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Personal Problems: हिस्टेरेक्टॉमी के बाद कैसी हो डायट? (What Diet Should Be Taken After Hysterectomy?)

मेरी उम्र 24 साल है. मेरी शादी को 6 महीने हो गए हैं. मेरी समस्या है कि मेरे गुदाद्वार पर गुलाबी रंग का छोटा-सा मस्सा हो गया है और आसपास की जगह पर सूजन है. कृपया, बताएं कि मैं किस डॉक्टर से संपर्क करूं?
– अनीता गोयल, मिर्जापुर.

आपको एनोजेनिटल वार्ट्स की समस्या हो सकती है. यह संक्रमण जननेंद्रियों के संपर्क में आने से या ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण फैलता है. कई बार यह संक्रमण अपने आप ही ठीक हो जाता है. लेकिन यदि यह ठीक नहीं हो रहा है तो गायनाकोलॉजिस्ट की सलाह लें, जो  पैप स्मीयर टेस्ट कराएंगे, जिससे इस संक्रमण के सही कारण का पता चल सकेगा.

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Hysterectomy

मेरी मम्मी की अभी हाल ही में एबडॉमिनल हिस्टेरेक्टॉमी हुई है. क्या आप बता सकती हैं कि उन्हें किस तरह की डायट देनी चाहिए? मैंने सुना है कि ऑपरेशन के बाद कम से कम 2 हफ़्ते तक चावल नहीं खाना चाहिए. क्या यह सही है? कृपया, सलाह दें?
  – त्रिशाला पांडे, जयपुर.

जब भी एबडॉमिनल सर्जरी की जाती है तो सावधानी के तौर पर आंतों का ख़ास ध्यान रखा जाता है, क्योंकि सर्जरी के बाद वे बहुत धीमी गति से काम करती हैं. सर्जरी के बाद सॉलिड डायट इसलिए नहीं दी जाती कि आंतें अपना काम सुचारु रूप से करने योग्य हो सकें. जब आंतें सामान्य रूप से काम करना शुरू कर देंगी तो डॉक्टर्स डायट देना आरंभ कर देंगे. सर्जरी के बाद सबसे पहले फ्लुइड, बाद में लिक्विड व सॉ़फ़्ट डायट और फिर सॉलिड डायट दी जाती है. मरीज़ को आरंभ से ही ऐसी डायट दी जाती है, जिसे वह आसानी से पचा सके, जैसे- फल व सब्ज़ियां आदि. बाद में ज़रूरत के अनुसार कार्बोहाइड्रेट्स और प्रोटीन, जैसे- दाल, स्प्राउट्स, लीन मीट आदि दिया जाता है. लेकिन ़ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट्स नहीं देना चाहिए. मरीज़ को चावल दे सकते हैं, पर उचित मात्रा में.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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World Mental Health Day: मानसिक बीमारी है अकेलापन, अनदेखा न करें (The Health Consequences of Loneliness)

दोस्त को देखकर रास्ता बदल देना, सामाजिक कार्यक्रमों में जाने से हिचकिचाना, भीड़ में ख़ुद को अकेला महसूस करना…क्या ये लक्षण सामान्य हैं? या किसी समस्या की ओर इशारा करते हैं? इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने बात की सॉल्यूशन काउंसलिंग सेंटर की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ से. हममें से ज़्यादातर लोग कभी न कभी अकेलापन महसूस करते हैं. ऐसा होना एक सामान्य बात है, लेकिन अगर अक्सर ऐसा होने लगे यह ख़तरे की घंटी हो सकती है. आज वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे के अवसर पर हम आपको अकेलेपन की समस्या से निपटने के उपाय बता रहे हैं.

Health Tips

शरीर और मन के बीच है गहरा कनेक्शन
शरीर और मन जुड़ा हुआ होता है. हम शरीर और मन को अलग नहीं कर सकते. दोनों साथ में चलनेवाली चीज़ें हैं. हमारी शारीरिक समस्याएं हमें मानसिक समस्याएं दे सकती हैं, ठीक उसी तरह मानसिक समस्याएं भी शारीरिक समस्याएं दे सकती हैं. शारीरिक समस्याओं के कारण होनेवाली मानसिक समस्याओं से निपटना आसान होता है, बशर्ते कि हमें समय रहते हमें यह समझ में आ जाए. समझ न आने पर स्वभाव में चिड़चिड़ापन, दर्द, बैचेनी इत्यादि समस्याएं हो सकती हैं. आम लोगों के लिए यह समझना बहुत मुश्क़िल होता है कि कोई समस्या मानसिक कारण से हो रहा है या शारीरिक कारण से. मानसिक समस्या को समझने में बहुत समय लगता है. लोग इस बात को स्वीकार नहीं करना चाहते कि उन्हें कोई प्रॉब्लम है. अकेलापन महसूस करना भी ऐसी ही मानसिक स्थिति है. लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि यह एक वॉर्निंग वेल है.

समस्या की शुरुआत हो सकती है
अकेलापन एंज़ाइटी से आता है. एंज़ाइटी होने पर सबसे पहले व्यक्ति को अकेलापन महसूस करता है. ऐसे लोग दूसरों को अवॉइड करने लगते हैं. क्योंकि वे दूसरे के सवाल-जवाब से बचना चाहते हैं. इसे विथड्रावल या अवॉइडेंस सिम्टम कहते हैं. ऐसे व्यक्ति लोगों के बीच जाना ही नहीं चाहते. न ही किसी से मिलना पसंद करते हैं. जाहिर है ख़ुद को समाज से काट लेने पर उन्हें अकेलापन महसूस होता है. यह एक शुरुआत है. अगर आपको भी भीड़ में भी अकेला महसूस हो तो यह समझ जाना चाहिए कि यह मानसिक समस्या का संकेत है. तो बेहतर होगा कि आप अलर्ट हो जाएं. समस्या से लड़ने का यह पहला स्टेप है.

