन के तहत हुई और इसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.

भारत के कई राज्यों के गाँवों में फेज़ वाइज़ इसको लेकर सर्वे किए गए. राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, उत्तराखंड, झारखंड, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के गाँवों को भी इसमें शामिल किया गया.

Menstruation Stigma

आज भी कई महिलाएँ पैड्स की जगह कपड़ा ही यूज़ करती हैं जो काफ़ी अनहाइजिनिक होता है और कई तरह के इंफ़ेक्शन्स का डर बना रहता है.

सर्वे में पाया गया कि

  • 70% महिलाओं को यह भी पता नहीं होता कि उन्हें पीरियड्स क्यों होते हैं.
  • 92% महिलाओं को लगता है कि वाइट डिसचार्ज उनके शरीर के लिए हानिकारक होता है.
  • 40% महिलाओं को लगता है कि पीरियड्स के बारे में बात करने में कोई बुराई नहीं.
  • लेकिन उनमें से मात्र 10.25% ने ही इसको लेकर अपनी मां से बात की.
  • 55% महिलाएँ पीरियड्स के दौरान किचन में नहीं जातीं.
  • कई महिलाओं को 9km पैदल चलकर जाना पड़ता है पीरियड्स से जुड़ा सामान लाने के लिए.
  • 20% महिलाएँ पीरियड्स के दौरान टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं करतीं.
Menstrual Hygiene

इन तथ्यों के आधार पे टाटा वाटर मिशन ने मेंस्ट्रुअल हाइजीन प्रोग्राम बनाया जिसमें किशोरों को जागरुक करने का काम किया गया. महिलाओं से बात की, लड़कों और पुरुषों से भी बात की गई. इस अभियान के तहत इन बातों पे ध्यान दिया गया-

  • स्कूल में व समाज में भी किशोरियों व महिलाओं से बात करके एजुकेट किया गया, उनको ट्रेनिंग व सैनिटाइज़ेशन सेशंस दिए गए.
  • समाज में पुरुषों व स्कूल में भी किशोरों से बात करके उन्हें पीरियड्स के बारे में जागरूक किया गया और इस बात का एहसास कराया गया कि उनका सहयोग कितना ज़रूरी है और यह सहयोग किस तरह से मदद कर सकता है.
  • महिलाओं को ईको फ़्रेंडली प्रोडक्ट्स मिल पाएं इसके लिए सप्लाई चेन की व्यवस्था की गई, साथ ही स्थानीय लोगों व महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित किया गया इस तरह के प्रोडक्ट्स का निर्माण स्थानीय स्तर पर ही हो पाए.
  • सैनिटरी वेस्ट को सुरक्षित तरीक़े से डिसपोज़ किया जा सके इसके प्रबंध से जुड़ी बातों की व्यवस्था भी की गई.
Menstrual Hygiene

पिछले तीन सालों से यह प्रयास चल रहा है और इसका असर व प्रभाव भी नज़र आया. कई महिलायें व बच्चियां इससे लाभान्वित हुईं, लेकिन लॉकडाउन के चलते इस क्रम में बदलाव व रुकावट निश्चित तौर पे आई है जिससे जो महिलायें व बच्चियाँ पैड्स यूज़ करने लगी थीं वो फिर से कपड़े के इस्तेमाल को मजबूर हो गईं.

Menstrual Hygiene

काम बंद है तो पैड्स भी उन्हें उपलब्ध नहीं. इसी के चलते उन्हें अब इस दिशा में जागरुक किया का रहा है कि कपड़े को हाइजिनिक तरीक़े से कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्हें खुद अपना कपड़े का पैड बनाने की दिशा में भी आत्मनिर्भर किया जा रहा है.

Menstrual Hygiene

सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को भी इस काम में आत्म निर्भर बनाया गया जिससे वो भी उधोग की शुरुआत कर सकें और इसी वजह से उत्तर प्रदेश में 1500 कपड़े के पैड्स बनाए व बेचे गए. यही नहीं लगभग 20,000 से अधिक महिलाओं को खुद घर में इस तरह के क्लोथ पैड्स बनाने की ट्रेनिंग भी दी गई.

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ख़ूबसूरत नज़र आने के लिए महिलाएं हर तरह की एक्सरसाइज़ और डायटिंग करने के साथ ही आउटफ़िट से लेकर एक्सेसरीज़ तक ढेरों एक्सपेरिमेंट करती हैं, लेकिन ऐसा करते समय कई बार वो ऐसी गलतियां करती हैं, जो उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती हैं. आइए, हम आपको सेहत से जुड़ी ऐसी 10 गलतियों के बारे में बताते हैं, जो लगभग सभी महिलाएं करती हैं.

Health Mistakes All Women Make

1) हाई हील वाले फुटवेयर्स पहनना
अक्सर महिलाएं कॉन्फिडेंट और इंप्रेसिव नज़र आने के लिए हाई हील वाली सैंडल पहनती हैं. अगर आप भी ऐसा करती हैं, तो ज़रा संभल जाइए, क्योंकि हाई हील वाले फुटवेयर्स आपका कॉन्फिडेंस बढ़ाएं न बढ़ाएं, लेकिन आपकी सेहत का ग्राफ़ ज़रूर गिरा देते हैं. दरअसल, हाई हील वाली सैंडल पहनने से बॉडी पोस्चर प्रभावित होता है, जिससे जोड़ों में दर्द, पैरों में सूजन, बैक पेन आदि की समस्या हो सकती है.
कैसे बचें इस गलती से?
अगर आप अपनी सेहत के साथ समझौता नहीं करना चाहतीं, तो 1.5 इंच या उससे कम हील वाले फुटवेयर्स पहनें. इससे आपका शौक़ भी पूरा हो जाएगा और किसी तरह की समस्या भी नहीं होगी.

2) हैवी हैंडबैग का इस्तेमाल
मोबाइल, वॉलेट, एक्सेसरीज़, कॉस्मेटिक्स आदि को हैंडबैग में एडजस्ट करने के चक्कर में महिलाएं अक्सर बड़ा बैग चुनती हैं और उनका ये ओवरसाइज़्ड बैग कब ओवर लोड हो जाता है, उन्हें पता ही नहीं चलता. ऐसे में भारी-भरकम बैग की वजह से पीठ, गर्दन व कंधे में दर्द की शिकायत हो जाती है और धीरे-धीरे ये दर्द गंभीर रूप लेता है.
कैसे बचें इस गलती से?
प्लस साइज़ की बजाय छोटी साइज़ का हैंडबैग यूज़ करें और अगर आप ओवरसाइज़्ड बैग ट्राई करना ही चाहती हैं, तो उसमें कम से कम सामान रखने की कोशिश करें.

