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मॉनसून में कैसे रखें सेहत का ख़्याल? (Monsoon Health Care)

 

Monsoon Health Care
मॉनसून में कैसे रखें सेहत का ख़्याल? (Monsoon Health Care)

गर्मी की तपिश से राहत दिलानेवाली बारिश की फुहारें अपने साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम्स भी लेकर आती हैं. सर्दी-ज़ुकाम जैसी आम समस्याओं के अलावा टायफॉइड, हैजा, मलेरिया जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां भी इसी मौसम की देन हैं, लेकिन सही खानपान और कुछ हेल्दी आदतें अपनाकर आप बरसात में होनेवाली बीमारियों से बच सकते हैं.

मॉनसून हेल्थ प्रॉब्लम्स

बारिश का मौसम अपने साथ कई आम व गंभीर बीमारियां भी लेकर आता है, इसलिए ज़रूरी है कि हम पहले से ही उसके लिए सावधान रहें. एटलांटा हॉस्पिटल के जनरल फिजिशियन डॉ. फतेह सिंह ने बरसाती बीमारियों से बचाव के बारे में हमें जानकारी दी.

डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया 

जहां डेंगू में तेज़ बुख़ार, बहुत ज़्यादा सिरदर्द और जोड़ों में दर्द होता है, वहीं बुख़ार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द और कमज़ोरी आना मलेरिया के लक्षण हैं. चिकनगुनिया के भी लक्षण लगभग यही हैं.

बचाव

–    इससे बचाव का सबसे आसान तरीक़ा यही है कि घर के आसपास कहीं भी पानी का जमाव न होने दें, ताकि मच्छरों को पनपने के लिए जगह न मिले.

–    घर में कबाड़ जमा करके न रखें. जितना हो सके, घर साफ़ रखें.

–    बारिश से पहले घर में पेस्ट कंट्रोल ज़रूर करवाएं.

हैजा

बारिश के मौसम में फैलनेवाली यह एक गंभीर व जानलेवा बीमारी है, जो दूषित भोजन या पानी के कारण होती है. गंदगी और हाइजीन की कमी इस बीमारी को बढ़ावा देती है. उल्टी और पतली दस्त इस बीमारी के शुरुआती लक्षण हैं.

बचाव

–    सबसे ज़रूरी है कि आप हैजे का टीका लगवाएं, इससे 6 महीनों तक आप सुरक्षित रहेंगे.

–   हाथ धोने के लिए लिक्विड हैंड सोप का ही इस्तेमाल करें.

–   साफ़ और शुद्ध पानी के लिए प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें अथवा पानी उबालकर पीना सबसे बेहतरीन उपाय है.

–    दूध व दूध से बनी चीज़ें, जैसे- आइस्क्रीम, मलाई वगैरह ज़्यादा न खाएं.

–    स्ट्रीट फूड से दूर रहें.

टायफॉइड

बारिश के दौरान होनेवाली यह एक आम बीमारी है. यह भी दूषित पानी व खाने के कारण ही होती है. इसमें सबसे ख़तरनाक बात यह है कि ठीक होने के बावजूद इसका इंफेक्शन मरीज़ के गॉल ब्लैडर में रह जाता है. बुख़ार, पेटदर्द और सिरदर्द इसके लक्षण हैं.

Monsoon Health Tips

बचाव

यह एक संक्रामक बीमारी है, जो बहुत तेज़ी से फैलती है, इसलिए मरीज़ को अलग कमरे में दूसरों से थोड़ा दूर रखें.

–    उबला व साफ़ पानी ही पीएं.

–    डिहाइड्रेशन से बचने के लिए मरीज़ को लगातार लिक्विड डायट लेते रहना चाहिए.

–    खाना खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह ज़रूर धोएं.

–    होमियोपैथिक ट्रीटमेंट ज़्यादा मददगार होती है.

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डायरिया/ पेट के इंफेक्शन्स

इस मौसम में पेट की बीमारियां, जैसे- डायरिया और गैस्ट्रो सबसे ज़्यादा लोगों को परेशान करती हैं, जो वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण हो सकती हैं. पेट के ज़्यादातर इंफेक्शन्स में उल्टी और दस्त होते हैं, जिसके लिए तुरंत डॉक्टर से मिलना बहुत ज़रूरी है.

बचाव

–    खानपान के साथ-साथ पर्सनल हाइजीन का  भी ख़ास ख़्याल रखें. टॉयलेट के बाद और डायपर बदलने पर हैंडवॉश से हाथ ज़रूर धोएं.

–    बर्तनों और कटिंग बोर्ड को अच्छी तरह साफ़ रखें.

–    ऐसे फल और सब्ज़ियां खाएं, जिनके छिलके निकाल सकते हैं.

–   अगर ट्रैवेल करनेवाले हैं, तो हेपेटाइटिस ए का टीका ज़रूर लगवाएं.