वजह जानना है ज़रूरी
अकेलेपन की वजह जाननी बहुत ज़रूरी है. इसे सेल्फ इवैल्यूशन कहते हैं. कहने का अर्थ है कि आप यह जानने की कोशिश कीजिए कि आपको ऐसा क्यों हो रहा है? आप किसी से क्यों नहीं मिलना चाहते? लोगों को देखकर आप रास्ता क्यों बदल देते हैं? ऐसी क्या वजह है कि आपको लोगों से मिलने का मन नहीं करता? आपको लोग क्यों नहीं पसंद आते? ऐसी क्या वजह है कि जो लोग आपको पहले अच्छे लगते थे, अब वे पसंद नहीं आते. आपके लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि बदलाव आपमें आया है कि लोगों में, क्योंकि लोग तो वही हैं. कुछ आपमें है तो अलग हो रहा है. कुछ लोग इस समस्या से बाहर आने के लिए, सेल्फ हेल्फ बुक्स और वीडियोज़ का सहारा लेते हैं. उन्हें लगता है कि एक-दो बुक्स पढ़ने या वीडियो देखने से इस समस्या से निकला जा सकता है, उनकी यह सोच ही ग़लत है. बुक या वीडियो देखने से काम नहीं बनने वाला. आपको किसी व्यक्ति के मदद की ज़रूरत है.

Health Tips

किसी के साथ शेयर कीजिए
ज़रूरी नहीं है कि आप प्रोफेशनल के पास जाएं. आपको ऐसे व्यक्ति के पास जाना होगा, जो आपको सुन व समझ सके. आपके आस-पास कोई न कोई ऐसा ज़रूर होगा, जो आपमें दिलचस्पी रखता होगा और आपकी भलाई चाहता होगा. उससे बात कीजिए. अक्सर लोग किसी से कुछ कहने से इसलिए भी कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे बात फैल जाएगी. लेकिन ध्यान दें किसी से बात शेयर न करना, प्रेशर कुकर की तरह है. आपको यह समझना होगा कि कि आपने अपने शरीर के अंदर प्रेशर कुकर पालकर रखा है. अगर बहुत प्रेशर हो गया तो उसके ब्लास्ट होना ही है. इसलिए फीलिंग को बाहर निकलना बहुत ज़रूरी है. किसी न किसी से शेयर करना पड़ेगा.

Health Care Tips

लिखकर फाड़ दें
अगर शेयर नहीं कर सकते तो किसी नोटबुक में लिखकर फाड़ दीजिए. इसे थीळींश- ठशरव-र्इीीप टेक्नीक कहते हैं. लिखते समय आप अपनी पूरी भड़ास निकाल लीजिए. एक-दो घंटे बाद उसे पढ़िए और पढ़कर फाड़ दीजिए. उसे इकट्ठा नहीं करना है. कई मामलों में तो ऐसा होता है कि लोगों को अपना लिखा पढ़कर ही हंसी आती है कि आख़िर कैसी छोटी-सी बात परेशान कर रही थी. अगर आप उसे फड़ा रहे हैं तो इसका अर्थ हुआ कि आप अतीत भूलना चाहते हैं और अगर एकत्रित करेंगे तो इसका अर्थ होगा कि आप अपने दुखों को जमा कर रहे हैं.
मेडिटेशन और काउंसलिंग मेडिटेशन से फ़ायदा होता है, लेकिन सिर्फ़ इससे ही कुछ नहीं होना. अगर इन उपायों को अपनाने के बाद और अपनी ओर से पूरी कोशिश करने के बाद ही बात न बने तो थेरेपिस्ट से संपर्क करें.

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क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

Vaginal Health
क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

सतर्कता व जागरूकता की कमी के चलते आज भी अधिकांश महिलाएं वेजाइनल हेल्थ को इग्नोर करती हैं. शायद कम ही लोग जानते हैं कि वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन का ख़्याल न रखने की वजह से कई गंभीर यौन रोग व इंफेक्शन का ख़तरा पनप सकता है.
बेहतर होगा कि ऐसे में वेजाइनल हाइजीन का पूरा ख़्याल रखें.

हेल्दी वेजाइना के बेसिक रूल्स
अक्सर महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट की हेल्थ की ज़रूरत का महत्व नहीं समझतीं. शायद इस तरफ़ उनका ध्यान ही नहीं जाता, क्योंकि ये बातें उन्हें बचपन से घर पर भी नहीं सिखाई जातीं. लेकिन अब व़क्त बदल रहा है, ऐसे में वेजाइनल हेल्थ के महत्व को समझना बेहद ज़रूरी है.

वेजाइनल हेल्थ को प्रोटेक्ट करने ईज़ी स्टेप्स

– वेजाइनल पीएच बैलेंस को करें प्रोटेक्ट
यदि सही पीएच बैलेंस बना रहे, तो वो हेल्दी बैक्टीरिया की ग्रोथ को बढ़ाता है. इस वजह से बेहद ज़रूरी है कि वेजाइनल पीएच बैलेंस को प्रोटेक्ट किया जाए.

– हेल्दी वेजाइना के लिए ज़रूरी है हेल्दी डायट
हाइजीन के साथ-साथ वेजाइना की हेल्थ की लिए सही-संतुलित डायट भी बेहद ज़रूरी है.