3) मेकअप उतारे बिना सो जाना
कई महिलाएं देर रात पार्टी-फंक्शन से लौटने के बाद थकान की वजह से बिना मेकअप उतारे ही सो जाती हैं, जिससे उनके चेहरे की ख़ूबसूरती बिगड़ सकती है. रात में बिना मेकअप उतारे सोने से दिनभर की जमी चिकनाई और धूल-मिट्टी त्वचा पर ही चिपकी रह जाती है, जिससे रोम छिद्र बंद हो जाते हैं और त्वचा खुलकर सांस नहीं ले पाती. नतीजतन पिंपल्स की समस्या हो जाती है. इसी तरह मस्कारा व आई मेकअप से आंखों में जलन हो सकती है.
कैसे बचें इस गलती से?
पार्टी से आने के बाद अच्छी क्वालिटी के मेकअप रिमूवर से मेकअप उतारें.

4) ड्रिंक करना
करियर के साथ ही अब शराब पीने के मामले में भी महिलाएं पुरुषों से पीछे नहीं हैं, लेकिन अधिक शराब के सेवन से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में भी यह बात सामने आई है कि ज़्यादा शराब पीने से महिलाओं के मस्तिष्क के उस हिस्से को नुक़सान पहुंचता है, जो याददाश्त को नियंत्रित करता है यानी उनकी याददाश्त कमज़ोर हो जाती है. इसी तरह गर्भावस्था में भी शराब पीना ख़तरनाक हो सकता है. इससे न केवल भ्रूण के विकास में समस्या आती है, बल्कि बच्चा मिर्गी आदि का भी शिकार हो सकता है.
कैसे बचें इस गलती से?
सेहतमंद बने रहने के लिए शराब की लत से बचें और पैसिव स्मोकिंग से भी दूर रहें.

5) गलत साइज़ की ब्रा पहनना
हाल में हुए एक शोध से यह बात सामने आई है कि लगभग 70 फ़ीसदी महिलाएं ग़लत साइज़ की ब्रा पहनती हैं, जिससे लुक के साथ ही उनकी सेहत भी प्रभावित होती है. ग़लत साइज़ की ब्रा की वजह से बैक, नेक व ब्रेस्ट पेन के चांसेस बढ़ जाते हैं. साथ ही स्किन इरीटेशन, ब्लड सर्कुलेशन प्रॉब्लम व ब्रेस्ट कैंसर का ख़तरा भी बढ़ जाता है.
कैसे बचें इस गलती से?
ब्रा ख़रीदने से पहले अपनी ब्रेस्ट साइज़ का माप जान लें. अगर आप प्रेग्नेंट हैं, तो एक साइज़ बड़ी ब्रा ख़रीदें, ताकि वो ब्रेस्ट साइज़ के साथ एडजस्ट हो जाए.

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women

6) तनावग्रस्त रहना
कॉम्पिटीशन के इस दौर में घर और ऑफ़िस दोनों जगह ख़ुद को बेहतर साबित करने के चक्कर में अक्सर महिलाएं तनावग्रस्त हो जाती हैं. लंबे समय तक तनावग्रस्त रहने से डिप्रेशन, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिसीज़, कैंसर जैसी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, पीरियड्स के दौरान तनावग्रस्त रहने वाली महिलाओं के प्रेग्नेंट होने की संभावना कम हो जाती है. साथ ही वे सिरदर्द, पेट में ख़राबी, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों की शिकार हो जाती हैं. इतना ही नहीं, धीरे-धीरे उनमें सेक्स की इच्छा भी ख़त्म होने लगती है.
कैसे बचें इस गलती से?
इन समस्याओं से निजात पाने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करें और सकारात्मक सोच विकसित करें. इससे आपको नई ऊर्जा मिलेगी. मुमकिन हो तो वीकेंड पर दोस्तों के साथ हॉलिडे पर चली जाएं, इससे आप फ्रेश और तनावमुक्त महसूस करेंगी.

7) साइज़ ज़ीरो फिगर पाने के लिए डायटिंग
साइज़ ज़ीरो फिगर के प्रति महिलाओं की दीवानगी उन्हें डायटिंग के लिए मजबूर कर रही है, लेकिन ऐसा करते समय वो ये नहीं सोचती कि स्लिम होने की उनकी इस कोशिश का उनकी सेहत पर कितना बुरा असर होता है. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, डायटिंग करने से शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिसका नतीजा आंखों के नीचे काले घेरे, चेहरे का रंग फीका पड़ना, कमज़ोर हड्डियों और लो ब्लड प्रेशर के रूप में सामने आता है. इतना ही नहीं, क्रश डायटिंग (जल्दी पतला होने के लिए डायनिंग करना) से शरीर में कैलोरीज़, मिनरल और विटामिन्स की भी कमी हो जाती है, जिससे बालों का झड़ना, दोमुंहे और बेजान बालों की समस्या बढ़ जाती है. साथ ही नाखून और त्वचा की रंगत भी फीकी पड़ जाती है.
कैसे बचें इस गलती से?
डायटिंग करने में कोई बुराई नहीं, बशर्ते वो किसी अच्छे डायटीशियन की सलाह से की जाए. डायटिंग का मतलब ये नहीं कि आप खाना-पीना पूरी तरह बंद कर दें. बेहतर होगा कि ऐसा करने की बजाय अपनी डायट में कम ़फैट, हाई प्रोटीन व फ़ाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें, ताकि स्लिम रहने के साथ ही आप हेल्दी भी बनी रहें.

8) इमोशनल ईटिंग
पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज़्यादा इमोशनल होती हैं और अपनी भावनाओं को क़ाबू में रखने के लिए कई महिलाएं खाने का सहारा लेती हैं. ऐसे में अक्सर वो मीठी और अधिक कैलोरी वाली चीज़ें खा लेती हैं, जिससे उनका वज़न बढ़ने लगता है और वो मूड स्विंग, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी बीमारियों की शिकार हो जाती हैं.
कैसे बचें इस गलती से?
‘इमोशनल ईटर’ बनने से बचें. जब भी आप पर इमोशन्स हावी होने लगें, तो उस वक़्त खाने पर से ध्यान हटाने के लिए ख़ुद को दूसरे कामों में व्यस्त रखें, जैसे- घर की सफ़ाई करें, गाना सुनें, क़िताब पढ़ें आदि.