पीलिया

मॉनसून के दौरान लिवर में वायरल इंफेक्शन काफ़ी आम बात है. हेपेटाइटिस के वायरस पानी के ज़रिए तेज़ी से फैलते हैं. यह इंफेक्शन गंभीर हो सकता है, क्योंकि हेपेटाइटिस का कारण पीलिया होता है, जिससे आंखें और यूरिन आदि पीले पड़ जाते हैं.

बचाव

–    हेपेटाइटिस ए और बी का वैक्सीन लें.

–    दूषित खाने और पानी से बचें.

–    हाइजीन का ख़ास ख़्याल रखें.

हेल्थ अलर्ट्स

–    अगर तीन दिन से बुख़ार आ रहा है, तो ख़ुद से दवा खाने की बजाय डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि यह कोई गंभीर बुख़ार भी हो सकता है.

–   शरीर पर किसी भी तरह के रैशेज़ या फोड़े-फुंसी नज़र आएं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, यह कोई इंफेक्शन भी हो सकता है.

–    अगर आपको अस्थमा या कोई और ब्रीदिंग प्रॉब्लम है, तो ध्यान रखें कि सीलनवाली दीवार से चिपककर न बैठें. घर की दीवारें गीली न रखें, वरना फंगस के कारण आपको तकलीफ़ हो सकती है.

–    अस्थमा और डायबिटीज़ के मरीज़ ज़्यादा तीखा और मसालेदार खाना न खाएं, वरना उन्हें हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं.

–   डायबिटीज़ के मरीज़ नंगे पांव गीली ज़मीन पर न चलें, वरना जर्म्स और बैक्टीरिया से आपको इंफेक्शन हो सकता है.

मॉनसून डायट

मॉनसून में हमारी पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो जाती है और शारीरिक क्षमता पर भी इसका असर पड़ता है. इस मौसम में खाना ठीक तरी़के से पचता नहीं, जिससे एसिडिटी और गैस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में आपको खानपान का ख़ास ध्यान रखना चाहिए.

–    बारिश में उबालकर छाना हुआ पानी ही पीएं, वरना दूषित पानी के कारण बीमार पड़ सकते हैं.

–    मॉनसून में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां खाने से बचें, क्योंकि बारिश में उनमें कीड़े लगने लगते हैं, जो आपके खाने के साथ पेट में जा सकते हैं.

–    मसालेदार और तले हुए खाने से अपच, उबकाई आना, वॉटर रिटेंशन आदि की समस्या हो सकती है.

–    रोज़ाना गर्म दाल या सूप ज़रूर पीएं. उसमें हल्दी, लौंग, कालीमिर्च और सौंफ ज़रूर डालें. यह इंफेक्शन से लड़ने में आपकी मदद करेगा.

–    खाने के बाद सौंफ का पानी पीने से गैस और एसिडिटी की समस्या नहीं होती. घर के सभी सदस्यों को खाने के बाद ये पानी दें.

–    उबला व अच्छी तरह पका हुआ खाना मॉनसून में आपकी सेहत की देखभाल करेगा.

–   एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर हर्बल टी और ग्रीन टी इस मौसम में काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होती हैं. इसे डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    गाय का दूध पीएं. यह हल्का व सुपाच्य होता है, जिससे आपको इंस्टेंट एनर्जी मिलती है.

–    खाने में गेहूं के आटे और मैदा की जगह जौ और चने के आटे का इस्तेमाल करें.

–    रोज़ाना अरहर की दाल की बजाय मूंगदाल का इस्तेमाल करें.

–    फ्रेश फ्रूट्स में आप सेब, अनार, मोसंबी और केला खाएं. ड्रायफ्रूट्स को अपने डेली डायट का हिस्सा बनाएं.

–    इस मौसम में जितना हो सके, प्रोसेस्ड फूड अवॉइड करें.

–   नॉन वेज के शौक़ीन बरसात में इसका सेवन कम कर दें.

–    अगर आप दही खाना पसंद करते हैं, तो ज़रूर खाएं, पर उसमें नमक या शक्कर मिला लें.

–    इस मौसम में गाय का घी खाना काफ़ी फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि वो न स़िर्फ आपकी पाचन क्रिया  को दुरुस्त रखता है, बल्कि रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर आपकी याद्दाश्त को बेहतर बनाता है.

–   कच्ची सब्ज़ियां और सलाद खाने से बचें. अगर घर पर खा रहे हैं, तो सब्ज़ियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें.

हेल्दी लाइफस्टाइल

–   बहुत ज़्यादा भीड़भाड़वाली जगह पर जाना अवॉइड करें, क्योंकि वहां वायरल इंफेक्शन होने की संभावना ज़्यादा रहती है.

–    फुल स्लीव शर्ट और फुल पैंट पहनें, ताकि मच्छर काट न सकें.