– करें सेफ सेक्स
अक्सर झिझक के चलते महिलाएं अपने मेल पार्टनर से सेफ सेक्स पर चर्चा तक नहीं करतीं. लेकिन आपकी सेहत आपके हाथ में है. संकोच न करें और पार्टनर से कंडोम यूज़ करने को कहें, क्योंकि यह कई तरह के यौन संक्रमण से आपका बचाव करता है.

– रेग्यूलर चेकअप करवाएं
भारत में अभी भी यह कल्चर डेवलप नहीं हुआ. यही वजह है कि वेजाइनल इंफेक्शन और यहां तक कि कैंसर तक भी सतर्कता की कमी के चलते हो रहे हैं. नियमित चेकअप से आप इन सबसे बच सकती हैं.

– क्या करें अगर इंफेक्शन हो जाए?
इंफेक्शन होने पर सही इलाज व सही केयर करें, ताकि वह बढ़ नहीं और भविष्य में इंफेक्शन न हो इसके लिए भी सतर्कता बरतें.

– सही हो अंडरगार्मेंट सिलेक्शन

कॉटन पैंटीज़ लें. सिंथेटिक से बचें. वेजाइनल भाग ड्राय रखने की कोशिश करें.

– हाइजीन का रखें ख़ास ख़्याल
साफ़-सफ़ाई रखें. टॉयलेट में भी इसका ख़्याल रखें. पब्लिक टॉयलेट्स के इस्तेमाल के व़क्त सावधानी बरतें.

पेल्विक एक्सरसाइज़ से रखें वेजाइना को हेल्दी
स़िर्फ डायट ही नहीं सही एक्सरसाइज़ भी वेजाइनल हेल्थ के लिए ज़रूरी है.

सर्वे- क्यों झिझकती हैं महिलाओं?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज भी बहुत बड़ी संख्या में भारतीय महिलाएं वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन के महत्व को न तो समझती हैं और न ही इस पर खुलकर बात करती हैं. यही वजह है कि वो वेजाइनल प्रॉब्लम्स से दो-चार होती हैं.

जागरूकता की कमी भी एक सबसे बड़ी वजह
हमारा सामाजिक ढांचा इसकी बड़ी वजह है. यहां इन अंगों पर बात तक करने से लोग हिचकते हैं. यहां तक के अपने डॉक्टर्स से भी इस पर बात करने से कतराते हैं..

आंखों के लिए अच्छे नहीं हैं ये 5 रोग (5 Diseases That Can Harm Your Eyes and Vision)

आंखें मानव शरीर का एक अहम् अंग हैं जिससे वो इस ख़ूबसूरत दुनिया को देख सकता है, लेकिन ज़रा सोचिए, अगर इन आंखों की रोशनी कमज़ोर पड़ जाए या फिर आंखों की रोशनी ही चली जाए तो ये रंगीन दुनिया कितनी बेरंग और अंधकारमय लगने लगेगी. इसलिए आंखों को लंबे समय तक सेहतमंद बनाए रखने के लिए उनकी सही देखभाल बहुत ज़रूरी है. दरअसल, हमारी आंखें शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी होती हैं. ऐसे में शरीर में होने वाली किसी भी स्वास्थ्य समस्या का दुष्प्रभाव आंखों पर भी दिखाई देता है. हालांकि कई बार हम इन स्वास्थ्य समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो आंखों की सेहत के लिए घातक साबित हो सकती हैं. चलिए जानते हैं ऐसे ही 5 रोग, जो आंखों की सेहत को नुक़सान पहुंचाते हैं. 

Eye Diseases

हाई कोलेस्ट्रॉल
जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है तो इसका असर चेहरे पर साफ़ दिखाई देने लगता है. चेहरे पर कोलेस्ट्रॉल जमा होने के कारण आंखों के ऊपर और नीचे निशान पड़ जाते हैं. इसके अतिरिक्त अधिक कोलेस्ट्रॉल जमा होने से आंखों की ओर होने वाला रक्त संचार भी बंद हो जाता है, जिसके कारण धीरे-धीरे आंखों की रोशनी कमज़ोर होने लगती है और आंखों में दर्द की शिकायत होती है. हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली आंखों की इस समस्या को डायस्लिपिडेमिया भी कहा जाता है.
लक्षण
. आंखों के ऊपर व नीचे निशान पड़ना.
. आंखों का बदसूरत नज़र आना.
. आंखों में दर्द व तकलीफ़ महसूस होना.
. आंखों से कम दिखाई देना.

थायरॉइड
गर्दन के बीचों बीच मौजूद तितली के आकार की थायरॉइड ग्रंथि से थायरॉइड हार्मोन का स्राव होता है, जो पूरे शरीर के मेटाबॉलिज़्म को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है. हालांकि इस ग्रंथि से आवश्यकता से कम या अधिक मात्रा में थायरॉइड हार्मोन्स का स्राव कई शारीरिक समस्याओं को जन्म दे सकता है और यह आंखों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. थायरॉइड ग्रंथि से जुड़े किसी भी विकार के चलते आंखों के आसपास के टिशूज़ में सूजन आने लगती है और डबल विज़न यानी हर चीज़ डबल दिखाई देती है. इतना ही नहीं, कई बार तो थायरॉइड के मरीज़ों की आंखें पूरी तरह से बंद भी नहीं हो पाती हैं. आंखें पूरी तरह से बंद भी नहीं हो पाती हैं.
लक्षण
. आंखों के आसपास के टिशूज़ में सूजन.
. आंखों में पानी भरना व दबाव महसूस होना.
. एक ही चीज़ का डबल-डबल नज़र आना.
. आंखों में सिकुड़न और ड्राइनेस की समस्या.