9) पर्याप्त नींद न लेना
ख़राब सेहत के लिए कई बार अपर्याप्त नींद भी ज़िम्मेदार होती है और इसकी ज़्यादातर शिकार कामकाजी महिलाएं ही होती हैं. हाल ही में हुए एक शोध में कहा गया है कि 5 घंटे से कम सोने से हाइपरटेंशन और हार्ट डिसीज़ का ख़तरा बढ़ जाता है. साथ ही नींद पूरी न होने से हार्मोनल बैलेंस भी बिगड़ने लगता है, जिससे भूख बढ़ जाती है और ज़्यादा खाने से वज़न बढ़ने लगता है.
कैसे बचें इस गलती से?
हार्मोन्स के स्तर को बैलेंस करनेे के लिए रोज़ाना कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद लें. अच्छी सेहत के लिए ये बहुत ज़रूरी है. इससे पाचन शक्ति और याददाश्त भी बढ़ती है.

10) ख़ुद की अनदेखी
महिलाएं अक्सर घर-परिवार और ऑफ़िस का तो पूरा ख़्याल रखती हैं, लेकिन इन सबके बीच वो ख़ुद की अनदेखी कर जाती हैं. घर-परिवार की देखभाल और बच्चों की मांग पूरी करने में वो इतनी बिज़ी रहती हैं कि उन्हें अपनी सेहत का ख़्याल ही नहीं रहता. ऐसा करते समय वो ये भूल जाती हैं कि दूसरों का ख़्याल रखने के लिए पहले ख़ुद सेहतमंद होना ज़रूरी है.
कैसे बचें इस गलती से?
परिवार के साथ ही अपना भी ख़्याल रखें. ख़ुद के लिए वक़्त निकालें. संतुलिट डायट लें, सुबह वॉक पर जाएं या घर पर ही एक्सरसाइज़, योगा आदि करें. इससे आप फिट और हेल्दी रहेंगी.

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मैं 21 वर्षीया कॉलेज स्टूडेंट हूं. हर महीने पीरियड्स के एक-दो दिन पहले से ही मेरे ब्रेस्ट्स में बहुत दर्द होता है, पर मुझे डॉक्टर के पास जाने में बहुत डर भी लग रहा है. मैं क्या करूं? कृपया, मेरी मदद करें.
– राध्या गोस्वामी, हैदराबाद.

इसमें डरने की कोई बात नहीं है. आप ऐसी अकेली नहीं हैं, जिसके साथ यह हो रहा है, ऐसीबहुत-सी लड़कियां व महिलाएं हैं, जिन्हें पीरियड्स से पहले ब्रेस्ट्स में दर्द होता है. दर्द से राहत पाने के लिए पीरियड्स के दौरान अच्छी फिटिंगवाली ब्रा पहनें और पेनकिलर ले लें. ज्यादातर मामलों में इससे फ़र्क़ पड़ता है, लेकिन अगर आपको इससे राहत न मिले, तो किसी गायनाकोलॉजिस्ट को ज़रूर दिखाएं. वो आपको सही दवाइयां देंगे, ताकि आपको दर्द से राहत मिले.

Premenstrual Breast Pain
मैं 24 वर्षीया वर्किंग वुमन हूं. पिछले दिनों पेट के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत के कारण डॉक्टर की सलाह पर सोनोग्राफी करवाई. रिपोर्ट में मेरी ओवरीज़ में 4.5 से.मी. का सिस्ट दिखा है. मेरे गायनाकोलॉजिस्ट ने कहा है कि घबराने की कोई बात नहीं और 3 महीने बाद फॉलोअप करने की सलाह दी है. मैं बहुत परेशान हूं, कृपया मार्गदर्शन करें.
मान्वी मिश्रा, जयपुर.

आपकी रिपोर्ट में जिस सिस्ट के बारे में लिखा गया है, उसे फिज़ियोलॉजिकल सिस्ट कहते हैं. महिलाओं की रिप्रोडक्टिव एज में यह आम बात है. अगर घबराने की कोई बात होती, तो डॉक्टर आपको ब्लड टेस्ट्स करने की सलाह देतीं, क्योंकि आपको 3 महीने बाद फॉलोअप के लिए बुलाया गया है, इससे पता चलता है कि कोई गंभीर बात नहीं है. सिस्ट के आकार में कोई बदलाव आया या नहीं, यह जानने के लिए फॉलोअप बहुत ज़रूरी है.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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बॉलीवुड की बेबी डॉल कनिका कपूर का कोरोना टेस्ट पॉज़िटिव पाया गया. वो हाल ही में लंदन से लौटी थीं. कहा जा रहा है कि कनिका इस बीच काफ़ी लोगों से मिलीं और उन्होंने लापरवाही बरती. कनिका ने पार्टी भी की थी जिसमें कई नेता और बड़े लोग शामिल थे. सांसद दुष्यंत सिंह व उनकी माँ वसुंधरा राजे और उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री भी इस पार्टी में मौजूद थे. कनिका के पॉज़िटिव पाए जाने के बाद उन्होंने भी खुद को अलग कर लिया है. कनिक लंदन में अपने बच्चों से मिलने गई थीं और उन्होंने कोई अड्वाइज़री फ़ॉलो नहीं की. अब ये देखना होगा कि वो जिन जिन लोगों से मिलीं उनको कैसे ट्रेस करके टेस्ट किया जाता है. कनिका अपनी ग़लती मानने की बजाय प्रशासन और डॉक्टर पर ही आरोप लगा रही हैं.

जाह्नवी कपूर अपनी फिल्मों से कहीं ज़्यादा अपने जिम लुक्स को लेकर चर्चा में रहती हैं. जाह्नवी अपनी फिटनेस को लेकर भी बहुत न्यूज़ में रहती हैं. आइए नज़र डालते हैं उनके फेमस जिम लुक्स पर.

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The Fitness Project by Rujuta Diwekar

फिटनेस प्रोजेक्ट: घी खाएं बिना डरे, बिना शंका व अपराधबोध के… रुजुता दिवेकर का फिटनेस मंत्र (Eat Ghee Without Fear, Without Guilt, Without Doubt: The Fitness Project by Rujuta Diwekar)

फिटनेस प्रोजेक्ट की थीम के अंतर्गत हमने आपको पहले हफ्ते की गाइडलाइन्स की जानकारी दी थी. अब आप जानें कि दूसरे हफ्ते में आपको कैसे डायट व फिटनेस को प्लान करना है.
ब्रेकफास्ट-लंच-डिनर में 1 टीस्पून घी का इस्तेमाल ज़रूर करें. बिना किसी डर के, बिना किसी शंका के, बिना किसी झिझक के और बिना अपराधबोध के बेहिचक, बेझिझक देसी घी का इस्तेमाल ज़रूर करें.

