Healthy Eating

एक वक़्त था जब मेंटल हेल्थ यानी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अब एकदम अनजान थे. न उस पर कभी बात होती थी, न हीकभी विचार-विमर्श, क्योंकि हमें ये ग़ैर ज़रूरी लगता था. लेकिन वक़्त बदलने के साथ ही थोड़ी जागरूकता आती गई, लेकिन फिर भी अन्य देशों के मुक़ाबले हम आज भी पीछे हैं.

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लेकिन कोविड ने लोगों को काफ़ी जागरुक किया है और अब लोग, यहां तक कि सेलिब्रिटीज़ भी अब अपने मानसिकस्वास्थ्य पर खुलकर बात करते हैं. 

पहले अक्सर लोग इसे छिपाया करते थे क्योंकि समाज का रवैया ही कुछ ऐसा था. हमारे देश में मानसिक स्वास्थ्य केइलाज को लेकर भी शर्मिंदगी से जोड़कर देखा जाता है, अक्सर लोगों की यही धारणा होती है कि मनोचिकित्सक के पासतो सिर्फ़ पागल लोग ही जाया करते हैं. समाज में मानसिक बीमारी या समस्या से जूझ रहे लोगों को समर्थन व सहयोगनहीं मिलता. उनको अलग ही नज़रिए से देखा जाता है, जबकि उन्हें ही सबसे ज़्यादा सहयोग की आवश्यकता होती है. 

जिस तरह तन के अस्वस्थ होने पर हम इलाज करते हैं, ठीक उसी तरह मन के अस्वस्थ होने पर भी इलाज की ज़रूरत होतीहै. 

लेकिन अब काफ़ी बदलाव आया है और लोग अब तन के साथ साथ मन के स्वास्थ्य को भी तवज्जो देने लगे हैं. 

यहां हम मेंटल हेल्थ के लिए बेस्ट होम रेमेडीज़ बता रहे हैं, जो आपको हमेशा रखेंगी ऊर्जावान और प्रसन्न.

लेकिन उससे पहले आपको खुद अपने मन को पढ़ना होगा, उसे समझना होगा और उसमें झांकना होगा. 

अपने व्यवहार में आए बदलावों को पहचानें… 

कई बार हम ग़ौर ही नहीं करते कि हमारा मन उदास है, दुखी है और इन्हीं अनदेखी के करने मेंटल हेल्थ  इग्नोर हो जातीहै. 

  • अपने शुरुआती लक्षणों को पहचानें.
  • अपने मूड में आए बदलाव को समझें. 
  • अपनी एनर्जी में आए बदलाव को जानें. 
  • अपने डायट में आए चेंजेस को पहचानें. 
  • अपने हैप्पीनेस लेवल में आई गिरावट को नोट करें. 
  • एक डायरी में सब नोट करें. 
  • अपनी परेशानी के कारण को जानने का प्रयास करें.
  • क्या प्यार ने धोखा या करियर में नाकामयाबी है इसकी वजह? 
  • अकेलापन या ग़लत लाइफ़ स्टाइल है इसकी वजह? 
  • खुद से नाराज़गी के कारण आई है ये उदासी या कुछ और? 

कई प्रकार की हो सकती है ये मानसिक समस्या

मेंटल हेल्थ में असंतुलन एक चेन की तरह होती है. एक समस्या दूसरी से जुड़ी होती है या दूसरी समस्या तीसरी को जन्मदेती है. उदासी से अकेलापन और उससे डिप्रेशन आता है. क्रोध और घबराहट से ऐंज़ाइयटी पनपती है. चिंता और परेशानीसे पैनिक अटैक आ सकते है.

क्या उपाय करें? 

अगर समस्या अधिक गंभीर है तो ज़ाहिर है आपको हेल्प लेनी चाहिए. एक्सपर्ट के पास जाना चाहिए, लेकिन इन सबकेसाथ ही आपको कुछ घरेलू उपाय भी करने चाहिए, जिनसे आप बेहतर महसूस करेंगे.

  • एक्सरसाइज़ करें. रोज़ व्यायाम करने से आप पॉज़िटिव महसूस करेंगे. लेकिन ध्यान रहे कि लाइट एक्सरसाइज़ हीकरें और वही फ़िज़िकल एक्टिविटी करें जो आपको पसंद हो, जैसे- स्विमिंग, साइक्लिंग, वॉकिंग, जॉगिंग, डान्सिंग. 
  • नींद पूरी लें. ये आपके मस्तिष्क को राहत देगी और बेहतर महसूस कराएगी.
  • एक्टिव और अपडेटेड रहें. अलर्ट रहने की कोशिश करें. न्यूज़ देखें और आसपास क्या चल रहा है और आपके मन मेंक्या चल रहा है उन सबके प्रति सचेत रहें. 
  • शराब या अन्य तरह की लत में सुकून न ढूंढ़ें, ये समस्या को और बढ़ाएंगी.
  • लोगों से मिलें-जुलें और शेयर करें. अपने करीबी या दोस्तों से दूर न भागें. सोशल एक्टिविटी का हिस्सा बनें. अपनीसमस्या से अकेले जूझने की बजाय उसे बांटें. इससे आप बेहतर महसूस करेंगे.
  • योग और ध्यान करें, क्योंकि मेडिटेशन इमोशनल हेल्थ को बेहतर बनाता है. बढ़ती उम्र संबंधी भूलने की बीमारी मेंबेहद लाभदायक है और एकाग्रता बढ़ाता है.
  • रिसर्च कहते हैं कि मेडिटेशन घबराहट को कम करके कई तरह के मानसिक रोगों को भी नियंत्रित करने में सक्षम है. यह फोबिया, लत, विकृत सोच, ऑबसेसिव कंपलसिव डिसऑर्डर आदि में भी फ़ायदेमंद है.
  • स्टडीज़ में साबित हुआ है कि मेडिटेशन इंफ्लेमेटरी केमिकल्स को घटाता है. ये केमिकल्स स्ट्रेस के कारण बनते हैं, जो मूड को प्रभावित करके डिप्रेशन पैदा करते हैं. ऐसे में मेडिटेशन इस केमिकल को कम करके डिप्रेशन को कमकरता है.
  • ध्यान से मस्तिष्क अल्फ़ा स्टेट में पहुंच जाता है, जिससे हैप्पी होर्मोंस रिलीज़ होते हैं और मन प्रसन्न व ऊर्जावानहोता है. 

मेंटल हेल्थ के लिए बेस्ट सुपर फ़ूड्स

अखरोट: ये एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं और ये नए न्यूरॉन्स बनाने में मदद करते हैं जिसका मतलब ये है कि इन्हें खानेसे ब्रेंस को नए सेल्स मिलते हैं, जो मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद करते हैं.

हरी पत्तिदार सब्ज़ियां: शोध बताते हैं कि जो लोग पालक व मेथी जैसी हरी सब्ज़ियां खाते हैं उनको मस्तिष्क से जुड़ी वबढ़ती उम्र के साथ होने वाली मस्तिष्क की समस्याएं अपेक्षाकृत कम होती हैं.

मछली: इसमें ओमेगा ३ फ़ैटी एसिड होता है जो ब्रेन हेल्थ के लिए काफ़ी अच्छा होता है. ये मेमरी अच्छी बनाए रखता हैऔर ऐंज़ाइयटी के स्तर को काफ़ी हद तक कम करने में मददगार है.

दही: ये एक नेचुरल प्रोबायोटिक है और पेट व आंतों के लिएबेहतरीन है लेकिन ये मेंटल हेल्थ के लिए भी उतना हीलाभदायक है. ये ऐंज़ाइयटी, डिप्रेशन और तनाव को भी कम करता है. आप इसे ब्रेकफ़ास्ट में लें या छाछ बनाकर लें- येहर तरह से फायदेमंद है.

डायट में शामिल करें इन्हें- 

विटामिन बी: ये हैप्पी होर्मोंस को रिलीज़ करने me मदद करता है. इसकी कमी से मेंटल हेल्थ पर असर होता है. आपडिप्रेशन या स्ट्रेस का शिकार हो सकते हैं. बेहतर होगा अपने खाने में पनीर, साबूत अनाज, डेयरी प्रोडक्ट्स और अंडे आदिशामिल करें.

कार्बोहाइड्रेट: ये भी मेंटल हेल्थ के लिए काफ़ी ज़रूरी हैं, इसलिए गेहूं, चावल, आलू से लेकर ताज़ा फल व सब्ज़ियां ज़रूरखाएं.

एंटीऑक्सीडेंट्स: ये आपको बेरीज़ में काफ़ी मात्रा में मिलेंगे. स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, ताज़ा फल, सब्ज़ियां और नींबू में ये पाएजाते हैं और आपको स्ट्रेस फ्री करके हैप्पी हॉर्मोन को बढ़ाने में मदद करते हैं.

ओमेगा ३ फ़ैटी एसिड: ये ब्रेन हेल्थ के लिए काफ़ी फायदेमंद है. डिप्रेशन को कम करके मेंटल हेल्थ को बनाए रखता है. येआपको फ़िश, नट्स, ऑलिव ऑयल, अंडे आदि में मिलेगा.

मेंटल हेल्थ अब सबकी और सेलेब्स की भी प्राथमिकता है 

पिछले दिनों रूबीना दिलैक से लेकर हिना खान तक ने मेंटल हेल्थ के महत्व पर खुलकर कहा. अपने बढ़ते वज़न को लेकरउन्होंने कहा कि बुरे वक़्त में हमने अपने शरीर की ब्यूटी व उसको आकर्षक बनाए रखने की बजाय अपनी मेंटल हेल्थ कोमहत्व दिया. ग्लैम इंडस्ट्री में होने के बावजूद हम ये समझ चुके कि हमें खुद से प्यार करना और खुद को स्वीकारना ज़रूरीहै. 

हालांकि इन सेलेब्स को अपने बढ़े वज़न को लेकर ट्रोल भी होना पड़ा और शुरुआत में वो खुद भी डिप्रेशन महसूस करनेलगी थी लेकिन उन्होंने कमबैक किया और ट्रोल्स को भी मुंहतोड़ जवाब दिया.

  • गीता शर्मा 

हेल्दी रहने के लिए सबसे ज़रूरी है बेहतरीन पोषण. लेकिन हम स्वाद के चक्कर में तो कभी डायटिंग के चक्कर में पोषण को भूल जाते हैं. ऐसे में हम आपको यहां बेस्ट और ईज़ी तरीक़े बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अधिकतम पोषण ग्रहण कर सकते हैं और हेल्दी रह सकते हैं. डॉक्टर शेख इस बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं, जो एबॉट न्यूट्रिशन के हेड एडल्ट न्यूट्रीशन, सायंटिफ़िक और मेडिकल अफ़ेयर्स से जुड़े हैं.

