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Personal Problems: बिकनी लाइन के आस-पास फुंसियों के लिए क्या करूं? (How To Get Rid Of Bikini Boils?)

मैं 40 वर्षीया महिला हूं. मेरे बिकनी लाइन के आसपास कुछ फुंसियां हो गई हैं, जबकि मैं अपने यौनांगों की साफ़-सफ़ाई का पूरा ध्यान रखती हूं. एंटीसेप्टिक सोल्यूशन से साफ़ करती हूं और रेग्यूलर शेव भी करती हूं. फिर भी फुंसियां हो जाती हैं. कोई उपाय बताएं.
– विनीता पांडे, दिल्ली.

बिकनी एरिया में शेव करते समय शायद कुछ कट लग जाने से आपको इंफेक्शन हो गया है. इसलिए बालों को हटाने के लिए शेविंग की बजाय कैंची से कट करें. नहाते समय यौनांगों की सफ़ाई के लिए माइल्ड एंटीसेप्टिक सोल्यूशन का इस्तेमाल करें. कॉटन के अंडर गार्मेंट्स पहनें. अगर फिर भी ये फुंसियां ठीक नहीं होती हैं और ज़्यादा दर्द होता है, तो गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करें. वो आपको एंटीबायोटिक गोलियां और कोई क्रीम या लोशन देंगे.

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Bikini Boils

मेरी उम्र 42 साल है. मेरे दोनों ब्रेस्ट में बहुत दर्द होता है. कभी-कभी तो गांठ-सी भी महसूस होती है. आजकल मैंने ब्रेस्ट कैंसर के बारे में बहुत सुना है. मुझे डर है कि कहीं मुझे भी तो ब्रेस्ट कैंसर नहीं हैं?
– नेहा देसाई, झांसी.

अच्छा होगा कि आप ब्रेस्ट सर्जन या गायनाकोलॉजिस्ट से अपना चेकअप कराएं, जो आपकी मेमोग्राफ़ी और सोनो मेमोग्राफ़ी कराएंगी. जांच के बाद सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. अमूमन 40 साल के बाद सभी महिलाओं को मेमोग्राफ़ी करानी चाहिए. हर महीने अपना सेल्फ़ ब्रेस्ट एग्ज़ामिनेशन करते रहना चाहिए. शीशे के सामने ख़ड़े होकर अपने वक्षों की सुडौलता, निप्पल का लेवलव कलर, स्किन के कलर को अच्छी तरह से चेक करें. ले़फ़्ट हैंड से राइट ब्रेस्ट को और राइट हैंड से ले़फ़्ट ब्रेस्ट को दबाएं. कहीं कोई गांठ तो महसूस नहीं हो रही है. कई बार पीरियड्स बंद होने के एक सप्ताह बाद और मेनोपॉज़ के बाद माह में एक बार ब्रेस्ट में दर्द होता है. हर महिला को 3-5 साल में मेमोग्राफ़ी कराते रहना चाहिए.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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Personal Problems: क्या दोबारा मेरी डिलीवरी सिज़ेरियन ही होगी? (Do I Have To Go Through Cesarean Delivery Again?)

मैं 28 वर्षीया महिला हूं. मुझे 7 महीने का गर्भ है. कुछ दिन पहले मुझे ब्लीडिंग हुई थी. तब डॉक्टर ने बताया कि मेरा प्लासेंटा भ्रूण के मुंह के बहुत पास है और दोबारा भी ब्लीडिंग हो सकती है. कृपया, ब्लीडिंग को रोकने का कोई उपाय बताएं. क्या मेरी डिलीवरी सिज़ेरियन होगी? मेरी पहली डिलीवरी भी सिज़ेरियन थी.
– निष्ठा गांधी, अजमेर.

ऐसा लगता है कि आपका प्लासेंटा कमज़ोर है. यूटेरस के निचले भाग के खिंचने और कमज़ोर होने के कारण ब्लीडिंग होती है. प्रेग्नेंसी के आख़िरी तीन महीने में ऐसा होता है और इसके खिंचाव व कमज़ोर होने का कारण है प्लासेंटा का कमज़ोर होना. अगर ब्लीडिंग होती है, तो आपको तुरंत अपने गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए. आपकी कंडीशन को देखते हुए ब्लीडिंग को रोकने के लिए वे आपकी डिलीवरी सिज़ेरियन भी कर सकते हैं.

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Cesarean Delivery

मेरी उम्र 22 वर्ष है. कुछ दिनों से मेरे प्राइवेट पार्ट के पास कुछ रैशेज़ हो गए हैं और बहुत खुजली व जलन भी होती है. मुझे उठने-बैठने में भी बहुत परेशानी होती है. कृपया, कोई उपाय बताएं.
– महक पॉल, मुंबई.

इसके लिए आप गायनाकोलॉजिस्ट या डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें. लेकिन आपने यह नहीं लिखा कि क्या आप सेक्सुअली एक्टिव हैं? हो सकता है आपको हर्पिस इं़़फेक्शन हो? आपको तुरंत इसका उपचार कराना चाहिए. हर्पीस दो तरह का होता है, पहला- एचएसवी-1 और दूसरा- एचएसवी-2. ज़्यादातर लोगों में एचएसवी-2 के कारण यौनांग हर्पिस होता है. इंफेक्शन होने पर मलाशय और उसके आसपास की जगह पर एक या एक से अधिक फफोले हो जाते हैं और फफोले फूटने पर घाव भी हो जाते हैं. एचएसवी-2 इंफेक्शन से पीड़ित व्यक्ति (पुरुष/स्त्री) से शारीरिक संबंध बनाने पर दूसरे व्यक्ति को भी एचएसवी-2 इंफेक्शन हो सकता है. इस रोग से बचने का तरीक़ा है- यौन संपर्क से बचना. यदि सेक्स करना चाहते हैं तो कंडोम का इस्तेमाल ज़रूर करें.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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लताजी की हालत गंभीर… (Lata Mangeshkar In ICU)

लेजेंड सिंगर लता मंगेशकरजी को सांस लेने मेंं तकलीफ़ होने के कारण आईसीयू में भर्ती किया गया है. वे मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हैं. कल रात से उन्हें सांस लेने में द़िक्क़त होने लगी, जिसके कारण उन्हें तुरंत अस्पताल में लाया गया.

