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Personal Problems: मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग कहीं गंभीर समस्या तो नहीं? (What Does It Mean If You’re Bleeding After Menopause?)

मैं 53 वर्षीया महिला हूं. तीन साल पहले मेरा मेनोपॉज़ (Menopause) हो चुका है. इन दिनों अचानक मुझे हल्की वेजाइनल ब्लीडिंग (Vaginal Bleeding) शुरू हो गई है. क्या यह कोई गंभीर समस्या है? क्या मुझे चेकअप करवाना चाहिए?
– सुमति राव, मैंगलोर.

एक बार जब मासिकधर्म एक साल के लिए बंद हो जाए तो यह स्थिर हो जाता है. इसके बाद कभी आपको वेजाइनल ब्लीडिंग नहीं होनी चाहिए, यहां तक कि दाग़-धब्बे भी नहीं दिखनेे चाहिए. आपको तुरंत गायनाकोलॉजिस्ट से चेकअप करवाना चाहिए, जो इंटरनल एक्ज़ामिनेशन या पीएपी स्मीअर जांच से सर्विक्स के कैंसर का पता लगा सकते हैं. यूट्रीन लाइन पर सूजन है या नहीं, इसकी जांच के लिए आप सोनोग्राफ़ी भी करवा लें. यूट्रीन लाइन पर सूजन एंडोमेट्रियल हाइपरप्लेसिया, कैंसर या ओवरी ट्यूमर का संकेत है. वेजाइनल ब्लीडिंग का कारण इनमें से कोई भी हो सकता है, इसलिए सही जांच ज़रूरी है.

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 Bleeding After Menopause
मैं 40 वर्षीया महिला हूं. मैंने अपनी सहेलियों से सुना है कि उन्होंने पीएपी स्मीअर करवाया है. यह क्या है और इस उम्र में क्या यह सभी को करवाना
पड़ता है?
– रजनी शर्मा, दिल्ली.

40 वर्ष की उम्र ऐसी उम्र है, जहां किसी भी तरह के कैंसर या ट्यूमर की संभावना से पहले ही नियमित चेकअप करवाते रहना चाहिए. पीएपी स्मीअर एक साधारण-सा टेस्ट है, जिसमें कॉटन या ब्रश को सर्विक्स से छूकर स्लाइड तैयार की जाती है और इस स्लाइड की जांच द्वारा कैंसर या अन्य किसी बीमारी का पता लगाया जा सकता है. यह जांच किसी भी डॉक्टर के क्लिनिक में दो मिनट में की जा सकती है. यह जांच हर साल करवानी चाहिए और इसकी शुरुआत तभी कर देनी चाहिए, जब महिला सेक्सुअली एक्टिव हो. इसके अलावा 40 की उम्र में पेल्विक सोनोग्राफ़ी करवानी चाहिए, जिससे गर्भाशय और ओवरी के कैंसर का पता चलता है. साथ ही मैमोग्राफ़ी भी करवा लेनी चाहिए, जिससे स्तन कैंसर का पता चलता है. किसी भी महिला को कैंसर की जांच के लिए ये सामान्य से टेस्ट अवश्य करवाने चाहिए.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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जानिए क्यों आते हैं सपने (Dreams: Why Do We Dream?)

सपने (Dreams) क्यों आते हैं? नींद में सोते समय मस्तिष्क में ऐसा क्या होता है जो सपनों की दुनिया में ले जाता है? इन सवालों पर कई रिसर्च्स की गई हैं. हालांकि इन सवालों के कोई पुख़्ता जवाब नहीं मिले हैं. लेकिन शोधों के आधार पर सपनों के बारे में कई तथ्य सामने आए हैं.

Dreaming

नींद और सपने का कनेक्शन
1. वैज्ञानिकों ने नींद को दो चरणों में बांटा है. पहला है- आरईएम और दूसरा है- नॉन आरईएम, जिसके चार चरण होते हैं. सबसे ज़्यादा सपने आरईएम यानी रैपिड आई मूवमेंट चरण में आते हैं. इस दौरान शरीर शिथिल रहता है, लेकिन पलकों के नीचे आंखों की पुतलियां तेज़ी से घूमती रहती हैं.
2. 70 मिनट के नॉन आरईएम चरण के बाद व्यक्ति पहले आरईएम चरण में पहुंचता है, जो केवल 5 मिनट का होता है.
3. आरईएम-नॉन आरईएम का चक्र 90 मिनटों का होता है और पूरी रात में नींद के दौरान यह पैटर्न 5 बार रिपीट होता है.
4. जैसे-जैसे समय गुज़रता है, नॉन आरईएम स्टेज छोटा होता जाता है और आरईएम स्टेज बढ़ा होता जाता है और व्यक्ति सपनों की दुनिया में पहुंच जाता है.
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Dreams

क्यों आते हैं सपने?
यूं तो सपने क्यों आते हैं? इसका कोई पुख़्ता जवाब नहीं मिल पाया है, लेकिन रिसर्च के आधार पर जो कारण सामने आए हैं, वे ये हो सकते हैं
– कुछ छिपी इच्छाएं या भावनाएं, जो पूरी न हो सकी हों या पूरी न हो पा रही हों.
– पूरे दिन ख़ुद के साथ घटित हुई बातों  व घटनाओं का पुनर्परीक्षण करने के लिए सपने आते हैं.
– कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि सपने इसलिए आते हैं, ताकि शरीर आराम कर सके.
– जब आप बेहद तनाव में होते हैं, तब सपने आते हैं.
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सपने का सच
1. हर व्यक्ति सपने देखता है. फिर चाहे वो पुरुष हो, स्त्री हो या बच्चा. फ़र्क़ इतना है कि कुछ लोगों को सपने याद रह जाते हैं और कुछ को नहीं.
2. नींद के लगभग 2 घंटे सपने देखने में जाते हैं.
3. हर व्यक्ति रात में 3 से 6 सपने देखता है, जिनमें से एकाध सपना ही याद रह जाता है.
4. नींद में हर 90 मिनट पर एक सपना आता है. हर सपना पिछलेवाले से बड़ा होता है. एक्सपर्ट्स की माने तो रात का पहला सपना 5 मिनट लंबा होता है, जबकि आख़िरी सपना लगभग 45 मिनट से 1 घंटे का होता है.
5.  एक रिसर्च के मुताबिक़, एक इंसान अपने पूरे जीवनकाल में तक़रीबन 100000 से ज़्यादा सपने देखता है या यह भी कह सकते हैं कि जीवन के 6 साल वो सपने देखने में बिताता है.
6. नींद से जागने के बाद 95 फ़ीसदी लोगों को उनके सपने याद नहीं रहते हैं.
7.  सपने कुछ सीखने में मदद करते हैं और याद्दाश्त को मज़बूत बनाते हैं.
8. महिला और पुरुष के सपनों में फ़र्क़ होता है. दोनों अलग-अलग तरह के सपने देखते हैं. पुरुषों की तुलना में महिलाएं परिवार व अपने बच्चों से जुड़े सपने ज़्यादा देखती हैं.
9. रैपिड आई मूवमेंट और नॉन रैपिड आई मूवमेंट के दौरान देखे गए सपनों में फ़र्क़ होता है.
10. 48 फ़ीसदी ऐसे लोग सपने में आते हैं, जिन्हे आप जानते हैं.
11. नेत्रहीन लोगों को देख पानेवाले लोगों के मुक़ाबले ज़्यादा सपने आते हैं.
12. अल्कोहल पीने से नींद और सपने दोनों की क्वालिटी पर असर होता है.
13. सपनों पर कंट्रोल करना भी संभव है. कई सपने ऐसे होते हैं, जिनमें व्यक्ति भले ही सो रहा हो पर उसे पता होता है कि वो सपना देख रहा है और इस सपने को अपनी इच्छानुसार कंट्रोल कर सकता है. इसे ल्यूसिड ड्रीम्स कहा जाता है.