डायबिटीज़
डायबिटीज़जो लोग डायबिटीज़ से पीड़ित हैं उन्हें अपनी आंखों की नियमित जांच करवानी चाहिए, क्योंकि इसका असर उनके शरीर के साथ-साथ आंखों पर भी पड़ता है. डायबिटीज़ के कारण आंखों की रोशनी कम हो जाती है और सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है. इससे पीड़ित लोगों में रेटिनोपैथी, ग्लूकोमा और मोतियाबिंद जैसे कई नेत्र रोगों के होने की आशंका बढ़ जाती है. दरअसल, ब्लड शुगर में होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण आंखों को ब्लड सप्लाई करने वाली कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे इमेज व कलर धुंधले दिखाई देने लगते हैं और रेटिना में सूजन आ जाती है. हालांकि कई बार इस समस्या का पता तब चलता है, जब यह बीमारी बहुत गंभीर रूप ले चुकी होती है.
लक्षण
. ग्लूकोमा या मोतियाबिंद की समस्या.
. आंखों का बार-बार संक्रमित होना.
. बार-बार चश्मे का नंबर बदलना.

स्ट्रोक
स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में हर साल 1.5 लाख लोग ब्रेन स्ट्रोक के शिकार होते हैं. जबकि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक़, ब्रेन स्ट्रोक के 41 फ़ीसदी मामलों में व्यक्ति की जान को ख़तरा होता है और 59 फ़ीसदी लोगों में शारीरिक या मानसिक दुर्बलता की आशंका बनी रहती है. हालांकि स्ट्रोक के बाद कुछ लोग चलने-फिरने में असमर्थ हो जाते हैं, जबकि कुछ की स्मरण शक्ति कमज़ोर पड़ जाती है और कई लोगों की आंखों से धुंधला दिखाई देने लगता है. कई बार स्ट्रोक के कारण आंखों की नर्व्स डैमेज हो जाती है, ऐसे में मरीज़ को एक ही चीज़ डबल दिखाई देने लगती है या फिर उसकी आंखों से सब कुछ धुंधला दिखता है.

लक्षण
. आंखों से सब कुछ धुंधला दिखाई देना.
. एक ही वस्तु का डबल नज़र आना.
. एक आंख से कम दिखाई देना.
. दोनों आंखों की रोशनी का प्रभावित होना.

रेटिनल माइग्रेन
रेटिनल माइग्रेन की समस्या होने पर आंखों में दर्द की शिकायत हो सकती है और जिन लोगों को रेटिनल माइग्रेन होता है उन लोगों की एक आंख की रोशनी क़रीब 10-20 मिनट के लिए चली जाती है, जबकि कुछ मामलों में तक़रीबन 1 घंटे के लिए आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है. कई बार आपको ऐसा भी लग सकता है कि आंखों के सामने लाइट फ्लैश हो रही है और आपको कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है. रेटिनल माइग्रेन में इन लक्षणों के आने से पहले या बाद में आपको सिरदर्द की परेशानी हो सकती है. रेटिनल माइग्रेन के लिए अत्यधिक एक्सरसाइज़, स्मोकिंग, डिहाइड्रेशन, हाइपरटेंशन और कैफीन जैसी कई चीज़ें ज़िम्मेदार हो सकती हैं.

लक्षण
. क़रीब एक घंटे तक सब कुछ धुंधला दिखाई देना.
. एक आंख की रोशनी का अचानक से कम हो जाना.
. रेटिनल माइग्रेन के बाद या पहले तेज़ सिरदर्द होना.
. सिरदर्द और मितली के साथ आंखों की रोशनी का कमज़ोर होना.

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Personal Problems: हार्मोंस के कारण चिन पर बहुत बाल हैं, कोई उपाय बताएं? (Please Suggest Something For Unwanted Facial Hair)

मेरी उम्र 22 साल है. मेरे शरीर पर बहुत बाल हैं, ख़ासतौर से चिन पर. मैंने हेयर रिमूवल क्रीम्स, वैक्सिंग, थ्रेडिंग सभी टेम्प्रेरी तरी़के अपनाए, पर कोई लाभ नहीं हुआ. 
 – शीतल झा,पुणे.

आपको हिरसूट़िज़्म यानी एक्सेसिव हेयर ग्रोथ की समस्या है, जिसमें शरीर पर पतले, कठोर और काले बाल होते हैं, जैसे पुरुषों के होते हैं. हार्मोंस में असंतुलन के कारण महिलाओं में यह समस्या होती है. आपको हार्मोनल टेस्ट करवाना चाहिए. यदि हार्मोंस में असंतुलन हो गया है या हार्मोंस ब्लॉक हो गए हैं, तो आपको ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स या एंटीएंड्रोजन की ज़रूरत होगी. बेहतर होगा कि आप गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करें.

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Unwanted Facial Hair
मेरी 65 वर्षीया सहेली को 10 वर्ष पहले मेनोपॉज़ हो चुका था. लेकिन कुछ दिनों पहले उसे थोड़ी ब्लीडिंग हुई. क्या मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग होना ठीक है? मुझे भी  मेनोपॉज़ हो चुका है और मुझे डर है कि कहीं मेरे साथ भी ऐसा ही न हो?
– पूजा गौतम, पंजाब.