 Lata Mangeshkar
पिछले ही महीने 28 सितंबर को लताजी ने अपना नब्बे वां जन्मदिन मनाया था. तब सभी सेलिब्रिटीज़ ने उन्हें बधाइयां और ढेर सारी शुभकामनाएं दी थीं. ख़ासकर अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर ने तो दिल को छू लेनेवाले वीडियो संदेश सोशल मीडिया पर उन्हें जन्मदिन की मुबारकबाद देते हुए शेयर किए थे, जिसे लोगों ने बेहद पसंद दिया.
लताजी ने अब तक क़रीब एक हज़ार से अधिक गाने गाए हैं. उन्हें साल 2001 में भारत रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है. उन्होंने लगभग 36 भाषाओं में अपनी आवाज़ दी है.
पिछले दिनों अपने सोशल अकाउंट से उन्होंने पानीपत फिल्म में गोपिका बाई का क़िरदार निभा रही पद्मिनी कोल्हापुरे की तारीफ़ भी की थी.
उनकी अच्छे सेहत की दुआ करते हैं. आशा है, वे जल्द ही स्वस्थ होकर हो जाएंगी. गेट वेल सून…

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Personal Problems: क्या मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग सामान्य है? (Is Postmenopausal Bleeding Normal?)

मेरी मां 59 वर्षीया हैं. जब वो 53 साल की थीं, तभी उनका मेनोपॉज़ हो गया था, लेकिन पिछले हफ़्ते वो कहने लगीं कि उनके पीरियड्स वापस आ गए हैं, वो भी पूरे छह साल बाद. क्या यह सामान्य है?
– संगीता शर्मा, राजकोट.

मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग सामान्य नहीं है. आपकी मां को तुरंत चेकअप कराके पता करना होगा कि ब्लीडिंग कहां से हो रही है, मसलन वेजाइना, सर्विक्स, यूटेरस या फिर वल्वा से. इस तरह की ब्लीडिंग के कई कारण हो सकते हैं. यहां तक कि ऐसे मामलों में इंडोमेट्रियल कैंसर का भी ख़तरा हो सकता है, इसलिए बिना किसी तरह की देरी किए आप फ़ौरन उनका चेकअप करवाएं.

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 Postmenopausal Bleeding

एक महीने पहले जब मेरी डिलीवरी हुई थी, तब डॉक्टर ने छह हफ़्ते बाद आकर फॉलोअप चेकअप कराने और बच्चे के वैक्सीन्स शुरू करने की बात कही थी. पर हाल ही में मैंने वैक्सीन्स के कारण ऑटिज़्म के बारे में सुना है, इसलिए मैं अपने बच्चे को वैक्सीन्स नहीं दिलवाना चाहती. क्या ऐसा करना सही होगा?
– राजकुमारी चौहान, वाराणसी.

बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए वैक्सीन यानी टीकाकरण बहुत ज़रूरी है. टीके की बदौलत हमने चेचक जैसी महामारी को ख़त्म कर दिया है और पोलियो में भी काफ़ी अच्छी सफलता मिल रही है. अगर टीके के कारण आपका बच्चा बीमारियों से बच सकता है, तो फिर आप उसे इससे वंचित क्यों रखना चाहती हैं. बल्कि आपके बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए यह सबसे बेहतरीन निवेश है. पूरी दुनिया में जब से टीकाकरण शुरू हुआ है, तब से टीबी, टिटनस, पोलियो, चेचक, डिप्थीरिया, कंठमाला का रोग और हेपाटाइटिस बी जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में काफ़ी कमी आई है.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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सोरायसिस से पीड़ित हैं! यात्रा के दौरान रखें इन बातों का ख्‍याल (Travel Guide: Easy Tips For Traveling With Psoriasis)

Psoriasis

सोरायसिस से पीड़ित हैं! यात्रा के दौरान रखें इन बातों का ख्‍याल (Travel Guide: Easy Tips For Traveling With Psoriasis)

हरी-भरी वादियों, बर्फ से ढंके पहाड़ों और सूरज की रोशनी से भरपूर, सुनहरे समुद्रतटों पर जाने का मजा ही कुछ और है, लेकिन यदि आपको सोरायसिस हो तो? ऐसे लोगों को यात्रा करने के दौरान असहजता हो सकती है. यदि वे मामूली से लेकर गंभीर प्रकार के सोरायसिस से ग्रस्‍त हैं. खासकर लंबी यात्रा में.सोरायसिस एक स्व-प्रतिरक्षित रोग है, जिसमें त्वचा की नई कोशिकाएं सामान्य की तुलना में अधिक तेजी से विकसित होती हैं.

आमतौर पर हमारा शरीर पुरानी कोशिकाओं की जगह भरने के लिये प्रत्येक 10 से 30 दिन में त्वचा की नई कोशिकाएं बनाता है. सोरायसिस में त्वचा की नई कोशिकाएं 3 से 4 दिन में ही बन जाती हैं और शरीर को पुरानी कोशिकाएं हटाने का समय नहीं मिलता है. इससे त्वचा की सतह पर परत आ जाती है और त्वचा शुष्क, खुजली वाली, पपड़ीदार दिखाई देने लगती है और उस पर लाल चकत्ते या चमकीली परत आ जाती है.

सोरायसिस से पीड़ित लोगों को यदि बिना किसी परेशानी के एक आरामदायक यात्रा का आनंद उठाना है तो उन्‍हें बस पहले से योजना बनाना जरूरी है. चिकित्सा विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि सोरायसिस से पीड़ित लोगों के लिये यात्रा सम्बंधी कोई विशेष मनाही नहीं हैं, उनके लिए हल्की धूप वाला मौसम ठंडे और शुष्क मौसम की तुलना में बेहतर रहता है.  डॉ. शेहनाज़ अरसीवाला, त्वचा रोग विशेषज्ञ, सैफी हॉस्पिटल एवं प्रिंस अली खान हॉस्पिटल और मेडिकल डायरेक्टर, रीन्यूडर्म सेंटर स्किन हेयर लेजर्स एंड एस्थेटिक्स सोरायसिस से पीड़ित लोगों के लिये यात्रा सम्बंधी कुछ उपयोगी टिप्स दे रही हैं, जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए.