दूसरा हफ्ता- गाइडलाइन 2- कैसे शुरुआत करें?

– आप अपना नाश्ता अपनी पहली मील, जिसे आप पहले हफ्ते से फॉलो कर रहे हैं, उसके 20-90 मिनट बाद ले सकते हैं.

– दोपहर में यदि मीठा खाने की इच्छा हो या फिर आलस महसूस हो यानी आपको यह लगे कि आप अपनी क्षमता का मात्र 50% ही इस्तेमाल करके काम कर रहे हैं, तो लंच में एक्स्ट्रा टीस्पून देसी घी का डालें.

– यदि आपको कब्ज़ की समस्या रहती है, पाचन संबंधी समस्या रहती है या अच्छी नींद नहीं आती, तो रात के खाने में भी एक अतिरिक्त टीस्पून घी का इस्तेमाल करें.

घी के इस्तेमाल के अन्य तरीके, ख़ासतौर से सर्दियों में अपने जोड़ों को लचीला व त्वचा को ग्लोइंग इफेक्ट देने के लिए-
– घी में मखाने भूनकर खाएं, मिड मील यानी चाय के साथ लगभग 4 बजे.

– देसी घी में बने गोंद के लड्डू, ख़ासतौर से यदि आप उत्तर भारत या दुनिया में कहीं भी बेहद ठंडी जगहों पर रहते हों, तो मिड मॉर्निंग मील (नाश्ते के 2-3 घंटे बाद) के तौर पर खाएं.

– घी और गुड का सेवन करें, यदि आपको पीएमएस यानी पीरियड्स से पहले की तकलीफ़ होती हो, थकान महसूस होती हो या आपको हीमोग्लोबिन स्तर कम हो तो.

यह भी पढ़ें: फिटनेस का मतलब वेटलॉस या पतला होना नहीं होता… रुजुता दिवेकर का फिटनेस मंत्र! (Theme- Fitness Is Simple And Uncomplicated- The Fitness Project By Rujuta Diwekar)

आमतौर पर पूछे जानेवाले सवाल

मुझे हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर आदि की समस्या हो, तो क्या घी का सेवन किया जा सकता है?
जी बिल्कुल. घी मेटाबॉलिज़्म में लिपिड्स को बढ़ाकर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है. बेहतर होगा पैक्ड बिस्किट्स न खाएं और अल्कोहल बंद करें, न कि घी. घी पूरी तरह सुरक्षित व हेल्दी है.

मुझे डायबिटीज़, पीसीओडी है और मैं ओवरवेट हूं, तो क्या मैं घी ले सकता/सकती हूं?
जी हां, ज़रूर ले सकते हैं, क्योंकि घी में भी एसेंशियल फैटी एसिड का एक प्रकार होता है, जो वज़न और ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है.

हम देसी घी में ही खाना बनाता है, इसके बाद भी क्या ऊपर से अतिरिक्त घी डालेन की आवश्यकता है?
यह पूरी तरह आप पर निर्भर है. यह ख़्याल रखें कि आप दिन में 3-6 टीस्पून घी का सेवन करें. घी खाने का स्वाद बढ़ाता है, न कि उसे मास्क करता है.

हम तेल में खाना बनाते हैं, तो क्या हमें ऊपर से घी मिलाना चाहिए?
जी हां, ज़रूर.

क्या स्टोर से ख़रीदा घी ठीक रहेगा या हमें घर पर बनाना चाहिए?
आपको यह ध्यान में रखना होगा कि देसी गाय के दूध से बना घी हो. बड़े ब्रान्ड्स की बजाय छोटी गौशाला या महिला गृह उद्योग जैसी संस्थाओं से लेना श्रेयस्कर है.

अगर देसी गाय का घी उपलब्ध न हो, तो क्या भैंस का घी इस्तेमाल किया जा सकता है?
जी हां, आप कर सकते हैं. यह बड़े ब्रान्ड्स से घी ख़रीदने से कहीं बेहतर होगा.

भारत के बाहर रहनेवालों के लिए क्या विकल्प हैं?
कल्चर्ड व्हाइट ऑर्गैनिक बटर या क्लैरिफाइड बटर, जो हेल्थ फूड स्टोर्स पर मिलता हो. बेहतर होगा कि खुले में स्वतंत्र चरनेवाली या घास खानेवाली गाय के ही डेयरी प्रोडक्ट्स यूज़ करें.

क्या हमें मांसाहार पर भी घी का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि वो तो पहले से ही काफ़ी फैटी होता है.
आपको ज़रूर देसी घी यूज़ करना चाहिए, क्योंकि घी का अनूठा फैटी एसिड स्ट्रक्चर शरीर के लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है.

हमें कैसे पता चलेगा कि हर खाने में कितना और कितनी मात्रा में घी का इस्तेमाल करना है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या खा रहे हैं और यह जानकारी एक परिपेक्ष में सामान्यतौर पर समझ के लिए है. दाल-चावल, खिचड़ी या रोटी-सब्ज़ी में कम घी यूज़ होता है, जबकि पूरन पोली, दाल-बाटी, बाजरा रोटी में अधिक घी की आवश्यकता होती है. यदि किसी तरह का कंफ्यूज़न हो, तो घर की बुज़ुर्ग यानी दादी-नानी से सलाह लें.

घी व उसके इस्तेमाल से संबंधित अधिक जानकारी के लिए इंडियन सुपरफूड्स का घी चैप्टर पढ़ें.

घी के हेल्थ बेनीफिट्स के लिए देखें यह वीडियो

Why you must add Ghee in your meals

The fitness project 2018 – week 2 guideline #RDfitnessproject2018

Posted by Rujuta Diwekar on Tuesday, 9 January 2018

सौजन्य: https://www.rujutadiwekar.com

मेरी शादी को दो साल हो गए हैं. मुझे हाल ही में पता चला है कि मैं गर्भवती हूं. जब मैंने सोनोग्राफ़ी करवाई तो पता चला कि गर्भ यूटेरस की बजाय ट्यूब में है यानी एक्टॉपिक प्रेग्नेंसी है, यह क्या है? और इसे हटाने के लिए क्या मुझे ऑपरेशन ही कराना पड़ेगा. क्या ऐसा कोई रास्ता नहीं है, जिससे मैं प्रेग्नेंसी जारी रख सकूं?
– रेणु घोष, असम.