 

 

Personal Problems: गर्भपात से बहुत ज़्यादा डरी हुई हूं (Scared Of My Previous Miscarriage Experiences)

मेरी उम्र 28 साल है. मेरा दो बार दो महीने का गर्भपात (Miscarriage) हो चुका है. मैं गर्भधारण करना चाहती हूं, लेकिन मैं पहले दो बार हुए गर्भपात से बहुत ज़्यादा डरी हुई हूं. क्या मैं गर्भधारण कर सकती हूं? कृपया, सलाह दें.
– रजनी वर्मा, जौनपुर.

आपको दो बार गर्भपात हो चुका है, इसलिए आपका डर वाजिब है. लेकिन आप मां बन सकती हैं. बस, गर्भधारण करने से पूर्व आपको कुछ टेस्ट करवा लेने चाहिए, जैसे- हार्मोन टेस्ट, शुगर लेवल, इम्यूनोलॉजिकल टेस्ट और सोनोग्राफ़ी आदि. इसके अलावा आपके और आपके पति के जेनेटिक टेस्ट भी करवाने ज़रूरी हैं. बार-बार गर्भपात होने पर हिस्टीरोस्कोपी टेस्ट किया जाता है, जिसमें गर्भाशय में कैमरा रख कर देखा जाता है कि किसी तरह की प्रॉब्लम तो नहीं है. यदि सभी टेस्ट सामान्य हैं तो आप गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड और हार्मोन्स की टैबलेट ले सकती हैं. बेहतर होगा कि आप अपने गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करें.

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 Abortion Experiences
मेरा पहला बच्चा सीज़ेरियन द्वारा हुआ था, क्योंकि बच्चे की ब्रीच पोज़ीशन थी. अब मैं 5 महीने की गर्भवती हूं. मैं जानना चाहती हूं कि क्या इस बार भी मेरी डिलीवरी सीज़ेरियन ही होगी?.
– श्रुति बियानी, उदयपुर.

यदि सब कुछ सामान्य है और कोई ख़तरे की बात नहीं है तो सीज़ेरियन डिलीवरी के बावजूद नॉर्मल डिलीवरी हो सकती है. हालांकि डिलीवरी अच्छे हॉस्पिटल में बहुत सावधानीपूर्वक होनी चाहिए, क्योंकि ऐसे मामले में सीज़ेरियन डिलीवरी के दौरान लगे टांके टूटने का डर रहता है, जो मां और बच्चे दोनों के लिए घातक है. इसलिए हालात को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि दो सीज़ेरियन के बाद अगली डिलीवरी भी सिज़ेरियन द्वारा ही हो तो बेहतर होगा.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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चार तरह के होते हैं बॉडी फैट्स: आपका कौन-सा है? (4 Types Of Body Fats: Which One Do You Have?)

आप क्या खाते हैं, कितना खाते हैं और किस तरह से खाते हैं- इसी के आधार पर हमारे शरीर (Body) की संरचना होती है और धीरे-धीरे हमारा शरीर एक विशेष आकार में आ जाता है. इसी आकार के कारण हमारी शारीरिक बनावट अलग-अलग होती है. हम यहां पर चार अलग-अलग तरह के बॉडी फैट्स (Types Of Body Fats) के बारे में बता रहे हैं, जिनसे आप अपने बॉडी फैट्स (Body Fats) के बारे में जान सकते हैं.

Types Of Body Fats

1. हाई स्ट्रेस टाइप

काम की व्यस्तता, घरेलू परेशानियां या अन्य कारणों से अधिकतर लोग तनाव में रहते हैं. तनाव होने पर शरीर में कार्टिसोल नामक हार्मोंस का उत्पादन अधिक होता है और अधिक कार्टिसोल होने पर वह पेट के आसपास फैट्स के रूप में जमा होने लगता है.

कैसे छुटकारा पाएं ऐसे बॉडी फैट से?

–    कपालभाति और अन्य प्राणायाम करें.

–     ख़ुद को लिखने-पढ़ने, खेलनेे, संगीत, डांस आदि में व्यस्त रखें.

–     उपरोक्त के अलावा ऐसी गतिविधियों में व्यस्त रहें, जिससे हैप्पी हार्मोंस का उत्पादन बढ़े.

2. हाई शुगर टाइप

शक्कर के शौकीन लोगों में यह फैट अधिक जमा होता है. जब हम बहुत अधिक शक्कर का सेवन करते हैं, तो हमारा शरीर बहुत अधिक मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन करता है, जिसका शरीर पर साइड इफेक्ट होता है और कमर के आसपास फैट जमा होने लगता है.

कैसे छुटकारा पाएं ऐसे बॉडी फैट से?

–    शक्कर का सेवन कम करें.

–     लहसुन, दालचीनी, अजवायन को अपनी डायट में शामिल करें. ये मसाले शक्कर के प्रभाव को कम करते हैं.