 

  1. सबसे पहले योजना बनाएं : चाहे आप छोटी यात्रा पर जा रहे हों या फिर लंबे समय के लिए, आपको दो सप्ताह पहले से तैयारी आरम्‍भ कर देनी चाहिए. ठहरने के दौरान की गतिविधियों को निश्चित करना और यात्रा के लिये आवश्यक चीजों को रखना अच्छा होता है. इन चीजों में आपकी दवाएं भी शामिल हैं और वे आपके सामान में सरलता से शामिल होनी चाहिए. यात्रा के दौरान अपनी भोजन सम्बंधी आदतों का नियमित ध्यान रखें और शराब से बचें. इस बारे में आपके त्वचा रोग विशेषज्ञ बेहतर सलाह दे सकते हैं. तनाव से सोरियासिस की पीड़ा बढ़ जाती है, इसलिये अपने यात्राक्रम की पहले से योजना बनाकर आप अंतिम मिनट की परेशानियों से बच सकते हैं. सोरियासिस के रोगियों को यात्रा पर जाने से पहले खूब आराम करने और अपनी त्वचा को अधिक से अधिक नम रखने की सलाह भी दी जाती है.

 

  1. अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास अवश्य जाएं: छुट्टियों पर जाने से पहले यह सुनिश्चित करना अच्छा होता है कि आपकी त्वचा की स्थिति अच्छी हो, इसलिए यात्रा की योजना बनाने से पहले अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास जाना महत्वपूर्ण है. सुनिश्चित करें कि आपकी दवाओं के सभी पर्चे व्यवस्थित हों और लिखित पर्चों की प्रति भी मांगें, ताकि यात्रा के समय जरूरत पड़ने पर वे काम आ सकें. यदि आपको बायोलॉजिक्स के इंजेक्शन लगते हैं, तो इसके बारे में अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ से पूरी जानकारी प्राप्‍त कर लें. इस जानकारी में वह महत्वपूर्ण वर्णन भी होना चाहिये, जो आपकी यात्रा के स्थान पर वहाँ के त्वचा रोग विशेषज्ञ से मदद लेने में काम आ सके.

 

  1. पैकिंग सावधानी से करें और जरूरी सामान व्‍यवस्थित रखें : आपके गंतव्य के लिये उपयुक्त कपड़े, जूते और अन्य चीजें रखें. उदाहरण के लिए यदि आप गर्म, आर्द्र क्षेत्र में जा रहे हैं, तो हल्के, ढीले, पसीने को बाहर निकालने वाले कपड़े रखें. यदि आप ठंडे स्थान पर जा रहे हैं, तो टोपी, दस्ताने और स्कार्फ रखें, ताकि आपकी त्वचा सुरक्षित रहे. त्वचा रोग विशेषज्ञ द्वारा बताए गए मेडिकैटेड शैम्पू, मॉइश्चराइजर और साबुन या क्लींजर रखें और उनके द्वारा बताया गया सनस्क्रीन ले जाना कतई न भूलें. यात्रा के समय दवाएं लेना न भूलें. किसी भी तरह के दर्द से बचने के लिये अच्छी नींद लें.

 

  1. संक्रमण के जोखिम से बचें: कुछ प्रकार के संक्रमण सोरियासिस की पीड़ा बढ़ा सकते हैं. अपने त्वचा रोग विशेषज्ञ के निर्देशानुसार उपचार के क्रम में रक्त की आवश्यक जांचें करवाएं. इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपको संक्रमण का जोखिम नहीं है. यात्रा के दौरान स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करें और वायरल संक्रमण वाले व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें. स्वच्छ रहने के लिए अपने हाथ धोएं और त्वचा रोग विशेषज्ञ द्वारा बताए गए सैनिटाइजर का उपयोग करें. शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा होना भी बहुत जरूरी है.

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ब्लड डोनेशन से जुड़े मिथ्स…! (Myths About Blood Donation)

Myths About Blood Donation

ब्लड डोनेशन से जुड़े मिथ्स…! (Myths About Blood Donation)

रक्तदान को जीवनदान कहा जाता है, लेकिन आज भी इसे लेकर लोग बहुत उत्साहित नज़र नहीं आते, कारण- रक्तदान को लेकर बहुत-सी ग़लतफ़हमियां आज भी बनी हुई हैं. क्या हैं वो ग़लतफ़हमियां यह जानना ज़रूरी है, ताकि लोगों के मन से भ्रांतियां दूर हों और रक्तदान को लेकर वो अधिक उत्साहित हों.

1. रक्तदान आपको कमज़ोर बनाता है.
अक्सर लोग सोचते हैं कि रक्तदान करने के बाद उनमें कमज़ोरी आ जाएगी और उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाएगी.
लेकिन यह सोच ग़लत है. रक्तदान के बाद कुछ ही दिनों में रेड ब्लड सेल्स यानी लाल रक्त कण सामान्य संख्या में पहुंच जाते हैं. व्हाइट ब्लड सेल्स को थोड़ा ज़्यादा समय लगता है, लेकिन यदि शरीर को यह सिग्नल मिले कि वो ख़तरे में है, तो यह प्रक्रिया और भी तेज़ हो जाती है.

2. रक्तदान की प्रक्रिया काफ़ी तकलीफ़देह व दर्दनाक होती है.
जी नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. स़िर्फ सुई चुभनेभर का दर्द ज़रूर होता है, लेकिन रक्तदान के बाद आपके हाथ का वह भाग एक-दो दिन में ही सामान्य हो जाता है, जहां से सुई भीतर जाती है.

3. महिलाओं को ब्लड डोनेशन नहीं करना चाहिए.
अक्सर लोगों की यह धारणा होती है कि महिलाएं मासिक स्राव से गुज़रती हैं, इसलिए उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए. कुछ लोग यह भी मानते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर कम होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से दूर रहना चाहिए, वरना वे अधिक कमज़ोर हो सकती हैं. हक़ीक़त यह है कि रक्तदान का लिंग से कोई लेना-देना नहीं होता. जिस तरह से पुरुषों पर रक्तदान असर करता है, महिलाओं को भी उसी तरह प्रभावित करता है. महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर प्राकृतिक रूप से कम ही होता है, इसलिए उन्हें रक्तदान से कोई कमज़ोरी नहीं होगी. हां, यदि वे गर्भवती हों, स्तनपान करा रही हों, किसी बीमारी या समस्या के चलते वे एनिमिक हों, तो उन्हें रक्तदान नहीं करना चाहिए.