नाश्ते को ना न कहें: दिनभर की ऊर्जा आपको नाश्ते से ही मिलती है, लेकिन अधिकतर लोग नाश्ते को इतना महत्व नहीं देते. स्टडीज़ बताती हैं कि ब्रेकफ़ास्ट शरीर और ख़ासतौर से हार्ट की हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद है. पोषण से भरपूर नाश्ते से उन पोषक तत्वों को फिर प्राप्त करने में मदद मिलती है जो सोते समय उपयोग किए जाते हैं और दिन भर आपको एनर्जेटिक रखते हैं.

आप नाश्ते में अनाज, अंडे, डेयरी, साबुत अनाज, फल या नट्स ले सकते हैं जो ईज़ी और फ़ास्ट ऑप्शन हैं.

पोषक तत्वों से भरपूर भोजन सिलेक्ट करें

ऐसे खाद्य पदार्थों को चुनें जिनमें बहुत सारे पोषक तत्व हों – जैसे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, कम फैट्सवाले या फ़ैट रहित डेयरी प्रोडक्ट्स शरीर को एक तरह से ईंधन देने का काम करते हैं. प्रोटीन रिच फूड जैसे- अंडे, पनीर, बीन्स, दाल और बादाम पोषक तत्वों के साथ अन्य बेहतरीन विकल्प हैं जो ऊर्जा और पोषण संबंधी सभी जरूरतों को पूरा करते हैं. खाने के इतने विकल्पों में से विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व से भरपूर फूड को सिलेक्ट करना ज़रूरी है. हेल्दी ईटिंग पैटर्न डेवलप करने से न केवल आपको ऊर्जा मिलती है, बल्कि मोटापे, हृदय रोग, हाई बीपी, टाइप 2 डायबिटीज़ को रोकने में भी मदद मिलती है.

स्मार्ट फूड चॉइस हो और बैलेंस्ड इंडियन फ़ूड ऑप्शन चुनें

कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट्स के साथ-साथ माइक्रो नूट्रीयंट, जैसे- विटामिन और मिनरल्स जैसे पोषक तत्व शरीर को भीतर से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जब आप इन पोषक तत्वों का सेवन सही और संतुलित मात्रा में करते हैं तो यह पोषक तत्वों की कमी और बढ़ती उम्र संबंधी कई बीमारियों के रिस्क को कम करते हैं.

बैलेन्स्ड डायट शरीर और मस्तिष्क को सही ढंग से काम करने के लिए आवश्यक पोषण देता है. फलों, सब्जियों और फाइबर से भरपूर, कम नमक, कम फ़ैट्स वाला भोजन शारीरिक और मानसिक स्टैमिना देता है. फ़ैंसी डायट ट्रेंड्स झांसे में न आएं और प्रोटीन से भरपूर इंडियन फ़ूड खाएं, जिसमें रेगुलर मीट की जगह लीन मीट हो. बेहतर होगा चिकन, मछली, बीन्स, मटर, अंडे, डेयरी और टोफू को अपने भोजन का हिस्सा बनाएं. सिंपल शुगर की जगह कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट चुनें, अधिक सब्जियां, अनाज और फल खाएं. शुगर युक्त ड्रिंक्स से बचें.

ऐसा भी होता है जब रोज़ाना संपूर्ण पोषण लेना संभव नहीं हो पाता और इस कारण शरीर में पोषण की कमी हो सकती है, ऐसे में आप सप्लिमेंट ले सकते हैं. आप एंश्योर जैसे सप्लिमेंट लेकर अपने पोषण की कमी को पूरा कर सकते हैं, क्योंकि एंश्योर में हाई क्वालिटी प्रोटीन, 11 इम्यूनिटी नूट्रीयंट और कैल्शियम व विटामिन डी जैसे हड्डियों को मज़बूती देने वाले पोषक तत्व हैं. ये पोषक तत्व मांसपेशियों को बढ़ाने व ऊर्जा प्रदान करने से लेकर पाचन स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूती देने में मदद करते हैं.

हाइड्रेशन को बढ़ाएं और पानी को अपना बेस्ट फ्रेंड बनाएं

पानी मानव शरीर का 60% हिस्सा बनाता है, इसलिए इसकी कमी न होने दें कभी. शरीर में मात्र एक या दो प्रतिशत भी फ़्लूइड कम होने से थकान और कॉग्निशन में समस्या हो सकती है.हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए पानी भरपूर पीएं. लिक्विड इंटेक बढ़ाएं, कम शक्कर वाली चाय या दूध लें. बॉडी में पानी की कमी है ये जानने का बेहतर तरीक़ा है कि आप अपने यूरिन का कलर देखें. अगर डार्क कलर या येलो ज़्यादा हो तो मतलब है कि पानी की कमी है.

अपने कैफीन इंटेक की मात्रा पर नज़र रखें

सुबह-सुबह चाय या कॉफ़ी की चुस्की ऊर्जा ज़रूर देती है लेकिन ज़्यादा सेवन से आप शुगर, कैलोरी और फैट्स भी ज़्यादा लेंगे उसके साथ. ब्लैक कॉफ़ी ही एकमात्र विकल्प नहीं है, कुछ मिल्क बेस्ड कॉफ़ी ड्रिंक्स है जिनमें शुगर और फ़ैट न के बराबर होता है, आप नॉन फ़ैट लाते चुन सकते हैं जो आपको कुछ प्रोटीन, कैलशियम और विटामिन डीभी देते हैं.

अपनी बॉडी की बात सुनें, हल्की भूख लगने पर खाएं और जैसे ही हल्का सा पेट भर जाए तब रुक जाएं

आपका शरीर खुद आपको संकेत देता है उसे सुनें और समझें क्योंकि ज़रूरत से ज़्यादा या कम पोषण से एनर्जी लेवल कम हो जाता है. आप 0 से 10 के बीच पैमाने पर काम करें, (जहां 0 उतनी भूखी है जितनी आप कल्पना कर सकते हैं और 10 बेहद भरा हुआ) ऐसे में आप 4 पर खाना शुरू करें और 6 पर रुक जाएं. इससे आपको संतुलित रूप से दिनभर के पोषक तत्व मिलेंगे और आपकी एनर्जी स्टेबल रहेगी. एक से दो स्नैक्स के साथ, तीन समय का भोजन आपको देने में मदद करेगा. भूख लगने पर सुविधाजनक, पोषक तत्वों से भरपूर स्नैक्स,जैसे नट्स, फल और स्ट्रिंग चीज़ लें.

हार्ट फेलियर धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है. इसमें हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि हृदय ने काम करना बंद कर दिया है ना ही इसका यह मतलब है कि शरीर का यह अंग जरूरत भर खून नहीं पंप कर पा रहा है. भारत में हार्ट फेलियर करीब 8 से 10 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है. इससे मोटे तौर पर देश भर में 1.8 मिलियन लोगों को अस्पताल में दाखिल होना पड़ता है. इसके अच्छे-खासे बोझ के बावजूद लोग स्थिति को आमतौर पर नहीं जान पाते हैं और इसे ठीक से नहीं समझते हैं.
• अनुसंधान से पता चलता है कि कोविड मायोकार्डिटिस की एक बड़ी वजह है, जो हार्ट फेलियर का कारण बन सकता है
• भारतीयों में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां पश्चिम के लोगों के मुकाबले जल्दी पैदा होती है.
• विशेषज्ञों का सुझाव है कि नियमित स्क्रीनिंग और बेहतर उपचार पर ध्यान दिया जाए.

कोविड महामारी की दूसरी लहर के महीनों बाद भारत में हार्ट फेलियर के मरीज काफ़ी प्रभावित हुए हैं. हेल्थकेयर सेवाएं संक्रमण से निपटने पर केंद्रित हैं, ऐसे में कार्डियोवैस्‍कुलर बीमारियों के मरीज़ों की न चाहते हुए भी अनदेखी हो रही है.

डॉ. जमशेद दलाल, निदेशक, कार्डिएक साइंसेज, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल, मुंबई ने कहा, “भारत में हार्ट फेलियर के बढ़ते मामलों के मद्देनजर इसे जन स्वास्थ्य की प्राथमिकता के रूप में शीघ्र मान्यता दिए जाने की आवश्यकता है. अपने अस्पताल में हम हर महीने दर्जन भर से ज्यादा हार्ट फेलियर के मरीजों को भर्ती होते देखते हैं. हार्ट अटैक के करीब 10 प्रतिशत मरीज को हार्ट फेलियर का अंदेशा रहता है.इस पुरानी और गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है ताकि चेतावनी संकेतों को पहचानना सुनिश्चित किया जा सके. समय रहते बीमारी का पता लगाने और रोग प्रबंध की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके. हालांकि, एक और बाधा है जिसे दूर किए जाने की आवश्यकता है और वह है बताए गए उपचार का अनुपालन नहीं होना या कम होना. अब नई ड्रग थेरेपी उपलब्ध है जो अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता में उल्लेखनीय कमी लाती है और मरीज के बचे रहने की संभावना बेहतर करती है. दूसरी ओर, बताए गए इलाज का अनुपालन नहीं करने से जटिलताएं बढ़ सकती हैं और इससे अस्पताल में दाखिल करने का जोखिम भी बढ़ेगा. जागरूकता और सहायता से बीमारी का समय रहते प्रभावी इलाज हो सकता है और इस तरह हार्ट फेलियर के मरीज ज्यादा समय तक जिन्दा रह सकते हैं और साथ ही प्रतिकूल लक्षण कम होंगे.”

World Heart Day

युवा भारतीयों के बीच बढ़ते मामले
भारतीयों में युवाओं में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां पश्चिम के लोगों के मुकाबले जल्दी होती हैं जो चिन्ताजनक है. तनावपूर्ण जीवनशैली, आहार संबंधी खराब आदतें, शराब या नशे की लत तथा पर्याप्त शारीरिक गतिविधि की कमी इसके कारण हैं. हार्ट फेलियर के लक्षणों को शुरू में ही पहचान लेना जरूरी है. आम लक्षणों में सांस फूलना, थकान, एड़ी, पैरों या पेट में सूजन और सोने में मुश्किल. अन्य संकेतों में रात में खांसी, घरघराहट, भूख न लगना और तेज धड़कन आदि शामिल हैं.

ट्रिकल डाउन इफेक्ट: एनसीडी और कोविड हार्ट फेलियर के बड़े कारण हैं

हाइपरटेंशन जैसे तेजी से बढ़ते एनसीडी के मामले और डायबिटीज भारत में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या के रूप में उभरे हैं. हार्ट फेलियर के मामले बढ़ने में इसका भी योगदान है. डायबिटीज के मरीजों में हार्टफेलियर की आशंका दूसरों के मुकाबले दोगुनी के करीब होती है. भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या दुनिया भर में दूसरे नंबर पर है. हार्ट फेलियर का कारण मायोकार्डिटिस या हृदय की मांसपेशियों का सूजन (मायोकार्डियम) हो सकता है. कोविड मायोकार्डिटिस के लिए एक गंभीर वजह है. इससे किसी भी व्यक्ति का मायोकार्डिटिस का डर 15.7% तक बढ़ सकता है. बुजुर्ग मरीजों और पुरुषों में यह ज्यादा प्रमुखता से देखा जाता है.