–     प्लैंक, कोर टोनिंग, क्रंचेस जैसी एक्सरसाइज़ करें.

3. हाई एस्ट्रोजन टाइप

अगर आपके बट्स बहुत हैवी हैं, तो आपकी बॉडी में एस्ट्रोजन का लेवल बहुत हाई है.

कैसे छुटकारा पाएं ऐसे बॉडी फैट से?

–     हरी सब्ज़ियां, जैसे- ब्रोकोली, फाइटो केमिकल्स से भरपूर सब्ज़ियों का सेवन अधिक मात्रा में करें.

–     स्कवॉट एक्सरसाइज़ करके शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर संतुलित रख सकते हैं.

4. लो टेस्टोस्टेरॉन टाइप:

अगर आपको अपने बाइसेप्स के पास जमा फैट्स को कम करना मुश्किल लगता है, तो इसका मतलब है कि आपके शरीर में टेस्टोस्टेरॉन का लेवल बहुत कम है.

कैसे छुटकारा पाएं ऐसे बॉडी फैट से?

–     विटामिन डी से भरपूर चीज़ें, जैसे- मशरूम आदि अधिक से अधिक खाएं.

–     डायट के अलावा विटामिन डी सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं.

–     बाइसेप्स को टोन करनेवाली एक्सरसाइज़ करें.

– बेला शर्मा

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Personal Problems: लंबे समय तक गर्भनिरोधक के इस्तेमाल से समस्या तो नहीं आएगी? (What Are The Long Term Effects Of Birth Control?)

मेरी उम्र 23 साल है. मैं पिछले तीन सालों से गर्भनिरोधक गोलियों (Contraception Pill) का सेवन कर रही हूं. मैं जानना चाहती हूं कि गर्भनिरोधक गोलियों के लंबे समय तक इस्तेमाल से आगे चलकर मुझे गर्भधारण में तो कोई समस्या (Problems) नहीं आएगी?
– चांदनी सक्सेना, अल्मोड़ा.

दुनियाभर में करोड़ों महिलाएं कंट्रासेप्टिव पिल्स का सालों तक इस्तेमाल करती हैं. अगर आप स्वस्थ हैं, स्मोकिंग नहीं करतीं और केवल उसी गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं, जो आपको सूट करती हैं तो भविष्य में आपको कोई भी समस्या नहीं होनी चाहिए. इन गोलियों से बांध्यपन का ख़तरा नहीं होता. इनका सेवन बंद कर देने के बाद आप तत्काल गर्भधारण कर सकेंगी.

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Effects Of Birth Control

मैं 24 साल की युवती हूं. हाल ही में मैंने अपने मंगेतर के साथ असुरक्षित सेक्स किया. हालांकि इसके दूसरे ही दिन मैंने इमरजेंसी पिल्स ले लिया था, लेकिन मुझे अब भी यह डर लग रहा है कि कहीं मैं प्रेग्नेंट तो नहीं हो जाऊंगी?
– विनीता रामचंद्र, हैदराबाद.

असुरक्षित सेक्स संबंध बनाने के बाद इमरजेंसी पिल्स खाने के बावजूद गर्भधारण का ख़तरा 20 से 25 प्रतिशत तक बना रहता है, ख़ासकर तब, जब आपने अपने ओव्यूलेशन पीरियड के आसपास सेक्स किया हो. अब अगर आपकी माहवारी अनियमित हो गई हो, तो तुरंत प्रेग्नेंसी टेस्ट कराएं. अनचाहे गर्भ के लिए आप एबॉर्शन पिल्स का प्रयोग भी कर सकती हैं.

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 Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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टीनएज बच्चों के लिए टॉप 10 हेल्दी डायट टिप्स (10 Healthy Eating Tips for Teens)

इस उम्र में बच्चे (Children) वही खाते हैं जिसका टेस्ट उन्हें अच्छा लगता है. वो ये नहीं सोचते कि  जो वो खा रहे हैं क्या वो उनकी सेहत (Health) के लिए भी अच्छा है? चूंकि इस उम्र में बच्चे घर से ज़्यादा वक़्त बाहर बिताते हैं इसलिए उनकी खाने-पीने की आदतों पर नज़र रखना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन आप यदि घर में ही उनमें हेल्दी फूड हैबिट डेवलप करेंगी, तो वे बाहर भी उसे फॉलो करेंगे.

Healthy Eating Tips

  1. इस उम्र में भी बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास होता रहता है इसलिए उन्हें अन्य लोगों से ज़्यादा कैलोरी की आवश्यकता होती है.
  2. टीनएजर लड़कों को 2500-3000 और लड़कियों को क़रीब 2200 कैलोरी की ज़रूरत होती है.
  3. इस उम्र में हड्डियों का विकास होता है इसलिए उन्हें मज़बूत बनाने के लिए टीनएजर्स को कैल्शियम से भरपूर चीज़ें दें. अगर इस उम्र में शरीर को पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलेगा तो हमेशा के लिए उनकी हड्डियां कमज़ोर हो जाएंगी.
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  4. इस उम्र में लड़कियां स्लिम-ट्रिम नज़र आने के लिए डेयरी प्रॉडक्ट्स जैसे फैटी फूड से परहेज़ करने लगती हैं. यदि आपकी बेटी भी ऐसा करती है, तो उसे ऐसा करने से रोकें. साथ ही उसकी डायट में ओमेगा3 जैसे फैटी फूड को शामिल करें. ये फूड उसकी स्किन, बाल और इम्यून सिस्टम के लिए अच्छे होते हैं.
  5. प्यूबर्टी पीरियड में हार्मोन्स में होने वाले बदलाव की वजह से शरीर के कुछ हिस्से, जैसे-ब्रेस्ट, थाइज़ और हिप्स में फैट जमा हो जाता है. इससे लड़कियों को लगता है कि वो मोटी हो रही हैं और वे डायटिंग शुरू कर देती हैं, जिससे उन्हें ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते.
  6. हर किसी का बॉडी स्ट्रक्चर अलग होता है. हर कोई मॉडल की तरह पऱफेक्ट दिखे ये ज़रूरी नहीं, फिर भी आपकी टीनएजर बेटी यदि डायटिंग करना चाहे तो बिना डॉक्टर की सलाह लिये उसे  कोई भी डायट प्लान न अपनाने दें.
    Healthy Eating
  7. बच्चे तेज़ी से प्यूबर्टी पीरियड की ओर बढ़ते हैं इसलिए उन्हें पोषक तत्वों, जैसे-आयरन, प्रोटीन, ज़िंक, फोलेट, कैल्शियम आदि की ज़्यादा ज़रूरत होती है.
  8.  आयरन रिच फूड ब्रेन को काम करने में मदद  करता है, साथ ही इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाता है. लड़कियों को आयरन रिच फूड की ज़्यादा ज़रूरत होती है.
  9.  हेल्दी व पोषक तत्वों से भरपूर खाना टीनएजर्स को कैंसर और हार्ट डिज़ीज़ जैसी बीमारियों से भी बचाता है.
  10. इस उम्र में ईटिंग डिसऑर्डर की समस्या भी हो सकती है इसलिए अपने बच्चे के खाने-पीने की आदतों पर ख़ास ध्यान दें.
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जानें 10 पावरफुल नेचुरल पेनकिलर्स के बारे में (Top 10 Powerful Natural Painkillers You Must Know)