4. रक्तदान करनेवाले को जानलेवा इंफेक्शन्स का ख़तरा अधिक होता है.
रक्तदान के समय संक्रमण का डर भी बड़ी वजह है लोगों को रक्तदान से रोकने की. लेकिन रक्तदान के समय नई सुई का ही इस्तेमाल होता है और आप स्वयं भी जागरूक रहेंगे, तो ऐसा कोई ख़तरा नहीं होगा, इसलिए बेझिझक रक्तदान करें.

5. रक्तदान के बाद एक-दो दिन का आराम ज़रूरी होता है.
ऐसा कोई नियम नहीं है और न ही इसकी ज़रूरत है. आप रक्तदान के फ़ौरन बाद ही अपने काम पर लौट सकते हैं, बशर्ते आपने रक्तदान के बाद भरपूर पानी या जूस वगैरह पिया हो, ताकि शरीर में पानी की आपूर्ति हो जाए. हां, रक्तदान के बाद 24 घंटों तक अल्कोहल व तेज़ धूप से बचना चाहिए.

6. अगर आप स्मोक करते हैं, तो आप रक्तदान नहीं कर सकते.
भले ही आप स्मोकर हों, पर आप ब्लड डोनेट कर सकते हैं. हां, ब्लड डोनेशन के बाद तीन घंटे तक स्मोक न करें और डोनेशन से एक दिन पहले शराब का सेवन भी न करें.

7. रक्तदान बहुत ही समय लेनेवाली प्रक्रिया है.
ब्लड डोनेशन में 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लगता है, जिसमें ब्लड डोनेशन की प्रक्रिया मात्र 10-12 मिनट की ही होती है, लेकिन फॉर्म भरना और डोनेशन के बाद रिफ्रेशमेंट वगैरह मिलाकर 45 मिनट से एक घंटे तक का ही समय लगता है.

8. दुबले-पतले लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
आपका वज़न 50 किलो से अधिक हो और आपकी आयु 18 वर्ष या अधिक हो, तो आप रक्तदान कर सकते हैं.

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Blood Donation Myths

9. उच्च रक्तचापवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. यदि आपका रक्तचाप 180 और 100 है, तो भी आप रक्तदान कर सकते हैं. यह रक्तचाप हालांकि अधिक है, लेकिन यह आपको रक्तदान से नहीं रोक सकता. यहां तक कि रक्तचाप की दवाइयां भी इस प्रक्रिया में अवरोध नहीं बनतीं.

10. डायबिटीज़ से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
अगर आप इंसुलिन जैसे सप्लीमेंट्स लेते हैं, तो ही रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन यदि आप पिल्स लेते हैं और लाइफस्टाइल के ज़रिए डायबिटीज़ नियंत्रित करते हैं, तो आप रक्तदान ज़रूर कर सकते हैं. जिन्हें हृदय रोग हों और जो टाइप 2 डायबिटीज़ की वजह से ब्लड प्रेशर से ग्रसित हों, वे किन्हीं असाधारण परिस्थितियों में रक्तदान न कर पाएं, लेकिन बाक़ी कोई वजह नहीं जो आपको रक्तदान से रोके.

11. रक्तदान के बाद स्पोर्ट्स या फिज़िकल एक्टीविटीज़ नहीं कर सकते.
यह मात्र एक भ्रांति है. रक्तदान के एक घंटे बाद ही आपकी ज़िंदगी पूरी तरह से सामान्य हो जाती है. यदि आप खेल-कूद के शौकीन हैं या किसी स्पोर्ट्स एक्टीविटी में हिस्सा लेना चाहते हैं, तो जिस दिन ब्लड डोनेट किया, उसी दिन आप हिस्सा ले सकते हैं या मनपसंद खेल खेल सकते हैं.

12. दवा खानेवाला व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सकता.
आमतौर पर लोगों की यही धारणा होती है कि यदि आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन सच तो यह है कि अधिकांश दवाएं आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. अगर आप सर्दी-ज़ुकाम की दवा, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स, विटामिन या न्यूट्रिएंट सप्लीमेंट, पेनकिलर, पैरासिटामॉल, एंटैसिड या एंटी एलर्जिक दवाएं ले रहे हैं, तो आप रक्तदान कर सकते हैं. हां, अगर आप एंटीबायोटिक्स का सेवन कर रहे हैं, तो आपको कोर्स पूरा होने के बाद 72 घंटे इंतज़ार करना होगा. यदि आप किसी मानसिक समस्या की दवा ले रहे हैं, तो अपने सायकिएट्रिस्ट से पूछकर ही रक्तदान करें.

13. सीज़नल एलर्जी से ग्रसित लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
सर्दी-ज़ुकाम जैसी सीज़नल एलर्जी आपको रक्तदान से नहीं रोकतीं. आप बेझिझक रक्तदान कर सकते हैं.

14. बहुत जल्दी-जल्दी रक्तदान नहीं करना चाहिए, वरना शरीर कमज़ोर हो जाएगा.
एक स्वस्थ व्यक्ति साल में चार बार रक्तदान कर सकता है. हर तीन महीने के अंतराल पर आप रक्तदान कर सकते हैं, इसलिए यह भ्रम मन से निकाल दें कि आप कमज़ोर हो जाएंगे.

15. हाई कोलेस्ट्रॉलवाले रक्तदान नहीं कर सकते.
यदि आप हाई कोलेस्ट्रॉल की दवाएं भी ले रहे हैं, तब भी रक्तदान कर सकते हैं.

16. रक्तदान से मोटापा बढ़ता है.
रक्तदान से वज़न नहीं बढ़ता, लेकिन कुछ लोग रक्तदान के बाद मानसिक तौर पर यह मान लेते हैं कि वो कमज़ोर हो गए और उन्हें अधिक पोषण की ज़रूरत है. ऐसे में वो अधिक खाने लगते हैं और एक्सरसाइज़ या शारीरिक गतिविधियां घटा देते हैं, जिससे उनका वज़न बढ़ सकता है. तो सीधे तौर पर यह मोटापे से नहीं जुड़ा है.

कौन रक्तदान नहीं कौन रक्तदान नहीं कर सकता?
  • 60 वर्ष से अधिक व 18 वर्ष से कम आयु के लोग रक्तदान नहीं कर सकते.
  • गर्भवती स्त्रियां.
  • स्तनपान करानेवाली मांएं.
  • अगर आपने व्रत रखा है, तो रक्तदान नहीं कर सकते, क्योंकि रक्तदान से चार घंटे पहले अच्छा भोजन करना बेहतर होता है.
  • अल्कोहल के सेवन के बाद.
  • इंसुलिन लेनेवाले डायबिटीज़ के रोगी.

