Tag Archives: Healthy food

क्या आप जानते हैं फैट से जुड़े 5 फैक्ट्स? (5 Facts About Fats)

क्या आप जानते हैं फैट से जुड़े 5 फैक्ट्स? क्योंकि फैट से जुड़े 5 फैक्ट्स आपको हमेशा हेल्दी बनाए रखेंगे. फिट रहने के चक्कर में अक्सर लोग फैट खाना छोड़ देते हैं, लेकिन ऐसा करना ठीक नहीं है. हेल्दी रहने के लिए फैट की कितनी मात्रा ज़रूरी है और किन चीज़ों से हमें हेल्दी फैट मिलता है? आइए, हम आपको बताते हैं.

Fats Food

ये हैं फैट से जुड़े 5 फैक्ट्स:
1) हमारी डायट में कैलोरी का 20-30 प्रतिशत फैट से आना चाहिए. फैट की इतनी मात्रा हमारे शरीर के लिए बहुत ज़रूरी है इसलिए अपनी डायट में फैट की सही मात्रा ज़रूर रखें.
2) सूखे मेवे, बीज, फैटी फिश आदि अच्छे फैट के स्रोत हैं. इनसे हमें हेल्दी फैट मिलता है इसलिए अपनी डायट में इन्हें ज़रूर शामिल करें.
3) सरसों, राइस ब्रान, तिल, सफ़ेद सरसों, मूंगफली और ऑलिव ऑयल में मोनोअनसैच्युरेटेड फैट होता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है. अतः खाना बनाने के लिए मोनोअनसैच्युरेटेड फैट युक्त कुकिंग ऑयल इस्तेमाल करें.
4) क्वांटिटी के साथ ही फैट की क्वालिटी भी बहुत महत्वपूर्ण है. मोनोअनसैच्युरेटेड फैट से भरपूर डायट सेहत के लिए अच्छी होती है, मगर ट्रांसफैट नहीं.
5) खाना बनाने के लिए अलग-अलग तरह के वेजीटेबल ऑयल का इस्तेमाल करें, क्योंकि किसी भी एक वेजीटेबल ऑयल में फैट की संतुलित मात्रा नहीं होती है. अतः आप भी खाना बनाने के लिए अलग-अलग तरह के वेजीटेबल ऑयल का इस्तेमाल करें.

यह भी पढ़ें: मोटापा कम करने के १० योगासन (10 Yoga For Weight Loss Fast And Naturally)

 

क्या आप जानते हैं नाभि में छिपे 12 हेल्थ सीक्रेट्स? देखें वीडियो:

कामकाजी महिलाओं के लिए हेल्दी स्नैकिंग आइडियाज़ (Healthy Snacking Ideas For Working Women)

Healthy Snacking Ideas, Working Women cooking tips

वर्किंग वीमेन (Working Women) के लिए ज़रूरी है वर्क लाइफ (worklife) और पर्सनल लाइफ (personallife) में बैलेंस बनाते हुए भी अपने हेल्थ को इग्नोर न करना, ऐसी में ये हेल्दी स्नैकिंग (Healthy Snacking) टिप्स (Tips) उनकी मदद करेंगे