3-4% महिलाएं ऐसी होती हैं, जिनकी प्रेग्नेंसी यूटेरस की बजाय ट्यूब में होती है, इसे ‘एक्टॉपिक प्रेग्नेंसी’ कहा जाता है. यह स्थिति ठीक नहीं है, क्योंकि ट्यूब बहुत नाज़ुक व पतली होती है. यदि इसका तुरंत इलाज नहीं किया गया तो ट्यूब फट सकती है और मरीज़ को पेट में हैवी ब्लीडिंग हो सकती है. समय पर इलाज न किया जाए तो मरीज़ की जान को ख़तरा भी हो सकता है. इसलिए समय पर ही इस समस्या का पता चलना बेहद ज़रूरी है. इसके लिए लेप्रोस्कोपी (की होल सर्जरी) द्वारा ट्यूब को हटाया जाता है. ऐसे मामले में नॉर्मल प्रेग्नेंसी जारी रखना बहुत मुश्किल है.

यह भी पढ़ें: Personal Problems: पीरियड्स के दौरान बहुत कम रक्तस्राव होता है (What Is The Reason Of Bleeding Less During Periods?)

Ectopic Pregnancy

मेरी 25 वर्षीया सहेली को ब्लड डोनेट करते समय पता चला कि वह एचआईवी पॉ़ज़िटिव है. क्या यह संभव है कि उसका बच्चा भी एचआईवी पॉ़ज़िटिव हो? उसके पति भी एचआईवी पॉ़ज़िटिव हैं. दोनों ही हेल्दी हैं और कोई ट्रीटमेंट नहीं ले रहे हैं.
– सविता त्रिवेदी, रायपुर.

आपकी सहेली और उनके पति दोनों को ही काउंसलर से मिलना चाहिए और काउंसलर की राय लेने के बाद ही कोई निर्णय लेना चाहिए. यदि वह सेफ़ प्रेग्नेंसी चाहती हैं तो प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ मेडिसिन भी ले सकती हैं, ताकि बच्चे को इं़फेक्शन होने की संभावना को कम किया जा सके. अगर वह बच्चे को स्तनपान न कराएं तो इससे बच्चे को वायरस फैलने के चांसेस भी कम होंगे. जो भी हो, निर्णय उन्हें लेना है और सोच-समझकर कर ही निर्णय लें तो बेहतर है.

 

यह भी पढ़ें: Personal Problems: 3-4 महीनों के बाद पीरियड्स आते हैं (Why My Periods Are 3-4 Months Late?)

Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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Benefits Of Cooking

कुकिंग थेरेपी: हेल्दी रहने का बेस्ट फॉर्मूला (Cooking Therapy: Benefits Of Cooking)

खाना बनाना और उसे दूसरों को खिलाना कई लोगों के शौक में शुमार होता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि खाना बनाने का यह शौक आपको हेल्दी भी रखता है, इसीलिए इसे कुकिंग थेरेपी का नाम दिया गया है. साइंटिस्ट्स अब यह दावे के साथ कहते हैं कि कुकिंग दरअसल एक थेरेपी है, जो आपको हेल्दी रखती है और आपके रिश्तों को भी बेहतर बनाती है.

साइंस के अनुसार कुकिंग दरअसल मेडिटेशन सेशन की तरह है: क्या कभी आपने इस ओर ध्यान दिया है कि स्ट्रेस से भरा दिन और आपकी थकान घर पर आने के बाद कुछ अच्छा पकाने की सोच मात्र से ही कम हो जाती है. बहुत बार ऐसा होता है कि आप कुछ स्वादिष्ट या अपना मनपसंद खाना बनाने की तैयारी करने की सोचते हैं और उसे बनाने के बाद जो संतुष्टि आपको मिलती है, उससे आपके दिनभर की थकान व तनाव दूर होता है. आप भले ही नियमित रूप से खाना न भी बनाते हों, लेकिन यदि आप ऐसा करते हैं, तो पाएंगे कि कुकिंग सेशन एक तरह से आपके लिए मेडिटेशन का काम करता है.

थेरेपिस्ट कुकिंग को मानसिक समस्याओं के इलाज के लिए प्रयोग में लाते हैं: डिप्रेशन, घबराहट, तनाव आदि के इलाज में अब बहुत-से सायकोलॉजिस्ट व थेरेपिस्ट कुकिंग कोर्सेस को थेरेपी की तरह यूज़ करने लगे हैं, क्योंकि जो व़क्त आप कुकिंग में लगाते हो, उससे आपका ध्यान नकारात्मक स्थितियों व बातों से हट जाता है और आप रिलैक्स महसूस करते हैं.

क्रिएटिव बनाती है आपको कुकिंग: एक्सपर्ट्स ने अपने शोधों में यह भी पाया है कि कुकिंग आपको क्रिएटिव बनाती है, क्योंकि आप अपने अनुसार रेसिपी को बनाने के नए-नए तरी़के सोचते हो, नया स्वाद क्रिएट करने की कोशिश करते हो, जिससे आपकी भी क्रिएटिविटी बढ़ती है. दूसरे, कुकिंग आपको पूरे माहौल में कंट्रोल का अनुभव महसूस कराती है. आपको लगता है कि अब आप अपने अनुसार स्वाद में बदलाव ला सकते हो और जब आपको तारी़फें मिलती हैं, तो आप पॉज़िटिव महसूस करते हो.

कुकिंग और मेंटल हेल्थ का सबसे बड़ा कनेक्शन है न्यूट्रिशन: जब आप कुकिंग करते हो, तो आप अपने पोषण, डायट व हेल्थ के प्रति अपने आप ही सचेत हो जाते हो. आपके हाथ में होता है कि कितना ऑयल डालना है, कितना नमक, कितने मसाले और आपका ब्रेन यही सोचने लगता है कि किस तरह से अपनी डिश को आप और हेल्दी बना सकते हो. इससे आपको संतुष्टि महसूस होती है कि आपका खाना हेल्दी है, क्योंकि आप अपने खाने की क्वालिटी को कंट्रोल करते हो.

कुकिंग जो ख़ुशी देती है, वो घर के अन्य काम नहीं देते: एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भले ही आप कुकिंग का शौक न रखते हों, लेकिन आप जब कुकिंग करते हैं, तो यह फ़र्क़ ज़रूर महसूस करते हैं कि खाना बनाने से जो ख़ुशी व संतुष्टि का अनुभव होता है, वह बिस्तर ठीक करने, कपड़े धोने या अन्य कामों से नहीं होता. इसके पीछे की वजह यह है कि कुकिंग अपने आप में रिवॉर्डिंग एक्सपीरियंस होता है, क्योंकि कहीं-न-कहीं सबकॉन्शियस माइंड में भी यह बात रहती है कि खाना बनाने के बाद आपको इसका स्वाद भी मिलेगा. खाना बनाने के दौरान जो ख़ुशबू आती है, उसे बनता देखने का जो अनुभव होता है और यहां तक कि फल व सब्ज़ियों को काटने-छीलने के दौरान उनके रंग व आकार हमें आकर्षित करते हैं, वो मस्तिष्क में पॉज़िटिव वाइब्रेशन्स पैदा करते हैं.