– गीता शर्मा

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Personal Problems: 3-4 महीनों के बाद पीरियड्स आते हैं (Why My Periods Are 3-4 Months Late?)

मैं 18 वर्ष की हूं. शुरू से ही मुझे अनियमित माहवारी की समस्या है. कभी-कभी 3-4 महीनों के बाद माहवारी आती है. इन दिनों मेरे चेहरे पर ख़ूब सारे बाल भी हो गए हैं. ऐसा क्यों हो रहा है? कृपया, सलाह दें.
– नुपूर बबेरवाल, हरियाणा.

पीरियड शुरू होने के एक-दो साल बाद तक कई लड़कियों को अनियमित पीरियड की समस्या होती है, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे पीरियड नियमित होने लगता है. यदि आपका पीरियड शुरू में नियमित था और अब अनियमित है, तो आपको हार्मोनल प्रॉब्लम हो सकती है. हो सकता है कि आपको पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम हो. इस समस्या में अनियमित माहवारी, चेहरे पर बाल, एक्ने और वज़न बढ़ने जैसे लक्षण होते हैं. समस्या के बारे में जानने के लिए आपको सोनोेग्राफ़ी व हार्मोनल टेस्ट करवा लेने चाहिए. दवाइयों से भी इस समस्या का निदान हो सकता है.

Periods 3-4 Months Late

मैं 30 वर्षीया हूं और मेरी शादी को तीन साल हो गए हैं. मैं गर्भधारण की कोशिश कर रही हूं, लेकिन सफल नहीं हो पा रही हूं. मैं बहुत चिंतित हूं. मुझे क्या करना चाहिए, जिससे मैं मां
बन सकूं?
– हर्षा कुलकर्णी, नागपुर.

सबसे पहले तो आप किसी अच्छे गायनाकोलॉजिस्ट से मिलें और समस्या जानने के लिए टेस्ट करवाएं. पति के वीर्य की भी जांच करवाएं. आपको ब्लड, हार्मोन्स का टेस्ट व सोनोग्राफ़ी करवाने की ज़रूरत है. गर्भाशय का एक्स-रे करवाने से आपको यह पता चल जाएगा कि आपके फेलोपियन ट्यूब्स सामान्य हैं या नहीं. यह जांच हीस्टीरोस्कोपी व लेप्रोस्कोपी द्वारा संभव है. सारी जांच कराने के बाद ही समस्या का पता चल सकता है और उसी के अनुसार इलाज हो सकता है.

यह भी पढ़ें: Personal Problems: कहीं मैं प्रेग्नेंट तो नहीं हो गई? (Am I Pregnant?)

Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
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Personal Problems: हिस्टेरेक्टॉमी के बाद कैसी हो डायट? (What Diet Should Be Taken After Hysterectomy?)

मेरी उम्र 24 साल है. मेरी शादी को 6 महीने हो गए हैं. मेरी समस्या है कि मेरे गुदाद्वार पर गुलाबी रंग का छोटा-सा मस्सा हो गया है और आसपास की जगह पर सूजन है. कृपया, बताएं कि मैं किस डॉक्टर से संपर्क करूं?
– अनीता गोयल, मिर्जापुर.

आपको एनोजेनिटल वार्ट्स की समस्या हो सकती है. यह संक्रमण जननेंद्रियों के संपर्क में आने से या ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण फैलता है. कई बार यह संक्रमण अपने आप ही ठीक हो जाता है. लेकिन यदि यह ठीक नहीं हो रहा है तो गायनाकोलॉजिस्ट की सलाह लें, जो  पैप स्मीयर टेस्ट कराएंगे, जिससे इस संक्रमण के सही कारण का पता चल सकेगा.

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Hysterectomy

मेरी मम्मी की अभी हाल ही में एबडॉमिनल हिस्टेरेक्टॉमी हुई है. क्या आप बता सकती हैं कि उन्हें किस तरह की डायट देनी चाहिए? मैंने सुना है कि ऑपरेशन के बाद कम से कम 2 हफ़्ते तक चावल नहीं खाना चाहिए. क्या यह सही है? कृपया, सलाह दें?
  – त्रिशाला पांडे, जयपुर.

जब भी एबडॉमिनल सर्जरी की जाती है तो सावधानी के तौर पर आंतों का ख़ास ध्यान रखा जाता है, क्योंकि सर्जरी के बाद वे बहुत धीमी गति से काम करती हैं. सर्जरी के बाद सॉलिड डायट इसलिए नहीं दी जाती कि आंतें अपना काम सुचारु रूप से करने योग्य हो सकें. जब आंतें सामान्य रूप से काम करना शुरू कर देंगी तो डॉक्टर्स डायट देना आरंभ कर देंगे. सर्जरी के बाद सबसे पहले फ्लुइड, बाद में लिक्विड व सॉ़फ़्ट डायट और फिर सॉलिड डायट दी जाती है. मरीज़ को आरंभ से ही ऐसी डायट दी जाती है, जिसे वह आसानी से पचा सके, जैसे- फल व सब्ज़ियां आदि. बाद में ज़रूरत के अनुसार कार्बोहाइड्रेट्स और प्रोटीन, जैसे- दाल, स्प्राउट्स, लीन मीट आदि दिया जाता है. लेकिन ़ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट्स नहीं देना चाहिए. मरीज़ को चावल दे सकते हैं, पर उचित मात्रा में.

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World Mental Health Day: मानसिक बीमारी है अकेलापन, अनदेखा न करें (The Health Consequences of Loneliness)

दोस्त को देखकर रास्ता बदल देना, सामाजिक कार्यक्रमों में जाने से हिचकिचाना, भीड़ में ख़ुद को अकेला महसूस करना…क्या ये लक्षण सामान्य हैं? या किसी समस्या की ओर इशारा करते हैं? इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने बात की सॉल्यूशन काउंसलिंग सेंटर की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ से. हममें से ज़्यादातर लोग कभी न कभी अकेलापन महसूस करते हैं. ऐसा होना एक सामान्य बात है, लेकिन अगर अक्सर ऐसा होने लगे यह ख़तरे की घंटी हो सकती है. आज वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे के अवसर पर हम आपको अकेलेपन की समस्या से निपटने के उपाय बता रहे हैं.