Healthy Snacking Ideas, Working Women cooking tips

अब वो व़क्त तो रहा नहीं, जब महिलाएं केवल किचन और घर की शोभा बढ़ाती थीं. समय बदलने के साथ-साथ महिलाओं की भूमिका में भी बहुत परिवर्तन आ गया है. फैमिली लाइफ के अलावा आज उसकी सोशल और प्रोफेशनल लाइफ भी है. यही वजह है कि उसके लिए चुनौतियां बढ़ी हैं. घर-परिवार, जॉब और बच्चों की देखभाल… इन सबके बीच उसकी अपनी सेहत काफ़ी प्रभावित होती है. लेकिन अगर वो हेल्दी डायट ले और अपनी हेल्थ को इग्नोर न करे, तो इन सारी चुनौतियों का सामना वो बेहतर तरी़के से कर पाएगी.
लें सही डायट
– काम के बीच अपने लिए कुछ भी ख़ास बनाकर खाना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन अगर आप स्मार्टली स्नैकिंग करें, तो यह आसान हो जाएगा.
– ऑयली और जंक फूड की जगह हेल्दी फूड लें.
– आपके दोपहर के भोजन में कम से कम एक हरी सब्ज़ी, एक हिस्सा ताज़ा सलाद का और एक हिस्सा कैल्शियम से भरपूर डेयरी प्रोडक्ट, जैसे- छाछ, पनीर या दही, का होना चाहिए.
– महिलाओं को वैसे भी कैल्शियम की अधिक ज़रूरत होती है, तो ऐसे में अपनी ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ न करें.
– पानी भरपूर पीएं. अपने डेस्क पर पानी की बोतल भरकर रखें, ताकि हमेशा हाइड्रेटेड रहें.
– काम के तनाव के बीच, देर तक काम करने और डेड लाइन्स पूरी करने के चक्कर में खानपान अनियमित और अनहेल्दी हो जाता है. लेकिन ऐसा जंक फूड न लें, जिनमें न एनर्जी है, न पोषण. बेहतर होगा कि जब भूख लगे, तो फ्रेश फ्रूट या फिर नट्स खाएं.
– एक्सरसाइज़ के लिए समय नहीं मिल पाता, तो बैठे-बैठे कुछ देेर के लिए मेडिटेशन करें. इससे तनाव कम होकर ऊर्जा मिलेगी.
– दिल्ली बेस्ड न्यूट्रिशनिस्ट रितिका समादार के अनुसार, “वर्किंग वुमन को सेहत संबंधी समस्याएं होने की अधिक आशंका रहती है, क्योंकि समय के अभाव के चलते उनकी खाने में हेल्दी फूड और पोषण की कमी रहती है. वो जब भी समय मिलता है, कुछ भी अनहेल्दी खा लेती हैं, जिससे स़िर्फ फैट्स और कैलोरीज़ ही बढ़ती हैं. इससे बचने के लिए स्मार्ट स्नैकिंग की ज़रूरत है.
– रोज़ सुबह रातभर पानी में भिगोए हुए बादाम खाएं, इससे दिनभर एनर्जी बनी रहेगी, क्योंकि यह विटामिन ई, फाइबर, प्रोटीन, राइबोफ्लेविन और अन्य कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है.
– स्नैकिंग के लिए ऐसी हेल्दी चीज़ें सिलेक्ट करें, जिन्हें कैरी करना भी आसान हो.”

यह भी पढ़ें: बिना एंटीबायोटिक्स के साइनस से आराम पाने के कारगर तरीक़े

कैसे करें स्मार्ट स्नैकिंग?
– सलाद काटने का समय नहीं हो, तो गाजर, ककड़ी, टमाटर, सेब आदि को आप यूं ही बैग में रख लें और लंच के समय काटकर खाएं.
– जब कभी भूख लगे, तो ऑयली खाने की बजाय एक सेब या कोई अन्य फ्रूट खाएं.
– कभी-कभी भूख दिमाग़ में भी होती है, इसलिए जब भी भूख महसूस हो, तो पहले पानी पीएं. हो सकता है इसी से आपकी भूख शांत हो जाए.
– कोल्ड ड्रिंक्स की बजाय ताज़ा फलों का जूस पीएं.
– ग्रीन टी भी अच्छा ऑप्शन है. यह काफ़ी हेल्दी होती है.
– बहुत अधिक मीठा न खाएं. इससे फैट्स बढ़ेगा.
– अपने खाने में या फिर एक बाउल दही में कुछ क्रश्ड बादाम मिलाकर खाएं. यह बहुत ही हेल्दी ऑप्शन है और इससे पेट भी भरा रहेगा.
– हर 4 घंटे में भूख लगती ही है, ऐसे में अपने डेस्क या ड्रॉअर में ऐसे हेल्दी स्नैक्स रखें, जिनमें 200 से कम कैलोरीज़ हों.
– मल्टीग्रेन बिस्किट्स या क्रैकर्स, पीनट बटर, नट्स, चना, स्प्राउट्स, फ्रूट्स आदि रखें.
– बेहतर होगा कि बादाम का पैकेट लाकर ड्रॉअर में रखें, जब कभी भूख लगे, तो इसे अलग-अलग तरह से खाने में मिलाकर खाएं.
– आप रोस्टेड आल्मंड भी खा सकती हैं. चिप्स और समोसे से यह ऑप्शन बेहतर है.
– फैट फ्री, माइक्रोवेव में भुने पॉपकॉर्न भी एक विकल्प है, क्योंकि यह अधिक समय तक पेट भरे होने का एहसास कराते हैं.
– ऑलिव्स भी बहुत हेल्दी होते हैं और गुणों से भरपूर भी.
– व्हाइट ब्रेड की बजाय ब्राउन ब्रेड लें. पीनट बटर के साथ या अन्य हेल्दी चीज़ों के साथ उसकी सैंडविच बनाकर खाएं.