–    जिन्हें एलर्जी और इंफेक्शन्स की समस्या है, वो नीम की पत्तियों को उबालकर उसे नहाने के पानी में मिलाकर नहाएं.

–    एक्सरसाइज़ इस मौसम में भी उतनी ही ज़रूरी है, जितनी हर मौसम में.

–    हो सके तो शाम को घर पहुंचने पर नहाएं.

अपनाएं ये होम रेमेडीज़

–    सर्दी-खांसी से राहत के लिए एक कप पानी में सोंठ पाउडर उबालकर पीएं, राहत मिलेगी.

–    गले में ख़राश या दर्द है, तो गुनगुने पानी में नमक और हल्दी मिलाकर गरारे करें.

–    सर्दी से नाक बंद हो गई हो, तो गर्म पानी में नीलगिरी तेल कीकुछ बूंदें डालकर भाप लें या फिर रुमाल में उसकी कुछ बूंदें छिड़ककर सूंघें.

–    अगर वायरल फीवर है, तो एक कप पानी में तुलसी और अदरक मिलाकर उबाल लें. आंच से उतारकर शहद मिलाएं और चाय की तरह पीएं.

–    अपच व बदहज़मी से बचने के लिए हर बार खाने से पहले अदरक के एक छोटे से टुकड़े पर सेंधा नमक लगाकर खाएं.

–    रोज़ाना हल्दीवाला दूध न स़िर्फ आपको दूषित पानी के कारण होनेवाली बीमारियों से बचाएगा, बल्कि आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाएगा.

– सुनीता सिंह

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क्या आप भी करते हैं दूसरों की बुराई? (How To Avoid Gossiping)

How To Avoid Gossiping

“बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत कहो” गांधीजी के ये वाक्य भले ही हमने रट लिए हों, लेकिन उन्हें जीवन में उतारने की कोशिश हमने आज तक नहीं की. तो क्यों न अब इस ओर एक प्रयास किया जाए?

How To Avoid Gossiping

क्योंकि निंदा करना बुरी बात है
कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो हमें बचपन से सिखाई जाती हैं, जैसे- झूठ बोलना पाप है, चोरी करना गलत बात है आदि. इसी तरह निंदा करना बुरी बात है यह वाक्य भी कई बार हम अपने बड़े-बूढ़ों के मुंह से सुन चुके हैं, लेकिन आश्‍चर्य इस बात का है कि आज भी हमारी सुबह और शाम पड़ोसी, रिश्तेदार व सखी-सहेली से जुड़ी निंदक बातों से शुरू और खत्म होती है. जब कि हम सब इस बात से भलीभांति अवगत हैं कि निंदा करना बुरी बात है.

निंदा करना और सुनना दोनों ही पाप है
कहते हैं, अन्याय करनेवाले और सहनेवाले दोनों ही बराबर के दोषी होते हैं. ठीक उसी तरह हिंदू वेद-पुराण के अनुसार परनिंदा करनेवाले और सुननेवाले दोनों ही पाप के समान भागीदार होते हैं. अतः अगर धार्मिक किताबों में आपकी निष्ठा है, तो अब से न ही दूसरों की निंदा करें और न ही किसी की निंदक बातों में दिलचस्पी लें.

परनिंदा से बेहतर है संतगुणों की प्रसंशा
काहू कि नहिं निन्दिये, चाहै जैसा होय।
फिर फिर ताको बन्दिये, साधु लच्छ है सोय॥
संत कबीर दासजी कहते हैं कि भले ही कोई व्यक्ति कितना भी बुरा हो, परंतु उसकी निंदा न करें, क्योंकि इससे स़िर्फ समय की बर्बादी होती है और कुछ नहीं, इसलिए अच्छा यह होगा कि आप अपना समय उन लोगों की प्रशंसा में व्यतीत करें, जो स्वभाव से सरल हों, जिनके भीतर साधू के लक्षण विद्यमान हों अथवा जो सतगुणों की खान हों.

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परनिंदा से केवल समय की बर्बादी होती है
यह बात सौ आने सच है कि परनिंदा से केवल समय की बर्बादी होती है और कुछ नहीं, क्योंकि आप जिस व्यक्ति की निंदा करते हैं, उसे इस बात की ख़बर तक नहीं होती कि आप उसके बारे में यूं भला-बुरा कह रहे हैं, नतीजतन वह व्यक्ति तो अपने काम में मस्त रहता है, परंतु उस वक्त उसकी निंदा करने के चक्कर में आपके काम पर अल्पविराम लग जाता है, इसलिए अब से अपना बेशक़ीमती समय दूसरों की निंदा में बर्बाद करने की बजाय अपने काम में मन लगाएं.