Health Tips

शरीर और मन के बीच है गहरा कनेक्शन
शरीर और मन जुड़ा हुआ होता है. हम शरीर और मन को अलग नहीं कर सकते. दोनों साथ में चलनेवाली चीज़ें हैं. हमारी शारीरिक समस्याएं हमें मानसिक समस्याएं दे सकती हैं, ठीक उसी तरह मानसिक समस्याएं भी शारीरिक समस्याएं दे सकती हैं. शारीरिक समस्याओं के कारण होनेवाली मानसिक समस्याओं से निपटना आसान होता है, बशर्ते कि हमें समय रहते हमें यह समझ में आ जाए. समझ न आने पर स्वभाव में चिड़चिड़ापन, दर्द, बैचेनी इत्यादि समस्याएं हो सकती हैं. आम लोगों के लिए यह समझना बहुत मुश्क़िल होता है कि कोई समस्या मानसिक कारण से हो रहा है या शारीरिक कारण से. मानसिक समस्या को समझने में बहुत समय लगता है. लोग इस बात को स्वीकार नहीं करना चाहते कि उन्हें कोई प्रॉब्लम है. अकेलापन महसूस करना भी ऐसी ही मानसिक स्थिति है. लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जबकि यह एक वॉर्निंग वेल है.

समस्या की शुरुआत हो सकती है
अकेलापन एंज़ाइटी से आता है. एंज़ाइटी होने पर सबसे पहले व्यक्ति को अकेलापन महसूस करता है. ऐसे लोग दूसरों को अवॉइड करने लगते हैं. क्योंकि वे दूसरे के सवाल-जवाब से बचना चाहते हैं. इसे विथड्रावल या अवॉइडेंस सिम्टम कहते हैं. ऐसे व्यक्ति लोगों के बीच जाना ही नहीं चाहते. न ही किसी से मिलना पसंद करते हैं. जाहिर है ख़ुद को समाज से काट लेने पर उन्हें अकेलापन महसूस होता है. यह एक शुरुआत है. अगर आपको भी भीड़ में भी अकेला महसूस हो तो यह समझ जाना चाहिए कि यह मानसिक समस्या का संकेत है. तो बेहतर होगा कि आप अलर्ट हो जाएं. समस्या से लड़ने का यह पहला स्टेप है.

वजह जानना है ज़रूरी
अकेलेपन की वजह जाननी बहुत ज़रूरी है. इसे सेल्फ इवैल्यूशन कहते हैं. कहने का अर्थ है कि आप यह जानने की कोशिश कीजिए कि आपको ऐसा क्यों हो रहा है? आप किसी से क्यों नहीं मिलना चाहते? लोगों को देखकर आप रास्ता क्यों बदल देते हैं? ऐसी क्या वजह है कि आपको लोगों से मिलने का मन नहीं करता? आपको लोग क्यों नहीं पसंद आते? ऐसी क्या वजह है कि जो लोग आपको पहले अच्छे लगते थे, अब वे पसंद नहीं आते. आपके लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि बदलाव आपमें आया है कि लोगों में, क्योंकि लोग तो वही हैं. कुछ आपमें है तो अलग हो रहा है. कुछ लोग इस समस्या से बाहर आने के लिए, सेल्फ हेल्फ बुक्स और वीडियोज़ का सहारा लेते हैं. उन्हें लगता है कि एक-दो बुक्स पढ़ने या वीडियो देखने से इस समस्या से निकला जा सकता है, उनकी यह सोच ही ग़लत है. बुक या वीडियो देखने से काम नहीं बनने वाला. आपको किसी व्यक्ति के मदद की ज़रूरत है.

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किसी के साथ शेयर कीजिए
ज़रूरी नहीं है कि आप प्रोफेशनल के पास जाएं. आपको ऐसे व्यक्ति के पास जाना होगा, जो आपको सुन व समझ सके. आपके आस-पास कोई न कोई ऐसा ज़रूर होगा, जो आपमें दिलचस्पी रखता होगा और आपकी भलाई चाहता होगा. उससे बात कीजिए. अक्सर लोग किसी से कुछ कहने से इसलिए भी कतराते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे बात फैल जाएगी. लेकिन ध्यान दें किसी से बात शेयर न करना, प्रेशर कुकर की तरह है. आपको यह समझना होगा कि कि आपने अपने शरीर के अंदर प्रेशर कुकर पालकर रखा है. अगर बहुत प्रेशर हो गया तो उसके ब्लास्ट होना ही है. इसलिए फीलिंग को बाहर निकलना बहुत ज़रूरी है. किसी न किसी से शेयर करना पड़ेगा.

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लिखकर फाड़ दें
अगर शेयर नहीं कर सकते तो किसी नोटबुक में लिखकर फाड़ दीजिए. इसे थीळींश- ठशरव-र्इीीप टेक्नीक कहते हैं. लिखते समय आप अपनी पूरी भड़ास निकाल लीजिए. एक-दो घंटे बाद उसे पढ़िए और पढ़कर फाड़ दीजिए. उसे इकट्ठा नहीं करना है. कई मामलों में तो ऐसा होता है कि लोगों को अपना लिखा पढ़कर ही हंसी आती है कि आख़िर कैसी छोटी-सी बात परेशान कर रही थी. अगर आप उसे फड़ा रहे हैं तो इसका अर्थ हुआ कि आप अतीत भूलना चाहते हैं और अगर एकत्रित करेंगे तो इसका अर्थ होगा कि आप अपने दुखों को जमा कर रहे हैं.
मेडिटेशन और काउंसलिंग मेडिटेशन से फ़ायदा होता है, लेकिन सिर्फ़ इससे ही कुछ नहीं होना. अगर इन उपायों को अपनाने के बाद और अपनी ओर से पूरी कोशिश करने के बाद ही बात न बने तो थेरेपिस्ट से संपर्क करें.

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क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

Vaginal Health
क्यों ज़रूरी है वेजाइनल हेल्थ और हाइजीन? (Vaginal Health And Hygiene)

सतर्कता व जागरूकता की कमी के चलते आज भी अधिकांश महिलाएं वेजाइनल हेल्थ को इग्नोर करती हैं. शायद कम ही लोग जानते हैं कि वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन का ख़्याल न रखने की वजह से कई गंभीर यौन रोग व इंफेक्शन का ख़तरा पनप सकता है.
बेहतर होगा कि ऐसे में वेजाइनल हाइजीन का पूरा ख़्याल रखें.