हो सकता है एट्रोफिक वेजिनाइटिस या वेजाइना के थिक होने के कारण आपकी सहेली के साथ ऐसा हुआ हो. लेकिन ऐसी स्थिति में लापरवाही बरतना ठीक नहीं. यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है, जैसे- सर्विक्स कैंसर, ओवरी कैंसर, एंडोमेट्रियल पोलिप्स, यूरिनल ट्यूमर आदि.  इसलिए मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग को हल्के से नहीं लेना चाहिए. जहां तक आपका सवाल है तो आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं. ज़रूरी नहीं कि आपकी सहेली के साथ जो हुआ है, वो आपके साथ भी हो.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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कब्ज़ से छुटकारा पाने के आसान व असरदार घरेलू उपाय (Home Remedies To Get Rid Of Constipation)

. 1 टेबलस्पून ऑलिव ऑयल सुबह खाली पेट लें, चाहें तो इसमें 1 टीस्पून नींबू का रस भी मिला सकते हैं. यह बहुत ही अच्छा उपाय है. अगर खाली पेट लेना भूल जाएं, तो खाना खाने के बाद जब आपको दोबारा भूख महसूस हो, तब लें.
. 1 नींबू का रस 1 कप गर्म पानी में मिलाकर पिएं.

Remedies To Get Rid Of Constipation
.1 टीस्पून गुड़ और ख़ासतौर से काला गुड़ कब्ज़ में फ़ायदेमंद है. चाहें तो इसे पानी या चाय में मिलाकर भी ले सकते हैं. बाद में इसकी मात्रा 2 टेबलस्पून तक कर सकते हैं. रात में खाना खाने के बाद गुड़ के सेवन से सुबह कब्ज़ नहीं होता.
.अगर संतुलित मात्रा में पी जाए, तो कॉफी भी कब्ज़ से राहत देती है. दिन में 1-2 कप कॉफी पाचन क्रिया को बढ़ती है. लेकिन अधिक पीने से डिहाइड्रेशन होकर कब्ज़ बढ़ने का ख़तरा भी रहता है.
. ल्की एक्सरसाइज़ और वॉक ज़रूरी है. इससे अंदरूनी अंगों में क्रियाशीलता व गतिशीलता आती है और कब्ज़ की समस्या भी नहीं होती.
.पानी ख़ूब पिएं और फाइबरयुक्त आहार लें, जिसमें ताज़ सब्ज़ियां व फल भी शामिल हों.
.1 ग्लास संतरे का जूस पल्प के साथ लें. इसमें 1 टेबलस्पून फ्लैक्स सीड ऑयल मिलाकर पिएं. 5 घंटे बाद आपका पेट साफ़ हो जाएगा.
.2 टेबलस्पून एलोवीरा जेल को फ्रूट जूस में मिलाकर सुबह-सुबह लें या फिर 1 कप एलोवीरा जूस पिएं.
.दिन में 1-3 कप दही ज़रूर खाएं. 1 कप नाश्ते में लें और बाकी खाने के साथ. दही के हेल्दी बैक्टिरिया पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं और कब्ज़ से बचाते हैं.
.गर्म पानी में बेकिंग सोडा मिलाकर पीने से भी पेट साफ़ होता है.
.रिफाइन्ड फूड से बचें.
.1 टेबलस्पून शहद दिन में 3 बार लें. आप चाहें तो इसे गर्म पानी में मिलाकर भी ले सकते हैं.
. तिल का सेवन करें. चाहें तो सलाद में मिलाकर भी उसे ले सकते हैं. पर ध्यान रहे कि इसका सेवन संतुलित मात्रा में ही करें. तिल को खाने के बाद पानी ख़ूब पिएं.

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जानिए खजूर के 10 बड़े फायदे ( 10 Proven Health Benefits of Dates)

विटामिन, फाइबर और मिनरल्स से भरपूर खजूर (Dates) स्वाद और सेहत की दृष्टि से बहुत ही लाभकारी है. खजूर कोलेस्ट्रॉल फ्री होने के साथ-साथ डायटरी फाइबर, विटामिन्स, मिनरल्स और कैल्शियम से भरपूर होता है. इसमें बहुत कम फैट होता है, जो हार्ट संबंधी बीमारियों से होने वाले ख़तरे को कम करता है. खजूर में हाई न्यूट्रीशनल वैल्यू होती है, जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है.

Health Benefits of Dates

– खजूर में सोल्यूबल व इनसोल्यूबल फाइबर और अनेक तरह के अमीनो एसिड होते हैं, जो पाचन तंत्र में सुधार करते हैं.
– इसमें मैग्नीशियम, कॉपर, मैगनीज़, विटामिन बी5, विटामिन बी3 और सेलेनियम आदि तत्व होते हैं, जो हड्डियों और दांतों को स्ट्रॉन्ग व हेल्दी बनाने और आंत संबंधी संक्रमण को दूर करने में मदद करते हैं.
– जिन लोगों को कब्ज़ की शिकायत होती है, उनके लिए खजूर बहुत फ़ायदेमंद है. खजूर को सारी रात भिगोकर रखें और सुबह उठकर खा लें. खजूर में प्राकृतिक रूप से फाइबर, प्रोटीन और अनेक पोषक तत्व होते हैं, जो कब्ज़ को दूर करने में सहायक होते हैं.
– खजूर में आयरन और कैल्शियम होता है. इसे खाने से ख़ून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है और एनर्जी का स्तर भी बढ़ता है.
– खजूर में नेचुरल शुगर, जैसे- ग्लूकोज़, फू्रक्टोज़ और सुक्रोज़ होता है, जो एनर्जी बढ़ाता है. इसलिए इसे मिड डे स्नैक्स के रूप में ले सकते हैं.
– इसमें मौजूद विटामिन्स नर्वस सिस्टम को हेल्दी बनाए रखते हैं. पोटैशियम ब्रेन को अलर्ट रखता है और हार्ट संबंधी बीमारियों के ख़तरे को कम करके उसे हेल्दी बनाता है.
– महिलाओं में ही नहीं, बल्कि आजकल पुरुषों में भी जोड़ों के दर्द की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है. कैल्शियम की कमी होने पर जोड़ों का दर्द होता है. रोज़ाना 5-6 खजूर खाने से कैल्शियम की कमी को पूरा किया जा सकता है.
– डायरिया को नियंत्रित करने के लिए खजूर अच्छा विकल्प है. खजूर में मौजूद पोटैशियम तत्व खाने को अच्छी तरह पचाने में मदद करता है.
खजूर रेसिपी
– खजूर को बीच में से काटकर बीज निकाल लें. क्रश्ड किए हुए अखरोट और बादाम को भरकर खाएं.
– 10-15 खजूर के बीज निकालकर बारीक़ टुकड़ों में काट लें. कटे हुए खजूर से सलाद और डेज़र्ट्स को सजाकर सर्व करें.
– टेस्टी ब्रेकफास्ट स्मूदी बनाने के लिए दूध, 1 चुटकी जायफल पाउडर, 2-3 बूंदें वेनिला एसेंस और खजूर को ब्लेंडर में ब्लेंड कर लें. आइस क्यूब्स डालकर सर्व करें.