परनिंदा से पहले करें स्वयं का परीक्षण
जब हम दूसरों की तरफ एक उंगुली दिखाते हैं, तब हम ये भूल जाते हैं कि बाकी बची चार उंगुलियां हमारी ओर इशारा करती हैं. अर्थात जब हम फलाना व्यक्ति को एक उंगली से परिभाषित करते हैं, तो उस वक्त हमारी चार उंगलियां हमें परिभाषित कर रही होती हैं. इसका मतलब आप उस व्यक्ति से ज़्यादा अवगुणी हैं. अतः किसी और पर दोषारोपण करने से पहले अपने गुण-दोष का परिक्षण करें और ख़ुद से पूछें कि क्या आप दूसरों की निंदा करने के लायक हैं? और उत्तर मिलने के बाद ही किसी की निंदा करें या सुनें.

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष: हेल्दी रहने के लिए अपनाएं यौगिक लाइफस्टाइल (International Yoga Day: Follow Yogic Lifestyle For Healthy life)

International Yoga Day

स्वस्थ व सेहतमंद बने रहने के लिए सुबह से शाम तक आपकी जीवनशैली भी बहुत मायने रखती है. सुबह से लेकर शाम तक की सभी गतिविधियां अगर योग के अनुसार हों, तो आप हमेशा चुस्त-दुरुस्त और तंदुरुस्त रहेंगे.

International Yoga Day
सुबह की सही शुरुआत

– योग के अनुसार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना लाभदायक होता है, लेकिन अगर आप 5.30 बजे तक भी उठें, तो ठीक रहेगा.
– उठने के बाद 2 ग्लास पानी पीएं. पानी रात को तांबे के बर्तन में भरकर रख दें और सुबह उठकर पीएं. पानी खड़े होकर नहीं पीना चाहिए. बैठकर पीएं, उकड़ू बैठकर पीना और भी फ़ायदेमंद होता है. वज़न ज़्यादा है, तो गर्म पानी पीएं.
– पानी पीकर फ्रेश हो जाएं और एक घंटे तक योग व प्राणायाम करें. चाहें तो, मॉर्निंग वॉक पर भी जा सकते हैं.
– नहा-धोकर तैयार हो जाएं. ईश्‍वर का ध्यान करें और अपने सफल दिन की सही शुरुआत के लिए प्रार्थना करें.
– 7.30-8 बजे तक नाश्ता करें. नाश्ते में फल, पोहा, उपमा, दलिया, ओट्स, दूध जैसी पौष्टिक चीज़ों को शामिल करें.
– उसके बाद दिनभर के कामों की लिस्ट बना लें. जैसे-जैसे आपके काम ख़त्म होते जाएं, उन्हें टिक कर दें और बचे हुए कामों को अगले दिन की लिस्ट में शामिल कर लें.

दोपहर को दुरुस्त बनाएं

– अगर आप ऑफिस में काम करते हैं, तो लंच टाइम में खाना खाएं और खाने में सलाद ज़रूर शामिल करें.
– खाने को ख़ूब चबा-चबाकर खाएं और खाने के आधे घंटे बाद ही पानी पीएं. खाते समय भी पानी नहीं पीना चाहिए.
– ऑफिस में दो घंटे से ज़्यादा लगातार सीट पर न बैठें. ऑफिस के छोटे-छोटे काम, मसलन- पानी की बॉटल भरकर लाना, चाय-कॉफी लेना, प्रिंटर से प्रिंटआउट लाना आदि ख़ुद ही करें.
– खाने के बाद अगर आपके पास फ्री टाइम है, तो थोड़ी देर टहलें.
– घर पर हैं, तो बाकी काम निपटाकर थोड़ा रिलैक्स हो जाएं. खाना खाकर अपनी पसंद का कुछ काम कर सकते हैं. काम ख़त्म कर रात – खाने की तैयारी कर लें.

शाम हो सुकूनभरी

– ऑफिस में हैं, तो 4 बजे के क़रीब सीट पर बैठे-बैठे बॉडी स्ट्रेचिंग करें. इससे आप रिलैक्स और फ्रेश महसूस करेंगे.
– शाम की भूख मिटाने के लिए भुने हुए चने, मूंगफली, कुरमुरा, भेल, फल, चाय-बिस्किट आदि लें. पकौड़े और वड़े-समोसे से दूर रहें.
– दिनभर में कम से कम 10-12 गिलास पानी पीएं.
– ऑफिस से लौटकर थोड़ी देर रिलैक्स करें.
– 7 बजे थोड़ा ध्यान करना आपके लिए फ़ायदेमंद साबित होगा. 20 मिनट तक ध्यान करें. दिनभर की सारी थकान, तनाव और निगेटिविटी दूर हो जाएगी.