हेल्दी वेजाइना के बेसिक रूल्स
अक्सर महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट की हेल्थ की ज़रूरत का महत्व नहीं समझतीं. शायद इस तरफ़ उनका ध्यान ही नहीं जाता, क्योंकि ये बातें उन्हें बचपन से घर पर भी नहीं सिखाई जातीं. लेकिन अब व़क्त बदल रहा है, ऐसे में वेजाइनल हेल्थ के महत्व को समझना बेहद ज़रूरी है.

वेजाइनल हेल्थ को प्रोटेक्ट करने ईज़ी स्टेप्स

– वेजाइनल पीएच बैलेंस को करें प्रोटेक्ट
यदि सही पीएच बैलेंस बना रहे, तो वो हेल्दी बैक्टीरिया की ग्रोथ को बढ़ाता है. इस वजह से बेहद ज़रूरी है कि वेजाइनल पीएच बैलेंस को प्रोटेक्ट किया जाए.

– हेल्दी वेजाइना के लिए ज़रूरी है हेल्दी डायट
हाइजीन के साथ-साथ वेजाइना की हेल्थ की लिए सही-संतुलित डायट भी बेहद ज़रूरी है.

– करें सेफ सेक्स
अक्सर झिझक के चलते महिलाएं अपने मेल पार्टनर से सेफ सेक्स पर चर्चा तक नहीं करतीं. लेकिन आपकी सेहत आपके हाथ में है. संकोच न करें और पार्टनर से कंडोम यूज़ करने को कहें, क्योंकि यह कई तरह के यौन संक्रमण से आपका बचाव करता है.

– रेग्यूलर चेकअप करवाएं
भारत में अभी भी यह कल्चर डेवलप नहीं हुआ. यही वजह है कि वेजाइनल इंफेक्शन और यहां तक कि कैंसर तक भी सतर्कता की कमी के चलते हो रहे हैं. नियमित चेकअप से आप इन सबसे बच सकती हैं.

– क्या करें अगर इंफेक्शन हो जाए?
इंफेक्शन होने पर सही इलाज व सही केयर करें, ताकि वह बढ़ नहीं और भविष्य में इंफेक्शन न हो इसके लिए भी सतर्कता बरतें.

– सही हो अंडरगार्मेंट सिलेक्शन

कॉटन पैंटीज़ लें. सिंथेटिक से बचें. वेजाइनल भाग ड्राय रखने की कोशिश करें.

– हाइजीन का रखें ख़ास ख़्याल
साफ़-सफ़ाई रखें. टॉयलेट में भी इसका ख़्याल रखें. पब्लिक टॉयलेट्स के इस्तेमाल के व़क्त सावधानी बरतें.

पेल्विक एक्सरसाइज़ से रखें वेजाइना को हेल्दी
स़िर्फ डायट ही नहीं सही एक्सरसाइज़ भी वेजाइनल हेल्थ के लिए ज़रूरी है.

सर्वे- क्यों झिझकती हैं महिलाओं?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज भी बहुत बड़ी संख्या में भारतीय महिलाएं वेजाइनल हेल्थ व हाइजीन के महत्व को न तो समझती हैं और न ही इस पर खुलकर बात करती हैं. यही वजह है कि वो वेजाइनल प्रॉब्लम्स से दो-चार होती हैं.

जागरूकता की कमी भी एक सबसे बड़ी वजह
हमारा सामाजिक ढांचा इसकी बड़ी वजह है. यहां इन अंगों पर बात तक करने से लोग हिचकते हैं. यहां तक के अपने डॉक्टर्स से भी इस पर बात करने से कतराते हैं..

आंखों के लिए अच्छे नहीं हैं ये 5 रोग (5 Diseases That Can Harm Your Eyes and Vision)

आंखें मानव शरीर का एक अहम् अंग हैं जिससे वो इस ख़ूबसूरत दुनिया को देख सकता है, लेकिन ज़रा सोचिए, अगर इन आंखों की रोशनी कमज़ोर पड़ जाए या फिर आंखों की रोशनी ही चली जाए तो ये रंगीन दुनिया कितनी बेरंग और अंधकारमय लगने लगेगी. इसलिए आंखों को लंबे समय तक सेहतमंद बनाए रखने के लिए उनकी सही देखभाल बहुत ज़रूरी है. दरअसल, हमारी आंखें शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी होती हैं. ऐसे में शरीर में होने वाली किसी भी स्वास्थ्य समस्या का दुष्प्रभाव आंखों पर भी दिखाई देता है. हालांकि कई बार हम इन स्वास्थ्य समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो आंखों की सेहत के लिए घातक साबित हो सकती हैं. चलिए जानते हैं ऐसे ही 5 रोग, जो आंखों की सेहत को नुक़सान पहुंचाते हैं. 

Eye Diseases

हाई कोलेस्ट्रॉल
जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने लगती है तो इसका असर चेहरे पर साफ़ दिखाई देने लगता है. चेहरे पर कोलेस्ट्रॉल जमा होने के कारण आंखों के ऊपर और नीचे निशान पड़ जाते हैं. इसके अतिरिक्त अधिक कोलेस्ट्रॉल जमा होने से आंखों की ओर होने वाला रक्त संचार भी बंद हो जाता है, जिसके कारण धीरे-धीरे आंखों की रोशनी कमज़ोर होने लगती है और आंखों में दर्द की शिकायत होती है. हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली आंखों की इस समस्या को डायस्लिपिडेमिया भी कहा जाता है.
लक्षण
. आंखों के ऊपर व नीचे निशान पड़ना.
. आंखों का बदसूरत नज़र आना.
. आंखों में दर्द व तकलीफ़ महसूस होना.
. आंखों से कम दिखाई देना.

थायरॉइड
गर्दन के बीचों बीच मौजूद तितली के आकार की थायरॉइड ग्रंथि से थायरॉइड हार्मोन का स्राव होता है, जो पूरे शरीर के मेटाबॉलिज़्म को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है. हालांकि इस ग्रंथि से आवश्यकता से कम या अधिक मात्रा में थायरॉइड हार्मोन्स का स्राव कई शारीरिक समस्याओं को जन्म दे सकता है और यह आंखों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. थायरॉइड ग्रंथि से जुड़े किसी भी विकार के चलते आंखों के आसपास के टिशूज़ में सूजन आने लगती है और डबल विज़न यानी हर चीज़ डबल दिखाई देती है. इतना ही नहीं, कई बार तो थायरॉइड के मरीज़ों की आंखें पूरी तरह से बंद भी नहीं हो पाती हैं. आंखें पूरी तरह से बंद भी नहीं हो पाती हैं.
लक्षण
. आंखों के आसपास के टिशूज़ में सूजन.
. आंखों में पानी भरना व दबाव महसूस होना.
. एक ही चीज़ का डबल-डबल नज़र आना.
. आंखों में सिकुड़न और ड्राइनेस की समस्या.