रूटीन चेक-अप के दौरान समय पर बीमारी का पता चल जाने से बीमारी को मैनेज किया जा सकता है.

World Heart Day

हार्ट फेलियर को कैसे मैनेज करें?
जीवनशैली और आहार संबंधी बदलाव में स्मोकिंग छोड़ना, तनाव मैनेज करना, लिक्विड का पर्याप्त सेवन, नमक कम खाना, टीकाकरण और नियमित एक्सरसाइज़ शामिल हैं. लेकिन अक्सर लोग इसको फ़ॉलो नहीं करते और इन नियमों का पालन न करना भी एक बड़ी वजह है कि ये बीमारी बढ़ रही है.

वर्ल्ड हार्ट डे के मौके पर हार्ट फेलियर की इस बढ़ती समस्या को समझने और नियमित जांच, डायग्‍नोसिस तथा बीमारी को मैनेज करने को लेकर जागरूकता बढ़ाना अत्‍यावश्‍यक है, ताकि आपका दिल सुरक्षित रहे!

यह भी पढ़ें: इन 11 संकेतों से जानें कि कहीं आपके शरीर में प्रोटीन की कमी तो नहीं (11 Symptoms Of Protein Deficiency In Body)

चाहे लॉकडाउन हो या नहीं महिलाओं की जिम्मेदारियां कभी कम नहीं होतीं, उनके लिए तो चुनौतियां बढ़ी ही हैं. घर-परिवार,  जॉब भले ही घर से काम कर रही हों, लेकिन इन सबके साथ बच्चों की देखभाल… इन सबके बीच उसकी अपनी सेहत और फिटनेस काफ़ी प्रभावित होती है. लेकिन अगर वो हेल्दी डायट ले और अपनी हेल्थ को इग्नोर न करे, तो इन सारी चुनौतियों का सामना वो बेहतर तरी़के से कर पाएगी और फिटभी रह पाएगी ताकि उसका वेट भी आउट ऑफ़ कंट्रोल ना हो!

कैसे लें सही डायट?

– हम में से अधिकांश लोग अनहेल्दी स्नैकिंग से अनजाने में ही बहुत सी कैलरीज़ ले लेते हैं और स्नैकिंग हमारे वज़न बढ़ेने का एक बहुत बड़ा कारण है, इसलिए अगर आप स्मार्टली स्नैकिंग करें, तो आपके लिए फिटनेस मेंटेन करना आसान हो जाएगा.

– अपनी ज़रूरतों और पोषण को पहचानें और उसी के अनुसार डायट प्लान करें.

– अक्सर देखा गया है और रीसर्च भी कहता है कि महिलाओं के खाने में हेल्दी फूड और पोषण की कमी रहती है. वो जब भीसमय मिलता है, कुछ भी अनहेल्दी खा लेती हैं, जिससे स़िर्फ फैट्स और कैलोरीज़ ही बढ़ती हैं. इससे बचने के लिए स्मार्ट स्नैकिंग की ज़रूरत है.

Snacking Ideas For Weight loss

– दोपहर के भोजन में कम से कम एक हरी सब्ज़ी, एक हिस्सा ताज़ा सलाद का और एक हिस्सा कैल्शियम सेभरपूर डेयरी प्रोडक्ट, जैसे- छाछ, पनीर या दही, का होना चाहिए.

– महिलाओं को वैसे भी कैल्शियम की अधिक ज़रूरत होती है, तो ऐसे में अपनी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ न करें.

– पानी भरपूर पीएं. अपने पास पानी की बोतल भरकर रखें, ताकि हमेशा हाइड्रेटेड रहें.

– महिलाओं में अक्सर खानपान अनियमित और अनहेल्दी हो जाता है. लेकिन ऐसा जंक फूड न लें, जिनमें न एनर्जी है, न पोषण. बेहतर होगा कि जब भूख लगे, तो नट्स खाएं या फ्रेश फ्रूट.

– अपनी प्रोटीन की ज़रूरतों को भी नज़रअंदाज़ न करें. एग वाइट, डाल और बादाम लें.

– एक्सरसाइज़ के लिए समय नहीं मिल पाता, तो बैठे-बैठे कुछ देर मेडिटेशन या प्राणायाम करें. इससे ऊर्जा मिलेगी और तनाव कम होगा.

– रोज़ सुबह रातभर पानी में भिगोए हुए बादाम खाएं, इससे दिनभर एनर्जी बनी रहेगी, क्योंकि यह विटामिन ई, फाइबर, प्रोटीन, राइबोफ्लेविन और अन्य कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है.

Snacking Ideas For Weight loss

कैसे करें स्मार्ट स्नैकिंग?

– कभी-कभी भूख दिमाग़ में भी होती है, इसलिए जब भी भूख महसूस हो, तो पहले पानी पीएं. हो सकता है इसी से आपकी भूख शांत हो जाए.

– शाम की चार बजे की भूख के लिए चिप्स या डीप फ़्राइड चीज़ों की बजाय सलाद, सूप या ड्राई फ़्रूट्स ट्राई करें.

– सूखा भेल या वेज सैंड्विच भी एक अच्छा ऑप्शन है

– सलाद काटने में बोरियत महसूस हो या काटने का समय नहीं हो, तो गाजर, ककड़ी, टमाटर, सेब आदि को आप यूं हीखाएं. 

– कोल्ड ड्रिंक्स की बजाय ताज़ा फलों का जूस पीएं.

– बहुत अधिक मीठा न खाएं. इससे फैट्स बढ़ेगा.

Diet Ideas For Weight loss

– अपने खाने में या फिर एक बाउल दही में कुछ क्रश्ड बादाम मिलाकर खाएं. यह बहुत ही हेल्दी ऑप्शन है और इससे पेटभी भरा रहेगा.

– हर 4 घंटे में भूख लगती ही है, ऐसे में अपने किचन में ऐसे हेल्दी स्नैक्स रखें, जिनमें 200 से कम कैलोरीज़ हों.

– मल्टीग्रेन बिस्किट्स या क्रैकर्स, पीनट बटर, नट्स, चना, स्प्राउट्स, फ्रूट्स आदि रखें.

– बेहतर होगा कि बादाम, अखरोट या माखाना खाएं.

– आप रोस्टेड आल्मंड भी खा सकती हैं. ये समोसे से यह ऑप्शन बेहतर है.

– फैट फ्री, माइक्रोवेव में भुने पॉपकॉर्न भी एक विकल्प है, क्योंकि यह अधिक समय तक पेट भरे होने का एहसास करातेहैं.

– ऑलिव्स भी बहुत हेल्दी होते हैं और गुणों से भरपूर भी.

– व्हाइट ब्रेड की बजाय ब्राउन ब्रेड लें. पीनट बटर के साथ या अन्य हेल्दी चीज़ों के साथ.

– ग्रीन टी भी अच्छा ऑप्शन है. यह काफ़ी हेल्दी होती है.

– राजा शर्मा

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हेल्दी रहना भले ही आज के दौर में इतना आसान नहीं लेकिन छोटी-छोटी कोशिशें बड़े रंग ला सकती हैं. आप भी अगर ये सिम्पल रूल्स फ़ॉलो करेंगे तो हमेशा फिट और हेल्दी रहेंगे… इन स्टेप्स को फ़ॉलो करना ज़रा भी मुश्किल नहीं और इनकी जानकारी हम सभी को है लेकिन बस हम इनको फ़ॉलो नहीं करते, लेकिन आप कल से इन्हें आज़माएं और फ़र्क़ देखें व महसूस करें!