ताकि न हो रतजगा

– रात 8 बजे तक खाना खा लें. रात का भोजन बहुत हल्का होना चाहिए.
– रात का भोजन टीवी देखते हुए या बातचीच करते हुए न लें. खाना खाते व़क्त बातें न करें, स़िर्फ खाने पर ध्यान दें, इससे खाना जल्दी व अच्छी तरह पचता है. ओवरईटिंग से बचें.
– रात के खाने और सोने के बीच कम से कम 2 घंटे का अंतर ज़रूर होना चाहिए और खाने के थोड़ी देर बाद 15 मिनट तक हल्की वॉक करनी चाहिए.
– खाने के बाद ज़रूरी काम निपटा लें. सोने में जब तक समय है, तब तक आप बच्चों के होमवर्क देख सकते हैं, उनके साथ खेल सकते हैं या फिर गप्पे मार सकते हैं.
– अपने लिए थोड़ा समय निकालकर म्यूज़िक सुनें या कोई अच्छी क़िताब पढ़ें.
– रात 10 से 10.30 बजे तक सो जाएं. सोने से पहले पूरे दिन का विश्‍लेषण कर लें. अगर कोई काम अधूरा रह गया हो, तो उसे अगले दिन की लिस्ट में शामिल कर लें.
– रोज़ाना 6-8 घंटे सोएं. ऐसा कहा जाता है कि रात 10 बजे से 2 बजे तक का समय नींद के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. इन चार घंटों की नींद बाकी समय के आठ घंटों के बराबर है. ऐसे में देर से सोने का मतलब है नींद की क्वॉलिटी के साथ समझौता करना. और हां, दिन में सोने से बचें.

 

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– सत्येंद्र सिंह

बेहतर और हेल्दी जीवन के लिए 50 + टिप्स(50+ tips for healthy life)

tips for healthy life

जीवन में सबसे मुश्किल काम है सरल, संतुलित बने रहना, लेकिन यह नामुमकिन नहीं है. यदि चंद छोटी-छोटी बातों को आप अपनी दिनचर्या और जीवन का हिस्सा बनाकर अपनी आदत में शुमार कर लेंगे, तो ज़िंदगी न स़िर्फ बेहतर लगेगी, बल्कि हेल्दी भी बनेगी. यहां हम ऐसे ही टिप्स दे रहे हैं, जो आपके जीवन को बनाएंगे और भी बेहतर. health

tips for healthy life

1. कोशिश करें कि आप और आपकी सभी चीज़ें हमेशा व्यवस्थित रहें. बहुत-से लोग ख़ुद भी अस्त-व्यस्त रहते हैं और अपना घर, ऑफिस का डेस्क भी अस्त-व्यस्त ही रखते हैं, जिससे न स़िर्फ वे ख़ुद भी परेशान रहते हैं, बल्कि लोगों पर उनका प्रभाव भी अच्छा
नहीं पड़ता.

2. अपनी सोच और अप्रोच हमेशा सकारात्मक और प्रगतिशील रखें. नकारात्मक सोचनेवालों के साथ ज़्यादा बातचीत न करें.

3. रात को जल्दी सोने की आदत डालें और सुबह भी जल्दी उठें.

4. हल्का व्यायाम ज़रूर करें और हेल्दी नाश्ता करें.

5. ऑफिस को कभी भी घर पर न लेकर आएं. वहां का प्रेशर, वहां के तनाव वहीं छोड़कर आएं. अपने परिवार के साथ एन्जॉय करें.

6. रोज़ाना अपनी टू डू लिस्ट अपडेट करें यानी दिनभर में आपको जो भी काम करना हो, उसकी लिस्ट बनाएं.

7.खाना हमेशा आराम से चबा-चबाकर खाएं, यह आपकी सेहत और पाचन शक्ति के लिए अच्छा होगा.

8. रीडिंग हैबिट डेवलप करें यानी रोज़ाना कोई अच्छी क़िताब, अच्छा साहित्य ज़रूर पढ़ें. यह न स़िर्फ आपका ज्ञान बढ़ाएगा, बल्कि आपको सकारात्मक बनाकर रचनात्मकता भी बढ़ाएगा.

9. अख़बार ज़रूर पढ़ें या फिर न्यूज़ देखें, ताकि आपकी जानकारी अपडेट रहे.

10. बैठते वक़्त ध्यान रखें कि पैरों को क्रॉस करके न बैठें, इससे रक्त संचार में रुकावट पैदा होती है, जिससे पीठ दर्द, कमर दर्द के अलावा वेरिकोज़ वेन्स और स्पाइडर वेन्स की समस्या भी होती है.

11. बेहतर होगा आप घुटनों की बजाय एंकल से क्रॉस करके बैठें.

12. बहुत ज़्यादा हाई हील्स न पहनें. 2 इंच से ज़्यादा हील्स पहनने से सेहत को नुक़सान हो सकता है.

13. लगातार कंप्यूटर पर काम न करें, इससे आंखों, कंधों और गर्दन पर प्रभाव पड़ता है. बीच-बीच में ब्रेक लें. कुछ सेकंड तक आंखें बंद करें और गर्दन व कंधों को भी घुमाकर रिलैक्स करें.