यदि आप किसी भी तरह के बॉडी पेन (Body Pain) से परेशान हैं, तो डॉक्टर के पास जाने की बजाय एक नज़र अपने किचन में डालें. वहां पर आपको ऐसी अनेक चीज़ें मिल जाएंगी, तो आपके दर्द को चुटकियों में दूर कर देंगी.

Natural Painkillers

1. हल्दी

इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और करक्यूमिन नामक तत्व घाव को भरने के साथ-साथ दर्द में भी राहत दिलाते हैं, इसलिए हल्दी को अपनी रोज़ाना की डायट में शामिल करें, जिससे इम्युनिटी मज़बूत हो.

– हल्दी को पीसकर घी में भूनकर और शक्कर मिलाकर कुछ दिन खाने से डायबिटीज़ में लाभ होता है.

– यदि गले में दर्द या सूजन हो, तो कच्ची हल्दी अदरक के साथ पीसकर गुड़ मिलाकर गर्म कर लें और इसका सेवन करें.

– हल्दी की गांठ तुअर की दाल में पकाकर उसे छाया में सुखा लें. इसे पानी में घिसकर सूर्यास्त के पहले, दिन में दो बार आंखों में लगाने से आंखों की लालिमा दूर होती है.

– हल्दी के टुकड़े को सेंककर रात में सोते समय मुंह में रखने से ज़ुकाम, कफ़ और खांसी में लाभ होता है. कष्टदायक खांसी भी इससे कम हो जाती है.

– हल्दी की गांठ को आग में भूनकर उसका चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को तीन ग्राम की मात्रा में एलोवीरा में मिलाकर सुबह-शाम सात दिन तक सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है.

2. नींबू

नींबू में ऐसी दर्दनिवारक प्रॉपटीऱ्ज होती हैं, जिससे दर्द में तुरंत आराम मिलता है. गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाएं. इसमें कपड़े को डुबोकर दर्दवाली जगह पर रखें. पांच-सात मिनट तक ऐसा करने से जल्द ही दर्द में आराम मिलेगा.

– नींबू का रस ठंडे पानी में मिलाकर पीने से गर्मी के कारण उत्पन्न बेचैनी दूर होती है.

– एक ग्लास पानी में एक नींबू का रस निचोड़कर उसमें थोड़ी-सी शक्कर मिलाकर पीने से पित्त की समस्या दूर होती है.

– एक ग्लास ठंडे पानी में नींबू का रस मिलाकर सुबह पीने से कब्ज़ियत में बहुत लाभ होता है.

– नींबू के रस में सेंधा नमक मिलाकर कुछ दिनों तक नियमित पीने से पथरी गल कर निकल जाती है.
3. अदरक

एंटीइंफ्लेमेट्री प्रॉपटीऱ्ज से भरपूर अदरक पेटदर्द व पेट संबंधी विकारों को दूर करने में मदद करता है. बुख़ार व गले में दर्द होने पर अदरक का सेवन करने से तुरंत आराम मिलता है.

– अदरक का रस और शहद मिलाकर सेवन करने से बैठी हुई आवाज़ खुलती है और सुरीली बनती है.
– अदरक और प्याज़ का रस मिलाकर पीने से उल्टी बंद होती है.

– 4 ग्राम सोंठ का चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से मसूड़ों की सूजन तथा दांतों का दर्द दूर होता है.

– पतले दस्त होने पर अदरक कूटकर पानी में उबालें. फिर मरीज़ को वह पानी दिन में तीन बार पिलाएं. तुरंत लाभ होगा.

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Natural Painkillers

4. हींग

इसमें ऐसे इंफ्लेमेट्री ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जोे पेटदर्द, उल्टी, गैस, अपच जैसी समस्याओं को दूर करते हैं. पेटदर्द होने पर हींग को पानी में घोलकर नाभि के आसपास लगाने से पेटदर्द और गैस में आराम मिलता है.

– हींग को शराब में खरल करके सुखा लीजिए. इसे दो रत्ती मक्खन के साथ खाने से खांसी, श्‍वास और दूषित कफ विकार में अत्यंत लाभ होता है.

– हींग, कपूर और आम की गुठली समभाग में लेकर पुदीने के रस में पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें. चार-चार घंटे पर यह गोली देने से हैजे में फ़ायदा होता है.

– हींग को पानी में उबालकर उस पानी से कुल्ले करने से दांत की पीड़ा दूर होती है. यदि दांत में पोल हो, तो पोल में हींग भरने से दंतकृमि मर जाते हैं और दांत की पीड़ा दूर हो जाती है.

5. मेथी

यह भी पेनकिलर का काम करती है.मेथी में ऐसे तत्व होते हैं, जो डायबिटीज़ को नियंत्रित करते हैं.

– पेट में जलन होने पर मेथी की सूखी पत्तियों और शहद को मिलाकर काढ़ा बनाएं. दिन में दो बार इसे पीने से पेट की जलन से राहत मिलती है.

– यदि स्किन प्रॉब्लम्स जैसे- रिंकल्स, ब्लैकहेड्स, पिंपल्स, ड्राईनेस आदि से परेशान हैं, तो मेथी की पत्तियों का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं और  क़रीब 20 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें.

– डिलीवरी के बाद महिलाओं को मेथी के लड्डू खाने को कहा जाता है. इससे प्रेग्नेंसी के बाद शरीर मज़बूत बनता है और कमज़ोरी महसूस नहीं होती.  ब्रेस्टफीड करानेवाली महिलाओं के लिए मेथी के पत्तों की सब्ज़ी बहुत फ़ायदेमंद होती है. मेथी कैल्शियम का भी बेहतरीन स्रोत है.