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Personal Problems: प्रेग्नेंसी के दौरान वज़न को कैसे मैनेज करूं? (How Should I Manage Weight During Pregnancy?)

मेरी उम्र 29 वर्ष है और यह मेरी पहली प्रेग्नेंसी (First Pregnancy) है. पिछले कुछ सालों से मैंने रेग्युलर एक्सरसाइज़ करके अपना वज़न मेनटेन (Weight Maintain) किया है. पर प्रेग्नेंसी में मेरा वज़न बहुत बढ़ जाएगा, यह सोचकर मैं परेशान हूं. कृपया बताएं, प्रेग्नेंसी के दौरान अपने वज़न को कैसे मैनेज करूं?
– जेसिका कौर, अमृतसर.

यह तो बड़ी अच्छी बात है कि आप अपनी फ़िटनेस के प्रति जागरूक हैं. आप तब तक  एक्सरसाइज़ कर सकती हैं, जब तक कंफ़र्टेबल फील करें. प्रेग्नेंसी में सबसे अच्छी एक्सरसाइज़ वॉकिंग होती है. इसके अलावा दूसरी अहम् बात है- प्रेग्नेंसी के दौरान सही डायट लेना. प्रेग्नेंसी के समय एक महिला को अपना वज़न नॉर्मल रखने के लिए पहले 3 महीने में 150- 200 अतिरिक्त कैलोरी रोज़ाना लेनी चाहिए. दूसरे और तीसरे महीने में हर रोज़ 400-500 अतिरिक्त कैलोरीज़ ज़रूरी होती हैं. इसके अलावा पहले 3 महीने में अतिरिक्त डायट में 1 ग्लास दूध, ड्रायफ्रूट, दलिया,  उपमा आदि लेे सकती हैं और दूसरी-तीसरी तिमाही में अतिरिक्त डायट में दाल, दही, फ़िश, चिकन और अंडा आदि ले सकती हैं.

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Manage Weight During Pregnancy

 

मेरी बेटी की उम्र 16 साल है. पिछले कुछ महीनों से उसका वज़न बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है. हर समय नींद आने और थकान होने की शिकायत करती है. अभी तो वह बहुत छोटी है, उसके बढ़ते वज़न को देखकर मुझे बहुत चिंता होने लगी है. कृपया, उचित उपाय बताएं?
– नमिता साहनी, जोधपुर

आप अपनी बेटी को किसी जनरल फ़िज़िशियन या गायनाकोलॉजिस्ट को दिखाएं. वे आपकी बेटी का थायरॉइड टेस्ट कराएंगे. हो सकता है कि आपकी बेटी के बढ़ते वज़न का कारण थायरॉइड हार्मोन की कमी हो. अधिकतर युवाओं में इस तरह की समस्या का होना आम है. इसके अलावा गर्दन में हल्की-सी सूजन, स्किन का ड्राई होना, कब्ज़, थकान महसूस होना, वज़न बढ़ना, डिप्रेशन और आवाज़ का कर्कश होना आदि भी थायरॉइड हार्मोन की कमी के लक्षण हैं.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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कान के दर्द से छुटकारा पाने के 12 आसान होम रेमेडीज़ ( 12 effective home remedies for earache)

earache

कान दर्द (earache) आमतौर पर छोटे बच्चों में पाया जाता है. ज़ुकाम की वजह से या एक ही करवट काफ़ी समय तक सोने से कान में दर्द होता है, जिससे बच्चे रात को अचानक उठकर रोने लगते हैं. इसके अलावा कान में मैल का ज़्यादा जम जाना, पिन या अन्य वस्तु से कान खुजलाना, कान पर चोट लगना, कान में चींटी या अन्य कीड़ा घुस जाना, गला-दांत-जीभ की बीमारियां आदि कारणों से कानों में दर्द होने लगता है. हम आपको कान दर्द (earache) से छुटकारा पाने के आसान घरेलू उपाय बता रहे हैं.