14. हमेशा अपने मोबाइल पर ही न बिज़ी रहें. जब परिवार के साथ हों या वॉक वगैरह पर जाएं, तो बेहतर होगा कि मोबाइल स्विच ऑफ कर दें.

15. हाइजीन का ख़्याल रखें. ओरल से लेकर पर्सनल हाइजीन न स़िर्फ आपकी पर्सनैलिटी के लिए, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ज़रूरी है.

16. खाना खाने से पहले और खाना बनाने से पहले भी साबुन से हाथ ज़रूर धोएं.

17. खांसते व छींकते वक़्त हाथ या रुमाल ज़रूर रखें.

18. सोने से पहले ब्रश करना न भूलें.

19. घर में वेंटिलेशन अच्छा होना चाहिए. दिन के समय खिड़कियां खुली रखें, ताकि ताज़ी हवा और भरपूर रोशनी रहे. एसी का प्रयोग ज़रूरत पड़ने पर ही करें और समय-समय पर क्लीन भी करवाते रहें.

20. हर बात पर टोकना या दूसरे की ग़लतियां निकालना बंद कर दें. इससे आपका चिड़चिड़ापन बढ़ेगा और लोग आपको एक नेगेटिव इंसान समझेंगे.

21. छुट्टी के दिन दिनभर आलस में पड़े न रहें और न ही टीवी या कंप्यूटर के साथ चिपके रहें.
फैमिली के साथ वक़्त बिताएं. कहीं घूमने जाएं. बातचीत करें. बच्चों को समय दें.

22. मैसेज करते समय अक्सर लोग गर्दन झुकाकर फोन पर मैसेज पढ़ते या टाइप करते हैं, लेकिन यह तरीक़ा ग़लत है. इससे गर्दन पर ज़ोर पड़ता है और दर्द हो सकता है.

23. जंक फूड कम खाएं. यह न स़िर्फ मोटापा बढ़ाता है, बल्कि इसमें कैंसर उत्पन्न करनेवाले तत्व भी होते हैं.

24. अक्सर लोग कान साफ़ करने के लिए अपनी हेयर पिन, पेन या पेंसिल का इस्तेमाल करते हैं, जबकि यह ख़तरनाक हो सकता है. सबसे सुरक्षित तरीक़ा है कि छोटी उंगली पर टॉवल लपेटकर कान को साफ़ करें या फिर ईयर ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें.

25. अपना वज़न नियंत्रण में रखने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं. अगर आप मोटापे के शिकार हैं, तो उससे जुड़े रिस्क फैक्टर्स पर ध्यान दें, जैसे- उच्च रक्तचाप, डायबिटीज़, स्ट्रोक या हार्ट डिसीज़.

26. हर व्यक्ति की ज़रूरत और बॉडी क्लॉक अलग होता है, उसी के अनुसार डायट और एक्सरसाइज़ प्लान करें. अपना हफ़्तेभर का डायट प्लान करके चार्ट बना लें.

27. अपने डायट से सैचुरेटेड ़फैट्स और ट्रान्स ़फैट्स की मात्रा कम करें. रेड मीट, डेयरी प्रोडक्ट्स, फ्राइड व बेक्ड फूड, कैंडीज़ और प्रोसेस्ड फूड में कमी कर दें.

28. अलग-अलग प्रोटीन्स लें. ये आपको बीन्स, नट्स, सीड्स, टोफू, सोया प्रोडक्ट्स में मिलेंगे. कैल्शियम युक्त पदार्थ भी ज़रूर लें, जैसे- दूध, छाछ और दही. इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्ज़ियां भी कैल्शियम की अच्छी स्रोत हैं.

29. ओवर ईटिंग से बचें. हमेशा भूख से थोड़ा कम ही खाएं. अक्सर अपना मनपसंद खाना देखते ही हम ज़्यादा खा लेते हैं, लेकिन ऐसा न करें.

30. बहुत ज़्यादा पेन किलर्स न खाएं. अक्सर हम सिरदर्द या बदनदर्द होते ही कोई भी पेनकिलर खा लेते हैं, जो नुक़सानदायक हो सकती है. बेहतर होगा कोई घरेलू नुस्ख़ा आज़माएं या फिर डॉक्टर की सलाह लें.

31. वीकेंड्स पर मसाज करवाएं. इससे थकान भी मिटेगी और रक्त संचार भी बेहतर होगा.

32. छुट्टियां प्लान करें और आउट स्टेशन जाएं, क्योंकि हवा-पानी बदलने से न स़िर्फ आप रिफ्रेश हो जाते हो, बल्कि पेट संबंधी रोग भी कम होते हैं.

33. नियमित रूप से हेल्थ चेकअप भी करवाते रहें. कई बार डायबिटीज़ या उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का सालों तक पता नहीं
चल पाता.

34. रात को आंखों में गुलाबजल डालें या फिर रुई के फाहों को गुलाबजल में भिगोकर आंखों पर रखें. इससे आंखों की थकान मिट जाती है.