6. नमक

गले में ख़राश और दर्द होने पर नमक मिले गरम पानी के गलारा करने से दर्द में आराम मिलता है. इसके अलावा नमक मिले पानी से नहाने पर थकान भी दूर होती है.

7. कॉफी

हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, कॉफी में मौजूद कैफीन शरीर में सूजन बढ़ानेवाली रक्त कोशिकाओं को कम करने में मदद करता है. इसके अलावा सिरदर्द होने पर कॉफी पीने से दर्द में तुरंत राहत मिलती है.

8. कैलामाइन टी

इसे पीने से सिरदर्द, बॉडी पेन और तनाव दूर होता है.

9. लौंग

यह सिरदर्द, गठिया और दांत दर्द को दूर करने में मदद करता है.

10. चेरी

इसमें एंटीइंफ्लेमेट्री प्रॉपर्टीज़ होने के कारण इसे ‘पावरहाउस ऑफ न्यूट्रीशन’ भी कहते हैं. चेरी में मौजूद एंथोकाइनिन नामक तत्व दर्द उत्पन्न करनेवाले एंज़ाइम्स को रोकने में मदद करता है. चेरी खाने से मांसपेशियों के दर्द में आराम मिलता है. इसी वजह से खिलाड़ी भी अपनी डायट में चेरी जूस लेते हैं.

– अनुष्का कोठारी

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रखें वेजाइनल हेल्थ का ख़्याल (Easy Tips To Keep Your Vagina Healthy)

Tips To Keep Vagina Healthy

रखें वेजाइनल हेल्थ का ख़्याल (Easy Tips To Keep Your Vagina Healthy)

जागरूकता की कमी और शर्म-झिझक के कारण महिलाएं अक्सर वेजाइनल हेल्थ (Vagina Health) को अनदेखा कर देती हैं. नतीजा उन्हें कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स (Health Problems) की तकलीफ़ झेलनी पड़ती है. इसलिए ज़रूरी है कि वेजाइना (Vagina) की हेल्थ का भी ख़्याल रखा जाए और इसके लिए सबसे ज़रूरी है वेजाइनल हाइजीन (Vaginal Hygiene) का ख़्याल रखना.

कैसे रखें हाइजीन का ख़्याल?

क्लीनिंग के लिए सोप का इस्तेमाल न करें
कई लोग वेजाइना क्लीन करने के लिए परफ्यूमयुक्त साबुन या वेजाइनल डूशिंग का इस्तेमाल करते हैं, जो वेजाइनल हेल्थ के लिए ठीक नहीं. दरअसल, वेजाइना हानिकारक बैक्टीरिया से सुरक्षा के लिए अपने अंदर एक पीएच बैलेंस, नमी और तापमान बनाए रखती है, लेकिन साबुन और वेजाइनल डूशिंग के इस्तेमाल से ये पीएच संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे कई हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. इसलिए ऐसा करने से बचें. इसकी बजाय सादे पानी का इस्तेमाल करें.

केमिकल्स का इस्तेमाल ना करें
वेजाइना में केमिकल बेस्ड क्रीम और लुब्रिकेशन का इस्तेमाल ना करें. वेजाइना सेल्फ लुब्रिकेटिंग होती है और इसमें नेचुरल नमी होती है, इसलिए आपको यहां आर्टिफिशियल लुब्रिकेंट इस्तेमाल करने की कोई ज़रूरत ही नहीं. अगर आप ऐसा करती हैं, तो इससे पीएच लेवल का संतुलन बिगड़ सकता है और बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है.

सेफ सेक्स संबंध बनाएं
अनसेफ सेक्स से आपको वेजाइनल इंफेक्शन हो सकता है, इसलिए सुरक्षित यौन संबंध बनाएं. सेक्स के दौरान प्रोटेक्शन का इस्तेमाल करें, ताकि आप एचआईवी, जेनिटल हर्पीस आदि बीमारियों से सुरक्षित रहें.

जेनिटल एरिया को ड्राई रखें
अधिक पसीना आने और हवा न लगने से जेनिटल एरिया में नमी के कारण हानिकारक बैक्टीरिया पनपने की संभावना होती है, जिससेे खुजली और रैशेज़ की समस्या हो सकती है, इसलिए जेनिटल एरिया को हमेशा ड्राई रखने की कोशिश करें. कॉटन की पैंटी ही पहनें, ताकि वो पसीना सोख सके. साथ ही गीली पैंटी पहनने से बचें.

किसी भी तरह के इंफेक्शन को नज़रअंदाज़ ना करें
वेजाइना में छोटे-मोटे इंफेक्शन को भी अनदेखा न करें. ये इंफेक्शन कई बार भविष्य में गंभीर समस्या बन सकते हैं. इसलिए आपको जैसे ही वेजाइना में कोई एब्नॉर्मेलिटी या इंफेक्शन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
प्रोबायोटिक्स लेंः अपनी वेजाइनल हेल्थ को बरक़रार रखने के लिए बेहतर होगा कि अपने डायट में दही या प्रोबायोटिक्स शामिल करें. इंफेक्शन से लड़ने के लिए आपके वेजाइना को हेल्दी बैक्टीरिया की ज़रूरत होती है. प्रोबायोटिक्स से वेजाइना में अच्छे बैक्टीरिया बने रहेंगे और आपका मूत्राशय भी शेप  में रहेगा.

इन बातों का भी रखें ख़्याल

1. पब्लिक टॉयलेट के इस्तेमाल के समय हमेशा सतर्क रहें. एंटर होने से पहले फ्लश ज़रूर करें.

2. बहुत ज़्यादा टाइट पैंटी न पहनें. साथ ही बेहतर होगा कि रात में पैंटी निकालकर ही सोएं.

3. पैंटी की सफ़ाई किसी अच्छे डिटर्जेंट से करें.

4. पैंटी को अपने अन्य कपड़ों के साथ कभी न धोएं. उसे अलग से साफ़ करें.

5. पैंटी को हमेशा धूप में ही सुखाएं. इससे पैंटी बैक्टीरिया फ्री रहेगी.

6. रोज़ पहननेवाली पैंटी पर एक बार आयरन ज़रूर करें. आयरन की गर्मी से बैक्टीरिया पूरी तरह से ख़त्म हो जाते हैं और पैंटी इंफेक्शन से मुक्त हो जाती है.