यह भी पढ़ें: जानें घुटनों में दर्द के 10 कारण और आराम पाने के आसान उपाय

 

सही खाना ही नहीं, सही समय पर खाना भी है ज़रूरी (Healthy Eating: Are You Eating At The Right Time?)

Healthy Eating

अक्सर हम सोचते हैं कि हमें हेल्दी फूड (Healthy Food) खाना चाहिए और जब भी मौका मिलता है, तो हम हेल्दी फूड खाने से पीछे नहीं हटते, लेकिन उस व़क्त हम शायद ही यह सोचते हैं कि भले ही हम हेल्दी फूड खा रहे हैं, लेकिन क्या यह समय उसे खाने के लिए सही है? जी हां, स़िर्फ सही खाना ही नहीं, सही समय (Right Time) पर खाना भी उतना ही ज़रूरी है, वरना कितना भी हेल्दी फूड हो, उसका असर उल्टा भी पड़ सकता है.

Healthy Eating

दही (Curd)
गर्मी के मौसम में दही खाना बहुत फ़ायदेमंद होता है. ये पेट को ठंडा रखता है, लेकिन रात को दही नहीं खाना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार, रात में दही खाने से कफ़ के साथ ही पेट से जुड़ी अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय दही खाना बेस्ट है. दही को ग़लती से भी गरम करके खाने की भूल न करें.

दूध (Milk)
हड्डियों को मज़बूत बनाने के लिए दूध बहुत ज़रूरी है, मगर इसे कब पीना चाहिए, इसे लेकर हर किसी की राय अलग-अलग है. कुछ लोग सुबह नाश्ते के व़क्त दूध पीते हैं, तो कुछ रात को सोने के पहले. वैसे कभी भी सुबह खाली पेट दूध नहीं पीना चाहिए, इससे एसिडिटी की समस्या हो सकती है.
क्या है सही समय?
विशेषज्ञों के मुताबिक़, अगर सुबह में दूध का सेवन किया जाए, तो ये आपको पूरे दिन एनर्जेटिक रखता है, जबकि रात में दूध पीने से दिमाग़ शांत रहता है और नींद भी अच्छी आती है. आयुर्वेद में दूध पीने का सही समय रात में ही बताया गया है.

हर बीमारी का आयुर्वेदिक उपचार  उपाय जानने के लिए इंस्टॉल करे मेरी सहेली आयुर्वेदिक होम रेमेडीज़ ऐप

चावल (Rice)
आमतौर पर लोगों को लगता है कि चावल खाने से वज़न बढ़ता है, जबकि ये पूरा सच नहीं है. चावल में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर के लिए ज़रूरी है. हां, इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. कुछ लोगों को ये भी लगता है कि दोपहर में चावल खाना फिर भी ठीक है, मगर रात में नहीं खाना चाहिए, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होता.
क्या है सही समय?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, रात में ही चावल खाना चाहिए, मगर बहुत कम मात्रा में. इससे ये आसानी से पच भी जाता है और आपको रात को अच्छी नींद आती है, जबकि दोपहर में चावल अवॉइड करना चाहिए, क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है, जिससे काम के समय आपको नींद आने लगती है.

शक्कर
चाय या दूध में बहुत ज़्यादा शक्कर नहीं डालनी चाहिए, मगर इसका ये मतलब नहीं है कि आप शक्कर खाना पूरी तरह से बंद कर दें. थोड़ी शक्कर खानी भी ज़रूरी है.
क्या है सही समय?
शक्कर को दिन में खाना सही होता है, क्योंकि इंसुलिन शुगर को असरदार तरी़के से एब्जॉर्व कर लेता है और ये आसानी से पच जाती है, जबकि रात में शक्कर खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है और आपको ठीक से नींद नहीं आती, तो अगर रात को खाने के बाद आपको मीठा खाने की आदत है, तो इसे बदल लीजिए.