Tips To Stay Healthy & Fit
  1. रोज़ाना कम से कम 8 ग्लास पानी ज़रूर पीएं. फ्रूट जूसेस भी लें.
  2. सुबह उठते ही दो ग्लास गुनगुना पानी पीएं.
  3. भरपूर नींद लें. तनाव से दूर रहें.
  4. योग और एक्सरसाइज़ करें. रोज़ाना समय निकाल कर थोड़ी-सी फिज़िकल एक्टिविटी ज़रूर करें. दिन भर चुस्ती-स्फुर्ति के लिए हल्का व्यायाम बेहद ज़रूरी है.
  5. पौष्टिक नाश्ता ज़रूर करें. जी हां, जब भी आप सुबह उठते हैं तो अपनी ऊर्जा को बढ़ाने और नए दिन की ताज़ा तरीन शुरुआत के लिए सबसे ज़रूरी है पौष्टिक नाश्ता, जिससे शरीर को पूरे दिन की ऊर्जा मिले.
  6. अपने भोजन में वैरायटीज़ रखें, ताकि हर तरह का पोषण आपको मिल सके.
  7. मौसमी फल और सब्ज़ियां ज़रूर खाएं. हर रंग के फल व सब्ज़ियां खाएं.
  8. ड्राय फ्रूट्स भी अपने डायट में ज़रूर शामिल करें. होल ग्रेन्स और फ़ाइबर्स भी भरपूर मात्रा में लें.
  9. हेल्दी स्नैक्स खाएं. 4 बजे वाली भूख के लि, कोई हेल्दी ऑप्शन रखें. सूप्स पीएं, सलाद खाएं.
  10. शराब-सिगरेट, चाय-कॉफी जितना हो सके कम पीएं.
  11. अपनी पसंद का काम करें, अपनी हॉबीज़ को भी पूरा करने का टाइम निकालें. यह आपको रिफ्रेश कर देगा.
  12. खाना बनाने और खाने से पहले हाथ ज़रूर धोएं. अगर साबुन और पानी न हो, तो सनेटोइज़र का इस्तेमाल करें.
  13. खांसते-छींकते वक़्त मुंह ढंकें और धूल-धूप में जाते वक़्त मास्क पहनें.
  14. ओवर ईटिंग से बचें. कई बार अपना मनपसंद खाना देखते ही हम भूख से ज़्यादा खा लेते हैं, लेकिन ऐसा न करें. हमेशा भूख से थोड़ा कम ही खाएं, ताकि पानी के लिए जगह बची रहे.
  15. बहुत ज़्यादा पेन किलर्स न खाएं. घरेलू नुस्ख़े आज़माएं.
  16. खाने से एक घंटा पहले एक ग्लास पानी में नींबू का रस डालकर पीएं.
  17. खाने के फौरन बाद पानी न पी लें.
  18. रात को सोते समय एक ग्लास मीठा दूध पीएं.
  19. अपने बारे में हमेशा अच्छा महसूस करें और सकारात्मक सोच बनाए रखें.
  20. नहाने के बाद थोड़ा ध्यान लगाएं. इससे मन में एकाग्रता आती है और आप रिफ्रेश महसूस करते हैं.
  21. बहुत देर तक एक ही जगह पर न बैठें, न ही देर तक टीवी देखें. अपनी दिनचर्या नियमित करें और उसका पालन ईमानदारी से करें.
  22. अगर आपकी ईटिंग हैबिट्स ठीक नहीं है, तो एकदम से उसे बदलने की बजाय धीरे-धीरे बदलाव लाएं.
  23. अपनी बॉडी की सुनें. हर व्यक्ति की ज़रूरत और बॉडी टाइप व बॉडी क्लॉक अलग होता है, उसी के अनुसार अपना डायट और एक्सरसाइज़ प्लान करें.
  24. दिन में दो बार भरपेट खाने की बजाय 5-6 बार में थोड़ा-थोड़ा खाएं.
  25. खाना चबा-चबाकर खाएं.
  26. अपने डायट में मोनोअनसैचुरेटेड ़फैट्स शामिल करें. यह आपको स़फेद सरसों के तेल, मूंगफली का तेल और बादाम से मिलेगा. इसके अलावा कद्दू और सीसम के तेल में भी इसका स्रोत है.
  27. पॉलीअनसैचुरेटड फैट्स और ओमेगा3 और 6 ़फैटी एसिड भी शामिल करें. यह आपको ़फैटी फिश से मिलेगा, जैसे- सालमन, सार्डिन और ठंडे पानी की मछलियों के ऑयल. इसके अलावा अलसी के बीज, सोयाबीन और मकई भी पॉलीअनसैचुरेटड फैट्स के अच्छे स्रोत हैं.
  28. अपने डायट से सैचुरेटेड ़फैट्स की मात्रा कम करें. यह रेड मीट और डेयरी प्रोडक्ट्स में मिलता है.
  29. ट्रान्स फैट्स भी कम करें, जो फ्राइड व बेक्ड फूड, कुकिज़, कैंडीज़ और दूसरे प्रोसेस्ड फूड में पाया जाता है.
  30. अलग-अलग प्रोटीन्स लें. ये आपको बीन्स, नट्स, सीड्स, टोफू, सोय प्रोडक्ट्स में मिलेंगे. लेकिन सॉल्टेड, शुगरी या रिफाइन्ड नट्स न लें.
  31. कैल्शियम युक्त पदार्थ ज़रूर लें, जैसे- दूध, छाछ और दही. ये जल्दी डायजेस्ट हो जाते हैं. इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्ज़ियां भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं.
  32. बहुत ज़्यादा नमक और मीठा खाने से बचें. अपना हफ़्तेभर का डायट प्लान करके चार्ट बना लें. बासी भोजन करने से बचें. जितना हो सके ताज़ा पका खाना ही खाएं.
  33. रेग्युलर हेल्थ चेकअप भी करवाते रहें. कई बार डायबिटीज़ या उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का सालों तक पता नहीं चल पाता.
  34. घर में वेंटिलेशन अच्छा होना चाहिए. दिन के समय खिड़कियां खुली रखें, ताकि ताज़ा हवा और भरपूर रोशनी रहे.
  35. एसी का प्रयोग ज़रूरत पड़ने पर ही करें और समय-समय पर क्लीन भी करवाते रहें.
  36. ऑफ़िस में भी देर तक एक ही जगह पर न बैठे न रहें. बीच-बीच में टहल आएं.
  37. कंप्यूटर के सामने बहुत देर तक न रहें. समय-समय पर आंखें बंद करके रिलैक्मस करें.
  38. फ़ोन पर बहुत देर तक बातें न करें, इससे भी कई तरह के विकार उत्पन्न होते हैं.
  39. अगर संभव हो तो डान्सिंग और स्विमिंग क्लासेस जॉइन करें. इससे फन के साथ-साथ एक्सरसाइज़ भी होगी.
  40. रोज़ सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में शहद और नींबू मिलाकर पीएं.
  41. 1 कप कटे हुए मीठे पके सेब में 1 कप कटी हुई पत्ता गोभी, 1 टीस्पून जीरा और 3 कप पानी मिलाकर 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं. इसे छानकर इतना पानी मिला लें कि 3 कप बन जाए. इसे दिन भर थोड़ा-थोड़ा पीएं.
  42. नींबू का रोज़ाना सेवन करें. या तो नींबू पानी के रूप में या फिर खाने में नींबू का रस डालकर. यह पाचन शक्ति को बेहतर बनाता है.
  43. रोज़ सुबह 1 टीस्पून फिश ऑयल लेना भी काफ़ी हेल्दी होता है.
  44. जितना हो सके ब्रोकोली और पालक का सेवन करें.
  45. संतरे के छिलकों का जाम बनाकर सेवन करें. ताज़ा टमाटर खाएं.
  46. ब्लैक टी या ग्रीन टी लें.
  47. सोने से पहले भी दांतों को ब्रश करें. मुंह की दुर्गंध मिटाने के लिए पानी में बेकिंग सोडा डालकर गरारे करें.
  48. दांत और मसूड़ों की तकलीफ़ हो तो सेंधा नमक और सरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों की मालिश करें.
  49. वीकेंड्स पर बॉडी व हेड मसाज करवाएं. इससे थकान भी मिटेगी और ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ेगा.
  50. हवा-पानी बदलना बहुत ज़रूरी होता है. इससे पेट संबंधी रोग कम होते हैं. छुट्टियां प्लान करें और बाहर ज़रूर जाएं.
  51. खुलकर हंसे. रोज़मर्रा के तनाव में आपकी हंसी गायब न होने पाए. खुलकर हंसने से फेफड़ों में लचीलापन बढ़ता है और उन्हें ताज़ा हवा मिलती है.
  • रिंकु शर्मा
Tips To Stay Healthy & Fit

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Ishi Khosla

जानें क्या है मेटाबॉलिक सिंड्रोम… यूं कम करें पेट के फैट्स- इशी खोसला (About Metabolic Syndrome… How To Reduce Belly Fat- Ishi Khosla)

अक्सर लो अपने पेट की चर्बी से परेशान रहते हैं, डायटिंग, एक्सरसाइज़ करने पर भी उन्हें वो रिज़ल्ट नहीं मिल पाता, जिसकी वो उम्मीद करते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि वो पेट के फैट्स के मूल कारणों को नहीं जान पाते. इस विषय पर अधिक जानते हैं कि इशी खोसला किस तरह से मार्गदर्शन करती हैं. इशी खोसला अपने आप में जाना-माना नाम है. वो प्रैक्टिसिंग क्लिनिकल न्यूट्रिशिनिस्ट, कंसल्टेंट और राइटर हैं. आप भी उनके बताए डायट व हेल्थ प्लान्स फॉलो करें और हमेशा हेल्दी रहें.

पेट के फैट्स की प्रमुख वजहें हैं- हाई ब्लड प्रेशर, गुड फैट्स की कमी, बैड फैट्स की अधिकता, ट्रायग्लिसरॉइड्स की अधिक मात्रा, ब्लड शुगर की अधिकता या फिर वंशानुगत डायबिटीज़- जिसे मेटाबॉलिक सिंड्रोम या सिंड्रोम एक्स भी कहा जाता है. यह कोई बीमारी नहीं, पर रिस्क फैक्टर्स का कॉम्बीनेशन है.

सवाल यह है कि इन सबके चलते ज़िद्दी फैट्स को कैसे भगाया जाए? हेल्दी ईटिंग, लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज़ और स्ट्रेस मैनेजमेंट से यह किया जा सकता है.

शरीर के वज़न को नियंत्रित रखें: संतुलित खानपान व क्रियाशीलता से यह हो सकता है. साबूत अनाज, नट्स, फ्रूट्स, सब्ज़ियां, दालें और बीजों से अपने डायट को हेल्दी बनाएं. मीठा खाना-पीना व अल्कोहल का सेवन कम कर दें.

गुड कैलोरीज़वाला भोजन लें: फाइबर, गुड कैलोरीज़, प्रोटीन, कॉम्प्लैक्स कार्बोहाइड्रेट को अपने डायट का हिस्सा बनाएं.

हाई कैलोरी फुड से बचें: बहुत ज़्यादा ऑयली, फैटी, फ्राइड फूड न लें. मीठा व स्वीट ड्रिंक्स से बचें. कम पोषण वाले भोजन को अवॉइड करें. नमक कम खाएं. बेहतर होगा पिज़्ज़ा, बर्गर व अन्य जंक फूड से दूर रहें.

स्मार्ट स्नैकिंग करें: स्नैकिंग के लिए बेक्ड व रोस्टेड चीज़ें ख़रीदें. इसके अलावा ड्राय फ्रूट्स, फ्रेश फ्रूट्स आदि लें.

फिज़िकल एक्टिविटीज़ बढ़ाएं: वॉकिंग करें, जॉग करें. लाइट एक्सरसाइज़ करें. रोज़मर्रा की दिनचर्या में भी लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. ऑफिस में बीच-बीच में जगह से उठकर राउंड लगाकर आएं. इस तरह अपनी फिज़िकल एक्टिविटीज़ बढ़ाएं. इससे ब्लड शुगर, व प्रेशर के साथ-साथ आपका वज़न भी काफ़ी नियंत्रित रहता है.

स्ट्रेस मैनेज करें: मेडिटेशन, योगा, ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ और पॉज़िटिव सोच बेहतरीन तरी़के हैं अपने स्ट्रेस को मैनेज करने के. स्ट्रेस आए इससे पहले ही यदि इन हेल्दी एक्टिविटीज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लें, तो स्ट्रेस आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता. बहुत से लोग स्ट्रेस ईटिंग भी करते हैं, ऐसे में स्ट्रेस कम होगा, तो आप बेवजह कैलेरीज़ नहीं खाएंगे.

दरअसल ईटिंग हैबिट्स और डायटिंग को लेकर बहुत-सी ग़लतफ़हमियां हैं हम सबके मन में. इसे बेहतर तरी़के से समझने के लिए इस वीडियो को फॉलो करें, पर इसे मेडिकल एडवाइस के तौर पर न लें.