7. पीरियड्स के दौरान हर छह घंटे के अंतराल पर पैड्स बदलें. इससे किसी तरह का इंफेक्शन होने का डर नहीं रहता.

8. डिटर्जेंट से धोने के बाद पैंटी को पानी में एंटीसेप्टिक की कुछ बूंदें डालकर ज़रूर साफ़ करें. ऐसा करने से आप फंगल या ऐसे किसी संक्रमण से सुरक्षित रहेंगी.

9. सिंथेटिक की बजाय कॉटन की पैंटी इस्तेमाल करें और पैंटी हर तीन महीने में चेंज करें.

10. एक्सरसाइज़ या धूप से आने के बाद पसीने से भीगी पैंटी को तुरंत बदल लें. नमी के कारण उसमें बैक्टीरिया पनपने का ख़तरा बढ़ जाता है.

11. वेजाइना को गुनगुने पानी से अच्छी तरह से साफ़ करें.

12. प्राइवेट पार्ट्स में टैल्कम पाउडर का इस्तेमाल न करें. इससे ओवेरियन कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है.

मेंस्ट्रुअल हाइजीन की 5 बातें
पीरियड्स के दौरान भी महिलाओं को हाइजीन का विशेष ध्यान रखना चाहिए. फर्टिलिटी संबंधी अधिकतर प्रॉब्लम्स की वजह पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ख़्याल न रखना है, इसलिए पीरियड्स के दौरान हाइजीन से जुड़ी इन बातों का ख़्याल रखें.

1. सैनिटेशन का तरीक़ा: गांवों में आज भी लोग सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल नहीं करते, नतीजा उन्हें प्रजनन संबंधी कई तरह की प्रॉब्लम्स झेलनी पड़ती हैं, इसलिए पीरियड्स के दौरान सही सैनिटेशन का इस्तेमाल ज़रूरी है. आज मार्केट में कई तरह के साधन उपलब्ध हैं, जैसे- सैनिटरी नैपकिन, टैंपून्स और मैंस्ट्रुअल कप, ये पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ध्यान रखते हैं.

2. रोज़ नहाएं: आज भी कई जगहों पर यह मान्यता है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को नहाना नहीं चाहिए. लेकिन ये सही नहीं है, नहाने से न स़िर्फ बॉडी क्लीन होती है, बल्कि गर्म पानी से स्नान करने से पीरियड्स के दौरान होनेवाली ऐंठन, दर्द, पीठदर्द, मूड स्विंग जैसी परेशानियों से भी राहत मिलती है.

3. साबुन इस्तेमाल न करें: पीरियड्स के दौरान साबुन से वेजाइना की सफ़ाई करने पर अच्छे बैक्टीरिया के नष्ट होने का ख़तरा रहता है, जो इंफेक्शन का कारण बन सकता है. लिहाज़ा, इस दौरान वेजाइना की सफ़ाई के लिए सोप की बजाय गुनगुना पानी इस्तेमाल करें.

4. हाथ धोना ज़रूरी: सैनिटरी पैड, टैंपून या फिर मैंस्ट्रुअल कप बदलने के बाद हाथ ज़रूर धोएं. हाइजीन की इस आदत का हमेशा पालन करें. इसके अलावा इस्तेमाल किए गए पैड या टैंपून को पेपर में अच्छे से रैप करके डस्टबिन में ही डालें, फ्लश न करें.

5. अलग अंडरवियर यूज़ करें: पीरियड्स के दौरान अलग अंडरवियर का इस्तेमाल करें. इन्हें स़िर्फ पीरियड्स के दौरान ही इस्तेमाल करें और अलग से गुनगुने पानी और साबुन से धोएं. एक एक्स्ट्रा पैंटी साथ ज़रूर रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके.

हेल्दी वेजाइना के लिए ईज़ी एक्सरसाइज़
कीगल एक्सरसाइज़ः घुटने मोड़कर आराम की स्थिति में बैठ जाएं. अब पेल्विक मसल्स को टाइट करके स्क्वीज़ यानी संकुचित करें. 5 तक गिनती करें. फिर मसल्स को रिलीज़ कर दें. ध्यान रखें ये एक्सरसाइज़ भरे हुए ब्लैडर के साथ न करें. यूरिन पास करने के बाद ही करें.
लेग लिफ्टिंगः सीधे लेट जाएं. दोनों हाथ बगल में हों. अब एक पैर ऊपर उठाएं. थोड़ी देर इसी स्थिति में रहें. पूर्व स्थिति में आ जाएं. यही क्रिया दूसरे पैर से भी दोहराएं. अब दोनों पैरों को एक साथ लिफ्ट करके यही क्रिया दोहराएं. इससे पेल्विक एरिया के मसल्स मज़बूत होते हैं.
स्न्वैट्सः सीधे खड़े रहें. दोनों हाथ सामने की ओर खुले रखें. अब घुटनों को मोड़ते हुए ऐसे बैठें जैसे आप किसी कुर्सी पर बैठ रहे हों. थोड़ी देर इसी अवस्था में रहें. पूर्वस्थिति में आ जाएं.

– प्रतिभा तिवारी

Personal Problems: पीरियड्स अनियमित हैं और वज़न भी बढ़ रहा है (What Causes Irregular Periods And Weight Gain?)

मेरी उम्र 27 साल है और रेग्युलर एक्सरसाइज़ व डायटिंग के बावजूद मेरा वज़न बढ़ रहा है. मेरे बाल बहुत झड़ गए हैं और पीरियड्स भी अनियमित हो गए हैं. साथ ही मुझे बहुत ज़्यादा ठंड भी लगती है. डॉक्टर ने पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिसीज़ की जांच के लिए टेस्ट भी करवाया, पर रिपोर्ट्स नॉर्मल आईं. अब उन्हें थायरॉइड की आशंका है और वे मेरा ब्लड टेस्ट कराना चाहते हैं, लेकिन क्या यह थायरॉइड हो सकता है?
– वानी त्रिवेदी, बीकानेर.

थायरॉइड ग्लैंड हमारे गले में स्थित सबसे बड़ा एंडोक्राइन ग्लैंड है, जो थायरॉइड हार्मोंस- टी3 और टी4 का निर्माण करता है. आपके द्वारा बताए गए लक्षणों को देखकर लगता है कि आपको हाइपोथायरॉइडिज़्म है. इसे कंफर्म करने का तरीक़ा स़िर्फ ब्लड टेस्ट ही है, तभी आपके टी3 और टी4 हार्मोंस के लेवल्स का पता चल पाएगा. इसके बाद ही डॉक्टर आपको दवाइयों आदि के बारे में बता पाएंगे.