दाल और बींस (Pulses, Lentils, Legumes)
प्रोटीन से भरपूर दाल और बींस को भी डायट में शामिल करना ज़रूरी है, मगर इसे खाने का सही समय भी पता होना चाहिए. रात के समय दाल और बींस खाना ठीक नहीं होता, क्योंकि ये आसानी से डाइजेस्ट नहीं होते और फिर पेट में गैस बनने लगती है.
क्या है सही समय?
सुबह और दोपहर के समय इसे खाना अच्छा होता है, क्योंकि तब ये आसानी से पच जाते हैं और गैस की समस्या नहीं होती.

Healthy Eating

जानें इन फ्रूट्स (Fruits) को खाने का राइट टाइम

सभी तरह के फल सेहत के लिए अच्छे होते हैं, मगर इन्हें सही समय पर खाना चाहिए.

सेब (Apple)
विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर सेब में कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता. ये बहुत हेल्दी होता है, तभी तो कहते हैं, ङ्गएन एप्पल अ डे कीप्स द डॉक्टर अवेफ. मगर क्या आप जानते हैं कि बेहतर रिज़ल्ट के लिए सेब कब खाना चाहिए?
क्या है सही समय?
खाली पेट एप्पल खाने से बॉडी से सारे हानिकारक टॉक्सिन निकल जाते हैं. इससे एनर्जी मिलती है और वज़न भी नहीं बढ़ता.

ऑरेंज (Orange)
विटामिन सी से भरपूर संतरे में विटामिन ए, बी कॉम्प्लेक्स, फ्लेवोनॉयड, अमीनो एसिड, कैल्शियम, आयोडीन, फॉस्फोरस, सोडियम, मैगनीज़ आदि की भी भरपूर मात्रा होती है. रोज़ाना दो संतरा खाने से सर्दी, कोलेस्ट्रॉल, किडनी में स्टोन और कोलन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है.
क्या है सही समय?
संतरे को सुबह खाली पेट और रात में न खाएं. इसे हमेशा दोपहर के समय खाएं. खाना खाने के 1 घंटा पहले या बाद में संतरा खाना फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि खाना खाने से पहले खाने पर भूख बढ़ती है और बाद में खाने से डाइजेशन ठीक रहता है.

अंगूर (Grapes)
गर्मियों में अंगूर या अंगूर का जूस पीना बहुत फ़ायदेमंद होता है. इससे बॉडी को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है और शरीर में पानी की कमी भी नहीं होती. अंगूर विटामिन्स का बेस्ट स्रोत है.
क्या है सही समय?
सुबह खाली पेट अंगूर खाना बहुत लाभदायक होता है. इसके अलावा धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद ही अंगूर खाएं. अंगूर खाने के तुरंत बाद खाना न खाएं.

यह भी पढ़ें: कैसे करें अपने बच्चे की इम्युनिटी बूस्ट?

मौसंबी (Sweet Lime)
कैल्शियम, फास्फोरस आदि पोषक तत्वों से भरपूर मौसंबी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होती है. अक्सर पेशेंट को इसका जूस पीने की सलाह दी जाती है. गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मौसंबी का
जूस पीएं.
क्या है सही समय?
दोपहर के समय मौसंबी का सेवन करना लाभदायक होता है. धूप में जाने से कुछ देर पहले या धूप से आने के कुछ देर बाद मौसंबी खाना या उसका जूस पीना फ़ायदेमंद होता है.

केला (Banana)
विटामिन्स, मिनरल्स, पौटैशियम, ज़िंक, आयरन, कार्बोहाइड्रेट से भरपूर केला बेहतरीन फल है. इसे खाने से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है.
क्या है सही समय?
अगर आप एक्सरसाइज़ करते हैं, तो एक्सरसाइज़ के बाद केला खाएं, इससे तुरंत एनर्जी मिलती है. दोपहर में भी केला खा सकते हैं, क्योंकि इसे खाने के बाद देर तक पेट भरा होने का एहसास होता है. रात को सोने से पहले केला न खाएं, क्योंकि इससे सर्दी हो सकती है.