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पार्टनर के साथ कुकिंग आपके रिश्ते को भी बेहतर बनाती है: जब आप साथ में खाना बनाते हो या फिर घर के कोई भी सदस्य मिल-जुलकर खाना बनाने में हाथ बंटाते हैं, तो अपने आप उनके मतभेद कम होने लगते हैं. वो नकारात्मक बातों को एक तरफ़ रखकर खाना बेहतर बनाने व उसे परोसने की तरफ़ ध्यान देने लगते हैं. ऐसे में यदि आप अपने पार्टनर के साथ किचन में काम करेंगे, तो आपके रिश्ते भी बेहतर बनेंगे. आप एक-दूसरे के साथ अधिक समय बिता पाओगे, जिससे कम्यूनिकेशन बेहतर होगा. यदि खाने में आप दोनों की पसंद-नापसंद एक नहीं है, तब भी आपके विवाद को कम करने में कुकिंग एक थेरेपी की तरह काम करेगी, क्योंकि वहां आप एक-दूसरे के बारे में सोचोगे कि चलो आज तुम्हारी पसंद का खाना बनाते हैं या फिर आज तुम्हारी फेवरेट डिश तैयार करते हैं, पर कल तुम मेरी फेवरेट डिश बनाने में मेरी मदद करोगे… आदि.

कुकिंग से बढ़ते व बेहतर होते हैं आपके कनेक्शन्स: आपके जन्मदिन पर आपके पड़ोस में रहनेवाली दोस्त आपके लिए गिफ्ट लाती है और दूसरी ओर आपकी सास आपके लिए अपने हाथों से आपका मनपसंद खाना बनाती है, तो ज़ाहिर है आपके मन को सास का खाना बनाना ज़्यादा छुएगा, क्योंकि उन्होंने आपके बारे में सोचा और ख़ुद मेहनत करके आपके लिए खाना तैयार किया. इसी तरह आप देखेंगी कि अपनी बेस्ट फ्रेंड को यदि आप अपने हाथों से कुछ बनाकर देती हैं, तो उसकी ख़ुशी दोगुनी हो जाती है. इस तरह से कुकिंग आपके कनेक्शन्स को बेहतर बनाती है. इसलिए कुक करें और कनेक्टेड रहें.

मस्तिष्क को शांत करती है कुकिंग: साइंटिस्ट्स कहते हैं कि कुकिंग के समय आपको कभी भी अकेलापन महसूस नहीं होगा. उस व़क्त आपकी चिंताएं दूर हो जाती हैं और आपका मस्तिष्क शांति का अनुभव करता है, क्योंकि आपका पूरा ध्यान अपने टास्क पर लग जाता है, जिससे कई तरह की चिंताएं व दबाव की तरफ़ ध्यान नहीं जाता और आप बेहतर महसूस करते हैं. यही नहीं कुकिंग की प्रैक्टिस आपके शरीर को भी रिलैक्स करती है. कुकिंग के समय आप फ्लो में आ जाते हो, जिससे व्यर्थ के डर, चिंताओं व तनाव से उपजा दर्द, शरीर की ऐंठन व थकान भी दूर हो जाती है.

दूसरों के लिए कुछ करने का अनुभव बेहतर महसूस कराता है: ज़ाहिर-सी बात है कि आप खाना अपने लिए नहीं बनाते, बल्कि पूरे परिवार के लिए बनाते हैं. ऐसे में उनकी पसंद-नापसंद को ध्यान में रखकर उनके लिए कुछ अच्छा करने का अनुभव आपको कुकिंग से मिलता है. कुकिंग के ज़रिए आप अपनी भावनाएं व केयर भी सामनेवाले को ज़ाहिर कर सकते हैं. यह एक तरह से मूक प्रदर्शन है प्यार व देखभाल का.

भावनाओं का प्रभाव भी होता है कुकिंग में: आप जिस भाव से खाना बनाते हैं, उसका असर आपके खाने में नज़र आता है. लेकिन खाना बनाते समय हर कोई यही चाहता है कि उसके खाने को तारीफ़ ज़रूर मिले, इसलिए जब आप बच्चों के लिए कुछ ख़ास बनाते हो, तो उनके स्वाद व पोषण का ध्यान रखते हो, लेकिन जब आप बुज़ुर्गों के लिए कुछ बनाते हो, तो स्वाद के अलावा उनकी उम्र व सेहत का भी ख़्याल रखते हो. उन्हें क्या नहीं खाना चाहिए, इस तरफ़ भी आपका पूरा ध्यान रहता है.

कुकिंग से आप पैसे भी बचाते हो: होटल या बाहर से कुछ अनहेल्दी मंगाकर खाना आपको वो संतुष्टि नहीं देगा, जो अपने हाथों से कुछ हेल्दी बनाकर खाना देता है और इसके साथ ही आप अपने पैसे भी बचाते हो. हेल्थ और वेल्थ साथ-साथ सेव होने का एहसास आपके रिश्तों को भी बेहतर बनाता है और आपकी सेहत को भी.

– गीता शर्मा

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Rujuta Diwekar

फिटनेस का मतलब वेटलॉस या पतला होना नहीं होता… रुजुता दिवेकर का फिटनेस मंत्र! (Theme- fitness is simple and uncomplicated- The Fitness Project by Rujuta Diwekar)

– फिटनेस बेहद सिंपल है, इसमें आपको क्रांतिकारी डायट प्लान या वर्कआउट्स करने की ज़रूरत ही नहीं.
– दरअसल फिटनेस का मतलब ही लोग ग़लत समझते हैं. फिटनेस का अर्थ पतला हो जाना या वेटलॉस नहीं होता.
– फिटनेस वो होती है, जो आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करती है, उस पर असर डालती है, जैसे- आपका एनर्जी लेवल, नींद की क्वालिटी, पाचन शक्ति आदि.
– रुजुता दिवेकर ने अपने 12 हफ़्तों के फिटनेस प्रोजेक्ट को जब लॉन्च किया था, तो उन्हें बहुत ही ज़्यादा लोगों का समर्थन मिला.
– लोगों को इससे बेहद लाभ भी मिला. उनके इंचेज़ कम हुए और वो अधिक फिट महसूस करने लगे.
पहला हफ़्ता- गाइडलाइन 1- कैसे शुरुआत करें?
– अपने दिन की शुरुआत एक केले से करें या किसी भी फ्रेश फ्रूट से या फिर आप भिगोए हुए बादाम या किशमिश भी ले सकते हैं. चाय-कॉफी से अपना दिन शुरू न करें.
– हां, 10-15 मिनट बाद आप चाय-कॉफी ले सकते हैं.
– यह उठने के 20 मिनट के भीतर ही खा लें और अगर आपको थायरॉइड है, तो गोली लेने के बाद यह मील लें.