earache
* 1 चम्मच तिल के तेल में लहसुन की आधी कली डालकर कुनकुना गर्म करके दर्द वाले कान में 4-4 बूंदें टपकाकर दूसरी करवट दस मिनट लेटे रहें.
* मुलहठी को घी में मिलाकर हल्का गर्म करके कान के आसपास लेप लगाएं. दर्द से तुरंत राहत मिलेगी.
* एरंडी के पत्तों को गर्म तिल के तेल में डुबोकर उससे कानों के आसपास हल्का सेंक करें.
* कान से मवाद आता हो तो गुग्गुल का धुआं कान पर लें.
* कान में दर्द होने पर अजवाइन के तेल में सरसों का तेल मिलाकर धीमी आंच पर गुनगुना करके कान में डालना लाभकारी होता है. अजवाइन का तेल एक भाग और सरसों का तेल तीन भाग लिया जा सकता है.
* कान में दर्द होने पर लहसुन की 4-5 कलियों को मीठे तेल (अलसी के तेल) में आंच पर रखकर जला लें, बाद में इस तेल को छानकर एक शीशी में भर लें. सुबह-शाम इस लहसुन के तेल को कान में डालें. कुछ ही दिनों में फ़ायदा हो जाता है.
* तुलसी के पत्तों को पीसकर रस बना लें. इस रस को हल्की आंच पर रखकर थोड़ा-सा गर्म कर लें. सहने लायक होने पर 4-5 बूंदें कान में डालें. इससे कान का दर्द मिटता है.
* कान में दर्द होने पर बाह्य रूप से कान को रुई से सेंका भी जा सकता है. कभी-कभी ठंड के कारण या बाहरी हवा के कारण भी कान में दर्द होने लगता है.
* आम के ताज़े हरे पत्तों का अर्क गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है.
* मूली को बारीक़-बारीक़ टुकड़ों में काट लीजिए. इसे सरसों के तेल में डालकर ख़ूब गरम करके निकाल लीजिए. अब इस तेल को किसी शीशी में सुरक्षित रख लीजिए. दर्द के व़क्त कान में यह तेल डालें. आराम मिलेगा.
* कान में चाहे कितना ही भयंकर दर्द हो, केले के तने को चाकू से छीलकर रस निकालें और हल्का गरम करके रात को सोते समय कान में डालें. उसी रात कान का दर्द समाप्त हो जाएगा.
* अदरक का रस गुनगुना करके कान में डालने से दर्द जल्दी मिटता है.

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एंटीबायोटिक्स के बारे 10 बातें जो हर किसी को जाननी चाहिए ( 10 Facts About Antibiotics Which Everyone Should Know)

आज एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) सबसे ज़्यादा प्रिस्क्राइब की जानेवाली दवा बन गई है और चूंकि इससे तुरंत आराम मिलता है, इसलिए हम भी चाहते हैं कि डॉक्टर एंटीबायोटिक ज़रूर दे. कई डॉक्टर भी ज़रूरी न होने पर भी एंटीबायोटिक्स लिख देते हैं. कुल मिलाकर दुनियाभर में एंटीबायोटिक्स का उपयोग की बजाय दुरुपयोग हो रहा है.

Facts About Antibiotics
– सबसे पहले तो ये जान लें कि एंटीबायोटिक्स बेहद इफेक्टिव दवा ज़रूर है, लेकिन ये हर बीमारी का इलाज नहीं है.
– ये भी ध्यान रखें कि एंटीबायोटिक्स स़िर्फ बैक्टीरियल इंफेक्शन से होनेवाली बीमारियों पर असरदार है. वायरल बीमारियों जैसे सर्दी-ज़ुकाम, फ्लू, ब्रॉन्काइटिस, गले में इंफेक्शन आदि मेंे ये कोई लाभ नहीं देती.
– ये वायरल बीमारियां ज़्यादातर अपने आप ठीक हो जाती हैं. हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता इन वायरल बीमारियों से ख़ुद ही निपट लेती हैं. इसलिए अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की कोशिश करें.
– हां, बैक्टीरियल इंफेक्शन से होनेवाली हेल्थ प्रॉब्लम्स में कई बार एंटीबायोटिक्स लेना ज़रूरी हो जाता है.
– एंटीबायोटिक्स तभी लें, जब ज़रूरी हो और जब डॉक्टर ने प्रिस्क्राइब किया हो, वरना ऐसा हो जाएगा कि जब आपको सही में एंटीबायोटिक्स की ज़रूरत होगी, तब वो बेअसर हो जाएगी. दरअसल, एंटीबायोटिक्स लेने से सभी बैक्टीरिया नहीं मरते और जो बच जाते हैं, वे ताक़तवर हो जाते हैं. इन बैक्टीरियाज़ को उस एंटीबायोटिक्स से मारना असंभव हो जाता है. ये एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंट बैक्टीरिया कहलाते हैं.
– ये एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंट बैक्टीरिया ज़्यादा लंबी और गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं और इन बीमारियों से लड़ने के लिए ज़्यादा स्ट्रॉन्ग एंटीबायोटिक्स की ज़रूरत होती है, जिनके और ज़्यादा साइड इफेक्ट्स होते हैं.
– ये एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंट बैक्टीरिया बहुत तेज़ी से फैलते हैं और आपके परिवार के सदस्य, बच्चे और आपके साथ काम करनेवालों को भी अपना शिकार बनाते हैं. और हो सकता है कि एक स्टेज ऐसा भी आ जाए कि सभी ऐसे इंफेक्शन से घिर जाएं, जिसका इलाज मुश्किल हो.
– एंटीबायोटिक्स दवाएं अनहेल्दी व हेल्दी बैक्टीरिया के बीच फ़र्क़ नहीं कर पाती, यही वजह है कि ये अनहेल्दी बैक्टीरिया के साथ-साथ हेल्दी बैक्टीरिया को भी मार देती हैं.
– दुनियाभर में नई एंटीबायोटिक्स का विकास रुक गया है और एंटीबायोटिक दवाओं के बहुत ज़्यादा व ग़लत इस्तेमाल से जो एंटीबायोटिक दवाएं उपलब्ध हैं, वे बेअसर हो रही हैं और ये दुनियाभर के मेडिकल एक्सपर्ट्स के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि ऐसी स्थिति में कई बीमारियों का इलाज मुश्किल हो जाएगा.
– ध्यान रखें कि जिन एंटीबायोटिक्स की आपको ज़रूरत नहीं है, उसे लेने से आप अच्छा महसूस नहीं करेंगे, ना ही ये आपकी किसी तकलीफ़ का इलाज है, बल्कि ये आपको नुक़सान ही पहुंचाएंगे.