तरबूज़ (Watermelon)
इसे बेस्ट समर फ्रूट कहा जा सकता है. इसमें 92 प्रतिशत पानी होता है, जो गर्मियों में आपकी बॉडी में पानी की कमी नहीं होने देता. तरबूज़ खाने से इम्यून सिस्टम भी ठीक रहता है.
क्या है सही समय?
तरबूज़ दिन में कभी भी खा सकते हैं, मगर इसे खाने के बाद एक घंटे तक पानी न पीएं. तरबूज़ को बहुत देर तक काटकर न रखें.

Healthy Eating
इन्हें भी खाएं सही समय पर
  • अखरोट (Walnuts) को रात को सोते समय स्नैक के रूप में खाएं, इससे अच्छी नींद आएगी.
  • अंजीर (Fig) और खुबानी को सुबह खाने से शरीर का मेटाबॉलिज्म (Metabolism) बढ़ता है और पेट को गर्मी मिलती है. अतः इसे सुबह ही खाएं. रात में इन्हें खाने से गैस की समस्या हो सकती है.
  •  चीज़ (Cheese) भी सुबह खाएं, क्योंकि इसे डाइजेस्ट (Digest) होने में समय लगता है और इससे वज़न भी जल्दी बढ़ता है.
  •  कॉफी सुबह के समय पीएं. इससे एनर्जी मिलती है और नींद गायब हो जाती है. रात को कॉफी पीने की ग़लती न करें.

– कंचन सिंह

वेट लॉस टिप ऑफ द डे: 15 ईज़ी वेट लॉस टिप्स (Weight Loss Tip Of The Day: 15 Easy Weight Loss Tips)

 

एग्ज़ाम के समय बच्चों की डायट का रखें ख़्याल (Provide healthy food to children during exams)

Food During Exams

 

Food During Exams
एग्ज़ाम पीरियड में बच्चों को स्ट्रेस फ्री और हेल्दी रखने में डायट की भी अहम् भूमिका होती है. अतः उनके खाने-पीने का ख़ास ध्यान रखें.

* ब्रेकफास्ट में स्टार्च से भरपूर व मीठी चीज़ें, जैसे- हलवा और व्हाइट ब्रेड की जगह फाइबरयुक्त चीज़ें, जैसे- दलिया, पोहा, उपमा और होलवीट ब्रेड सैंडविच दें.

* रोज़ाना कम से कम 2 लीटर पानी पीना चाहिए.

* बच्चे के खाने में ताज़े फल व हरी पत्तेदार सब्ज़ियों की मात्रा ज़्यादा रखें.

* प्रोटीन भी बेहद ज़रूरी है. अतः खाने में दाल, स्प्राउट्स (अंकुरित मूंग, चना), सोया, दूध से बनी चीज़ें, सी फूड, लीन मीट, अंडा आदि शामिल करें.

* कोल्ड ड्रिंक, जंक फूड, फ्रायड स्नैक्स, एनर्जी ड्रिंक आदि से बच्चे को दूर रखें.

* ब्रेन पावर बढ़ाने के लिए आयरन से भरपूर चीज़ें, जैसे- रेड मीट, रागी, पालक आदि दें. साथ ही विटामिन बी युक्त होल ग्रेन (साबूत अनाज), अंकुरित गेहूं, अंडे, बादाम आदि भी उनकी डायट में शामिल करें. फिश और सोया भी बच्चों की ब्रेन पावर बढ़ाते हैं.

* एक ही बार ज़्यादा खाना देने की बजाय दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा करके खाना दें. इससे शरीर और मस्तिष्क दोनों को ज़रूरी पोषक तत्व मिलते रहेंगे.

* बादाम, अखरोट, कद्दू का बीज और तरबूज़ का बीज स्मरणशक्ति बढ़ाने के साथ ही कॉन्संट्रेशन में भी मदद करता है.

* रात को ज़्यादा देर तक पढ़ने के लिए बच्चे अक्सर चाय/कॉफी का सहारा लेते हैं, ये उनकी सेहत के लिए ठीक नहीं है. अतः उन्हें बहुत ज़्यादा चाय/कॉफी पीने से रोकें.