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– केला दरअसल उनके लिए सही होता है, जिन्हें या तो पाचन संबंधी समस्या होती है या फिर खाने के बाद कुछ मीठा खाने का मन होता है. बेहतर होगा ताज़ा लोकल वेरायटी का केला लें. हफ़्ते में 2-3 बार ख़रीदें और उन्हें प्लास्टिक बैग की बजाय कपड़े के थैले में लाएं.
– 7-8 भीगी हुई किशमिश केसर के एक या दो स्ट्रैंड के साथ खाएं, यदि आप लो एनर्जी महसूस करते हैं या आपको पीएमएस की बहुत अधिक समस्या है.
– 4-6 भिगोए व छीले हुए बादाम उनके लिए, जिन्हें डायबिटीज़, पीसीओडी, नींद की समस्या, लो फर्टिलिटी है. पीसीओडी की समस्या है, तो पीरियड्स से 10 दिन पहले किशमिशवाले प्लान पर आ जाएं.
– सुबह के इस मील के बाद आप 15-20 मिनट योगा या वर्कआउट कर सकते हैं.
– अगर वर्कआउट नहीं करते, तो इसके बाद एक घंटे के भीतर ही नाश्ता कर सकते हैं.
– सुबह जो पानी पीते हैं, उसे प्लेन ही रखें, उसमें कुछ भी न मिलाएं.
यह पहले हफ़्ते के लिए गाइडलाइन है, उसके बाद हम धीरे-धीरे एक-एक हफ़्तों की गाइडलाइन पर बात करेंगे.

इस फिटनेस प्रोजेक्ट को बेहतर समझने के लिए देखें यह वीडियो

Start your day with banana/ dry fruits

‘The fitness project 2018’ – an open participation public health project – Week 1 guideline#RDfitnessproject2018

Posted by Rujuta Diwekar on Tuesday, 2 January 2018

सौजन्य: https://www.rujutadiwekar.com

मैं 27 वर्षीया शादीशुदा महिला हूं. मेरी एक फ्रेंड कह रही थी कि गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से वज़न बढ़ता है. मैं यह जानना चाहती हूं कि क्या यह सच है?
– रश्मि पांडे, जयपुर.

कई स्टडीज़ में यह बात साबित हो चुकी है कि गर्भनिरोधक गोलियों के कारण वज़न नहीं बढ़ता. दरअसल, बहुत-सी महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल शादी के बाद लगभग 23-24 की उम्र से करना शुरू करती हैं. आमतौर पर इस उम्र में लड़कियों का वज़न थोड़ा बढ़ता ही है. स्टडीज़ में यह बात भी सामने आई है कि दुर्लभ मामलों में ही सही अगर किसी महिला का वज़न बढ़ा भी होगा, तो वह महज़ फ्लूइड रिटेंशन की वजह से हुआ होगा, जिसका प्रभाव टेम्प्ररी ही रहता है. कुछ महिलाओं को शुरुआत में थोड़ी द़िक्क़त हो सकती है, जैसे- जी मिचलाना, सिरदर्द आदि, पर ज़रूरी नहीं कि यह आपके साथ भी हो. कभी-कभार डेली रूटीन में बदलाव के कारण भी वज़न थोड़ा-बहुत बढ़ सकता है, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि गर्भनिरोधक गोलियों के कारण वज़न बढ़ता है.

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Contraceptive Pills

मैं 23 वर्षीया कॉलेज स्टूडेंट हूं. मैं जानना चाहती हूं कि सेक्सुअली एक्टिव होना किसे कहते हैं? क्या हस्तमैथुन (मास्टरबेशन) करना सेक्सुअली एक्टिव होना माना जाएगा?
– कोमल सारंगी, कटक.

मेडिकल साइंस की भाषा में कहें, तो अगर आप एक या मल्टीपल पार्टनर्स के साथ सेक्सुअली इन्वॉल्व हैं, तो इसे सेक्सुअली एक्टिव होना माना जाएगा. इस परिभाषा में स़िर्फ वेजाइनल इंटरकोर्स ही शामिल नहीं है, बल्कि ओरल सेक्स, उंगलियों का इस्तेमाल और ऐनल सेक्स भी शामिल है. अगर आम बोलचाल की भाषा में कहें, तो हस्तमैथुन करनेवालों को सेक्सुअली एक्टिव नहीं माना जाता. इसका एक फ़ायदा यह भी है कि आपके साथ कोई पार्टनर जुड़ा हुआ नहीं होता, इसलिए सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिसीज़ का कोई ख़तरा भी नहीं रहता.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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Ishi Khosla

जानें क्या है मेटाबॉलिक सिंड्रोम… यूं कम करें पेट के फैट्स- इशी खोसला (About Metabolic Syndrome… How To Reduce Belly Fat- Ishi Khosla)

अक्सर लो अपने पेट की चर्बी से परेशान रहते हैं, डायटिंग, एक्सरसाइज़ करने पर भी उन्हें वो रिज़ल्ट नहीं मिल पाता, जिसकी वो उम्मीद करते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि वो पेट के फैट्स के मूल कारणों को नहीं जान पाते. इस विषय पर अधिक जानते हैं कि इशी खोसला किस तरह से मार्गदर्शन करती हैं. इशी खोसला अपने आप में जाना-माना नाम है. वो प्रैक्टिसिंग क्लिनिकल न्यूट्रिशिनिस्ट, कंसल्टेंट और राइटर हैं. आप भी उनके बताए डायट व हेल्थ प्लान्स फॉलो करें और हमेशा हेल्दी रहें.