35. सबको एक साथ ख़ुश रखना नामुमकिन है. अगर आपको लगता है कि आपकी लाख कोशिशों के बावजूद कुछ लोग आपको नापसंद करते हैं, तो यह उनकी समस्या है. ख़ुद को इसके लिए दोष न दें और ख़ुश रहना सीखें. यह बात अच्छी तरह से समझ लें कि एक साथ सबको ख़ुश नहीं रखा जा सकता.
36. जो चीज़ें आपके नियंत्रण से बाहर हों, उनके लिए तनाव लेना बेव़कूफ़ी है, जैसे- आप समय से घर से निकलें, लेकिन ट्रेन या बस लेट है या ट्रैफिक बहुत ज़्यादा है, तेज़ बारिश या अन्य किसी वजह से देरी हो गई, तो तनाव न लें, क्योंकि यह आपके बस की बात ही नहीं है और इसमें आपका कुसूर भी नहीं है.

37. कभी भी किसी दूसरे की तरक़्क़ी या ख़ुशी देखकर हीनभावना न पालें. दुनिया में ऐसे बहुत-से लोग होंगे ही जिनके पास आपसे ज़्यादा क़ामयाबी और पैसा होगा. आप अपना काम मेहनत से कर रहे हैं इसकी तसल्ली रखिए.

38. ज़िंदगी के हर पल को पूरी तरह से जी लेने का जज़्बा पैदा करें. हमेशा ज़िंदगी से शिकायत करते रहने से हालात बदलेंगे नहीं, बल्कि आपके दुख ही बढ़ेंगे. ऐसे में ज़िंदगी में जो अच्छे पल आपके पास हैं, वो भी आप से छिन जाएंगे. बेहतर होगा, उन्हें एंजॉय करें.

39. ड्रामैटिक होकर सहानुभूति बटोरने की आदत है, तो फौरन उसे सुधारने पर ध्यान दें. बहुत-से लोग अपनी निजी ज़िंदगी, अपनी बीमारी और घरेलू समस्याओं को सबके सामने बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं और सोचते हैं, इससे लोगों की सहानुभूति उन्हें मिलेगी. जबकि पीठ पीछे यही लोग उनकी इस आदत का मज़ाक बनाते हैं, क्योंकि ये समस्याएं तो सभी की हैं, लेकिन हर कोई इन्हें अटेंशन पाने का ज़रिया नहीं बनाता.

40. लोगों के बारे में एक ही धारणा कायम न कर लें. न ही सबको एक ही तराज़ू में तौलें. हर परिस्थिति अलग होती है और अलग-अलग परिस्थिति में लोग अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं. मन में एक ही बात बैठाकर उसी नज़रिए को सही न मानें.

41. हर बात को दिल से न लगा लें और न ही पर्सनली लें. मज़ाक सहना भी सीखें वरना आप एक नकारात्मक इंसान के रूप में जाने जाएंगे और लोग आपसे दूर रहने में ही अपनी भलाई समझेंगे.

42.  बीती बातों से ही चिपके न रहें. हमेशा आगे की सोचें.

43. झूठ बोलने से बचें. कई लोग अपनी झूठी प्रशंसा करते हैं या फिर रिश्तों में भी झूठ बोलते हैं, जिससे आगे चलकर आपके रिश्ते बिगड़ सकते हैं और साथ ही आपके बारे में लोगों की राय भी बदल सकती है. कोई भी आप पर भरोसा नहीं करेगा.

44. इस बात को भी स्वीकारें कि आप परफेक्ट नहीं हैं और आपसे भी ग़लतियां हो सकती हैं. अपनी ग़लती मानें और सॉरी कहना भी सीखें.

45. रोज़ाना ख़ुद को बेहतर बनाने का प्रयास करें. हर किसी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है. दूसरों से और अपनी ग़लतियों से भी सीखें तथा ख़ुद को और बेहतर इंसान बनाने की दिशा में प्रयास करें.

46. अपने गुणों और हॉबीज़ पर ध्यान दें. अपनी पॉज़ीटिव बातों को लोगों के सामने लाएं.

47. दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहें. इससे आपका आत्मविश्‍वास भी बढ़ेगा और मन में संतोष भी रहेगा.

48. ख़ुद को पैंपर करना भी कभी-कभी बहुत अच्छा होता है. अपने लिए वक़्त निकालें. छुट्टी लेकर पूरा दिन अपने हिसाब से बिताएं. घूमने जाएं, शॉपिंग करें या मूवी देखें. इससे आप तरोताज़ा हो जाएंगे.

49. ज़िंदगी में सभी को सब कुछ नहीं मिलता. जो नहीं मिला उसकी आस में रोने की बजाय जो मिला है उसकी कद्र करें.

50. ख़ुद को बहुत ज्ञानी साबित करने के लिए बेवजह दूसरों को सलाह न दें. सलाह देने की बजाय उनकी समस्या को सुनें, समझें और जितना हो सके, मदद करें.