* थकान, चिंता और डिप्रेशन से बचने के लिए नींद पूरी होनी ज़रूरी है. अतः परीक्षा के दौरान इस बात का ख़ास ध्यान रखें कि आपका बच्चा पर्याप्त नींद ले, वरना वो रिलैक्स होकर एग्ज़ाम नहीं दे पाएगा.

– कंचन सिंह

 

बच्चों को दें ब्रेन डायट (Give Your Kids Brain Diet)

1

यूं तो पैरेंट्स बच्चों के खानपान का विशेष ख़्याल रखते हैं, लेकिन वे पढ़ाई में भी बेहतर करें, इसके लिए हेल्दी डायट के साथ-साथ ब्रेन फूड भी ज़रूरी है. इससे न केवल उनका एनर्जी लेवल बूस्ट होगा, बल्कि उनकी बौद्धिक क्षमता का भी विकास होगा. ब्रेन फूड, बच्चों को क्या खिलाएं, क्या न खिलाएं और खाने में किन चीज़ों की मात्रा बढ़ा दें, इसी विषय पर हमें अधिक जानकारी दी डायटीशियन मेघा चंदेल ने.

 

ब्रेन डायट में क्या है ज़रूरी?

हरी सब्ज़ियां- समस्त हरी सब्ज़ियों में आयरन होता है, जिससे याद्दाश्त तेज़ होती है और दिमाग़ को तेज़ करनेवाले
न्यूरोट्रांसमीटर्स का स्राव होता है. साथ ही इसमें पाए जानेवाले एंटीऑक्सीडेंट्स दिमाग़ को अनेक बीमारियों से मुक्त रखते हैं.
जामुनी फल- जामुन, काले अंगूर और शहतूत जैसे फल जिनका रंग काला, जामुनी या नीला होता है, में एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन और प्लांट कंपाउंड जैसे फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं, जो ब्रेन सेल्स को डैमेज करनेवाले ऑक्सीजन फ्री रैडिकल्स को कंट्रोल करते हैं.
ड्रायफ्रूट्स– विटामिन ई का प्रमुख स्रोत अखरोट, बादाम, काजू, अलसी, मगज, पीनट बटर, बादाम बटर और हेज़लनट सभी दिमाग़ को दुरुस्त रखते हैं. इसलिए इन्हें भरपूर मात्रा में बच्चों को दें.
बींस- शरीर के ग्लूकोज़ लेवल को कंट्रोल करती है. ऊर्जा के लिए दिमाग़ को नियमित रूप से ग्लूकोज़ चाहिए और चूंकि मस्तिष्क लंबे समय तक ग्लूकोज़ को स्टोर करके नहीं रख पाता, इसलिए वो नियमित ऊर्जा कम प्रदान कर पाता है. कोई भी हरी फली, दाल, राजमा, लोबिया सभी दिमाग़ के लिए फ़ायदेमंद होते हैं.
अनार- अनार के जूस में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स दिमाग़ को फ्री रैडिकल्स के प्रभाव से बचाते हैं.
गोभी- फूलगोभी, ब्रोकोली और पत्तागोभी एंटीऑक्सीडेंट्स और कई अन्य पोषक तत्वों से भरपूर हैं. ये तत्व दिमाग़ की क्षमताओं पर बुरा असर डालनेवाले विभिन्न टॉक्सिंस से दिमाग़ को सुरक्षित रखते हैं.
स्ट्रॉबेरी- वैज्ञानिकों के अनुसार स्ट्रॉबेरी, ब्लू बेरीज़ जैसे फलों में दिमाग़ को ऑक्सीडेंटिव स्ट्रेस से सुरक्षित रखने की क्षमता होती है. इन्हें खाने से दिमाग़ की क्षमता बढ़ती है.
सोया- एक शोध के अनुसार सोया में एस्ट्रोजेन अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जो दिमाग़ को तेज़ बनाते हैं, इसलिए बच्चे के खाने में सोया और टोफू से बने पदार्थ ज़रूर शामिल करें.
ओमेगा 3 फैटी एसिड- ओमेगा 3 न केवल नर्वस सिस्टम को सुचारु रखता है, बल्कि शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है. यह फैटी एसिड अलसी और अखरोट में पाया जाता है.
विटामिन बी- विटामिन बी दिमाग़ को ऑक्सीजन पहुंचाने और फ्री रैडिकल्स से बचाने का काम करता है. साथ ही विटामिन बी 12 दिमाग़ के सेल्स को स्वस्थ रखने का काम भी करता है.
रोज़मेरी- नॉर्थअंब्रिया यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक द्वारा किए गए एक टेस्ट के अनुसार रोज़मेरी ऑयल याद्दाश्त को दुरुस्त रखने का काम करता है, इसलिए बच्चे के सलाद में रोज़मेरी ऑयल डालें.