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 Causes of Irregular Periods
मैं 34 वर्षीया महिला हूं. हाल ही में अल्ट्रा सोनोग्राफी से पता चला है कि मेरे यूटेरस में फायब्रॉइड है. इसके लिए मैं क्या कर सकती हूं? कृपया, मार्गदर्शन करें.
– रोशनी पटवा, कानपुर.

यूटेराइन फायब्रॉइड को मैनेज करने के कई तरी़के हैं. जब ट्रीटमेंट जल्द से जल्द करना हो, तब ज़्यादातर डॉक्टर्स सर्जरी की सलाह देते हैं. आमतौर पर डॉक्टर्स हिस्टेरेक्टॉमी की सलाह देते हैं और अगर महिला मेनोपॉज़ से गुज़र रही हो, तो यूटेरस निकालने की सलाह दी जाती है. और अगर महिला की उम्र कम है और उसकी प्रेग्नेंसी के लिए यूटेेरस और बाकी रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स की ज़रूरत होती है, तो उनका मायमेक्टॉमी किया जाता है. इस प्रक्रिया में स़िर्फ फायब्रॉइड्स को टारगेट करके ख़त्म किया जाता है. इसके लिए डॉक्टर्स हिस्टेरोस्कोप, लैप्रोस्कोप और सर्जरी का सहारा लेते हैं. इसके अलावा लेज़र सर्जरी के ज़रिए फायब्रॉइड को नष्ट करना भी एक ट्रीटमेंट है.

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 Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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शक्कर मानसिक स्वास्थ्य को किस तरह प्रभावित करता है? (How Does Sugar Affects Our Brain?)

यह तो हम सभी जानते हैं कि ज़्यादा शक्कर (Sugar) हमारी सेहत (Health) के लिए हानिकारक (Harmful) होती है और अत्यधिक मात्रा में शक्कर का सेवन करने से मोटापा, डायबिटीज़, दांत ख़राब होना जैसी समस्याएं होती हैं, लेकिन यह बहुत कम लोगों को पता है कि ज़्यादा शक्कर खाने से हमारे मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर भी बुरा असर पड़ता है. बहुत से शोधों से इस बात की पुष्टि हुई है कि शक्कर का हमारे मूड, सीखने की क्षमता और जीवनशैली पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. सबसे महत्वपूर्ण बात शक्कर, मेपल सिरप जैसे हाई फ्रूक्टोज़ युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन हमारे मानसिक स्वास्थ्य को काफ़ी हद तक प्रभावित करता है.

Sugar

डिप्रेशन और स्किज़ोफ्रेनिया
जो लोग डिप्रेशन और स्किज़ोफ्रेनिया जैसी बीमारियों से ग्रस्त रहते हैं, उन पर शक्कर का नकारात्मक प्रभाव अन्य लोगों की तुलना में ज़्यादा पड़ता है, क्योंकि ब्लड शुगर में बार-बार उतार-चढ़ाव होने से मूड डिसऑर्डर की समस्या बढ़ जाती है. एक शोध से इस बात की पुष्टि हुई है कि हाई शुगर से डिप्रेशन का ख़तरा बढ़ जाता है. आपको बता दें कि आंकड़ों के अनुसार, जिन देशों के लोग ज़्यादा शक्कर का सेवन करते हैं, वहां डिप्रेशन के केसेज़ ज़्यादा देखने को मिलते हैं. स्किज़ोफ्रेनिया से ग्रस्त लोगों पर इसका असर और भी ज़्यादा होता है.

तनाव
हालांकि शक्कर खाने से तनाव नहीं होता है, लेकिन जो लोग अत्यधिक शक्कर का सेवन करते हैं, उनमें तनाव से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है. खाने में शक्कर की मात्रा घटाकर आप तनाव से बेहतर तरी़के से डील कर सकते हैं. इसके साथ ही कम शक्कर का सेवन आपके मूड को भी बेहतर बनाने में मदद
करता है.

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लत
बहुत से अध्ययनों से इस बात की पुष्टि हुई कि शक्कर में ऐसे गुण होते हैं, जिनके कारण लोगों को इसकी लत पड़ जाती है. ड्रग्स और शक्कर का सेवन करने से मस्तिष्क में फील गुड हार्मोन डोपाइन का स्राव बढ़ जाता है. एक शोध के दौरान पाया गया कि चूहों ने कोकीन की बजाय शक्कर को प्राथमिकता दी और उनमें शक्कर की लत के लक्षण भी दिखें.

याद्दाश्त और सीखने की क्षमता प्रभावित
शक्कर के सेवन से याद्दाश्त पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है. चूहों पर हुए एक शोध में पाया गया कि 6 हफ़्तों तक फ्रूक्टोज़ का सेवन करने के बाद चूहे अपने बिल का रास्ता भूल गए. शक्कर के अत्यधिक सेवन से ब्रेन सेल्स के कम्यूनिकेशन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे सीखने की क्षमता और याद्दाश्त पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

Health Problems From Sugar

शक्कर का सीमित सेवन

1. अत्यधिक शक्कर वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज़ करें. ज़्यादातर प्रोसेस्ड फूड्स में शक्कर होता है, इसलिए कोई भी प्रोसेस्ड फूड ख़रीदने से पहले लेबल को ध्यान से पढ़ें.
2. अगर कुछ मीठा खाने का मन कर रहा है तो मिठाई या आइसक्रीम की बजाय फल खाएं.
3. सोडा और आर्टिफिशियल फ्रूट जूस न पीएं.
4. डायट सोडा और आर्टिफिशियल स्वीटनर से भी परहेज़ करें.प फ्लेवर्ड योगर्ट न खाएं, क्योंकि उसमें भी शक्कर होता है. इसकी बजाय सादी दही में फल और 1-2 बूंद वेनिला एक्सट्रैक्ट मिलाकर खाएं.