पेट के फैट्स की प्रमुख वजहें हैं- हाई ब्लड प्रेशर, गुड फैट्स की कमी, बैड फैट्स की अधिकता, ट्रायग्लिसरॉइड्स की अधिक मात्रा, ब्लड शुगर की अधिकता या फिर वंशानुगत डायबिटीज़- जिसे मेटाबॉलिक सिंड्रोम या सिंड्रोम एक्स भी कहा जाता है. यह कोई बीमारी नहीं, पर रिस्क फैक्टर्स का कॉम्बीनेशन है.

सवाल यह है कि इन सबके चलते ज़िद्दी फैट्स को कैसे भगाया जाए? हेल्दी ईटिंग, लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज़ और स्ट्रेस मैनेजमेंट से यह किया जा सकता है.

शरीर के वज़न को नियंत्रित रखें: संतुलित खानपान व क्रियाशीलता से यह हो सकता है. साबूत अनाज, नट्स, फ्रूट्स, सब्ज़ियां, दालें और बीजों से अपने डायट को हेल्दी बनाएं. मीठा खाना-पीना व अल्कोहल का सेवन कम कर दें.

गुड कैलोरीज़वाला भोजन लें: फाइबर, गुड कैलोरीज़, प्रोटीन, कॉम्प्लैक्स कार्बोहाइड्रेट को अपने डायट का हिस्सा बनाएं.

हाई कैलोरी फुड से बचें: बहुत ज़्यादा ऑयली, फैटी, फ्राइड फूड न लें. मीठा व स्वीट ड्रिंक्स से बचें. कम पोषण वाले भोजन को अवॉइड करें. नमक कम खाएं. बेहतर होगा पिज़्ज़ा, बर्गर व अन्य जंक फूड से दूर रहें.

स्मार्ट स्नैकिंग करें: स्नैकिंग के लिए बेक्ड व रोस्टेड चीज़ें ख़रीदें. इसके अलावा ड्राय फ्रूट्स, फ्रेश फ्रूट्स आदि लें.

फिज़िकल एक्टिविटीज़ बढ़ाएं: वॉकिंग करें, जॉग करें. लाइट एक्सरसाइज़ करें. रोज़मर्रा की दिनचर्या में भी लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. ऑफिस में बीच-बीच में जगह से उठकर राउंड लगाकर आएं. इस तरह अपनी फिज़िकल एक्टिविटीज़ बढ़ाएं. इससे ब्लड शुगर, व प्रेशर के साथ-साथ आपका वज़न भी काफ़ी नियंत्रित रहता है.

स्ट्रेस मैनेज करें: मेडिटेशन, योगा, ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ और पॉज़िटिव सोच बेहतरीन तरी़के हैं अपने स्ट्रेस को मैनेज करने के. स्ट्रेस आए इससे पहले ही यदि इन हेल्दी एक्टिविटीज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लें, तो स्ट्रेस आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता. बहुत से लोग स्ट्रेस ईटिंग भी करते हैं, ऐसे में स्ट्रेस कम होगा, तो आप बेवजह कैलेरीज़ नहीं खाएंगे.

दरअसल ईटिंग हैबिट्स और डायटिंग को लेकर बहुत-सी ग़लतफ़हमियां हैं हम सबके मन में. इसे बेहतर तरी़के से समझने के लिए इस वीडियो को फॉलो करें, पर इसे मेडिकल एडवाइस के तौर पर न लें.

सौजन्य: http://www.theweightmonitor.com/

मैं 35 वर्षीया महिला हूं. मेरी समस्या यह है कि मैं हर घंटे में टॉयलेट जाती हूं, रात में भी कम से कम 4-5 बार टॉयलेट जाना पड़ता है. कई बार मैंने यूरिन टेस्ट भी करवाया, लेकिन रिपोर्ट नॉर्मल आई. मैं बहुत परेशान हूं. कृपया, उपाय बताएं?
– बरखा माणिक, शिलांग.

आपको ‘ओवरएक्टिव ब्लैडर’ यानी बार-बार पेशाब जाने की समस्या हो सकती है. इसके लिए आपको यूरोडायनेमिक टेस्ट कराने होंगे, जो मूत्र संबंधी बीमारियों के लिए कराए जाते हैं. आप किसी यूरोलॉजिस्ट या गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करें, जो बार-बार पेशाब जाने और ब्लैडर में होनेवाली गड़बड़ी के बारे में आपको सही जानकारी देंगे और उसका इलाज करेंगे. यदि दवाओं से आपको आराम नहीं होता तो बोटोक्स इंजेक्शन या सर्जरी के द्वारा भी इसका इलाज किया जा सकता है.

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Personal Problems

मैं 25 वर्षीया युवती हूं. मेरी शादी होनेवाली है. मेरे मंगेतर का और मेरा ब्लड ग्रुप एक ही है. क्या पति-पत्नी दोनों का ब्लड ग्रुप समान होने पर भविष्य में किसी तरह की समस्या हो सकती है?
– मीनल सक्सेना, लखनऊ.

ज़रूरी नहीं कि आपका और आपके मंगेतर का ब्लड ग्रुप समान है, तो आपकी शादीशुदा ज़िंदगी में किसी तरह की कोई समस्या हो. कुछ केसेस में, यदि महिलाओं का ब्लड ग्रुप ‘आरएच’ निगेटिव है और पति का पॉज़िटिव तो प्रेग्नेंसी के समय कुछ समस्या हो सकती है, विशेष रूप से पहली प्रेग्नेंसी के बाद. पहली प्रेग्नेंसी के दौरान यदि बच्चे का ब्लड ग्रुप पॉ़ज़ीटिव है, तो डिलीवरी के समय उसके ब्लड सेल्स मां के ब्लड स्ट्रीम में प्रवेश कर जाते हैं. ऐसा मां के शरीर में एंटीबॉडीज़ के प्रोडक्शन के कारण होता है. अगली प्रेग्नेंसी में ये एंटीबॉडीज़ मां के शरीर से बच्चे में पास हो सकती हैं और उसके ब्लड सेल्स को नष्ट कर सकती हैं, जिससे बच्चे के विकास में बाधा आ सकती है और उसकी जान को ख़तरा भी हो सकता है. इसलिए सावधानी के तौर पर हर महिला को प्रत्येक डिलीवरी के 72 घंटे के अंदर एंटी डी इंजेक्शन लेना चाहिए, जिससे ‘आरएच’ पॉ़ज़िटिव ब्लड सेल्स और एंटीबॉडीज़ फ़ॉरमेशन को बेअसर किया जा सके. एबॉर्शन और प्रेग्नेंसी की स्थिति में यह इंजेक्शन लेना ज़रूरी है. इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान कराए जानेवाले ब्लड टेस्ट मेंे एंटीबॉडी लेवल टेस्ट किया जाता है.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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