डायबिटीज़
डायबिटीज़जो लोग डायबिटीज़ से पीड़ित हैं उन्हें अपनी आंखों की नियमित जांच करवानी चाहिए, क्योंकि इसका असर उनके शरीर के साथ-साथ आंखों पर भी पड़ता है. डायबिटीज़ के कारण आंखों की रोशनी कम हो जाती है और सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है. इससे पीड़ित लोगों में रेटिनोपैथी, ग्लूकोमा और मोतियाबिंद जैसे कई नेत्र रोगों के होने की आशंका बढ़ जाती है. दरअसल, ब्लड शुगर में होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण आंखों को ब्लड सप्लाई करने वाली कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे इमेज व कलर धुंधले दिखाई देने लगते हैं और रेटिना में सूजन आ जाती है. हालांकि कई बार इस समस्या का पता तब चलता है, जब यह बीमारी बहुत गंभीर रूप ले चुकी होती है.
लक्षण
. ग्लूकोमा या मोतियाबिंद की समस्या.
. आंखों का बार-बार संक्रमित होना.
. बार-बार चश्मे का नंबर बदलना.

स्ट्रोक
स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में हर साल 1.5 लाख लोग ब्रेन स्ट्रोक के शिकार होते हैं. जबकि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक़, ब्रेन स्ट्रोक के 41 फ़ीसदी मामलों में व्यक्ति की जान को ख़तरा होता है और 59 फ़ीसदी लोगों में शारीरिक या मानसिक दुर्बलता की आशंका बनी रहती है. हालांकि स्ट्रोक के बाद कुछ लोग चलने-फिरने में असमर्थ हो जाते हैं, जबकि कुछ की स्मरण शक्ति कमज़ोर पड़ जाती है और कई लोगों की आंखों से धुंधला दिखाई देने लगता है. कई बार स्ट्रोक के कारण आंखों की नर्व्स डैमेज हो जाती है, ऐसे में मरीज़ को एक ही चीज़ डबल दिखाई देने लगती है या फिर उसकी आंखों से सब कुछ धुंधला दिखता है.

लक्षण
. आंखों से सब कुछ धुंधला दिखाई देना.
. एक ही वस्तु का डबल नज़र आना.
. एक आंख से कम दिखाई देना.
. दोनों आंखों की रोशनी का प्रभावित होना.

रेटिनल माइग्रेन
रेटिनल माइग्रेन की समस्या होने पर आंखों में दर्द की शिकायत हो सकती है और जिन लोगों को रेटिनल माइग्रेन होता है उन लोगों की एक आंख की रोशनी क़रीब 10-20 मिनट के लिए चली जाती है, जबकि कुछ मामलों में तक़रीबन 1 घंटे के लिए आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है. कई बार आपको ऐसा भी लग सकता है कि आंखों के सामने लाइट फ्लैश हो रही है और आपको कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है. रेटिनल माइग्रेन में इन लक्षणों के आने से पहले या बाद में आपको सिरदर्द की परेशानी हो सकती है. रेटिनल माइग्रेन के लिए अत्यधिक एक्सरसाइज़, स्मोकिंग, डिहाइड्रेशन, हाइपरटेंशन और कैफीन जैसी कई चीज़ें ज़िम्मेदार हो सकती हैं.

लक्षण
. क़रीब एक घंटे तक सब कुछ धुंधला दिखाई देना.
. एक आंख की रोशनी का अचानक से कम हो जाना.
. रेटिनल माइग्रेन के बाद या पहले तेज़ सिरदर्द होना.
. सिरदर्द और मितली के साथ आंखों की रोशनी का कमज़ोर होना.

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Personal Problems: हार्मोंस के कारण चिन पर बहुत बाल हैं, कोई उपाय बताएं? (Please Suggest Something For Unwanted Facial Hair)

मेरी उम्र 22 साल है. मेरे शरीर पर बहुत बाल हैं, ख़ासतौर से चिन पर. मैंने हेयर रिमूवल क्रीम्स, वैक्सिंग, थ्रेडिंग सभी टेम्प्रेरी तरी़के अपनाए, पर कोई लाभ नहीं हुआ. 
 – शीतल झा,पुणे.

आपको हिरसूट़िज़्म यानी एक्सेसिव हेयर ग्रोथ की समस्या है, जिसमें शरीर पर पतले, कठोर और काले बाल होते हैं, जैसे पुरुषों के होते हैं. हार्मोंस में असंतुलन के कारण महिलाओं में यह समस्या होती है. आपको हार्मोनल टेस्ट करवाना चाहिए. यदि हार्मोंस में असंतुलन हो गया है या हार्मोंस ब्लॉक हो गए हैं, तो आपको ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स या एंटीएंड्रोजन की ज़रूरत होगी. बेहतर होगा कि आप गायनाकोलॉजिस्ट से संपर्क करें.

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Unwanted Facial Hair
मेरी 65 वर्षीया सहेली को 10 वर्ष पहले मेनोपॉज़ हो चुका था. लेकिन कुछ दिनों पहले उसे थोड़ी ब्लीडिंग हुई. क्या मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग होना ठीक है? मुझे भी  मेनोपॉज़ हो चुका है और मुझे डर है कि कहीं मेरे साथ भी ऐसा ही न हो?
– पूजा गौतम, पंजाब.

हो सकता है एट्रोफिक वेजिनाइटिस या वेजाइना के थिक होने के कारण आपकी सहेली के साथ ऐसा हुआ हो. लेकिन ऐसी स्थिति में लापरवाही बरतना ठीक नहीं. यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है, जैसे- सर्विक्स कैंसर, ओवरी कैंसर, एंडोमेट्रियल पोलिप्स, यूरिनल ट्यूमर आदि.  इसलिए मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग को हल्के से नहीं लेना चाहिए. जहां तक आपका सवाल है तो आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं. ज़रूरी नहीं कि आपकी सहेली के साथ जो हुआ है, वो आपके साथ भी हो.

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Dr. Rajshree Kumar

डॉ. राजश्री कुमार
स्त्रीरोग व कैंसर विशेषज्ञ
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