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कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने के 10+ रामबाण घरेलू उपाय (10 +Natural Ways To Lower Your Cholesterol Levels)

कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) हमारे रक्त में पाया जाने वाला फैट है, जो हार्मोन्स के निर्माण और उनके सही तरी़के से काम करने के लिए ज़रूरी है, लेकिन जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर आवश्यकता से अधिक बढ़ जाता है तो तरह-तरह की स्वास्थ्य (Health) संबंधी समस्याएं (Problems) होती हैं. यही वजह है कि इसे मेंटेन रखने के लिए लोग अलग-अलग तरह के तेल का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन आपको बता दें कि कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित रखने के लिए खान-पान पर नियंत्रण रखना बहुत ज़रूरी है. हम आपको कुछ आसान घरेलू उपाय बता रहे हैं, जिनकी मदद से आप घर बैठे कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रख सकते हैं.

Cholesterol Levels

  1. कोलेस्ट्रॉल लेवल नियंत्रित रखने के घरेलू उपायकोलेस्ट्रॉल लेवल नियंत्रित रखने के घरेलू उपाय एक रिसर्च से सिद्ध हो गया है कि गुग्गुल का प्रयोग यदि औषधि के रूप में किया जाए तो यह कोलेस्ट्रॉल को कम करता है.

2.  हल्दी के उपयोग से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा में कमी आती है.

3. सुबह-शाम एलोवेरा और आंवला के रस में शहद मिलाकर पीने से फ़ायदा होगा. इसके अलावा कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखना है तो अंकुरित मूंग खाएं.

4. जिन लोगों को हाई कोलेस्ट्रॉल है, उन्हें सुबह उठने के बाद ख़ाली पेट कच्चा लहसुन खाना चाहिए, इससे फ़ायदा होता है.

5. कड़वे, कसैले और तीखे खाद्य पदार्थ कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं. ब्रोकोली, गोभी, फूलगोभी और फलों का सेवन करें.

Cholesterol Levels

6.  दिनभर में कम से कम 7-8 गलास पानी अवश्य पीएं.

7. हमेशा खाना पकाने के तुरंत बाद गर्मागर्म खाना खाने की आदत डालें.

8. एक कप दूध को बर्तन में 5 मिनट तक उबालें और एक अन्य कप में पानी लेकर एक चुटकी इलायची और दालचीनी मिलाएं. दोनों को मिला कर धीरे-धीरे इस मिश्रण को पीएं.

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9. घुलनशील फाइबर, जैसे-ओट, जौ और दानेदार अनाज के सेवन से कोलेस्ट्रॉल को शरीर से बाहर निकलने में आसानी होती है, इसलिए भोजन में कम से कम 20 ग्राम घुलनशील फाइबर की मात्रा शामिल करें.

10. भोजन बनाते समय हल्दी और करीपत्ते का प्रयोग करें. इसमें कोलेस्ट्रॉल कम करने के गुण होते हैं.

11. दिन में सोने से बचें, क्योंकि इससे मेटाबॉलिज़्म स्लो हो जाता है. सुबह 6 बजे से पूर्व उठा करें. सही समय पर भोजन करें और रात में सुपाच्य तथा हल्का भोजन करें.

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12. एक ग्लास पानी में 2 चम्मच धनिया बीज डालकर उबालें. फिर उसे ठंडा होने दें. इस मिश्रण को दिन में 3 बार पीएं. तरबूज के बीज सुखाकर भून लें और इसका बारीक़ चूर्ण बना लें. 1 चम्मच चूर्ण को 1ग्लास पानी में अच्छी तरह मिलाकर दिन में एक बार पीएं.

13. 10-15 तुलसी और नीम के पत्ते लेकर उन्हें पीसकर पेस्ट बनाएं. 1 ग्लास पानी में मिलाकर दिनभर में एक बार खाली पेट पीएं.

 

Personal Problems: दो साल में सिर्फ दो बार पीरियड्स आए (Reasons For Irregular Periods)

Reasons For Irregular Periods
मैं 18 साल की कॉलेज स्टूडेंट हूं. 13 साल की उम्र में मेरे पीरियड्स शुरू हो गए थे, पर कभी नियमित रूप से पीरियड्स आए नहीं. पिछले दो साल में स़िर्फ दो बार पीरियड्स आए हैं. डॉक्टर का कहना है कि इस उम्र में ऐसा होना सामान्य है, पर मेरी सभी सहेलियों के पीरियड्स नियमित हैं, इसलिए मुझे चिंता हो रही है. कृपया, मार्गदर्शन करें.
– सरोजनी राय, नोएडा.

आमतौर पर पीरियड्स शुरू होने के दो साल तक अनियमित रहते हैं. कभी-कभार तो डेढ़ या दो महीने बाद पीरियड्स आते हैं, पर ज़्यादातर मामलों में 2 साल के बाद पीरियड्स नियमित हो जाते हैं, जबकि आपके मामले में ऐसा नहीं हुआ. आपको डरने की ज़रूरत नहीं. डॉक्टर से मिलकर आपको जनरल चेकअप के साथ-साथ कुछ ब्लड टेस्ट्स कराने होंगे, ताकि किसी भी तरह के हार्मोनल इश्यूज़ के बारे में पता चल सके. हो सकता है, इसका कारण थायरॉइड या पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसीज़ हो, पर आप घबराएं नहीं, क्योंकि हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए तुलना न करें, बल्कि डॉक्टर से मिलें.

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Reasons For Irregular Periods

मैं 27 वर्षीया वर्किंग वुमन हूं. पिछले दिनों पेट के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत के कारण डॉक्टर की सलाह पर सोनोग्राफी करवाई. रिपोर्ट में मेरी ओवरीज़ में 5 से.मी. का सिस्ट दिखा है. मेरे गायनाकोलॉजिस्ट ने कहा है कि घबराने की कोई बात नहीं और 3 महीने बाद फॉलोअप करने की सलाह दी है. मैं बहुत परेशान हूं, कृपया मार्गदर्शन करें.
– रीना शुक्ला, नई दिल्ली.

आपकी रिपोर्ट में जिस सिस्ट के बारे में लिखा गया है, उसे फिज़ियोलॉजिकल सिस्ट कहते हैं. महिलाओं की रिप्रोडक्टिव एज में यह आम बात है. अगर घबराने की कोई बात होती, तो डॉक्टर आपको ब्लड टेस्ट्स करने की सलाह देतीं, क्योंकि आपको 3 महीने बाद फॉलोअप के लिए बुलाया गया है, इससे पता चलता है कि कोई गंभीर बात नहीं है. सिस्ट के आकार में कोई बदलाव आया या नहीं, यह जानने के लिए फॉलोअप बहुत ज़रूरी है.

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 Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
[email protected]

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