51. ख़ुद से प्यार करना सीखें. दूसरों की तरह बनने या उनकी नकल करने के प्रयास में अपनी पहचान न खोएं. आप जैसे भी हैं, अच्छे हैं. अपनी कमियों को ज़रूर सुधारें, पर ख़ुद को कम न आंकें.

52. ज़िंदगी की भागदौड़ और तनाव में आपकी हंसी गायब न हो जाए, इसलिए खुलकर हंसे. खुलकर हंसने से फेफड़ों में लचीलापन बढ़ता है और उन्हें ताज़ी हवा मिलती है.

53. रोज़ाना थोड़ा ध्यान लगाएं. इससे एकाग्रता बढ़ती है और आप रिफ्रेश महसूस करते हैं.

54. अपनी भावनाओं और मूड पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें. बहुत ज़्यादा ग़ुस्सा न करें, न ही बहुत दुखी या उदास रहें.
समाज में भी अपने व्यवहार और भावनाओं में संतुलन बनाए रखें.

– ब्रह्मानंद शर्मा

हेल्दी लाइफ के लिए करें सूर्यनमस्कार (Benefits of Surya Namaskar : Yogasana)

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1. पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं और दोनों हथेलियां जोड़ें. दोनों पैरों के टखने व अंगूठे मिलाकर रखें.

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2. सांस लेकर, हाथों को खोलते हुए कंधे के ऊपर से पीछे की ओर जितना ले जा सकें, ले जाएं (चित्र देखें).

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3. सांस छोड़ते हुए हाथों को पीछे से सामने की ओर झुकाते हुए पैरों के पास रखें (अगर रख सकें तो). पैर घुटने से मुड़ने नहीं चाहिए.

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4. नीचे झुकते हुए हाथों को मज़बूती से ज़मीन पर लगाएं. बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं. सिर ऊपर की तरफ़ तथा दाहिना घुटना सीने के पास दोनों हाथों के बीच में रहे.

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5. दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं. सिर को नीचे की ओर करते हुए पेट व कमर के भाग को ऊपर उठाएं और पर्वतासन की स्थिति में आएं (चित्रानुसार). एड़ियां ज़मीन से टच होनी चाहिए.

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6. दोनों घुटनों को, छाती को और ठुड्डी को ज़मीन से टच करें.

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7. दोनों पैरों और हाथों को ज़मीन पर चित्रानुसार रखें. सांस भरते हुए आगे की तरफ़ आते हुए सिर को ऊपर की ओर उठाएं. सिर ऊपर की तरफ़ अर्द्ध भुजंगासन की तरह रखें.

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8. पांचवीं अवस्था की तरह दोनों पैरों को आगे लाएं. सिर को नीचे की ओर करते हुए पेट व कमर के भाग को ऊपर उठाएं और पर्वतासन की स्थिति में आएं.

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9. दोनों हाथों को मज़बूती से ज़मीन पर लगाएं. बायां पैर सामने की तरफ़ लाएं दोनों हाथों के बीच में.

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10. नीचे झुकते हुए हाथों को मज़बूती से ज़मीन पर लगाएं. दोनों पैर दोनों हाथों के बीच रखें. घुटना छाती के सामने रखें. सिर व गर्दन दोनों हाथों के बीच में रखें.

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11. सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर ले जाते हुए पीछे की ओर करें.

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12. सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों को सामने की ओर लाएं और पूर्ववत् प्रणाम की स्थिति में आ जाएं.

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फ़ायदे

* 3 राउंड से शुरू करें और अपनी क्षमतानुसार राउंड्स बढ़ाएं.
* स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सूर्य नमस्कार को सर्वोत्तम अभ्यास माना गया है. इससे समस्त अंगों में क्रियाशीलता आती है तथा हार्मोंस संतुलित होते हैं.
* सूर्य नमस्कार कई बीमारियों को दूर करने की क्षमता रखता है.
* डायबिटीज़ की समस्या में बेहतर परिणाम देता है.
* पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हुए पेट संबंधी सभी समस्याओं, जैसे- आमाशय व अग्नाशय से जुड़ी परेशानियों से छुटकारा दिलाता है.
* मोटापे से जूझ रहे लोगों को वज़न कम करने में काफ़ी लाभदायक सिद्ध होता है.
* फेफड़ों व सांस संबंधी बीमारियों में भी कारगर साबित होता है.
* हृदय संबंधी विकारों को दूर करने में उपयोगी होता है.
* शरीर में रक्तसंचार को बेहतर बनाता है.
* बल और तेज की वृद्धि करता है.
* मानसिक शांति प्रदान करता है.
* रीढ़ का लचीलापन बढ़ाता है.
* अगर बचपन से ही यह आसन किया जाए, तो हाइट भी अच्छी होती है.
* शरीर की समस्त मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है.
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