क्या दें खाने को?

इस समय बच्चों को तले-भुने और मिर्च-मसालेदार हैवी खाने की बजाय विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर हेल्दी डायट दें.
इस दौरान बच्चे का मूड बार-बार बदलता रहता है, इससे उन्हें बचाने के लिए थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ खाने को देते रहें. उन्हें मुनक्के, बादाम, ताज़े फल, मूंगफली, सूप, अखरोट, खजूर, अंजीर, गाजर, रोस्टेड पिस्ता, पॉपकॉर्न, कद्दू के बीज, भेल आदि भी खाने को दे सकती हैं.
हर एक घंटे में पेय पदार्थ दें, जिनमें अलग-अलग फ्लेवर के ग्लूकोज़, नींबू पानी, बादाम, एप्पल या चीकू शेक, गाजर या चुकंदर का जूस, छाछ, लस्सी, नारियल पानी आदि हो. इससे उनके शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और वे स्वयं को फ्रेश व एनर्जेटिक महसूस करेंगे.
भोजन को धीरे-धीरे चबाकर खाने को कहें, ताकि वह आसानी से पच सके. खाने को कभी भी गर्म करके बच्चे को न खिलाएं. हमेशा ताज़ा खाना ही दें, ताकि भोजन के समस्त पौष्टिक तत्व उसे प्राप्त हो सकें.
तरबूज़, खरबूजा, संतरा, स्ट्रॉबेरी, मोसंबी, पालक, पत्तागोभी, ब्रोकोली आदि फल और सब्ज़ियों का सलाद दें.
बच्चों को ठंडा रायता, जिसमें सब्ज़ियां और फल हों, दें. इससे उन्हें कैल्शियम, विटामिन्स और पानी एक साथ मिल जाएंगे.
इडली, डोसा, खमन जैसे प्रोबायोटिक फूड भी आप बच्चों को दे सकती हैं.
कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीनयुक्त भोजन दें, जिसमें दाल, अनाज, मेवे, सोया, टोफू, अंडा, अंकुरित अनाज, दूध और दूध से बने पदार्थ, ताज़े फल, हरी सब्ज़ियां आदि शामिल हों.

क्या न दें?

पिज़्ज़ा, हॉट डॉग, सॉफ्ट ड्रिंक्स, सैंडविच, कुकीज़, केक, मफिन्स आदि मैदे से बने खाद्य पदार्थ न दें, क्योंकि ये जल्दी पचते नहीं और आप आलस भी महसूस करते हैं.
चॉकलेट, कैंडी, आलू, सूरन और अरबी तथा बहुत अधिक तले पदार्थ न खिलाएं, ये शरीर को शिथिल बनाते हैं, जिससे बच्चों का मन पढ़ाई या किसी काम में नहीं लगता.
संतुलित मात्रा में कैफीन का सेवन दिमाग़ को तेज़ करता है और याद्दाश्त बढ़ाता है, लेकिन इसकी अधिकता नुक़सानदायक होती है, इसलिए प्रतिदिन एक कप से अधिक कॉफी न दें.
बाहर का खाना बिल्कुल भी न खाने दें, क्योंकि इस दौरान उनका स्ट्रेस लेवल हाई और इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है, जिससे इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है.

– प्रतिभा अग्निहोत्री

यह भी पढ़े: चाइल्ड केयर- बच्चों की खांसी के घरेलू उपाय

यह भी पढ़े: बच्चे को डांटें नहीं हो जाएगा बीमार