सौजन्य: http://www.theweightmonitor.com/

Rujuta Diwekar
आर्ट ऑफ ईटिंग राइट: सही खाना और कैलोरीज़ गिनना एक-दूसरे के विपरीत है- रुजुता दिवेकर (Indian Food Wisdom And The Art Of Eating Right By Rujuta Diwekar)

वेटलॉस को लेकर बहुत-से मिथ्स हैं. जब तक इन्हें दूर कहीं करेंगे, ग़लतियों करते रहेंगे. इस विषय पर जानीमानी स्पोर्ट्स साइंस और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट रुजुता दिवेकर ने बहुत कुछ बताया और लोगों को सही मार्गदर्शन दिया है. रुजुता दिवेकर न स़िर्फ भारत बल्कि विश्‍व के सबसे अधिक फॉलो किए जानेवाले न्यूट्रिशनिस्ट्स में से एक हैं. वो बेस्ट सेलिंग ऑथर भी हैं और हेल्थ व वेलनेस पर बेहतरीन स्पीकर भी. यही वजह है कि उन्हें एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएनटेरोलॉजी द्वारा न्यूट्रिशन अवॉर्ड से भी नवाज़ा जा चुका है.
जी हां, हम अक्सर डायटिंग और वेटलॉस का मतलब यही समझते हैं कि कैलोरीज़ गिन-गिनकर खाओ और कम खाओ. बहुत-सी चीज़ें न खाओ, जबकि यह सोच ही ग़लत है. सही खाना और सही एक्सरसाइज़ ही आपको सही रिज़ल्ट दे सकते हैं. यही नहीं हर किसी की ज़रूरत व शरीर अलग होता है. अगर कोई डायबिटीज़ या हार्ट पेशेंट है तो उसका खान-पान अलग होगा.

क्या है सही खाना और सही डायट प्लान?
– लोकल फूड खाएं. आप जहां रहते हैं, वहां के वातावरण व लाइफस्टाइल के हिसाब से खाना आपको अधिक सूट करता है. भारत में रहकर यदि आप विदेशी फल व सब्ज़ियां खाएंगे, तो आपको उतना लाभ नहीं मिलेगा, जितना भारतीय फल व सब्ज़ियां खाने से मिलेगा.
– मौसमी चीज़ें खाएं. मौसमी फल व सब्ज़ियां खाने से हिचकें नहीं.
– अपने हाथों से बनाकर हेल्दी खाना खाएं.
– अपनी ज़रूरतों व आसपास के वातावरण के अनुसार अपना डायट प्लान बनाएं.
– हर किसी का शरीर अलग होता है, क्योंकि उनके रहन-सहन का तरीक़ा, उनका स्ट्रेस लेवल, उनकी ईटिंग हैबिट्स, डायट पैटर्न आदि भी अलग होता है.
– ऐसे में उनके सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सही डायट प्लान और एक्सरसाइज़ प्लान सिलेक्ट करना ज़रूरी है.
– आपको एक्सपर्ट बता पाएंगे कि आपके लिए क्या सही है.
– बिना सोचे-समझे खाना कम कर देने से फ़ायदे की जगह नुक़सान हो सकता है. हो सकता है सही पोषण न मिलने पर कमज़ोरी आ जाए. बेतहर होगा पूरी सजगता व सही जानकारी के आधार पर ही डायट व एक्सरसाइज़ करें.

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कैलोरीज़ नहीं, प्राण गिनें…
जहां एक तरफ़ वेस्टर्न कल्चर ने हमें कैलोरीज़ गिनना सिखाया है, वहीं हमारी सांस्कृतिक धरोहर ने हमें प्राणों यानी प्राणिक वैल्यू का महत्व बताया है. पेड़, पौधों और फसलों को प्राण कहां से मिलता है- हवा, पानी, सूर्य और मिट्टी में जो पोषक तत्व हैं उससे. जब उन्हें यह सही मात्रा में नहीं मिलेगा, तो ज़ाहिर है वो बीमार होंगे. ठीक इसी तरह हमें भी यदि ज़रूरी तत्व सही मात्रा में नहीं मिलेंगे, तो हम भी बीमार होंगे. प्राण क्या है? वो जीने का तत्व यानी जीने की ऊर्जा है. लेकिन यह ऊर्जा पश्‍चिम के शब्द एनर्जी से बिल्कुल अलग है. उनके लिए एनर्जी कैलोरीज़ होती हैं, जिन्हें गिनना ज़रूरी है, जबकि प्राण वो जीवनी शक्ति है, जो आपको संतुलित ऊर्जावान, ताज़ा व हल्का महसूस कराती है. इस वीडियो से आप इसे बेहतर तरी़के से समझ सकते हैं और हेल्दी लाइफ की ओर बढ़ सकते हैं.

सौजन्य: https://www.rujutadiwekar.com

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Summer Care Tips

  • पसीने की दुर्गंध से बचने के लिए प पसीने की दुर्गंध से बचने के लिए अच्छी कंपनी का डियो या सुगंधित पाउडर लगाएं.
  • दिन में दो बार स्नान करें.प यदि आप कामकाजी हैं, तो शाम को घर लौटने पर 10-15 मिनट तक ठंडे पानी में पैरों को डुबोकर रखें. इससे पैरों को आराम मिलेगा और आपको गर्मी से राहत.
  • ज़्यादा से ज़्यादा पानी पीएं. ख़ासकर घर से बाहर निकलते समय पानी ज़रूर पीएं. इससे आपके शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाएंगे और त्वचा भी ग्लो करेगी.
  • सुबह जल्दी उठकर लॉन में हरी घास पर टहलें.प घर से बाहर हों, तो थोड़ी-थोड़ी देर में नींबू पानी या जूस पीएं. हो सके, तो अपने साथ एक बॉटल में नींबू का शर्बत कैरी करें. इससे इंस्टेंट एनर्जी मिलती है.प दूध पोषक होने के साथ ठंडी तासीर का भी है, इसलिए रोज़ाना एक ग्लास दूध ज़रूर पीएं.
  • ज़्यादा ऑयली व गरिष्ठ भोजन करने से बचें.
  • अपने डायट में सलाद, जूस और फल शामिल करें. ढेर सारे फलों का सेवन करें, इससे त्वचा ग्लो करेंगी व गर्मी से भी राहत मिलेगी.
  • गर्मियों में अक्सर शरीर में पित्त की प्रॉब्लम हो जाती है, इसके लिएसुबह-सुबह ठंडा दूध पीएं.
  • छाछ को अपने भोजन का नियमित रूप से हिस्सा बनाएं. यह शरीर को ठंडक देता है.
  • लस्सी भी गर्मी से राहत दिलाती है.प गर्मी के कुछ महीनों में हो सके, तो चाय-कॉफी का सेवन बिल्कुल छोड़ दें, क्योंकि ये शरीर को गर्मी पहुंचाते हैं और सेंट्रल नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित करते हैं.
  • अगर बहुत ज़्यादा ज़रूरी न हो तो दिन में 11 बजे से 3 बजे तक धूप में न निकलें, क्योंकि इस समय सूरज की अल्ट्रा वॉयलेट किरणों का बहुत तेज़ और बुरा प्रभाव पड़ता है.
  • घर से बाहर जाएं या घर में रहें. अपनी त्वचा को सनस्क्रीन प्रोटेक्शन ज़रूर दें.
  • जिस तरह गर्मियों में शरीर डिहाइड्रेट होता है, उसी तरह स्किन भी डिहाइड्रेट होती है. ऐसे में स्किन का मॉइश्‍चर लेवल बनाए रखने के लिए ज़रूरी है उसे मॉइश्‍चराइज़ करना, ताकि स्किन को नरिशमेंट मिले. इसलिए गर्मियों में भी मॉइश्‍चराइज़र लगाना न भूलें.

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Winter Health Care

सर्दियों में यूं रखें सेहत का ख़्याल (Winter Health Care)

ठंड का मौसम अपने साथ सर्दी-ज़ुकाम और कई तरह की एलर्जी (Allergies) और इंफेक्शन्स (Infections) लेकर आता है. ऐसे में ज़रूरी है कि आप अपना और अपनों का ख़ास ख़्याल रखें, ताकि सर्दियों (Winter) के सुहाने मौसम का लुत्फ़ उठा सकें.

विंटर हेल्थ प्रॉब्लम्स

सर्दी के मौसम में गठिया और अस्थमा के मरीज़ों की द़िक्क़तें काफ़ी बढ़ जाती हैं. किसी को सालभर पुरानी चोट परेशान करने लगती है, तो किसी को मसल पेन. इनके अलावा और

कौन-कौन-सी बीमारियां हैं, जो सर्दियों के मौसम में आपको परेशान कर सकती हैं, आइए जानें.

सर्दी-खांसी

सर्दी-खांसी एक आम समस्या है, लेकिन सर्दी के मौसम में यह आपको काफ़ी परेशान कर सकती है. यह  रोग काफ़ी संक्रामक होता है, इसलिए अगर घर में किसी को सर्दी है, तो वह  छींकते-खांसते व़क्त रुमाल का इस्तेमाल करे. बहती नाक, सीने में जकड़न, छींकें आना, सिरदर्द, गले में खराश और हल्का बुख़ार इसके लक्षण हैं.

होम रेमेडीज़

–    जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है, वे बार-बार सर्दी-ज़ुकाम से परेशान रहते हैं. ऐसे लोगों को, ख़ासतौर से सर्दियों में, आंवले का मुरब्बा खाना चाहिए.

–     आधा टीस्पून शहद में कुछ बूंदें नींबू का रस और चुटकीभर दालचीनी पाउडर मिलाकर दिन में दो बार लें.

–    गुनगुने नींबू पानी में शहद मिलाकर लेने से सर्दी-खांसी से राहत मिलती है.

–     सर्दी-खांसी से राहत पाने के लिए एक कप पानी में थोड़ी-सी अलसी मिलाकर उबालें. पांच मिनट बाद आंच से उतार लें. छानकर उसमें नींबू का रस और शहद मिलाकर पीएं.

–    घी में लहसुन की कुछ कलियां गरम करके खाएं. गरम-गरम लहसुन खाने से खांसी में काफ़ी राहत मिलती है.

–     रात को सोने पर खांसी की समस्या बढ़ जाती है, क्योंकि लेटने पर नाक में मौजूद कफ़ धीरे-धीरे गले तक जाने लगता है, जिससे खांसी बढ़ जाती है. इसके लिए बेहतरीन उपाय है कि आप सिर को थोड़ा ऊंचा रखें. इससे खांसी कम होगी और आप सो भी पाएंगे.

गले में इंफेक्शन

गले में खिचखिच और ड्राईनेस, जो धीरे-धीरे दर्द का कारण बनता है, यह गले के इंफेक्शन के कारण होता है. मौसम में आई ठंडक और इंफेक्शन्स के कारण ऐसा होता है.

होम रेमेडीज़

–    इसके लिए हमारी दादी-नानी का फेवरेट नुस्ख़ा है गरारा करना. गुनगुने पानी में चुटकीभर नमक डालकर गरारा करने से बैक्टीरिया निकल जाते हैं, जिससे गले की खराश से छुटकारा मिलता है. इसे दिन में दो-तीन बार करें.

–     हल्दीवाला दूध भी एक ऐसा ही रामबाण नुस्ख़ा है. यह गले की सूजन और दर्द से राहत दिलाता है. बार-बार होनेवाली खांसी में भी हल्दीवाला दूध काफ़ी राहत पहुंचाता है.