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Personal Problems: क्या ब्रेस्ट से लिक्विड डिस्चार्ज होना ख़तरनाक है? (Is Abnormal Nipple Discharge Dangerous?)

मैं 35 वर्षीया महिला हूं और 2 बच्चों की मां भी. पिछले कुछ दिनों से मेरे ब्रेस्ट से मिल्की व्हाइट-सा लिक्विड डिस्चार्ज हो रहा है, जबकि मैंने 5 साल पहले ही अपने बच्चों को स्तनपान कराना बंद कर दिया है. क्या ऐसा डिस्चार्ज होना ख़तरनाक है? मुझे डर है कहीं यह कैंसर तो नहीं?
– सोनाली बंसल, बीकानेर.

पहले तो आप यह बताएं कि क्या आप कोई दवा ले रही हैं? क्योंकि कई बार कुछ दवाओं के खाने से भी ब्रेस्ट से व्हाइट डिस्चार्ज होता है, जिसे ‘गलेक्टोरिया’ कहते हैं. या फिर किसी और कारण से भी ऐसा हो सकता है. इसके लिए आपको गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए. यदि ऐसा दवाओं की वजह से हो रहा है, तो वे उन दवाओं की जगह कुछ अन्य दवाएं आपको देंगी. यदि दवा बदलने के बाद भी यह डिस्चार्ज बंद नहीं होता है, तो गायनाकोलॉजिस्ट आपके कुछ हार्मोनल टेस्ट कराएंगी, जैसे- थायरॉइड टेस्ट, प्रोलेक्टीन लेवल आदि. उसी के आधार पर आपका ट्रीटमेंट करेंगी. कई बार थायरॉइड से संबंधित दवाएं खाने पर भी ब्रेस्ट से डिस्चार्ज होता है.

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Abnormal Nipple Discharge

मैं 35 वर्षीया महिला हूं, मेरी शादी को 9 साल हो गए हैं. मेरे पीरियड्स अनियमित थे. लेकिन ट्रीटमेंट कराने के बाद अब मुझे नियमित पीरियड्स आते हैं. पर मैं गर्भ धारण नहीं कर पा रही हूं, जबकि मेरे और मेरे पति के सारे टेस्ट नॉर्मल हैं. कृपया बताएं, क्या करूं?
– रूपाली गौड, श्रीनगर.

आपको इंफ़र्टिलिटी की समस्या हो सकती है. लगता है आपके ओव्यूलेशन में कुछ प्रॉब्लम है. आपको इंफ़र्टिलिटी स्पेशलिस्ट के पास जाना चाहिए, जो आपके सारे टेस्ट कराने के बाद ही आपका सही ट्रीटमेंट करेंगे. यदि इसके बाद भी सफलता नहीं मिलती है तो टेस्ट ट्यूब बेबी की सहायता से आप मां बन सकती हैं. इसके अलावा यदि आप चाहें तो किसी बच्चे को गोद भी ले सकती हैं.

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जानिए अत्यधिक प्रोटीन के सेवन के साइडइफेक्ट्स (Is Too Much Protein Bad for Your Health?)

हम सभी को लगता है कि प्रोटीन (Protein) हमारे शरीर के लिए सबसे ज़रूरी पोषक तत्व है, इसलिए अक्सर हम बॉडी बनाने या वज़न कम करने के लिए बिना सोचे-समझ अत्यधिक प्रोटीन का सेवन शुरू करना कर देते हैं. जो सेहत बनाने की बजाय बिगाड़ सकते हैं. आपको बता दें कि प्रोटीन शरीर में होने वाली टूट-फूट को रिपेयर करने के साथ ही मसल्स बनाने के लिए भी बहुत आवश्यक होता है.

Protein

क्या होता है नुक़सान ?
* आजकल जिम में एक्सरसाइज़ करने वालों को प्रोटीन शेक पीने या प्रोटीन बार खाने के लिए कहा जाता है. हमारा शरीर हर घंटे स़िर्फ 5 ग्राम प्रोटीन पचा सकता है. जबकि प्रोटीन शेक या बार में 50 ग्राम प्रोटीन होता है, जिसके पचने में 10 घंटे लगते हैं. यह स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है.
* रोजाना 30% से अधिक प्रोटीन के सेवन से किडनी पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है.
* इससे शरीर में कैल्शियम का ह्रास होता है.
* इसके दुष्परिणामों में थकान, त्वचा का शुष्क होना, चक्कर आना, बालों का झड़ना, भूख कम होना, जी मिचलाना, सांसों की बदबू आदि है.
* शरीर में आनेवाला ज़रूरत से ज़्यादा प्रोटीन फैट में बदल जाता है इससे वज़न बढ़ता है.

किसको है ज़्यादा ख़तरा?
* मांसाहारी (नॉन वेजीटेरियन) लोग.
* जिम में जानेवाले लोग जो प्रोटीन शेक या प्रोटीन बार खाकर जल्दबाज़ी में मसल्स बनाना चाहते हैं.

क्या है हेल्दी लिमिट?
* ज़्यादातर लोगों को प्रतिदिन 50 ग्राम से 70 ग्राम तक प्रोटीन की आवश्यकता होती है. अतः नापकर प्रोटीन खाना अच्छा होता है जैसे, 150 ग्राम चिकन में 37 ग्राम प्रोटीन होता है, 1 अंडे में 5 ग्राम प्रोटीन होता है. अतः इनका ज़्यादा सेवन ठीक नहीं है.

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