–     एप्पल साइडर विनेगर को आप हर्बल टी या गरारेवाले पानी में डालकर इस्तेमाल करें.

–     लहसुन की एक कली चूसने से भी गले के इंफेक्शन और दर्द से राहत मिलती है.

–     इसके अलावा हर्बल टी और गरमागरम सूप आपके लिए काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होगा.

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अस्थमा

यह फेफड़े की बीमारी है, जिसमें श्‍वासनली में जलन और दर्द होने लगता है. सीने में जकड़न, छींकें आना, खांसी और सांस फूलना इसके लक्षण हैं. यह दो तरह का होता है, एलर्जिक और नॉन एलर्जिक. एलर्जिक अस्थमा धूल, धुएं, पेंट आदि के कारण होता है, जबकि नॉन एलर्जिक अस्थमा कोल्ड, फ्लू, स्ट्रेस और ख़राब मौसम के कारण होता है.

होम रेमेडीज़

–    एक कप पानी में आधा टीस्पून मुलहठी पाउडर और आधा टीस्पून अदरक मिलाकर चाय बनाकर पीएं.

–     एक ग्लास दूध में आधा टीस्पून कद्दूकस अदरक और आधा टीस्पून हल्दी पाउडर डालकर दिन में दो बार लें.

–     एक कप उबलते पानी में एक टीस्पून दालचीनी पाउडर और 1/4 टीस्पून कालीमिर्च, पिप्पली और सोंठ का समान मात्रा में मिलाया हुआ चूर्ण मिलाकर 10 मिनट तक उबालें. पीने से पहले एक टीस्पून शहद मिलाएं. यह अस्थमा अटैक्स से काफ़ी राहत देता है.

–    एक बाउल गरम पानी में पांच-छह बूंदें लैवेंडर ऑयल डालकर भाप लें.

इन्फ्लूएंज़ा

सर्दियों के मौसम में सर्दी और फ्लू कभी भी किसी को भी अपनी गिरफ़्त में ले सकते हैं. यह एक ऐसी समस्या है, जिसमें आपकी सारी एनर्जी ख़त्म हो जाती है. नाक बहना, सिरदर्द, बदनदर्द, बुख़ार और थकान फ्लू के आम लक्षण हैं.

–     आधा टीस्पून गिलोय को पीसकर एक कप पानी में उबालकर पीएं. इससे फ्लू के लक्षणों से काफ़ी राहत मिलती है.

–     समान मात्रा में शहद और प्याज़ का रस मिलाकर दिन में तीन बार फ्लू जाने तक लें.

–     एक टीस्पून शहद में 10-12 तुलसी की पत्तियों का रस मिलाकर दिन में एक बार लेने से भी राहत मिलती है.

–     गरम पानी में कुछ बूंदें नीलगिरी तेल की डालकर भाप लेने से काफ़ी राहत मिलेगी.

–    एक कप पानी में कालीमिर्च पाउडर, जीरा और गुड़ डालकर उबालें. यह चाय फ्लू के लक्षणों से राहत दिलाती है. आप चाहें, तो गुड़ में तिल मिलाकर उसके लड्डू बनाकर खाएं.

जोड़ों में दर्द

ठंड के कारण मसल्स और हड्डियों में अकड़न-सूजन के कारण यह मौसम कुछ लोगों के लिए कष्टदायक बन जाता है. इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है कि सोकर उठने पर आप स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ करें.

हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ आपको जोड़ों के दर्द से छुटकारा दिला सकती है.

–     आधी बाल्टी गरम पानी में दो कप सेंधा नमक मिलाकर उसमें टॉवेल डुबोकर प्रभावित जोड़ की सिंकाई करें.

–    रोज़ाना सुबह एक टीस्पून मेथी पाउडर फांककर एक ग्लास गुनगुना पानी पीएं.

–     नीलगिरी के तेल से जोड़ों पर मालिश करें. इससे दर्द और जलन दोनों में आराम मिलता है.

–    रात को सोने से पहले गुनगुने सरसों के तेल से जोड़ों पर मसाज करें. यह प्रभावित जोड़ों में रक्तसंचार बढ़ाता है, जिससे दर्द और अकड़न से राहत मिलती है.

–     एक कप गुनगुने पानी में एक टीस्पून एप्पल साइडर विनेगर और थोड़ा-सा शहद मिलाकर दिन में दो बार खाने से पहले लें.

हार्ट प्रॉब्लम्स

आपको जानकर हैरानी होगी कि ठंड में हार्ट अटैक्स के मामले बढ़ जाते हैं, क्योंकि ठंड के कारण हार्ट की कोरोनरी आर्टरीज़ सिकुड़ने लगती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर कम हो जाता है.

–     जिन्हें हार्ट प्रॉब्लम्स हैं, उन्हें ख़ासतौर से सर्दियों में रोज़ाना चार-पांच लहसुन की कलियां खानी चाहिए. यह खून को पतला करने का काम करता है, जिससे ब्लड फ्लो सही तरी़के से होता है.

–     एक ग्लास गुनगुने पानी में आधा टीस्पून अर्जुन की छाल का पाउडर और शहद मिलाकर लें. इससे आपको काफ़ी राहत मिलेगी.

–     अदरक-लहसुन के रस में शहद या गुड़ मिलाकर खाने से भी हार्ट प्रॉब्लम्स में राहत मिलती है.

–     इसके अलावा खानपान का ध्यान रखें. दो बार में हैवी खाने की बजाय चार-पांच बार में थोड़ा-थोड़ा खाएं. अपने वज़न को नियंत्रित रखें. अगर वज़न अचानक से बढ़ने लगे, तो डॉक्टर को बताएं.

– सुनीता सिंह

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Sugar Tips

इन 10 तरीक़ों से शक्कर कर सकती है आपको बीमार (10 Reasons Why Too Much Sugar Is Bad For You)

खाने में मिठास घोलनेवाली शक्कर (Sugar) की सच्चाई कितनी कड़वी है, इस बारे में शायद ही आपने कभी ध्यान दिया हो. शक्कर न स़िर्फ हमारी ज़िंदगी में पूरी तरह घुल-मिल गई है, बल्कि इसके साइड इफेक्ट्स (Side Effects) से हमारा स्वास्थ्य (Health) भी धीरे-धीरे घुल रहा है. रिफाइंड शक्कर का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल कर अनजाने में ही आप कई बीमारियों को न्योता दे रहे हैं. कौन-सी हैं वो बीमारियां और कितनी हानिकारक है शक्कर, आइए देखते हैं.

मैं शक्कर हूं!

सबसे पहले तो आपको बता दें कि शक्कर एक कार्बोहाइड्रेट है. मार्केट में मिलनेवाली शक्कर गन्ने या स़फेद चुकंदर से बनी प्रोसेस्ड व रिफाइंड शक्कर होती है, जिसमें कोई भी पोषक तत्व नहीं होते. यह हमारे शरीर में स़िर्फ कैलोरीज़ जमा करती है.

क्यों हानिकारक है शक्कर?

प्रोसेसिंग के दौरान शक्कर की चमक बढ़ाने के लिए उसमें सल्फर डाइऑक्साइड, फॉस्फोरिक एसिड, कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, एक्टिवेटेड कार्बन जैसे ख़तरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इसके सारे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. यह पचने में भी इतनी हेवी होती है कि इसे पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है. यह हमारे शरीर में धीरे-धीरे फैट के रूप में जमा होती रहती है, जो किसी न किसी बीमारी के रूप में बाहर निकलती है. यही वजह है कि इसे ‘स्लो व्हाइट पॉयज़न’ भी कहते हैं.

कहां-कहां से मिलती है शक्कर?

मार्केट में मिलनेवाली रिफाइंड शक्कर के अलावा कई और प्राकृतिक स्रोतों से भी हमें शक्कर मिलती है.

ग्लूकोज़: यह फलों और पौधों में पाया जाता है, जो फोटोसिंथेसिस के कारण बनता है. ज़रूरत पड़ने पर हमारा शरीर भी ग्लूकोज़ बनाता है.

फ्रूक्टोज़: यह फ्रूट शुगर होता है, जो फलों से मिलता है. यह गन्ने और शहद में पाया जाता है.

सुक्रोज़: यह गन्ना, स़फेद चुकंदर और कुछ ग्लूकोज़ के साथ कुछ फलों व सब्ज़ियों में भी पाया जाता है.

लैक्टोज़: दूध से मिलनेवाली इस शक्कर को हम मिल्क शुगर भी कहते हैं.

क्या होता है जब हम खाते हैं शक्कर?

जब हम किसी भी फॉर्म में शक्कर खाते हैं, तो हमारे शरीर के पास उसके लिए दो ऑप्शन्स होते हैं-

  1. उन कैलोरीज़ को बर्न करके एनर्जी में कनवर्ट करना.
  2. कार्बोहाइड्रेट्स को फैट में बदलकर फैट सेल्स में जमा करना.

हमारी बॉडी की एक्टिविटी इस बात पर निर्भर करती है कि उस दिन हमारे शरीर में कितनी शक्कर गई है. अगर शक्कर सही मात्रा में है, तो वो एनर्जी में कन्वर्ट होगी, लेकिन अगर ज़रूरत से ज़्यादा है, तो बॉडी फैट में बदल जाएगी.

कितनी शक्कर की होती है ज़रूरत?

वैसे तो हमें फलों और सब्ज़ियों से ज़रूरत के मुताबिक़ शक्कर मिल जाती है, लेकिन अगर आप रोज़ाना फल, सब्ज़ी और दूध नहीं लेते, तो अपने खाने में निम्नलिखित मात्रा से ज़्यादा शक्कर न लें.

पुरुष: रोज़ाना 9 टीस्पून या लगभग

37.5 ग्राम (150 कैलोरीज़)

महिला: रोज़ाना 6 टीस्पून या लगभग

25 ग्राम (100 कैलोरीज़)

रोज़ाना हमारे शरीर को लगभग 2000 कैलोरीज़ की ज़रूरत होती है, जिनमें से शक्कर का हिस्सा इतना ही है, लेकिन अगर आप इससे ज़्यादा शक्कर लेंगे, तो वो एक्स्ट्रा कैलोरीज़ आपको ही नुक़सान पहुंचाएंगी.

किस तरह बना सकती है रोगी?

शक्कर हमारे शरीर को कई तरह से प्रभावित करती है. किसी विशेष अंग को प्रभावित करने के साथ-साथ यह कई शारीरिक क्रियाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है.

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Sugar Control

  1. वज़न बढ़ाकर दे सकती है मोटापा

आजकल हम जो भी पैक्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड और शुगरी ड्रिंक्स ले रहे हैं, उनमें भारी मात्रा में शक्कर होती है. इन प्रोडक्ट्स में आमतौर पर फ्रूक्टोज़ का इस्तेमाल किया जाता है, जो शक्कर की क्रेविंग्स को और बढ़ा देता है. जो लोग सॉफ्ट ड्रिंक्स, सोडा और पैक्ड फ्रूट जूसेज़ पीते हैं, उनका वज़न बाकी लोगों के मुक़ाबले तेज़ी से बढ़ता है.

  1. प्रभावित करती है इंसुलिन की प्रक्रिया

ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए हमारा शरीर इंसुलिन रिलीज़ करता रहता है, लेकिन जब हम ज़रूरत से ज़्यादा शक्करवाली चीज़ें

खाने-पीने लगते हैं, तब शरीर को बहुत ज़्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है, जिससे इंसुलिन प्रोडक्शन का पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है और शरीर इंसुलिन की ज़रूरत को पूरा नहीं कर पाता. इससे टाइप 2 डायबिटीज़, हार्ट डिसीज़ और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी बीमारियां जन्म लेती हैं.

  1. बढ़ा सकती है हार्ट डिसीज़ का ख़तरा

शक्कर के ओवरडोज़ से कई बीमारियां हो सकती हैं, उन्हीं में से एक है, हार्ट प्रॉब्लम्स, जो पूरी दुनिया में इस समय मौत का सबसे बड़ा कारण बन गया है. रिसर्च में यह बात साबित हो गई है कि ज़्यादा शक्कर के सेवन से ओबेसिटी,

इंफ्लेमेशन, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर हो सकता है. ये सभी हार्ट प्रॉब्लम्स के रिस्क फैक्टर्स हैं.

  1. बढ़ाती है कैंसर के रिस्क फैक्टर्स

मोटापा और इंसुलिन की कमी दोनों ही फैक्टर्स कैंसर को ट्रिगर कर सकते हैं. एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो महिलाएं हफ़्ते में तीन बार या उससे ज़्यादा कुकीज़ और बिस्किट्स खाती हैं, उनमें इंडोमेट्रियल कैंसर का ख़तरा बाकी महिलाओं के मुक़ाबले डेढ़ गुना ज़्यादा बढ़ जाता है.

  1. फंसा सकती है एनर्जी ड्रेनिंग साइकल में

अगर कमज़ोरी महसूस कर रहे हों, तो कुछ मीठा खा लें, एनर्जी तुरंत बूस्ट हो जाती है, पर क्या आप जानते हैं कि अगर शक्कर के साथ प्रोटीन, फाइबर या फैट नहीं हो, तो वो एनर्जी टिक नहीं पाती और तुरंत नष्ट हो जाती है. जितनी तेज़ी से एनर्जी लेवल बढ़ता है, उसी तेज़ी से घट जाएगा, जिससे आप दोबारा विकनेस फील करेंगे. इस एनर्जी ड्रेनिंग साइकल से बचना चाहते हैं, तो स़िर्फ शक्करवाली चीज़ें लेना अवॉइड करें. आप लो फील कर रहे हैं, तो कोई शुगरी ड्रिंक पीने की बजाय सेब के साथ कुछ बादाम खा लें.

  1. दे सकती है आपको फैटी लिवर

लंबे समय तक हाई फ्रूक्टोज़ डायट के इस्तेमाल से फैटी लिवर का ख़तरा बढ़ जाता है. ग्लूकोज़ और अन्य तरह की शक्कर शरीर के अन्य सेल्स में घुल जाती हैं, पर फ्रूक्टोज़ स़िर्फ और स़िर्फ लिवर में घुलती है. लिवर उसे एनर्जी के रूप में इस्तेमाल करता है, लेकिन जब ज़रूरत से ज़्यादा फ्रूक्टोज़ लिवर में आने लगता है, तो वह फैट में बदलने लगता है, जिससे धीरे-धीरे लिवर फैटी होने लगता है.

  1. बढ़ने लगती हैं दांतों की बीमारियां

पिछले कुछ सालों में दांतों की बीमारियां तेज़ी से बढ़ी हैं, क्योंकि हमारे

खान-पान में शक्कर की मात्रा तेज़ी से बढ़ी है. हमारे मुंह में बहुत से हेल्दी व अनहेल्दी बैक्टीरिया रहते हैं. शक्कर एक ऐसी चीज़ है, जिसके कारण अनहेल्दी बैक्टीरिया तेज़ी से बढ़ते हैं और हमें दांतों की समस्याएं होने लगती हैं. शक्कर के कारण दांतों पर एसिड अटैक्स ज़्यादा होते हैं, जो कैविटी का मुख्य कारण बनते हैं.

  1. बढ़ाती है यूरिक एसिड की मात्रा

यूरिक एसिड बनने का मुख्य कारण फ्रूक्टोज़ है. जब शरीर में फ्रूक्टोज़ का लेवल बढ़ जाता है, तो शरीर उसे यूरिक एसिड के रूप में बाहर निकालने लगता है, जिससे हार्ट और किडनी प्रॉब्लम्स शुरू हो जाती हैं.

  1. शुगर एडिक्शन को बढ़ाती है

क्या आप जानते हैं कि शक्कर किसी ड्रग एडिक्शन से कम नहीं है? जी हां, यह हम नहीं बल्कि रिसर्चर्स कहते हैं. उनके मुताबिक़, जब हम शक्करवाली चीज़ें खाते हैं, तो हमारे ब्रेन से डोपामाइन नामक हार्मोन रिलीज़ होता है, जो हमें और शक्कर खाने के लिए उकसाता है और न चाहते हुए भी हम शक्कर का ओवरडोज़ ले लेते हैं.

  1. कम उम्र में बना सकती है अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार

हमारा खानपान हमारे ब्रेन के स्ट्रक्चर और फंक्शनिंग को प्रभावित करता है. रिसर्चर्स के मुताबिक़, ज़रूरत से ज़्यादा शक्कर ब्रेन की उस फंक्शनिंग को प्रभावित करती है, जो हमारी मेमोरी को कंट्रोल करती है. लगातार शक्कर का ओवरडोज़ बहुत कम उम्र में आपको अल्ज़ाइमर और डिमेंशिया का शिकार बना सकता है.

क्या हैं शक्कर के हेल्दी विकल्प?

ऑर्गैनिक शहद: इसकी एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज़ के कारण यह बेस्ट स्वीटनर माना जाता है. यह शक्कर से ज़्यादा मीठा होता है, इसलिए कम क्वांटिटी में इस्तेमाल होता है.

गुड़: इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने, आयरन लेवल को बढ़ाने, लिवर को डिटॉक्सिफाई करने के साथ-साथ यह सर्दी-खांसी में भी आपको राहत दिलाता है. जहां भी आपको शक्कर की ज़रूरत पड़ती हो, वहां गुड़ का इस्तेमाल करें.

खजूर: खजूर का इस्तेमाल आप हलवा, खीर जैसे डेज़र्ट्स और मिठाइयां बनाने के लिए कर सकते हैं. शक्कर की बजाय खजूर और काजू पाउडर आदि इस्तेमाल कर सकते हैं. ब्राउन शुगर की बजाय आप डेट शुगर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

अनरिफाइंड शुगर: इसे रिफाइंड नहीं किया जाता, जिससे आयरन और मैग्नीशियम जैसे प्राकृतिक तत्व बने रहते हैं. देखने में यह भूरे रंग का होता है, जिसका स्वाद शहद जैसा होता है. रिफाइन्ड शक्कर की जगह इसका इस्तेमाल करें.

कोकोनट या पाम शुगर: यह एक बेहतरीन नेचुरल स्वीटनर है, क्योंकि इसे प्रोसेस करने के लिए किसी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता. रोज़ाना की कुकिंग में इसे शामिल करें. चाय में डालकर आप रिफाइंड शक्कर से बच सकते हैं.

– अनीता सिंह

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रात की ये 10 आदतें बना सकती हैं आपको मोटा (10 Nighttime Habits That Make You Fat)

क्या आप मोटापा कम करने के लिए जिम में पसीना बहा रहे हैं या फिर डायटिंग के नाम पर अपने शरीर को टार्चर कर रहे हैं, फिर भी आपका मोटापा कम नहीं हो रहा है, तो एक नज़र अपनी लाइफस्टाइल संबंधी आदतों पर डालिए. जी हां, आपके मोटापे का एक अन्य और महत्वपूर्ण कारण है रात की   ग़लत आदतें, जो आपके मोटापे को कम नहीं होने देती हैं. आइए जानें, कैसे?

1 क्या आप हैवी डिनर करते हैं?

क्या आप जानते हैं कि आपकी इस आदत से आपका मोटापा बढ़ सकता है? आपकी यह आदत आपको अपने फिटनेस गोल से भटका सकती है? अगर फिट रहना चाहते हैं, तो अपनी इस आदत को तुरंत बदल डालिए. सुबह के समय हम अधिक एक्टिव रहते हैं. शाम होने पर थकावट के कारण शरीर का एनर्जी लेवल कम होने लगता है, जिसके कारण शरीर को कम कैलोरी की आवश्यकता होती है. पर हैवी डिनर करने से पाचन तंत्र पर अनावश्यक लोड बढ़ने लगता है, जिसके कारण अतिरिक्त कैलोरी अतिरिक्त फैट में बदलने लगती है और धीरे-धीरे मोटापा बढ़ने लगता है.

2 क्या आप टीवी देखते हुए खाना खाते हैं?

अधिकतर लोगों को टीवी के सामने बैठकर भोजन करना अच्छा लगता है. यह जानते हुए कि उनकी इस आदत से न स़िर्फ ओवरईटिंग होती है, बल्कि मोटापा भी बढ़ता है. अमेरिकन जनरल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन (2013) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, खाने के प्रति जागरूक न होने पर आप ज़रूरत से ज़्यादा खा सकते हैं और आपको पता भी नहीं चलेगा. अगर अपना ध्यान खाने पर केन्द्रित करके खाते हैं, तो आप निश्‍चित तौर पर कम खाएंगे. यदि टीवी देखते हुए खाते हैं, तो आप खाने के स्वाद को दिमाग़ी तौर पर महसूस नहीं कर पाएंगे और ओवरइंटिंग कर लेंगे.

3 रात के समय आप क्या खाते हैं?

मोटापा इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि आप कितना (कम/ज़्यादा) खाते हैं, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि रात के समय आप किस तरह का खाना खाते हैं यानी आपकी फूड चॉइस पर निर्भर करता है. अगर आप रात को क्रीम बेस्ड सूप और ग्रेवी, फ्राइड फूड, डेज़र्ट आदि खाते हैं, तो पचने में थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए रात के समय हाई कैलोरी फूड का सेवन नहीं करना चाहिए.

4 क्या आप डिनर के बाद ब्रश नहीं करते हैं?

डिनर के बाद ब्रश करना बहुत बोरिंग काम है. अपनी इस आदत से आप ख़ुद को न केवल अतिरिक्त स्नैक्स खाने से रोक सकते हैं, बल्कि मोटापा भी कंट्रोल कर सकते हैं. डायटीशियन्स के अनुसार, डिनर के बाद ब्रश करने की आदत से आप पोस्ट डिनर स्नैकिंग से बच सकते हैं. बहुत से लोग डिनर के बाद डेज़र्ट और कैलोरीवाले फूड खाते हैं, चाहे उन्हें भूख न हो तो भी. ब्रश करने के बाद वे ख़ुद को ऐसी चीज़ें खाने से रोक सकते हैं, क्योंकि ब्रशिंग जैसा बोरिंग काम दोबारा नहीं करना चाहते. परिणामस्वरूप मोटापा नहीं बढ़ेगा.

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5 खाने के बाद क्या आप वॉक पर नहीं जाते हैं?

अगर नहीं जाते हैं, तो जाना शुरू करें. एक अध्ययन के अनुसार, अगर आप रात को खाने के बाद वॉक करते हैं या फिर 5 मिनट तक वज्रासन में बैठते हैं, तो निश्‍चित रूप से आपका वज़न नियंत्रित रहेगा. यदि आप अपनी पाचन प्रक्रिया और मेटाबॉलिज़्म में सुधार करना चाहते हैं, तो डिनर के बाद वॉक ज़रूर करें. इससे आपका मोटापा नियंत्रित रहेगा और आपका मूड भी फ्रेश होगा.

6 क्या आप रात को मोबाइल या लैपटॉप पर व्यस्त रहते हैं?

अधिकतर लोगों में यह आदत होती है सोने से पहले मोबाइल-लैपटॉप पर अपने ईमेल चेक करना, अगले दिन की टु डू लिस्ट बनाना, अगले प्रोजेक्ट या असाइनमेंट का ड्राफ्ट तैयार करना आदि, जिसकी वजह से अनावश्यक रूप से तनाव बढ़ता है. अधिक तनाव होने से कार्टिसोल नामक हार्मोन का उत्पादन होता है. इस हार्मोन में ऐसे गुण होते हैं कि तनाव की तीव्रता स्वत: ही बढ़ जाती है, जिसके कारण फैट के स्तर में वृद्धि होने लगती है. इसके अलावा कार्टिसोल मेटाबॉलिज़्म को धीमा कर देता है, जिसके कारण खाना सही तरह से नहीं पचता है और मोटापा बढ़ने लगता है.

7 क्या आप रात को देर से सोते हैं?

देर रात तक जागने से मंचिंग करने के चांस काफ़ी बढ़ जाते हैं. मंचिंग के दौरान भूख बढ़ानेवाले हार्मोंस (घ्रेलीन- जिसे हंगर हार्मोन भी कहा जाता है) का स्तर बढ़ जाता है और वो स्ट्रेस बढ़ानेवाले हार्मोंस (लेप्टिन) के स्तर को कम करता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ते वर्कलोड के कारण अधिकतर लोग रात को देर से खाना खाते हैं, जिससे उनके शरीर का मेटाबॉलिज़्म बिगड़ने लगता है और धीरे-धीरे मोटापा हावी होने लगता है.

8 क्या आप सायकियाट्रिक मेडिसिन लेते हैं

रात को सोने से पहले कुछ लोग एंटीडिप्रेशन और सायकियाट्रिक मेडिसिन लेते हैं, जिससे मोटापा बढ़ता है. अगर आप अपने मोटापे को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो इन दवाओं को अपनी मर्ज़ी से बंद न करें, बल्कि अपने डॉक्टर से बात करके इनके डोज में बदलाव करें. ऐसी कोई एक मेडिसिन नियमित रूप से न खाएं, जिसका कोई साइड इफेक्ट हो.

9 क्या आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं?

पर्याप्त नींद न लेना और आवश्यकता से अधिक नींद लेने से मोटापा बढ़ता है. इसका कारण है कि आपका शरीर कैलोरी को बर्न करने में सक्षम नहीं है. अगर आप 7-8 घंटे से कम सोते हैं या फिर ज़रूरत से ज़्यादा सोते हैं, तो इसका मतलब है कि आपका मेटाबॉलिज़्म ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है.

हाल ही में हुए एक अध्ययन से यह साबित हुआ है कि जो लोग केवल 6 घंटे की नींद लेते हैं, उनका वज़न, उन लोगों की तुलना में अधिक होता है, जो 8-10 घंटे की पर्याप्त नींद लेते हैं. जो लोग 6 या 6 से कम घंटे सोते हैं, उनमें मोटापे के लक्षण दिखाई देते हैं. इसके अलावा पूरी नींद न लेने के कारण डायबिटीज़ और इंसोम्निया के होने की संभावना भी बढ़ जाती है.

10 क्या आप कैफीन या अल्कोहल का सेवन करते हैं?

अगर आप रात के व़क्त कैफीन और अल्कोहल का सेवन करते हैं, तो अपनी इस आदत को तुरंत सुधार लें. आपकी यह आदत धीरे-धीेरे आपके बढ़ते वज़न की ओर संकेत करती है. कैफीन और अल्कोहल में बहुत अधिक कैलोरी होती है. इनका सेवन करने से नींद में रुकावट आती है. नींद में बाधा आने के कारण मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है और शरीर में अतिरिक्त फैट जमने लगता है.

रात को जल्दी खाने के फ़ायदे

  • लंच और डिनर के बीच में बहुत अधिक अंतर होने के कारण भूख अधिक लगती है. इस अंतराल को कम करें. टी टाइम में स्नैक्स खाएं.
  • डिनर के दौरान टीवी न देखें, क्योंकि टीवी देखते हुए ओवरईटिंग की संभावना बढ़ जाती है.
  • कोशिश करें कि डिनर रात 9 बजे से पहले कर लें.
  • अगर यह संभव न हो, तो टी टाइम पर लाइट स्नैक्स लें और डिनर में हल्का भोजन करें.
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डिनर अवॉइड न करें. कम से कम सूप, सलाद या फ्रूट्स ज़रूर खाएं.
  • डिनर बैलेंस्ड लेकिन लाइट होगा, तो अगले दिन भी आप फ्रेश महसूस करेंगे.
  • डिनर में लो कार्ब और हाई प्रोटीन फूड लें. इन्हें पचने में अधिक समय लगता है.
  • लगातार कई दिनों तक डिनर में फ्राइड फूड और डेज़र्ट न लें. अगर इन्हें खाने की बहुत अधिक क्रेविंग हो, तो सुबह नाश्ते में लें.
  • डिनर के बाद तुरंत सोने की बजाय 5 मिनट वज्रासन में ज़रूर बैठें.
  • रात के समय चाय, कॉफी और चॉकलेट के सेवन से बचें.
  • इसकी बजाय गरम दूध में इलायची पाउडर डालकर पीएं.

– देवांश शर्मा

रंगों के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती. रंग जीवन में ख़ुशियां, ख़ूबसूरती, उत्साह… और अच्छी सेहत भी लाते हैं. यदि आप हर रंग के फल और सब्ज़ी में मौजूद न्यूट्रीएंट्स और उनके लाभ के बारे में जान लें, तो स्वस्थ रहना कोई मुश्किल काम नहीं है. आपको स्वस्थ और सुंदर बनाए रखने के लिए हमने तैयार किया है ये कलरफुल डायट चार्ट.

7 Colours You Need To Eat

हरा रंग
वैदिक काल से ही हरे पेड़-पौधों का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता रहा है, जो हमें स्वस्थ व मज़बूत बनाए रखने में सहायक हैं. हरे रंग के फल व सब्ज़ियों में पाए जाने वाले सल्फोराफिन, आइसोथायोसानेट, इंडोल, ल्यूटीन जैसे न्यूट्रीएंट्स आंखों की रोशनी बढ़ाते हैं, दांत व हड्डियां मज़बूत बनाते हैं. हरी सब्ज़ियों के नियमित सेवन से शरीर में भारी मात्रा में विटामिन ए, बी-कॉम्पलेक्स, सी के साथ ही कैल्शियम की कमी भी पूरी हो जाती है.
क्या खाएं?
हरी पत्तेदार सब्ज़ियां, पत्तागोभी, ककड़ी, बीन्स, ब्रोकोली, हरी प्याज़, हरी मटर, नाशपती, हरे अंगूर, हरा सेब आदि.

लाल रंग
इस रंग के फल और सब्ज़ियों में लाइकोपेन और एंथोसायनिन पाए जाते हैं, जो याददाश्त बढ़ाने के साथ ही कैंसर होने की संभावना को भी कम करते हैं. साथ ही इनसे शरीर में एनर्जी का स्तर भी बढ़ता है, जिससे हम दिनभर तरोताज़ा रहते हैं.
क्या खाएं?
लाल रंग के फल व सब्ज़ियां, जैसे- टमाटर, चुकंदर, लाल अंगूर, गाजर, स्ट्रॉबेरी, तरबूज, लाल शिमला मिर्च, चेरी, सेब, अनार आदि को अपनी डायट में शामिल करें.

पीला और ऑरेंज रंग
इन रंगों के फल और सब्ज़ियों में मौजूद अल्फा कैरोटीन, बीटा कैरोटीन, विटामिन सी, बायोफ्लैवोनॉइड आदि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं, त्वचा को स्वस्थ व जवां बनाए रखते हैं, फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं, हृदय रोग की संभावना को कम करते हैं और रतौंधी में भी फ़ायदा पहुंचाते हैं.

यह भी देखें: सीखें कुकिंग के नए तरीके

क्या खाएं?
संतरा, नींबू, आम, अनन्नास, नाशपती, पीच, पपीता, एप्रिकोट, नारंगी गाजर, पीले टमाटर, पीली शिमला मिर्च, कॉर्न, सरसों, कद्दू, खरबूजा आदि.

स़फेद रंग
इस रंग के फल और सब्ज़ियों में मौजूद एलीसीन, फ्लैवोनॉइड आदि न्यूट्रीएंट्स कॉलेस्ट्रॉल लेवल को कम करते हैं, हृदय को स्वस्थ रखते हैं, कैंसर या ट्यूमर होने की संभावना को कम करते हैं.
क्या खाएं?
केला, मूली, मशरूम, फूलगोभी, आलू, स़फेद प्याज़, लहसुन आदि.

नीला/बैंगनी रंग
इन रंगों के फल व सब्ज़ियों में पाया जाने वाला एंथोसायनिन त्वचा को स्वस्थ और जवां बनाए रखता है, हृदय को मज़बूत बनाता है और कैंसर होने की संभावना को भी कम करता है.
क्या खाएं?
जामुन, करौंदा, आलू बुखारा, पर्पल अंगूर, ब्लैक बेरी, ब्लू बेरी, पर्पल पत्तागोभी, बैंगन आदि.

यह भी देखें: हेल्दी कुकिंग टेकनीक्स
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